मेरा नाम अनीता खुशवाहा है। मैं मुशफ्रपफरपुर िाले के बोचाहा गाँव में रहती हूँ, जो बिहार में है। मेरे घर में माँ, पिताजी और दो छोटे भाइर् हैं। मैं काॅलेज में पढ़ती हूँ और स्वूफल के बच्चों को पढ़ाती हूँ। मैं मधुमक्खी पालने का काम भी करती हूँ। इतना सब कर पाना मेरे लिए आसान नहीं था। जब मैं छोटी थी, तब मैं दिन भर बकरियाँ चराती थी। मेरा भी स्वूफल जाने का मन करता था, पर माँ - पिताजी को लड़कियों का स्वूफल जाना पसंद नहीं था। ’ यह एक सच्ची कहानी है। अनीता खुशवाहा एक ‘चमकता सितारा’ ;गलर् स्टारद्ध है। ‘चमकते सितारे’ उन साधरण लड़कियों की असाधरण कहानियाँ हैं, जिन्होंने स्वूफल जाकर अपनी िांदगी बदल दी। बच्चों से भारत के नक्शे में बिहार ढूँढ़ने को कहें। स्कूल जाना - - एक सपना एक दिन मैंने स्वूफल के अंदर झाँककर देख ही लिया। बच्चों को देखकर मैं अपने आपको रोक नहीं पाइर् और बच्चों की कतार में पीछे जाकर चुपचाप बैठ गइर्। मुझे बहुत अच्छा लगा। घर जाते ही मैंने हिम्मत करके माँ - पिताजी को स्वूफल के बारे में बताया। उन्होंने मुझे स्वूफल जाने के लिए बिलवुफल मना कर दिया। उस दिन मैं बहुत रोइर्। मेरे गाँव की एक टीचर ने माँ - पिताजी को समझाया कि पढ़ाइर् करना कितना शरूरी है। उन्होंने बताया कि पाँचवीं कक्षा तक की पढ़ाइर् पर कोइर् खचर् भी नहीं होता है। पढ़ना तो सब बच्चों का हक है। मुझे पता नहीं वैफसे, पर माँ - पिताजी मान गए। मैंने स्वूफल जाना शुरू कर दिया। स्वूफल में मैं बहुत श्यादा नंबर तो नहीं लाती थी, पर टीचर से सवाल बहुत पूछती थी। झ् हिसाब लगाओ कि स्वूफल की सभी चीशों पर एक साल में तुम्हारा कितना खचार् होता है। चीशें खचार् 1. प़फीस 2. स्वूफल आने - जाने में 3. काॅपियाँ 4. पेंसिल - पैन 5. यूनिप़फाॅमर् 6. बस्ता 7. खाने का डिब्बा 8. जूते 9 10 वुफल ़झ् हर बच्चे का हक है कि वह आठवीं कक्षा तक की पढ़ाइर् मुफ्रत कर सके। क्या सभी बच्चों को यह अिाकार मिलता है? चचार् करो। ध्ीरे - ध्ीरे मैंने गाँववालों को समझाना शुरू किया कि सभी लड़कियों को स्वूफल भेजें। घर में माँ - पिताजी ने भी मेरी मदद करनी शुरू कर दी। घर का सारा काम मेरी माँ ही कर लेती थी। मुझे पढ़ने के लिए काप़फी समय मिल जाता था। स्कूल से मधुमक्खी पालन तक हमारे इलाके में बहुत सारे लीची के पेड़ हंै। लीची के पूफल मध्ुमक्िखयों को लुभाते हंै। इसलिए यहाँ लोग मध्ुमक्िखयों को पालकर शहद बनाने का काम करते हैं। मैंने सोचा कि क्यों न मैं भी यह काम कर लूँ। तब मैंने गाँव में मधुमक्खी पालने के एक सरकारी कोसर् में भाग लिया। कोसर् में भाग लेने वालों में मैं अकेली लड़की थी। ट्रेनिंग में मुझे पता चला कि अक्तूबर से दिसम्बर तक का समय मधुमक्िखयों के अंडे देने का होता है। मधुमक्खी पालन शुरू करने का सबसे अच्छा समय यही होता है। झ् क्या तुमने कीड़ों को पूफलों पर आते देखा है? उनके नाम पता करो और लिखो। झ् काॅपी में उनके चित्रा बनाकर रंग भरो। झ् वे पूफलों पर क्यों आते हैं? पता करो। झ् जब मध्ुमक्खी उड़ती है, तो वैफसी आवाश होती है? वैसी आवाश निकालो। सितम्बर का महीना था। दिसम्बर तक मेरे पास इतनी मधुमक्िखयाँ हो गईं कि दो बक्से कम पड़ गए। मैंने दो बक्से और खरीदे। मुझे मधुमक्िखयों के बारे में श्यादा अनुभव नहीं था। कइर् बार मध्ुमक्िखयों ने मुझे काटा भी। इससे मेरा चेहरा और हाथ सूज जाते थे। ददर् भी बहुत होता था, पर कहती किससे? यह काम तो मैंने अपनी ही इच्छा से शुरू किया था। पता करो झ् तुम्हारे आस - पास के इलाके में मध्ुमक्खी के काटने पर क्या लगाते हैं? झ् मध्ुमक्खी का चित्रा काॅपी में बनाओ। उसमें रंग भी भरो तथा अपना मनपसंद कोइर् नाम रखो। लीची के पूफल पफरवरी में ख्िालते हैं। मैंने अपने चारों बक्सों को लीची के बगीचे में रखा। मुझे हर बक्से से 12 किलो शहद मिला, जो मैंने बाशार में बेचा। मुझे अपनी पहली कमाइर् मिली। अब मेरे पास 20 बक्से हैं। झ् अनीता के 20 बक्सों की वुफल कीमत क्या है? मैं रोश साइकिल से काॅलेज जाती हूँ। काॅलेज गाँव से 5 किलोमीटर दूर शहर में है। जब मैं काॅलेज जाती हूँ, तो माँ मधुमक्िखयों के लिए चीनी का घोल तैयार करतीं हैं। पिताजी मधुमक्िखयों की देखभाल करते हैं और बक्सों से शहद निकालते हैं। अब तक तो तुम भी अनीता को अच्छी तरह जान गए होगे। आस - पास के आस - पास सभी गाँवों के लोग उसे पहचानते हैं। वह गाँव की सभी बैठकों में जाती है और लोगों को समझाती है कि पढ़ना सबके लिए बहुत शरूरी है। वुफछ लोग तो उस पर हँसते भी हैं, लेकिन अनीता को अपना काम करना है और वह करती है। अनीता होलसेलर बनना चाहती है, जिससे वह मध्ुमक्खी पालने वालों को शहद की सही कीमत दिलाने में मदद कर सके। पता करो झ् अनीता और गाँव वालों को एक किलो शहद के बदले 35 रुपये मिलते हैं। तुम्हारे यहाँ एक किलो शहद कितने रुपयों का मिलता है? झ् तुमने किस - किस रंग का शहद देखा है? झ् क्या तुम्हारे घर में शहद इस्तेमाल होता है? किस काम के लिए? हर छत्ते में एक रानी मक्खी होती है, जो अंडे देती है। छत्ते में वुफछ नर - मक्खी भी होते हैं। छत्ते में बहुत सारी काम करने वाली मक्िखयाँ भी होती हैं। ये दिन भर काम करती हैं। शहद के लिए पूफलों का रस ढूँढ़ती हैं। जब किसी मक्खी को रस मिल जाता है, तो वह एक तरह का नाच करती है, उससे दूसरी मक्िखयों को पता अध्यापक के लिएμबच्चों को होलसेलर का काम समझाएँ। चल जाता है कि रस कहाँ है। वे रस से शहद बनाती हैं। छत्ता बनाने का काम भी इन्हीं का होता है और बच्चों को पालना भी। ये न हों, तो न छत्ता बने और न ही शहद इकऋा हो। शहद के बिना छत्ते की सारी मध्ुमक्िखयाँ भूखी ही रह जाती हैं। नर - मक्खी छत्ते के लिए कुछ खास काम नहीं करते। झ् मध्ुमक्खी के अलावा और कौन - से कीड़े हैं, जो समूह में रहते हैं? मधुमक्िखयों की तरह ही चींटियाँ भी मिल - जुलकर रहती हैं। सभी चींटियों का काम बँटा होता है। रानी चींटियाँ अंडे देती हंै, सिपाही चींटी बिल का ध्यान रखतीं हैं और काम करने वाली चींटियाँ भोजन ढूँढ़ कर बिल तक लातीं हैं। दीमक और ततैये भी इसी तरह समूह में रहते हैं। झ् तुमने चींटियों का बिल कहाँ - कहाँ देखा है? झ् तुम्हें क्या लगता हैμकिस तरह की चीशों पर चींटियाँ श्यादा आती हंै? उनकी सूची बनाओ। झ् चींटियों की कतार को देखो और बताओ कि उनका रंग वैफसा है? आस - पास झ् क्या तुम्हें कभी चींटी ने काटा है? वैफसी थी वहμकाली या भूरी, छोटी या मोटी या किसी और तरह की? झ् क्या चींटी तुम्हारे पास आती है? कब? झ् वुफछ छोटी और बड़ी चींटियों को ध्यान से देखो। चींटियों के कितने पैर होते हैं? झ् बड़ी चींटी के पैर झ् छोटी चींटी के पैर झ् एक चींटी का चित्रा काॅपी में बनाओ और रंग भरो। झ् तुम अकसर मूँगपफली खाकर उसके छिलके पेंफक देते होगे। चलो, उन्हीं छिलकों से रंग - बिरंगे कीड़े - मकौड़े बनाने की कोश्िाश करो। उन पर रंग भरना न भूलना!

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