यह है नन्दू! नन्दू नींद से जागा और उसने अपनी आँखें खोलीं। वुफछ देर के लिए उसे पता ही नहीं चला कि वह कहाँ है। उसे लगा कि वह स्लेटी - भूरे पेड़ों के एक बड़े से जंगल में है। उसने अपनी आँखें घुमाईं, पिफर उसे वुफछ जाना - पहचाना सा लगा। ओह! ये तो अम्मा हैं। जिसे वह भूरा - स्लेटी जंगल समझ रहा था, वह उसके परिवार के साथ्िायों के पैर और सूँड थीं। सूरज आसमान में चमक रहा है। उसकी गरमी अब तेश होने लगी है। नानी - माँ शोर से चिंघाड़ी। वे इस झुंड में सबसे बड़ी हैं। वे जंगल की तरप़फ चल दीं। बाकी सभी हथ्िानियों ने नानी - माँ को जंगल की तरप़फ जाते देखा, तो वे सब भी उनके पीछे चल दीं, और नन्दू भी। अध्यापक के लिएμनानी - माँ, माँ की माँ। बच्चों से पूछें कि वे अपनी माँ की माँ को क्या कहते हैं। जंगल पहुँचते ही यह झुंड बिखर गया। वे सभी अपने मनपसंद पत्तों और झाडि़यों को खाने के लिए अलग - अलग हो गए। वुफछ देर खाने के बाद सभी नदी की तरप़फ चलने लगे। सब बच्चे पानी में खेलने लगे, वुफछ बड़ी हथ्िानियाँ नदी किनारे मिट्टी में लेट गईं। पता करो झ् नन्दू तो सिप़र्फ तीन महीने का है, लेकिन उसका वशन 200 किलोग्राम है। तुम्हारा वशन कितना है? झ् तुम्हारी उम्र के कितने बच्चों का वशन मिलाकर नन्दू के वशन के बराबर होगा? खेल - खेल में नन्दू ने अपने साथ्िायों को एक - दूसरे की पूँछ खींचते हुए देखा। उसने सोचा, फ्मैं बहुत छोटा हूँ। कहीं ये सब मेरे उफपर न गिर जाएँ।य् वह उनके पास नहीं गया और धीरे से अपनी अम्मा के पास जाकर खड़ा हो गया। अम्मा ने नन्दू को पानी की तरप़फ ध्केला, मानो उसे पानी में खेलने के लिए कह रही हो। नन्दू ध्ीरे से पानी की तरप़फ चल दिया। उसे तो पानी के साथ खेलना बहुत पसंद था। उसके दोस्त भी पानी में ही थे। पानी के पास पहुँचते ही, पानी का एक प़फव्वारा नन्दू के सिर पर गिरा। नन्दू पूरा भीग गया। उसने देखा, यह उसके दोस्तों की शरारत थी। वह मुस्वफराकर पानी से खेलने लगा। सूरज डूबने से पहले ही झुंड पिफर से जंगल की तरप़्ाफ चल दिया। जंगल में पहुँचते - पहुँचते नन्दू बहुत थक गया। वह दूध् पीते - पीते अपनी अम्मा के पैरों के बीच में सो गया। तुमने पढ़ा कि नन्दू हाथी अपने झुंड के साथ रहता है। हाथ्िायों के झुंड में केवल हथ्िानियाँ और बच्चे ही रहते हैं। झुंड की सबसे बुशुगर् हथ्िानी ही पूरे झुंड की नेता होती है। एक झुंड में 10 से 12 हथ्िानियाँ और बच्चे होते हैं। हाथी 14 - 15 साल तक ही इस झुंड में रहते हैं। पिफर वे झुंड छोड़ देते हैं और अकेले रहते हैं। नन्दू भी जब 14 - 15 साल का हो जाएगा, तो वह अपना झुंड छोड़ देगा। हाथी की तरह ही और भी वुफछ जानवर समूह में एक साथ रहते हैं। जानवरों के ऐसे समूह को झुंड कहते हैं। झुंड में रहने वाले जानवर मिल - जुलकर सभी काम करते हैं, जैसे खाने की तलाश में घूमना, खेलना और नहाना। झ् अगर तुम नन्दू होते और झुंड में रहते तो क्या - क्या करते? झ् हाथ्िायों के झुंड में सभी प़्ौफसले सबसे बुशुगर् हथ्िानी लेती है। तुम्हारे परिवार में घर के पैफसले कौन लेता है?़झ् हाथ्िायों के झुंड का एक कोलाज बनाओ। इसके लिए तुम हाथ्िायों के जितने चित्रा इकऋा कर सकते हो, करो। अब उन्हें काटकर अपनी काॅपी में चिपकाओ। झ् नन्दू वह सब करता था, जो उसे पसंद था। यदि तुम्हें अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए पूरा एक दिन मिले, तो तुम उस दिन क्या - क्या करोगे? झ् झ् झ् झ् झ् झ् पता करो और लिखो, कौन - कौन से जानवर झुंड या समूह में रहते हैं। झ् क्या तुम भी समूह में रहते हो? तुम्हें समूह में रहना वैफसा लगता है? तुम्हारे हिसाब से समूह में रहने के प़्ाफायदे और नुकसान क्या - क्या हो सकते हैं? फ़ायदे नुकसान झ् क्या तुमने कभी हाथी पर सवारी की है? वैफसा लगा? झ् तुम कौन - कौन से जानवरों पर बैठे हो? उनके नाम लिखो। ़झ् तुमने अपने आस - पास, प्िाफल्मों या किताबों में कइर् जानवरों को देखा होगा। अकेले और झुंड में देखे गए जानवरों में से, किसी एक के बारे में पता करके वुफछ बातें लिखो। सोचो और लिखो बगुला भैंस पर क्यों बैठा होगा? झ् क्या तुमने किसी जानवर को दूसरे जानवर पर सवारी करते देखा है? उसका नाम लिखो। झ् सवार जानवर झ् सवारी देता जानवर झ् ऐसे और जानवरों के नाम लिखो, जिन्हें हम सवारी के काम में लाते हैं। झ् ऐसे जानवरों के नाम लिखो, जिन्हें हम सामान ढोने के काम में लाते हैं। तुम्हारा अपना हाथी बनाओ झ् हाथी के चित्रा को जिसे अगले पृष्ठ पर दिया है बड़ा करके एक मोटे कागश पर बनाओ। उसे अब बाहरी रेखा पर से काटो। झ् अब चित्रा में जहाँ ‘काटो’ लिखा है वहाँ पर थोड़ा - सा काटो। ध्यान रहेμ काट कर अलग मत करना। झ् जहाँ ‘मोड़ो’ लिखा है, वहाँ से बिंदू वाली रेखा ;.....द्ध पर से मोड़ लो। झ् धरी वाले हिस्से को ; द्धअंदर की ओर मोड़ दो। झ् अब पूँछ बनाकर चिपका दो। बन गया न हाथी! झ् इसे अपनी पसंद के रंगों से और अलग - अलग तरह से सजाओ। झ् इस हाथी को अपनी कक्षा में लटकाओ। अपने साथ्िायों के बनाए हुए हाथी भी देखो। जानवरों की सभा झ् इन चित्रों को देखो और पढ़ोμये जानवर आपस में क्या - क्या कह रहे हैं। यह पिटारी ही अब मेरा घर बन गया है। मैं तो जंगल के जानवरों से मिलना और खुली हवा लेना मानो भूल ही गया हूँ। बस पिटारी है और यह सपेरा! तुमने मेरी दौड़ ही देखी है। मेरे पैरों के नीचे जब लोहे की नाल ठोकते हैं, तो ददर् से जान निकल जाती है। म्याउफँ - म्याउफँ - म्याउफँ! लोगोंके लिए वुफछ भी काम नहींकरती, पिफर भी बच्चे मुझेबहुत प्यार करते हैं। दूध्पिलाते हैं और सहलाते भीहैं। मैं अपनी मशीर्से सब जगहआती - जाती हूँ। यह मत सोचो कि मैं सवर्फस में बहुत खुश हूँ। नाचो, वूफदो, आग के गोेले में से निकलो, और भी न जाने क्या - क्या! न करो, तो भूखे रहो और पिटाइर् अलग से! नाचते - नाचते हमारी तो कमर ही टूट गइर्। मन न हो पिफर भी नाचो। वह भी, खाली पेट! गुटरगूँ! गुटरगूँ! जानते हो, लोग मुझे बुला - बुलाकर बड़े प्यार से दाना ख्िालाते हैं। चचार् करो झ् तुमने इन जानवरों की बातें पढ़ीं। तुम्हें क्या लगता है, इनमें से वुफछ उदास क्यों हैं? झ् पेड़ों पर झूमते और लटकते बंदरों और मदारी के बंदर में तुम्हें क्या अंतर लगता है? इस हाथी के कितने पैर?

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