एक पढ़क्वूफ बड़े तेश थे, तवर्फशास्त्रा पढ़ते थे, जहाँ न कोइर् बात, वहाँ भी नइर् बात गढ़ते थे। एक रोज़्ा वे पड़े प्िाफव्रफ में समझ नहीं वुफछ पाए,़फ्बैल घूमता है कोल्हू में वैफसे बिना चलाए?य् कइर् दिनों तक रहे सोचते, मालिक बड़ा गजब है?़सिखा बैल को रक्खा इसने, निश्चय कोइर् ढब है। आख्िार, एक रोज़्ा मालिक से पूछा उसने ऐसे, फ्अजी, बिना देखे, लेते तुम जान भेद यह वैफसे? कोल्हू का यह बैल तुम्हारा चलता या अड़ता है? रहता है घूमता, खड़ा हो या पागुर करता है?य् मालिक ने यह कहा, फ्अजी, इसमें क्या बात बड़ी है? नहीं देखते क्या, गदर्न में घंटी एक पड़ी है? मंतिख - तवर्फशास्त्रा पागुर - जुगाली 92 कविता में कहानी ‘पढ़क्वूफ की सूझ’ कविता में एक कहानी कही गइर् है। इस कहानी को तुम अपने शब्दों में लिखो। कवि की कविताएँ ाा’ पढथी। अब तुमने उन्हीं की कविता ‘पढ़क्वूफ की सूझ’ पढ़ी। ;कद्ध दोनों में से कौन - सी कविता पढ़कर तुम्हें ज़़्यादा मजा आया? ;चाहो तो तीसरी की किताब पिफर से देख सकते हो।द्ध ;खद्ध तुम्हें काबुली वाला श्यादा अच्छा लगा या पढ़क्वूफ? या कोइर् भी अच्छा नहीं लगा? ;गद्ध अपने साथ्िायों के साथ मिलकर एक - एक कविता ढँूढ़ो। कविताएँ इकट्टòा करके कविता की एक किताब बनाओ। मेहनत के मुहावरे कोल्हू का बैल ऐसे व्यक्ित को कहते हैं जो कड़ी मेहनत करता है या जिससे कड़ी मेहनत करवाइर् जाती है। मेहनत और कोश्िाश से जुड़े वुफछ और मुहावरे नीचे लिखे हैं। इनका वाक्यों में इस्तेमाल करो। ऽ दिन - रात एक करना ऽ पसीना बहाना ऽ एड़ी - चोटी का जोर लगाना़तीसरी कक्षा में तुमने रामधरी स्िंाह दिनकर की कविता ‘मिचर् का मज़़्ी पढ़क्वूफ ;कद्ध पढ़क्वूफ का नाम पढ़क्वूफ क्यों पड़ा होगा? ;खद्ध तुम कौन - सा काम खूब मन से करना चाहते हो? उसके आधर पर अपने लिए भी पढ़क्वूफ जैसा कोइर् शब्द सोचो। अपना तरीका हाँ जब बजती नहीं, दौड़कर तनिक पूँछ ध्रता हूँ पूँछ ध्रता हूँ का मतलब है पूँछ पकड़ लेता हूँ। नीचे लिखे वाक्यों को अपने शब्दों में लिखो। ;कद्धमगर बूँद भर तेल सांँझ तक भी क्या तुम पाओगे? ;खद्ध बैल हमारा नहीं अभी तक मंतिख पढ़ पाया है। ;गद्ध सिखा बैल को रखा इसने निश्चय कोइर् ढब है। ;घद्ध जहाँ न कोइर् बात, वहाँ भी नइर् बात गढ़ते थे। गढ़ना पढ़क्वूफ नइर् - नइर् बातें गढ़ते थे। बताओ, ये लोग क्या गढ़ते हैं? .................... .................... सुनार कवि .................... .................... लुहार वुफम्हार .................... ..................... ठठेरा लेखक अथर् खोजो नीचे दिए गए शब्दों के अथर् अक्षरजाल में खोजो - ढब, भेद, गशब, मंतिख, छल त वर्फ शा स्त्रा म्र रा ज त क ब जू स री मा धे रा श का ल खा धे क म ल ड़

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