स्वतंत्राता की ओर ध्नी को पता था कि आश्रम में कोइर् बड़ी योजना बन रही है, पर उसे कोइर् वुफछ न बताता। फ्वे सब समझते हैं कि मैं नौ साल का हूँ इसलिए मैं बु(ू हूँ। पर मैं बु(ू नहीं हूँबड़ाया। !य् ध्नी मन ही मन बड़ध्नी और उसके माता - पिता, बड़ी खास जगह मेें रहते थेμ अहमदाबाद के पास, महात्मा गांध्ी के साबरमती आश्रम में। जहाँ पूरे भारत से लोग रहने आते थे। गांध्ी जी की तरह वे सब भी भारत की स्वतंत्राता के लिए लड़ रहे थे। जब वे आश्रम में ठहरते तो चरखों पर खादी का सूत कातते, भजन गाते और गांध्ी जी की बातें सुनते। साबरमती में सबको कोइर् न कोइर् काम करना होताμ खाना पकाना, बतर्न धोना, कपड़े धोना, वुफएँ से पानी लाना, गाय और बकरियों का दूध् दुहना और सब्ज़्ाी उगाना। ध्नी का काम था बिन्नी की देखभाल करना। बिन्नी, आश्रम की एक बकरी थी। ध्नी को अपना काम पसंद था क्योंकि बिन्नी उसकी सबसे अच्छी दोस्त थी। ध्नी को उससे बातें करना अच्छा लगता था। उस दिन सुबह, ध्नी बिन्नी को हरी घास ख्िाला कर, उसके बतर्न में पानी डालते हुए बोला, फ्कोइर् बात ज़्ंारूर है बिन्नी! वे सब गाध्ी जी के कमरे में बैठकर बातें करते हैं। कोइर् योजना बनाइर् जा रही है। मैं सब समझता हूँ।य् बिन्नी ने घास चबाते हुए सिर हिलाया, जैसे कि वह ध्नी की बात समझ रही हो। ध्नी को भूख लगी। वूफदती - पफाँदती बिन्नी को लेकर वह रसोइर्घर की तरपफ चला।़उसकी माँ चूल्हा पूँफक रही थीं और कमरे में ध्ुआँ भर रहा था। फ्अम्मा, क्या गांध्ी जी कहीं जा रहे हैं?य् उसने पूछा। खाँसते हुए माँ बोलीं, फ्वे सब यात्रा पर जा रहे हैं।य् फ्यात्रा? कहाँ जा रहे हैं?य् ध्नी ने सवाल किया। फ्समुद्र के पास कहीं। अब सवाल पूछना बंद करो और जाओ यहाँ से धनी!य् अम्मा ज़्ारा गुस्से से बोलीं, फ्पहले मुझे खाना पकाने दो।य् ध्नी सब्ज़्ाी की क्यारियों की तरपफ निकल गया जहाँ़बूढ़ा ब्िंादा आलू खोद रहा था। फ्ब्िंादा चाचा,य् ध्नी उनके पास बैठ गया, फ्आप भी यात्रा पर जा रहे हैं क्या?य् ब्िंादा ने सिर हिलाकर मना किया। उसके वुफछ बोलने से पहले धनी ने उतावले होकर पूछा, फ्कौन जा रहे हैं? कहाँ जा रहे हैं? क्या हो रहा है?य् ¯बदा ने खोदना रोक दिया और कहा, फ्तुम्हारे सब सवालों के जवाब दूँगा पर पहले इस बकरी को बाँधे! मेरा सारा पालक चबा रही है!य् ध्नी बिन्नी को खींच कर ले गया और पास के नींबू के पेड़़ से बाँध् दिया। पिफर ब्िंादा ने उसे यात्रा के बारे में बताया। गांध्ी जी और उनके वुफछ साथी गुजरात में पैदल चलते हुए, दांडी नाम की जगह पर समुद्र के पास पहुँचेंगे। गाँवों और शहरों से होते हएुपूरा महीना चलेंगे। दाँडी पहुँच कर वे नमक बनाएँगे। फ्नमक?य् ध्नी चैंक कर उठ बैठा, फ्नमक क्यों बनाएँगे? वह तो किसी भी दुकान से खरीदा जा सकता है।य् फ्हाँ, मुझे मालूम है।य् ब्िंादा हँसा,य् पर महात्मा जी की एक योजना है। यह तो तुम्हें पता ही है कि वह किसी बात के विरोध् में ही यात्रा करते हैं या जुलूस निकालते हैं, है न?य् फ्हाँ, बिल्वुफल सही। मैं जानता हूँ। वे बि्रटिश सरकार के ख्िालापफ सत्याग्रह के जुलूस निकालते हैं़जिससे कि उनके ख्िालाप़्ाफ लड़ सवेंफ और भारत स्वतंत्रा हो जाए। पर नमक को लेकर विरोध् क्यों कर रहे हैं? यह तो समझदारी वाली बात नहीं है।य् फ्बिल्वुफल, ध्नी! क्या तुम्हें पता है कि हमें नमक पर ‘कर’ देना पड़ता है?य् फ्अच्छा।य् ध्नी हैरान रह गया। फ्नमक की शरूरत सभी को है... इसका मतलब है कि हर भारतवासी, गरीब से गरीब भी, यह कर देता है,य् बिंदा चाचा ने आगे समझाया। फ्लेकिन यह तो सरासर अन्याय है!य् ध्नी की आँखों में गुस्सा था। फ्हाँ, यह अन्याय है। इतना ही नहीं, भारतीय लोगों को नमक बनाने की मनाही है। महात्मा जी ने बि्रटिश सरकार को कर हटाने को कहा पर उन्होंने यह बात ठुकरा दी। इसलिए उन्होंने निश्चय किया है कि वे दांडी चल कर जाएँगे और समुद्र के पानी से नमक बनाएँगे।य् फ्एक महीने तक पैदल चलेंगे!य् ध्नी सोच कर परेशान हो रहा था। फ्गांधी जी तो थक जाएँगे। वे दांडी बस या ट्रेन से क्यों नहीं जा सकते?य् फ्क्योंकि, यदि वे इस लंबी यात्रा पर दांडी तक पैदल जाएँगे तो यह खबर पैफलेगी। अखबारों में पफोटो़छपेंगी, रेडियो पर रिपोटर् जाएगी! और पूरी दुनिया के लोग यह जान जाएँंगे कि हम अपनी स्वतंत्राता के लिए लड़ रहे हैं। और बि्रटिश सरकार के लिए यह बड़ी शमर् की बात होगी।य् फ्गांध्ी जी, बड़े ही अक्लमंद हैं, हैं न?य् ध्नी की आँखें चमकीं। ¯बदा ने हदोपहर को जब आश्रम में थोड़ी शांति छाइर्, ध्नी अपने पिता को ढूँढ़ने निकला। वह एक पेड़ के नीचे बैठकर चरखा कात रहे थे। फ्पिता जी, क्या आप और अम्मा दांडी यात्रा पर जा रहे हैं?य् ध्नी ने सीधे काम की बात पूछी। फ्मैं जा रहा हूँ। तुम और अम्मा यहीं रहोगे।य् फ्मैं भी आपके साथ चल रहा हूँ।य् फ्बेकार की बात मत करो ध्नी! तुम इतना लंबा नहीं चल पाओगे। आश्रम के नौजवान ही जा रहे हैं।य् ध्नी ने हठ पकड़ ली, फ्मैं नौ साल का हँू और आपसे तेज़्ा दौड़ सकता हूँ।य् सकर कहा, फ्हाँ, वह तो हैं ही।य् ँध्नी के पिता ने चरखा रोक कर बड़े ध्ीरज से समझाया, फ्सिपर्फ वे लोग जाए़ँगे जिन्हें महात्मा जी ने खुद चुना है।य् फ्ठीक है! मैं उन्हीं से बात करूारूर हाँ कहेंगे!य् ध्नी खड़े होकर बोला और वहाँ से चल दिया। गांध्ी जी बड़े व्यस्त रहते थे। उन्हें अकेले पकड़ पाना आसान नहीं था। पर ध्नी को वह समय मालूम था जब उन्हें बात सुनने का समय होगा - रोश सुबह, वह आश्रम में पैदल घूमते थे। अगले दिन जैसे ही सूरज निकला, ध्नी बिस्तर छोड़कर गांध्ी जी को ढूँढ़ने निकला। वे गौशाला में गायों को देख रहे थे। पिफर वह सब्शी के बगीचे में मटर और बंदगोभी देखते हुए बिंदा से बात करने लगे। ध्नी और बिन्नी लगातार उनके पीछे - पीछे चल रहे थे। अंत में, गांध्ी जी अपनी झोंपड़ी की ओर चले। बरामदे में चरखे के पास बैठ कर उन्होंने ध्नी को पुकारा, फ्यहाँ आओ, बेटा!य् ध्नी दौड़कर उनके पास पहुँचा। बिन्नी भी साथ में वूफदती हुइर् आइर्। फ्तुम्हारा क्या नाम है, बेटा?य् फ्ध्नी, बापू।य् फ्और यह तुम्हारी बकरी है?य् गा। वह ज़्ँफ्जी हाँ, यह मेरी दोस्त बिन्नी है, जिसका दूध् आप ़रोज सुबह पीते हैंय्, ध्नी गवर् से मुस्कराया, फ्मैं इसकी देखभाल करता हूँ।य् फ्बहुत अच्छा!य् गांध्ी जी ने हाथ हिलाकर कहा, फ्अब यह बताओ ध्नी कि तुम और बिन्नी सुबह से मेरे पीछे क्यों घूम रहे हो?य् फ्मैं आपसे वुफछ पूछना चाहता थाय्, ध्नी थोड़ा घबराया। फ्क्या मैं आपके साथ दांडी चल सकता हूँ?य् हिम्मत करके उसने कह डाला। गांध्ी जी मुस्वुफराए, फ्तुम अभी छोटे हो बेटा! दांडी तो बहुार्फ तुम्हारे पिता जैसे नौजवान ही मेरेत दूर है! सिप़्साथ चल पाएँगे।य् फ्पर आप तो नौजवान नहीं हैंय्, ध्नी बोला, फ्आप नहीं थक जाएँगे?य् फ्मैं बहुूत अच्छे से चलता हँय्, गांध्ी जी ने कहा। फ्मैं भी बहत अच्छे से चलताुहूँय्, ध्नी भी अड़ गया। 72 फ्हाँ, ठीक बात हैय्, वुफछ सोचकर गांध्ी जी बोले, फ्मगर एक समस्या है। अगर तुम मेरे साथ जाओगे तो बिन्नी को कौन देखेगा? इतना चलने के बाद, मैं तो कमज़्ाोर हो जाउँफगा। इसलिए, जब मैं वापस आउँफगा तो मुझे खूब सारा दूध् पीना पड़ेगा, जिससे कि मेरी ताकत लौट आए।य् फ्हूँ... यह बात तो ठीक है, बिन्नी तभी खाती है, जब मैं उसे ख्िालाता हूँय्, ध्नी ने प्यार से बिन्नी का सिर सहलाया, फ्और सिप़्ार्फ मैं जानता हूँ कि इसे क्या पसंद है।य् फ्बिल्वुफल सही। तो क्या तुम आश्रम में रहकर मेरे लिए बिन्नी की देखभाल करोगे?य् गांध्ी जी प्यार से बोले। फ्जी, हाँ, करूँ गाय्, ध्नी बोला, फ्बिन्नी और मैं आपका इंतज़्ाार करेंगे।य् सुभद्रा सेन गुप्ता अनुवादμमनीषा चैध्री प्यारे बापू इस कहानी को पढ़कर तुम्हें बापू के बारे में कइर् बातें पता चली होंगी। उनमें से कोइर् तीन बातें यहाँ लिखो। ऽ ऽ ऽ चूल्हा ध्नी की माँ चूल्हा पूँफक रही थीं। ध्नी की माँ खाना पकाने के लिए चूल्हे का इस्तेमाल करती थीं। नीचे वुफछ चित्रा बने हैं। इनके नाम पता करो और लिखो। ऽइनमें कौन - कौन से ईंध्न का इस्तेमाल किया जाता है? ऽतुम्हारे घर में खाना पकाने के लिए इनमें से किसका इस्तेमाल किया जाता है? कहानी से आगे नीचे कहानी में आए वुफछ शब्द लिखे हैं। कक्षा में चार - चार के समूह में एक - एक चीश के बारे में पता करोμ ऽस्वतंत्राता ऽ सत्याग्रह ऽखादी ऽ चरखा तुम इस काम में अपने दोस्तों से, बड़ों से, शब्दकोश या पुस्तकालय से सहायता ले सकते हो। जानकारी इकट्टòा करने के बाद कक्षा में इसके बारे में बताओ। आगे की कहानी गांध्ी जी ने ध्नी से कहा, फ्क्या तुम आश्रम में ही रहकर मेरे लिए बिन्नी की देखभाल करोगे?य् ध्नी ने गांध्ी जी की बात मान ली। जब गांध्ी जी दांडी यात्रा से लौटे होंगे, तब आश्रम में क्या - क्या हआुहोगा? आगे की कहानी सोचकर लिखो। कहानी से ;कद्ध ध्नी ने गांध्ी जी से सुबह के समय बात करना क्यों ठीक समझा होगा? ;खद्ध ध्नी बिन्नी की देखभाल वैफसे करता था? ;गद्ध ध्नी को यह वैफसे महसूस हुआ होगा कि आश्रम में कोइर् योजना बनाइर् जा रही है? कहानी और तुम ;कद्ध ध्नी यात्रा पर जाने के लिए उत्सुक क्यों था? ऽ अगर तुम ध्नी की जगह होते तो क्या तुम यात्रा पर जाने की जिदकरते? क्यों? ;खद्ध गांध्ी जी ने ध्नी को न जाने के लिए वैफसे मनाया? ऽ क्या तुम गांध्ी जी के तवर्फ से सहमत हो? क्यों? ताकत के लिए गांध्ी जी ने कहा, फ्जब मैं वापस आऊँ गा तो मुझे खूब सारा दूध् पीना पड़ेगा, जिससे कि मेरी ताकत लौट आए।य् बताओ, खूब सारी ताकत और अच्छी सेहत के लिए तुम क्या - क्या खाओगे - पिओगे? चटपटी अंवुफरित दाल मीठा दूध् गमर् समोसे रसीला आम करारे गोलगप्पे गमार्गमर् साग वुफरवुफरी मक्का की रोटी ठंडी आइसक्रीम खुशबूदार दाल रंग - बिरंगी टाॅपफी मसालेदार अचार ठंडा शरबत विशेषता के शब्द अभी तुमने जिन खाने - पीने की चीशों के नाम पढ़े, उनकी विशेषता बता रहे हैं ये शब्दμ चटपटी, मीठा, गमर्, ठंडा, वुफरवुफरी आदि नीचे लिखी चीशों की विशेषता बताने वाले शब्द सोचकर लिखोμ हलवा पेड़ नमक चीटी ........................वुफरता ........................पत्थर चश्मा झंडा चाँद की बिंदी नीचे लिखे शब्दों में सही जगह पर μं या μँ लगाओ। ध्ुआ वुफआ पूफक कहा स्वतत्रा बाध् मा गाव बदगोभी इतज़्ाार पसद किसकी िाम्मेदारी? ध्नी को बिन्नी की देखभाल करने की ज्िाम्मेदारी दी गइर् थी। इनकी़क्या - क्या ज्ि़ाम्मेदारियाँ थीं? ऽमाँ ऽपिता ऽब्िंादा पोरबंदर, यहाँ गांधी जी प्राथमिक विद्यालय, राजकोटका जन्म हआ थाुजहाँ गांधी जी पढ़ते थे। गांधी जी, 7 साल की आयु में गांधी जी और कस्तूरबा सुबह सैर करते हुए 78 महात्मा गांध्ी प्राथर्ना सभा में

RELOAD if chapter isn't visible.