कौन? किसने बटन हमारे वुफतरे? किसने स्याही को बिखराया? कौन चट कर गया दुबक कर घर - भर में अनाज बिखराया? दोना खाली रखा रह गया कौन ले गया उठा मिठाइर्? दो टुकड़े तसवीर हो गइर् किसने रस्सी काट बहाइर्? कभी वुफतर जाता है चप्पल कभी वुफतर जूता है जाता, कभी खलीता पर बन आती अनजाने पैसा गिर जाता किसने जिल्द काट डाली है? बिखर गए पोथी के पन्ने। रोज टा़गता धे - धेकर मैंँकौन उठा ले जाता छन्ने? 62 वुफतर - वुफतर कर कागज़्ा सारे रद्दी से घर को भर जाता। कौन कबाड़ी है जो वूफड़ा दुनिया भर का घर भर जाता? कौन रात भर गड़बड़ करता? हमें नहीं देता है सोने, खुर - खुर करता इध्र - उध्र है ढूँढ़ा करता छिप - छिप कोने? रोज रात - भर जगता रहता़खुर - खुर इध्र - उध्र है धता बच्चों उसका नाम बताओ कौन शरारत यह कर जाता? सोहन लाल द्विवेदी 63 कविता से ;कद्ध कविता पढ़कर बताओ कि यह शरारती जीव घर में कहाँ - कहाँ गया? ;खद्ध किस तरह की चीज़्ाों का सबसे श्यादा नुकसान हआ?ु;गद्ध कविता में बहुत से नुकसान गिनाए गए हैं। तुम्हारे हिसाब से इनमें से कौन - सा नुकसान सबसे बड़ा है? क्यों? ;घद्ध इस कविता में किसकी शैतानियों की बात कही गइर् है? तुमने वैफसे अनुमान लगाया? कभी वुफतर जाता है चप्पल शरारती जीव ने बहुाों को वुफतरा, बिखराया और काटा।़त सारी चीज्अब तुम बताओ कि किन - किन चीज़्ाों कोμ वुफतरा जा सकता है बिखराया जा सकता है काटा जा सकता है ............................................................................................. ............................................................................................. ............................................................................................. कबाड़ का हिसाब ;कद्ध कबाड़ी क्या - क्या सामान खरीदते हंै? ;खद्ध तुम्हारे घर से सामान ले जा कर कबाड;गद्ध पता करो कि पुराना अखबार या रद्दी किस भाव से बिकते हंै? ;घद्ध अगर कबाड़ी तुम्हारे घर का कबाड़ न खरीदे तो क्या होगा? ़ी उसका क्या करते हैं? घुसपैठ ;कद्ध तुम्हारे घर में भी यदि यह शरारती जीव है या उसकी पफौज घुस गइऱ्है तो पता करो कि उससे वैफसे निपटा जाता है। ;खद्ध इस शरारती जीव के अलावा और कौन - कौन से जीव तुम्हारे घर में घुस जाते हैं? बूझो नीचे लिखी कविता की पंक्ितयाँ पढ़ो। जिन शब्दों के नीचे रेखा ¯खची है, उनका अथर् आपस में चचार् वफरके बताओ। ;कद्ध कभी खलीता पर बन आती अनजाने पैसा गिर जाता ;खद्ध रोश टाँगता धे - धेकर मैं कौन उठा ले जाता छन्ने ;गद्ध रोश रात - भर जगता रहता खुर - खुर इध्र - उध्र है धता

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