नाव बनाओ नाव बनाओ नाव बनाओ, नाव बनाओ। भैया मेरे, जल्दी आओ।। वह देखो, पानी आया है, घ्िार - घ्िार कर बादल छाया है, सात समंुदर भर लाया है, तुम रस का सागर भर लाओ। भैया मेरे, जल्दी आओ।। पानी सचमुच खूब पड़ेगा, लंबी - चैड़ी गली भरेगा, लाकर घर में नदी ध्रेगा, ऐसे में तुम भी लहराओ। भैया मेरे, जल्दी आओ।। गुल्लक भारी, अपनी खोलो, हल्की मेरी, नहीं टटोलो, पैसे नए - नए ही रोलो, रोलो - लुढ़काओ पिफर बाशार लपक तुम लाओ। भैया मेरे, जल्दी आओ।। ले आओ कागज़्ा चमकीला, लाल - हरा या नीला - पीला, रं ग - बिरंगा खूब रंगीला, वैंफची, चुटकी, हाथ चलाओ। भैया मेरे, जल्दी आओ।। छप - छप कर वूफड़े से अड़ती, बूँदों - लहरों लड़ती - बढ़ती, सब की आँखों चढ़ती - गढ़ती नाव तैरा मुझको हषार्ओ। भैया मेरे, जल्दी आओ।। क्या कहते? मेरे क्या बस का? क्यों? तब पिफर यह किसके बस का? खोट सभी है बस आलस का, आलस छोड़ो सब कर पाओ। भैया मेरे, जल्दी आओ।। हरिकृष्णदास गुप्त कविता से क्या कहते? मेरे क्या बस का? ;कद्ध भैया ने क्या बहाना किया? क्यों? बूँदों - लहरों लड़ती - बढ़ती ;खद्धकौन बूँदों और लहरों से लड़ते हुए आगे बढ़ रही है? गुल्लक भारी, अपनी खोलो। ;गद्ध किसकी गुल्लक भारी है? किसकी गुल्लक हल्की है? नाव की कहानी एक बार पिफर से कविता पढ़ो। इस कविता में एक नाव के बनने और पानी में सप़्ाफर करने की कहानी छिपी है। मान लो तुम ही वह नाव हो। अब अपनी कहानी सबको सुनाओ। शुरुआत हम कर देते हैं। मैं एक नाव हूँ। मैं कागज़्ा से बनी हूँ। मुझे एक लड़के ने बनाया। उसका नाम तो मुझे नहीं पता पर ऽ इस कविता को पढते समय तुम्हारे मन में कइर् चित्रा आए होेंगे। ़उनके बारे में बताओ या उनका चित्रा बनाओ। सचमुच पानी सचमुच खूब पड़ेगा। सचमुच का इस्तेमाल करते हुए तुम भी दो वाक्य बनाओ। ;कद्ध ;खद्ध सात समुद्र घ्िार - घ्िार कर बादल छाया है, सात समंुदर भर लाया है। ;कद्ध पता करो, सात समुद्र कौन - कौन से होंगे जिनसे बादल पानी भरकर लाया है। ;खद्ध क्या सचमुच बारिश के बादल समुद्र से पानी लाते हैं? वे इतना सारा पानी वैफसे लाते होंगे? आपस में बातचीत करके पता करो। ों की या किताबों की मदद भी ले सकती हो।द्ध;तुम इस काम में बड़

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