कोइर् लाके मुझे दे वुफछ रंग भरे पूफल वुफछ ख‘े - मीठे पफल थोड़ी बाँसुरी की ध्ुन थोड़ा जमुना का जल कोइर् लाके मुझे दे! एक सोना जड़ा दिन एक रूपों भरी रात एक पूफलों भरा गीत एक गीतों भरी बात कोइर् लाके मुझे दे! एक छाता छाँव का एक ध्ूप की घड़ी एक बादलों का कोट एक दूब की छड़ी कोइर् लाके मुझे दे! एक छु‘ी वाला दिन एक अच्छी - सी किताब एक मीठा - सा सवाल एक नन्हा सा जवाब कोइर् लाके मुझे दे! दामोदर अग्रवाल पापा जब बच्चे थे पापा जब छोटे थे, तो उनसे अक्सर पूछा जाता था, फ्बडे़ होकर तुम क्या बनना चाहते हो?य् पापा के पास जवाब हमेशा तैयार होता। मगर उनका जवाब हर बार अलग - अलग होता था। शुरू - शुरू में पापा चैकीदार बनना चाहते थे। उन्हें यह सोचना बहुत अच्छा लगता था कि जब सारा शहर सोता है, चैकीदार जागता है। उन्हें यह सोचना भी अच्छा लगता था कि जब हर कोइर् सोया हुआ हो, वह खूब शोर मचा सकते हैं। उन्हें पक्का यकीन था कि बड़े होकर वह चैकीदार ही बनेंगे। लेकिन एक दिन अपने चटकदार हरे ठेले को लिए आइसक्रीम वाला आ गया। भइर् वाह! पापा आइसक्रीम वाला बनेंगे। वह ठेले को लेकर घूम भी सकते हैं और जितना मन चाहे उतनी आइसक्रीम भी खा सकते हैं। पापा ने सोचा, फ्मैं एक आइसक्रीम बेचूँगा तो एक खुद खाउँफगा। छोटे बच्चों को तो मैं मु.ँफ्रत में आइसक्रीम दिया करूगा।य् जब पापा के माता - पिता ने यह सुना कि वह आइसक्रीम बेचनेवाला बनना चाहते हैं, तो उन्हें बहुुु़ोदार लगी और वेत हैरानी हइर्। उन्हें यह बात बहत मज्खूब हँसे लेकिन पापा इसी बात पर अड़े रहे कि वह यही काम करेंगे। पिफर एक दिन रेलवे स्टेशन पर पापा ने एक अजीब आदमी कोे देखा। यह आदमी इंजनों और डिब्बों से खेल रहा था। लेकिन यह डिब्बे और इंजन ख्िालौने नहीं बल्िक असली थे, असली! कभी वह प्लेटप़्ाफामर् पर उछल कर आ जाता तो कभी डिब्बों के नीचे चला जाता। वह कोइर् बहुत अजीब और मज़्ोदार खेल खेल रहा था। पापा ने पूछा, फ्यह कौन है?य् उन्हें बताया गया, फ्यह शं¯टग करने वाला है।य् फ्शं¯टग किसे कहते हैं?य् पापा ने पूछा। फ्जब रेलगाड़ी अपनी यात्रा पूरी कर लेती है तो उसे अगली यात्रा के लिए तैयार करना होता है। रेलगाड़ी की साप़़्ाफ - सपफाइर् की जाती है। इंजन को घुमाकर ईंध्न - पानी भरा जाता है। इसे शं¯टग कहते हैं।य् पापा को बताया गया। बस, पापा को पता चल गया कि वह क्या बनेंगे! वह तो रेलगाड़ी के डिब्बों की शं़¯टग करेंगे! इससे भी श्यादा मशेदार और क्या हो सकता है? जाहिर है कि वुफछ भी नहीं। जब पापा ने कहा कि वह शं¯टग करने वाला बनेंगे तो किसी ने उनसे पूछा, फ्मगर तुम तो कहते थे कि तुम आइसक्रीम बेचने का काम करोगे! अब आइसक्रीम बेचने के काम का क्या होगा?य् यह सचमुच समस्या थी। पापा ने शं¯टग करने वाला बनने की सोच ली थी, मगर आइसक्रीम बेचने का चटकदार हरा ठेला भी वह नहीं गँवाना चाहते थे। आख्िार उन्होंने रास्ता निकाल लिया। पापा ने जवाब दिया, फ्मैं शं¯टग करने वाला और आइसक्रीम बेचने वाला दोनों बनूँगा।य् सबको बहुंुत अचभा हआ। उन्होंने पूछा, फ्तुम दोनों काम एक साथ वैफसे करोगे?य् पापा ने कहा, फ्इसमें क्या मुश्िकल है। आइसक्रीम मैं सुबह बेचा करूँ गा। वुफछ देर आइसक्रीम बेचने के बाद मैं स्टेशन चला जाया करूँ गा। वहाँ मैं वुफछ डिब्बों की शं¯टग करूँ गा और पिफर जाकर वुफछ आइसक्रीम और बेच आउँफगा। इसके बाद मैं प्िाफर स्टेशन चला जाउँफगा। वुफछ डिब्बों की शंटिंग कर लूँगा, इसके बाद जाकर पिफर वुफछ आइसक्रीम और बेच लूँगा। इसमें श्यादा मुश्िकल नहीं होगी क्योंकि अपना ठेला मैं स्टेशन के पास ही खड़ा करूँ गा और इसलिए गाडि़यों के लिए मुझे श्यादा दूर नहीं जाना पडे़गा।य् सब लोग पिफर हँस पड़े। पापा गुस्से में आकर बोले, फ्अगर तुम मेरी हँसी उड़ाओगे तो मैं साथ में चैकीदार भी बन जाउँफगा। आख्िार रात में करने के लिए होता ही क्या है!य् सभी वुफछ तय हो गया, लेकिन एक दिन पापा को वायुयान चालक बनने की सूझी। इसके बाद उन्होंने अभ्िानेता बनने की सोची। इसके अलावा वह जहाजी भी बनना चाहते थे। कम से कम वह चरवाहा बनकर लाठी हिलाते़हुए गायों के पीछे घूमते हुए अपने दिन बिताना तो चाहते ही थे। अंत में एक दिन उन्होंने तय किया कि वह असल में जो बनना चाहते हैंवह है वुफत्ता। उस दिन वह दिन भर चारों हाथ - पैरों पर इध्र - उध्र भागते हुए अजनबियों पर भौंकते रहे। एक बूढ़ी महिला ने उनके सिर को सहलाना चाहा तो पापा ने उन्हें काटने की कोश्िाश तक की! पापा ने भौंकना तो बड़ी अच्छी तरह से सीख लिया लेकिन बहुत कोश्िाश करने पर भी वह अपने पैर से कान के पीछे खुजाना नहीं सीख पाए। उन्होंने सोचा कि अगर वह बाहर जाकरअपने पालतू वुफत्ते के साथ बैठ जाएँ, तो शायद वह कान के पीछे खुजानाश्यादा जल्दी सीख जाएँगे। पापा वुफत्ते के पास जाकर बैठ गए। उसी वक्त एक अजनबी प़्ाफौजी अप़्ाफसर उधर से निकला। वह खड़ा होकर पापा को देखने लगा। वह उन्हें वुफछ देर तक देखता रहा और पिफर उसने पूछा, फ्यह तुम क्या कर रहे हो?य्पापा ने जवाब दिया, फ्मैं वुफत्ता बनना सीख रहा हँू ।य् तब प़्ाफौजी ने पूछा, फ्तुम वुफत्ता बनना क्यों चाहते हो?य् पापा ने कहा, फ्क्योंकि मैं काप़फी दिन तक इंसान बनकर रह चुका हूँ।य् अप़्ाफसर ने कहा, फ्बात तो सही है। पर क्या तुम जानते भी हो कि इंसान किसे कहते हैं?य् पापा ने पूछा, फ्मुझे तो नहीं पता। आप ही बता दीजिए।य् अप़्ाफसर ने कहा, फ्इसके बारे में तुम अपने आप सोचो!य् अप़्ाफसर वहाँ से चला गया। वह न तो हँसा और न मुस्वुफराया। पापा सोचने लगे। वह सोचते ही रहे। अप़्ाफसर ने उन्हें कोइर् बात भी नहीं समझाइर् थी पर अचानक ही यह बात पापा की समझ में आ गइर् कि वह रोज़्ा - रोज़्ा अपना इरादा नहीं बदल सकते। अगली बार जब उनसे यही सवाल पूछा गया तो उन्हें अपफसर की याद आ गइर्, और उन्होंने कहा, फ्मैं़इंसान बनना चाहता हँू।य् इस बार कोइर् भी नहीं हँसा और पापा समझ गए कि यही सबसे अच्छा जवाब है। आज भी वह यही समझते हैं। पहली बात तो यही है कि हमें अच्छा इंसान बनना चाहिए। अलेक्सांद्र रस्िकन तुम्हारी बात ;कद्ध पापा ने जितने काम सोचे, उनमें से तुम्हें सबसे दिलचस्प काम कौन - सा लगता है? क्यों? ;खद्ध क्या तुम्हें भी घर में बताया जाता है कि तुम्हें बड़े होकर क्या काम करना है? कौन - कौन कहता है? क्या कहता है? ;गद्ध अपने मम्मी या पापा से पता करो कि वे जब बच्चे थे तब बड़े होकर क्या - क्या करने की सोचते थे। ;घद्ध अपने घर के किसी भी एक सदस्य से उसके काम के बारे में जानकारी हासिल करो। ऽ पता करो उनके काम को किस नाम से जाना जाता है? ऽ उस काम को अच्छी तरह करने के लिए कौन - कौन सी बातें मालूम होनी चाहिए? ऽ उन्हें अपने काम में किन बातों से परेशानी होती है? कहानी से आगे शुरू - शुरू में पापा चैकीदार बनना चाहते थे। ;कद्ध चैकीदार रात को भी काम करते हैं। इसके अलावा और कौन - कौन से कामों में रात को जागना पड़ता है? पापा कइर् तरह के काम करना चाहते थे। ;खद्ध क्या तुम किसी व्यक्ित को जानते हो जो एक से श्यादा तरह के काम करता है? उस व्यक्ित के बारे में बताओ। आओ खेलें - शेखचिल्ली कहता है पापा अपने पैर से कान के पीछे नहीं खुजा पाते थे। आओ देखें, तुम कौन - कौन से काम कर सकती हो! एक खेल खेलते हैं। खेल का नाम हैμशेखचिल्ली कहता है। तुममंे से एक बनेगा शेखचिल्ली। जो शेखचिल्ली कहेगा, बाकी सबको वैसे ही करना है। शेखचिल्ली इस तरह के आदेश दे सकता हैμ ऽ शेखचिल्ली कहता हैμ अपने दायें हाथ को सिर के पीछे से ले जाकर नाक को पकड़ऽ अपने दायें हाथ को दायीं ो। टाँग के नीचे से ले जाकर दायाँ कान पकड़ऽ शेखचिल्ली कहता हैμ खड़े होकर झुको। ऽ अपने हाथों से पैरों को छुओ। ऽ सिर अपने घुटनों से लगाओ। ध्यान रहे, तुम्हें केवल वही आदेश मानना है जिसके साथ जुड़ा होμ शेखचिल्ली कहता है। अगर तुमने कोइर् और आदेश मान लिया तो तुम खेल से बाहर हो जाओगे। सोच - विचार ़अपफसर के जाने के बाद पापा बहत सोचते रहे। बताओ, वह क्या - क्याुसोच रहे होंगे? सही ;9द्ध का निशान लगाओ। ऽ यह अप़्ाफसर आख्िार है कौन? ऽ अब मैं रोज - रोज़्ा अपना इरादा नहीं बदल सकता। ़ो। ा कठिन काम है।ऽ वुफत्ता बनना बड़ऽ ये पफौजी अप़्ाफसर मुझ पर हँसा क्यों नहीं, बाकी सब तो हँसते हैं।़़ऽ इस अपफसर को वुफत्ता बनना नहीं आता। इसीलिए मुझे बहका रहा है। ऽ ..........................................................................................ऽ ..........................................................................................अगर....पापा ने कहा, फ्अपना ठेला मैं स्टेशन के पास ही खड़ा करूँ गा।य् ;कद्ध अगर तुम पापा की जगह होतीं तो ठेला कहाँ लगातीं? ऐसा तुमने क्यांे तय किया? ;खद्ध अगर तुम रेल से सप़़्ाफर करोगी तो तुम्हें प्लेटपफाॅमर् और रेलगाड़ी में कौन - कौन लोग नज़्ार आएँगे? परिवार पापा के पापा को दादा कहते हैं। इन्हें तुम अपने घर में क्या कहकर बुलाओगी? पापा के पापा माँ के पापा पापा की माँ माँ की माँ भाइर् .............................................पापा के बड़ेमाँ के भाइर् पापा की बहन माँ की बहन पापा के छोटे भाइर् .......................बहन के पति ......................एक शब्द के बदले दूसरा पापा को वायुयान चालक बनने की सूझी। इसके बाद उन्होंने अभ्िानेता बनने की सोची। इसके अलावा वह जहाज़्ाी भी बनना चाहते थे। ऊपर के वाक्यों में उन्होंने और वह का इस्तेमाल पापा की जगह पर हुआ है। हम अक्सर एक ही शब्द को दोहराने की बजाय उसकी जगह किसी दूसरे शब्द का इस्तेमाल करते हैं। मैं, तुम, इस भी ऐसे ही शब्द हैं। ;कद्ध पाठ में से ऐसे शब्दों के पाँच उदाहरण छाँटो। ;खद्ध इनकी मदद से वाक्य बनाओ। कौन - किसमें तेश सभी बच्चे और बड़े किसी न किसी काम में माहिर होते हैं। कोइर् साइकिल चलाने में होश्िायार होता है तो कोइर् चित्रा बनाने में तेज होता है। तुम्हारे़दोस्तों और परिवार में कौन किस काम में माहिर है? उनके नाम लिखो। तुम किन - किन चीजों में माहिर हो, यह भी बताओ।़कैसे थे पापा नीचे लिखी पंक्ितयाँ पढ़ो। इन पंक्ितयों के आधर पर बताओ कि तुम पापा के बारे में क्या सोचती हो? ;कद्ध पापा के पास जवाब हमेशा तैयार होता था। ऐसा लगता है कि पापा बहुत चतुर थे। ;खद्ध पापा का जवाब हमेशा अलग - अलग होता था। ऐसा लगता है कि ;गद्ध मैं छोटे बच्चों को मु.फ्र त में आइसक्रीम दिया करूँ गा। ऐसा लगता है कि ;घद्ध रात में करने वेँगा। ऐसा लगता है कि फ लिए होता ही क्या है? रात में मैं चैकीदारी करूउलझन पापा कहते बनो डाॅक्टर माँ कहती इंजीनियर! भैया कहते इससे अच्छा सीखो तुम वंफप्यूटर! चाचा कहते बनो प्रोप़्ोफसर चाची कहतीं अपफसऱदीदी कहती आगे चलकर बनना तुम्हें कलेक्टर! बाबा कहते पफौज में जाकऱजग में नाम कमाओ! दीदी कहती घर में रहकर ही उद्योग लगाओ! सबकी अलग - अलग अभ्िालाषा सबका अपना नाता! लेकिन मेरे मन की उलझन कोइर् समझ न पाता! सुरेंद्र विव्रफम एक मिठाइर् ही बहुत है। मुझे तो कइर् चाहिए। मुझे प्यास लगी है। अरे, बस इतनी सी बात! बड़ा आसान क्या बात है? आप लोग झगड़ क्यों रहे हैं? तीनों ने बूढ़े को समस्या बताइर्। सा उपाय है। वुफछ अंगूर ये तो बहुत खरीद लीजिए। सारे हैं। ये मेरी प्यास ये तो मीठे हैं! बुझाएँगे। उस बुजुगर् ने हमारी समस्या बड़ी आसानी से हल कर दी। लुइर्स पफना±डिस

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