देखें किध्र से हमारे श्िाक्षक ने हमें एक बार एक कार का चित्रा बनाने के लिए कहा। हम सबने कार के अलग - अलग चित्रा बनाए। अगले दिन, बड़े मशे से हमने एक दूसरे को अपने बनाए हुए चित्रा दिखाए। तभी अंशुल ने हँसना शुरू कर दिया। वह ध्ीरज के बनाए कार के चित्रा को देख रहा था। अंशुल ने कहा μ यह तो ऐसा लग रहा है जैसे एक बड़े बक्से में छोटा बक्सा रखा हो। पिफर अंशुल ने ध्ीरज को अपना बनाया हुआ चित्रा दिखाया। दोनों ने तस्वीर तो एक ही कार की बनाइर् थी लेकिन पिफर भी उनके चित्रा अलग - अलग दिख रहे थे। ध्ीरज ने कहा कि उसने कार को उफपर छत से देखा । क्या तुम्हें लगता है कि उसका बनाया हुआ यह अजीबो - गरीब चित्रा सही है? क्या तुमने कभी चीशों को अलग - अलग तरप़्ाफ से देखा है? क्या ये चारों ओर से एक जैसी लगती हैं या अलग - अलग लगती हैं? इन चित्रों को देखो। किनारों से मेश वैफसी दिखती है? कौन सा चित्रा मेश को उफपर से देखकर बनाया गया है? नीचे वुफछ चित्रा बनाए गए हैं। शरा सोचो कि जब इन चीशों को उफपर से देखेंगे तो चलो वुफछ काम करें कद्धएक बिल्ली एक कक्षा के अंदर झाँक रही है। वह कक्षा में श्िाक्षक को ढूँढ़ना चाहती है। क्या तुम उसकी वुफछ मदद कर सकते हो? खद्धनीचे वुफछ वस्तुओं के चित्रा दिए गए हैं। पता लगाओ कि किस ओर से देखने पर वे ऐसी दिखेंगी। सीढ़ी सीढ़ी मेश वुफसीर् पेंसिल गद्ध वुफछ चीशों को उफपर से देखो। उनके चित्रा बनाओ और अपने दोस्तों से पूछो कि वे किन चीशों के चित्रा हंै। रंगोली क्या तुमने कभी रंगोली बनाइर् है? मेरी दोस्त मैं मीनाक्षी हूँ। मैं तमिलनाडु की़मीनाक्षी पफशर् पर सुंदर रहने वाली हूँ। हम रोश सुबहडिशाइन बनाती है। ़पफशर् पर कोलम बनाते हैं। ये बिंदुओं से बनाए जाते हैं। नीचे दिए गए बिंदुओं की मदद से तुम भी रंगोली बनाने की कोश्िाश कर सकते हो। यहाँ रंगोली के दो चित्रा दिखाए गए हैं। 1.नीचे दी गइर् खाली जगह में इन आवृफतियों को पिफर से बनाओ। 2.बिंदुओं से अपनी पसंद की आवृफतियाँ और डिशाइन बनाओ। 3.नीचे छः अध्ूरे वगर् और आयत हैं, बिंदुओं को मिलाते हुए उन्हें पूरा करो। 4.नीचे दिए बिंदुओं का इस्तेमाल करते हुए बनाओ μ अद्ध एक पतंग बद्ध एक पत्ता सद्ध एक पूफल दद्ध एक नाव यद्ध एक तारा रद्ध एक बतर्न किसी चीश को कहाँ से देखा गया है, चित्रा उसी हिसाब से बनता है। शुरू के पन्नों में यही दिखाया गया है। किसी ठोस वस्तु के तीन आयाम होते हैं। जब उसका चित्रा बनाते हैं तो उसे दो आयामों में बाँध्ना होता है। बिंदुओं के ‘गि्रड’ पर आवृफतियाँ बनाने से समरूपता की समझ विकसित होगी। समरूपता मतलब समान रूप। चित्रा को घुमाने, ख्िासकाने या आइने में देखने पर वैफसे समरूपता दिखाइर् देती है इस बात को अध्याय पाँच और दस में भी लिया गया है। जैसे को तैसा एक दिन अमीना एक चित्राकार से मिली। क्या तुम मेरा हाँ - हाँ, शरूर! चित्रा बना सकते इसके लिए मैं हो? 200 रुपए लूँगा। वुफछ समय बाद चित्राकार ने उसे अपना बनाया हुआ चित्रा दिखाया। अमीना, यह पर यह तो रही तुम्हारी आध्ी ही है! तस्वीर! कैसी लगी? बाकी आध हिस्सा भी ठीक इसी क्या अब मुझे मेरा तरह का है। बस एक आइना सामने पैसा दोगी? रखो और तुम्हें पूरी तस्वीर मिल जाएगी। अमीना ने उसे 100 रुपए का एक नोट दिया। बचा हुआ आध हिस्सा भी ठीक उसी तरह कालेकिन यह तो है। इसलिए एक आइना नोट के सामने रखना और200 रुपए का तुम्हें तुम्हारा पूरा पैसा मिल जाएगा! हा...हा...हा!आध ही है! चित्राकार ने कइर् चित्रा बनाए जिसमें उसने उन चीशों के आध्े हिस्से को ही बनाया। इन चित्रों के बाकी बचे हिस्सों को बनाओ और बताओ कि ये किन चीशों के चित्रा हैंै। इसके लिए आइने की मदद ली जा सकती है। क्या हम नीचे दी गइर् वस्तुओं के चित्रा बनाते समय चित्राकार का तरीका इस्तेमाल कर सकते हैं? तुम चित्राकार को ऐसी चीशों के चित्रा बनाने के लिए कहो जिन्हें एक जैसे दो बराबर हिस्सों में न बाँटा जा सके। तो अब उसका आइने वाला उपाय नहीं चल पाएगा। तीन और ऐसी वस्तुओं के चित्रा बनाओ जिन्हें आइने की तस्वीर की तरह दो बराबर हिस्सों में न बाँटा जा सके। आध्े आइने इन तस्वीरों को देखो। बिंदु वाली रेखा पर आइना रख कर देखने पर क्या आध हिस्सा ऐसा ही दिखेगा जैसा कि चित्रा में दिखता है? इन अक्षरों को इस्तेमाल करके हम ऐसे शब्द भी बना सकते हैं जिन्हें दो समान भागों मैं तुम्हें बिल्ली का मुखौटा बनाना बताउँफ....कागश का एक टुकड़ा लो 1 इसे बीच से मोड़ो 3 2 एक कैंची से इसे एक तरप़्ाफ जैसा दिखाया गया किनारे - किनारे है वैसा चित्रा बनाओ काट लो 4 5 इसे रंगों से भर दो औरअब इसे खोलो और इसके पीछे एक रबड़आँख, नाक, मूँछ का छल्ला बाँध् दो।बनाओ। तुम्हारा मुखौटा तैयार है।

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