9ण् अक्ल बड़ी या भैंस कब आउँफ अवंती ने एक छोटी - सी रंगाइर् की दुकान खोली और गाँववासियों के लिए कपड़ा रंगना शुरू कर दिया। सब लोग उसकी रंगाइर् की प्रशंसा करने लगे। धीरे - धीरे उसकी दुकान चल निकली। अवंती की प्रशंसा सुनकर एक सेठ को बहुत इर्ष्यार् महसूस होने लगी। 78 अवंती को परेशान करने के लिए वह सेठ कपड़े का एक टुकड़ा लेकर अवंती की दुकान में जा पहुँचा। दरवाशे के अंदर घुसते ही सेठ बुलंद आवाश में बोला दृ अवंती, शरा यह कपड़ा तो अच्छी तरह से रंग दो। मैं देखना चाहता हूँ तुम्हारा हुनर वैफसा है। तुम्हारी काप.फी तारीप.फ सुनी थी, इसीलिए आया हूँ। अवंती ने सेठजी से पूछा दृ सेठजी इस कपड़े को आप किस रंग में रंगवाना चाहते हैं? सेठ ने कहा दृ रंग? रंग के बारे में मेरी कोइर् खास पसंद तो है नहीं, पर मुझे हरा, पीला, सप.ेफद, लाल, नारंगी, नीला, आसमानी, काला और बैंगनी रंग कतइर् अच्छे नहीं लगते। समझे कि नहीं? अवंती ने जवाब दिया दृ समझ गया हूँ, अच्छी तरह समझ गया हूँ। मैं शरूर आपकी पसंद की रंगाइर् कर दूँगा! अवंती ने सेठ का मंसूबा भाँपते हुए उसके हाथ से कपड़े का टुकड़ा ले लिया। सेठ ने खुश होकर कहा दृ अच्छा, तो इसे लेने मैं किस दिन आउँफ? अवंती ने कपड़े को अलमारी में बंद करके उसमें ताला लगा दिया और सेठ से बोला दृ आप इसे लेने सोमवार, मंगलवार, बुध्वार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार को छोड़कर किसी भी दिन आ सकते हैं। सेठ समझ गया कि उसकी चाल उल्टी पड़ चुकी है अतः भलाइर् धीरे से ख्िासक लेने में ही है। पिफर उस सेठ ने दोबारा अवंती की दुकान में घुसने की हिम्मत नहीं की। आर.एस. त्रिापाठी कहानी से ऽ सेठ ने किस रंग में कपड़ा रंगने को कहा? ऽ अवंती ने कपड़ा अलमारी में बंद कर दिया। क्यों? ऽ सेठ कपड़ा लेने किस दिन आया होगा? कौन छुपा है कहाँ? नीचे के वाक्यों में वुफछ हरी - भरी सब्िशयों के नाम छुपे हैं। ढूँढ़ो तो शरा - ऽ अब भागो भी, बारिश होने लगी है। ऽ मामू लीला मौसी कहाँ है? ऽ शीला के पास बैग नहीं है। ऽ रानी बोली - हमसे मत बोलो। मुहावरे चित्रों को देखो। क्या इन्हें देखकर तुम्हें कुछ मुहावरे या कहावतें याद आती हैं? उन्हें लिखो। अँध्ेरा आरसी आस्तीन ग्यारह कहो कहानी विद्यालय, गुरुजी, छु‘ी, बंदर, डंडा, पेड़, केला, ताली, बच्चे, भूख। इन शब्दों को पढ़कर तुम्हारे मन मंे वुफछ बातें आइर् होंगी। इन सब चीशों के बारे में एक छोटी - सी कहानी बनाओ और अपने साथ्िायांे को सुनाओ। उछालो एक रुमाल या कोइर् छोटा - सा कपड़ा उछालकर देखो। किसका रुमाल सबसे उँफचा उछलता है? रुमाल के साथ बिना वुफछ बाँध्े इसे और उँफचा वैफसे उछाला जा सकता है? समझ - समझदारी रंगाइर् शब्द रंग से बना है। इसी तरह और शब्द बनाओ - क्या समझे जिन शब्दों के नीचे रेखा ख्िंाची है, उनका मतलब बताओ - ऽ मुझे बैंगनी रंग कतइर् अच्छा नहीं लगता। ऽ अवंती ने सेठ का मंसूबा भाँप लिया। ऽ मैं तुम्हारा हुनर देखना चाहता हूँ। ऽ सेठ बुलंद आवाश में बोला। ऽ सेठ को इर्ष्यार् होने लगी। ऽ रंग के बारे में मेरी कोइर् खास पसंद तो है नहीं। वैफसा लगा आप़ंफती आप़ंफती के बारे में वुफछ वाक्य लिखो। तुम उसके कपड़ों, शक्ल - सूरत, पालतू पशु, बुि आदि के बारे में बता सकती हो। जोड़े ढूँढ़ो - दिन - दीन मेला - मैला उफपर दिए गए शब्दों के जोड़ों में केवल एक मात्रा बदली गइर् है। किसी भी मात्रा को बदलने से अथर् भी बदल जाता है। ऐसे और जोड़े बनाओ। देखें, कौन सबसे श्यादा जोड़े ढूँढ़ पाता है। ............... ............... ............... ............... ............... ............... ............... ............... ............... ............... ............... ............... ............... ............... ............... ............... वुफछ कलाकारी कब आउँफ वाले किस्से को चित्राकथा के रूप में लिखो। क्या है प.फालतू कभी - कभी हम अपनी बात करते हुए ऐसे शब्द भी बोल देते हैं, जिनकी कोइर् शरूरत नहीं होती। इसी तरह इन वाक्यों में वुफछ शब्द प.फालतू हैं। उन्हें ढूँढ़कर अलग करो - ऽ बाशार से हरा ध्निया पत्ती भी ले आना। ऽ एक पीला पका पपीता काट लो। ऽ अरे! रस में इतनी सारी ठंडी बपऽ शेबा, बगीचे से दो ताशे नींबू तोड़ लो। ऽ बेकार की प.फालतू बात मत करो।

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