उत्तर प्रदेश की लोककथा 7ण् टिपटिपवा एक थी बुढि़या। उसका एक पोता था। पोता रोश रात में सोने से पहले दादी से कहानी सुनता। दादी रोश उसे तरह - तरह की कहानियाँ सुनाती। एक दिन मूसलाधर बारिश हुइर्। ऐसी बारिश पहले कभी नहीं हुइर् थी। सारा गाँव बारिश से परेशान था। बुढि़या की झोंपड़ी में पानी जगह - जगह से टपक रहा था दृ टिपटिप - टिपटिप। इस बात से बेखबर पोता दादी की गोद में लेटा कहानी सुनने के लिए मचल रहा था। बुढि़या खीझकर बोली दृ अरे बचवा, का कहानी सुनाएँ? इर् टिपटिपवा से जान बचे तब न! पोता उठकर बैठ गया। उसने पूछा दृ दादी, ये टिपटिपवा कौन है? टिपटिपवा क्या शेर - बाघ से भी बड़ा होता है? दादी छत से टपकते हुए पानी की तरप़फ देखकर बोली दृ हाँ बचवा, न शेरवा के डर, न बघवा के डर। डर त डर, टिपटिपवा के डर। संयोग से मुसीबत का मारा एक बाघ बारिश से बचने के लिए झोंपड़ी के पीछे बैठा था। बेचारा बाघ बारिश से घबराया हुआ था। बुढि़या की बात सुनते ही वह और डर गया। अब यह टिपटिपवा कौन - सी बला है? शरूर यह कोइर् बड़ा जानवर है। तभी तो बुढि़या शेर - बाघ धेबी की पत्नी बोली दृ जाकर गाँव केडित जी से क्यों नहीं पूछते? वेहैं। आगे - पीछे, सबके हाल की उन्हें खबर उसी गाँव में एक धेबी रहता था। वह भी बारिश से परेशान था। आज सुबह से उसका गधा गायब था। सारा दिन वह बारिश में भीगता रहा और जगह - जगह गध्े को ढूँढ़ता रहा लेकिन वह कहीं नहीं पत्नी की बात धेबी को जँच गइर्। अपना मोटा लऋ उठाकर वह पंडित जी के घर की तरप.फ चल पड़ा। उसने देखा कि पंडित जी घर में जमा बारिश का पानी उलीच - उलीचकर पेंफक रहे थे । धेबी ने बेसब्री से पूछादृ महाराज, मेरा गध सुबह से नहीं मिल रहा है। शरा पोथी बाँचकर बताइए तो वह कहाँ है? सुबह से पानी उलीचते - उलीचते पंडित जी थक गए थे। धेबी की बात सुनी तो झुँझला पड़े और बोले दृ मेरी पोथी में तेरे गध्े का पता - ठिकाना लिखा है क्या, जो आ गया पूछने? अरे, जाकर ढूँढ़ उसे किसी गढ़इर् - पोखर में। और पंडित जी लगे पिफर पानी उलीचने। धेबी वहाँ से चल दिया। चलते - चलते वह एक तालाब के पास पहुँचा। तालाब के किनारे उँफची - उँफची घास उग रही थी। धेबी घास में गध्े को ढूँढ़ने लगा। किस्मत का मारा बेचारा बाघ टिपटिपवा के डर से वहीं घास में छिपा बैठा था। धेबी को लगा कि बाघ ही उसका गधा है। उसने आव देखा न ताव और लगा बाघ पर मोटा लऋ बरसाने। बेचारा बाघ इस अचानक हमले से एकदम घबरा गया। बाघ ने मन ही मन सोचा दृ लगता है यही टिपटिपवा है। आख्िार इसने मुझे ढूँढ़ ही लिया। अब अपनी जान बचानी है तो यह जो कहे, चुपचाप करते जाओ। आज तूने बहुत परेशान किया है। मार - मारकर मैं तेरा कचूमर कौन - किससे परेशान? इस कहानी में लगता है सभी परेशान थे। बताओ कौन - किससे परेशान था? ............. - ............................................................................ ............. - ............................................................................ ............. - ............................................................................ ............. - ............................................................................ मतलब बताओ नीचे कहानी में से वुफछ वाक्य दिए गए हैं। इन्हें अपने शब्दों में लिखो। ऽ टिपटिपवा कौन - सी बला है? ऽ पत्नी की बात धेबी को जँच गइर्। ऽ बाघ बिना चूँ - चपड़ किए भीगी बिल्ली बना धेबी के पीछे - पीछे चल दिया। ऽ शरा पोथी बाँच कर बताइए वह कहाँ है? याद करो तो पोता दादी की गोद में कहानी सुनने के लिए मचल रहा था। तुम किन - किन चीशों के लिए मचलते हो? मैं .......................................................................................................कौन है टिपटिपवा! हाँ बचवा, न शेरवा के डर, न बघवा के डर। डर त डर, टिपटिपवा के डर। ऽ तुम्हारे घर की बोली में इस बात को वैफसे कहेंगे? ऽ कहानी में टिपटिपवा कौन था? तुम किस - किस को टिपटिपवा कहोगे? बारिश यह कहानी एक ऐसे दिन की है जब मूसलाधर बारिश हो रही थी। अगर मूसलाधार बारिश की बजाए बूँदा - बाँदी होती, तो क्या होता? यदि उस रात बूँदा - बँादी होती तो तरह तरह की आवाशें पानी के टपकने की टिपटिप - टिपटिप आवाश आ रही थी। सोचो और लिखो ये आवाशें कब सुनाइर् पड़ती हैं। खरर् - खरर्भ्िान - भ्िान ठक - ठक चरर् - चरर्तड़ - तड़ खूँटा धेबी ने बाघ को खूँटे से बाँध् दिया। सोचो और बताओ, खँूटे से क्या - क्या बाँधा जाता है? एक से श्यादा एक कहानी μ सभी कहानियाँ एक तितली μ कइर् ...................................... एक ......... μ दस ...................................... एक चूड़ी μ ढेरों ...................................... एक ख्िाड़की μ चार ......................................

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