जीवन का जाल ड़ - पौध्ेसाँप पेगिलहरी पानी सूरज घास अब तक तुमने करीब - करीब यह पूरी किताब पढ़ ली होगी। तुमने पेड़ - पौधें, जानवरों, पानी, घर, वाहनों तथा और भी कइर् चीशों के बारे में पढ़ा और सोचा। क्या 156 पक्षी चंद्रमा गाय चूहा मिट्टीðघरहवा तुम बता सकते हो कि हमने इन चीशों के बारे में वुफछ जानने और सोचने की कोश्िाश क्यों की? 157 ❉ चित्रा मेें दिखाइर् चीशों से हमारा क्या नाता है? चलो पता लगाएँ μ ❉ सबसे पहले दी गइर् खाली जगह में अपना चित्रा बनाओ। ❉ अब अपने चित्रा से एक लाइन खींचकर उन चीशों से जोड़ो जो तुम्हें अपने जीने के लिए बहुत शरूरी लगती हैं। ❉ क्या तुमने खुद को ‘घर’ से जोड़ा है? ❉ देखें, घर किन - किन चीशों से जुड़ता है। पहले सोचो μ घर किन चीशों से बनता है? ♦ लकड़़ी μ जो पेड से मिलती है। ♦ इर्ं ðट μ जो पानी और मिट्टी से बनती है। ♦ मिट्टðी μ हमें शमीन से मिलती है। ♦ पानी μ हमें नदी, तालाब, वुफएँ या बारिश से मिलता है। तुम समझ गए न, घर को किन चित्रों या शब्दों से जोड़ना है? अब इसी तरह एक - एक करके सभी चीशों को दूसरी चीशों से जोड़ो। यह सब करने में हो सकता है तुम्हें वुफछ और चीजों के नाम लिखने की शरूरत पड़े। इतना सब करने पर क्या बना? बन गया न एक बड़ा - सा जाल! यह जाल देखकर तुम क्या समझे? तुमने जो जाल बनाया है उसे अपने दोस्तों को दिखाओ और उनका बनाया हुआ जाल भी देखो। क्या सब एक जैसे हैं? साथ्िायों के साथ इस पर चचार् भी करो। बच्चों द्वारा बनाया जाल उनके परिवेश में मिलने वाली चीशों की परस्पर निभर्रता की समझ को दशार्ता है। कक्षा में इस विषय पर चचार् करने से उन्हें जाल बनाने में मदद मिलेगी।

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