बूँद - बूँद से माधे राजस्थान के बज्जू गाँव में रहता है। गाँव में देखो तो चारों ओर रेत ही रेत दिखाइर् देती है। जब कभी रेत नहीं उड़ती, तब वुफछ घर दिख जाते हैं। माधे के घर में सब परेशान हैं। वैसे ही हर साल गमिर्यों में पानी की बहुत कमी होती है। इस साल तो बिल्वुफल ही बारिश नहीं हुइर्। अब उसकी माँ और बहन को और भी दूर जाना पड़ता है, पानी लाने के लिए। पास वाली बावड़ी सूख जो गइर् है! हर रोश चार घड़े पानी जुटाने में ही कइर् घंटे निकल जाते हैं। गमर् रेत में चल - चल कर उनके पैर तो जलते ही हैं, छाले भी पड़ जाते हैं। गाँव में खुशी की लहर तब उठती है, जब कभी रेल से पानी आता है। माधो छत के पिताजी उफँट - गाड़ी में पानी लाने आँगननाली ढक्कन के नीचेजाते हैं, पर ऐसा मौका अकसर नहीं टाँका आता। लोग पानी का इंतशार करते ही रह जाते हैं। वुफछ लोग बारिश का पानी इकट्टाòकरते हैं। यह खास तरह से किया जाता है μ टाँका बना कर। क्या तुम जानते हो टाँका क्या होता है? और इसे वैफसे बनाते हैं? आँगन में गडा बना कर उसे पक्का करके टाँका बनाते हैं। टाँके को ढक्कन से क्कबंद रखते हैं। टाँके के लिए घर की छत को वुफछ ढलवाँ बना देते हैं, जिससे छत पर गिरा बारिश का पानी नाली के द्वारा नीचे टाँके में इकट्टòा हो सके। छत की नाली परजालीलगादेतेहैं जिससे वूफड़ा - कचरा टाँके में न जा सके। यह पानी सापफ करके पीने के काम में लाया जाता है। कभी - कभी गाँव के एक़टाँके से माधे को भी पानी लेने देते हैं। सोचो! पानी की कमी से लोगों को क्या - क्या परेशानियाँ होती होंगी? ❉ माधे के गाँव के लोग पीने का पानी कहाँ से लाते हैं? ❉ माधे के घर में पानी भरकर कौन लाता है? ❉ टाँके का पानी श्यादातर पीने के काम में ही आता है। क्यों? ❉ अब तुम बताओ, क्या तुम्हारे घर में भी बारिश का पानी इकट्टा कियाòजाता है? यदि हाँ, तो वैफसे? ❉ क्या पानी को इकट्टा करने का कोइर् और तरीका भी हो सकता है?òअगर पानी इकट्टòा करने के स्थानीय तरीकों पर बच्चे अपने अनुभव बाँटें तो किताबी ज्ञान को जीवन के अनुभवों से जोड़ पाएँगे। माधे की तरह सोनल के घर में भी पानी की किल्लत रहती है। सोनल भावनगर शहर में रहती है। नल में रोश केवल आध्े घंटे पानी आता है। मोहल्ले भर के लोग एक ही नल पर, सोचो कितना बुरा हाल होता होगा। सोनल पानी भरने के लिए डटी रहती है। जब मौका मिलता है, बूँद - बूँद करके भी बाल्टी भर लेती है। आओ पता लगाएँ कि कितनी बूँदों से भरती है कटोरी, या पिफर बाल्टी। चित्रा में दिखाए तरीके से प्रयोग करो, पता लगाओ और खाली डिब्बे में लिखो। 1.एक चम्मच में कितनी बूँदे? 3.एक मग में कितनी कटोरी? 2.एक कटोरी में कितने चम्मच? 4.एक बाल्टी में कितने मग? देखा, बूँद - बूँद से मिला कितना पानी! अगर नल से बूँद - बूँद पानी टपकता रहेगा तो कितना पानी बरबाद होगा। इन चित्रों में ऐसा ही वुफछ हो रहा है। पानी की बचत के लिए तुम क्या कुछ सोच सकते हो? अपना सुझाव लिखो। क्या तुमने घर में, स्वूफल में या रास्ते में पानी को बेकार बहते देखा है? कहाँ? चित्रा देखो और चचार् करो μ क्या एक बार पानी से काम करने के बाद उसी पानी से वुफछ और काम कर सकते हैं? जिस जगह पर पानी की किल्लत होती है वहाँ लोग पानी की बचत करने व उसके दोबारा इस्तेमाल के कइर् तरीके अपनाते हैं। ऐसा वे लोग मशबूरी में करते हैं। इस बात को समझकर बच्चे अपने जीवन में पानी की बचत के वुफछ उपाय अपनाएँ तो ‘पानी सबका साँझा है’ μ यह बात वे समझ पाएँगे। अलग - अलग रंगों से लाइनें खींचकर दिखाओ, किस काम के बाद क्या काम करोगे, जिससे वही पानी बार - बार इस्तेमाल हो सके। एक उदाहरण नीचे दिया गया है। हाथ मुँह धेना कपड़े धेना पफल - सब्शी धेना पोंछा लगाना पौधंे में डालना शौचालय में डालना तुमने पानी के बार - बार इस्तेमाल के वुफछ तरीके सुझाए। ये तरीके लोग श्यादातर मजबूरी में ही अपनाते हैं, जहाँ पानी की बहुत कमी होती है। जानते हो पानी की कमी इसलिए भी होती है क्योंकि वुफछ लोग पानी बेकार करते हैं। सोचो कितना अच्छा हो अगर सभी को पानी मिले! इस्तेमाल किए हुए पानी के पुनः उपयोग पर चचार् करें। यह चचार् पानी के बचाव के महत्त्व को समझने में सहायक होगी। इस बारे में बच्चों के सुझाव सुनना और इन सुझावों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित करना उपयोगी रहेगा।

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