‘टक’ की आवाश सुनकर कक्षा में बैठे सभी बच्चे चैंक गए। आवाश छत पर लगे पंखे से आइर् थी। कल्याणी चिल्लाइर् - - देखो - देखो! उस कोने में देखो। चिडि़या पंखे से कट गइर्। पीटर झट से उठा और चिडि़या को उठा लाया। चिडि़या तड़प रही थी। नवजोत और अली जल्दी से जाकर एक कटोरी में पानी ले आए। पीटर ने चिडि़या को प्यार से सहलाया। पानी की कटोरी चिडि़या की चोंच के पास लगाइर्। चिडि़या ने थोड़ा पानी पिया। पानी पीकर वह ध्ीरे - ध्ीरे अपने पंख पफड़पफड़ाने लगी। नवजोत ने सभी बच्चों को पीछे हटने के लिए कहा। उन्होंने देखा कि चिडि़या ध्ीरे - ध्ीरे उड़ने की कोश्िाश कर रही है। तभी पुफरर्... की आवाश के साथ चिडि़या बाहर उड़ गइर्। अगले दिन बच्चों ने देखा एक चिडि़या कमरे में चक्कर लगा रही है। बच्चों ने यह पहचानने की कोश्िाश की कि क्या वह पिछले दिन वाली चिडि़या थी। उन्हें लगा कि वही है। उन्हांेने जल्दी से पंखा बंद कर दिया और ताली बजाने लगे। वाक्यों को सही व्रफम में डालो - - ♦ पीटर ने चिडि़या को प्यार से सहलाया। ♦ बच्चों ने देखा एक चिडि़या उनकीकक्षा में चक्करलगारही है। ♦ नवजोत और अली जल्दी से जाकर एक कटोरी में पानी ले आए। ♦ पुफरर्...की आवाश के साथ चिडि़या कक्षा से बाहर उड़ गइर्। ♦ चिडि़या पंखे से कट गइर्। शंकर बहुत खुश था। उसके घर के आँगन में बिल्ली ने चार बच्चे जो दिए थे। वह अपना खाली समय वहीं बिताने लगा। एक सुबह बिल्ली के रोने की आवाश से उसकी नींद खुली। ;बोलो, बिल्ली वैफसे ाती ह?द्ध रेैवह भागा आँगन की ओर। देखा तो बिल्ली अपने तीन बच्चों को साथ चिपका कर रो रही थी। एक बच्चा गायब था। बाहर जाकर देखा तो मालिनी बिल्ली के बच्चे को सहला रही थी। शंकर ने मालिनी को घर के आँगन में बुलाया। मालिनी ने बिल्ली को रोते हुए देखा। सोचो, मालिनी ने क्या किया होगा? जानवरों की भावनाओं के बारे में चचार् करने से बच्चे जानवरों के प्रति संवेदनशील हो सकते ह।ंै125 भोली, मीनू की गाय है। मीनू रोश सुबह भोली को मैदान में चराने ले जाती है। एक दिन तेशी से आते स्वूफटर से भोली के पाँव में चोट लग गइर्। चोट से खून निकल रहा था। अब मीनू के घर के लोग क्या करेंगे? ❉ चंदू धेबी अपने गध्े का बहुत ध्यान रखता है। गध भी तो उसके बहुत सारे काम करता है। चित्रों को देखकर लिखो कि चंदू अपने गध्े के लिए क्या - क्या करता है? 126 ❉ क्या तुम्हारे घर या पड़ोस में किसी के यहाँ कोइर् पालतू जानवर है? कौन - सा? ❉ क्या तुम उसे किसी प्यार के नाम से पुकारते हो? किस नाम से? ❉ तुम क्या करते हो जब तुम्हारे पालतू जानवर को μ ♦ भूख लगती है ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ ♦ गमीर् या ठंड लगती है ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ ♦ कोइर् परेशान करता है ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ ♦ चोट लगती है ऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋऋ ❉ हम वुफछ जानवरों को पालते हैं। उनकी देखभाल भी करते हैं। तालिका में वुफछ जानवरों के नाम हैं, जिन्हें पाला जाता है। तालिका को पूरा करो। जानवर का नाम इन्हें क्यों पालते हैं कु त्ता दूध् देती है गाड़ी खींचता है बैल मुगीर् मछली प्यारा या प्यारी लगती है मध्ुमक्खी हम जानवरों को पालते हैं तथा उनकी देखभाल भी करते हैं μ यह संबंध् समझने से बच्चों को उनके परिवेश में जीवों की आपसी निभर्रता समझने में आसानी होगी। पक्ष्िायों का प्याऊ मिट्टðी का एक चैडे़ मुँह का बतर्न लो। बतर्न को रस्सी से बाँध्कर लटकाओ, जैसा चित्रा में दिखाया है। अब उस बतर्न में पानी डालकर उसे किसी पेड़ की शाखा पर या घर के बाहर किसी खूँटी पर टाँग दो। उसमें रोश पानी भरो। देखो, पानी पीने के लिए कौन - कौन से पक्षी वहाँ आते हैं? ❉ पानी की शरूरत हमें भी है और जानवरों को भी। ऐसी ही वुफछ और चीशें हैं जिन्हंे हम और जानवर दोनों इस्तेमाल करते हैं। ऐसी किन्हीं तीन चीशों के नाम लिखो। तुमने शायद भोजन भी अपनी सूची में शामिल किया होगा। तुम जानते ही हो हमारा भोजन कितनी अलग - अलग तरह का है। इसी तरह जानवरों का भोजन भी अलग - अलग तरह का होता है। ❉ क्या तुमने कभी किसी जानवर को वुफछ ख्िालाया है या किसी और को वुफछ ख्िालाते हुए देखा है? यदि हाँ, तो तालिका में लिखो। बच्चों को पक्ष्िायों का प्याउफ बनाने में मदद करें। इसे बाहर खुले में रखवाएँ जिससे बच्चे पक्ष्िायों को नशदीक से देखें और उनके बारे में बहुत - सी बातें जानें। 128 किस जानवर को ख्िालाया क्या ख्िालाया तुम इन जानवरों को खाना क्यों ख्िालाते हो? किस जानवर को सबसे श्यादा बच्चों ने खाना ख्िालाया है? उसे क्या - क्या ख्िालाया? देखो, क्या तुम्हारी तालिका में इनके भी नाम हैं? पता करो ये क्या खाते हैं? चूहा, काॅकरोच, छछमकडँू़दर, ी, छिपकली, ैगिलहरी, सूअरआ, बंदर, सोचो, क्या कभी किसी जानवर ने तुम्हारी मशीर् के बिना तुम्हारा खाना खाया है? वैफसे? ऐसे जानवर ऐसे जानवर ऐसे जानवर जिन्हंे तुम जिन्हें तुमने छुआ है जिन्हें तुमने छुआ नहीं है छू नहीं सकते पर छू सकते हो तुमने देखा कि वुफछ जानवरों को हम छू सकते हैं। ये अध्िकतर हमारे घरों में और आस - पास रहते हैं। इनमें से वुफछ हमारी मदद करते हैं। वुफछ जानवरों के पास हम नहीं जाते। डर लगता है कहीं काट न लें, नुकसान न पहँुचाएँ या खा ही न जाएँ! बच्चों से यह चचार् की जा सकती है कि पशु - पक्ष्िायों को छूने का अथर् है उन्हें प्यार से सहलाना न कि उन्हें सताना। अगले पृष्ठ पर चित्रा द्वारा दिखाइर् गइर् कहानी प्रवृफति में संतुलन को दशार्ती ह।ैबच्चों को यह बात सहज और सरल तरीके से स्पष्ट करना शरूरी है।

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