ऐसे भी होते हैं घर मेरा नाम नसीम है। मैं श्रीनगर में रहता हँू। कल से हमारे स्वूफल में बहुत चहल - पहल है। यह पूरे सात दिनों तक रहेगी। जानते हो क्यों? हमारे स्वूफल में वंैफप जो लगा है। वैंफप में कइर् जगहों से बच्चे आए हैं। मैदान में टेंट लगाकर सबके रहने का इंतशाम किया गया है। हमने स्वूफल को खूब सजाया है। वुफछ बच्चों ने कपड़ों की कतरनों से झालर बनाकर, उन्हें दरवाशे पर लगाया है। वुफछ ने बादाम के छिलकों से पोस्टर बनाए हैं। कहीं तो सूखे पत्तों तथा लकड़ी के बुरादे से रंगोली बनाइर् है। मकानों की विविध्ता दिखाने के लिए वुफछ जगह जैसे - असम, राजस्थान, दिल्ली, पहाड़ी इलाके का उपयोग हुआ है। इन जगहों का परिवेश समझने से बच्चे इन मकानों को समझ पाएँगे। 116 आज वैंफप का पहला दिन है। हम सब बहुत खुश हैं। सुबह सब बच्चे इकट्टòे हुए। सब बच्चे शमीन पर एक गोला बना कर बैठ गए। सबने अपना - अपना परिचय दिया। सबनेे अपने बारे में बताया कि वे कहाँ रहते हैं, क्या खाना पसंद करते हैं। बच्चे अपने साथ अपने घर और परिवार की तस्वीरें भी लाए हैं। बारी - बारी से सब बच्चों नेे अपने घरों के बारे में भी बताया। सबसे पहले भूपेन के समूह की बारी आइर्। भूपेन ने अपना नाम बताया और कहा - ❉ इन मकानों की छतें वैफसी हैं? इन्हें ऐसा क्यों बनाया जाता है? ❉इन मकानों में अंदर जाने का क्या तरीका है? ❉रात के समय इन मकानों की सीढ़ी हटा देते हैं। क्यों? अब आइर् चमेली की बारी। उसने कहा μ ❉चमेली का घर किस इलाके में है? ❉चमेली और भूपेन के मकानों की छतों में क्या समानता है? ❉ऐसी छतें इन इलाकों में वैफसे मदद करती हैं? मिताली और अनुज ने बताया μ मिताली और अनुज दिल्ली से आए हैं। उन्होंने सबको दिल्ली की तस्वीरें दिखाइर्ं। एक बहुमंजिले मकानों में उफपर वैफसे चढ़ते होंगे? दिल्ली भारत की राजधनी है। दिल्ली और उसके जैसे बड़े शहरों में, गाँवों और कस्बों से लोगों को काम की तलाश में आना पड़ता है। ये लोग अक्सर शहर में ही बस जाते हैं। यहाँ रहने वाले लोग श्यादा हैं और जगह कम। बहुत लोगों के पास मकान होते ही नहीं। उन्हें झुग्गी - झोपडि़यों में रहना पड़ता है μ और कइर् लोगों के पास वह भी नहीं। लोग जहाँ जगह मिले वहीं सो जाते हैं μ सड़क पर, पुफटपाथ पर, स्टेशन पर...। वाकइर् शहरों में घर की बहुत बड़ी समस्या है। कांशीराम ने बताया μ मैं राजस्थान के एक गाँव से आया हँू। हमारे यहाँ बारिश बहुत कम होती है और खूब गमीर् पड़ती है। हम लोग मिट्टðी के घरों में रहते हैं। घरों की दीवारें बहुत मोटी होती हैं। इन दीवारों को मिट्टð़ेी से लीप - पोतकर सुंदर बनाया जाता है। छतें वँफटीली झाडियां की बनी होती हैं। बच्चों से बेघर लोगों की मुसीबतों के बारे में संवेदनशीलता से बातचीत करने की आवश्यकता ह।ै120 इसी तरह सभी टोलियों ने अपने - अपने घरों के बारे में बताया। परिचय के बाद रंगारंग कायर्व्रफम हुआ। बच्चों ने तरह - तरह के नाच किए। अपनी - अपनी भाषा में लोकगीत सुनाए। सब ने इलायची और बादाम डला हुआ वफहवा ;चायद्ध पीया। बहुत मशा आया। शाम को हम सब डल झील घूमने गए। वहाँ हमने एक हाउस बोट देखी। श्िाकारे में बैठे। वुफछ बच्चों ने चप्पू भी चलाया। चारों तरपफ नीले - नीले पहाड़़ और बीच में ‘चार चिनारी’। ❉हाउस बोट दूसरे घरों से अलग है। वैफसे? ❉क्या तुम ऐसे घर में रहना पसंद करोगे? क्यों? ❉ चित्रा देखकर मिलान करो। झोपड़ी बपर्फ का घर ;इग्लूद्ध तंबू हाउस बोट बहुमंजिला मकान 122 ❉ तुम्हारा घर किन - किन चीशों से बना है। उन के नाम पर ‘9’ का निशान लगाओ। अपने घर के आस - पास के मकानों को देखो। वे किन - किन चीशों से बने हैं? उन चीशों की सूची बनाओ। ❉ मकान जिन चीशों से बनते हैं, उन चीशों के नमूनों को इकट्टा करो।ò❉ आओ इर्ट बनाएँंचिकनी मिट्टðी को गूँध् लो। खाली माचिस में दबाकर भरो। सुखाकर निकालो। तुम्हारी छोटी - सी इर्ट तैयार हो गइर्!ंअपनी इर्टों पर तरह - तरह के रंग करो। उस पर अपना नाम भी लिखो।ंइन सभी इर्टों को मिलाकर एक रंग - बिरंगा घर बनाओ। घर की छत को भींसजाओ। ♦ कइर् तरह के घरों के चित्रा इकट्टे करो या उनके चित्रा बनाओ। चित्रों सेòएक सुंदर चाटर् बनाओ। कक्षा में उसे सजाओ। मकान किन चीशों से बनाए जाते हैं μ बच्चे अपने आस - पास उपलब्ध् इन चीशों को इकट्टाòकरके बेहतर ढंग से समझ सवेंफगे।

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