मैं हूँ एक चिट्टòòी। कागश कलम से लिखी चिट्टी, जो रीना ने अपने दोस्त अहमद को लिखी। मुझे पत्रा - पेटी में डाला। डाकिए ने मुझे निकाला और निकालकर एक बड़े से थैले में डाला। मैं हो गइर् डाकिए की साइकिल पर सवार और पहुँची डाकघर। वहाँ मुझे थैले से निकाला और निकालकर एक शोर का ठप्पा लगाया। ठप्पा था अगरतला का, जहाँ से मेरा सपफर शुरू हुआ। ठप्पे के बाद पहुँची मैं दूसरे बड़े थैले में। इसमें थीं अनेकों चििòयाँ जो जा रही थीं दिल्ली। डाकघर की लाल गाड़ी से पहुँची मैं रेलवे स्टेशन। वहाँ मैं चढ़ी दिल्ली जानेवाली रेलगाड़ी में। पाँच - छः दिन के लंबे सप़्ाफर के बाद मैं दिल्ली पहुँची। वहाँ के डाकघर के पते के अनुसार पिफर से हुइर् मेरी छँटाइर् और पिफर लगा ठप्पा। इसके बाद डाकिए ने मुझे पहुँचा दिया अहमद के घर। नीचे रीना की चिट्टòाफर चित्रों में दिया गया है। पर ये क्या!सारे़ी का सप्आगे - पीछे हो गए हैं। व्रफम के अनुसार चित्रों में बने गोलों में नंबर डालो। 110 एक चिट्टòòी रीना ने अहमद को लिखी। अब एक चिट्टी तुम अपनी कक्षा में किसी दोस्त को लिखो। चिट्टòी के उफपर दोस्त का नाम शरूर लिखना। सबने चिट्टòी लिख दी, पर डालेंगे किस में? चलो कक्षा के लिए एक पत्रा - पेटी बनाएँ μ 1.एक जूते का खाली डिब्बा लो। 2.डिब्बे पर लाल रंग करो या लाल कागश चिपका दो। 3.अब डिब्बे के ढक्कन को वैफंची से इतना काटो कि चिट्टòेी अंदर जा सवफ। लो हो गइर् तैयार पत्र - पेटी। तुम सब अपनी - अपनी चिट्टòी इसके अंदर डाल दो और इंतशार करो अपनी - अपनी चििòयों का। अब एक बच्चा डाकिया बने। वह पत्रा - पेटी से चििòयाँ निकाले और सब बच्चों को बाँटे। अच्छा लगा दोस्त की चिट्टòी पढ़कर? जैसे तुमने अपने दोस्त को चिट्टòी लिखी वैसे ही तुम्हारे घर पर भी रिश्तेदार और दोस्त चििòòयाँ भेजते होंगे। तुम घर से वुफछ चिियाँ लाओ और देखो। देखा कितनी अलग - अलग प्रकार की चििòयाँ होती हैं। ❉ तुम्हें इन चिियों में क्या अंतर दिखाइर् दिया?ò❉ किन - किन चिियों पर टिकट लगे हैं? ò❉ क्या सभी टिकट एक जैसे हैं? उनमें क्या - क्या अंतर हैं? ❉ क्या तुमने चिियों पर डाकघर का ठप्पा लगा देखा है?òकक्षा में ही अपने मित्रा को चिट्टòी लिखकर वुफछ बताने में बच्चों को मशा आएगा तथा यह उन्हंे पत्रा - लेखन के लिए भी प्रोत्साहित करेगा। असली चििòयाँ देखकर बच्चे बेहतर ढंग से समझ पाएँगे। वुफछ अलग - अलग तरह के टिकट इकट्टòे करके नीचे चिपकाओ। तुम्हारी चिट्टòी तुम्हारे दोस्त के पास वैफसे पहुँची? क्योंकि लिखा था उस पर उसका नाम, उसका पता। ये क्या! रिाया और उसकी आपा चिट्टòी को लेकर क्या बातें कर रहे हंै? रिाया और आपा निकल पड़ी प़्ाफोन करने गाँव की एक दुकान पर। आपा ने प़्ाफोन का नंबर लगाया। दोनों ने नानी से बातें की। दुकानदार को पैसे दिए और खुशी - खुशी घर लौट आइर्।ं❉ तुमने पफोन कहाँ - कहाँ देखा है?़❉ तुम पफोन पर किस - किस से बात करते हो?़❉ तुम्हें चिट्टी लिखना या पफोन करना μ दोनों में से क्या श्यादा अच्छा ़òलगता है? ❉ प़्ाफोन भी अलग - अलग तरह के होते हैं। तुमने जो पफोन देखे हैं उनका़चित्रा बनाओ। ❉ अपना फोन बनाओ ़इसके लिए चाहिए दो माचिस की खाली डिब्िबयाँ या आइसव्रफीम के कप और धागा। दोनों माचिस की डिब्िबयों में छेद करो। एक डिब्बी के छेद में से धगा निकालकर गाँठ बाँध् दो। धगे का दूसरा सिरा दूसरी डिब्बी के छेद में से निकालकर गाँठ बाँधो। बन गया तुम्हारा अपना प़़्ाफोन। अपने एक दोस्त को पफोन का एक सिरा कान में लगाने को कहो और दूसरा तुम अपने मुँह पर रखो। ध्यान रहे कि धागा ख्िांचा रहे कहीं छुए हमने चिट्टò़ò़ी भी लिखी, पफोन भी किया। बताओ कि चिट्टी और पफोन मेें कौन - सी बातें एक जैसी हैं और कौन - सी अलग? स्थानीय परिवेश को देखते हुए बच्चों से संचार के अन्य माध्यम जैसे मोबाइल पफोन, इर् - मेल, पैफक्स आदि पर भी बात की जा सकती है।

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