खाना अपना - अपना मैंने तो दाल - भात बनाया था।कल रात मैंने बाजरे की रोटी और गुड़ मेरे घर तो कल खाना खाया था। ही नहीं बना। बीजी के साथ हम गुरुद्वारे गए थे, वहीं लंगर में दाल - रोटी खाइर् थी। माँ ने खीर - पूरी बनाइर् थी, जो मुझे अच्छी नहीं लगती। इसलिए मैं तो अंडे की भुजिया खाकर सो गइर्। मेरी माँ ने माछ बनाइर् थी। मैंने खूब खाइर्, बहुत अच्छी थी। मेरी माँ जिस घर में काम करती है, वहाँ से नूडल्स लाइर् थी। सबको मशा आया। 36 तुमने कल क्या - क्या खाया? नीचे दी गयी थाली में उनके नाम लिखो। अपनी - अपनी थाली में जो लिखा है, उसे ब्लैकबोडर् पर लिखो। ❉ क्या तुम्हारी कक्षा में कल सबने एक जैसा खाना खाया था? ऐसा क्यों? ❉ चित्रा में ;पृष्ठ 36द्ध तुमने देखा कि एक बच्चे के घर खाना बना ही नहीं। यह किन कारणों से हो सकता है? ❉ क्या तुम्हारे साथ कभी ऐसा हुआ है कि भूख लगी हो और वुफछ भी खाने को नहीं मिला? अगर हाँ तो क्यों? ❉ तुम्हें वैफसे पता चलता है कि भूख लगी है? ❉ जब तुम्हें भूख लगती है तब तुम्हें वैफसा महसूस होता है? बच्चे एक खुले माहौल में अपनी बात बेझिझक कहते हैं। एक - दूसरे के खाने के बारे में सुनकर हम अपने खाने से जुड़ी संवुफचित सोच से हट सकते हैं। इसी से दूसरे लोगों के बारे में हमारी समझ बढ़ेगी। बच्चों से संबंध् बनाना और ऐसा माहौल बनाना शरूरी है जहाँ उनकी बात संवेदनशीलता से सुनी जाए। अपना - अपना खाना विपुल के परिवार में वुफछ लोग कइर् चीशें नहीं खाते, जो वह खाता है। सोचो उसके परिवार के लोग वे चीशें खाते ही नहीं या खा नहीं सकते? आओ विपुल के परिवार के बारे में पढ़ें μ स्वूफल से घर जाते - जाते विपुल ने एक भुट्टððा खरीदा। भुट्टा खाते - खाते विपुल घर में घुसा और माँ से पूछा μ माँ छुटकी कहाँ है? पहले तो मैं उसे ही देखूँगा। माँ ने हँसते हुए कहा μ छुटकी उफपर कमरे में है। विपुल ने दादी का हाथ पकड़कर कहा μ दादी, तुम भी चलो न! माँ ने कहा μ रुको, मैंने बा की रोटी दाल में डालकर रखी है। पहले वे खा तो लें। बेटा आज तो दाल में शक्कर ठीक से डाली है न? यहाँ नागपुर आकर तुम लोग अपना खाना भूलते जा रहे हो μ दादी ने माँ से कहा। माँ ने जवाब दिया μ बा, मंैने चख कर देखी है, बढि़या बनी है। मैं दादी का खाना भी उफपर ले जाता हूँ μ कहते हुए विपुल ने थाली उठाइर् और पफटापफट सीढि़याँ चढ़ गया। दादी जल्दी चढ़ो न! μ विपुल ने पुकारा। दादी ने कहा μ जब मैं तुम्हारी उम्र की थी तब मैं इतनी देर में सीढि़याँ तो क्या, पहाड़ भी चढ़ जाती थी। विपुल ने अंदर जाकर अपना भुट्टðा मामी को थमाया और हाथ धेकर छुटकी को उठा लिया। अचानक छुटकी ने रोना शुरू कर दिया। यह अब ऐसे चुप नहीं होगी, इसे भूख लगी है μ कहते हुए मामी छुटकी को दूध् पिलाने बैठ गइर्। ❉ दादी सीढि़याँ जल्दी क्यों नहीं चढ़ पाइर्?ं❉ दादी को दाल किस तरह से खाना पसंद है? ❉ कहानी में जितने लोग आए, उनमें से कितने लोग भुट्टðा खा पाएँगे? और क्यों? ❉ क्या सभी बूढ़े लोग भुट्टा नहीं खा पाते?ð❉ चार महीने तक छुटकी केवल अपनी माँ का ही दूध् पीएगी। वह ही उसका खाना है। सोचो, क्यों? अपने आस - पास के बड़ांे से पूछकर तालिका भरो μ क्या - क्या खा पाते हैं क्या - क्या नहीं खा पाते बच्चा जवान बूढ़ा यह तो थी वुफछ चीशों को ‘खा सकने’ और ‘नहीं खा सकने’ की बात। क्या हम वे सभी चीशंे खाते हैं जो हम खा सकते हैं? नहीं न! आओ बात करें उन चीशों की जिन्हें हम खाते हैं। ❉ जिन चीशों को तुम श्यादा खाते हो उन पर लगाओ। चावल रागी मक्का बाजरा गेहँू जइर् कप्पा ;टैपिओकाद्ध जौ हमारा भोजन श्यादातर इन्हीं चीशों से बनता है। अलग - अलग जगहों पर इनमें से वुफछ चीशों को अध्िक खाया जाता है। जो चीशें जहाँ आसानी से पैदा होती हंै, वहाँ पर वे श्यादा खाइर् जाती हैं। पता लगाओ, इनमें से कौन - कौन सी चीश कहाँ - कहाँ अध्िक खाइर् जाती है। हम लोग अलग - अलग चीशें तो खाते ही हैं। एक ही चीश का इस्तेमाल करके अलग - अलग भोजन भी बनाते हैं। पता करो और लिखो कि गेहँू और चावल से क्या - क्या बनता है? क्यों, कितनी चीशें लिखीं? इसी तरह अलग - अलग जगहों पर अलग - अलग तरह की दालें, सब्िशयाँ, पफल, माँस आदि खाया जाता है। वुफछ लोग वुफछ पसंद करते हैं, तो वुफछ लोग वुफछ और। अब बात करते हैं ‘पसंद’ और ‘नापसंद’ की। पसंद अपनी - अपनी उन तीन चीशों के नाम लिखो जो तुम्हंे खाने में पसंद हंै, और तीन चीशें जो तुम्हें नापसंद हैं। पसंद नापसंद ♦ क्या तुम्हारी पसंद - नापसंद तुम्हारे परिवार के लोगों से मिलती है? ♦ क्या तुम्हारी पसंद - नापसंद तुम्हारे दोस्त की पसंद - नापसंद से मिलतीहै? आओ अब वुफछ लोगों से बात करें और पता लगाएँ उन्हें क्या खाना अच्छा लगता है। कहाँ क्या खाया जाता है यह आख्िार निभर्र किस पर होता है? दिए गए कारणों मंे से जो तुम्हें सही लगे उस पर ‘9’ लगाओ। इसके अलावा जो कारण और हो सकते हैं वे खाली जगह में लिखो। ♦ वहाँ क्या आसानी से मिलता है। ♦ क्या खरीद सकते हैं। ♦ वहाँ के रीति - रिवाश वैफसे हैं। ♦ ♦ ❉ जो चीशें खाइर्ं जाती हंै उन पर ‘9’ का निशान लगाओ। किसी चीश के बारे में नहीं पता तो श्िाक्षक से पूछ लो। केले के पूफल मुगीर् का अंडा गोभी सैंजन के पूफल अरवी के पत्ते माँस खुंबी चूहा कलौंजी कमल डंडी मछली केकड़ा लाल चींटी बाजरे की रोटी घास पिछले दिन की रोटी मेंढक आँवला नारियल का तेल उफँटनी का दूध् चने की रोटी ❉ खाने की वुफछ ऐसी चीशों के नाम लिखो, जो तुमने कभी नहीं खाइर्,ंलेकिन खाने का मन करता है।

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