Chapter 13 13. सूरज जल्दी आना जी! एक कटोरी, भर कर गोरी धूप हमें भी लाना जी। सूरज जल्दी आना जी। जमकर बैठा यहाँ कुहासा आर-पार न दिखता है। ऐसे भी क्या कभी किसी के घर में कोई टिकता है? सच-सच ज़रा बताना जी। सूरज जल्दी आना जी।। कल की बारिश में जो भीगे कपड़े अब तक गीले हैं। क्या दीवारें, क्या दरवाज़े। सब के सब ही सीले हैं। छोड़ो आज बहाना जी।। ना...ना...ना-ना...ना-ना-जी। सूरज जल्दी आना जी। 81 रंगों की बात कविता में धूप का रंग गोरा बताया गया है। तुम्हें धूप का रंग कैसा लगता है? धूप कब नहीं सुहाती कौन-से मौसम में धूप बिल्कुल नहीं सुहाती। तब तुम धूप से बचने के लिए क्या-क्या करती हो? • छाता लेकर जाते हैं। शब्दों का मेल नीचे दिए शब्दों के आगे चार-चार शब्द लिखे हैं। इन चारों में से एक-एक शब्द अलग है। बताओ कि अलग शब्द कौन-सा है? वह शब्द बाकी सबसे अलग क्यों है? । बारिश - पानी, गीला, बादल, पटना घर - दरवाज़ा, खिड़की, साबुन, दीवार सूरज - धरती, धूप, पसीना, गरमी कटोरी - कड़ाही, तश्तरी, चूल्हा, गिलास 82 अगर ऐसा हो • अगर धूप न हो तो क्या होगा? • अगर हवा न हो तो क्या होगा? • अगर पानी न हो तो क्या होगा? ••••••••••..... • अगर पेड़-पौधे न हों तो क्या होगा? ••••• कौन-सा बहाना सूरज का अभी आने का मन नहीं है। वह बच्चों को क्या बहाने बनाकर मना करेगा? आज 83 कुहासा कुहासे का मतलब है कोहरा या धुंध। कोहरा किस मौसम में छा जाता है? सूख जा भई सूख जा मान लो कल स्कूल से घर आते हुए तुम तेज बारिश में भीग गईं। तुम इन्हें कहाँ सुखाओगी? तुम्हारी ये चीजें कितने समय में सूखेंगी? • कमीज़ • बस्ता । • जूते फ़र्क पहचानो फ़ीता-फीका फ़ीता और फीका दोनों शब्दों में अंतर है न! इन्हें बोला भी अलग-अलग तरह से जाता है। पहले फ्री में बिंदी लगी है जबकि दूसरे फी में बिंदी नहीं है। नीचे ऐसे कुछ और शब्द दिए गए हैं। उन्हें बोल और सुनकर अंतर समझो। दोनों तरह का एक-एक शब्द खुद भी जोड़ो। काफ़ी फिर सफ़ेद फैलना तारीफ़ फटना

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