उद्देश्य इस एकक के अध्ययन के पश्चात् आप - ऽ आवतर् सारणी में क.तथा .िब्लाॅक तत्वों की स्िथति जान पायेंगेऋ ऽ संक्रमण ;क.ब्लाॅकद्ध तथा आंतरिक संक्रमण ;.िब्लाॅकद्ध तत्वों के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास जान सवेंफगेऋ ऽ इलैक्ट्रोड विभव के संदभर् में विभ्िान्न आॅक्सीकरण अवस्थाओं के तुलनात्मक स्थायित्व के महत्त्व को समझ सकेंगेऋ ऽ ज्ञ ब्त व् तथा ज्ञडदव् जैसे महत्वपूणर् यौगिकों2274के विरचन, गुणों, संरचनाओं तथा उपयोगों का वणर्न कर सकेंगेऋ ऽ क.तथा .िब्लाॅक के तत्वों के सामान्य गुणों तथा इनमें क्षैतिज प्रवृिा व वगर् की सामान्य प्रवृिा के बारे में समझ सवेंफगेऋ ऽ .िब्लाॅक के तत्वों के गुणों का वणर्न कर सवेंफगे तथा लैन्थेनाॅयडों एवं एक्िटनाॅयडों के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास, आॅक्सीकरण अवस्था एवं रासायनिक व्यवहार का तुलनात्मक परिकलन कर सवेंफगे। फ्आयरन, काॅपर, सिल्वर और गोल्ड - सभी संक्रमण तत्वों में आते हैं जिन्होंने मानव सभ्यता के विकास में महत्वपूणर् भूमिका निभाइर् है। आंतरिक संक्रमण तत्व जैसे ज्ीए च्ं तथा न् आधुनिक काल में नाभ्िाकीय ऊजार् के श्रेष्ठ ड्डोेत सि( हो रहे हैं।य् आवतर् सारणी के क.ब्लाॅक में वगर् 3 से 12 के तत्व आते हैं, जिसमें चारों दीघर् आवतो± में क कक्षक भरे जाते हैं। .िब्लाॅक के तत्व वे हैं जिनमें बाद के दो दीघर् आवतो± में 4 ितथा 5 िकक्षक उत्तरोत्तर भरे जाते हैंऋ ये तत्व वगर् 3 के औपचारिक सदस्य हैं जिसमें से इन्हें पृथक कर दिया गया है तथा ये आवतर् सारणी में एक पृथक .िब्लाॅक बनाते हैं। क.एवं .िब्लाॅक के तत्वों को क्रमशः संक्रमण तत्व एवं आंतरिक संक्रमण तत्व भी वफहते हैं। संक्रमण तत्वों की मुख्य रूप से तीन श्रेण्िायाँ हैं, 3क श्रेणी ;ैब से र्दद्ध, 4क श्रेणी ;ल् से ब्कद्ध तथा 5क श्रेणी ;स्ं से भ्ह, ब्म से स्न को छोड़करद्ध चैथी 6क श्रेणी, जो ।ब से प्रारंभ होती है, अभी अपूणर् है। आंतरिक संक्रमण तत्वों की दो श्रेण्िायाँ ;4 ितथा 5द्धि क्रमशः लैन्थेनाॅयड तथा ऐक्िटनाॅयड कहलाती हैं। सुनिश्िचत रूप से एक संक्रमण तत्व वह है, जिसकी मूल ;आद्यद्ध अवस्था अथवा किसी अन्य आॅक्सीकरण अवस्था में उसके क कक्षक अपूणर् भरित हों। वगर् 12 के िांक, वैफडमियम तथा मक्यर्ूरी में उनकी मूल अवस्था तथा उनकी सामान्य आॅक्सीकरण अवस्था में पूणर् क 10 विन्यास है और इसीलिए इन्हें संक्रमण धतु नहीं माना जाता। पिफर भी, तीन संक्रमण श्रेण्िायों के अंतिम सदस्य होने के कारण इनके रसायन का अध्ययन संक्रमण धतुओं के रसायन के साथ किया जाता है। इनके परमाणुओं में आंश्िाक भरित क.अथवा .िकक्षकों की उपस्िथति के कारण संक्रमण तत्वों तथा उनके यौगिकों का अध्ययन उन्हें मुख्य वगो± के तत्वों से अलग कर देता है। प्िाफर भी संयोजकता का सामान्य सि(ांत जो मुख्य समूहों के तत्वों पर लागू होता है, संक्रमण तत्वों पर भी सपफलतापूवर्क प्रयुक्त किया जा सकता है। अनेक बहुमूल्य धतुएं जैसे सिल्वर, गोल्ड तथा प्लैटिनम और औद्योगिक रूप से महत्वपूणर् धतुएं जैसे आयरन, काॅपर तथा टाइटेनियम सभी संक्रमण धातुएं हैं। 8.1 आवतर् सारणी में स्िथति 8.2 क - ब्लाॅक तत्वों के ेे इलेक्ट्राॅनिक विन्यास इस एकक में, संक्रमण तत्वों के परिचय के साथ, हम उनके इलेक्ट्राॅनिक विन्यास, उपलब्ध्ता तथा सामान्य गुणों पर विचार करेंगे जिसमें प्रथम पंक्ित ;3कद्ध के तत्वों के गुणों में प्रवृिा पर अिाक ध्यान देंगे तथा वुफछ प्रमुख यौगिकों के विरचन व गुणों का अध्ययन करेंगे। तत्पश्चात आंतरिक संक्रमण धातुओं के सामान्य पहलुओं जैसे इलेक्ट्राॅनिक विन्यास, आॅक्सीकरण अवस्थाएं तथा रासायनिक अभ्िाियाशीलता पर विचार करेंगे। संक्रमण तत्व ;क.ब्लाॅकद्ध आवतर् सारणी का बड़ा मध्य भाग क.ब्लाॅक ने घेरा हुआ है, जिसके दोनों ओर े.तथा च.ब्लाॅक स्िथत हैं। े.व च.ब्लाॅक तत्वों के मध्य स्िथत होने के कारण ही क.ब्लाॅक तत्वों को ‘संक्रमण तत्व’ नाम दिया गया है। इनके उपांतिम ऊजार् स्तरों के क.कक्षकों में इलेक्ट्राॅन भरे जाते हैं तथा इस प्रकार संक्रमण धतुओं की तीन पंक्ितयाँ अथार्त् 3कए 4क व 5क प्राप्त होती हैं। चैथी पंक्ित ;6कद्ध अभी तक अपूणर् है। संक्रमण तत्वों की यह श्रेण्िायाँ सारणी 8ण्1 में दशार्यी गइर् है। 1दृ10 1दृ2सामान्य रूप से इन तत्वों का इलेक्ट्राॅनिक विन्यास ;ददृ1द्धक दे है। ;ददृ1द्ध आंतरिक क कक्षकों को इंगित करता है, जिनमें एक से दस तक इलेक्ट्राॅन हो सकते हैं तथा बाह्यतम दे कक्षक में एक अथवा दो इलेक्ट्राॅन हो सकते हैं। परंतु ;ददृ1द्धक तथा दे कक्षकों की ऊजार्ओं में बहुत कम अंतर के कारण इस सामान्य नियम के अनेक अपवाद हैं। पुनश्चः अधर् एवं पूणर् भरित कक्षकों का स्थायित्व अपेक्षाकृत अध्िक होता है। इसका परिणाम 3क श्रेणी के संक्रमण तत्वों, ब्त तथा ब्न के इलेक्ट्राॅनिक विन्यासों में प्रति¯बबित होता है। 4251उदाहरण के लिए ब्त में 3क 4े के स्थान पर 3क 4े विन्यास है। 3क व 4े कक्षकों की ऊजार्ओं में अंतर इतना कम है कि वह 4े इलेक्ट्राॅन के 3क कक्षक में प्रवेश को रोक 92101नहीं पाता। इसी प्रकार ब्न में इलेक्ट्राॅनिक विन्यास 3क 4े न होकर 3क 4े है। संक्रमण तत्वों के बाह्य इलेक्ट्राॅनिक विन्यास सारणी 8ण्1 में दिए गए हैं। सारणी 8ण्1 - संक्रमण तत्वों के बाह्य इलेक्ट्राॅनिक विन्यास ;मूल अवस्थाद्ध र्दए ब्क तथा भ्ह के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास, सामान्य सूत्रा ;द.1द्धक 10दे 2 से प्रद£शत किए जाते हैं। इन तत्वों की मूल अवस्थाओं तथा सामान्य आॅक्सीकरण अवस्थाओं में इनके कक्षक पूणर् भरित होते हैं। इसीलिए इन्हें संक्रमण तत्वों की श्रेणी में नहीं माना जाता। संक्रमण तत्वों के क कक्षक अन्य कक्षकों ;े व चद्ध की अपेक्षा परमाणु की सतह पर अध्िक प्रक्ष्िाप्त होते हैं, अतः वे अपने परिवेश से अध्िक प्रभावित होते हैं तथा इसी प्रकार अपने चारों ओर के परमाणुओं अथवा अणुओं को भी प्रभावित करते हैं। वुफछ पहलुओं में, एक से विन्यास क द ;दत्र1दृ9द्ध वाले आयनों में समान चुंबकीय एवं इलेक्ट्राॅनिक गुण पाए जाते हैं। आंश्िाक रूप से भरित क कक्षकों के कारण ये तत्व वुफछ अभ्िालक्षण्िाक गुण दशार्ते हैं, जैसे - अनेक आॅक्सीकरण अवस्थाएं, रंगीन आयनों का बनना तथा अनेक प्रकार के लिगन्डों के साथ संवुफल निमार्ण आदि। संक्रमण धतुएं तथा इनके यौगिक उत्प्रेरकी गुण व अनुचुंबकीय व्यवहार भी दशार्ते हैं। इन सभी विशेषताओं की विवेचना विस्तार से इस एकक में बाद में की गइर् है। मुख्य समूहों के तत्वों के विपरीत संक्रमण तत्वों के गुणों में क्षैतिज समानताएं अिाक पाइर् जाती हैं। तथापि, वुफछ वगर् समानताएं भी पाइर् जाती हैं। हम पहले सामान्य अभ्िालक्षणों तथा उनकी क्षैतिज पंक्ित ;प्रमुखतः 3क पंक्ितद्ध में प्रवृिा का अध्ययन करेंगे, तत्पश्चात् वुफछ वगर् समानताओं पर विचार करेंगे। 8.3 स्।ंक्रमण तत्वों (क - ब्लाॅक) केेे सामान्य गुण लगभग सभी संक्रमण तत्व अभ्िाधत्िवक गुण, जैसे उच्च तनन सामथ्यर् ;जमदेपसम ेजतमदहजीद्ध, तन्यता ;कनबजपसपजलद्ध, वधर्नीयता ;उंससमंइपसपजलद्ध, उच्च तापीय तथा विद्युत् चालकता एवं धत्िवक चमक दशार्ते हैं। र्दए ब्कए भ्ह तथा डद जैसे अपवादों को छोड़कर सामान्य ताप पर इनकी एक या अिाक प्रारूपिक धत्िवक संरचनाएं होती हैं। संक्रमण धतुओं की विभ्िान्न जालक संरचनाओं को आगे सारणी में दिया गया है। संक्रमण धतुओं की जालक संरचनाएं ;इबब त्र काय वेंफदि्रत घनीयय ीबच त्र षट्कोणीय निबिडतम संवुफलनय बबच त्र घनीय निबिड संवुफलनय ग् त्र एक विशेष धात्िवक संरचनाद्धण् 8.3.1 भौतिक गुण संक्रमण धतुएं ;िांक, कैडमियम तथा मक्यूर्री के अपवादों के साथद्ध अतिकठोर तथा अल्प वाष्पशील होती हैं। इनके गलनांक व क्वथनांक उच्च होते हैं। चित्रा 8ण्1 में 3कए 4क तथा 5क संक्रमण धतुओं के गलनांक दिए गए हैं। उच्च गलनांक का कारण अंतरापरमाण्िवक धात्िवक बंधन में दे इलेक्ट्राॅन के अतिरिक्त ;ददृ1द्धक कक्षकों के अिाक इलेक्ट्राॅनों की भागीदारी है। केवल डद तथा ज्ब के अपवादों को छोड़कर किसी भी श्रेणी में धतुओं के गलनांक क 5 विन्यास पर अिाकतम होते हैं तथा बढ़ते हुए परमाणु क्रमांकों के साथ गलनांकों में नियमित रूप से कमी आती है। इनकी कणन एन्थैल्पी ;मदजींसचल व िंजवउपेंजपवदद्ध के मान उच्च होते हैं जैसा कि चित्रा 8ण्2 में दशार्या गया है। प्रत्येक श्रेणी के लगभग मध्य में उच्चतम मान इस तथ्य को दशार्ता है कि प्रबल अंतरापरमाण्िवक अन्योन्यिया के लिए प्रति क कक्षक एक अयुगलित इलेक्ट्राॅन का होना विशेष रूप से अनुवूफल है। सामान्यतः चित्रा 8.1 - संक्रमण तत्वों के गलनांकों की प्रवृिायाँ चित्रा 8.2 - संक्रमण तत्वों की कणन एन्थैल्पी की प्रवृिायाँ 8.3.2 संक्रमण धतुओं के परमाण्िवक एवं आयनिक आकारों में परिवतर्न संयोजकता इलेक्ट्राॅनों की संख्या जितनी अध्िक होगी, उतना ही प्रबल परिमाणी आबंधन होगा। चूँकि धतुओं के मानक इलैक्ट्रोड विभव के निधर्रण में कणन एन्थैल्पी एक महत्वपूणर् कारक है। अतः बहुत उच्च कणन एन्थैल्पी ;अथार्त बहुत उच्च क्वथनांकद्ध वाली धतुओं की प्रवृिा अभ्िाियाओं में उत्कृष्ट रहने की होती है। ;इलैक्ट्रोड विभव के लिए बाद में देखें।द्ध चित्रा 8.2 के आधर पर एक अन्य सामान्य नियम निकाला जा सकता है कि प्रथम संक्रमण श्रेणी के संगत तत्वों की तुलना में द्वितीय तथा तृतीय श्रेणी के तत्वों की कणन एन्थैल्पी के मान अध्िक होते हैंऋ यह भारी संक्रमण धातुओं के यौगिकों में धतु - धतु आबंधों के बहुधा बनने में एक महत्वपूणर् कारक है। सामान्यतः श्रेणी में बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के साथ समान आवेश वाले आयनों की त्रिाज्याओं में उत्तरोत्तर ”ास होता है। इसका कारण है कि जब भी नाभ्िाकीय आवेश में वृि होती है, अतिरिक्त इलेक्ट्राॅन हर बार क आॅबिर्टल में प्रवेश करता है। पुनः स्मरण करें कि क इलेक्ट्राॅन का आवरण प्रभाव ;ेबतममदपदह ममििबजद्ध कम प्रभावशाली होता है, अतः नाभ्िाकीय आवेश तथा बाह्यतम इलेक्ट्राॅन के बीच नेट वैद्युत आवफषर्ण में वृि हो जाती है जिससे आयनी त्रिाज्या का मान घट जाता है। इसी प्रकार की प्रवृिा किसी श्रेणी में परमाणु त्रिाज्याओं में भी देखी जाती है। परंतु श्रेणी में त्रिाज्याओं के मानों में यह परिवतर्न बहुत थोड़ा होता है। एक रोचक तथ्य प्रकाश में तब आता है जब किसी विशेष संक्रमण श्रेणी के तत्वों के आकार की तुलना, दूसरी श्रेणी के संगत तत्वों के आकार से की जाती है। चित्रा 8.3 के वक्र दशार्ते हैं कि प्रथम संक्रमण श्रेणी ;3कद्ध के तत्वों की तुलना में द्वितीय संक्रमण श्रेणी ;4कद्ध के संगत तत्वों का आकार बड़ा है परंतु तृतीय संक्रमण श्रेणी ;5कद्ध के तत्वों की त्रिाज्याएं लगभग वही हैं जो कि द्वितीय संक्रमण श्रेणी के संगत तत्वों की हैं। यह परिघटना 4 िकक्षकों के बीच में आने के कारण होती है जिनमें इलेक्ट्राॅनों की आपूतिर्, 5क श्रेणी के तत्वों के क कक्षक में आपूतिर् प्रारंभ होने से पहले होनी चाहिए। 5क कक्षकों के पूवर् 4 िकक्षकों में इलेक्ट्राॅनों की आपूतिर् के कारण परमाणु त्रिाज्याओं में नियमित ”ास होता है, जिसे लैन्थेनाॅयड आवंुफचन ;स्ंदजींदवपक ब्वदजतंबजपवदद्ध कहते हैं। जो आवश्यक रूप से बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के साथ परमाणवीय आकार में हुइर् संभावित वृि की क्षतिपूतिर् करता है। लैन्थेनाॅयड आवंुफचन के समग्र प्रभाव के कारण द्वितीय एवं तृतीय संक्रमण श्रेणी के अनुरूप तत्वों की त्रिाज्याएं समान हो जाती हैं ;उदाहरण र्तए 160 चउ तथा भ्एि 159 चउद्ध तथा इनके भौतिक एवं रासायनिक गुणों में अत्यध्िक समानता पाइर् जाती है, जो सामान्य जातिगत संबंधों के आधर पर अपेक्ष्िात समानता से भी बहुत अध्िक होती है। लैन्थेनाॅयड आवंुफचन के लिए उत्तरदायी कारक लगभग वही है जो एक सामान्य संक्रमण श्रेणी के लिए देखा जाता है तथा समान कारण के लिए उत्तरदायी है, अथार्त् एक ही समुच्चय के कक्षकों में एक इलेक्ट्राॅन द्वारा दूसरे पर अपूणर् आवरण प्रभाव। परंतु एक 4 िइलेक्ट्राॅन द्वारा दूसरे पर आवरण प्रभाव, एक क इलेक्ट्राॅन द्वारा दूसरे पर आवरण प्रभाव की तुलना में कम होता है तथा जैसे - जैसे एक श्रेणी में नाभ्िाकीय आवेश में वृि होती है, सभी 4 िद कक्षकों के आकार में चित्रा 8.3 - संक्रमण तत्वों की परमाणु त्रिाज्याओं में प्रवृिायाँ नियमित ”ास होता है। धत्िवक त्रिाज्या में ”ास के साथ परमाण्िवक द्रव्यमान में वृि के परिणामस्वरूप इन तत्वों के घनत्व में सामान्यतः वृि होती है। इस प्रकार की महत्वपूणर् घनत्व वृि टाइटेनियम ;र्त्र22द्ध से काॅपर ;र्त्र29द्ध तक देखने को मिलती है ;सारणी 8ण्2द्ध। सारणी 8ण्2 - प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास एवं वुफछ अन्य गुण 8.3.3 आयनन एन्थैल्पी आंतरिक क कक्षकों के भरने के साथ नाभ्िाकीय आवेश में वृि होने के कारण श्रेणी में बाएं से दाहिनी ओर बढ़ने पर संक्रमण श्रेणी के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी में वृि होती है, यद्यपि इस वृि में कइर् छोटी - छोटी विभ्िान्नताएं भी पाइर् जाती हैं। सारणी 8ण्2 में प्रथम संक्रमण श्रेणी की तत्वों की प्रथम तीन आयनन एन्थैल्िपयों के मान दिए गए हैं। इन मानों से स्पष्ट है कि इन तत्वों की क्रमिक एन्थैल्पी में वृि वैसी तीव्र नहीं होती जैसी कि मुख्य वगर् के तत्वों में। हालाँकि सामान्यतः प्रथम आयनन एन्थैल्पी के मान में वृि होती है परंतु उत्तरोत्तर तत्वों की द्वितीय एवं तृतीय आयनन एन्थैल्पी के मानों में हुइर् वृि का परिमाण सामान्यतः बहुत अध्िक होता है। 3क धतुओं की प्रथम आयनन एन्थैल्पी की अनियमित प्रवृिा का यद्यपि कोइर् खास रासायनिक महत्व नहीं है पिफर भी यह स्पष्टीकरण दिया जा सकता है कि एक इलेक्ट्राॅन पृथक करने से 4े तथा 3क कक्षकों की आपेक्ष्िाक ऊजार्ओं में परिवतर्न होता है। इस प्रकार एकध्न आयन का विन्यास क द होता है तथा 4े में इलेक्ट्राॅन नहीं होते। इस प्रकार, इलेक्ट्राॅनों की संख्या में वृि और े इलेक्ट्राॅनों के क कक्षकों में स्थानांतरण के पफलस्वरूप वुफछ विनियम उफजार् के साथ आयनन होने पर उफजार् का पुनगर्ठन होता है। सामान्यतः इनके मानों में प्रभावी नाभ्िाकीय आवेश में वृि के कारण, बढ़ने की अपेक्ष्िात प्रवृिा होती है। यद्यपि, क विन्यास में किसी भी परिवतर्न की अनुपस्िथति में क्रोमियम के लिए मान कम होता है और र्द के लिए मान उच्च होता है क्योंकि यह 4े स्तर से आयनन को प्रदश्िार्त करता है। इन धतुओं की निम्नतम आॅक्सीकरण अवस्था ़2 है। गैसीय अणुओं से ड2़ आयन बनाने हेतु, कणन एन्थैल्पी के साथ - साथ प्रथम एवं द्वितीय आयनन उफजार्ओं की भी आवश्यकता होती है। प्रमुख पद द्वितीय आयनन एन्थैल्पी है, जिसका मान ब्त और ब्न के लिए अप्रत्याश्िात रूप से उच्च है, जिनमें ड़ आयनों के क 5 तथा क 10 विन्यास विदरित होने के कारण विनिमय उफजार् का महत्वपूणर् ”ास होता है। र्द के लिए संगत मान कम होता है क्योंकि आयनन हेतु एक इलेक्ट्राॅन निकलता है जिससे स्थायी क 10 विन्यास प्राप्त होता है। तृतीय आयनन एन्थैल्पी में प्रवृिा 4े कक्षक के कारक द्वारा जटिल नहीं बनती और 5 2़ 102़ क ;डद द्ध तथा क ;र्द द्ध से एक इलेक्ट्राॅन हटाने में अध्िक कठिनाइर् प्रदश्िार्त होती है, जो सामान्य वृि प्रवृिा जैसी है। सामान्यतः, तृतीय आयनन एन्थैल्पी पयार्प्त उच्च हैं और डद 2़ तथा थ्म 2़ के मानों में सुस्पष्ट अंतराल है। साथ ही काॅपर, जिंक और निवैफल के उच्च मान इंगित करते हैं कि क्यों इन तत्वों की ़2 से उच्च आॅक्सीकरण अवस्थाएं प्राप्त करना कठिन है। यद्यपि आयनन एन्थैल्िपयाँ, आॅक्सीकरण अवस्थाओं के तुलनात्मक स्थायित्व से संबंिात वुफछ मागर्दशर्न देती हैं, पिफर भी यह समस्या बहुत जटिल है और तात्कालिक व्यापकीकरण हेतु संशोध्नीय नहीं है। 8.3.4 आॅक्सीकरण संक्रमण तत्वों के विश्िाष्ट लक्षणों में से एक लक्षण इन तत्त्वों द्वारा यौगिकों में कइर् अवस्था आॅक्सीकरण अवस्थाएं दशार्ना है। सारणी 8ण्3 में प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्त्वों की सामान्य आॅक्सीकरण अवस्थाओं को सूचीब( किया गया है। सारणी 8ण्3 - प्रथम संक्रमण श्रेणी की धतुओं की आॅक्सीकरण अवस्थाएं ;अति सामान्य आॅक्सीकरण अवस्थाओं को मोटे टाइप में दिखाया गया है।द्ध अत्यिाक संख्या में आॅक्सीकरण अवस्थाएं दशार्ने वाले तत्व संक्रमण श्रेणी के मध्य में या इसके निकट स्िथत हैं। उदाहरणाथर्, मैंगनीज ़2 से ़7 तक की सभी आॅक्सीकरण अवस्थाएं दशार्ता है। श्रेणी के दोनों किनारों पर आॅक्सीकरण अवस्थाओं की संख्या कम पाइर् जाती है। इसका कारण तत्वों ;ैबए ज्पद्ध में परित्याग या साझेदारी के लिए कम इलेक्ट्राॅनों की उपलब्धता अथवा तत्वों के संयोजकता कोश में क इलेक्ट्राॅनों की अध्िक संख्या ;परिमाणतः भागीदारी के लिए कम कक्षकों की उपलब्ध्ताद्ध ख्ब्नए र्द, है। इस प्रकार प्रथम श्रेणी के आरंभ में स्वैफन्िडयम ;प्प्द्ध वास्तविकता में अज्ञात है तथा ज्प;प्प्द्ध या ज्प;प्प्प्द्ध की तुलना में ज्प;प्टद्ध अध्िक स्थायी है। श्रेणी के दूसरे छोर पर िांक की एकमात्रा आॅक्सीकरण अवस्था ़2 है ;क इलेक्ट्राॅनों की भागीदारी नहीं हैद्ध। सामान्य स्थायित्व वाली अध्िकतम आॅक्सीकरण अवस्थाओं की संख्या मैंगनीज तक े तथा क कक्षकों में उपस्िथत इलेक्ट्राॅनों प्ट ट ़ टप् 2− टप्प् −की संख्या के योग के बराबर है। ;ज्प व्2ट व्2एब्त व्4 डद व्4 द्ध। इसके पश्चात् तत्वों की उच्च आॅक्सीकरण अवस्थाओं के स्थायित्व में आकस्िमक कमी आ जाती है प्प्एप्प्प्प्प्एप्प्प्प्प् प्एप्प्जिसका अनुगमन करने वाली अभ्िालक्षण्िाक स्पीशीश हैं ;थ्मए ब्वए छप ए ब्न तथा र्दप्प्द्ध। परिवतर्नीय आॅक्सीकरण अवस्थाएं जो कि संक्रमण तत्वों की एक विशेषता हैं, का कारण है, अपूणर् क कक्षकों में इलेक्ट्राॅनों का इस प्रकार से प्रवेश करना, जिससे इन तत्वों की प्प् प्प्प् प्ट टआॅक्सीकरण अवस्थाओं में एक का अंतर बना रहता है। इसका उदाहरण, ट एट एट एट हैं। उल्लेखनीय है कि असंक्रमण तत्वों ;दवद.जतंदेपजपवद मसमउमदजेद्ध में, विभ्िान्न आॅक्सीकरण अवस्थाओं में सामान्यतः दो का अंतर पाया जाता है। क.ब्लाॅक तत्त्वों के वगो± ;वगर् 4 से 10द्ध की आॅक्सीकरण अवस्थाओं की परिवतर्नशीलता में एक रोचक तथ्य देखने को मिलता है। च.ब्लाॅक में ;अिय युगल प्रभाव के कारणद्ध भारी सदस्यों द्वारा निम्न आॅक्सीकरण अवस्थाएं बनना अनुवूफल होता है, जबकि क.ब्लाॅक में इसका विपरीत सही है। उदाहरणाथर् - वगर् 6 में डव;टप्द्ध तथा ॅ;टप्द्ध का स्थायित्व ब्त;टप्द्ध से अध्िक हैं। अतः अम्लीय माध्यम में ब्त;टप्द्ध, डाइक्रोमेट के रूप में प्रबल आॅक्सीकारक है जबकि डवव्3 एवं ॅव्3 नहीं। निम्न आॅक्सीकरण अवस्थाएं तब पाइर् जाती है जब एक संवुफल यौगिक में ऐसे लिगन्ड हों जिनमें σ - आबंधन के अतिरिक्त π - ग्राही गुण भी पाए जाते हों। उदाहरणाथर् - छप;ब्व्द्ध4 और थ्म;ब्व्द्ध5ए में निवैफल और आयरन की आॅक्सीकरण अवस्था शून्य है। 8.3.5 ड2़ध्ड मानक इलैक्ट्रोड विलयन में ठोस धतु के ड 2़ आयन में रूपांतरण से संबंध्ित विभवों में प्रवृिायाँ ऊष्मा - रासायनिक प्राचल और मानक इलैक्ट्रोड विभव सारणी 8ण्4 में दिए गए हैं। सारणी 8ण्4 के मानों का उपयोग करके परिकलित मानों तथा म् टके प्रेक्ष्िात मानों के मध्य तुलना को चित्रा 8ण्4 में दशार्या गया है। काॅपर का घनात्मक म् टके कारण अद्वितीय व्यवहार, इसकी अम्लों से भ्2 मुक्त करने की असमथर्ता का स्पष्टीकरण देता है। केवल आॅक्सीकारक अम्ल ;नाइटिªक अम्ल और गरम सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्लद्ध ही ब्न के साथ अभ्िािया करते हैं और ये अम्ल अपचित हो जाते हैं। ब्न;ेद्ध के ब्न 2़ ;ंुद्ध में रूपांतरण के लिए आवश्यक उच्च ऊजार्, इसकी जलयोजन एन्थैल्पी से संतुलित नहीं हो पाती। श्रेणी में म् टके कम ट्टणात्मक मानों की सामान्य प्रवृिा धतुओं के प्रथम एवं द्वितीय आयनन एन्थैल्पी के योग में सामान्य वृि से संबंध्ि चित्रा 8.4 - ज्प से र्द तक के तत्त्वों के ;ड2़→डवद्ध मानक इलैक्ट्रोड विभवों के प्रेक्ष्िात तथा त है। यह जानना रोचक है कि डदए छप तथा र्द के म् टके मान सामान्य प्रवृिा द्वारा आपेक्ष्िात मानों से अिाक ट्टणात्मक होते हैं। परिकलित मान सारणी 8ण्4 - प्रथम श्रेणी के संक्रमण तत्वों के ऊष्मा - रासायनिक मान ;ाश्र उवस.1द्ध और ड;प्प्द्ध से ड में अपचयन के मानक इलैक्ट्रोड विभवों के मान तत्त्व ;Μद्ध Δ भ्ट ;Μद्ध Δप भ्ट टट2़टभ्;डद्धम्ध्टΔपΔ 12ीलकं 8.3.6 मानक इलैक्ट्रोड विभवों ड3़ध्ड2़ में प्रवृिायाँ 8.3.7 उच्चतम आॅक्सीकरण अवस्थाओं के स्थायित्व की प्रवृिायाँ 2़ 2़10डद में अध्र् - भरित क.कक्षक का स्थायित्व और र्द में पूणर्भरित क विन्यास इनके म् टमानों से संबंिात है, जबकि छप का म् टइसके उच्चतम ट्टणात्मक Δीलकभ् ट से संबंिात है। 3़ 2़सारणी 8.2 में म् ट ;डध्ड द्ध के मानों का अवलोकन इनकी परिवतर्नशील प्रवृिायों को दशार्ता है। ैब के लिए इसका निम्न मान, ैब3़ के स्थायित्व को दशार्ता है जिसका विन्यास अिय गैस विन्यास है। र्द के लिए इसके उच्चतम मान का कारण र्द2़ के स्थायी क 10 विन्यास से एक इलेक्ट्राॅन का हटना है। डद के लिए अपेक्षावृफत उच्च मान दशार्ता है कि 5 3़5 ड2़ ;क द्ध विशेष रूप से स्थायी है जबकि थ्म के अपेक्षावृफत निम्न मान, थ्म ;क द्ध केद अतिरिक्त स्थायित्व को दशार्ते हैं। ट के अपेक्षावृफत निम्न मान ट2़ के स्थायित्व से संबंिात हैं। ;अध्र्भरित ज2ह स्तर, एकक 9द्ध। सारणी 8.5 संक्रमण धतुओं की 3क श्रेणी के स्थायी हैलाइडों को दशार्ती है। उच्चतम आॅक्सीकरण संख्या ज्पग्4 ;टेट्राहैलाइडोंद्ध, टथ्5 और ब्तथ्6 में प्राप्त होती हैं। डद की ़7 आॅक्सीकरण अवस्था सरल हैलाइड में प्रदश्िार्त नहीं होती परंतु डदव्3थ् ज्ञात है और डद के पश्चात् सिवाय थ्मग्3 और ब्वथ्3 के कोइर् भी धतु ट्राइहैलाइड नहीं बनाता। अध्िकतम आॅक्सीकरण अवस्था को स्थायित्व प्रदान करने की फ्रलुओरीन की क्षमता या तो इसकी उच्च जालक उफजार् के कारण होती है, जैसे कि ब्वथ्3 के संदभर् में या उच्च सहसंयोजक यौगिकों जैसे टथ्5 और ब्तथ्6 में, उच्च आबंध एन्थैल्पी के कारण होती है। सारणी 8ण्5 - 3क धातुओं के हैलाइडों के सूत्रा यहाँ ग् त्र थ् → प्य ग्प् त्र थ् → ठतय ग्प्प् त्र थ्ए ब्प्य ग्प्प्प् त्र ब्प् → प् यद्यपि टथ्5 केवल टट को प्रद£शत करता है, अन्य हैलाइड जलअपघटन पर आॅक्सोहैलाइड, टव्ग्3 देते हैं। फ्रलुओराइडों का दूसरा गुण, निम्न आॅक्सीकरण अवस्था में इनका अस्थायित्व है, जैसे - टग्2;ग्त्रब्सएठत और प्द्ध में और यही ब्नग् के लिए लागू होता प्प् 2़दृहै। दूसरी ओर आयोडाइड के अतिरिक्त ब्न के सभी हैलाइड ज्ञात हैं। यहाँ ब्न ए प् को प्2 में आॅक्सीकृत करता है - 2़−2ब्न ़ 4प् → ब्न प् ;ेद्ध़ प्22 2 तथापि अनेक ब्ऩ यौगिक जलीय विलयन में अस्थायी हैं तथा निम्नानुसार असमानुपातित होते हैं - ़ 2़2ब्न → ब्न ़ ब्न ब्न2़;ंुद्ध का स्थायित्व ब्ऩ;ंुद्ध से अध्िक होने का कारण इसकी जलयोजन एन्थैल्पी Δीलकभ् ट का ब्न2़ की तुलना में बहुत अध्िक ट्टणात्मक मान होना है, जो काॅपर की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी की क्षतिपू£त से अध्िक है। आॅक्सीजन की उच्चतम आॅक्सीकरण अवस्था को स्थायित्व प्रदान करने की क्षमता आॅक्साइडों में प्रद£शत होती है। आॅक्साइडों में उच्चतम आॅक्सीकरण संख्या ;सारणी 8.6द्ध उनकी वगर् संख्या से मेल खाती है और यह ैब2व्3 से डद2व्7 तक देखने को मिलती है। वगर् 7 के बाद, थ्म के उच्च आॅक्साइड थ्म2व्3 से आगे ज्ञात नहीं है। यद्यपि क्षारकीय माध्यम में पेफरेट ;टप्द्ध अवस्था में, ;थ्मव्4द्ध2दृ, आयन बनते हैं परंतु यह शीघ्र ही थ्म2व्3 ट़प्ट व व्2 में विघटित हो जाते हैं। आॅक्साइड के अतिरिक्त, आॅक्सोवैफटायन ट को टव्2ए ट 2़ प्ट 2़को टव् तथा ज्प को ज्पव् के रूप में स्थायित्व प्रदान करते हैं। फ्रलुओरीन की अपेक्षा आॅक्सीजन की इन उच्च आॅक्सीकरण अवस्थाओं को स्थायित्व प्रदान करने की क्षमता अध्ि क होती है। इस प्रकार डद का उच्चतम फ्रलुओराइड डदथ्4 है जबकि उच्च आॅक्साइड डद2व्7 है। आॅक्सीजन की धतुओं के साथ बहुआबंध् बनाने की क्षमता से इसकी उत्कृष्टता को समझा जा सकता है। सहसंयोजक आॅक्साइड डद2व्7 में, प्रत्येक डद परमाणु, चतुष्पफलकीय रूप से एक डद.व्.डद सेतु सहित व् परमाणुओं से घ्िारा रहता है। टअए टप्टटप् टप्प्ब्त ए डद ए डद और डद के लिए चतुष्पफलकीय ख्डव्4,ददृ आयन ज्ञात है। सारणी 8ण्6 - 3क धतुओं के आॅक्साइड ’ मिश्रित आॅक्साइड 8.3.8 रासायनिक अभ्िाियाशीलता एवं म्ट मान संक्रमण धतुओं की रासायनिक अभ्िाियाशीलता व्यापक रूप से परिवतर्नशील है। बहुत - सी धतुएं पयार्प्त विद्युतध्नीय हैं तथा खनिज अम्लों में विलेय हैं, जबकि वुफछ धतुएं ‘उत्कृष्ट’ हैं, जो कि साधरण अम्लों द्वारा प्रभावित नहीं होती। काॅपर धतु को छोड़कर प्रथम श्रेणी के तत्व अपेक्षाकृत अध्िक अभ्िाियाशील होते हैं जो 1ड भ़् आयनों द्वारा आॅक्सीकृत हो जाते हैं, यद्यपि इन धतुओं की हाइड्रोजन आयन ;भ़्द्ध जैसे आॅक्सीकारकों से अभ्िािया करने की वास्तविक दर में कभी - कभी कमी आ जाती है। उदाहरणाथर्कृ कक्ष ताप पर टाइटेनियम एवं वैनेडियम तनु आॅक्सीकारक अम्लों के प्रति निष्िक्रय हैं। ड2़ध्ड के म् टके मान श्रेणी में द्विसंयोजी ध्नायनों के बनाने की घटती हुइर् प्रवृिा को दशार्ते हैं ;सारणी 8.2द्ध। म् टके कम ट्टणात्मक मानों की ओर जाने की सामान्य प्रवृिा प्रथम एवं द्वितीय आयनन एन्थैल्पी के योग में सामान्य वृि से संबंध्ित है। यह जानना रोचक है कि डदए छप और र्द के म् टमान सामान्य प्रवृिा से आपेक्ष्िात मानो की तुलना 2़ 5 2़में अध्िक ट्टणात्मक हैं। जबकि डद में अध्र् भरित ;कद्ध उपकोश ;क द्ध तथा र्द में पूणर् भरित क.उपकोश का स्थायित्व इनके म् टके मानों से संबंिात हैऋ निवैफल के लिए म् ट का मान इसकी उच्चतम ट्टणात्मक जलयोजन एन्थैल्पी से संबंिात है। 3़ 2़ टड ध्ड रेडाॅक्स युग्म के म् मानों के अवलोकन ;सारणी 8.2द्ध से स्पष्ट है कि डद3़ तथा ब्व3़ आयन जलीय विलयन में प्रबलतम आॅक्सीकरण कमर्क का कायर् करते 2़2़2़हैं। ज्प ए ट तथा ब्त आयन प्रबल अपचायी कमर्क ;अपचायकद्ध हैं तथा तनु अम्ल से हाइड्रोजन गैस मुक्त करते हैं। उदाहरणाथर् - 2़़ 3़ 2 ब्त ;ंुद्ध ़ 2 भ्;ंुद्ध → 2 ब्त ;ंुद्ध ़ भ्2;हद्ध 8.3.9 चुबंकीय गुण पदाथर् पर चुंबकीय क्षेत्रा अनुप्रयुक्त करने पर मुख्यतः दो प्रकार के चुंबकीय व्यवहार प्रद£शत होते हैं - प्रतिचुंबकत्व ;कपंउंहदमजपेउद्ध तथा अनुचुंबकत्व ;च्ंतंउंहदमजपेउद्ध ;एकक 1द्ध। प्रतिचुंबकीय पदाथर्, अनुप्रयुक्त चुंबकीय क्षेत्रा द्वारा प्रतिकष्िार्त होते हैं परंतु अनुचुंबकीय पदाथर् आकष्िार्त होते हैं। जो पदाथर् चुंबकीय क्षेत्रा में प्रबल रूप से आकष्िार्त होते हैं, वे लोहचुंबकीय ;थ्मततवउंहदमजपबद्ध कहलाते हैं। वास्तव में, लोहचुंबकत्व, अनुचुंबकत्व का चरम स्वरूप है। बहुत से संक्रमण धतु आयन अनुचुंबकीय हैं। अनुचुंबकत्व की उत्पिा, अयुगलित इलेक्ट्राॅनों की उपस्िथति के कारण होती है, प्रत्येक ऐसे अयुगलित इलेक्ट्राॅन का चुंबकीय आघूणर् ;उंहदमजपब उवउमदजद्ध, प्रचक्रण कोणीय संवेग ;ेचपद ंदहनसंत उवउमदजनउद्ध तथा कक्षीय कोणीय संवेग ;वतइपजंस ंदहनसंत उवउमदजनउद्ध से संबंध्ित होता है। प्रथम संक्रमण श्रेणी की धातुओं के यौगिकों में कक्षीय कोणीय संवेग का योगदान प्रभावी रूप से शमित ;ुनमदबीद्ध हो जाता है इसलिए इसका कोइर् महत्व नहीं रह जाता। अतः इनके लिए चुंबकीय आघूणर् का निधर्रण उसमें उपस्िथत अयुगलित इलेक्ट्राॅनों की संख्या के आधर पर किया जाता है तथा इसकी गणना नीचे दिए गए ‘प्रचक्रण - मात्रा’ ;ैचपद वदसलद्ध सूत्रा द्वारा की जाती है। - त्र द ;द ़ 2द्ध यहाँ द अयुगलित इलेक्ट्राॅनों की संख्या है तथा - चुंबकीय आघूणर् है जिसका मात्राक बोर मैग्नेटाॅन ;ठडद्ध है। एक अयुगलित इलेक्ट्राॅन का चुंबकीय आघूणर् 1.73 बोर मैग्नेटाॅन ;ठडद्ध होता है। अयुगलित इलेक्ट्राॅनों की बढ़ती संख्या के साथ चुंबकीय आघूणर् का मान बढ़ता है। अतः प्रेक्ष्िात चुंबकीय आघूणर् से परमाणुओं, अणुओं तथा आयनों में उपस्िथत अयुगलित इलेक्ट्राॅनों की संख्या का संकेत मिलता है। ‘प्रचक्रण - मात्रा’ सूत्रा द्वारा गणना से प्राप्त चुंबकीय आघूणर् के मान तथा प्रयोगों के आधर पर निधर्रित प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों के चुंबकीय आघूणो± के मान सारणी 8.7 में दिए गए हैं। प्रायोगिक आँकड़े मुख्य रूप से विलयन में उपस्िथत जलयोजित आयनों अथवा ठोस अवस्था के लिए हैं। सारणी 8ण्7 - चुंबकीय आघूणर् के परिकलित एवं प्रेक्ष्िात मान ;ठडद्ध 8.3.10 रंगीन आयनों का बनना जब निम्न उजार् वाले क.कक्षक से इलेक्ट्राॅन का उत्तेजन, उच्च ऊजार् वाले क.कक्षक में होता है तो उत्तेजन ऊजार् ;मदमतहल व िमगबपजंजपवदद्ध का मान अवशोष्िात प्रकाश की आवृिा के संगत होता है ;एकक 9द्ध। सामान्यतः यह आवृिा, दृश्य प्रक्षेत्रा ;अपेपइसम तमहपवदद्ध में स्िथत होती है। प्रेक्ष्िात रंग, अवशोष्िात प्रकाश का पूरक रंग होता है। अवशोष्िात प्रकाश के आवृिा का निधर्रण लिगन्ड ;स्पहंदकद्ध के स्वभाव के आधर पर किया जाता है। सारणी 8.8 में आयनों के जलीय विलयन में प्रेक्ष्िात रंगों को क्रमब( किया गया है, यहाँ जल के अणु लिगन्ड का कायर् करते हैं। चित्रा 8ण्5 में वुफछ क.ब्लाॅक तत्वों के रंगीन विलयनों को दशार्या गया है। सारणी 8ण्8 - प्रथम संक्रमण श्रेणी के वुफछ जलयोजित धतु आयनों के रंग 8.3.11 संवुफल यौगिकों का बनना 8.3.12 उत्प्रेरकीय गुण 8.3.13 अंतराकाशी यौगिकों का बनना 8.3.14 मिश्रातुओं का बनना संवुफल यौगिक वे यौगिक होते हैं जिनमें धातु आयन निश्िचत संख्या में ट्टणायन अथवा उदासीन अणुओं से बंधन करके संवुफलन स्पीशीश बनाते हैं। जिनके अपने अभ्िालक्षण्िाक गुण 3दृ4दृ 2़होते हैं। इसके वुफछ उदाहरण हैं कृ ख्थ्म;ब्छद्ध6, ए ख्थ्म;ब्छद्ध6, ए ख्ब्न;छभ्3द्ध4, तथा ख्च्जब्स4,2दृ ;एकक 9 में संवुफल यौगिकों के रसायन की विस्तृत चचार् की गइर् हैद्ध। संक्रमण तत्त्व अनेक संवुफल यौगिकों की रचना करते हैं। इसका मुख्य कारण है धातु आयनों के आकार का छोटा होना, धातु आयनों पर उच्च आयनिक आवेश तथा आबंधें के बनने के लिए क कक्षकों की उपलब्ध्ता। संक्रमण धतुएं तथा इनके यौगिक उत्प्रेरकीय सियता के लिए जाने जाते हैं। संक्रमण धातुओं का यह गुण उनकी परिवतर्नशील संयोजकता एवं संवुफल यौगिक के बनाने के गुण के कारण हैं। वैनेडियम ;टद्ध आॅक्साइड ;संस्पशर् प्रक्रम मेंद्ध, सूक्ष्म विभाजित आयरन ;हाबर प्रक्रम मेंद्ध और निवैफल ;उत्प्रेरकीय हाइड्रोजनन मेंद्ध संक्रमण धतुओं के द्वारा उत्प्रेरण के वुफछ उदाहरण हैं। उत्पे्ररक के ठोस पृष्ठ पर अभ्िाकारक के अणुओं तथा उत्पे्ररक की सतह के परमाणुओं के बीच आबंधें की रचना होती है। आंबध् बनाने के लिए प्रथम संक्रमण श्रेणी की धतुएं 3क एवं 4े इलेक्ट्राॅनों का उपयोग करती हैं। परिणामस्वरूप, उत्प्रेरक की सतह पर अभ्िाकारक की सांद्रता में वृि हो जाती है तथा अभ्िाकारक के अणुओं में उपस्िथत आबंध दुबर्ल हो जाते हैं। सियण ऊजार् का मान घट जाता है। आॅक्सीकरण अवस्थाओं में परिवतर्न हो सकने के कारण संक्रमण धतुएं उत्प्रेरक के रूप में अिाक प्रभावी होती हैं। उदाहरणाथर्ं कृ आयरन ;प्प्प्द्ध, आयोडाइड आयन तथा परसल्पेफट आयन के बीच संपन्न होने वाली अभ्िािया को उत्प्रेरित करता है। दृ2दृ 2दृ 2 प् ़ ै2व्8 → प्2 ़ 2 ैव्4 इस उत्प्रेरकीय अभ्िािया का स्पष्टीकरण इस प्रकार हैं कृ 3़दृ 2़2 थ्म ़ 2 प् → 2 थ्म ़ प्2 2़2दृ 3़2दृ 2 थ्म ़ ै2व्8 → 2 थ्म ़ 2ैव्4 जब संक्रमण धतुओं के िस्टल जालक के भीतर छोटे आकार वाले परमाणु जैसे भ्ए छ या ब् संपाश्िात हो जाते हैं तो अंतराकाशी यौगिकों की रचना होती है। ये यौगिक सामान्यतया असमीकरणमितीय ;दवद.ेजवपबीपवउमजतपबद्ध होते हैं तथा न तो आयनी होते हैं और न ही सहसंयोजी। उदाहरण के लिए ज्पब्ए डद4छए थ्म3भ्ए टभ्0ण्56 तथा ज्पभ्1ण्7 इत्यादि। उ(ृत सूत्रा धतुओं की कोइर् सामान्य आॅक्सीकरण अवस्था प्रद£शत नहीं करते। संघटनों की प्रकृति के आधर पर, इस प्रकार के यौगिक अंतराकाशी यौगिक ;पदजमतेजपजपंस बवउचवनदकेद्ध कहलाते हैं। इन यौगिकों के मुख्य भौतिक एवं रासायनिक अभ्िालक्षण निम्न होते हैं - ;पद्ध अंतराकाशी यौगिकों के गलनांक उच्च होते हैं जो शु( धतुओं से भी अध्िक हैं। ;पपद्ध ये अति कठोर होते हैं। यहाँ तक कि वुफछ बोराइडों की कठोरता लगभग हीरे की कठोरता के समान होती है। ;पपपद्ध इन यौगिकों की धत्िवक चालकता सुरक्ष्िात रहती है। ;पअद्ध रासायनिक रूप से अंतराकाशी यौगिक निष्िक्रय होते हैं। मिश्रातु ;ंससवलद्ध विभ्िान्न धतुओं का सम्िमश्रण होते हैं जो कि धतुओं के सम्िमश्रण से प्राप्त होते हंै। मिश्रातु समांगी ठोस विलयन हो सकते हैं जिनमें एक धतु के परमाणु, दूसरी धातु के परमाणुओं में अनियमित रूप से वितरित रहते हैं। इस प्रकार के मिश्रातुओं की रचनाएं उन परमाणुओं द्वारा होती हैं जिनकी धत्िवक त्रिाज्याओं में 15ः का अंतर हो। संक्रमण धातुओं के अभ्िालक्षण्िाक गुणों तथा उनकी त्रिाज्याओं में समानता के कारण संक्रमण धतुओं द्वारा मिश्रातुओं की रचना सरलतापूवर्क होती है। इस प्रकार प्राप्त मिश्रातु कठोर होते हैं तथा इनके गलनांक सामान्यतया उच्च होते हैं। पेफरस मिश्रातु सबसे सुपरिचित मिश्रातु हैं। क्रोमियम, वैनेडियम, टंगस्टन, माॅलिब्डेनम तथा मैंगनीज का उपयोग विभ्िान्न प्रकार के स्टील तथा स्टेनलेस स्टील के उत्पादन में किया जाता है। असंक्रमण धतुओं तथा संक्रमण धतुओं के संयोग से प्राप्त मिश्रातु औद्योगिक महत्त्व के होते हैं, जिनके उदाहरण हैं कृ पीतल ;काॅपर - जिंकद्ध, कांसा ;काॅपर - टिनद्ध आदि। उच्च ताप पर संक्रमण धतुओं एवं आॅक्सीजन के मध्य अभ्िािया के पफलस्वरूप संक्रमण धतुओं के आॅक्साइड प्राप्त होते हैं। स्वैंफडियम के अतिरिक्त सभी धतुएं डव् प्रकार के आयनिक आॅक्साइड बनाती हैं। इन आॅक्साइडों में धातुओं की उच्चतम आॅक्सीकरण संख्या इनकी वगर् संख्या के ;समान होती है। जैसा कि ैब2व्3 से डद2व्7 यौगिकों तक देखने को मिलता है। वगर् 7 के पश्चात् आयरन का थ्म2व्3 से ऊपर कोइर् उच्च आॅक्साइड ज्ञात अ ़ प्टनहीं है। आॅक्साइड के अतिरिक्त आॅक्सो - ध्नायन ;वगवबंजपवदेद्ध ट को टव्2 में, ट को 2़2़प्ट टव् में तथा ज्पव् को ज्प स्थायित्व देते हैं। धतुओं की आॅक्सीकरण संख्या में वृि के साथ आॅक्साइडों के आयनिक गुण में कमी आती है। मैंगनीज का आॅक्साइड, डद2व्7 सहसंयोजी तथा हरा तैलीय पदाथर् होता है। यहाँ तक कि ब्तव्3 तथा ट2व्5 के गलनांक भी निम्न होते हैं। इन उच्च आॅक्साइडों में अम्लीय स्वभाव की प्रमुखता होती है। इस प्रकार डद2व्7 से भ्डदव्4 प्राप्त होता है। भ्2ब्तव्4 तथा भ्2ब्त2व्7 दोनों ही ब्तव्3 से प्राप्त होते हैं। ट2व्5 उभयध्मीर् होने पर भी मुख्यतः अम्लीय है और टव्43दृ तथा टव्2़ के लवण देता है। वैनेडियम के आॅक्साइडों में क्षारिकीय ट2व्3 से, अल्प क्षारिकीय ट2व्4 और उभयध्मीर् ट2व्5 तक क्रमिक परिवतर्न देखने को मिलता है। ट2व्4, अम्ल में विलेय होकर टव्2़ लवण बनाता है। इसी प्रकार ट2व्5, अम्ल तथा क्षारों से अभ्िािया कर क्रमशः टव्4़ तथा टव्43दृ देता है। पूणर्रूप से अभ्िालक्षण्िात ब्तव् क्षारकीय है परंतु ब्त2व्3 उभयध्मीर् है। पोटैश्िायम डाइक्रोमेट, ज्ञ2ब्त2व्7 पोटैश्िायम डाइक्रोमेट चमर् उद्योग के लिए एक महत्त्वपूणर् रसायन है। इसका उपयोग कइर् ऐशो ;ं्रवद्ध यौगिकों को बनाने में आॅक्सीकारक के रूप में किया जाता है। डाइक्रोमेट को 8.4 संक्रमण तत्वों केेे कु छ महत्वपूणर् यौगिक 8.4.1 धातुओं के आॅक्साइड एवं आॅक्सो - ट्टणायन सामान्यतः क्रोमेट से बनाया जाता है। क्रोमाइट अयस्क ;थ्मब्त2व्4द्ध को जब वायु की उपस्िथति में सोडियम या पोटैश्िायम काबोर्नेट के साथ संगलित किया जाता है तो क्रोमेट प्राप्त होता है। क्रोमाइट की सोडियम काबोर्नेट के साथ अभ्िािया नीचे दी गइर् हैं कृ 4 थ्मब्त2व्4 ़ 8 छं2ब्व्3 ़ 7 व्2→ 8 छं2ब्तव्4 ़ 2 थ्म2व्3 ़ 8 ब्व्2 सोडियम क्रोमेट के पीले विलयन को छानकर उसे सल्फ्रयूरिक अम्ल द्वारा अम्लीय बना लिया जाता है जिसमें से नारंगी सोडियम डाइक्रोमेट, छं2ब्त2व्7ण्2भ्2व् को िस्टलित कर लिया जाता है। 2छं2ब्तव्4 ़ 2 भ़्→ छं2ब्त2व्7 ़ 2 छं़ ़ भ्2व् सोडियम डाइक्रोमेट की विलेयता, पोटैश्िायम डाइक्रोमेट से अध्िक होती है। इसलिए सोडियम डाइक्रोमेट के विलयन में पोटैश्िायम क्लोराइड डालकर पोटैश्िायम डाइक्रोमेट प्राप्त कर लिया जाता है। छं2ब्त2व्7 ़ 2 ज्ञब्स → ज्ञ2ब्त2व्7 ़ 2 छंब्स पोटैश्िायम डाइक्रोमेट के नारंगी रंग के िस्टल, िस्टलीकृत हो जाते हैं। जलीय विलयन में क्रोमेट तथा डाइक्रोमेट का अंतरारूपांतरण होता है जो विलयन के चभ् पर निभर्र करता है। क्रोमेट तथा डाइक्रोमेट मंे क्रोमियम की आॅक्सीकरण संख्या समान है। 2दृ़2दृ2 ब्तव्4 ़ 2भ्→ ब्त2व्7 ़ भ्2व् 2दृ.2दृब्त2व्7 ़ 2 व्भ्→ 2 ब्तव्4 ़ भ्2व् क्रोमेट आयन ब्तव्42दृ तथा डाइक्रोमेट आयन ब्त2व्72दृ की संरचनाएं नीचे दी गइर् हैं। क्रोमेट आयन चतुष्पफलकीय होता है जबकि डाइक्रोमेट आयन में दो चतुष्पफलकों के शीषर् आपस में साझेदारी किए रहते हैं, जिसमें ब्तदृव्दृब्त आबंध् कोण का मान 126° होता है। सोडियम तथा पोटैश्िायम डाइक्रोमेट प्रबल आॅक्सीकरण कमर्क का कायर् करते हैं। सोडियम लवण की जल में विलेयता अध्िक होती है तथा यह काबर्निक रसायन में आॅक्सीकरण कमर्क के रूप में अत्यिाक प्रयुक्त किया जाता है। पोटैश्िायम डाइक्रोमेट का उपयोग आयतनमितीय विश्लेषण में प्राथमिक मानक के रूप में किया जाता है। अम्लीय माध्यम में डाइक्रोमेट आयन की आॅक्सीकरण िया निम्न प्रकार से प्रद£शत की जा सकती हैं - 2दृ़दृ3़ट ब्त2व्7 ़ 14भ् ़ 6म→ 2ब्त ़ 7भ्2व् ;म् त्र 1ण्33टद्ध इस प्रकार अम्लीय पोटैश्िायम डाइक्रोमेट, आयोडाइड का आॅक्सीकरण आयोडीन में, सल्पफाइड का सल्पफर में, टिन ;प्प्द्ध का टिन ;प्टद्ध में तथा आयरन ;प्प्द्ध लवण का आयरन ;प्प्प्द्ध लवण में करेगा। अधर् अभ्िाियाएं निम्न हैं - 6 प् दृ→ 3प्2 ़ 6 मदृ 3भ्2ै → 6भ़् ़ 3ै ़ 6 मदृ 2़4़दृ 3 ैद→ 3ैद ़ 6 म 2़3़दृ 6 थ्म→ 6थ्म ़ 6 म संपूणर् आयनिक अभ्िािया को पोटैश्िायम डाइक्रोमेट की आॅक्सीकरण अध्र् अभ्िािया तथा अपचायकों की अपचयन अधर् अभ्िािया को जोड़कर प्राप्त किया जा सकता है। 2दृ़2़3़3़ब्त2व्7 ़ 14 भ् ़ 6 थ्म→ 2 ब्त ़ 6 थ्म ़ 7 भ्2व् पोटैश्िायम परमैंगनेट ज्ञडदव्4 पोटैश्िायम परमैंगनेट को प्राप्त करने के लिए डदव्2को क्षारीय धतु हाइड्राॅक्साइड तथा ज्ञछव्3 जैसे आॅक्सीकारक के साथ संगलित किया जाता है। इससे गाढ़े हरे रंग वफा उत्पाद ज्ञ2डदव्4 प्राप्त होता है जो उदासीन या अम्लीय माध्यम में असमानुपातित होकर पोटैश्िायम परमैंगनेट देता है। 2डदव्2 ़ 4ज्ञव्भ् ़ व्2→ 2ज्ञ2डदव्4 ़ 2भ्2व् 2दृ ़दृ3डदव्4 ़ 4भ् → 2डदव्4 ़ डदव्2 ़ 2भ्2व् औद्योगिक स्तर पर इसका उत्पादन डदव्2 के क्षारीय आॅक्सीकरणी संगलन के पश्चात्, मैंगनेट ;टप्द्ध के वैद्युतअपघटनी आॅक्सीकरण द्वारा किया जाता है। ज्ञव्भ्के साथ सगं लन वायु या ज्ञछव् 3 वफे साथ आॅक्सीकरण 2डदव् ⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯→ डदव् − 24 मंै ेगनट आयन क्षारीय विलयन मं वद्युॅेै त - अपघटनी आक्सीकरण 2−−डदव् 4 ⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯→ डदव् 4 मंै ानेपरमंगनट आयन ग्ट आयन ैेप्रयोगशाला में मैंगनीज ;प्प्द्ध आयन के लवण परआॅक्सोडाइसल्पेफट द्वारा आॅक्सीकृत होकर परमैंगनेट बनाते हैं। 2़2दृदृ2दृ़ 2डद ़ 5ै2व्8 ़ 8भ्2व् → 2डदव्4 ़ 10ैव्4 ़ 16भ् पोटैश्िायम परमैंगनेट गहरे बैंगनी ;लगभग कालाद्ध रंग के िस्टल बनाता है जो ज्ञब्सव्4 के साथ समसंरचनात्मकता दशार्ते हैं। यह लवण जल में बहुत विलेय नहीं है, ;293 ज्ञ ताप पर 6ण्4 ग्राम/100 ग्राम जल मेंद्ध। परंतु 513ज्ञ तक गरम करने पर अपघटित हो जाता है। 2ज्ञडदव्4→ ज्ञ2डदव्4 ़ डदव्2 ़ व्2 इसके दो भौतिक गुण अध्िक रोचक हैं कृ इसका अत्यध्िक गहरा रंग तथा तापक्रम पर आश्रित दुबर्ल अनुचुंबकत्व। इन्हें अणु कक्षक सि(ांत द्वारा समझाया जा सकता है, जो कि इस पुस्तक की सीमा से बाहर है। मैंगनेट तथा परमैंगनेट आयन चतुष्पफलकीय होते हैं। हरा मैंगनेट आयन एक अयुगलित इलेक्ट्राॅन के कारण अनुचुंबकीय होता है परंतु परमंैगनेट आयन प्रतिचुंबकीय होता है। आॅक्सीजन के चकक्षकों व मैंगनीज के ककक्षकों के अतिव्यापन से इनमें π आबंधन पाया जाता है। अम्लीय परमैंगनेट विलयन आॅक्सैलेट को काबर्नडाइआॅक्साइड में, आयरन ;प्प्द्ध लवण को आयरन ;प्प्प्द्ध लवण में, नाइट्राइट को नाइट्रेट में तथा आयोडाइड को मुक्त आयोडीन में आॅक्सीकृत कर देता है। अपचायकों की अधर् अभ्िाियाएं इस प्रकार हैं कृ ब्व्व् दृ 5 10ब्व्2 ़ 10मदृ ब्व्व् दृ 2़3़दृ 5 थ्म→ 5 थ्म ़ 5म 5छव्2दृ ़ 5भ्2व् → 5छव्3दृ ़ 10भ़् ़ स0मदृ 10प्दृ→ 5प्2 ़ 10मदृ ज्ञडदव्4 की अधर् - अभ्िािया एवं अपचायकों की अधर् - अभ्िाियाओं को जोड़कर संपूणर् अभ्िािया को लिखा जा सकता है तथा आवश्यकतानुसार समीकरण को संतुलित कर लिया जाता है। यदि हम परमैंगनेट के मैंगनेट, मैंगनीज डाइआॅक्साइड तथा मैंगनीज ;प्प्द्ध लवणों में अपचयन की अधर् - अभ्िाियाओं को निम्न रूप से प्रदश्िार्त करें, दृदृ 2दृ टडदव्4 ़ म → डदव्4 ;म् त्र ़ 0ण्56 टद्ध दृ़दृ टडदव्4 ़ 4भ् ़ 3म → डदव्2 ़ 2भ्2व् ;म् त्र ़ 1ण्69 टद्ध दृ़दृ 2़ टडदव्4 ़ 8भ् ़ 5म → डद ़ 4भ्2व् ;म् त्र ़ 1ण्52 टद्ध तो हम भली प्रकार देख सकते हैं कि विलयन में हाइड्रोजन आयन की सांद्रता अभ्िाियाओं को प्रभावित करने में महत्वपूणर् भूमिका निभाती है। यद्यपि कइर् अभ्िाियाओं को रेडाॅक्स - विभव की सहायता से समझाया जा सकता है लेकिन अभ्िािया की गतिकी भी एक महत्त्वपूणर् कारक है। परमैंगनेट आयन द्वारा ख्भ़्,त्र1 पर जल को आॅक्सीकृत किया जाना चाहिए। परंतु प्रायोगिक रूप से अभ्िािया धीमी होती है जब तक कि मैंगनीज ;प्प्द्ध आयन उपस्िथत न हो अथवा तापक्रम बढ़ाया न जाए। ज्ञडदव्4 की वुफछ महत्वपूणर् आॅक्सीकरण अभ्िाियाएं निम्नलिख्िात हंैकृ 1.अम्लीय विलयन में - ;कद्ध पोटैश्िायम आयोडाइड से आयोडीन मुक्त होती हैकृ दृदृ़ 2़10प् ़ 2डदव्4 ़ 16भ् → 2डद ़ 8भ्2व् ़ 5प्2 2़ 3़;खद्ध थ्म आयन ;हराद्ध का, थ्म ;पीलाद्ध में परिवतर्न - 2़दृ़2़3़ 5थ्म ़ डदव्4 ़ 8भ् → डद ़ 4भ्2व् ़ 5थ्म ;गद्ध 333ज्ञ पर आॅक्सैलेट आयन अथवा आॅक्सैलिक अम्ल का आॅक्सीकरण होता है - 2दृदृ़2़5ब्2व्4 ़ 2डदव्4 ़ 16भ् → 2डद ़ 8भ्2व् ़ 10ब्व्2 ;घद्ध हाइड्रोजन सल्पफाइड का सल्पफर में आॅक्सीकरण, जिसमें सल्पफर अवक्षेपित हो जाता है कृ ़2दृ भ्2ै → 2भ् ़ ै 2दृदृ़2़5ै ़ 2डदव् 4 ़ 16भ् → 2डद ़ 8भ्2व् ़ 5ै ;चद्ध सल्फ्रयूरस अम्ल अथवा सल्पफाइट का सल्पेफट अथवा सल्फ्रयूरिक अम्ल में आॅक्सीकरणकृ 2दृदृ़2़ 2दृ 5ैव्3 ़ 2डदव्4 ़ 6भ् → 2डद ़ 3भ्2व् ़ 5ैव्4 ;छद्ध नाइट्राइट का नाइट्रेट में आॅक्सीकरणकृ दृदृ़2़दृ5छव्2 ़ 2डदव्4 ़ 6भ् → 2डद ़ 5छव्3 ़ 3भ्2व् 2.उदासीन अथवा दुबर्ल क्षारीय माध्यम मेंकृ ;कद्ध ध्यान देने योग्य अभ्िािया है, आयोडाइड का आयोडेट में परिवतर्नकृ दृदृ दृदृ 2डदव्4 ़ भ्2व् ़ प् → 2डदव्2 ़ 2व्भ् ़ प्व्3 ;खद्ध थायोसल्पेफट का सल्पेफट में लगभग मात्रात्मक रूप से आक्सीकरणकृ दृ2दृ 2दृदृ 8डदव्4 ़ 3ै2व्3 ़ भ्2व् → 8डदव्2 ़ 6ैव्4 ़ 2व्भ् ;गद्ध मैंगनीज लवण का डदव्2 में आॅक्सीकरणऋ ¯शक सल्पेफट अथवा ¯शक आॅक्साइड की उपस्िथति अभ्िािया को उत्प्रेरित करती हैकृ दृ2़ ़ 2डदव्4 ़ 3डद ़ 2भ्2व् → 5डदव्2 ़ 4भ् नोट - हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की उपस्िथति में परमैंगनेट का अनुमापन असंतोषजनक हैऋ क्योंकि हाइड्रोक्लोरिक अम्ल क्लोरीन में आॅक्सीकृत हो जाता है। उपयोग विश्लेषणात्मक रसायन में उपयोग के अलावा पोटैश्िायम परमैंगनेट का उपयोग संश्लेषण काबर्निक रसायन में आॅक्सीकारक के रूप में किया जाता है। इसका उपयोग एक विरंजीकारक के रूप में किया जाता है। ऊनी, सूती, सिल्क वस्त्रों तथा तेलों के विरंजीकरण में इसका उपयोग भी इसकी आॅक्सीकरण क्षमता पर निभर्र करता है। आंतर संक्रमण तत्व ;.िब्लाॅकद्ध .िब्लाॅक की दो श्रेण्िायाँ हैं, लैन्थेनाॅयड ;लैन्थेनम के बाद के चैदह तत्वद्ध तथा ऐक्िटनाॅयड ;ऐक्िटनियम के बाद के चैदह तत्वद्ध। चूँकि लैन्थेनम तथा लैन्थेनाॅयड में सन्िनकटता पाइर् जाती है अतः लैन्थेनाॅयडों की चचार् में लैन्थेनम भी सम्िमलित रहता है। इन तत्वों के लिए सामान्य संकेत स्द प्रयुक्त होता है। इसी प्रकार से ऐक्िटनाॅयड तत्वों की चचार् में ऐक्िटनियम भी इस श्रेणी के चैदह तत्वों के साथ सम्िमलित रहता है। संक्रमण श्रेणी की तुलना में लैन्थेनाॅयड आपस में अध्िक सन्िनकट समानताएं प्रद£शत करते हैं। इन तत्वों में केवल एक स्थायी आॅक्सीकरण अवस्था होती है तथा इनका रसायन इन समान गुणों वाले तत्वों के आकार तथा नाभ्िाकीय आवेश में हुए अल्प परिवतर्न के श्रेणी में प्रभाव की समीक्षा करने का उत्तम अवसर प्रदान करता है। दूसरी ओर, एक्िटनाॅयड श्रेणी का रसायन अत्यध्िक जटिल है। जटिलता का एक कारण इन तत्वों की आॅक्सीकरण अवस्थाओं का विस्तृत परास तथा दूसरा कारण इन तत्वों का रेडियोधमीर्गुण है, जो इन तत्वों के अध्ययन में विशेष कठिनाइयाँ उत्पन्न करता है। यहाँ .िब्लाॅक की दोनों श्रेण्िायों का अध्ययन पृथक रूप से किया जाएगा। लैन्थेनम तथा लैन्थेनाॅयड ;जिनके लिए सामान्य संकेत स्द का उपयोग किया गया हैद्ध के8.5 लैन्थेनाॅयडनाम, संकेत, परमाण्िवक एवं वुफछ आयनिक अवस्थाओं के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास, परमाणु एवं आयनी त्रिाज्याओं के मान सारणी 8ण्9 में दिए गए हैं। सारणी 8ण्9 - लैन्थेनम एवं लैन्थेनाॅयडों के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास एवं त्रिाज्याएं ’ केवल ख्ग्म, क्रोड के बाह्य इलेक्ट्राॅन दशार्ए गए हैं। 8.5.1 इलेक्ट्राॅनिक विन्यास 8.5.2 परमाणु एवं आयनिक आकार चित्रा 8ण्6 कृलैन्थेनाॅयडों की आयनिक त्रिाज्याओं में प्रवृिायाँ कठिनाइर् के लिए उत्तरदायी है। 8.5.3 आॅक्सीकरण लैन्थेनाॅयड में, स्ं;प्प्द्ध तथा स्द;प्प्प्द्ध यौगिक प्रमुख हैं, पिफर भी प्रायः ़2 तथा ़4 आयन अवस्थाएं विलयन में अथवा ठोस यौगिकों में उपस्िथत रहते हैं। यह अनियमितता ;जैसी कि आयनन एन्थैल्पी मेंद्ध रिक्त, अध्र्भरित तथा पूणर्भरित .िकक्षकों के अतिरिक्त स्थायित्व के कारण पाइर् जाती है। अतः ब्मप्ट का उत्कृष्ट गैस अभ्िाविन्यास इसके बनने में सहायक होता है। परंतु यह एक प्रबल आॅक्सीकारक है। अतः यह पुनः सामान्य ़3 अवस्था में आ जाता है। ब्म4़ध् ब्म3़ के म् टका मान ़1ण्74 ट है, जो यह दशार्ता है कि यह जल को आॅक्सीकृत कर सकता है। तथापि, इस अभ्िािया की दर अध्िक ध्ीमी है और इसीलिए ब्म;प्टद्ध एक अच्छा विश्लेषणात्मक अभ्िाकमर्क है। च्तए छकए ज्इ तथा क्ल भी ़4 आॅक्सीकरण अवस्था दशार्ते हैं, परंतु केवल डव्2 आॅक्साइडों में। म्न2़ऐइलेक्ट्राॅनों के परित्याग द्वारा बनता है तथा ि7 विन्यास इस आयन के बनने का कारण होता है। म्न2़ एक प्रबल अपचायक है जो सामान्य ़3 अवस्था में परिव£तत हो जाता है। इसी प्रकार से ल्इ 2़, जिसका विन्यास यह देखा जा सकता है कि इन सभी परमाणुओं के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास में 6े 2एक समान है, परंतु 4 िस्तर पर परिवतर्नशील निवेशन है ;सारणी 8ण्9द्ध। यद्यपि इन सभी तत्वों के त्रिाधनात्मक इलेक्ट्राॅनिक विन्यास ;लैन्थेनाॅयडों की अति स्थायी आॅक्सीकरण अवस्थाद्ध का स्वरूप 4 िद है ;बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के साथ दत्र1 से 14 तकद्ध। लैन्थेनम से ल्युटीश्िायम तक के तत्वों की परमाणु एवं आयनिक त्रिाज्याओं में समग्र ”ास ;लैन्थेनाॅयड आवुंफचनद्ध लैन्थेनाॅयड तत्वों के रसायन का एक विश्िाष्ट लक्षण है। इसका तृतीय संक्रमण श्रेणी के तत्वों के रसायन पर दूरगामी प्रभाव होता है। परमाणु त्रिाज्याओं के मानों ;धतुओं की संरचनाओं से व्युत्पन्नद्ध में पाइर् गइर् कमी नियमित नहीं है जैसा कि ड3़ आयनों में नियमित रूप से देखने को मिलता है, ;चित्रा 8ण्6द्ध। यह आवंुफचन ठीक वैसा ही है जैसाकि सामान्य संक्रमण श्रेण्िायों में पाया गया है तथा कारण भी समान है, अथार्त् एक ही उपकोश में एक इलेक्ट्राॅन का दूसरे इलेक्ट्राॅन द्वारा अपूणर् परिरक्षण प्रभाव ;पउचमतंिबज ेीपमसकपदह ममििबजद्ध। पिफर भी श्रेणी में नाभ्िाकीय आवेश बढ़ने के साथ एक क.इलेक्ट्राॅन पर दूसरे क.इलेक्ट्राॅन के परिरक्षण प्रभाव की तुलना में, एक 4 िइलेक्ट्राॅन का दूसरे 4इिलेक्ट्राॅन पर परिरक्षण प्रभाव कम होता है तथा श्रेणी में बढ़ते हुए नाभ्िाकीय आवेश के कारण बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के साथ परमाणु के आकार में एक नियमित ”ास पाया जाता है। लैन्थेनाॅयड श्रेणी के आवंुफचन का संचयीप्रभाव, लैन्थेनाॅयड आवंुफचन कहलाता है, जिसके कारण तृतीय संक्रमण श्रेणी की त्रिाज्याओं के मान दूसरी संक्रमण श्रेणी के संगत तत्वों की त्रिाज्याओं के मानों के लगभग समान हो जाते हैं। र्त ;160 चउद्ध तथा भ् ि;159 चउद्ध की त्रिाज्याओं का लगभग बराबर मान लैन्थेनाॅयड आवंुफचन का परिणाम है। यह इन धतुओं के प्रकृति में साथ पाए जाने तथा इनके पृथक्करण में उत्पन्न 8.5.4 सामान्य अभ्िालक्षण ि14 है, एक अपचायक का कायर् करता है। ज्इप्ट के .िकक्षक अध्र्भरित है तथा यह आॅक्सीकारक का कायर् करता है। सैमेरियम का व्यवहार यूरोपियम से अत्यिाक मिलता - जुलता है, जो ़2 तथा ़3 दोनों आक्सीकरण अवस्थाएं प्रद£शत करता है। सभी लैन्थेनाॅयड चाँदी की तरह श्वेत तथा नरम धतुएं हैं और वायु में तुरंत बदरंग हो जाती हैं। परमाणु क्रमांक में वृि के साथ कठोरता में वृि होती है। सैमेरियम स्टील की तरह कठोर होता है। इनके गलनांक 1000 से 1200 ज्ञ के मध्य होते हैं परंतु सैमेरियम 1623 ज्ञ पर पिघलता है। इनकी विश्िाष्ट धतु संरचनाएं होती हैं तथा ये ऊष्मा एवं विद्युत् के अच्छे चालक होते हैं। केवल म्न तथा ल्इ और कभी - कभी ैउ तथा ज्उ को छोड़कर घनत्व तथा अन्य गुणों में निबार्ध परिवतर्न होता है। अनेक त्रिासंयोजी लैन्थेनाॅयड आयन ठोस अवस्था तथा विलयन में रंगीन होते हैं। इन आयनों का रंग िइलेक्ट्राॅनों की उपस्िथति के कारण होता है। स्ं3़ तथा स्न3़ आयनों में से कोइर् भी रंगीन नहीं हैं परंतु शेष लैन्थेनाॅयड आयन रंगीन होते हैं। पिफर भी, संभवतः िस्तर व 3़4़पर ही उत्तेजना के पफलस्वरूप अवशोषण बैंड संकीणर् होते हैं। ि;स्ं तथा ब्म द्ध एवं 142़3़ ि;ल्इ तथा स्न द्ध के अतिरिक्त अन्य सभी लैन्थेनाॅयड आयन अनुचुंबकीय होते हैं। नियोडिमियम में अनुचुंबकीय गुण उच्चतम होता है। लैन्थेनाॅयडों की प्रथम आयनन एन्थैल्िपयों का मान 600 ाश्र उवसदृ1 के आसपास होता है। द्वितीय आयन एन्थैल्पी का मान लगभग 1200 ाश्र उवसदृ1 है, जो वैफल्िसयम के समतुल्य है। तृतीय आयनन एन्थैल्पी के मानों में विचरण के विस्तृत विवेचन से यह निष्कषर् निकलता है कि विनिमय एन्थैल्पी का महत्व ;जैसा कि प्रथम संक्रमण श्रेणी के 3क कक्षकों मेंद्ध रिक्त, अध्र्भरित तथा पूणर्भरित िस्तर को वुफछ सीमा तक स्थायित्व प्रदान करने में प्रतीत होता है। यह लैन्थेनम, गैडोलिनियम तथा ल्यूटीश्िायम वफी तृतीय आयनन एन्थैल्पी के असाधारण निम्न मानों से स्पष्ट है। सामान्य रूप से श्रेणी के आरंभ वाले सदस्य अपने रासायनिक व्यवहार में वैफल्िसयम की तरह बहुत ियाशील होते हैं, परंतु बढ़ते परमाणु क्रमांक के साथ यह ऐलुमिनियम की तरह व्यवहार करते हैं। अध्र् अभ्िािया स्द3़;ंुद्ध ़ 3मदृ→ स्द;ेद्ध के लिए म् टका मान दृ2ण्2 से दृ2ण्4 ट के परास में है। म्न के लिए म् टका मान दृ2ण्0 ट है। निस्संदेह मान में थोड़ा सा परिवतर्न है, हाइड्रोजन गैस के वातावरण में मंद गति से गमर् करने पर धतुएं हाइड्रोजन से संयोग कर लेती हैं। धातुओं को काबर्न के साथ गमर् करने पर काबार्इड - स्द3ब्ए स्द2ब्3 तथा स्दब्2 बनते हैं। यह तनु अम्लों से हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं तथा हैलोजन के वातावरण में जलने पर हैलाइड बनाती हैं। ये आॅक्साइड ड2व्3 तथा हाइड्राॅक्साइड ड;व्भ्द्ध3 बनाती हैं। हाइड्राॅक्साइड निश्िचत यौगिक हैं न कि केवल हाइड्रेटेड आॅक्साइड। ये क्षारीय मृदा धतुओं के आॅक्साइड तथा हाइड्राॅक्साइड की भाँति क्षारकीय होते हैं। इनकी सामान्य अभ्िाियाएं चित्रा 8ण्7 में प्रद£शत की गइर् हैं। चित्रा 8ण्7कृलैन्थेनाॅयडों की रासायनिक अभ्िाियाएं लैन्थेनाॅयडो का सवोर्त्तम उपयोग प्लेट तथा पाइप बनाने के लिए मिश्रातु इस्पात के उत्पादन में है। एक सुप्रसि( मिश्रातु मिश धातु ;उपेबी उमजंसद्ध है जो एक लैन्थेनाॅयड धतु ;्95ःद्ध आयरन ;्5ःद्ध तथा लेशमात्रा ैए ब्ए ब्ंए व ।स से बनी होती है। मिश धातु की अत्यध्िक मात्रा, मैग्नीश्िायम आधरित मिश्रातु में प्रयुक्त होती है जो बंदूक की गोली, कवच या खोल तथा हल्के िलंट के उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जाता है। लैन्थेनाॅयडों के मिश्रित आॅक्साइडों का उपयोग पेट्रोलियम भंजन में उत्प्रेरक की तरह किया जाता है। लैन्थेनाॅयडों के वुफछ आॅक्साइडों का उपयोग स्पुफरदीपी ;प़्ाफाॅस्प़्ाफरद्ध के रूप में टेलीविशन पदेर् में तथा इसी प्रकार की प्रतिदीप्त सतहों में किया जाता है। 8.6 ऐक्िटनाॅयड ऐक्िटनाॅयडों में ज्ी से स्त तक चैदह तत्व हैं। इन तत्वों के नाम, संकेत तथा वुफछ गुण सारणी 8ण्10 में दिए गए हैं। ऐक्िटनाॅयड रेडियोसिय तत्व हैं तथा प्रारंभ्िाक सदस्यों की अधर्यु अपेक्षाकृत अध्िक होती है। परंतु बाद वाले सदस्यों की अधर्यु का परास एक दिन से 3 मिनट तक है। लाॅरेन्िशयम ;र्त्र103द्ध की अधर्यु 3 मिनट है। बाद वाले सदस्य केवल नैनोग्राम मात्राओं में ही बनाए जा सकते हैं। इन तथ्यों के कारण इनके अध्ययन में अध्िक कठिनाइयाँ आती हैं। सारणी 8ण्10 - ऐक्िटनियम तथा ऐक्िटनाॅयडों के वुफछ गुण ’ केवल ख्त्द, क्रोड के बाह्य इलेक्ट्राॅन दशार्ए गए हैं। 8.6.1 इलेक्ट्राॅनिक विन्यास समझा जाता है कि सभी ऐक्िटनाॅयडों में 7े2 विन्यास होता है तथा 5 िएवं 6क उपकोशों में परिवतर्नशील निवेश होता है। चैदह इलेक्ट्राॅनों का निवेश 5 िउपकोश में होता है। थोरियम ;ज्ीए र्त्र90द्ध तक तो नहीं परंतु च्ं एवं इसके आगे वाले तत्वों में नियमित रूप से निवेश होते हुए परमाणु संख्या 103 तक पहुँचने पर 5 िकक्षक पूणर् रूप से भर जाता है। लैन्थेनाॅयडों के समान ऐक्िटनाॅयडों के इलेक्ट्राॅनिक विन्यासों में अनियमितताएं, 5 िउपकोश में उपस्िथत 8.6.2 आयनिक आकार 8.6.3 आॅक्सीकरण अवस्थाएं 0714िए ि तथा िविन्यासों के स्थायित्व से सबंध्ित हैं। इस प्रकार ।उ तथा ब्उ का 72712इलेक्ट्राॅनिक विन्यास क्रमशः ख्त्द, 5 ि7े तथा ख्त्द, 5 ि6क 7े है। यद्यपि, 5 िकक्षकों तथा 4 िकक्षकों में, उनके तरंग पफलन के कोणीय भाग के संदभर् में समानता पाइर् जाती है परंतु ये इतने धँसे हुए नहीं होते हैं जितने कि 4 िकक्षक। अतः 5 िकक्षक अध्ि क मात्रा में आबंध्न में भाग ले सकते हैं। आयनिक आकार के संदभर् में ऐक्िटनाॅयडों की सामान्य प्रवृिा भी लैन्थेनाॅयडों की ही तरह है। श्रेणी में परमाणु अथवा ड3़ आयनों के आकार में धीरे - धीरे क्रमिक ”ास होता है। इसे ऐक्िटनाॅयड आवंुफचन ;लैन्थेनाॅयड आवंुफचन की तरहद्ध के रूप में संद£भत किया जा सकता है। यद्यपि यह आवंुफचन इस श्रेणी में एक तत्व से दूसरे तत्व में उत्तरोत्तर बढ़ता जाता है जो 5 िइलेक्ट्राॅनों द्वारा दुबर्ल परिरक्षण ;ेीपमसकपदहद्ध के कारण है। ऐक्िटनाॅयड श्रेणी में आॅक्सीकरण अवस्थाओं का परास अध्िक है। आंश्िाक रूप से इसका कारण 5एि 6क तथा 7े स्तरों की समतुल्य ऊजार् है। ऐक्िटनाॅयड की ज्ञात आॅक्सीकरण अवस्थाएं सारणी 8ण्11 में दशार्इर् गइर् हैं। सारणी 8ण्11 - ऐक्िटनियम तथा ऐक्िटनाॅइडों की आॅक्सीकरण अवस्थाएं 8.6.4 सामान्य अभ्िालक्षण तथा लैन्थेनाॅयडों से तुलना ऐक्िटनाॅयड सामान्यतः ़3 आॅक्सीकरण अवस्था दशार्ते हंै। श्रेणी के प्रारंभ्िाक अधर् - भाग वाले तत्व सामान्यतः उच्च आॅक्सीकरण अवस्थाएं प्रद£शत करते हैं। उदाहरणाथर्, उच्चतम आॅक्सीकरण अवस्था ज्ी में ़4 है च्ंए न् तथा छच में क्रमशः ़5ए ़6 तथा ़7 तक पहुँंतु बाद के तत्वों में आॅक्सीकरण अवस्थाएं घटती हैंच जाती है। पर;सारणी 8ण्11द्ध। ऐक्िटनाॅयडों व लैन्थेनाॅयडों में यह समानता है कि यह ़4 आॅक्सीकरण अवस्था की अपेक्षा ़3 आॅक्सीकरण अवस्था में अध्िक यौगिक बनाते हैं। तथापि, ़3 तथा ़4 आयनों की जल अपघटित होने की प्रवृिा होती है। प्रारंभ एवं बाद वाले ऐक्िटनाॅयडों की आॅक्सीकरण अवस्थाओं के वितरण में इतनी अिाक अनियमितता तथा विभ्िान्नता पाइर् जाती हैऋ कि आॅक्सीकरण अवस्थाओं के संदभर् में इन तत्वों के रसायन की समीक्षा करना संतोषजनक नहीं है। सभी ऐक्िटनाॅयड धतुएं देखने में चाँदी की तरह लगती हैं परंतु विभ्िान्न प्रकार की संरचनाएं दशार्ती हैं। संरचनाओं में भ्िान्नता का कारण धत्िवक त्रिाज्याओं में अनियमितताएं हैं, जो लैन्थेनाॅयडों से कहीं अध्िक हैं। ऐक्िटनाॅयड अत्यध्िक अभ्िाियाशील धतुएं हैं, विशेषकर जब वे सूक्ष्म विभाजित हों। इन पर उबलते हुए जल की िया से आॅक्साइड तथा हाइड्राइड का मिश्रण प्राप्त होता है और अध्िकांश अधतुओं से संयोजन, सामान्य ताप पर होता है। हाइड्रोक्लोरिक अम्ल सभी धतुओं को प्रभावित करता है, परंतु अिाकतर धातुएं नाइटिªक अम्ल द्वारा, अल्प प्रभावित होती हैं, कारण कि इन धातुओं पर आॅक्साइड की संरक्षी सतह बन जाती है। क्षारों का इन धातुओं पर कोइर् प्रभाव नहीं पड़ता। ऐक्िटनाॅयडों के चुंबकीय गुण लैन्थेनाॅयडों की तुलना में अध्िक जटिल हंै। यद्यपि 5 िके अयुगलित इलेक्ट्राॅनों की संख्या के साथ ऐक्िटनाॅयडों की चुंबकीय प्रवृिा में परिवतर्न लगभग वैसा ही है जैसा लैन्थेनाॅयडों के लिए संगत परिणामों में है, हालाँकि ये मान लैन्थेनाॅयडों में वुफछ अध्िक होते हैं। ऐक्िटनाॅयडों के व्यवहार से यह स्पष्ट है कि प्रारंभ्िाक ऐक्िटनाॅयडों की आयनन एन्थैल्पी ;यद्यपि सही रूप से ज्ञात नहीं हैद्ध, प्रारंभ्िाक लैन्थेनायडों से कम हैं। यह उचित भी प्रतीत होता है क्योंकि जब 5 िकक्षक भरना प्रारंभ होंगे तो वे इलेक्ट्राॅनों के आंतरिक क्रोड में कम भेदन करेंगे। इसीलिए 5 िइलेक्ट्राॅन नाभ्िाकीय आवेश संगत लैन्थेनाॅयडों के 4 िइलेक्ट्राॅनों की तुलना में अध्िक प्रभावी रूप से परिरक्ष्िात होंगे। ऐक्िटनाॅइड में बाह्य इलेक्ट्राॅन कम दृढ़ता से जकड़े आबंध्न के लिए उपलब्ध् होते हैं। विभ्िान्न लक्षणों के संदभर् में जिनका विवेचन ऊपर किया जा चुका है, ऐक्िटनाॅयडों की लैन्थेनाॅयडों से तुलना करने पर हम पाते हैं कि ऐक्िटनाॅयडों में लैन्थेनाॅयडों की तरह का व्यवहार, श्रेणी के दूसरे भाग तक पहुँचने तक सुस्पष्ट नहीं होता है। पिफर भी प्रारंभ्िाक ऐक्िटनाॅयड भी लैन्थेनाॅयडों की तरह आपस में सन्िनकट समानताएं दशार्ने में तथा गुणों के क्रमिक परिवतर्न प्रदश्िार्त करने में मिलते - जुलते हैं, जिनमें आॅक्सीकरण अवस्था का परिव£तत होना सम्िमलित नहीं है। लैन्थेनाॅयड तथा ऐक्िटनाॅयड आवंुफचन का तत्वों के आकार पर विस्तृत प्रभाव पड़ता है और इसीलिए संगत आवतर् में उनके आगे आने वाले तत्वों के गुणों पर भी प्रभाव पड़ता है। लैन्थेनाॅयड आवंुफचन अिाक महत्वपूणर् हैऋ क्योंकि एक्िटनाॅयडों के पश्चात् आने वाले तत्वों का रसायन अभी तक कम ज्ञात है। लोहा तथा इस्पात अत्यंत महत्वपूणर् निमार्ण सामग्री हैं। इनका उत्पादन आयरन आॅक्साइड के अपचयन, अशुियों के निष्कासन तथा काबर्न व मिश्रात्वन धतुओं, जैसे ब्तए डद और छप के समिश्रण पर आधरित है। वुफछ यौगिकों का उत्पादन वुफछ विशेष उद्देश्य के लिए होता है, जैसे ज्पव् का वणर्क उद्योग में और डदव्2 का शुष्क बैटरी सेलों में। बैटरी उद्योग में र्द तथा छपध्ब्क की भी आवश्यकता पड़ती है। वगर्.11 के तत्वों को मुद्राधतु कहना उचित होगा। यद्यपि सिल्वर व गोल्ड की वस्तुओं का महत्व केवल संग्रहण तक ही सीमित हो गया है तथा समकालीन न्ज्ञ ‘काॅपर’ सिक्के वास्तव में काॅपर अव£णत स्टील हैं और ‘सिल्वर’ न्ज्ञ सिक्के ब्नध्छप मिश्रातु हैं। बहुत सी धातुएं और/या उनके यौगिक रसायन 8.7 क. एवं .िब्लाॅक तत्वों के ेे कुुु छ अनुप्रयोग उद्योग में महत्वपूणर् उत्प्रेरक हैं। सल्फ्रयूरिक अम्ल के उत्पादन में ट2व्5ए ैव्2 के आॅक्सीकरण को उत्प्रेरित करता है। ।स;ब्भ्3द्ध3 युक्त ज्पब्स4 त्सीग्लर उत्प्रेरकों का आधार है, जिसका उपयोग पाॅलिएथ्िालीन ;पाॅलिएथीनद्ध के उत्पादन में होता है। हाबर वििा में छ2ध्भ्2 मिश्रण से अमोनिया प्राप्त करने के लिए आयरन उत्प्रेरक के रूप में प्रयुक्त होता है। तेल/वसा के हाइड्रोजनन में निवैफल उत्प्रेरक के रूप में प्रयुक्त होता है। एथाइन के आॅक्सीकरण से एथेनल बनाने के ‘वाकर प्रक्रम’ में च्कब्स2 उत्प्रेरक के रूप में प्रयुक्त होता है। निवैफल के संवुफलों ऐल्काइनों तथा अन्य काबर्निक यौगिकों जैसे बेन्जीन के बहुलकीकरण में उपयोगी हैं। पफोटोग्रापफी उद्योग ।हठत के विश्िाष्ट प्रकाश संवेदनशीलता के गुणों पर आधारित है। अभ्यास 8ण्1 निम्नलिख्िात के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास लिख्िाए - 3़ ़2़ 2़;पद्ध ब्त ;पपपद्ध ब्न ;अद्ध ब्व ;अपपद्ध डद 3़ 4़2़ 4़;पपद्ध च्उ ;पअद्ध ब्म ;अपद्ध स्न ;अपपपद्ध ज्ी 8ण्2 ़3 आॅक्सीकरण अवस्था में आॅक्सीकृत होने के संदभर् में डद2़ के यौगिक थ्म2़ के यौगिकों की तुलना में अिाक स्थायी क्यों हैं? 8ण्3 संक्षेप में स्पष्ट कीजिए कि प्रथम संक्रमण श्रेणी के प्रथम अध्र्भाग में बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के साथ ़2 आॅक्सीकरण अवस्था वैफसे अिाक स्थायी होती जाती है? 8ण्4 प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्वों के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास किस सीमा तक आॅक्सीकरण अवस्थाओं को निधर्रित करते हैं? उत्तर को उदाहरण देते हुए स्पष्ट कीजिए। 8ण्5 संक्रमण तत्वों की मूल अवस्था में नीचे दिए गए क इलेक्ट्राॅनिक विन्यासों में कौन - सी आॅक्सीकरण अवस्था स्थायी होगी? 3 584 3क ए 3क ए 3क तथा 3क 8ण्6 प्रथम संक्रमण श्रेणी के आॅक्सो - धतुट्टणायनों का नाम लिख्िाएऋ जिसमें धतु संक्रमण श्रेणी की वगर् संख्या के बराबर आॅक्सीकरण अवस्था प्रद£शत करती है। 8ण्7 लैन्थेनाॅयड आवंुफचन क्या है? लैन्थेनाॅयड आवंुफचन के परिणाम क्या हैं? 8ण्8 संक्रमण धतुओं के अभ्िालक्षण क्या हंै? ये संक्रमण धतु क्यों कहलाती हैं? क.ब्लाॅक के तत्वों में कौन से तत्व संक्रमण श्रेणी के तत्व नहीं कहे जा सकते? 8ण्9 संक्रमण धतुओं के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास किस प्रकार असंक्रमण तत्वों के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास से भ्िान्न हैं? 8ण्10 लैन्थेनाॅयडों द्वारा कौन - कौन सी आॅक्सीकरण अवस्थाएं प्रद£शत की जाती हैं? 8ण्11 कारण देते हुए स्पष्ट कीजिएकृ ;पद्ध संक्रमण धतुएं तथा उनके अध्िकांश यौगिक अनुचुंबकीय हैं। ;पपद्ध संक्रमण धतुओं वफी कणन एन्थैल्पी के मान उच्च होते हैं। ;पपपद्ध संक्रमण धतुएं सामान्यतः रंगीन यौगिक बनाती हैं। ;पअद्ध संक्रमण धतुएं तथा इनके अनेवफ यौगिक उत्तम उत्प्रेरक का कायर् करते हैं। 8ण्12 अंतराकाशी यौगिक क्या हैं? इस प्रकार के यौगिक संक्रमण धतुओं के लिए भली प्रकार से ज्ञात क्यों हैं? 8ण्13 संक्रमण धतुओं की आॅक्सीकरण अवस्थाओं में परिवतर्नशीलता असंक्रमण धतुओं में आॅक्सीकरण अवस्थाओं में परिवतर्नशीलता से किस प्रकार भ्िान्न है? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए। 8ण्14 आयरनक्रोमाइट अयस्क से पोटैश्िायम डाइक्रोमेट बनाने की विध्ि का वणर्न कीजिए। पोटैश्िायम डाइक्रोमेट विलयन पर चभ् बढ़ाने से क्या प्रभाव पड़ेगा? 8ण्15 पोटैश्िायम डाइक्रोमेट की आॅक्सीकरण िया का उल्लेख कीजिए तथा निम्नलिख्िात के साथ आयनिक समीकरण लिख्िाए - ;पद्ध आयोडाइड आयन ;पपद्ध आयरन ;प्प्द्ध विलयन ;पपपद्ध भ्2ै 8ण्16 पोटैश्िायम परमैंगनेट वफो बनाने की विध्ि का वणर्न कीजिए। अम्लीय पोटैश्िायम परमैंगनेट किस प्रकार - ;पद्ध आयरन ;प्प्द्ध आयन ;पपद्ध ैव्2 तथा ;पपपद्ध आॅक्सैलिक अम्ल से अभ्िािया करता है? अभ्िाियाओं के लिए आयनिक समीकरण लिख्िाए। ट2़ 3़2़8ण्17 ड ध्ड तथा ड ध्ड निकाय के संदभर् में वुफछ धतुओं के म् के मान नीचे दिए गए हैं। 2़ 32़ ब्त ध्ब्त .0ण्9ट ब्त ध्ब्त .0ण्4 ट 2़ 3़2़ डद ध्डद .1ण्2ट डद ध्डद ़1ण्5 ट 2़ 3़2़ थ्म ध्थ्म .0ण्4ट थ्म ध्थ्म ़0ण्8 ट उपरोक्त आँकड़ों के आधर पर निम्नलिख्िात पर टिप्पणी कीजिए - 3़3़3़;पद्ध अम्लीय माध्यम में ब्त या डद की तुलना में थ्म का स्थायित्व। ;पपद्ध समान प्रिया के लिए क्रोमियम अथवा मैंगनीश धतुओं की तुलना में आयरन के आॅक्सीकरण में सुगमता। 8ण्18 निम्नलिख्िात में कौन से आयन जलीय विलयन में रंगीन होंगे? 3़3़ ़3़ए 2़3़2़ज्प ए ट ए ब्नए ैबडद ए थ्म , ब्व , प्रत्येक के लिए कारण बताइए। 8ण्19 प्रथम संक्रमण श्रेणी की धतुओं की ़2 आॅक्सीकरण अवस्थाओं के स्थायित्व की तुलना कीजिए। 8ण्20 निम्नलिख्िात के संदभर् में, लैन्थेनाॅयड एवं ऐक्िटनाॅयड के रसायन की तुलना कीजिए। ;पद्ध इलेक्ट्राॅनिक विन्यास ;पपद्ध परमाण्वीय एवं आयनिक आकार ;पपपद्ध आॅक्सीकरण अवस्था ;पअद्ध रासायनिक अभ्िाियाशीलता। 8ण्21 आप निम्नलिख्िात को किस प्रकार से स्पष्ट करेंगे - ;पद्ध क4 स्पीशीश में से ब्त2़ प्रबल अपचायक है जबकि मैंगनीश ;प्प्प्द्ध प्रबल आॅक्सीकरक है। ;पपद्ध जलीय विलयन में कोबाल्ट ;प्प्द्ध स्थायी है परंतु संवुफलनकारी अभ्िाकमर्कों की उपस्िथति में यह सरलतापूवर्क आॅक्सीकृत हो जाता है। ;पपपद्ध आयनों का क 1 विन्यास अत्यंत अस्थायी है। 8ण्22 असमानुपातन से आप क्या समझते हैं? जलीय विलयन में असमानुपातन अभ्िाियाओं के दो उदाहरण दीजिए। 8ण्23 प्रथम संक्रमण श्रेणी में कौन सी धतु बहुध तथा क्यों ़1 आॅक्सीकरण अवस्था दशार्ती है? 8ण्24 निम्नलिख्िात गैसीय आयनों में अयुगलित इलेक्ट्राॅनों की गणना कीजिए। 3़ 3़ 3़3़डद ए ब्त ए ट तथा ज्प इनमें से कौन सा जलीय विलयन में अतिस्थायी है? 8ण्25 उदाहरण देते हुए संक्रमण धतुओं के रसायन के निम्नलिख्िात अभ्िालक्षणों का कारण बताइएकृ ;पद्ध संक्रमण धतु का निम्नतम आॅक्साइड क्षारकीय है, जबकि उच्चतम आॅक्साइड उभयधमीर् अम्लीय है। ;पपद्ध संक्रमण धतु की उच्चतम आॅक्सीकरण अवस्था आॅक्साइडों तथा फ्रलुओराइडों में प्रद£शत होती है। ;अपपपद्ध धतु के आॅक्सोट्टणायनों में उच्चतम आॅक्सीकरण अवस्था प्रद£शत होती है। 8ण्26 निम्नलिख्िात को बनाने के लिए विभ्िान्न पदों का उल्लेख कीजिए कृ ;पद्ध क्रोमाइट अयस्क से ज्ञ2ब्त2व्7 ;पपद्ध पाइरोलुसाइट से ज्ञडदव्4 8ण्27 मिश्रातुएं क्या हैं? लैन्थेनाॅयड धतुओं से युक्त एक प्रमुख मिश्रातु का उल्लेख कीजिए। इसके उपयोग भी बताइए। 8ण्28 आंतरिक संक्रमण तत्व क्या हैं? बताइए कि निम्नलिख्िात में कौन से परमाणु क्रमांक आंतरिक संक्रमण तत्वों के हैं कृ 29ए 59ए 74ए 95ए 102ए 104 8ण्29 ऐक्िटनाॅयड तत्वों का रसायन उतना नियमित नहीं है जितना कि लैन्थेनाॅयड तत्वों का रसायन। इन तत्वों की आॅक्सीकरण अवस्थाओं के आधर पर इस कथन का आधार प्रस्तुत कीजिए। 8ण्30 एक्िटनाॅयड श्रेणी का अंतिम तत्व कौन सा है? इस तत्व का इलेक्ट्राॅनिक विन्यास लिख्िाए। इस तत्व की संभावित आॅक्सीकरण अवस्थाओं पर टिप्पणी कीजिए। 8ण्31 हुंड - नियम के आधर पर ब्म3़ आयन के इलेक्ट्राॅनिक विन्यास को व्युत्पन्न कीजिए तथा ‘प्रचक्रण मात्रा सूत्रा’ के आधार पर इसके चुंबकीय आघूणर् की गणना कीजिए। 8ण्32 लैन्थेनाॅयड श्रेणी के उन सभी तत्वों का उल्लेख कीजिए जो ़4 तथा जो ़2 आॅक्सीकरण अवस्थाएं दशार्ते हैं। इस प्रकार के व्यवहार तथा उनके इलेक्ट्राॅनिक विन्यास के बीच संबंध् स्थापित कीजिए। 8ण्33 निम्नलिख्िात के संदभर् में ऐक्िटनाॅयड श्रेणी के तत्वों तथा लैन्थेनाॅयड श्रेणी के तत्वों के रसायन की तुलना कीजिए। ;पद्ध इलेक्ट्राॅनिक विन्यास ;पपद्ध आॅक्सीकरण अवस्थाएं ;पपपद्ध रासायनिक अभ्िाियाशीलता। 8ण्34 61ए 91ए 101 तथा 109 परमाणु क्रमांक वाले तत्वों का इलेक्ट्राॅनिक विन्यास लिख्िाए। 8ण्35 प्रथम श्रेणी के संक्रमण तत्वों के अभ्िालक्षणों की द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के वगो± के संगत तत्वों से क्षैतिज वगो± में तुलना कीजिए। निम्नलिख्िात ¯बदुओं पर विशेष महत्व दीजिए - ;पद्ध इलेक्ट्राॅनिक विन्यास ;पपद्ध आॅक्सीकरण अवस्थाएं ;पपपद्ध आयनन एन्थैल्पी तथा ;पअद्ध परमाण्वीय आकार 8ण्36 निम्नलिख्िात आयनों में प्रत्येक के लिए 3क इलेक्ट्राॅनों की संख्या लिख्िाए - 2़ 2़ 3़ 2़ 2़ 3़ 2़2़ 2़ ज्प ए ट ए ब्त ए डद ए थ्म ए थ्म ए ब्व ए छप ए ब्न आप इन जलयोजित आयनों ;अष्टपफलकीयद्ध में पाँच 3क कक्षकों को किस प्रकार अिाग्रहीत करेंगे? दशार्इए। 8ण्37 प्रथम संक्रमण श्रेणी के तत्व भारी संक्रमण तत्वों के अनेक गुणों से भ्िान्नता प्रद£शत करते हैं। टिप्पणी कीजिए। 8ण्38 निम्नलिख्िात संवुफल स्पीशीश के चुंबकीय आघूणो± के मान से आप क्या निष्कषर् निकालेंगे? उदाहरण चुंबकीय आघूणर् ;ठडद्ध ज्ञ4ख्डद;ब्छद्ध6द्ध 2ण्2 2़ ख्थ्म;भ्2व्द्ध6, 5ण्3 ज्ञ2ख्डदब्स4, 5ण्9 पाठ्यनिहित प्रश्नों केेे उत्तर 8ण्1 सिल्वर ;र्त्र47द्धए ़2 आॅक्सीकरण अवस्था प्रद£शत कर सकता है, जिसमें उसके 4क कक्षक अपूणर् भरे हुए हैं अतः यह संक्रमण तत्व है। 8ण्2 िंाक के 3क कक्षकों के इलेक्ट्राॅन धत्िवक आबंधन में प्रयुक्त नहीं होते हैं जबकि 3क श्रेणी के शेष सभी धातुओं के क कक्षक के इलेक्ट्राॅन धत्िवक आबंध् बनाने में प्रयुक्त होते हैं। 8ण्3 मैंगनीज ;र्त्र25द्धए के परमाणु में सवार्ध्िक अयुगलित इलेक्ट्राॅन पाए जाते हैं। 8ण्5 आयनन एन्थैल्पी में अनियमित परिवतर्न विभ्िान्न 3क विन्यासों के स्थायित्व की क्षमता में भ्िान्नता के कारण है ;उदाहरण 0 5 10क ए क ए क द्ध असामान्य रूप से स्थाइर् हैं। 8ण्6 छोटे आकार एवं उच्च विद्युत ट्टणात्मकता के कारण आॅक्सीजन अथवा फ्रलुओरीन, धतु को उसके उच्च आॅक्सीकरण अवस्था तक आॅक्सीकृत कर सकते हैं। 8ण्7 थ्म2़ की तुलना में ब्त2़ एक प्रबल अपचायक पदाथर् है। 2़3़4 → क 3 2़3़6 → क 5कारण - ब्त से ब्त बनने में क परिवतर्न होता है किन्तु थ्म से थ्म में क में परिवतर्न होता है। जल जैसे माध्यम में क5 की तुलना में क3 अध्िक स्थायी है ;देखें ब्थ्ैब्द्ध। 8ण्9 ब्ऩ जलीय विलयन में असमानुपातित होता है। ट2ब्ऩ;ंुद्ध → ब्न2़;ंुद्ध ़ ब्न;ेद्ध इसके लिये म् मान अनुवूफल है। 8ण्10 5क इलेक्ट्राॅन नाभकीय आवेश से प्रभावी रूप से परिरक्ष्िात रहते हैं। दूसरे शब्दों में 5क इलेक्ट्राॅनों का श्रेणी में एक तत्व से दूसरे तत्व की ओर जाने पर दुबर्ल परिरक्षण प्रभाव प्ररिलक्ष्िात होता है।

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