उद्देश्य इस एकक के अध्ययन के पश्चात् आप कृ ऽ 15, 16, 17 और 18 वगर् के तत्वों के रसायन में सामान्य प्रवृिायों के महत्व को समझ सकेंगेऋ ऽ डाइनाइट्रोजन और प़्ाफाॅस्प़्ाफोरस तथा उनके कुछ महत्वपूणर् यौगिकों के संश्लेषण, गुणों और उपयोगों के बारे में सीख सकेंगेऋ ऽ डाइ आॅक्सीजन और ओशोन के संश्लेषण, गुण और उपयोग तथा वुफछ सामान्य आॅक्साइडों के रसायन का वणर्न कर सकेंगेऋ ऽ सल्पफर के अपररूपों, इसके महत्वपूणर् यौगिकों के रसायन तथा इसके आॅक्सोअम्लों की संरचना के बारे में जान सवेंफगेंऋ ऽ क्लोरीन और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के संश्लेषण, गुणों तथा उपयोगों का वणर्न कर सकेंगेऋ ऽ अंतराहैलोजनों के रसायन तथा हैलोजनों के आॅक्सोअम्लों की संरचना के बारे में जान सकेंगेऋ ऽ उत्वृफष्ट गैसों के उपयोग बता सकेंगेऋ ऽ दैनिक जीवन में इन तत्वों और इनके यौगिकों के महत्व को समझ सवेंफगे। 7.1 वगर् 15 केेे तत्व 7.1.1 उपलब्ध्ता फ्रसायन में विविध्ता च.ब्लाॅक तत्वों की स्पष्ट पहचान है जो उनकी अपने एवं ेदृए कदृ व ि ब्लाॅक तत्वों के साथ अभ्िावि्रफया करने की प्रवृिा से स्पष्ट है।य् कक्षा ग्प् में आप जान चुके हैं कि च ब्लाक के तत्व आवतर् सारणी के वगर् 13 से 18 में रखे गए हैं। इनके संयोजकता कोश का इलेक्ट्राॅनिक विन्यास 2 1दृ6दे दच ;हीलियम, भ्मए के अतिरिक्त, विन्यास 1े 2द्ध है, च.ब्लाॅक के तत्वों के गुण अन्य तत्वों की ही भाँति परमाणवीय आकारों, आयनन एन्थैल्पी, इलेक्ट्राॅन लब्िध् एन्थैल्पी तथा विद्युतट्टणात्मकता से बहुत अध्िक प्रभावित होते हैं। द्वितीय आवतर् में क.कक्षकों की अनुपस्िथति तथा भारी तत्वों में क या क और .िकक्षकों ;तृतीय आवतर् एवं उसके पश्चातवतीर्द्ध की उपस्िथति का तत्वों के गुणों पर साथर्क प्रभाव होता है। इसके अतिरिक्त तीनों प्रकार के तत्वों - धतु, उपधतु तथा अधतु की उपस्िथति इनके रसायन को विविध्ता प्रदान करती है। आवतर् सारणी के च.ब्लाॅक के वगर् 13 व 14 के तत्वों के रसायन का कक्षा ग्प् में अध्ययन करने के पश्चात् इस एकक में आप इसके बाद के वगो± के तत्वों के रसायन के बारे में पढ़ेंगे। वगर् 15 में तत्व, नाइट्रोजन, प़़्ाफाॅस्पफोरस, आसेर्निक ऐन्िटमनी तथा बिस्मथ सम्िमलित हैं। जैसे - जैसे हम वगर् में नीचे की ओर बढ़ते हैं, अधत्िवक गुण, उपधत्िवक गुणों से होते हुए धत्िवक गुणों में परिवतिर्त हो जाते हैं। नाइट्रोजन तथा पफाॅस्प़्ाफोरस अधतुएं, आसेर्निक तथा ऐन्िटमनी उपधतुएं तथा बिस्मथ एक़धतु है। वायुमंडल में आण्िवक नाइट्रोजन का आयतन 78» है। भूपपर्टी के खनिजों में यह सोडियम नाइट्रेट ;चिली साल्टपीटर या चिली शोराद्ध तथा पोटैश्िायम नाइट्रेट ;इंडियन साल्टपीटरद्ध के रूप में पाया जाता है। जीवों और वनस्पतियों में यह प्रोटीन के रूप में पाया जाता है। पफाॅस्प़्ाफोरस ऐपेटाइट वगर् के खनिजों़ब्ं;च्व्द्धण् ब्ंग् ;ग् त्र थ्ए ब्स अथवा व्भ्द्धए ;उदाहरण - फ्रलुओरोऐपेटाइट ब्ं;च्व्द्ध6ण्946294ब्ंथ्2द्ध में मिलता है, जो कि पफाॅस्पेफट चट्टðानों के मुख्य घटक होते हैं। पफाॅस्पफोरस प्राण्िायों एवं पादप पदाथोर्ं का आवश्यक अवयव होता है। यह अस्िथयों तथा अन्य जीवित कोश्िाकाओं ़ाफाॅस्प़्में उपस्िथत होता है। प्ाफोप्रोटीन दूध् तथा अंडों में उपस्िथत होते हैं। आसेर्निक, ऐन्िटमनी तथा बिस्मथ मुख्यतः सल्पफाइड खनिजों के रूप में पाए जाते हैं। इस वगर् के तत्वों के महत्वपूणर् परमाण्िवक तथा भौतिक गुण उनके इलेक्ट्राॅनिक विन्यास के साथ सारणी 7.1 में दिए गए हैं। इस वगर् के कुछ परमाण्िवक, भौतिक और रासायनिक गुणों की प्रवृिायों की चचार् नीचे की गइर् है। सारणी 7ण्1 - वगर् 15 के तत्वों के परमाण्िवक तथा भौतिक गुण म्प्प्प् एकल बंध् ;म्त्र तत्वद्धय म् पर ीधूसर α.रूप ’ आण्िवक छ2 7.1.2 इलेक्ट्राॅनिक विन्यास 7.1.3 परमाणु एवं आयनी त्रिाज्या 7.1.4 आयनन एन्थैल्पी ं इ 3दृब 3़ ़़य म्यक श्वेत पफाॅस्पफोरस म ध्ूसर 38ण्6 ंजउ परय α.रूप िउध्वर्पातन ताप ह 63 ज्ञ इन तत्वों का संयोजकता कोश इलेक्ट्राॅनिक विन्यास, दे 2 दच 3 होता है। इन तत्वों के े कक्षक पूणर्तया भरे होते हैं तथा च कक्षक अध्र्भरित होते हैं, जो इनके इलेक्ट्राॅनिक विन्यास को अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करते हैं। वगर् में नीचे की ओर बढ़ने पर सहसंयोजक तथा आयनी ;किसी एक विशेष अवस्था मेंद्ध त्रिाज्याओं के आकार में वृि होती है। छ से च् तक सहसंयोजक त्रिाज्या में विचारणीय वृि होती है। हालाँकि, ।े से ठप तक सहसंयोजक त्रिाज्या में बहुत कम वृि प्रेक्ष्िात की जाती है। यह भारी सदस्यों में पूणर् भरे क और / या िकक्षकों की उपस्िथति के कारण है। वगर् में नीचे की ओर बढ़ने पर आयनन एन्थैल्पी परमाण्िवक आकार में लगातार वृि के कारण घटती है। अध्र्भरित च.कक्षीय इलेक्ट्राॅनिक विन्यास के अतिरिक्त स्थायित्व एवं छोटे आकार 7.1.5 विद्युत्ट्टणात्मकता 7.1.6 भौतिक गुण के कारण संगत आवर्तों में वगर् संख्या 15 के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी वगर् 14 के तत्वों की अपेक्षा बहुत अध्िक होती है। विभ्िान्न आयनन एन्थैल्िपयों का आपेक्ष्िात व्रफम निम्नलिख्िात हैकृ ΔΗढ ΔΗढ ΔΗ ;सारणी 7.1द्धι1 ι2 ι3सामान्यतः वगर् में नीचे की ओर जाने पर परमाण्िवक आकार में वृि के साथ विद्युत्ट्टणात्मकता का मान घटता है हालाँकि भारी तत्वों में यह अंतर बहुत अध्िक नहीं है। इस वगर् के सभी तत्व बहुपरमाणुक हैं। डाइनाइट्रोजन एक द्विपरमाणुक गैस है जबकि अन्य 7.1.7 रासायनिक गुण ़सभी ठोस हैं। वगर् में नीचे की ओर जाने पर धत्िवक गुण बढ़ता है। नाइट्रोजन तथा पफाॅस्पफोरस अधतु हैं, आसेर्निक और ऐन्िटमनी उपधतु हैं तथा बिस्मथ धतु है। ऐसा आयनन एन्थैल्पी में कमी तथा परमाण्िवक आकार में वृि के कारण है। सामान्यतया वगर् में उफपर से नीचे की ओर जाने पर क्वथनांक में वृि होती है, परंतु गलनांक, आसेर्निक तक बढ़ते हैं और उसके बाद बिस्मथ तक घटते हंै। नाइट्रोजन के अलावा सभी तत्व अपररूपता प्रदश्िार्त करते हैं। आॅक्सीकरण अवस्थाएं तथा इनकी वि्रफयाशीलता में पाइर् जाने वाली प्रवृिायाँ इन तत्वों की सामान्य आॅक्सीकरण अवस्थाएं दृ3ए ़3 तथा ़5 हैं। आकार तथा धतु लक्षणों में वृि के कारण वगर् में नीचे की ओर जाने पर - 3 आॅक्सीकरण अवस्था प्रदश्िार्त करने की प्रवृिा घटती है। वास्तव में वगर् का अंतिम सदस्य, बिस्मथ - 3 आॅक्सीकरण अवस्था में शायद ही कोइर् यौगिक बनाता हो। वगर् में नीचे की ओर जाने पर ़5 आॅक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व घटता है। बिस्मथ ;टद्ध का एकमात्रा अभ्िालक्षण्िाक यौगिक ठपथ्5 है। वगर् में नीचे की ओर ़5 आॅक्सीकरण अवस्था के स्थायित्व में कमी तथा ़3 आॅक्सीकरण अवस्था ;अवि्रफय युगल प्रभाव के कारणद्ध के स्थायित्व में वृि होती है। आॅक्सीजन के साथ अभ्िािया करने पर ़़़आॅक्सीकरण अवस्थाएं भी प्रदश्िार्त करती है। प़्1ए ़2ए ़4नाइट्रोजन ाफाॅस्पफोरस भी वुफछ आॅक्सो अम्लों में, ़1 तथा ़4 आॅक्सीकरण अवस्थाएं प्रदश्िार्त करता है। नाइट्रोजन की ़1 से ़4 तक सभी आॅक्सीकरण अवस्थाओं की प्रवृिा अम्ल विलयन में असमानुपातन की होती है। उदाहरण के लिए - 3भ्छव् 2 → भ्छव् 3 ़ भ्व् ़2 2छव् इसी प्रकार पफाॅस्प़्ाफोरस की लगभग सभी मध्यवतीर् आॅक्सीकरण अवस्थाएं क्षार व अम्ल ़दोनों में ़5 और दृ3 आॅक्सीकरण अवस्थाओं में असमानुपातित हो जाती हैं हालाँकि आसेर्निक ऐन्िटमनी और बिस्मथ की ़3 आॅक्सीकरण अवस्था असमानुपातन के संदभर् में बहुत अिाक स्थायी हो जाती है। नाइट्रोजन की अध्िकतम सहसंयोजकता 4 ही हो सकती हैऋ क्योंकि केवल 4 कक्षक ;एक े तथा तीन चद्ध ही बंध्न के लिए उपलब्ध् हैं। भारी तत्वों में बाहरी कोश में रिक्त क कक्षक होते हैं, जो बंध्न ;सहसंयोजीद्ध के लिए उपयोग किए जा सकते हैं, अतः उनकी सहसंयोजकता बढ़ा देते हैं जैसे च्थ्6दृ में। नाइट्रोजन का असामान्य गुण ;व्यवहारद्ध नाइट्रोजन छोटे आकार, उच्च विद्युत्ट्टणात्मकता, उच्च आयनन एन्थैल्पी एवं क कक्षकों की अनुपलब्ध्ता के कारण वगर् के अन्य सदस्यों से भ्िान्न होती हैं। नाइट्रोजन की स्वयं के साथ व छोटे आकार तथा उच्च विद्युत्ट्टणात्मकता वाले तत्वों ;जैसे ब्एव्द्ध के साथ, चπ−चπ बहुआबंध् बनाने की विश्िाष्ट प्रवृिा होती है। इस वगर् के भारी तत्व चπ−चπ बंध् नहीं बनाते क्योंकि उनके परमाणु कक्षक इतने बड़े और विसरित होते हैं कि वे प्रभावी अतिव्यापन नहीं कर सकते। इस प्रकार नाइट्रोजन दो परमाणुओं के बीच एक त्रिाबंध् ;एक σ तथा दो πद्ध के साथ एक द्विपारमाणुक अणु रूप में पाया जाता है, परिणामस्वरूप इसकी बंध् एन्थैल्पी ;941ण्4 ाश्र उवसदृ1द्ध बहुत उच्च है। इसके विपरीत पफाॅस्प़्ाफोरस, आसेर्निक तथा ऐन्िटमनी़च्दृच्ए ।ेदृ।े तथा ैइदृैइ जैसे एकल बंध् बनाते हैं, जबकि बिस्मथ तात्िवक अवस्था में धात्िवक बंध् बनाता है एक छदृछ बंध्, एक च्दृच् बंध् की अपेक्षा दुबर्ल होता है क्योंकि इसमें अबंध्ी इलेक्ट्राॅनों के उच्च अंतराइलेक्ट्राॅनिक प्रतिकषर्ण के कारण बंध् लंबाइर् कम होती है। परिणामतः नाइट्रोजन में शृंखलन प्रवृिा दुबर्ल होती है। इसके संयोजकता कोश में क कक्षकों की अनुपस्िथति दूसरा कारक है जो इसके रसायन को प्रभावित करता है। इसकी सहसंयोजकता केवल 4 तक ही सीमित रहने के अलावा नाइट्रोजन कπदृचπ बंध् नहीं बना सकता जैसा कि भारी तत्व करते हैं, उदाहरणाथर् त्3च्त्रव् तथा त्3च्त्रब्भ्2 ;त् त्र ऐल्िकल समूहद्ध। पफाॅस्प़्ाफोरस तथा आसेर्निक संव्रफमण तत्वों के साथ भी़कπदृकπ बंध् बना सकते हैं, जब उनके च्;ब्भ्द्ध तथा ।े;ब्भ्द्ध जैसे यौगिक लिगेन्डों के रूप में कायर् करते हैं।253653;पद्ध हाइड्रोजन के प्रति वि्रफयाशीलता वगर् 15 के सभी तत्व म्भ्3 प्रकार के हाइड्राइड बनाते हैं, जहाँ म् त्र छए च्ए ।ेए ैइ या ठप हो सकता है। इनके हाइड्राइडों के कुछ गुण सारणी 7.2 में दशार्ए गए हैं। हाइड्राइड उनके गुणों में नियमित क्रमिक परिवतर्न दशार्ते हैं। हाइड्राइडो का स्थायित्व छभ्3 से ठपभ्3 तक घटता है जो कि उनकी बंध् वियोजन एन्थैल्पी से प्रेक्ष्िात किया जा सकता है। परिणामस्वरूप, हाइड्राइडों का अपचायी गुण बढ़ता है। अमोनिया केवल एक मृदु अपचायक है, जबकि ठपभ्3 प्रबलतम अपचायक है। क्षारकता भी इसी व्रफम में घटती है - छभ् झ च्भ् झ ।ेभ् झ ैइभ्झ ठपभ्33333 सारणी 7ण्2 - वगर् 15 के तत्वों के हाइड्राइडों के गुण ;पपद्ध आॅक्सीजन के प्रति वि्रफयाशीलता ये सभी तत्व दो प्रकार के आॅक्साइड - म्2व्3 तथा म्2व्5 बनाते हैं। तत्व की उच्च आॅक्सीकरण अवस्था का आॅक्साइड निम्न आॅक्सीकरण अवस्था के आॅक्साइड की तुलना में अध्िक अम्लीय होता है। वगर् में नीचे जाने पर अम्लीय गुण घटता है। नाइट्रोजन और पफाॅस्पफोरस के म्2व्3 प्रकार के आॅक्साइड पूणर्तया अम्लीय हैं जबकि आसेर्निक तथा ऐन्िटमनी के उभयध्मीर् तथा बिस्मथ के प्रबल क्षारीय हैं। ;पपपद्ध हैलोजन के प्रति वि्रफयाशीलता इन तत्वों की अभ्िाियाओं में हैलाइडो की दो श्रेण्िायाँ - म्ग्3 तथा म्ग्5 बनती हैं। नाइट्रोजन के संयोजकता कोश में क कक्षकों की अनुपस्िथति के कारण यह पेंटाहैलाइड नहीं बनाता। पेन्टाहैलाइड ट्राइर्हैलाइडों की अपेक्षा अध्िक सहसंयोजी होते हैं। नाइट्रोजन के अलावा इन सभी तत्वों के ट्राइहैलाइड स्थायी होते हैं। नाइट्रोजन के लिए केवल छथ्3 ही स्थायी है। ठपथ्3 के अतिरिक्त सभी ट्राइहैलाइड मुख्य रूप से सहसंयोजी प्रकृति के होते हैं। ;पअद्ध धतुओं के प्रति वि्रफयाशीलता यह सभी तत्व धतुओं के साथ अभ्िािया करके द्विअंगी यौगिक बनाते हैं जिनमें यह - 3 आॅक्सीकरण अवस्था दशार्ते हैं। जैसे ब्ं3 छ2 ;वैफल्िशयम नाइट्राइडद्ध ब्ं3च्2 ;वैफल्िशयम पफाॅस्पफाइडद्ध छं3 ।े2 ;सोडियम आसेर्नाइडद्ध र्द3 ैइ2 ;जिंक एन्टीमोनाइडद्ध तथा डह3 ठप2 ;मैग्नीश्िायम बिस्मथाइडद्ध। 7.2 डाइनाइट्रोजन विरचन डाइनाइट्रोजन का व्यावसायिक उत्पादन वायु के द्रवीकरण तथा प्रभाजी आसवन से किया जाता है। पहले द्रव नाइट्रोजन ;क्वथनांक 77.2ज्ञद्ध आसवित होती है एवं आॅक्सीजन ;क्वथनांक 90ज्ञद्ध शेष रह जाती है। प्रयोगशाला में डाइनाइट्रोजन बनाने के लिए अमोनियम क्लोराइड के जलीय विलयन कीे सोडियम नाइट्राइट के साथ अभ्िािया कराइर् जाती है - छभ्4ब्स;ंुद्ध ़ छंछव्2;ंुद्ध → छ2;हद्ध ़ 2भ्2व्;सद्ध ़ छंब्स ;ंुद्ध इस अभ्िावि्रफया में थोड़ी मात्रा में छव् तथा भ्छव्3 भी बनते हैंऋ इन अशुियों को गैस को पौटैश्िायम डाइव्रफोमेट युक्त सल्फ्रयूरिक अम्ल के जलीय विलयन में से प्रवाहित कर दूर किया जा सकता है। इसे अमोनियम डाइव्रफोमेट के तापीय अपघटन से भी प्राप्त किया जा सकता है। ताप;छभ्द्धब्तव् छ ़ 4भ्व् ़ ब्तव्4227 ⎯⎯⎯→ 2223 अति शु( अवस्था में नाइट्रोजन सोडियम या बेरियम एजाइड के तापीय अपघटन से भी प्राप्त की जा सकती है। ठं;छ3द्ध2 → ठं ़ 3छ2 गुण डाइनाइट्रोजन एक रंगहीन, गंधहीन, स्वादहीन तथा अविषैली गैस है। नाइट्रोजन परमाणु के दो स्थायी समस्थानिक 14छ तथा 15छ हैं। इसकी जल में विलेयता बहुत कम है ;23ण्2 बउ3 प्रति लीटर जल, 273ज्ञ ताप तथा 1 बार दाब परद्ध तथा हिमांक और क्वथनांक भी कम हैं ;सारणी 7.1द्ध। छ≡छ बंध् की उच्च बंध् एन्थैल्पी के कारण डाइनाइट्रोजन कमरे के ताप पर कापफी अवि्रफय है। यद्यपि, ताप में वृि के साथ वि्रफयाशीलता तेशी से बढ़ती है। उच्च ताप पर यह कुछ धतुओं के साथ सीध्े संयुक्त होकर मुख्य रूप से आयनिक नाइट्राइडों तथा अधतुओं के साथ सहसंयोजक नाइट्राइडों को बनाती है। कुछ विश्िाष्ट अभ्िावि्रफयाएं हैं - ताप6स्प ़ छ2 ⎯⎯⎯→ 2स्प3छ ताप3डह ़ छ2 ⎯⎯⎯→ डह3छ2 यह उत्प्रेरक की उपस्िथति में लगभग 773 ज्ञ ताप पर यह हाइड्रोजन के साथ संयोजित होकर अमोनिया बनाती है ;हाबर प्रक्रमद्ध। छ2;हद्ध ़ 3भ्2;हद्ध 2छभ्3;हद्धय Δभ्ि8 त्र दृ46ण्1 ाश्रउवसदृ1 डाइनाइट्रोजन, केवल अत्यध्िक उच्च ताप ;लगभग 2000 ज्ञद्ध पर डाइआॅक्सीजन के साथ संयोग कर नाइटिªक आॅक्साइड, छव् बनाती है। छ2;हद्ध ़ व्2;हद्ध 2छव्;हद्ध उपयोग डाइनाइट्रोजन का मुख्य उपयोग अमोनिया तथा नाइट्रोजन युक्त अन्य औद्योगिक रसायनों ;उदाहरण - वैफल्िसयम सायनेमाइडद्ध के निमार्ण में है। जहाँ अवि्रफय वातावरण की आवश्यकता होती हैऋ वहाँ भी इसका उपयोग होता है। ;जैसे - लोहा और स्टील उद्योग, अभ्िावि्रफयाशील रसायनों के लिए अवि्रफय तनुकारीद्ध द्रव नाइट्रोजन का उपयोग जैविक पदाथो± एवं खाद्य सामग्री के लिए प्रशीतक के रूप में और व्रफायोसजर्री में होता है। 7.3 अमोनिया विरचन अमोनिया कम ;सूक्ष्मद्ध मात्राओं में वायु तथा मिट्टी में उपस्िथत रहती है। जहाँ यह नाइट्रोजनयुक्त काबर्निक पदाथोर्ं के विघटन से बनती है उदाहरणाथर् - यूरिया छभ् ब्व्छभ् ़ 2भ् व् →;छभ् द्ध ब्व् क् 2छभ् ़ भ्व् ़ ब्व्222 43 3222 छोटे स्तर पर अमोनिया, अमोनियम लवणों से प्राप्त होती है, जो काॅस्िटक सोडा या वैफल्िसयम हाइड्राॅक्साइड से वि्रफया करने पर विघटित हो जाते हैं। 2छभ् ब्स ़ ब्ं ;व्भ्द्ध→ 2छभ् ़ 2भ् व् ़ ब्ंब्स4 3222 ;छभ् ैव् ़ 2छंव्भ् → 2छभ् ़ 2भ् व् ़ छं ैव्4 द्ध 4 32 242 व्यापक स्तर पर अमोनिया हाबर प्रक्रम द्वारा बनाइर् जाती है। 8दृ1छ2;हद्ध ़ 3भ्2;हद्ध क् 2छभ्3;हद्धय Δ िभ् त्र दृ 46ण्1 ाश्र उवसले - शतैलिए सि(ांत के अनुसार उच्च दाब अमोनिया निमिर्त करने के लिए अनुवूफल होता है। अमोनिया के उत्पादन के लिए अनुवूफलतम परिस्िथतियाँ 200 × 105 च्ं ;लगभग 200 वायुमंडलीय दाब, ्700 ज्ञ ताप तथा थोड़ी मात्रा में ज्ञ2व् तथा ।स2व्3 युक्त आयरन आॅक्साइड जैसे उत्प्रेरक का उपयोग है, ताकि साम्य अवस्था प्राप्त करने की दर बढ़ाइर् जा सके। अमोनिया के उत्पादन के लिए प्रवाह - चित्रा 7.1 में दशार्या गया है। गुण अमोनिया एक तीखी गंध्वाली, रंगहीन गैस है। इसका हिमांक तथा क्वथनांक व्रफमशः 198.4 ज्ञ तथा 239.7 ज्ञ है। जल की भाँति ही द्रव और ठोस अवस्थाओं में यह हाइड्रोजन बंधों द्वारा बंध्ित होती है जिसके कारण इसके गलनांक व क्वथनांक के मान इसके अणु द्रव्यमान के आधर पर अपेक्ष्िात मानों की अपेक्षा अध्िक होते हैं। अमोनिया का अणु त्रिाकोणीय पिरैमिडी है जिसके शीषर् पर नाइट्रोजन परमाणु है। दशार्ए गए चित्रा के अनुसार इसमें तीन आबंध् युगल तथा एक एकाकी युगल है। अमोनिया गैस जल में अत्यध्िक विलेय है। व्भ्दृ आयन बनने के कारण इसका जलीय विलयन दुबर्लतः क्षारीय है। छभ्3;हद्ध ़ भ्2व्;सद्ध छभ़्4 ;ंुद्ध ़ व्भ्दृ ;ंुद्ध यह अम्लों के साथ अमोनियम लवण बनाती है उदाहरणाथर् छभ्4ब्सए ;छभ्4द्ध2ैव्4 इत्यादि। एक दुबर्ल क्षार के रूप में यह कइर् धतुओं के लवणों के विलयनों से उनके हाइड्राक्साइडों ;वुफछ धतुओं के जलीय आॅक्साइडोंद्ध को अवक्षेपित करती है। जैसेकृ र्दैव् ;ंुद्ध़ 2छभ् व्भ्;ंुद्ध→ र्द ;व्भ्द्ध;द्धे ़;छभ् द्ध2 ैव् ;ंुद्ध4 4 244 ;श्वते अवक्षपे द्ध थ्मब्स ंु ़ छभ्व्भ् ंु → थ्म व् ण्ग भ्व् ; द्ध़ छभ्ब्स ंु;द्ध 4 ;द्ध 3े 4 ;द्ध3 22 ;भरू ा अवक्षपे द्ध अमोनिया अणु के नाइट्रोजन परमाणु पर एक एकाकी इलेक्ट्राॅन युगल की उपस्िथति इसे लूइस क्षारक बनाती है। यह इलेक्ट्राॅन एकाकी युगल दान करके धतु आयनों के साथ बंध् बनाता है। ऐसे संकुल यौगिकों के बनने का ब्न2़ तथा ।ह़ जैसे धतु आयनों को पहचानने में अनुप्रयोग है - ब्न2़ ;ंुद्ध ़ 4 छभ्3;ंुद्ध क् ख्ब्न;छभ्3द्ध4,2़;ंुद्ध;नीलाद्ध;गहरा नीलाद्ध ।ह ़ ंु ़ ब्स− ंु →।हब्स ;द्ध;द्ध ;द्ध े ;रंगहीनद्ध ;श्वेत अवक्षेपद्ध ।हब्स ;ेद्ध़ 2छभ्3 ;ंुद्ध→ ⎡ ।ह ;छभ्3 द्ध ⎤ ब्स ;ंुद्ध⎣ 2 ⎦ ;श्वेत अवक्षेपद्ध ;रंगहीनद्ध उपयोग अमोनिया कइर् नाइट्रोजनी उवर्रकों के उत्पादन ;अमोनियम नाइट्रेट, यूरिया, अमोनियम प़फाॅस्पे़फट तथा अमोनियम सल्पेफटद्ध तथा कुछ अकाबर्निक यौगिकों के उत्पादन में उपयोग किया जाता है। जिनमें से नाइटिªक अम्ल एक प्रमुख है। द्रव अमोनिया प्रशीतक के रूप में भी उपयोग में आती है। नाइट्रोजन विभ्िान्न आॅक्सीकरण अवस्थाओं के अनेक आॅक्साइड बनाती है। इन आॅक्साइडों के7.4 नाइट्रोजन केेे नाम, सूत्रा, विरचन तथा भौतिक रंग - रूप सारणी 7.3 में दिए गए हैं। आॅक्साइडों की मुख्यआॅक्साइड लूइस डाॅट अनुनाद संरचनाएं तथा आबंध् प्राचलों को सारणी 7.4 में दिया गया है। सारणी 7ण्3 - नाइट्रोजन के आॅक्साइड 7.5 नाइटिªक अम्ल नाइट्रोजन भ्छव् ;हाइपोनाइट्रस अम्लद्ध भ्छव् ;नाइट्रस अम्लद्ध, भ्छव् ;नाइटिªक22223अम्लद्ध जैसे आॅक्सो अम्ल बनाती है। इनमें भ्छव्3 सबसे महत्वपूणर् है। विरचन प्रयोगशाला में, नाइटिªक अम्ल, काँच के रिटाॅटर् ;भभकाद्ध में सांद्र भ्2ैव्4 तथा छंछव्2 अथवा ज्ञछव्3 को गमर् करके प्राप्त किया जाता है। छंछव् ़ भ् ैव् → छंभ्ैव् ़ भ्छव्324 43 व्यापक स्तर पर यह मुख्यतः ओस्टवाल्ड प्रव्रफम द्वारा बनाया जाता है। यह विध्ि अमोनिया ;छभ्3द्ध के वायुमंडलीय आॅक्सीजन द्वारा उत्प्रेरकीय आॅक्सीकरण पर आधारित है। च्ज ध्त्ी गाॅरेकज उत्प्र4छभ् ह ़ 5व् ह ⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯→ 4छव् ह ़ 6भ्व् ह;द्ध ;द्ध ;द्ध ;द्ध3 2 500ज्ञए 9इंत 2 ;वायु सेद्ध सारणी 7ण्4 - नाइट्रोजन के आॅक्साइडों की संरचना इस प्रकार निमिर्त नाइटिªक आॅक्साइड आॅक्सीजन के साथ संयोग कर छव्2 देती है। 2छव् ह; द्ध़ व्2 ;हद्ध क् 2छव्2 ;हद्ध निमिर्त नाइट्रोजन डाइआॅक्साइड पानी में घुलकर भ्छव्3 देती है। 3छव् ;हद्ध़ भ्व्स; द्ध→ 2भ्छव् ;ंुद्ध़ ;द्धछव् ह22 3 निमिर्त छव् पुनः चवि्रफत की जाती है तथा जलीय भ्छव्3 को आसवन द्वारा लगभग 68» द्रव्यमान तक सांदि्रत किया जा सकता है। सांद्र भ्2ैव्4 द्वारा निजर्लीकरण से इसे 98» तक सांदि्रत किया जा सकता है। गुण यह एक रंगहीन द्रव है ;हिमांक 231ण्4 ज्ञ तथा क्वथनांक 355ण्6 ज्ञद्ध। प्रयोगशाला कोटि के नाइटिªक अम्ल में भ्छव्3 68» द्रव्यमान होता है तथा इसका विश्िाष्ट घनत्व 1ण्504 होता है। गैसीय अवस्था में, भ्छव्3 की संरचना समतलीय है जैसा कि चित्रा में दिखाया गया है। जलीय विलयन में नाइटिªक अम्ल प्रबल अम्ल की तरह व्यवहार करता है तथा हाइड्रोनियम और नाइट्रेट आयन देता है। भ्छव्3;ंुद्ध ़ भ्2व्;सद्ध → भ्3व़्;ंुद्ध ़ छव्3दृ ;ंुद्ध सांद्र नाइटिªक अम्ल प्रबल आॅक्सीकारक है तथा सोना एवं प्लेटिनम जैसी उत्वृफष्ट धतुओं को छोड़कर अध्िकतर धतुओं के साथ अभ्िावि्रफया करता है। आॅक्सीकरण के उत्पाद अम्ल की सांद्रता, ताप तथा आॅक्सीकृत होने वाले पदाथर् की प्रकृति पर निभर्र करते हैं। 3ब्न ़ 8 भ्छव्;तनुद्ध → 3ब्न;छव्द्ध ़ 2छव् ़ 4भ्व्3 322ब्न ़ 4भ्छव्;सांद्रद्ध → ब्न;छव्द्ध ़ 2छव़् 2 भ्व्3 32 2 2जिंक तनु नाइटिªक अम्ल के साथ वि्रफया करने पर छ2व् तथा सांद्र अम्ल के साथ छव्2 देता है। 4र्द ़ 10भ्छव् ;तनुद्ध → 4 र्द;छव्द्ध ़ 5भ्व् ़ छव्33222र्द ़ 4भ्छव् ;सादद्धं्र → र्द ;छव् 2 ़ 2भ् व् ़ 2छव् 33 द्ध 22 कुछ धतुएं ;जैसे ब्तए ।सद्ध सांद्र नाइटिªक अम्ल में विलेय नहीं होती। क्योंकि धतु की सतह पर आॅक्साइड की पतली अिय परत बन जाती है। सांद्र अधतुओं एवं उनके यौगिकों को भी आक्सीकृत करता है। आयोडीन आयोडिक अम्ल में, काबर्न काबर्न डाइआक्साइड में, सल्पफर सल्फ्रयूरिक अम्ल में तथा प़्ाफाॅस्प़्ाफोरस प़्ाफाॅस्प़्ाफोरिक अम्ल में आक्सीकृत होता है। प़् 10भ्छव्→ 2भ्प्व् ़ 10 छव् ़ 4भ्व्2 3322ब् ़ 4भ्छव्→ ब्व़् 2भ्व् ़ 4छव्32 22 ै ़ 48भ्छव्→ 8भ्ैव़् 48छव् ़ 12भ्व्8324 22च् ़ 20भ्छव्→ 4भ्च्व् ़ 20 छव् ़ 4भ्व्43342 2भूरी - वलय परीक्षण नाइट्रेटों के लिए सुपरिचित भूरा वलय परीक्षण थ्म2़ आयनों की नाइट्रेटों को नाइटिªक आॅक्साइड में अपचित करने की क्षमता पर निभर्र करता है, जो थ्म2़ से अभ्िावि्रफया कर भूरे रंग का संवुफल बनाता है। यह परीक्षण सामान्यतया नाइट्रेट आयन युक्त जलीय विलयन में तनु पेफरस सल्पेफट विलयन मिलाने के पश्चात सावधनीपूवर्क परखनली की दीवार के सहारे सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल मिलाकर किया जाता है। विलयन तथा सल्फ्रयूरिक अम्ल अंतरापृष्ठ पर एक भूरी वलय का बनना विलयन में नाइट्रेट आयन की उपस्िथति का संकेत करता है। दृ2़़ 3़छव्3 ़ 3थ्म ़ 4भ्→ छव् ़ 3थ्म ़ भ्2व् 2ख्थ्म;भ्व्द्ध , ़ ़ छव् → ख्थ्म;भ्व्द्ध;छव्द्ध,2़ ़ भ्व्26252;भूराद्ध उपयोग नाइटिªक अम्ल का प्रमुख उपयोग उवर्रकों के लिए अमोनियम नाइट्रेट बनाने तथा विस्पफोटक एवं पायरों तकनीक में प्रयुक्त होने वाले अन्य नाइट्रेटों के उत्पादन में है। यह नाइट्रोग्िलसरीन, ट्राइनाइट्रोटालुइन तथा अन्य काबर्निक नाइट्रो यौगिकों के विरचन में भी प्रयुक्त होता है। इसके अन्य प्रमुख उपयोग स्टेनलैस स्टील के अम्लोपचार, धतुओं के निक्षारण और राॅकेट इर्ंध्नों में आॅक्सीकारक के रूप में हैं। 7.6 फ़ ाॅस्फ़ ोरस केेे ोरसफाॅस्प़ फश्वेत प़ एक पारभासी श्वेतमोमी ठोस है। यह विषैला, जल में अविलेय परंतु काबर्न डाइसल्पफाइड मेंअपररूप विलेय होता है तथा अँध्ेरे में दीप्त होता है ;रसोसंदीप्ितद्ध। च् अवि्रफय वायुमंडल में यह उबलते हुए छंव्भ् विलयन में घुलकर च्भ्3 देता है। च् ़ 3छंव्भ् ़ 3भ् व् → च्भ् ़3छंभ् च्व्4 2322 60° ;सोि डयमहाइपापे फास्ॅ पफाइटद्ध च् च् च्4अणुओं में कोणीय तनाव के कारण, जिनमें कोण केवल 60° का है, श्वेत ोरस कम स्थायी है तथा सामान्य परिस्िथतियों में दूसरी ठोस प्रावस्थाओं से अिाकफाॅस्प़ फप़ च् चित्रा 7.2 - श्वेत प्वि्रफयाशील होता है। यह वायु में तेजी से आग पकड़कर च्4व्10 के सघन श्वेत ध्ूम देता है ़़च् ़ 5व् → च्व्ाफाॅस्प्4 410ाफोेरस 2 यह विविक्त चतुष्पफलकीय च्4 अणुओं से बना होता है जैसा चित्रा 7.2 में दिखाया गया है। लाल प़्ाफाॅस्प़्ाफोरसताप पर कइर् दिनों तक गमर् करने परज्ञोरस को जब अिय वातावरण में 573फाॅस्प़ फश्वेत प़ ोरस को उच्च दाब पर गमर् किया जाता है तो कालेफाॅस्प़ फप्राप्त होता है। जब लाल प़ ोरसफाॅस्प़ फोरसके प्रावस्थाओं की श्रेण्िायाँ प्राप्त होती हैं। लाल प़ फाॅस्प़ फप़ च्च् च् च् च् च् लोहे - जैसी ध्ूसर चमक वाला होता है। यह गन्ध्हीन, अविषैला तथा जल एवं काबर्न डाइसल्पफाइड में अविलेय है। रासायनिक रूप सेच् च्च् ोरस की तुलना में बहुत कम वि्रफयाशीलफाॅस्प़ फोरस, श्वेत प़ फाॅस्प़ फलाल प़ च् च् च् होता है। यह अँधेरे में दीप्त नहीं होता। यह बहुलकी होता है जिसमें चित्रा 7.3 - लाल प़्ाफाॅस्प़्ाफोरस च्4 चतुष्पफलक शृंखला के रूप में एक - दूसरे से जुड़े रहते हैं जैसा चित्रा 7.3 में दिखाया गया है। काला प़्ाफाॅस्प़्ाफोरस ोरस।फाॅस्प़ फकाला प़ β−ोरस तथाफाॅस्प़ फकाला प़ α−ोरस के दो रूप होते हैं,फाॅस्प़ फकाले प़ ोरस बनताफाॅस्प़ फकाला प़ α−पर, बन्द नलिका में गमर् करने पर803 ज्ञोरस कोफाॅस्प़ फलाल प़ है। इसे वायु में उध्वर्पातित किया जा सकता है तथा इसके िस्टल अपारदशीर्, एकनताक्ष ोरस श्वेतफाॅस्प़ फकाला प़ β−या त्रिासमनताक्ष होते हैं। यह वायु में आक्ॅसीवृफत नहीं होता। 673ताप तथा उच्च दाब पर गमर् करके बनाया जाता है। यह वायु में473 ज्ञोरस कोफाॅस्प़ फप़ ज्ञ तक नहीं जलता। 7.7 फ़ ाॅस्फ़ ीन विरचनसे अभ्िावि्रफया द्वारा बनाइर् जाती है।भ्ब्साइड की जल या तनुफाॅस्प़ फीन, वैफल्िसयम प़ फाॅस्प़ फप़ ब्ं च़्6भ् → 3ब्ं;व्भ्द्ध ़2च्भ्322 23 ब्ं च् ़6भ्ब्स → 3ब्ंब्स ़2च्भ्32 23 ब्वेरस कोफाॅस्प़ फप्रयोगशाला में, यह श्वेत प़ 2 का अवि्रफय वातावरण में सांद्र काॅस्िटक सोडा विलयन के साथ गमर् करके बनाइर् जाती है। च् ़ 3छंव्भ् ़ 3भ् व् → च्भ् ़ 3छंभ् च्व्4 23 22 ;सोि डयम हाइपो पफास्ॅ पफाइटद्ध शु( अवस्था में यह अज्वलनशील होती है लेकिन च्2भ्4 या च्4 के वाष्पों की उपस्िथति के कारण यह ज्वलनशील हो जाती है। अशुियों से शु( करने के लिए, इसे भ्प् में अवशोष्िात किया जाता है। जिससे पफास्पफोनियम आयोडाइड ;च्भ्4प्द्ध बन जाए जो ज्ञव्भ् से अभ्िावि्रफया कराने पर पफाॅस्पफीन दे देता है। च्भ् प् ़ ज्ञव्भ् → ज्ञप् ़ भ्व् ़ च्भ्4 23 गुण यह एक रंगहीन, सड़ी मछली के समान गंध् वाली अत्यंत विषैली गैस है। यह भ्छव्3ए ब्स2 तथा ठत2 जैसे आक्सीकारकों के वाष्पों की अतिसूक्ष्म मात्रा के संपवर्फ में आने पर विस्पफोटित होती है। यह जल में आंश्िाक रूप से विलेय है। च्भ्3 का जलीय विलयन प्रकाश की उपस्िथति भेरस तथाफाॅस्प़ फमें विघटित होकर लाल प़ 2 देता है। काॅपर सल्पेफट या मरक्यूरिक क्लोराइड विलयन द्वारा अवशोष्िात करने पर संगत पफाॅस्पफाइड प्राप्त होते हैं। 3ब्नैव् ़ 2च्भ् → ब्न च् ़ 3भ् ैव्4 3 3224 3भ्हब्स ़ 2च्भ् → भ्ह च् ़ 6भ्ब्स2 332 ोरस अमोनिया की तरह दुबर्ल क्षारकीय है तथा अम्लों के साथ पफाॅस्पफोनियमफाॅस्प़ फप़ यौगिक देती है, उदाहरणाथर् - च्भ् ़ भ्ठत → च्भ् ठत34 उपयोग हैं और संकेत के रूप में कायर् करती हैं। यह ध्ूमपट में भी प्रयुक्त होती हैं। ीन का स्वतः स्पूफतर् दहन का तकनीकी रूप से उपयोग होम्ज सिग्नलों में किया जाता है। वैफल्िसयम काबार्इडफाॅस्प़ फप़ ाइड के पात्रों को छेदित करके समुद्र में पेंफक दिया जाता है जिससे गैसें उत्पन्न होती हैं, जलतीफाॅस्प़ फतथा वैफल्िसयम प़ 7.8 फ़़़ ाॅस्फ़़़ ोरस केेे ोरस दो प्रकार के हैलाइड बनाता है - फाॅस्प़ फप़ च्ग्3 ;ग्त्र थ्ए ब्सए ठतए प्द्ध तथा च्ग्5 ;ग्त्रथ्ए ब्सए ठतद्ध।हैलाइड ोरसफाॅस्प़ फप़ 7.8.1 ट्राइर्क्लोराइड विरचन ोरस पर शुष्क क्लोरीन प्रवाहित करने से प्राप्त होता हैफाॅस्प़ फयह श्वेत प़ च् ़ 6ब्स → 4च्ब्स42 3 ोरस के साथ करने से भी प्राप्त कियाफाॅस्प़ फयह थायोनिल क्लोराइड की अभ्िावि्रफया श्वेत प़ जाता है। च् ़ 8ैव्ब्स → 4च्ब्स ़ 4ैव् ़ 2ै ब्स4 2 3222 गुण यह रंगहीन तैलीय द्रव है तथा नमी की उपस्िथति में जल अपघटित हो जाता है। च्ब्स ़ 3भ् व् →भ् च्व् ़3भ्ब्स32 33 यह ब्भ्3ब्व्व्भ्ए ब्2भ्5व्भ् जैसे दृव्भ् समूह युक्त काबर्निक यौगिकों से वि्रफया करता है 3ब्भ् ब्व्व्भ् ़ च्ब्स → 3ब्भ् ब्व्ब्स ़ भ् च्व्ब्सब्स 3 3333ब्स 3ब् भ् व्भ् ़ च्ब्स → 3ब् भ् ब्स़ भ् च्व्25 325 33 ैचेरसफाॅस्प़ फइसकी आवृफति पिरैमिडी है जैसा यहाँ चित्रा में दिखाया है जिसमें प़3 संकरित है। ोरसफाॅस्प़ फप़ 7.8.2 विरचन पेन्टाक्लोराइड ोरस पेन्टाक्लोराइड श्वेत पफाॅस्पफोरस की शुष्क क्लोरीन के आध्िक्य में अभ्िावि्रफया सेफाॅस्प़ फप़ बनता है। च् ़ 10ब्स → 4च्ब्स42 5 ैवेरस परफाॅस्प़ फइसे प़ 2ब्स2 की वि्रफया द्वारा भी बनाया जा सकता है। च् ़ 10ैव् ब्स → 4च्ब्स ़ 10ैव्422 52 गुण च्ब्स5 एक हल्का पीत - श्वेत पाउडर है तथा नम वायु में यह जल अपघटित होकर च्व्ब्स3 देता है और अंततः पफाॅस्पफोरिक अम्ल में परिवतिर्त हो जाता है। च्ब्स ़ भ्व् → च्व्ब्स ़ 2भ्ब्स52 3 च्व्ब्स ़ 3भ् व् → भ् च्व् ़ 3भ्ब्स32 34 गमर् करने पर यह उध्वर्पातित होता है परन्तु अध्िक गमर् करने से वियोजित हो जाता है। तापच्ब्स ⎯⎯⎯→ च्ब्स ़ ब्स5 32 यह दृव्भ् समूह युक्त काबर्निक यौगिकों के साथ अभ्िावि्रफया करके उन्हें क्लोरो व्युत्पन्नों में परिवतिर्त कर देता है। ब् भ् व्भ् ़ च्ब्स → ब् भ् ब्स ़ च्व्ब्स ़ भ्ब्स25525 3 ब्भ् ब्व्व्भ् ़ च्ब्स → ब्भ् ब्व्ब्स ़ च्व्ब्स ़भ्ब्स353 3 सूक्ष्म विभाजित धतुएं च्ब्स5 के साथ गरम करने पर संगत क्लोराइड बनाती हैं। 2।ह ़ च्ब्स5 → 2।हब्स ़ च्ब्स3 ैद ़ 2च्ब्स → ैदब्स ़ 2च्ब्स5 43 इसका उपयोग वुफछ काबर्निक यौगिकों के संश्लेषण में किया जाता है उदाहरणाथर् - ब्2भ्5ब्सए ब्भ्3ब्व्ब्स द्रव तथा गैसीय प्रावस्थाओं में इसकी संरचना त्रिासमनताक्ष द्विपिरैमिडी होती है जैसा यहाँ दशार्या गया है। तीनों निरक्षीय ;मुनंजवतपंसद्ध च्दृब्स आबंध् समतुल्य हैं। जबकि दो अक्षीय आबंध् ;ंगपंसद्ध निरक्षीय बंधें से बड़े हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि निरक्षीय आबंध् युगलों की तुलना में अक्षीय ;ंगपंसद्ध आबंध् युगलों पर अिाक प्रतिकषर्ण होता है। ठोस प्रावस्था में, यह एक आयनिक ठोस ख्च्ब्स4,़ख्च्ब्स6,दृ की तरह विद्यमान होता ़ दृहै, जिसमें धनायन ख्च्ब्स4 , चतुष्पफलकीय होता है तथा ट्टणायन ख्च्ब्स6, अष्टपफलकीय होता है। ़़ ़़7.9 फ़़़ ाॅस्फ़़़ ोरस केेे पफाॅस्पफोरस अनेक आॅक्सो अम्ल बनाता है। पफाॅस्पफोरस के महत्वपूणर् आॅक्सोअम्ल सूत्रा, बनाने की विध्ि तथा उनकी संरचनाओं में उपस्िथत कुछ अभ्िालक्षण्िाक आबंधें को सारणी 7.5 मेंआॅक्सो अम्ल दिया गया है। आॅक्सोअम्लों के संघटन भ्2व् अणु अथवा व्.परमाणु के ग्रहण करने या त्यागने की दृष्िट से परस्पर संबंध्ित होते हैं। कुछ महत्वपूणर् आॅक्सोअम्लों की संरचनाएं चित्रा 7.4 में दी गइर् हैं - ोरस के आॅक्सोअम्लफाॅस्प़ फ - प़ 7ण्5सारणी नाम सूत्रा ोरस कीफाॅस्प़ फप़अभ्िालक्षण्िाक आबंध् विरचन आक्सीकरण अवस्था तथा उनकी संख्या ोरस़हाइपोपफ फाॅस्प़ाफीनीकद्ध़़;पफाॅस्प्भ्च्व़् 1 एक च्.व्भ् श्वेत च्4 ़ क्षार32 दो च्.भ् एक च्त्रव् ोरस़आॅथोर् पफ फाॅस्प़भ्च्व़् 3 दो च्.व्भ् च्व् ़ भ्व्33 232;पफाॅस्प़्ाफोनिकद्ध़एक च्.भ् एक च्त्रव् ोरस़फपायरापफाॅस्प़भ्4च्2व्5 ़ 3 दो च्.व्भ् च्ब्स3 ़ भ्3च्व्3 दो च्.भ् दो च्त्रव् हाइपोपफाॅस्प़्ाफोरिक़भ्च्व़् 4 चार च्.व्भ् लाल च्4 ़ क्षार426 दो च्त्रव् एक च्दृच् ़आथोर्प्ाफाॅस्पफोरिक़भ्च्व़् 5 तीन च्.व्भ् च्व़्भ्व्34 4102एक च्त्रव् पायरो पफाॅस्प़़्ाफोरिक भ्च्व़् 5 चार च्.व्भ्427 दो च्त्रव् एक च्दृव्दृच् मेटापफाॅस्प़्ाफोरिक़’ ;भ्च्व्3द्धद ़ 5 तीन च्.व्भ् तीन च्त्रव् तीन च्दृव्दृच् ’केवल बहुलकी रूप में अस्ितत्व ;भ्च्व्3द्ध3 के अभ्िालक्षण्िाक आबंध् सारणी में दिए गए हैं। भ्3च्व्2 भ्च्व्भ्च्व्33 34 हाइपोपफास्पफोरस अम्ल आथोर्पफाॅस्पफोरस अम्ल आथोर्पफाॅस्पफोरिक अम्ल चित्रा 7.4 - प़्ाफाॅस्प़्ाफोरस के वुफछ प्रमुख आक्सोअम्लों की संरचनाएं ;भ्च्व्3द्ध3 साइक्लोट्राइमेटाप़्ाफाॅस्प़्ाफरिक अम्ल गमर् पफाॅस्प़़्ाफोरिक अम्ल पफाॅस्प़़्ाफोरस अम्ल ़ ठत2ए बन्द नली में गमर् भ्च्व्427 पायरोपफाॅस्पफोरिक अम्ल ;भ्च्व्3द्ध3 पाॅलीमेटापफाॅस्पफोरिक अम्ल ़आॅक्सोअम्लों में प्ाफाॅस्पफोरस अन्य परमाणुओं द्वारा चतुष्पफलकीय रूप से घ्िारा रहता है। सभी़अम्लों में कम - से - कम एक च्त्रव् आबंध् तथा एक च्.व्भ् आबंध् होता है। उन आक्ॅसोअम्लों में, जिनमें पफाॅस्प़्ाफोरस की निम्न आक्सीकरण अवस्था ;़़5 से कमद्ध होती है, च् त्र व् तथा च्दृ व्भ् आबंधें के अतिरिक्त या तो च्.च् ;जैसे भ्च्व् मेंद्ध या च्दृभ् ;जैसे भ्च्व् मेंद्ध22632आबंध् होते हैं, परंतु दोनों नहीं। पफाॅस्प़्ाफोरस की़़3 आॅक्सीकरण अवस्था वाले इन अम्लों की प्रवृिा, उच्च या निम्न आॅक्सीकरण अवस्थाओं में असमानुपातित होने वाली होती है। उदाहरण ़ाॅस्पफोरस अम्ल ;या पफाॅस्पफोरसअम्लद्ध गमर् करने पर असमानुपातित होकर आथोर्पफ़ फके लिए आथोर्प़़़़़ाफाॅस्पफोरिकअम्लद्ध तथा पफाॅस्पफीन देता है। ़़ ोरिक अम्ल ;या प्फाॅस्प़4भ् च्व् → 3भ् च्व् ़ च्भ्33 343 वह अम्ल जिनमें च्दृभ् आबंध् होते हैं, प्रबल अपचायक गुण वाले होते हैं। इसीलिए हाइपो पफाॅस्प़्ाफोरस अम्ल में दो़च्दृभ् आबंध् होने के कारण यह एक अच्छा अपचायक है तथा ये उदाहरण के लिए ।हछव्3 को धत्िवक चाँदी में अपचित कर देता है।4 ।हछव् ़ 2भ्व् ़ भ्च्व् → 4।ह ़ 4भ्छव् ़ भ्च्व्3232334 ये च्दृभ् आबंध् आयनीवृफत होकर भ़् नहीं देते तथा क्षारकता में कोइर् भूमिका नहीं निभाते। केवल वे ही हाइड्रोजन परमाणु आयनन योग्य होते हैं। जो और क्षारकता उत्पÂ करते हैं। च्दृव्भ् आबंध् में आक्ॅसीजन के साथ जुड़े रहते हैं। इसलिए भ्3च्व्3 तथा भ्3च्व्4 व्रफमशः द्विक्षारकीय और त्रिाक्षारकीय हैंऋ क्यांेकि भ्3च्व्3 की संरचना में दो च्.व्भ् आबंध् तथा भ्3च्व्4 तीन आबंध् होते हैं। 7.10 वगर् 16 के ेे तत्व 7.10.1 उपलब्ध्ता आवतर् सारणी के वगर् 16 में आॅक्सीजन, सल्पफर, सिलीनियम, टेल्यूरियम तथा पोलोनियम निहित हैं। यह कभी - कभी केल्कोजौन समूह की तरह जाना जाता है। यह नाम, ब्रास के लिए ग्रीक भाषा के शब्द से व्युत्पन्न हुआ है तथा सल्पफर एवं इसके समवंश्िायों का काॅपर के साथ संगुणन होने की ओर इंगित करता है। अध्िकांश काॅपर खनिजों में या तो आॅक्सीजन अथवा सल्पफर और बहुध वगर् के अन्य सदस्य पाए जाते हैं। पृथ्वी पर सभी तत्वों में से आॅक्सीजन सबसे अध्िक प्रचुरता में पाइर् जाती है। भूपपर्टी के द्रव्यमान का लगभग 46.6» आॅक्सीजन के द्वारा निमिर्त है। शुष्क वायु में आयतन के अनुसार 20.946» आॅक्सीजन होती है। हालाँकि भूपपर्टी में सल्पफर की उपलब्ध्ता केवल 0.03 से 0.1» है, संयुक्त अवस्था में सल्पफर मुख्यतया सल्पेफटों के रूप में जिप्सम ब्ंैव्4ण्2भ्2व्ए एपसम लवण डहैव्4ण्7भ्2व्ए बेराइट ठंैव्4 तथा सल्पफाइडों के रूप में गेलेना च्इैए यशद ब्लैंड र्दैए काॅपर पाइराॅइट ब्नथ्मै2 में पाइर् जाती है। सल्पफर की सूक्ष्म मात्रा ज्वालामुखी में हाइड्रोजन सल्पफाइड के रूप में पाइर् जाती है। काबर्निक पदाथोर्ंऋ जैसेकृ अंडे, प्रोटीन, लहसुन, प्याश, सरसों, बाल तथा उफन में सल्पफर होती है। सिलीनियम तथा टेल्यूरियम सल्पफाइड अयस्कों में धतु सेलेनाइडों तथा टेलुराइडों के रूप में पाए जाते हैं। पोलोनियम प्रवृफति में थोरियम तथा यूरेनियम खनिजों के विघटन उत्पाद के रूप में पाया जाता है। वगर् 16 के महत्वपूणर् परमाण्िवक एवं भौतिक गुण उनके इलेक्ट्राॅनिक विन्यास के आधार पर सारणी 7.6 में दिए गए हैं। कुछ परमाण्िवक भौतिक तथा रासायनिक गुणों और उनकी प्रवृिायों की विवेचना नीचे की गइर् है। सारणी 7ण्6 - वगर् 16 के तत्वों के कुछ भौतिक गुण ं एकल बंध् इ लगभग मान ब गलनांक पर क विषमलंबाक्ष गंध्कम षट्कोणीय ध्ूसर िएकनताक्ष रूप, 673 ज्ञण् ’ आॅक्सीजन, आक्ॅसीजन फ्रलुओराइडों, व्थ्2 तथा व्2थ्2 में व्रफमशः ़2 तथा ़1 आॅक्सीकरण अवस्था दशार्ती है। 7.10.2 इलेक्ट्राॅनिक विन्यास वगर् 16 के तत्वों के बाह्य कोशों में छः इलेक्ट्राॅन होते हैं तथा सामान्य इलेक्ट्राॅनिक विन्यास दे 2 दच 4 होता है। 7.10.3 परमाणु तथा वगर् में उफपर से नीचे की ओर बढ़ने पर कोशों की संख्या में वृि के कारण आयनी तथा परमाणु त्रिाज्याओं के मानों में वृि होती है। तथापि आॅक्सीजन परमाणु का आकार अपवादआयनी त्रिाज्या स्वरूप छोटा होता है। 7.10.4 आयनन एन्थैल्पी 7.10.5 इलेक्ट्राॅन लब्िध् एन्थैल्पी 7.10.6 विद्युत्ट्टणात्मकता वगर् में नीचे की ओर बढ़ने पर आयनन एन्थैल्पी में कमी होती है। इसका कारण आकार में वृि है। तथापि इस वगर् के तत्वों की आयनन एन्थैल्पी का मान वगर् 15 के संगत आवतों के तत्वों से निम्न होता है। इसका कारण यह है कि वगर् 15 के तत्वों में अतिरिक्त स्थायित्व प्राप्त अध्र्भरित इलेक्ट्राॅनिक विन्यास के चदृकक्षक उपस्िथत होते हैं। आॅक्सीजन परमाणु की सुसंब( प्रवृफति के कारण इसकी इलेक्ट्राॅन लब्िध् एन्थैल्पी सल्पफर की अपेक्षा कम ट्टणात्मक होती है। तथापि सल्पफर से पोलिनियम तक पुनः इसके मान कम ट्टणात्मक होते जाते हैं। फ्रलुओरीन के बाद, आॅक्सीजन की विद्युत्ट्टणात्मकता का मान, सब तत्वों से उच्चतम होता है। वगर् में परमाणु व्रफमांक में वृि के साथ विद्युत्ट्टणात्मकता में कमी होती जाती है। इससे यह प्रदश्िार्त होता है कि आॅक्सीजन से पोलोनियम तक धात्िवक लक्षणों में वृि होती है। 7.10.7 भौतिक गुण 7.10.8 रासायनिक गुण वगर् 16 के तत्वों के कुछ भौतिक गुण सारणी 7.6 में दिए गए हैं। आॅक्सीजन तथा सल्पफर अधतु, सिलीनियम तथा टेल्यूरियम उपधतु हैं जबकि पोलोनियम एक धतु है। पोलोनियम रेडियोध्मीर् होता है तथा अल्प आयु है ;अधर्यु 13.8 दिनद्ध। सभी तत्व अपररूपता प्रदश्िार्त करते हैं। वगर् में नीचे की ओर बढ़ने पर परमाणु व्रफमांक में वृि के साथ गलनांक तथा क्वथनांक में वृि होती है। आॅक्सीजन तथा सल्पफर के गलनांक और क्वथनांक के मध्य बहुत श्यादा अंतर को उनकी परमाणुकता के आधर पर समझाया जा सकता है। आॅक्सीजन द्विपरमाणुक अणु ;व्2द्ध के रूप में विद्यमान होता है जबकि सल्पफर बहुपरमाणुक अणु ;ै8द्ध के रूप में विद्यमान होता है। आॅक्सीकरण अवस्थाएं तथा रासायनिक वि्रफयाशीलता में प्रवृिायाँ वगर् 16 के तत्व अनेक आॅक्सीकरण अवस्थाएं ;सारणी 7.6द्ध प्रदश्िार्त करते हैं। - 2 आॅक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व वगर् में नीचे की ओर घटता है। पोलिनियम कतिपय ही - 2 आॅक्सीकरण अवस्था प्रदश्िार्त करता है। आॅक्सीजन की विद्युत्ट्टणात्मकता बहुत उच्च होने के कारण व्थ्2 के उदाहरण को छोड़ कर जिसमें इसकी आॅक्सीकरण अवस्था ़2 है। यह केवल - 2 ट्टणात्मक आॅक्सीकरण अवस्था दशार्ता है। वगर् के अन्य तत्व ़2ए ़4ए़6 आॅक्सीकरण अवस्थाएं दशार्ते हैं, लेकिन ़4 तथा ़6 अध्िक सामान्य हैं। सल्पफर सिलीनियम तथा टेल्यूरियम सामान्यतया आॅक्सीजन के साथ यौगिकों में ़4 आॅक्सीकरण अवस्था तथा फ्रलुओरीन के साथ यौगिकों में ़6 आॅक्सीकरण अवस्था दशार्ते हैं। वगर् में नीचे की ओर बढ़ने पर ़6 आॅक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व घटता है और ़4 आॅक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व बढ़ता है ;अिय युग्म प्रभावद्ध। ़4 तथा ़6 आॅक्सीकरण अवस्थाओं में आबंधन प्राथमिक रूप से सहसंयोजक होता है। आॅक्सीजन का असामान्य व्यवहार द्वितीय आवतर् में उपस्िथत च - ब्लाक के अन्य सदस्यों की भाँति आॅक्सीजन का असामान्य व्यवहार इसके छोटे आकार तथा उच्च विद्युत्ट्टणात्मकता के कारण होता है छोटे आकार तथा उच्च विद्युत्ट्टणात्मकता के प्रभावों का एक विश्िाष्ट उदाहरण जल में प्रबल हाइड्रोजन बंध् की उपस्िथति है जो कि भ्2ै में नहीं पाया जाता है। आॅक्सीजन में क कक्षकों की अनुपस्िथति के कारण इसकी सहसंयोजकता 4 तक सीमित होती है और व्यवहार में 2 से अध्िक दुलर्भ है। दूसरी ओर वगर् के अन्य तत्वों में संयोजकता कोश का विस्तार हो सकता है और सहसंयोजकता 4 से अध्िक होती है। ;पद्ध हाइड्रोजन के प्रति वि्रफयाशीलता वगर् 16 के सभी तत्व भ्2म् ;म् त्र व्ए ैए ैमए ज्मए च्वद्ध प्रकार के हाइड्राइड बनाते हैं। हाइड्राइडों के कुछ गुण सारणी 7.7 में दिए गए हैं। इनवफा अम्लीय गुण भ्2व् से भ्2ज्म तक बढ़ता है। अम्लीय गुण में वृि को वगर् में नीचे की ओर जाने पर के लिए बंध् ;भ्.म्द्ध वियोजन एन्थैल्पी में कमी द्वारा समझा जा सकता है। बंध् ;भ्.म्द्ध वियोजन एन्थैल्पी में वगर् में नीचे की ओर जाने पर कमी होने के कारण हाइड्राइडों के तापीय स्थायित्व में भी भ्2व् से लेकर भ्2च्व तक कमी होती है। जल के अतिरिक्त सभी हाइड्राइड अपचायक गुण वाले होते हैं तथा यह गुण भ्2ै से लेकर भ्2ज्म तक बढ़ता है। सारणी 7ण्7 - वगर् 16 के तत्वों के हाइड्राइडों के गुण ं जलीय विलयन, 298 ज्ञ ;पपद्ध आॅक्सीजन के प्रति वि्रफयाशीलता ये सभी तत्व म्व्2 तथा म्व्3 प्रकार के आॅक्साइड बनाते हैं जहाँ म् त्र ैए ैमए ज्म तथा च्व। ओजोन ;व्3द्ध तथा सल्पफर डाइआॅक्साइड ;ैव्2द्ध गैसें हैं जबकि सिलीनियम डाइआॅक्साइड ;ैमव्2द्ध एक ठोस है। डाइआॅक्साइड का अपचायक गुण ैव्2 से ज्मव्2 तक कम होता जाता है। ैव्2 एक अपचायक है जबकि ज्मव्2 एक आॅक्सीकारक है। म्व्2 प्रकार के आॅक्साइडों के अतिरिक्त सल्पफर, सिलीनियम तथा टेल्यूरियम म्व्3 प्रकार के आॅक्साइड ;ैव्3ए ैमव्3ए ज्मव्3द्ध भी बनाते हैं। दोनों प्रकार के आॅक्साइड अम्लीय प्रवृफति के होते हैं। ;पपपद्ध हैलोजन के प्रति वि्रफयाशीलता वगर् 16 के तत्व म्ग्6ए म्ग्4 तथा म्ग्2 प्रकार के अनेक हैलाइड बनाते हैं, जहाँ म् इस वगर् की धतु है तथा ग् एक हैलोजन है, हैलाइडों का स्थायित्व के घटने का व्रफम है थ्झब्सझठतझप्। हेक्साहैलाइडों में केवल हेक्साफ्रलुओराइड ही स्थायी हैलाइड होते हैं। सभी हेक्साफ्रलुओराइड गैसीय प्रवृफति के हैं। इनकी संरचना अष्टपफलकीय होती है। सल्पफर हेक्साफ्रलुओराइड, ैथ्6ए त्रिाविमीय कारणों से असाधरण रूप से स्थायी होता है। टेट्राफ्रलुओराइडों में से ैथ्4 एक गैस, ैमथ्4 द्रव तथा ज्मथ्4 एक ठोस है। ये हेक्साफ्रलुओराइड ेच3क संकरित होते हैं, अतः इनकी संरचना त्रिाकोणीय द्विपिरैमिडी होती है जिसमें एक निरक्षीय ;मुनंजवतपंसद्ध स्िथति पर एक एकाकी इलेक्ट्राॅन युगल होता है। यह ज्यामिति सी - साॅ ;ेमम.ेंूद्ध ज्यामिति भी कहलाती है। आॅक्सीजन को छोड़कर सभी तत्व डाइक्लोराइड तथा डाइब्रोमाइड बनाते हैं। यह डाइहेलाइड ैच्3 संकरण द्वारा बनते हैं तथा चतुष्पफलकीय संरचना के होते हैं। सुपरिचित मोनोलाइड द्वितयी ;कपउमतद्ध प्रवृफति के हैं जैसे ैथ्ए ैब्सए ैठतए ैमब्स तथा22222222ैम2ठत2 । यह द्वितयी हेलाइड निम्न प्रकार से असमानुपातित होते हैं - 2ैमब्स→ ैमब्स़ैम22 47.11 डाइआॅक्सीजन विरचन डाइआॅक्सीजन, प्रयोगशाला में निम्नलिख्िात विध्ियों से प्राप्त की जाती है। ;पद्ध आॅक्सीजन युक्त लवणों जैसे क्लारेटों, नाइट्रेटों तथा परमैंगनेटों को गमर् करने परकृ ताप2ज्ञब्सव्3 ⎯⎯⎯⎯2ज्ञब्स ़ 2→ 3व् डदव्2 ;पपद्ध वैद्युत रासायनिक श्रेणी में नीचे के तत्वों के आॅक्साइडों तथा कुछ धतुओं के उच्चतर आॅक्साइडों के तापीय विघटन द्वाराकृ 2।ह2व्;ेद्ध → 4।ह;ेद्ध ़ व्2;हद्ध 2भ्हव्;ेद्ध → 2भ्ह;सद्ध ़ व्2;हद्ध 2च्इ3व्4;ेद्ध → 6च्इव्;ेद्ध़व्2;हद्ध 2च्इव्2;ेद्ध → 2च्इव्;ेद्ध़व्2;हद्ध ;पपपद्ध हाइड्रोजन पाराॅक्साइड आसानी से उत्प्रेरक जैसे सूक्ष्म विभाजित धतुएं तथा मैंगनीज डाइआॅक्साइड द्वारा वियोजित होकर जल तथा डाइआॅक्सीजन देती हैं - 2भ्2व्2;ंुद्ध → 2भ्2व्;1द्ध ़ व्2;हद्ध व्यापक स्तर पर इसे जल या वायु से भी बनाया जा सकता है। जल के वैद्युत अपघटन में हाइड्रोजन वैफथोड पर तथा आॅक्सीजन ऐनोड पर मुक्त होती है। औद्योगिक रूप से, डाइआॅक्सीजन वायु से प्राप्त की जाती है। पहले काबर्न डाइआॅक्साइड तथा जल वाष्प को हटाते हैं, तत्पश्चात् बची गैसों को द्रवित करते हैं तथा आंश्िाक आसवन द्वारा डाइनाइट्रोजन तथा डाइआॅक्सीजन प्राप्त होती हैं। गुण डाइआॅक्सीजन एक रंगहीन, गंध्हीन गैस है। 293 ज्ञ ताप पर इसकी 100बउ3 जल में विलेयता 3ण्08बउ3 की सीमा तक होती है, जो कि समुद्री तथा जलीय जीवन के लिए पयार्प्त है। यह 90 ज्ञ पर द्रवीवृफत तथा 55 ज्ञ पर जम जाती है। आॅक्सीजन परमाणु के तीन स्थायी समस्थानिक हैंकृ 16व्ए 17व् तथा 18 व्। इलेक्ट्राॅनों की सम संख्या के होने पर भी आण्िवक आॅक्सीजन का अनुचुंबकीय होना विलक्षण है ;देखें कक्षा ग्प् रसायन पुस्तक एकक - 4द्ध। डाइआॅक्सीजन, केवल वुफछ धतुओं ;जैसे ।नए च्जद्ध तथा कुछ उत्वृफष्ट गैसों को छोड़कर लगभग सभी धतुओं और अधतुओं के साथ सीध्ी वि्रफया करती है। इसका अन्य तत्वों के साथ संयोग प्रायः प्रबल उष्माक्षेपी होता है जो अभ्िावि्रफया जारी रखने में सहायक होता है। हालाँकि अभ्िावि्रफया को प्रारंभ कराने के लिए उच्च बाह्य ताप की आवश्यकता होती है क्योंकि आॅक्सीजन - आॅक्सीजन द्विबंध् की आबंध् वियोजन एन्थैल्पी उच्च ;493ण्4 ाश्र उवसदृ1द्ध होती है। डाइआॅक्सीजन की धतुओं, अधतुओं तथा दूसरे यौगिकों के साथ कुछ अभ्िावि्रफयाएं नीचे दी गइर् हैं - 2ब्ं ़ व्2 → 2ब्ंव् 4।स ़ 3व् → 2।स व्2 23 च् ़ 5व् → च्व्4 2 410 ब् ़ व्2 → ब्व्2 2र्दै ़ 3व्→ 2र्दव् ़ 2ैव्22 ब्भ्4 ़ 2व्2 → ब्व्2 ़ 2भ् व्2 वुफछ यौगिकों का उत्प्रेरकी आक्सीकरण होता है। टव्जैसे - 2ैव् ़ व् ⎯⎯⎯⎯25→2ैव्22 3 ब्नब्स24भ्ब्स ़ व्2 ⎯⎯⎯⎯→ 2ब्स2 ़ 2भ् व्2 उपयोग सामान्य श्वसन तथा दहन प्रिया में इसकी महत्ता के अतिरिक्त आॅक्सीजन का उपयोग आॅक्सीऐसीटिलीन वेल्िंडग मेंऋ अनेक धतुओं के उत्पादन में, विशेषकर स्टील के लिए होती है। अध्िकतर अस्पतालों अत्यध्िक ऊँचाइर् पर उड़ानों तथा पवर्तारोहरण में आॅक्सीजन के सिलिंडर उपयोग किए जाते हैं। द्रव आॅक्सीजन में हाइड्रैशीन जैसे ईंध्नों का दहन राकेटों को ऊपर उठाने के लिए विस्मयकारी दबाव प्रदान करता है। 7.12 सामान्य आॅक्साइड 7.13 ओज़ ोन आॅक्सीजन का किसी अन्य तत्व के साथ द्विअंगी यौगिक आॅक्साइड कहलाता है। जैसा कि पहले बताया जा चुका है, आॅक्सीजन आवतर् सारणी के अध्िकतर तत्वों से अभ्िावि्रफया करके आॅक्साइड बनाती है। ऐसे बहुत से उदाहरण हैं जहाँ एक तत्व, दो या अध्िक आॅक्साइड बनाता है। आॅक्साइडों की प्रवृफति तथा गुणों में अत्यध्िक भ्िान्नता है। आॅक्साइड सामान्य ;जैसे डहव्ए ।सव्द्ध तथा संयुक्त ; च्इव्ए थ्मव्द्ध हो सकते हैं। सामान्य आॅक्साइडों को233434उनके अम्लीय, क्षारकीय तथा उभयध्मीर् गुणों से वगीर्वृफत किया जा सकता है। आॅक्साइड जो जल के साथ संयोग कर अम्ल देता है, अम्लीय आॅक्साइड कहलाता है ;जैसे, ैव्2ए ब्स2व्7ए ब्व्ए छव् द्ध उदाहरणाथर् ैव् जल के साथ संयोग कर भ्ैव् अम्ल देता है।225223ैव् ़ भ्व् → भ् ैव्22 23 सामान्य नियम के अनुसार केवल अधतु आॅक्साइड अम्लीय होते हैं परंतु कुछ धतुओं के आॅक्साइड जिनमें धतु की आॅक्सीकरण अवस्था उच्च होती है, अम्लीय होते हैं ;जैसे - डदव्ए ब्तव्ए टव्द्ध।27325आॅक्साइड जो जल में क्षारक देते हैं, क्षारकीय आॅक्साइड कहलाते हैं ;जैसे छं2व्ए ब्ंव्ए ठंव् द्ध उदाहरणाथर् ब्ंव् जल के साथ संयोग कर ब्ं;व्भ्द्ध2 क्षार देता है। ़ भ्व् → ब्ं ;व्भ्द्ध2ब्ंव् 2 सामान्यतया धत्िवक आॅक्साइड क्षारकीय होते हैं। कुछ धत्िवक आॅक्साइड द्वैत व्यवहार प्रदश्िार्त करते हैं। वे अम्लीय तथा क्षारकीय दोनों प्रकार के आॅक्साइडों के गुण प्रदश्िार्त करते हैं। इन आॅक्साइडों को उभयध्मीर् आक्साइड कहते हैं। वे अम्लों तथा क्षारकों, दोनों के साथ अभ्िावि्रफया करते हैं। उदाहरणाथर् - ।स2व्3 अम्लों व क्षारकों दोनों के साथ वि्रफया करता है। ;द्ध ;द्ध ।स;भ् व्द्ध 3़−।सव्3 े ़ 6भ्ब्स ;ंुद्ध़ 9भ् व् → 26 , ंुद्ध़ 6ब्स ंुद्ध22 स ख् 2 ;; ।स व् ; द्ध ़ 6छंव्भ्;ंुद्ध़ 3भ् व्;द्धस → 2छं ख्।स ;व्भ्द्ध ,;ंुद्धे23 236 वुफछ ऐसे आॅक्साइड हैं जो न तो अम्लीय होते हैं न ही क्षारकीय। ये आॅक्साइड उदासीन आॅक्साइड कहलाते हैं। ब्व्ए छव् तथा छ2व् उदासीन आॅक्साइडों के उदाहरण हैं। ओशोन आॅक्सीजन का अपररूप है, यह इतनी वि्रफयाशील होती है कि समुद्र तल की ऊँचाइर् पर यह लंबे समय तक वातावरण में नहीं रहती। लगभग 20 ाउ ऊँचाइर् पर यह सूयर् के प्रकाश की उपस्िथति में वायुमंडलीय आॅक्सीजन से बनती है। यह ओशोन परत भू - पृष्ठ को पराबैंगनी विकिरणों ;न्टद्ध की अध्िक मात्रा से बचाती है। विरचन आॅक्सीजन की एक मंद शुष्क धरा निरव वैद्युत विसजर्न से गुशरे जाने पर ओशोन में परिवतिर्त ;10»द्ध हो जाती है। 3व्2 → 2व्3 Δभ्ट;298 ज्ञद्ध त्र ़142 ाश्र उवसदृ1 चूँकि आॅक्सीजन से ओशोन का विरचन एक उष्माशोषी प्रव्रफम है, अतः इसके विरचन में निरव वैद्युत विसजर्न का उपयोग आवश्यक है ताकि इसका विघटन न हो। यदि ओशोन की 10» से अध्िक सांद्रता की आवश्यकता हो तो ओशोनित्रों की बैटरी का उपयोग किया जा सकता है तथा शु( ओशोन ;385 ज्ञ क्वथनांकद्ध को एक द्रव आॅक्सीजन से घ्िारे पात्रा में संघनित किया जा सकता है। गुण शु( ओशोन एक हल्की पीत - नीली गैस, गहरा नीला द्रव तथा बैंगनी - काला ठोस होती है। ओशोन की अभ्िालक्षण्िाक गंध् होती है और थोड़ी मात्रा में यह हानिकारक नहीं होती। परंतु यदि सांद्रता 100 भाग प्रति मिलियन ;100 चचउद्ध से अध्िक बढ़ जाए तो श्वास लेने में असुविध होती है जिससे सिरददर् व मितली उत्पन्न होती है। ओशोन उष्मागतिकीय रूप से आॅक्सीजन की तुलना में अस्थायी हैऋ क्योंकि इसके आॅक्सीजन में विघटन से उष्मा मुक्त ;Δभ् ट्टणात्मकद्ध होती है और एन्ट्राॅपी ;Δै ध्नात्मकद्ध में वृि होती है। दोनों प्रभाव एक - दूसरे को प्रबलित करते हैं जो इसके आॅक्सीजन में परिवतर्न के लिए गिब्श उफजार् ;Δळद्ध परिवतर्न का अध्िक ट्टणात्मक मान देते हैं। इसलिए यह वास्तव में आश्चयर्जनक नहीं है कि ओशोन की उच्च सांद्रता भयंकर विस्पफोटक हो सकती है। यह बहुत आसानी से नवजात आॅक्सीजन मुक्त करने के कारण ;व्3 → व्2 ़ व्द्ध प्रबल आॅक्सीकारक होती है। उदाहरण के लिए यह लेड सल्पफाइड को लेड सल्पेफट में और आयोडाइड आयनों की आयोडीन में आॅक्सीवृफत करती है। च्इै;ेद्ध ़ 4व्3;हद्ध → च्इैव्4;ेद्ध ़ 4व्2;हद्ध 2प्दृ;ंुद्ध ़ भ्2व्;सद्ध ़ व्3;हद्ध → 2व्भ्.;ंुद्ध ़ प्2;ेद्ध ़ व्2;हद्ध जब ओशोन, बोरेट बप़फर ;उभय प्रतिरोध्ीद्ध ;चभ् 9ण्2द्ध से उभय प्रतिरोध्ित पोटैश्िायम आयोडाइड विलयन के आध्िक्य से अभ्िावि्रफया करती है तो आयोडीन मुक्त होती है जिसका मानक सोडियम थायोसल्पेफट विलयन के साथ अनुमापन किया जा सकता है। यह व्3 गैस के आकलन की मात्रात्मक विध्ि है। प्रयोग दशार्ते हैं कि नाइट्रोजन के आॅक्साइड ;विशेष रूप से नाइटिªक आॅक्साइडद्ध ओशोन के साथ अत्यध्िक तीव्रता से संयुक्त होते हैं। अतः यह सम्भव है कि सुपरसोनिक जेट विमानों के निकास तंत्रा से उत्सजिर्त नाइट्रोजन आॅक्साइड उफपरी वायुमंडल में ओशोन परत की सांद्रता में मंद गति से क्षरण कर रही हो। छव् ह ; द्ध़ व् ;हद्ध→ छव् ;हद्ध़ व् ;हद्ध3 22 इस ओशोन परत को दूसरा खतरा संभवतया पे्रफआॅनों के उपयोग से है जिनका उपयोग ऐरोसोल स्प्रे तथा प्रशीतकों के रूप में किया जाता है। ओशोन अणु में दो आॅक्सीजन - आॅक्सीजन आबंध् लंबाइयाँ समान हैं। ;128 चउद्ध और जैसा कि अपेक्ष्िात है अणु कोणीय है जिसमें बंध्क कोण लगभग 117व है। यह निम्नलिख्िात दो प्रमुख रूपों का अनुनादी संकर है - उपयोग यह एक ;जमर्नाशीद्ध कीटाणु विसंक्रासी तथा जल को रोगाणुरहित ;निजर्मर्द्ध करने में उपयोग किया जाता है। इसका तेलों, हाथीदाँत, आटे तथा स्टाचर् आदि को विरंजित करने में भी उपयोग किया जाता है। पोटैश्िायम परमैंगनेट के उत्पादन में यह एक आॅक्सीकारक के रूप में कायर् करती है। पाठ्यनिहित प्रश्न 7ण्18 व्3ए एक प्रबल आॅक्सीकारक की तरह क्यों वि्रफया करती है? 7ण्19 व्3 का मात्रात्मक आकलन वैफसे किया जाता है? 7.14 सल्फर केेे सल्पफर के अनेक अपररूप हैं जिसमें पीली विषमलंबाक्ष ;α−सल्पफरद्ध तथा एकनताक्ष ;β−सल्पफरद्ध रूप अति महत्वपूणर् हैं। कक्षताप पर विषमलंबाक्ष सल्पफर स्थायी अपररूप है जोअपररूप 369 ज्ञ ताप पर गमर् करने से एकनताक्ष ;उवदवबसपदपबद्ध सल्पफर में रूपांतरित हो जाती है। विषमलंबाक्ष सल्पफर ;α−सल्पफरद्ध यह अपररूप पीले रंग का होता है जिसका गलनांक 385ण्8 ज्ञ तथा विश्िाष्ट घनत्व 206 होता है। विषमलंबाक्ष सल्पफर के वि्रफस्टल गंध्क शलाका के ब्ै2 में विलयन को वाष्पीकृत करके बनाए जाते हैं यह जल में अविलेय है परंतु कुछ मात्रा में बेन्शीन, एल्कोहाॅल तथा इर्थर में विलेय है। यह ब्ै2 में पूणर्तया विलेय है। एकनताक्ष सल्पफर ;β−सल्पफरद्ध;कद्ध इसका गलनांक 393 ज्ञ है तथा विश्िाष्ट घनत्व 1.98 है यह ब्ै2 में विलेय है। सल्पफर के इस अपररूप को बनाने के लिए विषमलंबाक्ष गंध्क को एक तश्तरी में पिघलाकर तथा पपड़ी बनने तक ठंडा करते हैं। इस पपड़ी में दो छिद्र करते हैं। जिनमें से बचा हुआ द्रव निकाल लिया जाता है। पपड़ी को हटाने पर, रंगहीन, सुइर् के आकार के β−सल्पफर के वि्रफस्टल बनते हैं। यह 369 ज्ञ के उफपर ताप पर स्थायी है तथा इसके नीचे ताप पर α−सल्पफर में रूपांतरित हो जाती है। इसके विपरीत α−सल्पफर 369 ज्ञ से नीचे ताप पर स्थायी है तथा इसके उफपर ताप पर β−सल्पफर में रूपांतरित हो जाती है। 369 Κ पर दोनों रूप स्थायी ;खद्ध हैं। यह ताप, संव्रफमण ताप कहलाता है। विषमलंबाक्ष तथा एकनताक्ष दोनों ही सल्पफर अपररुपों में ै अणु होते हैं। यह ै अणु विभ्िान्न प्रकार से संवुफलित होकर विभ्िान्नचित्रा 7.5 ;कद्ध विषमलंबाक्ष सल्पफर 8 8वि्रफस्टलीय संरचनाएँ बनाते हैं। दोनों अपररूपों में ै वलय प्रवुंफचित होती हैं तथामें ै8 वलय तथा 8किरीटाकार ;बतवूद ेींचमकद्ध होती है। आण्िवक विमाएं चित्रा 7.5 ;कद्ध में प्रदश्िार्त;खद्ध ै रूप संरचनाएं6 की गइर् हैं। पिछले दो दशकों में सल्पफर के अनेक रूपांतरण संश्लेष्िात किए गए हैं जिनमें 6 - 20 सल्पफर परमाणु युक्त वलय होती हैं। साइक्लो ै6 वलय में कुसीर् रूप धरण करती है जिसकी विमाएं चित्रा 7.5 ;खद्ध में दशार्इर् गइर् हैं। उदाहरण 7ण्12 सल्पफर का कौन सा रूप अनुचुंबकीय व्यवहार प्रदश्िार्त करता है? हल वाष्प अवस्था में सल्पफर आंश्िाक रूप में ै2 अणु के रूप में पाया जाता है, जिसमें व्2 की तरह प्रतिआबंध्न आबिर्टल π∗ में अयुग्िमत इलेक्ट्राॅन होने के कारण अनुचंुबकत्व का गुण प्रदश्िार्त होता है। 7.15 सल्फर डाइआॅक्साइड विरचन सल्पफर डाइआॅक्साइड सल्पफर को वायु या आॅक्सीजन में जलाने पर तब बनती है साथ ही सूक्ष्म रूप में ;6 - 8»द्ध सल्पफर ट्राइआॅक्साइड भी बनती है ै;ेद्ध ़ व्2;हद्ध → ैव्2 ;हद्ध प्रयोगशाला में, यह किसी सल्पफाइट की सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ अभ्िावि्रफया करके आसानी से बन जाती है। ैव्32.;ंुद्ध ़ 2भ़् ;ंुद्ध → भ्2व्;सद्ध ़ ैव्2 ;हद्ध इसका औद्योगिक उत्पादन सल्पफाइड अयस्कों के भजर्न से सहउत्पाद के रूप में होता है। 4थ्मै ; द्ध ़11व् ;हद्ध→ 2थ्म व् ; द्ध ़ 8ैव् ;हद्धेे22 232 गैस को शुष्क करने के पश्चात् दाब द्वारा द्रवीवृफत किया जाता है तथा स्टील के सि¯लडरों में संग्रह कर लिया जाता है। गुण सल्पफर डाइआॅक्साइड तीखी गंध् वाली रंगहीन गैस है तथा जल में अत्यध्िक विलेय है। यह कक्ष ताप व दो वायुमंडलीय दाब पर द्रवित होती है तथा 263 ज्ञ पर उबलती है। सल्पफर डाइआॅक्साइड को जल में प्रवाहित करने पर सल्फ्रयूरस अम्ल का विलयन प्राप्त होता है। ैव् ह ़ भ्व्स क् भ् ैव् ंु2 ;द्ध 2 ;द्ध 23 ;द्ध यह सोडियम हाइड्राॅक्साइड विलयन के साथ आसानी से अभ्िािया कर सोडियम सल्पफाइट बनाती है जो कि सल्पफर डाइआॅक्साइड की और अध्िक मात्रा के साथ अभ्िावि्रफया कर सोडियम हाइड्रोजन सल्पफाइट बनाता है। 2छंव्भ् ़ ैव्→ छंैव् ़ भ्व्2 232छंैव् ़ भ्व् ़ ैव्→ 2छंभ्ैव्2322 3 जल तथा क्षार के साथ अभ्िावि्रफया में सल्पफर डाइआॅक्साइड का व्यवहार काबर्न डाइ आॅक्साइड से बहुत मिलता - जुलता है। सल्पफर डाइआॅक्साइड चारकोल की उपस्िथति में क्लोरीन के साथ जो कि उत्प्रेरक की तरह कायर् करता है। अभ्िािया करने पर सल्फ्रयूरिवफ क्लोराइड ैव्2ब्स देता है। यह आॅक्सीजन द्वारा वेनेडियम ;अद्ध आॅक्साइड उत्प्रेरक की उपस्िथति में आक्सीवृफत होकर सल्पफर ट्राइआॅक्साइड बनाता है। ैव्2;हद्ध ़ ब्प्2 ;हद्ध → ैव्2ब्प्2;सद्ध टव्2ैव् ;हद्ध़ व् ;हद्ध ⎯⎯⎯⎯25→ 2ैव् ;हद्ध22 3 नम सल्पफर डाइआॅक्साइड अपचायक की तरह व्यवहार करती है। उदाहरणाथर् यह आयरन ;प्प्प्द्ध आयन को आयरन ;प्प्द्ध आयन में परिवतिर्त करती है तथा अम्लीय पोटैश्िायम परमैंगनेट ;टप्प्द्ध विलयन को रंगहीन कर देती है। बाद की अभ्िावि्रफया गैस के परीक्षण के लिए सुविधाजनक है। 3़ 2़ 2−़2थ्म ़ ैव् ़ 2भ् व् → 2थ्म ़ ैव् ़ 4भ्2 2 4 − 2−़ 2़5ैव् ़ 2डदव् ़ 2भ् व् → 5ैव् ़ 4भ् ़ 2डद242 4 ैव्2 का अणु कोणीय है यह दो विहित रूपों का अनुनाद संकर है उपयोग सल्पफर डाइआॅक्साइड का उपयोग होता है - ;पद्ध शकर्रा एवं पेट्रोलियम के शोध्न में ;पपद्ध उफन तथा रेशम के विरंजन में ;पपपद्ध प्रतिक्लोर, विसंक्रामक तथा परिरक्षक के रूप में। सल्पफर डाइआॅक्साइड से सल्फ्रयूरिक अम्ल, सोडियम हाइड्रोजनसल्पफाइट तथा वैफल्िसयम हाइड्रोजन सल्पफाइट ;औद्योगिक रसायनद्ध का उत्पादन होता है। द्रव ैव्2 अनेक काबर्निक तथा अकाबर्निक रसायनों के लिए विलायक के रूप में प्रयुक्त होती है। पाठ्यनिहित प्रश्न 7ण्20 तब क्या होता है जब सल्पफर डाइआॅक्साइड को थ्म;प्प्प्द्ध लवण के जलीय विलयन में से प्रवाहित करते हैं? 7ण्21 दो ैदृव् आबंधें की प्रवृफति पर टिप्पणी कीजिए जो ैव्2 अणु बनाते हैं क्या ैव्2 अणु के ये दोनों ैदृव् आबंध् समतुल्य हैं। 7ण्22 ैव्2 की उपस्िथति का पता वैफसे लगाया जाता है? 7.16 सल्फर केेे सल्पफर अनेक आॅक्सोअम्ल बनाता है जैसे आॅक्सोअम्ल भ्ैव्ए भ्ैव्ए भ्ैव्ए भ्ैव्ए भ्ैव्232232242252ग ;ग त्र 2 से 5द्ध, भ्ैव्ए भ्ैव्ए भ्ैव्ए भ्ैव्8ण्242272522वुफछ आॅक्सोअम्ल अस्थायी होते हैं तथा इनका पृथक्करण नहीं किया जा सकता। इनका अस्ितत्व जलीय विलयन में अथवा लवणों के रूप में होता है। सल्पफर के कुछ महत्वपूणर् आॅक्सोअम्लों की संरचनाएं चित्रा 7.6 में दशार्इर् गइर् हैं। सल्फ्रयूरस अम्ल सल्फ्रयूरिक अम्ल परआॅक्सोडाइसल्फ्रयूरिक अम्ल पाइरोसल्फ्रयूरिक अम्ल ;ओलियमद्ध ;भ्2ैव्3द्ध ;भ्2ैव्4द्ध ;भ्ैव्द्ध ;भ्ैव्द्ध228 227चित्रा 7.6 - सल्पफर के कुछ महत्वपूणर् आॅक्सोअम्लों की संरचनाएं 7.17 सल्फ्यूरिक अम्ल उत्पादन पूरे विश्व में, सल्फ्रयूरिक अम्ल अतिमहत्वपूणर् औद्योगिक रसायनों में से एक है। सल्फ्रयूरिक अम्ल का उत्पादन संस्पशर् प्रक्रम द्वारा तीन चरणों में संपन्न होता है। ;पद्धसल्पफर अथवा सल्पफाइड अयस्कों को वायु में जलाकर सल्पफर डाइआॅक्साइड का उत्पादन करना। ;पपद्धउत्प्रेरक ;ट2व्5द्ध की उपस्िथति में आॅक्सीजन के साथ अभ्िािया कराकर ैव्2 का ैव्3 में परिवतर्न करना। ;पपपद्धैव्3 को सल्फ्रयूरिक अम्ल में अवशोष्िात करके ओलियम ;भ्2ै2व्7द्ध प्राप्त करना। सल्फ्रयूरिक अम्ल के उत्पादन का प्रवाह चित्रा, चित्रा 7.7 में दिया गया है। जल की सांद्र सल्फ्रयूरिक अशु( पफुहार अम्ल की पफुहार सांद्र भ्2ैव्4 ैव्2 ़ व्2 शुष्कैव्2 ़ व्2 ैव्3 ट2व्5 सल्पफर क्वाटर््श पूवर्तापक वायु उत्प्रेरकीय परिवतर्कअपश्िास्ट ओलियमसल्पफर बनर्र अम्ल भ्ैव्अपश्िास्ट जलआसेर्निक शुिकारकधेने एवं शुष्कन 227 जिलेटनी पेफरिकध्ूल अवक्षेपक शीतलीकरण के मीनार हाइड्राॅक्साइड युक्तलिए मीनार चित्रा 7.7 - सल्फ्रयूरिक अम्ल के उत्पादन का प्रवाह चित्रा प्राप्त सल्पफर डाइआॅक्साइड को ध्ूल के कणों एवं आसेर्निक यौगिकों जैसी अन्य अशुियों से मुक्त कर शु( कर लिया जाता है। सल्फ्रयूरिक अम्ल के उत्पादन में आॅक्सीजन द्वारा ैव्2 गैस का ट2व्5 उत्प्रेरक की उपस्िथति में ैव्3 प्राप्त करने के लिए उत्प्रेरकी आॅक्सीकरण मूल पद है। टव् 2 50 −1 हह →ह त्र− 2ैव् 2 ; द्ध़ व्2 ; द्ध ⎯⎯⎯⎯2ैव् 3 ;द्ध Δ त भ् 196ण्6 ाश्रउवस यह अभ्िािया उष्माक्षेपी तथा उत्क्रमणीय है एवं अग्र अभ्िािया में आयतन में कमी आती है। अतः कम ताप और उच्च दाब उच्च लब्िध् ;लपमसकद्ध के लिए उपयुक्त स्िथतियाँ हैं। परंतु तापक्रम बहुत कम नहीं होना चाहिए अन्यथा अभ्िािया की गति धीमी हो जाएगी। सल्फ्रयूरिक अम्ल के उत्पादन में प्रयुक्त सयंत्रा का संचालन 2 इंत दाब तथा 720 ज्ञ ताप पर किया जाता है। उत्प्रेरकी परिवतिर्त्रा से प्राप्त ैव्3 गैस, सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल में अवशोष्िात होकर ओलियम, भ्2ै2व्7 बना देती है। जल द्वारा ओलियम का तनुकरण करके वांछित सांद्रता वाला सल्फ्रयूरिक अम्ल प्राप्त कर लिया जाता है। प्रक्रम के सतत संचालन तथा लागत में भी कमी लाने के लिए उद्योग में उपरोक्त दोनों प्रियाएं साथ - साथ संपन्न की जाती हैं। ैव् ़ भ्ैव्→ भ्ैव्324227;ओलियमद्ध भ्ैव् ़ भ्व्→ 2भ्ैव्227224 संपकर् विध्ि द्वारा प्राप्त सल्फ्रयूरिक अम्ल की शु(ता सामान्यतः 96 दृ 98ः होती है। गुण सल्फ्रयूरिक अम्ल एक रंगहीन, गाढ़ा तैलीय द्रव है जिसका 298 ज्ञ ताप पर विश्िाष्ट घनत्व 1ण्84 ह बउदृ3 है। 283 ज्ञ ताप पर अम्ल जम जाता है तथा 611 ज्ञ ताप पर उबलने लगता है। यह जल में अत्यध्िक ऊष्मा निगर्मन के साथ घुलता है, अतः सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल का तनुकरण करने में बहुत सावधनी रखनी चाहिए। सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल को जल में कम मात्रा में, ध्ीमे - ध्ीमे डालना चाहिए तथा उसको लगातार हिलातेे रहना चाहिए। सल्फ्रयूरिक अम्ल की रासायनिक अभ्िाियाएं इसकी निम्न विशेषताओं के पफलस्वरूप हैं - ;कद्ध निम्न वाष्पशीलता ;खद्ध प्रबल अम्लीय गुण ;गद्ध जल के प्रति प्रबल बंध्ुता तथा ;घद्ध आॅक्सीकरण कमर्क का गुण। जलीय विलयन में सल्फ्रयूरिक अम्ल का आयनन दो चरणों में होता है - भ्ैव् ;ंुद्ध ़ भ्व्;सद्ध → भ्व़् ;ंुद्ध ़ भ्ैव्दृ ;ंुद्धय ज्ञ त्र बहुत अध्िक242341;ज्ञं1 झ 10द्ध दृ़2दृदृ2भ्ैव् ;ंुद्ध ़ भ्व् ;सद्ध → भ्व् ;ंुद्ध ़ ैव् ;ंुद्धय ज्ञ त्र 1ण्2 × 10423 42ज्ञ ं का अध्िक मान यह दशार्ता है कि भ्2ैव्4 अध्िकतर भ़् तथा भ्ैव्4 दृ में 1 वियोजित है। वियोजन स्िथरांक ;ज्ञंद्ध का अध्िक मान अम्ल की अध्िक प्रबलता दशार्ता है। अम्ल लवणों की दो श्रेण्िायाँ देता है, सामान्य सल्पेफट ;जैसे सोडियम सल्पेफट तथा काॅपर सल्पेफटद्ध एवं अम्लीय सल्पेफट ;जैसे सोडियम हाइड्रोजनसल्पेफटद्ध। निम्न वाष्पशीलता के कारण सल्फ्रयूरिक अम्ल का उपयोग अध्िक वाष्पशील अम्लों के उनके संगत लवणों से उत्पादित करने के लिए किया जाता है। 2 डग् ़ भ्ैव्→ 2भ्ग् ़ डैव्24 24 ;ड त्र धतुद्ध ;ग् त्र थ्ए ब्सए छव्3द्ध सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल एक प्रबल निजर्लन कमर्क है। अनेक नम गैसों को सल्फ्रयूरिक अम्ल में से प्रवाहित करके शुष्क किया जाता है, यदि ये गैसें सल्फ्रयूरिक अम्ल से अभ्िािया न करती हों। सल्फ्रयूरिक अम्ल काबर्निक पदाथो± से जल निष्कासित करता है जैसा इसकी काबार्ेहाइड्रेट पर आदग्ध्न िया से स्पष्ट है। भ् ैव्24ब्भ्व्⎯⎯⎯⎯→ 12 ब् ़ 11 भ्व्122211 2गरम सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल एक मध्यम प्रबलता का आॅक्सीकारक है। इस संदभर् में इसका स्थान पफाॅस्पफोरिक अम्ल तथा नाइटिªक अम्ल के बीच आता है। धतुएं तथा अधतुएं दोनों ही सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल द्वारा आॅक्सीकृत हो जाती हैं तथा इस प्रिया में सल्फ्रयूरिक अम्ल ैव्2 में अपचित हो जाता है। ब्न ़ 2 भ् ैव्;सांद्रद्ध → ब्न ैव् ़ ैव् ़ 2 भ्व्24 422ै ़ 2 भ् ैव्;सांद्रद्ध → 3 ैव् ़ 2 भ्व्24 22ब् ़ 2 भ् ैव्;सांद्रद्ध → ब्व् ़ 2 ैव् ़ 2 भ्व्24 222उपयोग सल्फ्रयूरिक अम्ल एक अत्यध्िक महत्वपूणर् औद्योगिक रसायन है। किसी राष्ट्र की औद्योगिक सामथ्यर् उस राष्ट्र में सल्फ्रयूरिक अम्ल के उत्पादन और उपयोग में आने वाली मात्रा के आधार पर आँकी जा सकती है। सल्फ्रयूरिक अम्ल की आवश्यकता, हशारों यौगिकों के उत्पादन तथा बहुत से औद्योगिक प्रक्रमों में होती है। इस अम्ल की अध्िकांश मात्रा का उपयोग उवर्रकों के उत्पादन में किया जाता है ;उदाहरण - अमोनियम सल्पेफट, सुपरपफाॅस्पफेटद्ध। सल्फ्रयूरिक अम्ल के अन्य उपयोग हैं - ;कद्ध पेट्रोलियम के शोध्न मेंऋ ;खद्ध वणर्कों, प्रलेपों तथा रंजकों के मध्यव£तयों के उत्पादन मेंऋ ;गद्ध अपमाजर्क उद्योग मेंऋ ;घद्ध धतुकमीर्य प्रक्रमों में ;उदाहरण इनेमलन वैद्युतलेपन एवं यशदलेपन के पहले धतुओं के शोध्न मेंद्धऋ ;चद्ध संचायक बैटरियों मेंऋ ;छद्ध और नाइट्रोसेलुलोज उत्पादों के उत्पादन में तथा ;जद्ध प्रयोगशाला अभ्िाकमर्क की तरह। 7.18 वगर् 17 के ेे तत्व 7.18.1 उपलब्ध्ता फ्रलुओरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन तथा ऐस्टैटीन वगर् 17 के सदस्य हैं। ये तत्व संयुक्त रूप से हैलोजन कहलाते हैं ¹ग्रीक भाषा में हेलो का अथर् है लवण तथा जेनेस का अथर् है उत्पन्न करना अथार्त लवण पैदा करने वालेह् हैलोजन अति ियाशील अधतु तत्व हैं। वगर् 1 व 2 की तरह वगर् 17 के तत्व भी आपस में बहुत अध्िक समानता दशार्ते हैं। इतनी समानता आवतर् सारणी के अन्य वगो± के तत्वों में नहीं पाइर् जाती। इनके रासायनिक तथा भौतिक गुणों में भी नियमित परिवतर्न होता है। ऐस्टैटीन रेडियोध्मीर् तत्व है। फ्रलुओरीन और क्लोरीन बहुलता से उपलब्ध् है जबकि ब्रोमीन तथा आयोडीन कम मात्रा में। फ्रलुओरीन मुख्यतया अविलेय फ्रलुओराइडों ;फ्रलुओरस्पार ब्ंथ्2, क्रायोलाइट छं3।सथ्6 तथा फ्रलुओरएपेटाइट 3ब्ं3;च्व्4द्ध2ऽ ब्ंथ्2द्ध और थोड़ी मात्रा में नदी जल, पादपों, जीवों की हडि्डयों तथा दाँतों में उपस्िथत होती है। समुद्री पानी में सोडियम पोटैश्िायम मैग्नीश्िायम तथा वैफल्िशयम के क्लोराइड, ब्रोमाइड तथा आयोडाइड उपस्िथत होते हैं लेकिन मुख्यतया यह सोडियम क्लोराइड विलयन ;द्रव्यमान द्वारा 2ण्5ःद्ध है। शुष्क हुए समुद्री निक्षेपों में सोडियम क्लोराइड तथा कारनेलाइट ज्ञब्स ऽ डहब्स2 ऽ 6भ्2व् जैसे यौगिक उपस्िथत होते हैं। वुफछ समुद्री जीवों के तंत्रा में आयोडीन होती हैऋ बहुत से समुद्री पादपों में 0ण्5ः आयोडीन तथा चिली साल्टपीटर में 0ण्2ः तक सोडियम आयोडेट पाया जाता है। वगर् 17 के तत्वों के परमाण्िवक तथा भौतिक गुण एवं इलेक्ट्राॅनिक विन्यास के साथ सारणी 7.8 में दिए गए हैं। सारणी 7ण्8 - हैलोजनों के परमाण्िवक एवं भौतिक गुण ं रेडियोध्मीर् इ पाॅलिंग स्केल ब द्रव के लिए कोष्ठ में दिया गया ताप ज्ञ दशार्ता है क ठोस म अध्र्सेल अभ्िािया ग्;।हद्ध ़ 2म दृ → 2ग् दृ ;ंुद्ध 7.18.2 इलेक्ट्राॅनिक विन्यास 7.18.3 परमाणु तथा आयनी त्रिाज्या 7.18.4 आयनन एन्थैल्पी 2कुछ परमाण्िवक भौतिक तथा रासायनिक गुणों की प्रवृिा नीचे की गइर् है - इन सभी तत्वों के बाह्यतम कोश में सात इलेक्ट्राॅन ;दे 2 दच 5द्ध होते हैं। जो कि उससे अगली उत्कृष्ट गैस से एक इलेक्ट्राॅन कम होता है। अध्िकतम प्रभावी नाभ्िाकीय आवेश के कारण हैलोजनों की आयनी त्रिाज्या अपने यथाक्रम आवतीर् में सबसे छोटी होती है। फ्रलुओरीन की परमाणु त्रिाज्या दूसरे आवतर् के अन्य तत्वों के समान बहुत छोटी होती है। क्वान्टम कोशों की संख्या में फ्रलुओरीन से आयोडीन तक वृि होने के कारण परमाणु तथा आयनी त्रिाज्या में वृि होती है। इनकी इलेक्ट्राॅन त्यागने की प्रवृिा कम होती है। इसलिए इनकी बहुत उच्च आयनन एन्थैल्पी होती है। परमाण्िवक आकार में वृि होने के कारण वगर् में नीचे की ओर आने पर आयनन एन्थैल्पी में कमी होती है। 7.18.5 इलेक्ट्राॅन लब्िध् एन्थैल्पी 7.18.6 विद्युत्)णात्मकता संगत आवतो± में हैलोजनों की इलेक्ट्राॅन लब्िध् एन्थैल्पी सबसे अध्िक )णात्मक होती है। इसका कारण यह है कि इन तत्वों के परमाणुओं में स्थायी उत्कृष्ट गैस विन्यास से केवल एक इलेक्ट्राॅन कम होता है। वगर् में नीचे जाने पर वगर् के तत्वों की इलेक्ट्राॅन लब्िध् एन्थैल्पी कम )णात्मक होती जाती है। हालाँकि फ्रलुओरीन की )णात्मक इलेक्ट्राॅन लब्िध् एन्थैल्पी क्लोरीन की तुलना में कम होती है। ऐसा फ्रलुओरीन परमाणु के छोटे आकार के कारण होता है। परिणामस्वरूप फ्रलुओरीन के अपेक्षाकृत छोटे 2च कक्षकों में प्रबल अंतरइलेक्ट्राॅनिक प्रतिकषर्ण होते हैं। अतः आने वाला इलेक्ट्राॅन श्यादा आकषर्ण अनुभव नहीं करता। इनकी विद्युत्)णात्मकता बहुत उच्च होती है। वगर् में नीचे की ओर विद्युत्)णात्मकता में कमी होती जाती है। आवतर् सारणी में फ्रलुओरीन सबसे अध्िक विद्युत्)णात्मक तत्व हैं। 7.18.7 भौतिक गुण हैलोजन अपने भौतिक गुणों में अबाध् विचरण दशार्ते हैं। फ्रलुओरीन तथा क्लोरीन गैस हैं, ब्रोमीन एक द्रव तथा आयोडीन एक ठोस है। बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के साथ इनके गलनांक तथा क्वथनांकों में नियमित रूप से वृि होती है। सभी हैलोजन रंगीन होते हैं। इसका कारण यह है कि दृश्य प्रक्षेत्रा में विकिरणों का अवशोषण होता है तथा बाह्यतम कोश के इलेक्ट्राॅन उत्तेजित होकर उच्च ऊजार् स्तर में चले जाते हैं। विकिरण के भ्िान्न - भ्िान्न क्वान्टम अवशोष्िात करने के कारण वे अलग - अलग रंग प्रदश्िार्त करते हैं जैसे फ्रलुओरीन पीला, क्लोरीन हरापन लिए हुए पीला, ब्रोमीन लाल तथा आयोडीन बैंगनी रंग का होता है। फ्रलुओरीन तथा क्लोरीन जल से अभ्िािया करती हैं। ब्रोमीन तथा आयोडीन जल में अल्प विलेय हैं परंतु बहुत से काबर्निक विलायकों जैसेकि क्लोरोपफामर्, काबर्न टेट्राक्लोराइड, काबर्न डाइर्सल्पफाइड, हाइड्रोकाबर्न में विलेय हैं तथा रंगीन विलयन बनती हैं। एक रोचक अपवाद सारणी 7.8 में यह देखने को मिलता है कि ब्स2 की तुलना में फ्रलुओरीन थ्2 की वियोजन एन्थैल्पी का मान कम है। जबकि क्लोरीन के बाद ग् दृ ग् आबंध् वियोजन एन्थैल्पी के मानों में आपेक्ष्िात प्रवृिा पाइर् जाती है, ब्स दृ ब्स झ ठत दृ ठत झ प् दृ प् । इस असंगति का एक कारण थ्2 के एकाकी युगलों के मध्य इलेक्ट्राॅन - इलेक्ट्राॅन प्रतिकषर्ण का सापेक्षतः अध्िक होना है जो कि क्लोरीन की तुलना में एक दूसरे के अध्िक सन्िनकट हैं। 7.18.8 रासायनिक गुण हैलोजन परमाणु मूल अवस्था ;ग्राउंड अवस्थाद्ध में ;फ्रलुओरीन को छोड़करद्ध प्रथम उत्तेजित अवस्था द्वितीय उत्तेजित अवस्था तृतीय उत्तेजित अवस्था आॅक्सीकरण अवस्थाएं तथा रासायनिक ियाशीलता की प्रवृिाकृ सभी हैलोजन - 1 आॅक्सीकरण अवस्था प्रदश्िार्त करती हैं तथापि क्लोरीन, ब्रोमीन तथा आयोडीन ़1ए ़3ए ़5 तथा ़7 आॅक्सीकरण अवस्थाएं भी प्रदश्िार्त करती हैं। जैसा कि नीचे स्पष्ट किया गया है। 1 अयुगलित इलेक्ट्राॅन दृ1 या ़1 आॅक्सीकरण अवस्था का स्पष्टीकरण देता है 3 अयुगलित इलेक्ट्राॅन ़3 आॅक्सीकरण अवस्था का स्पष्टीकरण देता है 5 अयुगलित इलेक्ट्राॅन ़5 आॅक्सीकरण अवस्था का स्पष्टीकरण देता है। 7 अयुगलित इलेक्ट्राॅन ़7 आॅक्सीकरण अवस्था का स्पष्टीकरण देता है क्लोरीन, ब्रोमीन तथा आयोडीन की उच्च आॅक्सीकरण अवस्थाएं मुख्यतया तब प्राप्त होती हैं जब हैलोजन छोटे तथा उच्च विद्युत )णात्मकता वाले फ्रलुओरीन तथा आॅक्सीजन परमाणुओं के साथ संयोग करते हैं, जैसे - अंतराहैलोजनों, आॅक्साइडों तथा आॅक्सोअम्लों में ़4 व ़6 आॅक्सीकरण अवस्थाएं क्लोरीन तथा ब्रोमीन के आॅक्साइडों तथा आॅक्सोअम्लों में पाइर् जाती हैं। फ्रलुओरीन के परमाणु के संयोजकता कोश में कोइर् क कक्षक नहीं होता। अतः यह अपने अष्टक का प्रसार नहीं कर सकता। सबसे अध्िक विद्युत )णात्मकता होने के कारण यह केवल दृ1 आॅक्सीकरण अवस्था प्रदश्िार्त करता है। सभी हैलोजन अतिियाशील होते हैं। ये धतु तथा अधतुओं के साथ अभ्िािया कर हैलाइड बनाते हैं। वगर् में नीचे की ओर जाने पर हैलोजनों की ियाशीलता कम होती है। एक इलेक्ट्राॅन तत्काल प्रतिग्रहण कर लेने की प्रवृिा के कारण हैलोजनों की प्रबल आॅक्सीकारक प्रकृति होती है। थ्2 प्रबलतम आॅक्सीकारक हैलोजन है और यह दूसरे हैलाइड आयनों को विलयन में या यहाँ तक कि ठोस प्रावस्था में भी आॅक्सीकृत कर देती है। सामान्यतया एक हैलोजन उच्च परमाणु क्रमांक के हैलाइड आयनों को आॅक्सीकृत करती है। थ्2़2ग्दृ → 2थ्दृ़ग्2 ;ग्त्रब्सए ठत या प्द्ध ब्स2़2ग्दृ → 2ब्सदृ़ग्2 ;ग्त्रठत या प्द्ध ठत2़2प्दृ → 2ठतदृ़प्2 वगर् में नीचे की ओर जाने पर हैलोजनों के जलीय विलयन में घटती हुइर् आॅक्सीकारक प्रवृिा की पुष्िट उनके मानक इलैक्ट्रोड विभावों से होती है। सारणी 7.8 जो कि नीचे दशार्ए गए प्राचलों पर निभर्र करते हैं - टट ट1 1ध्2 Δ वियाजन भ् Δ मह भ्दृ Δजलयाजे नभ्दृ ग् ; ह द्ध ⎯⎯⎯⎯⎯⎯ग् ; द्ध ⎯⎯⎯⎯ग् ; ह ⎯⎯⎯⎯⎯ग् ;े→ ह →द्ध → ंु द्ध2 हैलोजनों की तुलनात्मक आॅक्सीकारक सामथ्यर् को उनकी जल के साथ अभ्िािया से और अध्िक समझा जा सकता है। फ्रलुओरीन जल को आॅक्सीजन में आॅक्सीकृत कर देती है। जबकि क्लोरीन तथा ब्रोमीन जल के साथ अभ्िािया कर संगत हाइड्रोहैलिक और हाइपोहैलस अम्ल बनाती हैं। आयोडीन की जल के साथ अभ्िािया अस्वतः प्रवतिर्त है। दृवास्तव में, प् अम्लीय माध्यम में आॅक्सीजन द्वारा आॅक्सीकृत किया जा सकता है, जो कि फ्रलुओरीन द्वारा प्रदश्िार्त अभ्िािया का ठीक विपरीत है। 2 ;हद्ध़ 2भ् व् ; द्ध → 4भ् ़ ंु द्ध़ 4थ् − ंु द्ध़ व्22थ् 2स ; ;;हद्ध ग्2 ; द्ध ़ भ् व् 2 ;द्ध स → भ्ग् ;ंु द्ध़ भ्व्ग् ;ंु द्धह ; जहाँ ग् त्र ब्स या ठत द्ध ;द्ध ;द्ध 2 ;द्ध े 2स4प् − ंु ़ 4भ् ़ ंु ़ व्ह → 2प् 2 ; द्ध ़ 2भ् व् ;द्ध फ्रलुओरीन का असामान्य व्यवहार च.ब्लाक में द्वितीय आवतर् में उपस्िथत अन्य तत्वों की भाँति फ्रलुओरीन भी कइर् गुणों में असामान्य है। उदाहरण के लिए आयनन एन्थैल्पी, विद्युत )णात्मकता तथा विद्युत विभव, यह सभी फ्रलुओरीन के लिए, अन्य हैलोजनों की प्रवृिायों के आधार पर अपेक्ष्िात मानों से उच्च होते हैं। इसके अतिरिक्त आयनी तथा सहसंयोजी त्रिाज्या, गलनांक, क्वथनांक, आबंध वियोजन एन्थैल्पी तथा इलेक्ट्राॅन लब्िध् एन्थैल्पी अपेक्ष्िात मानों से भी बहुत कम होते हैं। फ्रलुओरीन का असामान्य व्यवहार इसके छोटे आकार, उच्च विद्युत )णात्मकता, निम्न थ् दृ थ् बंध् वियोजन एन्थैल्पी तथा संयोजकता कोश में कक्षकों की अनुपलब्ध्ता के कारण होता है। फ्रलुओरीन की अध्िकांश अभ्िाियाएं उष्माक्षेपी होती हैं ;इसका मुख्य कारण है दूसरे तत्वों के साथ इसके छोटे तथा प्रबल आबंधें को बननाद्ध। यह केवल एक आॅक्सोअम्ल बनाती है जबकि दूसरे हैलोजन कइर् आॅक्सोअम्ल बनाते हैं। हाइड्रोजन फ्रलुओराइड प्रबल हाइड्रोजन आबंधें के कारण एक द्रव है ;क्वथनांक 293 ज्ञद्ध। दूसरे हाइड्रोजन हैलाइड गैसें हैं। ;पद्ध हाइड्रोजन के प्रति अभ्िाियाशीलता ये सभी हाइड्रोजन के साथ अभ्िािया कर हाइड्रोजन हैलाइड बनाती हैं। परंतु फ्रलुओरीन से आयोडीन तक हाइड्रोजन के प्रति बंध्ुता में कमी आती है। हाइड्रोजन हैलाइड जल में विलेय होकर हाइड्रोहैलिक अम्ल बनाते हैं। हाइड्रोजन हैलाइडों के कुछ गुणों को सारणी 7.9 में दिया गया है। इन अम्लों की अम्लीय सामथ्यर् निम्न क्रम में है - भ्थ् ढ भ्ब्स ढ भ्ठत ढ भ्प्। इन हैलाइडों का स्थायित्व वगर् में नीचे की ओर बढ़ने पर घटता है। इसका कारण आबंध् ;भ् दृ ग्द्ध वियोजन एन्थैल्पी में कमी का क्रम, भ् दृ थ् झ भ् दृ ब्स झ भ् दृ ठत झ भ् दृ प्, होना है। सारणी 7ण्9 - हाइड्रोजन हैलाइडों के गुण गलनांक/ज्ञ क्वथनांक/ज्ञ आबंध् दूरी ;भ् दृ ग्द्धध्चउ Δवियोजन भ्टधश्र उवसदृ1 चज्ञं 190 293 91ण्7 574 3ण्2 159 189 127ण्4 432 दृ7ण्0 185 206 141ण्4 363 दृ9ण्5 222 238 160ण्9 295 दृ10ण्0 ;पपद्ध आॅक्सीजन के प्रति अभ्िाियाशीलता हैलोजन आॅक्सीजन से संयोग कर बहुत से आॅक्साइड बनाते हैं परंतु इनमें से अध्िकंाश अस्थायी होते हैं। फ्रलुओरीन दो आॅक्साइड, व्थ् तथा व्थ्बनाती है परंतु केवल व्थ्ही222 2 298 ज्ञ ताप पर स्थायी होता है। ये आॅक्साइड आवश्यक रूप से आॅक्सीजन फ्रलोराइड हैं क्योंकि फ्रलुओरीन की विद्युत )णात्मकता आॅक्सीजन से अिाक है। ये दोनों प्रबल फ्रलुओरीनन कारक है। व्2थ्2ए प्लूटोनियम को च्नथ्6 में आॅक्सीकृत कर देता है। इस प्रकार इस अभ्िािया का उपयोग भुक्तशेष नाभ्िाकीय ईंधन से प्लूटोनियम को च्नथ्6 के रूप में हटाने हेतु किया जाता है। क्लोरीन, ब्रोमीन तथा आयोडीन भी आॅक्साइड बनाती हैं जिनमें इन हैलोजनों की आॅक्सीकरण संख्या ़1 से ़7 तक होती है। गतिज तथा उष्मागतिक कारकों के संयोग के कारण सामान्यतया हैलोजनों द्वारा निमिर्त आॅक्साइडों के स्थायित्व का घटता क्रम 1 झ ब्स झ ठत होता है। हैलोजनों के उच्चतर आॅक्साइडों की प्रवृिा निम्नतर आॅक्साइड्स की अपेक्षा अध्िक स्थायी होने की होती है। क्लोरीन के आॅक्साइड ब्सव्ए ब्सव्ए ब्सव् तथा ब्सव् अत्यध्िक ियाशील222627आॅक्सीकारक तथा विस्पफोटक प्रवृिा के होते हैं। ब्सव्2 का उपयोग कागश की लुगदी तथा वस्त्रों के विरंजीकरण और पीने के पानी के शुिकरण में किया जाता है। ब्रोमीन के आॅक्साइड, ठत2व्ए ठतव्2ए ठतव्3 सबसे कम स्थायी होते हैं ;मध्य पंक्ित अनियमितताद्ध तथा इनका अस्ितत्व केवल कम ताप पर होता है। ये बहुत प्रबल आॅक्सीकारक होते हैं। आयोडीन के आॅक्साइड, प्2व्4ए प्2व्5ए प्2व्7 अविलेय ठोस है तथा गरम करने पर विघटित हो जाते हैं। प्2व्5 बहुत अच्छा आॅक्सीकारक है तथा इसका उपयोग काबर्न मोनोक्साइड के आकलन में होता है। ;पपपद्ध धतुओं के प्रति अभ्िाियाशीलता हैलोजन धतु के साथ अभ्िािया करके धतु हैलाइड बनाते हैं। उदाहरणाथर्, ब्रोमीन मैग्नीश्िायम के साथ अभ्िािया करके मैग्नीश्िायम ब्रोमाइड देता है डह;ेद्ध ़ ठत2 ;सद्ध → डह ठत2 ;ेद्ध हैलाइड के आयनिक गुण इस क्रम में कम होते हैं - डथ् झ डब्स झ डठत झ डप् जहाँ डए एकसंयोजी धतु है। यदि धतु एक से अध्िक आॅक्सीकरण अवस्थाएं प्रदश्िार्त करती हैं तो उच्च आॅक्सीकरण अवस्था वाले हैलाइड, निम्न आॅक्सीकरण अवस्था वाले हैलाइडों से अध्िक सहसंयोजक होंगे। उदाहरण के लिए ैदब्सए च्इब्सए ैइब्सतथा न्थ् की अपेक्षा क्रमशः ैदब्स4ए223 4च्इब्स4ए ैइब्स5 तथा न्थ्6 अध्िक सहसंयोजक होते हैं। ;पअद्ध हैलोजन की अभ्िाियाशीलता अन्य हैलोजनों के प्रति हैलोजन अन्य हैलोजनों के साथ संयोग कर बहुत से यौगिक बनाते हैं, जो अंतरा हैलोजेन कहलाते हैं जिनके प्रकार हैं - ग्ग्ए ग्ग्3ए ग्ग्5तथा ग्ग्7जहाँ ग्दृ बड़े आकार का हैलोजन तथा ग् छोटे आकार का हैलोजन है। 7.19 क्लोरीन शैले ने 1774 में भ्ब्स पर डदव्2 की अभ्िािया द्वारा क्लोरीन को खोजा था। 1810 में डेवी ने इसकी तात्िवक प्रकृति को स्थापित किया तथा इसके रंग के आधर पर इसे क्लोरीन नाम दिया। ;ग्रीक, ब्ीसवतवे दृ हरित - पीलाद्ध विरचन इसे निम्नलिख्िात में से किसी भी विध्ि द्वारा बनाया जा सकता हैकृ ;पद्ध सांद्र हाइड्रोक्लोरिक अम्ल को मैंगनीज डाइआॅक्साइड के साथ गमर् करके डदव्2 ़ 4भ्ब्स → डदब्स2 ़ ब्स2 ़ 22भ् व् परंतु, भ्ब्स के स्थान पर नमक तथा सांद्र भ्2ैव्4 का मिश्रण उपयोग में लिया जाता है। ;पपद्ध पोटैश्िायम परमैंगनेट की भ्ब्स से अभ्िािया करने पर 2ज्ञडदव् ़ 16भ्ब्स → 2ज्ञब्स ़ 2डदब्स ़ 8भ् व् ़ 5ब्स4 222 क्लोरीन का उत्पादन ;पद्ध डेकाॅन विध्ि - इनमें 723 ज्ञ पर हाइड्रोजन क्लोराइड गैस का ब्नब्स2 ;उत्प्रेरकद्ध की उपस्िथति में वायुमंडलीय आॅक्सीजन द्वारा आॅक्सीकरण करते हैं। ब्नब्स24भ्ब्स ़ व् ⎯⎯⎯⎯→ 2ब्स ़ 2भ् व्2 22 ;पपद्ध वैद्युतअपघटन प्रक्रम - क्लोरीन लवण जल ;सांद्र छंब्स विलयनद्ध के वैद्युतअपघटन द्वारा प्राप्त की जाती हैद्ध क्लोरीन ऐनोड पर प्राप्त होती है। यह बहुत से रासायनिक उद्योगों में सहउत्पाद के रूप में भी प्राप्त होती है। गुण यह तीखी गंध् वाली, दमघोंटू हरित - पीली गैस है। यह वायु से 2.5 गुना भारी है। यह हरित - पीले द्रव के रूप में आसानी से द्रवित की जा सकती है जो कि 239 ज्ञ पर उबलती है। यह जल में विलेय है। क्लोरीन बहुत सी धतुओं तथा अधतुओं के साथ िया कर क्लोराइड बनाती है। 2।स ़ 3ब्स2→2।सब्स3 2छं ़ ब्स2→2छंब्स 2 थ्म़3ब्स2→2थ्मब्स3 च् ़ 6ब्स → 4च्ब्स42 3 ै ़ 4ै ब्स8 4ब्स2 → 22 इसकी हाइड्रोजन के प्रति अत्यध्िक बंध्ुता होती है। यह हाइड्रोजन युक्त यौगिकों के साथ अभ्िािया कर भ्ब्स बनाती है। भ्2 ़ ब्स 2 → 2भ्ब्स भ्ै ़ ब्स → 2भ्ब्स ़ ै22 ब् भ् ़ 8ब्स → 16भ्ब्स ़ 10ब् 10 16 2 अमोनिया के आध्िक्य के साथ, क्लोरीन, नाइट्रोजन तथा अमोनियम क्लोराइड देती है जबकि क्लोरीन अध्िक होने पर नाइट्रोजन ट्राइक्लोराइड ;विस्पफोटकद्ध बनता है। 8छभ़् 3ब्स→ 6छभ्ब्स ़ छछभ् ़ 3ब्स→ छब्स़ 3भ्ब्स3 2 42 3 2 3 अध्िक अध्िक ठंडे तथा तनुक्षारकों के साथ, क्लोरीन क्लोराइड और हाइपोक्लोराइट का मिश्रण देती है। परंतु गरम तथा सांद्र क्षारकों के साथ, क्लोराइड तथा क्लोरेट बनते हैं। 2छंव्भ् ़ ब्स2→छंब्स ़ छंव्ब्स ़ भ्2व् ;ठंडा तथा तनुद्ध 6 छंव्भ् ़ 3ब्स→ 5छंब्स ़ छंब्सव़् 3भ्व्2 3 2;गरम तथा सांद्रद्ध शुष्क बुझे हुए चूने के साथ यह विरंजक चूणर् ;ब्लीचिंग पाउडरद्ध देती है। गमर् तथा सांद्र विरंजक चूणर् का संघटन ब्ं;व्ब्सद्ध2 ऽ ब्ंब्स2 ऽ ब्ं;व्भ्द्ध2 ऽ 2भ्2व् है। क्लोरीन हाइड्रोकाबर्नों के साथ अभ्िािया करती है तथा संतृप्त हाइड्रोकाबर्नों के साथ प्रतिस्थापन उत्पाद और असंतृप्त हाइड्रोकाबर्नों के साथ योगज उत्पाद देती है। उदाहरणाथर्कृ ब्भ् ़ ब्सन्ट ब्स ़ भ्ब्स42 ⎯⎯→ ब्भ्3मेथेन मेथ्िाल क्लोराइड कक्ष तापब्भ् ़ ब्स⎯⎯⎯⎯→ ब्भ् ब्स2 42 242एथीन 1ए 2दृ डाइक्लोरोएथेन भ्ब्स तथा भ्व्ब्स के निमार्ण के कारण क्लोरीन जल का पीला रंग उड़ जाता है। इस प्रकार प्राप्त हाइपोक्लोरस अम्ल ;भ्व्ब्सद्ध नवजात आॅक्सीजन देता है जो कि क्लोरीन के विरंजक तथा आॅक्सीकारक गुणों के लिए उत्तरदायी है। ;पद्ध यह पफेरस को पफेरिक, सल्पफाइट को सल्पेफट, सल्पफर डाइआॅक्साइड को सल्फ्रयूरिक अम्ल तथा आयोडीन को आयोडिक अम्ल में आॅक्सीकृत करती है। 2 थ्म ैव् ़ भ् ैव् ़ ब्स→ थ्म ;ैव्द्ध ़ 2भ्ब्स4242 ⎯⎯243→ छंछं ैव् ़ ब्स ़ भ्व् ⎯⎯ ैव् ़ 2 भ्ब्स232224ैव् ़ 2भ्व् ़ ब्स→ भ् ैव् ़ 2 भ्ब्स222 ⎯⎯24प् ़ 6 भ्व् ़ 5 ब्स→ 2 भ्प्व् ़ 10 भ्ब्स222 ⎯⎯3;पपद्ध यह एक प्रबल विरंजक है, विरंजन िया आॅक्सीकरण के कारण होती है ब्स2 ़ भ्2व् ⎯⎯→ 2भ्ब्स ़ व् रंगीन पदाथर् ़ व् → रंगहीन पदाथर् यह नमी की उपस्िथति में वानस्पतिक अथवा काबर्निक पदाथो± को विरंजित करती है। क्लोरीन का विरंजक प्रभाव स्थायी होता है। उपयोग इसका उपयोग ;पद्ध काष्ठ लुगदी ;कागज़ तथा रेआॅन के उत्पादन में आवश्यक होती है।द्ध, कपास तथा वस्त्रों के विरंजन में ;पपद्ध सोने तथा प्लैटिनम के निष्कषर्ण में ;पपपद्ध रंजकों, औषधें तथा काबर्निक पदाथोर्ं जैसे ब्ब्स4ए ब्भ्ब्स3ए क्क्ज्, प्रशीतकों इत्यादि के उत्पादन में ;पअद्ध पीने के जल को निजर्म ;जीवाणुरहितद्ध करने में ;अद्ध विषैली गैसों, जैसे प़फाॅसशीन ;ब्व्ब्सद्ध अश्रु गैस ;ब्ब्सछव्द्धए मस्टडर् गैस ;ब्सब्भ्ब्भ्ैब्भ्ब्भ्ब्सद्ध के बनाने में होता है।23222227.20 हाइड्रोजनक्लोराइड यह अम्ल 1648 में ग्लैबर ने साधरण लवण ;नमकद्ध को सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ गमर् कर प्राप्त किया। 1810 में डेवी ने प्रदश्िार्त किया कि यह हाइड्रोजन तथा क्लोरीन का यौगिक है। विरचन प्रयोगशाला में यह सोडियम क्लोराइड को संाद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ गरम करके बनाया जाता है। 420ज्ञछंब्स ़ भ्2ैव्4 → छंभ्ैव्4 ़ भ्ब्स⎯⎯⎯⎯823ज्ञछंभ्ैव़् छंब्स → छंैव़् भ्ब्स4 ⎯⎯⎯⎯24 भ्ब्स गैस को सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल में प्रवाहित करके शुष्क किया जा सकता है। गुण यह रंगहीन व तीक्ष्ण गंध् वाली गैस है। यह आसानी से रंगहीन द्रव में द्रवित हो जाती है ;क्वथनांक 189 ज्ञद्ध तथा श्वेत िस्टलीय ठोस के रूप में जम जाती है ;हिमांक 159 ज्ञद्ध। यह पानी में अत्यध्िक विलेय है तथा निम्न प्रकार से आयनित होती है - ़− 7; द्ध़ भ्व्; द्ध → भ्व् ;ंुद्ध़ ब्स ;ंुद्ध ज्ञ त्र 10भ्ब्सह स23 ं इसका जलीय विलयन को हाइड्रोक्लोरिक अम्ल कहते हैं। वियोजन स्िथरांक का उच्च मान प्रदश्िार्त करता है कि यह जल में एक प्रबल अम्ल है। यह आमोनिया से अभ्िािया करती है तथा छभ्4ब्स के श्वेत ध्ूम देती है। छभ्3 ़ भ्ब्स → छभ्4ब्स सांद्र भ्ब्स के तीन भाग तथा सांद्र भ्छव्3 के एक भाग को मिलाने पर एक्वारेजिया बनता है। जो कि सोने तथा प्लैटिनम जैसी अिय धतुओं ;जैसे सोना, प्लैटिनमद्ध को घोलने के लिए काम में लाया जाता है। ़−− −।न ़ 4भ् ़ छव् ़ 4ब्स → ।नब्स ़ छव् ़ 2भ् व्3 42 ़−− 2−3च्ज ़ 16भ् ़ 4छव् ़ 18ब्स → 3च्जब्स ़ 4छव् ़ 8भ् व्3 62 हाइड्रोक्लोरिक अम्ल दुबर्ल अम्लों के लवणों जैसे काबोर्नेट, हाइड्रोजन काबोर्नेट, सल्पफाइट इत्यादि को विघटित कर देता है। छंब्व़् 2भ्ब्स → 2छंब्स ़ भ्व् ़ ब्व्23 22 छंभ्ब्व्3 ़ भ्ब्स → छंब्स ़ भ्2व् ़ ब्व्2 छंैव़् 2भ्ब्स → 2छंब्स ़ भ्व् ़ ैव्23 22 उपयोग इसके उपयोग हैं - ;पद्ध क्लोरीन, अमोनियम क्लोराइड तथा ग्लूकोस ;अन्न स्टाचर् सेद्ध के उत्पादन में, ;पपद्ध अस्िथयों से सारेस निकालने और अस्िथ कोयले के शुिकरण में, तथा ;पपपद्ध औषध् में तथा प्रयोगशाला अभ्िाकमर्क के रूप में। उच्च विद्युत )णात्मकता तथा छोटे आकार के कारण फ्रलूओरीन एक मात्रा आॅक्सोअम्ल7.21 हैलोजनों के भ्व्थ् बनाती है जो फ्रलूओरिक ;1द्ध अम्ल या हाइपोफ्रलूओरस अम्ल कहता है। अन्य हैलोजनआॅक्सोअम्ल अनेक आॅक्सोअम्ल बनाते हैं। जिनमें से अध्िकांश शु( रूप में पृथक नहीं किए जा सकते। आॅक्सोअम्ल केवल जलीय विलयन में अथवा लवण के रूप में स्थायी है। हैलोजनों के आॅक्सोअम्ल सारणी 7.10 में दिए गए हैं तथा उनकी संरचनाएं चित्रा 7.8 में दी गइर् हैं। सारणी 7ण्10 - हैलोजनों के आॅक्सोअम्ल चित्रा 7.8 - क्लोरीन के आॅक्सोअम्लों की संरचनाएं 7.22 अंतराहैलोजन यौगिक हाइपोक्लोरस अम्ल क्लोरस अम्ल क्लोरिक अम्ल परक्लोरिक अम्ल जब दो भ्िान्न हैलोजन एक दूसरे से अभ्िािया करते हैं तब अंतराहैलोजन यौगिक बनते हैं। ′′′′इन्हें सामान्य संघटनों ग्ग् ए ग्ग्ए ग्ग् तथा ग्ग् से प्रदश्िार्त किया जा सकता है। जहाँ ग्35 7 बड़े आकार वाला हैलोजन है तथा ग् ′ छोटे आकार वाला, एवं ग्ए ग्′की तुलना में अिाकविद्युत ध्नात्मक है। जैसे - जैसे ग्और ग् ′ की त्रिाज्याओं का अनुपात बढ़ता है, प्रति अणु परमाणुओं की संख्या भी बढ़ती है। अतः आयोडीन ;टप्प्द्ध फ्रलोराइड में परमाणुआंे की संख्या अध्िकतम होनी चाहिए। क्योंकि प् और थ् के बीच त्रिाज्याओं का अनुपात अध्िकतम है। इसीलिए इसका सूत्रा 1थ्7होता है जिसमें परमाणुओं की संख्या अध्िकतम है। विरचन अंतराहैलोजन यौगिक सीध्े संयोग द्वारा या किसी हैलोजन की एक निम्नतर अंतराहैलोजन यौगिक पर अभ्िािया द्वारा बनाए जा सकते हैं। निमिर्त उत्पाद कुछ विश्िाष्ट परिस्िथतियों पर निभर्र करते हैं। जैसे - 437 ज्ञ 573 ज्ञब्स2 2 ⎯⎯⎯⎯2ब्सथ् ब्स2 ़ 3थ्2 →़थ् → ⎯⎯⎯⎯2ब्सथ्3 ;समआयतनद्ध ;सममाले रद्ध प्2 ़ ब्स2 → 2प्ब्स प्2 ़ 3ब्स2 → 2प्ब्स3 ;सममाले रद्ध ;आध्िक्यद्ध ठत2 ़ 3थ्2 → 2ठतथ्3 ठत2 ़ 5थ्2 → 2ठतथ्5 ;पानीके साथतनकु रणद्ध ;आध्िक्यद्ध गुण अंतराहैलोजन यौगिकों के कुछ गुण सारणी 7.11 में दिए गए हैं। ये सभी सहसंयोजक अणु होते हैं और प्रतिचुंबकीय प्रकृति के होते हैं। ब्प्थ् के अतिरिक्त जो कि 298ज्ञ पर एक गैस है, ये सभी वाष्पशील ठोस या द्रव हैं। इनके भौतिक गुण अवयवी हैलोजनों के मध्यवतीर् होते हैं। केवल यह अंतर होता है कि इनके गलनांक व क्वथनांक अपेक्ष्िात मानों से थोड़े उच्च होते हैं। इनकी रासायनिक अभ्िाियाओं की तुलना पृथक अवयवी हैलोजनों से की जा सकती है। सामान्यतया अंतरा हैलोजन यौगिक हैलोजनों की अपेक्षा अध्िक ियाशील होते हैं ;फ्रलुओरीन के अतिरिक्तद्ध। ऐसा अंतरा हैलोजनों के ग्दृग्श् आबंधें का हैलोजनों के ग्दृग् आबंधें की तुलना में दुबर्ल होने के कारण होता है ;थ्दृथ् आबंध् को छोड़करद्ध। ये सभी जल अपघटित होकर छोटे हैलोजन के संगत हैलाइड आयन, और बड़े हैलोजन के संगत हाइपोहैलाइट ;जब ग्ग्श्द्ध हैलाइट ;जब ग्ग्श्3द्ध, हैलेट ;जब ग्ग्श्5द्ध तथा परहैलेट ;जब ग्ग्श्7द्ध आयन देते हैं। ग्ग् श़् भ्व् → भ्ग् श़् भ्व्ग् 2 इनकी आण्िवक संरचनाएं बहुत रोचक होती हैं जो कि टैम्च्त् सि(ांत के आधर पर समझाइर् जा सकती हैं ;उदाहरण 7.19द्ध। ग्ग्3यौगिकों की संरचना बंकित ज्.आकार की, ग्ग्5 यौगिकों की संरचना वगार्कार पिरैमिडी तथा ग्थ्7की संरचना पंचकोणीय द्विपिरैमिडी होती है ;सारणी 7.11द्ध। सारणी 7ण्11 - अंतरायौगिकों के वुफछ गुण प्रकार सूत्रा भौतिक अवस्था तथा रंग संरचना ′ ग्ग् 1 ब्सथ् रंगहीन गैस - ठतथ् पफीकी भूरी गैस - प्थ्ं स्पेक्ट्रमिकी द्वारा संसूचित - ठतब्सइ गैस - प्ब्स रूबी लाल ठोस ;α - रूपद्ध - भूरा लाल, ठोस ;β - रूपद्ध - प्ठत काला ठोस - ग्ग् ′ 3 ब्सथ्3 रंगहीन गैस बंकित ज्.आकृति ठतथ्3 पीला हरा द्रव बंकित ज्.आकृति प्थ्3 पीला पाउडर बंकित ज्.आकृति’ प्ब्स3 ब नारंगी ठोस बंकित ज्.आकृति’ ′ ग्ग् 5 प्थ्5 रंगहीन गैस परंतु वगर् पिरैमिडी 77ज्ञ के नीचे ठोस ठतथ्5 रंगहीन द्रव वगर् पिरैमिडी ब्सथ्5 रंगहीन द्रव वगर् पिरैमिडी ′ ग्ग् 7 प्थ्7 रंगहीन गैस पंचकोणीय द्विपिरैमिडी ंबहुत अस्थायीइशु( ठोस कमरे के ताप पर ज्ञात बब्स - सेतु द्वितय बनाता है ;प्2ब्स6द्ध ’ अनिश्िचत उदाहरण 7ण्19 टैम्च्त् सि(ांत के आधर पर ठतथ्3की आकृति की व्याख्या कीजिए। हल केंद्रीय परमाणु ठत के संयोजकता कोश में सात इलेक्ट्राॅन हैं। इनमें से तीन इलेक्ट्राॅन तीन फ्रलुओरीन परमाणुआंे के साथ इलेक्ट्राॅन युगल आबंध् बना लेते हैं तथा चार इलेक्ट्राॅन शेष रह जाते हैं। इस प्रकार अब तीन आबंध् युगल तथा दो एकाकी युगल टैम्च्त् सि(ांत के अनुसार सभी इलेक्ट्राॅन युगल त्रिासमनताक्ष द्विपिरैमिडी के शीषोर्ं पर स्िथत रहते हैं। दो एकाकी इलेक्ट्राॅन युगल निरक्षीय स्थान पर स्िथत होंगे जिससे कि एकाकी युगल - एकाकी युगल तथा आबंध् युगल एकाकी युगल के बीच प्रतिकषर्ण न्यूनतम रहें। उल्लेखनीय है कि ये प्रतिकषर्ण, आबंध् युगल - आबंध् युगल प्रतिकषर्ण से अध्िक होते हैं। इसके अतिरिक्त अक्षीय फ्रलुओरीन परमाणु, एकाकी युगल - एकाकी युगल के बीच प्रतिकषर्ण को कम करने के लिए निरक्षीय फ्रलुओरीन परमाणुठतथ्3की आकृति थोड़ी बंकित श्ज्श् आकृति की हो जाती है। झुक जाते हैं जिससे एकाकी युगल - एकाकी युगल प्रतिकषर्ण न्यूनतम रहे। इस प्रकारफकी तरप़ उपयोग यह यौगिक अजलीय विलायकों की तरह उपयोग में लाए जा सकते हैं। अंतराहैलोजन यौगिक बहुत उपयोगी है। फ्रलुओरीनीकरण कारक होते हैं। ब्सथ्तथा ठतप्का उपयोग यूरेनियम 235न् के संवध्र्न हेतु न्थ्के उत्पादन में किया33 6 जाता है। न्;ेद्ध ़ 3ब्सथ्3;सद्ध → न्थ्6;हद्ध ़ 3ब्सथ्;हद्ध 7.23 वगर् 18 के तत्व 7.23.1 उपलब्ध्ता वगर् 18 में छः तत्व हैंकृ हीलियम, निआॅन, आॅगर्न, िप्टाॅन, जीनाॅन तथा रेडाॅन। ये सभी गैसें हैं तथा रासायनिक रूप से अिय हैं ये बहुत कम यौगिक बनाती हैं इसी कारण इन्हें उत्कृष्ट गैसें कहते हंै। रेडाॅन के अतिरिक्त अन्य सभी उत्कृष्ट गैसें वायुमंडल में पाइर् जाती हैं। आयतन के अनुसार, इनकी शुष्क वायु में बाहुल्यता लगभग 1 प्रतिशत है जिसमें आॅगर्न प्रमुख अवयव है। हीलियम तथा कभी - कभी निआॅन रेडियोध्मीर् उत्पिा के खनिजों में पाए जाते हैं। जैसे पिचब्लैन्ड, मोनेशाइट, क्लीवाइट। हीलियम का मुख्य औद्योगिक स्रोत प्राकृतिक गैस है। जीनाॅन तथा रेडाॅन इस वगर् के दुलर्भतम तत्व हैं। रेडियम ;226त्ंद्ध के विघटन उत्पाद की तरह रेडाॅन प्राप्त 226 222 4होता है - त्ं → त्द ़ भ्म88 86 2 वगर् 18 के तत्वों के महत्वपूणर् परमाण्िवक तथा भौतिक गुण उनके इलेक्ट्राॅनिक विन्यास के साथ सारणी 7.12 में दिए गए है। सारणी 7ण्12 - वगर् 18 के तत्वों के परमाण्िवक एवं भौतिक गुण ’रेडियोध्मीर्7.23.2 इलेक्ट्राॅनिक विन्यास 7.23.3 आयनन एन्थैल्पी 7.23.4 परमाणु त्रिाज्या 7.23.5 इलेक्ट्राॅन लब्िध् एन्थैल्पी 7.23.6 भौतिक गुण यहाँ वगर् के परमाण्िवक, भौतिक तथा रासायनिक गुणों की प्रवृिायों की व्याख्या की गइर् है। हीलियम के अतिरिक्त सभी उत्कृष्ट गैसों का सामान्य इलेक्ट्राॅनिक विन्यास दे 2 दच 6 होता है जो कि हीलियम के लिए 1े2 है ;सारणी 7.14द्ध उत्कृष्ट गैसों के बहुत से गुण जिनमें अिय प्रकृति शामिल है, उनकी संवृत कोश संरचना के कारण होती है। स्थायी इलेक्ट्राॅनिक विन्यास के कारण इनकी गैसों में आयनन एन्थैल्पी बहुत अध्िक होती है। जबकि परमाण्िवक आकार में वृि के साथ वगर् में नीचे की ओर बढ़ने पर यह कम होती जाती है। परमाणु क्रमांक में वृि के साथ - साथ वगर् में नीचे की ओर परमाणु त्रिाज्या में वृि होती है। उत्कृष्ट गैसों का स्थायी इलेक्ट्राॅनिक विन्यास होने के कारण इनकी प्रवृिा इलेक्ट्राॅन ग्रहण करने की नहीं होती, अतः इनकी इलेक्ट्राॅन लब्िध् एन्थैल्पी का मान अध्िक ध्नात्मक होता है। सभी उत्कृष्ट गैसें एक परमाण्िवक हैं। यह रंगहीन, गंध्हीन तथा स्वादहीन होती हैं। जल में अल्प विलेय हैं। इनके गलनांक तथा क्वथनांक अत्यध्िक निम्न होते हैं, क्योंकि इन तत्वों में एक मात्रा अंतरापरमाणुक अन्योन्यिया दुबर्ल परिक्षेपण बलों के कारण होती है। ज्ञात पदाथो± में हीलियम का क्वथनांक ;4.2 ज्ञद्ध निम्नतम होता है। हीलियम में प्रयोगशाला में प्रयुक्त होने वाले साधरण पदाथो±, जैसे कि रबर, काँच तथा प्लास्िटक में से विसरित होने का असामान्य गुण पाया जाता है। 7.23.7 रासायनिक गुण सामान्यतया उत्कृष्ट गैसें सबसे कम ियाशील होती हैं। इनकी रासायनिक अभ्िािया के प्रति अियता के निम्न कारण दिए जाते हैं।;पद्ध उत्कृष्ट गैसों के संयोजकता कोश का पूणर्भरित इलेक्ट्राॅनिक विन्यास दे 2 दच 6 होता है ख्हीलियम में ;152द्ध,। ;पपद्ध इनकी आयनन एन्थैल्पी अध्िक होती है तथा इलेक्ट्रान लब्िध् एन्थैल्पी अध्िक ध्नात्मक होती है। इनकी खोज के समय से ही इनकी सियता बार - बार परखी जाती रही, परंतु इनके यौगिक बनाने के सभी प्रयास कापफी समय तक असपफल रहे। माचर् 1962 में नील बटर्लेट ने, जो कि उस समय बि्रटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय में थे, एक उत्कृष्ट गैस की ियाशीलता प्रेक्ष्िात की। उन्होंने पहले एक लाल रंग का यौगिक निमिर्त किया जिसे व्2़च्जथ्6दृ सूत्रा से दशार्या जा सकता है। उन्होंने अनुभव किया कि आॅक्सीजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी ;1175 ाश्र उवसदृ1द्ध जिनाॅन ;1170 ाश्रउवसदृ1द्ध के लगभग बराबर है। उन्होंने ग्म के इसी प्रकार के यौगिक बनाने का प्रयास किया और ग्म तथा च्जथ्6 को मिलाकर लाल रंग के एक दूसरे यौगिक ग्म़च्जथ्6दृ के विरचन में सपफलता प्राप्त की। इस खोज के पश्चात् जीनाॅन के बहुत से यौगिक, प्रमुख रूप से अध्िक विद्युत्)णात्मकता वाले फ्रलुओेरीन एवं आॅक्सीजन तत्वों के साथ, संश्लेष्िात किए गए हैं। िप्टाॅन के बहुत कम यौगिक ज्ञात हैं। केवल िप्टाॅन डाइफ्रलुओराइड ;ज्ञतथ्2द्ध का विस्तृत अध्ययन किया गया है। रेडाॅन के यौगिकों का पृथक्करण नहीं हो पाया है परंतु इनकी पहचान रेडियो अनुज्ञापक ;रेडियो टेªसरद्ध तकनीक द्वारा की गइर् है। ।तए छम तथा भ्म का कोइर् भी वास्तविक यौगिक ज्ञात नहीं है। ;कद्ध जीनाॅन - फ्रलुओरीन यौगिक अनुकूल प्रायोगिक परिस्िथतियों में तत्वों से प्रत्यक्ष िया द्वारा जीनाॅन तीन प्रकार के द्विअंगी फ्रलुओराइड, ग्मथ्2ए ग्मथ्4 तथा ग्मथ्6 बनाती है। 673ज्ञए1 इंतग्म ;हद्ध ़ थ्;हद्ध ग्मथ्;ेद्ध2 ⎯⎯⎯⎯⎯→2;जीनाॅन आध्िक्य मेंद्ध 873ज्ञए7 इंतग्म ;हद्ध ़ 2थ्;हद्ध ग्मथ्;ेद्ध2 ⎯⎯⎯⎯⎯⎯4→;1: 5 अनुपातद्ध 573 ज्ञए 60−70 इंतग्म ;हद्ध ़ 3थ्2 ;हद्ध ⎯⎯⎯⎯⎯⎯⎯→ ग्मथ्6;ेद्ध;1: 20 अनुपातद्ध ग्मथ् को ग्मथ्तथा व्थ्की 143ज्ञ ताप पर अन्यन्यिया से भी बनाया जाता है।64 22 ग्मथ् 4 ़ 22 → ग्मथ् 6 ़ व्2व्थ् ग्मथ्2ए ग्मथ्4 तथा ग्मथ्6 रंगहीन, िस्टलीय ठोस पदाथर् हैं जो कि 298 ज्ञ ताप पर आसानी से उध्वर्पातित हो जाते हैं। यह प्रबल फ्रलुओरीनीकरण वफमर्क हैं। लेश मात्रा जल से भी इनका जलअपघटन आसानी से हो जाता है। उदाहरणाथर् ग्मथ्2 के जल अपघटन से ग्मए भ्थ् तथा व्2 प्राप्त होते हैं। 2ग्मथ्2 ;ेद्ध ़ 2भ्2व्;सद्ध → 2ग्म ;हद्ध ़ 4 भ्थ्;ंुद्ध ़ व्2;हद्ध जीनाॅन के तीनों फ्रलुओराइडों की संरचनाओं की व्युत्पिा टैम्च्त् सि(ांत के आधार पर की जा सकती है। इन संरचनाओं को चित्रा 7.9 में दशार्या गया है ग्मथ्2 तथा ग्मथ्4 की संरचनाएं क्रमशः रैख्िाक तथा वगर् समतलीय हैं ग्मथ्6 में सात इलेक्ट्राॅन युगल हैं ;6 आबंध् युगल तथा एक एकाकी युगल हैद्ध अतः इसकी संरचना विकृत अष्टपफलकीय है जैसा कि गैसीय प्रावस्था में प्रायोगिक आधर पर पाया गया है। जीनॅान फ्रलुओराइड, फ्रलुओराइड आयन ग्राही से अभ्िािया कर ध्नायन स्पीशीज तथा फ्रलुओराइड आयन दाता से अभ्िािया करके फ्रलुओरोट्टणायन बनाते हैं। ग्मथ्2 ़ च्थ्5 → ख्ग्मथ्,़ ख्च्थ्6,दृ ग्मथ्4 ़ ैइथ्5 → ख्ग्मथ्3,़ ख्ैइथ्6,दृ ग्मथ्6 ़ डथ् → ड़ ख्ग्मथ्7,दृ ;ड त्र छंए ज्ञए त्इ वत ब्ेद्ध ;खद्ध जीनाॅन - आॅक्सीजन यौगिक ग्मथ्4 तथा ग्मथ्6 के जल अपघटन पफलस्वरूप ग्मव्3 प्राप्त होता है। 6ग्मथ् ़ 12 भ्व् → 4ग्म ़ 2ग्म0 ़ 24 भ्थ् ़ 3 व्4 2 3 2 ग्मथ्6 ़ 3 भ्2व् → ग्मव्3 ़ 6 भ्थ् ग्मथ्6 के आंश्िाक जल अपघटन से आॅक्सीफ्रलुओराइड ग्मव्थ्4 तथा ग्मव्2 थ्2 प्राप्त होते हैं। ग्मथ्6 ़ भ्2व् → ग्मव्थ्4 ़ 2 भ्थ् ग्मथ् ़ 2 भ्व् → ग्मव्थ् ़ 4भ्थ्6222ग्मव्3 एक रंगहीन विस्पफोटक ठोस पदाथर् है। इसकी संरचना पिरैमिडी है ;चित्रा 7.9द्ध। ग्मव्थ्4 एक रंगहीन वाष्पशील द्रव है जिसकी संरचना वगर् समतलीय होती है ;चित्रा 7.9द्ध। ;कद्धरेखीय ;खद्ध वगर् समतलीय ;गद्ध विकृत अष्टपफलकीय ;घद्ध वगर् पिरैमिडी ;चद्ध पिरैमिडी चित्रा 7.9 - ;कद्धग्मथ्ए;खद्धग्मथ्ए;गद्धग्मथ्ए;घद्धग्मव्थ्तथा ;चद्धग्मव्की संरचनाएं2464 3उदाहरण 7ण्22 क्या ग्मथ्6 का जल अपघटन एक रेडाॅक्स अभ्िािया है? हल नहीं, जल अपघटन के उत्पाद ग्मव्थ्4 तथा ग्मव्2थ्2 हैं जिनमें सभी तत्वों की आॅक्सीकरण अवस्थाएं अभ्िािया से पहले की अवस्था के समान हैं। उपयोग हीलियम अज्वलनशील तथा हल्की गैस है। अतः इसका उपयोग मौसम प्रेक्षण के लिए गुब्बारों में भरने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग गैस शीतित नाभ्िाकीय रिएक्टरों में भी किया जाता है। द्रव हीलियम ;क्वथनांक 4.2 ज्ञद्ध को निम्न ताप पर संचालित प्रयोगों के लिए निम्नतापीकारक के रूप में उपयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त द्रव हीलियम का उपयोग अतिचालक चुंबक को उत्पन्न तथा कायम रखने के लिए किया जाता है जो कि आधुनिक छडत् स्पेक्ट्रोमीटर तथा आध्ुनिक चिकित्सीय निदान में प्रयुक्त होने वाले चुंबकीय अनुनाद प्रतिबिंब ;डत्प्द्ध तंत्रा के मुख्य अवयव हैं। आध्ुनिक गोताखोरी के उपकरणों में यह आॅक्सीजन के तनुकारी के रूप में उपयोग मंे आती हैऋ क्योंकि रक्त में इसकी विलेयता बहुत कम है। निआॅन का उपयोग विसजर्न ट्यूब तथा प्रदीप्त बल्बों में विज्ञापन प्रदशर्न हेतु किया जाता है। निआॅन बल्बों का उपयोग वनस्पति उद्यान तथा ग्रीनहाउस में किया जाता है। आॅगर्न का उपयोग उच्चताप धतु कमीर्य प्रक्रमों में अिय वातावरण उत्पन्न करने के लिए किया जाता है। ;धातुओं तथा उपधतुओं के आवर्फ वेल्िंडग में इसका उपयोग विद्युत बल्ब को भरने के काम आता है। प्रयोगशाला में इसका उपयोग वायु सुग्राही पदाथार्ें के प्रबन्ध्न में भी किया जाता है। जीनाॅन तथा िप्टाॅन के कोइर् विशेष उपयोग नहीं हैं। इनका उपयोग विशेष अवसरों के लिए बनाए गए बल्बों में किया जाता है। अभ्यास 7ण्1 वगर् 15 के तत्वों के सामान्य गुणध्मोंर् को उनके इलेक्ट्राॅनिक विन्यास, आॅक्सीकरण अवस्था परमाण्िवक आकार, आयनन एन्थैल्पी तथा विद्युत्)णात्मकता के संदभर् में विवेचना कीजिए। 7ण्2 नाइट्रोजन की ियाशीलता पफाॅस्पफोरस से भ्िान्न क्यों है? 7ण्3 वगर् 15 के तत्वों की रासायनिक ियाशीलता की प्रवृिा की विवेचना कीजिए। 7ण्4 छभ्3 हाइड्रोजन बंध् बनाती है। परंतु च्भ्3 नहीं बनाती क्यों? 7ण्5 प्रयोगशाला में नाइट्रोजन वैफसे बनाते हैं? संपन्न होने वाली अभ्िािया के रासायनिक समीकरणों को लिख्िाए। 7ण्6 अमोनिया का औद्योगिक उत्पादन वैफसे किया जाता है? 7ण्7 उदाहरण देकर समझाइए कि काॅपर धतु भ्छव्3 के साथ अभ्िािया करके किस प्रकार भ्िान्न उत्पाद दे सकती है? 7ण्8 छव्2 तथा छ2व्5 के अनुनादी संरचनाओं को लिख्िाए। 7ण्9 भ्छभ् कोण का मान, भ्च्भ्ए भ्।ेभ् तथा भ्ैइभ् कोणों की अपेक्षा अध्िक क्यों है? ;संकेत - छभ्3 में ेच 3 संकरण के आधर तथा हाइड्रोजन और वगर् के दूसरे तत्वों के बीच केवल े.च आबंध्न के द्वारा व्याख्या की जा सकती है।द्ध 7ण्10 त्3च् त्र व् है पाया जाता है जबकि त्3छ त्र व् नहीं क्यों ;त्त्र ऐल्िकल समूहद्ध? 7ण्11 समझाइए कि क्यों छभ्3 क्षारकीय है जबकि ठपभ्3 केवल दुबर्ल क्षारक है। 7ण्12 नाइट्रोजन द्विपरमाणुक अणु के रूप में पाया जाता है तथा पफाॅस्पफोरस च्4 के रूप में। क्यों? 7ण्13 7ण्14 7ण्15 भ्3च्व्3 की असमानुपातन अभ्िािया दीजिए। 7ण्16 क्या च्ब्स5 आॅक्सीकारक और अपचायक दोनों कायर् कर सकता है? तवर्फ दीजिए। ोरस के गुणों की मुख्य भ्िान्नताओं को लिख्िाए।फाॅस्प़ फोरस तथा लाल प़ फाॅस्प़ फश्वेत प़ शृंखलन गुणों को कम प्रदश्िार्त करता है, क्यों?ोरस की तुलना में नाइट्रोजन फाॅस्प़ फप़ 7ण्17 व्ए ैए ैमए ज्म तथा च्व को इलेक्ट्राॅनिक विन्यास, आॅक्सीकरण अवस्था तथा हाइड्राइड निमार्ण के संदभर् में आवतर् सारणी के एक ही वगर् में रखने का तवर्फ दीजिए। 7ण्18 क्यों डाइआॅक्सीजन एक गैस है जबकि सल्पफर एक ठोस है? 7ण्19 यदि व् → व्दृ तथा व् → व्2दृ के इलेक्ट्राॅन लब्िध् एन्थैल्पी मान पता हो, जो क्रमशः 141 तथा 702ाश्र उवसदृ1 है, आप दृवैफसे स्पष्ट कर सकते हैं कि व्2दृ स्पीशीज वाले आॅक्साइड अध्िक बनते हैं न कि व् वाले? ;संकेत - यौगिकों के बनने में जालक ऊजार् कारक को ध्यान में रख्िाएद्ध 7ण्20 कौन से एरोसोल्स ओजोन हैं? 7ण्21 संस्पशर् प्रक्रम द्वारा भ्2ैव्4 के उत्पादन का वणर्न कीजिए। 7ण्22 ैव्2 किस प्रकार से एक वायु प्रदूषक है? 7ण्23 हैलोजन प्रबल आॅक्सीकारक क्यों होते हैं? 7ण्24 स्पष्ट कीजिए कि फ्रलुओरीन केवल एक ही आॅक्सोअम्ल, भ्व्थ् क्यों बनाता है। 7ण्25 व्याख्या कीजिए कि क्यों लगभग एक समान विद्युत्)णात्मकता होने के पश्चात् भी नाइट्रोजन हाइड्रोजन आबंध् निमिर्त करता है, जबकि क्लोरीन नहीं। 7ण्26 ब्सव्2 के दो उपयोग लिख्िाए। 7ण्27 हैलोजन रंगीन क्यों होते हैं? 7ण्28 जल के साथ थ्2 तथा ब्स2 की अभ्िाियाएं लिख्िाए। 7ण्29 आप भ्ब्स से ब्स2 तथा ब्स2 से भ्ब्स को वैफसे प्राप्त करेंगे? केवल अभ्िाियाएं लिख्िाए। 7ण्30 एन - बाटर्लेट ग्म तथा च्जथ्6 के बीच अभ्िािया कराने के लिए वैफसे प्रेरित हुए? 7ण्31 ;पद्ध भ्च्व्;पपद्ध च्ब्स;पपपद्ध ब्ंच्;पअद्ध छंच्व्;अद्ध च्व्थ्घ्333 32343 7ण्32 निम्नलिख्िात के लिए संतुलित समीकरण दीजिए। ;पद्ध जब छंब्स को डदव्2 की उपस्िथति में सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल के साथ गरम किया जाता है। ;पपद्ध जब क्लोरीन गैस को छंप् के जलीय विलयन में से प्रवाहित किया जाता है। 7ण्33 जीनाॅन फ्रलुओराइड, ग्मथ्2, ग्मथ्4, तथा ग्मथ्6 वैफसे बनाए जाते हैं? 7ण्34 किस उदासीन अणु के साथ ब्सव्दृ, समइलेक्ट्रानी है? क्या एक अणु लुइस क्षारक है? 7ण्35 निम्नलिख्िात प्रत्येक समुच्चय को सामने लिखे गुणों के अनुसार सही क्रम में व्यवस्िथत कीजिए - ;कद्ध थ्2ए ब्स2ए ठत2ए प्2 .आबंध् वियोजन एन्थैल्पी बढ़ते क्रम में ;खद्ध भ्थ्ए भ्ब्सए भ्ठतए भ्प् .अम्ल सामथ्यर् बढ़ते क्रम में ;गद्ध छभ्3ए च्भ्3ए ।ेभ्3ए ैइभ्3ए ठपभ्3 दृ क्षारक सामथ्यर् बढ़ते क्रम में 7ण्36 निम्नलिख्िात में से कौन सा एक अस्ितत्व में नहीं है? ;ंद्ध ग्मव्थ् ;इद्ध छमथ्;बद्ध ग्मथ्;कद्ध ग्मथ्4 226 7ण्37 उस उत्कृष्ट गैस स्पीशीज का सूत्रा देकर संरचना की व्याख्या कीजिए जो कि इनके साथ समसंरचनीय है - दृ दृदृ ोरस की आॅक्सीकरण अवस्थाएं क्या हैं?फाॅस्प़ फनिम्नलिख्िात में प़ ;ंद्ध प्ब्स ;इद्ध प्ठत;बद्ध ठतव्4 23 7ण्38 उष्कृष्ट गैसों के परमाण्िवक आकार तुलनात्मक रूप से बड़े क्यों होते हैं? 7ण्39 निआॅन तथा आॅगर्न गैसों के उपयोग सूचीब( कीजिए। कुछ पाठ्यनिहित प्रश्नों केेे उत्तर 7ण्1 वंेफद्रीय परमाणु की जितनी उच्च ध्नात्मक आॅक्सीकरण अवस्था होती है। उतनी ही अिाक इसकी ध््रुवण क्षमता भी होती है जिसके कारण वेंफद्रीय परमाणु और अन्य परमाणु के बीच बने आबंध् में सहसंयोजक लक्षण बढ़ते जाते हैं। 7ण्2 क्योंकि ठपभ्3 वगर् 15 के हाइड्राइडों में सबसे कम स्थायी होता है। 7ण्3 क्योंकि प्रबल चπ दृ चπ अतिव्यापन के कारण त्रिाबंध् छ≡छ बनता है। 7ण्6 छ2व्5 की संरचना से पुष्िट होती है कि छ2 की सहसंयोजकता 4 है। 7ण्7 ये दोनों ही ेच 3 संकरित हैं। च्भ्4़ में चारों कक्षक आबंध्ित होते हैं जबकि च्भ् में च् पर एक एकाकी इलेक्ट्राॅन युगल है जो कि एकाकी युगल - आबंध् युगल प्रतिकषर्ण के लिए उत्तरदायी है जिससे आबंध् कोण 109°28श् से कम होता है। 7ण्10 च्ब्स5 ़ क्2व् → च्व्ब्स3 ़ 2क्ब्स 7ण्11 भ्3च्व्4 अणु में तीन च्दृव्भ् समूह उपस्िथत है अतः इसकी क्षारकता 3 है। 7ण्15 आॅक्सीजन व्2 के छोटे आकार और उच्च विद्युत्)णात्मकता के कारण जल के अणु हाइड्रोजन आबंध् से अध्िक संगुण्िात होते हैं। इसके परिणामस्वरूप यह द्रव अवस्था में रहता है। 7ण्21 अनुनाद संरचनाओं के कारण दोनों ैदृव् आबंध् सहसंयोजी हैं तथा समान सामथ्यर् वाले हैं। दृ दृ 7ण्25 मुख्यतया भ्व़् और भ्ैव् में प्रथम आयनन के कारण भ्ैव्जल में एक प्रबल अम्ल है। भ्ैव् का भ्व़् तथा3424 43ैव्2दृ में आयनन नगण्य है अतः 7ण्31 सामान्यतः अंतराहैलोजन यौगिक हैलोजन की अपेक्षा अध्िक ियाशील होते हैं। इसका कारण ग्दृग्1 आबंध् की अपेक्षा ग्दृग्1 आबंध् का दुबर्ल होना है। अतः प्ब्प्ए प्2 से अिाक ियाशील है। 7ण्34 रेडाॅन रेडियोसिय है तथा इसकी अधर्यु कम होती है जिससे रेडाॅन के रसायन का अध्ययन कठिन हो जाता है। ज्ञ ढढ ज्ञ । 4ं21

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