उद्देश्य इस एकक के अध्ययन के पश्चात् आपμ ऽ औसत एवं तात्कालिक अभ्िािया वेग को परिभाष्िात कर सवेंफगेऋ ऽ अभ्िािया वेग को अभ्िाियकांे अथवा उत्पादों की सांद्रता में समय के साथ परिवतर्न के पद में लिख सवेंफगे ऋ ऽ प्रारंभ्िाक तथा जटिल अभ्िाियाओं में विभेद कर सवेंफगेऋ ऽ अभ्िाियाओं की आण्िवकता तथा कोटि में अंतर कर सवेंफगेऋ ऽ वेग स्िथरांक की परिभाषा कर सवेंफगेऋ ऽ वेग स्िथरांक पर अभ्िाियकों की सांद्रता, ताप तथा उत्प्रेरक की निभर्रता का वणर्न कर सवेंफगेऋ ऽ शून्य एवं प्रथम कोटि की अभ्िाियाओं के लिएसमाकलित वेग समीकरण की व्युत्पिा कर सवेंफगेऋ ऽ शून्य एवं प्रथम कोटि की अभ्िाियाओं के लिए वेग स्िथरांक का निधार्रण कर सवेंफगेऋ ऽ संघट्टवाद ;ब्वससपेपवद ज्ीमवतलद्ध का वणर्न कर सवेंफगे। फ्रासायनिक बलगतिकी हमें यह समझने में सहायता करती है कि अभ्िाियाएं वैफसे होती हैं।य् रसायन स्वाभाविक रूप से परिवतर्न से संबंिात विज्ञान है। रासायनिक अभ्िािया द्वारा विश्िाष्ट गुणों से युक्त पदाथो± का अन्य गुणों से युक्त विभ्िान्न पदाथो± में परिवतर्न होता है। किसी रासायनिक अभ्िािया में रसायनज्ञ निम्नलिख्िात तथ्य जानने का प्रयत्न करते हैंμ कद्ध रासायनिक अभ्िािया होने की संभावना को, जो कि ऊष्मागतिकी से निधार्रित की जा सकती है ;आप जानते हैं कि स्िथर ताप एवं दाब पर जिस अभ्िािया के लिए Δळ ढ 0 होती है वह अभ्िािया संभाव्य होती हैद्धऋ खद्ध किस सीमा तक अभ्िािया होगी, इसे रासायनिक साम्य से निधार्रित किया जा सकता हैऋ गद्ध अभ्िािया का वेग अथार्त् अभ्िािया द्वारा साम्यावस्था तक पहुँचने में लगने वाला समय। रासायनिक अभ्िािया को पूणर् रूप से समझने के लिए अभ्िािया की संभाव्यता तथा सीमा के साथ - साथ इसके वेग तथा उसको निधार्रित करने वाले कारकों को जानना भी समान रूप से महत्वपूणर् है। उदाहरणाथर्μ कौन से प्राचल निधार्रित करते हैं कि खाद्य पदाथर् कितनी शीघ्र खराब ;ैचवपसद्ध होगा? दाँत भरने के लिए शीघ्र जमने वाले पदाथर् वैफसे अभ्िाकल्प किए जाएं? अथवा स्वचालित इंजन में ईंधन के दहन की दर वैफसे नियंत्रिात होती है? इन सभी प्रश्नों का उत्तर रसायन विज्ञान की उस शाखा द्वारा मिलता है, जिसमें अभ्िािया वेग तथा इसकी ियावििा का अध्ययन किया जाता है, जिसे रासायनिक बलगतिकी कहते हैं। श्ज्ञपदमजपबेश् ;बलगतिकीद्ध शब्द की व्युत्पिा ग्रीक भाषा के शब्द श्ज्ञपदमेपेश् से हुइर् है जिसका अथर् होता है गति। ऊष्मागतिकी केवल अभ्िािया की संभाव्यता बताती है जबकि रासायनिक 4.1 रासायनिक अभ्िािया वेग बलगतिकी अभ्िािया की गति बताती है। उदाहरणाथर् ऊष्मागतिकीय आँकड़े दशार्ते हैं कि हीरे को ग्रैपफाइट में परिवतिर्त किया जा सकता है परंतु वास्तव में इस परिवतर्न की गति इतनी मंद होती है कि परिवतर्न बिल्वुफल भी परिलक्ष्िात नहीं होता। अतः अिाकंाश लोग समझते हैं कि ‘हीरा सदैव ही हीरा रहता है’। बलगतिकीय अध्ययन न केवल रासायनिक अभ्िािया के वेग को निधार्रित करने में मदद करते हैं अपितु उन स्िथतियों का भी वणर्न करते हैं जिनसे अभ्िािया वेग में परिवतर्न लाया जा सकता है। वुफछ कारक जैसे सांद्रता, ताप, दाब तथा उत्प्रेरक अभ्िािया के वेग को प्रभावित करते हैं। स्थूल स्तर पर हमारी रुचि पदाथो± की कितनी मात्रा प्रयुक्त अथवा निमिर्त हुइर् है और इनके उपभोग अथवा निमिर्त होने की दर में होती है। आण्िवक स्तर पर अभ्िािया की ियावििा में, संघट्ट करने वाले अणुओं के विन्यास तथा ऊजार् को सम्िमलित करते हुए विचार - विमशर् किया जाता है। इस एकक में, हम अभ्िािया के औसत एवं तात्कालिक वेग तथा इन्हें प्रभावित करने वाले कारकों का अध्ययन करेंगे। संघट्टवाद ;ब्वससपेपवद ज्ीमवतलद्ध के विषय में वुफछ प्रारंभ्िाक जानकारी भी इसमें दी गइर् है। तथापि इन सबको समझने के लिए, आइए, हम पहले अभ्िािया वेग के विषय में समझें। वुफछ अभ्िाियाएं, जैसे आयनिक अभ्िाियाएं अत्यिाक तीव्र गति से होती हैं। उदाहरणाथर्, सिल्वर नाइट्रेट के जलीय विलयन में सोडियम क्लोराइड का जलीय विलयन मिलाने पर सिल्वर क्लोराइड का अवक्षेपण अतिशीघ्र होता है। दूसरी ओर वुफछ अभ्िाियाएं बहुत मंद होती हैं, जैसेμ वायु व आद्रर्ता की उपस्िथति में लोहे पर जंग लगना। वुफछ अभ्िाियाएं ऐसी भी होती हैं जो मध्यम वेग से होती हैं, जैसेμ इक्षु - शवर्फरा का प्रतिलोमन तथा स्टाचर् का जलअपघटन। क्या आप प्रत्येक संवगर् की अभ्िाियाओं के अन्य उदाहरण सोच सकते हैं? आप जानते ही होंगे कि स्वचालित वाहन की गति को उसकी स्िथति परिवतर्न अथवा निश्िचत समय में तय की गइर् दूरी के बीच संबंध से व्यक्त करते हैं। इसी प्रकार से किसी अभ्िािया की गति अथवा वेग को इकाइर् समय में अभ्िाियकों अथवा उत्पादों की सांद्रता में परिवतर्न के रूप में परिभाष्िात किया जा सकता हैं। अिाक सुस्पष्टता के लिए इसेμ ;पद्ध किसी एक अभ्िाियक की सांद्रता में ”ास की दर अथवा ;पपद्ध किसी एक उत्पाद की सांद्रता में वृि की दर के द्वारा व्यक्त करते हैं। एक काल्पनिक अभ्िािया पर यह मानते हुए विचार करें कि आयतन स्िथर है, अभ्िाियक त् का एक मोल उत्पाद च् का एक मोल निमिर्त करता है। त् → च् यदि समय ज1 एवं ज2 पर त् एवं च् की सांद्रताएं क्रमशः ख्त्,1 एवं ख्च्,1 तथा ख्त्,2 एवं ख्च्,2 हों तबμ Δज त्र ज2 दृ ज1 Δख्त्, त्र ख्त्,2 दृ ख्त्,1 Δख्च्, त्र ख्च्,2 दृ ख्च्,1 उक्त व्यंजकों में बड़ा कोष्ठक मोलर सांद्रता व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त किया जाता है। त् की सादंं्रता मे”ासΔ Δख्त्, ज त्र−त् में ”ास होने की दर ;4ण्1द्धत्र समय च् की सादतं्रा मंे वृि(Δ Δख्च्, ज ;4ण्2द्धच् मंे वृि( की दर त्रत्ऱसमय क्योंकि अभ्िाियकों की सांद्रता घटती है अतः Δख्त्, एक )णात्मक मात्रा है। अभ्िािया वेग को धनात्मक मात्रा में प्राप्त करने के लिए इसे दृ1 से गुणा करते हैं। समीकरण 4ण्1 तथा 4ण्2 औसत अभ्िािया वेग, त को निरूपित करते हैं। औसतंअअभ्िािया वेग अभ्िाियकों अथवा उत्पादों के सांद्रता परिवतर्न तथा परिवतर्न में प्रत्युक्त समय पर निभर्र करता है ;चित्रा 4ण्1द्ध। चित्रा 4.1μ अभ्िािया का तात्क्षण्िाक एवं औसत वेग अभ्िािया वेग की इकाइयाँ समीकरण 4ण्1 एवं 4ण्2 से स्पष्ट है कि अभ्िािया वेग की इकाइर्, सांद्रता समयदृ1 है। उदाहरणाथर्, यदि सांद्रता की इकाइर् उवस स्दृ1 तथा समय की इकाइर् सेवेंफड में ली जाए तो अभ्िािया वेग की इकाइर् उवस स्दृ1 ेदृ1 होगी। तथापि, गैसीय अभ्िाियाओं में जब गैसों की सांद्रता आंश्िाक दाब द्वारा व्यक्त की जाती है, तब वेग की इकाइर् ंजउ ेदृ1 होगी। सारणी 4ण्1 से यह देखा जा सकता है कि औसत वेग का मान 1ण्90 × 10दृ4 उवस स्दृ1 ेदृ1 से 0ण्40 × 10दृ4 उवस स्दृ1ेदृ1 के मध्य है। तथापि औसत वेग किसी क्षण पर अभ्िािया वेग को व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त नहीं हो सकता क्योंकि जिस समयांतराल के लिए इसकी गणना की गइर् है, उसमें यह अपरिवतिर्त रहेगा। इसलिए समय के किसी क्षण पर वेग व्यक्त करने के लिए तात्क्षण्िाक वेग ज्ञात किया जाता है। इसे हम किसी अतिलघु समयांतराल कज ;जब Δज शून्य की ओर अग्रसर होद्ध के लिए औसत वेग द्वारा प्राप्त कर सकते हैं। अतः गण्िातीय रूप में अनंत सूक्ष्म कज के लिए तात्क्षण्िाक वेग को निम्नलिख्िात प्रकार से व्यक्त करते हैंμ दृΔख्त्, Δख्च्, तंअ त्रत्र ;4ण्3द्धΔज Δज जब Δज → 0 दृकख्त्, कख्च्, या त त्रत्र पदेज कज कज इसे ग्रापफ द्वारा, त् अथवा च् में से किसी के भी सांद्रता - समय वक्र पर स्पशर् रेखा खींच कर तथा उसके ढाल की गणना करके ज्ञात किया जा सकता है ;चित्रा 4ण्2द्ध। उदाहरण 4ण्1 चित्रा 4.2μ ब्यूटिल क्लोराइड ;ब्4भ्9ब्सद्ध के जल अपघटन का तात्क्षण्िाक वेग स्पशर् रेखा का ढाल तात्क्षण्िाक वेग का मान देता है। अतः 600 े परμ ;0ण्0165 − 0ण्037द्धउवस स् −1 त त्र−पदेज ;800 − 400द्धे −5 −1 −1त्र 5ण्12 ×10 उवसस् े ज त्र 250 े पर तपदेज त्र 1ण्22 × 10−4 उवस स्−1े −1 ज त्र 350 े पर तपदेज त्र 1ण्0 × 10−4 उवस स्−1े −1 ज त्र 450 े पर त्र 6ण्4 × 10−4 उवस स्−1े −1 तपदेजअब अभ्िािया भ्ह;सद्ध ़ ब्स2;हद्ध → भ्हब्स2;ेद्ध पर विचार करते हैं। इस अभ्िािया में अभ्िाियक व उत्पादों के स्टाॅइकियोमीट्री गुणांक समान है। अतः ऐसी अभ्िािया के लिएμ −Δख्भ्ह, −Δ ख्ब्स , Δख्भ्हब्स , अभ्िािया वेग त्रत्र 2 त्र 2 Δज Δज Δज अथार्त् किसी अभ्िाियक की सांद्रता में कमी की दर उत्पाद की सांद्रता की वृि की दर के समान होती है। विंफतु निम्नलिख्िात अभ्िािया में भ्प् के दो मोल अपघटित होकर भ्2 तथा प्2 में से प्रत्येक का एक मोल देते हैंμ 2भ्प्;हद्ध → भ् ;हद्ध ़ प् ;हद्ध 22 जिन अभ्िाियाओं में अभ्िाियक एवं उत्पादों के स्टाॅइकियोमीट्री गुणांक समान नहीं होते, उनके वेग को व्यक्त करने के लिए किसी भी अभ्िाियक की सांद्रता में कमी की दर अथवा किसी भी उत्पाद की सांद्रता में वृि की दर को क्रमशः उनके स्टाॅइकियोमीट्री गुणांक से भाग देते हैं। उपरोक्त उदाहरण में भ्प् की सांद्रता में कमी की दर, भ्2 अथवा प्2 की सांद्रता में वृि की दर से दुगुनी हैं अतः इन्हें समान बनाने के लिए Δख्भ्प्, को 2 से भाग देते हैंμ ΔΔख्भ्, ख्प्, 1ख्भ्प्, 2 Δ 2इस अभ्िािया का वेग त्र− त्रत्र 2 Δज Δज Δज इसी प्रकार से अभ्िाियाμ − −़5ठत ;ंुद्ध ़ठतव् ;ंुद्ध ़6भ् ;ंुद्ध →3ठत ;ंुद्ध ़3भ् व्;सद्ध के लिए3 22 −− ़1ख्ठत Δ , Δख्ठतव्, 1 Δख्भ्, 1 Δख्ठत, 1 Δख्भ् व्, 3 22अभ्िािया वगे त्र− त्र−त्र−त्रत्र 5 Δज Δज 6 Δज 3 Δज 3 Δज किसी गैसीय अभ्िािया के लिए सांद्रता आंश्िाक दाब के समानुपाती होती है, अतः अभ्िािया वेग को अभ्िाकमर्क अथवा उत्पाद के आंश्िाक दाब में परिवतर्न की दर से व्यक्त किया जा सकता है। 4.2 अभ्िािया वेग को प्रभावित अभ्िािया वेग प्रायोगिक परिस्िथतियों, जैसेμ अभ्िाियकों की सांद्रता ;गैसों के संदभर् में दाबद्ध, ताप तथा उत्प्रेरक पर निभर्रकरने वाले कारक करता है। 4.2.1 अभ्िािया वेग की सांद्रता पर निभर्रता 4.2.2 वेग व्यंजक एवं वेग स्िथरांक किसी दिए गए ताप पर अभ्िािया वेग, एक अथवा अनेक अभ्िाियकों तथा उत्पादों की सांद्रताओं पर निभर्र हो सकता है। अभ्िािया वेग का अभ्िाियकों की सांद्रता के पदों में निरुपण वेग नियम ;त्ंजम स्ंूद्ध कहलाता है। इसे वेग समीकरण अथवा वेग व्यंजक भी कहते हैं। सारणी 4ण्1 के परिणाम स्पष्ट दशार्ते हैं कि समय के साथ जैसे - जैसे अभ्िाियकों की सांद्रता घटती है, अभ्िािया वेग घटता जाता है। इसके विपरीत अभ्िािया वेग सामान्यतः, अभ्िाियकों की सांद्रता में वृि होने से बढ़ता है। अतः अभ्िािया का वेग अभ्िाियकों की सांद्रता पर निभर्र करता है। एक सामान्य अभ्िाियाμ ं। ़ इठ → बब् ़ कक् पर विचार करें जिसमें ंए इए ब तथा क अभ्िाियकों एवं उत्पादों के स्टाॅइकियोमीट्री गुणांक हैं। इस अभ्िािया के लिए वेग व्यंजक होगा वेग ∝ ख्।,ग ख्ठ,ल ;4ण्4द्ध यहाँ घातांक ग तथा ल स्टाॅइकियोमीट्री गुणांक ;ं तथा इद्ध के समान अथवा भ्िान्न हो सकते हैं। उक्त समीकरण को हम निम्न रूप में लिख सकते हैंμ वेग त्र ा ख्।,ग ख्ठ,ल ;4ण्4 कद्ध − क;तद्ध कज ख्।, ख्ठ,ग लात्र ;4ण्4 खद्ध समीकरण 4ण्4 ;खद्ध को अवकल वेग समीकरण कहते हैं। यहाँ ा समानुपाती स्िथरांक है जिसे वेग स्िथरांक कहते हैं। 4ण्4 जैसी समीकरण को जो कि अभ्िािया वेग एवं अभ्िाियकों की सांद्रता में संबंध स्थापित करती है, वेग नियम अथवा वेग व्यंजक कहते हैं। अतः वेग नियम वह व्यंजक होता है जिसमें किसी अभ्िािया के वेग को अभ्िाियकों की मोलर सांद्रता के पद पर कोइर् घातांक लगाकर व्यक्त करते हैं। वह किसी संतुलित रासायनिक समीकरण में अभ्िाकमर्कों के स्टाॅइकियोमीट्री गुणांक के समान अथवा भ्िान्न भी हो सकते हैं। उदाहरण के लिए अभ्िाियाμ 2 छव् ;हद्ध ़ व्2 ;हद्ध → 2छव्2 ;हद्ध इस अभ्िािया के वेग का निधार्रण या तो किसी एक अभ्िाियक की सांद्रता को स्िथर रखते हुए दूसरे अभ्िाियक की सांद्रता में परिवतर्न करके, अथवा दोनों अभ्िाियकों की सांद्रता परिवतिर्त करके, प्रारंभ्िाक सांद्रताओं के पफलन के रूप में कर सकते हैं। परिणाम सारणी 4ण्2 में दिए गए हैं। सारणी 4ण्2μ छव्2 के विरचन का प्रारंभ्िाक वेग परिणामों से स्पष्ट परिलक्ष्िात होता है कि जब व्2 की सांद्रता स्िथर रखकर छव् की सांद्रता दुगुनी की जाती है तब अभ्िािया के प्रारंभ्िाक वेग में चार के गुणक ;0ण्096 उवस स्−1े −1 से 0ण्384 उवस स्−1े −1द्ध से वृि होती है। यह दशार्ता है कि वेग छव् की सांद्रता के वगर्पफल पर निभर्र करता है। जब छव् की सांद्रता स्िथर रखी जाती है तथा व्2 की सांद्रता दुगुनी की जाती है तब अभ्िािया वेग का दुगुना होना अभ्िािया वेग का व्2 की सांद्रता की एक घात पर निभर्रता दशार्ता है। अतः इस अभ्िािया के लिए वेग समीकरण होगाμ वेग त्र ा ख्छव्,2ख्व्2, क;तद्ध 2इस समीकरण का अवकल रूप समीकरण −त्रख्छव्, ख्व् , द्वारा दिया जाता है।ा 2कज इस अभ्िािया में प्रायोगिक आँकड़ों से प्राप्त वेग समीकरण में सांद्रताओं के घातांकों का मान, संतुलित अभ्िािया में सांद्रताओं के स्टाॅइकियोमीट्री घातांकों के समान है। वुफछ अन्य उदाहरण निम्नलिख्िात हैंμ अभ्िािया प्रायोगिक वेग समीकरण)1ण् ब्भ्ब्स3 ़ ब्स2 → ब्ब्स4 ़ भ्ब्स वेग त्र ा ख्ब्भ्ब्स3, ख्ब्स2,2ण् ब्भ्3ब्व्व्ब्2भ्5 ़ भ्2व् → ब्भ्3 ब्व्व्भ् ़ ब्2भ्5व्भ् वेग त्र ा ख्ब्भ्3 ब्व्व्ब्2भ्5, ख्भ्2व्,0 इन अभ्िाियाओं में सांद्रता पदों के घातांक समीकरण में उपस्िथत स्टाॅकियोमीट्री गुणांकों से भ्िान्न हैं अतः हम कह सकते हैंμ वेग नियम को किसी संतुलित अभ्िािया को देखकर प्रागुक्त नहीं किया जा सकता, यानि इसका निधार्रण सै(ांतिक रूप से नहींऋ बल्िक प्रायोगिक रूप से किया जाता है। 4.2.3 अभ्िािया की कोटि वेग समीकरण 4ण्4 ;कद्ध मेंμ वेग त्र ा ख्।,ग ख्ठ,ल ग एवं ल इंगित करते हैं कि अभ्िािया का वेग, । अथवा ठ के सांद्रता परिवतर्न से वैफसे प्रभावित होता है। समीकरण 4ण्4 ;कद्ध में इन घातकों का योग ग ़ ल अभ्िािया की 101 रासायनिक बलगतिकी वुफल कोटि को व्यक्त करता है जबकि ग तथा ल क्रमशः । तथा ठ के प्रति अभ्िािया की कोटि को प्रद£शत करते हैं। अतः किसी अभ्िािया के वेग नियम व्यंजक में प्रयुक्त सांद्रताओं के घातांकों का योग उस अभ्िािया की कोटि कहलाती है। अभ्िािया की कोटि 0ए 1ए 2ए 3 अथवा भ्िान्नात्मक भी हो सकती है। अभ्िािया की कोटि के शून्य होने का अथर् है कि अभ्िािया वेग अभ्िाियकों की सांद्रता पर निभर्र नहीं करता। संतुलित रासायनिक समीकरण, अभ्िािया वैफसे हो रही हैऋ इसका सही चित्राण कभी भी प्रस्तुत नहीं करतीऋ क्योंकि विरले ही कोइर् अभ्िािया एक पद में पूणर् होती है। एक पद में होने वाली अभ्िाियाओं को प्राथमिक अभ्िाियाएं ;म्समउमदजंतल त्मंबजपवदेद्ध कहते हैं। जब प्राथमिक अभ्िाियाएं एक पद में न होऋ बल्िक कइर् पदों में संपन्न होकर उत्पाद बनाती हों, तब ऐसी अभ्िाियाओं को जटिल अभ्िाियाएं ;ब्वउचसमग त्मंबजपवदेद्ध कहते हैं। ये अभ्िाियाएं क्रमागत ;जैसे, एथेन का ब्व्2 तथा भ्2व् में आॅक्सीकरण कइर् माध्यमिक पदों द्वारा जिनमें एल्कोहाॅल, एल्िडहाइड तथा अम्ल बनते हैंद्ध, विपरीत अभ्िाियाएं तथा पाश्वर् अभ्िाियाएं ;जैसे प़फीनाॅल के नाइट्रोकरण द्वारा आॅथोर्नाइट्रोप़फीनाॅल तथा पैरानाइट्रोप़फीनाॅल का बननाद्ध हो सकती हंै। वेग स्िथरांक की इकाइयाँμ एक सामान्य अभ्िाियाμ ं। ़ इठ → बब् ़ कक् के लिए वेग त्र ा ;।द्धग ;ठद्धल जहाँ ग ़ ल त्र द त्र अभ्िािया की कोटि वेग सादंत्रा 1ा त्र गल त्र× द जब ख्।,त्रख्ठ,ख्,ख्,।ठ समय ;सादंत्राद्ध सांद्रता एवं समय की ैप् इकाइर् उवस स्दृ1 एवं े लेने पर विभ्िान्न अभ्िाियाओं के लिए ा की इकाइयाँ सारणी 4ण्3 में दशार्इर् गइर् है। सारणी 4ण्3μ वेग स्िथरांक की इकाइयाँ 4.2.4 अभ्िािया की आण्िवकता अभ्िािया का एक अन्य गुणधमर्, जिसे आण्िवकता कहते हैं, अभ्िािया की ियावििा समझने में सहायता करता है। प्राथमिक अभ्िािया में भाग लेने वाली स्पीशीश ;परमाणु, आयन अथवा अणुद्ध जो कि एक साथ संघट्ट के पफलस्वरूप रासायनिक अभ्िािया करती हैं, की संख्या को अभ्िािया की आण्िवकता कहते हैं। जब अभ्िािया में केवल एक स्पीशीश संलग्न हो तो अभ्िािया एक अणुक कहलाती है, उदाहरणाथर्μ अमोनियम नाइट्राइट का अपघटन छभ्4छव्2 → छ2 ़ 2भ्2व् द्वि - परमाणुक अभ्िाियाओं में एक साथ दो स्पीशीश का संघट्ट होता है, उदाहरणाथर्μ हाइड्रोजन आयोडाइड का वियोजन 2भ्प् → भ्2 ़ प्2 त्रिा - परमाणुक अभ्िाियाओं में एक साथ तीन स्पीशीश का संघट्ट होता है, जैसेμ 2छव् ़ व्2 → 2छव्2 उचित विन्यास के साथ तीन से अिाक अणुओं के एक साथ संघट्ट के उपरांतअभ्िाकृत होने की संभाव्यता अत्यंत कम होती है। अतः त्रिाअणुक आण्िवकता की अभ्िाियाएं बहुत कम होती हैं और धीमी गति से बढ़ती हैं। इस प्रकार स्पष्ट है कि जटिल अभ्िाियाएं जिनके स्टाॅइकियोमीट्री समीकरण में तीन से अिाक अणु होते हैं, वे एक से अिाक पदों में होनी चाहिए, जैसेμ ज्ञब्सव्3 ़ 6थ्मैव्4 ़ 3भ्2ैव्4 → ज्ञब्स ़ 3थ्म2;ैव्4़ 3भ्2व्द्ध3 यह अभ्िािया जो ऊपरी तौर से दशम कोटि की आभासित होती है, वास्तव में द्वितीय103 रासायनिक बलगतिकी कोटि की अभ्िािया है। यह बताता है कि यह अभ्िािया अनेक पदों में संपन्न होती है। कौनसा पद वुफल अभ्िािया वेग को नियंत्रिात करता है, इस प्रश्न का उत्तर हम अभ्िािया की ियावििा को ज्ञात करके दे सकते हैं। उदाहरण के लिए रिले दौड़ प्रतियोगिता में जीतने की संभावना समूह के सबसे मंद धावक पर निभर्र करती है। ठीक इसी प्रकार अभ्िािया का वुफल वेग अभ्िािया के सबसे मंद पद द्वारा नियंत्रिात होता है, जिसे वेग निधार्रक पद कहते हैं। क्षारीय माध्यम में आयोडाइड आयन से उत्प्रेरित हाइड्रोजन परआॅक्साइड के अपघटन की अभ्िािया पर विचार कीजिए। −प्2भ् व् ⎯⎯⎯⎯⎯⎯→2भ् व् ़ व्22 22क्षारीय माध्यम इस अभ्िािया के लिए निम्नलिख्िात वेग समीकरण प्राप्त होता हैμ −कख्भ्व् ,22 −वेग त्रत्र ा ख्भ्व् ,ख् ,2 2प्कज यह अभ्िािया भ्2व्2 एवं प्−ए प्रत्येक के प्रति प्रथम कोटि की है। प्रमाण, अभ्िािया के दो पदों में सम्पन्न होने का संकेत देते हैं। ;पद्ध भ्2व्2 ़प्−→ भ्2व् ़ प्व्− ;मंद पदद्ध ;पपद्ध भ्2व्2 ़ प्व्−→ भ्2व् ़ प्− ़ व्2 दोनों पद द्वि - अणुक प्राथमिक अभ्िािया हंै। प्व्− स्पीशीश को मध्यवतीर् कहते हैं, क्योंकि यह अभ्िािया में नि£मत होती है। परंतु समग्र संतुलित समीकरण में परिलक्ष्िात नहीं होती। प्रथम पद मंद होने के कारण वेग निधार्रक पद है। अतः इस अभ्िािया में मध्यवतीर् बनने की दर अभ्िािया वेग को निधार्रित करेगी। अतः अब तक के वणर्न से हम निम्न निष्कषर् निकाल सकते हैंμ ;पद्ध अभ्िािया की कोटि एक प्रायोगिक मात्रा है। यह शून्य तथा भ्िान्नात्मक भी हो सकती है। परंतु अभ्िािया की आण्िवकता शून्य अथवा अपूणा±क नहीं हो सकती। ;पपद्ध अभ्िािया की कोटि प्राथमिक एवं जटिल दोनांे प्रकार की अभ्िाियाओं पर लागू होती है जबकि अभ्िािया की आण्िवकता केवल प्राथमिक अभ्िािया के लिए ही परिभाष्िात होती है। जटिल अभ्िाियाओं के लिए आण्िवकता का कोइर् अथर् नहीं होता। ;पपपद्ध जटिल अभ्िाियाओं में कोटि सबसे मंद पद की दी जाती है तथा सबसे मंद पद की आण्िवकता तथा कोटि समान होती है। 4.3 समाकलित वेग समीकरण 4.3.1 शून्य कोटि की अभ्िाियाएं चित्रा 4.3μ शून्य कोटि की अभ्िािया के लिए सांद्रता का समय के साथ परिवतर्न आलेख हम पहले जान चुके हैं कि सांद्रता पर आधारित वेग समीकरण को अवकल वेग समीकरण कहते हैं। तात्कालिक वेग का निधार्रण सदैव आसान नहीं होता, क्योंकि इसका मान सांद्रता एवं समय के मध्य खींचे वक्र के श्ज श् बिंदु पर खींची गइर् स्पशर् रेखा का ढाल माप कर किया जाता है ;चित्रा 4ण्1द्ध। इससे वेग नियम ज्ञात करना कठिन हो जाता है, अतः अभ्िािया की कोटि भी ज्ञात करना कठिन हो जाता है। इस कठिनाइर् के निवारण हेतु हम वेग समीकरण को समाकलित करके समाकलित वेग समीकरण प्राप्त कर सकते हैं, जिससे हमें सीधे ही मापे हुए प्रायोगिक आँकड़ों, अथार्त् विभ्िान्न समय पर सांद्रता तथा वेग स्िथरांक के बीच संबंध ज्ञात हो जाता है। विभ्िान्न कोटि की अभ्िाियाओं के लिए अलग - अलग समाकलित वेग समीकरण होते हैं। यहाँ पर हम केवल शून्य एवं प्रथम कोटि की अभ्िाियाओं के लिए ही समाकलित वेगसमीकरणों की व्युत्पिा करेंगे। शून्य कोटि की अभ्िािया का अथर् होता है ऐसी अभ्िािया जिसका वेग अभ्िाियक की सांद्रता के शून्य घातांक के समानुपाती हो। अभ्िािया, त् → च् पर विचार करेंμ कख्त्, 0 वेग त्र− त्रा ख्,त्कज किसी मात्रा पर शून्य घातांक का मान इकाइर् होता है अतःकख्त्,त्र×1वेग त्र− ा कज या कख्त्, त्र दृ ा कज दोनों तरपफ समाकलन करने परμ ख्त्, त्र दृ ा ज ़ प् ;4ण्5द्ध यहाँ प्ए समाकलन स्िथरांक है। ज त्र 0 पर अभ्िाियक त् की सांद्रता त्र ख्त्,0 है, जहाँ ख्त्,0 अभ्िाियक की प्रारंभ्िाक सांद्रता है। समीकरण 4ण्5 में ख्त्,0 का मान रखने परμ ख्त्,0 त्र दृा × 0 ़ प् ख्त्,0 त्र प् प् का मान समीकरण 4ण्5 में रखने परμ ख्त्, त्र दृाज ़ ख्त्,0 ;4ण्6द्ध समीकरण 4ण्6 सरल रेखा के समीकरण ल त्र उग ़ ब के समतुल्य है। यदि हम ख्त्, एवं ज के बीच ग्रापफ खींचे तो एक सीधी रेखा प्राप्त होती है ;चित्रा 4ण्3द्ध। इस रेखा का ढाल त्र दृ ा एवं अंतः खंड ख्त्,0 के बराबर होता है। समीकरण 4ण्6 को पुनः सरल करने पर वेग स्िथरांक प्राप्त होता है। ख्, ख्,त्0 −त्ा त्र ;4ण्7द्धज शून्य कोटि की अभ्िाियाएं अपेक्षाकृत असामान्य हैं, विंफतु विशेष परिस्िथतियों में यह 105 रासायनिक बलगतिकी 4.3.2 प्रथम कोटि की अभ्िाियाएं घटित होती हैं। वुफछ एन्जाइम उत्प्रेरित अभ्िाियाएं तथा धातु सतहों पर होने वाली अभ्िाियाएं शून्य कोटि की अभ्िाियाओं के वुफछ उदाहरण हैं। उच्च दाब पर, गैसीय अमोनिया का तप्त प्लैटिनम सतह पर वियोजन, शून्य कोटि की अभ्िािया है। 1130ज्ञ 2छभ् ;हद्ध ⎯⎯⎯⎯⎯→छ ;हद्ध ़3भ् ;हद्ध 3 22च्ज उत्प्रेरक वेग त्र ा ख्छभ्3,0 त्र ा इस अभ्िािया में, प्लेटिनम की सतह उत्प्रेरक का कायर् करती है। उच्च दाब पर, धातु की सतह गैस अणुओं से संतृप्त हो जाती है। इसलिए अभ्िािया की परिस्िथतियों में और अिाक परिवतर्न, धातु सतह पर उपस्िथत अमोनिया की मात्रा में परिवतर्न नहीं कर सकता। अतः अभ्िािया वेग अभ्िाियक की सांद्रता पर निभर्रता से स्वतंत्रा हो जाता है। स्वणर् सतह पर, भ्प् का उष्मीय वियोजन शून्य कोटि की अभ्िािया का एक अन्य उदाहरण है। इस वगर् की अभ्िाियाओं में अभ्िािया वेग, अभ्िाियक त् की सांद्रता के प्रथम घातांक के समानुपाती होता है। उदाहरणाथर्μ त् → च् कख्त्,त्रा त्वेग त्र− ख्,कज क ख्त् ,या त्र दृ ाजक ख्त् , इस समीकरण का समाकलन करने पर हम पाते हैंμ सद ख्त्, त्र दृाज ़ प् ;4ण्8द्ध एक बार पिफर प् समाकलन का स्िथरांक है तथा इसका मान सरलता से ज्ञात किया जा सकता है। जब ज त्र 0ए त् त्र ख्त्,0ए यहाँ ख्त्,0 अभ्िाियक की प्रारंभ्िाक सांद्रता है। अतः समीकरण 4ण्8 को हम निम्न प्रकार से लिख सकते हैंμ सद ख्त्,0 त्र दृा × 0 ़ प् सद ख्त्,0 त्र प् प् का मान समीकरण 4ण्8 में प्रतिस्थापित करने परμ सद ख्त्, त्र दृाज ़ सदख्त्,0 ;4ण्9द्ध समीकरण को पुनः व्यवस्िथत करने परμ ख्त्,सद त्र−ाजख्,0त् 1 ख्त्, 0ा त्र सदया ;4ण्10द्धज ख्त्, समय ज1 पर, समीकरण 4ण्8 सेसदख्त्,1 त्र दृ ाज1 ़ सदख्त्,0 ;4ण्11द्ध समय ज2 परऋसदख्त्,2 त्र दृ ाज2 ़ सदख्त्,0 ;4ण्12द्ध चित्रा 4.4μ प्रथम कोटि की अभ्िािया के लिए सदख्त्, एवं ज के मध्य आलेख चित्रा 4.5μप्रथम कोटि की अभ्िािया के लिए सवह ख्त्,0ध्ख्त्, एवं समय के मध्य आलेख यहाँ ख्त्,1 तथा ख्त्,2 क्रमशः समय ज1 तथा ज2 पर अभ्िाियक की सांद्रताएं हैं। समीकरण 4ण्12 को 4ण्11 से घटाने परμ सदख्त्,1दृ सदख्त्,2 त्र दृ ाज1 दृ ;दृाज2द्ध ख्त्, सद 1 त्राज;2 −ज1द्धख्त्, 2 1 ख्त्, ा त्र सद 1 ;4ण्13द्ध;ज −ज द्ध ख्त्, 21 2 समीकरण 4ण्9 को निम्न प्रकार से भी लिख सकते हैंμ ख्त्, सद त्र−ा ज ख्त्, 0 समीकरण के दोनों तरपफ प्रतिलघुगुणक लेने परμ दृ ा जख्त्, त्र ख्त्,0 म ;4ण्14द्ध समीकरण 4ण्9 समीकरण ल त्र उग ़ ब के समतुल्य है, यदि हम सद ख्त्, एवं ज के मध्य ग्रापफ खीचें ;चित्रा 4ण्4द्ध तो हमें दृ ढाल त्र दृ ा वाली सरल रेखा प्राप्त होती है तथा अंतः खंड का मान सद ख्त्,0 होता है। प्रथम कोटि के वेग समीकरण 4ण्10 को निम्न प्रकार से भी लिखा जा सकता हैμ 2ण्303 ख्त्, 0ा त्र सवह ;4ण्15द्धज ख्त्, ख्त्, ाजया’ सवह 0त्र ख्त्, 2ण्303 ख्त्, 0यदि हम सवह एवं ज के मध्य ग्रापफ खींचे ;चित्रा 4ण्5द्ध तो ढाल त्र ाध्2ण्303ख्त्,होगा। एथीन का हाइड्रोजनन ;भ्लकतवहमदंजपवदद्ध प्रथम कोटि की अभ्िािया का उदाहरण है। ब् भ् ;हद्ध ़भ् ;हद्ध →ब् भ् ;हद्ध 242 26 अतः वेग त्र ा ख्ब्2भ्4, अस्थायी नाभ्िाकों के सभी प्राकृतिक तथा कृत्रिाम नाभ्िाकीय ;रेडियोएक्िटवद्ध क्षय प्रथम कोटि की बलगतिकी के द्वारा होते हैं। 226 4 222त्ं → भ्म ़ त्द88 286 वेग त्र ा ख्त्ं, छ2व्5 एवं छ2व् का अपघटन प्रथम कोटि की अभ्िाियाओं के वुफछ अन्य उदाहरण हैं। आइए, हम गैसीय अवस्था की एक प्रतिनििाक प्रथम कोटि अभ्िािया पर विचार करें। ।;हद्ध → ठ;हद्ध ़ ब्;हद्ध ’ सद एवं सवह ;सवहंतपजीउे यानि लघुगणकद्ध के लिए परिश्िाष्ट - प्ट देखें। माना कि । का प्रारंभ्िाक दाब चप है तथा श्जश् समय पर वुफल दाब चहै। ऐसी अभ्िाियाज के लिए समाकलित वेग समीकरण की व्युत्पिा निम्न प्रकार से कर सकते हैंμ वुफल दाब च त्र च। ़ चठ ़ चब् ;दाब इकाइयाँद्धजच।ए चठ एवं चब् क्रमशः ।ए ठ एवं ब् के आंश्िाक दाब हैं। यदि ज समय पर । के दाब में ग ंजउ की कमी आती है तो ठ एवं ब् प्रत्येक के एक मोल बनने पर ठ एवं ब् प्रत्येक के दाब में ग ंजउ की वृि होगी। ।;हद्ध → ठ;हद्ध ़ ब्;हद्ध ज त्र 0 समय पर चप ंजउ 0 ंजउ 0 ंजउ ज समय पर ;चप दृ गद्ध ंजउ ग ंजउ ग ंजउ यहाँ ज त्र 0 समय पर प्रारंभ्िाक दाब चप है। चज त्र ;चप दृ गद्ध ़ ग ़ ग त्र चप ़ ग ग त्र चज दृ चप यहाँ, च। त्र चप दृ ग त्र चप दृ ;च दृ चप द्ध त्र 2चप दृ चजज ⎛ 2ण्303 ⎞⎛ चप ⎞ 2ण्303 चपा त्र⎜ ⎟⎜सवह ⎟त्र सवह ;4ण्16द्ध⎝ ज ⎠⎝ च। ⎠ ज ;2चप − चज द्ध 4.3.3 अभ्िािया कीकिसी अभ्िािया में अभ्िाियक की प्रारंभ्िाक सांद्रता के आधे होने में जितना समय लगता अधार्यु है, उसे अधार्यु कहते हैं। इसे ज) द्वारा प्रदश्िार्त किया जाता है। शून्य कोटि की अभ्िािया के लिए वेग स्िथरांक समीकरण 4ण्7 से दिया जाता है ख्त्, − ख्त्, ा त्र 0;4ण्7द्धज 1समय ज त्र ज) पर ख्त्, त्र ख्त्,02 ज) पर वेग स्िथरांक होगा ख्त्, 0 − 12ख्त्, 0 ख्त्, ा त्र या ज त्र 0ज11 22ा2 अतः स्पष्ट है कि शून्य कोटि की अभ्िािया में ज) अभ्िाियक की प्रारंभ्िाक सांद्रता के समानुपाती तथा वेग स्िथरांक के व्युत्क्रमानुपाती होता है। प्रथम कोटि की अभ्िािया के लिएμ 2ण्303 ख्,0ा त्र सवह त् ;4ण्15द्धज ख्,त् ख्त्,0 ज) पर ख्,त् त्र ;4ण्16द्ध2 अतः उपरोक्त समीकरण निम्न प्रकार होगाμ 2ण्303 ख्त्, 2ण्303 2ण्303 ा त्रसवह 0 अथवाज12 त्र ा ×सवह 2 त्र×0ण्301 ज) ख्त्,0 ा 2 0ण्693या ज) त्र ;4ण्17द्धा अतः प्रथम कोटि की अभ्िािया के लिए अधार्यु स्िथरांक होती है अथार्त् यह अभ्िाियकों की प्रारंभ्िाक सांद्रताओं पर निभर्र नहीं होती। प्रथम कोटि की अभ्िािया में अधार्यु की गणना वेग स्िथरांक से एवं वेग स्िथरांक की गणना अधार्यु से की जा सकती है। शून्य कोटि की अभ्िािया के लिए ज1ध्2 αख्त्,0 तथा प्रथम कोटि की अभ्िािया के लिए ज1ध्2 का मान ख्त्,0 पर निभर्र नहीं होता। शून्य एवं प्रथम कोटि की अभ्िाियाओं की गण्िातीय विश्िाष्टताओं का सारांश सारणी 4.4 में दिया गया है। सारणी 4ण्4μ शून्य एवं प्रथम कोटि की अभ्िाियाओं के लिए समाकलित वेग नियम 4.4 छद्म प्रथम कोटि की अभ्िािया कभी - कभी परिस्िथतियों के परिवतर्न द्वारा अभ्िािया की कोटि में परिवतर्न हो जाता है। उदाहरणाथर्, दो अभ्िाियकों वाली अभ्िािया, जिसमें एक अभ्िाियक आिाक्य में हो, पर विचार करते हैं। 0ण्01 उवस एथ्िाल ऐसीटेट के 10 उवस जल के साथ जलअपघटन के प्रारंभ में ;ज त्र 0द्ध तथा अभ्िािया की संपन्नता ;जद्ध पर विभ्िान्न अवयवों की मात्रा नीचे दी गइर् हैμ भ़्ब्भ्3ब्व्व्ब्2भ्5 ़भ्2व् ब्भ्3ब्व्व्भ् ़ ब्2भ्5व्भ्⎯⎯⎯→ ज त्र 0 0ण्01 उवस 10 उवस 0 उवस 0 उवस ज त्र ज 0 उवस 9ण्9 उवस 0ण्01 उवस 0ण्01 उवस अभ्िािया के उपरांत जल की सांद्रता में अिाक परिवतर्न नहीं होता, अतः वेग समीकरणμ वेग त्र ाश् ख्ब्भ्3ब्व्व्ब्2भ्5, ख्भ्2व्, ख्भ्2व्, को स्िथरांक मान सकते हैं। अतः समीकरण को निम्न प्रकार से लिख सकते हैंμ वेग त्र ा ख्ब्भ्3ब्व्व्ब्2भ्5, यहाँ ा त्र ाश् ख्भ्2व्, यह अभ्िािया प्रथम कोटि अभ्िािया की तरह व्यवहार करती है, अतः ऐसी अभ्िाियाओं को छद्म प्रथम कोटि की अभ्िािया कहते हैं। इक्षु - शकर्रा ;सूक्रोसद्ध का प्रतिलोमन छद्म प्रथम कोटि की अभ्िािया का एक अन्य उदाहरण है। भ़़्भ्2व् ़ब्6ब्12भ्22 व्11 ⎯⎯⎯→ ब्6भ्12व्6 भ्12व्6 इक्षु - शकर्रा ग्लूकोस Úक्टोश वेग त्र ा ख्ब्12,भ्22व्114.5 अभ्िािया वेग की बहुत सी अभ्िाियाएं ताप की वृि के साथ त्वरित होती हैं। उदाहरणाथर्, छ2व्5 के वियोजन में, पदाथर् का प्रारंभ्िाक मात्रा से आधी मात्रा में वियोजन, 0°ब् पर 10 दिनों में, 25°ब् परताप पर निभर्रता 5 घंटे में तथा 50°ब् पर 12 मिनट में, होता है। आप यह भी जानते हैं कि पोटैश्िायम रसायन विज्ञान 112 चित्रा 4.6μ मध्यवतीर् के द्वारा भ्प् का विरचन चित्रा 4.7μ स्िथतिज ऊजार् एवं अभ्िािया निदर्ेशांक के मध्य आलेख चित्रा 4.8μ विभ्िान्न गैसीय अणुओंमें ऊजार् वितरण को प्रद£शत करता वक्र परमैंगनेट ;ज्ञडदव्4द्ध एवं आॅक्सैलिक अम्ल ;भ्2ब्2व्4द्ध के मिश्रण में पोटैश्िायम परमैंगनेट का विरंजन निम्न ताप की तुलना में उच्च ताप पर शीघ्रता से होता है। यह भी पाया गया है कि किसी रासायनिक अभ्िािया में 10° ताप वृि से वेग स्िथरांक में लगभग दुगुनी वृि होती है। अभ्िािया वेग की ताप पर निभर्रता की व्याख्या आरेर्निअस समीकरण 4ण्18 से भली - भांति की जा सकती है। इसे सवर्प्रथम रसायनज्ञ जे. एच. वान्ट हाॅपफ ने प्रस्तावित किया था विंफतु स्वीडन के रसायनज्ञ आरेर्निअस ने इसका भौतिक सत्यापन तथा प्रतिपादन किया। दृम्ं ध्त्ज्ा त्र । म ;4ण्18द्ध यहाँ । आरेर्निअस गुणक अथवा आवृिा गुणक है। इसे पूवर् - चरघातांकी गुणक भी कहते हैं। यह किसी विश्िाष्ट अभ्िािया के लिए स्िथरांक होता है। त् गैस स्िथरांक है तथा म् संियण ऊजार् जिसे रवनसमेध्उवसए ;श्र उवस दृ1द्ध में मापते हैं।ंइसे निम्नलिख्िात सरल अभ्िािया से समझा जा सकता है। भ्2 ;हद्ध ़ प्2;हद्ध → 2भ्प् ;हद्ध आरेर्निअस के अनुसार यह अभ्िािया तभी हो सकती है जब हाइड्रोजन का एक अणु आयोडीन के एक अणु से संघट्ट कर एक अस्थाइर् मध्यवतीर् का विरचन करे ;चित्रा 4ण्6द्ध। यह मध्यवतीर् बहुत कम समय तक अस्ितत्व में रहता है तथा टूटकर हाइड्रोजन आयोडाइड के दो अणुओं का विरचन करता है। मध्यवतीर् जिसे सियित संवुफल ;ब्द्ध भी कहते हैं, के विरचन के लिए आवश्यकऊजार्, सियण ऊजार् ;म्द्ध कहलाती है। स्िथतिज ऊजार् एवं अभ्िािया निदर्ेशांक केंमध्य ग्रापफ खींचने पर चित्रा ;4ण्7द्ध प्राप्त होता है। अभ्िािया निदेर्शांक अभ्िाियकोंके उत्पाद में ऊजार् परिवतर्न की रूपरेखा प्रद£शत करते हैं। जब सियित संवुफल अपघटित होकर उत्पाद निमिर्त करता है तो वुफछ ऊजार् मुक्तहोती है। अतः अंतिम अभ्िािया एन्थैल्पी अभ्िाियकों एवं उत्पादों की प्रकृति पर निभर्र करती है। अभ्िाियक स्पीशीज के सारे अणुओं की गतिज ऊजार् समान नहीं होती। किसी एक अणु के व्यवहार की परिशु(ता के बारे में पूवार्नुमान कठिन होता है अतः लडविग बोल्ट्समान तथा जेम्स क्लावर्फ मैक्सवेल ने अिाक संख्या में अणुओं के व्यवहार कोप्रागुक्त करने के लिए सांख्ियकी का प्रयोग किया। इनके अनुसार गतिज ऊजार् का वितरण, ;म् द्ध ऊजार् से युक्त अणुओं की संख्या, ;छम्ध्छज् द्ध एवं गतिज ऊजार् के मध्य वक्र खींचकर किया जा सकता है ;चित्रा 4ण्8द्ध। यहाँ छम् ए ऊजार् म् से युक्त अणुओं की संख्या है तथा छज् वुफल अणुओं की संख्या है। वक्र का शीषर्, अतिसंभाव्य गतिज ऊजार् अथार्त् अणुओं के सवार्िाक अंश कीगतिज ऊजार् के संगत होता है। इस गतिज ऊजार् से कम अथवा अिाक ऊजार् वाले अणुओं की संख्या कम होती जाती है। जब ताप बढ़ाया जाता है तो आलेख का शीषर् अिाकऊजार् मान की ओर विस्थापित हो जाता है ;चित्रा 4ण्9द्ध तथा वक्र का पैफलाव दाहिनीओर बढ़ जाता है क्योंकि अत्यिाक ऊजार् प्राप्त अणुओं का अनुपात बढ़ जाता है। वक्र के अंतर्गत क्षेत्रापफल समान रहता है क्योंकि वुफल संभाव्यता का मान हर समय एक रहना चाहिए। हम म् की स्िथति मैक्सवेल - बोल्ट्समान वक्र पर अंकित करंसकते हैं ;चित्रा 4.9द्ध। किसी पदाथर् के तापमान में वृि द्वारा म् से अिाक ऊजार् प्राप्त ंसंघट्ट करने वाले अणुओं की संख्या के मान में वृि होती है। चित्रा से स्पष्ट है कि वक्र में ;ज ़ 10द्ध तापमान पर सियण ऊजार् या इससे अिाकऊजार् प्राप्त अणुओं को प्रद£शत करने वाला क्षेत्रापफल लगभग दो गुना हो जाता है अतः अभ्िािया वेग दोगुना हो जाता है। आरेर्निअस समीकरण 4ण्18 में कारक मदृम्ं ध्त्ज् , म् से अिाक ंगतिज ऊजार् वाले अणुओं की भ्िान्न के संगत होता है। समीकरण 4ण्18 के चित्रा 4.9μअभ्िािया वेग की ताप पर निभर्रता दोनों पक्षों का प्राकृतिक लघुगणक लेने परμदशार्ता हुआ वितरण वक्र म्ंसदा त्र..़सद । ;4ण्19द्धत्ज् सदा एवं 1ध्ज् के मध्य वक्र समीकरण 4ण्19 के अनुरूप सीधी रेखा होता है जिसे चित्रा 4ण्10 में दशार्या गया है। आरर्ेनिअस समीकरण 4.18 के अनुसार ताप में वृि अथवा सियण ऊजार् में कमी से अभ्िािया वेग में वृि होगी तथा वेग स्िथरांक में चरघातांकी वृि होगी। चित्रा 4.10 में ढाल त्र−म्ं तथा अंतःखंड त्र सद । है। अतः हम इनत् मानों से म् तथा । की गणना कर सकते हैं।ंतापमान ज्1 पर समीकरण 4ण्19 का रूप निम्न होगाμ म्ंसद ा1 त्र दृ ़ सद । ;4ण्20द्धत् ज्1 और तापमान ज्2 परμ म्ंसद ा2 त्र दृ ़ सद । ;4ण्21द्धत् ज्2 ;। किसी दी गइर् अभ्िािया के लिए स्िथरांक हैंद्ध ा1 तथा ा2 क्रमशः तापमान ज्1 तथा ज्2 पर वेग स्िथरांक हैं। समीकरण 4ण्21 से 4ण्20 घटाने पर हमें प्राप्त होगाμ −सद ा2 दृ सद ा1 त्र म्ं म्ं त् ज्1 त् ज्2 ⎡1ा2 म्ं1 ⎤सद त्र−⎢⎥ा1 त् ⎣ज्1 ज्2 ⎦ ाम् ⎡11 ⎤सवह त्र ⎢⎥ ;4ण्22द्ध2ं − चित्रा 4.10μ सद ा एवं 1ध्ज् के मध्य आलेख ा1 2ण्303 त् ⎣ज्1 ज्2 ⎦ ा2 म्ं ⎡ज्2 −ज्1 ⎤सवह त्र ⎢⎥2ण्303त् ज्ज् ⎦ा1 ⎣ 12 4.5.1उत्प्रेरक का प्रभाव उत्प्रेरक वह पदाथर् है जिसमें स्वयं स्थायी रासायनिक परिवतर्न हुए बिना यह, अभ्िािया के वेग को बढ़ाता है। उदाहरणाथर् डदव्2 निम्न अभ्िािया को उत्प्रेरित कर वेग में महत्वपूणर् वृि करता है। डदव्22ज्ञब्सव् 3 ⎯⎯⎯⎯ 2 ज्ञब्स ़ 3व् 2→ जब मिलाया गया पदाथर् अभ्िािया की दर को कम करता है तो उत्प्रेरक शब्द का प्रयोग नहीं करना चाहिए, पदाथर् को तब निरोधक कहते हैं उत्प्रेरक की िया को मध्यवतीर् संवुफल सि(ांत से समझा जा सकता है। इस सि(ांत के अनुसार उत्प्रेरक रासायनिक अभ्िािया में भाग लेकर अभ्िाियकों के साथ अस्थायी बंध बनाता है जो कि मध्यवतीर् संवुफल में परिणत होता है। इसका अस्ितत्व क्षण्िाक होता है तथा यह वियोजित होकर उत्पाद एवं उत्प्रेरक देता है। यह विश्वास किया जाता है कि उत्प्रेरक एक वैकल्िपक पथ अथवा ियाविध्ि से अभ्िाियकोंव उत्पादों के मध्य सियण ऊजार् कम करके एवं इस प्रकार ऊजार् अवरोध में कमी करके अभ्िािया संपन्न करता है जैसा कि चित्रा 4.11 में दशार्या गया है। आरेर्निअस समीकरण 4ण्18 से यह स्पष्ट है कि सियण ऊजार् का मान जितना कम होगा अभ्िािया का वेग उतना अिाक होगा। उत्प्रेरक की लघु मात्रा अभ्िाियकों की दीघर् मात्रा को उत्प्रेरितकर सकती है। उत्प्रेरक, अभ्िािया की गिब्श ऊजार्, Δळए में बदलाव नहीं करता। यह स्वतः प्रव£तत अभ्िाियाओं को उत्प्रेरित करता है परंतु चित्रा 4.11μसियण ऊजार् पर उत्प्रेरक का प्रभाव 4.6 रासायनिक अभ्िािया का संघट्ट सिद्धांत स्वतः अप्रवतिर्त अभ्िािया को उत्प्रेरित नहीं करता। यह भी पाया गया है कि उत्प्रेरक किसी अभ्िािया, के साम्य स्िथरांक में परिवतर्न नहीं करता किंतु यह साम्य को शीघ्र स्थापित करने में सहायता करता है। यह अग्र एवं प्रतीप दोनों अभ्िाियाओं को समान रूप से उत्प्रेरित करता है जिससे साम्यावस्था अपरिव£तत रहती है परंतु शीघ्र स्थापित हो जाती हैं। यद्यपि आरेर्नियस समीकरण कापफी विस्तृत परिस्िथतियों में लागू होती है लेकिन संघट्टवाद जिसे मेक्स ट्राउट्ज तथा विलियम लुइर्स ने 1916.18 में प्रतिपादित किया था, अभ्िािया की औजिर्की तथा ियावििा के संदभर् में अिाक प्रकाश डालता है। यह गैस की गतिक परिकल्पना पर आधारित है। इस सि(ांत के अनुसार अभ्िाियक के अणुओं को कठोर गोले माना जाता है, एवं माना जाता है कि अभ्िािया अणुओं के आपस में संघट्ट होने के कारण होती हैं। अभ्िािया मिश्रण के प्रति इकाइर् आयतन में प्रति सेवेंफड संघट्ट को संघट्ट आवृति ;र्द्ध कहते हैं। रासायनिक अभ्िािया को प्रभावित करने वाला एक अन्य कारक सियण ऊजार् है जैसा कि हम पहले ही अध्ययन कर चुके हैं। द्विअणुक प्राथमिक अभ्िािया । ़ ठ → उत्पाद के लिए, अभ्िािया वेग को निम्न रूप में प्रदश्िार्त कर सकते हैंμ − ध्त्ज् ंवेग त्रर्म म् ;4ण्23द्ध।ठ−म्ं ध्त्ज् जहाँ र्।ठ अभ्िाियक । एवं ठ के संघट्ट की आवृिा तथा म म्ं के बराबर अथवा इससे अिाक ऊजार् वाले अणुओं के अंश को प्रद£शत करता है। समीकरण 4ण्23 की तुलना आरेर्निअस समीकरण से करने पर हम कह सकते हैं कि । संघट्ट आवृिा से संबंिात है। समीकरण 4ण्23 उन अभ्िाियाओं के वेग स्िथरांक के मान की सटीक प्रागुक्ित करता है, जिनमें सामान्य अणु अथवा परमाणु सम्िमलित होते हैं, विंफतु जटिल अणुओं के संदभर् में महत्वपूणर् विचलन परिलक्ष्िात होता है। इसका कारण सभी संघट्टांे का उत्पाद में विरचन नहींहोना हो सकता है। वे संघट्ट जिसमें अणुओं की पयार्प्त गतिज ऊजार् ;देहली ऊजार्ऽद्ध तथा सही अभ्िाविन्यास होता है, जिससे अभ्िाियक स्पीशीश के बंधों के टूटने तथा उत्पादों में नए बंध विरचन से उत्पादों का बनना सुसाध्य हो जाता है, प्रभावी संघट्ट कहलाते हैं। उदाहरणाथर्, मेथेनाॅल का ब्रोमोएथेन से विरचन अभ्िाियकों के अभ्िाविन्यास पर निभर्र करता है। इसे चित्रा 4ण्12 में प्रद£शत किया गया है। अभ्िाियकों के अणुओें का उपयुक्त अभ्िाविन्यास बंध निमार्ण कर उत्पाद निमिर्त करता है तथा अनुपयुक्त अभ्िाविन्यास होने पर वे केवल दोबारा अलग - अलग हो जाते हैं और उत्पाद नहीं बनता। चित्रा 4.12μअणुओं का उपयुक्त एवं अनुपयुक्त अभ्िाविन्यास दशार्ता आरेख प्रभावी संघट्ट के स्पष्टीकरण के लिए हम एक अन्य कारक च् जिसे प्रायिकता ;च्तवइंइपसपजलद्ध अथवा त्रिाविम कारक कहते हैं, प्रस्तावित करते हैं। यह इस बात को समाहित करता है कि संघट्ट में अणुओं का उपयुक्त अभ्िाविन्यास होना चाहिए, यानिμ − ध्त्ज्ंवेग त्र च् र्म म् ।ठअतः संघट्ट सि(ांत में सियण ऊजार् एवं उपयुक्त अभ्िाविन्यास दोनों ही साथ - साथ प्रभावी संघट्ट का मानक निधार्रित करते हैं अथार्त् अभ्िािया वेग को निधार्रित करते हैं। संघट्ट सि(ांत की वुफछ कमियाँ हैं, जैसे कि इसमें परमाणुओं/अणुओं को कठोर गोले माना गया है तथा इनके संरचना पहलू को नकारा गया है। आप इस सि(ांत तथा अन्य सि(ांतों के विषय में और अध्िक विस्तृत अध्ययन अपनी उच्च कक्षाओं में करेंगे। ’ देहली उफजार् त्र सियण उफजार् ़ अभ्िाियक स्पीशीश की उफजार् अभ्यास 4ण्1 निम्न अभ्िाियाओं के वेग व्यंजकों से इनकी अभ्िािया कोटि तथा वेग स्िथरांकों की इकाइयाँ ज्ञात कीजिए। ;पद्ध 3छव्;हद्ध → छ2व् ;हद्ध वेग त्र ा ख्छव्,2 ;पपद्ध भ्2व्2 ;ंुद्ध ़ 3प्दृ ;ंुद्ध़ 2भ़् → 2भ्2व् ;सद्ध ़ प्3 − वेग त्र ा ख्भ्2व्2,ख्प्दृ, ;पपपद्ध ब्भ्3ब्भ्व् ;हद्ध → ब्भ्4 ;हद्ध ़ ब्व्;हद्ध वेग त्र ा ख्ब्भ्3ब्भ्व्,3ध्2 ;पअद्ध ब्2भ्5ब्स ;हद्ध → ब्2भ्4 ;हद्ध ़ भ्ब्स ;हद्ध वेग त्र ा ख्ब्2भ्5ब्स, 4ण्2 अभ्िािया 2। ़ ठ → ।2ठ के लिए वेग त्र ा ख्।,ख्ठ,2 यहाँ ा का मान 2ण्0 × 10दृ6 उवसदृ2 स्2 ेदृ1 है। प्रारंभ्िाक वेग की गणना कीजिएऋ जब ख्।, त्र 0ण्1 उवस स्दृ1 एवं ख्ठ,त्र 0ण्2 उवस स्दृ1 हो तथा अभ्िािया वेग की गणना कीजिएऋ जब ख्।, घट कर 0ण्06 उवस स्दृ1 रह जाए। 4ण्3 प्लैटिनम सतह पर छभ्3 का अपघटन शून्य कोटि की अभ्िािया है। छ2 एवं भ्2 के उत्पादन की दर क्या होगी जब ा का मान 2ण्5 × 10दृ4 उवस स्दृ1 ेदृ1 हो? 4ण्4 डाइर्मेथ्िाल इर्थर के अपघटन से ब्भ्4ए भ्2 तथा ब्व् बनते हैं। इस अभ्िािया का वेग निम्न समीकरण द्वारा दिया जाता हैμ ,3ध्2वेग त्र ा ख्ब्भ्3व्ब्भ्3अभ्िािया के वेग का अनुगमन बंद पात्रा में बढ़ते दाब द्वारा किया जाता है, अतः वेग समीकरण को डाइर्मेथ्िाल इर्थर के आंश्िाक दाब के पद में भी दिया जा सकता है। अतः 3ध्2 वेग त्र ा ;चब्भ् व्ब्भ् द्ध33 यदि दाब को इंत में तथा समय को मिनट में मापा जाये तो अभ्िािया के वेग एवं वेग स्िथरांक की इकाइयाँ क्या होंगी? 4ण्5 रासायनिक अभ्िािया के वेग पर प्रभाव डालने वाले कारकों का उल्लेख कीजिए। 4ण्6 किसी अभ्िाियक के लिए एक अभ्िािया द्वितीय कोटि की है। अभ्िािया का वेग वैफसे प्रभावित होगाऋ यदि अभ्िाियक की सांद्रताμ ;पद्ध दुगुनी कर दी जाए ;पपद्ध आधी कर दी जाए 4ण्7 वेग स्िथरांक पर ताप का क्या प्रभाव पड़ता है? ताप के इस प्रभाव को मात्रात्मक रूप में वैफसे प्रद£शत कर सकते हैं? 4ण्8 जल में एस्टर के छद्म प्रथम कोटि के जल - अपघटन के निम्नलिख्िात आँकड़े प्राप्त हुएμ जध्े 0 30 60 90 ¹एस्टरह्ध् उवस स्दृ1 0ण्55 0ण्31 0ण्17 0ण्085 ;पद्ध 30 से 60 सेवेंफड समय अंतराल में औसत वेग की गणना कीजिए। ;पपद्ध एस्टर के जल - अपघटन के लिए छद्म प्रथम कोटि अभ्िािया वेग स्िथरांक की गणना कीजिए। 4ण्9 एक अभ्िािया । के प्रति प्रथम तथा ठ के प्रति द्वितीय कोटि की है ;पद्ध अवकल वेग समीकरण लिख्िाए। ;पपद्ध ठ की सांद्रता तीन गुनी करने से वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा? ;पपपद्ध । तथा ठ दोनों की सांद्रता दुगुनी करने से वेग पर क्या प्रभाव पड़ेगा? 4ण्10 । और ठ के मध्य अभ्िािया में । और ठ की विभ्िान्न प्रारंभ्िाक सांद्रताओं के लिए प्रारंभ्िाक वेग ;त0द्ध नीचे दिए गए हैं। । और ठ के प्रति अभ्िािया की कोटि क्या है? ।ध् उवस स्दृ1 0ण्20 0ण्20 0ण्40 ठध् उवस स्दृ1 0ण्30 0ण्10 0ण्05 त0ध्उवस स्दृ1 े दृ1 5ण्07 × 10दृ5 5ण्07 × 10दृ5 1ण्43 × 10दृ4 4ण्11 2। ़ ठ → ब् ़ क् अभ्िािया की बलगतिकी अध्ययन करने पर निम्नलिख्िात परिणाम प्राप्त हुए। अभ्िािया के लिए वेग नियम तथा वेग स्िथरांक ज्ञात कीजिए। प्रयोग ख्।,ध् उवस स्दृ1 ख्ठ,ध् उवस स्दृ1 क् के विरचन का प्रारंभ्िाक वेगध्उवस स्दृ1 उपददृ1 प् 0ण्1 0ण्1 6ण्0 × 10दृ3 प्प् 0ण्3 0ण्2 7ण्2 × 10दृ2 प्प्प् 0ण्3 0ण्4 2ण्88 × 10दृ1 प्ट 0ण्4 0ण्1 2ण्40 × 10दृ2 4ण्12 । तथा ठ के मध्य अभ्िािया । के प्रति प्रथम तथा ठ के प्रति शून्य कोटि की है। निम्न तालिका में रिक्त स्थान भरिए। प्रयोग ख्।,ध्उवस स्दृ1 ख्ठ,ध्उवस स्दृ1 प्रारंभ्िाक वेगध्उवस स्दृ1 उपददृ1 प् 0ण्1 0ण्1 2ण्0 × 10दृ2 प्प् दृ 0ण्2 4ण्0 × 10दृ2 प्प्प् 0ण्4 0ण्4 दृ प्ट दृ 0ण्2 2ण्0 × 10दृ2 4ण्13 नीचे दी गइर् प्रथम कोटि की अभ्िाियाओं के वेग स्िथरांक से अधर्यु की गणना कीजिएμ ;पद्ध 200 ेदृ1 ;पपद्ध 2 उपददृ1 ;पपपद्ध 4 लमंतदृ1 4ण्14 14ब् के रेडियोएक्िटव क्षय की अधार्यु 5730 वषर् है। एक पुरातत्व कलाकृति की लकड़ी में, जीवित वृक्ष की लकड़ी की तुलना में 80: 14ब् की मात्रा है। नमूने की आयु का परिकलन कीजिए। 4ण्15 गैस प्रावस्था में 318 ज्ञ पर छ2व्5 के अपघटन की ख्2 छ2व्5 → 4छव्2 ़ व्2, अभ्िािया के आँकड़े नीचे दिए गए हैंμ जध्े 0 400 800 1200 1600 2000 2400 2800 3200 102 × ख्छ2व्5,ध् उवस स्दृ1 1ण्63 1ण्36 1ण्14 0ण्93 0ण्78 0ण्64 0ण्53 0ण्43 0ण्35 ;पद्ध ख्छ2व्5, एवं ज के मध्य आलेख खींचिए। ;पपद्ध अभ्िािया के लिए अधर्यु की गणना कीजिए। ;पपपद्ध सवहख्छ2व्5, एवं ज के मध्य ग्रापफ खींचिए। ;पअद्ध अभ्िािया के लिए वेग नियम क्या है? ;अद्ध वेग स्िथरांक की गणना कीजिए। ;अपद्ध ा की सहायता से अधार्यु की गणना कीजिए तथा इसकी तुलना ;पपद्ध से कीजिए। 1 4ण्16 प्रथम कोटि की अभ्िािया के लिए वेग स्िथरांक 60 ेदृ1 है। अभ्िाियक को अपनी प्रारंभ्िाक सांद्रता से वाँ भाग रह16 जाने में कितना समय लगेगा? 4ण्17 नाभ्िाकीय विस्पफोट का 28ण्1 वषर् अधर्यु वाला एक उत्पाद 90ैत होता है। यदि वैफल्िसयम के स्थान पर 1μहए 90ैत नवजात श्िाशु की अस्िथयों में अवशोष्िात हो जाए और उपापचयन से ”ास न हो तो इसकी 10 वषर् एवं 60 वषर् पश्चात् कितनी मात्रा रह जाएगी? 4ण्18 दशार्इए कि प्रथम कोटि की अभ्िािया में 99ः अभ्िािया पूणर् होने में लगा समय 90ः अभ्िािया पूणर् होने में लगने वाले समय से दुगुना होता है। 4ण्19 एक प्रथम कोटि की अभ्िािया में 30ः वियोजन होने में 40 मिनट लगते हैं। ज1ध्2 की गणना कीजिए। 4ण्20 543 ज्ञ ताप पर एशोआइसोप्रोपेन के हेक्सेन तथा नाइट्रोजन में विघटन के निम्न आँकड़े प्राप्त हुए। वेग स्िथरांक की गणना कीजिए। ज ;ेमबद्ध च ;उउ भ्ह मेंद्ध 0 35ण्0 360 54ण्0 720 63ण्0 4ण्21 स्िथर आयतन पर, ैव्2ब्स2 के प्रथम कोटि के ताप अपघटन पर निम्न आँकड़े प्राप्त हुएμ ैव् ब्स ;हद्ध→ ैव् ;हद्ध़ ब्स ;हद्ध22 22 अभ्िािया वेग की गणना कीजिए जब वुफल दाब 0ण्65 ंजउ हो। प्रयोग समयध्े वुफल दाबध्ंजउ 1 0 0ण्5 2 100 0ण्6 4ण्22 विभ्िान्न तापों पर छ2व्5 के अपघटन के लिए वेग स्िथरांक नीचे दिए गये हैंμ ज्ध्°ब् 0 20 40 60 80 105 × ाध्ेदृ1 0ण्0787 1ण्70 25ण्7 178 2140 सद ा एवं 1ध्ज् के मध्य ग्रापफ खींचिए तथा । एवं म्की गणना कीजिए। 30°ब् तथा 50°ब् पर वेग स्िथरांक कों प्रागुक्त कीजिए। 4ण्23 546 ज्ञ ताप पर हाइड्रोकाबर्न के अपघटन में वेग स्िथरांक 2ण्418 × 10दृ5 ेदृ1 है। यदि सियण ऊजार् 179ण्9 ाश्रध्उवस हो तो पूवर् - घातांकी गुणन का मान क्या होगा? 4ण्24 किसी अभ्िािया । → उत्पाद के लिए ा त्र 2ण्0 × 10दृ2ेदृ1 है। यदि । की प्रारंभ्िाक सांद्रता 1ण्0 उवस स्दृ1 हो तो 100े के पश्चात् इसकी सांद्रता क्या रह जाएगी? 4ण्25 अम्लीय माध्यम में सूक्रोस का ग्लूकोस एवं Úक्टोश में विघटन प्रथम कोटि की अभ्िािया है। इस अभ्िािया की अधार्यु 3ण्0 घंटे है। 8 घंटे बाद नमूने में सूक्रोस का कितना अंश बचेगा? 4ण्26 हाइड्रोकाबर्न का विघटन निम्न समीकरण के अनुसार होता है। म् की गणना कीजिए।ं दृ1द्ध मदृ28000ज्ञध्ज्ा त्र ;4ण्5 × 1011 े 4ण्27 भ्2व्2 के प्रथम कोटि के विघटन को निम्न समीकरण द्वारा लिख सकते हैंμ सवह ा त्र 14ण्34 दृ 1ण्25 × 104ज्ञध्ज् इस अभ्िािया के लिए म्की गणना कीजिए। कितने ताप पर इस अभ्िािया की अधार्यु 256 मिनट होगी?ं 4ण्28 10°ब् ताप पर । के उत्पाद में विघटन के लिए ा का मान 4ण्5 × 103 ेदृ1 तथा सियण ऊजार् 60 ाश्र उवसदृ1 है किस ताप पर ा का मान 1ण्5 × 104ेदृ1 होगा? 4ण्29 298 ज्ञ ताप पर प्रथम कोटि की अभ्िािया के 10ः पूणर् होने का समय 308 ज्ञ ताप पर 25ः अभ्िािया पूणर् होने में लगे समय के बराबर है। यदि । का मान 4 × 1010ेदृ1 हो तो 318 ज्ञ ताप पर ा तथा म्की गणना कीजिए।ं 4ण्30 ताप में 293 ज्ञ से 313 ज्ञ तक वृि करने पर किसी अभ्िािया का वेग चार गुना हो जाता है। इस अभ्िािया के लिएसियण ऊजार् की गणना यह मानते हुए कीजिए कि इसका मान ताप के साथ परिव£तत नहीं होता। पाठ्यनिहित प्रश्नों केेे उत्तर4ण्1 तंअत्र 6ण्66 × 10दृ6 उवस स्दृ1 ेदृ14ण्2 अभ्िािया का वेग त्र। के विलुप्त होने की दर त्र 0ण्005 उवस स्दृ1 उपददृ14ण्3 अभ्िािया की कोटि 2ण्5 है।4ण्4 ग् → ल्, वेग त्र ाख्ग्,2, वेग 9 गुना बढ़ेगा।4ण्5 जत्र 444 े4ण्6 1ण्925 × 10दृ4 ेदृ14ण्8 म्ं त्र 52ण्897 ाश्र उवसदृ14ण्9 1ण्471 × 10दृ19

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