उद्देश्य इस एकक के अध्ययन के पश्चात् आप कृ ऽ विभ्िान्न प्रकार के विलयनों का बनना व£णत कर सवेंफगेऋ ऽ विलयन की सांद्रता को विभ्िान्न मात्राकों में व्यक्त कर सवेंफगेऋ ऽ हेनरी एवं राउल्ट नियमों को स्पष्ट कर सवेंफगे तथा व्याख्या कर सवेंफगेऋ ऽ आदशर् तथा अनादशर् विलयनों में विभेद कर सवेंफगेऋ ऽ वास्तविक विलयनों का राउल्ट के नियम से विचलन का कारण बता सवेंफगेऋ ऽ विलयनों के अणुसंख्य गुणध्मो± का वणर्न कर सवेंफगे तथा इनका विलेय के आण्िवक द्रव्यमान से संबंध् स्थापित कर सवेंफगेऋ ऽ विलयनों में वुफछ विलेयों द्वारा प्रद£शत असामान्य अणुसंख्य गुणध्मो± को समझा सवेंफगे। शरीर में लगभग सभी प्रक्रम किसी न किसी विलयन में घटित होते हैं। सामान्य जीवन में हम बहुत कम शु( पदाथो± से परिचित होते हैं। अध्िकांशतः ये दो या अध्िक शु( पदाथो± के मिश्रण होते हैं। उनका जीवन में उपयोग तथा महत्व उनके संगठन पर निभर्र करता है। जैसे, पीतल ;जिंक व निवैफल का मिश्रणद्ध के गुण जमर्न सिल्वर ;काॅपर, जिंक व निवैफल का मिश्रणद्ध अथवा काँसे ;ताँबे एवं टिन का मिश्रणद्ध से अलग होते हैं। जल में उपस्िथत फ्रलुओराइड आयनों की 1ण्0 चचउ मात्रा दंत क्षरण को रोकती है। जबकि इसकी 1ण्5 चचउ मात्रा दाँतों के कबुर्रित ;पीलापनद्ध होने का कारण होती है तथा फ्रलुओराइड आयनों की अध्िक सांद्रता जहरीली हो सकती है ;उदाहरणाथर् कृ सोडियम फ्रलुओराइड का चूहों के लिए जहर के रूप में उपयोगद्धऋ अंतश्िारा इंजेक्शन हमेशा लवणीय जल में एक निश्िचत आयनिक सांद्रता पर घोले जाते हैं जो रक्त प्लाज्मा की सांद्रता के सदृश होती हैं, इत्यादि वुफछ उदाहरण हैं। इस एकक में हम मुख्यतः द्रवीय विलयनों तथा उनको बनाने की वििायों पर विचार करेंगे तत्पश्चात् हम उनके गुणों जैसे वाष्पदाब व अणुसंख्य गुणधमर् का अध्ययन करेंगे। हम विलयनों के प्रकार से प्रारम्भ करेंगे और पिफर द्रव विलयनों में उपस्िथत विलेय की सांद्रता को व्यक्त करने के विभ्िान्न विकल्पों को जानेंगे। 2.1 विलयनों के विलयन दो या दो से अध्िक अवयवों का समांगी मिश्रण होता है। समांगी मिश्रण से हमारा तात्पयर् है कि मिश्रण में सभी जगह इसका संघटन व गुण एक समान होते हैं। सामान्यतः जोप्रकार अवयव अध्िक मात्रा में उपस्िथत होता है, वह विलायक कहलाता है। विलायक विलयन की भौतिक अवस्था निधर्रित करता है, जिसमें विलयन विद्यमान होता है। विलयन में विलायक के अतिरिक्त उपस्िथत एक या अध्िक अवयव विलेय कहलाते हैं। इस एकक में हम केवल द्विअंगी विलयनों ;जिनमें दो अवयव होंद्ध का अध्ययन करेंगे। यहाँ प्रत्येक अवयव ठोस, द्रव अथवा गैस अवस्था में हो सकता है। जिनका संक्ष्िाप्त विवरण सारणी 2ण्1 में दिया गया है। सारणी 2ण्1 - विलयनों के प्रकार विलयनों के प्रकार विलेय विलायक सामान्य उदाहरण गैसीय विलयन गैस द्रव ठोस गैस गैस गैस आॅक्सीजन व नाइट्रोजन गैस का मिश्रण क्लोरोपफाॅमर् को नाइट्रोजन गैस में मिश्रित किया जाए कपूर का नाइट्रोजन गैस में विलयन द्रव विलयन गैस द्रव ठोस द्रव द्रव द्रव जल में घुली हुइर् आॅक्सीजन जल में घुली हुइर् एथेनाॅल जल में घुला हुआ ग्लूकोस ठोस विलयन गैस द्रव ठोस ठोस ठोस ठोस हाइड्रोजन का पैलेडियम में विलयन पारे का सोडियम के साथ अमलगम ताँबे का सोने में विलयन 2.2 विलयनों की सांद्रता को व्यक्त करना किसी विलयन का संघटन उसकी सांद्रता से व्यक्त किया जा सकता है। सांद्रता को गुणात्मक रूप से या मात्रात्मक रूप से व्यक्त किया जा सकता है। उदाहरणाथर्, गुणात्मक रूप से हम कह सकते हैं कि विलयन तनु है ;अथार्त् विलेय की अपेक्षाकृत बहुत कम मात्राद्ध अथवा यह सांद्र है ;अथार्त् विलेय की अपेक्षाकृत बहुत अध्िक मात्राद्ध परंतु वास्तविकता में इस तरह का वणर्न अत्यध्िक भ्रम उत्पन्न करता है। अतः विलयनों का मात्रात्मक रूप में वणर्न करने की आवश्यकता होती है। विलयनों की सांद्रता का मात्रात्मक वणर्न हम कइर् प्रकार से कर सकते हैं। ;पद्ध द्रव्यमान प्रतिशत ;ूध्ूद्ध विलयनों के अवयवों को द्रव्यमान प्रतिशत में निम्न प्रकार से परिभाष्िात किया जाता है - विलयन मेंउपस्िथत अवयव का द्रव्यमान अवयव का दव्यमान»्रत्र ×100 ;2ण्1द्धविलयन का वफु ल दव््र यमान उदाहरणाथर्, यदि एक विलयन का वणर्न, जल में 10ः ग्लूकोस का द्रव्यमान, के रूप में किया जाए तो इसका तात्पयर् यह है कि 10 ह ग्लूकोस को 90 ह जल में घोलने पर 100 ह विलयन प्राप्त हुआ। द्रव्यमान प्रतिशत में व्यक्त सांद्रता का उपयोग सामान्य रासायनिक उद्योगों के अनुप्रयोगों में किया जाता है। उदाहरणाथर् व्यावसायिक ब्लीचिंग विलयन में सोडियम हाइपोक्लोराइट का जल में 3ण्62 द्रव्यमान प्रतिशत होता है। ;पपद्ध आयतन प्रतिशत ;टध्टद्ध आयतन प्रतिशत को निम्न प्रकार से परिभाष्िात किया जाता है - अवयव का आयतन अवयव का पतिशत आयतन्रत्र ×100 ;2ण्2द्धविलयन का वुफल आयतन उदाहरणाथर्ऋ एथेनाॅल का जल में 10ः विलयन का तात्पयर् है कि 10 उस् एथेनाॅल को इतने जल में इतना घोलते हैं कि विलयन का वुफल आयतन 100 उस् हो जाए। द्रवीय विलयनों 33 विलयन को सामान्यतः इस मात्राक में प्रद£शत किया जाता है। उदाहरणाथर्, एथ्िालीन ग्लाइकाॅल का 35ः ;टध्टद्ध विलयन वाहनों के इंजन को ठंडा करने के काम में आता है। इस सांद्रता पर हिमरोध्ीऋ जल के हिमांक को 255ण्4 ज्ञ ;दृ17ण्6 व्ब्द्ध तक कम कर देता है। ;पपपद्ध द्रव्यमान - आयतन प्रतिशत ;ूध्टद्ध एक अन्य इकाइर् ;मात्राकद्ध जो औषिायों व पफामेर्सी में सामान्यतः उपयोग में आती है। वह है 100 उस् विलयन में घुले हुए विलेय का द्रव्यमान। ;पअद्ध पाटर््स पर ;प्रतिद्ध मिलियन ;पी.पी.एम.द्ध जब विलेय की मात्रा अत्यंत सूक्ष्म हो तो सांद्रता को पाट्सर् पर मिलियन ;चचउद्ध में प्रद£शत करना उपयुक्त रहता है - अवयववेेकीसख्ंयाफ भागांपाटस् र् पर;पतिद्धमिलियन्रत्र ×106 विलयन मंेउपस्िथत सभी अवयवांे;2ण्3द्ध वेु ंकीसख्याफ वफल भागो ं प्रतिशत की भाँति चचउ ;पाट्सर् पर मिलियनद्ध सांद्रता को भी द्रव्यमान - द्रव्यमान, आयतन - आयतन व द्रव्यमान - आयतन में प्रद£शत किया जा सकता है। एक लीटर ;1030 हद्ध समुद्री जल में 6 ×10दृ3 ह आॅक्सीजन ;व्2द्ध घुली होती है। इतनी कम सांद्रता को 5ण्8 ह प्रति 106 ह समुद्री जल ;5ण्8 चचउद्ध से भी व्यक्त किया जा सकता है। जल अथवा वायुमंडल में प्रदूषकों की सांद्रता को प्रायः - ह उस् दृ1 अथवा चचउ में प्रद£शत किया जाता है। ;अद्ध मोल - अंश ग को सामान्यतः मोल - अंश के संकेत के रूप में उपयोग करते हैं और ग के दाईं ओर नीचे लिखी हुइर् संख्या उसके अवयवों को प्रद£शत करती है - अवयव वफे माले ांे की सख्ं या अवयव का मोंत्र ;2ण्4द्धल - अश सभी अवयवोंवफे वफु ल माले ोंकी सख्ं या उदाहरणाथर्, एक द्विअंगी विलयन में यदि । व ठ अवयवों के मोल क्रमशः द। व दठ हों तो । का मोल - अंश होगा - द ग।त्र । ;2ण्5द्ध द ़ द।ठ प अवयवों वाले विलयन में - दद गप त्र प त्र प ;2ण्6द्ध द ़ द ़ ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् ़ दद12 पप यह दशार्या जा सकता है कि दिए गए विलयन में उपस्िथत सभी अवयवों के मोल - अंशों का योग एक होता है अथार्त् - ग 1 ़ ग 2 ़ ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण् ़ गप त्र 1 ;2ण्7द्ध मोल - अंश इकाइर्, विलयनों के भौतिक गुणों में संबंध दशार्ने में बहुत उपयोगी है जैसे विलयनों की सांद्रता का वाष्पदाब के साथ संबंध दशार्ने में तथा इसका उपयोग गैसीय मिश्रणों के लिए आवश्यक गणना की व्याख्या करने में भी है। ;अपद्ध मोलरता एक लीटर ;1 क्यूबिक डेसीमीटरद्ध विलयन में घुले हुए विलेय के मोलों की संख्या को उस विलयन की मोलरता ;डद्ध कहते हैं। विलेेेय वफमालमोलरता त्र ;2ण्8द्धविलयन का लीटर मंे आयतन उदाहरणाथर् छंव्भ् के 0ण्25 उवस स्दृ1 ;0ण्25 डद्ध विलयन का तात्पयर् है कि छंव्भ् के 0ण्25 मोल को 1 लीटर ;एक क्यूबिक डेसीमीटरद्ध विलयन में घोला गया है। ;अपपद्ध मोललता किसी विलयन की मोललता ;उद्ध 1 ाह विलायक में उपस्िथत विलेय के मोलों की संख्या के रूप में परिभाष्िात की जाती है और इसे निम्न प्रकार से व्यक्त करते हैं - विलये वफे मालेमोललता ;उद्ध त्र ;2ण्9द्धविलायक का किलागो्रम मेंद्रव्यमान उदाहरणाथर्, 1ण्00 उवस ाह −1 ;1ण्00 उद्ध ज्ञब्स का जलीय विलयन से तात्पयर् है कि 1 उवस ;74ण्5 हद्ध ज्ञब्स को 1 ाह जल में घोला गया है। विलयनों की सांद्रता व्यक्त करने की प्रत्येक विध्ि के अपने - अपने गुण एवं दोष होते हैं। द्रव्यमान प्रतिशत, चचउ मोल - अंश तथा मोललता ताप पर निभर्र नहीं करते, जबकि मोलरता ताप पर निभर्र करती है। ऐसा इसलिए होता है कि आयतन ताप पर निभर्र करता है जबकि द्रव्यमान नहीं। 2.3 विलेयता किसी अवयव की विलेयता एक निश्िचत ताप पर विलायक की निश्िचत मात्रा में घुली हुइर् उस पदाथर् की अिाकतम मात्रा होती है। यह विलेय एवं विलायक की प्रकृति तथा 2.3.1 ठोसों की द्रवों में विलेयता ताप एवं दाब पर निभर्र करती है। आइए हम इन कारकों के प्रभाव का अध्ययन ठोस अथवा गैस की द्रवों में विलेयता पर करें। प्रत्येक ठोस दिए गए द्रव में नहीं घुलता जैसे सोडियम क्लोराइड व शवर्फरा जल में आसानी से घुल जाते हैं, जबकि नैफ्ऱथैलीन और ऐन्थ्रासीन नहीं घुलते। दूसरी ओर नैफ्ऱथैलीन व ऐन्थ्रासीन बेन्जीन में आसानी से घुल जाते हैं, जबकि सोडियम क्लोराइड व शवर्फरा नहीं घुलते। यह देखा गया है कि ध्रुवीय विलेय, ध्रुवीय विलायकों में घुलते हैं जबकि अध्रुवीय विलेय अध््रुवीय विलायकों में। सामान्यतः एक विलेय विलायक में घुल जाता है, यदि दोनों में अंतराआण्िवक अन्योन्यियाएं समान हों। हम कह सकते हैं कि फ्समान - समान को घोलता हैय् ;ष्सपाम कपेेवसअमे सपामष्द्ध जब एक ठोस विलेय, द्रव विलायक में डाला जाता है तो यह उसमें घुलने लगता है। यह प्रिया विलीनीकरण ;घुलनाद्ध कहलाती है। इससे विलयन में विलेय की सांद्रता बढ़ने लगती है। इसी समय विलयन में से वुफछ विलेय के कण ठोस विलेय के कणों के साथ संघट्ट कर विलयन से अलग हो जाते हैं। यह प्रिया िस्टलीकरण कहलाती है। एक ऐसी स्िथति आती है, जब दोनों प्रियाओं की गति समान हो जाती है। इस परिस्िथति में विलयन में जाने वाले विलेय कणों की संख्या विलयन से पृथक्कारी विलेय के कणों की संख्या के बराबर होगी और गतिक साम्य की प्रावस्था पहुँच जाएगी। इस स्िथति में दिए गए ताप व दाब पर विलयन में उपस्िथत विलेय की सांद्रता स्िथर रहेगी। विलेय ़ विलायक विलयन ;2ण्10द्ध जब गैस को द्रवीय विलायकों में घोला जाता है तब भी ऐसा ही होता है। इस प्रकार का विलयन जिसमें दिए गए ताप एवं दाब पर और अध्िक विलेय नहीं घोला जा सके, संतृप्त विलयन कहलाता है, एवं वह विलयन जिसमें उसी ताप पर और अध्िक विलेय घोला जा सके, असंतृप्त विलयन कहलाता है। वह विलयन जो कि बिना घुले विलेय के साथ गतिक साम्य में होता हैऋ संतृप्त विलयन कहलाता है एवं इसमें विलायक की दी गइर् मात्रा में घुली हुइर्, विलेय की अध्िकतम मात्रा होती है। ऐसे विलयनों में विलेय की सांद्रता उसकी विलेयता कहलाती है। पहले हम देख चुके हैं कि एक पदाथर् में दूसरे की विलेयता पदाथो± की प्रकृति पर निभर्र करती है। इसके अतिरिक्त दो अन्य कारक, ताप एवं दाब भी इस प्रिया को नियंत्रिात करते हैं। ताप का प्रभाव ठोसों की द्रवों में विलेयता पर ताप परिवतर्न का महत्वपूणर् प्रभाव पड़ता है। समीकरण ;2ण्10द्ध द्वारा प्रद£शत साम्य का अध्ययन करें, गतिक साम्य होने के कारण इसे ले - शातैलिये नियम का पालन करना चाहिए। सामान्यतः यदि निकट संतृप्तता प्राप्त विलयन में घुलने की प्रिया उष्माशोषी ;Δभ् झ 0द्ध हो तो ताप के बढ़ने पर विलेयता बढ़नी चाहिए और यदि यहविलयनउष्माक्षेपी ;Δभ् ढ 0द्ध हो तो विलेयता कम होनी चाहिए। ऐसा प्रयोगात्मक रूप से भीविलयनदेखा गया है। दाब का प्रभाव ठोसों की द्रवों में विलेयता पर दाब का कोइर् साथर्क प्रभाव नहीं होता। ऐसा इसलिए होता हैऋ क्योंकि ठोस एवं द्रव अत्यिाक असंपीड्य होते हैं एवं दाब परिवतर्न से सामान्यतः अप्रभावित रहते हैं। बहुत सी गैसें जल में घुल जाती हैं। आॅक्सीजन जल में बहुत कम मात्रा में घुलती है। आॅक्सीजन 2.3.2 गैसों की द्रवों में की यह घुली हुइर् मात्रा जलीय जीवन को जीवित रखती है। दूसरी ओर हाइड्रोजन क्लोराइड गैस ;भ्ब्सद्ध जल में अत्यिाक घुलनशील होती है। गैसों की द्रवों में विलेयता ताप एवं दाबविलेयता द्वारा बहुत अिाक प्रभावित होती है। दाब बढ़ने पर गैसों की विलेयता बढ़ती जाती है। चित्रा 2ण्1 ;कद्ध में दशार्ये गए गैसों के विलयन के एक निकाय का च दाब एवं ज् ताप पर अध्ययन करते हैं जिसका निचला भाग विलयन है एवं ऊपरी भाग गैसीय है। मान लें कि यह निकाय गतिक साम्य अवस्था में हैऋ अथार्त् इन परिस्िथतियों में गैसीय कणों के विलयन में जाने व उसमें से निकलने की गति समान है। अब गैस के वुफछ आयतन को संपीडित कर विलयन पर दाब बढ़ाते हैं ;चित्रा 2ण्1 खद्ध। इससे विलयन के ऊपर उपस्िथत गैसीय कणों की संख्या प्रति इकाइर् आयतन में बढ़ जाएगी तथा गैसीय कणों की, विलयन की सतह में प्रवेश करने के लिए, उससे टकराने की दर भी बढ़ जाएगी। इससे गैस की विलेयता तब तक बढ़ेगी जब तक कि एक नया साम्य स्थापित न हो जाए। अतः विलयन पर दाब बढ़ने से गैस की विलेयता बढ़ती है। चित्रा 2.1कृ गैस की विलेयता पर दाब का प्रभाव। विलेय गैस की सांद्रता विलयन के ऊपर उपस्िथत गैस पर लगाए गए दाब के समानुपाती होती है। सवर्प्रथम गैस की विलायक में विलेयता तथा दाब के मध्य मात्रात्मक संबंध हेनरी ने दिया, जिसे हेनरी नियम कहते हैं। इसके अनुसार स्िथर ताप पर किसी गैस की द्रव में विलेयता द्रव अथवा विलयन की सतह पर पड़ने वाले गैस के आंश्िाक दाब के समानुपाती होती है। डाल्टन, जो हेनरी के समकालीन था, ने भी स्वतंत्रा रूप से निष्कषर् निकाला कि किसी द्रवीय विलयन में गैस की विलेयता गैस के आंश्िाक दाब पर निभर्र करती है। यदि हम विलयन में गैस के मोल - अंश को उसकी विलेयता का माप मानें तो यह कहा जा सकता है कि किसी विलयन में गैस का मोल - अंश उस विलयन के ऊपर उपस्िथत गैस के आंश्िाक दाब के समानुपाती होता है। सामान्य रूप से हेनरी नियम के अनुसार फ्किसी गैस का वाष्प अवस्था में आंश्िाक दाब ;चद्ध, उस विलयन में गैस के मोल - अंश ;गद्ध के समानुपाती होता हैय् अथवा च त्र ज्ञभ् ग ;2ण्11द्ध चित्रा 2.2कृ भ्ब्स गैस की साइक्लोहेक्सेन में यहाँ ज्ञभ् हेनरी स्िथरांक है। यदि हम गैस के आंश्िाक दाब एवं विलयन में गैस 293 ज्ञ पर विलेयता के प्रायोगिक के मोल - अंश के मध्य आलेख खींचें तो हमें चित्रा 2ण्2 में दशार्या गया आलेख परिणाम। रेखा का ढाल हेनरी प्राप्त होगा। स्िथरांक ज्ञभ् को व्यक्त करता है। समान ताप पर विभ्िान्न गैसों के लिए ज्ञभ् का मान भ्िान्न - भ्िान्न होता है ;सारणी 2.2द्ध। इससे निष्कषर् निकलता है कि ज्ञभ् का मान गैस की प्रकृति पर निभर्र करता है। समीकरण 2ण्11 से स्पष्ट है कि दिए गए दाब पर ज्ञभ् का मान जितना अध्िक होगा, द्रव में गैस की विलेयता उतनी ही कम होगी। सारणी 2ण्2 से देखा जा सकता है कि छ2 एवं व्2 दोनों के लिए ताप बढ़ने पर ज्ञभ् का मान बढ़ता है, जिसका अथर् है कि ताप बढ़ने पर इन गैसों की विलेयता घटती है। यही कारण है कि जलीय स्पीशीश के लिए गमर् जल की तुलना में ठंडे जल में रहना अिाक आरामदायक होता है। सारणी 2ण्2 - जल में वुफछ गैसों के लिए हेनरी स्िथरांक ;ज्ञभ्द्ध का मान भ्म भ् 2 छ 2 छ 2 व् 2 व् 2 293 293 293 303 293 303 144ण्97 69ण्16 76ण्48 88ण्84 34ण्86 46ण्82 आगर्न ब्व् 2 पफामेर्ल्डीहाइड मेथेन वाइनिल क्लोराइड 298 298 298 298 298 40ण्3 1ण्67 1ण्83×10.5 0ण्413 0ण्611 2.4 द्रवीय विलयनों का वाष्प दाब हेनरी नियम के उद्योगों में अनेक अनुप्रयोग हैं एवं यह वुफछ जैविक घटनाओं को समझाता है। इनमें से वुफछ ध्यान आकष्िार्त करने वाली इस प्रकार हैं कृ ऽ सोडा - जल एवं शीतल पेयों में ब्व्2 की विलेयता बढ़ाने के लिए बोतल को अध्िक दाब पर बंद किया जाता है। ऽ गहरे समुद्र में श्वास लेते हुए गोताखोरों को अिाक दाब पर गैसों की अिाक घुलनशीलता का सामना करना पड़ सकता है। अिाक बाहरी दाब के कारण श्वास के साथ ली गइर् वायुमंडलीय गैसों की विलेयता रुिार में अिाक हो जाती है। जब गोताखोर सतह की ओर आते हैं, बाहरी दाब ध्ीरे - ध्ीरे कम होने लगता है। इसके कारण घुली हुइर् गैसें बाहर निकलती हैं, इससे रुध्िर में नाइट्रोजन के बुलबुले बन जाते हैं। यह केश्िाकाओं में अवरोध उत्पन्न कर देता है और एक चिकत्सीय अवस्था उत्पन्न कर देता है जिसे बेंड्स ;ठमदकेद्ध कहते हैं, यह अत्यध्िक पीड़ादायक एवं जानलेवा होता है। बेंड्स से तथा नाइट्रोजन की रूध्िर में अध्िक मात्रा के शहरीले प्रभाव से बचने के लिए, गोताखोरों द्वारा श्वास लेने के लिए उपयोग किए जाने वाले टैंकों में, हीलियम मिलाकर तनु की गइर् वायु को भरा जाता है ;11ण्7ः हीलियम, 56ण्2ः नाइट्रोजन तथा 32ण्1ः आॅक्सीजनद्ध। ऽ अध्िक ऊँचाइर् वाली जगहों पर आॅक्सीजन का आंश्िाक दाब सतही स्थानों से कम होता है अतः इन जगहों पर रहने वाले लोगों एवं आरोहकों के रुध्िर और ऊतकों में आॅक्सीजन की सांद्रता निम्न हो जाती है। इसके कारण आरोहक कमशोर हो जाते हैं और स्पष्टतया सोच नहीं पाते। इन लक्षणों को ऐनाॅक्िसया कहते हैं। ताप का प्रभाव ताप के बढ़ने पर किसी गैस की द्रवों में विलेयता घटती है। घोले जाने पर गैस के अणु द्रव प्रावस्था में विलीन होकर उसमें उपस्िथत होते हैं अतः विलीनीकरण के प्रक्रम को संघनन के समकक्ष समझा जा सकता है तथा इस प्रक्रम में ऊजार् उत्स£जत होती है। हम पिछले खंड में पढ़ चुके हैं कि विलीनीकरण की प्रिया एक गतिक साम्य की अवस्था में होती है अतः इसे ले - शातैलिये नियम का पालन करना चाहिए। चूँकि घुलनशीलता एक उष्माक्षेपी प्रिया हैऋ अतः ताप बढ़ने पर विलेयता घटनी चाहिए। जब विलायक कोइर् द्रव होता है तो द्रवीय विलयन बनते हैं। विलेय एक गैस, द्रव या ठोस हो सकता है। गैसों के द्रवों में विलयनों का अध्ययन हम पहले ही खंड 2ण्3ण्2 में कर चुके हैं। अब हम द्रवों और ठोसों के द्रवों में विलयनों का अध्ययन करेंगे। इस प्रकार के विलयनों में एक या अध्िक अवयव वाष्पशील हो सकते हैं। सामान्यतः द्रवीय विलायक वाष्पशील होते हैं। विलेय वाष्पशील हो भी सकते हैं अथवा नहीं भी। हम यहाँ केवल द्विअंगी विलयनों के गुणों का अध्ययन करेंगे, अथार्त् वे विलयन जिनमें दो अवयव होते हैं यानि कि ;1द्ध द्रवों का द्रवों में विलयन तथा ;2द्ध ठोसों का द्रवों में विलयन। 2.4.1 द्रव - द्रव विलयनों का वाष्प दाब आइए, हम दो वाष्पशील द्रवों के द्विअंगी विलयन का अध्ययन करें और इसके दोनों अवयवों को 1 व 2 से अंकित करें। एक बंद पात्रा में लेने पर दोनों अवयव वाष्पीकृत होंगे तथा अंततः वाष्प प्रावस्था एवं द्रव प्रावस्था के मध्य एक साम्य स्थापित हो जाएगा। मान लीजिए इस अवस्था में वुफल दाब च तथा अवयव 1 एवं 2 के आंश्िाक वाष्प दाब क्रमशः च एवं च हैं। यहवुफल12आंश्िाक वाष्प दाब, अवयव 1 एवं 2 के मोल - अंश, क्रमशः ग1 व ग2 से संबंिात हैं। प्रेंफच रसायनज्ञ प्रेंफसियस माटेर् राउल्ट ;1986द्ध ने इनके बीच एक मात्रात्मक संबंध दिया। यह संबंध राउल्ट नियम के नाम से जाना जाता है। इसके अनुसार वाष्पशील द्रवों के विलयन में प्रत्येक अवयव का आंश्िाक दाब विलयन में उसके मोल - अंश के समानुपाती होता है। अतः अवयव 1 के लिए - च1 ∝ ग 1और च1 त्र च10 ग 1 ;2ण्12द्धजहाँ च10 शु( घटक 1 का समान ताप पर वाष्प दाब है इसी प्रकार अवयव 2 के लिए - च2 त्र च20 ग 2 ;2ण्13द्ध जहाँ च20 शु( घटक 2 के वाष्प दाब को प्रद£शत करता है। डाल्टन के आंश्िाक दाब के नियमानुसार पात्रा में विलयन अवस्था का वुफल दाब ;चवुफलद्ध विलयनों के अवयवों के आंश्िाक दाब के जोड़ के बराबर होता है इसलिए - चत्र च़ च;2ण्14द्धवुफल 12 च1 व च2 के मान रखने पर हम पाते हैं कि - चत्र गच0 ़ गच0 वुफल 1122 त्र ;1 दृ ग द्ध च0 ़ गच 0 ;2ण्15द्ध2122 चित्रा 2ण्3कृस्िथर ताप पर आदशर् विलयन के वाष्प दाब एवं मोल - अंश का आलेख असतत रेखाएँ प् एवं प्प् घटकों के आंश्िाक दाब को व्यक्त करती हैं ;आलेख से देखा जा सकता है कि च1 तथा च2 क्रमशः ग1 एवं ग2 के समानुपाती हैंद्ध चित्रा में अंकित रेखा प्प्प् वुफल वाष्प दाब दशार्ती है। 0 00 त्र च1 ़ ;च2 दृ च1द्ध ग 2 ;2ण्16द्ध समीकरण 2ण्16 से निम्नलिख्िात परिणाम निकाले जा सकते हैं। ;पद्ध किसी विलयन के वुफल वाष्प दाब को उसके किसी अवयव के मोल - अंश से संबंिात किया जा सकता है। ;पपद्ध किसी विलयन का वुफल वाष्प दाब अवयव 2 के मोल - अंश के साथ रेखीय रूप से परिव£तत होता है। ;पपपद्धशु( अवयव 1 व 2 के वाष्प दाब पर निभर्र रहते हुए विलयन का वुफल वाष्प दाब अवयव 1 के मोल - अंश के बढ़ने से कम या श्यादा होता है। किसी विलयन के लिए च1 अथवा च2 का ग1 तथा ग2 के विरु( आलेख चित्रा 2.3 की तरह रेखीय आलेख होता है। जब ग1 व ग2 का मान 1 होता है तो ये रेखाएँ ;प् व प्प्द्ध क्रमशः बिंदु च10 व च20 से होकर गुशरती हैं। इसी प्रकार से चवुफल का ग2 के विरु( आलेख ;लाइन प्प्प्द्ध भी रेखीय होता है ;चित्रा 2ण्3द्ध। चवुफल का न्यूनतम मान च10 तथा अध्िकतम मान च20 है। यहाँ घटक 1 घटक 2 की तुलना में कम वाष्पशील है अथार्त् च10 ढ च20 । विलयन के साथ साम्य में वाष्प प्रावस्था के संघटन का निधार्रण अवयवों के आंश्िाक दाब से निधार्रित किया जा सकता है। यदि ल1 एवं ल2 क्रमशः अवयव 1 व 2 के वाष्पीय अवस्था में मोल - अंश हों तब डाल्टन के आंश्िाक दाब के नियम का उपयोग करने पर - च1 त्र ल1 चवुफल ;2ण्17द्ध च2 त्र ल2 चवुफल ;2ण्18द्ध सामान्यतः चप त्र लप चवुफल ;2ण्19द्ध 2.4.2 राउल्ट का नियमऋ राउल्ट के नियम के अनुसार किसी विलयन में उसके वाष्पशील घटक का वाष्प दाब चप त्र ग प चप 0 द्वारा व्यक्त किया जाता है। किसी द्रव में गैस के विलयन के प्रकरण में गैसीयहेनरी के नियम की घटक इतना वाष्पशील है कि वह गैस रूप में ही रहता है तथा हम जानते हैं कि उसकीएक विशेष स्िथति घुलनशीलता हेनरी के नियम से निधार्रित होती है जिसके अनुसार - च त्र ज्ञ भ्ग यदि हम राउल्ट के नियम व हेनरी के नियम की तुलना करें तो देखा जा सकता है कि वाष्पशील घटक अथवा गैस का आंश्िाक दाब विलयन में उसके मोल - अंश के समानुपाती होता है केवल समानुपातिक स्िथरांक ज्ञभ् एवं चप0 में भ्िान्नता होती है। इस प्रकार राउल्ट का नियम, हेनरी के नियम की एक विशेष स्िथति है जिसमें ज्ञभ् का मान चप0 के मान के बराबर हो जाता है। 2.4.3 ठोस पदाथो± का विलयनों का एक अलग महत्त्वपूणर् वगर् द्रवों में घुले हुए ठोस पदाथो± का है। उदाहरणाथर्, सोडियम क्लोराइड, ग्लूकोस, यूरिया एवं शवर्फरा का जल में विलयन और आयोडीन, गंधकद्रवों में विलयन एवं जैसे ठोसों का काबर्न डाइ सल्पफाइड में विलयन। इन विलयनों के वुफछ भौतिक गुण शु(उनका वाष्पदाब विलायकों से बहुत अलग होते हैं, उदाहरण हैकृ वाष्प दाब। हम कक्षा ग्प् के एकक 5 में पढ़ चुके हैं कि किसी दिए गए ताप पर द्रव वाष्िपत होता है तथा साम्यावस्था पर द्रव की वाष्प का, द्रव प्रावस्था पर डाला गया दाब उस द्रव का वाष्प दाब कहलाता है ;चित्रा 2ण्4 कद्ध। शु( द्रवों की सारी सतह द्रव के अणुओं द्वारा घ्िारी रहती है। यदि किसी विलायक में एक अवाष्पशील विलेय डालकर विलयन बनाया जाए तो इस विलयन का वाष्प दाब केवल विलायक के वाष्पदाब के कारण होता है ;चित्रा 2ण्4 खद्ध। दिए गए ताप पर विलयन का यह वाष्प दाब शु( विलायक के वाष्पदाब से कम होता है। विलयन की सतह पर विलेय व विलायक दोनांे के अणु उपस्िथत रहते हैं। अतः सतह का विलायक के अणुओं से घ्िारा भाग कम रह जाता है। इसके कारण सतह छोड़करचित्रा 2.4कृ विलायक में विलेय की उपस्िथति के पफलस्वरूप जाने वाले विलायक अणुओं की संख्या भी तदनुसार घट जाती है, अतःविलायक के वाष्प दाब में कमी विलायक का वाष्प दाब भी कम हो जाता है।;कद्ध विलायक के अणुओं का उसकी सतह से वाष्पन, विलायक के वाष्प दाब में कमी विलयन में उपस्िथत अवाष्पशील विलेय की मात्रा पर निभर्र करती है उसकी प्रकृति पर नहीं,;खद्ध विलयन में विलेय के कण को से दशार्या उदाहरणाथर्, 1 ाह जल में 1ण्0 मोल सुक्रोस मिलाने पर जल केगया है यह भी सतह का वुफछ भाग घेरते हैं। वाष्प दाब में कमी लगभग वही होती है जो कि 1ण्0 मोल यूरिया को जल की उसी मात्रा में उसी ताप पर मिलाने से होती है। राउल्ट नियम को सामान्यतः इस प्रकार व्यक्त किया जाता है फ्किसी विलयन के प्रत्येक वाष्पशील अवयव का आंश्िाक वाष्प दाब इसके मोल - अंश के समानुपाती होता है।य् अब हम द्विअंगी विलयन में विलायक को 1 व विलेय को 2 से व्यक्त करते हैं। जब विलेय अवाष्पशील होता है तो केवल विलायक अणु ही वाष्प अवस्था में होते हैं और वाष्प दाब का कारण होते हैं। यदि च1 विलायक का वाष्प दाब व ग1 इसका मोल - अंश हो, एवं च10 इसकी शु( अवस्था का वाष्पदाब हो, तो राउल्ट के नियमानुसार - च∝ग 1 1 और च1 त्र ग 1 च10 ;2ण्20द्ध समानुपाती स्िथरांक शु( विलायक के वाष्प दाब च10 के बराबर होता है, विलायक के वाष्प दाब व मोल - अंश प्रभाज के मध्य खींचा गया आलेख रेखीय होता है ;चित्रा 2ण्5द्ध। चित्रा 2.5कृ यदि कोइर् विलयन सभी सांद्रणों के लिए राउल्ट के नियम का पालन करता है तो उसका वाष्प दाब एक सरल रेखा में शून्य से शु( विलायक के वाष्प दाब तक बढ़ता जाता है। 2.5 आदशर् एवं अनादशर् विलयन 2.5.1 आदशर् विलयन 2.5.2 अनादशर् विलयन द्रव - द्रव विलयनों को राउल्ट के नियम के आधार पर आदशर् एवं अनादशर् विलयनों में वगीर्कृत किया जा सकता है। ऐसे विलयन जो सभी सांद्रताओं पर राउल्ट के नियम का पालन करते हैं, आदशर् विलयन कहलाते हैं। आदशर् विलयन के दो अन्य मुख्य गुण भी होते हैं। मिश्रण बनाने के लिए शु( अवयवों को मिश्रित करने पर मिश्रण बनाने का ऐंथैल्पी परिवतर्न तथा आयतन परिवतर्न शून्य होता है। अथार्त् Δभ् त्र 0ए Δट त्र 0 ;2ण्21द्धमिश्रणमिश्रणइसका तात्पयर् यह है कि अवयवों को मिश्रित करने पर उष्मा का उत्सजर्न अथवा अवशोषण नहीं होता। इसके अतिरिक्त विलयन का आयतन भी दोनों अवयवों के आयतन के योग के बराबर होता है। आण्िवक स्तर पर विलयनों के आदशर् व्यवहार को अवयव । व ठ के अध्ययन द्वारा समझा जा सकता है। शु( अवयवों में अंतराआण्िवक आवफषर्ण अन्योन्यियाएं ।.। और ठ.ठ प्रकार की होती हैं। जबकि द्विअंगी विलयनों में इन दोनों अन्योन्यियाओं के अतिरिक्त ।.ठ प्रकार की अन्योन्यियाएँ भी उपस्िथत होंगी। यदि ।.। व ठ.ठ के बीच अंतराआण्िवक आवफषर्ण बल ।.ठ के समान हों तो यह आदशर् विलयन बनाता है। एक पूणर्रूपेण आदशर् विलयन की संभावना बहुत कम होती है, लेकिन वुफछ विलयन व्यवहार में लगभग आदशर् होते हैं। द.हेक्सेन और द.हेप्टेन, ब्रोमोएथेन और क्लोरोएथेन तथा बेन्जीन और टाॅलूइर्न आदि के विलयन इस वगर् में आते हैं। जब कोइर् विलयन सभी सांद्रताओं पर राउल्ट के नियम का पालन नहीं करता तो वह अनादशर् विलयन कहलाता है। इस प्रकार के विलयनों का वाष्पदाब राउल्ट के नियम द्वारा प्रागुक्त ;चतमकपबजद्ध किए गए वाष्प दाब से या तो अध्िक होता है या कम ;समीकरण 2ण्16द्ध। यदि यह अिाक होता है तो यह विलयन राउल्ट नियम से ध्नात्मक विचलन प्रद£शत करता है और यदि यह कम होता है तो यह ट्टणात्मक विचलन प्रद£शत करता है। ऐसे विलयनों के वाष्प दाब का मोल - अंश के सापेक्ष आलेख, चित्रा 2ण्6 में दिखाया गया है। चित्रा 2.6कृ द्विघटकीय निकाय का वाष्प दाब उनके संघटन के कारक के रूप में ;कद्ध राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन दशार्ने वाला विलयन ;खद्ध राउल्ट के नियम से ट्टणात्मक विचलन दशार्ने वाला विलयन इन विचलनों का कारण आण्िवक स्तर पर अन्योन्यियाओं की प्रकृति में स्िथत है। राउल्ट नियम से धनात्मक विचलन की स्िथति में, ।.ठ अन्योन्यियाएं ।.। अथवा ठ.ठ के बीच अन्योन्यियाओं की तुलना में कमशोर होती हैं अथार्त् इस स्िथति में विलेय - विलायक अणुओं के मध्य अंतराआण्िवक आवफषर्ण बल विलेय - विलेय और विलायक - विलायक अणुआंे की तुलना में कमशोर होते हैं। इसका मतलब इस प्रकार के विलयनों में से । अथवा ठ के अणु शु( अवयव कि तुलना में अिाक आसानी से पलायन कर सकते हैं। इसके परिणाम स्वरूप वाष्प दाब में वृि होती है जिससे धनात्मक विचलन होता है। एथेनाॅल व ऐसीटोन का मिश्रण इसी प्रकार का व्यवहार दशार्ता है। शु( एथेनाॅल में अणुओं के मध्य हाइड्रोजन बंध होते हैं। इसमें ऐसीटोन मिलाने पर इसके अणु आतिथेय अणुओं के बीच आ जाते हैं, जिसके कारण आतिथेय अणुओं के बीच पहले से उपस्िथत हाइड्रोजन बंध टूट जाते हैं। इससे अंतराआण्िवक बल कमशोर हो जाने के कारण मिश्रण राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन ;चित्रा 2ण्6 कद्ध दशार्ता है। काबर्न डाइसल्पफाइड को ऐसीटोन में मिलाने पर बने विलयन में विलेय - विलायक अणुओं के मध्य द्विध््रुवीय अन्योन्यियाएं विलेय - विलेय और विलायक - विलायक अणुओं के मध्य अन्योन्यियाओं से कमशोर होती हैं। यह विलयन भी धनात्मक विचलन दिखाता है। राउल्ट के नियम से ट्टणात्मक विचलन की स्िथति में ।.। व ठ.ठ के बीच अंतराआण्िवक आवर्फषण बल ।.ठ की तुलना में कमशोर होता है। इसके पफलस्वरूप वाष्पदाब कम हो जाता है अतः ट्टणात्मक विचलन प्रदश्िार्त होता है। प़फीनाॅल व ऐनिलीन का मिश्रण इस प्रकार का उदाहरण है। इस स्िथति में प़फीनाॅलिक प्रोटाॅन व ऐनिलीन के नाइट्रोजन अणु के एकाकी इलेक्ट्राॅन युगल के मध्य अंतराआण्िवक हाइड्रोजन बंध एक से अणुओं के मध्य हाइड्रोजन बंध की तुलना में मशबूत होता है। इसी प्रकार से क्लोरोपफाॅमर् व ऐसीटोन का मिश्रण भी ऐसा विलयन बनता है जो राउल्ट के नियम से ट्टणात्मक विचलन दशार्ता है। इसका कारण यह है कि क्लोरोपफाॅमर् का अणु ऐसीटोन के अणु के साथ हाइड्रोजन बंध बना सकता है जैसा कि आप नीचे दिए चित्रा में देख सकते हैं। ऐसीटोन एवं क्लोरोपफाॅमर् के मध्य हाइड्रोजन बंध इसके कारण प्रत्येक घटक के अणुओं की पलायन की प्रवृिा कम हो जाती है, जिससे वाष्प दाब में कमी आ जाती है तथा राउल्ट नियम से ट्टणात्मक विचलन होता है ;चित्रा 2ण्6 खद्ध। वुफछ द्रव मिश्रित करने पर स्िथरक्वाथी बनाते हैं जो ऐसे द्विघटकीय मिश्रण हैं, जिनका द्रव व वाष्प प्रावस्था में संघटन समान होता है तथा यह एक स्िथर ताप पर उबलते हैं। ऐसे प्रकरणों में घटकों को प्रभाजी आसवन द्वारा अलग नहीं किया जा सकता। स्िथरक्वाथी दो प्रकार के होते हैं, जिन्हें न्यूनतम क्वथनांकी स्िथरक्वाथी तथा अिाकतम क्वथनांकी स्िथरक्वाथी कहते हैं। विलयन जो एक निश्िचत संगठन पर राउल्ट नियम से अत्यिाक धनात्मक विचलन प्रद£शत करते हैं, न्यूनतमक्वथनांकी स्िथरक्वाथी बनाते हैं। उदाहरणाथर् शवर्फराओं के किण्वन से प्राप्त एथेनाॅल एवं जल का मिश्रण प्रभाजी आसवन द्वारा जो विलयन देता है उसमें आयतन के आधर पर लगभग 95ः तक ऐथनाॅल होती है। एक बार यह संघटन प्राप्त कर लेने के पश्चात्, जो कि स्िथरक्वाथी संघटन है, द्रव व वाष्प का संघटन समान हो जाता है तथा इसके आगे पृथक्करण नहीं होता। 2.6 अणुसंख्य गुणधमर् और आण्िवक द्रव्यमान की गणना 2.6.1 वाष्प दाब का आपेक्ष्िाक अवनमन वे विलयन जो कि राउल्ट नियम से बहुत अध्िक ट्टणात्मक विचलन दशार्ते हैं, एक विश्िाष्ट संघटन पर अिाकतम क्वथनांकी स्िथरक्वाथी बनाते हैं। नाइटिªक अम्ल एवं जल का मिश्रण इस प्रकार के स्िथरक्वाथी का उदाहरण है। इस स्िथरक्वाथी के संघटन में लगभग 68ः नाइटिªक अम्ल एवं 32ः जल ;द्रव्यमानद्ध होता है जिसका क्वथनांक 393ण्5 ज्ञ होता है। खंड 2ण्4ण्3 में हमने जाना कि जब एक अवाष्पशील विलेय विलायक में डाला जाता है तो विलयन का वाष्प दाब घटता है। विलयन के कइर् गुण वाष्प दाब के अवनमन से संबंिात हैं, वे हैंकृ ;1द्ध विलायक के वाष्प दाब का आपेक्ष्िाक अवनमन ;2द्ध विलायक के हिमांक का अवनमन ;3द्ध विलायक के क्वथनांक का उन्नयन और ;4द्ध विलयन का परासरण दाब। यह सभी गुण विलयन में उपस्िथत वुफल कणों की संख्या तथा विलेय कणों की संख्या के अनुपात पर निभर्र करते हैं न कि विलेय कणों की प्रकृति पर। ऐसे गुणों को अणुसंख्य गुण धमर् कहते हैं। ¹अणुसंख्य, ;बवससपहंजपअमद्ध ‘लैटिन भाषा से जिसमें, ‘को’, का अथर् है एक साथ और ‘लिगेर’ का अथर् है आबंिातह् निम्नलिख्िात खंडों में हम एक - एक करके इन गुणों की विवेचना करेंगे। खंड 2ण्4ण्3 में हमने सीखा कि किसी विलायक का विलयन में वाष्प दाब शु( विलायक के वाष्प दाब से कम होता है। राउल्ट ने सि( किया कि वाष्प दाब का अवनमन केवल विलेय कणों के सांद्रण पर निभर्र करता है, उनकी प्रकृति पर नहीं। खंड 2ण्4ण्3 में दिया गया समीकरण 2ण्20 विलयन के वाष्प दाब, विलायक के वाष्प दाब एवं मोल - अंश से संबंध स्थापित करता है अथार्त - च त्र ग 1 च 0 ;2ण्22द्ध11विलायक के वाष्प दाब में अवनमन, Δच1 को निम्न प्रकार से दिया जाता है - 0 00Δच त्र च दृ च त्र च दृ चग 111111 त्र च0 ;1 दृ ग द्ध ;2ण्23द्ध11यह ज्ञात है कि ग 2 त्र 1 दृ ग 1 है, अतः समीकरण 2ण्23 निम्न प्रकार से बदल जाता है - Δच त्र ग 2 च 0 ;2ण्24द्ध11जिस विलयन में कइर् अवाष्पशील विलेय होते हैं, उसके वाष्पदाब का अवनमन विभ्िान्न विलेयों के मोल - अंश के योग पर निभर्र करता है। समीकरण 2ण्24 को इस प्रकार लिख सकते हैं - Δचच 0 − च1 11 त्र त्र ग ;2ण्25द्ध0 02 चच11 2.6.2 क्वथनांक का उन्नयन पहले ही बताया जा चुका है कि समीकरण में बाईं ओर लिखा गया पद वाष्पदाब का आपेक्ष्िाक अवनमन कहलाता है तथा इसका मान विलेय के मोल - अंश के बराबर होता है अतः उपरोक्त समीकरण को इस प्रकार लिख सकते हैंकृ च 0 − चद द21 चिू क ग त्र 01त्र 2 2 ;2ण्26द्धद ़ दचद ़ द 12121 यहाँ द1 और द2 क्रमशः विलयन में उपस्िथत विलायक और विलेय के मोलों की संख्या हैै। तनु विलयन के लिए द2 ढढ द1ए अतः द2 को हर में से छोड़ देने पर - च 0 − चद11 2 0 त्र 0 ;2ण्27द्ध चद11 च 0 − च ू ×ड 11 21या 0 त्र ;2ण्28द्ध चड2 × ू 11 यहाँ ू1 और ू2 तथा ड1 और ड2 क्रमशः विलायक और विलेय की मात्रा और मोलर द्रव्यमान हैं। समीकरण ;2ण्28द्ध में उपस्िथत अन्य सभी मात्राएं ज्ञात होने पर विलेय के मोलर द्रव्यमान ;ड2द्ध को परिकलित किया जा सकता है। कक्षा ग्प् के एकक 5 में हमने जाना कि द्रव का ताप बढ़ने पर वाष्प दाब बढ़ता है। यह उस ताप पर उबलता है जिस पर उसका वाष्प दाब वायुमंडलीय दाब के बराबर हो जाता है। उदाहरण के लिए जल 373ण्15 ज्ञ ;100वब्द्ध पर उबलता है क्योंकि इस ताप पर जल का वाष्प दाब 1ण्013 इंत ;1 वायुमंडलद्ध है। हमने पिछले खंड में जाना कि अवाष्पशील विलेय कि उपस्िथति से विलायक का वाष्प दाब कम हो जाता है। चित्रा 2ण्7 शु( विलायक और विलयन के वाष्पदाब का ताप के साथ परिवतर्न प्रद£शत करता है। उदाहरण के लिए सुक्रोस के जलीय विलयन का वाष्पदाब 373ण्15 ज्ञ पर 1ण्013 इंत से कम है। इस विलयन को उबालने के लिए ताप को शु( विलायक ;जलद्ध के क्वथनांक से अिाक बढ़ाकर विलयन का वाष्प दाब 1ण्013 इंत तक बढ़ाना पड़ेगा। अतः किसी भी विलयन का क्वथनांक शु( विलायक, जिसमें विलयन बनाया गया है, के क्वथनांक से हमेशा अिाक 1ण्013 इंतया चित्रा 2.7कृ विलयन का वाष्पदाब वक्र, शु( जल के वाष्प दाब वक्र के नीचे है। आरेख दशार्ता है कि Δज्इ विलयन में विलायक के क्वथनांक का उन्नयन हैै। होता है जैसा चित्रा 2ण्7 में दिखाया गया है। वाष्पदाब के अवनमन के समान ही क्वथनांक का उन्नयन भी विलेय के अणुओं की संख्या पर निभर्र करता है न कि उसकी प्रकृति पर। एक मोल सुक्रोस का 1000 ह जल में विलयन 1 वायुमंडलीय दाब पर 373ण्52 ज्ञ पर उबलता है। यदि ज्इ0 शु( विलायक का क्वथनांक है और ज्इ विलयन का क्वथनांक है तो Δ इ त्र ज् − ज्इ 0 को क्वथनांक का उन्नयन कहा जाता है। ज्इ प्रयोग दशार्ते हैं कि तनु विलयन में क्वथनांक का उन्नयन Δज्इए विलयन में उपस्िथत विलेय की मोलल सांद्रता के समानुपाती होता है। अतः Δज् इ ∝ उ ;2ण्29द्ध या Δज् इ त्र ज्ञ इ उ ;2ण्30द्ध यहाँ उ ;मोललताद्ध 1 ाह विलायक में विलीन विलेय के मोलों की संख्या है तथा ज्ञइ क्वथनांक उन्नयन स्िथरांक या मोलल उन्नयन स्िथरांक ;म्इनससपवेबवचपब ब्वदेजंदजद्ध कहलाता है। ज्ञइ की इकाइर् ज्ञ ाह उवस −1 है। वुफछ प्रचलित विलायकों के ज्ञइ का मान सारणी 2ण्3 में दिया गया है। यदि ड2 मोलर द्रव्यमान वाले विलेय के ू2 ग्राम, ू1 ग्राम विलायक में उपस्िथत हों तो विलयन की मोललता उ निम्न पद द्वारा व्यक्त की जाती है। ू2 ध् ड2 1000 × ू2 उ त्र त्र ;2ण्31द्ध ू1ध्1000 ड2 ×ू1 समीकरण ;2ण्30द्ध में मोललता का मान रखने पर - Δज् त्र इड त्र 2ज्ञ ×1000 × ूइ 2 ;2ण्32द्धड2 ×ू1 1000× ू × ज्ञ2इ ;2ण्33द्धΔज्इ ×ू1 अतः विलेय के मोलर द्रव्यमान ड2 का मान निकालने के लिए उस विलेय की एक ज्ञात मात्रा को ऐसे विलायक की ज्ञात मात्रा में विलीन करके Δज् इ का मान प्रयोग द्वारा प्राप्त किया जाता है, जिसके लिए ज्ञ इ का मान ज्ञात हो। 2.6.3 हिमांक का अवनमन वाष्प दाब में कमी के कारण शु( विलायक की तुलना में विलयन के हिमांक का अवनमन होता है ;चित्रा 2ण्8द्ध। हम जानते हैं कि किसी पदाथर् के हिमांक पर, ठोस प्रावस्था एवं द्रव प्रावस्था गतिक साम्य में रहती है। अतः किसी पदाथर् के हिमांक बिंदु को इस प्रकार परिभाष्िात किया जा सकता है कि यह वह ताप है जिसपर द्रव अवस्था का वाष्प दाब उसकी ठोस अवस्था के वाष्प दाब के बराबर होता है। एक विलयन का तभी हिमीकरण होता है जब उसका वाष्प दाब शु( ठोस विलायक के वाष्प दाब के बराबर हो जाए जैसा कि चित्रा 2ण्8 से स्पष्ट है। राउल्ट के नियम के अनुसार जब एक अवाष्पशील ठोस विलायक में डाला जाता है तो विलायक का वाष्प दाब कम हो जाता है और अब इसका वाष्पदाब ठोस विलायक के वाष्पदाब के बराबर वुफछ कम ताप पर होता है। अतः विलायक का हिमांक घट जाता है। माना कि ज्0 शु( विलायक का हिमांक बिंदु है और जब उसमेंिअवाष्पशील विलेय घुला है तब उसका हिमांक बिंदु ज् िहै। अतः हिमांक में कमी ज् 0 − ज् के बराबर होगी।ििΔज् त्र ज् 0 − ज् , इसे हिंमाक का अवनमन कहते हैं।िििक्वथनांक के उन्नयन के समान ही तनु विलयन ;आदशर् विलयनद्ध का हिमांक अवनमन ;Δज् िद्ध भी विलयन की मोललता उ के समानुपाती चित्रा 2.8कृ विलयन में विलायक के हिमांक का होता है। अतः अवनमन ;Δज् द्ध दशार्ने वाला आलेखिΔज्∝ उिया Δज् ित्र ज्ञ िउ ;2ण्34द्ध समानुपाती स्िथरांक, ज्ञ िए जो विलायक की प्रकृति पर निभर्र करता है, को हिमांक अवनमन स्िथरांक, मोलल अवनमन स्िथरांक या क्रायोस्कोपिक स्िथरांक कहते हैं। ज्ञ िकी इकाइर् ज्ञ ाह उवसदृ1 है। वुफछ प्रचलित विलायकों के ज्ञ िमान सारणी 2ण्3 में दिए गए हैं। यदि ू2 ग्राम विलेय जिसका मोलर द्रव्यमान ड2 है, की ू1 ग्राम विलायक में उपस्िथति विलायक के हिमांक में Δज् िअवनमन कर दे, तो विलेय की मोललता समीकरण 2ण्31 द्वारा दशार्इर् जाती हैकृ ू2 ध्ड 2 उत्र ;2ण्31द्ध ू1ध्1000 समीकरण ;2ण्34द्ध में मोललता का यह मान रखने पर, हमें प्राप्त होता है - ज्ञ ×ू ध्ड ि22 Δज् त्र िू1ध्1000 ज्ञ ि×ू2 ×1000 Δज्त्र ;2ण्35द्धिड2 ×ू1 × ×1000 ज्ञ िू2 ड 2त्र ;2ण्36द्धΔज् ि× ू1 अतः विलेय का मोलर द्रव्यमान निकालने के लिए हमें ू1ए ू2ए Δज् िके साथ मोलल अवनमन स्िथरांक ज्ञ िका मान भी ज्ञात होना चाहिए। ज्ञ िएवं ज्ञइ के मान, जो विलायक की प्रकृति पर निभर्र करते हैं, निम्न संबंधों से प्राप्त किए जा सकते हैं। त् × ड1× ज् ि2 ज्ञ ित्र ;2ण्37द्ध1000 × Δगलन भ् त् × ड1× ज्इ 2 ज्ञ त्र ;2ण्38द्धइ 1000 × भ्Δ वाष्पन यहाँ त् और ड1 क्रमशः गैस स्िथरांक एवं विलायक का मोलर द्रव्यमान तथा ज् ितथा ज्इ केल्िवन में शु( विलायक के क्रमशः हिमांक एवं क्वथनांक हैं। इसी प्रकार Δगलनभ् तथा Δवाष्पनभ् क्रमशः विलायक के गलन एवं वाष्पन एन्थैल्पी में परिवतर्न हैं। सारणी 2ण्3 - वुफछ विलायकों के मोलल क्वथनांक उन्नयन स्िथरांक एवं मोलल हिमांक अवनमन स्िथरांक 2.6.4 परासरण एवं परासरण दाब हम प्रकृति अथवा घर में कइर् परिघटनाओं को देखते हैं। उदाहरणाथर्, कच्चे आमों का अचार डालने के लिए नमकीन जल में भ्िागोने पर वे संवुफचित हो जाते हैं, मुरझाये पूफल ताशे जल में रखने पर ताशे हो उठते हैं, नमकीन जल में रखने पर रूिार कोश्िाकायें सिवुफड़ जाती हैं, आदि। इन सभी घटनाओं में एक बात जो समान दिखाइर् देती है, वह यह है कि ये सभी पदाथर् झिल्िलयों से परिब( हैं। ये झिल्िलयाँ जंतु या वनस्पति मूल की हो सकती हैं एवं यह सूअर के ब्लेडर या पाचर्मेन्ट की तरह प्राकृतिक रूप में मिलती हैं, अथवा सेलोपेफन की तरह संश्लेष्िात प्रकृति की होती हैं। ये झिल्िलयाँ सतत शीट या पिफल्म प्रतीत होती हैं, तथापि इनमें अतिसूक्ष्मदशीर्य ;ैनइउपबतवेबवचपबद्ध छिद्रों या रंध्रों का एक नेटववर्फ होता है। वुफछ विलायक जैसे जल के अणु इन छिद्रों से गुशर सकते हैं परंतु विलेय के बड़े अणुओं का गमन बािात होता है। इस प्रकार के गुणों वाली झिल्िलयाँ, अधर्पारगम्य झिल्िलयाँ ;ैच्डद्ध कहलाती हैं। मान लीजिए कि केवल विलायक के अणु ही इन अध्र्पारगम्य झिल्िलयों में से निकल सकते हैं। यदि चित्रा 2ण्9 में दशार्ये अनुसार यह झिल्ली विलायक एवं विलयन के मध्य रख दी जाए तो विलायक के अणु इस झिल्ली में से निकलकर विलयन की ओर प्रवाहित हो जाएंगे। विलायक के प्रवाह का यह प्रक्रम परासरण कहलाता है। साम्यवस्था प्राप्त होने तक प्रवाह सतत बना रहता है। झिल्ली में से विलायक का अपनी ओर से विलयन की ओर का प्रवाह, विलयन पर अतिरिक्त दाब लगा कर रोका जा सकता है। यह दाब जो कि विलायक के प्रवाह को मात्रा रोकता है, परासरण दाब कहलाता है। अधर्पारगम्य झिल्ली में से विलायक का तनु विलयन से सांद्र विलयन की ओर प्रवाह, परासरण के कारण होता है। यह ¯बदु ध्यान रखने योग्य है कि विलायक के अणु हमेशा विलयन की निम्न सांद्रता से उच्च सांद्रता की ओर प्रवाह करते हैं। परासरण दाब का विलयन की सांद्रता पर निभर्र होना पाया गया है।चित्रा 2.10 - परासरण को रोकने के लिए परासरण एक विलयन का परासरण दाब वह अतिरिक्त दाब है, जो परासरण कोदाब के तुल्य अतिरिक्त दाब विलयन पर रोकने अथार्त् विलायक के अणुओं वफो एक अधर्पारगम्य झिल्ली द्वाराप्रयुक्त करना चाहिए। विलयन में जाने से रोकने के लिए लगाया जाना चाहिए। यह चित्रा 2ण्10 में समझाया गया है। परासरण दाब एक अणुसंख्यक गुण है, जो कि विलेय कि अणु संख्या पर निभर्र करता है, न कि उसकी प्रकृति पर। तनु विलयनों के लिए प्रायोगिक तौर पर यह पाया गया है कि परासरण दाब दिए गए ताप ज् पर, मोलरता, ब् के समानुपातिक होता है। अतः Π त्र ब्त् ज् ;2ण्39द्ध यहाँ Π परासरण दाब एवं त् गैस नियतांक है। द Π त्र 2 त्ज् ;2ण्40द्धट यहाँ टए विलेय के द2 मोलों को रखने वाले विलयन का आयतन लीटर में है। यदि ड2 मोलर द्रव्यमान का ू2 ग्राम विलेय विलयन में उपस्िथत हो तब हम - ू द2 त्र 2 एवं ड2 ू2 त्ज् Π ट त्र ;2ण्41द्धड2 ू2 त्ज् या ड त्र लिख सकते हैं, ;2ण्42द्ध2Π ट अतः राश्िायों ू2ए ज्ए Π एवं ट के ज्ञात होने पर विलेय का मोलर द्रव्यमान परिकलित किया जा सकता है। विलेयों के मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने की एक अन्य वििा परासरण दाब का मापन है। यह वििा प्रोटीनों, बहुलकों एवं अन्य वृहदणुओं के मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने की प्रचलित वििा है। परासरण दाब विध्ि दाब मापन की अन्य विध्ियों से अिाक उपयोगी है क्योंकि परासरण दाब मापन कमरे के ताप पर होता है एवं मोललता के स्थान पर विलयन की मोलरता उपयोग में ली जाती है। अन्य अणुसंख्यक गुणों की तुलना में तनु विलयनों के लिए भी इसका परिमाण अिाक होता है। विलेयों के मोलर द्रव्यमान ज्ञात करने की परासरण दाब तकनीक विशेष रूप से जैव - अणुओं के लिए उपयोगी है जो उच्चताप पर सामान्यतया स्थायी नहीं होते एवं उन बहुलकों के लिए भी जिनकी विलेयता कम होती है। दिए गए ताप पर समान परासरण दाब वाले दो विलयन समपरासारी विलयन कहलाते हैं। जब ऐसे विलयन अधर्पारगम्य झिल्ली द्वारा पृथक किए जाते हैं, तो उनके मध्य 2.6.5 प्रतिलोम परासरण एवं जल शोधन परासरण नहीं होता। उदाहरणाथर्, रुध्िर कोश्िाका में स्िथत द्रव का परासरण दाब 0ण्9ः ;द्रव्यमान/आयतनद्ध सोडियम क्लोराइड, जिसे सामान्य लवण विलयन कहते हैं, के तुल्यांक होता है एवं इसे अंतःश्िारा में अंतःक्षेपित ;इंजेक्टद्ध करना सुरक्ष्िात रहता है। दूसरी ओर, यदि हम कोश्िाकाओं को 0ण्9ः ;द्रव्यमान/आयतनद्ध से अिाक सोडियम क्लोराइड विलयन में रख दें, तो जल कोश्िाकाओं से बाहर प्रवाहित हो जाएगा और वे संवुफचित हो जाएंगी। इस प्रकार के विलयन को अतिपरासरी विलयन कहा जाता है। यदि लवण की संाद्रता 0ण्9ः ;द्रव्यमान/आयतनद्ध से कम हो तो जल कोश्िाकाओं के अंदर प्रवाहित होगा और वे पूफल जायेंगी। ऐसे विलयन को अल्पपरासरी विलयन कहते हैं। इस खंड के प्रारंभ में उल्लेख्िात परिघटनाओं को परासरण के आधर पर समझाया जा सकता है। अचार बनाने के लिए सांद्र लवणीय विलयन में रखा गया कच्चा आम परासरण के कारण जल का क्षरण कर देता है एवं संवुफचित हो जाता है। मुरझाये पुष्प ताशा जल में रखने पर पुनः ताशे हो उठते हैं। वातावरण में जल ”ास के कारण लचीली हो चुकी गाजर जल में रखकर पुनः उसी अवस्था में प्राप्त की जा सकती है। परासरण के कारण जल इनके अंदर चला जाता है। यदि रुिार कोश्िाकाओं को 0ण्9ः ;द्रव्यमान/आयतनद्ध से कम लवण वाले जल में रखा जाये तो परासरण के कारण जल के ”ास से ये निपात ;बवससंचेमद्ध हो जाती हैं। जो लोग बहुत अिाक नमक या नमकीन भोजन लेते हैं वे ऊतक कोश्िाकाओं एवं अंतरा कोश्िाक स्थानों में जल धरण महसूस करते हैं। इसके परिणामस्वरूप होने वाली स्थूलता या सूजन को शोपफ ;मकमउंद्ध कहते हैं। जल का मृदा से पौधों की जड़ों में और पिफर पौधे के ऊपर के हिस्सों में पहुँचना आंश्िाक रूप से परासरण के कारण होता है। मांस में लवण मिलाकर संरक्षण एवं पफलों में शवर्फरा मिलाकर संरक्षण बैक्टीरिया की िया को रोकता है। परासरण के कारण नमकयुक्त मांस एवं मिश्री में पागे गए पफल पर स्िथर बैक्टीरियम जल ”ास के कारण संवुफचित होकर मर जाता है। चित्रा 2.10 में वण्िार्त विलयन पर यदि परासरण दाब से अिाक दाब लगाया जाए तो परासरण की दिशा को प्रतिव£तत ;त्मअमतेमकद्ध किया जा सकता हैऋ अथार्त् शु( विलायक अब अधर्पारगम्य झिल्ली के माध्यम से विलयन में से पारगमन करता है। यह परिघटना प्रतिलोम परासरण कहलाती है एवं व्यावहारिक रूप से बहुत उपयोगी है। प्रतिलोम परासरण का उपयोग समुद्री जल के विलवणीकरण में किया जाता है। प्रक्रम 53 विलयन चित्रा 2.11कृ जब विलयन पर परासरण दाब से अिाक दाब लगाया जाता है तो प्रतिलोम परासरण होता है। का आरेखीय निरूपण चित्रा 2ण्11 में दशार्या गया है। जब परासरण दाब से अिाक दाब लगाया जाता है तो शु( जल अध्र्पारगम्य झिल्ली के माध्यम से समुद्री जल में से निष्कासित हो जाता है। तो इस उद्देश्य के लिए विभ्िान्न प्रकार की बहुलकीय झिल्िलयाँ उपलब्ध हैं। प्रतिलोम परासरण के लिए आवश्यक दाब बहुत अिाक होता है। इसके लिए उपयुक्त झिल्ली सेलूलोस ऐसीटेट की पिफल्म से बनी होती है जिसे उपयुक्त आधार पर रखा जाता है। सेलूलोस ऐसीटेट जल के लिए पारगम्य है परंतु समुद्री जल में उपस्िथत अशुियों एवं आयनों के लिए अपारगम्य है। आजकल बहुत से देश अपनी पेय जल की आवश्यकता के लिए विलवणीकरण संयंत्रों का उपयोग करते हैं। 2.7 असामान्य मोलर द्रव्यमान हम जानते हैं कि आयनिक पदाथर् जल में घोलने पर धनायनों एवं ट्टणायनों में वियोजित हो जाते हैं। उदाहरणाथर्, यदि हम एक मोल ज्ञब्स ;74ण्5 हद्ध को जल में विलीन करें तो हम विलयन में ज्ञ़ एवं ब्स − आयनों में प्रत्येक के एक मोल के मुक्त होने की अपेक्षा करते हैं। यदि ऐसा होता है, तो विलयन में विलेय के कणों के दो मोल होंगे। यदि हम अंतराआयनी आकषर्णों की उपेक्षा करें तो यह आशा की जाती है कि 1 ाह जल में ज्ञब्स का एक मोल, क्वथनांक को 2 ×0ण्52 ज्ञ त्र 1ण्04 ज्ञ बढ़ा देगा। अब, यदि हम वियोजन की मात्रा के बारे में न जानते हों तो हम इस परिणाम पर पहुँचेंगे कि 2 मोल कणों का द्रव्यमान 74ण्5 ह है अतः एक मोल ज्ञब्स का द्रव्यमान 37ण्25 ह होगा। इससे यह नियम प्रकट होता है कि जब विलेय का आयनों में वियोजन होता है तो प्रायोगिक तौर पर इन विध्ियों द्वारा ज्ञात किया गया मोलर द्रव्यमान, वास्तविक द्रव्यमान से हमेशा कम होता है। बेन्जीन में एथेनाॅइक अम्ल के अणुओं का ;ऐसीटिक अम्लद्ध हाइड्रोजन बंध बनने के कारण द्वितयन ;कपउमतप्रंजपवदद्ध हो जाता है। ऐसा सामान्यतया निम्न परावैद्युतांक वाले विलायकों में होता है। इस प्रकरण में द्वितयन के कारण कणों की संख्या घट जाती है। अणुओं का संगुणन निम्न चित्रा में देखा जा सकता है 2 ब्भ्3ब्व्व्भ् ;ब्भ्3ब्व्व्भ्द्ध2 अणुओं का संगुणन यहाँ बेशक यह कहा जा सकता है कि यदि बेन्जीन में एथेनाॅइक अम्ल के समस्त अणु संगुण्िात हो जायें तो एथेनाॅइक अम्ल का Δज्इ या Δज् िसामान्य मान से आधा होगा। इस Δज्इ या Δज् िके आधार पर परिकलित मोलर द्रव्यमान अनुमानित मान का दो गुना होगा। ऐसा मोलर द्रव्यमान जो अनुमानित या सामान्य मान की तुलना में निम्न या उच्च होता है असामान्य मोलर द्रव्यमान कहलाता है। 1880 में वान्ट हाॅपफ ने वियोजन और संयोजन की सीमा के निधार्रण के लिए एक गुणक, प, जिसे वान्ट हाॅपफ गुणक कहते हैं, प्रतिपादित किया। इस गुणक, प, को निम्नानुसार परिभाष्िात किया जाता है - लरदव्यमान ्र ं ुसामान्य मो्रपेक्ष्िात अणुसख्यक गण प त्र त्र असामान्य मो्रपरिकलित अणसख्यक गणलरदव्यमानुं ु सगं णन/वियोे पश्चात् कणांवफवफल मालांु जनवफे े ु े ेकीसख्या प त्र णन/वियाजेू े े लांसगंुेनवफपवर्कणांवफमोेकीसख्ंया यहाँ असामान्य मोलर द्रव्यमान प्रायोगिक तौर पर ज्ञात किया गया मोलर द्रव्यमान है तथा अणुसंख्यक गुणों का परिकलन यह मानकर किया गया है कि अवाष्पशील विलेय न तो संयोजित होता है और न ही वियोजित। संगुणन की स्िथति में प का मान एक से कम जबकि वियोजन में यह एक से अिाक होता है। उदाहरण के लिए, जलीय ज्ञब्स के लिए प का मान 2 के नजदीक एवं बेन्जीन में एथेनाॅइक अम्ल के लिए लगभग 0ण्5 होता है। वान्ट हाॅपफ गुणक को शामिल करने पर अणुसंख्यक गुणों के लिए समीकरण निम्नानुसार संशोिात हो जाते हैकृ च वदृ चद11 2 त्र पण्विलायक के वाष्पदाब में आपेक्ष्िाक अवनमन, चव द11 क्वथनांक का उन्नयन, Δज्इ त्र प ज्ञइ उ हिमांक का अवनमन, Δज् त्र पज्ञ उ ििपद 2 त्ज् विलयन का परासरण दाब, Πत्र ट सारणी 2ण्4 में बहुत सारे प्रबल वैद्युत अपघट्यों के लिए प के मान दशार्ए गए हैं। ज्ञब्सए छंब्स एवं डहैव्4 के लिए जैसे ही विलयन बहुत तनु होता है, प का मान 2 के नशदीक पहुँच जाता है। जैसी की अपेक्षा है ज्ञ2ैव्4 के लिए प का मान 3 के नशदीक होता है। सारणी 2ण्4 - छंब्सए ज्ञब्सए डहैव्4 एवं ज्ञ2ैव्4 के लिए विभ्िान्न सांद्रणों पर वान्ट हाॅपफ कारक ;पद्ध के मान ’ प के मान अपूणर् वियोजन के लिए हैं। अभ्यास 2ण्1 विलयन को परिभाष्िात कीजिए। कितने प्रकार के विभ्िान्न विलयन संभव हैं? प्रत्येक प्रकार के विलयन के संबंध में एक उदाहरण देकर संक्षेप में लिख्िाए। 2ण्2 एक ऐसे ठोस विलयन का उदाहरण दीजिए जिसमें विलेय कोइर् गैस हो। 2ण्3 निम्न पदों को परिभाष्िात कीजिएकृ ;पद्ध मोल - अंश ;पपद्ध मोललता ;पपपद्ध मोलरता ;पअद्ध द्रव्यमान प्रतिशत 2ण्4 प्रयोगशाला कायर् के लिए प्रयोग में लाया जाने वाला सांद्र नाइटिªक अम्ल द्रव्यमान की दृष्िट से नाइटिªक अम्ल का 68ः जलीय विलयन है। यदि इस विलयन का घनत्व 1ण्504 ह उस्दृ1 हो तो अम्ल के इस नमूने की मोलरता क्या होगी? 2ण्5 ग्लूकोस का एक जलीय विलयन 10ः ;ूध्ूद्ध है। विलयन की मोललता तथा विलयन में प्रत्येक घटक का मोल - अंश क्या है? यदि विलयन का घनत्व 1ण्2 ह उस्दृ1 हो तो विलयन की मोलरता क्या होगी? 2ण्6 यदि 1 ह मिश्रण में छं2ब्व्3 एवं छंभ्ब्व्3 के मोलों की संख्या समान हो तो इस मिश्रण से पूणर्तः िया करने के लिए 0ण्1 ड भ्ब्स के कितने उस् की आवश्यकता होगी? 2ण्7 द्रव्यमान की दृष्िट से 25ः विलयन के 300 ह एवं 40ः के 400 ह को आपस में मिलाने पर प्राप्त मिश्रण का द्रव्यमान प्रतिशत सांद्रण निकालिए। 2ण्8 222ण्6 ह एथ्िालीन ग्लाइकाॅल, ब्2भ्4;व्भ्द्ध2 तथा 200 ह जल को मिलाकर प्रतिहिम मिश्रण बनाया गया। विलयन की मोललता की गणना कीजिए। यदि विलयन का घनत्व 1ण्072 ह उस्दृ1 हो तो विलयन की मोलरता निकालिए। 2ण्9 एक पेय जल का नमूना क्लोरोपफाॅमर् ;ब्भ्ब्स3द्ध से, वैंफसरजन्य समझे जाने की सीमा तक बहुत अध्िक संदूष्िात है। इसमें संदूषण की सीमा 15 चचउ ;द्रव्यमान मेंद्ध है - ;पद्ध इसे द्रव्यमान प्रतिशत में व्यक्त कीजिए। ;पपद्ध जल के नमूने में क्लोरोपफाॅमर् की मोललता ज्ञात कीजिए। 2ण्10 ऐल्कोहाॅल एवं जल के एक विलयन में आण्िवक अन्योन्यिया की क्या भूमिका है? 2ण्11 ताप बढ़ाने पर गैसों की द्रवों में विलेयता में, हमेशा कमी आने की प्रवृिा क्यों होती है? 2ण्12 हेनरी का नियम तथा इसके वुफछ महत्वपूणर् अनुप्रयोग लिख्िाए। दृ3 2ण्13 10× 6ण्56 हएथेन युक्त एक संतृप्त विलयन में एथेन का आंश्िाक दाब 1 इंत है। यदि विलयन में 5ण्00 ×10दृ2 ह एथेन हो तो गैस का आंश्िाक दाब क्या होगा? 2ण्14 राउल्ट के नियम से धनात्मक एवं ट्टणात्मक विचलन का क्या अथर् है तथा Δभ् के चिन्ह का इन विचलनों से वैफसेमिश्रणसंबंिात है? 2ण्15 विलायक के सामान्य क्वथनांक पर एक अवाष्पशील विलेय का 2ः जलीय विलयन का 1ण्004 इंत वाष्प दाब है। विलेय का मोलर द्रव्यमान क्या है? 2ण्16 हेप्टेन एवं आॅक्टेन एक आदशर् विलयन बनाते हैं। 373 ज्ञ पर दोनों द्रव घटकों के वाष्प दाब क्रमशः 105ण्2 ाच्ं तथा 46ण्8 ाच्ं हैं। 26ण्0 ह हेप्टेन एवं 35ण्0 ह आॅक्टेन के मिश्रण का वाष्प दाब क्या होगा? 2ण्17 300 ज्ञ पर जल का वाष्प दाब 12ण्3 ाच्ं है। इसमें बने अवाष्पशील विलेय के एक मोलल विलयन का वाष्प दाब ज्ञात कीजिए। 2ण्18 114 ह आॅक्टेन में किसी अवाष्पशील विलेय ;मोलर द्रव्यमान 40 ह उवसदृ1द्ध की कितनी मात्रा घोली जाए कि आॅक्टेन का वाष्प दाब घट कर मूल का 80ः रह जाए। 2ण्19 एक विलयन जिसे एक अवाष्पशील ठोस के 30 ह को 90 ह जल में विलीन करके बनाया गया है। उसका 298 ज्ञ पर वाष्प दाब 2ण्8 ाच्ं है। विलयन में 18 ह जल और मिलाया जाता है जिससे नया वाष्प दाब 298 ज्ञ पर 2ण्9 ाच्ं हो जाता है। निम्नलिख्िात की गणना कीजिए। ;पद्ध विलेय का मोलर द्रव्यमान ;पपद्ध 298 ज्ञ पर जल का वाष्प दाब। 2ण्20 शक्कर के 5ः ;द्रव्यमानद्ध जलीय विलयन का हिमांक 271 ज्ञ है। यदि शु( जल का हिमांक 273ण्15 ज्ञ है तो ग्लूकोस के 5ः जलीय विलयन के हिमांक की गणना कीजिए। 2ण्21 दो तत्व । एवं ठ मिलकर ।ठ2 एवं ।ठ4 सूत्रा वाले दो यौगिक बनाते हैं। 20 ह बेन्जीन में घोलने पर 1 ह ।ठ2 हिमांक को 2ण्3 ज्ञ अवनमित करता है। जबकि 1ण्0 ह ।ठ4 से 1ण्3 ज्ञ का अवनमन होता है। बेन्जीन के लिए मोलर अवनमन स्िथरांक 5ण्1 ज्ञ ाह उवसदृ1 है। । एवं ठ के परमाणवीय द्रव्यमान की गणना कीजिए। 2ण्22 300 ज्ञ पर 36 ह प्रति लीटर सांद्रता वाले ग्लूकोस के विलयन का परासरण दाब 4ण्98 इंत है। यदि इसी ताप पर विलयन का परासरण दाब 1ण्52 इंत हो तो उसकी सांद्रता क्या होगी? 2ण्23 निम्नलिख्िात युग्मों में उपस्िथत सबसे महत्वपूणर् अंतरआण्िवक आकषर्ण बलों का सुझाव दीजिए। ;पद्ध द.हेक्सेन व द.आॅक्टेन ;पपद्ध प्2 तथा ब्ब्स4 ;पपपद्ध छंब्सव्4 तथा भ्2व् ;पअद्ध मेथेनाॅल तथा ऐसीटोन ;अद्ध ऐसीटोनाइट्राइल ;ब्भ्3ब्छद्ध तथा ऐसीटोन ;ब्3भ्6व्द्ध 2ण्24 विलेय - विलायक आकषर्ण के आधर पर निम्नलिख्िात को द.आॅक्टेन की विलेयता के बढ़ते क्रम में व्यवस्िथत कीजिए - ज्ञब्सए ब्भ्3व्भ्ए ब्भ्3ब्छए साइक्लोहेक्सेन। 2ण्25 पहचानिए कि निम्नलिख्िात यौग्िाकों में से कौन से जल में अत्यध्िक विलेय, आंश्िाक रूप से विलेय तथा अविलेय हैं। ;पद्ध प़फीनाॅल ;पपद्ध टाॅलूइर्न ;पपपद्ध पफा£मक अम्ल ;पअद्ध एथ्िालीन ग्लाइकाॅल ;अद्ध क्लोरोपफाॅमर् ;अपद्ध पेन्टेनाॅल 2ण्26 यदि किसी झील के जल का घनत्व 1ण्25 ह उस्दृ1 है तथा उसमें 92 ह छं़ आयन प्रति किलो जल में उपस्िथत हैं। तो झील में छं़ आयन की मोललता ज्ञात कीजिए। 2ण्27 अगर ब्नै का विलेयता गुणनपफल 6 ×10दृ16 है तो जलीय विलयन में उसकी अिाकतम मोलरता ज्ञात कीजिए। 2ण्28 जब 6ण्5 हए ऐस्िपरीन ;ब्9भ्8व्4द्ध को 450 ह ऐसिटोनाइट्राइल ;ब्भ्3ब्छद्ध में घोला जाए तो ऐस्िपरीन का ऐसीटोनाइट्राइल में भार प्रतिशत ज्ञात कीजिए। 2ण्29 नैलाॅप़फीर्न ;ब्19भ्21छव्3द्ध जो कि माॅपफीर्न जैसी होती है, का उपयोग स्वापक उपभोक्ताओं द्वारा स्वापक छोड़ने से उत्पन्न ़लक्षणों को दूर करने में किया जाता है। सामान्यतया नैलाॅपफीर्न की 1ण्5 उह खुराक दी जाती है। उपरोक्त खुराक के लिए 1ण्5 ×10दृ3 उ जलीय विलयन का कितना द्रव्यमान आवश्यक होगा? 2ण्30 बेन्शोइक अम्ल का मेथेनाॅल में 0ण्15 उ विलयन बनाने के लिए आवश्यक मात्रा की गणना कीजिए। 2ण्31 ऐसीटिक अम्ल, ट्राइक्लोरोएसीटिक अम्ल एवं ट्राइफ्रलुओरो एसीटिक अम्ल की समान मात्रा से जल के हिमांक में अवनमन इनके उपरोक्त दिए गए क्रम में बढ़ता है। संक्षेप में समझाइए। 2ण्32 ब्भ्3.ब्भ्2.ब्भ्ब्स.ब्व्व्भ् के 10 ह को 250 ह जल में मिलाने से होने वाले हिमांक का अवनमन परिकलित कीजिए। दृ3 दृ1द्ध;ज्ञं त्र 1ण्4 ×10 ए ज्ञ ित्र 1ण्86 ज्ञ ाह उवस 2ण्33 ब्भ्2थ्ब्व्व्भ् के 19ण्5 ह को 500 ह भ्2व् में घोलने पर जल के हिमांक में 1ण्0वब् का अवनमन देखा गया। फ्रलुओरोएसीटिक अम्ल का वान्ट हाॅपफ गुणक तथा वियोजन स्िथरांक परिकलित कीजिए। 2ण्34 293 ज्ञ पर जल का वाष्प दाब 17ण्535 उउ भ्ह है। यदि 25 ह ग्लूकोस को 450 ह जल में घोलें तो 293 ज्ञ पर जल का वाष्प दाब परिकलित कीजिए। 2ण्35 298 ज्ञ पर मेथेन की बेन्जीन पर मोललता का हेनरी स्िथरांक 4ण्27 ग 10 5 उउ भ्ह है। 298 ज्ञ तथा 760 उउ भ्ह दाब पर मेथेन की बेन्जीन में विलेयता परिकलित कीजिए। 2ण्36 100 ह द्रव । ;मोलर द्रव्यमान 140 ह उवसदृ1द्ध को 1000 ह द्रव ठ ;मोलर द्रव्यमान 180 ह उवसदृ1द्ध में घोला गया। शु( द्रव ठ का वाष्प दाब 500 ज्वतत पाया गया। शु( द्रव । का वाष्प दाब तथा विलयन में उसका वाष्प दाब परिकलित कीजिए यदि विलयन का वुफल वाष्प दाब 475 ज्वतत हो। 2ण्37 328 ज्ञ पर शु( ऐसीटोन एवं क्लोरोपफाॅमर् के वाष्प दाब क्रमशः 741ण्8 उउ भ्ह तथा 632ण्8 उउ भ्ह हैं। यह मानते हुए कि संघटन के सम्पूणर् परास में ये आदशर् विलयन बनाते हैं, च, च, तथा च को ग के पफलन केवुफलक्लोरोपफामर्ऐसीटोनऐसीटोनरूप में आलेख्िात कीजिए। मिश्रण के विभ्िान्न संघटनों के प्रेक्ष्िात प्रायोगिक आंकड़े निम्नलिख्िात हैं। 100 × ;गऐसीटोनद्ध 0 11ण्8 23ण्4 36ण्0 50ण्8 58ण्2 64ण्5 72ण्1 चऐसीटोन ध्उउ भ्ह 0 54ण्9 110ण्1 202ण्4 322ण्7 405ण्9 454ण्1 521ण्1 चक्लोरोपफामर् ध्उउ भ्ह 632ण्8 548ण्1 469ण्4 359ण्7 257ण्7 193ण्6 161ण्2 120ण्7 उपरोक्त आंकड़ों को भी उसी ग्रापफ में आलेख्िात कीजिए और इंगित कीजिए कि क्या इसमें आदशर् विलयन से ध्नात्मक अथवा ट्टणात्मक विचलन है? रसायन विज्ञान 60 2ण्38 संघटनों के संपूणर् परास में बेन्जीन तथा टाॅलूइर्न आदशर् विलयन बनाते हैं। 300 ज्ञ पर शु( बेन्जीन तथा टाॅलूइर्न का वाष्प दाब क्रमशः 50ण्71 उउ भ्ह तथा 32ण्06 उउ भ्ह है। यदि 80 ह बेन्जीन को 100 ह टाॅलूइर्न में मिलाया जाये तो वाष्प अवस्था में उपस्िथत बेन्जीन के मोल - अंश परिकलित कीजिए। 2ण्39 वायु अनेक गैसों की मिश्रण है। 298 ज्ञ पर आयतन मंे मुख्य घटक आॅक्सीजन और नाइट्रोजन लगभग 20ः एवं 79ः के अनुपात में हैं। 10 वायुमंडल दाब पर जल वायु के साथ साम्य में है। 298 ज्ञ पर यदि आॅक्सीजन तथा नाइट्रोजन के हेनरी स्िथरांक क्रमशः 3ण्30 ×10 7 उउ तथा 6ण्51 ×10 7 उउ है, तो जल में इन गैसों का संघटन ज्ञात कीजिए। 2ण्40 यदि जल का परासरण दाब 27 व ब् पर 0ण्75 वायुमंडल हो तो 2ण्5 लीटर जल में घुले ब्ंब्स2 ;प त्र 2ण्47द्ध की मात्रा परिकलित कीजिए। 2ण्41 2 लीटर जल में 25 व ब् पर ज्ञ2ैव्4 के 25 उहए को घोलने पर बनने वाले विलयन का परासरण दाब, यह मानते हुए ज्ञात कीजिए कि ज्ञ2ैव्4 पूणर्तः वियोजित हो गया है। कुुु छ पाठ्यनिहित प्रश्नों केेे उत्तर 2ण्1 ब्6भ्6 त्र 15ण्28ःए ब्ब्स4 त्र 84ण्72ः 2ण्2 0ण्459ए 0ण्541 2ण्3 0ण्024 डए 0ण्03 ड 2ण्4 36ण्964 ह दृ1 दृ1 2ण्5 1ण्5 उवस ाह ए 1ण्45 उवस स् ए 0ण्0263 2ण्9 23ण्4 उउ भ्ह 2ण्10 121ण्67 ह 2ण्11 5ण्077 ह 2ण्12 30ण्96 च्ं

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