lhgy211 Chapter-11 Page 1 अध्याय 11 अंतर्राष्ट्रीय व्यापार आप अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के विभिन्न पहलुओं के बारे में पहले ही 'मानव भूगोल के मूल सिद्धांत' नामक पुस्तक में पढ़ चुके हैं। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सभी देशों के लिए परस्पर लाभदायक हैं, चूंकि कोई भी देश आत्मनिर्भर नहीं है। हाल ही के वर्षों में भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार ने मात्रा, संघटन के साथ-साथ व्यापार की दिशा के संबंध में आमूल परिवर्तनों का अनुभव किया है। यद्यपि, विश्व व्यापार में भारत की भागीदारी कुल मात्रा का केवल एक प्रतिशत है तथापि, विश्व की अर्थव्यवस्था में इसकी एक महत्त्वपूर्ण भूमिका है। आइए, भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के बदलते प्रारूप (Pattern) की पड़ताल करें। वर्ष 1950-51 में, भारत का वैदेशिक व्यापार का मूल्य 1,214 करोड़ रुपए था, जो कि वर्ष 2009-10 में बढ़कर 22,09,270 करोड़ रुपए हो गया। क्या आप 1950-51 के मुकाबले 2009-10 की प्रतिशत वृद्धि का परिकलन कर सकते हैं? विदेशी व्यापार में इस तीव्र वृद्धि के अनेक कारण हैं जैसे कि विनिर्माण के क्षेत्र में संवेगी (गतिशील) उठान, सरकार की उदार नीतियाँ तथा बाजारों की विविधरूपता आदि।। समय के साथ भारत के विदेशी व्यापार की प्रकृति में बदलाव आया है (तालिका 11.1)। यद्यपि, यहाँ पर आयात एवं निर्यात दोनों की ही मात्रा में वृद्धि हुई है, परंतु निर्यात की तुलना में आयात का मूल्य अधिक है। पिछले कुछेक वर्षों में व्यापार घाटे में भी वृद्धि हुई है। घाटे में हुई इस वृद्धि के लिए अपरिष्कृत (क्रूड) पेट्रोलियम को उत्तरदायी ठहराया जा सकता है, जो भारत की आयात सूची में एक प्रमुख घटक है। भारत के निर्यात-संघटन के बदलते प्रारूप स्रोतः आर्थिक सर्वेक्षण, 2011-12 स्रोत : आर्थिक सर्वेक्षण, 2011-12 चित्र 11.1 Page 2 तालिका 11.1 : भारत का विदेश व्यापार (रु. करोड़ में) व्यापार घाटा qof निर्यात 31 2000-01 2004-05 2007-08 2009-10 3 203,571 375,340 655,864 845,534 3 3 230,873 501,065 1,012,312 1,363,736 कुल व्यापार 434,444 876,405 1,668,176 2,209,270 -27302 -125,725 -356,448 -518,202 स्रोत : report-2010-11 मसाले, चाय व दालों आदि जैसी परंपरागत वस्तुओं के निर्यात में गिरावट आई है। हालाँकि पुष्पकृषि उत्पादों ताजे तालिका 11.2 के आँकड़ों का अध्ययन कीजिए और निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए : फलों, समुद्री उत्पादों तथा चीनी आदि के निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई है। क्या कारण है कि वर्ष 1997-98 के बाद से लगातार कृषि एवं समवर्गी उत्पादों के निर्यात में गिरावट आई है? । वर्ष 2010-11 के दौरान विनिर्माण क्षेत्र ने भारत के कुल निर्यात मूल्य में अकेले 68.0 प्रतिशत की भागीदारी अंकित की वर्ष 1999-2000 में ऊँचाई पर पहुँचने के पश्चात् विनिर्मित सामानों के निर्यात में गिरावट क्यों शुरू हो गई? है। निर्यात सूची में इंजीनियरिंग सामानों ने महत्त्वपूर्ण वृद्धि एक दंड आरेख बनाकर सारणी में दी गई सभी मदों के निर्यात को दर्शाई है। इस क्षेत्र में चीन तथा अन्य पूर्व एशियाई देश हमारे प्रवृत्ति को दर्शाएँ। इसके लिए भिन्न-भिन्न रंगों के पेन या पेंसिलें प्रमुख प्रतिस्पर्धी हैं। भारत के विदेश व्यापार में मणि-रत्नों तथा इस्तेमाल करें। आभूषणों की एक व्यापक हिस्सेदारी है। तालिका 11.2 : भारत का निर्यात संघटन, 1997-2011 (निर्यात में प्रतिशत अंश) वस्तुएँ/माल 1997-98 2003-04 2009-2010 2010-11 कृषि एवं समवर्गी उत्पाद 18.93 11.8 10.0 9.9 अयस्क एवं खनिज । 3.03 3.71 4.9 4.0 विनिर्मित वस्तुएँ 75.83 75.96 67.4 68.0 पेट्रोलियम व अपरिष्कृत उत्पाद 1.01 5.59 16.2 16.8 अन्य वस्तुएँ। 1.2 2.94 1.5 स्रोत : आर्थिक सर्वेक्षण 2011-12 1.2 2 जैसाकि पहले ही बताया जा चुका है कि भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वस्तुओं के संघटकों में समय के साथ। बदलाव आए हैं। इसमें कृषि तथा समवर्गी उत्पादों का हिस्सा । तालिका 11.3 का अध्ययन करते हुए ऐसी प्रमुख वस्तुएँ चुनें, जिन्हें वर्ष 2011-12 में निर्यातित किया गया हो। दंड आरेख बनाकर उन वस्तुओं घटा है, जबकि पेट्रोलियम तथा अपरिष्कृत उत्पादों एवं अन्य । के बीच विविधता को समझने हेतु तुलना करें। वस्तुओं में वृद्धि हुई है। अयस्क खनिजों तथा निर्मित सामानों का हिस्सा वर्ष 1997-98 से 2003-04 तक व्यापक तौर पर भारत के आयात-संघटन के बदलते प्रारूप लगातार स्थिर-सा रहा है। पेट्रोलियम उत्पादों के हिस्से में मारे वृद्धि का कारण पेट्रोलियम के मूल्यों में वृद्धि के साथ-साथ भारत ने 1950 एवं 1960 के दशक में खाद्यान्नों की गंभीर भारत में तेलशोधन क्षमता में वृद्धि भी ज़िम्मेदार है। कमी का अनुभव किया है। उस समय आयात की प्रमुख वस्तुएँ परंपरागत वस्तुओं के व्यापार में गिरावट का कारण मुख्यतः खाद्यान्न, पूँजीगत माल, मशीनरी एवं उपस्कर आदि थे। उस कड़ी अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा है। कृषि उत्पादों के अंतर्गत कॉफ़ी, समय भुगतान संतुलन बिल्कुल विपरीत था; चूँकि आयात 126 भारत : लोग और अर्थव्यवस्था Page 3 तालिका 11.3 : प्रमुख उपयोगी वस्तुओं का निर्यात मशीनरी परिवहन उपस्कर, धातुओं के विनिर्मितियाँ तथा रु. करोड़ में मशीनी औजार आदि पूँजीगत वस्तुओं की मुख्य मदें होती वस्तुएँ 2010-11 00 रु. में थीं। खाद्य तेलों के अयात में आई गिरावट के साथ खाद्य कृषि एवं समवर्गी उत्पाद 1,13,116 तथा समवर्गी उत्पादों के आयात में कमी आई है। भारत के अयस्क एवं खनिज 46,152 आयात में अन्य प्रमुख वस्तुओं में मोती तथा उपरत्नों, स्वर्ण विनिर्माणक सामान 7,77,424 एवं चाँदी, धातुमय अयस्क तथा धातु छीजन, अलौह धातुएँ खनिज ईंधन और लुब्रिकेंट्स 1,92,282 तथा इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ आदि आते हैं। वर्ष 2010-11 के स्रोत : आर्थिक सर्वेक्षण 2011-12 भारत की प्रमुख वस्तुओं के आयात के विवरण तालिका 11.5 में दिए गए हैं- प्रतिस्थापन के सभी प्रयासों के बावजूद आयात निर्यातों से अधिक थे। 1970 के दशक के बाद हरित क्रांति में सफलता मिलने पर खाद्यान्नों का आयात रोक दिया गया। लेकिन 1973 तालिका 11.5 के आँकड़ों के आधार पर कुछ में आए ऊर्जा संकट से पेट्रोलियम (पदार्थों) के मूल्य में उछाल क्रियाकलाप किए जा सकते हैं : आया फलतः आयात बजट भी बढ़ गया। खाद्यान्नों के आयात आरोही क्रम में अथवा अवरोही क्रम में सभी की जगह उर्वरकों एवं पेट्रोलियम ने ले ली। मशीन एवं वस्तुओं को क्रमबद्ध ढंग से व्यवस्थित करें और उपस्कर, विशेष स्टील, खाद्य तेल तथा रसायन मुख्य रूप से भारत के 2010-11 की आयात सूची की प्रमुख आयात व्यापार की रचना करते हैं। तालिका 11.4 में आयात के पाँच वस्तुओं का नाम लिखें। बदलते प्रारूप का परीक्षण करें तथा उसमें हुए परिवर्तन को समझने का प्रयास करें। भारत एक कृषि की दृष्टि से समृद्ध देश होते हुए तालिका 11.4 यह दर्शाती है कि पेट्रोलियम तथा इसके भी खाद्य तेलों एवं दालों का आयात क्यों करता है? उत्पादों के आयात में तीव्र वृद्धि हुई है। इसे न केवल ईंधन पाँच सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण वस्तुओं को तथा पाँच के रूप में प्रयुक्त किया जाता है बल्कि इसका प्रयोग उद्योगों सबसे कम महत्त्वपूर्ण वस्तुओं को चुनकर उन्हें में एक कच्चे माल के रूप में भी होता है। इससे बढ़ते हुए दंड-आरेख द्वारा दर्शाएँ।। औद्योगीकरण और बेहतर जीवन स्तर का संकेत मिलता है। क्या आप आयात सूची में कुछ ऐसे मदों को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भी इसकी कदाचनिक मूल्यवृद्धि भी । पहचान सकते हैं जिनके विकल्प भारत में विकसित एक अन्य कारण रही है। निर्याताभिमुख उद्योगों एवं घरेलू किए जा सकते हैं। क्षेत्र की बढ़ती हुई माँग के कारण पूँजीगत वस्तुओं के आयात में एक स्थिर वृद्धि होती रही है। गैर-वैद्युतिक तालिका 11.4: भारत का आयात संघटन, 2009-2011 (प्रतिशत में) 2009-10 2010-11 2.9 उपयोगी वस्तुएँ खाद्य तथा संबंधित वस्तुएँ ईंधन (कोयला, पी ओ एल) उर्वरक पेपर बोर्ड विनिर्मित और न्यूज प्रिंट पूंजीगत वस्तुएँ अन्य जिसमें रसायन । मोती, बहुमूल्य एवं अमूल्य रत्न सोना और चांदी स्रोत : आर्थिक सर्वेक्षण, 2011-12 3.7 33.2 2.3 0.5 15.0 (42.6) 5.2 (5.6) (10.3) 31.3 1.9 0.6 13.1 (47.7) 5.2 (9.4) (11.5) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार 127 Page 4 तालिका 11.5 : प्रमुख वस्तुओं का आयात (करोड़ रु. में) वस्तुएँ 2010-11 उर्वरक एवं उर्वरक विनिर्मितियाँ 31,533 खाद्य तेल। 29,860 लुगदा (लुगदी) तथा अपशिष्ट पेपर (कागज़) 5,208 पेपर बोर्ड (गत्ता) एवं विनिर्मितियाँ 9,614 अलौह धातुएँ । 2,12,153 लोहा और इस्पात 47,275 पेट्रोलियम अपरिष्कृत एवं उत्पाद 4,82,282 मोती, बहुमूल्य एवं अल्प मूल्य रत्न 15,75,596 चिकित्सीय एवं फार्मा उत्पाद 11,114 रासायनिक उत्पाद 13,278 | भारत को आयात-निर्यात व्यापार में विविधता की नीति के कारण सफलता मिली है। सन् 2000-01 में कुल व्यापार में एशिया और आसियान देशों का प्रतिशत 33.3 था जो 2011-12 के मध्य तक बढ़कर 57.3 प्रतिश्त हो गया। जबकि युरोप और अमेरिका क्रमशः 42.5 प्रतिशत और 30.8 प्रतिशत पर खिसक गए। इस नीति के कारण यूरोप और अमेरिका से शुरू होने वाले वैश्विक संकट में भी भारत को अपने आपको संभालने में मदद मिली है। भारत के व्यापार की दिशा में रोचक परिवर्तन हुआ है जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका जो 2003-04 में पहले स्थान पर था, सबसे बड़ा साझेदार था वह 2011-12 में खिसक कर तीसरे स्थान पर आ गया जबकि सन् 2008-09 से 2010-11 तक संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पहले स्थान पर तथा चीन दूसरे स्थान पर है। स्रोत : आर्थिक सर्वेक्षण 2011-12 व्यापार की दिशा भारत के व्यापारिक संबंध विश्व के अधिकांश देशों एवं प्रमुख प्रमुख व्यापारिक साझेदारों को प्रदर्शित करने के लिए एक बहुदंड व्यापारी गुटों के साथ हैं। वर्ष 2010-11 के दौरान क्षेत्रानुसार आरेख बनाएँ। एवं उपक्षेत्रानुसार व्यापार तालिका 11.6 में दिया गया है। भारत का अधिकतर विदेशी व्यापार समुद्री एवं वायु तालिका 1,6 : भारत के आयात व्यापार की दिशा मार्गों द्वारा संचालित होता है। हालाँकि, विदेशी व्यापार का (करोड रु. में) छोटा सा भाग सड़क मार्ग द्वारा नेपाल, भूटान, बांग्लादेश एवं प्रदेश पाकिस्तान जैसे पड़ोसी राज्यों में सड़क मार्ग द्वारा किया जाता है। 2010-11 तालिका 11.7: भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदार यूरोप 2,63,471 3,23,857 कुल व्यापार का प्रतिशत अंश (निर्यात आयात) (अ) यूरोपीय यूनियन देश (27) 1,81,937 2,02,779 agt 2003-04 देश 2010-11 अफ्रीका 97,871 1,18,612 उत्तरी अमेरिका यू.एस.ए. 10.3 यू. ए. ई. 10.81 1,39,480 1,00,602 3.7 चीन 10.16 लैटिन अमेरिका 48,942 64,576 बेल्जियम 3.7 यू. एस. ए. 7.35 एशिया एवं आसियान 8,29,224 10,29,881 जर्मनी 3.5 सऊदी अरब 4.13 स्रोत : वाणिज्य विभाग DCCI &S पर आधारित अंतरिम आंकड़े, जापान स्विटजरलैंड 4.10 आर्थिक सर्वेक्षण, 2011-2012 स्विटजरलैंड हांगकांग 3.18 हांगकांग 2.8 जर्मनी 3.00 भारत का उद्देश्य आगामी पाँच वर्षों के दौरान अंतर्राष्ट्रीय यू.ए.ई. 6.2 सिंगापुर 2.81 व्यापार में अपनी हिस्सेदारी को दुगुना करने का है। इसने इस इण्डोनेशिया 2.60 दिशा में, पहले से ही आयात उदारीकरण, आयात करों में कमी, सिंगापुर | 3.4 बेल्जियम 2.40 डि-लाइसेंसिंग (विअनुज्ञाकरण) तथा प्रक्रिया से उत्पाद के मलेशिया 1.7 कोरिया 2.35 एकस्व (पेटेंट) में बदलाव आदि अनुकूल उपाय अपनाने शुरू 47.7 कुल 52.89 कर दिए हैं। स्रोत : आर्थिक सर्वेक्षण, 2005-06 एवं 2011-12 यू.के. 7 N 0 ० र 128 भारत : लोग और अर्थव्यवस्था Page 5 समुद्री पत्तन-अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार के रूप में आई। यहाँ पर कुछ पत्तन ऐसे हैं जिनके पास विस्तृत प्रभाव भारत तीन ओर से समद से घिरा हुआ है और प्रकति ने हमें क्षेत्र हैं जबकि कुछ के पास सीमित प्रभाव क्षेत्र है। वर्तमान में, एक लंबी तटरेखा प्रदान की है। जल सस्ते परिवहन के लिए ल भारत में 12 प्रमुख और 185 छोटे या मझोले पत्तन हैं। प्रमुख एक सपाट तल प्रदान करता है। समुद्री यात्राओं की भारत में पत्तनों के संबंधों में केंद्र सरकार नीतियाँ बनाती है तथा नियामक क्रियाओं को निभाती हैं। छोटे पत्तनों के लिए राज्य सरकारें नीतियाँ बनाती है व नियामक क्रियाएँ निभाती हैं। प्रमुख पत्तन कुल यातायात के बड़े हिस्से का निपटान करती हैं। 2008-09 में 12 प्रमुख पत्तन देश के महासागरीय यातायात का 71 प्रतिशत भाग निपटाया। अंग्रेज़ों ने इन पत्तनों का उपयोग उनके पृष्ठप्रदेशों के संसाधनों के अवशोषण केंद्र के रूप में किया था। आंतरिक प्रदेशों में रेलवे के विस्तार ने स्थानीय बाज़ारों को क्षेत्रीय बाजारों और क्षेत्रीय बाजारों को राष्ट्रीय बाजारों तथा राष्ट्रीय बाज़ारों को अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की सुगमता प्रदान की। यह प्रवृत्ति 1947 तक बनी रही। यह अपेक्षा की गई थी कि देश की स्वतंत्रता इस प्रक्रम को उलट देगी, परंतु देश के विभाजन से भारत के दो अति महत्त्वपूर्ण पत्तन अलग हो गए। कराची पत्तन पाकिस्तान में चला गया और चिटगाँव पत्तन तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान और अब बांग्लादेश में चला गया। इस क्षतिपूर्ति के लिए अनेक नए पत्तनों को विकसित किया गया जैसे कि पश्चिम में कांडला तथा पूर्व में हुगली नदी पर कोलकाता के पास डायमंड हार्बर का विकास हुआ। इस बड़ी हानि के बावजूद, देश की स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से भारतीय पत्तन निरंतर वृद्धि कर रहे हैं। आज भारतीय चित्र 11.3 : पत्तन पर माल को उतारना पत्तन विशाल मात्रा में घरेलू के साथ-साथ विदेशी व्यापार का एक लंबी परंपरा रही है, यहाँ तक कि कई स्थानों के साथ निपटान कर रहे हैं। अधिकतर पत्तन आधुनिक अवसंरचना से उपनाम पत्तन जुड़ा हुआ है। भारत में समुद्री पत्तनों का एक लैस हैं। पहले पत्तनों के विकास एवं आधुनिकीकरण की रोचक तथ्य यह है कि इसके पूर्वी तट की अपेक्षा पश्चिमी तट जिम्मेदारी सरकारी अभिकरणों पर थी, लेकिन काम के बढ़ने पर अधिक पत्तन हैं। और इन पत्तनों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर के पत्तनों के समकक्ष बनाने की आवश्यकता ने भारत की पत्तनों के आधुनिकीकरण के लिए निजी उद्यमियों को आमंत्रित किया। क्या आप इन दोनों तटों पर पत्तनों की अवस्थिति आज भारतीय पत्तनों की नौभार निपटान की क्षमता 1951 की भिन्नता के कारणों का पता लगा सकते हैं। में 20 मिलियन टन से 2008-09 में 586 मिलियन टन से यद्यपि भारत में पत्तनों का उपयोग प्राचीन काल से हो अधिक बढ़ गई थी। अपने पृष्ठ प्रदेशों के साथ कुछ भारतीय रहा है तथापि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार के रूप में १ ना जाने पत्तन अग्रलिखित हैं- पत्तनों का उभरना यूरोपीय व्यापारियों का आगमन तथा अंग्रेज़ी कच्छ की खाड़ी के मुँहाने पर अवस्थित कांडला पत्तन को देश के पश्चिमी एवं उत्तर-पश्चिमी भाग की जरूरतों को द्वारा भारत के उपनिवेशीकरण के बाद महत्त्वपूर्ण बना। इसी । कारण देश में पत्तनों के आकार और गुणवत्ता में विविधता पूरा व पूरा करने और मुंबई पत्तन पर दबाव को घटाने के लिए एक प्रमुख पत्तन के रूप में विकसित किया गया है। इस पत्तन को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार 129 Page 6 चित्र 11.4 : भारत - मुख्य पत्तन एवं समुद्री मार्ग 130 भारत : लोग और अर्थव्यवस्था Page 7 विशेष रूप से भारी मात्रा में पेट्रोलियम, पेट्रोलियम उत्पादों एवं कोलकाता पत्तन हुगली नदी पर अवस्थित है जो उर्वरकों को ग्रहण करने के लिए बनाया गया है। वाडीनार में बंगाल की खाड़ी से 128 कि.मी. स्थल में अंदर स्थित है। एक अपतटीय टर्मिनल विकसित किया गया है ताकि कांडला मुंबई पत्तन की भाँति इसका विकास भी अंग्रेजों द्वारा किया गया पत्तन के दबाव को घटाया जा सके। था। कोलकाता को ब्रिटिश भारत की राजधानी होने के प्रारंभिक देश (hinterland)की सीमाओं का चिह्नांकन लाभ प्राप्त थे। इस पत्तन ने विशाखापट्नम, पाराद्वीप और मुश्किल होता है क्योंकि यह क्षेत्र पर सुस्थिर नहीं होता। उसकी अनुषंगी पत्तन हल्दिया जैसी अन्य पत्तनों की ओर अधिकतर मामलों में एक पत्तन का पृष्ठ प्रदेश दूसरे पत्तन के निर्यात के दिक्परिवर्तन के कारण अपनी सार्थकता काफ़ी हद पृष्ठप्रदेश का अतिव्यापन कर सकता है। तक खो दी है। | मुंबई एक प्राकृतिक पत्तन और देश का सबसे बड़ा कोलकाता पत्तन हुगली नदी द्वारा लाई गई गाद की पत्तन है। यह पत्तन मध्यपूर्व, भूमध्य सागरीय देशों, उत्तरी समस्या से भी जूझता रहा है जो कि उसे समुद्र से जुड़ने का अफ्रीका, उत्तर अमेरिका तथा यूरोप के देशों के सामान्य मार्ग मार्ग प्रदान करती है। इसके पृष्ठ प्रदेश के अंतर्गत उत्तर प्रदेश, के निकट स्थित है जहाँ से देश के विदेशी व्यापार का अधि बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और उत्तर-पूर्वी कांश भाग संचालित किया जाता है। यह पत्तन 20 कि.मी. राज्य आते हैं। इन सबके अतिरिक्त, यह पत्तन हमारे भूटान और लंबा तथा 6-10 कि.मी. चौड़ा है। जिसमें 54 गोदियाँ और देश नेपाल जैसे स्थलरुद्ध पड़ोसी देशों को भी सुविधाएँ उपलब्ध का विशालतम टर्मिनल हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर कराता है। प्रदेश व राजस्थान के भाग मुंबई पत्तन की पृष्ठभूमि की रचना हल्दिया पत्तन कोलकाता से 105 कि.मी. अंदर अनुप्रवाह करते हैं। (डाउनस्ट्रीम) पर स्थित है। इसका निर्माण कोलकाता पत्तन की जवाहरलाल नेहरू पत्तन को न्हावा-शेवा में मुंबई पत्तन संकुलता को घटाने के लिए किया गया है। यह स्थूल नौभार के दबाव को कम करने के लिए एक अनुषंगी पत्तन के रूप जैसे- लौह-अयस्क, कोयला, पेट्रोलियम तथा पेट्रोलियम में विकसित किया गया था। यह भारत का विशालतम कंटेनर उत्पाद, उर्वरक, जूट एवं जूट उत्पाद, कपास तथा सूती धागों पत्तन है। आदि का निपटान (handle) करता है। जुआरी नदमुख के मुँहाने पर अवस्थित मार्मागाओ पारादीप पत्तन कटक से 100 कि.मी. दूर महानदी पत्तन गोवा का एक प्राकृतिक बंदरगाह है। जापान को डेल्टा पर स्थित है। इसका पोताश्रय सबसे गहरा है जो भारी लौह-अयस्क के निर्यात का निपटान करने के लिए 1961 में पोतों के निपटान के लिए सर्वाधिक अनुकूल है। इसे मुख्य रूप हुए पुनर्प्रतिरूपण के बाद इसका महत्त्व बढ़ा। कोंकण रेलवे ने से बड़े पैमाने पर लौह-अयस्क के निर्यात के लिए निपटान इस पत्तन के पृष्ठ प्रदेश में महत्त्वपूर्ण विस्तार किया है। विकसित किया गया है। इस पत्तन के पष्ठ प्रदेश के अंतर्गत कर्नाटक, गोआ तथा दक्षिणी महाराष्ट्र इसकी पृष्ठभूमि की उडीसा, झारखंड और छत्तीसगढ़ आते हैं। रचना करते हैं। विशाखापट्नम आंध्र प्रदेश में एक भू-आबद्ध पत्तन है। न्यू मंगलौर पत्तन कर्नाटक में स्थित है और लौह-अयस्क । । जिसे ठोस चट्टान एवं बालू को काटकर एक नहर के द्वारा समुद्र और लौह-सांद्र के निर्यात की जरूरतों को पूरा करता है। यह से जोड़ा गया है। एक बाह्य पत्तन का विकास लौह-अयस्क, पत्तन भी उर्वरकों, पेट्रोलियम उत्पादों, खाद्य तेलों, कॉफ़ी, चाय, | पेट्रोलियम तथा सामान्य नौभार के निपटान हेतु विकसित किया लुगदी, सूत, ग्रेनाइट पत्थर, शीरा आदि का निपटान करता है। * गया है। इस पत्तन का प्रमुख पृष्ठ प्रदेश आंध्र प्रदेश तथा पृष्ठ कर्नाटक इस पत्तन का प्रमुख पृष्ठप्रदेश है। बेवानद कायाल, जिसे 'अरब सागर की रानी' (क्वीन तलगाना है। ऑफ अरेबियन सी) के लोकप्रिय नाम से जाना जाता है, के चेन्नई पत्तन-पूर्वी तट पर स्थित यह सबसे पुराने पत्तनों मॅहाने पर स्थित कोच्चि पत्तन भी एक प्राकृतिक पत्तन है। इस में से एक है। यह एक कृत्रिम पत्तन है जिसे 1859 में बनाया पत्तन को स्वेज कोलंबो मार्ग के पास अवस्थित होने का लाभ गया था। तट के निकट उथले जल के कारण यह पत्तन प्राप्त है। यह केरल, दक्षिणी कर्नाटक तथा दक्षिण-पश्चिमी विशाल पोतों के लिए अनुकूल नहीं है। तमिलनाडु और तमिलनाडु की आवश्यकताओं को पूरा करता है। पुदुच्चेरी इसके पृष्ठप्रदेश हैं। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार 131 Page 8 चित्र 11.5 : भारत - वायु मार्ग 132 भारत : लोग और अर्थव्यवस्था Page 9 तमिलनाडु में नई विकसित एन्नोर पत्तन चेन्नई के फरवरी 2013 तक देश में 19 अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे उत्तर में 25 कि.मी. दूर चेन्नई पत्तन के दबाव को कम करने कार्य कर रहे थे। अंतर्राष्ट्रीय हवाई पत्तनों के अंतर्गत अहमदाबाद, के लिए बनाई गई है। अमृतसर, बेंगलूरु, चेन्नई, दिल्ली, गोवा, गुवाहाटी, हैदराबाद, तूतीकोरिन पत्तन का विकास भी चेन्नई पत्तन के दबाव कोच्चि, कोलकाता, मुंबई, थिरुवनंथपुरम, श्रीनगर, जयपुर, को कम करने के लिए किया गया था। यह विभिन्न प्रकार के कालीकट, पोर्टब्लेयर तथा नागपुर तिरुचिरापल्ली तथा कोयम्बटूर नौभार का निपटान करता है जिसके अंतर्गत कोयला, नमक, आते हैं। खाद्यान्न, खाद्य तेल, चीनी, रसायन तथा पेट्रोलियम उत्पाद आप इससे पहले के अध्याय में वायु परिवहन के बारे शामिल हैं। में पढ़ चुके हैं। आप परिवहन पर अध्याय को देखें और भारत में वायु परिवहन की प्रमुख विशेषताओं को ज्ञात करें। हवाई अड्डे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में वायु परिवहन एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन्हें लंबी दूरी वाले उच्च मूल्य वाले या नाशवान अपने निवास स्थान से निकटतम घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय हवाई पत्तनों सामानों को कम से कम समय में ले जाने व निपटाने के लिए के नाम लिखें। सबसे अधिक घरेलू हवाई पत्तन वाले राज्य की पहचान लाभ प्राप्त होते हैं। यह भारी और स्थूल वस्तुओं के वहन करने भी करे। के लिए बहुत महँगा और अनुपयुक्त होता है। यही कारण उन चार नगरों की पहचान करें, जहाँ सबसे अधिक हवाई मार्ग अंततः अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में महासागरीय मार्गों की तुलना में इस अभिसारित होते हों और इसके कारण भी बताएँ। क्षेत्र की भागीदारी को घटा देता है। अभ्यास 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए। (i) दो देशों के मध्य व्यापार कहलाता है- (क) अंतर्देशीय व्यापार (ग) अंतर्राष्ट्रीय व्यापार (ख) बाह्य व्यापार (घ) स्थानीय व्यापार (ii) निम्नलिखित में से कौन-सा एक स्थलबद्ध पोताश्रय है? (क) विशाखापट्नम (ग) एन्नोर (ख) मुंबई (घ) हल्दिया (iii) भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार वहन होता है- (क) स्थल और समुद्र द्वारा (ख) स्थल और वायु द्वारा (ग) समुद्र और वायु द्वारा (घ) समुद्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार 133 Page 10 (iv) वर्ष 2010-11 में निम्नलिखित में से कौन-सा भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था? (क) यू.ए.ई. (ग) जर्मनी (ख) चीन (घ) स.रा. अमेरिका 2. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें। (i) भारत के विदेशी व्यापार की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। पत्तन और पोताश्रय में अंतर बताइए। (iii) पृष्ठप्रदेश के अर्थ को स्पष्ट कीजिए। (iv) उन महत्त्वपूर्ण मदों के नाम बताइए जिन्हें भारत विभिन्न देशों से आयात करता है? (v) भारत के पूर्वी तट पर स्थित पत्तनों के नाम बताइए। 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें। (i) भारत में निर्यात और आयात व्यापार के संयोजन का वर्णन कीजिए। (ii) भारत के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की बदलती प्रकृति पर एक टिप्पणी लिखिए। 134 भारत : लोग और अर्थव्यवस्था

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