lhgy204 Chapter-4 Page 1 अध्याय 4 मानव बस्तियाँ मानव बस्ती का अर्थ है किसी भी प्रकार और आकार के घरों का संकुल जिनमें मनुष्य रहते हैं। इस उद्देश्य के लिए लोग मकानों और अन्य इमारतों का निर्माण करते हैं और अपने आर्थिक पोषण-आधार के लिए कुछ क्षेत्र पर स्वामित्व रखते हैं। अतः बस्ती की प्रक्रिया में मूल रूप से लोगों के समूहन और उनके संसाधन आधार के रूप में क्षेत्र का आवंटन सम्मिलित होते हैं। बस्तियाँ आकार और प्रकार में भिन्न होती हैं। उनका परिसर एक पल्ली से लेकर महानगर तक होता है। आकार के साथ बस्तियों के आर्थिक अभिलक्षण और सामाजिक संरचना बदल जाती हैं और साथ ही बदल जाते हैं पारिस्थितिकी और प्रौद्योगिकी। बस्तियाँ छोटी और विरल रूप से लेकर बड़ी और संकुलित अवस्थित हो सकती हैं। विरल रूप से अवस्थित छोटी बस्तियाँ, जो कृषि अथवा अन्य प्राथमिक क्रियाकलापों में विशिष्टता प्राप्त कर लेती हैं, गाँव कहलाती हैं। दूसरी ओर कम, किंतु बड़े अधिवास द्वितीयक और तृतीयक क्रियाकलापों में विशेषीकृत होते हैं जो इन्हें नगरीय बस्तियाँ कहा जाता है। ग्रामीण और नगरीय बस्तियों में आधारभूत अंतर निम्नलिखित हैं- ग्रामीण बस्तियाँ अपने जीवन का पोषण अथवा आधारभूत आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति भूमि आधारित प्राथमिक आर्थिक क्रियाओं से करती हैं। जबकि नगरीय बस्तियाँ एक ओर कच्चे माल के प्रक्रमण और तैयार माल के विनिर्माण तथा दूसरी ओर विभिन्न प्रकार की सेवाओं पर निर्भर करती हैं। नगर आर्थिक वृद्धि के नोड (node) के रूप में कार्य करते हैं और न केवल नगर निवासियों को बल्कि अपने पश्च भूमि की ग्रामीण बस्तियों को भी भोजन और कच्चे माल के बदले वस्तुएँ और सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं। नगरीय और ग्रामीण बस्तियों के बीच प्रकार्यात्मक संबंध परिवहन और संचार परिपथ के माध्यम से स्थापित होता है। ग्रामीण और नगरीय बस्तियाँ सामाजिक संबंधों अभिवृत्ति और दृष्टिकोण की दृष्टि से भी भिन्न होती हैं। ग्रामीण लोग कम गतिशील होते हैं और इसलिए उनमें सामाजिक संबंध घनिष्ठ होते हैं। दूसरी ओर नगरीय क्षेत्रों में जीवन का ढंग जटिल और तीव्र होता है और सामाजिक संबंध औपचारिक होते हैं। Page 2 ग्रामीण बस्तियों के प्रकार के बुंदेलखंड प्रदेश और नागालैंड में। राजस्थान में जल के अभाव में उपलब्ध जल संसाधनों के अधिकतम उपयोग ने बस्तियों के प्रकार निर्मित क्षेत्र के विस्तार और अंतर्वास दूरी द्वारा संहत बस्तियों को अनिवार्य बना दिया है। निर्धारित होता है। भारत में कुछ सौ घरों से युक्त संहत अथवा गच्छित गाँव विशेष रूप से उत्तरी मैदानों में एक सार्वत्रिक अर्ध-गुच्छित बस्तियाँ (Semi-clusteredSettlements) लक्षण है। फिर भी अनेक क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ अन्य प्रकार की । अर्ध-गुच्छित अथवा विखंडित बस्तियाँ परिक्षिप्त बस्ती के ग्रामीण बस्तियाँ पाई जाती हैं। ग्रामीण बस्तियों के विभिन्न । किसी सीमित क्षेत्र में गुच्छित होने की प्रवृत्ति का परिणाम है। प्रकारों के लिए अनेक कारक और दशाएँ उत्तरदायी हैं। इनके । अधिकतर ऐसा प्रारूप किसी बड़े संहत गाँव के संपृथकन अंतर्गत- (i) भौतिक लक्षण - भू-भाग की प्रकृति, ऊँचाई, अथवा विखंडन के परिणामस्वरूप भी उत्पन्न हो सकता है। जलवायु और जल की उपलब्धता, (ii) सांस्कृतिक और । ऐसी स्थिति में ग्रामीण समाज के एक अथवा अधिक वर्ग मानवजातीय कारक - सामाजिक संरचना, जाति और धर्म, '' स्वेच्छा से अथवा बलपूर्वक मुख्य गुच्छ अथवा गाँव से थोड़ी (iii) सुरक्षा संबंधी कारक - चोरियों और डकैतियों से सुरक्षा । । दूरी पर रहने लगते हैं। ऐसी स्थितियों में, आमतौर पर ज़मींदार करते हैं। बृहत् तौर पर भारत की ग्रामीण बस्तियों को चार । | और अन्य प्रमुख समुदाय मुख्य गाँव के केंद्रीय भाग पर प्रकारों में रखा जा सकता है - • गुच्छित, संकुलित अथवा आकेंद्रित • अर्ध-गुच्छित अथवा विखंडित • पल्लीकृत और • परिक्षिप्त अथवा एकाकी गुच्छित बस्तियाँ (Clustered Settlements) गुच्छित ग्रामीण बस्ती घरों का एक संहत अथवा संकुलित रूप से निर्मित क्षेत्र होता है। इस प्रकार के गाँव में रहन-सहन का सामान्य क्षेत्र स्पष्ट और चारों ओर फैले खेतों, खलिहानों और चरागाहों से पृथक होता है। संकुलित निर्मित क्षेत्र और इसकी मध्यवर्ती गलियाँ कुछ जाने-पहचाने प्रारूप अथवा ज्यामितीय चित्र 4.2 : अर्ध-गुच्छित बस्तियाँ । आकृतियाँ प्रस्तुत करते हैं जैसे कि आयताकार, अरीय, रैखिक इत्यादि। ऐसी बस्तियाँ प्रायः उपजाऊ जलोढ मैदानों और आधिपत्य कर लेते हैं जबकि समाज के निचले तबके के लोग उत्तर-पूर्वी राज्यों में पाई जाती है। कई बार लोग सुरक्षा अथवा उत्तर-प राज्यों में पाई जाती है। कई बार लोग सवा अथवा और निम्न कार्यों में संलग्न लोग गाँव के बाहरी हिस्सों में बसते प्रतिरक्षा कारणों से संहत गाँवों में रहते हैं, जैसे कि मध्य भारत हैं। ऐसी बस्तियाँ गुजरात के मैदान और राजस्थान के कुछ भागों में व्यापक रूप से पाई जाती हैं। पल्ली बस्तियाँ (Hamleted Settlements) कई बार बस्ती भौतिक रूप से एक-दूसरे से पृथक अनेक इकाइयों में बँट जाती है किंतु उन सबका नाम एक रहता है। इन इकाइयों को देश के विभिन्न भागों में स्थानीय स्तर पर पान्ना, पाड़ा, पाली, नगला, ढाँणी इत्यादि कहा जाता है। किसी विशाल गाँव का ऐसा खंडीभवन प्रायः सामाजिक एवं मानवजातीय कारकों द्वारा अभिप्रेरित होता है। ऐसे गाँव मध्य और निम्न गंगा के मैदान, छत्तीसगढ़ और हिमालय की निचली घाटियों में चित्र 4.1 : उत्तर-पूर्वी राज्यों में गुच्छित बस्तियाँ बहुतायत में पाए जाते हैं। मानव बस्तियाँ 33 Page 3 परिक्षिप्त बस्तियाँ (Dispersed Settlements) यूरोपियों के भारत आने तक आवधिक उतार-चढ़ावों से भरा भारत में परिक्षिप्त अथवा एकाकी बस्ती प्रारूप सुदूर जंगलों में । २ रहा। विभिन्न युगों में उनके विकास के आधार पर भारतीय नगरों को इस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है- एकाकी झोंपड़ियों अथवा कुछ झोंपड़ियों की पल्ली अथवा " • प्राचीन नगर, • मध्यकालीन नगर, और • आधुनिक नगर। छोटी पहाड़ियों की ढालों पर खेतों अथवा चरागाहों के रूप में दिखाई पड़ता है। बस्ती का चरम विक्षेपण प्रायः भू-भाग और। प्राचीन नगर भारत में 2000 से अधिक वर्षों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वाले अनेक नगर हैं। इनमें से अधिकांश का विकास धार्मिक अथवा सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में हुआ है। वाराणसी इनमें से सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण नगर हैं। प्रयाग (इलाहाबाद), पाटलिपुत्र (पटना), मदुरई देश में प्राचीन नगरों के कुछ अन्य उदाहरण हैं। मध्यकालीन नगर वर्तमान के लगभग 100 नगरों का इतिहास मध्यकाल से जुड़ा चित्र 4.3 : नागालैंड में परिक्षिप्त बस्तियाँ है। इनमें से अधिकांश का विकास रजवाड़ों और राज्यों के मुख्यालयों के रूप में हुआ। ये किला नगर हैं जिनका निर्माण निवास योग्य क्षेत्रों के भूमि संसाधन आधार की अत्यधिक प्राचीन नगरों के खंडहरों पर हुआ है। ऐसे नगरों में दिल्ली विखंडित प्रकृति के कारण होता है। मेघालय, उत्तरांचल, हैदराबाद, जयपर, लखनऊ, आगरा और नागपर महत्त्वपर्ण हैं। हिमाचल प्रदेश और केरल के अनेक भागों में बस्ती का यह प्रकार पाया जाता है। आधुनिक नगर नगरीय बस्तियाँ अंग्रेज़ों और अन्य यूरोपियों ने भारत में अनेक नगरों का विकास ग्रामीण बस्तियों के विपरीत नगरीय बस्तियाँ सामान्यतः संहत किया। तटीय स्थानों पर अपने पैर जमाते हुए उन्होंने सर्वप्रथम और विशाल आकार की होती हैं। ये बस्तियाँ अनेक प्रकार के सूरत, दमन, गोआ, पाडिचेरी इत्यादि जैसे व्यापारिक पत्तन अकृषि, आर्थिक और प्रशासकीय प्रकार्यों में संलग्न होती हैं। जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है नगर अपने चारों ओर के क्षेत्रों से प्रकार्यात्मक रूप में जुड़ा हुआ होता है। अतः वस्तुओं और सेवाओं का विनिमय कई बार प्रत्यक्ष रूप से और कई बार मंडी शहरों और नगरों की श्रृंखला के माध्यम से संपन्न होता है। इस प्रकार नगर गाँवों से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार से जुड़े होते हैं और वे परस्पर भी जुड़े हुए होते हैं। आप ‘मानव भूगोल के मूलभूत सिद्धांत' नामक पुस्तक के अध्याय 10 में नगरों की परिभाषा देख सकते हैं। भारत में नगरों का विकास भारत में नगरों का अभ्युदय प्रागैतिहासिक काल से हुआ है। चित्र 4.4 : आधुनिक शहर का एक दृश्य यहाँ तक कि सिंधु घाटी सभ्यता के युग में भी हड़प्पा और विकसित किए। अंग्रेजों ने बाद में तीन मुख्य नोडों मुंबई मोहनजोदड़ो जैसे नगर अस्तित्व में थे। इसके बाद का समय (बंबई), चेन्नई (मद्रास) और कोलकाता (कलकत्ता) पर नगरों के विकास का साक्षी है। यह समय 18वीं शताब्दी में अपनी पकड़ मज़बूत की और उनका अंग्रेज़ी शैली में निर्माण 34 भारत : लोग और अर्थव्यवस्था Page 4 चित्र 4.5 : भारत - महानगरीय शहर, 2001 मानव बस्तियाँ 35 Page 5 auf तालिका 4.1 : भारत - नगरीकरण की प्रवृत्तियाँ 1901-2001 नगरों/नगरीय नगरीय जनसंख्या कुल नगरीय संकुलों की संख्या (हज़ारों में ) जनसंख्या का % दशकीय वृद्धि ( % ) - 1901 1,827 25,851.9 10.84 1911 1,815 25,941.6 10.29 1921 1,949 28,086.2 11.18 1931 2,072 33,456.0 11.99 1941 2,250 44,153.3 13.86 1951 2,843 62,443.7 17.29 1961 2,365 78,936.6 17.97 1971 2,590 1,09,114 19.91 1981 3,378 1,59,463 23.34 1991 4,689 2,17,611 25.71 2001 5,161 2,85,355 27.78 2011* 7,935 3,77,000 31.16 स्रोतः भारत की जनगणना, 2011, http.//LDub.censusindia.gov.in (अंतरिम) 0.35 8.27 19.12 31.97 41.42 26.41 38.23 46.14 36.47 31.13 31.08 किया। अपनी प्रभाविता को प्रत्यक्ष रूप से अथवा रजवाड़ों पर जनसंख्या आकार के आधार पर नगरों का वर्गीकरण नियंत्रण के माध्यम से तेजी से बढ़ाते हुए उन्होंने प्रशासनिक भारत की जनगणना नगरों को छ: वर्गों में वर्गीकृत करती है जैसा केंद्रों, ग्रीष्मकालीन विश्राम स्थलों के रूप में पर्वतीय नगरों को । कि तालिका 4.2 में प्रदर्शित किया गया है। एक लाख से अधिक स्थापित किया और उनमें सिविल, प्रशासनिक और सैन्य क्षेत्रों नगरीय जनसंख्या वाले नगरीय केंद्र को नगर अथवा प्रथम वर्ग को जोड़ा। 1850 के बाद आधुनिक उद्योगों पर आधारित नगरों का नगर कहा जाता है। 10 लाख से 50 लाख की जनसंख्या वाले का भी जन्म हुआ। जमशेदपुर इसका एक उदाहरण है। नगरों को महानगर तथा 50 लाख से अधिक जनसंख्या वाले नगरों स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात्, अनेक नगर प्रशासनिक । को मेगा नगर कहा जाता है। बहुसंख्यक महानगर और मेगा नगर केंद्रों, जैसे- चंडीगढ़, भुवनेश्वर, गांधीनगर, दिसपुर इत्यादि । नगरीय संकुल हैं। एक नगरीय संकुल में निम्नलिखित तीन और औद्योगिक केंद्रों जैसे दुर्गापुर, भिलाई, सिंदरी, बरौनी के । संयोजकों में से किसी एक का समावेश होता है- (क) एक रूप में विकसित हुए। कुछ पुराने नगर महानगरों के चारों ओर नगर व उसका संलग्न नगरीय बहिर्बद्ध, (ख) बहिर्बद्ध अनुषंगी नगरों के रूप में विकसित हुए जैसे दिल्ली के चारों ओर गाजियाबाट शेतक और गडगाँव इत्यादि ग्रामीण क्षेत्रों में चित्र 4.6 : भारत नगरीय केन्द्रों के आकार वर्ग के अनुसार नगरीय जनसंख्या वितरण (%)-2001 बढ़ते निवेश के साथ पूरे देश में बड़ी संख्या में मध्यम और छोटे नगरों का विकास हुआ है। भारत में नगरीकरण नगरीकरण के स्तर का माप कुल जनसंख्या में नगरीय जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में किया जाता है। वर्ष 2001 में भारत में नगरीकरण का स्तर 28 प्रतिशत था जो विकसित देशों की तुलना में काफ़ी कम है। 20वीं शताब्दी के दौरान नगरीय जनसंख्या 11 गुना बढ़ी है। नगरीय केंद्रों के विवर्धन और नए नगरों के आविर्भाव ने देश में नगरीय जनसंख्या की वृद्धि और नगरीकरण में सार्थक भूमिका निभाई है (तालिका 4.1)। किंतु नगरीकरण की वृद्धि दर पिछले दो दशकों में धीमी हुई है। 36 भारत : लोग और अर्थव्यवस्था Page 6 तालिका 4.2 : भारत - वर्गानुसार शहरों और नगरों की संख्या एवं उनकी जनसंख्या, 2001 auf जनसंख्या आकार संख्या जनसंख्या (दस लाख ) नगरीय जनसंख्या का % प्रतिशत वृद्धि ( 1991- 2001) सभी वर्गों का योग ८ २६E EE 1,00,000 और अधिक 50,000 - 99,999 20,000 - 49,999 10,000 - 19,999 5,000 - 9,999 5,000 से कम 5161 423 498 1386 1560 1057 227 285.35 172.04 34.43 41.97 22.6 7.98 0.8 100 61.48 12.3 15.0 8.08 31.13 23.12 43.45 46.19 32.94 41.49 21.21 2.85 0.29 (outgrowth) के सहित अथवा रहित दो अथवा अधिक औद्योगिक नगर संस्पर्शी नगर, और (ग) एक अथवा अधिक संलग्न नगरों के मुंबई, सेलम, कोयंबटूर, मोदीनगर, जमशेदपुर, हुगली, भिलाई बहिर्बद्ध से युक्त एक संस्पर्शी प्रसार नगर का निर्माण। नगरीय इत्यादि के विकास का प्रमुख अभिप्रेरक बल उद्योगों का बहिर्बद्ध के उदाहरण गाँव अथवा शहर या नगर से संलग्न गाँव विकास रहा है। की राजस्व सीमा में अवस्थित रेलवे कॉलोनियाँ, विश्वविद्यालय परिसर, पत्तन क्षेत्र सैनिक छावनी इत्यादि हैं। परिवहन नगर तालिका 4.2 से स्पष्ट है कि भारत की 60 प्रतिशत नगरीय ये पत्तन नगर जो मुख्यतः आयात और निर्यात कार्यों में संलग्न जनसंख्या प्रथम वर्ग के नगरों में रहती हैं। इन 423 नगरों में से रहते हैं, जैसे- कांडला, कोच्चि, कोझीकोड, विशाखापट्नम, 35 नगर/नगरीय संकुल महानगर हैं (चित्र 4.3)। इनमें से छः इत्यादि अथवा आंतरिक परिवहन की धुरियाँ जैसे धूलिया. मेगा नगर हैं जिनमें से प्रत्येक की जनसंख्या 50 लाख से अधिक मुगलसराय, इटारसी, कटनी इत्यादि हो सकते हैं। है। पाँचवें भाग से अधिक (21.0%) नगरीय जनसंख्या इन मेगानगरों में रहती है। इनमें से 1 करोड़ 64 लाख लोगों के साथ वाणिज्यिक नगर बृहन मुंबई सबसे बड़ा नगरीय संकुल है; कोलकाता, दिल्ली, व्यापार और वाणिज्य में विशिष्टता प्राप्त शहरों और नगरों को चेन्नई, बँगलौर और हैदराबाद देश के अन्य मेगा नगर हैं। इस वर्ग में रखा जाता है। कोलकाता, सहारनपुर, सतना इत्यादि नगरों का प्रकार्यात्मक वर्गीकरण कुछ उदाहरण हैं। अपनी केंद्रीय अथवा नोडीय स्थान की भूमिका के अतिरिक्त खनन नगर अनेक शहर और नगर विशेषीकत सेवाओं का निष्पादन करते। हैं। कुछ शहरों और नगरों को कुछ निश्चित प्रकार्यों में । ये नगर खनिज समृद्ध क्षेत्रों में विकसित हुए हैं जैसे रानीगंज, विशिष्टता प्राप्त होती हैं और उन्हें कुछ विशिष्ट क्रियाओं, झा । झरिया, डिगबोई, अंकलेश्वर, सिंगरौली इत्यादि। उत्पादनों अथवा सेवाओं के लिए जाना जाता है। फिर भी गैरिसन (छावनी) नगर है । प्रत्येक शहर अनेक प्रकार्य करता है। प्रमुख अथवा विशेषीकृत प्रकार्यों के आधार पर भारतीय नगरों को मोटे तौर पर निम्नलिखित इन नगरों का उदय गैरिसन नगरों के रूप में हुआ है, जैसे प्रकार से वर्गीकृत किया जाता है - अंबाला, जालंधर, महू, बबीना, उधमपुर इत्यादि। प्रशासन शहर और नगर धार्मिक और सांस्कृतिक नगर उच्चतर क्रम के प्रशासनिक मुख्यालयों वाले शहरों को प्रशासन वाराणसी, मथुरा, अमृतसर, मदुरै, पुरी, अजमेर, पुष्कर, तिरुपति, नगर कहते हैं, जैसे कि चंडीगढ़, नई दिल्ली, भोपाल, शिलांग, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार, उज्जैन अपने धार्मिक/सांस्कृतिक महत्त्व के गुवाहाटी, इंफाल, श्रीनगर, गांधी नगर, जयुपर, चेन्नई इत्यादि। कारण प्रसिद्ध हुए। मानव बस्तियाँ 37 Page 7 तालिका 4.3 : भारत - दस लाख नगरों/नगरीय संकुलों की जनसंख्या, 2001 chife colfe नगरीय संकुल/ नगरों का नाम जनसंख्या (दस लाख में) नगरीय संकुल/ नगरों का नाम जनसंख्या (दस लाख में) 19. = बृहन मुंबई कोलकाता दिल्ली चेन्नई बँगलौर हैदराबाद अहमदाबाद 16.37 13.22 12.79 6.42 5.69 5.53 4.52 3.76 2.81 1.39 1.36 1.33 1.32 1.21 1.19 N 1.17 ॐ gut ॐ लुधियाना कोच्चि विशाखापट्नम आगरा। वाराणसी मदुरई 78 नासिक जबलपुर जमशेदपुर आसनसोल धनबाद फरीदाबाद इलाहाबाद अमृतसर विजयवाड़ा राजकोट chool 1.15 1.12 1.10 1.09 1.06 2.69 ॐ = 2.32 ० ० 1.05 १ कानपुर जयपुर no89 नागपुर 4251 इंदौर वडोदरा भोपाल कोयंबटूर 2.27 2.12 1.71 1.64 1.49 1.45 ० 1.05 1.01 1.01 1.00 107.88 ० N ॐ 1.45 भारत की जनगणना, 2011 के लिए परिशिष्ट पृ० सं०-161 देखें पर्यटन नगर नगरीय संकुलों/नगरों की राज्यानुसार सूची बनाये नैनीताल, मसूरी, शिमला, पचमढ़ी, जोधपुर, जैसलमेर, उडगमंडलम और नगरों के इस वर्ग के अंतर्गत राज्यानुसार जनसंख्या (ऊटी), माउंट आबू कुछ पर्यटन गंतव्य स्थान हैं। नगर अपने को देखें। प्रकार्यों में स्थिर नहीं है उनके गतिशील स्वभाव के कारण प्रकार्यों में परिवर्तन हो जाता है। शैक्षिक नगर विशेषीकृत नगर भी महानगर बनने पर बहुप्रकार्यात्मक बन मुख्य परिसर नगरों में से कुछ नगर शिक्षा केंद्रों के रूप में जाते हैं जिनमें उद्योग व्यवसाय, प्रशासन, परिवहन इत्यादि विकसित हुए जैसे रुड़की, वाराणसी, अलीगढ़, पिलानी, महत्त्वपूर्ण हो जाते हैं। प्रकार्य इतने अंतर्ग्रथित हो जाते हैं कि नगर इलाहाबाद। को किसी विशेष प्रकार्य वर्ग में वर्गीकृत नहीं किया जा सकता। 38 भारत : लोग और अर्थव्यवस्था Page 8 अभ्यास YEN 1. नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए। (i) निम्नलिखित में से कौन-सा नगर नदी तट पर अवस्थित नहीं है? (क) आगरा (ग) पटना (ख) भोपाल (घ) कोलकाता (ii) भारत की जनगणना के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सी एक विशेषता नगर की परिभाषा का अंग नहीं है? (क) जनसंख्या घनत्व 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी. (ख) नगरपालिका, निगम का होना (ग) 75% से अधिक जनसंख्या का प्राथमिक खंड में संलग्न होना (घ) जनसंख्या आकार 5000 व्यक्तियों से अधिक (iii) निम्नलिखित में से किस पर्यावरण में परिक्षिप्त ग्रामीण बस्तियों की अपेक्षा नहीं की जा सकती? (क) गंगा का जलोढ़ मैदान (ग) हिमालय की निचली घाटियाँ (ख) राजस्थान के शुष्क और अर्ध-शुष्क प्रदेश (घ) उत्तर-पूर्व के वन और पहाड़ियाँ (iv) निम्नलिखित में से नगरों का कौन-सा का वर्ग अपने पदानुक्रम के अनुसार क्रमबद्ध है? (क) बृहन मुंबई, बंगलौर, कोलकाता, चेन्नई (ग) कोलकाता, बृहन मुंबई, चेन्नई, कोलकाता (ख) दिल्ली, बृहन मुंबई, चेन्नई, कोलकाता (घ) बृहन मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई 2. निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें। (i) गैरिसन नगर क्या होते हैं? उनका क्या प्रकार्य होता है? (ii) किसी नगरीय संकुल की पहचान किस प्रकार की जा सकती है? (iii) मरुस्थली प्रदेशों में गाँवों के अवस्थिति के कौन-से मुख्य कारक होते हैं। (iv) महानगर क्या होते हैं? ये नगरीय संकुलों से किस प्रकार भिन्न होते हैं? 3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें। (i) विभिन्न प्रकार की ग्रामीण बस्तियों के लक्षणों की विवेचना कीजिए। विभिन्न भौतिक पर्यावरणों में बस्तियों के प्रारूपों के लिए उत्तरदायी कारक कौन-से हैं? (ii) क्या एक प्रकार्य वाले नगर की कल्पना की जा सकती है? नगर बहुप्रकार्यात्मक क्यों हो जाते हैं? मानव बस्तियाँ 39

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