अध्याय 2 प्रवास प्रकार, कारण और परिणाम छत्तीसगढ़ के भ्िालाइर् इस्पात संयंत्रा में एक अभ्िायंता के रूप में कायर् कर रहे रामबाबू का जन्म बिहार के भोजपुर िाले के एक छोटे से गाँव में हुआ था। 12 वषर् की आरंभ्िाक आयु में माध्यमिक स्तर का अध्ययन पूरा करने के लिए वह निकटवतीर् कस्बे आरा में चला गया। वह अपनी अभ्िायांत्रिाकी की डिग्री के लिए झारखंड में स्िथत ¯सदरी गया और बाद में भ्िालाइर् में उसे नौकरी मिल गइर्, जहाँ वह पिछले 31 वषो± से रह रहा है। उसके माता - पिता अश्िाक्ष्िात थे और उनकी आजीविका का एकमात्रा स्रोत वृफष्िा से होने वाली अल्प आय थी। उन्होंने अपना सारा जीवन उस गाँव में गुजार दिया। रामबाबू के तीन बच्चे हैं जिन्होंने अपनी माध्यमिक स्तर की श्िाक्षा भ्िालाइर् में प्राप्त की और पिफर उच्चतर श्िाक्षा के लिए विभ्िान्न स्थानों पर गए। पहला बच्चा इलाहाबाद और मुंबइर् में पढ़ा और वतर्मान में दिल्ली में एक वैज्ञानिक के रूप में काम कर रहा है। दूसरे बच्चे ;लड़कीद्ध ने अपनी उच्चतर श्िाक्षा भारत के विभ्िान्न विश्वविद्यालयों से ग्रहण की और वतर्मान में वह संयुक्त राज्य अमेरिका में काम कर रही है। तीसरी, अपनी पढ़ाइर् पूरी कर शादी के बाद सूरत में बस गइर्। यह कहानी केवल रामबाबू और उसके बच्चों की नहींहै, ऐसे गमनागमन अिाक से अिाक वैश्िवक प्रवृिा वाले बनते जा रहे हैं। लोग एक गाँव से दूसरे गाँव, गाँवों से शहरों, छोटे शहरों से बड़े शहरों और एक देश से दूसरे देश में जा रहे हैं। अपनी पुस्तक ‘मानव भूगोल के मूलभूत सि(ांत’ में आप प्रवास की संकल्पना और परिभाषा को पहले ही समझ चुके हैं। प्रवास दिव्फ और काल के संदभर् में जनसंख्या केपुनविर्तरण का अभ्िान्न अंग और एक महत्त्वपूणर् कारक हैं। भारत देश में मध्य और पश्िचमी एश्िाया तथा दक्ष्िाण - पूवीर् एश्िाया से आने वाले प्रवासियों की तरंगों का साक्षी रहा है। वास्तव में भारत का इतिहास देश के विभ्िान्न भागों में प्रवासियों की तरंगों के एक के बाद एक आ - आकर बसने का इतिहास है। एक नामी कवि प्ि़ाफराक गोरखपुरी के शब्दों में: फ्सर शमीन - ए - हिन्द पर अक्वाम - ए - आलम के प्िाफराक़कारवाँ बसते गए, हिन्दोस्तान बनता गयाय् ;विश्व के सभी भागों से लोगों के कारवाँ भारत में आते रहे और बसते रहे और इसी से भारत की विरचना हुइर्।द्ध इसी प्रकार, भारत से भी बहुत बड़ी संख्या में लोग बेहतर अवसरों की तलाश में विभ्िान्न स्थानों विशेष रूप से मध्य पूवर् और पश्िचमी यूरोप के देशों अमेरिका, आस्ट्रेलिया और पूवीर् और दक्ष्िाण - पूवीर् एश्िाया में प्रवास करते रहे। भारतीय प्रसार ;प्दकपंद क्पंेचवतंद्ध उपनिवेश काल ;बि्रटिश कालद्ध के दौरान अंग्रेशों द्वाराउत्तर प्रदेश और बिहार से माॅरीशस, वैफरेबियन द्वीपों ;टिªनीडाड, टोबैगो और गुयानाद्ध पिफजी और दक्ष्िाण अप्रफीकाऋ प्रफांसीसियों और जमर्नों द्वारा रियूनियन द्वीप, गुआडेलोप, माटीर्नीक और सूरीनाम में, प्रफांसीसी तथा डच लोगों और पुतर्गालियों द्वारा गोवा, दमन और दीव से, अंगोला, मोजांबिक व अन्य देशों में करारब( लाखों श्रमिकों को रोपण वृफष्िा में काम करने के लिए भेजा था। ऐसे सभी प्रवास ;भारतीय उत्प्रवास अिानियमद्ध गिरमिट एक्ट नामक समयब( अनुबंध के तहत आते थे। पिफर भी, इन करारब( मशदूरों के जीवन की दशाएँ दासों से बेहतर नहीं थीं। प्रवासियों की दूसरी तरंग ने नूतन समय में व्यवसायियों, श्िाल्िपयों, व्यापारियों और पैफक्टरी मशदूरों के रूप में आथ्िार्क अवसरों की तलाश में निकटवतीर् देशों थाइलैंड, मलेश्िाया, सिंगापुर, इंडोनेश्िाया, ब्रूनइर्,इत्यादि देशों में व्यवसाय के लिए गए और यह प्रवृिा अब भी जारी है। 1970 के दशक में पश्िचम एश्िाया में हुइर् सहसा तेल वृि द्वारा जनित श्रमिकों की माँग के कारण भारत से अधर् - वुफशल और वुफशल श्रमिकों का नियमित बाह्य प्रवास हुआ। वुफछ बाह्य प्रवास उद्यमियों, भंडार मालिकों, व्यवसायियों का भी पश्िचमी देशों में प्रवास हुआ। प्रवासियों की तीसरी तरंग में डाॅक्टरों, अभ्िायंताओं;1960 के बादद्ध साॅफ्रटवेयर अभ्िायंताओं, प्रबंधनपरामशर्दाताओं, वित्तीय विशेषज्ञों, संचार माध्यम से जुड़े व्यक्ितयों और ;1980 के बादद्ध अन्य समाविष्ट थे, जिन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड विंफगडम, आस्ट्रेलिया, न्यूशीलैंड और जमर्नी इत्यादि में प्रवास किया। इन व्यवसायियों ने सवार्िाक श्िाक्ष्िात, उच्चतम अजर्न करने वाले और सपफलतम समूहों में से एक होने की विश्िाष्टता का आनंद लिया। उदारीकरण के पश्चात 90 के दशक में श्िाक्षा और ज्ञान आधारित भारतीय उत्प्रवासियों ने भारतीय प्रसार को विश्व के सवार्िाक शक्ितशाली प्रसार में से एक बना दिया। इन सभी देशों में भारतीय प्रसार अपने - अपनेदेशों के विकास में महत्त्वपूणर् भूमिका निभा रहे हैं। 16 भारत: लोग और अथर्व्यवस्था प्रवास आप भारत में जनगणना से पहले ही परिचित हैं। इसमें देश में प्रवास के संबंध में सूचना होती है। वास्तव में प्रवास को 1881 इर्. में भारत की प्रथम संचालित जनगणना से ही दजर् करना आरंभ कर दिया गया था। इन आँकड़ों को जन्म के स्थान के आधार पर दजर् किया गया था। परंतु 1961 की जनगणना में पहला मुख्य संशोधन किया गया था और उसमें दो घटक अथार्त् जन्म स्थान अथार्त् गाँव या नगर और ;यदि अन्यत्रा जन्मा हैद्ध तो निवास की अविा सम्िमलित किए गए। इसके बाद 1971 में पिछले निवास के स्थान और गणना के स्थान पर रुकने की अविा की अतिरिक्त सूचना को समाविष्ट किया गया। प्रवास के कारणों पर सूचना का समावेश 1981 की जनगणना में किया गया जिसका व्रफमिक जनगणनाओं में संशोधन किया गया। जनगणना में प्रवास पर निम्नलिख्िात प्रश्न पूछे जाते हैं: ऽ क्या व्यक्ित इसी गाँव अथवा शहर में पैदा हुआ है? यदि नहीं, तब जन्म के स्थान की ;ग्रामीण/नगरीयद्ध स्िथति, िाले और राज्य का नाम और यदि भारत से बाहर का है तो जन्म के देश के नाम की सूचना प्राप्त की जाती है। ऽ क्या व्यक्ित इस गाँव या शहर में कहीं और से आया है? यदि हाँ, तब निवास के पूवर् स्थान के स्तर ;ग्रामीण/नगरीयद्ध िाले और राज्य का नाम और यदि भारत से बाहर का है तो देश के नाम के बारे में आगे प्रश्न पूछे जाते हैं। इनके अतिरिक्त पिछले निवास स्थान से प्रवास के कारण और गणना के स्थान पर निवास की अविा भी पूछी जाती है। भारत की जनगणना में प्रवास की गणना दो आधारों पर की जाती है: ;पद्ध जन्म का स्थान, यदि जन्म का स्थान गणना के स्थान से भ्िान्न है ;इसे जीवनपय±त प्रवासी के नाम से जाना जाता हैद्धऋ ;पपद्ध निवास का स्थान, यदि निवास का पिछला स्थान गणना के स्थान से भ्िान्न है ;इसे निवास के पिछले स्थान से प्रवासी के रूप में जाना जाता हैद्ध। क्या आप भारत की जनगणना में प्रवासियों के अनुपात की कल्पना कर सकते हैं? 2001 की जनगणना के अनुसार देश के 102.9 करोड़ लोगों में से 30.7 करोड़ ;30 प्रतिशतद्ध की रिपोटर् प्रवासियों के रूप में की गइर् थी जो अपने जन्म के स्थान से अलग रह रहे थे। यद्यपि निवास के ;पिछले स्थान के संदभर् में यह संख्या 315 करोड़ ;31 प्रतिशतद्ध थी। प्रवास की स्िथति ज्ञात करने के लिए अपने पड़ोस के पाँच घरों का सवेर्क्षण कीजिए। यदि प्रवासी हैं तो पाठ में दी गइर् दो कसौटियों के आधार पर उन्हें वगीर्वृफत कीजिए। प्रवास की धाराएँ आंतरिक प्रवास ;देश के भीतरद्ध और अंतरार्ष्ट्रीय प्रवास ;देश के बाहर और अन्य देशों से देश के अंदरद्ध से संबंिात वुफछ तथ्य यहाँ प्रस्तुत हैं। आंतरिक प्रवास के अंतगर्त चार धाराओं की पहचान की गइर् है: ;कद्ध ग्रामीण से ग्रामीण 2.1 क और 2.1 ख में प्रस्तुत किया गया है। इस बात का स्पष्ट साक्ष्य है कि दोनों प्रकार के प्रवासों में थोड़ी दूरी के ग्रामीण से ग्रामीण प्रवास की धाराओं में स्ित्रायों की संख्या सवार्िाक है। इसके विपरीत आथ्िार्क कारणों की वजह से अंतर - राज्यीय प्रवास ग्राम से नगर धारा में पुरुष सवार्िाक हैं। आंतरिक प्रवास की इन धाराओं के अतिरिक्त भारत में पड़ोसी देशों से आप्रवास और उन देशों की ओर भारत से उत्प्रवास भी हुआ है। तालिका 2.1 में पड़ोसी देशों से प्रवासियों का ब्योरा प्रस्तुत करती है। जनगणना 2001 में अंकित है कि भारत में अन्य देशों से 50 लाख व्यक्ितयों चित्रा 2.1 क: निवास के अंतिम स्थान के अनुसार अंतःराज्यीय चित्रा 2.1 ख: निवास के अंतिम स्थान के अनुसार अंतर - राज्यीय प्रवास दशार्ती प्रवास की धाराएँ ;अविा 0 - 9 वषर्द्ध भारत, 2001 प्रवास दशार्ती प्रवास की धाराएँ ;अविा 0 - 9 वषर्द्ध भारत, 2001 स्रोत: प्रवास सारणी, भारत की जनगणना, 2001 2001 की जनगणना के अनुसार अंतःराज्यीय और अन्तर - राज्यीय प्रवास को दशार्ने वाले चित्रों 2.1 क और 2.1 ख का परीक्षण कीजिए और ज्ञात कीजिए: ;कद्ध दोनों चित्रों में ग्रामीण से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवास करने वाली स्ित्रायों की संख्या अिाक क्यों है? ;खद्ध ग्रामीण से नगरीय क्षेत्रों में पुरूष प्रवास अिाक क्यों है? ;खद्ध ग्रामीण से नगरीय ;गद्ध नगरीय से नगरीय और ;घद्ध का प्रवास हुआ है। इनमें से 96 प्रतिशत पड़ोसी देशों से नगरीय से ग्रामीण। भारत में 2001 के दौरान पिछले निवास के आए हैं: बांग्लादेश ;30 लाखद्ध इसके बाद पाकिस्तान आधार पर परिकलित 31.5 करोड़ प्रवासियों में से 9.8 करोड़ ;9 लाखद्ध और नेपाल ;5 लाखद्ध इनमें तिब्बत, श्रीलंका, ने पिछले दस वषो± में अपने निवास का स्थान बदल लिया है। बांग्लादेश, पाकिस्तान, अपफगानिस्तान, इर्रान और म्यांमार इनमें से 8.1 करोड़ अंतःराज्यीय प्रवासी थे। इस धारा में स्त्राी 1.6 लाख शरणाथीर् भी समाविष्ट हैं। जहाँ तक भारत से प्रवासी प्रमुख थी। इनमें से अिाकांश विवाहोपरांत प्रवासी थीं। उत्प्रवास का प्रश्न है, ऐसा अनुमान है कि भारतीय अंतःराज्यीय और अन्तर - राज्यीय प्रवास की विभ्िान्न डायास्पोरा के लगभग 2 करोड़ लोग हैं जो 110 देशों में धाराओं में स्त्राी और पुरुष प्रवासियों के वितरण को चित्रा पैफले हुए हैं। प्रवास: प्रकार, कारण और परिणाम 17 पड़ोसी देशों से प्रवास 4,918,266 को 100 प्रतिशत मानते हुए तालिका 2.1 में दिए गए आँकड़ों को पाइर् आरेख द्वारा प्रदश्िार्त कीजिए। प्रवास में स्थानिक विभ्िान्नता महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात और हरियाणा जैसे राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार इत्यादि जैसे अन्य राज्यों से प्रवासियों को आकष्िार्त करते हैं ;ब्यौरे के लिए देखें परिश्िाष्ट 2.1द्ध 23 लाख आप्रवासियों के साथ महाराष्ट्र का सूची में प्रथम स्थान है, इसके बाददिल्ली, गुजरात और हरियाणा आते हैं। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश ;μ26 लाखद्ध और बिहार ;μ17 लाखद्ध वे राज्य हैं जहाँ से उत्प्रवासियों की संख्या सवार्िाक है। नगरीय समूहनों में से बृहत् मुंबइर् में सवार्िाक संख्या में प्रवासी आए। इसमें अंतःराज्यीय प्रवास का भाग सवार्िाक है। यह अंतर मुख्य रूप से राज्य के आकार के कारण है जिसमें ये नगरीय समूहन स्िथत हैं। पिछले निवास स्थान के अनुसार आप्रवासी तालिका 2.1: भारत में सभी अविायों में पड़ोसी देशों से देश आप्रवासियों आप्रवासियों की संख्या का » वुफल अंतरार्ष्ट्रीय प्रवास 5ए155ए423 100 पड़ोसी देशों से प्रवास 4ए918ए266 95ण्5 अपफगानिस्तान 9ए194 0ण्2 बांग्लादेश 3ए084ए826 59ण्8 भूटान 8ए337 0ण्2 चीन 23ए721 0ण्5 म्यांमार 49ए086 1ण्0 नेपाल 596ए696 11ण्6 पाकिस्तान 997ए106 19ण्3 श्रीलंका 149ए300 2ण्9 स्रोत: भारत की जनगणना, 2001 दिए गए समाचार विवरणों से प्रवासन के राजनैतिक एवं आथ्िार्क कारणों को पहचानने की कोश्िाश करें। 18 भारत: लोग और अथर्व्यवस्था प्रवास के कारण लोग सामान्य रूप से अपने जन्म स्थान से भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं। ¯कतु लाखों लोग अपने जन्म के स्थान और निवास को छोड़ देते हैं। इसके विविध कारण हो सकते हैं जिन्हें बृहत् रूप से दो संवगो± में रखा जा सकता है: ;पद्ध प्रतिकषर् कारक ;च्नेी ंिबजवतद्ध जो लोगों को निवास स्थान अथवा उद्गम को छुड़वाने का कारण बनते हैं और ;पपद्ध अपकषर् कारक ;च्नसस ंिबजवतद्ध जो विभ्िान्न स्थानों से लोगों को आकष्िार्त करते हैं। भारत में लोग ग्रामीण से नगरीय क्षेत्रों में मुख्यतः गरीबी, वृफष्िा भूमि पर जनसंख्या के अिाक दबाव, स्वास्थ्य सेवाओं, श्िाक्षा जैसी आधारभूत अवसंरचनात्मक सुविधाओं के अभाव इत्यादि के कारण प्रवास करते हैं। इन कारकों के अतिरिक्त बाढ़, सूखा, चव्रफवातीय तूपफान, भूकम्प, सुनामी जैसी प्रावृफतिक आपदाएँ, यु(, स्थानीय संघषर् भी प्रवास के लिए अतिरिक्त प्रतिकषर् पैदा करते हैं। दूसरी ओर अपकषर् कारक हैं, जो लोगों को ग्रामीण क्षेत्रों से नगरों की ओर आकष्िार्त करते हैं। नगरीय क्षेत्रों की ओर अिाकांश ग्रामीण प्रवासियों के लिए सवार्िाकमहत्त्वपूणर् अपकषर् कारक बेहतर अवसर, नियमित काम का मिलना और अपेक्षावृफत उफँचा वेतन है। श्िाक्षा के लिए बेहतर अवसर, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ और मनोरंजन के स्रोत इत्यादि भी कापफी महत्त्वपूणर् अपकषर् कारक हैं।़चित्रा 2.2 क तथा ख में पुरुषों और स्ित्रायों के प्रवास के कारणों का अलग - अलग परीक्षण कीजिए। चित्रों के आधार पर यह देखा जा सकता है कि पुरुषों और स्ित्रायों के लिए प्रवास के कारण भ्िान्न हैं। उदाहरण के तौर पर काम और रोशगार पुरुष प्रवास के मुख्य कारण ;38 प्रतिशतद्ध रहे हैं जबकि यही कारण केवल 3 प्रतिशत स्ित्रायों के लिए हैं। इसके विपरीत 65 प्रतिशत स्ित्रायाँ विवाह के उपरांत अपने मायके से बाहर जाती हैं। भारतके ग्रामीण क्षेत्रों में यह सवार्िाक महत्त्वपूणर् कारण हैं, मेघालय इसका अपवाद है जहाँ स्िथति उलट है। मेघालय में स्त्राी विवाह प्रवास कानून क्यों भ्िान्न है? इन विवाहों की तुलना में देश में पुरुष प्रवास केवल 2 प्रतिशत है। प्रवास के परिणाम प्रवास, क्षेत्रा पर अवसरों के असमान वितरण के कारण होता है। लोगों में कम अवसरों और कम सुरक्षा वाले स्थान से अिाकअवसरों और बेहतर सुरक्षा वाले स्थान की ओर जाने की प्रवृिा होती है। बदले में यह प्रवास के उद्गम और गंतव्य क्षेत्रों के लिए लाभ और हानि दोनों उत्पन्न करता है। परिणामों को आथ्िार्क, सामाजिक, सांस्वृफतिक, राजनीतिक और जनांकिकीय संदभो± में देखा जा सकता है। आथ्िार्क परिणाम उद्गम प्रदेश के लिए मुख्य लाभ प्रवासियों द्वारा भेजी गइर् हुंडी हैं। अंतरार्ष्ट्रीय प्रवासियों द्वारा भेजी गइर् हुंडियाँ विदेशी विनिमय के प्रमुख स्रोत में से एक हैं। सन् 2002 में भारत ने अंतरार्ष्ट्रीय 20 भारत: लोग और अथर्व्यवस्था प्रवासियों से हुंडियों के रूप में 110 खरब अमेरिकी डाॅलर प्राप्त किए। पंजाब, केरल और तमिलनाडु अपने अंतरार्ष्ट्रीय प्रवासियोंसे महत्त्वपूणर् राश्िा प्राप्त करते हैं। अंतरार्ष्ट्रीय प्रवासियों की तुलना में आंतरिक प्रवासियों द्वारा भेजी गइर् हुंडियों की राश्िा बहुत थोड़ी है, ¯कतु यह उद्गम क्षेत्रा की आथ्िार्क वृि में महत्त्वपूणर् भूमिका निभाती है। हुंडियों का प्रयोग मुख्यतः भोजन, )णों की अदायगी, उपचार, विवाहों, बच्चों की श्िाक्षा, वृफषीय निवेश,गृह - निमार्ण इत्यादि के लिए किया जाता है। बिहार, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, इत्यादि के हशारों निधर्न गाँवों की अथर्व्यवस्था के लिए ये हुंडियाँ जीवनदायक रक्त काकाम करती हैं। पूवीर् उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और उड़ीसाके ग्रामीण क्षेत्रों से पंजाब, हरियाणा, पश्िचमी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवास वृफष्िा विकास के लिए उनकी हरित - व्रफांतिकायर्योजना की सपफलता के लिए उत्तरदायी हैं। इसके अतिरिक्त अनियंत्रिात प्रवास ने भारत के महानगरों को अति संवुुफलित कर दिया है। महाराष्ट्र, गुजरात, कनार्टक, तमिलनाडु और दिल्ली जैसे औद्योगिक दृष्िट से विकसित राज्यों में गंदी बस्ितयों ;स्लमद्ध का विकास देश में अनियंत्रिात प्रवास का नकारात्मक परिणाम है। क्या आप प्रवास के वुफछ और सकारात्मक और नकारात्मक परिणामों का नाम बता सकते हैं? जनांकिकीय परिणाम प्रवास से देश के अंदर जनसंख्या का पुनविर्तरण होता है। ग्रामीण नगरीय प्रवास नगरों में जनसंख्या की वृि में योगदानदेने वाले महत्त्वपूणर् कारकों में से एक हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले युवा आयु, वुफशल एवं दक्ष लोगों का बाह्य प्रवास ग्रामीण जनांकिकीय संघटन पर प्रतिवूफल प्रभाव डालता है। यद्यपिउत्तरांचल, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पूवीर् महाराष्ट्र से होने वाले बाह्य प्रवास ने इन राज्यों की आयु एवं लिंग संरचना में गंभीर असंतुलन पैदा कर दिया है। ऐसे ही असंतुलन उन राज्यों में भी उत्पन्न हो गए हैं जिनमें ये प्रवासी जाते हैं। प्रवासियों के उद्गम और गंतव्य स्थानों में लिंग अनुपात असंतुलित होने का क्या कारण है? सामाजिक परिणाम प्रवासी सामाजिक परिवतर्न के अभ्िाकतार्ओं के रूप में कायर् करते हैं। नवीन प्रौद्योगिकियों, परिवार नियोजन, बालिका श्िाक्षा चित्रा 2.2 क: 0 - 9 वषर् अविा वाले पिछले निवास के अनुसार पुरुष प्रवास के कारण भारत, 2001 इत्यादि से संबंिात नए विचारों का नगरीय क्षेत्रों से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर विसरण इन्हीं के माध्यम से होता है। प्रवास से विविध संस्वृफतियों के लोगों का अंतमिर्श्रण होता है। इसका संकीणर् विचारों को भेदते तथा मिस्र संस्वृफति के उद्विकास में सकारात्मक योगदान होता है और यह अिाकतर लोगों के मानसिक क्ष्िातिज को विस्तृत करता है। ¯कतु इसके गुमनामी जैसे गंभीर नकारात्मक परिणाम भी होते हैं जो व्यक्ितयों में सामाजिक निवार्त और ख्िान्नता की भावना भर देते हैं। ख्िान्नता की सतत भावना लोगों को अपराध और औषध दुरुपयोग ;कतनह ंइनेमद्ध जैसी असामाजिक वि्रफयाओं के पाश में पँफसने के लिए अभ्िाप्रेरित कर सकती है। पयार्वरणीय परिणाम ग्रामीण से नगरीय प्रवास के कारण लोगों का अति संवुफलन नगरीय क्षेत्रों में वतर्मान सामाजिक और भौतिक अवसंरचना पर दबाव डालता है। अंततः इससे नगरीय बस्ितयों की अनियोजित वृि होती है और गंदी बस्ितयों और क्षुद्र काॅलोनियों का निमार्ण होता है। इसके अतिरिक्त प्रावृफतिक संसाधनों के अति दोहन के कारण नगर भौमजल स्तर के अवक्षय, वायु प्रदूषण, वाहित मल चित्रा 2.2 ख: 0 - 9 वषर् अविा वाले पिछले निवास के अनुसार स्त्राी प्रवास के कारण भारत, 2001 के निपटान और ठोस कचरे के प्रबंधन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे हैं। अन्य प्रवास ;विवाहजन्य प्रवास को छोड़कर भीद्ध स्ित्रायों के जीवन स्तर को प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से प्रभावित करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष वरणात्मक बाह्य प्रवास के कारण पत्िनयाँ पीछे छूट जाती हैं जिससे उन पर अतिरिक्त शारीरिक और मानसिक दबाव पड़ता है। श्िाक्षा अथवा रोशगार के लिए ‘स्ित्रायों’ काप्रवास उनकी स्वायत्तता और अथर्व्यवस्था में उनकी भूमिका को बढ़ा देता है ¯कतु उनकी सुभेद्यता ;अनसदमतंइपसपजलद्ध भी बढ़ती है। स्रोत प्रदेश के दृष्िटकोण से यदि हुंडियाँ ;तमउपजजंदबमेद्ध प्रवास के प्रमुख लाभ हैं तो मानव संसाधन, विशेष रूप से वुफशल लोगों का ”ास उसकी गंभीर लागत है। उन्नत वुफशलता का बाशार सही मायने में वैश्िवक बाशार बन गया है और सवार्िाक गत्यात्मक औद्योगिक अथर्व्यवस्थाएँ गरीब प्रदेशों से उच्च प्रश्िाक्ष्िात व्यावसायिकों को साथर्क अनुपातों में प्रवेश दे रही है और भतीर् कर रही हैं। परिणामस्वरूप स्रोत प्रदेश के वतर्मान अल्पविकास को बल मिलता है। प्रवास: प्रकार, कारण और परिणाम 21 अभ्यास 1ण् नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए। ;पद्ध निम्नलिख्िात में से कौन - सा भारत में पुरुष प्रवास का मुख्य कारण है? ;कद्ध श्िाक्षा ;गद्ध काम और रोशगार ;खद्ध व्यवसाय ;घद्ध विवाह ;पपद्ध निम्नलिख्िात में से किस राज्य में सवार्िाक संख्या में आप्रवासी आते हैं? ;कद्ध उत्तर प्रदेश ;गद्ध महाराष्ट्र ;खद्ध दिल्ली ;घद्ध बिहार ;पपपद्ध भारत में प्रवास की निम्नलिख्िात धाराओं में से कौन - सी एक धरा पुरुष प्रधान है? ;कद्ध ग्रामीण से ग्रामीण ;गद्ध ग्रामीण से नगरीय ;खद्ध नगरीय से ग्रामीण ;घद्ध नगरीय से नगरीय ;पअद्ध निम्नलिख्िात में से किस नगरीय समूहन में प्रवासी जनसंख्या का अंश सवार्िाक है? ;कद्ध मुंबइर् नगरीय समूहन ;गद्ध बँगलौर नगरीय समूहन ;खद्ध दिल्ली नगरीय समूहन ;घद्ध चेन्नइर् नगरीय समूहन 2ण् निम्नलिख्िात प्रश्नों का उत्तर लगभग 30 शब्दों में दें। ;पद्ध जीवन पय±त प्रवासी औैर पिछले निवास के अनुसार प्रवासी में अंतर स्पष्ट कीजिए। ;पपद्ध पुरुष/स्त्राी चयनात्मक प्रवास के मुख्य कारण की पहचान कीजिए। ;पपपद्ध उद्गम और गंतव्य स्थान की आयु एवं लिंग संरचना पर ग्रामीण - नगरीय प्रवास का क्या प्रभाव पड़ता है? 3ण् निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दें। ;पद्ध भारत में अंतरार्ष्ट्रीय प्रवास के कारणों की विवेचना कीजिए। ;पपद्ध प्रवास के सामाजिक जनांकिकीय परिणाम क्या - क्या हैं? 22 भारत: लोग और अथर्व्यवस्था

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