अध्याय - 10 मानव बस्ती हम सब मकानों के समूह में रहते हैं। आप इसे ग्राम, नगर या एक शहर कह सकते हैं, यह सभी मानव बस्ती के उदाहरण हैं। मानव बस्ती का अध्ययन मानव भूगोल का मूल है क्योंकि किसी भी क्षेत्रा में बस्ितयों का रूप उस क्षेत्रा के वातावरण से मानव का संबंध् दशार्ता है। एक स्थान जो साधारणतया स्थायी रूप से बसा हुआ हो उसे मानव बस्ती कहते हैं। मकानों का स्वरूप बदला जा सकता है, उनके कायर् बदल सकते हैं परंतु बस्ितयाँ समय एवं स्थान के साथ निरंतर बसती रहेंगी। वुफछ बस्ितयाँ अस्थायी हो सकती हैं जिसमें निवास वुफछ ही समय जैसे कि एक )तु के लिए होता है। बस्ितयों का वगीर्करणμ ग्रामीण नगरीय द्विभाजन यह सभी स्वीकार करते हैं कि बस्ितयों में भेद नगरीय व ग्रामीण आधर पर होता है, परंतु हम किस को ग्राम कहें एवं किसको नगर इस पर कोइर् मतैक्य नहीं है। यद्यपि जनसंख्या इसका एक मापदंड हो सकती है पर यह सवर्व्यापी मापदंड नहीं हो सकता क्योंकि भारत एवं चीन में जो घने बसे देश हैं उनमें कइर् ऐसे ग्राम हैं जिनकी जनसंख्या पश्िचमी यूरोप एवं संयुक्त राज्य अमेरिका के नगरों से अध्िक है। एक समय था जब ग्राम के निवासियों का मुख्य उद्यम वृफष्िा करना या प्राथमिक गतिविध्ियों में लगे रहना था। परंतु वतर्मान समय में विश्व के विकसित देशों की नगरीय जनसंख्या यद्यपि शहरों में कायर् करती हैं तथापि वे गाँवों में रहना पसंद करते हैं। अतः ग्रामों एवंेशहरां में आधारभूत अंतर यह होता है कि नगरों या शहरों के निवासियों का मुख्य व्यवसाय द्वितीयक एवं तृतीयक गतिवििायों से संबंध्ित है। इसके विपरीत ग्रामों में रहने वाले निवासियों का मुख्य व्यवसाय प्राथमिक गतिविध्ियाँ जैसे वृृफष्िा, मछली पकड़ना, लकड़ी काटना, खनन कायर्, पशुपालन इत्यादि से संबंिात होता है। उप नगरीकरण यह एक नवीन प्रवृिा है जिसमें मनुष्य शहर के घने बसेक्षेत्रों से हटकर रहन - सहन की अच्छी गुणवत्ता की खोज में शहर के बाहर स्वच्छ एवं खुले क्षेत्रों में जा रहेहैं। बड़े शहरों के समीप ऐसे महत्त्वपूणर् उपनगर विकसित हो जाते हैं, जहाँ से प्रतिदिन हशारों व्यक्ित अपने घरों से कायर्स्थलों पर आते - जाते हैं। ग्रामीण एवं नगरीय जनसंख्या में उनके द्वारा संपन्न कायो± के आधर पर विभेदीकरण अध्िक अथर्पूणर् है क्योंकि ग्रामीण एवं नगरीय बस्ितयों द्वारा किए गए कायो± के पदानुक्रम में समरूपता नहीं है। संयुक्त राज्य अमेरिका में पैट्रोल पंप को पदानुक्रम में निम्न श्रेणी का कायर् समझा जाता है, जबकि भारत में यह नगरीय कायर् के अंतगर्त आता है। यहाँ तक कि एक देश के अंदर ही कायो± का स्तर प्रादेश्िाक अथर्व्यवस्था के अनुसार अलग - अलग हो सकता है, जो सुविधाएँ विकसित देशों के ग्रामों में पाइर् जाती हंै, वैसी सुविधाएँ विकासशील एवं अल्प विकसित देशों के गाँवों में दुलर्भ होती हैं। 1991 की भारतीय जनगणना में नगरीय बस्ती को इस प्रकार परिभाष्िात किया है। ‘सभी स्थान जहाँ नगरपालिका, निगम, छावनी बोडर् ;वैंनमेंट बोडर्द्ध या अध्िसूचित फटोनगरीय क्षेत्रा समिति ;नोटीपफाइड टाउन एरिया कमेटीद्ध हो एवं कम से कम 5000 व्यक्ित वहाँ निवास करते हों, 75 प्रतिशत पुरुष श्रमिक गैर वृफष्िा कायो± में संलग्न हांेव जनसंख्या का घनत्व 400 व्यक्ित प्रति वगर् किलोमीटर हो, ऐसे स्थान या क्षेत्रा को नगरीय बस्ती कहेंगे’। बस्ितयों के प्रकार एवं प्रतिरूप बस्ितयों का वगीर्करण उनकी आवृफति एवं प्रतिरूपों के आधार पर किया जाता है। आवृफति के आधर पर बस्ितयों को मुख्यतया निम्न प्रकारों में वगीर्वृफत किया जा सकता है: ;पद्ध संहत बस्ती: इस प्रकार की बस्ितयाँ वे होती हैं जिनमें मकान एक दूसरे के समीप बनाए जाते हैं। इस तरह की बस्तयों का विकास नदी घाटियों केसहारे या उपजाऊ मैदानों में होता है। यहाँ रहने वाला समुदाय मिलकर रहता है एवं उनके व्यवसाय भी समान होते हैं। ;पपद्ध प्रकीणर् बस्ती: इन बस्ितयों में मकान दूर - दूर होते हैं तथा प्रायः खेतों के द्वारा एक दूसरे से अलग होते हैं। एक सांस्वृफतिक आवृफति जैसे पूजा - स्थल अथवा बाशार, बस्ितयों को एक साथ बाँध्ता है। चित्रा 10.2: प्रकीणर् बस्ती ग्रामीण बस्ती ग्रामीण बस्ती अध्िक निकटता से तथा प्रत्यक्ष रूप से भूमि से नशदीकी संबंध् रखती हैं। यहाँ के निवासी अध्िकतर प्राथमिक गतिवििायों में लगे होते हैं। जैसेμवृफष्िा, पशुपालन एवं मछली पकड़ना आदि इनके प्रमुख व्यवसाय होते हैं। बस्ितयों का आकार अपेक्षावृफत छोटा होता है। ग्रामीण बस्ितयों को प्रभावित करने वाले कारक निम्नलिख्िात हैं - चित्रा 10.1: संहत बस्ती 93मानव अध्िवास जल आपूतिर् साधरणतया ग्रामीण बस्ितयाँ जल ड्डोतों या जलराश्िायों जैसे नदियाँ, झीलें एवं झरनों इत्यादि के समीप स्िथत होती हैं, जहाँ जल आसानी से उपलब्ध् हो जाता है। कभी - कभी पानी की आवश्यकता लोगों को अन्यथा असुविधजनक स्थानों जैसे दलदल से घ्िारे द्वीपों अथवा नदी किनारों के निचले क्षेत्रों में बसने के लिए प्रेरित करते हैं। अध्िकांश जल आधरित ‘नम ¯बदु’ बस्ितयों में पीने, खाना बनाने, वस्त्रा धेने आदि के लिए जल की उपलब्िध् जैसे अनेक लाभ उपलब्ध् होते हैं। पफामर् भूमि की सिंचाइर् के लिए नदियों और झीलों का उपयोग कियाजा सकता है। इन्हीं जल ड्डोतों से वहाँ के निवासी भोजन हेतु मछली पकड़ते हैं तथा नाव चलाने योग्य नदियाँ एवं झीलें जल यातायात के लिए भी प्रयोग की जा सकती हैं। भूमि मनुष्य बसने के लिए उस जगह का चुनाव करता है जहाँ कीभूमि वृफष्िा कायर् के लिए उपयुक्त व उपजाऊ हो। यूरोप में दलदली क्षेत्रा एवं निचले क्षेत्रा में बस्ितयाँ नहीं बसाइर् जाती हैं जबकि दक्ष्िाणी पूवीर् एश्िाया में रहने वाले लोग नदी घाटियों के निम्न भाग एवं तटवतीर् मैदानों के निकट बस्ितयाँ बसाते हैं जो कि उन्हें नम चावल की वृफष्िा के लिए सहायक होते हैं। किसी भी क्षेत्रा में प्रारंभ्िाक अिावासी उपजाऊ एवं समतल क्षेत्रों में ही बसते थे। उच्च भूमि के क्षेत्रा मानव ने अपने अध्िवास हेतु ऊँचे क्षेत्रों को इसलिए चुना कि वहाँ पर बाढ़ के समय होने वाली क्षति से बचा जा सके एवं मकान व जीवन सुरक्ष्िात रह सके। नदी बेसिन के निम्न भाग में बस्ितयाँ नदी वेदिकाओं एवं तटबंधें पर बसाइर् जाती हैं 94 मानव भूगोल के मूल सि(ांत क्योंकि ये भाग ‘शुष्क ¯बदु’ होते हैं। उष्ण कटिबंधीय देशों के दलदली क्षेत्रों के निकट लोग अपने मकान स्तंभों पर बनाते हैं जिससे कि बाढ़ एवं कीडे़ - मकोड़ों से बचा जा सके। गृह निमार्ण सामग्री मानव बस्ितयों के विकसित होने में गृहनिमार्ण सामग्री की उपलब्धता भी एक बड़ा कारक होती है। जहाँ आसानी से लकड़ी, पत्थर आदि प्राप्त हो जाते हैं मनुष्य वहीं अपनी बस्ितयाँ बसाता है। वनों को काट कर प्राचीन गाँवों को बनाया गया था जहाँ लकड़ी बहुतायत में थी। चीन के लोयस क्षेत्रा में वहाँ के निवासी वंफदराओं में मकान बनाते थे एवं अप्रफीका के सवाना प्रदेश में कच्ची ईंटों के मकान बनते थे जबकि ध््रुवीय क्षेत्रा में एस्िकमो हिम खंडों से अपने इग्लू का निमार्ण करते हैं। सुरक्षा राजनीतिक अस्िथरता, यु( या पड़ोसी समूहों के उपद्रवी होने की स्िथति में गाँवों को सुरक्षात्मक पहाडि़यों एवं द्वीपों पर बसाया जाता था। नाइजीरिया में खडे़ इंसेलबगर् अच्छी सुरक्ष्िात स्िथति प्रदान करते हैं। भारत में अध्िकतर दुगर् उँफचे स्थानों अथवा पहाडि़यों पर स्िथत हैं। नियोजित बस्ितयाँ इस तरह की बस्ितयाँ सरकार द्वारा बसाइर् जाती हैं। ग्रामवासियों द्वारा स्वतः जिन बस्ितयों की स्िथति का चयन नहीं किया जाता, सरकार द्वारा अध्िगृहित की गइर् ऐसी भूमि पर निवासियों को सभी प्रकार की सुविधाएँ जैसेμआवास, पानी तथा अन्य अवसंरचना आदि उपलब्ध कराकर बस्ितयों को विकसित करती हंै। इथोपिया में सरकार द्वारा ग्रामीणीकरण योजना एवं भारत में इंदिरा गांध्ी नहर के क्षेत्रा में नहरी बस्ितयों का विकास इसके अच्छे उदाहरण हैं। ग्रामीण बस्ितयों के प्रतिरूप ग्रामीण बस्ितयों का प्रतिरूप यह दशार्ता है कि मकानों की स्िथति किस प्रकार एक दूसरे से संबंध्ित है। गाँव की आवृफति एवं प्रसार को प्रभावित करने वाले कारकों में गाँव की स्िथति, समीपवतीर् स्थलावृफति एवं क्षेत्रा का भूभाग प्रमुख स्थान रखते हैं। ग्रामीण बस्ितयों का वगीर्करण कइर् मापदंडों के आधार पर किया जा सकता है: चित्रा 10.4: ग्रामीण बस्ितयों के प्रतिरूप ;पद्ध विन्यास के आधर पर: इनके मुख्य प्रकार हैंμ मैदानी ग्राम, पठारी ग्राम, तटीय ग्राम, वन ग्राम एवं मरुस्थलीय ग्राम। ;पपद्ध कायर् के आधर पर: इसमें वृफष्िा ग्राम, मछुवारों के ग्राम, लकड़हारों के ग्राम, पशुपालक ग्राम आदि आते हैं। ;पपपद्ध बस्ितयों की आवृफति के आधर पर: इसमें कइर् प्रकार की ज्यामितिक आवृफतियाँ हो सकती हैं जैसेकि रेखीय, आयताकार, वृत्ताकार, तारे के आकार की, ‘टी’ के आकार की, चैक पट्टðी, दोहरे ग्राम इत्यादि। ;कद्ध रैख्िाक प्रतिरूप: उस प्रकार की बस्ितयों में मकान सड़कों, रेल लाइनों, नदियों, नहरों, घाटी के किनारे अथवा तटबंधें पर स्िथत होते हैं। ;खद्ध आयताकार प्रतिरूप: ग्रामीण बस्ितयों का यह प्रतिरूप समतल क्षेत्रों अथवा चैड़ी अंतरा पवर्तीय घाटियों में पाया जाता है। इसमें सड़वेंफ आयताकार होती हैं जो एक दूसरे को समकोण पर काटती हैं। ;गद्ध वृत्ताकार प्रतिरूप: इस प्रकार के गाँव झीलों व तालाबों आदि क्षेत्रों के चारों ओर बस्ती बस जाने से विकसित होते हैं। कभी - कभी ग्राम को इस योजना चित्रा 10.5: रैख्िाक प्रतिरूप बस्ती से बसाया जाता है कि उसका मध्य भाग खुला रहे जिसमें पशुओं को रखा जाए ताकि वे जंगली जानवरों से सुरक्ष्िात रहें। तारे के आकार का प्रतिरूप: जहाँ कइर् मागर् आकर एक स्थान पर मिलते हैं औ±ेफ सहारेर उन मागा वेमकान बन जाते हैं। वहाँ तारे के आकार की बस्ितयाँ विकसित होती हैं। ‘टी’ आकार, ‘वाइर्’ आकार, क्राॅस आकार: टी के आकार की बस्ितयाँ सड़क के तिराहे पर विकसित ;घद्ध ;डद्ध होती हैं। जबकि वाइर् आकार की बस्ितयाँ उन क्षेत्रों में पाइर् जाती हैं जहाँ पर दो मागर् आकर तीसरे मागर् से मिलते हैं। क्राॅस आकार की बस्ितयाँ चैराहों पर प्रारंभ होती हैं जहाँ चैराहे से चारों दिशा में बसाव आरंभ हो जाता है। ;चद्ध दोहरे ग्राम: नदी पर पुल या पेफरी के दोनों ओर इन बस्ितयों का विस्तार होता है। ियाकलाप आपके द्वारा कक्षा ग्प् के भूगोल प्रायोगिक कायर्, भाग - प् ;एन.सी.इर् आर.टी. 2006द्ध में अध्ययन किए गए किसी भी स्थलावृफतिक पत्राक में इन प्रतिरूपों को पहचानिए। ग्रामीण बस्ितयों की समस्याएँ विकासशील देशों में ग्रामीण बस्ितयों की संख्या अध्िक है एवं इनका आधरभूत ढाँचा भी अविकसित है। ये नियोजकों के सम्मुख बड़ी चुनौती और सुअवसर प्रस्तुत करते हैं। विकासशील देशों में ग्रामीण बस्ितयों में जल की आपूतिर् भी पयार्प्त नहीं है। पवर्तीय एवं शुष्क क्षेत्रों में निवासियों को पेय जल हेतु लंबी दूरियाँ तय करनी पड़ती हैं। जल जनित बीमारियाँ जैसे हैजा, पीलिया आदि सामान्य समस्या है। दक्ष्िाणी एश्िाया के देश प्रायः बाढ़ एवं सूखे से ग्रस्त रहते हैं। सिंचाइर् सुविधएँ कम होने से वृफष्िा कायर् पर भी प्रभाव पड़ता है। शौचघर एवं वूफड़ा - कचरा निस्तारण की सुविधाएँ नगण्य हैं। जिससे इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य से संबंध्ित समस्याएँ रहती हैं। मकानों की रूपरेखा एवं उनके लिए प्रयुक्त होने वाली गृह 96 मानव भूगोल के मूल सि(ांत निमार्ण सामग्री हर पारिस्िथतिक प्रदेश में भ्िान्न होती है। जो मकान मिट्टðी, लकड़ी एवं छप्पर के बनाए जाते हंै उन्हंे भारी वषार् एवं बाढ़ के समय काप़फी नुकसान पहुँचता है एवं हर वषर् उनके उचित रख - रखाव की आवश्यकता पड़ती है। अिाकतर मकानों की रूपरेखा भी ऐसी होती है जिसमें उपयुक्त संवातन नहीं होता है। एक ही मकान में मनुष्यों के साथ पशु भी रहते हैं। इसी मकान में पशु शेड और उनके चारा रखने की जगह भी होती है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि जंगली जानवरों से पालतू पशुओं और उनके चारे की रक्षा उचित ढंग से हो सके। कच्ची सड़क एवं आध्ुनिक संचार के साध्नों की कमी भी यहाँ की प्रमुख समस्या है। वषार् )तु में इन क्षेत्रों का संपवर्फ आसपास के क्षेत्रा से कट जाता है जिससे आपतकालीन सेवाएँ प्रदान करने में भी गंभीर कठिनाइयाँ उपलब्ध् हो जाती है। विशाल ग्रामीण जनसंख्या के लिए स्वास्थ्य एवं श्िाक्षा संबंध्ी पयार्प्त सुविधाएँ प्रदान करना भी कठिन हो जाता है। यह समस्या उस समय और विकट हो जाती है जब ग्रामीणीकरण उचित प्रकार से नहीं हुआ है और विशाल क्षेत्रा में मकान दूर तक विकसित होते हैं। नगरीय बस्ितयाँ तीव्र नगरीय विकास एक नूतन परिघटना है। वुफछ समय पूवर् तक बहुत ही कम बस्ितयाँ वुफछ हशार से अिाक निवासियों वाली थी। प्रथम नगरीय बस्ती लंदन नगर की जनसंख्या लगभग 1810 इर्. तक 10 लाख हो गइर् थी। 1982 में विश्व में करीब 175 नगर 10 लाख से अध्िक जनसंख्या वाले थे। 1800 में विश्व की केवल 3 प्रतिशत जनसंख्या नगरीय बस्ितयों में निवास करती थी जबकि वतर्मान समय में 48 प्रतिशत जनसंख्या नगरों में निवास करती है ;तालिका 10.1द्ध। तालिका 10.1: विश्व में नगरीय जनसंख्या का प्रतिशत वषर् प्रतिशत 1800 3 1850 6 1900 14 1950 30 1982 37 2001 48 नगरीय बस्ितयों का वगीर्करण नगरीय क्षेत्रों की परिभाषा एक देश से दूसरे देश में भ्िान्न है। वगीर्करण के वुफछ सामान्य आधर जनसंख्या का आकार, मनुष्यों द्वारा किए जाने वाले व्यवसाय एवं प्रशासकीय ढाँचा है। जनसंख्या का आकार नगरीय क्षेत्रों को परिभाष्िात करने के लिए अध्िकतर देशों ने इसी मापदंड को अपनाया है। नगरीय क्षेत्रा की श्रेणी में आने के लिए जनसंख्या के आकार की निचली सीमा कोलंबिया में 1500, पर देखी जाती है। उदाहरण के तौर पर किसी अवकाश सैरगाह की स्िथति के लिए जो आवश्यक बातें होनी चाहिएवो औद्योगिक नगर, सेना नगर या एक समुद्री पत्तन नगर के लिए आवश्यक स्िथतियों से भ्िान्न होती हैं। सामरिक नगरों की स्िथति ऐसी जगह हो जहाँ इसे प्रावृफतिक सुरक्षा मिलेऋ खनिज नगरों के लिए क्षेत्रा में आथ्िार्क दृष्िटकोण से उपयोगी खनिजों का पाया जाना आवश्यक हैऋ औद्योगिक नगरों के लिए स्थानीय शक्ित के साध्न एवं कच्चा मालऋ पयर्टन वेंफद्रअजथाइर्लैंड में 2500, भारत में 5000 एवं जापान में 30,000 व्यक्ित े±टाइना एवं पुतर्गाल में 2000, संयुक्त राज्य अमेरिका एवं के लिए आकषर्क दृश्य या सामुदि्रक तट, औषधीय जलवाला झरना या कोइर् ऐतिहासिक अवशेषऋ पत्तन के लिएहैं। भारत में जनसंख्या के अतिरिक्त जनसंख्या घनत्व भी 400 व्यक्ित प्रतिवगर् किलोमीटर होना चाहिए एवं साथ ही साथ गैर वृफष्िा कायर् में लगी जनसंख्या को भी ध्यान में रखा जाता है। विभ्िान्न देशों में जनसंख्या घनत्व अध्िक या कम होने की स्िथति में घनत्व वाला मापदंड उसी के अनुरूप बढ़ा या घटा दिया जाता है। डेनमावर्फ, स्वीडन एवं पिफनलैंड में 250 व्यक्ितयों की जनसंख्या वाले सभी क्षेत्रा नगरीय क्षेत्रा कहलाते ंैह। आइसलैंड में नगर होने के लिए न्यूनतम जनसंख्या 300 मनुष्य होनी चाहिए जब कि कनाडा एवं वेनेजुएला में यह संख्या 1000 व्यक्ित ह।ैव्यावसायिक संरचना जनसंख्या के आकार के अतिरिक्त वुफछ देशों में जैसे भारत में प्रमुख आथ्िार्क गतिविध्ियों को भी नगरीय बस्ितयाँ निदिर्ष्ट करने के लिए मापदंड माना जाता है। इसी प्रकार इटली में उस बस्ती को नगरीय कहा जाता है जिसकी आथ्िार्क रूप से उत्पादक जनसंख्या का 50 प्रतिशत गैर वृफष्िा कायो± में संलग्न हो। भारत में यह मापदंड 75 प्रतिशत का रखा गया है। प्रशासन वुफछ देशों में किसी बस्ती को नगरीय बस्ती मंे वगीर्वृफत करने हेतु प्रशासनिक ढाँचे को मापदंड माना जाता है। उदाहरण के लिए भारत में किसी भी आकार की बस्ितयों को नगर के रूप में वगीर्वृफत किया जाता है यदि वहाँ नगरपालिका, छावनी बोडर् या अध्िसूचित नगरीय क्षेत्रा समिति है। इसी प्रकार लैटिन अमेरिका के देश ब्राजील एवं बोलीविया में जनसंख्या आकार का ध्यान नहीं रखते हुए किसी भी प्रशासकीय वेंफद्र को नगरीय वेंफद्र माना जाता है। स्िथति नगरीय वेंफद्रांे की स्िथति उनके द्वारा संपन्न कायो± के आधर पोताश्रय का होना। प्राचीन नगरीय बस्ितयों की स्िथति, जल, गृह निमार्णसामग्री एवं उपजाऊ भूमि उपलब्ध्ता पर निभर्र रहती थी।यद्यपि वतर्मान में भी उपरोक्त कारकों का महत्त्व कम नहीं हुआ है पिफर भी आध्ुनिक प्रौद्योगिकी के कारण ऐसे क्षेत्रों में भी नगरीय बस्ितयाँ विकसित हो रही हैं जहाँ उपरोक्त सुविधएँ न हांे। पाइपलाइन के द्वारा जल दूर - दूर तक पहुँचाया जा सकता है एवं यातायात के साध्नों के माध्यम से गृह निमार्ण सामग्री भी दूरस्थ क्षेत्रों से प्राप्त की जा सकती है। नगरों के विस्तार में स्थान के अलावा उनकी स्िथति भीमहत्त्वपूणर् भूमिका निभाती है। जो नगर महत्त्वपूणर् व्यापारिक मागर् के निकट स्िथत हैं उनका विकास तेशी से हुआ है। नगरीय क्षेत्रों के कायर् प्राचीन नगर, प्रशासन, व्यापार, उद्योग, सुरक्षा एवं धमिर्कमहत्त्व के वेंफद्र हुआ करते थे। वतर्मान समय में सुरक्षा तथा धमर्का कायार्त्मक विभेदीकरण के रूप में महत्त्व घटा है, परंतु कइर् अन्य कायर् इस सूची में जुड़ गए हैं। आजकल कइर् नए कायर् जैसे मनोरंजनात्मक, यातायात, खनन, निमार्ण, आवासीय तथा सबसे नवीन सूचना प्रौद्योगिकी आदि वुफछ विश्िाष्ट नगरों में संपन्न होते हैं। इनमें से वुफछ कायो± के लिए नगरीय वेंफद्रों को समीप के ग्रामीण क्षेत्रों से किसी भी प्रकार के आधरभूत संबंधों की आवश्यकता नहीं होती है। सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का एक कायर् के रूप में वतर्मान एवं नवीन बस्ितयों के विकास पर क्या प्रभाव होगा। ियाकलाप उन शहरों की सूची बनाइए जिनमें नए कायो± ने पुराने कायो± का स्थान ले लिया है। यद्यपि नगर बहुत से कायर् करते हैं पर हम केवल उनके द्वारा किए गए प्रमुख कायो± का ही उल्लेख करते हैं। उदाहरणके तौर पर हम शैपफील्ड को औद्योगिक नगर, लंदन को पत्तन नगर, चंडीगढ़ को प्रशासकीय नगर सोचते हैं। बडे़ नगरों में विभ्िान्न प्रकार के कायर् किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त समय के अनुसार नए - नए कायर् विकसित होते रहते हैं। इंग्लैंड के19वीं शताब्दी के मछली पकड़ने वाले पत्तनों ने अब पयर्टन को विकसित कर लिया है। कइर् प्राचीन बाशार नगर अब विनिमार्ण कायो± के लिए जाने जाते हैं। नगरांे एवं शहरों का वगीर्करण निम्न प्रकार से किया जा सकता है। प्रशासनिक नगर राष्ट्र की राजधनियाँ जहाँ पर वेंफद्रीय सरकार के प्रशासनिक कायार्लय होते हंै उन्हें प्रशासनिक नगर कहा जाता है। जैसे नयी दिल्ली, केनबेरा, बीजिंग, अदीस अबाबा, वाश्िांगटन डी.सीएवं लंदन इत्यादि प्रशासनिक नगर हैं। राज्यों में भी ऐसे नगर हो सकते हैं जिनका कायर् प्रशासनिक हो, उदाहरण के लिए विक्टोरिया ;बि्रटिश कोलंबियाद्ध, अलबैनी ;न्यूयावर्फद्ध, चेन्नइर्र् ;तमिलनाडुद्ध इत्यादि। व्यापारिक एवं व्यावसायिक नगर वृफष्िा बाशार कस्बे जैसे विनिपेग एवं वंफसास नगर, बैंकिंग एवंवित्तीय कायर् करने वाले नगर, जैसे प्रैंफकपफटर् एवं एमसटडर्म, विशाल अंतदेर्शीय वेंफद्र जैसे मैनचेस्टर एवं सेंट लूइस एवं परिवहन के वेंफद्र जैसे लाहौर, बगदाद एवं आगरा प्रमुख व्यापारिक वेंफद्र रहे हैं। सांस्वृफतिक नगर तीथर्स्थान जैसे जैरूसलम, मक्का, जगन्नाथ पुरी एवं बनारस आदि सांस्वृफतिक नगर हैं। धमिर्क दृष्िटकोण से इनका बहुतमहत्त्व है। इनके अतिरिक्त जो कायर् नगर करते हैं उनमें स्वास्थ्य एवं मनोरंजन ;मियामी एवं पणजीद्ध, औद्योगिक ;पिट्सबगर् एवं जमशेदपुरद्ध, खनन ;ब्रोकन हिल एवं ध्नबादद्ध एवं परिवहन ;सिंगापुर एवं मुगलसरायद्ध आदि सम्िमलित किए जाते हैं। 98 मानव भूगोल के मूल सि(ांत नगरीकरण से तात्पयर् एक देश की नगरीय क्षेत्रा में निवास करने वाली जनसंख्या में अनुपातिक वृि से है। नगरीकरण का प्रमुख कारण ग्रामों से नगरों की ओर स्थानांतरण है। 1990 के दशक के अंत में 2 से 3 करोड़ मनुष्य प्रतिवषर् गाँव छोड़कर नगरों और शहरों की ओर रहने के लिए चले जाते थे। 19वीं शताब्दी में विकसित देशों में नगरीकरण तेशी से हुआ है। 20वीं शताब्दी के उत्तराध्र् में विकासशील देशों में नगरीकरण तेशी से हुआ है। आवृफति के आधर पर नगरों का वगीर्करण एक नगरीय बस्ती रेखीय, वगार्कार, तारा के आकार या अधर् चंद्राकार ;चापाकारद्ध हो सकती है। वास्तव में किसी भी नगर की आवृफति, वास्तुकला एवं भवनों की शैली वहाँ के ऐतिहासिक एवं सांस्वृफतिक परंपराओं की देन होती है। विकसित एवं विकासशील देशों के कस्बे एवं नगर उनके विकास एवं नगर नियोजन में कइर् तरह की विभ्िान्नताएँ रखते हैं। विकसित देशों में अध्िकतर नगर योजनाब( तरीके से बसाये गए हैं जबकि विकासशील देशों में अध्िकतर नगरों कीउत्पिा ऐतिहासिक है तथा उनकी आवृफति अनियमित है। उदाहरण के तौर पर चंडीगढ़ एवं केनबरा नियोजित नगर हैं, जबकि भारत में छोटे कस्बे ऐतिहासिक रूप से परकोटे से बाहर की ओर बडे़ नगरीय पैफलाव में गैर योजनाब( तरीके से विकसित हुए हैं। अदीस अबाबा ;नवीन पुष्पद्ध इथोपिया का राजधनी नगर अदीस अबाबा जैसा कि इसके नाम से विदित होता है ;अदीस - नया, अबाबा - पुष्पद्ध एक नया नगर है जिसकी स्थापना 1878 में हुइर् थी। संपूणर् नगर पवर्तीय घाटी स्थलावृफति पर स्िथत है सड़कों का प्रारूप स्थानीय ध्रातल से प्रभावित है। राजकीय मुख्यालय प्याज्शा, अरात एवं आमिस्ट किलो से चारों ओर सड़वंेफ जाती हंै। मरकाटो में एक बहुत विकसित बाशार है,जिसके विषय मंे मान्यता है कि उत्तर में काहिरा एवं दक्ष्िाण मंे जोहंसबगर् के बीच ये सबसे बड़ा बाशार है। अदीस अबाबा चित्रा 10.7: अदीस अबाबा की आकारिकी जहाँ एक बहु संकाय विश्वविद्यालय, चिकित्सा महाविद्यालय एवं कइर् अच्छे स्वूफल होने की वजह से श्िाक्षा का भी एकमहत्त्वपूणर् वेंफद्र है। जिबूतीμ अदीस अबाबा रेलमागर् का अंतिम स्टेशन है। बोले हवाइर् अड्डा सापेक्षतः एक नया हवाइर् अड्डा है। इस नगर का तेशी से विकास हुआ है, क्योंकि यह इथोपिया के मध्य में स्िथत है एवं कइर् प्रकार के कायर् यहाँ संपन्न किए जाते हैं। केनबेरा अमेरिकन वास्तुविद वाल्टर बरली गि्रपिफन ने 1912 में आस्ट्रेलिया की राजधनी के लिए इस नगर की योजना बनाइर्। भू - दृश्य की प्रावृफतिक आवृफतियों को ध्यान में रखते हुए लगभग 25,000 निवासियों के रहने के लिए इस उद्यान नगर की कल्पना की थी। इसमें पाँच मुख्य वेंफद्र थे, प्रत्येक के अलग - अलग कायर् थे। पिछले वुफछ दशकों में कइर् उपनगर इसके समीप बन गए हैं जिनके अपने वेंफद्र हैं। नगर में बहुत खुले क्षेत्रा हैं एवं कइर् उद्यान तथा पावर्फ हैं। नगरीय बस्ितयों के प्रकार नगरीय बस्ती अपने आकार, उपलब्ध् सुविधओं एवं उनके द्वारा संपन्न किए जाने वाले कायो± के आधर पर कइर् नामों से पुकारी जाती हैं जैसे नगर, शहर, मिलियन सिटी, सन्नगर, विश्वनगरी। नगर नगर की संकल्पना को ग्राम के संदभर् में आसानी से समझा जा सकता है। केवल जनसंख्या का आकार ही मापदंड नहीं होता है। नगरों एवं ग्रामों में कायो± की विषमता सदैव स्पष्ट नहीं होती है परंतु वुफछ विशेष कायर् जैसे निमार्ण, खुदरा एवं थोक व्यापार एवं व्यावसायिक सेवाएँ नगरों में ही विद्यमान होती हैं। शहर यह अग्रणी नगर होता है। जो अपने स्थानीय व क्षेत्राीय प्रतिस्पिार्यों को पीछे छोड़ देता है। लेविस ममपफोडर् के शब्दों में, ‘वास्तव मंे शहर उच्च एवं अध्िक जटिल प्रकार के सहचारी जीवन का भौतिक रूप हैं।’ शहर नगरों से बडे़ होते हैं एवं इनके आथ्िार्क कायर् भी अध्िक होते हैं। यहाँ पर प्रमुखवित्तीय संस्थान, प्रादेश्िाक प्रशासकीय कायार्लय एवं यातायात के वेंफद्र होते हैं। जब इनकी जनसंख्या 10 लाख से अध्िक हो जाती है तब इन्हें मिलियन सिटी कहा जाता है। सन्नगर इस शब्दावली का प्रयोग 1915 में पैटिªक गिडिज ने किया था। यह विशाल विकसित नगरीय क्षेत्रा होते हैं जो कि मूलतः अलग - अलग नगरों या शहरों के आपस में मिल जाने से एक विशाल नगरीय विकास क्षेत्रा में परिवतिर्त हो जाता है। ग्रेटर लंदन, मानचेस्टर, श्िाकागो एवं टोक्यो इसके उदाहरण हैं। क्या आप भारत से ऐसा उदाहरण दे सकते हैं? विश्वनगरी यह यूनानी शब्द ‘मेगालोपोलिस’ से बना है जिसका अथर् होता है ‘विशाल नगर’। इसका प्रयोग 1957 में जीन गोटमेन ने किया। यह बड़ा महानगर प्रदेश होता है जिसमें सन्नगरों का समूह होता है। विश्वनगरी का सबसे अच्छा उदाहरण संयुक्तराज्य अमेरिका में है जहाँ उत्तर मंे बोस्टन से दक्ष्िाण में वाश्िांगटन तक नगरीय भूदृश्य के रूप में दिखाइर् देता है। मिलियन सिटी विश्व में मिलियन सिटी की संख्या पहले की अपेक्षा निरंतर बढ़ रही है। 1800 में लंदन इस श्रेणी में आया, 1850 में पेरिस, 1860 में न्यूयावर्फ तथा 1950 तक विश्व में 80 शहर मिलियन सिटी थे। मिलियन सिटी की वृि प्रत्येक तीसरे दशक में तीन गुनी हुइर् है। 1975 में इनकी संख्या 160 थी जो बढ़कर 2005 में 438 हो गइर्। तालिका 10.2: मिलियन सिटी का महाद्वीपों के अनुसार वितरण महाद्वीप आरंभ्िाक 1970 के 2000 1950 दशक के के मध्य मध्य यूरोप 23 30 58 एश्िाया 32 69 206 उत्तरी एवं मध्य अमेरिका 16 36 79 दक्ष्िाणी अमेरिका 8 17 43 अप्रफीका 3 8 46 आस्ट्रेलिया 2 2 6 विश्व योग 84 162 438 ड्डोत रू ूूूण्बपजलचवचनसंजपवदण्कमध्ॅवतसकण्ीजउस मेगासिटी का वितरण एक मेगासिटी शब्दावली उन नगरों के लिए प्रयुक्त की जाती है जिनकी जनसंख्या मुख्य नगर व उपनगरों को मिलाकर एक करोड़ से अध्िक हो। सबसे पहले 1950 में न्यूयावर्फ ने यह तालिका 10.3: विश्व के मेगासिटी ;28.1.2006 के अनुसारद्ध क्र.सं नगर का नाम देश जनसंख्या;दस लाख मेंद्ध 1 टोक्यो जापान 34.2 2 मेक्िसको सिटी मेक्िसको 22.8 3 सिओल दक्ष्िाणी कोरिया 22.3 4 न्यूयावर्फ स.रा. अमेरिका 21.9 5 साओ पाओलो ब्राजील 20.2 6 मुंबइर् भारत 19.9 7 दिल्ली भारत 19.7 8 शंघाइर् चीन 18.2 9 लोस एंजिल्स सं.रा.अमेरिका 18.0 10 ओसाका जापान 16.8 11 जकातार् इंडोनेश्िाया 16.6 12 कोलकाता भारत 15.7 13 काहिरा मिड्ड ;इजिप्टद्ध 15.6 14 मनीला पिफलीपींस 15.0 15 कराँची पाकिस्तान 14.3 16 मास्को रूस 13.8 17 ब्युन्स आयसर् अजे±टाइना 13.5 18 ढाका बंाग्लादेश 13.3 19 रियो डी जेनेरो ब्राजील 12.2 20 बीजिंग चीन 12.1 21 लंदन ग्रेट बि्रटेन 12.0 22 तेहरान इर्रान 11.9 23 इस्तांबुल तुकीर् ;टरकीद्ध 11.5 24 लागोस नाइजीरिया 11.1 25 शेनझेन चीन 10.7 ड्डोत रू ूूूण्बपजलचवचनसंजपवदण्कमध्ॅवतसकण्ीजउस 100 मानव भूगोल के मूल सि(ांत श्रेय प्राप्त किया था जब उसकी जनसंख्या 1 करोड़ 25 लाख हो गइर्। वतर्मान में 25 मेगासिटी हैं। पिछले 50 वषो± में विकसित देशों की अपेक्षा विकासशील देशों में इनकी संख्या बढ़ी है। विकासशील देशों में मानव बस्ितयों की समस्याएँ विकासशील देशों में बस्ितयों से संबंध्ित कइर् प्रकार की समस्याएँ हंै जैसे अवहनीय जनसंख्या का वेंफद्रीकरण, छोटे व तंग आवास एवं गलियाँ, पीने योग्य जल जैसी सुविधओं की कमी। इसके अतिरिक्त इनमें आधरभूत ढाँचा जैसे बिजली, गंदे पानी की निकासी, स्वास्थ्य एवं श्िाक्षा आदि सुविधओं की भी कमी होती है। ियाकलाप ग्रामीण/नगरीय समस्याएँ क्या आप अपने नगर/कस्बे/ग्राम में उत्पन्न निम्नलिख्िात समस्याओं मंे से किसी एक की भी पहचान कर सकते हैं? पीने योग्य जल की उपलब्ध्ता विद्युत आपूतिर् मल निकास व्यवस्था परिवहन एवं संचार सुविधएँ स्वास्थ्य एवं श्िाक्षा की अवसंरचना जल एवं वायु प्रदूषण क्या आप उपरोक्त समस्याओं के समाधन सोच सकते हैं। नगरीय बस्ितयों की समस्याएँ रोशगार के अवसर एवं नागरिक सुविधओं के लिए मानव शहरों की ओर आता है। परंतु विकासशील देशों में अध्िकतर शहर अनियोजित हैं अतः आने वाले व्यक्ित अत्यंत भीड़ की स्िथति पैदा कर देते हंै। विकासशील देशों के आध्ुनिक शहरांे में आवासांे की कमी लंाबवत विस्तार ;बहुमंजिल मकानद्ध तथा गंदी बस्ितयों की वृि प्रमुख विशेषताएँ हैं। अनेक शहरों में जनसंख्या का बढ़ता भाग निम्न स्तरीय आवासों जैसे गंदी बस्ितयों, अनध्िवृफत बस्ितयों में रहते हैं। भारत के अध्िकांश मिलीयन सिटी 25 प्रतिशत निवासी अवैध् बस्ितयों में रहते हैं और ऐसे नगर अन्य नगरों की अपेक्षा दोगुनी तेशी से बढ़ रहे हैं। एश्िाया पेसिपिफक देशों में नगरीय जनसंख्या का 60 प्रतिशत भाग अनध्िवृफत बस्ितयों मंे रहता ह।ैचित्रा 10.9: गंदी बस्ती एक स्वस्थ शहर क्या है? विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बतलाया कि एक स्वस्थ शहर में निम्न सुविधएँ अवश्य होनी चाहिए: ऽ ‘स्वच्छ’ एवं ‘सुरक्ष्िात’ वातावरण ऽ सभी निवासियों वफी आधरभूत आवश्यकताओं की पूतिर् ऽ स्थानीय सरकार में समुदाय की भागीदारी ऽ सभी के लिए आसानी से उपलब्ध् स्वास्थ्य सुविधएँ आथ्िार्क समस्याएँ विश्व के विकासशील देशों के ग्रामीण व छोटे नगरीय क्षेत्रों में रोशगार के घटते अवसरों के कारण जनसंख्या का शहरों की ओर पलायन हो रहा है। यह विशाल प्रवासी जनसंख्या नगरीय क्षेत्रों, अवुफशल एवं अध्र्वुफशल श्रमिकों, की संख्या में अत्यिाक वृि कर देती है, जबकि इन क्षेत्रों में जनसंख्या पहले से ही चरम पर होती है। सामाजिक - सांस्वृफतिक समस्याएँ विकासशील देशों के शहर विभ्िान्न प्रकार की सामाजिकबुराइयों से ग्रस्त हैं। अपयार्प्त वित्तीय संसाध्नों के कारण बहुसंख्यक निवासियों की आधरभूत सामाजिक ढाँचागत आवश्यकताएँ भी पूरी नहीं हो पाती हैं। उपलब्ध् स्वास्थ्य एवं श्िाक्षा संबंध्ी सुविधाएँ गरीब नगरवासियों की पहँुच से बाहर रहती हैं। विकासशील देशों में स्वस्थ सूचक भी एक निराशाजनक चित्रा प्रस्तुत करते हैं। बेरोशगारी एवं श्िाक्षा की कमी के कारण अपराध् अध्िक होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से स्थानांतरित जनसंख्या में पुरुषों की अध्िकता के कारण इन नगरों में जनसंख्या का लिंग अनुपात असंतुलित हो जाता है। पयार्वरण संबंध्ी समस्याएँ विकासशील देशों में रहने वाली विशाल नगरीय जनसंख्या जल का केवल उपयोग ही नहीं करती वरन् जल एवं सभी प्रकार के व्यथर् पदाथो± का निस्तारण भी करती है। विकासशील देशों के अनेक नगरों में पीने योग्य पानी की न्यूनतम आवश्यकता की पूतिर् तथा घरेलू और औद्योगिक उपयोग के लिए जल की उपलब्ध्ता सुनिश्िचत करना अत्यध्िक कठिन है। घरेलू एवं औद्योगिक कायो± के लिए परंपरागत ईंध्न के व्यापक उपयोग के कारण वायु प्रदूष्िात हो जाती है। एक अनुपयुक्त मल निस्तारण व्यवस्था अस्वास्थ्यकर दशाएँ पैदा करती हैं। घरेलू एवं औद्योगिक अपश्िाष्ट को सामान्य मल - व्यवस्था में डाल दिया जाता है या बिना किसी शोध्न के अनिश्िचत स्थानों में डाल दिया जाता है। जनसंख्या को आवास प्रदान करने के लिए विशाल वंफकरीट ढाँचे बनाए जाते हैं जो नगरों में ‘उष्म द्वीप’ बनाने में सहायक भूमिका निभाते हैं। समान, संसाध्न एवं मनुष्यों के संचलन के द्वारा शहर, नगर एवं ग्रामीण बस्ती आपस में एक दूसरे के संपवर्फ में रहते हैं। मानव बस्ितयों को बनाए रखने के लिए नगरीय - ग्रामीण संपवर्फ अत्यंत आवश्यक है। विशेष रूप से विकासशील देशों में ग्रामीण जनसंख्या की वृि ने रोशगार सृजन एवं आथ्िार्क अवसरों को पीछे धकेल दिया है जिसके कारण ग्रामीण जनसंख्या का नगरों की ओर प्रवास क्रमशः बढ़ा है। जिसने नगरीय क्षेत्रों में पहले से ही समस्याग्र्रस्त ढाँचागत सुविधओं और सेवाओं पर बहुत अिाक दबाव बढ़ा दिया है। ग्रामीण निधर्नता को दूर करना शीघ्र आवश्यक है। ग्रामीण बस्ितयों में रहन - सहन के स्तर को सुधरना एवं वहाँ रोशगार व श्िाक्षा के अवसरों का सृजन करना भी आवश्यक है। ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों मंे विभ्िान्न आथ्िार्क सामाजिक एवं पयार्वरणीय आवश्यकताओं को संतुलित करके उनके अनुपूरक योगदान तथा संपको± का पूरा - पूरा लाभ उठाना चाहिए। नगरीय रणनीति की योजना संयुक्त राष्ट्र विकास कायर्क्रम ने ‘नगर रणनीति’ में निम्न प्राथमिकताएँ बताइर् हैंः ऽ नगरीय निध्र्नों के लिए ‘आश्रयस्थल’ में वृि ऽ आधरभूत नगरीय सुविधओं जैसे श्िाक्षा, प्राथमिक स्वास्थ्य, स्वच्छ जल और सपफाइर् का प्रबंध् आदि को उपलब्ध् करवाना। ऽ महिलाओं की ‘मूलभूत सेवाओं’ तथा राजकीय सुविधाओं तक पहुँच में सुधर ऽ उजार् उपयोग तथा वैकल्िपक परिवहन तंत्रा को उन्नत बनाना। ऽ वायु प्रदूषण को कम करना। अभ्यास 1ण् नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिएः ;पद्ध निम्न में से किस प्रकार की बस्ितयाँ सड़क, नदी या नहर के किनारे होती हैं? ;अद्ध वृत्ताकार ;सद्ध चैक पट्टðी ;बद्ध रेखीय ;दद्ध वगार्कार 102 मानव भूगोल के मूल सि(ांत ;पपद्ध निम्न में से कौन - सी एक अथ्िार्क िया ग्रामीण बस्ितयों की मख्य आथ्िाक िया हैा ुर्? ;कद्ध प्राथमिक ;खद्ध तृतीयक ;गद्ध द्वितीयक ;घद्ध चतुथर् ;पपपद्ध निम्न में से किस प्रदेश में प्रलेख्िात प्राचीनतम नगरीय बस्ती रही है? ;कद्ध ह्नांगही की घाटी ;खद्ध सिंध्ु घाटी ;गद्ध नील घाटी ;घद्ध मेसोपोटामिया ;पअद्ध 2006 के प्रारंभ में भारत में कितने मिलियन सिटी थे? ;कद्ध 40 ;खद्ध 41 ;गद्ध 42 ;घद्ध 43 ;अद्ध विकासशील देशों की जनसंख्या के सामाजिक ढाँचे के विकास एवं आवश्यकताओं की पूतिर्में कौन से प्रकार के संसाध्न सहायक हैं? ;कद्ध वित्तीय ;खद्ध मानवीय ;गद्ध प्रावृफतिक ;घद्ध सामाजिक 2ण् निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए: ;पद्ध आप बस्ती को वैफसे परिभाष्िात करेंगे? ;पपद्ध स्थान ;साइटद्ध एवं स्िथति ;सिचुएसनद्ध के मध्य अंतर बताएँ। ;पपपद्ध बस्ितयों के वगीर्करण के क्या आधर हैं? ;पअद्ध मानव भूगोल में मानव बस्ितयों के अध्ययन का औचित्य बताएँ। 3ण् निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों से अध्िक में न दीजिए: ;पद्ध ग्रामीण एवं नगरीय बस्ती किसे कहते हैं? उनकी विशेषताएँ बताएँ। ;पपद्ध विकासशील देशों में नगरीय बस्ितयों की समस्याओं का विवेचन कीजिए। ;पद्ध क्या आप शहर में रहते हैं? यदि नहीं तो क्या शहर के समीप रहते हैं? क्या आपकाजीवन शहर से जुड़ा हुआ है?;कद्ध इसका क्या नाम है?;खद्ध यह कब बसा?;गद्ध इसकी यह स्िथति क्यों चुनी गइर्?;घद्ध इसकी जनसंख्या कितनी है?;डद्ध यह कौन - से कायर् करता है?;चद्ध अपने शहर का एक खाका ;स्केचद्ध बनाकर उसमें किए जाने वाले कायो± को पहचानिए।प्रत्येक विद्याथीर् चयनित शहर से जुड़ी हुइर् पाँच चीशों की सूची बनाए जो अन्यत्रा नहीं पाइर् जाती हो। यह शहर कीएक छोटी परिभाषा होगी जैसा कि विद्याथीर् इसे देखता है। कक्षा में इस सूची को एक दूसरे से मिलाएँ एवं देखें किसूचियों के बारे में आपस में कितनी सहमति है। ;पपद्ध क्या आप किसी ऐसी युक्ित के विषय में सोच सकते हैं, जिसके प्रयोग से आप अपनी बस्ती मेंप्रदूषण कम करने में सहायता कर सकते हैं। संकेत: ;अद्ध उचित वूफड़ा - करकट निस्तारण ;बद्ध सावर्जनिक यातायात के साध्नों का प्रयोग ;सद्ध घरेलू पानी उपयोग का बेहतर प्रबंध्न ;दद्धआस - पास के क्षेत्रों में वृक्षारोपण

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