अध्याय - 9 अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार आप एक ‘तृतीयक ियाकलाप’ के रूप में ‘व्यापार’ शब्द से पहले ही परिचित हैं जो आप इस पुस्तक के अध्याय 7 में पढ़ चुके हैं। आप जानते हैं कि व्यापार का तात्पयर् वस्तुओं और सेवाओं के स्वैच्िछक आदान - प्रदान से होता है। व्यापार करने के लिए दो पक्षों का होना आवश्यक है। एक व्यक्ित/पक्ष बेचता है और दूसरा खरीदता है। वुफछ स्थानों पर लोग वस्तुओं का विनिमय करते हैं। व्यापार दोनांे ही पक्षों के लिए समान रूप से लाभदायक होता है। व्यापार दो स्तरों पर किया जा सकता है - अंतरार्ष्ट्रीय और राष्ट्रीय। अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार विभ्िान्न राष्ट्रों के बीच राष्ट्रीय सीमाओं के आर - पार वस्तुओं और सेवाओं के आदान - प्रदान को कहते हैं। राष्ट्रों को व्यापार करने की आवश्यकता उन वस्तुओं को प्राप्त करने के लिए होती है, जिन्हें या तो वे ;देशद्ध स्वयं उत्पादित नहीं कर सकते या जिन्हें वे अन्य स्थान से कम दामों में खरीद सकते हैं। आदिम समाज में व्यापार का आरंभ्िाक स्वरूप ‘विनिमय व्यवस्था’ था, जिसमें वस्तुओं का प्रत्यक्ष आदान - प्रदान होता था अथार्त् वस्तु के बदले में रुपये के स्थान पर वस्तु दी जाती थी। इस व्यवस्था में यदि आप एक वुफम्हार होते और आपको एक नलसाश की आवश्यकता होती, तो आपको एक ऐसा नलसाश ढूँढ़ना पड़ता, जिसे आप द्वारा बनाए हुए बतर्नों की आवश्यकता होती और आप उसकी नलसाश की सेवाओं के बदले अपने बतर्न देकर आदान - प्रदान कर सकते थे। एकमात्रा मेला है, जहाँ विनिमय व्यवस्था आज भी जीवित है। इस मेले के दौरान एक बडे़ बाशार की व्यवस्था की जाती है और विभ्िान्न जनजातियों तथा समुदायों के लोग अपनी वस्तुओं का आदान - प्रदान करते हैं। रुपये अथवा मुद्रा के आगमन के साथ ही विनिमय व्यवस्था की कठिनाइयों को दूर कर लिया गया। पुराने समय में कागशी व धत्िवक मुद्रा के आगमन से पहले उच्च नैजमान मूल्य वाली दुलर्भ वस्तुओं को मुद्रा के रूप में प्रयुक्त किया जाता था जैसे - चकमक पत्थर, आब्सीडियन, ;आग्नेय काँचद्ध,काउरी शेल, चीते के पंजे, ह्वेल के दाँत, वुफत्ते के दाँत, खालें, बाल ;पफरद्ध, मवेशी, चावल, पैपरकानर्, नमक, छोटे यंत्रा, ताँबा, चाँदी और स्वणर्। क्या आप जानते हैं क्या आप जानते हैं कि ‘सैलेरी’ ;ैंसंतलद्ध शब्द लैटिन शब्द ‘सैलेरिअम’ ;ैंसंतपनउद्ध से बना है, जिसका अथर् है नमक के द्वारा भुगतान। क्योंकि उस समय समुद्र के जल से नमक बनाना ज्ञात नहीं था और इसे केवल खनिज नमक से बनाया जा सकता था, जो उस समय प्राय: दुलर्भ और खचीर्ला था, यही वजह है कि यह भुगतान का एक माध्यम बना। अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार का इतिहास प्राचीन समय में, लंबी दूरियों तक वस्तुओं का परिवहन जोख्िामपूणर् होता था, इसलिए व्यापार स्थानीय बाशारों तक ही सीमित था। लोग तब अपने संसाध्नों का अध्िकंाश भाग मूलभूत आवश्यकताओं - भोजन और वस्त्रा पर खचर् करते थे। केवल ध्नी लोग ही आभूषण व महँगे परिधन खरीदते थे, और परिणामस्वरूप विलास की वस्तुओं का व्यापार आरंभ हुआ। रेशम मागर् लंबी दूरी के व्यापार का एक आरंभ्िाक उदाहरण है, जो 6000 कि.मी. लंबे मागर् के सहारे रोम को चीन से जोड़ता था। व्यापारी भारत, पश्िार्या ;इर्रानद्ध और मध्यएश्िाया के मध्यवतीर् स्थानों से चीन में बने रेशम, रोम की ऊन व बहुमूल्य धतुओं तथा अन्य अनेक महँगी वस्तुओं का परिवहन करते थे। रोमन साम्राज्य के विखंडन के पश्चात् 12वीं और 13वीं शताब्दी के दौरान यूरोपीय वाण्िाज्य में वृि हुइर्। समुद्रगामी यु(पोतों के विकास के साथ ही यूरोप तथा एश्िाया के बीच व्यापार बढ़ा तथा अमेरिका की खोज हुइर्। 15वीं शताब्दी से ही यूरोपीय उपनिवेशवाद शुरू हुआ और विदेशी वस्तुओं के साथ व्यापार के साथ ही व्यापार के एक नए स्वरूप का उदय हुआ, जिसे ‘दास व्यापार’ कहागया। पुतर्गालियों, डचों, स्पेनिश लोगों व अंग्रेशों ने अप्रफीकी मूल निवासियों को पकड़ा और उन्हें बलपूवर्वफ, बागानों में श्रम हेतु नए खोजे गए अमेरीका में परिवहित किया। दास व्यापार दो सौ वषो± से भी अध्िक समय तक एक लाभदायक व्यापार रहा जब तक कि यह 1792 में डेनमावर्फ में, 1807 में ग्रेट बि्रटेन में और 1808 में संयुक्त राज्य में पूणर्रूपेण समाप्त नहीं कर दिया गया। औद्योगिक क्रांति के पश्चात्, कच्चे माल जैसे - अनाज,मांस, ऊन की माँग भी बढ़ी, लेकिन विनिमार्ण की वस्तुओं की तुलना में उनका मौदि्रक मूल्य घट गया। औद्योगीवृफत राष्ट्रों ने कच्चे माल के रूप में प्राथमिक उत्पादों का आयात किया और मूल्यपरक तैयार माल को वापस अनौद्योगीवृफत राष्ट्रों को नियार्त कर दिया।19वीं शताब्दी के उत्तरा(र् में, प्राथमिक वस्तुओं काउत्पादन करने वाले प्रदेश अध्िक महत्त्वपूणर् नहीं रहे और औद्योगिक राष्ट्र एक दूसरे के मुख्य ग्राहक बन गए। प्रथम व द्वितीय विश्व यु( के दौरान पहली बार राष्ट्रों ने करती है। यह विभ्िान्न उत्पादों की विविध्ता कोव्यापार कर और संख्यात्मक प्रतिबंध् लगाए। विश्व यु( के बाद भी सुनिश्िचत करती है, उदाहरणतः ऊन - उत्पादन ़तथाके समय के दौरान ‘व्यापार व शुल्क हेतु सामान्य समझौता’ ठंडे क्षेत्रों में ही हो सकता हैऋ केला, रबड;ळ।ज्ज्द्ध जैसे संस्थाओं ने ;जो कि बाद में विश्व व्यापार संगठन ॅज्व् बनाद्ध शुल्क को घटाने में सहायता की। अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार अस्ितत्व में क्यों है? अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार उत्पादन मंे विश्िाष्टीकरण का परिणाम है। यह विश्व की अथर्व्यवस्था को लाभान्िवत करता है, यदि विभ्िान्न राष्ट्र वस्तुओं के उत्पादन या सेवाओं वफी उपलब्ध्ता में श्रम विभाजन तथा विशेषीकरण को प्रयोग में लाएँ। हर प्रकार का विश्िाष्टीकरण व्यापार को जन्म दे सकता है। इस प्रकार अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार वस्तुओं और सेवाओं के तुलनात्मक लाभ, परिपूरकता व हस्तांतरणीयता के सि(ांतों पर आधरित होता है और सि(ांततः यह व्यापारिक भागीदारों को समान रूप से लाभदायक होना चाहिए। आध्ुनिक समय में व्यापार, विश्व के आथ्िार्क संगठन का आधर है और यह राष्ट्रों की विदेश नीति से संबंध्ित है। सुविकसित परिवहन तथा संचार प्रणाली से युक्त कोइर् भी देश अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार में भागीदारी से मिलने वाले लाभों को छोड़ने का इच्छुक नहीं है। अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार के आधर ;पद्ध राष्ट्रीय संसाध्नों में भ्िान्नता: भौतिक संरचना जैसे कि भूविज्ञान, उच्चावच, मृदा व जलवायु में भ्िान्नता के कारण विश्व के राष्ट्रीय संसाध्न असमान रूप से विपरीत हैं। ;कद्ध भौगोलिक संरचना खनिज संसाध्न आधर को निधर्रित करती है और ध्रातलीय विभ्िान्नताएँ पफसलों व पशुओं की विविध्ता सुनिश्िचत करती हैं। निम्न भूमियों में वृफष्िा - संभाव्यता अध्िक होती है। पवर्त पयर्टकों को आकष्िार्त करते हैं और पयर्टन को बढ़ावा देते हैं। ;खद्ध खनिज संसाध्न संपूणर् विश्व में असमान रूप से वितरित हैं। खनिज संसाध्नों की उपलब्ध्ता औद्योगिक विकास का आधर प्रदान करती है। ;गद्ध जलवायु किसी दिए हुए क्षेत्रा में जीवित रह जाने वाले पादप व वन्य जात के प्रकार को प्रभावित कहवा उष्ण कटिबंध्ीय क्षेत्रों में ही उग सकते हैं। ;पपद्ध जनसंख्या कारक: विभ्िान्न देशों में जनसंख्या के आकार, वितरण तथा उसकी विविध्ता व्यापार की गइर् वस्तुओं के प्रकार और मात्रा को प्रभावित करते हैं। ;कद्ध सांस्वृफतिक कारक: विश्िाष्ट संस्वृफतियों में कला तथा हस्तश्िाल्प के विभ्िान्न रूप विकसित हुए हैं जिन्हें विश्व - भर में सराहा जाता है। उदाहरणस्वरूपचीन द्वारा उत्पादित उत्तम कोटि का पाॅसर्लिन ;चीनी मिट्टðी का बतर्नद्ध तथा ब्रोकेड ;किमखाब - जरीदार या बूटेदार कपड़ाद्ध। इर्रान केकालीन प्रसि( हैं, जबकि उत्तरी अप्रफीका का चमडे़ का काम और इंडोनेश्िायाइर् बटिक ;छींट वालाद्ध वस्त्रा बहुमूल्य हस्तश्िाल्प हैं। ;खद्ध जनसंख्या का आकार: सघन बसाव वाले देशों में आंतरिक व्यापार अध्िक है जबकि बाहªय व्यापार कम परिमाण वाला होता है, क्योंकि वृफषीय और औद्योगिक उत्पादों का अध्िकांश भाग स्थानीय बाशारों में ही खप जाता है।जनसंख्या का जीवन स्तर बेहतर गुणवत्ता वाले आयातित उत्पादों की माँग को निधर्रित करता है क्योंकि निम्न जीवन स्तर के साथ केवल वुफछ लोग ही महँगी आयातित वस्तुएँ खरीद पाने में समथर् होते हैं। ;पपपद्ध आथ्िार्क विकास की प्रावस्था: देशों के आथ्िार्क विकास की विभ्िान्न अवस्थाओं में व्यापार की गइर् वस्तुओं का स्वभाव ;प्रकारद्ध परिवतिर्त हो जाता है।वृफष्िा की दृष्िट से महत्त्वपूणर् देशों में, विनिमार्ण की वस्तुओं के लिए वृफष्िा उत्पादों का विनिमय किया जाता है, जबकि औद्योगिक राष्ट्र मशीनरी और निमिर्त उत्पादों का नियार्त करते हैं तथा खाद्यान्न तथा अन्य कच्चे पदाथो± का आयात करते हैं। ;पअद्ध विदेशी निवेश की सीमा: विदेशी निवेश विकासशील देशों में व्यापार को बढ़ावा दे सकता है जिनके पास खनन, प्रवेध्न द्वारा तेल - खनन, भारी अभ्िायांत्रिाकी, काठ कबाड़ तथा बागवानी वृफष्िा के विकास के लिए आवश्यक पूँजी का अभाव है। विकासशील देशों में ऐसे पूँजी प्रधन उद्योगों के विकास द्वारा औद्योगिक राष्ट्र खाद्य पदाथो±, खनिजों का आयात सुनिश्िचत करते हैं तथा अपने निमिर्त उत्पादों के लिए बाशार निमिर्त करते हैं। यह संपूणर् चक्र देशों के बीच में व्यापार के परिमाण को आगे बढ़ाता है। ;अद्ध परिवहन: पुराने समय में परिवहन के पयार्प्त और समुचित साध्नों का अभाव स्थानीय क्षेत्रों में व्यापार को प्रतिबंिात करता था। केवल उच्च मूल्य वाली वस्तुओं, जैसे - रत्न, रेशम तथा मसाले का लंबी दूरियों तक व्यापार किया जाता था। रेल, समुद्री तथा वायु परिवहन के विस्तार और प्रशीतन तथा परिरक्षण के बेहतर साध् नों के साथ, व्यापार ने स्थानिक विस्तार का अनुभव किया ह।ैअंतरार्ष्ट्रीय व्यापार के महत्त्वपूणर् पक्ष आर सैेवाओं के प्रकार में परिवतर्न हुए हैं। पिछली शताब्दी के आरंभ में, प्राथमिक उत्पादों का व्यापार प्रधन था। बाद में, विनिमिर्त वस्तुओं ने प्रमुखता प्राप्त कर ली और वतर्मान समय में यद्यपि विश्व व्यापार का अध्िकांश विनिमार्ण क्षेत्रा के आध्िपत्य में है, सेवा क्षेत्रा जिसमें यात्रा, परिवहन तथा अन्य व्यावसायिकसेवाएँ सम्िमलित हैं, उपरिगामी प्रवृिा दशार् रहा है। अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार के तीन बहुत महत्त्वपूणर् पक्ष हैं। ये हंै वषर् परिमाण, प्रखंडीय संयोजन और व्यापार की दिशा। ड्डोत: विश्व व्यापार संगठन, व्यापार सांख्ियकी, 2002 चित्रा 9.2: वस्तुओं व सेवाओं का नियार्त, 1980 - 2000 व्यापार का परिमाण वुफल विश्व व्यापार में विभ्िान्न वस्तु समूहों का अंश नीचे ़व्यापार की गइर् वस्तुओं का वास्तविक तौल परिमाण कहलाता ग्रापफ में देखा जा सकता है। है। हालाँकि व्यापारिक सेवाओं को तौल में नहीं मापा जा सकता। इसलिए व्यापार की गइर् वस्तुओं तथा सेवाओं के वुफल मूल्य को व्यापार के परिमाण के रूप में जाना जाता है। ियाकलाप आप क्यांे सोचते हैं कि पिछले दशकों में व्यापार का परिमाण बढ़ा है? क्या इन आँकड़ों की तुलना की जा सकती है? 1955 की तुलना मंे 2005 में कितनी वृि हुइर् है? व्यापार संयोजन पिछली शताब्दी में, देशोें द्वारा आयातित तथा नियार्तित वस्तुओं 1955 1965 1975 1985 1995 2005 नियार्त वुफल व्यापारिक माल आयात वुफल व्यापारिक माल 95,000 99,000 1,90,000 1,99,000 8,77,000 9,12,000 19,54,000 20,15,000 51,62,000 52,92,000 1,03,93,000 1,07,53,000 ड्डोत: विश्व व्यापार संगठन - अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार सांख्ियकी, 2005 उपयुर्क्त ग्राप़्ाफ को देखकर हमें ज्ञात होता है कि मशीनरी और परिवहन उपकरण, ईंध्न और खदान उत्पाद, कायार्लय और दूरसंचार उपकरण, रसायन, मोटरगाड़ी के पुजेर्, वृफष्िा उत्पाद, लौह और इस्पात, कपडे़ तथा वस्त्रा व्यापारिक माल का ज्िानका संपूणर् विश्व में व्यापार किया जाता है, एक बडे़ भाग की संरचना करते हैं। सेवा क्षेत्रा में व्यापार, विनिमार्ण क्षेत्रा तथा प्राथमिक उत्पादों के व्यापार से बिल्वुफल भ्िान्न है, क्योंकि सेवाओं का अपरिमित विस्तार किया जा सकता है, भारहीन है और एक बार उत्पादित किए जाने पर आसानी से प्रतिवलित की जा सकती हैं और इस प्रकार वस्तुओं के उत्पादन से कहीं अध्िक लाभ उत्पन्न करने में समथर् हैं। चार भ्िान्न मागर् हैं, जिनके द्वारा सेवाओं की आपूतिर् की जा सकती है। तालिका 9.2 सेवाओं के विभ्िान्न प्रकार तथा उन सेवाओं के अंश को, जिनकी अंतरार्ष्ट्रीय बाशारों में आपूतिर् की गइर् है, दशार्ता है। ड्डोत: विश्व व्यापार संगठन, व्यापार संाख्ियकी, 2005 व्यापार की दिशा ऐतिहासिक रूप से, वतर्मान कालिक विकासशील देश मूल्यपरक वस्तुओं तथा श्िाल्प आदि का नियार्त किया करते थे जो यूरोपीय देशों को नियार्त की जाती थी। 19वीं शताब्दी के दौरान व्यापार की दिशा में प्रत्यावतर्न हुआ। यूरोपीय देशों ने विनिमार्ण वस्तुओं को अपने उपनिवेशों से खाद्य पदाथर् तथा कच्चे माल के बदले, नियार्त करना शुरू कर दिया। यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व में बडे़ व्यापारिक साझेदार के रूप में उभरे और विनिमार्ण वस्तुओं के व्यापार में अग्रणी बने। उस समय जापानभी तीसरा महत्त्वपूूणर् व्यापारिक देश था। 20वीं शताब्दी केउत्तरा(र् में विश्व व्यापार की प(ति में तीव्र परिवतर्न हुए। यूरोप के उपनिवेश समाप्त हो गए जबकि भारत, चीन और अन्य विकाशील देशों ने विकसित देशों के साथ प्रतिस्पधर् शुरू कर दी। व्यापारित वस्तुओं की प्रवृफति भी बदल गइर्। व्यापार संतुलन व्यापार संतुलन, एक देश के द्वारा अन्य देशों को आयात एवं 86 मानव भूगोल के मूल सि(ांत इसी प्रकार नियार्त की गइर् वस्तुओं एवं सेवाओं की मात्रा ;परिमाणद्ध का प्रलेखन करता है। यदि आयात का मूल्य, देश के नियार्त मूल्य की अपेक्षा अध्िक है तो देश का व्यापार संतुलन )णात्मक अथवा प्रतिवूफल है। यदि नियार्त का मूल्य, आयात के मूल्य की तुलना में अध्िक है तो देश का व्यापार संतुलन ध्नात्मक अथवा अनुवूफल है। एक देश की आथ्िार्की के लिए व्यापार संतुलन एवं भुगतान संतुलन के गंभीर निहिताथर् होते हैं। एक )णात्मक संतुलन का अथर् होगा कि देश वस्तुओं के क्रय पर उससे अिाक व्यय करता है जितना कि अपने सामानों के विक्रय सेअजिर्त करता है। यह अंतिम रूप में वित्तीय संचय की समाप्ित को अभ्िाप्रेरित करता है। अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार के प्रकार अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार को दो प्रकारों में वगीर्वृफत किया जा सकता है: ;कद्धद्विपाश्िर्वक व्यापार: द्विपाश्िर्वक व्यापार दो देशों के द्वारा एक दूसरे के साथ किया जाता है। आपस में निदिर्ष्ट वस्तुओं का व्यापार करने के लिए वे सहमति करते हैं। उदाहरणाथर् देश ‘क’ वुफछ कच्चे पदाथर् के व्यापार के लिए इस समझौते के साथ सहमत हो सकता है कि देश ‘ख’ वुफछ अन्य निदिर्ष्ट सामग्री खरीदेगा अथवा स्िथति इसके विपरीत भी हो सकती है। ;खद्धबहु पाश्िर्वक व्यापार: जैसा कि शब्द से स्पष्ट होता है कि बहुु पाश्िर्वक व्यापार बहुत से व्यापारिक देशों के साथ किया जाता है। वही देश अन्य अनेक देशों के साथ व्यापार कर सकता है। देश वुफछ व्यापारिक साझेदारों को ‘सवार्ध्िक अनुवूफल राष्ट्र’ ;डथ्छद्ध की स्िथति प्रदान कर सकता है। मुक्त व्यापार की स्िथति व्यापार हेतु अथर्व्यवस्थाओं को खोलने का कायर् मुक्त व्यापार अथवा व्यापार उदारीकरण के रूप में जाना जाता है। यह कायर् व्यापारिक अवरोधें जैसे सीमा शुल्क को घटाकर किया जाता है। घरेलू उत्पादों एवं सेवाओं से प्रतिस्पधार् करने के लिए व्यापार उदारीकरण सभी स्थानांे से वस्तुओं और सेवाओं के लिए अनुमति प्रदान करता है। भूमंडलीकरण और मुक्त व्यापार विकासशील देशों की अथर्व्यवस्थाओं को उन पर प्रतिवूफल थोपते हुए तथा उन्हें विकास के समान अवसर न देकर बुरी तरह से प्रभावित कर सकते हैं। परिवहन एवं संचार तंत्रा के विकास के साथ ही वस्तुएँ एवं सेवाएँ पहले की अपेक्षा तीव्रगति से एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँच सकती है। विंफतु व्यापार मुक्त व्यापार को केवल संपन्न देशों के द्वारा ही बाशारों की ओर नहीं ले जाना चाहिए, बल्िक विकसित देशों को चाहिए कि वे अपने स्वयं के बाशारों को विदेशी उत्पादों से संरक्ष्िात रखें। देशों को भी डंप की गइर् वस्तुओं से सतकर् रहने की आवश्यकता है, क्योंकि मुक्त व्यापार के साथ इस प्रकार की सस्ते मूल्य की डंप की गइर् वस्तुएँ घरेलू उत्पादकों को नुकसान पहँुचा सकती है। डंप करना लागत की दृष्िट से नहीं वरन् भ्िान्न - भ्िान्न कारणों से अलग - अलग कीमत की किसी वस्तु को दो देशों में विक्रय करने की प्रथा डंप करना कहलाती है। विश्व व्यापार संगठन 1948 में विश्व को उच्च सीमा शुल्क और विभ्िान्न प्रकार की अन्य बाधओं से मुक्त कराने हेतु वुफछ देशों के द्वारा जनरल एग्रीमेंट आॅन टेªड एंड टैरिपफ ;ळ।ज्ज्द्ध का गठन किया गया। 1994 में सदस्य देशों के द्वारा राष्ट्रों के बीच मुक्त एवं निष्पक्ष व्यापार वफो बढ़ा प्रोन्नत करने के लिए एक स्थायी संस्था के निमार्ण का निश्चय किया गया था तथा जनवरी 1995 से ;ळ।ज्ज्द्ध को विश्व व्यापार संगठन ;ॅज्व्द्ध में रूपांतरित कर दिया गया। विश्व व्यापार संगठन एकमात्रा ऐसा अंतरार्ष्ट्रीय संगठन है जो राष्ट्रों के मध्य वैश्िवक नियमों का व्यवहार करता है। यह विश्वव्यापी व्यापार तंत्रा के लिए नियमों को नियत करता है और इसके सदस्य देशों के मध्य विवादों का निपटारा करता है। विश्व व्यापार संगठन दूरसंचार और बैं¯कग जैसी सेवाओं तथा अन्य विषयों जैसे बौिक संपदा अिाकार के व्यापार को भी अपने कायो± में सम्िमलित करता है। उन लोगों के द्वारा विश्व व्यापार संगठन की आलोचना एवं विरोध किया गया है जो मुक्त व्यापार और अथर्व्यवस्था के भूमंडलीकरण के प्रभावों से परेशान हैं। इस पर तवर्फ किया गया है कि मुक्त व्यापार आम लोगों के जीवन को अिाक संपन्न नहीं बनाता। धनी देशों को और अिाक ध्नी बनाकर यह वास्तव में गरीब और अमीर के बीच की खाइर् को बढ़ा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि विश्व व्यापार संगठन में प्रभावशाली राष्ट्र केवल अपने वाण्िाज्ियक हितों पर ध्यान वेंफदि्रत करते हैं। इसके अतिरिक्त अनेक विकसित देशों ने अपने बाशारों को विकसित देशों के उत्पादों के लिए पूरी तरह से नहीं खोला है। यह भी तवर्फ दिया जाता है कि स्वास्थ्य, श्रमिकों के अिाकार, बाल श्रम और पयार्वरण जैसे मुद्दों की उपेक्षा की गइर् है। क्या आप जानते हैं विश्व व्यापार संगठन का मुख्यालय जिनेवा ;स्िवटजरलैंडद्ध में स्िथत है। दिसंबर 2005 में 149 देश विश्व व्यापार संगठन के सदस्य थे। भारत विश्व व्यापार संगठन के संस्थापक सदस्य में से एक रहा है। प्रादेश्िाक व्यापार समूह प्रादेश्िाक व्यापार समूह व्यापार की मदों में भौगोलिक सामीप्य, समरूपता और पूरकता के साथ देशों के मध्य व्यापार को बढ़ाने 87अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार एवं विकासशील देशों के व्यापार पर लगे प्रतिबंध को हटाने के यद्यपि, ये प्रादेश्िाक समूह सदस्य राष्ट्रों में व्यापार शुल्क उद्देश्य से अस्ितत्व में आए हैं। आज 120 प्रादेश्िाक व्यापार समूह को हटा देते हैं तथा मुक्त व्यापार को बढ़ावा देते हैं लेकिन विश्व के 52 प्रतिशत व्यापार का जनन करते हैं। इन व्यापार भविष्य में विभ्िान्न व्यापारिक समूहों के बीच मुक्त व्यापार का समूहों का विकास अंततः प्रादेश्िाक व्यापार को गति देने मेंबने रहना कठिन होता जा रहा है। वुफछ प्रमुख प्रादेश्िाक व्यापारवैश्िवक संगठनों के असपफल होने के प्रत्युत्तर में हुआ है। समूह तालिका 9.3 में सूचीब( किए गए हंै: तालिका 9.3: प्रमुख प्रादेश्िाक व्यापार समूह प्रादेश्िाक समूह मुख्यालय सदस्य राष्ट्र उत्पिा वस्तुएँ सहयोग के अन्य क्षेत्रा ।ैम्।छ जकातार् ब्रुनेइर्, इंडोनेश्िाया अगस्त, कृष्िा उत्पाद, रबड़, ताड़ का आथ्िार्क वृि को त्वरित आसियान इंडोनेश्िाया मलेश्िाया, ¯सगापुर, थाइर्लैंड, वियतनाम 1967 तेल, चावल, नारियल, काॅपफी, खनिज - ताँबा, कोयला, निकिलऔर टंगस्टन, ऊजार् पैट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथासाॅफ्रटवेयर उत्पाद करना, सांस्कृतिक विकास, शांति और प्रादेश्िाक स्थायित्व सी.आइर्.एस ¯मसक,बेलारूस आरमीनिया, अशरबैजान, बेलारूस, जाॅजिर्या, कशाखस्तान, ख्िारगिस्तान,माॅल्डोवा, रूस,ताजीकिस्तान, तुवर्फमेनिस्तान,यूव्रेफन और उशबेकिस्तान μ अशोिात तेल, प्राकृतिक गैस,सोना, कपास, रेशे, एल्यूमिनियम अथर्व्यवस्था, प्रतिरक्षा और विदेश नीति केमामलों पर समन्वय एवं सहयोग इर्.यू ब्रुसेल्स आॅस्िट्रया, बेल्िजयम, इर्.इर्.सी कृष्िा उत्पाद, खनिज, रसायन, एकल मुद्रा के साथ यूरोपीय बेल्िजयम डेनमावर्फ, प्रफांस, पिफनलैंड, माचर् लकड़ी, कागश, परिवहन की एकल बाशार, संघ आयरलैंड, इटली, नीदरलैंड, लक्जमबगर्, पुतर्गाल, स्पेन, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम 1957 इर्.यू.पफरवरी1992 गाडि़याँ, आप्टीकल उपकरण,घडि़याँ, कलाकृतियाँ, पुरावस्तु स्।प्। माॅण्टेविडियो अज±ेटाइना, वोलीविया, 1960 μ μ लेटिन उरुवे ब्राजील, कोलंबिया, अमेरिकन इक्वाडोर, मैक्िसको, इंटीग्रेशन पराग्वे, पेरू, एसोसिएशन उरुग्वे और वेनेजुएला छ।थ्ज्। नाथर् अमेरिकन प्रफी ट्रेड एसोसिएशन - संयुक्त राज्य अमेरिका 1994 कृष्िा उत्पाद, मोटर गाडि़याँ, स्वचालित पुजर्े, वंफप्यूटर, वस्त्रा ओपेक वियना अल्जीरिया, इंडोनेश्िाया, 1949 अशोिात खनिज तेल खनिज तेल की नीतियों ;आगेर्नाइशेशन इरान, इर्राक, वुफवैत, का समन्वय एवं आॅप़्ाफ लीबिया, नाइजीरिया, एकीकरण करना पैट्रोलियम कतर, सऊदी अरब, एक्सपोटि±ग संयुक्त अरब अमीरात वंफट्रीशद्ध और वेनेजुएला साफ्रटा - बांग्लादेश, मालदीव जनवरी μ अंतर - प्रादेश्िाक ;साउथ भूटान, नेपाल, भारत, 2006 व्यापार के करों को एश्िायन पाकिस्तान और श्रीलंका घटाना प्रफी टेªड एग्रीमेंटद्ध अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार से संबंिात मामले अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार का होना राष्ट्रों के लिए पारस्परिक लाभदायक होता है, यदि यह प्रादेश्िाक विश्िाष्टीकरण, उत्पादन के उच्च स्तर, उच्च रहन - सहन के स्तर, वस्तुओं एवं सेवाओं की विश्वव्यापी उपलब्धता, कीमतों और वेतन का समानीकरण,ज्ञान एवं संस्कृति के प्रस्पुफरण को प्रेरित करता है। अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार देशों के लिए हानिकारक हो सकता है यदि यह अन्य देशों पर निभर्रता, विकास के असमान स्तर, शोषण और यु( का कारण बनने वाली प्रतिद्वंद्विता की ओर उन्मुख है। विश्वव्यापी व्यापार जीवन के अनेक पक्षों को प्रभावित करते हैं। यह सारे विश्व में पयार्वरण से लेकर लोगों के स्वास्थ्य एवं कल्याण इत्यादि सभी को प्रभावित कर सकता है। जैसे - जैसे देश अिाक व्यापार के लिए प्रतिस्पधीर् बनते जारहे हैं, उत्पादन और प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग बढ़ता जा रहा है, और संसाधनों के नष्ट होने की दर उनके पुनभर्रण की दर से तीव्र होती है। परिणामस्वरूप समुद्री जीवन भी तीव्रता से नष्ट हो रहा है, वन काटे जा रहे हैं और नदी बेसिन निजी पेय जल वंफपनियों को बेचे जा रहे हैं। तेल गैस खनन, औषिाविज्ञान और कृष्िा व्यवसाय में संलग्न बहुराष्ट्रीय निगम और अिाक प्रदूषण उत्पन्न करते हुए हर कीमत पर अपने काया±े को बढ़ाए रखती है - उनके कायर् करने की प(ति सतत पोषणीय विकास के मानकों का अनुसरण नहीं करती। यदि संगठन केवल लाभ बनाने की ओर उन्मुख रहते हैं और पयार्वरणीय तथा स्वास्थ्य संबंध्ी विषयों पर ध्यान नहीं देते तो यह भविष्य के लिए इसके गहरे निहिताथर् हो सकते हैं। पत्तन अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार के प्रवेश द्वार पत्तन अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार वफी दुनिया के मुख्य प्रवेश द्वार पोताश्रय तथापत्तन होते हैं। इन्हीं पत्तनों के द्वारा जहाशी माल तथा यात्राी विश्व के एक भाग से दूसरे भाग को जाते हैं।पत्तन जहाश के लिए गोदी, लादने, उतारने तथा भंडारण हेतु सुविधाएँ प्रदान करते हैं। इन सुविधाओं को प्रदान करने केउद्देश्य से पत्तन के प्राध्िकारी नौगम्य द्वारों का रख - रखाव, रस्सों व बजरों ;छोटी अतिरिक्त नौकाएँद्ध की व्यवस्था करने और श्रम एवं प्रबंधकीय सेवाओं को उपलब्ध कराने की व्यवस्थाकरते हैं। एक पत्तन के महत्त्व को नौभार के आकार और निपटान किए गए जहाजों की संख्या द्वारा निश्िचत किया जाता है। एक पत्तन द्वारा निपटाया नौभार, उसके पृष्ठ प्रदेश के विकास के स्तर का सूचवफ है। चित्रा 9.4: सैन प्रफांसिस्को, विश्व का सबसे बड़ा स्थलरु( पत्तन पत्तन के प्रकार सामान्यत: पत्तनों का वगीर्करण उनके द्वारा सँभाले गए यातायात के प्रकार के अनुसार किया जाता है।निपटाए गये नौभार के अनुसार पत्तनों के प्रकार: ;पद्ध औद्योगिक पत्तन: ये पत्तन थोक नौभार के लिएविशेषीकृत होते हैं जैसे - अनाज, चीनी, अयस्क, तेल, रसायन और इसी प्रकार के पदाथर्। ;पपद्ध वाण्िाज्ियक पत्तन: ये पत्तन सामान्य नौभार संवेष्िटत उत्पादों तथा विनिमिर्त वस्तुओं का निपटान करते हैं। येपत्तन यात्राी - यातायात का भी प्रबंध करते हैं। ;पपपद्ध विस्तृत पत्तन: ये पत्तन बड़े परिमाण में सामान्य नौभार का थोक में प्रबंध् करते हैं। संसार के अिाकांश महानपत्तन विस्तृत पत्तनों के रूप में वगीर्कृत किए गए हैं।अवस्िथति के आधार पर पत्तनों के प्रकार ;पद्ध अंतदर्ेशीय पत्तन: ये पत्तन समुद्री तट से दूर अवस्िथत होते हैं। ये समुद्र से एक नदी अथवा नहर द्वारा जुड़े होतेहैं। ऐसे पत्तन चैरस तल वाले जहाश या बजरे द्वारा ही गम्य होते हैं। उदाहरणस्वरूप - मानचेस्टर एक नहर से जुड़ा हैऋ मेंपिफस मिसीसिपी नदी पर अब स्िथत हैऋ राइनके अनेक पत्तन हैं जैसे - मैनहीम तथा ड्यूसबगर्ऋ और कोलकाता हुगली नदी, जो गंगा नदी की एक शाखा है, पर स्िथत है। ;पपद्ध बाह्य पत्तन: ये गहरे जल के पत्तन हैं जो वास्तविकपत्तन से दूर बने होते हैं। ये उन जहाशों, जो अपने बड़े आकार के कारण उन तक पहुँचने में अक्षम हंै, कोग्रहण करके पैतृक पत्तनों को सेवाएँ प्रदान करते हैं।उदाहरणस्वरूप एथेंस तथा यूनान में इसके बाह्य पत्तन पिरेइअस एक उच्चकोटि का संयोजन है।विश्िाष्टीकृत कायर्कलापों के आधार पर पत्तनों के प्रकार ;पद्ध तैल पत्तन: ये पत्तन तेल के प्रक्रमण और नौ - परिवहनका कायर् करते हैं। इनमें से वुफछ टैंकर पत्तन हैं तथा वुफछतेल शोधन पत्तन हैं। वेनेजुएला में माराकाइबो, ट्यूनिश्िायामें एस्सखीरा, लेबनान में त्रिापोली टैंकर पत्तन हैं। पश्िार्याकी खाड़ी पर अबादान एक तेलशोधन पत्तन है। ;पपद्ध मागर् पत्तन ;विश्राम पत्तनद्ध: ये ऐसे पत्तन हैं, जो मूल रूप से मुख्य समुद्री मागा±े पर विश्राम वेंफद्र के रूप में विकसित हुए, जहाँ पर जहाश पुन: ईंधन भरने, जल भरने तथा खाद्य सामग्री लेने के लिए लंगर डाला करतेथे। बाद में, वे वाण्िाज्ियक पत्तनों में विकसित हो गए। अदन, होनोलूलू तथा ¯सगापुर इसके अच्छे उदाहरण हैं। ;पपपद्ध पैकेट स्टेशन: इन्हें प़फेरी - पत्तन के नाम से भी जाना जाता है। ये पैकेट स्टेशन विशेष रूप से छोटी दूरियों को तय करते हुए जलीय क्षेत्रों के आर - पार डाक तथा यात्रिायों के परिवहन ;आवागमनद्ध से जुडे़ होते हैं। ये स्टेशन जोड़ों में इस प्रकार अवस्िथत होते हैं कि वे जलीय क्षेत्रा के आरपार एक दूसरे के सामने होते हैं। उदाहरणस्वरूप - इंग्िलश चैनल के आरपार इंग्लैंड में डोवर तथा प्रफांस में वैफलाइस। ;पअद्ध आंत्रापो पत्तन: ये वे एकत्राण वेंफद्र हैं, जहाँ विभ्िान्न देशों से नियार्त हेतु वस्तुएँ लाइर् जाती हैं। ¯सगापुर एश्िाया केलिए एक आंत्रापो पत्तन है, रोटरडम यूरोप के लिए औरकोपेनहेगेन बाल्िटक क्षेत्रा के लिए आंत्रापो पत्तन हैं। ;अद्ध नौ सेना पत्तन: ये केवल सामाजिक महत्त्व के पत्तन हैं।ये पत्तन यु(क जहाशों को सेवाएँ देते हैं तथा उनके लिए मरम्मत कायर्शालाएँ चलाते हैं। कोच्िच तथा कारवाड़भारत में ऐसे पत्तनों के उदाहरण हैं। अभ्यास 1ण् नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनें: ;पद्ध संसार के अिाकांश महान पत्तन इस प्रकार वगीर्कृत किए गए हैं - ;कद्ध नौसेना पत्तन ;खद्ध विस्तृत पत्तन ;गद्ध तैल पत्तन ;घद्ध औद्योगिक पत्तन ;पपद्ध निम्नलिख्िात महाद्वीपों में से किस एक से विश्व व्यापार का सवार्िाक प्रवाह होता है? ;कद्ध एश्िाया ;खद्ध यराूेप ;गद्ध उत्तरी अमेरिका ;घद्ध अपफीका्र;पपपद्ध दक्ष्िाण अमरीकी राष्ट्रों में से कौन - सा एक ओपेक का सदस्य है? ;कद्ध ब्राशील ;खद्ध वेनेजुएला ;गद्ध चिली ;घद्ध परूे;पअद्ध निम्न व्यापार समूहों में से भारत किसका एक सह - सदस्य है? ;कद्ध साफ्रटा ;ै।थ्ज्।द्ध ;खद्ध आसियान ;।ैम्।छद्ध ;गद्ध ओइसीडी ;व्म्ब्क्द्ध ;घद्ध ओपेक ;व्च्म्ब्द्ध 2ण् निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर 30 शब्दों में दीजिए: ;पद्ध विश्व व्यापार संगठन के आधारभूत कायर् वफौन - से हैं? ;पपद्ध )णात्मक भुगतान संतुलन का होना किसी देश के लिए क्यों हानिकारक होता है? ;पपपद्ध व्यापारिक समूहों के निमार्ण द्वारा राष्ट्रों को क्या लाभ प्राप्त होते हैं? 3ण् नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर 150 शब्दों से अिाक में न दें: ;पद्ध पत्तन किस प्रकार व्यापार के लिए सहायक होते हैं? पत्तनों का वगीर्करण उनकी अवस्िथति के आधार पर कीजिए। ;पपद्ध अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार से देश वैफसे लाभ प्राप्त करते हैं?

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