संपूणर् आथ्िार्क ियाएँ चाहे वो प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक एवं चतुथर्क हों सभी का कायर् क्षेत्रा संसाध्नों की प्राप्ित एवं उनके उपयोग का अध्ययन करना है। ये संसाध्न मनुष्य के जीवित रहने के लिए आवश्यक हैं। ़ल्यबढद्वितीयक गतिविध्ियों द्वारा प्रावृफतिक संसाध्नों का मूद्वितीयक ियाएँ जाता है। प्रवृफति में पाए जाने वाले कच्चे माल का रूप बदलकर यह उसे मूल्यवान बना देती है। कपास का सीमित उपयोग है परंतु तंतु में परिवतिर्त होने के बाद यह और अध्िक मूल्यवान हो जाता है और इसका उपयोग वस्त्रा बनाने में किया जा सकता है। खदानों से प्राप्त लौह - अयस्क का हम प्रत्यक्ष उपयोग नहीं कर सकतेंेू, परतु अयस्क से इस्पात बनान वफ बाद यह मल्यवान हो जाता है, और इसका उपयोग कइर् प्रकार की मशीनें एवं औशार बनाने में होता है। खेतों, वनों, खदानों एवं समुद्रों से प्राप्त पदाथो± के विषय में भी यही बात सत्य है। इस प्रकार द्वितीयक ियाएँ विनिमार्ण, प्रसंस्करण और निमार्ण ;अवसंरचनाद्ध उद्योग से संबंध्ित हैं। विनिमार्ण विनिमार्ण से आशय किसी भी वस्तु का उत्पादन है। हस्तश्िाल्प कायर् से लेकर लोहे व इस्पात को गढ़ना, प्लास्िटक के ख्िालौने बनाना, कंप्यूटर के अति सूक्ष्म घटकों को जोड़ना एवं अंतरिक्ष यान निमार्ण इत्यादि सभी प्रकार के उत्पादन को निमार्ण के अंतगर्त ही माना जाता है। विनिमार्ण की सभी प्रियाआंे में वुफछ ँसामान्य विशेषताएप्रकार की वस्तुओं का विशां विश्िाष्टल उत्पादन एवं कारखानों मेश्रमिक जो मानक वस्तुओं का उत्पादन करते हैं। विनिमार्ण आधु श्क्ित वफ साध्न एवं मशीनरी के द्वारा यापराने साध्नांनिकोुेद्वारा किया जाता है। तृतीय विश्व के अध्िकांश देशों में विनिमार्ण को अब भी शाब्िदक अथो± में प्रयोग किया जाता है। इन देशों में सभी विनिमार्ताओं का संपूणर् रूप से चित्राण करना कठिन है। इनमें औद्योगिक ियाओं के उन प्रकारों पर अध्िक बल दिया जाता है जिसमें उत्पादन के कम जटिल तंत्रा को लिया जाता है। आध्ुनिक बडे़ पैमाने पर होने वाले विनिमार्ण की विशेषताएँ वतर्मान समय में बडे़ पैमाने पर होने वाले विनिमार्ण की निम्नलिख्िात विशेषताएँ हैंः कौशल का विश्िाष्टीकरण/उत्पादन की विध्ियाँ श्िाल्प तरीके से कारखाने में थोड़ा ही सामान उत्पादित किया जाता है। जो कि आदेशानुसार बनाया जाता है, अतः इसकी लागत अध्िक आती है। जबकि अध्िक उत्पादन का संबंध् बडे़ होती हैं, जैसे शक्ित का उपयोग, एक ही पैमाने पर बनाए जाने वाले सामान से है जिसमें प्रत्येक कारीगर संगठनात्मक ढाँचा एवं स्तरीकरण निरंतर एक ही प्रकार का कायर् करता है। आध्ुनिक निमार्ण की विशेषताएँ हैं: ;पद्ध एक जटिल प्रोद्यौगिकी यंत्रा ‘उद्योगों का निमार्ण’ एवं ‘विनिमार्ण उद्योग’ विनिमार्ण का शाब्िदक अथर् है ‘हाथ से बनाना’ पिफर भी इसमें यंत्रों द्वारा बनाया गया सामान भी सम्िमलित किया जाता है। यह एक परमावश्यक प्रिया है। जिसमें कच्चे माल को स्थानीय या दूरस्थ बाशार में बेचने के लिए उँफचे मूल्य के तैयार माल में परिवतिर्त कर दिया जाता है। वैचारिक दृष्िटकोण से उद्योग एक निमार्ण इकाइर् होती है जिसकी भौगोलिक स्िथति अलग होती है एवं प्रबंध् तंत्रा के अंतगर्त लेखा - बही एवं रिकाडर् का रखरखाव रखा जाता है। उद्योग एक व्यापक नाम है और इसे विनिमार्ण के पयार्यवाची के रूप में भी देखा जाता है। जब कोइर् इस्पात उद्योग और रसायन उद्योग शब्दावली का प्रयोग करता है तब उसके मस्ितष्क में कारखाने एवं कारखानों में होने वाली विभ्िान्न प्रियाओं का विचार उत्पन्न होता है। लेकिन कइर् गौण ियाए हैं जो कारखानों में संपन्न नहीं होती जैसे कि पयर्टन उद्योग या मनोरंजन उद्योग इत्यादि। अतः स्पष्टता के लिए ‘विनिमार्ण उद्योग’ शब्दावली का प्रयोग किया जाता है। ;पपद्ध अत्यध्िक विश्िाष्टीकरण एवं श्रम विभाजन के द्वारा कम प्रयास एवं अल्प लागत से अध्िक माल का उत्पादन करना ;पपपद्ध अध्िक पूँजी ;पअद्ध बडे़ संगठन एवं ;अद्ध प्रशासकीय अध्िकारी - वगर् अनियमित भौगोलिक वितरण आध्ुनिक निमार्ण के मुख्य संवेंफद्रण वुफछ ही स्थानों में सीमित हंै। विश्व के वुफल स्थलीय भाग के 10 प्रतिशत से कम भू - भाग पर इनका विस्तार है। यह देश आथ्िार्क एवं राजनीतिक शक्ित के वेंफद्र बन गए हैं। वुफल क्षेत्रा को आच्छादित करने की दृष्िट से विनिमार्ण स्थल, प्रियाओं की अत्यध्िक गहनता के कारण बहुत कम स्पष्ट हैं तथा वृफष्िा की अपेक्षा बहुत छोटे क्षेत्रों में संवेंफदि्रत हैं। उदाहरण के तौर पर अमेरिका के मक्का की पेटी के 2.5 वगर् किलोमीटर क्षेत्रा में साधरणतया चार बडे़ पफामर् होते हंै जिनमें, 10 - 20 श्रमिक कायर् करते हैं जिनसे 50 - 100 मनुष्यों का भरण - पोषण होता है। परंतु इतने ही क्षेत्रा में अनेकों वृहद् समाकलित कारखानों को समाविष्ट किया जा सकता है और हशारों श्रमिकों को रोशगार दिया जा सकता है। उद्योग अपनी लागत घटाकर लाभ को बढ़ाते हैं इसलिए उद्योगों की स्थापना उस स्थान पर की जानी चाहिए जहाँ पर उत्पादन लागत कम आए। उद्योगों की स्िथति को प्रभावित करने वाले वुफछ कारक निम्न हैं। बाशार तक अभ्िागम्यता उद्योगों की स्थापना में सबसे प्रमुख कारक उसके द्वारा उत्पादित माल के लिए उपलब्ध् बाशार का होना है। बाशार से तात्पयर् उस क्षेत्रा मंे तैयार वस्तुओं की माँग एवं वहाँ के निवासियों में खरीदने की क्षमता ;क्रय शक्ितद्ध है। दूरस्थ क्षेत्रा जहाँ कम जनसंख्या निवास करती है छोटे बाशारों से युक्त होते हैं। यूरोप, ँयंत्राीकरण यंत्राीकरण से तात्पयर् है किसी कायर् को पूणर् करने के लिए मशीनों का प्रयोग करना। स्वचालित ;निमार्ण प्रिया के दौरान मानव वफी सोच को सम्िमलित किए बिना कायर्द्ध यंत्राीकरण कीविकसित अवस्था है। पुननिर्वेशन एवं संवृत्त - पाश कंप्यूटर नियंत्राण प्रणाली से युक्त स्वचालित कारखाने जिनमें, मशीनों को ‘सोचने’ के लिए विकसित किया गया है, पूरे विश्व में नशर आने लगी है। प्रौद्योगिकीय नवाचार प्रौद्योगिक नवाचार, शोध् एवं विकासमान युक्ितयों के द्वाराविनिमार्ण की गुणवत्ता को नियंत्रिात करने, अपश्िाष्टों के निस्तारण एवं अदक्षता को समाप्त करने तथा प्रदूषण के विरु(संघषर् करने का महत्त्वपूणर् पहलू है। 46 मानव भूगोल के मूल सि(ांत उत्तरी अमेरिका, जापान एवं आस्ट्रेलिया के क्षेत्रा वृहद् वैश्िवक बाशार हंै, क्योंकि इन प्रदेशों के लोगों की क्रय क्षमता अध्िक है। दक्ष्िाणी एवं दक्ष्िाणी पूवीर् एश्िाया के घने बसे प्रदेश भी वृहद् बाशार उपलब्ध् कराते हैं। वुफछ उद्योगों का व्यापक बाशार होता है, जैसेः वायुयान निमार्ण एवं शस्त्रा निमार्ण उद्योग। कच्चे माल की प्राप्ित तक अभ्िागम्यता उद्योग के लिए कच्चा माल अपेक्षावृफत सस्ता एवं सरलता से परिवहन योग्य होना चाहिए। भारी वजन, सस्ते मूल्य एवं वजन घटने वाले पदाथो± ;अयस्कद्ध पर आधरित उद्योगकच्चे माल के ड्डोत स्थल के समीप ही स्िथत हैं, जैसेइस्पात, चीनी एवं सीमेंट उद्योग। कच्चे माल के ड्डोतों के समीप स्थापित उद्योगों के लिए पदाथर् की शीघ्र नष्टशीलता एक अनिवायर् कारक है। वृफष्िा प्रसंस्करण एवं डेरी उत्पादक्रमशः वृफष्िा उत्पादन क्षेत्रों अथवा दुग्ध् आपूतिर् ड्डोतों के समीप ही संसाध्ित किए जाते हैं। श्रम आपूतिर् तक अभ्िागम्यता उद्योगों की अवस्िथति में श्रम एक प्रुै़ेुमख कारक ह। बढत हए यंत्राीकरण, स्वचलन एवं आद्यैोगिक प्रिया के लचीलेपन ने उद्योगों में श्रमिकों पर निभरर्ता को कम किया है, पिफर भी वुफछ प्रकार के उद्योगों मंे अब भी वुफशल श्रमिकों की आवश्यकता होती है। शक्ित के साध्नों तक अभ्िागम्यता वे उद्योग जिनमंे अध्िक शक्ित की आवश्कता होती है वेे ऊजार्के ड्डोतों के समीप लगाए जाते हैं, जैसे एल्यूमिनियम उद्योग। प्राचीन समय में कोयला प्रमुख शक्ित का साध्न था पर आजकल जल विद्युत एवं खनिज तेल भी कइर् उद्योगों के लिएशक्ित का महत्त्वपूणर् साध्न है। परिवहन एवं संचार की सुविधओं तक अभ्िागम्यता कच्चे माल को कारखाने तक लाने के लिए और परिष्वृफत सामग्री को बाशार तक पहुुँचने के लिए तीव्र और सक्षम परिवहन सुविधएँ औद्योगिक विकास के लिए अत्यावश्यक हैं। परिवहन लागत किसी औद्योगिक इकाइर् की अवस्िथति कोनिश्िचत करने में महत्त्वपूणर् कारक हैं। पश्िचमी यूरोप एवंऔर विनिमार्ण की प्रादेश्िाक विश्िाष्टता को बढ़ाता है। उद्योगों हेतु सूचनाआंे के आदान - प्रदान एवं प्रबंध्न के लिए संचार कीभी महत्त्वपूणर् आवश्यकता होती है। सरकारी नीति संतुलित आथ्िार्क विकास हेतु सरकार प्रादेश्िाक नीति अपनाती है जिसके अंतगर्त विश्िाष्ट क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना की जाती है। समूहन अथर्व्यवस्था तक अभ्िागम्यता/उद्योगों के मध्य संबंध् प्रधन उद्योग की समीपता से अन्य अनेक उद्योग लाभान्िवत होते हैं। ये लाभ समूहन अथर्व्यवस्था के रूप में परिणत हो जाते हैं। विभ्िान्न उद्योगों के मध्य पाइर् जाने वाली शृंखला से बचत की प्राप्ित होती है। उपरोक्त सभी कारण सम्िमलित रूप से किसी उद्योग की अवस्िथति का निधर्रण करते हैं। स्वच्छंद उद्योग स्वच्छंद उद्योग व्यापक विविध्ता वाले स्थानों में स्िथत होते हैं। यह किसी विश्िाष्ट कच्चे माल जिनके भार में कमी हो रही है अथवा नहीं, पर निभर्र नहीं रहते हैं। यह उद्योग संघटक पुरजों पर निभर्र रहते हैं जो कहीं से भी प्राप्त किए जा सकते हैं। इसमें उत्पादन कम मात्रा में होता है, एवं श्रमिकों की भी कम आवश्यकता होती है। सामान्यतः ये उद्योग प्रदूषण नहीं पैफलाते। इनकीस्थापना में महत्त्वपूणर् कारक सड़कों के जाल द्वारा अभ्िागम्यता होती है। विनिमार्ण उद्योगों का वगीर्करण विनिमार्ण उद्योगों का वगीर्करण उनके आकार, कच्चा माल, उत्पाद एवं स्वामित्व के आधर पर किया जाता है ;चित्रा 6.1द्ध। आकार पर आधरित उद्योग किसी उद्योग का आकार उसमें निवेश्िात पूँजी, कायर्रत श्रमिकों उत्तरी अमेरिका के पूवीर् भागों में अत्यध्िक परिवहन तंत्रा विकसित होने के कारण सदैव इन क्षेत्रों में उद्योगों का संवेंफद्रण की संख्या एवं उत्पादन की मात्रा पर निभर्र करता है। इसके हुआ है। आध्ुनिक उद्योग अपृथक्करणीय ढंग से परिवहन तंत्रा अनसार उद्यागों को घरेलू अथवा वफटीर, छोटे व बडे़ पैमानेुेु के से जुडे़ हैं। परिवहनीयता में सुधर समाकलित आथ्िार्क विकास उद्योगों में वगीर्वृफत किया जा सकता है। 47द्वितीयक गतिविध्ियाँ वुफटीर उद्योग यह निमार्ण की सबसे छोटी इकाइर् है। इसमें श्िाल्पकार स्थानीय कच्चे माल का उपयोग करते हंै एवं साधरण औशारों द्वारा परिवार के सभी सदस्य मिलकर अपने दैनिक जीवन के उपभोग की वस्तुओं का उत्पादन करते हैं। तैयार माल का या तो वे स्वयं उपभोग करते है या इसे स्थानीय गाँव के बाशार में विक्रय कर देते हैं। कभी ये अपने उत्पादों की अदला - बदली भी करते हैं। पूँजी एवं परिवहन इन उद्योगों को अिाक प्रभावित नहीं करते हैं क्योंकि इनके द्वारा निमिर्त वस्तुओं काव्यापारिक महत्त्व कम होता है एवं अिाकतर उपकरण स्थानीय लोगों द्वारा निमिर्त होते हैं। इस उद्योग में दैनिक जीवन के उपयोग में आने वाली वस्तुओं जैसे खाद्य पदाथर्, कपड़ा, चटाइयाँ, बतर्न, औशार, पफनीर्चर, जूते एवं लघुंमूतिर्याँ उत्पादित की जाती है। इसके अतिरिक्त पत्थर एवं मिट्टðी वेट,चमड़े से कइर् प्रकार का सामान बनाया जाता है। ±फ बतर्न एवं इसुनार सोना, चाँदी एवं ताँबे से आभूषण बनाता है। वुफछ श्िाल्प की वस्तुएँ बाँछोटे पैमाने के उद्योग यह वुफटीर उद्योग से भ्िान्न है। इसके उत्पादन की तकनीक एवं निमार्ण स्थल ;घर से बाहर कारखानाद्ध दोनांे वुफटीर उद्योग से भ्िान्न होते हैं। इसमें स्थानीय कच्चे माल का उपयोग होता है एवं अ(र्वुफशल श्रमिक व शक्ित के साध्नों से चलने वाले यंत्रों का प्रयोग किया जाता है। रोशगार के अवसर इस उद्योग में अिाक होते हैं जिससे स्थानीय निवासियों की क्रय शक्ित बढ़ती है। भारत, चीन, इंडोनेश्िाया एवं ब्राजील जैसे देशों ने अपनी जनसंख्या को रोशगार उपलब्ध् करवाने के लिए इस प्रकार के श्रम - सघन छोटे पैमाने के उद्योग प्रारंभ किए हैं। बडे़ पैमाने के उद्योग बडे़ पैमाने के उद्योग के लिए विशाल बाशार, विभ्िान्न प्रकार का कच्चा माल, शक्ित के साध्न, वुफशल श्रमिक, विकसित प्रौद्योगिकी, अध्िक उत्पादन एवं अध्िक पूँजी की आवश्यकता होती है। पिछले 200 वषो± में इसका विकास हुआ है। पहले यह उद्योग ग्रेट बि्रटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका के पूवीर् भाग एवं यूरोप में लगाए गए थे परंतु वतर्मान में इसका विस्तार विश्व के सभी भागों में हो गया है। स एवं स्थानीय वन से प्राप्त लकड़ी से बनाइर् जाती है। द्वितीयक गतिविध्ियाँ 49 चित्रा 6.4: जापान में एक मोटर निमार्ण कंपनी के कारखाने में यात्राी कार की संयोजन प्रिया विश्व के प्रमुख औद्योगिक प्रदेशों को उनके वृहत् पैमाने पर किए गए निमार्ण के आधर पर दो बडे़ समूहों में बाँटा जा सकता है: ;पद्ध परंपरागत वृहत औद्योगिक प्रदेश जिनके समूह वुफछ अध्िक विकसित देशों में है। ;पपद्ध उच्च प्रौद्योगिकी वाले वृहत औद्योगिक प्रदेश जिनका विस्तार कम विकसित देशों में हुआ है। कच्चे माल पर आधरित उद्योग कच्चे माल पर आधरित उद्योगों का वगीर्करण पाँच शीषर्कों के अंतगर्त किया जाता है। ;कद्ध वृफष्िा आधरित ;खद्ध खनिज आधरित ;गद्ध रसायन आधरित ;घद्ध वन आधरित;घद्ध पशु आधरित ;कद्धवृफष्िा आधरित खेतों से प्राप्त कच्चे माल को विभ्िान्न प्रियाओं द्वारा तैयार माल में बदलकर विक्रय हेतु ग्रामीण एवं नगरीय बाशारों में भेजा जाता है। प्रमुख वृफष्िा आधरित उद्योग में भोजन तैयार करने वाले उद्योग, शक्कर, अचार, पफलों के रस, पेय पदाथर् ;चाय काॅपफी, कोकोआद्ध, मसाले, तेल एवं वस्त्रा ;सूती, रेशमी, जूटद्ध तथा रबड़ उद्योग आते हैं। भोजन प्रसंस्करण वृफष्िा से तैयार खाद्य में मलाइर् ;क्रीमद्ध का उत्पादन, डिब्बा खाद्य, पफलों से खाद्य तैयार करना एवं मिठाइयाँ सम्िमलित की जाती हैं। खाद्य 50 मानव भूगोल के मूल सि(ांत चित्रा 6.5: तमिलनाडु की नीलगिरि पहाडि़यों में चाय बागान तथा कारखाना को सुरक्ष्िात रखने की कइर् विध्ियाँ प्राचीन काल से चली आ रही है। जैसे उनको सुखाकर, संधन कर या अचार के रूप में तेल या सिरका आदि डालकर। पर इन विध्ियों का औद्योगिक व्रफांति के पूवर् सीमित उपयोग ही होता था। वृफष्िा व्यापार एक प्रकार की व्यापारिक वृफष्िा है जोऔद्योगिक पैमाने पर की जाती है इसका वित्त - पोषण प्रायः वह व्यापार करता है जिसकी मुख्य रुचि वृफष्िा के बाहर हो। वृफष्िा व्यापार पफामर् से आकार मंे बड़े, यंत्राीवृफत, रसायानों पर निभर्र एवं अच्छी संरचना वाले होते हैं। इनको ‘वृफष्िा कारखाने’ भी कहा जाता है। ;खद्धखनिज आधरित उद्योग इन उद्योगों में खनिजों को कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है। वुफछ उद्योग लौह अंश वाले धत्िवक खनिजों का उपयोग करते हैं जैसे कि लौह इस्पात उद्योग जबकि वुफछ उद्योग अलौह धत्िवक खनिजों का उपयोग करते हैं जैसे एल्युमिनियम, ताँबा एवं जवाहरात उद्योग। सीमेंट, मिट्टðी के बतर्न आदि उद्योगों में अधत्िवक खनिजों का प्रयोग होता है। ;गद्ध रसायन आधरित उद्योग इस प्रकार के उद्योगों में प्रावृफतिक रूप मंे पाए जाने वाले रासायनिक खनिजों का उपयोग होता है जैसे पेट्रो रसायन उद्योग में खनिज तेल ;पैट्रोलियमद्ध का उपयोग होता है। नमक, गंधक एवं पोटाश उद्योगों मंे भी प्रावृृफतिक खनिजों को काम में लेते हैं। वुफछ रसायनिक उद्योग लकड़ी एवं कोयले से प्राप्त कच्चे माल पर भी निभर्र हैं। रसायन उद्योग के अन्य उदाहरण वृृफत्रिाम रेशे बनाना, प्लास्िटक निमार्ण इत्यादि है। ;घद्ध वनों पर आधरित उद्योग वनों से प्राप्त कइर् मुख्य एवं गौण उपज कच्चे माल के रूप में उद्योगों में प्रयुक्त होती है। पफनीर्चर उद्योग के लिए इमारती लकड़ी, कागश उद्योग के लिए लकड़ी, बाँस एवं घास तथा लाख उद्योग के लिए लाख वनों से ही प्राप्त होती है। ;घद्धपशु आधरित उद्योग चमड़ा एवं ऊन पशुओं से प्राप्त प्रमुख कच्चा माल है। चमड़ाउद्योग के लिए चमड़ा एवं ऊनी वस्त्रा उद्योग के लिए ऊन पशुओं से ही प्राप्त की जाती है। हाथीदाँत उद्योग के लिए दाँत भी हाथी से मिलता है। उत्पादन/उत्पाद आधरित उद्योग आपने वुफछ मशीनें एवं औशार देखे होंगे जिनके निमार्ण में लौह - इस्पात का प्रयोग कच्चे माल के रूप में किया जाता है। लौंह - इस्पात स्वय में एक उद्योग है। वे उद्योग जिनके उत्पाद को अन्य वस्तुएँ बनाने के लिए कच्चे माल के रूप में प्रयोग में लाया जाता है उन्हें आधरभूत उद्योग कहते हैं। क्या आप इस कड़ी को पहचान सकते हैं? लौह - इस्पात वस्त्रा उद्योग के लिए मशीनें उपभोक्ता के उपयोग हेतु कपड़ा। उपभोक्ता वस्तु उद्योग के ऐसे सामान का उत्पादन करते हैं जो प्रत्यक्ष रूप में उपभोक्ता द्वारा उपभोग कर लिया जाता है। उदाहरण के तौर पर रोटी ;ब्रेडद्ध एवं बिस्वुफट, चाय, साबुन,लिखने के लिए कागश, टेलीविजन एवं शंृगार सामान इत्यादि का उत्पादन करने वाले उद्योगों को उपभोक्ता माल बनाने वाले अथवा गैर आधरभूत उद्योग कहा जाता है। स्वामित्व के आधर पर उद्योग ;कद्ध सावर्जनिक क्षेत्रा के उद्योग सरकार के अध्ीन होते हैं। भारत में बहुत से उद्योग सावर्जनिक क्षेत्रा के अध्ीन है। समाजवादी देशों में भी अनेक उद्योग सरकारी स्वामित्व वाले होते हैं। मिश्रित अथर्व्यवस्था में निजी एवं सावर्जनिक दोनांे प्रकार के उद्यम पाए जाते हैं। ;खद्ध निजी क्षेत्रा के उद्योगों का स्वामित्व व्यक्ितगत निवेशकों के पास होता है। ये निजी संगठनों द्वारा संचालित होते हैं। पँूजीवादी देशों में अध्िकतर उद्योग निजी क्षेत्रा में है। ;गद्ध संयुक्त क्षेत्रा के उद्योग का संचालन संयुक्त वंफपनी के द्वारा या किसी निजी एवं सावर्जनिक क्षेत्रा की वंफपनी के संयुक्त प्रयासों द्वारा किया जाता है। क्या आप इस प्रकार के उद्योगों की सूची बना सकते हैं? परंपरागत बडे़ पैमाने वाले औद्योगिक प्रदेश यह भारी उद्योग के क्षेत्रा होते हैं जिसमें कोयला खदानों के समीप स्िथत धतु पिघलाने वाले उद्योग, भारी इंजीनियरिंग, रसायन निमार्ण, वस्त्रा उत्पादन इत्यादि का कायर् किया जाता है। इन्हें ध्ुएँ की चिमनी वाला उद्योग भी कहते हैं। परंपरागत औद्योगिक प्रदेशों के निम्न पहचान ¯बदु हैं। ऽ निमार्ण उद्योगों में रोशगार का अनुपात उँफचा होता है। उच्च गृह घनत्व जिसमें घर घटिया प्रकार के होते हैं एवं सेवाएँ अपयार्प्त होती है।वातावरण अनाकषर्क होता है जिसमें गंदगी के ढेर व प्रदूषण होता है। ऽ बेरोशगारी की समस्या, उत्प्रवास, विश्वव्यापी माँग कम होने से कारखाने बंद होने के कारण परित्यक्त भूमि का क्षेत्रा। जमर्नी का रूहर कोयला क्षेत्रा यह लंबे समय से यूरोप का प्रमुख औद्योगिक प्रदेश रहा है। द्वितीयक गतिविध्ियाँ 51 कोयला, लोहा एवं इस्पात यहाँ अथर्व्यवस्था का प्रमुख आधार रहा है पर कोयले की माँग में कमी आने के कारण उद्योग संवुफचित होने लगा। यहाँ लौह अयस्क समाप्त होने पर भी जलमागर् से आयातित अयस्क का प्रयोग करके उद्योग कायर्शील रहा है। जमर्नी के इस्पात उत्पादन का 80 प्रतिशत रूहर से प्राप्त होता है। औद्योगिक ढाँचे में परिवतर्न के कारण वुफछ क्षेत्रों के उत्पादन में गिरावट आइर् है एवं प्रदूषण व औद्योगिक अपश्िाष्ट की समस्या भी होने लगी है। अब रूहर के भविष्य की संपन्नता कोयले व इस्पात के बजाय नए उद्योग जैसे ओपेल कार बनाने का विशाल कारखाना, नए रासायनिक संयंत्रा, विश्वविद्यालय इत्यादि पर आधरित है। यहाँ खरीदारी के बड़े - बड़े बाशार बन गए हैं जिससे एक ‘नया रूहर’ भू - दृश्य विकसित हो रहा है। उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग की संकल्पना निमार्ण ियाओं मंे उच्च प्रौद्योगिकी नवीनतम पीढ़ी है। इसमें उन्नत वैज्ञानिक एवं इंजीनियरिंग उत्पादकों का निमार्ण गहन शोध् एवं विकास के प्रयोग द्वारा किया जाता है। संपूणर् श्रमिक शक्ित का अध्िकतर भाग व्यावसायिक ;सप़्ोफद काॅलरद्ध श्रमिकों का होता है। ये उच्च, दक्ष एवं विश्िाष्ट व्यावसायिक श्रमिक वास्तविक उत्पादन ;नीला काॅलरद्ध श्रमिकों से संख्या में अिाक होते हैं। उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग में यंत्रामानव, वंफप्यूटर आधारित डिशाइन ;वैफडद्ध तथा निमार्ण, धतु पिघलाने एवं शोधन के इलेक्ट्रोनिक नियंत्राण एवं नए रासायनिक व औषधीय उत्पाद प्रमुख स्थान रखते हैं। इस भूदृश्य में विशाल भवनों, कारखानों एवं भंडार क्षेत्रों के स्थान पर आध्ुनिक, नीचे साप़्ाफ - सुथरे, बिखरे कायार्लय एवं प्रयोगशालाएँ देखने को मिलती हैं। इस समय जो भी प्रादेश्िाक व स्थानीय विकास की योजनाएँ बन रही हंै उनमें नियोजित व्यवसाय पावर्फ का निमार्ण किया जा रहा है। वे उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग जो प्रादेश्िाक संवेंफदि्रत हंै, आत्मनिभर्र एवं उच्च विश्िाष्टता लिए होते हैं उन्हें प्रौद्योगिक ध््रुव कहा जाता है। सेन प्रफंासिस्को के समीप सिलीकन घाटी एवं सियटल के समीप सिलीकन वन प्रौद्योगिक ध््रुव के अच्छे उदाहरण हंै। क्या भारत में वुफछ प्रौद्योगिकी ध्रुव विकसित हो रहे हैं? विश्व अथर्व्यव्स्था में निमार्ण उद्योग का बड़ा योगदान है। लौह - इस्पात, वस्त्रा, मोटर गाड़ी निमार्ण, पेट्रो रसायन एवं इलेक्ट्रोनिक्स विश्व के प्रमुख निमार्ण उद्योग हैं। 52 मानव भूगोल के मूल सि(ांत लौह इस्पात उद्योग लौह - इस्पात उद्योग सभी उद्योगों का आधर है इसलिए इसे आधरभूत उद्योग भी कहा जाता है। यह आधरभूत इसलिए है क्योंकि यह अन्य उद्योगों जैसे कि मशीन और औशार जो आगे उत्पादों के लिए प्रयोग किए जाते हैं को कच्चा माल प्रदान करता है। इसे भारी उद्योग भी कहते हैं क्योंकि इसमें बड़ी मात्रा में भारी - भरकम कच्चा माल उपयोग में लाया जाता है एवं इसके उत्पाद भी भारी होते हैं। लोहा निकालने के लिए लौह - अयस्क को झोंका भियाðंेमें काबर्न ;कोकद्ध एवं चूना पत्थर के साथ प्रगलन किया जाता है। पिघला हुआ लौह बाहर निकलकर जब ठंडा हो जाता है तो उसे कच्चा लोहा कहते हैं। इसी कच्चे लोहे में मैंगनीज मिलाकर इस्पात बनाया जाता है। परंपरागत रूप से बडे़ इस्पात उद्योग की स्िथति कच्चेमाल के ड्डोत के समीप ही रही है जहाँ लौह - अयस्क, कोयला, मैंगनीज एवं चूना - पत्थर आसानी से उपलब्ध् हो जाता हो या यह ऐसे स्थान पर भी अवस्िथत हो सकता है जहाँकच्चा माल आसानी से पहुँचाया जा सके जैसे पत्तन के समीप। परंतु छोटे इस्पात कारखाने जिनका निमार्ण और प्रचालन कम महँगा है की अवस्िथति के लिए कच्चेमाल की अपेक्षाबाशार का समीप होना अध्िक महत्त्वपूणर् होता है क्योंकि कच्चे माल के रूप में रद्दी धतू बाशार से उपलब्ध् हो जाती है। परंपरागत रूप से अध्िकतर इस्पात का उत्पादन विशाल संघटित संयंत्रों द्वारा ही किया जाता था पर अब छोटे इस्पात संयंत्रा जिनमें केवल एक प्रिया - इस्पात निमार्ण होता है, अध्िक लगने लगे हैं। वितरणः यह एक जटिल उद्योग है जिसमें अध्िक पूँजीकी आवश्यकता होती है। तथा उत्तरी अमेरिका, यूरोप एवं एश्िाया के विकसित देशों में इसका वेंफद्रीकरण है। संयुक्त राज्य अमेरिका में लौह - इस्पात का उत्पादन करने वाले प्रमुख क्षेत्रा,उत्तर अप्लेश्िायन प्रदेश ;पिट्सबगर्द्ध महान झील क्षेत्रा ;श्िाकागो - गैरी, इरी, क्लीवलैंड, लोरेन, बपैफलो एवं ड्युलुथद्ध तथा एटलांटिक तट ;स्पैरोज पोइंट एवं मोरिसविलेद्ध हैं। इनके अतिरिक्त इस उद्योग का विस्तार दक्ष्िाणी राज्य अलाबामा में भीहुआ है। पीट्सबगर् क्षेत्रा का महत्त्व अब घट रहा है एवं इस क्षेत्रा को ‘जंग का कटोरा’ के नाम से पुकारा जाता है। यूरोप में ग्रेट बि्रटेन, जमर्नी, बेल्िजयम, लक्शेमबगर्, नीदरलैंड एवं सोवियत रूस इसके मुख्य उत्पादक हैं। ग्रेट बि्रटेन में बरमिंघम एवं शैपफील्ड, जमर्नी में, डूइसबगर्, डोरटमुंड, डूसूलडोरपफ एवं ऐसेन, प्रफांस में ली क्रीयुसोट एवं सेंट इटीनी, सोवियत रूस में मास्को, सेंट पीट्रसबगर्, लीपेटस्क एवं तुला, युवे्रफन में िबोइ, राॅग एवं दोनेत्सक प्रमुख इस्पात वेंफद्र हैं। एश्िाया महाद्वीप में जापान में नागासाकी एवं टोक्यो, योकोहामा, चीन में शंघाइर्, तियनस्ितन एवं वूहान एवं भारत में जमशेदपुर, वुफल्टी - बुरहानपुर, दुगार्पुर, राउरकेला, भ्िालाइर्, बोकारो, सलेम, विशाखापटनम एवं भद्रावती प्रमुख वेंफद्र हैं। उपयुर्क्त सभी वेंफद्रों को अपने एटलस में देख्िाए। सूती कपड़ा उद्योग इस उद्योग में सूती कपडे़ का निमार्ण हथकरघा, बिजली करघा एवं कारखानों में किया जाता है। हथकरघा क्षेत्रा में अध्िक श्रमिकों की आवश्यकता होती है एवं यह अ(र्वुफशल श्रमिकों को रोशगार प्रदान करता है। पूँजी की आवश्यकता भी इसमें कम होती है। स्वतंत्राता के आंदोलन में महात्मा गांध्ी ने खादी के उपयोग पर क्यों बल दिया था? इसके अंतगर्त सूत की कताइर्, बुनाइर् आदि का कायर् किया जाता है। बिजली करघों से कपड़ा बनाने में यंत्रांे का प्रयोग किया जाता है अतः इसमें श्रमिकों की कम आवश्कता पड़ती है एवं उत्पादन भी अिाक होता है। कारखानों में कपड़ा बनाने के लिए अिाक पूँजी की आवश्यकता होती है परंतु इसमें अच्छे प्रकार के कपडे़ का बहुत अध्िक मात्रा में उत्पादन किया जाता है। सूती वस्त्रा निमार्ण के लिए कच्चे माल के रूप में अच्छी किस्म की कपास चाहिए। विश्व के 50 प्रतिशत से अध्िक कपास का उत्पादन भारत, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका,पाकिस्तान, उज्बेकिस्तान एवं मिड्ड में किया जाता है। ग्रेटबि्रटेन, उत्तरी पश्िचमी यूरोप के देश एवं जापान भी आयातित धगे से सूती कपड़े का उत्पादन करते हैं। अकेला यूरोप विश्व का लगभग आधा कपास आयात करता है। वतर्मान में इस उद्योग को वृफत्रिाम रेशे से प्रतिस्प(ार् करनी पड़ रही है। जिसके कारण अनेक देशों में इसमें नकारात्मक प्रवृति देखी जा रही है। वैज्ञानिक प्रगति एवं तकनीकी सुधरों से उद्योगों की संरचना में परिवतर्न होता है। उदाहरण के तौर पर द्वितीय विश्व यु( सेलेकर सत्तर के दशक तक जमर्नी ने इस उद्योग में काप़्ाफी प्रगति की पर अब इसके उत्पादन में कमी आ रही है। यह उद्योग उन कम विकसित देशों में स्थानांतरित हो गया है जहाँ श्रम लागत कम है। अभ्यास 1ण् नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए: ;पद्ध निम्न में से कौन - सा कथन असत्य है? ;कद्ध हुगली के सहारे जूट के कारखाने सस्ती जल यातायात की सुविध के कारण स्थापित हुए। ;खद्ध चीनी, सूती वस्त्रा एवं वनस्पति तेल उद्योग स्वच्छंद उद्योग है। ;गद्ध खनिज तेल एवं जलविद्युत शक्ित के विकास ने उद्योगों की अवस्िथति कारक के रूप में कोयलाशक्ित के महत्त्व को कम किया है। ;घद्ध पत्तन नगरों ने भारत में उद्योगों को आकष्िार्त किया है। ;पपद्ध निम्न में से कौन - सी एक अथर्व्यवस्था में उत्पादन का स्वामित्व व्यक्ितगत होता है? ;कद्ध पूँजीवाद ;खद्ध मिश्रित ;गद्ध समाजवाद ;घद्ध कोइर् भी नहीं द्वितीयक गतिविध्ियाँ 53 ;पपपद्ध निम्न में से कौन - सा एक प्रकार का उद्योग अन्य उद्योगों के लिए कच्चे माल का उत्पादन करता है? ;कद्ध वुफटीर उद्योग ;खद्ध छोटे पैमाने के उद्योग ;गद्ध आधरभूत उद्योग ;घद्ध स्वच्छंद उद्योग ;पअद्ध निम्न में से कौन - सा एक जोड़ा सही मेल खाता है? ;कद्ध स्वचालित वाहन उद्योग ...लाॅस एंजिल्स ;खद्ध पोत निमार्ण उद्योग ...लूसाका ;गद्ध वायुयान निमार्ण उद्योग ...पफलोरेंस ;घद्ध लौह - इस्पात उद्योग ...पिट्सबगर् 2ण् निम्नलिख्िात पर लगभग 30 शब्दों में टिप्पणी लिख्िाए: ;पद्ध उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग ;पपद्ध विनिमार्ण ;पपपद्ध स्वच्छंद उद्योग 3ण् निम्न प्रश्नों का 150 शब्दों में उत्तर दीजिए: ;पद्ध प्राथमिक एवं द्वितीयक गतिविध्ियों में क्या अंतर है। ;पपद्ध विश्व के विकसित देशों के उद्योगों के संदभर् में आध्ुनिक औद्योगिक ियाओं की मुख्य प्रवृतियों की विवेचना कीजिए। ;पपपद्ध अध्िकतर देशों में उच्च प्रौद्योगिकी उद्योग प्रमुख महानगरों के परिध्ि क्षेत्रों में ही क्यों विकसित हो रहे हैं। व्याख्या कीजिए। ;पअद्ध अप्रफीका में अपरिमित प्रावृफतिक संसाध्न हैं पिफर भी औद्योगिक दृष्िट से यह बहुत पिछड़ा महाद्वीप है। समीक्षा कीजिए। ;पद्ध आपके विद्यालय परिसर का सवेर्क्षण कीजिए एवं सभी व्यक्ितयों द्वारा उपयोग में लाए गए कारखाना निमिर्त सामान की जानकारी प्राप्त कीजिए। ;पपद्ध जैव अपघटनीय एवं अजैव अपघटनीय शब्दों के क्या अथर् हैं। इनमें से कौन - से प्रकार का पदाथर् उपयोग के लिए अच्छा है और क्यों? ;पपपद्ध अपने चारों और दृष्िट दौड़ाइए एवं सावर्भौम टेªडमावर्फ उनके भाव चिÉ एवं उत्पाद की सूची तैयार कीजिए। 54 मानव भूगोल के मूल सि(ांत

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