मानव के वो कायर्कलाप जिनसे आय प्राप्त होती है, आथ्िार्क िया कहा जाता है। आथ्िार्क ियाओं को मुख्यतः चार वगो± में विभाजित किया जाता है - प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक एवं चतुथर् ियाए। प्राथमिक ियाएप्रत्यक्ष रूप से पयार्वरण पर ँँप्राथमिक ियाएँ निभर्र है, क्योंकि ये पृथ्वी के संसाध्नों जैसे - भूमि, जल, वनस्पति, भवन निमार्ण सामग्री एवं खनिजों के उपयोग के विषय में बतलाती हैं। इस प्रकार इसके अंतगर्त आखेट, भोजन संग्रह, पशुचारण, मछली पकड़ना, वनों से लकड़ी काटना, वृफष्िा एवं खनन कायर् सम्िमलित किमछली पकड़ने एवं वृफष्िा करने का कायर् क्रमशः तटीय एवं मैदानी भागों के निवासी ही क्यों करते हैं? वे कौन से भौतिक एवं सामाजिक कारक हैं, जो विभ्िान्न प्रदेशों में प्राथमिक ियाओं के प्रकार को निधर्रित करते हैं? क्या आप जानते हैं प्राथमिक कायर्कलाप करने वाले लोग उनका कायर् क्षेत्रा घर से बाहर होने के कारण लाल काॅलर श्रमिक कहलाते हैं। आखेट एवं भोजन संग्रह मानव सभ्यता के आरंभ्िाक युग में आदिमकालीन मानव अपने जीवन निवार्ह के लिए अपने समीप के वातावरण पर निभर्र रहता था। उसका जीवन - निवार्ह दो कायो± द्वारा होता था ;कद्ध पशुओं का आखेट कर, और ;खद्ध अपने समीप के जंगलों से खाने योग्य जंगली पौध्े एवं वंफद - मूल आदि को एकत्रिात कर। आदिमकालीन समाज जंगली पशुओं पर निभर्र था। अतिशीत एवं अत्यध्िक गमर् प्रदेशों के रहने वाले लोग आखेट द्वारा जीवन - यापन करते थे। तकनीकी विकास के कारण यद्यपि मत्स्य - ग्रहण आध्ुनिकीकरण से युक्त हो गया है, तथापि तटवतीर् क्षेत्रों में रहने वाले लोग अब भी मछली पकड़ने का कायर् करते हैं। अवैध श्िाकार के कारण जीवों की कइर् जातियाँ या तो लुप्त हो गइर् हैं या संकटापन्न है। प्राचीन - काल के आखेटक पत्थर या लकड़ी के बने औजार एवं तीर इत्यादि का प्रयोग करते थे, जिससे मारे जाने वाले पशुओं की संख्या सीमित रहती थी। भारत में श्िाकार पर क्यों प्रतिबंध् लगाया गया है? भोजन संग्रह एवं आखेट प्राचीनतम ज्ञात अथ्िार्क ियाएँ हैं। विश्व के विभ्िान्न भागों में यह कायर् विभ्िान्न स्तरों पर विभ्िान्न रूपों में किया जाता है। यह कायर् कठोर जलवायुविक दशाओं में किया जाता है। इसे अध्िकतर आदिमकालीन समाज के लोग करते हैं। ये लोग अपने भोजन, वस्त्रा एवं शरण की आवश्यकता की पूतिर् हेतु पशुओं एवं वनस्पति का संग्रह करते हैं। इस कायर् के लिए बहुत कम पूँजी एवं निम्न स्तरीय तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता होती है। इसमें भोजन अध्िशेष भी नहीं रहता है एवं प्रति व्यक्ित उत्पादकता भी कम होती है। भोजन संग्रह विश्व के दो भागों में किया जाता है ;पद्धउच्च अक्षांश के क्षेत्रा जिसमें उत्तरी कनाडा, उत्तरी यूरेश्िाया एवं दक्ष्िाणी चिली आते हैं ;पपद्ध निम्न अक्षांश के क्षेत्रा जिसमें अमेजन बेसिन, उष्णकटिबंध्ीय अप्रफीका, आस्ट्रेलिया एवं दक्ष्िाणी पूवीर् एश्िाया का आंतरिक प्रदेश आता है ;चित्रा 5.2द्ध। आध्ुनिक समय में भोजन संग्रह के कायर् का वुफछ भागों में व्यापारीकरण भी हो गया है। ये लोग कीमती पौधों की पिायाँे, छाल एवं औषध्ीय पौधें को सामान्य रूप ससंशोेध्ित कर बाजार में बेचने का कायर् भी करते हैं। पौध्े के विभ्िान्न भागों का ये उपयोग करते हैं। उदाहरण के तौर पर छाल का उपयोग वुफनैन, चमड़ा तैयार करना एवं कावर्फ केलिएऋ पिायों का उपयोग, पेय पदाथर्, दवाइयाँ एवं कांतिव(र्क वस्तुएँ़बनाने के लिएऋ रेशे को कपडा बनानेऋ दृढ़पफल को भोजन एवं तेल के लिए एवं पेड़ के तने का उपयोग रबड़, बलाटा, गोंद व राल बनाने के लिए करते हैं। क्या आप जानते हैं चुविंगगम को चूसने के बाद शेष बचे भाग को क्या कहते हैं? क्या तुम जानते हो कि इसे चिकल कहते हैं? ये जेपोटा वृक्ष के दूध् से बनता है। विश्व स्तर पर भोजन संग्रहण का अध्िक महत्त्व नहीं है। इन ियाओं के द्वारा प्राप्त उत्पाद विश्व बाजार में प्रतिस्प(ार् नहीं कर सकते। कइर् प्रकार की अच्छी किस्म एवं कम दाम वाली वृफत्रिाम उत्पादों ने उष्ण कटिबंध्ीय वन के भोजन संग्रह करने वाले समूहों के उत्पादों का स्थान ले लिया है। पशुचारण आखेट पर निभर्र रहने वाले समूह ने जब ये महसूस किया कि केवल आखेट से जीवन का भरण - पोषण नहीं किया जा सकता है, तब मानव ने पशुपालन व्यवसाय के विषय में सोचा। विभ्िान्न जलवायुविक दशाओं में रहने वाले लोगों ने उन क्षेत्रों में पाए जाने वाले पशुओं का चयन करके पालतू बनाया। भौगोलिक कारकों एवं तकनीकी विकास के आधर पर वतर्मान समय में पशुपालन व्यवसाय निवर्हन अथवा व्यापारिक स्तर पर किया जाता है। चलवासी पशुचारण चलवासी पशुचारण एक प्राचीन जीवन - निवार्ह व्यवसाय रहा है जिसमें पशुचारक अपने भोजन, वस्त्रा, शरण, औजार एवं यातायात के लिए पशुओं पर ही निभर्र रहता था। वे अपने पालतू पशुओं के साथ पानी एवं चरागाह की उपलब्ध्ता एवंगुणवत्ता के अनुसार एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित होते रहते थे। इन पशुचारक वगो± के अपने - अपने निश्िचत चरागाह क्षेत्रा होते थे। पाला जाता है। तिब्बत एवं एंडीज के पवर्तीय भागों में याॅक व लामा एवं आवर्फटिक और उप उत्तरी ध््रुवीय क्षेत्रों में रडियरेंपाला जाता है चलवासी पशुचारण के तीन प्रमुख क्षेत्रा हैं। इसका प्रमुखक्षेत्रा उत्तरी अप्रफीका के एटलांटिक तट से अरब प्रायद्वीप होता हुआ मंगोलिया एवं मध्य चीन तक पैफला है। दूसरा क्षेत्रा यूरोप तथा एश्िाया के टुंड्रा प्रदेश में है जबकि तीसरा क्षेत्रा दक्ष्िाणी गोला(र् में दक्ष्िाणी पश्िचमी अप्रफीका एवं मेडागास्कर द्वीप पर है ;चित्रा 5.4द्ध। नए चरागाहों की खोज में ये पशुचारक समतल भागों एवं पवतीर्य क्षेत्रों में लंबी दूरियाँ तय करते है। गमिर्यों में मैदानी भाग से पवर्तीय चरागाह की ओर एवं शीत में पवर्तीय भाग से मैदानी चरागाहों की ओर प्रवास करते हैं। इनकी इस गतिवििा को )तुप्रवास कहा जाता है। भारत में हिमालय के पवर्तीय क्षेत्रों में गुज्जर, बकरवाल, गद्दी एवं भूटिया लोगों के समूह ग्रीष्मकाल में मैदानी क्षेत्रों से पवर्तीय क्षेत्रों में चले जाते हैं एवं शीतकाल में पवर्तीय क्षेत्रों से मैदानी क्षेत्रा में आ जाते हंै। इसी प्रकार टुंड्राप्रदेश में ग्रीष्म काल में दक्ष्िाण से उत्तर की ओर एवं शीत मेंउत्तर से दक्ष्िाण की ओर चलवासी पशुचारकों का पशुओं के साथ प्रवास होता है। चलवासी पशुचारकों की संख्या अब घट रही है एवं इनके द्वारा उपयोग में लाए गए क्षेत्रा में भी कमी हो रही है। इसके दो कारण हैं ;कद्ध राजनीतिक सीमाओं का अिारोपण ;खद्ध कइर् देशों द्वारा नइर् बस्ितयों की योजना बनाना। वाण्िाज्य पशुध्न पालन चलवासी पशुचारण की अपेक्षा वाण्िाज्य पशुध्न पालन अिाक व्यवस्िथत एवं पूँजी प्रधन है। वाण्िाज्य पशुध्न पालन पश्िचमी संस्वृफति से प्रभावित है एवं पफामर् भी स्थायी होते है। यह पफामर् विशाल क्षेत्रा पर पैफले होते हैं एवं संपूणर् क्षेत्रा को छोटी - छोटी इकाइयों में विभाजित कर दिया जाता है। चराइर् को नियंत्रिात करने के लिए इन्हें बाड़ लगाकर एक दूसरे से अलग कर दिया जाता है। जब चराइर् के कारण एक छोटे क्षेत्रा की घास समाप्त हो जाती है तब पशुओं को दूसरे छोटे क्षेत्रा में ले जाया जाता है। वाण्िाज्य पशुध्न पालन में पशुओं की संख्या भी चरागाह की वहन क्षमता के अनुसार रखी जाती है यह एक विश्िाष्ट गतिविध्ि है, जिसमें केवल एक ही प्रकार के पशु पाले जाते हैं। प्रमुख पशुओं में भेड़, बकरी,गाय - बैल एवं घोड़े हैं। इनसे प्राप्त मांस, खालंे एवं ऊन को प्राथमिक ियाएँ 33 चित्रा 5.4: चलवासी पशुचारण के क्षेत्रा वैज्ञानिक ढंग से संसाध्ित एवं डिब्बा बंद कर विश्व के बाजारों में नियार्त कर दिया जाता है। पशुपफामर् में पशुध्न पालन वैज्ञानिक आधर पर व्यवस्िथत किया जाता है। इसमें मुख्य ध्यान पशुओं के प्रजनन, जननिक सुधर बीमारियों पर नियंत्राण एवं उनके स्वास्थ्य पर दिया जाता है। 34 मानव भूगोल के मूल सि(ांत विश्व में न्यूजीलैंड, आस्टेªलिया, अजे±टाइना, युरूग्वे एवं संयुक्त राज्य अमेरिका में वाण्िाज्य पशुध्न पालन किया जाता है ;चित्रा 5.6द्ध। वृफष्िा विश्व में पाइर् जाने वाली विभ्िान्न भौतिक, सामाजिक एवं आथ्िार्क दशाएँ वृफष्िा कायर् को प्रभावित करती हैं एवं इसी प्रभाव के कारण विभ्िान्न वृफष्िा प्रणालियाँ देखी जाती हैं। वृफष्िा विभ्िान्न प्रकार के पफसलों का बोया जाना तथा पशुपालन विभ्िान्न वृफष्िा विध्ियों पर आधरित होता है। मुख्य प्रणालियाँ निम्नलिख्िात हैं। निवार्ह वृफष्िा इस प्रकार की वृफष्िा मंे वृफष्िा क्षेत्रा में रहने वाले स्थानीय उत्पादों का संपूणर् अथवा लगभग का उपयोग करते हैं। इसको दो भागों में वगीर्वृफत किया जा सकता है। आदिकालीन निवार्ह वृफष्िा आदिकालीन निवार्ह वृफष्िा अथवा स्थानांतरणशील वृफष्िा कायर् चित्रा 5.6: वाण्िाज्य पशुध्न पालन के क्षेत्रा प्राथमिक ियाएँ 35 उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में किया जाता है जहाँ आदिम जाति के लोग यह वृफष्िा करते हैं। इसका क्षेत्रा अप्रफीका, दक्ष्िाणी एवं मध्य अमेरिका का उष्णकटिबंध्ीय भाग एवं दक्ष्िाणी पूवीर् एश्िाया है ;चित्रा 5.7द्ध। इन क्षेत्रों की वनस्पति को जला दिया जाता है एवं जली हुइर् राख की परत उवर्रक का कायर् करती है। इस प्रकार स्थानांतरणशील वृफष्िा कतर्न एवं दहन वृफष्िा भी कहलाती है। इसमें बोए गए खेत बहुत छोटे - छोटे होते हैं एवं खेती भी पुराने औजार जैसे लकड़ी, वुफदाली एवं पफावड़े द्वारा की जाती है।वुफछ समय पश्चात् ;3 से 5 वषर्द्ध जब मिट्टðी का उपजाऊपन समाप्त हो जाता है, तब वृफषक नए क्षेत्रा में वन जलाकर वृफष्िाके लिए भूमि तैयार करता है। वुफछ समय पश्चात् वृफषक वापस पहले वाले वृफष्िा क्षेत्रा पर वृफष्िा कायर् करने आ जाता है। इस वृफष्िा कायर् में सबसे बड़ी समस्या यह है कि इस क्षेत्रा में भूमि की उवर्रता कम होती जाती है जिससे झूम का चक्र ;आग लगाकर वृफष्िा क्षेत्रा तैयार करनाद्ध छोटा होता जाता है। उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में इसे अलग - अलग नामों से जाना जाता हैभारत के उत्तरी पूवीर् राज्यों में इसे झूमिंग, मध्य अमेरिका एवं मैक्िसको में मिल्पा एवं मलेश्िाया व इंडोनेश्िाया में लादांग कहा जाता है। आप ऐसे अन्य क्षेत्रों का पता लगाइए जहाँ इस प्रकार की वृफष्िा की जाती है एवं वहाँ इसे किस नाम से पुकारते हैं। गहन निवार्ह वृफष्िा इस प्रकार की वृफष्िा मानसून एश्िाया के घने बसे देशों में की जाती है। गहन निवार्ह वृफष्िा के दो प्रकार हैं। ;पद्ध चावल प्रधन गहन निवार्ह वृफष्िाः इसमें चावल प्रमुख पफसल होती है। अध्िक जनसंख्या घनत्व के कारण खेतों का आकार छोटा होता है एवं वृफष्िा कायर् मंे वृफषक का संपूणर् परिवार लगा रहता है। भूमि का गहन उपयोग होताहै एवं यंत्रों की अपेक्षा मानव श्रम का अध्िक महत्त्व है। उवर्रता बनाए रखने के लिए पशुओं के गोबर की खाद एवं हरी खाद का उपयोग किया जाता है। इस वृफष्िा में प्रति इकाइर् उत्पादन अध्िक होता है, परंतु प्रति वृफषक उत्पादन कम है। ;पपद्ध चावल रहित गहन निवार्ह वृफष्िाः मानसून एश्िाया के अनेक भागों में उच्चावच, जलवायु, मृदा तथा अन्य भौगोलिक कारकों की भ्िान्नता के कारण धन की पफसलउगाना प्रायः संभव नहीं है। उत्तरी चीन, मंचूरिया, उत्तरीकोरिया एवं उत्तरी जापान में गेहूँ, सोयाबीन, जौ एवं सोरपम बोया जाता है। भारत में सिंध - गंगा के मैदान के पश्िचमी भाग में गेहूँ एवं दक्ष्िाणी व पश्िचमी शुष्क प्रदेश में ज्वार - बाजरा प्रमुखत रूप से उगाया जाता है। इस वृफष्िा की अध्िकतर विशेषताएँ वो ही है जो चावल प्रधन वृफष्िा की हैं। केवल अंतर यह है कि इसमें सिंचाइर् की जाती है। रोपण वृफष्िा यूरोपीय लोगों ने विश्व के अनेक भागों का औपनिवेशीकरण किया तथा वृफष्िा के वुफछ अन्य रूपों की शुरुआत की जैसे रोपण वृफष्िा, जो वृहद् स्तरीय लाभोन्मुख उत्पादन प्रणाली है। यूरोपीय उपनिवेशों ने अपने अध्ीन उष्ण कटिबंध्ीय क्षेत्रों में चाय, काॅपफी, कोको, रबड़, कपास, गन्ना, केले एवं अनन्नास की पौध् लगाइर्। इस वृफष्िा की प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें वृफष्िा क्षेत्रा का आकार बहुत विस्तृत होता है। इसमें अध्िक पूजी भी वुफछ काॅपफी के बागान जिन्हें पेफशेंडा कहा जाता है यूरोपवासियों के नियंत्राण में है। वतर्मान में अध्िकतर बागानों का स्वामित्व देशों की सरकार अथवा नागरिकों के नियंत्राण में है। चित्रा 5.10: चाय के बागान अनुवूफल भौगोलिक दशाओं के कारण ढालों का उपयोग चाय बागानों हेतु किया जाता है। विस्तृत वाण्िाज्य अनाज वृफष्िा मध्य अक्षांशांे के आंतरिक अध्र् शुष्क प्रदेशों में इस प्रकार की वृफष्िा की जाती है। इसकी मुख्य पफसल गेहूँ है। यद्यपि अन्य पफसलें जैसे मक्का, जौ, राइर् एवं जइर् भी बोइर् जाती है। इस वृफष्िा में खेतों का आकार बहुत बड़ा होता है एवं खेत जोतने से पफसल काटने तक सभी कायर् यंत्रों द्वारा संपन्न किए ँजाते हैं। ;चित्रा 5निवेश, उच्च प्रबंध एवं तकनीकी आधर एवं वैज्ञानिक 11द्ध इसमें प्रति विध्ियों का प्रयोग किया जाता है। यह एक पफसली वृफष्िा एकड़ उत्पादन कम है जिसमें किसी एक पफसल के उत्पादन पर ही सवंेफद्रण होता है परंतु प्रति किया जाता है। श्रमिक सस्ते मिल जाते हैं एवं यातायात व्यक्ित उत्पादन विकसित होता है जिसके द्वारा बागान एवं बाशार सुचारु अध्िक होता है। रूप से जुडे़ रहते हैं। ऐसा क्यों होता है? प्रफांसवासियांे ने पश्िचमी अप्रफीका में काॅपफी एवं चित्रा 5.11:कोकोआ की पौध् लगाइर् थी। बि्रटेनवासियों ने भारत एवं लंका मशीनीवृफत अनाजमें चाय के बाग, मलयेश्िाया में रबड़ के बाग एवं पश्िचमी वृफष्िा द्वीप समूह में गन्ना एवं केले के बाग विकसित किए। स्पेन कंबाइर्न व्रूफ एक दिन एवं अमेरिकावासियों ने पिफलीपाइंस में नारियल व गन्ने के में कइर् हेक्टेयर भूमि बागान लगाए। इंडोनेश्िाया में एक समय गन्ने की वृफष्िा में से अनाज काटने में सक्षम है।हाॅलैंडवासियों ;डचोंद्ध का एकािाकार था। ब्राजील में अभी प्राथमिक ियाएँ 37 चित्रा 5.12: विस्तृत वाण्िाज्य अनाज वृफष्िा के क्षेत्रा इस प्रकार की वृफष्िा का क्षेत्रा यूरेश्िाया के स्टेपीज, उत्तरी अमेरिका के पे्रयरीज, अजे±टाइना के पंपाज, दक्ष्िाणी अप्रफीका के वेल्डस, आस्टेªलिया के डाउंस एवं न्यूजीलैंड के वेंफटरबरी के मैदान में है ;विश्व मानचित्रा पर इन क्षेत्रों का निधर्रण कीजिएद्ध। मिश्रित वृफष्िा इस प्रकार की वृफष्िा विश्व के अत्यध्िक विकसित भागों में कीजाती है, उदाहरणस्वरूप उत्तरी पश्िचमी यूरोप, उत्तरी अमेरिका का पूवीर् भाग, यूरेश्िाया के वुफछ भाग एवं दक्ष्िाणी महाद्वीपों के समशीतोष्ण अक्षांश वाले भागों में इसका विस्तार है ;चित्रा 514द्ध। इस वृफष्िा में खेतों का आकार मध्यम होता है। इसमें बोइर् जाने वाली पफसलें गेहूँ, जौ, राइर्, जइर्, मक्का, चारे की पफसल एवं वंफद - मूल प्रमुख है। चारे की पफसलें मिश्रित वृफष्िा के मुख्य घटक हैं। पफसल उत्पादन एवं पशुपालन दोनों को इसमें समान महत्त्व दिया जाता है। पफसलों के साथ पशुओंजैसे - मवेशी, भेड़, सुअर एवं वुफक्वुफर आय के मुख्य ड्डोत हंै। शस्यावतर्न एवं अंतः पफसली वृफष्िा मृदा की उवर्रता को बनाएरखने में महत्त्वपूणर् भूमिका निभाते हैं। विकसित वृफष्िा यंत्रा, इमारतों, रासायनिक एवं वनस्पति खाद ;हरी खादद्ध के गहन उपयोग आदि पर अध्िक पूँजी व्यय के साथ ही वृफषकों की वुफशलता और योग्यता मिश्रित वृफष्िा की मुख्य विशेषताएँ हैं। डेरी वृफष्िा डेरी व्यवसाय दुधरु पशुओं के पालन - पोषण का सवार्िाक उन्नत एवं दक्ष प्रकार है। इसमें पूँजी की भी अिाक आवश्यकता होती है। पशुओं के लिए छप्पर, घास संचित करने के भंडार चित्रा 5.14: मिश्रित वृफष्िा के क्षेत्रा एवं दुग्ध् उत्पादन में अध्िक यंत्रों के प्रयोग के लिए पूँजी भी अध्िक चाहिए। पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन एवं पशु चिकित्सा पर भी अध्िक ध्यान दिया जाता है। इसमें गहन श्रम की आवश्यकता होती है। पशुओं को चराने, दूध् निकालने आदि कायो± के लिए वषर् भर श्रम की आवश्यकता रहती है। क्योंकि पफसलों की तरह इनमें कोइर् अंतराल नहीं होता जिसमें श्रम की आवश्यकता न हो। डेरी वृफष्िा का कायर् नगरीय एवं औद्योगिक वेंफद्रों के समीप किया जाता है, क्योंकि ये क्षेत्रा ताजा दूध् एवं अन्य डेरी उत्पाद के अच्छे बाजार होते हैं वतर्मान समय में विकसित यातायात के साध्न, प्रशीतकों का उपयोग, पास्तेरीकरण की सुविध के कारण विभ्िान्न डेरी उत्पादों को अध्िक समय तक रखा जा सकता है। वाण्िाज्य डेरी वृफष्िा तीन प्रमुख क्षेत्रा हैं, सबसे बड़ाप्रदेश उत्तरी पश्िचमी यूरोप का क्षेत्रा है। दूसरा कनाडा एवं तीसरा क्षेत्रा न्यूजीलैंड, दक्ष्िाणी पूवीर् आस्टेªलिया एवं तस्मानिया है ;चित्रा 5.16द्ध। भूमध्यसागरीय वृफष्िा भूमध्यसागरीय वृफष्िा अति विश्िाष्ट प्रकार की वृफष्िा है। इसकाविस्तार भूमध्यसागर के समीपवतीर् क्षेत्रा जो दक्ष्िाणी यूरोप से उत्तरी ्अप्रफीका में टयूनीश्िाया से एटलांटिक तट तक पैफला है दक्ष्िाणी वैफलीपफोनिर्या, मध्यवतीर् चिली, दक्ष्िाणी अप्रफीका का दक्ष्िाणी पश्िचमी भाग एवं आस्ट्रेलिया के दक्ष्िाण व दक्ष्िाण पश्िचम भागमें है। खट्टे पफलों की आपूतिर् करने में यह क्षेत्रा महत्त्वपूणर् है। अंगूर की वृफष्िा भूमध्यसागरीय क्षेत्रा की विशेषता है। इसक्षेत्रा के कइर् देशों में अच्छे किस्म के अंगूरों से उच्च गुणवत्ता वाली मदिरा का उत्पादन किया जाता है। निम्न श्रेणी के अंगूरों को सुखाकर मुनक्का एवं किशमिश बनाइर् जाती है। अंजीर एवं जैतून भी यहाँ उत्पन्न होता है। शीत )तु में जब यूरोप एवं चित्रा 5.15 ;कद्ध: स्िवटशरलैंड में एक अंगूर का बाग प्राथमिक ियाएँ 39 चित्रा 5.16: डेरी वृफष्िा के क्षेत्रा संयुक्त राज्य अमेरिका में पफलों एवं सब्िजयों की माँग होती है तब इसी क्षेत्रा से पूतिर् की जाती है। बाशार के लिए सब्जी खेती एवं उद्यान वृफष्िा इस प्रकार की वृफष्िा में अध्िक मुद्रा मिलने वाली पफसलें जैसे सब्िजयाँ, पफल एवं पुष्प लगाए जाते हैंँजिनकी माग नगरीय क्षेत्रांे में होती है। इस वृफष्िा में खेतों का आकार छोटा होता है एवं खेत अच्छे यातायात साध्नों के द्वारा नगरीय वेंफद्रों जहाँ 40 मानव भूगोल के मूल सि(ांत उँची आय वाले उपभोक्ता रहते हंै। इसमें गहन श्रम एवं अिाक पूँजी की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त सिंचाइर्, उवर्रक, अच्छी किस्म के बीज, कीटनाशी, हरित गृह एवं शीत क्षेत्रों में वृफत्रिाम ताप का भी इस वृफष्िा में उपयोग होता है।इस प्रकार की वृफष्िा उत्तरी पश्िचमी यूरोप, संयुक्त राज्य अमेरिका वेफ उत्तरी पूवीर् भाग एवं भूमध्यसागरीय प्रदेश में अिाक विकसित है, जहाँ औद्योगिक क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व अध्िक है। नीदरलैंड पुष्प उत्पादन में विश्िाष्टीकरण रखता है। यहाँ्ूसे बागबानी पफसल विशेषतः टयलिप ;एक प्रकार का पूफलद्ध पूरे यूरोप के प्रमुख शहरों में भेजा जाता है। जिन प्रदेशों में वृफषक केवल सब्िजयाँ पैदा करता है वहाँ इसको ‘ट्रक वृफष्िा’ का नाम दिया जाता है। ट्रक पफामर् एवं बाशार के मध्य की दूरी, जो एक ट्रक रात भर में तय करता है, उसी आधर पर इसका नाम ट्रक वृफष्िा रखा गया है।पश्िचमी यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका के औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यान वृफष्िा के अलावा कारखाना वृफष्िा भी की जाती है। इसमें पशुध्न पाला जाता है जिनमें विशेषतः गाय - बैल एवं वुफक्वुफर होते हैं। इन्हें बाडे़ पर कारखानों में तैयार बने बनाए भोजन पर रखा जाता है, एवं उनकी बीमारियों का भी ध्यान रखा जाता है। इसमें भवन निमार्ण, यंत्रा खरीदने, प्रकाश एवं ताप की व्यवस्था करने एवं पशु चिकित्सा के लिए बहुत अध्िक ध्न की आवश्यकता होती है। अच्छी नस्ल का चुनाव और प्रजनन की वैज्ञानिक वििायों वुफक्वुफर एवं पशुपालन केमहत्त्वपूणर् लक्षण हैं। वृफष्िा करने वाले संगठन के आधर पर भी वृफष्िा के प्रकारों का वगीर्करण किया जा सकता है। वृफष्िा संगठन, वृफषक का खेतों पर अपना अध्िकार एवं उस पर सरकारी नीतियाँ जो वृफष्िा में सहायक होती हैं, से प्रभावित होता है। सहकारी वृफष्िा जब वृफषकों का एक समूह अपनी वृफष्िा से अध्िक लाभ कमाने के लिए स्वेच्छा से एक सहकारी संस्था बनाकर वृफष्िा कायर् संपन्न करे उसे सहकारी वृफष्िा कहते हैं। इसमें व्यक्ितगत पफामर् अक्षुण्ण रहते हुए सहकारी रूप में वृफष्िा की जाती है। सहकारी संस्था वृफषकों को सभी रूप में सहायता करती है। यह सहायता वृफष्िा कायर् में आने वाली सभी चीजों की खरीद करने, वृफष्िा उत्पाद को उचित मूल्य पर बेचने एवं सस्ती दरों पर प्रसंस्वृफत साध्नों को जुटाने के लिए होती है। सहकारी अंादोलन एक शताब्दी पूवर् प्रारंभ हुआ था एवं पश्िचमी यूरोप के डेनमावर्फ, नीदरलैंड, बेल्िजयम, स्वीडन एवं इटली में यह सपफलतापूवर्क चला। सबसे अध्िक सपफलता इसे डेनमावर्फ में मिली जहाँ प्रत्येक वृफषक इसका सदस्य है। डेनमावर्फ में यह आंदोलन सवार्ध्िक सपफल रहा, जहाँ व्यावहारिक रूप से प्रत्येक वृफषक इस आंदोलन का सदस्य है। चित्रा 5.17 ;खद्ध: ट्रकों एवं ठेलों पर नगरीय बाजारों में ले जाने के लिए सब्िजयों का लादा जाना। सामूहिक वृफष्िा इस प्रकार की वृफष्िा का आधरभूत सि(ांत यह होता है कि इसमें उत्पादन के साध्नों का स्वामित्व संपूणर् समाज एवं सामूहिक श्रम पर आधरित होता है। वृफष्िा का यह प्रकार पूवर् सोवियत संघ में प्रारंभ हुआ था जहाँ वृफष्िा की दशा सुधरने एवं उत्पादन में वृि व आत्मनिभर्रता प्राप्ित के लिए सामूहिक वृफष्िा प्रारंभ की गइर्। इस प्रकार की सामूहिक वृफष्िा को सोवियत संघ में कोलखहोश का नाम दिया गया। सभी वृफषक अपने संसाध्न जैसे भूमि, पशुध्न एवं श्रम को मिलाकर वृफष्िा कायर् करते थे। ये अपनी दैनिक आवश्यकताओं की पूतिर् के लिए भूमि का छोटा - सा भाग अपने अध्िकार में भी रखते थे। सरकार उत्पादन का वाष्िार्क लक्ष्य निधर्रित करती थी एवं उत्पादन को सरकार ही निधर्रित मूल्य पर खरीदती थी। लक्ष्य से अध्िक उत्पन्न होने वाला भाग सभी सदस्यों को वितरित कर दिया जाता था या बाशार में बेच दिया जाता था। उत्पादन एवं भाडे़ पर ली गइर् मशीनों पर वृफषकों को कर चुकाना पड़ता था। सभी सदस्यों को उनके द्वारा किए गए कायर् की प्रवृफति के आधर पर भुगतान किया जाता था। असाधरण कायर् करने वाले सदस्य को नकद या माल के रूप में पुरस्वृफत किया जाता था। पूवर् सोवियत संघ की समाजवादी सरकार ने इसे प्रारंभ किया जिसे अन्य समाजवादी देशों ने भी अपनाया। सोवियत संघ के विघटन के बाद इस प्रकार की वृफष्िा में भी संशोध्न किया गया है। प्राथमिक ियाएँ 41 खनन मानव विकास के इतिहास मंे खनिजों की खोज की कइर् अवस्थाएँ देखी जा सकती हंै जैसे ताम्र युग, कांस्य युग एवं लौह युग। प्राचीन काल में खनिजों का उपयोग औजार बनाने, बतर्न बनाने एवं हथ्िायार बनाने तक ही सीमित था। इसका वास्तविक विकास औद्यौगिक क्रांति के पश्चात् ही संभव हुआएवं निरंतर इसका महत्त्व बढ़ता रहा है। खनन कायर् को प्रभावित करने वाले कारक खनन कायर् की लाभप्रदता दो बातों पर निभर्र करती है। ;पद्ध भौतिक कारक जिनमें खनिज निक्षेपों के आकार, श्रेणी एवं उपस्िथति की अवस्था को सम्िमलित करते है। ;पपद्ध आथ्िार्क कारक जिनमें खनिज की माँग, विद्यमान तकनीकी ज्ञान एवं उसका उपयोग, अवसंरचना के विकास के लिए उपलब्ध् पूँजी एवं यातायात व श्रम पर होने वाला व्यय आता है। खनन की विध्ियाँ उपस्िथति की अवस्था एवं अयस्क की प्रवृफति के आधर पर खनन के दो प्रकार हैंः ध्रातलीय एवं भूमिगत खनन। ध्रातलीय खनन को विवृत खनन भी कहा जाता है। यह खनिजों के खनन का सबसे सस्ता तरीका है, क्योंकि इस विध्ि में सुरक्षात्मक पूवोर्पायों एवं उपकरणों पर अतिरिक्त खचर् अपेक्षावृफत निम्न कम होता है एवं उत्पादन शीघ्र व अध्िक होता है। चित्रा 5.19: खनन की विध्ियाँ जब अयस्क ध्रातल के नीचे गहराइर् में होता है तब भूमिगत अथवा वूफपकी खनन विध्ि का प्रयोग किया जाता है। इस विध्ि में लंबवत् वूफपक गहराइर् तक स्िथत हैं, जहाँ से भूमिगत गैलरियाँ खनिजों तक पहुँचने के लिए पैफली हैं। इन मागो± से होकर खनिजों का निष्कषर्ण एवं परिवहन धरातल तक किया जाता है। खदान में कायर् करने वाले श्रमिकों तथा निकाले जाने वाले खनिजों के सुरक्ष्िात और प्रभावी आवागमनहेतु इसमें विशेष प्रकार की लिफ्रट बेध्क ;बरमाद्ध, माल ढोने की गाडि़याँ तथा वायु संचार प्रणाली की आवश्यकता होती है। खनन का यह तरीका जोख्िाम भरा है क्योंकि जहरीली गैसें, आग एवं बाढ़ के कारण कइर् बार दुघर्टनाएँ होने का भय रहता है। क्या आपने कभी भारत की कोयला खदानों में आग लगने एवं बाढ़ आने के विषय में पढ़ा है? विकसित अथर्व्यवस्था वाले देश उत्पादन की खनन, प्रसंस्करण एवं शोध्न कायर् से पीछे हट रहे हैं क्योंकि इसमें श्रमिक लागत अध्िक आने लगी है। जबकि विकासशील देश अपने विशाल श्रमिक शक्ित के बल पर अपने देशवासियों के उँफचे रहन - सहन को बनाए रखने के लिए खनन कायर् कोमहत्त्व दे रहे हैं। अप्रफीका के कइर् देश, दक्ष्िाण अमेरिका के वुफछ देश एवं एश्िाया में आय के साध्नों का पचास प्रतिशत तक खनन कायर् से प्राप्त होता है। अभ्यास 1ण् नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए: ;पद्ध निम्न में से कौन - सी रोपण पफसल नहीं है? ;कद्ध काॅपफी ;खद्ध गन्ना ;गद्धगेहूँ ;घद्ध रबड़ ;पपद्ध निम्न देशों में से किस देश में सहकारी वृफष्िा का सपफल परीक्षण किया गया है? ;कद्ध रूस ;खद्ध डेनमावर्फ ;गद्धभारत ;घद्ध नीदरलैंड ;पपपद्ध पूफलों की वृफष्िा कहलाती है - ;कद्ध ट्रक पफामि±ग ;खद्ध कारखाना वृफष्िा ;गद्धमिश्रित वृफष्िा ;घद्ध पुष्पोत्पादन ;पअद्ध निम्न में से कौन - सी वृफष्िा के प्रकार का विकास यूरोपीय औपनिवेश्िाक समूहांे द्वारा किया गया? ;कद्ध कोलखाशे ;खद्ध अंगूरोत्पादन ;गद्धमिश्रित वृफष्िा ;घद्ध रोपण वृफष्िा ;अद्ध निम्न प्रदेशों में से किसमें विस्तृत वाण्िाज्य अनाज वृफष्िा नहीं की जाती है? ;कद्ध अमेरिका एवं कनाडा के पे्रयरी क्षेत्रा ;खद्ध अजे±टाइना के पंपास क्षेत्रा ;गद्धयूरोपीय स्टैपीश क्षेत्रा ;घद्ध अमेजन बेसिन ;अपद्ध निम्न में से किस प्रकार की वृफष्िा में खट्टे रसदार पफलों की वृफष्िा की जाती है? ;कद्ध बाजारीय सब्जी वृफष्िा ;खद्ध भूमध्यसागरीय वृफष्िा ;गद्धरोपण वृफष्िा ;घद्ध सहकारी वृफष्िा ;अपपद्ध निम्न वृफष्िा के प्रकारों में से कौन - सा प्रकार कतर्न - दहन वृफष्िा का प्रकार है? ;कद्ध विस्तृत जीवन निवार्ह वृफष्िा ;खद्ध आदिकालीन निवार्हक वृफष्िा ;गद्धविस्तृत वाण्िाज्य अनाज वृफष्िा ;घद्ध मिश्रित वृफष्िा ;अपपपद्ध निम्न में से कौन - सी एकल वृफष्िा नहीं है? ;कद्ध डेरी वृफष्िा ;खद्ध मिश्रित वृफष्िा ;गद्धरोपण वृफष्िा ;घद्ध वाण्िाज्य अनाज वृफष्िा 2ण् निम्न प्रश्नों का 30 शब्दों में उत्तर दीजिए: ;पद्ध स्थानांतरी वृफष्िा का भविष्य अच्छा नहीं है। विवेचना कीजिए। ;पपद्ध बाशारीय सब्जी वृफष्िा नगरीय क्षेत्रों के समीप ही क्यों की जाती है? ;पपपद्ध विस्तृत पैमाने पर डेरी वृफष्िा का विकास यातायात के साध्नों एवं प्रशीतकों के विकास के बाद ही क्यों संभव हो सका है? प्राथमिक ियाएँ 43 3ण् निम्न प्रश्नों का 150 शब्दों में उत्तर दीजिएः ;पद्ध चलवासी पशुचारण और वाण्िाज्य पशुध्न पालन में अंतर कीजिए। ;पपद्ध रोपण वृफष्िा की मुख्य विशेषताएँ बतलाइए एवं भ्िान्न - भ्िान्न देशों में उगाइर् जाने वाली वुफछ प्रमुख रोपण पफसलों के नाम बतलाइए। अपने समीप के गाँव में जाकर देख्िाए की वहाँ कौन - कौन सी पफसलंे उगाइर् जाती हंै एवं वृफषक से खेती के लिए किए जाने वाले विभ्िान्न कायो± के बारे में पूछिए।

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