आप ‘भूगोल एक विषय के रूप में’ ‘भौतिक भूगोल के मूल सि(ांत’ ;रा.शै्र.प.2006द्ध के अध्याय 1 में पहले ही.अ.पपढ़ चुके हैं। क्या आप इसकी अंतवर्स्तु को याद कर सकते हैं? इस अध्याय ने बृहद रूप से आपका परिचय भूगोल कीप्रवृफति से कराया था। आप भूगोल की महत्त्वपूणर् शाखाओं से भी परिचित हैं। यदि आप अध्याय को पुं तोनः पढे़आपको मानव भूगोल का मुे ंख्य विषय ‘भूगोल’ ससबंध् भी ज्ञात हो जाएगा। जैसा कि आप जानते हैं कि एक अध्ययन क्षेत्रा के रूप में भूगोल समाकलनात्मक, आनुभविक एवं व्यावहारिक है। अतः भूगोल की पहुँच विस्तृत है और किसी मानव भूगोल प्रवृफति एवं विषय क्षेत्रा भी घटना अथवा परिघटना का, जो दिव्फ एवं काल के संदभर् में परिवतित हाता ह, उसका भौगोलिक ढंग से अध्ययन कियौर्ेजा सकता है। आप ध्रातल को किस प्रकार देखते हैं? क्या आप को लगता है कि पृथ्वी के दो प्रमुख घटक हैंः प्रवृफति ;भौतिक पयार्वरणद्ध और जीवन के रूप जिसमें मनुष्य भी सम्िमलित हैं। अपने परिवेश के भौतिक और मानवीय घटकों की सूची बनाइए। भौतिक भूगोल भौतिक पयार्वरण का अध्ययन करता है और मानव भूगोल ‘भौतिक/प्रावृफतिक एवं मानवीय जगत के बीच संबंध, मानवीय परिघटनाओं वफा स्थानिक वितरण तथा उनके घटित होने के कारण एवं विश्व के विभ्िान्न भागों में सामाजिक और आथ्िार्क विभ्िान्नताओं का अध्ययन करता है’।1 आपको इस तथ्य का पहले से ही बोध् होगा कि एक विषय वेंगाल का मख्य सरोकार पथ्वी का मानव वफफ रूप म भूेुृेेघर के रूप में समझना और उन सभी तत्वों का अध्ययन करना है, जिन्हानंेे मानव को पोष्िात किया है। अतः प्रवृफति और मानव के अध्ययन पर बल दिया गया है। आप अनुभव करेंगे कि भूाल मंे ैतवा ार इस आशय के व्यापक तवर्फ - वितवर्फगेद्वादआयअैआरंभ हो गए कि क्या एक विषय के रूप में भूगोल को नियम बनाने/सि(ंातीकर ;नोमोथेटिकद्ध अथवा विवरणात्मक ;भावचित्रात्मक/इडियोग्रापिफकद्ध होना चाहिए। क्या इसके विषय - वस्तु को व्यवस्िथत किया जाना चाहिए और इसके अध्ययन का उपागम प्रादेश्िाक अथवा क्रमब( होना चाहिए? क्या भौगोलिक परिघटनाओं की व्याख्या सै(ांतिक आधर पर होनी चाहिए अथवा ऐतिहासिक - संस्थागत उपागम वेफ आधर पर? ये बौिक अभ्यास के मुद्दे रहे हैं और अंततः आपमूल्यांकन करेंगे कि प्रकृति और मानव के बीच वैध् द्वैधता नहीं है, क्योंकि प्रवृफति और मानव अविभाज्य तत्त्व हैं और इन्हें 1 एंड्रयू जे. लिविंगस्टोन, डेविड एन. और रोजसर् ए.ऋ ;1996द्ध ब्लैक्वेल पब्िलश्िांग लि., माल्डन, यू.एस.ए. भाग 1 व 2 समग्रता में देखा जाना चाहिए। यह जानना रुचिकर है कि भौतिक और मानवीय दोनों परिघटनाओं का वणर्न मानव शरीर रचना विज्ञान से प्रतीकों का प्रयोग करते हुए रूपकों के रूप में किया जाता है। हम सामान्यतः पृथ्वी के ‘रूप’, तूप.फान की ‘आँख’, नदी के ‘मुख’, हिमनदी के ‘प्रोथ’ ;नासिकाद्ध, जलडमरूमध्य की ‘ग्रीवा’ और मृदा की ‘परिच्छेदिका’ का वणर्न करते हैं। इसी प्रकार प्रदेशों, गाँवों, नगरों का वणर्न ‘जीवों’ के रूप में कियागया है। जमर्न भूगोलवेत्ता राज्य/देश का वणर्न ‘जीवित जीव’ के रूप में करते हैं। सड़कों, रेलमागो± और जलमागो± के जाल को प्रायः ‘परिसंचरण की ध्मनियों’ के रूप में वणर्न किया जाता है। क्या आप अपनी भाषा से ऐसे शब्दों और अभ्िाव्यक्ितयों को एकत्रिात कर सकते हैं? अब मूल प्रश्न उत्पन्न होता है कि क्या हम प्रवृफति और मनुष्य को पृथव्फ कर सकते हैं जबकि वे इतनी जटिलता से आपस में जुड़े हुए हैं? मानव भूगोल की परिभाषाएँ ऽ फ्मानव भूगोल मानव समाजों और ध्रातल के बीचसंबंधें का संश्लेष्िात अध्ययन है।य् रैटशेल ऊपर दी गइर् परिभाषा में संश्लेषण पर जोर दिया गयाहै। ऽ फ्मानव भूगोल अस्िथर पृथ्वी और ियाशील मानवके बीच परिवतर्नशील संबधें का अध्ययन है।य् एलन सी. सेंपल सेंपल की परिभाषा में संबंधें की गत्यात्मकता मुख्य शब्द है। ऽ फ्हमारी पृथ्वी को नियंत्रिात करने वाले भौतिक नियमों तथा इस पर रहने वाले जीवों के मध्य संबंधें केअध्िक संश्लेष्िात ज्ञान से उत्पन्न संकल्पना।य् पाॅल विडाल - डी - ला ब्लाश मानव भूगोल पृथ्वी और मनुष्य के अंतस±बंधें की एक नयी संकल्पना प्रस्तुत करता है। मानव भूगोल की प्रवृफति मानव भूगोल भौतिक पयार्वरण तथा मानव - जनित सामाजिक सांस्वृफतिक पयार्वरण के अंतस±बंधें का अध्ययन उनकी परस्पर अन्योन्यिया के द्वारा करता है। आप अपनी कक्षा ग्प् वीं की 2 मानव भूगोल के मूल सि(ांत पुस्तक ‘भौतिक भूगोल के मूल सि(ांत’;रा.शै.अ.प्र.प. - 2006द्धमें भौतिक पयार्वरण के तत्त्वों का अध्ययन कर चुके हैं। आपजानते हैं कि ये तत्त्व भू - आकृति, मृदाएँ, जलवायु, जल, प्रावृफतिक वनस्पति और विविध् प्राण्िाजात तथा वनस्पति - जातहैं। क्या आप उन तत्त्वों की सूची बना सकते हैं, जिनकी रचनामानव ने भौतिक पयार्वरण द्वारा प्रदत्त मंच पर अपने कायर् - कलापों के द्वारा की है? गृह, गाँव, नगर, सड़कों व रेलों का जाल,उद्योग, खेत, पत्तन, दैनिक उपयोग में आने वाली वस्तुएँ तथाभौतिक संस्वृफति के अन्य सभी तत्त्व भौतिक पयार्वरण द्वारा प्रदत् संसाध्नों का उपयोग करते हुए मानव द्वारा निमिर्त किए गए हैं, जबकि भौतिक पयार्वरण मानव द्वारा वृहत् स्तर पर परिवतिर्त किया गया है, साथ ही मानव जीवन को भी इसने प्रभावित किया है। मानव का प्रावृफतीकरण और प्रवृफति का मानवीकरण मनुष्य अपने प्रौद्योगिकी की सहायता से अपने भौतिक पयार्वरणसे अन्योन्यिया करता है। यह महत्त्वपूणर् नहीं है, कि मानवक्या उत्पन्न और निमार्ण करता है बल्िक यह अत्यन्त महत्त्वपूणर् है कि वह ‘किन उपकरणों और तकनीकों की सहायता से उत्पादन और निमार्ण करता है’? प्रौद्योगिकी किसी समाज के सांस्वृफतिक विकास के स्तर की सूचक होती है। मानव प्रवृफति के नियमों को बेहतर ढंग से समझने के बाद ही प्रौद्योगिकी का विकास कर पाया। उदाहरणाथर्,घषर्ण और ऊष्मा की संकल्पनाओं ने अग्िन वफी खोज में हमारी सहायता की। इसी प्रकार डी.एन.ए.और आनुवांश्िाकी के रहस्यों की समझ ने हमें अनेक बीमारियों पर विजय पाने के योग्य बनाया। अध्िक तीव्र गति से चलने वाले यान विकसित करने वफेलिए हम वायु गति के नियमों का प्रयोग करते हैं। आप देख सकते हैं कि प्रवृफति का ज्ञान प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए महत्त्वपूणर् है और प्रौद्योगिकी मनुष्य पर पयार्वरण की बंदिशों को कम करती है्रृर्ेे। पावफतिक पयावरण स अन्यान्यिया की आरंभ्िाक अवस्थाओं में मानव इससे अत्यध्िक प्रभावित हुआ था। उन्होंने प्रवृफति के आदेशों के अनुसार अपने आप को ढाल लिया। इसका कारण यह है कि प्रौद्योगिकी का स्तर अत्यंत निम्न था और मानव के सामाजिक विकास की अवस्था भी आदिम थी। आदिम मानव समाज और प्रवृफति की प्रबल शक्ितयों के बीच इस प्रकार की अन्योन्यिया को पयार्वरणीय निश्चयवाद कहा गया। प्रौद्योगिक विकास की उस अवस्था में हम प्रावृफतिक मानव की कल्पना कर सकते हैं जो प्रवृफति को सुनता था, उसकी प्रचंडता से भयभीत होता था और उसकी पूजा करता था। मानव का प्रावृफतीकरण क्षेत्रा के जंगलों में रहता है। ़बेंदा मध्य भारत के अबूझमाडयाँ हैं जो जंगल के बीच हैं। यहाँ़उसके गाँव में तीन झोपडितक कि पक्षी और आवारा वुफत्ते जिनकी भीड़ प्रायः गाँवों में मिलती है, भी यहाँ दिखाइर् नहीं देते। छोटी लंगोटी पहनेऔर हाथ में वुफल्हाड़ी लिए वह पेंडा ;वनद्ध का सवेर्क्षणकरता है, जहाँ उसका कबीला वृफष्िा का आदिमरूप - स्थानंातरी वृफष्िा करता है। बंेदा और उसके मित्रा वन के छोटे टुकड़ों को जुताइर् के लिए जलाकर सापफ करते़हैं। राख का उपयोग मृदा को उवर्र बनाने के लिए कियाजाता है। अपने चारों ओर ख्िाले हुए महुआ वृक्षों को देखकर बंेदा प्रसन्न है। जैसे ही वह महुआ, पलाश औरसाल के वृक्षों को देखता है, जिन्हांेने बचपन से ही उसेआश्रय दिया है, वह सोचता है कि इस सुं्रंाड कादर बह्मअंग बनकर वह कितना सौभाग्यशाली है। विसपीर् गति से चतहै। जैसे ही ँपेंडा को पार करके बंेदा नदी तकपहुा वह चुल्लू भर जल लेने के लिए झुकता है, उसे वन कीआत्मा लोइर् - लुगी की प्यास बुझाने की स्वीवृफति देने के लिए धन्यवाद करना याद आता है। अपने मित्रों के साथआगे बढ़ते हुए बेंदा गूदेदार पत्तों और वंफदमूल को चबाताहै। लड़के वन से गज्ज्हरा और वुफचला का संग्रहण करने का प्रयास कर रहे हैं। ये विश्िाष्ट पादप हैं जिनका प्रयोगबेंदा और उसके लोग करते हैं। वह आशा करता है किवन की आत्माएँ दया करेंगी और उसे उन जड़ी बूटियों तक ले जाएँगी। ये आगामी पूण्िार्मा को मधइर् अथवा जनजातीय मेले में वस्तु विनिमय के लिए आवश्यक है।वह अपने नेत्रा बंद करके स्मरण करने का कठिन प्रयत्न±ुकरता है, जो उसके बजुगो ने उन जड़ी बूटियों और उनके पाए जाने वाले स्थानों के बारे में समझाया था। वह चाहताहै कि काश उसने अध्िक ध्यानपूवर्क सुना होता। अचानकपत्तों में खड़खड़ाहट होती है। बेंदा और उसके मित्रा जानते हैं कि ये बाहरी लोग हैं जो इन जंगलों में उन्हें ढूँढ़ते हएुआए हैं। एक ही प्रवाही गति से बेंदा और उसके मित्रासघन वृक्षों के वितान के पीछे अदृश्य हो जाते हैं और वन की आत्मा के साथ एकाकार हो जाते हैं। निभर्र है। ऐसे समाजों के लिए भौतिक पयार्वरण ‘माता - प्रवृफति’ का रूप धरण करता है। समय के साथ लोग अपने पयार्वरण और प्रावृफतिवफ बलों को समझने लगते हैं। अपने सामाजिक और सांस्वृफतिक विकास के साथ मानव बेहतर और अध्िक सक्षम प्रौद्योगिकी का विकास करते हैं। वे अभाव की अवस्था से स्वतंत्राता की अवस्था की ओर अग्रसर होते हैं। पयार्वरण से प्राप्त संसाध्नों के द्वारा वे संभावनाओं को जन्म देते हैं। मानवीय ियाएँ सांस्वृफतिक भू - दृश्य की रचना करती हैं। मानवीय ियाओं की छाप सवर्त्रा हैऋ उच्च भूमियों पर स्वास्थ्य विश्रामस्थल, विशाल नगरीय प्रसार, खेत, पफलोद्यान मैदानों व तरंगित पहाडि़यों मेंचरागाहें, तटों पर पत्तन और महासागरीय तल पर समुद्री मागर् तथा अंतरिक्ष में उपग्रह इत्यादि। पहले के विद्वानों ने इसे संभववाद का नाम दिया। प्रवृफति अवसर प्रदान करती है और मानव उनका उपयोग करता है तथा धीरे - धीरे प्रवृफति का मानवीकरण हो जाता है तथा प्रवृफति पर मानव प्रयासों वफी छाप पड़ने लगती है। बाॅक्स की कथा ;मानव का प्रावृफतीकरणद्ध आथ्िार्क दृष्िट से आदिम समाज से संबंध्ित एक घर के प्रत्यक्ष संबंधों का प्रतिनिध्ित्व करती है। ऐसे अन्य आदिम समाजों के संबंध में पढ़े जो प्रावृफतिक पयार्वरण के साथ पूणर्तः सामंजस्य बनाए हुए हैं। आप अनुभव करेंगे कि ऐसे सभी प्रकरणों में प्रवृफति एक शक्ितशाली बल, पूज्य, सत्कार योग्य तथा संरक्ष्िात है।सतत पोषण हेतु मनुष्य प्राकृतिक संसाध्नों पर प्रत्यक्ष रूप से प्रवृफति का मानवीकरण ट्राॅन्डहाइर्म के शहर में सदिर्यों का अथर् है - प्रचंड पवनेंऔर भारी हिम। महीनों तक आकाश अदीप्त रहता है।वैफरी प्रातः 8 बजे अँध्ेरे में कार से काम पर जाती है।सदिर्यों के लिए उसके पास विशेष टायर हैं और वहअपनी शक्ितशाली कार की लाइटें जलाए रखती है।उसका कायार्लय सुखदायक 23 डिग्री सेल्िसयस परवृफत्रिाम ढंग से गमर् रहता है। विश्वविद्यालय का परिसरजिसमें वह काम करती है, काँच के एक विशाल गुंबदके नीचे बना हुआ है। यह गुंबद सदिर्यों में हिम को बाहररखता है और गमिर्यों में धूप को अंदर आने देता है।तापमान को सावधनीपूवर्क नियंत्रिात किया जाता है औरवहाँ पयार्प्त प्रकाश होता है। यद्यपि ऐसे रूक्ष मौसम मेंनयी सब्िजयाँ और पौध्े नहीं उगते। वैफरी अपने डेस्क परआविर्फड रखती है और उष्णकटिबंधीय पफलों जैसे - केलाव किवी का आनन्द लेती है। ये नियमित रूप से वायुयानद्वारा उष्ण क्षेत्रों से मँगाए जाते हैं। माउस की एक क्िलकके साथ वैफरी नयी दिल्ली में अपने सहकमिर्यों सेवंफप्यूटर नेटववर्फ से जुड़ जाती है। वह प्रायः लंदन केलिए सुबह की उड़ान लेती है और शाम को अपनामनपसंद टेलिविजन सीरियल देखने के लिए सही समयपर वापस पहुँच जाती है। यद्यपि वैफरी 58 वषीर्य है पिफरभी वह विश्व के अन्य भागों के अनेक 30 वषीर्य लोगोंसे अध्िक स्वस्थ और युवा दिखती है। 3मानव भूगोलः प्रवृफति एवं विषय क्षेत्रा क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि ऐसी जीवनशैली वैफसे संभव हुइर् है? यह प्रौद्योगिकी है जिसके कारण ट्राॅन्डहाइर्म के लोग व उन जैसे अन्य लोग प्रवृफति द्वारा आरोपित अवरोधों पर विजय पाने के लिए सक्षम हुए हैं। क्या आप ऐसे अन्य वुफछ दृष्टांतों को जानते हैं? ऐसे उदाहरणों को ढूँढ़ना कठिन नहीं है। भूगोलवेता गि्रप्ि़ाफथ टेलर ने एक नयी संकल्पना प्रस्तुुत की है जो दो विचारों पयार्वरणीय निश्चयवाद और संभववाद के बीच मध्य मागर् को परिलक्ष्िात करता है। उन्हांेने इसे नवनिश्यचवाद अथवा रुको और जाओ निश्चयवाद का नाम दिया। आप में से जो नगरों में रहते हैं और जो नगर देख चुके हैं, जरूर जानते हांेगे कि चैराहों पर यातायात का नियंत्राणबिायों द्वारा होता है। लाल बत्ती का अथर् है ‘रुको’, ऐंबर;पीलीद्ध बत्ती लाल और हरी बिायों के बीच रूककर तैयाररहने का अंतराल प्रदान करती है और हरी बत्ती का अथर् है ‘जाओ’। संकल्पना दशार्ती है कि न तो यहाँ नितांत आवश्यकता की स्िथति ;पयार्वरणीय निश्चयवादद्ध है और न ही नितांत स्वतंत्राता ;संभववादद्ध की दशा है। इसका अथर् है कि प्रावृफतिकनियमों का अनुपालन करके हम प्रकृति पर विजय प्राप्त करसकते हैं। उन्हें लाल संकेतों पर प्रत्युत्तर देना होगा और जब प्रवृफति रूपांतरण की स्वीवृफति दे तो वे अपने विकास के प्रयत्नों में आगे बढ़ सकते हैं। इसका तात्पयर् है कि उन सीमाओं में, जो पयार्वरण की हानि न करती हों, संभावनाओं को उत्पन्नकिया जा सकता है। तथा अंधध्ुंध् रफ्ऱतार दुघर्टनाओं से मुक्त नहीं होती है। विकसित अथर्व्यवस्थाआ के द्वारा चली गइर् मुक्त चाल के परिणामस्वरूप हरित - गृह प्रभाव, ओशोन परत अवक्षय, भूमंडलीय तापन, पीछे हटती हिमनदियाँ, निम्नीवृफत भूमियाँ हैं। नवनिश्चयवाद संकल्पनात्मक ढंग से एक संतुलन बनाने का प्रयास करता है जो संभावनाओं के बीच अपरिहायर् चयन द्वैतवाद को निष्पफल करता है। समय के गलियारों से मानव भूगोल पयार्वरण से अनुवूफलन व समायोजन की प्रिया तथा इसका रूपंातरण पृथ्वी के ध्रातल पर विभ्िान्न पारिस्िथतिकीय रूप से पारिस्िथतिकीय निकेत में मानव के उदय के साथ आरंभ हुआ इसे सुस्पष्ट करने वाले उपागमों में परिवतर्न आया है। उपागमों में यह गत्यात्मकता विषय की परिवतर्नशील प्रवृफति को दशार्ती है। पहले विभ्िान्न समाजों के बीच अन्योन्यिया नगण्य थी और एक - दूसरे के बारे में ज्ञान सीमित था। यात्राी और अन्वेषक अपने यात्रा क्षेत्रों के बारे में सूचनाओं का प्रसार किया करते थे। नौचालन संबंध्ी वुफशलताएँ विकसित नहीं हुइर् थीं और समुद्री यात्राएँ खतरों से खाली न थी। 15वीं शताब्दी के अंत में यूरोप में अन्वेषणों के प्रयास हुए और धीरे - धीरे देशों और लोगों के विषय में, मिथक और रहस्य खुलने शुरू हो गए। उपनिवेश युग ने अन्वेषणों को आगे बढ़ाने के लिए गति प्रदान की ताकि प्रदेशों के संसाधनों तक पहुँच हो सके और तालिकायुक्त सूचनाएँ प्राप्त हो सवेंफ। यहाँ आशय गहन ऐतिहासिक विवरण प्रस्तुत करने का नहीं है, केवल आपको मानव भूगोल के क्रमिक विकास की प्रियाओं से अवगत कराने का है। संक्ष्िाप्त तालिका 1.1 आपको भूगोल के उप - क्षेत्रा के रूप में मानव भूगोल की विस्तृत अवस्थाओं से परिचय कराएगी। ऽ मानव भूगोल की कल्याणपरक अथवा मानवतावादी विचारधारा का संबंध् मुख्यतः लोगों के सामाजिक कल्याण के विभ्िान्न पक्षों से था। इनमें आवासन, स्वास्थ्य और श्िाक्षा जैसे पक्ष सम्िमलित थे। भूगोलवेताओंने पहले ही स्नातकोत्तर पाठ्यचयार् में ‘सामाजिक कल्याण के रूप में भूगोल’ का एक कोसर् आरंभ कर दिया है। ऽ आमूलवादी ;रेडिकलद्ध विचारधरा ने निध्र्नता के कारण, बंध्न और सामाजिक असमानता की व्याख्या के लिए माक्सर् के सि(ांत का उपयोग किया। समकालीन सामाजिक समस्याओं का संबंध् पूजीवाद के विकास से था। ऽ व्यवहारवादी विचारधरा ने प्रत्यक्ष अनुभव के साथ - साथ मानव जातीयता, प्रजाति, ध्मर् इत्यादि पर आधरित सामाजिक संवगो± के दिव्फकाल बोध् पर ज्यादा शोर दिया। ँमानव भूगोल के क्षेत्रा और उप - क्षेत्रा मानव भूगोल, जैसा कि आपने देखा, मानव जीवन के सभी तत्त्वों तथा अंतराल, जिसके अंतगर्त वे घटित होते हैं के मध्य संबंध् है। इस प्रकार यदि हम पयार्वरण और मानव की अन्योन्यिया से मानव भूगोल के प्रारंभ की कल्पना करें तो इसकी जड़ें की व्याख्या करने का प्रत्यत्न करती है। इस प्रकार मानव भूगोल इतिहास में अत्यंत गहरी हैं। अतः मानव भूगोल के विषयों में की प्रवृफति अत्यध्िक अंतर - विषयक है। पृथ्वी तल पर पाए जानेएक दीघर्कालिक सांतत्य पाया जाता है, यद्यपि समय के साथ वाले मानवीय तत्त्वों को समझने व उनकी व्याख्या करने के लिए 4 मानव भूगोल के मूल सि(ांत तालिका 1.1ः मानव भूगोल की वृहत् अवस्थाएँ और प्रणोद समय अवध्ि उपागम वृहत् लक्षण आरंभ्िाक उपनिवेश युग अन्वेषण और विवरण साम्राज्यी और व्यापारिक रुचियों ने नए क्षेत्रों में खोजों व अन्वेषणों को प्रोत्साहितकिया। क्षेत्रा का विश्वज्ञानकोष्िाय विवरण भूगोलवेताओं द्वारा वणर्न का महत्त्वपूणर् पक्ष बना। उत्तर उपनिवेश युग प्रादेश्िाक विश्लेषण प्रदेश के सभी पक्षों के विस्तृत वणर्न किए गए। मत यह था कि सभी प्रदेश पूणर् अथार्त् पृथ्वी के भाग हैं, अतः इन भागों की पूरी समझ पृथ्वी पूणर् रूप से समझने में सहायता करेगी। अंतर - यु( अवध्ि के बीच 1930 का दशक क्षेत्राीय विभेदन एक प्रदेश अन्य प्रदेशों से किस प्रकार और क्यों भ्िान्न है यह समझने के लिए तथा किसी प्रदेश की विलक्षणता की पहचान करने पर बल दिया जाता था। 1950 के दशक के अंत से 1960 के दशक के अंत तक स्थानिक संगठन वंफप्यूटर और परिष्वृफत सांख्ियकीय विध्ियों के प्रयोग के लिए विश्िाष्ट। मानचित्रा और मानवीय परिघटनाओं के विश्लेषण में प्रायः, भौतिकी के नियमों का अनुप्रयोग किया जाता था। इस प्रावस्था को विभ्िान्न मानवीय ियाओं के मानचित्रा योग्य प्रतिरूपों की पहचान करना इसका मुख्य उद्देश्य था। 1970 वफा दशक मानवतावादी, आमूलवादी और व्यवहारवादी विचारधराओं का उदय। मात्रात्मक क्रांति से उत्पन्न असंतुष्िट और अमानवीय रूप से भूगोल के अध्ययन के चलते मानव भूगोल में 1970 के दशक में तीन नए विचारधराओं का जन्म हुआ। इन विचारधाराओं के अभ्युदय से मानव भूगोल सामाजिक - राजनीतिक यथाथर् के प्रति अध्िक प्रासंगिक बना। इन विचारधराओं की थोड़ी और जानकारी के लिए नीचे दिए गए बाॅक्स का अवलोकन करें। 1990 का दशक भूगोल में उत्तर - आधुनिकवाद वृहत् सामान्यीकरण तथा मानवीय दशाओं की व्याख्या करने वाले वैश्िवक सि(ांतों की प्रयोज्यता पर प्रश्न उठने लगे। अपने आप में प्रत्येक स्थानीय संदभर्की समझ के महत्त्व पर जोर दिया गया। मानव भूगोल सामाजिक विज्ञानों के सहयोगी विषयों वेपरिलक्ष्िात करती है। उप - क्षेत्रों के मध्य सीमाएँ प्रायः फ साथ घनिष्ठ अंतरापष्ठ विकसित करती हनए उपक्षेत्रों का विकास होता है और मानव भूगोल के साथ भी ऐसा ही हुआ। आइए, मानव भूगोल के क्षेत्रों और उप - क्षेत्रों का परीक्षण करें ;तालिका 1.2द्ध। आपने अनुभव किया होगा कि यह सूची विशाल और विस्तृत है। यह मानव भूगोल के विस्तृत होते परिमंेडल काृै। ज्ञान के विस्तार के साथ अतिव्यापी होती हैं। इस पुस्तक में अध्यायों के रूप में जो सामग्री दी गइर् है, वह आपको मानव भूगोल के विभ्िान्न पक्षों का पयार्प्त एवं विस्तृत ज्ञान प्रदान करेगी। अभ्यास, ियाएँ और प्रकरण अध्ययन इसकी विषय - वस्तु को और अध्िक समझने के लिए आपको वुफछ अनुभवाश्रित दृष्टंात प्रदान करेंगे। 5मानव भूगोलः प्रवृफति एवं विषय क्षेत्रा तालिका 1.2ः मानव भूगोल और सामाजिक विज्ञानों के सहयोगी अनुशासन मानव भूगोल के क्षेत्रा उपक्षेत्रा सामाजिक विज्ञानों के सहयोगी अनशासकों से अंतरा पृष्ठ सामाजिक भूगोल - सामाजिक विज्ञान - समाजशास्त्रा व्यवहारवादी भूगोल मनोविज्ञान सामाजिक कल्याण का भूगोल कल्याण अथर्शास्त्रा अवकाश का भूगोल समाजशास्त्रा सांस्वृफतिक भूगोल मानवविज्ञान लिंग भूगोल समाजशास्त्रा, मानवविज्ञान, महिला अध्ययन ऐतिहासिक भूगोल इतिहास चिकित्सा भूगोल महामारी विज्ञान नगरीय भूगोल μ नगरीय अध्ययन और नियोजन राजनीतिक भूगोल μ राजनीति विज्ञान निवार्चन भूगोल μ सैन्य भूगोल सैन्य विज्ञान जनसंख्या भूगोल μ जनांकिकी आवास भूगोल μ नगर/ग्रामीण नियोजन अथ्िार्क भूगोल μ अथर्शास्त्रा संसाध्न भूगोल संसाध्न अथर्शास्त्रा वृफष्िा भूगोल वृफष्िा विज्ञान उद्योग भूगोल औद्योगिक अथर्शास्त्रा विपणन भूगोल व्यवसायिक अथर्शास्त्रा, वाण्िाज्य पयर्टन भूगोल पयर्टन और यात्रा प्रबंध्न अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार का भूगोल अंतरार्ष्ट्रीय व्यापर अभ्यास 1ण् नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर को चुनिए: ;पद्ध निम्नलिख्िात कथनों में से कौन - सा एक भूगोल का वणर्न नहीं करता? ;कद्ध समाकलनात्मक अनुशासन ;खद्ध मानव और पयार्वरण के बीच अंतर - संबंधें का अध्ययन। ;गद्ध द्वैध्ता पर आश्रित ;घद्ध प्रौद्योगिकी के विकास के पफलस्वरूप आध्ुनिक समय में प्रासंगिक नहीं। 6 मानव भूगोल के मूल सि(ांत ;पपद्ध निम्नलिख्िात में से कौन - सा एक भौगोलिक सूचना का ड्डोत नहीं है? ;कद्ध यात्रिायों के विवरण ;खद्ध प्राचीन मानचित्रा ;गद्ध चंद्रमा से चट्टðानी पदाथो± के नमूने ;घद्ध प्राचीन महाकाव्य ;पपपद्ध निम्नलिख्िात में कौन - सा एक लोगों और पयार्वरण के बीच अन्योन्यिया का सवार्ध्िक महत्त्वपूणर् कारक है? ;कद्ध मानव बुिमता ;खद्ध पा्रद्यौगिकीे;गद्ध लोगों के अनुभव ;घद्ध मानवीय भाइर्चारा ;पअद्ध निम्नलिख्िात में से कौन - सा एक मानव भूगोल का उपगमन नहीं है? ;कद्ध क्षेत्राीय विभ्िान्नता ;खद्ध मात्रात्मक क्रांति ;गद्ध स्थानिक संगठन ;घद्ध अन्वेषण और वणर्न 2ण् निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए: ;पद्ध मानव भूगोल को परिभाष्िात कीजिए। ;पपद्ध मानव भूगोल के वुफछ उप - क्षेत्रों के नाम बताइए। ;पपपद्ध मानव भूगोल किस प्रकार अन्य सामाजिक विज्ञानों से संबंध्ित है? 3ण् निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए। ;पद्ध मानव के प्रावृफतीकरण की व्याख्या कीजिए। ;पपद्ध मानव भूगोल के विषय क्षेत्रा पर एक टिप्पणी लिख्िाए। 7मानव भूगोलः प्रवृफति एवं विषय क्षेत्रा

RELOAD if chapter isn't visible.