जीव विज्ञान ;अद्ध ;बद्ध चित्रा 7ण्4 श्वेत पंखों और काले पंखों वाले शलभों के वृक्ष के तने पर के चित्रा ;अद्ध प्रदूषण रहित और ;बद्ध प्रदूष्िात क्षेत्रों में मनुष्य ने पादपों एवं पशुओं को कृष्िा, बागवानी, खेल तथा सुरक्षा के लिए चुना और बहुत सारे जंगली जानवरों को पालतू बनाया तथा खेती - पफसलें उगाईं। इन सघन प्रजनन कायर्क्रमों द्वारा नस्लें तैयार हुईंऋ जोकि अन्य वंश प्रकारों से भ्िान्न थीं ;जैसे वुफत्ताद्धऋ लेकिन पिफर भी वह उसी समूह से है। यह तकर् दिया जा रहा है कि यद्यपि मनुष्य सौ साल के भीतर नइर् नस्ल पैदा कर सकता है तो प्रकृति भी यही कायर् लाखों - लाख वषर् में क्यों नहीं कर सकती। प्राकृतिक वरण के समथर्न में एक अन्य अवलोकन इंग्लैंड में शलभों ;माॅथद्ध के संग्रह का है। शहरी क्षेत्रों में देखा गया है कि औद्योगिकीकरण शुरू होने के पूवर् अथार्त् 1850 इर्. से पहले यदि संग्रह किया जाता तो पेड़ों पर श्वेत पंखी शलभ गहरे वणोर्ं के शलभों की अपेक्षा संख्या में अध्िक होते। अब औद्योगिकीकरण के पश्चात् 1920 में किए गए संग्रह यह संकेत देते हैं कि ठीक उसी क्षेत्रा में गहरे रंग के शलभ अध्िसंख्यक थे अथार्त् अनुपात उलटा हो गया। इस प्रेक्षण का स्पष्टीकरण इस प्रकार दिया गया। औद्योगिकीकरण के बाद वाली अवध्ि में उद्योगों के ध्ुँए और कालिख के कारण पेड़ों के तने काले पड़ गए। इस कारण शलभों का आखेट करने वाले प्राण्िायों की निगाह से काले शलभ बच गए और श्वेत शलभ अध्िक मारे गए। औद्योगिकीकरण के पूवर् वृक्षों पर श्वेत लाइकेन उगा करते थे और इस पृष्ठभूमि में श्वेत शलभ बच जाते थे और काले शलभ श्िाकारियों की पकड़ में आ जाते थे। क्या आप जानते हैं कि लाइकेन औद्योगिक प्रदूषण के सूचक होते हैं। ये प्रदूष्िात स्थानों में नहीं उगते। इसीलिए शलभ इनके छद्मावरण में सुरक्ष्िात रह पाते थे। इस मान्यता को समथर्न इस तथ्य से मिलता है कि ग्रामीण इलाकों में जहाँ औद्योगिकीकरण नहीं हुआ। अश्वेत शलभों की संख्या कम थी। मिश्र जीव संख्या में जो अनुवूफलित हो गयाऋ वह बचा रहा और उसकी संख्या बढ़ती गयी। याद रहे कि किसी भी जीव का पूणर् विनाश नहीं होता। ठीक इसी प्रकार, शाकनाशकों एवं कीटनाशकों के अत्यध्िक प्रयोग के परिणाम स्वरूप कम समयावध्ि में केवल प्रतिरोध्क किस्मोेें का चयन हुआ। ठीक यही बात जीव विज्ञान चित्रा 7ण्11 आध्ुनिक वयस्क मानव, श्िाशु चिंपैंजी और वयस्क चिंपैंजी की खोपडि़यों की तुलना। श्िाशु चिंपैंजी की खोपड़ी अिाक मानव सम है अपेक्षावृफत वयस्क चिंपैंजी की खोपड़ी के। देशों में रहते थे। वे अपने शरीर की रक्षा के लिए खालों का इस्तेमाल करते थे और अपने मृतकों को जमीन में गाड़ते थे। होमो सैंपियंस ;मानवद्ध अप्रफीका में विकसित हुआ और धीरे - ध्ीरे महाद्वीपांे से पार पहुँचा था तथा विभ्िान्न महाद्वीपों में पैफला था, इसके बाद वह भ्िान्न जातियों में विकसित हुआ। 75,000 से 10,000 वषर् के दौरान हिमयुग में यह आधुनिक युगीन मानव पैदा हुआ। मानव ने प्रागैतिहासिक गुपफा - चित्रों की रचना लगभग 18,000 वषर् पूवर् हुइर्। कृष्िा कायर् लगभग 10,000 वषर् पूवर् आरंभ हुआ और मानव बस्ितयाँ बनना शुरू हुईं। बाकी जो वुफछ हुआ वह मानव इतिहास या वृि का भाग और सभ्यता की प्रगति का हिस्सा है।

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