वंशागति का आणविक आधार 5’ पफाॅस्पेफट 3‘ हाइड्राॅक्सील चित्रा 6ण्1 एक पाॅलिन्यूक्िलयोटाइड शृंखला शृंखला का 3‘ किनारा कहते हैं। पाॅलीन्यूक्िलयोटाइड शृंखला के आधार का निमार्ण शवर्फरा व पफाॅस्पेफट्स से होता है। नाइट्रोजनी क्षार शवर्फरा अंश से जुड़ा होता है जो आधार से प्रक्षेपित होता है ;चित्रा 6.1द्ध आरएनए में प्रत्येक न्यूक्िलयोटाइड अवशेष के राइबोज की 2‘ जगह पर एक अतिरिक्त हाइड्राॅक्सील समूह स्िथत होता है। आरएनए में थाइमीन ;5‘ - मथ्िाल यूरेसील थाइमीन का दूसरा रासायनिक नाम हैद्ध की जगह पर यूरेसील मिलता है। प्रेफडरीच मेस्चर ने 1869 में वेंफद्रक में मिलने वाले अम्लीय पदाथर् डीएनए की खोज की थी। उसने इसका नाम ‘न्यूक्िलन’ दिया। ऐसे लंबे संपूणर् बहुलक को तकनीकी कमियों के कारण विलगित करना कठिन था, इस कारण से बहुत लंबे समय तक डीएनए की संरचना के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं थी। मौरिस विल्िकन्स व रोजलिंड पै्रंफकलिन द्वारा दिए गए एक्स - रे निवतर्न आंकड़े के आधार पर 1953 में जेम्स वाट्सन व प्रफाँन्िसस क्रीक ने डीएनए की संरचना का द्विवुंफडली नमूना प्रस्तुत किया। उनके प्रस्तावों में पाॅलीन्यूक्िलयोटाइड शृंखलाओं के दो लडि़यों के बीच क्षार युग्मन की उपस्िथति एक बहुत प्रमाण्िात शृंखला ;चेनद्ध थी। उपरोक्त प्रस्ताव द्विवुंफडली डीएनए के इविर्न चारगापफ़के परीक्षण के आधार पर भी था जिसमें इसने बताया कि एडनिन व थाइमिन तथा ग्वानिन व साइटोसीन के बीच अनुपात स्िथत व एक दूसरे के बराबर रहता है। क्षार युग्मन पाॅलीन्यूक्िलयोटाइड शृंखलाओं की एक खास विशेषता है। ये शृंखलाएँ एक दूसरे के पूरक है इसलिए एक रज्जुक में स्िथत क्षार क्रमों के बारे जानकारी होने पर दूसरी रज्जुक के क्षार क्रमों की कल्पना कर सकते हैं। यदि डीएनए ;इसे पैतृक डीएनए कहते हैंद्ध की प्रत्येक रज्जुक नए रज्जुक के संश्लेषण हेतु टेम्पलेट का कायर् करते हैं। इस तरह से दो द्विरज्जुकीय डीएनए ;जिसे संतति डीएनए कहते हैंद्ध का निमार्ण होता है जो पैतृक डीएनए अणु के समान होते हैं। इस कारण से आनुवंश्िाक डीएनए की संरचना के बारे में बहुत स्पष्ट जानकारी मिल सकी। द्विवुंफडली डीएनए की संरचना की खास विशेषताएँ निम्न हैं कृ ;कद्ध यह दो पाॅलीन्यूक्िलयोटाइड शृंखलाओं का बना होता है जिसका आधार शवर्फरा - पफाॅस्पेफट का बना होता है व क्षार भीतर की ओर प्रक्षेपी होता है। ;खद्ध दोनों शृंखलाएँ प्रति समानांतर ध्रुवणता रखती है। इसका मतलब एक शृंखला को ध्रुवणता 5‘ से 3‘ की ओर हो तो दूसरे की ध्रुवणता 3‘ से 5‘ की तरह होगी। ;गद्ध दोनों रज्जुकों के क्षार आपस में हाइड्रोजन बंध द्वारा युग्िमत होकर क्षार युग्मक बनाते हैं। एडेनिन व थाइमिन जो विपरीत रज्जुकों में होते हैं। आपस में दो जीव विज्ञान हाइड्रोजन बंध चित्रा 6ण्2 द्विरज्जुकीय पाॅलीन्युक्िलयोटाइड शृंखला हाइड्रोजन बंध बनाते हैं। ठीक इसी तरह से ग्वानीन साइटोसलीन से तीन - हाइड्रोजन बंध द्वारा बँधा रहता है जिसके पफलस्वरूप सदैव यूरीन के विपरीत दिशा में पीरीमिडन होता है। इससे वुंफडली के दोनों रज्जुकों के बीच लगभग समान दूरी बनी रहती है बेस जोड़ा एडेनीन थाइमीन ;चित्रा 6.2द्ध। ;घद्ध दोनों शृंखलाएँ दक्ष्िाणवतीर् वुंफडलित होती हैं। वुंफडली का पिच 3.4 नैनोमीटर ;एक नैनोमीटर एक मीटर का 10 करोड़़वाँ भाग होता है वह 10 - 9 मीटर ग्वानीन साइटोसीन के बराबर हैद्ध व प्रत्येक घुमाव में लगभग 10 क्षार युग्मक मिलते हैं। परिणामस्वरूप एक वुंफडली में शवर्फरा पफाॅस्पेफट एक क्षार युग्मक के बीच लगभग 0.34 नैनोमीटर आधार ;बैक बोनद्ध की दूरी होती है। ;घद्ध द्विवुंफडली में एक क्षार युग्म की सतह के उफपर दूसरे स्िथत होते हैं। इसके अतिरिक्त हाइड्रोजन बंध वुंफडलिनी संरचना को स्थायित्व प्रदान करते हैं। प्यूरीन व पीरिमीडीन की संरचनात्मक तुलना 106 चित्रा 6ण्3 द्विवुंफडली डीएनए करो। क्या आप बता सकते हैं कि डीएनए में दो पाॅलीन्यूक्िलयोटाइड शृंखलाओं के बीच की दूरी हमेशा लगभग समान क्यों रहती है? ;चित्रा 6ण्3द्ध। डीएनए की द्विवुंफडली संरचना का प्रस्ताव यू परिक्रमी है कि आनुवंाश्िाक उलझाव को सरल तरीके से व्याख्या करने में सक्षम है। शीघ्र ही आणविक जीव विज्ञान में प्रंफासिस िक ने मूल सि(ांत ;सेंट्रल डोग्माद्ध का विचार प्रस्तुत किया जिससे स्पष्ट है कि वंशागति का आणविक आधार आनुवंाश्िाक सूचनाओं का बहाव डीएनए से आरएनए व इससे प्रोटीन की तरह रहता है ;डीएनए आरएनए प्रोटीनद्ध। प्रतिवृफति अनुलेखन रूपांतरणएम आरएनए प्रोटीनडीएनए मूल सि(ांत वुफछ विषाणुओं में उपरोक्त बहाव विपरीत दिशा आरएनए से डीएनए की तरपफ भी होता है। क्या तुम इस प्रक्रम के लिए एक साधारण नाम का सुझाव कर सकते हो? 6.1.2 डीएनए वुंफडली का पैकेजिंग लगातार दो क्षार युग्मों के बीच की दूरी 0.34 नैनोमीटर ;0.34×10 - 9 मीटरद्ध मान ली जाए और यदि एक प्रारूपी स्तनधारी कोश्िाका में डीएनए द्विवुंफडली की लंबाइर् की गणना ;साधारणतया सभी क्षार युग्म की संख्या को लगातार दो क्षार युग्म के बीच की दूरी से गुणा करने पर दूरी की गणना कर सकते हैं, वह है 6.6×109 क्षार युग्म × 0.34 × 10 - 9 मीटर प्रति क्षार युग्मद्ध की जाए तो यह लगभग 2.2 मीटर के बराबर डीएनए भ्1 हिस्टोंसहोगी। यह लंबाइर् प्रारूपी वेंफद्रक की लंबाइर् - चैड़ाइर् ;लगभग 10 - 6 मीटरद्ध से कापफी अिाक है इस तरह एक लंबा बहुलक एक कोश्िाका में वैफसे पेकेज्ड होता है? यदि इर्.कोलाइर् डीएनए की लंबाइर् 1.36 मिलीमीटर है तो क्या हिस्टोंसआप इर्.कोलाइर् में क्षार युग्मों की संख्या की गणना कर सकते हैं? अष्टकअसीमवेंफद्रकी जैसी इर्.कोलाइर् जिसमंे स्पष्ट वेंफद्रक नहीं मिलता है इसके बावजूद भी डीएनए पूरी कोश्िाका में नहीं पैफला होता है। डीएनए ;ट्टणात्मक आवेश्िातद्ध वुफछ प्रोटीन्स ;धनात्मक आवेश्िातद्ध से बँधकर एक जगह पर स्िथत होते हैं जिसे वेंफद्रकाभ ;न्यूक्िलआएडद्ध हिस्टोन अणु का सारभाग कहते हैं। न्यूक्लीआएड में डीएनए बड़े लूपों में व्यवस्िथत होता है चित्रा 6ण्4अ न्यूक्िलयोसोम जो प्रोटीन से जुड़े होते हैं। ससीमवेंफद्रकी/सुवेंफद्रकी में यह संरचना और कापफी जटिल होती है। धनात्मक आवेश्िात क्षारीय प्रोटीन का समूह होता है जिसे हिस्टोन्स कहते हैं। इस प्रोटीन्स का आवेश, आवेश्िात पाश्वर् शृंखलाओं में स्िथत एमीनो अम्लों की बहुलता पर निभर्र करता है। हिस्टोन्स में क्षारीय एमीनो अम्लीय लाइसीन व आरजीनीन अिाक मात्रा में मिलते हैं। दोनों एमीनो अम्ल की पाश्वर् शृंखलाओं पर धनात्मक आवेश होता है। हिस्टोन व्यवस्िथत होकर आठ हिस्टोन अणुओं की एक इर्काइर् बनाता है जिसे हिस्टोन अष्टक कहते हैं। धनात्मक आवेश्िात हिस्टोन अष्टक चारो तरपफ से ट्टणात्मक आवेश्िात डीएनए से सटा होता है जिसे न्यूक्िलयोसोम कहते हैं ;चित्रा 6.4अद्ध। एक प्रारूपी न्यूक्िलयोसोम 200 क्षार युग्म की डीएनए वुंफडली होती है। वेंफद्रक में मिलने वाली एक संरचना जिस पर जीव विज्ञान 6.2.1 आनुवंश्िाक पदाथर् डीएनए है डीएनए आनुवंश्िाक पदाथर् है इसके बारे में सुस्पष्ट प्रमाण अल्प्रेफड हषेर् व माथार् चेस ;1952द्ध के प्रयोगों से प्राप्त हुआ। इन्होंने उन विषाणुओं पर कायर् किया जो जीवाणु को संक्रमित करते हैं जिसे जीवाणुभोजी कहते हैं। जीवाणुभोजी जीवाणु से चिपकते हैं अपने आनुवंश्िाक पदाथर् को जीवाणु कोश्िाका में भेजते हैं। जीवाणु कोश्िाका विषाणु के आनुवंश्िाक पदाथर् को अपना समझने लगते हंै जिससे आगे चलकर अिाक विषाणुओं का निमार्ण होता है। हषेर् व चेस ने इस बात का पता लगाने के लिए प्रयोग किया कि विषाणु से प्रोटीन या डीएनए निकल कर जीवाणु में प्रवेश करता है। उन्होंने वुफछ विषाणुओं को ऐसे माध्यम पर पैदा किया जिसमें एक को विकिरण सिय पफाॅस्पफोरस व दूसरे विषाणुओं को विकिरण सिय सल्पफर पर वृि किया था। जिस विषाणु को विकिरण सिय पफाॅस्पफोरस की उपस्िथति में पैदा किया। उसमें विकिरण सिय डीएनए पाया गया जबकि विकिरण सिय प्रोटीन नहीं था, क्योंकि डीएनए में पफाॅस्पफोरस होता हैऋ प्रोटीन नहीं। ठीक इसी तरह से विषाणु जिसे विकिरण सिय सल्पफर जीवाणुभोजी विकिरण सिय ;35ैद्ध से अंकित प्रोटीन संपुट कोश्िाकाओं में विकिरण ;35ैद्ध का पता नहीं लगा विकिरण ;35ैद्ध का पता लगा चित्रा 6ण्5 विकिरण सिय ;32च्द्ध से अंकित डीएनए 1. संक्रमण 2. अनावरण 3. अपवेंफद्रण कोश्िाकाओं में विकिरण ;32च्द्ध का पता लगा विकिरण का पता नहीं लगा हषेर् - चेस का प्रयोग वंशागति का आणविक आधार 6.4 प्रतिवृफति डीएनए के द्विवुंफडली रचना के प्रतिवादन के साथ ही वाॅटसन व िक ने तत्काल डीएनए की प्रतिवृफति की योजना प्रस्तुत की। यदि उनके मूल कथनों को उद्धृत किया जाए तो वह इस प्रकार हैं - ‘‘विश्िाष्ट युग्मन की जानकारी के बाद आनुवंश्िाक पदाथर् के नए रूप के निमार्ण की प्रियाओं के बारे में तत्काल प्रतिपादन करने से बचा नहीं जा सकता था।’’ ;वाटसन व िक, 1953द्ध उपरोक्त योजना से स्पष्ट है कि दोनों रज्जुक अलग होकर टेम्पलेट के रूप में कायर्कर नए पूरक रज्जुकों का निमार्ण करते हैं। प्रतिवृफति के पूणर् होने के बाद जो डीएनए अणु बनता है उसमें एक पैतृक व एक नइर् निमिर्त लड़ी रज्जुक होती है। डीएनए प्रतिवृफति की यह योजना अधर्सरंक्षी ;सेमीवंफजरवेटिवद्ध कहलाती है। ;चित्रा 6.6द्ध 6.4.1 प्रायोगिक प्रमाण अब यह सि( हो चुका है कि डीएनए का अधर्सरंक्षी प्रतिवृफतियन होता है। इसके बारे में सवर्प्रथम जानकारी इस्चेरिचिया कोलाइर् से चित्रा 6ण्6 डी एन ए के अधर्संरक्षी प्रवृफतियन का प्राप्त हुइर् और आगे जाकर उच्च जीवों जैसे पौधों व मानव वाटसन - िक प्रतिरूप कोश्िाकाओं में पता लग पाया। मैथ्यूमेसेल्सन व पैं्रफकलिन स्टाल ने 1958 में निम्न प्रयोग किया कृ ;कद्ध इन्होंने इर्.कोलाइर् को ऐसे संवधर्न में विकसित किया जिसमें 15छभ्4ब्स ;15छ नाइट्रोजन का भारी समस्थानिक हैद्ध अमोनिया क्लोराइड कइर् पीढि़यों तक केवल नाइट्रोजन का स्त्रोत है। जिसके परिणामस्वरूप नवनिमिर्त डीएनए एवं अन्य दूसरे नाइट्रोजन युक्त यौगिकों में ;15नाइट्रोजनद्ध 15छ व्यवस्िथत हो जाता है। इस भारी डीएनए अणु को सामान्य डीएनए से सोडियम क्लोराइड के घनत्व प्रवणता में अपवेंफद्रीकरण करने से अलग कर सकते हैं। ;वृफपया ध्यान दें कि 15नाइट्रोजन एक विकिरण सिय समस्थानिक नहीं है, और यह 14 नाइट्रोजन ;14छद्ध से घनत्व के आधार पर अलग किया जा सकता हैद्ध। ;खद्ध इसके बाद कोश्िाकाओं को ऐसे संवधर्न में स्थानांतरित किया जिसमें साधारण 14छभ्4ब्स था व निश्िचत समयांतराल पर गुण्िात कोश्िाकाओं के नमूनों को लेने पर व इससे डीएनए निष्कषर्ण करने पर पाया कि यह हमेशा द्विरज्जुक वुंफडलियों के रूप में मिलता है। डीएनए के घनत्वों के बारे में जानकारी प्राप्त करने हेतु विभ्िान्न नमूनों को स्वतंत्रा रूप से सीजिएम ब्ैब्स ग्रेडिऐंट की प्रवणता पर अलग किया गया ;चित्रा 6.7द्ध। जीव विज्ञान डीएनए अपवेंफद्रबल भारी पीढ़ी प् पीढ़ी प्प् डीएनए डीएनए डीएनए डीएनए 20 मिन 40 मिन डीएनए डीएनए संकरित हल्का भारी अपवेंफद्रण से निष्कष्िार्त किया गया डीएनए चित्रा 6ण्7 मेसेल्सन एवं स्टाल का प्रयोग क्या तुम अपवेंफद्रबल के बारे में बता सकते हो? और सोचो क्यों एक अणु जो अिाक द्रव्यमान घनत्व का है तेजी से अवछाद बनाता है? परिणामों को चित्रा 6.7 में दशार्या गया है - ;गद्ध इस प्रकार, संवधर्न जिसको 15छ से 14छ माध्यम पर एक पीढ़ी तक स्थानांतरित किया गया था, इससे डीएनए निष्कष्िार्त करने पर पाया गया कि इसका घनत्व संकरित या मध्य था ;20 मिनट बाद प्रथम पीढ़ीऋ इर्.कोलाइर् 20 मिनट में विभाजित होता हैद्ध। डीएनए जो दूसरी पीढ़ी ;40 मिनट बादऋ द्वितीय पीढ़ीद्ध के संवधर्न से निष्कष्िार्त किया गया कि समान मात्रा में संकरित डीएनए हल्के डीएनए से मिलकर बना होता है। इर्. कोलाइर् के 80 मिनट बाद वृि से प्राप्त डीएनए में हल्के व संकरित डीएनए घनत्व का अनुपात होगा? ठीक इसी तरह का प्रयोग टेलट व उनके सहयोगियों ने 1958 में विसिया पफाबा ;पफाबा सेमद्ध पर नवनिमिर्त डीएनए का गुणसूत्रा में वितरण का पता लगाने के लिए विकिरण सिय थाइमीडिन का प्रयोग किया। इस प्रयोग से यह सि( हो गया कि गुणसूत्रा में डीएनए अधर् संरक्षकीय तरह से प्रतिवृफति करता है। 6.4.2 कायर्प्रणाली व एंजाइम सजीव कोश्िाकाओं जैसे इर्.कोलाइर् में प्रतिवृफति हेतु उत्प्रेरकों ;एंजाइमद्ध के समूहों की आवश्यकता होती है। मुख्य एंजाइम जो डीएनए पर निभर्र है, वह डीएनए पाॅलीमरेज है। यह डीएनए टेम्प्लेट का उपयोग डीआॅक्सीन्युक्िलयोराइड के बहुलकन को उत्प्रेरित करता है। यह एंजाइम कापफी प्रभावी है, क्योंकि बहुत ही कम समय में अिाक संख्या में न्युक्िलयाटाइडस के बहुलकन को उत्पे्ररित करता है। कल्पना करो कि इर्. कोलाइर् में जीव विज्ञान दमनकारी उ आरएनए दमनकारी उ आरएनए प्रेरक निष्िक्रय दमनकारी प्रेरक की अनुपस्िथति में प्रचालक क्षेत्रा ;वद्ध में दमनकार के बंधन से आरएनए पालीमरेज द्वारा प्रचालेक का अनुलेखन बािात प्रेरक की उपस्िथति में अनुलेखन लैक उ आरएनए स्थानांतरण परमीएज टांसएसीटाइर्लेजβ - गैलेक्टोसाइर्डेज चित्रा 6ण्14 लैक ओपेरान एकलक इर्काइर् गैलेक्टोज व ग्लूकोज का निमार्ण करता है। वाइर् ;लद्ध जीन परमीएज का वूफटलेखन करता है जो कोश्िाका के लिए बीटा - गैलेक्टोसाइडेज की पारगम्यता को बढ़ता है। जीन ए ;ंद्ध द्वारा ट्रांसएसिटीलेज का वूफटलेखन होता है। इस तरह से लैक - प्रचालेक के सभी तीनों जीन के उत्पाद लैक्टोज उपापचय के लिए आवश्यक है। दूसरे अन्य प्रचालेकों के प्रचालेक में उपस्िथत जीन समान संबंिात उपापचयी पथ में एक साथ कायर् करते हैं ;चित्रा 6.14द्ध। लैक्टोज एंजाइम बीटा - गैलेक्टोसाइडेज के लिए ियाधार का काम करता है जो प्रचालेक की सियता के आरंभ ;आनद्ध या निष्िक्रयता समाप्ित ;आपफद्ध को नियमित करता है। इसे प्रेरक कहते हैं। सबसे उपयुक्त काबर्न ड्डोत - ग्लूकोज की अनुपस्िथति में यदि जीवाणु के संवधर्न माध्यम में लैक्टोज डाल दिया जाता है तब परमिएड की िया द्वारा लैक्टोज कोश्िाका के अंदर अभ्िागमन करता है। ;याद करो कोश्िाका में लैक - प्रचालेक की अभ्िाव्यक्ित निम्न स्तर पर हमेशा बनी रहती है अन्यथा लैक्टोज कोश्िाकाओं के भीतर प्रवेश नहीं कर सकता हैद्ध। इसके बाद लैक्टोज प्रचालेक को निम्न ढंग से प्रेरित करता है। प्र्रचालेक का दमनकारी आइर् ;पद्ध जीन द्वारा संश्लेष्िात ;हमेशा उपस्िथत रहता हैद्ध होता है। दमनकारी प्रोटीन प्रचालेक के प्रचालक स्थल से बंधकर आरएनए पाॅलीमरेज को निष्िक्रय कर देता है जिससे प्रचालेक अनुलेख्िात नहीं हो पाता है। प्रेरक जैसे लैक्टोज वंशागति का आणविक आधार खंडों का निमार्ण होना आवश्यक है। इन अनुक्रमों को मनुष्य द्वारा पंक्ितब( करना संभव नहीं है। इस कारण से कम्प्यूटर आधारित विशेष प्रक्रमन ;प्रोग्रामद्ध के विकास की आवश्यकता है ;चित्रा 6.15द्ध बाद में इन अनुक्रमकों का टिप्पणी कर प्रत्येक गुणसूत्रा के साथ निधार्रित किया गया। गुणसूत्रा 1 का अनुक्रमण में मइर् 2006 ;यह मानव के 24 गुणसूत्रों में अंतिम था - 22 - 3 लिंग गुणसूत्रा और ग् तथा ल् की अनुक्रमण की आवश्यकता हैद्ध। दूसरा चुनौतीपूणर् कायर् जीनोम का आनुवंश्िाक व भौतिक नक्शे तैयार करना था। बहुरूपीय प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लीएज पहचान स्थल व दोहराए गए डीएनए के अनुक्रमों, जिसे सूक्ष्म अनसंगीय ;माइक्रोसैटिलाइर्टद्ध ;दोहराए गए डीएनए अनुक्रमों में बहुरूपीय की उपयोगिता के बारे में अगले खंड चित्रा 6ण्15 मानव जीनोम परियोजना का निरूपक आरेखडीएनए पिफंगरपि्रंटिंग में पढ़ेंगेंद्ध कहते हैं। 6.9.1 मानव जीनोम की मुख्य विशेषताएँ मानव जीनोम परियोजना से प्राप्त विशेष परिक्षण निम्नवत है कृ ;कद्ध मानव जीनोम 3164.7 करोड़ क्षार मिलते हैं। ;खद्ध औसतन प्रत्येक जीन में 3000 क्षार स्िथत हैं जिनके आकार में अिाक विभ्िान्नताएँ हैं। मनुष्य को ज्ञात सबसे बड़ी जीन डिसट्राॅपिफन ;क्लेजतवचीपदद्ध में 2.4 करोड़ क्षार मिले हैं। ;गद्ध जीन की संख्या 30,000 है जो पहले की अनुमानित संख्या 80,000 से 140,000 से कापफी कम है। लगभग सभी ;99.9 प्रतिशतद्ध लोगों में मिलने न्यूक्िलयो टाइड्स क्षार एक समान है। ;घद्ध खोजी गइर् 50 प्रतिशत से अिाक जीन के कायर् के बारे में जानकारी प्राप्त है। ;घद्ध दो प्रतिशत से कम जीनोम प्रोटीन का वूफटलेखन करते हैं। ;चद्ध मानव जीनोम के बहुत बड़े भाग का निमार्ण पुनरावृिा अनुक्रम द्वारा होता हैं। ;छद्ध पुनरावृिा अनुक्रम डीएनए के पैफले हुए भाग हैं जिनकी कभी - कभी सौ से हजार बार पुनरावृिा होती है। जिनके बारे में यह विचार है कि इनका सीधा वूफटलेखन में कोइर् कायर् नहीं है लेकिन इनसे गुणसूत्रा की संरचना, गतिकीय व विकास के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। 129;जद्ध गुणसूत्रा 1 में सवार्िाक जीन ;2968द्ध व ल् गुणसूत्रा में सबसे कम जीन ;231द्ध मिलते हैं। ;झद्ध वैज्ञानिकों ने मानव में लगभग 1.4 करोड़ जगहों पर अलग इकहरा क्षार ;ैछच्े - एकल न्यूक्िलयोटाइड बहुरूपताऋ सिंगल न्यूक्िलयोटाइड पाॅलीमारपफीश्मऋ जिसे ‘स्िनप्स’ कहा जाता हैद्ध का पता लगाया। उपरोक्त

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