इर्काइर् सात आनुवंश्िाकी तथा विकास अध्याय 5 मेंडल तथा उनके अनुयायी जिन्होंने इनके कायो± को सराहा और उनका अनुसरण कियाऋ वंशागति और विविध्ता के सि(ांत वंशागति प्रतिरूप के विषय में हमारे सम्मुख अपने विचार प्रस्तुत किए। यद्यपि, उनकारकों, जो लक्षणप्ररूप का निधर्रण करते हैं, की प्रकृति वुफछ स्पष्ट नहीं थी। यहअध्याय 6 कारक वंशागति के आनुवंश्िाक आधर का प्रतिनिध्ित्व करते हैं और आनुवंश्िाक पदाथर्वंशागति का आणविक आधर की संरचनाओं के बारे में बताते हैं तथा समजीनीय और समलक्षण्िायों के संरचनात्मक आधर का रूपांतरण करते हैं यह सभी आगामी शताब्दी के लिए जीव विज्ञान का एकअध्याय 7 आकषर्ण बिंदु बन चुके हैं। जीव विज्ञान के संपूणर् ढाँचे का विकास, वाटसन, िक,विकास नीरेनबगर्, खुराना, कोनर्बगर् ;पिता एवं पुत्राद्ध बैंजर मौनड्, ब्रीनट आदि के विशेष सहयोग का मिलाजुला परिणाम है। इसी समस्या के समांतर एक अन्य समस्या पर भी कायर् हुआऋ वह विकास की ियाविध्ि थी। आण्िवक आनुवंश्िाकी, संरचनात्मक जीव विज्ञान तथा बायोइंपफाॅरमैटिक्स आदि क्षेत्रों में जागरूकता ने विकास के आण्िवक आधार के बारे में हमारे ज्ञान को बढ़ाया है। इस इर्काइर् में डीएनए की संरचना तथा कायर् तथा विकास की कहानी तथा वाद को विस्तार से समझा तथा उसकी व्याख्या की गइर् है। वंशागति और विविध्ता के सि(ांत अध्र्सूत्राण प् - पश्चावस्था अध्र्सूत्राण प् - पश्चावस्था अध्र्सूत्राण प्प् - पश्चावस्था अध्र्सूत्राण प्प् - पश्चावस्था जनन कोश्िाकाएँ पश्चावस्था जनन कोश्िाकाएँ पश्चावस्था संभावना प् संभावना प्प् एक लंबा श्वेत तथा छोटा श्वेतएक लंबा श्वेत तथा छोटा कालाक्रोमोसोम और लंबा काला और छोटाक्रोमोसोम और लंबा काला और छोटाकाला क्रोमोसोम एक ही ध््रुव पर श्वेत क्रोमोसोम एक ही ध््रुव पर चित्रा 5ण्9 क्रोमोसोमों का स्वतंत्रा संव्यूहन सटन और बोवेरी ने तवर्फ प्रस्तुत किया कि क्रोमोसोम युग्म का जोड़ा बन जाना या अलग होना अपने में ले जाए जा रहे कारकों के विसंयोजन का कारण बनेगा। सटन ने क्रोमोसोम के विसंयोजन के ज्ञान को मेंडल के सि(ांतों के साथ जोड़कर ‘‘वंशागति का क्रोमोसोमवाद या सि(ांत’’ प्रस्तुत किया। इस विचार के विश्लेषणों का अनुपालन करते हुए, थामस हंट मोरगन तथा ;अद्ध ;बद्धउसके साथ्िायों ने वंशागति का क्रोमोसोम - वाद या सि(ांत के प्रयोगात्मक सत्यापन किए और यौन जनन उत्पादन विभेदन के लिए खोज के आधार की नींव डाली। चित्रा 5.10 ड्रोसोपिफला मेलनोगैस्टर मोरगन ने पफल - मक्िखयों ;प्रूफटफ्रलाइर् - ड्रोसोपिफला मेलनोगैस्टरद्ध पर काम ;अद्ध नर ;बद्ध मादा किया, जो ये ऐसे अध्ययनों के लिए उपयुर्क्त पाइर् गयी ;चित्रा 5ण्10द्ध। इन्हें प्रयोगशाला में सरल कृत्रिाम माध्यमों पर रखा जा सकता था। ये अपना पूरा जीवन चक्र दो सप्ताह में पूरा कर सकती थीं और इनमें एकल मैथुन से विशाल संख्या में संतति मक्िखयों का उत्पादन संभव था। साथ ही लिंगों का विभेदन स्पष्ट था। नर और मादा की आसानी से पहचान की जा सकती थी। साथ ही इसमें आनुवंश्िाक विविध्ताओं के अनेक प्रकार थे जो कम क्षमता वाले माइक्रोस्कोप से देखे जा सकते थे। जीव विज्ञान द्वारा निषेचित अंडे मादा बन जाते हैं और जो ग्.क्रोमोसोम रहित शुक्राणु से निषेचित होते हैं, वे नर बनते हैं। क्या आप सोचते हैं कि नर और मादा दोनों की क्रोमोसोम संख्या बराबर है? इस ग्.क्रोमोसोम की लिंग निधर्रण में भूमिका होने से इसे लिंग - क्रोमोसोम ;सैक्स क्रोमोसोमद्ध नाम दिया गया। शेष क्रोमोसोमों को अलिंग क्रोमोसोम आॅटोसोम नाम दिया गया। टिड्डा ग्व् प्रकार के लिंग निधर्रण का;अद्ध एक उदाहरण है, इसमें नर में अलिंग क्रोमोसोम के अतिरिक्त केवल एक ग्.क्रोमोसोम होता है जब कि मादा में ग्.क्रोमोसोम का एक पूरा जोड़ा होता है। इन प्रेक्षणों की प्रेरणा से लिंग - निधर्रण की ियाविध्ि को समझने के लिए अन्य जातियों में भी अन्वेषण प्रेरित किए गए। कइर् अन्य कीटांे तथा मानव;बद्ध समेत स्तनधरियों में ग्ल् प्रकार का लिंग निधर्रण देखा जाता है जहाँ नर और मादा दोनों में क्रोमोसोम संख्या समान होती है। नर में एक क्रोमोसोम तो ग् होता है पर उसका जोड़ीदार स्पष्टतः छोटा होता है और ल् क्रोमोसोम कहलाता है। अलिंग सूत्रों की संख्या नर और मादा में बराबर होती है। दूसरे शब्दों में नर में अलिंग सूत्रा के साथ ग्ल् और मादा में ;सद्ध अलिंग सूत्रा के साथ ग्ग् उदाहरणाथर् मानव तथा ड्रोसोपिफला में नर में अलिंग क्रोमोसोम के अलावा चित्रा 5ण्12 क्रोमोसोम भ्िान्नताओं के द्वारा लिंग निधर्रण ;अ,बद्ध एक ग् और एक ल् क्रोमोसोम होता है जबकि मादा मानव तथा ड्रोसोपिफला, मादा में ग्ग् क्रोमोसोम में अलिंग क्रोमोसोमों के अलावा एक जोड़ा ग् ;समयुग्मकीद्ध तथा नर में ग्ल् ;विषमयुग्मकीद्ध क्रोमोसोम का ;चित्रा 5.12 अ तथा बद्ध।स्िथति। ;सद्ध अनेक पक्ष्िायों में मादा में असमान ऊपर के विवरण में आपने दो प्रकार के लिंगक्रोमोसोम र्ॅ तथा नर में समान क्रोमोसोम र्र् । निधर्रण - अथार्त् ग्व् प्रकार और ग्ल् प्रकार के विषय में पढ़ा। दोनों में ही नर दो प्रकार के युग्मक पैदा करते हैं जो हैं ;कद्ध या तो ग् क्रोमोसोम सहित या रहित और ;खद्ध वुफछ युग्मकों में ग्. क्रोमोसोम, और वुफछ में ल् क्रोमोसोम। इस प्रकार की लिंग निधर्रण ियाविध्ि को नर विषमयुग्मकता ;हिटिरोगेमिटीद्ध कहा जाता है। वुफछ अन्य जीवों जैसे पक्ष्िायों में 94 दूसरे प्रकार की लिंग निधर्रण ियाविध्ि देखी गयी ;चित्रा 5.12 सद्ध। इस विध्ि में क्रोमोसोम की वुफल संख्या नर और मादा दोनों में समान होती है विंफतु मादा द्वारा लिंग क्रोमोसोम के लिहाज से दो भ्िान्न प्रकार के युग्मकों का उत्पादन होता है, अथार्त् मादा विषमयुग्मकता ;हिटिरोगेमिटीद्ध पाइर् जाती है। पूवर् वण्िार्त लिंग निधर्रण से भ्िान्नता प्रदान करने के उद्देश्य से पक्ष्िायों के लिंग क्रोमोसोमों को र् और ॅ क्रोमोसोम कह दिया वंशागति और विविध्ता के सि(ांत ;अद्ध ;बद्ध चित्रा 5ण्14 प्रतीकात्मक वंशावली विश्लेषण ;अद्ध अलिंगी क्रोमोसोम पर प्रभावी विशेषक जैसे मायोटोनिक दुष्पोषण ;डिस्ट्रोपफीद्ध, ;बद्ध आलंगी - क्रोमोसोम पर - अप्रभावी विशेषक जैसे दात्रा कोश्िाका अरक्तता ;सिकल सेल एनिमियाद्ध मेंडलीय विकारों की वंशागति के उदाहरण को किसी परिवार में वंशावली विश्लेषण द्वारा खोजा जा सकता है। मेंडलीय विकारों के सवर्विदित उदाहरण हीमोपफीलिया, सिस्िटक प्रफाइब्रोसिस, दात्रा कोश्िाका अरक्तता, वणा±ध्ता ;कलर ब्लाइंडनेसद्ध, पफीनाइल कीटोन्यूरिया, थैलेसीमिया इत्यादि हैं। यहाँ यह भी बताना महत्त्वपूणर् है कि ये मेंडलीय विकार प्रभावी अथवा अप्रभावी हो सकते हैं, साथ ही जैसाकि हीमोपफीलिया में होता है। यह लक्षण लिंग क्रोमोसोम - आधरित भी हो सकता है। यह सुस्पष्ट है कि ग्. लग्न अप्रभावी लक्षण, वाहक मादा ;वैफरियर मदरद्ध से नर संतति को प्राप्त होता है। इस वंशावली का नमूना चित्रा 5.14 पर प्रस्तुत है जिसमें प्रभावी और अप्रभावी लक्षण दिखलाए गए हैं। अपने अध्यापक से चचार् करें और अलिंग तथा लिंग क्रोमोसोम से लग्न लक्षणों वाला वंशावली नक्शा बनाएँ। हीमोपफीलिया - इस लिंग सहलग्न रोग का व्यापक अध्ययन हो चुका है। इसमें प्रभाव रहित वाहक नारी से नर - संतति को रोग का संचार होता है इस रोग में रुध्िर के थक्का बनने से संब( एकल प्रोटीन प्रभावित होता है। यह एकल प्रोटीन एक प्रोटीन शृंखला का अंशमात्रा होता है। इसके कारण आहत व्यक्ित के शरीर की एक छोटी सी चोट से भी रुध्िर का निकलना बंद ही नहीं होता। विषमयुग्मजी नारी ;वाहकद्ध से यह रोग पुत्रों में जाता है। नारी की रोगग्रस्त होने की संभावना विरल होती हैऋ क्योंकि इस प्रकार की नारी की माता को कम से कम वाहक और पिता को हीमोपफीलिया से ग्रस्त होना आवश्यक होता है। ;जो अध्िक वय तक जीवित नहीं रह पाताद्ध महारानी विक्टोरिया की वंशावली में अनेक हीमोपफीलिया ग्रस्त वंशज थे और रानी स्वयं रोग की वाहक थी। दात्रा कोश्िाका - अरक्तता ;सिकल सेल एनिमियाद्ध - यह अलिंग क्रामोसोम लग्न अप्रभावी लक्षण है जो जनकों से संतति में तभी प्रवेश करता है जबकि दोनों जनक जीन के वाहक होते हैं ;विषमयुग्मजीद्ध। इस रोग का नियंत्राण अलील का एकल जोड़ा भ्इ। और भ्इे करता है। रोग का लक्षण ;पफीनोटाइपद्ध तीन संभव जीनोटाइपों में से केवल भ्इे ;भ्इे भ्इेद्ध वाले समयुग्मकी व्यक्ितयों में दश्िार्त होता है।

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