जीव विज्ञान वैधनिक आयु स्त्राी के लिए 18 वषर् तथा पुरुष के लिए 21 वषर् सुनिश्िचत है और इस समस्या से निपटने हेतु लघु परिवार के लिए जोड़ों को प्रोत्साहित किया जाता है। आइए! यहाँ पर वुफछ सामान्य तौर पर इस्तेमाल होने वाले गभर् निरोध्कों के बारे में चचार् करें। एक आदशर् गभर् निरोध्क प्रयोगकतार् के हितों की रक्षा करने वाला आसानी से उपलब्ध्, प्रभावी तथा जिसका कोइर् अनुषंगी प्रभाव या दुष्प्रभाव नहीं हो या हो भी तो कम से कम। इसके साथ ही यह उपयोगकतार् की कामेच्छा, प्रेरणा तथा मैथुन में बाध्क न हो। आजकल व्यापक परिध्ि के गभर् निरोध्क साध्न जैसे कि आसानी से उपलब्ध् हैंऋ उन्हें मोटे तौर पर निम्न श्रेण्िायों में वगीर्कृत किया जा सकता है, जैसे प्राकृतिक/परंपरागत, रोध् ;बैरियरद्ध, आइर्यूडीज ;कापर टीद्ध मुँह से लेने योग्य गभर् निरोधक, टीका रूप में, अंतरोर्प तथा शल्य ियात्मक विध्ियाँ। प्राकृतिक विध्ियाँ कृ ये विध्ियाँ अंडाणु ;ओवमद्ध एवं शुक्राणु के संगम को रोकने के सि(ांत पर कायर् करती हैं। इनमें से एक उपाय आवध्िक संयम है जिसमंे एक दंपति माहवारी चक्र के 10वें से 17वें दिन के बीच की अविा, के दौरान मैथुन से बचते हैं जिसे अंडोत्सजर्न की अपेक्ष्िात अवध्ि मानते हैं। इस अवध्ि के दौरान निषेचन एवं उवर्र ;गभर्धरणद्ध के अवसर बहुत अध्िक होने के कारण इसे निषेच्य अवध्ि भी कहा जाता चित्रा 4ण्1 ;अद्ध पुरूष के लिए वंफडोम चित्रा 4ण्1 ;बद्ध स्त्राी के लिए वंफडोम है। इस तरह से, इस दौरान मैथुन ;सहवासद्ध न करने पर गभार्धन से बचा जा सकता है। बाह्य स्खलन या अंतरित मैथुन ;कोइटस इन्ट्रप्सनद्ध एक अन्य विध्ि है जिसमें पुरुष साथी संभोग के दौरान वीयर् स्खलन से ठीक पहले स्त्राी की योनि से अपना लिंग बाहर निकाल कर वीयर्सेचन से बच सकता है। स्तनपान अनातर्व ;लैक्टेशनल एमेनोरियाद्ध विध्ि भी इस तथ्य पर निभर्र करती है कि प्रसव के बाद, स्त्राी द्वारा श्िाशु को भरपूर स्तनपान कराने के दौरान अंडोत्सगर् और आतर्व चक्र शुरू नहीं होता है। इसलिए जितने दिनों तक माता श्िाशु को पूणर्तः स्तनपान कराना जारी रखती है ;इस दौरान श्िाशु को माँ के दूध् के अलावा, ऊपर से पानी या अतिरिक्त दूध् भी नहीं दिया जाना चाहिए। यह अवध्ि 4 - 6 माह की होती हैद्ध, गभर्धारण के अवसर लगभग शून्य होते हैं। यह विध्ि प्रसव के बाद ज्यादा से ज्यादा 6 माह की अवध्ि तक ही कारगर मानी गइर् है। चूँकि उपयुर्क्त विध्ियों में किसी दवा या साध्न का उपयोग नहीं होता, अतः इसके दुष्प्रभाव लगभग शून्य के बराबर हैं। हालाँकि, इसके असपफल रहने की दर कापफी अिाक है। रोध् ;बैरियरद्ध विध्ियों के अंतगर्त रोध्क साध्नों के माध्यम से अंडाणु और शुक्राणु को भौतिक रूप से मिलने से रोका जाता है। इस प्रकार के उपाय पुरुष एवं स्त्राी, दोनों के लिए उपलब्ध् हैं। कंडोम ;निरोध्द्ध ;चित्रा 4.1 अ और बद्ध आदि रोध्क उपाय हैं जिन्हें पतली रबर या लेटेक्स से बनाया जाता है ताकि इस के उपयोग से पुरुष के लिंग या स्त्राी की योनि एवं गभार्शय ग्रीवा को संभोग से ठीक पहले, ढक दिया जाए और स्खलित शुक्राणु स्त्राी के जननमागर् में नहीं घुस सके। यह गभार्धान को बचा सकता है। पुरुषों के लिए कंडोम का मशहूर ब्रांड नाम कृ‘निरोध्’ कापफी लोकपि्रय है। हाल ही के

RELOAD if chapter isn't visible.