अध्याय 1 जीवों में जनन 1ण्1 अलैंगिक जनन 1ण्2 लैंगिक जनन प्रत्येक जीव केवल वुफछ निश्िचत समय तक ही जीवित रह सकता है। जीव के जन्म से उसकी प्राकृतिक मृत्यु तक का यह काल, उस जीव की जीवन अवध्ि को निरूपित करता है। चित्रा 1.1 में वुफछ जीवों की जीवन अवध्ि दिखाइर् गइर् है। बहुत से अन्य जीवों के चित्रा प्रस्तुत किए गए हैं। इन चित्रों को देखकरऋ इनके बारे में पता लगाकर दिए गए रिक्त स्थान में आपको उनवफी जीवन अवध्ि के बारे में लिखना है। चित्रा 1.1 में निरूपित जीव की जीवन अवध्ि का परीक्षण कीजिए। क्या यह दोनों बातें रोचक एवं कौतूहल पूणर् नहीं हैं कि यह अवध्ि कम से कम एक दिन या पिफर अध्िक से अध्िक वुफछ हशार वषर् हो सकती हैं? इन दोनों चरम सीमाओं के मध्य अध्िकांश जीवित जीवों की जीवन अवध्ि बनी रहती है। आप शायद इस बात पर ध्यान देंगे कि किसी जीव की जीवन अवध्ि का आवश्यक रूप से आकार ;साइजद्ध से संबंध नहीं हैऋ कौआ और तोता के आकार में कोइर् अंतर नहीं होता, पिफर भी इन दोनों के जीवन अवध्ि में बहुत अंतर होता है। ठीक इसी प्रकार से आम के वृक्ष की जीवन अवध्ि पीपल के वृक्ष की तुलना में बहुत कम होती है। जीवन अवध्ि भले ही कितनी ही हो, परंतु प्रत्येक जीव की मृत्यु सुनिश्िचत है। दूसरे शब्दों मेंऋ यह कह सकते हैं कि एक कोशीय जीवों को छोड़कर कोइर् भी जीव अमर नहीं है। हमक्यों कहते हैं कि एक कोशीय जीव की प्राकृतिक मृत्यु नहीं होती? इस वास्तविकता को जानते हुए क्या आपको आश्चयर् नहीं होता कि हशारों वषो± से पृथ्वी पर पादपों तथा पशु - पक्ष्िायों की विभ्िान्न स्पीशीश की विशाल संख्या विद्यमान है? जीवित जीवों में वुफछ प्रियाएँ अवश्य ही ऐसी हैं जिनसे यह निरंतरता सुनिश्िचत होती है। हाँ, यहाँ हम जनन का उल्लेख कर रहे हैं जिसे हम निश्िचत मानते हैं। जीव विज्ञान मुख ;अद्ध कलिका ;सद्ध कोनिडिया ;दद्ध ;बद्ध चित्रा 1ण्3 अलैंगिक प्रजनन संरचना ;अद्ध क्लैमिडोमोनास में अलैंगिक चल बीजाणु ;बद्ध पैनीसीलियम की कोनिडिया ;सद्ध हाइड्रा में कलिका ;दद्ध स्पंज में स्पंज दो भागों में विभक्त हो जाती है और प्रत्येक भाग एक वयस्क जीव के रूप में तीव्रता पूवर्क वृि कर जाता है ;जैसे अमीबा, पैरामीसियम आदिद्ध। यीस्ट में यह विभाजन एक समान नहीं होता तथा छोटी कलिकाएँ उत्पन्न हो जाती हैं जो प्रारम्भ में तो जनक कोश्िाका से जुड़ी रहती हैं और बाद में अलग हो कर नए यीस्ट जीव में परिपक्व हो जाती हैं। पंफजाइर् जगत के सदस्य तथा साधरण पादप जैसे शैवाल विशेष अलैंगिक जननीय संरचनाओं द्वारा जनन करते हैं ;चित्रा 1.3द्ध। इन संरचनाओं में अत्यंत ही सामान्य संरचनाएँ अलैंगिक चलबीजाणु ;जू स्पोसर्द्ध हैं जो सामान्यतः सूक्ष्मदशीर्य चलनशील संरचनाएँ होती हैं। अन्य सामान्य अलैंगिक जनन संरचनाएँ कोनिडिया ;पैनीसिलमद्ध, कलिका ;हाइड्राद्ध तथा जैम्यूल ;स्पंजद्ध होते हैं। जीवों में जनन आँखें अंवुफरणशील आँख कलिका पवर्संध्ि कलिका ;अद्ध अपस्थानिक कलिका ;बद्ध अपस्थानिक मूल भूस्तरिका ;सद्ध ;दद्ध ;यद्ध चित्रा 1ण्4 पुष्पीय पादपों में कायिक प्रवध्र्न ;अद्ध आलू की आँख ;बद्ध अदरक का प्रवंफद ;सद्ध अगैव का बुलबिल ;दद्ध ब्रायोपिफलम की पणर् कलिकाएँ ;यद्ध जल हायसिंथ की भूस्तरिका कक्षा 11 में आपने पादपों के कायिक जनन के बारे में अवश्य ज्ञान प्राप्त किया होगा। आपका क्या विचार है कि कायिक जनन भी एक प्रकार का अलैंगिक जनन है? आप ऐसा क्यों सोचते हैं? क्या क्लोन शब्द कायिक जनन से उत्पन्न संतति के लिए उपयोज्य है। जबकि जंतुओं तथा अन्य साधरण जीवों में अलैंगिक शब्द का प्रयोग स्पष्ट रूप से तथा पादपों में इस शब्द का प्रयोग निरंतर किया जाता है। पादपों में कायिक प्रवध्र्न की इकाइर् जैसे उपरिभूस्तारी ;सरद्ध प्रकन्द, ;सरजोमद्ध सकरकन्द, बल्व, भूस्तरी ;औपफ सेंटद्ध सभी नयी संतति को पैदा करने का सामथ्यर् रखते हैं ;चित्रा 1.4द्ध। ये संरचनाएँ कायिक प्रवधर् ;प्रोपेग्यूलद्ध कहलाती हैं, चूँकि इन संरचनाओं के निमार्ण में दो जनक भाग नहीं लेते, अतः यह अलैंगिक जनन ही होगा। जीवों में जनन ;अद्ध ;बद्ध ;सद्ध चित्रा 1ण्5 युग्मकों की किस्में कृ ;अद्ध क्लैडोपफोरा ;एक शैवालद्ध के समयुग्मक ;बद्ध फ्रयूक्स ;एक शैवालद्ध के विषम युग्मक ;सद्ध मानव के विषम युग्मक अिाकतर लैंगिक प्रजनक जीवों द्वारा आकारिकी रूप से स्पष्ट दो प्रकार के ;विषम युग्मकद्ध पैदा किए जाते हैं इस प्रकार के जीवों में नर युग्मकों को पुमणु या शुक्राणु कहते हैंऋ जबकि मादा युग्मकों को अंड अथवा डिंब ;चित्रा 1.5 सद्ध कहते हैं। जीवों में लैंगिकता कृसामान्यतः जीवों में लैंगिक जनन के दौरान दो विभ्िान्न समष्िटयों के युग्मकों में युग्मन होता है। परंतु यह सदा के लिए सत्य तथ्य नहीं है। यदि आप कक्षा 11 के उदाहरणों का स्मरण करें तो क्या स्वतः निषेचन की प्रिया को पहचान सकते हैं। यद्यपि पादपों में इसके उदाहरण प्रस्तुत करना आसान है। पादप में नर तथा मादा दोनों जनन संरचनाएँ पाइर् जाती हैंऋ परंतु जब एक ही पादप में दोनांे नर तथा मादा जनन संरचनाएँ पाइर् जाएँ तो वह ‘द्विलिंगी’ ;चित्रा 1.6 स, यद्ध अथवा जब वह भ्िान्न पादपों पर हों ‘एक लिंगी’ ;चित्रा 1.6 दद्ध कहलाता है। बहुत - सी पंफजाइर् तथा पादपों में द्विलिंगी स्िथति को उल्िलख्िात करने के लिए उभय लिंगाश्रयी तथा समथैलसी शब्द का प्रयोग करते हैं। एकलिंगता की स्िथति को उल्िलख्िात करने के लिए एकलिंगाश्रयी तथा विषमथैलसी शब्द प्रयुक्त किए जाते हैं। पुष्पीय पादपों में एक लिंगी नर पुष्प पुंकेसरी होता है अथार्त् पुंकेसर ;परागकणद्ध वहन करने वाला जबकि मादा पुष्प स्त्राकेसर अथार्त् स्त्राीकेसर धारण किए रहता है। वुफछ पुष्पीय पादपों में एक अकेला पादप उभयलिंगाश्रयी ;नर या मादा दोनों लिंगीद्ध हो सकता है और इनमें पैदा होने वाले पुष्प एकल्िंागी तथा द्विलिंगी दोनों हो सकते हैंऋ जबकि मादा पुष्प स्त्राकेसर अथार्त् स्त्राीकेसर धरण करता है। उभयलिंगाश्रयी पादपों के वुफछ उदाहरण वुफकरव्िाटांे तथा नारियल वृक्ष हैंऋ जबकि पपीता तथा खजूर एकलिंगाश्रयी के उदाहरण हैं। उन युग्मक प्रकारों के नाम लिखें जो पुंकेसरी एवं स्त्राीकेसरी पुष्पों से बनते हैं। इसी प्रकार से प्राण्िायों में क्या होता है? क्या सभी प्रजातियों की व्यष्िट में नर अथवा मादा ;एकलिंगीद्ध ;चित्रा 1.6 बद्ध पाए जाते हैं? अथवा जिनमें दोनांे लिंग एक साथ एक 11 ही प्राणी ;द्विंिलंगीद्ध में पाए जाते हैं। आप संभवतः अनेक एकलिंगीय प्राणी प्रजातियों की सूची बना सकते हैं। प्राण्िायों में वेंफचुए ;चित्रा 1.6 अद्ध स्पंज, टेपवमर् तथा जोंक द्विलिंगी प्राण्िायों के प्रारूपिक उदाहरण हैं इनमें नर तथा मादा जनन अंग दोनांे ही ;उभयलिंगी/द्विलिंगीद्ध एक प्राणी में पाए जाते हैं। तिलचट्टा एकलिंगी प्राणी का उदाहरण है। जीव विज्ञान क्लाइटेलम वृषण कोष युक्त वृषण नर अंडाशय वृषण ;अद्ध अंडधनी मादा मादा लैंगिक अंग पुंधनी अंडाशय नर लैंगिक अंग ;सद्ध पुंधनीध्र ;बद्ध स्त्राीधनीध्र पुंकेसर अंडप नर थैलस नारी थैलस ;दद्ध ;यद्ध चित्रा 1ण्6 जीवों में लैंगिकता की विविध्ता ;अद्ध द्विलिंगी प्राणी ;वेंफचुआद्ध ;बद्ध एक लिंगी प्राणी ;काॅकरोचद्ध ;सद्ध उभय लिंगाश्रयी ;काराद्ध पादप ;दद्ध एक लिंगाश्रयी पादप ;मारककेन्िशयाद्ध ;यद्ध द्विलिंगी पुष्प ;शकरकंदद्ध जीवों में जनन पफलभ्िािा ;चमतपबंतचद्ध कहते हैं। इसका कायर् पफल को सुरक्षा प्रदान करना है ;चित्रा 1.8द्ध। विकिरण के पश्चात् बीज अनुवूफल परिस्िथतियों के आने पर अंवुफरित होता है तथा नए पादप को जन्म देता है। चित्रा 1.8 वुफछ पफलों की किस्मों में बीशों तथा संरक्षी पफलभ्िािा को दिखाया गया है। सारंाश जनन एक प्रजाति को पीढ़ी - दर - पीढ़ी जीवित रहने योग्य बनाता है। जीवों के जनन को व्यापक रूप से दो श्रेण्िायों में विभक्त किया जा सकता है कृ अलैंगिक तथा लैंगिक जनन। अलैंगिक जनन के अंतगर्त युग्मक अथवा युग्मकों का युग्मन शामिल नहीं है। ऐसे जीव जिनके शरीर की संरचना अपेक्षाकृत साधरण होती हैऋ उनमें यह सामान्य रूप से पाए जाते हैंऋ जैसे कृ कवक, शैवाल तथा वुफछ अकशेरूकी प्राण्िा। अलैंगिक प्रजनन द्वारा निमिर्त संतति एक समान होते हैं। इन्हें क्लोन भी कहा जा सकता है। अध्िकांशतः शैवालों तथा कवकों में चलबीजाणु, कोनिडिया आदि सामान्य अलैंगिक संरचनाएँ होती हैं। मुवुफलन तथा जिम्मूल निमार्ण प्राण्िायों में सामान्य अलैंगिक विध्ि देखी गइर् है। प्रोकेरिऔट तथा एककोशीय जीव जनक कोश्िाका के कोश्िाका विभाजन अथवा द्विखंडन युग्मन से उत्पन्न होते हैं। अनेक जलीय जीवों, पुष्पीय पादपों की स्थलीय प्रजातियों की संरचनाएँ जैसे उपरिभूस्तारी, प्रवंफदों, अंतःभूस्तारी वंफदों एवं भूस्तरिका आदि में नयी संतानों को पैदा करने की क्षमता होती है। इस प्रकार के अलैंगिक जनन की विध्ि को कायिक प्रवध्र्न कहते हैं। लैंगिक जनन के अंतगर्त युग्मकों का निमार्ण तथा युग्मन शामिल है। अलैंगिक जनन की तुलना में यह एक जटिल एवं ध्ीमी प्रिया है। अध्िकांश उच्चश्रेणी के प्राणी पूणर्तः लैंगिक विध्ि द्वारा जनन करते हैं। लैंगिक जनन की घटना को निषेचन पूवर्, निषेचन तथा निषेचन के बाद की घटना में श्रेणीब( किया जा सकता है। निषेचन - पूवर् घटना के अंतगर्त युग्मकजनन तथा युग्मक स्थानांतरण जबकि निषेचन - पश्च में युग्मक का निमार्ण तथा भू्रणोद्भव को ही शामिल किया गया है।

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