अध्याय 12 अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार 2 अिागम उद्देश्यः इस अध्याय के अध्ययन के पश्चात आपः ऽ नियार्त सौदों के ियांवयन से संबं( विभ्िान्न महत्त्वपूणर् चरणों एवं प्रलेखों काऋ ऽ आयात सोदों के ियांवयन से संबं( विभ्िान्न महत्त्वपूणर् चरणों एवं प्रलेखों को समझा सवेंफगेऋ ऽ अंतरार्ष्ट्रीय इकाइयों को मिलने वाले विभ्िान्न प्रलोभनों एवं योजनाओं की पहचान कर सवेंफगेऋ ऽ विदेशी व्यापार के प्रवतर्न के लिए देश में स्थापित विभ्िान्न संगठनों की भूमिका की पहचान कर सवेंफगे एवं उसे बता सवंेफगे, एवं ऽ विश्व स्तर के प्रमुख अंतरार्ष्ट्रीय संस्थानों एवं समझौतों को सूचिब( कर सवेंफगे तथा अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार एवं विकास के प्रवतर्न में उनकी भूमिका की व्याख्या कर सवेंफगे। अपने मित्रा एवं पुत्रा के साथ विचार - विमशर् के पश्चात् श्री सुधीर मनचंदा को विश्वास हो गया कि अंतरार्ष्ट्रीय बाजार में प्रवेश का उसके लिए यही उचित समय है। इससे वह न केवल वह आंतरिक बाजार में अपने स्वचालित वाहनों के पुजोर्ं की माँग परिपूणर्ता की समस्या पर विजय प्राप्त कर सवेंफगे बल्िक इससे उन्हें अंतरार्ष्ट्रीय इकाइयों को मिलने वाले लाभों को प्राप्त कर सवेंफगे। इस समय क्योंकि उनके पास सीमित पूँजी है तथा उनको विदेशों में व्यापार को कोइर् पिछला अनुभव भी नहीं है। उन्होंने अंतरार्ष्ट्रीय बाजार में प्रवेश के लिए नियार्त मागर् को चुना। परंतु उनके साथ समस्या यह है कि वह यह नहीं जानते कि नियार्त व्यवसाय में वैफसे प्रविष्ट हुआ जाए। टायर के व्यापार में रत उनके मित्रा ने उन्हें बताया कि आयात - नियार्त ियाएँ अपने देश में व्यापार प्रचालन की ियाएँ जितनी सरल नहीं है। माल को नियार्त करने से पहले कइर् औपचारिकताएँ पूरी करनी होती हैं तथा प्रलेख तैयार करने होते हैं। यदि वह नियार्त या गुणवत्ता वाली वस्तुओं का उत्पादन करना चाहता है तथा उसके लिए वह वुफछ औजार एवं कच्चे माल का आयात करना चाहता है तो इसकी भी समान तथा वुफछ सीमा तक थकाने वाली प्रिया है। श्री मनचंदा पिफर से पशोपेश में है। वह बिल्वुफल भी नहीं जानते कि आयात - नियार्त की आवश्यक औपचारिकताएँ क्या हैं एवं कौन - कौन से प्रलेखों की आवश्यकता होती है। श्री मनचंदा इस बात के लिए भी हैरान हैं कि वह नियार्त की जोख्िामों से किस प्रकार अपना बचाव करेंगे। उनकी चिंता का एक कारण वह अतिरिक्त लागत है, जो उन्हें अपनी वस्तुओं को नियार्त योग्य बनाने के लिए व्यय करनी होंगी। वुफछ आयातित मशीनों एवं कच्चे माल के प्रयोग को भी वह ध्यान में रखे हुए हंै लेकिन क्या इन वस्तुओं के आयात पर आयात कर उनके उत्पाद की लागत में वृि नहीं कर देगा? इसके अतिरिक्त वह विदेशों को नियार्त के लिए आवश्यक परिवहन, पैकेजिंग एवं बीमा पर अतिरिक्त व्यय करेंगे। टायर का व्यापार कर रहे श्री मनचंदा के मित्रा ने उनसे कहा कि इन समस्याओं के संबंध में उन्हें अिाक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। भारत की कइर् अन्य पफमेर्ं भी तो पहले से ही नियार्त व्यापार में लगी हुइर् हैं एवं उनका नियार्त भी बहुत अिाक है। उन्हें धीरज रखना चाहिए तथा इन छोटी - छोटी बातों से परेशान नहीं होना चाहिए। श्री मनचंदा के मित्रा ने उन्हें अपने आपको आयात - नियार्त प्रिया एवं प्रलेख तैयार करने से परिचित कराने के लिए किसी व्यापार विशेषज्ञ से सलाह लेने की सलाह दी। उनके मित्रा ने उनको यह भी बताया कि यद्यपि उसके पास कोइर् निश्िचत विवरण नहीं है लेकिन वह जानता है कि विदेशी व्यापार संवधर्न के कइर् उपाय एवं संगठन हैं जो उनकी समस्याओं के समाधान करने एवं विश्व बाजार में उनके उत्पादों को और अिाक उपयोगी बनाने में सहायक हो सकते हैं। 12.1 परिचय बाह्य देशों को वस्तुओं का नियार्त, अपने देश में उनके विक्रय से कापफी भ्िान्न है। विदेशी गंतव्य स्थान से माल को वास्तव में लदान करने अथवा बाह्य देशों के आपूतिर्कतार्ओं से आयात करने से पहले जिन प्रिया संबंिात औपचारिकताओं को पूरा करना है उनसे परिचित होना आवश्यक है। व्यापार को सुगम बनाने एवं उसके संवधर्न के लिए सरकार कइर् प्रकार की प्रेरणाएँ प्रदान करती है जैसे अंतरार्ष्ट्रीय पफमोर्ं को शुन्य अथवा कम दर के सीमा शुल्क पर वस्तुओं के आयात की योजना, यदि उन वस्तुओं का उपयोग वह नियार्त के लिए वस्तुओं के उत्पादन में करते हैं, उन्हें अन्य शुल्क एवं करोें के भुगतान से मुक्ित एवं उनकी आयात - नियार्त ियाओं के लिए उचित वातावरण तैयार करने एवं उसका प्रसार करने, वुफछ विश्िाष्ट वस्तुओं के नियार्त के संवर्धन, अंतरार्ष्ट्रीय व्यावसायिक इकाइयों के कायर्कारी अिाकारियों को प्रश्िाक्षण देने एवं नियार्त की वस्तुओं की गुणवत्ता एवं उनके परिबंधन को सुनिश्िचत करने के लिए अनेक प्रकार के संगठनों की स्थापना की है। विभ्िान्न देशों के बीच विकास एवं व्यापार को गति प्रदान करने के लिए अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर अनेक संगठन हैं जैसे विश्व व्यापार संगठन ;डब्ल्यू.टी.ओ.द्ध इस अध्याय में विदेशी व्यापार के प्रमुख चरण/पादान एवं इसमें प्रयुक्त होने वाले विभ्िान्न प्रलेखों पर परिचचार् की जाएगी। इस अध्याय में विभ्िान्न व्यापार संवधर्न उपायों एवं अंतरार्ष्ट्रीय व्यवसाय के प्रवतर्न हेतु स्थापित संगठनों की व्यवसाय अध्ययन भूमिका की पहचान एवं परीक्षा की जाएगी। इस अध्याय के निणार्यक अनुभाग में विश्व के विकास एवं व्यापार के संवधर्न हेतु विश्व स्तर पर कायर्रत प्रमुख अंतरार्ष्ट्रीय संस्थानों का विश्लेषण करंेगे। 12.2 आयात नियार्त प्रिया आंतरिक एवं बाह्य व्यवसाय परिचालन में प्रमुख अंतर की जटिलता है। वस्तुओं का आयात एवं नियार्त उतना सीधा एवं सरल नहीं है जितना कि घरेलू बाजार में क्रय एवं विक्रय, क्योंकि विदेशी व्यापार में माल देश की सीमा के पार भेजा जाता है तथा इसमें विदेशी मुद्रा का प्रयोग किया जाता है, इसलिए अपने देश की सीमा को पार करने तथा दूसरे देश की सीमा में प्रवेश करने से पूवर् कइर् औपचारिकताओं को पूरा करना होता है। आगे के अनुभागों में आयात - नियार्त सौदों को पूरा करने से संबंिात प्रमुख चरणों की चचार् करेंगे। 12.2.1 नियार्त प्रिया विभ्िान्न चरणों की संख्या एवं जिस क्रम में यह चरण उठाए जाते हैं अलग - अलग नियार्त लेन - देनों के अलग - अलग होते हैं। एक प्रति रूपक नियार्त लेन - देन निम्नलिख्िात चरण होते हैंः ;कद्ध पूछताछ प्राप्त करना एवं निखर् भेजनाः संभावित क्रेता विभ्िान्न नियार्तकोें को पूछताछ का पत्रा भेजता है जिसमें वह उनसे माल के मूल्य, गुणवत्ता एवं नियार्त से संबंिात शतोंर् के संबंध में सूचना भेजने के लिए प्राथर्ना करता है। आयातक इस प्रकार विज्ञापन की पूछताछ के संबंध में नियार्तकों को समाचार पत्रों में विज्ञापन के माध्यम से भी सूचित कर सकता है। नियार्तक इस पूछताछ का उत्तर निखर् के रूप में भेजता है जिसे प्रारूप बीजक कहते हंै। प्रारूप बीजक में उस मूल्य के संबंध में सूचना होती है जिस पर नियार्तक माल को बेचने के लिए तैयार है। इसमें गुणवत्ता, श्रेणी, आकार, वजन, सुपुदर्गी की प्रणाली, पैकेजिंग का प्रकार एवं भुगतान की शतोर्ं आदि की भी सूचना दी होती है। ;खद्ध आदेश अथवा इंडैंट की प्राप्ितः यदि संभावित क्रेता ;अथार्त् आयातक पफमर्द्ध के लिए नियार्त का मूल्य एवं अन्य शतेर्ं स्वीकायर् है, तो वह वस्तुओं को भेजने का आदेश देगा। इस आदेश में जिसे इंडैंट भी कहते हैं, आदेश्िात वस्तुओं का विवरण, देय मूल्य, सुपुदर्गी की शतेर्ं, पैकिंग एवं चिÉांकन का ब्यौरा एवं सुपुदर्गी संबंधी निदेर्श होते हैं। ;गद्ध आयातक की साख का आंकलन एवं भुगतान की गारंटी प्राप्त करनाः इंडैंट की प्राप्ित के पश्चात् नियार्तक, आयातक की साख के संबंध में आवश्यक पूछताछ करता है। इस पूछताछ का उद्देश्य माल के आयात के गंतव्य स्थान पर पहँुचने पर आयातक द्वारा भुगतान न करने की जोख्िाम का आंकलन करता है। इस जोख्िाम को कम से कम करने के लिए अिाकांश नियार्तक, आयातक से साख पत्रा की माँग करते हैं। साख पत्रा आयातक के बैंक द्वारा जारी किया जाता है जिसमें वह नियार्तक के बैंकों को एक निश्िचत राश्िा तक के नियार्त बिलों के भुगतान की गारंटी देता है। अंतरार्ष्ट्रीय लेन - देनोें के निपटान के लिए भुगतान की सवार्िाक उपयुक्त एवं सुरक्ष्िात वििा है। 303 ;घद्ध नियार्त लाइसेंस प्राप्त करनाः भुगतान के संबंध में आश्वस्त हो जाने के पश्चात् नियार्तक पफमर् नियार्त संबंधी नियमों के पालन की दिशा में कदम उठाती है। भारत में वस्तुओं के नियार्त पर सीमा नियम लागू होते हैं जिनके अनुसार नियार्तक पफमर् को नियार्त करने से पहले नियार्त लाइसेंस प्राप्त कर लेना चाहिए। नियार्त लाइसेंस प्राप्त करने के पूवर् महत्त्वपूणर् अपेक्षाएँ निम्नलिख्िात हैंः भारतीय रिजवर् बैंक द्वारा अिावृफत किसी भी बैंक में खाता खोलना एवं खाता संख्या प्राप्त करना। ऽ विदेशी व्यापार ;डी.जी.एल.टी.द्ध अथवा क्षेत्राीय आयात - नियार्त लाइसेंसिग प्रािाकरण से आयात - नियार्त कोड संख्या ;आइर्.इर्.सीसंख्याद्ध प्राप्त करना। ऽ उपयर्ुक्त नियार्त संवधर्न परिषद् के यहाँ पंजीयन कराना ऽ नियार्त साख एवं गारंटी निगम ;एक्सपोटर् क्रेडिट एंड गारंटी काउंसिल - इर्.सी.जी.सी.द्ध भुगतान प्राप्त न होने के कारण होने वाली जोख्िामों के विरू( सुरक्षा हेतु पंजीकरण कराना। एक नियार्तक पफमर् को आयात - नियार्त कोड ;आइर्.इर्.सी.द्ध संख्या अवश्य प्राप्त कर लेनी चाहिए क्योंकि इसे कइर् आयात/नियार्त विलेखों में लिखना होता है। आइर्.इर्.सी. नंबर प्राप्त करने के लिए नियार्तक पफमर् को प्रमुख निदेशक विदेशी व्यापार ;डाइरेक्टर जनरल पफॅार पफाॅरेन ट्रेड - डी.जी.एल.टी.द्ध के पास आवेदन करना होता है जिसके साथ वह वुफछ प्रलेख संलग्न करता है जो इस प्रकार हैं - नियार्त खाता, आपेक्ष्िात पफीस की बैंक रसीद, बैंक से एक पफामर् पर प्रमाण पत्रा, बैंक द्वारा अनुप्रमाण्िात पफोटोग्रापफ, गैर आवासी हित का विस्तृत ब्यौरा एवं जिन पफमो± से सावधान रहना हैं उनसे किसी प्रकार का संबंध नहीं है, इस आशय की घोषणा। प्रत्येक नियार्तक के लिए उपयुक्त नियार्त संवधर्न परिषद् के यहाँ पंजीयन कानूनी बाध्यता है। भारत सरकार द्वारा विभ्िान्न वगोर्ं के उत्पादों के संवधर्न एवं विकास के लिए कइर् नियार्त संवधर्न परिषदों की स्थापना की गइर् है जैसे कि इंजीनियरिंग नियार्त संवधर्न परिषद् ;इ.इ.पी.सी.द्ध एवं एप्पेरेल नियार्त संवधर्न परिषदों के संबंध में चचार् आगे एक अनुभाग में की जाएगी। यहाँ यह बताना आवश्यक है कि किसी भी नियार्तक के लिए किसी उपयुक्त नियार्त संवधर्न परिषद् का सदस्य बनना एवं पंजीयन - सदस्यता प्रमाण पत्रा ;आर.सी.एम.सी.द्ध प्राप्त करना जरूरी है तभी सरकार से नियार्तक पफमो± को मिलने वाले लाभों को प्राप्त कर पाएगा। विदेशों से भुगतान को राजनीतिक एवं वाण्िाज्ियक जोख्िामों से संरक्षण के लिए इर्.सी.जी.सी. के पास पंजीकरण कराना आवश्यक है। पंजीकरण करा लेने पर नियार्तक पफमोर्ं को व्यापारिक बैंक एवं अन्य वित्तीय संस्थानों से वित्तीय सहयोग भी प्राप्त हो जाता है। ;घद्ध माल प्रेषण से पूवर् वित्त करनाः आदेश होने एवं साख - पत्रा की प्राप्ित के पश्चात् नियार्तक माल के प्रेषण से पूवर् के वित्त हेतु अपने बैंक के पास जाता है जिससे कि वह नियार्त के लिए उत्पादन कर सके। प्रेषण पूवर् व्यवसाय अध्ययन वित्त वह राश्िा है जिसकी नियार्तक को कच्चा माल एवं अन्य संबंिात चीजों का क्रय करने, वस्तुओं के प्रियन एवं अन्य संबंिात चीजों का क्रय करने, वस्तुओं के प्रियन एवं पैकेजिंग तथा वस्तुओं के माल लदान बंदरगाह तक परिवहन के लिए आवश्यकता होती है। ;चद्ध वस्तुओं का उत्पादन एवं अिाप्राप्ितः माल के लदान से पूवर् बैंक से वित्त की प्राप्ित हो जाने पर नियार्तक आयातक के विस्तृत वणर्न के अनुसार माल को तैयार करेगा। पफमर् या तो इन वस्तुओं का स्वयं उत्पादन करेगी अथवा इन्हें बाजार से क्रय करेगी। ;छद्धजहाज लदान निरीक्षणः भारत सरकार ने यह सुनिश्िचत करने की दिशा में कइर् कदम उठाएं हैं कि देश से केवल अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तुओं का ही नियार्त हो। इनमें से एक कदम सरकार द्वारा मनोनीत सवर्था योग्य एजेन्सी द्वारा वुफछ वस्तुओं का अनिवायर् निरीक्षण है। इस उद्देश्य की प्राप्ित के लिए सरकार ने एक्सपोटर् क्वालिटी वंफट्रोल एवं निरीक्षण एक्ट 1963 पारित किया। सरकार ने वुफछ एजेंसियों को निरीक्षण एजेंसी के रूप में अिावृफत किया। यदि नियार्त किया जाने वाला माल इस वगर् के अंतगर्त आता है तो उसे एक्सपोटर् इंसपैक्सन एजेंसी ;इर्.आइर्.ए.द्ध अथवा अन्य मनोनीत की गइर् एजेंसी से संपवर्फ कर निरीक्षण प्रमाणपत्रा प्राप्त करना होगा। इस निरीक्षण अनुवेदन को नियार्त के अवसर पर अन्य नियार्त प्रलेखों के साथ जमा कराया जाएगा। यदि माल का नियार्त सितारा नियार्त गृहों, नियार्त प्रिया अंचल/विशेष आथ्िार्क अंचल ;इर्.पी.जैड/ एस.इर्.जैड.द्ध एवं शत् प्रतिशत नियार्त मूलक इकाइर्यँा ;इर्.ओ.यू.द्ध के द्वारा किया जा रहा है तो इस प्रकार का निरीक्षण अनिवायर् नहीं होगा। इन विश्िाष्ट प्रकार की नियार्त कालमों के संबंध में आगे के अनुभाग में चचार् करेंगे। ;जद्ध उत्पाद शुल्क की निकासीः वेंफद्रीय उत्पादन शुल्क अिानियम ;सैंटरल एक्साइज टैरिपफ एक्टद्ध के अनुसार वस्तुओं के विनिमार्ण में प्रयुक्त माल पर उत्पादन शुल्क का भुगतान करना होता है। नियार्तक को इसीलिए संबंिात क्षेत्राीय उत्पादन शुल्क कमीश्नर को आवेदन करना होता है। यदि कमीश्नर संतुष्ट हो जाता है तो वह उत्पादन शुल्क की छूट का प्रमाण पत्रा दे देगा। लेकिन वुफछ मामलों में यदि उत्पादित वस्तुएं नियार्त के लिए होती हैं तो सरकार उत्पादन शुल्क से छूट प्रदान कर देती है अथवा इसे लौटा देती है। इस प्रकार की छूट अथवा वापसी का उद्देश्य नियार्तक को और अिाक नियार्त के लिए प्रोत्साहित करना एवं नियार्त उत्पादों को विश्व बाजार में और अिाक प्रतियोगी बनाना है। उत्पादन शुल्क की वापसी को शुल्क की वापसी कहते हैं। शुल्क पिफरौती योजना को आजकल वित्त मंत्रालय के अधीनस्थ पिफरौती/वापसी निदेशालय प्रशासित करता है। यही विभ्िान्न उत्पादों के पिफरौती की दर को निश्िचत करता है। वापसी का अनुमोदन एवं भुगतान को उसके बंदरगाह/हवाइर् अîóे/स्थल सीमा स्टेशन, जिससे माल का नियार्त किया गया है के कस्टम, कमीशन अथवा वेंफद्रीय उत्पाद इंचाजर् के द्वारा किया जाता है। 305 ;झद्ध उद्गम प्रमाणपत्रा प्राप्त करनाः वुफछ आयातक देश, किसी विशेष देश से आ रहे माल पर शुल्क की छूट अथवा अन्य कोइर् छूट देते हैं। इनका लाभ उठाने के लिए आयातक नियार्तक से उद्गम प्रमाण पत्रा की माँग कर सकता है। यह प्रमाण पत्रा इस बात को प्रमाण्िात करता है कि वस्तुओं का उत्पादन उसी देश में हुआ है जिस देश ने इसका नियार्त किया है। इस प्रमाण पत्रा को नियार्तक के देश में स्िथत वाण्िाज्य दूतावास अिाकारी से प्राप्त किया जा सकता है। ;×ाद्ध जहाज में स्थान का आरक्षणः नियार्तक पफमर् जहाज में स्थान के लिए प्रावधान हेतु जहाजी वंफपनी को आवेदन करती है। इसे नियार्त के माल का प्रकार, जहाज में लदान की संभावित तिथ्िा एवं गंतव्य बंदरगाह को घोष्िात करना होता है। जहाज पर लदान के आवेदन की स्वीवृफति, के पश्चात जहाजी वंफपनी जहाजी आदेश पत्रा जारी करती है। जहाजी आदेश पत्रा जहाज के कप्तान के नाम आदेश होता है कि वह निधार्रित वस्तुओं को नामित बंदरगाह पर सीमा शुल्क अिाकारियों द्वारा निकासी होने पर जहाज पर माल का लदान करा ले। ;टद्ध पैकिंग एवं माल को भेजनाः माल उचित ढंग से पैकिग कर उन पर आवश्यक विवरण देंगें जैसे आयातक का नाम एवं पता, सकल एवं शु( भार, भेजे जाने वाले एवं गंतव्य बंदरगाहों के नाम एवं उद्गम देश का नाम आदि। नियार्तक तत्पश्चात माल को बंदरगाह तक ले जाने की व्यवस्था करता है। रेल के डिब्बें में माल का लदान कर लेने के पश्चात रेल अिाकारी ‘रेलवे रसीद’ जारी करते हैं जो माल के मालिकाना अिाकार का काम करता है। नियार्तक इस रेलवे रसीद को अपने एजेंट के नाम को बेचान कर देता है जिससे कि वह बंदरगाह के शहर के स्टेशन पर माल की सुपुदर्गी ले सके। ;ठद्धवस्तुओं का बीमाः वस्तुओं को मागर् में समुद्री जोख्िामोें के कारण, माल के खो जाने अथवा टूट - पूफट जाने की जोख्िाम से संरक्षण प्रदान करने के लिए नियार्तक बीमा कंपनी से वस्तुओं का बीमा करा लेता है। ;डद्धकस्टम निकासीः जहाज में लदान से पहले वस्तुओं की कस्टम से निकासी अनिवायर् है। कस्टम से निकासी प्राप्त करने के लिए नियार्तक जहाजी बिल तैयार करता है। यह मुख्य प्रलेख होता है जिसके आधार पर कस्टम कायार्लय नियार्त की अनुमति प्रदान करता है। जहाजी बिल में नियार्त किये जाने वाले माल, जहाज का नाम, बंदरगाह जहाँ माल उतारना है, अंतिम गंतव्य देश, नियार्तक का नाम एवं पता आदि का विवरण दिया जाता है तत्पश्चात जहाजी बिल की पाँच प्रति एवं नीचे दिये गए प्रलेख कस्टम घर में तैनात कस्टम मूल्यांकन अिाकारी के पास जमा करा दिए जाते हंै। ये प्रलेख हैं। ऽ नियार्त अनुबंध अथवा नियार्त आदेश ऽ साख पत्रा ऽ वाण्िाज्ियक बीजक ऽ उद्गम प्रमाण पत्रा ऽ निरीक्षण प्रमाण पत्रा यदि आवश्यक है तो ऽ समुद्री बीमा पाॅलिसी ऽ अधीक्षक व्यवसाय अध्ययन इन प्रलेखों को जमा करने के पश्चात, संबंिात, बंदरगाह न्यास के पास ‘माल को ढो ले जाने का आदेश प्राप्त करने के लिए जाया जाएगा। ढो ले जाने का आदेश बंदरगाह के प्रवेश द्वार पर तैनात कमर्चारियों के नाम, डाॅक में माल के प्रवेश की अनुमति देने के लिए आदेश होता है। ढो ले जाने के आदेश की प्राप्ित माल को बंदरगाह क्षेत्रा में ले जाकर उपयुक्त शैड में संगृहित कर दिया जाएगा। नियार्तक को इन सभी औपचारिकताओं की पूतिर् के लिए हर समय उपस्िथति संभव नहीं है, इसीलिए यह कायर् एक एजेंट को सौंप दिया जाता है जिसे निकासी एवं माल भेजने वाला एजेंट कहते हैं। ;ढद्ध जहाज के कप्तान की रसीद ;मेट्स रिसीप्टद्ध प्राप्त करनाः वस्तुओं का अब जहाज पर लदान किया जाएगा जिसके बदले जहाज का कारिंदा अथवा कप्तान/मेट्स रसीद जारी/बंदरगाह अधीक्षक को जारी करेगा। मेट्स रसीद जहाज के नायक के कायार्लय द्वारा जहाज पर माल के लदान पर जारी की जाती है जिसमें जहाज का नाम, माल लदान की तिथ्िा,, पेटींबधन ;पैकेजद्ध का विवरण, चिन्ह एवं संख्या, जहाज पर प्राप्ित के समय माल की दशा आदि की सूचना दी जाती है। बंदरगाह का अिाक्षक बंदरगाही शुल्क की प्राप्ित के पश्चात मेट्स रसीद को निकासी एवं प्रेषक एजेंट को सांैप देता है।;ढ़द्ध भाड़े का भुगतान एवं जहाजी बिल्टी का बीमाः भाडे़ की गणना हेतु निकासी एवं प्रेषक एजेंट मेट्स रसीद को जहाजी कंपनी को सौंप देगा। भाडे़ के भुगतान के पश्चात् जहाजी वंफपनी जहाजी बिल्टी जारी करेगी जो इस बात का प्रमाण है कि जहाजी कंपनी ने माल को नामित गंतव्य स्थान तक ले जाने के लिए स्वीकार कर लिया है। यदि माल हवाइर् जहाज के द्वारा भेजा जा रहा है तो इस प्रलेख को एयर वे बिल कहेंगे। ;णद्ध बीजक बनानाः माल को भेज देने के पश्चात, भेजे गए माल का बीजक तैयार किया जाएगा। बीजक भेजे गए माल की मात्रा एवं आयातक द्वारा भुगतान की जाने वाली राश्िा लिखी होती है। निकासी एवं प्रेषक एजेंट इसे कस्टम अिाकारी से सत्यापित कराएगा। ;ड़द्ध भुगतान प्राप्त करनाः माल के जहाज से भेज देने के पश्चात नियार्तक इसकी सूचना आयातक को देगा। माल के आयातक के देश में पहँुच जाने पर उसे माल पर अपने स्वामित्व के अिाकार का दावा करने के लिए एवं उनकी कस्टम से निकासी के लिए विभ्िान्न प्रलेखों की आवश्यकता होती हैं यह प्रलेख हैः बीजक की सत्यापित प्रति, जहाजी बिल्टी, पैकिंग सूचि, बीमा पाॅलिसी, उद्गम प्रमाण पत्रा एवं साख पत्रा। नियार्तक इन प्रलेखों को अपने बैंक के माध्यम से इन निदेर्शों के साथ भेजता है कि इन प्रलेखों को आयातक को तभी सौंपा जाए जबकि वह विनिमय विपत्रा को स्वीकार कर ले जिसे ऊपर लिखे प्रलेखों के साथ भेजा जाता है। प्रांसगिक प्रलेखों को बैंक को भुगतान प्राप्ित के उद्देश्य से सौंपना प्रलेखों का विनिमयन कहलाता है। विनिमय विपत्रा आयातक को एक निश्िचत राश्िा का निश्िचत व्यक्ित अथवा आदेश्िात 307 व्यक्ित अथवा विलेख के धारक को भुगतान करने का आदेश होता है। यह दो प्रकार का हो सकता है अिाकार पत्रा प्राप्ित पर भुगतान ;दशर् विपत्राद्ध अिाकार प्राप्ित पर स्वीवृफति ;मुद्दती विपत्राद्ध दशर् विपत्रा में अिाकार पत्रों को आयातक को भुगतान पर ही सौंपा जाता है। जैसे ही आयातक दशर् विपत्रा पर हस्ताक्षर करने को तैयार हो जाता है, संबंिात प्रलेखों को उसे सौंप दिया जाता है। मियादी विपत्रा में दूसरी ओर आयातक द्वारा बिल को स्वीकार करने, जिसमें एक निश्िचत अविा जैसे कि तीन मास, की समाप्ित पर भुगतान करना होता है, उसे अिाकार प्रलेख सौपे जाते हैं। विनिमय विपत्रा की प्राप्ित पर दशर् विपत्रा के होने पर आयातक भुगतान कर देता है और यदि मियादि विपत्रा है तो विपत्रा की भुगतान तिथ्िा पर भुगतान के लिए इसे स्वीकार करता है। नियार्तक का बैंक आयातक के बैंक के माध्यम से भुगतान प्राप्त करता है तत्पश्चात उसे नियार्तक के खाते के जमा में लिख देता है। नियार्तक को आयातक द्वारा भुगतान करने की इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है। नियार्तक अपने बैंक को प्रलेख सौंप कर एवं क्षतिपूरक पत्रा पर हस्ताक्षर कर तुरंत भुगतान कर सकता है। क्षतिपूरक पत्रा पर हस्ताक्षर कर नियार्तक आयातक से भुगतान की प्राप्ित न होने की स्िथति में बैंक को यह राश्िा ब्याज सहित भुगतान करने का दायित्व लेता है। नियार्त के बदले में भुगतान प्राप्त कर लेने पर नियार्तक को बैंक से भुगतान प्राप्ित का प्रमाण पत्रा प्राप्त करना होगा। यह प्रमाण पत्रा यह प्रमाण्िात करता है कि एक निश्िचत नियार्त प्रेषण को भुगतान के लिए प्रस्तुत कर दिया गया हैद्ध से संबंिात प्रलेखों ;विनिमय विपत्रा को सम्िमलित एवं विनिमय नियंत्राण नियमों के अनुरूप भुगतान करद्ध का प्रक्रमण कर लिया गया है ;आयातक प्राप्त कर लिया गया है। नियार्त लेन - देन में प्रयुक्त होने वाले प्रमुख प्रलेख ;कद्ध वस्तुओं से संबंिात प्रलेख नियार्त बीजकः नियार्त बीजक विक्रेता का विक्रय माल बिल होता है जिसमें बेचे गए माल के संबंध में सूचना दी होती है जैसे मात्रा, वुफल मूल्य, पैकेजों की संख्या, पैकिंग पर चिन्ह गंतव्य बंदरगाह, जहाज का नाम, जहाजी बिल्टी संख्या, सुपुदर्गी संबंिात शतेर्ं एवं भुगतान आदि। पैकिंग सूचीः पैंकिग सूची, पेटीयों अथवा गांठों की संख्या एवं इनमें रखे गए माल का विवरण है। इसमें नियार्त किए गए माल की प्रवृफति एवं इनके स्वरूप का विवरण दिया होता है। उद्गम का प्रमाण पत्राः यह वह प्रमाण पत्रा है जो इस बात का निधार्रण करता है कि माल का उत्पादन किस देश में हुआ है। इस प्रमाण पत्रा से आयातक को वुफछ पूवर् निधार्रित देशों में उत्पादित वस्तुओं पर शुल्क पर छूट या पिफर अन्य छूट जैसे कोटा प्रतिबंध का लागू न होना, प्राप्त हो जाती है। जब वुफछ चुनीदां देशों से वुफछ विशेष वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध हो तब भी इस प्रमाण पत्रा की आवश्यकता होती है क्योंकि वस्तुएँ यदि प्रतिबंिात देश में उत्पादित नहीं हैं तभी उन्हें आयातक देश में आने दिया जाएगा। निरीक्षण प्रमाण पत्राः उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्िचत करने के लिएं सरकार ने वुफछ उत्पादों का किसी अिावृफत एजेंसी द्वारा निरीक्षण अनिवायर् कर दिया है। भारतीय नियार्त निरीक्षण परिषद् ;इर्.आइर्.सी.आइर्.द्ध एक ऐसी ही एजेंसी है जो इस प्रकार का निरीक्षण करती है एवं इस आशय का प्रमाण पत्रा जारी करती है कि प्रेष्िात माल का नियार्त गुणवत्ता नियंत्राण एवं निरीक्षण अिानियम 1963 के तहत निरीक्षण कर लिया गया है एवं यह इस पर लागू गुणवत्ता नियंत्राण एवं निरीक्षण शतोर्ं को पूरा करता है एवं यह नियार्त के सवर्था योग्य है। प्रमाण पत्रा को अपने देश में आयातित वस्तुओं के लिए अिावृफत रूप से अनिवायर् कर दिया है। ;खद्ध जहाजी कारिंदे/कप्तान की रसीद/मेट्स रसीदः यह रसीद जहाज के नायक द्वारा जहाज पर माल के लदान के पश्चात नियार्तक को दी जाती है। मेट्स रसीद में जहाज का नाम, बथर्, माल भेजने की तिथ्िा, पैकेजों का विवरण, चिन्ह एवं संख्या, जहाज पर माल प्राप्ित के समय में माल की स्िथति, आदि जहाजी कंपनी तब तक जहाजी बिल्टी जारी नहीं करती जब तक की यह मेटस रसीद प्राप्त नहीं कर लेती। जहाजी बिल, यह मुख्य प्रलेख है। इसी के आधार पर कस्टम कायार्लय नियार्त की अनुमति प्रदान करता है। जहाजी बिल नियार्त किए जा रहे माल का विवरण, जहाज का नाम, बंदरगाह जिस पर माल उतारा जाना है, अंतिम गंतव्य देश, नियार्तक का नाम, पता आदि। जहाजी बिल्टीः यह एक ऐसा प्रलेख है जो जहाजी वंफपनी द्वारा जारी जहाज पर माल प्राप्ित की रसीद है तथा साथ ही गंतव्य बंदरगाह तक उन्हें ले जाने की शपथ भी। यह वस्तु और स्वामित्व के अिाकार प्रलेख है इसीलिए यह बेचान एवं सुपुदर्गी द्वारा स्वतंत्रा रूप से हस्तांतरणीय है। वायुमागर् विपत्राः जहाजी बिल्टी के समान वायुमागर् विपत्रा भी एक प्रलेख है जो एयर लाइन वंफपनी की हवाइर् जहाज पर माल की प्राप्ित की वििावत रसीद होती है तथा जिसमें वह गंतव्य हवाइर् अîóे तक उन्हें ले जाने का वचन देती है। यह भी माल पर मालिकाना हक का प्रलेख है एवं यह बेचान एवं सुपुदर्गी द्वारा स्वतंत्रा रूप से हस्तांतरणीय है। समुद्री बीमा पालिसीः यह एक बीमा अनुबंध का प्रमाण पत्रा होता है जिसमें बीमा वंफपनी बीमावृफत को प्रतिपफल, जिसे प्रीमियम कहते हैं के भुगतान के बदले किसी समुद्री जोख्िाम से हानि की क्षतिपूतिर् का वचन देता है। गाड़ी टिकट: इसे गाड़ी चिट, वाहन अथवा गेट पास भी कहते हैं। इसे नियार्तक तैयार करता है तथा इसमें नियार्त सामान का विस्तृत विवरण होता है जैसे कि माल भेजने वाले का नाम, पैकेजों की संख्या, जहाजी बिल संख्या, गंतव्य बंदरगाह, एवं माल ढोने वाले वाहन का नंबर। ;गद्ध भुगतान संबंधी प्रलेखः साख पत्राः साख पत्रा आयातक के बैंक द्वारा दी जाने वाली गारंटी है जिसमें वह नियार्तक के बैंक को एक निश्िचत राश्िा तक के नियार्त बिल के भुगतान की गारंटी देता है। यह अंतरार्ष्ट्रीय सौदों के निपटान के लिए भुगतान का सबसे उपयुक्त एवं सुरक्ष्िात साधन है। विनिमय विपत्राः यह एक लिख्िात प्रपत्रा है जिसमें इसको जारी करने वाला दूसरे पक्ष को एक निश्िचत राश्िा, एक निश्िचत व्यक्ित अथवा इसके धारक को भुगतान का आदेश देता है। आयात नियार्त लेन - देन के संदभर् में विनिमय विपत्रा नियार्तक द्वारा आयातक पर लिखा जाता है जिसमें वह आयातक को एक निश्िचत व्यक्ित अथवा इसके धारक को एक निश्िचत राश्िा के भुगतान के लिए कहता है। नियार्त किए माल पर मालिकाना अिाकार देने वाले प्रलेखों को आयातक को केवल उस दशा में ही सौंपा जाता हैं जबकि वह बिल में दिए गए आदेश को स्वीकार कर लेता है। बैंक का भुगतान संबंिात प्रमाण पत्राः यह प्रमाण पत्रा यह प्रमाण्िात करता है कि एक निश्िचत नियार्त प्रेषण से संबंिात प्रलेखों ;विनिमय विपत्रा को सम्िमलित करद्ध का प्रक्रामण कर लिया गया है ;आयात को भुगतान के लिए प्रस्तुत कर दिया गया हैद्ध एवं विनिमय नियंत्राण नियमों के अनुरूप भुगतान प्राप्त कर लिया गया है। 12.2.2 आयात प्रिया आयात व्यापार से अभ्िाप्राय बाह्य देश से माल के क्रय से है। आयात प्रिया भ्िान्न - भ्िान्न देशों के संबंध में भ्िान्न - भ्िान्न होती है जो देश की आयात एवं कस्टम संबंधी नीतियों एवं अन्य वैधानिक आवश्यकताओं पर निभर्र करती है। आगे के परिच्छेदों में भारत की सीमाओं के भीतर माल लाने के लिए सामान्य आयात लेन - देनों के विभ्िान्न चरणों की विवेचना की गइर् है। ;कद्ध व्यापारिक पूछताछः सवर्प्रथम आयातक पफमर् उन देशों एवं पफमोर्ं के संबंध में सूचना एकत्रिात करेगी जो उत्पाद विशेष का नियार्त करते हैं। यह सूचना उसे व्यापार निदेर्श्िाका अथवा व्यापार संघ एवं व्यापार संगठनों से प्राप्त हो सकती है। नियार्तक पफमोर्ं एवं देशों की पहचान करने के पश्चात आयातक पफमर् नियार्तक पफमोर्ं से उनके व्यापारिक पूछताछ के द्वारा नियार्त मूल्यों एवं नियार्त की शतो± की सूचना प्राप्त करती है। व्यापारिक पूछताछ आयातक पफमर् द्वारा नियार्तक पफमर् के नाम लिख्िात प्राथर्ना पत्रा है जिसमें वह उस मूल्य एवं विभ्िान्न शतोर्ं की सूचना देने के लिए प्राथर्ना करता है जिनपर नियार्तक माल का नियार्त करने के लिए तैयार है। व्यापारिक पूछताछ का उत्तर आने के पश्चात नियार्तक निखर् तैयार करता है एवं इसे आयातक को भेज देता है। इस निखर् को प्रारूप बीजक कहते हैं। प्रारूप बीजक में एक ऐसा विलेख है जिसमें नियार्त की वस्तुओं की गुणवत्ता, श्रेणी, स्वरूप, आकार, वजन, एवं मूल्य तथा नियार्त की शते± लिखी होती हैं। व्यवसाय अध्ययन ;खद्ध आयात लाइसेंस प्राप्त करनाः वुफछ वस्तुओं को स्वतंत्रातापूवर्क आयात किया जा सकता है जबकि अन्य के लिए लाइसेंस की आवश्यकता होती है। यह जानने के लिए कि जिन वस्तुओं का वह आयात करना चाहता है उन पर आयात लाइसेंस लागू होता है अथवा नहीं आयातक वतर्मान आयात नियार्त नीति ;इर्.एक्स.आइर्.एम.द्ध को देखेगा। यदि उन वस्तुओं के आयात के लिए लाइसेंस की आवश्यकता है तो वह आयात लाइसेंस प्राप्त करेगा। भारत में प्रत्येक आयातक ;नियार्तक के लिए भीद्ध के लिए विदेशी व्यापार महानिदेर्शक अथवा क्षेत्राीय आयात - नियार्त लाइसेसिंग प्रािाकरण के पास पंजीयन कराना एवं आयात नियार्त कोड नंबर प्राप्त करना आवश्यक है। इस नंबर को अिाकांश आयात संबंधी प्रलेखों पर लिखना अनिवायर् होता है। ;गद्ध विदेशी मुद्रा का प्रबंध करनाः आयात लेन - देन से संबंिात आपूतिर्कतार् विदेश में रहता है वह भुगतान विदेशी मुद्रा में करना चाहेगा। विदेशी मुद्रा में भुगतान के लिए भारतीय मुद्रा का विदेशी मुद्रा में विनिमय करना होगा। भारत में सभी विदेशी विनिमय संबंिात लेन - देनों का भारतीय रिजवर् बैंक के विनिमय नियंत्राण विभाग द्वारा नियमन होता है। नियमों के अनुसार प्रत्येक आयातक के लिए विदेशी मुद्रा का अनुमोदन प्राप्त करना आवश्यक है। इस अनुमोदन को प्राप्त करने के लिए भारतीय रिजवर् बैंक द्वारा अिावृफत बैंक के पास विदेशी मुद्रा जारी करने के लिए आवेदन करना होगा। यह आवेदन एक निधार्रित पफामर् भर कर आयात लाइसेंस के साथ विनिमय नियंत्राण अिानियम के प्रावधानों के अनुसार करना होता है। आवेदन की भली भाँति जाँच कर लेने के पश्चात बैंक आयात सौदे के लिए आवश्यक विदेशी मुद्रा का अनुमोदन कर देता है। ;घद्ध आदेश अथवा इंडैंट भेजनाः लाइसेंस प्राप्त होने के पश्चात आयातक निधार्रित वस्तुओं की आपूतिर् हेतु नियार्तक के पास आयात आदेश अथवा इंडैंट भेजेगा। आयात आदेश में आदेश्िात वस्तुओं का मूल्य, मात्रा माप, श्रेणी एवं गुणवत्ता एवं पैंकिगं, माल का लदान बंदरगाह जहाँ से माल को ले जाया जाएगा एवं जहाँ ले जाया जायेगा की सूचना दी जाती है। आयात आदेश को ध्यान से तैयार करना चाहिए जिससे कि किसी प्रकार संशय न रहे जिसके कारण आयातक एवं नियार्तक के बीच मतभेद पैदा हो सकते हैं। ;घद्ध साख पत्रा प्राप्त करनाः आयातक एवं विदेशी आपूतिर्कतार् के बीच भुगतान की शतोर्ं में साख पत्रा तय किया गया है तो आयातक को अपने बैंक से साख पत्रा प्राप्त करना होगा जिसे वह आगे आपूतिर्कतार् को भेज देगा। जैसा कि पहले ही कहा जा चुका है कि साख पत्रा आयातक के बैंक द्वारा जारी की जाने वाली गारंटी है जिसमें वह नियार्तक के बैंक को निश्िचत राश्िा तक के नियार्त बिल के भुगतान की गारंटी देता है। यह अंतरार्ष्ट्रीय सौदों के निपटान के लिए भुगतान का सबसे उपयुक्त एवं सुरक्ष्िात साधन है। नियार्तक को इस प्रपत्रा की आवश्यकता यह सुनिश्िचत करने के लिए होती है कि भुगतान न होने की कोइर् जोख्िाम नहीं है। 311 ;चद्धवित्त की व्यवस्था करनाः माल के बंदरगाह पर पहुँचने पर नियार्तक को भुगतान करने के लिए आयातक को इस की अगि्रम व्यवस्था करनी चाहिए। भुगतान न किए जाने के कारण बंदरगाह से निकासी न होने की दशा में भारी विलंब शुल्क ;अथार्त जुमार्नाद्ध देना होता है। इससे बचने के लिए आयात के वित्तीयन के लिए अगि्रम योजना बनानी आवश्यक है। ;छद्धजहाज से माल भेज दिए जाने की सूचना की प्राप्ितः जहाज में माल के लदान कर देने के पश्चात विदेशी आपूतिर्कतार् आयातक को माल भेजने की सूचना भेजता है। माल प्रेषण सूचना पत्रा में जो सूचनाएँ दी होती हैं वह है - बीजक संख्या, जहाजी बिल्टी /वायु मागर् बिल नंबर एवं तिथ्िा, जहाज का नाम एवं तिथ्िा, नियार्त बंदरगाह, माल का विवरण एवं मात्रा तथा जहाज के प्रस्थान की तिथ्िा। ;जद्धआयात प्रलेखों को छुड़ानाः माल रवानगी के पश्चात विदेशी आपूतिर्कतार् अनुबंध एवं साख पत्रा की शतोर्ं को ध्यान में रखकर आवश्यक प्रलेखों का संग्रह तैयार करता है तथा उन्हें अपने बैंक को भेज देता है जो उन्हें आगे साख पत्रा में निधार्रित रीति से भेजता है एवं प्रक्रमण करता है। इस संग्रह में सामान्यतः विनिमय विपत्रा, वाण्िाज्ियक बीजक, जहाजी बिल्टी/वायुमागर् बिल पैंकिग सूची उद्गम स्थान प्रमाणपत्रा, समुद्री बीमा पाॅलिसी आदि सम्िमलित होते हैं। इन प्रलेखों के साथ जो विनिमय विपत्रा भेजा जाता है उसे प्रलेखीय विनिमय विपत्रा कहते हैं। जैसा कि पहले ही नियार्त प्रिया में बताया जा चुका है प्रलेखीय विनिमय विपत्रा दो प्रकार का हो सकता है - भुगतान के बदले प्रलेख ;दशर् विपत्राद्ध एवं स्वीवृफति के बदले प्रलेख ;मुद्दती विपत्राद्ध। दशर् विपत्रा में लेखक आदेशक बैंक को भुगतान प्राप्त हो जाने पर ही आयातक को आवश्यक प्रलेखों को सौंपने का आदेश देता है। लेकिन मुद्दती विपत्रा की दशा में वह बैंक को प्रलेखों को आयातक द्वारा विनिमय विपत्रा के स्वीकार किए जाने पर ही सौंपने का आदेश देता है। प्रलेखों को प्राप्त करने के लिए विनिमय विपत्रा की स्वीवृफति को आयात प्रलेखों का भुगतान कहते हैं। भुगतान हो जाने के पश्चात आयात संबंधी प्रलेखों को आयातक को सौंप देता है। ;झद्ध माल का आगमनः विदेशी आपूतिर्कतार् माल को अनुबंध के अनुसार जहाज से भेजती है। वाहन ;जहाज अथवा हवाइर् जहाजद्ध का अभ्िारक्षक गोदी अथवा हवाइर् अîóे पर तैनात देख - रेख अिाकारी को माल के आयातक देश में पहुँच जाने की सूचना देता है। वह उन्हें एक विलेख सौंपता है जिसे आयातित माल की सामान्य सूची कहते हैं। यह वह प्रलेख है जिसमें आयातित का विस्तृत विवरण दिया होता है। इसी विलेख के आधार पर ही माल को उतरवाया जाता है। ;×ाद्ध सीमा शुल्क निकासी एवं माल को छुड़ानाः भारत में आयातित माल को भारत की सीमा में प्रवेश के पश्चात सीमा शुल्क निकासी से गुजरना होता है। सीमा शुल्क निकासी एक जटिल प्रिया है तथा इसके लिए कइर् औपचारिकताओं को पूरा करना होता है। इस व्यवसाय अध्ययन लिए उचित यही रहेगा कि आयातक निकासी एवं लदाने वाले एजेंट की नियुक्ित करें क्योंकि यह इन औपचारिकताओं से भली भाँति परिचित होता है एवं सीमा शुल्क से माल की निकासी में इनकी अहम् भूमिका होती है। सवर्प्रथम आयातक सुपुदर्गी आदेश पत्रा प्राप्त करेगा जिसे सुपुदर्गी के लिए बेचान भी कहते हैं। सामान्यतः जब जहाज बंदरगाह पर पहुँचता है तो आयातक जहाजी बिल्टी के पृष्ठ भाग पर बेचान करा लेता है। यह बेचान संबंिात जहाजी वंफपनी के द्वारा किया जाता है। वुफछ मामलों में जहाजी वंफपनी बिल का बेचान करने के स्थान पर एक आदेश पत्रा जारी कर देती है। यह आदेश पत्रा आयातक को माल की सुपुदर्गी का लेने का अिाकार देता है। यह बात अलग है कि आयातक को माल के अपने अिाकार में लेने से पहले भाड़ा चुकाना होगा। ;यदि इसका भुगतान नियार्तक ने नहीं किया है।द्ध आयातक को गोदी व्यय ;डाॅक व्ययद्ध का भी भुगतान करना होगा जिसके बदले उसे बदरगाह न्यास शुल्क की रसीद मिलेगी। इस के लिए आयातक अवतरण एवं जहाजी शुल्क कायार्लय में एक पफामर् को भरकर उसकी दो प्रति जमा करानी होती है। इसे आयात आवेदन कहते हैं। अवतरण एवं जहाजी शुल्क कायार्लय गोदी अिाकारियों की सेवाओं के बदले शुल्क लगाती है जिसे आयातक वहन करता है। डाॅक व्यय को भुगतान कर देने पर आवेदन की एक प्रति जो प्राप्ित की रसीद होती है, आयातक को लौटा दी जाती है। इस रसीद को बंदरगाह न्यास शुल्क रसीद कहते हैं। आयातक इसके पश्चात् आयात शुल्क निधार्रण हेतु प्रवेश बिल ;बिल आॅपफ एंट्रीद्ध पफामर् भरेगा। एक मूल्यांकन कतार् सभी विलेखों का ध्यान से अध्ययन कर निरीक्षण के लिए आदेश देगा। आयातक मूल्यांकनकतार् के द्वारा तैयार विलेख को प्राप्त करेगा और यदि सीमा शुल्क देना है तो उसका भुगतान करेगा। आयात शुल्क का भुगतान कर देने के पश्चात प्रवेश बिल को गोदी अधीक्षक के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। अधीक्षक इसे चिन्िहत करेगा तो निरीक्षक से आयातित माल का भौतिक रूप में निरीक्षण करने के लिए कहेगा। निरीक्षक प्रवेश बिल पर ही अपना अनुवेदन लिख देगा। आयातक अथवा उसका प्रतिनििा इस प्रवेश बिल को बंदरगाह अिाकारियों के समक्ष प्रस्तुत करेगा। आवश्यक शुल्क ले लेने के पश्चात वह अिाकारी माल की सुपुदर्गी का आदेश दे देगा। 313 12.3 विदेशी व्यापार प्रोन्नति प्रोत्साहन एवं संगठनात्मक समथर्न नियार्त में प्रतिस्पधार् की योग्यता मे वृि के लिए व्यावसायिक पफमोर्ं की सहायता के लिए देश में कइर् प्रेरणा एवं योजनाएँ प्रचलित हैं। समय - समय पर सरकार ने अंतरार्ष्ट्रीय व्यवसाय में संलग्न पफमोर्ं को विपणन में सहायता एवं बुनियादी ढाँचागत समथर्न प्रदान करने के लिए संगठन स्थापित किए हैं। आगे के अनुभागों में प्रमुख विदेशी व्यापार प्रोन्नति योजनाओं एवं संगठनों पर चचार् की गइर् है। 12.3.1 विदेशी व्यापार प्रोन्नति वििायाँ एवं योजनाएं व्यावसायिक पफमोर्ं के कायो± को सुगम बनाने के लिए सरकार अपनी आयात - नियार्त नीति में विभ्िान्न व्यापार प्रोन्नति उपायों एवं योजनाओं आयात लेन देनों में प्रयुक्त प्रमुख प्रलेख व्यापारिक पूछताछः यह आयातक की ओर से नियार्तक को एक लिख्िात प्राथर्ना जिसमें वह नियार्तक द्वारा नियार्त की वस्तुओं के मूल्य एवं विभ्िान्न शतोर्ं की सूचना प्रदान करने के लिए कहता है। प्रारूप बीजकः यह वह प्रलेख है जिसमें नियार्त के माल के मूल्य, गुणवत्ता, श्रेणी, डिजाइन, माप, भार तथा नियार्त की शतोर्ं का विस्तृत वणर्न होता है। आयात आदेश अथवा इंडैंटः यह वह विलेख है जिसमें व्रेफता ;आयातकद्ध आपूतिर्कतार् ;नियार्तकद्ध को इसमें मांगी गइर् वस्तुओं की आपूतिर् का आदेश देता है। इस आदेश इंडैंट में आयात की वस्तुओं, मात्रा एवं गुणवत्ता, मूल्य, माल लदान की प(ति, पैकिंग की प्रवृफति भुगतान का माध्यम आदि के संबंध में सूचना दी जाती है। साख पत्राः साख पत्रा आयातक के बैंक द्वारा नियार्तक बैंक को एक निश्िचत राश्िा के नियार्तक बिल के भुगतान की गारंटी है। इसे नियार्तक आयातक को वस्तुओं के नियार्त के बदले मेें जारी करता है। माल प्रेषण की सूचनाः यह नियार्तक द्वारा आयातक को भेजा जाने वाला प्रलेख है जिसमें वह सूचित करना है कि माल का लदान करा दिया गया है। माल लदान/प्रेषण सूचना पत्रा में बीजक नंबर, जहाजी बिल्टी/वायुमागर् बिल संख्या एंव तिथ्िा, जहाज का नाम एवं तिथ्िा, नियार्तक बंदरगाह, माल का विवरण एवं मात्रा एवं जहाज की यात्रा प्रारंभ तिथ्िा। जहाजी बिल्टीः यह जहाज के नायक द्वारा तैयार एवं हस्ताक्षरयुक्त विलेख होता है जिसमें वह माल के जहाज पर प्राप्ित को स्वीकार करता है। इसमें माल को निधार्रित बंदरगाह तक ले जाने से संबंिात शतेर्ं दी हुइर् होती है। हवाइर् मागर् बिलः जहाजी बिल्टी के समान वायु मागर् विपत्रा भी एक प्रलेख है जो एयर लाइन वंफपनी की हवाइर् जहाज पर माल प्राप्ित की वििावत रसीद होती है तथा जिसमें वह माल को गंत्व्य हवाइर् अîóे तक ले जाने का वचन देती हैं। यह भी माल पर मालिकाना हक का प्रलेख है एवं यह भी बेचान एवं सुपुदर्गी द्वारा स्वतंत्रा रूप से हस्तांतरणीय है। प्रवेश बिलः यह सीमा शुल्क कायार्लय द्वारा आयातक को दिया जाने वाला एक पफाॅमर् होता है जिसे आयातक माल की प्राप्ित पर भरता है। इसकी तीन प्रतियाँ होती हैं तथा इसे सीमा शुल्क कायार्लय में जमा कराया जाता है। इसमें जो सूचना दी हुइर् होती है वह है आयातक का नाम एवं पता, जहाज का नाम, पैकेजों की संख्या पैकेज पर चिन्ह, माल की मात्रा एवं मूल्य, नियार्तक का नाम एवं पता, गंतव्य बंदरगाह एवं देय सीमा शुल्क। विनिमय विपत्राः यह एक लिख्िात प्रपत्रा है जिसमें इसको जारी करने वाला दूसरे पक्ष को एक निश्िचत राश्िा एक निश्िचत व्यक्ित अथवा इसके धारक को भुगतान के लिए कहता है। आयात नियार्त लेन - देन के संदभर् में यह नियार्त द्वारा आयातक पर लिखा जाता है जिसमें वह आयातक को एक निश्िचत राश्िा एक निश्िचत व्यक्ित अथवा इसके धारक को भुगतान करने का आदेश देता है। नियार्त किए गए माल पर मालिकाना अिाकार देने वाले प्रलेखों को आयातक को केवल उस दशा में ही सौंपा जाता है जबकि वह बिल में दिए गए आदेश को स्वीवृफति प्रदान कर दे। दशर् बिलः यह विनिमय विपत्रा का वह प्रकार है जिसमें इसका लेखक बैंक को आयातक को संबंिात प्रलेख बिल को भुगतान कर देने पर ही देने का आदेश देता है। मुद्दती बिलः यह विनिमय विपत्रा का वह प्रकार है जिसमें बिल को स्वीकार कर देने पर ही सौंपने के आदेश देता है। आयातित माल की सूचीः यह वह प्रलेख है जिसमें आयातित माल का विस्त्तृत विवरण दिया होता है। इसी के आधार पर माल को जहाज से उतरवाया जाता है। डाॅक चालानः सीमा शुल्क संबंधी औपचारिकताओं की पूतिर् पर डाॅक व्यय का भुगतान किया जाता है। डाॅक/गोदी व्यय का भुगतान करते समय आयातक अथवा उसका निकासी एजेंट डाॅक व्यय की राश्िा एक चालान अथवा पफामर् में दशार्ता है जिसे डाॅक चालान कहते हैं। की घोषणा करती है। वतर्मान में प्रचलित प्रमुख व्यापार प्रोन्नति उपाय ;विशेषतः नियार्त से संबंिातद्ध निम्न लिख्िात हैंः ;कद्ध शुल्क वापसी योजनाः नियार्त की वस्तुओं को देश के भीतर उपभोग नहीं किया जाता। इन पर किसी प्रकार का उत्पादन शुल्क एवं सीमा शुल्क का भुगतान नहीं करना होता। नियार्त की वस्तुओं पर यदि किसी प्रकार के शुल्क का भुगतान कर दिया गया है तो उसे नियार्तक को लौटा दिया जायेगा लेकिन इसके लिए उसे संबंिात अिाकारियों को नियार्त का प्रमाण देना होगा। इस प्रकार की वापसी को शुल्क वापसी कहते हैं। वुफछ प्रमुख शुल्क वापसियों में नियार्त के लिए वस्तुओं पर उत्पादन शुल्क, कच्चे माल एवं नियार्त हेतु उत्पादन के लिए आयातित मशीनों पर सीमा शुल्क का भुगतान सम्िमलित हैं। अंतिम वापसी को सीमा शुल्क वापसी भी कहते हैं। ;खद्ध बांड योजना के अंतर्गत नियार्त हेतु विनिमार्णः इस सुविधा के अनुसार पफमेर्ं वस्तुओं का उत्पादन शुल्क अथवा अन्य कोइर् शुल्क देय कर सकती हैं जो पफमेर्ं इस सुविधा का लाभ उठाना चाहती है उन्हें - - - - - ;अथार्त बांडद्ध देना होता है कि वह वस्तुओं का उत्पादन नियार्त के उद्देश्य से कर रहे हैं तथा वह इनका वास्तव में नियार्त करेंगे। ;गद्ध विक्रय कर के भुगतान से छूटः नियार्त की वस्तुओं पर विक्रय कर नहीं लगता। यही नहीं कापफी लंबी अविा तक नियार्त ियाओं से अजिर्त आय पर आयकर भी नहीं देना होता था। अब आयकर से छूट केवल 100 प्रतिशत 315 नियार्त मूलक इकाइयों एवं नियार्त प्रवतर्न क्षेत्रों / विश्िाष्ट आथ्िार्क क्षेत्रोें में स्थापित इकाइयों को ही वुफछ चुने हुये वषोर्ं के लिए ही मिलती है। अब आगे के परिच्छेदों में हम इन इकाइयों की विवेचना करेंगे। ;घद्ध अगि्रम लाइसेंस योजनाः इस योजना के अंतगर्त नियार्तक को नियार्त के लिए वस्तुओं के उत्पादन घरेलू एवं आयातित आगत की बिना किसी शुल्क का भुगतान किए आपूतिर् की छूट है। नियार्तक को नियार्त के लिए वस्तुओं के विनिमार्ण हेतु वस्तुओं के आयात पर सीमा शुल्क नहीं देना होता। अगि्रम लाइसेंस दोनों प्रकार के नियार्तकों को उपलब्ध है - जो नियमित रूप से नियार्त करते हैं एवं जो तदथर् नियार्त करते हैं। नियमित नियार्तक अपने उत्पादन कायर्क्रम के आधार पर इस प्रकार का लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं। कभी - कभी नियार्त करने वाली पफमेर्ं भी विश्िाष्ट नियार्त आदेशों के विरू( इस प्रकार का लाइसेंस प्राप्त कर सकती है। ;घद्ध नियार्त संवधर्न पँूजीगत वस्तुएँ योजनाः इस योजना का मुख्य उद्देश्य नियार्त उत्पादन के लिए पूँजीगत वस्तुओं के आयात को प्रोत्साहन देना है। यह योजना नियार्त पफमोर्ं को पूँजीगत वस्तुओं के आयात को प्रोत्साहन देना है। यह योजना नियार्त पफमोर्ं को पूँजीगत वस्तुओं को नीची दर अथवा शून्य सीमा शुल्क पर आयात की अनुमति देती है। लेकिन शतर् है कि वह वास्तविक उपयोगकतार् होना चाहिए तथा वह वुफछ विश्िाष्ट नियार्त अनुग्रहों को पूरा करता हो। यदि विनिमार्ता इन शतो± को पूरा करता है तो वह पूँजीगत वस्तुओं को या तो शून्य अथवा रियायती दर पर आयात कर चुका कर आयात कर सकता है। समथर्क विनिमार्ता एवं सेवा प्रदान कतार् भी इस योजना के अंतगर्त पूँजीगत वस्तुओं के आयात के लिए योग्य हैं। यह योजना विशेष रूप से उन औद्योगिक इकाइयों के लिए उपयोगी है जो अपने वतर्मान संयंत्रा एवं मशीनरी के आधुनिकीकरण एवं संवधर्न में रूचि रखते हैं। अब सेवा नियार्त पफमर् भी, नियार्त के लिए साॅफ्रटवेयर विकसित करने के लिए वंफप्यूटर साॅफ्रटवेयर प्रणाली जैसी वस्तुओं के आयात के लिए इस सुविधा का लाभ उठा सकती है। ;चद्ध नियार्त पफमोर्ं को नियार्त गृह, एवं सुपर स्टार व्यापार गृहों के रूप में मान्यता देने की योजनाः भली - भँाति स्थापित नियार्तकों को प्रोन्नति एवं अंतरार्ष्ट्रीय बाजार में उनके उत्पादों के विपणन में सहायता के लिए सरकार वुफछ चुनीदां नियार्तक पफमोर्ं को नियार्तगृह, व्यापार गृह एवं सुपर स्टार व्यापार गृह के स्तर की मान्यता देती है। यह सम्मान जनक स्थान किसी पफमर् को तब दिया जाता है जब वह पिछले वुफछ चुने हुए वषो± में निधार्रित औसत नियार्त निष्पादन को प्राप्त कर लेती है। न्यूनतम पिछली औसत नियार्त निष्पादन को प्राप्त करने के साथ - साथ ऐसी नियार्तक पफमोर्ं को आयात - नियार्त नीति में उल्िलख्िात अन्य शतो± को भी पूरा करना होगा। नियार्त संवधर्न के लिए विपणन मौलिक ढाँचा एवं विशेषज्ञता के विकास को ध्यान में रखते हुए विभ्िान्न वगोर्ं के नियार्त गृहों को मान्यता प्रदान की गइर् है। नियार्त संवधर्न के लिए इन व्यवसाय अध्ययन गृहों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी गइर् है। इन्हें उच्च श्रेणी के पेशेवर एवं गतिशील संस्थानों के रूप में कायर् करना होता है तथा यह नियार्त के उत्थान के लिए एक महत्वपूणर् साधन के रूप में कायर् करते हैं। ;छद्धनियार्त सेवाएँः नियार्त सेवाओं को प्रोत्साहन देने के लिए विभ्िान्न श्रेणी के नियार्त गृहों को मान्यता दी गइर् है। इन को मान्यता सेवा प्रदानकतार्ओं के नियार्त निष्पादन के आधार पर दी गइर् है। इन्हें इनके नियार्त निष्पादन के आधार पर सेवा नियार्तगृह अंतरार्ष्ट्रीय सेवा नियार्त गृह, अंतरार्ष्ट्रीय स्टार सेवा नियार्त गृह के नाम दिए गए हैं। ;जद्धनियार्त वित्तः नियार्तकों को वस्तुओं के उत्पादन के लिए वित्त की आवश्यकता होती है। माल के लदान कर देने के पश्चात भी वित्त की आवश्यकता होती है क्योंकि आयातक से भुगतान आने मेें वुफछ समय लग सकता है। इसीलिए अिावृफत बैंकों द्वारा नियार्तकों को दो प्रकार का नियार्त वित्त उपलब्ध कराया जाता है। इन्हें लदानपूणर् वित्त या पैकेजिंग साख एवं लदान के पश्चात वित्त कहते हैं। जहाज में लदान से पूवर् वित्त में नियार्तक को वित्त/क्रय, प्रियण, विनिमार्ण अथवा पैकेजिंग के लिए उपलब्ध कराया जाता है। माल लदान पश्चात वित्त योजना के अंतगर्त माल लदान के पश्चात साख की तिथ्िा को बढ़ाने से उपलब्ध कराइर् जाती हैं। नियार्तकों को वित्त ब्याज की रियायती दरों पर उपलब्ध रहता है। ;झद्ध नियार्त प्रवतर्न क्षेत्राः नियार्त प्रवतर्न क्षेत्रा वह औद्योगिक परिक्षेत्रा होते हैं जो राष्ट्रीय सीमा शुल्क क्षेत्रा में अंतः क्षेत्रा का सृजन करते हैं। यह सामान्यतः समुद्री बंदरगाह अथवा हवाइर् अîóे के समीप स्िथत होते हंै। इनका उद्देश्य कम लागत पर नियार्त उत्पादन के लिए अंतरार्ष्ट्रीय प्रतिस्पधार्त्मक शुल्क रहित वातावरण प्रदान करना है। इससे नियार्त प्रवतर्न क्षेत्रों ;इर्.पी.जैडसद्ध के उत्पाद अंतरार्ष्ट्रीय बाजार में गुणवत्ता एवं मूल्य दोनों में प्रतिस्पधार् योग्य किए गए हैं जिनमें प्रमुख हैंः कांदला ;गुजरातद्ध, सांताक्रुज ;मुंबइर्द्ध, पफाल्टा ;पश्िचमी बंगालद्ध, नौएडा ;उ.प्र.द्ध, कोचीन ;केरलद्ध, चेन्नैइर् ;तमिलनाडुद्ध एवं विशखापट्टनम् ;आंध्र प्रदेशद्ध। सांताक्रूज क्षेत्रा केवल इलैक्ट्रोनिक वस्तुओं एवं हीरा एवं जेवरात की मदों के लिए है। अन्य इर्.पी.जैड क्षेत्रा अनेकों प्रकार की वस्तुओं का व्यापार करते हैं। हाल ही में इर्.पी.जैडस को विशेष आथ्िार्क क्षेत्रा ;स्पेशल इकोनोमिक जोन इर्.पी.जैडद्ध में परिवतिर्त कर दिया गया है जो नियार्त प्रवतर्न क्षेत्रों का और अध्िक अन्नत स्वरूप है। इर्.पी.जैड. आयात नियार्त को शासित करने वाले नियमों, श्रम एवं बैंकिंग से संबंिात को छोड़कर, मुक्त हैं। स. सरकार ने इर्.पी.जैड को विकसित करने के लिए निजी, राज्य अथवा संयुक्त क्षेत्रों को अनुमति दे दी है। निजी इर्.पीजैड के लिए गठित अंतः मंत्रालय कमेटी पहले ही मुंबइर्, सूरत एवं कांचीपुरम में निजी इर्.पीजैड स्थापित करने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे चुकी है। ;×ाद्ध 100 प्रतिशत नियार्त परक इकाइयाँ ;100 प्रतिशत इर्.ओ.यूसद्धः 100 प्रतिशत नियार्त परक इकाइयाँ योजना को 1981 में इर्.पी.जैड317 योजना की पूरक के रूप में लागू किया गया। यह उत्पादन के समान क्षेत्रों को ही अपनाता है लेकिन स्थानीय करार की दृष्िट से वृहत विकल्प देता है जिनका संबंध जिन निधार्रक तत्वों से होता है वे हैं - कच्चे माल के स्रोत, बंदरगाह, पृष्ठ प्रदेश सुविधाएँ औद्योगिकी में दक्षता की उपलब्धता, औद्योगिक आधार का होना एवं इस परियोजना के लिए भूमि के बड़े क्षेत्रा की आवश्यकता इर्.ओ.यू. की स्थापना नियार्त के लिए अतिरिक्त उत्पादन क्षमता पैदा करने की दृष्िट से की गइर् है। इसके लिए उचित नीतिगत कायर् ढांचा, परिचालन में लोचपूणर्ता एवं प्रेरणा उपलब्ध कराइर् जाती है। 12.3.2 संगठन समथर्न भारत सरकार हमारे देश में विदेशी व्यापार की प्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए समय - समय पर विभ्िान्न संस्थानों की स्थापना करती रही है। वुफछ महत्त्वपूणर् संस्थान निम्न हैः ;कद्ध वाण्िाज्य विभागः भारत सरकार के वाण्िाज्य मंत्रालय में वाण्िाज्य विभाग सवोर्च्च संस्था है जो देश के विदेशी व्यापार एवं इससे संबंिात सभी मामलों के लिए उत्तरदायी है। इस पर दूसरे देशों के साथ वाण्िाज्ियक संबंध बढ़ाने, राज्य व्यापार, नियार्त प्रोन्नति उपाय एवं नियार्त परक उद्योगों एवं वस्तुओं के नियमन का उत्तरदायित्व होता है। यह विभाग विदेशी व्यापार के लिए नीतियाँ निधार्रित करता है विशेष रूप से देश की आयात - नियार्त नीति बनाता है। ;खद्ध नियार्त प्रोन्नति परिषद् ;इर्.पी.सीद्धः नियार्त प्रोन्नति परिषद् गैर - लाभ संगठन होते हैं जिनको वंफपनी अिानियम अथवा समिति पंजीयन अिानियम के अंतगर्त पंजीकरण कराया जाता है। इन परिषदों का मूल उद्देश्य इनके अिाकार क्षेत्रा के विश्िाष्ट उत्पादों के नियार्त को बढ़ावा देना एवं विकसित करना है। वतर्मान में 21 इर्.पी.सी. है। जो विभ्िान्न वस्तुओं में व्यवहार करती हैं। ;गद्ध सामग्री बोडर्ः यह वह बोडर् है जिनकी स्थापना भारत सरकार द्वारा परंपरागत वस्तुओं के उत्पादन के विकास एवं उनके नियार्त के लिए गइर् है। इर्.पी.सी के पूरक होता है। इनके कायर् भी इर्.पी.सी. के कायोर्ं के समान होते हैं। आज भारत में सात सामग्री बोडर् हैं ये हैं काॅपफी बोडर्, रबड बोडर्, तंबाकू बोडर्, मसाले बोडर्, वेंफद्रीय सिल्क बोडर्, चाय बोडर् एवं कोयर बोडर्। ;घद्ध नियार्त निरीक्षण परिषद ;इर्.आइर्.सीद्धः नियार्त निरीक्षण परिषद् की स्थापना भारत सरकार द्वारा नियार्त गुणवत्ता, नियंत्राण एवं निरीक्षण अिानियम 1963 की धारा 3 के अंतगर्त की गइर् थी। इस परिषद का उद्देश्य गुणवत्ता नियंत्राण एवं लदान पूवर् निरीक्षण के माध्यम से नियार्त व्यवसाय का संवधर्न करना है। नियार्त की वस्तुओं के गुणवत्ता नियंत्राण एवं पूवर् लदान निरीक्षण संबंधी ियाओं पर नियंत्राण हेतु यह सवोर्च्च संस्था है। वुफछ वस्तुओं को छोडकर शेष सभी नियार्त की वस्तुओं के लिए इर्.आइर्.सीकी स्वीवृफति लेनी अनिवायर् है। ;घद्ध भारतीय व्यापार प्रोन्नति संगठन ;आइर्.टी.पी.ओद्धः इस संगठन की स्थापना भारत सरकार के वाण्िाज्य मंत्रालय द्वारा वंफपनी अिानियम 1956 के अंतगर्त जनवरी 1992 में की गइर् थी। इसका मुख्यालय नइर् दिल्ली में व्यवसाय अध्ययन है। आइर्. टी.पी.ओ का निमार्ण दो पूवर् एजेंसियों व्यापार विकास अिाकरण एवं भारतीय व्यापार मेला प्रािाकरण को मिलाकर किया गया उद्योग एवं सरकार से नियमित एवं नजदीकी आदान - प्रदान हैं। यह देश के अंदर तथा देश से बाहर व्यापार मेले एवं प्रदशर्नियों का आयोजन कर औद्योगिक क्षेत्रा की सेवा करता है। यह नियार्त पफमोर्ं को अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार मेले एवं प्रदशर्नियों में भाग लेने में सहायता करती है, नइर् वस्तुओं के नियार्त को विकसित करती है, वाण्िाज्य व्यवसाय संबंधी आज तक की सूचना उपलब्ध करता है एवं समथर् प्रदान करता है। इसके पाँच क्षेत्राीय कायार्लय हैं जो मुंबइर्, बैंगलोर, कोलकत्ता, कानपुर एवं चेन्नइर् में हैं तथा चार अंतरार्ष्ट्रीर्य कायार्लय हैं जो जमर्नी जापान, यू.एइर्. एवं यू.ए.एसमें स्िथत हैं। ;चद्धभारतीय विदेशी व्यापार संस्थानः भारतीय विदेशी व्यापार संस्थान की स्थापना 1963 में भारत सरकार ने समिति पंजीयन अिानियम के अंतर्गत पंजीवृफत स्वायत्य संस्था के रूप में की थी। इसका मूल उद्देश्य देश के विदेशी व्यापार प्रबंध को एक पेशे का स्वरूप प्रदान करना है। इसे हाल ही में मांद विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता प्रदान की गइर् है। यह अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार का प्रश्िाक्षण देती है, अंतर्रार्ष्ट्रीय व्यवसाय के विभ्िान्न क्षेत्रों में अनुसंधान करती है एवं अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार एवं निवेश संबंिात आंकड़ों का विश्लेषण एवं प्रसार करती है। ;छद्धभारतीय पैकेजिंग संस्थान ;आइर्.आइर्.पीद्धः भारतीय पैकेजिंग संस्थान की स्थापना 1966 में भारत सरकार के वाण्िाज्य मंत्रालय, एवं भारतीय पैकेजिंग उद्योग एवं संबंिात हितों के संयुक्त प्रयास से एक राष्ट्रीय संस्थान के रूप में स्थापना की गइर् थी। इसका मुख्यालय एवं प्रमुख प्रयोगशाला मुंबइर् में एवं तीन क्षेत्राीय प्रयोगशालाएं कलकत्ता, दिल्ली एवं चेन्नइर् में स्िथत हैं। यह पैकेजिंग एवं जांच का यह प्रश्िाक्षण एवं अनुसंधान संस्थान है। इसके पास अद्भुत आधारगत सुविधाएँ हैं जो पैकेज विनिमार्ण एवं पैकेज उपयोग, उद्योगों की विभ्िान्न आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। यह राष्ट्रीय एवं अंतरार्ष्ट्रीय बाजार की पैकेजिंग की जरूरतों को पूरा करती हैं। यह औद्योगिकी सलाह देना, पैकेजिंग के विकास की जाँच सेवाएँ, प्रश्िाक्षण एवं शैक्षण्िाक कायर्क्रम संवधर्न इनामी प्रतियोगिता, सूचना सेवाएँ एवं अन्य सहायक ियाएँ करती हैं। ;जद्ध राज्य व्यापार संगठन ;एस.टी.सीद्धः भारत की बड़ी संख्या में घरेलू पफमो± के लिए विश्व बाजार की प्रतियोगिता में टिकना कठिन था। इसके साथ ही वतर्मान व्यापार मागर्/माध्यम नियार्त, प्रोन्नति एवं यूरोप के देशों को छोड़कर अन्य देशों के साथ व्यापार में विविधता लाने के लिए वतर्मान माध्यम अनुपयुक्त थे। इन परिस्िथतियों में मइर् 1956 में राज्य व्यापार संगठन की स्थापना की गइर् थी। एस.टी.सी. का मुख्य उद्देश्य विश्व के विभ्िान्न व्यापार में, भागीदारों मंे व्यापार, विशेषतः नियार्त को बढ़ावा देना है। बाद में सरकार ने ऐसे अन्य कइर् संगठनों की स्थापना की जैसे मैटल एवं मिनरल व्यापार निगम ;एम.एम.टी.सीद्ध, हैंडलूम एवं हैंडीक्राफ्रट नियार्त निगम ;एच.एच.इर्.सीद्ध 319 12.4 अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार संस्थान एवं व्यापार समझौते 1914 के प्रथम विश्व यु( एवं 1939 - 45 के द्वितीय विश्व यु( में पूरे विश्व में जीवन एवं संपिा की भारी तबाही हुइर्। विश्व की लगभग सभी अथर्व्यवस्थाएं इससे बुरी तरह प्रभावित हुइर्। संसाधनों की कमी के कारण राष्ट्र कोइर् पुननिर्माण एवं विकास कायर् करने की स्िथति में नहीं थे। विश्व की मुद्रा प्रणाली में व्यवधान के कारण अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार पर विपरीत प्रभाव पड़ा। विनिमय दर की कोइर् सवर्मान्य प्रणाली नहीं थी। ऐसे हालात में चवालीस देशों के प्रतिनििा जे.एम.कीन्स - जो एक नामी अथर्शस्त्राी थे, की अगुआइर् में विश्व में शांति एवं सामान्य वातावरण की पुनः स्थापना के लिए उपाय ढूंढ़ने के लिए बै्रटनवूडस, न्यू हैम्पशायर में एकत्रिात हुए। मीटिंग का समापन तीन अंतरार्ष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना के साथ हुआ जिनके नाम हैं अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा कोष ;आइर्.एम.एपफ.द्ध पुनर्निमार्ण एवं विकास का अंतरार्ष्ट्रीय बैंक ;आइर्.बी.आर.डी.द्ध एवं अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार संगठन ;आइर्.टी.ओ.द्ध वे इन तीन संगठनों को विश्व के आथ्िार्क विकास के तीन स्तंभ मानते थे। विश्व बैंक को यु( के कारण नष्ट अथर् व्यवस्थाओं विशेषतः यूरोप के पुनर्निमार्ण का कायर् सौंपा गया तो अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा कोष को विश्व व्यापार के विस्तार का मागर् प्रशस्त करने के लिए विनिमय दरों में स्िथरता लाने का दायित्व सौंपा गया। आइर्.टी.ओ. का मुख्य कायर्, जिसकी कल्पना उन्होंने उस समय की थी, सदस्य देशों के बीच उस समय व्यवहार में लाइर् जाने वाली विभ्िान्न प्रतिबंध एवं पक्षपात पूणर् व्यवहार पर अिाकार प्राप्त कर अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना एवं सुगम बनाना था। प्रथम दो संस्थान अथार्त आइर्.बी.आर.डीएवं आइर्.एम.एपफ. तुरंत अस्ितत्व में आ गए लेकिन डब्ल्यू.आर.ओ. के विचार को अमेरिका के विरोध के कारण मूतर् रूप प्रदान नहीं किया जा सका। संगठन के स्थान पर ऊँचे सीमा शुल्क तथा अन्य प्रतिबंधों से अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार को मुक्त करने की व्यवस्था उभरकर आइर्। इस व्यवस्था को जनरल एगरीमेंट पफाॅर टेरिपफ एंड टेªड का नाम दिया गया। भारत इन तीन संस्थाओं के संस्थापक सदस्यों में से एक है। इन तीन संस्थाओं के प्रमुख उद्देश्य एवं कायोर्ं की विस्तार से विवेचना आगे के अनुभागों में की गइर् है। 12.4.1 विश्व बैंक पुनर्निमार्ण एवं विकास का अंतर्राष्ट्रीय बैंक ;आइ.बी.आर.डी.द्ध जिसे विश्व बैंक भी कहते हैं। वूरै टन वूड कान्प्रफैंस का एक स्वप्न था। इस अंतरार्ष्ट्रीय संगठन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य यु( से प्रभावित यूरोप के देशों की अथर्व्यवस्था व्यवसाय अध्ययन पुनर्निमार्ण एवं विश्व के अविकसित देशों को विकास के कायर् में सहायता प्रदान करना था। प्रारंभ के वुफछ वषर् विश्व बैंक यूरोप के यु( से तबाह देशों को इससे उभरने के कायर् में जुटा रहा 1950 तक वह इस कायर् में सपफलता प्राप्त कर लेने के पश्चात विश्व बैंक ने अविकसित देशों के विकास पर ध्यान देना प्रारंभ किया इसने यह माना कि जितना अध्िक इन देशों में निवेश करेंगे विशेष रूप से सामाजिक क्षेत्रा जैसे कि स्वास्थ्य एवं श्िाक्षा उतना ही अिाक विकासशील देशों में आवश्यक सामाजिक एवं आथ्िार्क बदलाव लाना संभव होगा। अविकसित देशों में निवेश वफी इस पहल को मूतर् रूप देने के लिए 1960 में अंतरार्ष्ट्रीय विकास संघ ;आइर्.डी.ए.द्ध का निमार्ण किया गया। आइर्.डीए. की स्थापना का मुख्य उद्देश्य उन देशों को रियायती दरों पर )ण उपलब्ध कराना था जिनकी प्रति व्यक्ित आय नाजुक स्तर से भी नीचे है। रियायती शतोर् से अभ्िाप्राय हैः ;कद्ध )ण को लौटाने की अवध्ि आइर्.बीआर.डी. की निधार्रित अविा से भी कहीं अिाक लंबी है। दशर् 12.1 विश्व बैंक एवं इसकी सहयोगी संस्थाएँ संस्थान स्थापना वषर् पुनर् निमार्ण एवं विकास का अंतरार्ष्ट्रीय बैंक ;आइर्.बी.आर.डी.द्ध 1945 अंतरार्ष्ट्रीय वित्त निगम ;आइर्.एपफ.सी.द्ध 1956 अंतरार्ष्ट्रीय विकास निगम ;आइर्.डी.ए.द्ध 1960 बहु राष्ट्रीय निवेश गारंटी एजेंसी ;एम.आइर्.जी.ए.द्ध 1988 निवेश विवाद का अंतरार्ष्ट्रीय वेंफद्र ;आइर्.सी.एस.आइर्.डी.द्ध 1966 ;खद्ध )ण लेने वाले देश के लिए इन )णों पर ब्याज देने की आवश्यकता नहीं है। इस प्रकार से आइर्.डी.ए. गरीब देशों को ब्याज मुक्त दीघर् अविा )ण देती है लेकिन यह वाण्िाज्ियक दर से ब्याज लेता है। कालांतर में विश्व बैंक की छत्रा छाया में अतिरिक्त संगठनों की स्थापना की गइर्। आज विश्व बैंक पाँच अंतरार्ष्ट्रीय संगठनों का समूह है जो विभ्िान्न देशों को वित्त प्रदान करते हैं। यह समूह एवं इसकी सहयोगी संस्थाओं, जिनका मुख्यालय वाश्िांगटन डी.सी. में है एवं जो विभ्िान्न वित्तीय आवश्यकताओं की पूतिर् करती हैं, की सूची दशर् 11.2 में दी गइर् है। विश्व बैंक के कायर्ः जैसा कि पहले बताया जा चुका है विश्व बैंक को आथ्िार्क विकास एवं अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार के क्षेत्रा के विस्तार का कायर् सौंपा गया है। अपने आरंभ के वषोर्ं में इसने मूलभूत ढाँचागत सुविधाओं जैसे ऊजार्, परिवहन एवं अन्य पर अिाक ध्यान दिया। इसमें कोइर् शंका नहीं कि इसका लाभ अविकसित देशों को भी मिला है लेकिन इन देशों में कमजोर प्रशासनिक ढँाचे, संस्थागत कायर् योजना की कमी एवं निपुण श्रम की कमी के कारण संतोष जनक परिणाम नहीं निकले। अविकसित देश वृफष्िा एवं लघु उद्योगों पर अिाक आश्रित है लेकिन इन पर मूलभूत ढाँचे के विकास के प्रयत्न का शायद ही कोइर् प्रभाव पड़ता हो। इस समस्या को देखते हुए बाद में विश्व बैंक ने संसाधनों को इन देशों में औद्योगिक एवं वृफष्िा के क्षेत्रा में विकास में लगाने का निणर्य लिया। विभ्िान्न देशों को रोकड़ पफसल उगाने के लिए सहायता 321 दी जाती है, जिससे कि उनकी आय में वृि हों। एवं लघु पैमाने के उद्यमों को संसाधन उपलब्ध कराता है। आज विश्व बैंक द्वारा प्रदत्त सेवाओं मंे कइर् गुणा वृि हुइर् है। अब यह केवल मूलभूत ढाँचे के विकास, वृफष्िा, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं रहा है बल्िक अब इसका महत्त्वपूणर् योगदान अन्य बहुत से क्षेत्रों में भी है जैसे कि उत्पादकता में वृि के द्वारा ग्रामीण गरीबी को दूर करना, गावों में गरीब लोगों की आय में वृि करना, तकनीकी सहायता प्रदान करना एवं अनुंसधान एवं सहकारिता उद्यमों को प्रारंभ करना आदि। 12.4.2 अंतरार्ष्ट्रीय विकास संघः अंतरार्ष्ट्रीय विकास संघ ;आइर्.डी.ए.द्ध की स्थापना 1960 में विश्व बैंक की संब( संस्था के रूप में की गइर् थी। इसकी स्थापना का मूल उद्देश्य कम विकसित सदस्य देशों को आसान शतोर्ं पर )ण के रूप में वित्त उपलब्ध कराना था। इसके इस उद्देश्य के कारण ही इसे आइर्.बी.आर.डीकी आसान )ण ख्िाड़की कहा जाता है। आइर्.डी.ए. के उद्देश्यः आइर्.डी.ए. के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिख्िात हैं। ऽ कम विकसित सदस्य देशों को आसान शतोर्ं पर विकास वित्त प्रदान। ऽ सबसे गरीब देशों में गरीबी दूर करने में सहायता प्रदान करना। ऽ कम विकसित देशों में आथ्िार्क विकास को बढ़ावा देने, उत्पादकता एवं जीवन स्तर को ऊँचा उठाने के लिए रियायती ब्याज दर पर वित्त उपलब्ध कराना। - - - आथ्िार्क प्रबंध सेवाएँ जैसे कि स्वास्थ्य श्िाक्षा, पोषण, मानव संसाधन विकास एवं जन संख्या नियंत्राण आदि। 12.4.3 अंतरार्ष्ट्रीय वित्त निगम ;आइर्.एपफ.सी.द्ध आइर्.एपफ.सी. की स्थापना जुलाइर् 1956 में निजी क्षेत्रा को वित्त उपलब्ध कराने के लिए की गइर् थी। आइर्.एल.सी. भी विश्व बैंक की संब( संस्था है लेकिन इसका पृथक कानूनी अस्ितत्त्व, कोष एवं कायर् है। विश्व बैंक के सभी सदस्य आइर्.एपफ.सी. के सदस्यता के योग्य होते हैं। 12.4.4 बहुराष्ट्रीय निवेश गारंटी एजेंसी ;एम.आइर्.जी.ए.द्ध एम.आइर्.जी.ए. की स्थापना अप्रैल 1988 में विश्व बैंक एंव आइर्.एपफ.सीके कायोर्ं की अनुपूतिर् हेतु की गइर् थी। एम.आइर्.जी.ए. के उद्देश्यः ये उद्देश्य निम्न हैंः ऽ कम विकसित सदस्य देशों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना। ऽ निवेशकों को राजनीतिक जोख्िामों के विरु( बीमा कराना। ऽ गैर वाण्िाज्ियक जोख्िामों के विरु( गारंटी देना ;जैसे कि मुद्रा हस्तांतरण में आने वाली जोख्िामें, यु( एवं नागरिक उपद्रव एवं करार भंगद्ध ऽ नए निवेशों का बीमा करना, वतर्मान निवेशों का विस्तार, निजीकरण एवं वित्तीय पुनगर्ठन। ऽ प्रवर्तन एवं सलाहकार सेवाएँ प्रदान करना, तथा ऽ साख का निमार्ण करना। व्यवसाय अध्ययन 12.4.5 अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा कोष ;आइर्.एम.एपफद्ध अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा कोष विश्व बैंक के बाद दूसरा अंतरार्ष्ट्रीय संगठन है। आइर्.एम.एपफ जो 1945 में अस्ितत्व में आया, का मुख्यालय वाश्िांगटन डी.सी. में स्िथत है। 2005 में 91 देश इसके सदस्य थे। आइर्.एम.एपफ की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य एक व्यवस्िथत अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा प्रणाली का विकास करना है अथार्त अंतरार्ष्ट्रीय भुगतान प्रणाली को सुविधाजनक बनाना एवं राष्ट्रीय मुद्राओं में विनिमय दर को समायोजित करना। आइर्.एम.एपफ के उद्देश्यः अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं। ऽ एक स्थाइर् संस्था के माध्यम से अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा सहयोग को बढावा देना। ऽ अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार को संतुलित विकास के विस्तार को सुगम बनाना एवं उच्च स्तरीय रोजगार एवं वास्तविक आय में वृि एवं अनुरक्षण में योगदान देना। ऽ सदस्य देशों के बीच नियमानुसार विनिमय व्यवस्था के उद्देश्य से विनिमय स्िथरता को बढाना। ऽ देशों के बीच वतर्मान लेन - देनों के संदभर् में भुगतान की बहु आयामी प्रणाली की स्थापना में सहायता करना। अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा कोष के कायर्ः इस संगठन के द्वारा उपयुर्क्त उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए अनेकों कायर् किए जाते है। इसके वुफछ महत्त्वपूणर् कायर् निम्नलिख्िात हैं। ऽ एक लघु अविा साख संस्था के रूप में कायर् करना। ऽ विनिमय दर के नियम के अनुसार समायोजन के लिए तंत्रा की रचना करना। ऽ सभी सदस्य देशों की मुद्राओं के कोष के रूप में कायर् करना जिसमें से कोइर् भी देश दूसरे देश की मुद्रा में )ण ले सकता है। ऽ विदेशी मुद्रा एवं वतर्मान लेन - देनों के )णदात्राी संस्था का कायर् किसी भी देश की मुद्रा का मूल्य निधार्रण करना करना अथवा आवश्यकता पड़ने पर उसमें परिवतर्न करना जिससे कि सदस्य देशों में विनिमय दरों में सुव्यवस्िथत समायोजन किया जा सके। अंतरार्ष्ट्रीय विचार विमशर् के लिए तंत्रा की व्यवस्था करना। 12.4.6 विश्व व्यापार संगठन ;डब्ल्यू.टी.ओद्ध एवं प्रमुख समझौतेः अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं विश्व बैंक की तजर् पर बै्रटन वूडस सम्मेलन में प्रारंभ में अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार संघ की स्थापना का निणर्य लिया गया। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार वफो बढ़ावा देना एवं सुविधाजनक बनाना तथा उस समय व्याप्त विभ्िान्न प्रतिबंध एवं पक्षपात पर काबू पाना। लेकिन यह विचार अमेरिका के कडे़ विरोध के कारणों व्यवहार में नहीं आ सका। लेकिन इस विचार को पूणर् रूप से त्याग देने के स्थान पर जो देश बै्रटन वूड्स सम्मेलन में भाग ले रहे थे, ने विश्व को ऊँचे सीमा शुल्क एवं उस समय लागू अन्य दूसरे प्रकार के प्रतिबंधों से मुक्त करने के लिए आपस में कोइर् व्यवस्था करना तय किया। यह व्यवस्था शुल्क एवं व्यापार का साधारण समझौता ;जनरल एगरीमंेट पफाॅर टैरिफ्रस एंड टेªड - जी.ए.टी.टी.द्ध कहलाया। 323 जी.ए.टी.टी 1 जनवरी 1948 को अस्ितत्व में आया तथा दिसंबर तक कायर्रत रहा। इसके सानिध्य में सीमा शुल्क एवं अन्य बाधाओं को कम करने के लिए बात - चीत के कइर् दौर हो चुके हैं। अंतिम दौर, जिसे यूरूग्वे दौर कहा जाता हैऋ जिसमें सवार्िाक संख्या में समस्याओं पर विचार किया गया एवं जिसकी अविा भी सबसे लंबी रही जोकि 1986 से 1994 तक की सात वषर् की थी। जी.ए.टी.टी में विचार विमशर् के यूरूग्वे दौर की प्रमुख उपलब्िधयों में से एक है विभ्िान्न देशों में स्वतंत्रा एवं संतोषजनक व्यापार वफी प्रोन्नति पर ध्यान देने के लिए एक स्थायी संस्था की स्थापना का निणर्य। इस निणर्य के परिणाम स्वरूप जी.ए.टी.टी को 1 जनवरी 1995 से विश्व व्यापार संगठन में परिवतिर्त कर दिया गया। इसका मुख्यालय जेनेवा, स्िवटजरलैंड में स्िथत है। विश्व व्यापार संगठन की स्थापना लगभग पचास वषर् पूवर् के अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार संगठन ;आइर्.टी.ओ.द्ध की स्थापना के मूल प्रस्ताव का ियान्वयन है। यद्यपि विश्व व्यापार संगठन जी.ए.टी.टी. का उत्तरािाकारी है तथापि यह उससे अिाक शक्ितशाली संगठन है। यह न केवल वस्तुओं बल्िक सेवाओं एवं बौिक संपदा अिाकार में व्यापार को शासित करता है। जी.ए.टी.टी. से हटकर यह एक स्थायी संगठन है जिसकी स्थापना अंतरार्ष्ट्रीय समझौते से हुइर् है तथा जिसे सदस्य देशों की सरकारों एवं विधन मंडलों ने प्रमाण्िात किया है। वैसे भी यह एक सदस्यों द्वारा संचालित नियमों पर आधारित संगठन है क्योंकि इसमें सभी निणर्य सदस्य सरकारों द्वारा आम राय से लिए जाते हैं। विभ्िान्न देशों के बीच व्यापारिक समस्याओं के समाधान की प्रधान अंतरार्ष्ट्रीय संस्था एवं बहु आयामी व्यापारिक परक्रामण का मंच होने के नाते इसका आइर्.एम.एपफ.एवं विश्व बैंक के समान वैश्िवक स्तर है। भारत विश्व व्यापार संगठन का संस्थापक सदस्य है। 11 दिसंबर 2005 को इसके 149 सदस्य थे। विश्व व्यापार संगठन के उद्देश्यः विश्व व्यापार संगठन के उद्देश्य वही हैं जो जी.ए.टी.टी. के हैं, अथार्त् आय में वृि एवं जीवन स्तर में सुधारपूणर् रोजगार सुनिश्िचत करना, उत्पादन एवं व्यापार का विस्तार एवं विश्व के संसाधनों का समुचित उपयोग। दोनों के उद्देश्यों में सबसे बड़ा अंतर यह है कि विश्व व्यापार संगठन के उद्देश्य अिाक सुनिश्िचत हैं तथा इसके कायर् क्षेत्रा में सेवाओं का व्यापार भी आता है। विश्व व्यापार संगठन का एक उद्देश्य विश्व के संसाधनों के समुचित उपयोग के द्वारा टिकाऊ विकास करना है जिससे कि पयार्वरण को सुरक्षा एवं संरक्षण को सुनिश्िचत किया जा सवेंफ। उपयर्ुक्त परिचचार् को ध्यान में रखते हुए हम अिाक स्पष्ट रूप में कह सकते हैं कि विश्व व्यापार संगठन के प्रमुख उद्देश्य निम्न हैंः ऽ विभ्िान्न देशों द्वारा लगाए शुल्क एवं अन्य व्यापारिक बाधाओं में कमी को सुनिश्िचत करनाऋ ऽ ऐसे कायर् करना जो जीवन स्तर में सुधार लांए, रोजगार पैदा करें, आय एवं प्रभावी मांग में वृि करें एवं अिाक उत्पादन एवं व्यापार को सुगम बनाएऋ व्यवसाय अध्ययन ऽ टिकाऊ विकास के लिए विश्व संसाधनों के उचित उपयोग को सुगम बनाना। ऽ एकीवृफत, अिाक व्यावहारिक एवं टिकाऊ व्यापार प्रणाली का प्रवतर्न। विश्व व्यापार संगठन के कायर्ः विश्व व्यापार संगठन के प्रमुख कायर् इस प्रकार हैं। एक ऐसे वातावरण को बल देना जो इसके सदस्य देशों को अपनी श्िाकायतों को दूर करने के लिए डब्ल्यू.टी.ओ.के पास आने के लिए प्रोत्साहित करेऋ ऽ एक सवर्मान्य आचार संहिता बनाना जिससे कि व्यापार की बाधाओं जैसे सीमा शुल्क को कम किया जा सके एवं अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार संबंधों में पक्षपात को समाप्त किया जा सकेऋ ऽ विवादों के हल करने वाली संस्था के कायर्ऋ ऽ यह सुनिश्िचत करना कि सभी सदस्य देश अपने आपसी विवादों को हल करने के लिए अिानियम द्वारा निधार्रित सभी नियम एवं कानूनों का पालन करेंऋ ऽ आइर्.एम.एपफ. एवं आइर्.बी.आर.डी. एवं इससे संब( एजेंसियों से विचार - विमशर् करना जिससे कि वैश्िवक आथ्िार्क नीति के निमार्ण में और श्रेष्ठ समझ एवं सहयोग का समावेश किया जा सकेऋ एवं ऽ वस्तुओं, सेवाओं एवं व्यापार से संबंिात बौिक अध्िकारों के संबंध में संशोिात समझौते एवं सरकारी घोषणाओं के परिचालन का नियमित पयर्वेक्षण करना। विश्व व्यापार संगठन ;डब्ल्यू.टी.ओ.द्ध के लाभऋ 1995 में स्थापना के समय से ही विश्व व्यापार संगठनने वतर्मान बहुआयामी व्यापार प्रणाली की वैधानिक एवं संस्थागत आधारश्िाला तैयार के लिए एक लंबा सपफर तय किया है। यह न केवल व्यापार को सुगम बनाने बल्िक जीवन स्तरों में सुधार एवं सदस्य देशों में पारस्परिक सहयोग का ......रहा है। ऽ विश्व व्यापार संगठन अंतरार्ष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देता है एवं अंतरार्ष्ट्रीय व्यवसाय को सुगम बनाता है। ऽ सदस्य देशों के बीच विवादों को आपसी बातचीत से निपटाता है। ऽ नियम अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार एवं संबंधों को मृदु एवं संभाव्य बनाते हैं। ऽ स्वतंत्रा व्यापार के कारण विभ्िान्न प्रकार की अच्छी गुणवत्ता वाली वस्तुओं को प्राप्त करने के पयार्प्त अवसर मिलते हैं। ऽ स्वतंत्रा व्यापार के कारण आथ्िार्क विकास में तीव्रता आइर् है। ऽ यह प्रणाली श्रेष्ठ शासन को प्रोत्साहित करती है। विश्व व्यापार संगठनविकासशील देशों के विकास का, व्यापार से संबंिात मामलों में विशेष ध्यान रख कर प्राथमिकता के आधार पर व्यवहार कर पोषण करने में सहायक होता है। विश्व व्यापार संगठन ;डब्ल्यू.टी.ओ.द्ध के समझौतेः जी.ए.टी.टी. जहाँ वस्तुओं में व्यापार से संबंिात नियमों को ही व्याख्याओं एवं बौिक संपदा को सम्िमलित करते हैं। यह समझौते विवादों को हल करने की प्रिया बताते हैं तथा 325 इनमें विकासशील देशों के साथ विशेष व्यवहार के प्रावधान हैं। ये समझौते अपेक्षा रखते हैं कि सरकारें व्यापार उदारीकरण के लिए विभ्िान्न कानून एवं उपायों को विश्व व्यापार संगठन को सूचित कर अपनी व्यापार नीतियों में पारदश्िार्ता लाएं। विश्व व्यापार संगठन के प्रमुख समझौतो की विवेचना नीचे की गइर् है। जी.ए.टी.टी.के समझौतेः पूवर् सीमा शुल्क एवं व्यापार पर साधारण समझौते ;जी.ए.टी.टी.द्ध में 1994 भारी परिवतर्न ;प्रक्रमण का यूरुग्वे दौर का एक हिस्साद्ध विश्व व्यापार संगठन समझौतो का ही एक हिस्सा है। व्यापार उदारीकरण के सामान्य सि(ांतों के साथ - साथ जी.ए.टी.टी. के वुफछ विशेष समझौते भी हैं जो विश्िाष्ट गैर - सीमा शुल्क बाधाओं से निपटने के लिए हैं। जी.ए.टी.टी.के वुफछ निश्िचत समझौतों को दशर् 11.3 की सूची में दिखाया गया है। कपड़ा एवं वस्त्रा समझौता ;ए.टी.सी.द्धऋ ये समझौते विश्व व्यापार संगठन के अधीन तैयार किये गये थे। यह समझौता विकसित देशों द्वारा विकासशील देशों से नियार्त किए कपड़े पर से कोटा प्रतिबंध को हटाना था। विकसित देश बहु रेशा व्यवस्था ;मल्टीपफाइबर अरेंजमेंट 19 एपफ.ए.द्ध के अंतगर्त कइर् प्रकार के कोटा प्रतिबंध लगा रही थी जो जी.ए.टी.टी.के वस्तुओं के स्वतंत्रा व्यापार के आधारभूत सि(ांत से प्रमुख विचलन था। ए.टी.सी. के अंतगर्त विकसित देश कोटा प्रतिबंधों को 1995 से प्रारंभ 10 वषर् की अविा में धीरे - धीरे समाप्त करने पर सहमत हुइर्। ए.टी.सी.को विश्व व्यापार संगठन की एक ऐतिहासिक उपलब्िध् माना गया। ए.टी.सी.के कारण ही 1 जनवरी 2005 से कपड़ा एवं वस्त्रा का विश्व व्यापार लगभग कोटा मुक्त हो चुका है। इससे विकासशील देशों को अपना कपड़ा एवं वस्त्रा नियार्त का विस्तार करने में बहुत अिाक लाभ हुआ है। वृफष्िा पर समझौता ;एगरीमैंट आॅन एगरीकल्चर ए.ओ.ए.द्धः यह वृफष्िा मंे स्वतंत्रा एवं संतोष जनक व्यापार को सुनिश्िचत करने के लिए समझौता है। यद्यपि वृफष्िा में व्यापार पर जी.ए.टी.टी के नियम लागू होते थे पिफर भी इनमें वुफछ कमियाँ थीं। जैसे कि सदस्य देशों को अपने स्वंय के देश में किसानों के हितों की रक्षा के लिए वुफछ गैर - सीमा शुल्क उपायों जैसे कस्टम शुल्क आयात कोटा एवं सहायता राश्िा आदि की छूट। विशेष रूप से वुफछ विकसित देशों द्वारा सहायता राश्िा के उपयोग के कारण वृफष्िा व्यापार में बहुत अिाक विवृफति आ गइर्। व्यवसाय अध्ययन ए.ओ.ए.वृफष्िा उत्पादों के व्यवस्िथत एवं संतोषजनक व्यापार की दिशा में एक महत्त्वपूणर् कदम है। विकसित देश वृफष्िा उत्पादों के आयात पर कस्टम कर एवं नियार्त पर सहायता राश्िा को कम करने पर सहमत हो गए हैं। विकासशील देश क्योंकि वृफष्िा पर अिाक निभर्र करते हैं। इसीलिए उन्हें बदले मंे इस प्रकार के प्रस्तावों से छूट दे दी गइर् है। सेवाओं के व्यापार पर साधारण समझौता ;जी.ए.टी.एस.द्ध सेवाओं से अभ्िाप्राय उन ियाओं एवं कायर् निष्पादन से है जो वास्तव में अमूतर् है तथा उन्हें वस्तुओं के समान न तो छुआ जा सकता है और नहीं स्पशर् किया जा सकता है। जी.ए.टी.एस.को यूरूग्वे दौर की एक ऐतिहासिक उपलब्िध माना गया है क्योंकि इसी के कारण वस्तुओं में व्यापार को शासित करने वाले नियम सेवाओं में व्यापार’ पर लागू होने लगे हैं। जी.ए.टी.टी 1994रू प्रमुख समझौते/करार ऽ कस्टम कर के लिए मूल्यांकन पर समझौता अथार्त के अंतनिर्यम टप्प् ;कस्टम कर योग्य मूल्यांकनद्ध ियान्वयन पर समझौता। ऽ लदान पूवर् निरीक्षण करार। ऽ व्यापार के तकनीकी अवरोध करार। ऽ आयात लाइसेंसिंग प्रिया करार। ऽ स्वच्छता एवं वनस्पति स्वच्छता उपायों के लागू करने पर समझौता। ऽ सुरक्षा उपायों पर समझौता। ऽ सहायता एवं सम करने के उपायांे पर समझौता ऽ उद्गम से संबंिात नियमों पर समझौता। अंतरार्ष्ट्रीय व्यवसाय 2 जी.ए.टी.एस.के तीन प्रमुख प्रावधानः जो बौिक संपिा अिाकार के व्यापार पक्षों सेवाओं में व्यापार को शासित करते हैं नीचे दिए पर समझौता ;टी.आर.आइर्.पी.एस.द्धः हैं। सभी सदस्य देशों को सेवा व्यापार पर से टी.आर.आइर्.पी.एस.पर डब्ल्यू.टी.ओ.को प्रतिबंधों को धीरे - धीरे समाप्त करना होगा। लेकिन समझौता परक्रामण 1986 - 94 में किया गया। विकासशील देशों को यह निणर्य लेने में अिाक जी.ए.टी.टी.परक्रामण के यूरूग्वे दौर में बौिक स्वतंत्राता दी गइर् है, कि मुक्त करने के लिए संपिा अिाकारों से संबंिात नियमों पर प्रथम कितना समय लेंगे एवं उस समय तक वह बार चचार् की गइर् तथा इन्हें बहुआयामी व्यापार कौन - कौन से सेवाओं को प्रतिबंध मुक्त करेंगे। प्रणाली के एक भाग के रूप में लाया गया। सेवा व्यापार समझौता ;जी.ए.टी.एस.द्ध व्यवस्था बौिक संपदा का अथर् है वाण्िाज्ियक मूल्यों देता है कि सेवा व्यापार सवार्िाक अनुग्रह प्राप्त की सूचना जैसे विचार खोज, सृजनात्मक भाव राष्ट्र के कतर्व्य से शासित है जो राष्ट्रांे को एवं अन्य। यह समझौता संरक्षण के न्यूनतम विदेशी आपूतिर्कतार्ओं एवं सेवाओं में पक्षपात मानकों को निधार्रित करता है जिन्हें समझौते करने से रोकता है। के पक्ष सात बौिक संपिायों के संदभर् में प्रत्येक सदस्य देश सेवा संबंिात नियम एवं अपनाएंगें। ये संपिायाँ हैं काॅपी राइट/अिाकार कानूनों, जिनमें वे व्यापार एवं सेवाओं से जुडे़ एवं अन्य संबिात अिाकार, ट्रेड माकर्, भौगोलिक अंतरार्ष्ट्रीय समझौते सम्िमलित हैं जिन पर सदस्य निदेर्श, औद्योगिक डिजाइन पेटेंटस, एकीवृफत देश ने हस्ताक्षर किए हैं, को तुरंत प्रकाश्िात सरकट्/परिभ्रमण खाके का डिजाइन, एवं गुप्त करेगा। सूचना ;व्यापार रहस्यद्ध। मुख्य शब्दावली सुचनाथर् बीजक बीजक आदेश अथवा इंडेंट विनिमय विपत्रा नियार्त अनुज्ञप्ित/लाइसेंस दशर् विपत्रा आइर्.इर्.सी. नंबर मुद्दती विपत्रा पंजीकरण एवं सदस्यता प्रमाण पत्रा समुद्री बीमा पालिसी माल पे्रषण से पूवर् वित्त चिटवाहन गेटपास माल प्रेषण से पूवर् निरीक्षण बैंक का भुगतान संबंध्ित प्रमाण पत्रा नियार्त निरीक्षक एजेंसी निरीक्षण पूछताछ उत्पाद शुल्क की निकासी माल प्रेषण सूचना पत्रा उद्गम प्रमाण पत्रा व्यापारिक पूछताछ कस्टम निकासी आयातित माल की सामान्य सूची साख पत्रा सुपुदर्गी आदेश पत्रा जहाजी बिल प्रवेश बिल मेट्स/कप्तान की रसीद शुल्क वापसी योजना जहाजी बिल्टी बाँड योजना के अंतगर्त नियार्त हेतु विनिमार्ण वायुमागर् विपत्रा अगि्रम लाइसेंस योजना सामग्री बोडर् नियार्त संवध्र्न पूँजीगत वस्तुएँ योजना नियार्त निरीक्षण परिषद माल लदान पश्चात् वित्त भारतीय पैकेजिंग संस्थान नियार्त प्रवतर्न क्षेत्रा राज्य व्यापार संगठन 100 प्रतिशत नियार्त परक इकाइर्याँ विश्व बैंक नियार्त प्रोन्नति परिषद सारांश बाह्य देशों को वस्तुओं का नियार्त अपने देश में उनके विक्रय से कापफी भ्िान्न है। विदेशी गंतव्य स्थान से माल को वास्तव में लदान करने अथवा बाह्य देशों के आपूतिर्कतार्ओं से आयात करने से पहले जिन प्रिया संबंिात औपचारिकताओं को पूरा करना है उनसे परिचित होना आवश्यक है। आयात नियार्त प्रियाः आंतरिक एवं बाह्य व्यवसाय परिचालन में प्रमुख अंतर की जटिलता है। वस्तुओं का आयात एवं नियार्त उतना सीधा एवं सरल नहीं है जितना कि घरेलू बाजार में क्रय एवं विक्रय, क्योंकि विदेशी व्यापार में माल देश की सीमा के पार भेजा जाता है तथा इसमें विदेशी मुद्रा का प्रयोग किया जाता है। नियार्त प्रियाः नियार्त लेन - देन के अलग - अलग होते हैं। एक प्रति रूपक नियार्त लेन - देन के निम्नलिख्िात चरण होते हैंः ;कद्ध पूछताछ प्राप्त करना एवं निखर् भेजना ;खद्ध आदेश अथवा इंडैंट की प्राप्ित ;गद्ध आयातक की साख का आंकलन एवं भुगतान की गारंटी प्राप्त करना ;घद्ध नियार्त लाइसेंस प्राप्त करना ;घद्ध माल प्रेषण से पूवर् वित्त करना ;चद्धवस्तुओं का उत्पादन एवं अिाप्राप्ित ;छद्ध जहाज लदान निरीक्षण ;जद्ध उत्पाद शुल्क की निकासी ;झद्ध उद्गम प्रमाणपत्रा प्राप्त करना ;णद्ध जहाज में स्थान का आरक्षण ;टद्ध पैकिंग एवं माल को भेजना ;ठद्ध वस्तुओं का बीमा ;डद्ध कस्टम निकासी ;ढद्ध जहाज के कप्तान की रसीद ;मेट्स रिसीप्टद्ध प्राप्त करना ;नद्ध भाड़े का भुगतान एवं जहाजी बिल्टी का बीमा ;तद्ध बीजक बनाना ;थद्ध भुगतान प्राप्त करना। आयात प्रियाः ;कद्ध व्यापारिक पूछताछ ;खद्ध आयात लाइसेंस प्राप्त करना ;गद्ध विदेशी मुद्रा का प्रबंध करना ;घद्ध आदेश अथवा इंडैंट भेजना ;घद्ध साख पत्रा प्राप्त अंतरार्ष्ट्रीय व्यवसाय 2 करना ;चद्ध वित्त की व्यवस्था करना ;छद्ध जहाज से माल भेज दिए जाने की सूचना की प्राप्ित ;जद्ध आयात प्रलेखों को छुड़ाना ;झद्ध माल का आगमन ;णद्ध सीमा शुल्क निकासी एवं माल को छुड़ाना विदेशी व्यापार प्रोन्नति प्रोत्साहन एवं संगठनात्मक समथर्नः आगे के अनुभागों में प्रमुख विदेशी व्यापार प्रोन्नति योजनाओं एवं संगठनों पर चचार् की गइर् है। विदेशी व्यापार प्रोन्नति वििायाँ एवं योजनाएंः ;कद्ध शुल्क वापसी योजना ;खद्ध बांड योजना के अंतर्गत नियार्त हेतु विनिमार्ण ;गद्ध विक्रय कर के भुगतान से छूट ;घद्ध अगि्रम लाइसेंस योजना ;घद्ध नियार्त संवधर्न पँूजीगत वस्तुएँ योजना ;चद्ध नियार्त पफमोर्ं को नियार्त गृह एवं सुपर स्टार व्यापार गृहों के रूप में मान्यता देने की योजना ;छद्ध नियार्त सेवाएँ ;जद्धनियार्त वित्त ;झद्ध नियार्त प्रवतर्न क्षेत्रा ;णद्ध 100 प्रतिशत नियार्त परक इकाइयाँ ;100 प्रतिशत इर्.ओ.यूसद्ध संगठन समथर्नः ;कद्ध वाण्िाज्य विभाग ;खद्ध नियार्त प्रोन्नति परिषद् ;इर्.पी.सीद्ध ;गद्धसामग्री बोडर् ;घद्ध नियार्त निरीक्षण परिषद ;इर्.आइर्.सीद्ध ;घद्ध भारतीय व्यापार प्रोन्नति संगठन ;आइर्.टी.पी.ओद्ध ;चद्ध भारतीय विदेशी व्यापार संस्थान ;छद्ध भारतीय पैकेजिंग संस्थान ;आइर्.आइर्.पीद्ध ;जद्ध राज्य व्यापार संगठन ;एस.टी.सीद्ध अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार संस्थान एवं व्यापार समझौतेः प्रथम दो संस्थान अथार्त आइर्.बीआर.डी. एवं आइर्.एम.एपफ. तुरंत अस्ितत्व में आ गए लेकिन डब्ल्यू.आर.ओ. इस व्यवस्था को जनरल एगरीमेंट पफार टेरिपफ एंड टेªड का नाम दिया गया। संस्थाओं के प्रमुख उद्देश्य एवं कायोर्ं की विस्तार से विवेचना आगे के अनुभागों में की गइर् है। विश्व बैंकः पुनः निमार्ण एवं विकास का अंतरार्ष्ट्रीय बैंक ;आइ.बी.आर.डीद्ध जिसे विश्व बैंक भी कहते हैं। बे्रटन वूड कांप्रफैंस का एक स्वप्न था। इस अंतरार्ष्ट्रीय संगठन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य यु( से प्रभावित यूरोप के देशों की अथर्व्यवस्था पुनः निमार्ण एवं विश्व के अविकसित देशों को विकास के कायर् में सहायता प्रदान करना था। बहुराष्ट्रीय निवेश गारंटी एजेंसी अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा कोष ;आइर्.एम.एपफ.द्ध विश्व व्यापार संगठन ;डब्ल्यू.टी.ओ.द्ध एवं प्रमुख समझौते जी.ए.टी.टी.के समझौते बौिक संपिा अिाकार के व्यापार पक्षों पर समझौता ;टी.आर.आइर्.पी.एस.द्ध अभ्यास बहु विकल्प प्रश्न 1.नियार्त लाइसेंस प्राप्त करने के लिए निम्नलिख्िात में से कौन से प्रलेखों की आवश्यकता नहीं होती। ;कद्ध आइर्.इर्.सी. नंबर ;खद्ध साख पत्रा ;गद्ध पंजीयन संग सदस्यता प्रमाण पत्रा ;घद्ध बैंक खाता संख्या 2.आयात लेने - देनों में निम्नलिख्िात में से किस प्रलेख की आवश्यकता नहीं होती? ;कद्ध जहाजी बिल्टी ;खद्ध जहाजी बिल ;गद्ध उद्गम स्थान संबंिात प्रमाण पत्रा ;घद्ध लदान संबंधी सूचना 3.निम्न में से कौन सा शुल्क वापसी योजना का अंग नहीं है? ;कद्ध उत्पादन शुल्क की वापसी ;खद्ध सीमा शुल्क की वापसी ;गद्ध नियार्त कर की वापसी ;घद्ध लदान बंदरगाह पर बंदरगाही 4.निम्न में से कौन सा प्रलेख कस्टम संबंिात औपचारिकताओं का भाग नहीं है? ;कद्ध जहाजी बिल ;खद्ध नियार्त लाइसेंस ;गद्ध बीमा पत्रा ;घद्ध सूचनाथर् बीजक 5.निम्न में से कौन सा नियार्त संबंिात प्रलेखों में सम्िमलित नहीं है? ;कद्ध वाण्िाज्ियक बीजक ;खद्ध उद्गम स्थान प्रमाण पत्रा ;गद्ध प्रवेश बिल ;घद्ध करिंदे की रसीद 6. जब माल का जहाज पर लदान करा दिया जाता है तो जहाज के कप्तान द्वारा जारी रसीद को कहते हैं - ;कद्ध जहाजरानी रसीद ;खद्ध कारिंदे की रसीद ;गद्ध नौभार माल रसीद ;घद्ध जहाज के किराए की रसीद 7. निम्न में से कौन सा प्रलेख नियार्तक द्वारा बनाया जाता है जिसमें जहाज से माल भेजने से संबंिात विवरण होता है जैसे भेजने वाले का नाम, पैकेजों की संख्या, जहाजी बिल, गंतव्य बंदरगाह, जहाज का नाम आदिः ;कद्ध जहाजी बिल ;खद्ध पैकेजिंग सूची ;गद्ध कारिंदे की रसीद ;घद्ध विनिमय पत्रा 8. प्रलेख जिसमें बैंक द्वारा उस पर नियार्तक द्वारा लिखे बिल के भुगतान की गारंटी दी होती है। वह है - ;कद्ध बंधक पत्रा ;खद्ध साख पत्रा ;गद्ध जहाजी बिल्टी ;गद्ध विनिमय पत्रा अंतरार्ष्ट्रीय व्यवसाय 2 9.निम्न से कौन सा विश्व बैंक समूह का सदस्य नहीं है? ;कद्ध पुननिर्मार्ण एवं विकास का अंतरार्ष्ट्रीय बैंक ;खद्ध बहुआयामी निवेश गारंटी एजेंसी। ;गद्ध अंतरार्ष्ट्रीय विकास संघ। ;घद्ध अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा कोष 10.टी.आर.आइर्.पी. विश्व व्यापार समझौते में से एक है जो संबंिात हैः ;कद्ध वृफष्िा व्यापार ;खद्ध सेवा व्यापार ;गद्ध व्यापार संबंिात निवेश उपाय ;घद्ध इनमें से कोइर् नहीं लघु उत्तरीय प्रश्नः 1.नियार्त लाइसेंस लेने के लिए औपचारिकताओं की विवेचना कीजिए। 2.नियार्त प्रोन्नति परिषद् में पंजीयन कराना क्यों आवश्यक है? 3.आयात - नियार्त कोड नंबर क्या होता है? 4.लदान - पूवर् वित्त क्या है? 5.एक नियार्त पफमर् के लिए लदान - पूवर् निरीक्षण कराना क्यों आवश्यक है? 6.माल को उत्पादन शुल्क विभाग से अनुमति के लिए प्रिया की संक्षेप में विवेचना कीजिए। 7.नियार्त की वस्तुओं को कस्टम से निकासी की प्रिया को संक्षेप में समझाइए। 8.जहाजी बिल्टी क्या है? यह प्रवेश बिल से किस प्रकार भ्िान्न है? 9.जहाजी बिल क्या है? 10.जहाजी कारिंदे की रसीद के अथर् को समझाइए। 11.साख पत्रा क्या है? नियार्तक को इस प्रलेख की क्या आवश्यकता है? 12.नियार्त का भुगतान प्राप्त करने की प्रिया की विवेचना कीजिए। 13.निम्न में अंतभेर्द कीजिएः ;कद्ध दशर् विपत्रा एवं मुद्दती विपत्रा ;खद्ध जहाजी बिल्टी एवं वायु मागर् बिल ;गद्ध लदान पूवर् एवं लदान के पश्चात वित्त 14.आयात के संबंध में प्रयुक्त निम्न प्रलेखों को समझाइए। ;कद्ध व्यापार संबंधी पूछ - ताछ ;खद्ध आयात लाइसेंस ;गद्ध माल भेजने की सूचना ;घद्ध आयातित माल की सूची। 15.विश्व बैंक से संबं( प्रमुख संगठनो के नाम बताइए। 16.निम्न पर संक्षेप में टिप्पणी लिखेंः ;कद्ध संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास परिषद् ;खद्ध बहुआयामी निवेश गारंटी एजेंसी। ;गद्ध विश्व बैंक। ;घद्ध भारतीय व्यापार प्रवतर्न संगठन ;घद्ध अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा कोष। दीघर् उत्तरीय प्रश्न 1.रेखा गारमैंट्स को आस्ट्रेलिया में स्िथत स्िवफ्रट इम्पोटर््स लि. को 2000 पुरुष पैंट के नियार्त का आदेश प्राप्त हुआ है। इस नियार्त आदेश को ियान्िवत करने में रेखा गारमेंट्स को किस प्रिया से गुजरना होगा? विवेचना कीजिए। 2.आपकी पफमर् कनाडा से कपड़ा मशीनरी के आयात की योजना बना रही है। आयात प्रिया का वणर्न कीजिए। 3.नियार्त में प्रयुक्त प्रधान प्रलेखों की विवेचना कीजिए। 4.देश के नियार्त की प्रोन्नति के लिए सरकार द्वारा तैयार विभ्िान्न प्रेरक एवं योजनाओं को सूचीब( कीजिए एवं समझाइए। 5.देश के विदेशी व्यापार को बढावा देने के लिए सरकार ने जिन संगठनों की स्थापना की है। उनके नाम दीजिए। 6.विश्व बैंक क्या है? इसके विभ्िान्न उद्देश्यों को एवं इससे संब( एजेंसियों की भुमिका की विवेचना कीजिए। 7.अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा कोष क्या है? इसके विभ्िान्न उद्देश्यों एवं कायो± की विवेचना कीजिए। 8.विश्व व्यापार संगठन की विशेषताओं ढाँचा उद्देश्य एवं कायर् संचालन पर विस्तृत टिप्पणी लिख्िाए।

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