अध्याय 10 आंतरिक व्यापार अध्िगम उद्देश्य इस अध्याय के अध्ययन के पश्चात आपः ऽ आंतरिक व्यापार का अथर् एवं इसके प्रकारों का वणर्न कर सवेंफगेऋ ऽ थोक विवे्रफता की विनिमार्ताओं एवं पुफटकर विवे्रफताओं के प्रति सेवाओं को बता सवेंफगेऋ ऽ पुफटकर व्यापारियों की सेवाओं की व्याख्या कर सवेंफगेऋ ऽ पुफटकर व्यापारियों के प्रकारों का वगीर्करण कर सवेंफगेऋ ऽ छोटे पैमाने एवं बड़े पैमाने के पुफटकर विवे्रफताओं के विभ्िान्न प्रकारों का वणर्न सवेंफगेऋ ऽ आंतरिक व्यापार को बढ़ावा देने में वाण्िाज्ियक एवं उद्योग संघों की भूमिका का उल्लेख कर सवेंफगेऋ क्या आपने कभी सोचा है कि यदि बाजार न होते तो विभ्िान्न उत्पादकों के उत्पाद हम तक किस प्रकार पहँुच पाते? हम सभी सामान्य प्रोविजन स्टोर ;पंसारी की दुकानद्ध से तो परिचित हैं ही जो हमेशा हमारी दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुएँ बेचता है। परंतु क्या यह कापफी है? जब हमें विश्िाष्ट प्रवृफति की चीजें खरीदने की आवश्यकता होती है, तब हम किसी बड़े बाजार अथवा दुकान की ओर रूख करते हैं जहाँ वस्तुओं की विविध्ता उपलब्ध् होती है। हमारा पे्रक्षण हमें यह बताता है कि विभ्िान्न चीजो अथवा विश्िाष्ट वस्तुओं को बेचने वाली अलग तरह की दुकानंे होती है और यह हमारी जरूरत पर निभर्र करता है कि हम एक निश्चत दुकान अथवा बाजार से खरीददारी करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में हम ध्यान दे सकते हैं कि लोग अपना सामान गलियों में बेचते हैं, यह सामान सब्जी से लेकर कपड़े तक हो सकता है। यह उस दृश्य के बिल्वुफल विपरित है जो हम शहरी क्षेत्रा में देखते हैं। हमारे देश में सभी प्रकार के बाजार सदभावनापूणर् रूप से विद्यमान हैं। आयातित वस्तुओं एवं बहुराष्ट्रीय वंफपनियों ;निगमोंद्ध के प्रादभार्व से हमारे यहाँ इन उत्पादों को बेचने वाली दुकानें भी हैं। बड़े कस्बों एवं शहरों में, अनेक ऐसी पुफटकर दुकानें हैं जो सिपर्फ एक विश्िाष्ट ब्रांड के उत्पाद ही बेचती हैं। इन सबका एक दूसरा पहलू यह है कि वैफसे यह उत्पाद, उत्पादकों से दुकानों तक पहुँचते हैं? इस कायर् को करने वाले वुफछ बिचैलिए तो अवश्य होंगे। क्या वास्तव में वह उपयोगी हैं अथवा उनके कारण कीमतों में वृि होती है? 10.1 परिचय व्यापार से अभ्िाप्राय लाभ अजर्न के उद्देश्य से वस्तु एवं सेवाओं के क्रय एवं विक्रय से है। मनुष्य सभ्यता के प्रारंभ्िाक दिनों से किसी न किसी प्रकार के व्यापार में संलग्न रहा है। आधुनिक समय में व्यापार का महत्व और बढ़ गया है क्योंकि प्रतिदिन नये से नये उत्पाद विकसित किये जा रहे हैं तथा उन्हें पूरी दुनिया में लोगों को उनके उपभोग/उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है। कोइर् भी व्यक्ित अथवा देश अपनी आवश्यकता की वस्तु एवं सेवाओं के पयार्प्त मात्रा में उत्पादन में आत्मनिभर्रता का दावा नहीं कर सकता। अतः प्रत्येक व्यक्ित उस वस्तु का उत्पादन करता है जिसका उत्पादन वह सवोर्त्तम ढंग से कर सकता है तथा अतिरिक्त उत्पादन को वह दूसरों से विनिमय कर लेता है। व्रेफता एवं विवे्रफताओं की भौगोलिक स्िथति के आधार पर व्यापार को दो वगोर्ं में विभक्त किया जा सकता है। ;कद्ध आंतरिक व्यापार तथा ;खद्ध बाह्य व्यापार। एक देश की सीमाओं के अंदर किया हुआ व्यापार आंतरिक व्यापार कहलाता है। दूसरी ओर दो या अिाक देशों के बीच किया हुआ व्यापार बाह्य व्यापार कहलाता है। इस अध्याय में आंतरिक व्यापार का अथर् एवं प्रकृति विस्तारपूवर्क वणर्न किया गया है एवं इसके विभ्िान्न प्रकारों तथा वाण्िाज्ियक संघ की इसके प्रवतर्न में भूमिका को समझाया गया है। 10.2 आंतरिक व्यापार जब वस्तुओं एवं सेवाओं का क्रय - विक्रय एक ही देश की सीमाओं के अंदर किया जाता है तो इसे आंतरिक व्यापार कहते हैं। चाहे वस्तुआंे का क्रय एक क्षेत्रा में पास ही की दुकान से है अथवा वेंफद्रीय बाजार से या पिफर विभागीय भंडार, माल से, या पफेरी लगाकर माल का विक्रय करने वाले विवे्रफता से, प्रदशर्नी आदि से किया है। यह सभी आंतरिक व्यापार के उदाहरण हैं, क्योंकि इनमें माल का क्रय देश के भीतर व्यक्ित अथवा संस्थान से किया है। इस प्रकार के व्यापार में कोइर् सीमा शुल्क अथवा आयात कर नहीं लगाया जाता क्योंकि वस्तुएँ घरेलू उत्पादन का भाग हैं तथा घरेलू उपयोग के लिए होती है। साधारणतया भुगतान देश की सरकारी मुद्रा में अथवा अन्य किसी मान्य मुद्रा मंे किया जाता है। आंतरिक व्यापार को दो भागोें में बाँटा जा सकता है। ;कद्ध थोक व्यापार एवं ;खद्ध पुफटकर व्यापार। साधारणतया जब उत्पाद ऐसे हों कि उनका वितरण दूरदराज क्षेत्रों में पफैले। बड़ी संख्या में वे्रफताओं को करना होता है तो उत्पादकों के लिए उपभोक्ता अथवा उपयोगकतार्ओं तक सीधे पहुँचना बहुत कठिन हो जाता है। उदाहरण के लिए यदि वनस्पति तेल अथवा नहाने का साबुन अथवा नमक का देश के एक भाग में उत्पादन करने वाला उत्पादनकतार् यदि पूरे देश में पफैले लाखों उपभोक्ताओं तक पहँुचाना चाहता है तो उसके लिए थोक व्यापारी एवं पुफटकर व्यापारियों की सहायता महत्त्वपूणर् हो जाती है। पुनः विक्रय अथवा पुनः उत्पादन के लिए बड़ी मात्रा में वस्तुओं एवं सेवाओं का क्रय - विक्रय थोक व्यापार कहलाता है। दूसरी ओर जब क्रय - विक्रय कम मात्रा में हो, जो साधारणतया उपभोक्ताओं को किया गया व्यवसाय अध्ययन हो तो इसे पुफटकर व्यापार कहते हैं जो व्यापारी थोक व्यापार करते हैं उन्हें थोक व्यापारी तथा जो पुफटकर व्यापार करते हैं उन्हें पुफटकर व्यापारी कहते हैं। पुफटकर विवे्रफता एवं थोक विवे्रफता दोनों ही महत्त्वपूणर् विपणन मध्यस्थ होते हैं जो उत्पादक एवं उपयोगकतार् अथार्त अंतिम उपभोगकतार् के बीच वस्तु एवं सेवाओं के विनिमय का महत्त्वपूणर् कायर् करते हैं। आंतरिक व्यापार का लक्ष्य देश के अंदर वस्तुओं के समान, मात्रा में शीघ्र एवं कम लागत पर वितरण से है। 10.3 थोक व्यापार जैसे कि पिछले अनुभाग में चचार् की जा चुकी है विक्रय अथवा पुनः थोक व्यापार से अभ्िाप्राय पुनः उत्पादन के उपयोग के लिए वस्तु एवं सेवाओं के बड़ी मात्रा में क्रय - विक्रय से है। थोक विक्रय उन व्यक्ितयों अथवा संस्थानों की ियाएँ हैं जो पुफटकर विवे्रफताओं एवं अन्य व्यापारियों अथवा औद्योगिक संस्थागत एवं वाण्िाज्ियक उपयोगकतार्ओं को विक्रय करते हैं। लेकिन यह अंतिम उपभोक्ताओं को अिाक विक्रय नहीं करते। थोक विवे्रफता विनिमार्ता एवं पुफटकर विवे्रफताओं के बीच की महत्त्वपूणर् कड़ी होते हैं। यह न केवल उत्पादकों के लिए बड़ी संख्या में बिखरे हुए उपभोक्ताओं तक पहंुचने में ;पुफटकर विवे्रफताओं के माध्यम सेद्ध संभव बनाते हैं बल्िक वस्तुओं एवं सेवाओं की वितरण प्रिया के कइर् अन्य कायर् भी करते हैं। यह साधारणतया माल के स्वामी होते हैं तथा वस्तुओं को अपने नाम से खरीदते बेचते हैं एवं व्यवसाय की जोख्िाम को वहन करते हैं। ये बड़ी मात्रा में क्रय कर पुफटकर विवे्रफताओं एवं उत्पादन के लिए उपयोगकतार्ओं को छोटी मात्रा में बेचते हैं। यह उत्पादों का श्रेणी करना, उनकी दो छोटे - छोटे भागों में पैकिंग करना, उनका संग्रहण, परिवहन, प्रवतर्न, बाजार के संबंध में सूचना एकत्रिात करना, बिखरे हुए पुफटकर विवे्रफताओं से छोटी मात्रा में आदेश लेना तथा उन्हें वस्तुओं की सुपूदर्गी देना जैसे अन्य कायर् करते हैं। यह पुफटकर विवे्रफताओं को बड़ी मात्रा में संग्रहण के दायित्व से मुक्ित दिलाते हैं तथा उन्हें उधार की सुविधा भी प्रदान करते हैं। थोक विवे्रफताओं के अिाकांश कायर् इस प्रकार के हैं कि थोक विवे्रफताओं को समाप्त नहीं किया जा सकता। यदि थोक विवे्रफता नहीं होंगे तो इनके कायोर्ं को या तो विनिमार्ता करेंगें या पिफर पुफटकर विवे्रफता। थोक विव्रेफताओं की सेवाएँं थोक विवे्रफता विनिमार्ताओं एवं पुफटकर विव्रेफताओं को वस्तुओं एवं सेवाओं के वितरण में भारी सहायता करते हैं। यह वस्तुएँ उस स्थान पर और उस समय पर जब उनकी आवश्यकता है उपलब्ध कराते हैं। इस प्रकार से यह समय उपयोगिता एवं स्थान उपयोगिता दोनों को सृजन करते हैं। थोक विवे्रफताओं की विभ्िान्न वगोर्ं के लिए सेवाओं को नीचे दिया गया हैः 10.3.1 विनिमार्ताओं के प्रति सेवाएँं वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादकों के प्रति थोक विवे्रफताओं की प्रमुख सेवाएँं नीचे दी गइर् हैं। 247 ;कद्ध बडे़ पैमाने पर उत्पादन में सहायकः थोक विवे्रफता बड़ी संख्या में पुफटकर विवे्रफताओं से थोड़ी मात्रा में आदेश लेते हैं। इन्हे इकट्टòा कर विनिमार्ताओं को हस्तांतरित कर देते हैं तथा बड़ी मात्रा में क्रय करते हैं। इससे उत्पादक उत्पादन बड़े पैमाने पर करते हैं तथा उन्हें बड़े पैमाने के लाभ प्राप्त होते हैं। ;खद्ध जोख्िाम उठानाः थोक विवे्रफता वस्तुओं का क्रय विक्रय अपने नाम से करते हैं, बड़ी मात्रा में माल का क्रय कर उन्हें अपने भंडार गृहों में रखते हैं। इस प्रिया में वह मूल्य कम होने की जोख्िाम, चोरी, छीजन, खराब हो जाना आदि की जोख्िाम को उठाते हैं। इस सीमा तक वह विनिमार्ताओं को इन जोख्िामों से छुटकारा दिलाते हैं। ;गद्ध वित्तीय सहायताः वह निमार्ताओं से माल का नकद क्रय करते हैं इस प्रकार से वह उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं। विनिमार्ताओं को स्टाॅक में अपनी पूँजी पफंसाने की आवश्यकता नहीं होती है। कभी - कभी तो वह बड़ी मात्रा के लिए आदेश देते हैं तथा उन्हें वुफछ राश्िा अगि्रम भी दे देते हैं। ;घद्ध विशेषज्ञ सलाहः थोक विवे्रफता पुफटकर विवे्रफताओं से सीधे संपकर् में रहते हैं इसलिए वह निमार्ताओं को विभ्िान्न पहलुओं के संबंध में सलाह देते हैं। यह पक्ष है ग्राहकों की रूचि एवं पंसद, बाजार की स्िथति, प्रतियोगियों की गतिवििायों एवं उपभोक्ता की आवश्यकता के अनुसार वस्तुएँ। यह इन सबके संबंधों में एवं अन्य संबंिात मामलों के संबंध में बाजार की जानकारी के महत्त्वपुणर् स्रोत हैं। ;घद्ध विपणन में सहायकः थोक विवे्रफता बड़ी संख्या में पुफटकर विवे्रफताओं को माल का वितरण करते हैं जो आगे उन्हें बड़ी संख्या में बड़े भौगोलिक क्षेत्रा में पफैले उपभोक्ताओं को बेचते हैं। इस प्रकार से उत्पादकों को अनेकों विपणन कायो± से मुक्ित मिल जाती है तथा वह पूरा ध्यान उत्पादन में लगा सकते हैं। ;चद्धनिरंतरता में सहायकः थोक विवे्रफता जैसे ही माल का उत्पादन होता है उसे खरीद लेते हैं इस प्रकार से उत्पादन िया पूरे वषर् चलती रहती है। ;छद्धसंग्रहणः थोक विवे्रफता कारखानों में जैसे ही माल का उत्पादन होता है उसे खरीद लेते हैं तथा उन्हें अपने गोदामोें/भंडारगृहों में संग्रहित कर लेते हैं। इससे निमार्ताओं को तैयार माल को स्टोर करने की सुविधाएँ जुटाने की आवश्यकता नहीं होती। 10.3.2 पुफटकर विव्रेफताओं के प्रति सेवाएँं थोक विवे्रफताओं द्वारा पुफटकर विवे्रफताओं को प्रदान की जानेवाली सेवाएँं निम्नलिख्िात हैंः - ;कद्ध वस्तुओं को उपलब्ध करानाः पुफटकर विवे्रफताओं को विभ्िान्न प्रकार की वस्तुओं का पयार्प्त मात्रा में स्टाॅक रखना पड़ता है जिससे कि वह अपने ग्राहकों को विभ्िान्न प्रकार की वस्तुएँ प्रदान कर सवेंफ। थोक विवे्रफता पुफटकर विवे्रफताओं को विभ्िान्न उत्पादकों की वस्तुओं को तुरंत उपलब्ध कराते हैं। इससे पुफटकर विवे्रफताओं को अनेकांे उत्पादकों से वस्तुओं को एकत्रिात करने एवं बड़ी मात्रा में उनके संग्रहित करने की आवश्यकता नहीं होती। व्यवसाय अध्ययन ;खद्ध विपणन में सहायकः थोक विवे्रफता विपणन के विभ्िान्न कायोर्ं को करते हैं तथा पुफटकर विवे्रफताओं को सहायता प्रदान करते हैं। वह विज्ञापन कराते हैं तथा विक्रय संवधर्न के कायोर्ं को करते हैं जिससे कि ग्राहक माल को क्रय के लिए तैयार हों। इससे नये उत्पादों की मांग में भी वृि होती है तथा पुफटकर विवे्रफताओं को लाभ होता है। ;गद्ध साख प्रदान करनाः थोक विवे्रफता अपने नियमित ग्राहकों को साख की सुविधा देते हैं। इससे पुफटकर विवे्रफताओं को अपने व्यवसाय के लिए कम कायर्शील पूंजी की आवश्यकता होती है। ;घद्ध विश्िाष्ट ज्ञानः थोक विवे्रफता एक ही प्रकार की वस्तुओं के विशेषज्ञ होते हैं तथा बाजार की नब्ज को पहचानते हैं। अपने विश्िाष्ट ज्ञान का लाभ वह पुफटकर विवे्रफताओं को पहुँचाते हैं। वह पुफटकर विवे्रफताओं को नए उत्पादों उनकी उपयोगिता, गुणवत्ता, मूल्य आदि के संबंध में सूचनाएँ प्रदान करते हैं। वह दुकान की बाह्य सजावट, अलमारियों की व्यवस्था एवं वुफछ उत्पादों के प्रदशर्न के संबंध मंे सलाह भी देते हैं। ;घद्ध जोख्िाम में भागीदारीः थोक विवे्रफता बड़ी मात्रा में क्रय करते हैं एवं पुफटकर विवे्रफताओं को थोड़ी मात्रा में माल का विक्रय करते हैं। पुफटकर वे्रफता माल को थोड़ी मात्रा मेें क्रय कर व्यवसाय को चला लेते हैं। इससे उनको संग्रह की जोख्िाम, छीजन, प्रचलन से बाहर होने, मूल्यों में गिरावट, मांग में उतार - चढ़ाव जैसी जोख्िामें नहीं उठानी पड़ती अन्यथा थोक विव्रेफताओं के न होने पर उन्हें बड़ी मात्रा में माल का क्रय करना पड़ता तथा यह सभी जोख्िामें उठानी पड़ती। 10.4 पुफटकर व्यापार पुफटकर विवे्रफता वह व्यावसायिक इकाइर् होती है जो वस्तुओं एवं सेवाओं को सीधे अंतिम उपभोक्ताओं को बेचते हैं। यह थोक विवे्रफताओं से बड़ी मात्रा में माल का क्रय कर उन्हें अंतिम उपभोक्ताओं को थोड़ी - थोड़ी मात्रा में बेचते हैं। यह वस्तुओं के वितरण शृंखला की अंतिम कड़ी होते हैं, जहाँ से व्यापारी के हाथ से लेकर वस्तुओं को अंतिम उपभोक्ताओं अथवा उपयोगकतार्ओं को हस्तांतरित कर देते हैं। पुफटकर व्यापार इस प्रकार से व्यवसाय की वह कड़ी है जो अंतिम उपभोक्ताओं को उनके व्यक्ितगत उपयोग एवं गैर व्यावसायिक उपयोगों या विक्रय का कायर् करती है। माल को बेचने की कइर् वििा हो सकती हैं जैसे व्यक्ितगत रूप से टेलीपफोन पर या पिफर बिक्री मशीनों के माध्यम से। उत्पादों को अलग - अलग स्थानों पर बेचा जा सकता है जैसे स्टोर मंे, ग्राहक के घर जाकर या पिफर अन्य किसी स्थान पर वुफछ सावर्जनिक स्थान भी हैं जैसे रोडवेज की बसों में बाॅल प्वाइंट पैन या पिफर जादुइर् दवा या पिफर चुटवुफलांे की पुस्तक की बिक्री, घर - घर जाकर बेची जाती हैं प्रसाधन का सामान, कपड़े धोने का पाउडर या पिफर किसी छोटे किसान द्वारा सड़क के किनारे सब्जी की बिक्री, लेकिन यह सब अंतिम उपभोक्ता को बेची जाती हैं इसलिए यह भी पुफटकर व्यापार में सम्िमलित हैं। अतः हम कह सकते हैं कि 249 वस्तुओं का विक्रय वैफसे किया जाता है या पिफर कहाँ किया जाता है यह कोइर् अथर् नहीं रखता। यदि बिक्री सीधी उपभोक्ता को की गइर् है तो यह पुफटकर विक्रय कहलाएगा। एक पुफटकर विवे्रफता वस्तुओं एवं सेवाओं के वितरण के कइर् कायर् करता है। वह थोक विवे्रफताओं एवं अन्य लोगोें से विभ्िान्न वस्तुएँ खरीदता है, वस्तुओं का उचित रीति से भंडारण करता है, थोड़ी - थोड़ी मात्रा में माल बेचता है, व्यवसाय की जोख्िामों को उठाता है, वस्तुओं का श्रेणीकरण करता है, बाजार से सूचनाएँ एकत्रिात करता है, वे्रफताओं को उधार की सुविधा देता हैं, प्रदशर्न तथा विभ्िान्न योजनाओं में भाग लेकर या अन्य तरीका अपना कर वस्तुओं की बिक्री को बढ़ाता है। पुफटकर व्यापारियों की सेवाएँँ पुफटकर व्यापार वस्तुओं एवं सेवाओं के वितरण में उत्पादक एवं अंतिम उपभोक्ताओं के बीच की एक महत्त्वपूणर् कड़ी है। इस प्रिया में वह उपभोक्ताओं, थोक विवे्रफताओं एवं विनिमार्ताओं को उपयोगी सेवाएँं प्रदान करता है। पुफटकर व्यापारियों की वुफछ महत्त्वपूणर् सेवाओं का नीचे वणर्न किया गया हैः 10.4.1 उत्पादकों एवं थोक विवे्रफताओं की सेवाएँं पुफटकर व्यापारी उत्पादकों एवं थोक विवे्रफताओं को जो मूल्यवान सेवाएँं प्रदान करते हैं वह नीचे दी गइर् हैंः ;कद्ध वस्तुओं के वितरण में सहायकः एक पुफटकर व्यापारी की उत्पादकों एवं थोक विवे्रफताओं को सबसे महत्त्वपूणर् सेवा उनके उत्पादों के वितरण में सहायता करना है। वह अंतिम उपभोक्ताओं को जो बड़े भोगौलिक क्षेत्रा में पफैले हुए होते हैं, इन उत्पादों को उपलब्ध कराते हैं। ;खद्ध व्यक्ितगत विक्रयः अिाकांश उपभोक्ता वस्तुओं की बिक्री की प्रिया में वुफछ न वुफछ व्यक्ितगत प्रयत्न भी सम्िमलित होते हैं। व्यक्ितगत रूप से विक्रय का प्रयत्न कर वह उत्पादक को इस कायर् से मुक्ित दिलाते हैं तथा बिक्री को कायार्न्िवत करने में सहायक होते हैं। ;गद्ध बड़े पैमाने पर परिचालन में सहायकः पुफटकर व्यापारियों की सेवाओं के परिणामस्वरूप उत्पादक एवं थोक विवे्रफता उपभोक्ताओं को छोटी मात्रा में माल वफो बेचने की सिरददीर् से मुक्ित दिलाते हैं। इसके कारण वह बड़े पैमाने पर अपना कायर् कर सकते हैं तथा अन्य ियाओं पर ध्यान केंदि्रत करते हैं। ;घद्ध बाजार संबंिात सूचनाएँ एकत्रिात करनाः पुफटकर विवे्रफताओं का उपभोक्ताओं से सीधा एवं निरंतर संपकर् बना रहता है। वह ग्राहकों की रूचि, पसंद एवं रूझान के संबंध मंे बाजार की जानकारी एकत्रिात करते रहते हैं। यह सूचना किसी भी संगठनों की विपणन संबंधी निणर्य लेने में बहुत महत्त्वपूणर् मानी जाती है। ;घद्ध प्रवतर्न में सहायकः अपने उत्पादों की बिक्री को बढ़ाने के लिए उत्पादक एवं वितरक समय - समय पर विभ्िान्न प्रवतर्न कायर् करते हैं। उदाहरण के लिए वह विज्ञापन करते हैं, वूफपन, मुफ्रत उपहार, बिक्री प्रतियोगिता जैसे लघु अविा प्रलोभन देते हैं। पुफटकर विवे्रफता विभ्िान्न प्रकार से इन वििायों में भाग लेते हैं और इस प्रकार से उत्पादों की बिक्री बढ़ाने में सहायता प्रदान करते हैं। व्यवसाय अध्ययन 10.4.2 उपभोक्ताओं को सेवाएँँ उपभोक्ताओं की दृष्िट से पुफटकर व्यापारियों की वुफछ सेवाएँं निम्नलिख्िात हैंः ;कद्ध उत्पादों की नियमित उपलब्धताः पुफटकर व्यापारी की उपभोक्ता को सबसे बड़ी सेवा विभ्िान्न उत्पादकों के उत्पादों को नियमित रूप से उपलब्ध कराना है। इससे एक तो उपभोक्ता को अपनी रूचि की वस्तु के चयन का अवसर मिलता है दूसरे वह जब चाहे वस्तु का क्रय कर सकते हैं। ;खद्ध नये उत्पादों के संबंध में सूचनाः पुफटकर विवे्रफता प्रभावी रूप से वस्तुओें का प्रदशर्न करते हैं एवं बेचने में व्यक्ितगत रूप से प्रयत्न करते हैं। इस प्रकार से वह ग्राहकों को नये उत्पादों के आगमन एवं उनकी विश्िाष्टताओं के संबंध में सूचना प्रदान करते हैं। यह वस्तुओं के क्रय का निणर्य लेने की प्रिया का एक महत्त्वपूणर् तत्त्व होता है। ;गद्ध क्रय में सुविधाः पुफटकर विवे्रफता बड़ी मात्रा में माल का क्रय करते हैं तथा उन्हें ग्राहकों को उनकी आवश्यकतानुसार छोटी मात्रा में बेचते हैं। वह अिाकांश आवासीय क्षेत्रों के समीप होते हैं एवं देर तक दुकान खोले रखते हैं। इससे ग्राहकों के लिए अपनी आवश्यकता की वस्तुओं को खरीदना सुविधाजनक होता है। ;घद्ध चयन के पयार्प्त अवसरः पुफटकर विवे्रफता विभ्िान्न उत्पादकों के विभ्िान्न उत्पादों का संग्रह करके रखते हैं। इस प्रकार उपभोक्ताओं को चयन के पयार्प्त अवसर मिल जाते हैं। ;घद्ध बिक्री के बाद की सेवाएँँः पुफटकर विवे्रफता घर पर सुपुदर्गी, अतिरिक्त पुजोर्ं की आपूतिर् एवं ग्राहकों की ओर ध्यान देना आदि विक्रय के पश्चात की सेवाएँँ प्रदान करते हैं। ग्राहक दोबारा माल खरीदने के लिए आए इसमें इस कारक की महत्त्वपूणर् भूमिका होती है। ;चद्ध उधार की सुविधाः पुफटकर विवे्रफता अपने नियमित ग्राहकों को उधार की सुविधा भी देते हैं। इससे उपभोक्ता अिाक खरीदारी करते हैं तथा उनका जीवन स्तर ऊँचा उठता है। 10.5 पुफटकर व्यापार के प्रकार भारत में कइर् प्रकार के पुफटकर विवे्रफता होते हैं। इनको भली - भांति समझने के लिए वुफछ वगोर्ं में विभक्त करना उपयुक्त रहेगा। विशेषज्ञांे ने पुफटकर व्यापारियों को विभ्िान्न प्रकारों में बांटने के लिए विभ्िान्न वगीर्करणों का सहारा लिया है। उदाहरण के लिए व्यावसायिक आकार के आधार पर यह बडे़ मध्यम एवं छोटे पुफटकर व्यापारी हो सकते हैं। स्वामित्व के अनुसार इनको एकंाकी व्यापारी, साझेदारी पफमर्, सहकारी स्टोर एवं कंपनी में बाँटा जा सकता है। इसी प्रकार से बिक्री की प(तियों के आधार पर यह विश्िाष्ट दुकानंे सुपर बाजार एवं विभागीय भंडारों मंे वगीर्कृत किया जा सकता है। वगीर्करण का एक और आधार है कि क्या उनको व्यापार का कोइर् निश्िचत स्थान है? इस आधार पर पुफटकर विवे्रफता दो प्रकार के हो सकते हैं। ;कद्ध भ्रमणशील पुफटकर विवे्रफता एवं ;खद्ध स्थायी दुकानदार इन दोनों प्रकारों के पुफटकर विवे्रफताओं का आगे के अनुभागों में वणर्न किया गया हैः 251 10.5.1 भ्रमणशील पुफटकर विव्रेफता ये वे पुफटकर व्यापारी होते हैं जो किसी स्थायी जगह से अपना व्यापार नहीं करते हैं। यह अपने सामान के साथ ग्राहकों की तलाश में गली - गली एवं एक स्थान से दूसरे स्थानों पर घुमते रहते हैं। विशेषताएँ ;कद्ध यह छोटे व्यापारी होते हैं जो सीमित साधनों से कायर् करते हैं। ;खद्ध यह सामान्यतः प्रतिदिन के उपयोग में आने वाली उपभोक्ता वस्तुओं, जैसे - प्रसाधन सामग्री, पफल, सब्िजयाँ आदि का व्यापार करते हैं। ;गद्ध ऐसे व्यापारी ग्राहकों को उनके घर पर वस्तुएँ उपलब्ध कराने की सुविधा पर अिाक ध्यान देते हैं। ;घद्ध इनका कोइर् व्यापारिक नियत स्थान नहीं होता है इसलिए यह माल का स्टाॅक घर में या पिफर किसी अन्य स्थान पर रखते हैं। भारत में साधारणतः भ्रमणशील पुफटकर विवे्रफता निम्न होते हैं ;कद्ध पफेरी वालेः पफेरी वाले किसी भी बाजार में सबसे पुराने पुफटकर विवे्रफता होते हैं जिनकी आज के समय में उतनी ही उपयोगिता है। जितनी आज से हजारों वषर् पूवर् थी। यह छोटे उत्पादक अथवा मामूली व्यापारी होते हैं जो वस्तुओं को साइर्कल, हाथ - ठेली, साइर्कल रिक्शा या अपने सिरपर रख कर तथा जगह - जगह घूम कर ग्राहक के दरवाजे पर जाकर माल का विक्रय करते हैं। यह साधरणतया गैर मानकीय एवं कम मूल्य की वस्तुएँ जैसे ख्िालौने, पफल - सब्िजयाँ, सिले - सिलाए कपड़े, गलीचे, खाने की वस्तुएँ एवं आइसक्रीम आदि बेचते हैं। यह आवासीय क्षेत्रों में, गलियों में प्रदशर्नियों एवं माॅल्स के बाहर तथा अधर्अवकाश में विद्यालयों के बाहर भी देखे जा सकते हैं। इस प्रकार के पुफटकर व्यापार का मुख्य लाभ उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक होना है। लेकिन इनसे लेन - देन करते समय चैकन्ना रहने की आवश्यकता है क्योंकि इनकी वस्तुओं की गुणवत्ता एवं मूल्य विश्वास के योग्य नहीं होती है। ;खद्ध साविाक बाजार व्यापारीः यह वह छोटे पुफटकर व्यापारी होते हैं जो विभ्िान्न स्थानों पर निश्िचत दिन अथवा तिथ्िा को दुकान लगाते हैं जैसे प्रति शनिवार या पिफर एक शनिवार छोड़कर दूसरे शनिवार को। यह एक ही प्रकार का माल बेचते हैं जैसे सिले - सिलाए कपड़े या पिफर तैयार वस्त्रा, ख्िालौने, व्रफॅाकरी का सामान या पिफर जनरल मचर्ेंट का व्यापार करते हैं। यह मुख्यतः कम आय वाले ग्राहकों के लिए माल रखते हैं तथा कम मूल्य की प्रतिदिन उपयोग में आने वाली वस्तुओं को बेचते हैं। ;गद्ध पटरी विवे्रफताः यह ऐसे छोटे विवे्रफता होते हैं जो ऐसे स्थानों पर पाए जाते हैं जहाँ लोगों का भारी आवागमन रहता है जैसे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड। यह साधारण रूप में उपयोग में आने वाली वस्तुओं को बेचते हैं जैसे कि स्टेशनरी का सामान, खाने - पीने की चीजें, तैयार वस्त्रा, समाचार पत्रा एवं मैगजीन। यह साविाक बाजार विवे्रफताओं व्यवसाय अध्ययन से इस रूप में भ्िान्न होते हैं कि वे अपने बिक्री के स्थान को आसानी से नहीं बदलते हैं। ;घद्ध सस्ते दर की दुकानः यह वह छोटे पुफटकर विवे्रफता होते हैं जिनकी किसी व्यावसायिक क्षेत्रा में स्वतंत्रा अस्थायी दुकान होती है। यह अपने व्यापार को एक क्षेत्रा से दूसरे क्षेत्रा में वहाँ की संभावनाओं को देखते हुए बदलते रहते हंै लेकिन यह पेफरी वाले या बाजार विवे्रफताओं के समान शीघ्रता से नहीं बदलते। यह उपभोक्ता वस्तुओं में व्यापार करते हैं एवं वस्तुओं को उस स्थान पर उपलब्ध कराते हैं जहाँ उसकी उपभोक्ता को आवश्यकता है। 10.5.2 स्थायी दुकानदार बाजार का यह सबसे सामान्य पुफटकर व्यापार है जैसा कि नाम से स्पष्ट है यह वह पुफटकर विवे्रफता हैं। विक्रय के लिए जिनके स्थायी रूप से संस्थान हैं। यह अपने ग्राहकों के लिए जगह - जगह नहीं घूमते। इन व्यापारियों की वुफछ और विशेषताएँ निम्नलिख्िात हैंः ;कद्ध भ्रमणशील व्यापारियों की तुलना में इनके पास अिाक संसाधन होते हैं तथा यह अपेक्षाकृत बड़े पैमाने पर कायर् करते हैं। स्थायी दुकानदार आकार के आधार पर अनेकों प्रकार के होते हैं। यह बहुत छोटे आकार से लेकर बहुत बडे़ आकार के भी होते हैं। ;खद्ध यह विभ्िान्न वस्तुओं का व्यापार करते हैं जो उपभोग योग्य टिकाउफ भी हो सकती हैं एवं गैर टिकाऊ भी। ;गद्ध ग्राहकों में इनकी अिाक साख होती है। यह ग्राहकों की वस्तुओं को घर पहुँचाना, गारंटी प्रदान करना, मरम्मत, उधार बिक्री, अतिरिक्त पूजेर् उपलब्ध कराना जैसी अनेकों सेवाएँँ प्रदान करते हैं। परिचालन आकार के आधार पर स्थायी दुकानदार मुख्यतः दो प्रकार के हो सकते हैंः ;कद्ध छोटे दुकानदार एवं ;खद्ध बडे़ पुफटकर विवे्रफता इन दो वगोर्ं के पुफटकर विवे्रफताओं के विभ्िान्न प्रकार के पुफटकर विवे्रफताओं का विस्तृत वणर्न नीचे किया गया है। छोटे स्थायी पुफटकर विवे्रफता ;कद्ध जनरल स्टोरः यह सामान्यतः स्थानीय बाजार एवं आवासीय क्षेत्रों में स्िथत होते हैं। जैसा कि इनके नाम से ही स्पष्ट है यह आस - पास के क्षेत्रों में रहने वाले उपभोक्ताओं के प्रतिदिन आवश्यकता वाली वस्तुओं की बिक्री करते हैं। यह स्टोर देर तक सुविधाजनक समय पर खुले रहते हैं तथा अपने नियमित ग्राहकों को उधार की सुविधा भी देते हैं। इन स्टोसर् का सबसे बड़ा लाभ इनसे ग्राहकों को सुविधा का होना है। उनके लिए अपने प्रतिदिन के प्रयोग में आने वाली वस्तुओं जैसे परचून की वस्तुएँ, पेय पदाथर्, प्रसाधन का सामान, स्टेशनरी एवं मिठाइयों का खरीदना सुविधाजनक रहता है और क्योंकि अिाकांश ग्राहक उसी क्षेत्रा के रहने वाले होते हैं। उनकी सपफलता में सबसे बड़ा योगदान दुकानदार की छवि तथा ग्राहकों के साथ उनके तालमेल का होना है। ;खद्ध विश्िाष्टीवृफत भंडारः इस प्रकार के पुफटकर स्टोर पिछले वुफछ समय से विशेष रूप से लोकपि्रय हो रहे हैं। विशेषतः शहरी क्षेत्रों में 253 यह विभ्िान्न प्रकार की वस्तुओं का विक्रय न कर एक ही प्रकार वस्तुओं की बिक्री करते हैं तथा यह विशेषज्ञ होते हैं। उदाहरण के लिए दुकानें जो केवल बच्चों के सिले - सिलाए वस्त्रा बेचती हैं या पिफर पुरूषों के वस्त्रा, महिलाओं के जूते, ख्िालौने एवं उपहार की वस्तुएँ, स्कूल यूनीपफामर्, कालेज की पुस्तकें या पिफर उपभोक्ता की इलैक्ट्रोनिक वस्तुएँ आदि की दुकानें। यह बाजार में पाइर् जाने वाली इस प्रकार की वुफछ दुकाने हैं। विशेष वस्तुओं की दुकानेंः साधारणतया ये वेंफद्रीय स्थल पर स्िथत होती हैं जहाँ पर बड़ी संख्या में ग्राहक आते हैं तथा यह ग्राहकों को वस्तुओं के चयन का भारी अवसर प्रदान करते हैं। ;गद्ध गली में स्टालः यह छोटे विवे्रफता गली के मुहाने पर या भीड़ - भाड़ वाले क्षेत्रों में होते हैं। यह घुमक्कड़ जनता को आकष्िार्त करते हैं तथा हौजरी की वस्तुएँ, ख्िालौने, सिगरेट, पेय पदाथर् आदि सस्ती वस्तुओं को बेचते हैं। यह स्थानीय आपूतिर्कत्तार् अथवा थोक विवे्रफता से माल खरीदते हैं क्योंकि इनकी पहुँच बहुत ही सीमित क्षेत्रा तक होती है। इसलिए यह बहुत ही छोटे पैमाने पर व्यापार करते हैं। ग्राहक को उसकी आवश्यकता की वस्तु सुगमतापूवर्क सुलभ कराना ही इनका मुख्य कायर् है। ;घद्ध पुरानी वस्तुओं की दुकानः यह दुकाने पुरानी वस्तुओं अथार्त पहले ही उपयोग की गइर् वस्तुओं की बिक्री करते हैं जैसे कि पुस्तकें, कपड़े, मोटर कारें, पफनीर्चर एवं अन्य घरेलू सामान। सामान्य आय वाले लोग ही इन्हें खरीदते हैं। यहाँ वस्तुएँ कम मूल्य पर प्राप्त होती हैं। यह दुकानदार ऐतिहासिक महत्त्व की दुलर्भ वस्तुएँ एवं पुरानी वस्तुएँ भी रखते हैं तथा उन लोगों को भारी मूल्य पर बेचते हैं जिनकी इन पुरानी वस्तुओं में रूचि होती है। पुरानी वस्तुओं का विक्रय करने वाली दुकानें गली के मुहाने पर या पिफर अिाक चहल पहल वाली गली में होती हैं। यह छोटे स्टाल होते हैं जिसमें एक मेज अथवा पफट्टे पर बिक्री की जाने वाली वस्तुएँ सजाइर् होती हैं। वुफछ का अच्छा संस्थागत ढांचा भी होता है जैसे पफनीर्चर विवे्रफता अथवा पुरानी कार, स्कूटर अथवा मोटरसाइकल के विवे्रफता। ;घद्ध एक वस्तु के भंडारः यह वह भंडार होते हैं जो एक ही श्रेणी की वस्तुओं का विक्रय करते हैं जैसे कि पहनने के तैयार वस्त्रा, घडि़याँ, जूते, कारें, टायर, वंफप्यूटर, पुस्तकें, स्टेशनरी आदि। यह भंडार एक ही श्रेणी की अनेकों प्रकार की वस्तुएँ रखते हैं तथा वेंफद्रीय स्थल पर स्िथत होते हैं। इनमें से अिाकांश स्वतंत्रा पुफटकर बिक्री संगठन होते हैं जो एकल स्वामित्व अथवा साझेदारी पफमर् के रूप में चलाए जाते हैं। स्थायी दुकानंे - बड़े पैमाने के भंडार गृहः 1. विभागीय भंडारः एक विभागीय भंडार एक बड़ी इकाइर् होती है जो विभ्िान्न प्रकार के उत्पादों की बिक्री करती हैं, जिन्हें भली - भांति निश्िचत विभागों में बाँटा गया होता है तथा जिनका उद्देश्य ग्राहक की लगभग प्रत्येक आवश्यकता की पूतिर् एक ही छत के नीचे करना है। अमेरिका में किसी विभागीय भंडार के लिए सुइर् से लेकर हवाइर् जहाज तक बेचना कोइर् असामान्य बात नहीं हैं। यह एक ही छत व्यवसाय अध्ययन के नीचे सभी प्रकार की वस्तुओं का क्रय है। सही अथो± में विभागीय भंडार की भावना पिन से लेकर विशालकाय वस्तु का एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है। भारत में सही अथर् वाले विभागीय भंडार अभी पुफटकर व्यापार में बड़े पैमाने पर नहीं आये हैं। हाँ भारत में इस श्रेणी में वुफछ भंडार हैं जैसे अकबरली तथा शीयाकरी भंडार मुम्बइर् में तथा स्पैंसंसर् चेन्नइर् में। एक विभागीय भंडार की वुफछ विशेषताएँ निम्नलिख्िात हैंः ;कद्ध आधुनिक विभागीय भंडार जलपान गृह, यात्रा एवं सूचना ब्यूरो, टेलीपफोन बूथ, विश्राम गृह आदि सभी प्रकार की सुविधाएँ प्रदान करती हैं। यह उच्च श्रेणी के ग्राहकों को अिाकतम सेवाएँँं प्रदान करने का प्रयत्न करते हैं जिनके लिए मूल्य द्वितीय महत्त्व की बात होती है। ;खद्ध यह भंडार साधारणतया शहर के वेंफद्र में स्िथत होते हैं जहाँ बड़ी संख्या में ग्राहक आते हैं। ;गद्ध यह भंडार बहुत बड़े होते हैं इसलिए यह संयुक्त पूँजी कंपनी के रूप में होते हैं तथा इनका प्रबंधन निदेशक मंडल करती है जिनकी सहायता जनरल मैनेजर एवं अन्य विभागीय प्रबंधक करते हैं। ;घद्ध विभागीय भंडार पुफटकर विवे्रफता भी होते हैं एवं भंडार गृृह भी माल यह सीधे उत्पादक से खरीदते हैं तथा इनके अपने अलग भंडार गृह होते हैं। इस प्रकार से यह उत्पादक एवं ग्राहकों के बीच के अनावश्यक मध्यस्थों को समाप्त करते हैं। ;घद्ध इनमें माल के क्रय की वेंफद्रीय व्यवस्था होती है। एक विभागीय भंडार में इसका क्रय विभाग ही पूरे माल का क्रय करता है जबकि विक्रय विभ्िान्न विभागों के माध्यम से किया जाता है। लाभ विभागीय भंडारों के माध्यम से पुफटकर व्यापार के प्रमुख लाभ निम्नलिख्िात हैंः ;कद्ध बड़ी संख्या में ग्राहकों को आकष्िार्त करता है। यह भंडार सामान्यतः वेंफद्रीय स्थलों पर स्िथत होते हैं इसलिए दिन में अिाकांश समय में बड़ी संख्या में ग्राहक आते रहते हैं। ;खद्ध क्रय करना सुगमः विभागीय भंडार एक ही छत के नीचे बड़ी संख्या में विभ्िान्न प्रकार की वस्तुओं की बिक्री की व्यवस्था करते हैं। इससे ग्राहकों को एक ही स्थान पर अपनी आवश्यकता की लगभग सभी वस्तुएँ खरीदने की सुविधा मिल जाती है। परिणामस्वरूप अपनी खरीददारी के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान पर भागना नहीं पड़ता। ;गद्ध आकषर्क सेवाएँँंः विभागीय भंडार का उद्देश्य ग्राहक को अिाकतम सेवाएँँं प्रदान करना है। इसकी वुफछ सेवाएँँं इस प्रकार हैः वस्तुओं की घर पर सुपुदर्गी, टेलीपफोन पर प्राप्त आदेश का ियान्वयन, विश्राम गृहों की व्यवस्था, टेलीपफोन बूथ, जलपानगृह, नाइर् की दुकान आदि। ;घद्ध बड़े पैमाने पर परिचालन के लाभः विभागीय भंडार बड़े स्तर पर संगठित किये जाते हैं इसलिए इन्हें बड़े पैमाने पर परिचालन के लाभ मिलते हैं विशेष रूप से वस्तुओं के क्रय के संबंध में। 255 ;घद्ध विक्रय में वृिः विभागीय भंडार कापफी धन विज्ञापन एवं अन्य संवधर्न ियाओं पर व्यय करने की स्िथति में होते हैं। उनकी बिक्री में वृि होती है। इस प्रकार के पुफटकर व्यापार की वुफछ अपनी सीमाएं हैं जिनका वणर्न नीचे किया गया हैः सीमाएँ ;कद्ध व्यक्ितगत ध्यान का अभावः बड़े पैमाने पर ियाओं के कारण विभागीय भंडार में ग्राहकों पर व्यक्ितगत रूप से ध्यान देना कठिन हो जाता है। ;खद्ध उच्च परिचालन लागतः विभागीय भंडार अतिरिक्त सेवाएँँं प्रदान करने पर अिाक जोर देते हैं इसलिए इनकी परिचालन लागत भी अिाक होती है। इन खचार्ें के कारण वस्तुओं का मूल्य भी अिाक होता है। यह मूल्य कम आय - वगर् के लोगों को आकष्िार्त नहीं करता है। ;गद्ध हानि की संभावना अिाकः परिचालन की ऊँची लागत एवं बड़े पैमाने पर कायर् करने के कारण एक विभागीय भंडार में हानि होने की संभावना अिाक होती है। उदाहरण के लिए माना कि ग्राहकों की रुचि/पफैशन में बड़ा परिवतर्न आ गया है तो यह आवश्यक हो जाता है कि स्टाॅक में एकत्रिात भारी मात्रा में पैफशन से बाहर हो गइर् वस्तुओं की बिक्री घटी दरों पर की जाए। ;घद्ध असुविधाजनक स्िथतिः विभागीय भंडार साधारणतः शहर के वेंफद्र में स्िथत होते हैं इसलिए यदि किसी वस्तु की तुरंत आवश्यकता हो तो यहां से खरीदना आसान नहीं होता। उपरोक्त सीमाओं के रहते हुए भी विभागीय भंडार विश्व के पश्िचमी देशों मंे एक वगर् विशेष को लाभ पहुँचाने के कारण बहुत अिाक लोकपि्रय हैं। 2. शृंखला भंडार अथवा बहुसंख्यक दुकानेंः शंृखला भंडार अथवा बहुसंख्यक दुकानें पुफटकर दुकानों का पैफला हुआ जाल है जिनका स्वामित्व एवं परिचालन उत्पादनकतार् या मध्यस्थ करते हैं। इस व्यवस्था में एक जैसी दिखाइर् देने वाली कइर् दुकानें देश के विभ्िान्न भागों में विभ्िान्न स्थानों पर खोली जाती हैं। इन दुकानों पर मानकीय एवं ब्रांड की वस्तुएँ जिन का विक्रय आवतर् तीव्र होता है बेची जाती हैं। इन दुकानों को एक ही संगठन चलाता है तथा इनकी व्यापार की व्यूह्रचना एक सी होती है तथा एक तरह की वस्तुओं का प्रदशर्न होता है। इस प्रकार की दुकानों की वुफछ महत्त्वपूणर् विशेषताएँ नीचे दी गइर् हंै। ;कद्ध यह दुकानें बड़ी जनसंख्या वाले क्षेत्रों में स्िथत होती हैं जहाँ कापफी संख्या में ग्राहक मिल जाते हैं। इनकी भावना ग्राहकों को उनके आवास अथवा कायर् स्थल के समीप सेवाएँँं प्रदान करना है न कि उनको एक वेंफदि्रत स्थान पर आमंत्रिात करना। ;खद्ध सभी पुफटकर इकाइर्यों के लिए उत्पादन अथवा क्रय करना मुख्यालय में वेंफदि्रत होता है जहाँ से इन्हें विभ्िान्न दुकानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार भेज दिया जाता है। इससे इन भंडारों के परिचालन व्यय में बचत हो जाती है। व्यवसाय अध्ययन ;गद्ध प्रत्येक दुकान का प्रबंधन एक शाखा प्रबंधक करता है जो दिन प्रतिदिन के कायोर्ं की देख - रेख करता है। वह बिक्री, नकद जमा एवं माल की आवश्यकता के संबंध में प्रतिदिन की सूचना मुख्यालय में भेजता है। ;घद्ध मुख्यालय ही सभी शाखाओं का नियंत्राण करता है तथा नीति निधार्रण कर उनका ियान्वयन कराता है। ;घद्ध इन दुकानों पर वस्तुओं का मूल्य एक ही होता है तथा सभी विक्रय नकद होता है। माल के विक्रय से प्राप्त राश्िा को प्रतिदिन स्थानीय बैंक में मुख्यालय को प्रेष्िात कर दिया जाता है। ;चद्ध प्रधान कायार्लय निरीक्षकों की नियुक्ित करता है जो दुकानों पर ग्राहकों को प्रदान की जा रही सेवाओं की गुणवत्ता, प्रधान कायार्लय की नीतियों का सम्मान आदि का निरीक्षण करते हैं। ;छद्ध शृंृखला भंडार ऐसी वस्तुओं के व्यापार का प्रभावी ढंग से संचालन करते हैं जिनकी बिक्री बड़ी मात्रा में एवं पूरे वषर् एक समान रहती है। भारत में बाटा के जूतांे की दुकान इसका एक लाक्षण्िाक उदाहरण है। इसी प्रकार की पुफटकर बिक्री की दुकानें अन्य उत्पादों के लिए भी खोली जा रही हैं। इसके वुफछ उदाहरण हैं डी.सी.एम. एवं रेमंड्स के शोरूम तथा नरूला, मैकडोनल्ड एवं पीजाकिंग की पफास्ट पूफड शंृखलाएँ हैं। बहुसंख्यक दुकानों से समाज के उपभोक्ताओं को अनेकों लाभ हैं जिनका वणर्न नीचे किया गया है। ;कद्ध बड़े पैमाने की मित्व्ययताः वंेफद्रीयवृफत क्रय/उत्पादन के कारण बहुसंख्यक दुकानों के संगठन को बडे़ पैमाने की मितव्ययता का लाभ मिलता है। ;खद्ध मध्यस्थ की समाप्ितः बहुसंख्यक दुकानंे शोधगृह को कोइर् माल बेचती हैं इसलिए वस्तु एवं सेवाओं के विक्रय में अनावश्यक मध्यस्थों को समाप्त कर देती हैं। ;गद्ध कोइर् अशोध्य )ण नहींः इन दुकानों पर क्योंकि माल का विक्रय नकद होता है इसलिए अशोध्य )णों के रूप में कोइर् हानि नहीं होती। ;घद्ध वस्तुओं का हस्तांतरणः यदि वस्तुओं की किसी एक स्थान पर मांग नहीं है तो उन्हें उस क्षेत्रा में भेज दिया जाता है जहाँ उनकी मांग है। इसके कारण इन दुकानों पर निष्िक्रय स्टाॅक की संभावना कम हो जाती है। ;घद्ध जोख्िाम का बिखरावः एक दुकान की हानि की पूतिर् दूसरी दुकानों के लाभ से हो जाती है जिससे संगठन की वुफल जोख्िाम कम हो जाती है। ;चद्धनिम्न लागतः क्रय का वेंफद्रीयकरण, मध्यस्थों की समाप्ित, वंेफद्रीय बिक्री संवधर्न एवं अिाक बिक्री के कारण बहुसंख्यक दुकानों का व्यापार कम लागत पर होता है। ;छद्ध लोचपूणर्ः इस प(ति में यदि कोइर् दुकान लाभ नहीं कमा रही है तो प्रबंधक इसे बंद कर सकते हैं अथवा इसे किसी दूसरे स्थान पर हस्तांतरित कर सकते हैं। इसका पूरे संगठन की लाभप्रदता पर कोइर् अिाक प्रभाव नहीं पडे़गा। 257 हानियाँ ;कद्ध वस्तुओं का चयन सीमितः बहुसंख्यक दुकानें सीमित उत्पाद की किस्मों में व्यापार करती है जिनके विपणनकतार् स्वयं ही उत्पादन करते हैं। वे अन्य उत्पादकों का माल नहीं बेचते। इस प्रकार से उपभोक्ताओं के सम्मुख चयन के अवसर सीमित होते हैं। ;खद्ध प्रेरणा का अभावः बहुसंख्यक दुकानों का प्रबंध करने वाले कमर्चारियों को प्रधान कायार्लय से प्राप्त आदेशों का पालन करना होता है। इससे वह सभी मामलों में प्रधान कायार्लय के दिशा निदेर्शों के आदी हो जाते हैं। इससे उनकी पहल क्षमता समाप्त हो जाती है तथा वह अपनी सृजनात्मक प्रवीणता का ग्राहकों की संतुष्िट के लिए उपयोग नही कर सकते। ;गद्ध व्यक्ितगत सेवा का अभावः कमर्चारियों के कारण व प्रेरणा के अभाव में उनमें उदासीनता आ जाती है तथा व्यक्ितगत सेवा का अभाव हो जाता है। ;घद्ध माँग में परिवतर्न कठिनः जिन वस्तुओं की बहुसंख्यक दुकानें व्यापार करती हैं यदि उनकी मांगों में तेजी से परिवतर्न आ जाता है तो संगठन को भारी हानि उठानी पड़ सकती है क्योंकि वेंफद्रीय भंडार में बड़ी मात्रा में बिना बिका माल बेचा जाता है। विभागीय भंडार एवं बहुसंख्यक दुकानों में अंतरः यह दोनों यद्यपि बडे़ पैमाने के संगठन हैं तथापि इनमें कइर् अंतर हैं जो नीचे दिये गए हैं। ;कद्धस्िथतिः विभागीय भंडार किसी वंेफद्रीय स्थान पर स्िथत होते हैं जहाँ कापफी बड़ी संख्या में ग्राहक आ सकते हैं, जबकि बहुसंख्यक दुकानंे अलग - अलग स्थानों पर स्िथत होती हैं जहाँ बड़ी संख्या में ग्राहक पहुँचते हैं। इस प्रकार से इनके लिए किसी वंेफद्रीय स्थल की आवश्यकता नहीं है। ;खद्ध उत्पादों की श्रेणीः विभागीय भंडारों का उद्देश्य एक ही छत के नीचे ग्राहकों की सभी आवश्यक वस्तुओं की आपूतिर् करना है। यह विभ्िान्न प्रकार के अलग - अलग उत्पादों का विक्रय करते हैं जबकि बहुसंख्यक दुकानों का उद्देश्य किसी वस्तु की विभ्िान्न किस्मों की ;ग्राहकों की आवश्यकताओं की पूतिर् हेतुद्ध पूतिर् करना है। ;गद्धप्रदत्त सेवाएँँँः विभागीय भंडार अपने ग्राहकों को अिाकतम सेवाएँँं प्रदान करने पर जोर देते हैं। इनमें वुफछ हैं डाक घर, जलपान गृह आदि। इसके विपरीत बहुसंख्यक दुकानें सीमित सेवाएँँँ ही प्रदान करती हैं जैसे वस्तुओं में यदि किसी प्रकार की कमी है तो उसकी गारंटी एवं मरम्मत। ;घद्ध कीमतें/मूल्यः बहुसंख्यक दुकानें निधार्रित मूल्यों पर माल बेचती हैं तथा उनकी सभी दुकानों पर एक ही मूल्य रहता है। विभागीय भंडारों में सभी विभागों में मूल्य नीति समान नहीं होती। कइर् बार माल की निकासी के लिए वुफछ वस्तुओं एवं किस्मों पर छूट दी जाती है। ;घद्ध ग्राहकों का वगर्ः विभागीय भंडार अिाकांश रूप से उच्च आय वगर् की व्यवसाय अध्ययन चाहते हैं तथा मूल्य की परवाह नहीं करते। दूसरी ओर बहुसंख्यक दुकानें ग्राहकों के विभ्िान्न वगोर्ं की आवश्यकताओं की पूतिर् करती हैं जिनमें कम आय वगर् भी है जो कम कीमत पर गुणवत्ता वाली वस्तुओं में रुचि रखते हैं। ;चद्धउधार की सुविधाः बहुसंख्यक दुकानों में सभी बिक्री पूणर्तः नकद होती है। इसके विपरीत विभागीय भंडार अपने वुफछ नियमित ग्राहकों को उधार की सुविधा भी देते हैं। ;छद्धलोचपूणर्ः विभागीय भंडार बड़ी संख्या में विभ्िान्न प्रकार की वस्तुओं का व्यापार करते हैं तथा विक्रय उत्पादों की विभ्िान्न श्रेण्िायों के कारण वस्तुओं में लचीलापन पाया जाता है। शंृखला भंडारों में लोचपूणर्ता की संभावना नहीं है क्योंकि यह सीमित श्रेणी की वस्तुओं का व्यापार करते हैं। डाक आदेशगृह यह वह पुफटकर विवे्रफता होते हंै जो डाक द्वारा वस्तुओं का विक्रय करते हैं। इस प्रकार के व्यापार में विवे्रफता एवं वे्रफता में कोइर् प्रत्यक्ष व्यक्ितगत संपकर् नहीं होता। आदेश प्राप्त करने के लिए यह संभावित ग्राहकों से समाचार पत्रा अथवा पत्रिाकाओं में विज्ञापन, परिपत्रा अनुसूची, नमूने एवं बिल एवं मूल्य सूची जो उन्हें डाक से भेजे जाते हैं के द्वारा संपकर् बनाते हैं। विज्ञापन में वस्तुओं के संबंध में सभी आवश्यक सूचनाएँ जैसे मूल्य, प्रकृति सुपुदर्गी की शतेर्ं, भुगतान की शते± आदि का वणर्न किया जाता है। आदेश प्राप्ित के पश्चात् वस्तुओं की ग्राहक आवश्यकताओं की पूतिर् करते हैं जो सेवाएँँँद्वारा जिन बातों की जानकारी मांगी जाती है उसके अनुसार जाँच की जाती है तथा उनका डाक के माध्यम से पालन किया जाता है। जहाँ तक भुगतान का संबंध है कइर् विकल्प हैं। प्रथम, ग्राहकों से पूरा भुगतान अगि्रम मांगा जा सकता है। दूसरे, वस्तुओं को मूल्य देय डाक द्वारा भेजा जा सकता है। इस व्यवस्था में वस्तुओं को डाक से भेजा जाता है तथा ग्राहकों को उनकी सुपुदर्गी तभी की जाती है जबकि वह उनका पूरा भुगतान कर देता है। तीसरे, वस्तुएँ बैंक के माध्यम से भेजी जा सकती हैं तथा उन्हें वस्तुओं को ग्राहकों को सुपुदर्गी का निदेर्श दिया जाता है। इस व्यवस्था में अशोध्य )णों की जोख्िाम नहीं होती क्योंकि वे्रफता को माल की सुपुदर्गी उसका पूरा भुगतान करने पर ही की जाती है लेकिन यहाँ ग्राहकों को यह विश्वास दिलाना होता है कि माल उनके द्वारा - निदिर्ष्ट वणर्न के अनुसार ही भेजा गया है। इस प्रकार का व्यापार सभी प्रकार के उत्पादों के लिए उपयुक्त नहीं होता। उदाहरण के लिए जो वस्तुएँ शीघ्र नष्ट होने वाली हो अथवा वजन में भारी हैं तथा जिन्हें सरलता से उठाना और रखना संभव नही है का डाक द्वारा व्यापार केवल वही वस्तुएँ ;कद्ध जिनका श्रेणीकरण एवं मानकीकरण हो सकता है ;खद्ध जिन्हें कम लागत पर ले जाया जा सकता है। ;गद्ध जिनकी बाजार में मांग है। ;घद्ध जो पूरे वषर् बड़ी मात्रा में उपलब्ध् हैं। ;घद्ध जिनमें बाजार में न्यूनतम प्रतियोगिता है। ;छद्ध जिनका चित्रा आदि के द्वारा वणर्न किया जा सकता है इत्यादि इस प्रकार के व्यापार के लिए उपयुक्त है। इस संबंध् में एक और बात ध्यान देने योग्य है कि डाक द्वारा व्यापार तभी सपफलतापूवर्क चलाया जा सकता है कि जबकि श्िाक्षा का पयार्प्त 259 प्रसार हो क्योंकि पढ़े - लिखे लोगों तक ही विज्ञापन एवं अन्य प्रकार के लिख्िात संप्रेषण के माध्यम से पहुँचा जा सकता है। ;कद्ध सीमित पूँजी की आवश्यकताः डाक व्यापार में भवन तथा अन्य आधारगत ढाँचे पर भारी व्यय की आवश्यकता नहीं होती। इसीलिए इसे तुलना में कम पूंजी से प्रारंभ किया जा सकता है। ;खद्ध मध्यस्थों की समाप्ितः उपभोक्ता की दृष्िट से डाक - द्वारा व्यापार का सबसे बड़ा लाभ है कि विवे्रफता एवं वे्रफता के बीच से अनावश्यक मध्यस्थ समाप्त हो जाते हैं। इससे वे्रफता एवं विवे्रफता दोनों की बचत होती है। ;गद्ध विस्तृत क्षेत्राः इस प(ति में हर उन स्थानों पर माल भेजा जा सकता है जहाँ डाक सेवाएँँं उपलब्ध हैं। इस प्रकार से डाक द्वारा पूरे देश में बड़ी संख्या में लोगों को माल बेचा जा सकता है जिससे व्यवसाय का क्षेत्रा व्यापक हो जाता है। ;घद्ध अशोध्य )ण संभव नहींः डाक द्वारा ग्राहकों को माल उधार नहीं बेचा जाता इसलिए ग्राहकों के द्वारा माल का भुगतान न करने से अशोध्य )णों की संभावना नहीं है। ;घद्ध सुविधाः इस प(ति में वस्तुओं की ग्राहकों के घर पर सुपुदर्गी कर दी जाती है। इसलिए इससे ग्राहकों द्वारा वस्तुओं का क्रय करना सुविधाजनक हो जाता है। सीमाएँ ;कद्ध व्यक्ितगत संपवर्फ की कमीः डाक द्वारा व्यापार में विवे्रफता एवं वे्रफता के बीच व्यक्ितगत संपवर्फ नहीं होता है। इसलिए दोनों के बीच भ्रंाति एवं अविश्वास पैदा होने की संभावना रहती है। वे्रफता क्रय से पहले वस्तुओं की जाँच नहीं कर सकते तथा विवे्रफताओं पर व्यक्ितगत ध्यान नहीं दे सकते एवं सूची पत्रों एवं विज्ञापन के द्वारा उनकी शंकाओं का समाधान नहीं कर सकते। ;खद्ध उच्च प्रवतर्न लागतः डाक द्वारा व्यापार में संभावित ग्राहकों को सूचित करने एवं वस्तुओं को खरीदने के लिए प्रेरित करने के लिए विज्ञापन पर एवं प्रवतर्न के अन्य साधनों पर बहुत अिाक निभर्र किया जाता है। परिणाम स्वरूप विक्रय प्रवतर्न पर भारी व्यय करना होता है। ;गद्ध बिक्री के बाद की सेवा का अभावः डाक द्वारा बिक्री में विवे्रफता एक दूसरे से बहुत दूर हो सकते हैं तथा उनके बीच कोइर् व्यक्ितगत संपकर् नहीं होता। परिणामस्वरूप बिक्री के बाद की सेवाएँँं प्रदान नहीं की जा सकती जो कि ग्राहकों की संतुष्िट के लिए बहुत महत्त्वपूणर् हैं। ;घद्ध उधार की सुविधा की कमीः डाक आदेश गृह वे्रफताओं को उधार की सुविधा प्रदान नहीं करते। इसलिए सीमित साधन वाले व्यक्ित इस प्रकार के व्यापार में रुचि नहीं लेते। ;घद्ध सुपुदर्गी मेें विलंबः डाक द्वारा आदेश प्राप्त करने एवं उनके ियान्वयन में समय लगता है। अतः ग्राहकों को माल की सुपुदर्गी समय पर नहीं मिल पाती। ;चद्ध दुरुपयोग की संभावनाः इस प्रकार के व्यापार में बेइर्मान व्यापारियों द्वारा धोखा दिए जाने की अिाक संभावना रहती है। यह उत्पाद के विषय में झूठे दावे करते हैं या पिफर विज्ञापन एवं इश्तहार में किए गए वादों को पूरा नहीं करते हैं। व्यवसाय अध्ययन ;छद्ध डाक सेवाओं पर अिाक निभर्रताः डाक आदेश व्यापार की सपफलता किसी स्थान पर प्रभावी डाक सेवाओं की उपलब्धता पर बहुत अिाक निभर्र करती है लेकिन भारत जैसे विशाल देश में जहाँ बहुत से स्थान ऐसे हैं जहाँ डाक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इस प्रकार के व्यवसाय के सपफल होने की संभावनाएं सीमित हैं। उपभोक्ता सहकारी भंडार एक उपभोक्ता सहकारी भंडार एक ऐसा संगठन है जिसके उपभोक्ता, स्वामी स्वयं ही होते हैं तथा वही उसका प्रबंध एवं नियंत्राण करते हैं। इन भंडारों का उद्देश्य मध्यस्थों की संख्या को कम करना है जो उत्पाद की लागत को बढ़ाते हंै इस प्रकार से यह सदस्यों की सेवा करते हैं। साधारणतया यह वस्तुओं को सीधे उत्पादक थोक विवे्रफता से बड़ी मात्रा में क्रय करते हैं तथा उन्हें उपभोक्ताओं को उचित दर पर बेचते हैं क्योंकि मध्यस्थ या तो समाप्त हो गए होते हैं या पिफर कम हो गए होते हैं, सदस्यों को अच्छी गुणवत्ता की वस्तुएँ सस्ते मूल्य पर उपलब्ध हो जाती हैं। उपभोक्ता सहकारी भंडारों द्वारा वषर् के दौरान अजिर्त लाभ को सदस्यों में उनके क्रय के अनुपात में लाभांश के रूप में घोष्िात किया जाता है तथा सदस्यों के सामाजिक एवं शैक्षण्िाक लाभों के अिाक सुदृढ़ बनाने के लिए साधारण संचय एवं कल्याण कोष में जमा किया जाता है। उपभोक्ता सहकारी भंडार को स्थापित करने के लिए न्यूनतम 10 सदस्यों की आवश्यकता होती है तथा एक स्वैच्िछक संगठन की स्थापना कर सहकारी समिति अिानियम के अंतगर्त पंजीवृफत करना पड़ता है। सहकारी भंडारांे के लिए पूँजी इनके सदस्यों को अंश निगर्मित करके जुटाइर् जाती है। इन भंडारों का प्रबंध जनतांत्रिाक प(ति से चुनी गइर् एक प्रबंध समिति द्वारा किया जाता है तथा इसमें एक व्यक्ित वोट के नियम का पालन होता है। कोषों के उचित प्रबंधन को सुनिश्िचत करने के लिए इन भंडारों के खातों का सहकारी समिति रजिस्ट्रार अथवा उसके द्वारा अिावृफत व्यक्ित के द्वारा अंकेक्षण किया जाता है। लाभ उपभोक्ता सहकारी भंडारों के प्रमुख लाभ निम्नलिख्िात हैंः ;कद्धस्थापना सरलः एक उपभोक्ता सहकारी समिति का गठन सरल होता है। कोइर् भी 10 व्यक्ित एकजुट होकर एक स्वैच्िछक संगठन बना सकते हैं तथा वुफछ औपचारिकताओं को पूरा कर सहकारी समिति के रजिस्ट्रार के पास इसका पंजीयन करा लेते हैं। ;खद्ध सीमित दायित्वः एक सहकारी भंडार के प्रत्येक सदस्य का दायित्व उसकी पूँजी तक सीमित होता है। यदि समिति की देयताएँ उसकी परिसंपिायों से अिाक हैं तो समिति के )णों के भुगतान के लिए अपनी पूँजी से अिाक की राश्िा के लिए वह व्यक्ितगत रूप से उत्तरदायी नहीं होता है। ;गद्धप्रजातांत्रिाक प्रबंधः सहकारी समिति का प्रबंध इसके सदस्यों के द्वारा चुनी गइर् प्रबंध समिति द्वारा प्रजातांत्रिाक ढंग से किया जाता है। 261 प्रत्येक सदस्य को एक वोट देने का अिाकार होता है भले ही उसके पास कितने भी शेयर हों। ;घद्ध कम कीमतः सहकारी भंडार उत्पादकों एवं थोक विवे्रफताओं से सीधे माल का क्रय करते हैं तथा उसे सदस्यों एवं अन्य लोगों को बेचते हैं। परिणामस्वरूप मध्यस्थ कम हो जाते हैं अतः उपभोक्ता एवं सदस्यों को वस्तुएँ कम मूल्य पर प्राप्त होती हैं। ;घद्ध नकद बिक्रीः प्रायः उपभोक्ता सहकारी भंडार वस्तुआंे का नकद विक्रय करते है परिणामस्वरूप कायर्शील पूँजी की आवश्यकता कम होती है। ;चद्ध सुविधाजनक स्िथतिः उपभोक्ता सहकारी भंडार सुविधा के अनुसार सावर्जनिक स्थलों पर खोले जाते हैं जहाँ से सदस्य एवं अन्य लोग सुगमतापूवर्क अपनी आवश्यकता की वस्तुओं का क्रय कर सकते हैं। सीमाएँ उपभोक्ता सहकारी भंडारों की सीमाएँ नीचे दी गइर् हैंः ;कद्ध प्रेरणा का अभावः सहकारी भंडारों का प्रबंध जिन लोगों द्वारा किया जाता है वह अवैतनिक होते हैं। इसीलिए इन लोगों में अिाक प्रभावी ढंग से काम करने के लिए पहल एवं अभ्िाप्रेरणा की कमी होती है। ;खद्ध कोषों की कमीः सहकारी भंडारों के लिए धन इकट्टòा करने का मूल स्रोत सदस्यों से अंशों का निगमर्न है। इनके सदस्य सीमित संख्या में होते हैं। इसलिए साधारणतया इनके पास धन की कमी रहती है। यह भंडारों की बढ़ोतरी एवं विस्तार में आडे़ आता है। ;गद्ध संरक्षण का अभावः प्रायः सहकारी भंडारों के सदस्य नियमित रूप से इनको संरक्षण प्रदान नहीं करते। इसलिए इनका सपफलतापूवर्क परिचालन नहीं हो पाता। ;घद्ध व्यावसायिक प्रश्िाक्षण का अभावः जिन लोगों को सहकारी भंडारों का प्रबंध कायर् सौंपा जाता है उनमें विशेषज्ञता का अभाव होता है क्योंकि उन्हें भंडार को सुचारू रूप से चलाने का प्रश्िाक्षण प्राप्त नहीं होता है। सुपर बाजार सुपर बाजार एक बड़ी पुफटकर व्यापारिक संस्था होती है जो कम लाभ पर अनेकों प्रकार की वस्तुओं का विक्रय करती है। इनमें स्वयं सेवा, आवश्यकतानुसार चयन एवं भारी विक्रय का आकषर्ण होती है। इनमें अिाकंाश खाद्य सामग्री एवं अन्य कम मूल्य की वस्तुएं ब्रांड वाली एवं बहुतायत में उपयोग में आने वाली उपभोक्ता वस्तुएँ जैसे परचून, बतर्न, कपड़े, बिजली के उपकरण, घरेलू सामान एवं दवाइयों का विक्रय किया जाता है। प्रायः सुपर बाजार अिाकांश रूप से प्रमुख विक्रय वेंफद्रों में स्िथत होते हैं। उनमें वस्तुओं को खानों में रखा जाता है जिन पर मूल्य एवं गुणवत्ता स्पष्ट रूप से लिखे होते हैं। उपभोक्ता भंडार में घूमकर अपनी आवश्यकता की वस्तुओं को चुनते हैं तथा उन्हें पिफर नकद पटल पर लाते हैं तथा भुगतान कर उन्हें घर ले जाते हैं। सुपर बाजार विभागीय भंडारों की भाँति विभ्िान्न विभागों में बँटा संगठन होता है जिसमें व्यवसाय अध्ययन ग्राहक विभ्िान्न प्रकार की वस्तुओं को एक ही छत के नीचे खरीद सकते हैं लेकिन यह भंडार, विभागीय भंडारों की भाँति घर पर माल की मुफ्रत सुपुदर्गी, उधार की सुविधा, एजेंसी सुविधाएँ प्रदान नहीं करते। यह ग्राहकों को वस्तुओं की गुणवत्ता आदि के संबंध में विश्वास दिलाने के लिए विवे्रफताओं की नियुक्ित नहीं करते। सुपर बाजार की वुफछ विशेषताएँ निम्नलिख्िात हैंः ;कद्ध सुपर बाजार सामान्यतः हर प्रकार की खाद्य सामग्री एवं परचून सामग्री जो गैर खाद्य आवश्यकता की वस्तुओं के अतिरिक्त होती है की बिक्री करते हैं। ;खद्ध ऐसे बाजारों में वे्रफता आवश्यक वस्तुओं का क्रय एक ही छत के नीचे कर सकते हैं। ;गद्ध सुपर बाजार स्वंय सेवा के सि(ंात पर चलाए जाते हैं। इसलिए इनकी वितरण लागत कम होती है। ;घद्ध निम्न परिचालन लागत, बड़ी मात्रा में क्रय एवं कम लाभ के कारण अन्य पुफटकर भंडारों की तुलना में यहाँ वस्तुओं की कीमत कम होती है। ;घद्ध वस्तुओं को केवल नकद बेचा जाता है। ;चद्ध सुपर बाजार साधारणतया वेंफद्रीय स्थानों पर स्िथत होते हैं जहाँ इनकी बिक्री बहुत अिाक होती है। लाभ सुपर बाजार के निम्नलिख्िात लाभ हैं। ;कद्ध एक छत कम लागतः सुपर बाजार में विभ्िान्न प्रकार की वस्तुओं को कम कीमत पर एक ही छत के नीचे बेचा जाता है। इन बिक्री वेंफद्रांे से वे्रफता न केवल सुविधापूवर्क क्रय कर सकते हैं बल्िक यह मित्व्ययी भी होता है। ;खद्ध वेंफद्र में स्िथतः सुपर बाजार साधारणतया शहर के मध्य में स्िथत होते हैं। परिणामस्वरूप यह आस - पास के क्षेत्रा के लोगों की पहुँच में होते हैं। ;गद्ध चयन के भारी अवसरः सुपर बाजार में विभ्िान्न डिजाइन रंग आदि की अनेक वस्तुएँ उपलब्ध होती हैं जिससे वे्रफता सुगमतापूवर्क भली - भाँति चयन कर सकते हैं। ;घद्ध कोइर् अशोध्य )ण नहींः माल का विक्रय नकद किया जाता है इसलिए सुपर बाजार में अशोध्य )ण नहीं होते। ;घद्ध बड़े स्तर के लाभः सुपर बाजार बडे़ पैमाने के पुफटकर विक्रय भंडार होते हैं। इसे बड़े पैमाने के क्रय एवं विक्रय के सभी लाभ मिलते हैं जिसके कारण इसकी प्रचालन लागत कम होती है। सीमाएँ सुपर बाजार की प्रमुख सीमाएँ निम्नलिख्िात हैंः ;कद्ध उधार विक्रय नहींः सुपर बाजार अपनी वस्तुओं का केवल नकद विक्रय करते हैं। इसमें उधार क्रय की सुविधा नहीं होती। अतः सभी वे्रफता यहाँ से माल का क्रय यहाँ नहीं कर सकते। 263 ;खद्ध व्यिाफगत ध्यान की कमीः सुपर बाजार स्वयं सेवा के सि(ांत पर चलते हैं। इसलिए ग्राहकों पर व्यक्ितगत रूप से ध्यान नहीं दिया जाता। परिणामस्वरूप जिन वस्तुओं पर विवे्रफताओं पर व्यक्ितगत ध्यान देने की आवश्यकता है इनका प्रभावी विक्रय सुपर बाजार में संभव नहीं है। ;गद्ध वस्तुओं की अव्यवस्िथत देख - रेखः वुफछ ग्राहक शैल्पफ में रखी वस्तुओं के साथ लापरवाही दिखाते हैं। इससे सुपर बाजार को भारी हानि उठानी पड़ती है। ;घद्ध भारी ऊपरी व्ययः सुपर बाजार में भारी ऊपरी व्यय होता है। इनके कारण यह ग्राहकों को कम कीमत माल नहीं बेच सकते। ;घद्ध भारी पूँजी की आवश्यकताः एक सुपर बाजार की स्थापना एवं परिचालन के लिए भारी निवेश की आवश्यकता होती है। इसीलिए इनमें अिाक बिक्री की आवश्यकता है जिससे कि ऊपरी व्यय को उचित स्तर पर रखा जा सके। यह केवल बड़े शहरों में ही संभव है छोटे कस्बों में नहीं। विक्रय मशीनें विपणन प(तियों में विक्रय मशीनें एक नइर् क्राँति की सूत्राधार हैं। मशीन में सिक्का डालिए और मशीन अपनी बिक्री का काम शुरू कर देगी। इसके माध्यम से अनेक वस्तुओं का विक्रय किया जा सकता है जैसे - गमर् पेय पदाथर्, प्लेटपफामर् टिकटें, दूध निरोधक, सिगरेट, पेय पदाथर्, चाॅकलेट, समाचारपत्रा आदि। इनका प्रयोग कइर् देशों में हो रहा है। इन उत्पादों के अतिरिक्त एक और क्षेत्रा जिसमें यह अवधारणा देश के कइर् भागों में ;विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों मेंद्ध अिाक लोकपि्रय हो रही है वह है आटोमेटिड टैलर मशीन ;ए.टी.एम.द्ध जो बैंकिंग सेवाएँँं प्रदान कर रही हैं। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है इन मशीनों ने बैंकिंग की अवधारणा को ही बदल दिया है तथा अब बिना किसी शाखा में जाए रुपया इन मशीनों की मदद से आसानी से निकाला जा सकता है। विक्रय मशीनें कम कीमत की पूवर् परिबंिात ब्राँड वस्तुएँ जिनकी बहुत अिाक बिक्री होती है जिनकी प्रत्येक इकाइर् का एक ही आकार एवं वजन होता है, बिक्री के लिए अिाक उपयोगी हैं लेकिन ऐसी मशीनों को लगाने पर प्रारंभ्िाक व्यय तथा इनके नियमित रख - रखाव तथा मरम्मत पर भारी व्यय करना होता है तथा ग्राहक वस्तु को क्रय करने से पहले उसका निरीक्षण नहीं कर सकते और यदि वस्तुओं की आवश्यकता नहीं हो तो उन्हें लौटा भी नहीं सकते। इसके अतिरिक्त मशीन के अनुसार वस्तु का विशेष परिबंधन विकसित करना होता है। मशीनों का परिचालन भी विश्वसनीय होना चाहिए। इन सीमाओं के रहते हुए भी अथर्व्यवस्था में विकास के साथ विक्रय मशीनों के द्वारा अिाक बिकने वाली, कम कीमत की उपभोक्ता वस्तुओं की पुफटकर बिक्री का भविष्य उज्ज्वल है। 10.6 इंडियन चैंबर आॅपफ काॅमसर् एंड इंडस्ट्री की आंतरिक व्यापार के संवध्र्न में भूमिका। चैंबसर् आॅपफ काॅमसर् एंड इंडस्ट्री की स्थापना व्यवसाय अध्ययन व्यवसाय एवं औद्योगिक गृहों के संगठनों के रूप में उनके समान हित एवं लक्ष्यों के संवधर्न एवं सरंक्षण के लिए की गइर् थी। कइर् ऐसे चैंबरों की स्थापना की गइर् थी तथा वह आज भी हैं। उदाहरण के लिए ए.एस.ओ.सी. एच.ए.एम, भारतीय उद्योग का महासंघ ;कॅानपैफड्रेशन आॅपफ इंडियन इंडस्ट्री, सी.आइर्.आइर्., एपफ.आइर्सी.सी.आइर्.द्ध ये चैंबसर् अथवा संस्थाएँ व्यापार, वाण्िाज्ियक एवं उद्योग का अपने आपको राष्ट्रीय संरक्षक के रूप में प्रस्तुत करती रही हैं। भारतीय चैंबर आॅपफ कामसर् एंड इंडस्ट्री आंतरिक व्यापार को संपूणर् अथर्व्यवस्था का एक महत्त्वपूणर् अंक एवं सशक्त बनाने के उत्प्रेरक की भूमिका अदा कर रहा है। यह चैंबसर् सरकार से विभ्िान्न स्तरों पर संवाद करते हैं जिससे कि सरकार ऐसी नीतियों को पुननिर्देश्िात अथवा व्यवस्िथत करे जिससे कि बाधएँ घटे, वस्तुओं की अंतरार्ज्यीय आवाजाही बढे़, पारदश्िार्ता लाए एवं बहुस्तरीय निरीक्षण एवं नौकरशाही को समाप्त करे। इसके अतिरिक्त चैंबर का लक्ष्य एक दृढ़ बुनियादी ढाँचा खड़ा करना एवं कर ढाँचे को सरल बनाना एवं एकरूपता प्रदान करना है। इसका हस्तक्षेप मुख्यतः निम्न क्षेत्रों में हैः ;कद्धपरिवहन अथवा वस्तुओं का अंतरार्ज्यीय स्थानांतरण/आवागमनः वाण्िाज्य एवं उद्योग मंडल वस्तुओं के अंतरार्ज्यीय संचलन से संबंध्ित अनेकों ियाओें में सहायता प्रदान करते हैं जैसे वाहनों का पंजीयन, सड़क एवं रेल परिवहन नीतियाँ, राजमागर् एवं सड़कों का निमार्ण आदि। उदाहरण के लिए भारतीय वाण्िाज्य एवं उद्योग मंडलों के महासंघ ;एल.आइर्.सी.सी.आइर्.द्ध की एक वाष्िार्क साधरण सभा के निमार्ण की घोषणा आंतरिक व्यापार को सुगम बनाएगी। ;खद्ध चुंगी एवं स्थानीय करः चंुगी एवं स्थानीय कर स्थानीय सरकार का महत्त्वपूणर् राजस्व का स्रोत है। यह राज्य अथवा नगर की सीमाओं में प्रवेश कर रही वस्तुओं एवं लोगों से वसूल किए जाते हैं। सरकार एवं वाण्िाज्य मंडलों को यह सुनिश्िचत करना चाहिए कि इन करों के कारण निबाध्र् परिवहन एवं स्थानीय व्यापार पर कोइर् प्रभाव न पडे़। ;गद्ध बिक्री कर ढाँचा एवं मूल्य संबध्िंत कर में एकरुपताः वाण्िाज्यक संघ विभ्िान्न राज्यों मे बिक्री कर ढाँचे में एकरूपता लाने के लिये सरकार से बातचीत में महत्त्वपूणर् भूमिका निभाती हैं। बिक्री कर राज्य राजस्व का एक महत्त्वपूणर् भाग होता है। संकलित व्यापार के प्रवतर्न के लिए राज्यों के बीच बिक्री कर का तवर्फसंगत ढाँचा एवं समान दर महत्त्वपूणर् हैं। सरकार की नइर् नीति के अनुसार बिक्री कर के असंतुलन पैदा करने के प्रभाव को दूर करने के लिए इसके स्थान पर मूल्य संबंध्ित कर लगाया जा रहा है। ;घद्ध कृष्िा उत्पादों के विपणन एवं इससे जुड़ी समस्याएँः कृषक संगठनों एवं अन्य महासंघों की कृष्िा उत्पादों के विपणन में महत्त्वपूणर् भूमिका होती है। कृष्िा उत्पादों की बिक्री उत्पादों की बिक्री करने वाले संगठनों की विपणन नीतियों एवं स्थानीय सहायता को चुस्त बनाने के वुफछ क्षेत्रा हैं जिनमें वाण्िाज्ियक एवं औद्योगिक संघ हस्तक्षेप कर सकते हैं एवं कृष्िा सहकारी 265 समितियों जैसी संबंध्ित एजेंसियों के साथ बातचीत कर सकते हैं। ;घद्ध माप - तोल तथा ब्राँड वस्तुओं की नकल को रोकनाः माप - तोल एवं ब्रांडों की सुरक्षा से संबंिात कानून उपभोक्ताओं एवं व्यापारियों के हितों की रक्षाथर् आवश्यकता हैं। इन्हें सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है। वाण्िाज्ियक एवं उद्योग संघ सरकार से ऐसे कानून बनाने के लिए बातचीत करते हैं तथा कानून एवं नियमों की अवहेलना करने वालों के विरू( कायर्वाही करते हैं। ;चद्ध उत्पादन करः वेंफद्रीय उत्पादन कर जिसे सभी राज्यों में वेंफद्रीय सरकार लगाती है सरकार के राजस्व का प्रमुख स्रोत है। मूल्य निधर्रण तंत्रा में उत्पादन कर नीति की अहम् भूमिका होती है इसीलिए व्यापार संगठनों के लिए उत्पादन कर को एक सूत्रा में लाने के लिए सरकार से बातचीत करना आवश्यक होता है। ;छद्ध सुदृढ़ मूल - भूत ढाँचे का प्रवर्तनः एक दृढ़ आधरभूत ढाँचा जैसे सड़क, बंदरगाह, बिजली रेल आदि व्यापार संवध्र्न में महत्त्वपूणर् भूमिका निभाते हैं। वाण्िाज्य संघों को सरकार के साथ मिलकर भारी निवेश प्रायोजनों को लेना चाहिए। ;जद्ध श्रम कानूनः एक सरल एवं लोचपूणर् श्रम कानून उद्योग को चलाने अध्िकतम उत्पादन एवं रोजगार पैदा करने में सहायक होती है। वाण्िाज्ियक संघों एवं सरकार के बीच श्रम कानून एवं श्रम संख्या में कटौती जैसी समस्याओं पर निरंतर बातचीत होती रहती है। मुख्य शब्दावली आंतरिक व्यापार थोक विक्रय सावध्िक बाजार व्यापारी थोक व्यापार खुदार विवे्रफता सस्ते दर की दुकान पूफटकर व्यापार खुदार विवे्रफता विक्रय मशीन एक वस्तु के भंडार भ्रमणशील पूफटकर विवे्रफता विश्िाष्टकृत भंडार विभागीय भंडार शृंखला भंडार चैंबर आॅपफ कामसर् सारांश व्यापार से अभ्िाप्राय लाभ अजर्न के उद्देश्य से वस्तुओं एवं सेवाओें के क्रय - विक्रय से है। वे्रफता एवं विवे्रफताओं की भौगोलिक स्िथति के आधार पर व्यापार को दो भागों में बाँटा जा सकता है। ;कद्धआंतरिक व्यापार एवं ;खद्ध बाह्य व्यापार। व्रेफता एवं विवे्रफताओं की भौगोलिक स्िथति के आधार पर व्यापार को दो वगोर्ं में विभक्त किया जा सकता है। ;कद्ध आंतरिक व्यापार तथा ;खद्ध बाह्य व्यापार। आंतरिक व्यापारः जब वस्तुओं एवं सेवाओं का क्रय - विक्रय एक ही देश की सीमाओं के अंदर किया जाता है तो इसे आंतरिक व्यापार कहते हैं। इस प्रकार के व्यापार में कोइर् सीमा शुल्क अथवा आयात कर नहीं लगाया जाता क्योंकि वस्तुएँ घरेलू उत्पादन का भाग हैं तथा घरेलू उपयोग के लिए होती है। आंतरिक व्यापार को दो भागोें में बांटा जा सकता है। ;कद्ध थोक व्यापार एवं ;खद्ध पुफटकर व्यापार। थोक व्यापारः विक्रय अथवा पुनः थोक व्यापार से अभ्िाप्राय पुनः उत्पादन के उपयोग के लिए वस्तु एवं सेवाओं के बड़ी मात्रा में क्रय - विक्रय से है। केवल उत्पादकों के लिए बड़ी संख्या में बिखरे हुए उपभोक्ताओं तक पंहुचने में ;पुफटकर विवे्रफताओं के माध्यम सेद्ध को संभव बनाते हैं बल्िक वस्तुओं एवं सेवाओं की वितरण प्रिया के कइर् अन्य कायर् भी करते हैं। थोक विव्रेफताओं की सेवाएँंः थोक विवे्रफता विनिमार्ता एवं पुफटकर विवे्रफताओं के बीच की महत्त्वपूणर् कड़ी होते हैं। यह समय उपयोगिता एवं स्थान उपयोगिता दोनों को सृजन करते हैं। विनिमार्ताओं के प्रति सेवाएँंः प्रति थोक विवे्रफताओं की प्रमुख सेवाएँं नीचे दी गइर् हैं। ;कद्धबडे़ पैमाने पर उत्पादन में सहायक ;खद्ध जोख्िाम उठाना ;गद्ध वित्तीय सहायता ;घद्ध विशेषज्ञ सलाह ;घद्ध विपणन में सहायक ;चद्ध निरंतरता में सहायक ;छद्ध संग्रहण पुफटकर विव्रेफताओं के प्रति सेवाएँंः ;कद्ध वस्तुओं को उपलब्ध कराना ;खद्ध विपणन में सहायक ;गद्धसाख प्रदान करना ;घद्ध विश्िाष्ट ज्ञान ;घद्ध जोख्िाम में भागीदारी पुफटकर व्यापारः पुफटकर विवे्रफता वह व्यावसायिक इकाइर् होती है जो वस्तुओं एवं सेवाओं को सीधे अंतिम उपभोक्ताओं को बेचते हैं। पुफटकर व्यापारियों की सेवाएँंः पुफटकर व्यापार वस्तुओं एवं सेवाओं के वितरण में उत्पादक एवं अंतिम उपभोक्ताओं के बीच की एक महत्त्वपूणर् कड़ी है। इस प्रिया में वह उपभोक्ताओं, थोक विवे्रफताओं एवं विनिमार्ताओं को उपयोगी सेवाएँं प्रदान करता है। उत्पादकों एवं थोक विवे्रफताओं की सेवाएँंः पुफटकर व्यापारी उत्पादकों एवं थोक विवे्रफताओं को जो मूल्यवान सेवाएँं प्रदान करते हैं वह नीचे दी गइर् हैंः ;कद्ध वस्तुओं के वितरण में सहायक ;खद्ध व्यक्ितगत विक्रय ;गद्ध बड़े पैमाने पर परिचालन में सहायक ;घद्ध बाजार संबंिात सूचनाएँ एकत्रिात करना ;घद्ध प्रवतर्न में सहायक उपभोक्ताओं को सेवाएँंः उपभोक्ताओं की दृष्िट से पुफटकर व्यापारियों की वुफछ सेवाएँं निम्नलिख्िात हैंः ;कद्ध उत्पादों की नियमित उपलब्धता ;खद्ध नये उत्पादों के संबंध में सूचना ;गद्धक्रय में सुविधा ;घद्ध चयन के पयार्प्त अवसर ;घद्ध बिक्री के बाद की सेवाएँ ;चद्ध उधार की सुविधा पुफटकर व्यापार के प्रकारः पुफटकर व्यापारियों को विभ्िान्न प्रकारों में बांटने के लिए विभ्िान्न वगीर्करणों का सहारा लिया है। व्यावसायिक आकार के आधार निश्िचत स्थान है, इस आधार पर पुफटकर विवे्रफता दो प्रकार के हो सकते हैं। ;कद्धभ्रमणशील पुफटकर विवे्रफता एवं ;खद्ध स्थायी दुकानदार भ्रमणशील पुफटकर विव्रेफताः यह वह पुफटकर व्यापारी होते हैं जो किसी स्थायी जगह से अपना व्यापार नहीं करते हैं। यह अपने सामान के साथ ग्राहकों की तलाश में गली - गली एवं एक स्थान से दूसरे स्थानों पर घुमते रहते हैं। ;कद्धपेफरी वालेः यह छोटे उत्पादक अथवा मामूली व्यापारी होते हैं जो वस्तुओं को साइर्कल, हाथ - ठेली, साइर्कल रिक्शा या अपने सिर पर रख कर तथा जगह - जगह घूम कर ग्राहक के दरवाजे पर जाकर माल का विक्रय करते हैं। ;खद्ध साविाक बाजार व्यापारीः पुफटकर व्यापारी होते हैं जो विभ्िान्न स्थानों पर निश्िचत दिन अथवा तिथ्िा को दुकान लगाते हैं जैसे प्रति शनिवार या पिफर एक शनिवार छोड़कर दूसरे शनिवार को। ;गद्धसस्ते दर की दुकानः यह उपभोक्ता वस्तुओं में व्यापार करते हैं एवं वस्तुओं को उस स्थान पर उपलब्ध कराते हैं जहाँ उसकी उपभोक्ता को आवश्यकता है। स्थायी दुकानदारः परिचालन आकार के आधार पर स्थायी दुकानदार मुख्यतः दो प्रकार के हो सकते हैंः ;कद्धछोटे दुकानदार एवं ;खद्ध बडे़ पुफटकर विवे्रफता छोटे स्थायी पुफटकर विवे्रफता ;कद्ध जनरल स्टोरः उपभोक्ताओं की प्रतिदिन की आवश्यकताओं की पूतिर् की वस्तुओं की बिक्री करते हैं। उनके लिए अपने प्रतिदिन के प्रयोग में आने वाली वस्तुओं जैसे परचून की वस्तुएँ, पेय पदाथर्, प्रसाधन का सामान, स्टेशनरी एवं मिठाइयों का खरीदना सुविधाजनक रहता है। ;खद्ध विश्िाष्टीवृफत भंडारः शहरी क्षेत्रों में यह विभ्िान्न प्रकार की वस्तुओं का विक्रय न कर एक ही प्रकार वस्तुओं की बिक्री करते हैं केवल बच्चों के सिले - सिलाए वस्त्रा बेचती हैं या पिफर पुरूषों के वस्त्रा, महिलाओं के जूते, ख्िालौने एवं उपहार की वस्तुएँ, स्वूफल यूनीपफामर्, कालेज की पुस्तवेंफ या पिफर उपभोक्ता की इलैक्ट्रोनिक वस्तुएँ आदि ;गद्ध गली में स्टाॅलः यह छोटे विवे्रफता गली के मुहाने पर या भीड़ - भाड़ वाले क्षेत्रों में होते हैं। तथा हौजरी की वस्तुएँ, ख्िालौने, सिगरेट, पेय पदाथर् आदि सस्ती वस्तुओं को बेचते हैं। ;घद्ध पुरानी वस्तुओं की दुकानः ये दुकाने पुरानी वस्तुओं की बिक्री करते जैसे कि पुस्तवेंफ, कपड़े, मोटर कारें, पफनीर्चर एवं अन्य घरेलू सामान। कम मूल्य पर प्राप्त होती हैं। ;घद्ध एक वस्तु के भंडारः ये वे भंडार होते हैं जो एक ही श्रेणी की वस्तुओं का विक्रय करते हैं जैसे कि पहनने के तैयार वस्त्रा, घडि़याँ, जूते, कारें, टायर, वंफप्यूटर, पुस्तवेंफ, स्टेशनरी आदि। ये वेंफद्रीय स्थल पर स्िथत होते हैं। स्थायी दुकानंे - बड़े पैमाने के भंडारगृहः ;कद्ध विभागीय भंडारः एक विभागीय भंडार एक बड़ी इकाइर् होती है जो विभ्िान्न प्रकार के उत्पादों की बिक्री करती हैं, जिन्हें भली - भांति निश्िचत विभागों में बाँटा गया होता है तथा जिनका उद्देश्य ग्राहक की लगभग प्रत्येक आवश्यकता की पूतिर् एक ही छत के नीचे करना है। विभागीय भंडारों के प्रमुख लाभ निम्नलिख्िात हैंः ;कद्ध बड़ी संख्या में ग्राहकों को आकष्िार्त करता है। ;खद्ध क्रय करना सुगम ;गद्धआकषर्क सेवाएँं ;घद्ध बड़े पैमाने पर परिचालन के लाभ ;घद्ध विक्रय में वृि सीमाएँः ;कद्ध व्यक्ितगत ध्यान का अभाव ;खद्ध उच्च परिचालन लागत ;गद्ध हानि की संभावना अिाक ;घद्ध असुविधाजनक स्िथति ;खद्ध शृंखला भंडार अथवा बहुसंख्यक दुकानेंःशंृखला भंडार अथवा बहु संख्यक दुकानें पुफटकर दुकानों का पफैला हुआ जाल हैं जिनका स्वामित्व एवं परिचालन उत्पादनकतार् या मध्यस्थ करते हैं। इन दुकानों पर मानकीय एवं ब्रांड की वस्तुएँ जिन का विक्रय आवतर् तीव्र होता है बेची जाती हैं। लाभः ;कद्ध बड़े पैमाने की मित्व्ययता ;खद्ध मध्यस्थ की समाप्ित ;गद्ध कोइर् अशोध्य )ण नहीं ;घद्ध वस्तुओं का हस्तांतरण ;घद्ध जोख्िाम का बिखराव ;चद्ध निम्न लागत ;छद्ध लोचपूणर् हानियाँः ;कद्ध वस्तुओं का चयन सीमित ;खद्ध प्रेरणा का अभाव ;गद्ध व्यक्ितगत सेवा का अभाव ;घद्ध माँग में परिवतर्न कठिन विभागीय भंडार एवं बहुसंख्यक दुकानों में अंतरः ;कद्धस्िथति ;खद्ध उत्पादों की श्रेणी ;गद्ध प्रदत्त सेवाएँँ ;घद्ध कीमतें/मूल्य ;घद्ध ग्राहकों का वगर् ;चद्धउधार की सुविधा ;छद्ध लोचपूणर् ;जद्ध डाक आदेश गृह ये वे पुफटकर विवे्रफता होते हंै जो डाक द्वारा वस्तुओं का विक्रय करते हैं। इस प्रकार के व्यापार में विवे्रफता एवं वे्रफता में कोइर् प्रत्यक्ष व्यक्ितगत संपकर् नहीं होता। लाभः ;कद्ध सीमित पूँजी की आवश्यकता ;खद्ध मध्यस्थों की समाप्ित ;गद्ध विस्तृत क्षेत्रा ;घद्ध अशोध्य )ण संभव नहीं ;घद्ध सुविधा सीमाएँः ;कद्धव्यक्ितगत संपकर् की कमी ;खद्ध उच्च प्रवतर्न लागत ;गद्ध बिक्री के बाद की सेवा का अभाव ;घद्ध उधार की सुविधा की कमी ;घद्ध सुपुदर्गी में विलंब ;चद्ध दुरुपयोग की संभावना ;छद्धडाक सेवाओं पर अिाक निभर्रता उपभोक्ता सहकारी भंडारः उपभोक्ता सहकारी भंडार एक ऐसा संगठन है जिसके उपभोक्ता, स्वामी स्वयं ही होते हैं तथा वही उसका प्रबंध एवं नियंत्राण करते हैं। इन भंडारों का उद्देश्य मध्यस्थों की संख्या को कम करना है जो उत्पाद की लागत को बढ़ाते हैं। इस प्रकार से यह सदस्यों की सेवा करते हैं। लाभः ;कद्ध स्थापना सरल ;खद्ध सीमित दायित्व ;गद्ध प्रजातांत्रिाक प्रबंध ;घद्ध कम कीमत ;घद्ध नकद बिक्री ;चद्ध सुविधाजनक स्िथति सीमाएँः ;कद्ध प्रेरणा का अभाव ;खद्ध कोषों की कमी ;गद्ध संरक्षण का अभाव ;घद्ध व्यावसायिक प्रश्िाक्षण का अभाव सुपर बाजारः सुपर बाजार एक बड़ी पुफटकर व्यापारिक संस्था होती है जो कम लाभ पर अनेकों प्रकार की वस्तुओं का विक्रय करती है। इनमें स्वयं सेवा, आवश्यकतानुसार चयन एवं भारी विक्रय का आकषर्ण होती है। लाभः ;कद्ध एक छत कम लागत ;खद्ध वेंफद्र में स्िथत ;गद्ध चयन के भारी अवसर ;घद्ध कोइर् अशोध्य )ण नहीं ;घद्ध बड़े स्तर के लाभ सीमाएँः ;कद्ध उधार विक्रय नहीं ;खद्ध व्यिाफगत ध्यान की कमी ;गद्ध वस्तुओं की अव्यवस्िथत देख - रेख ;घद्ध भारी ऊपरी व्यय ;घद्ध भारी पूँजी की आवश्यकता ;चद्ध विक्रय मशीनें विक्रय मशीनें कम कीमत की पूवर् परिबंिात ब्राँड वस्तुएँ जिनकी बहुत अिाक बिक्री होती है जिनकी प्रत्येक इकाइर् का एक ही आकार एवं वजन होता है अभ्यास लघु उत्तरीय प्रश्न ;कद्ध आंतरिक व्यापार से क्या तात्पयर् है? ;खद्ध स्थायी दुकान पुफटकर व्यापारी की विशेषताएँ बताइर्ए। ;गद्ध थोक व्यापारी द्वारा भंडारण की सुविध किस उद्देश्य के लिए दी जाती है? ;घद्ध थोक व्यापारी से मिलने वाली बाजार जानकारी से निमार्ता को किस प्रकार के लाभ मिलते है? ;घद्ध थोक व्यापारी द्वारा निमार्ता को बड़े पैमाने की मितव्ययता में किस प्रकार मदद करता है? ;चद्ध एक वस्तु भंडार और विश्िाष्टीकृत भंडार के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए। क्या आप ऐसे भंडारों को ज्ञात कर सकते है? ;छद्ध पटरी व्यापारी और सस्ते दर की दुकान में किस प्रकार अंतभर्ेद करेंगे? ;जद्ध थोक व्यापारी द्वारा निमार्ता को दी जाने वाली सेवाओं की व्याख्या कीजिए। ;झद्ध पुफटकर व्यापारी द्वारा थोक व्यापारी और उपभोक्ता को दी जाने वाली सेवाएँ बताइए। दीघर् उत्तरीय प्रश्न ;कद्ध भारत में भ्रमणशील पुफटकर विव्रेफता आंतरिक व्यापार का महत्वपूणर् अंग है। थोक पुफटकर व्यापारी से उसकी प्रतिस्पधार् के बजाय बचाव के कारणों का विशलेषण कीजिए। ;खद्ध विभागीय भंडार की विशेषताओं का वणर्न कीजिए। ये शंृखला भंडार या बहुसंख्यक दुकानों से किस प्रकार भ्िान्न है? ;गद्ध उपभोक्ता सहकारी भंडार को कम खचीर्ला क्यों माना जाता है? थोक पुफटकर व्यापारी से संबंध्ित लाभ क्या है? ;घद्ध स्थानीय बाजार के बिना अपने जीवन की कल्पना कीजिए। पुफटकर दुकान के नहीं होने पर उपभोक्ता को किन कठिनाइर् का सामना करना पड़ता है? ;घद्ध डाक आदेश गृहों की उपयोगिता का वणर्न कीजिए। इनके द्वारा किस प्रकार की वस्तुएँ दी जाती है? स्पष्ट कीजिए। परियोजना कायर् ;कद्ध अपने क्षेत्रा के विभ्िान्न स्थायी पुफटकर विव्रेफताओं की पहचान करो तथा उनका वगीर्करण करो। ;खद्ध क्या अपने क्षेत्रा में ऐसे किसी विव्रेफता को जानते हैं जो कि पुरानी वस्तुओं का विक्रय करता हो? उन उत्पादों का वगीर्करण करो जिसमें वह व्यवहार करता है, उनमें से कौन - से उत्पाद पुनः विक्रय योग्य हैं? इस प्रकार की सूची बनाकर अपना निष्कषर् निकालें। ;गद्ध पुफटकर व्यापार के अतीत एवं भविष्य का तुलनात्मक विशलेषण पर संक्ष्िाप्त निबंध् लिख्िाए और कक्षा में चचार् कीजिए। ;घद्ध अपने अनुभवों के आधर पर दो पुफटकर भंडारों की तुलना करो जो एक समान वस्तुएँ/उत्पाद बेचते हैं। उदाहरण के लिए एक ही तरह का सामान जनरल स्टोर एवं डिपाटर्मेंटल स्टोर में बिकता है। आप इन स्टोरों में बिकने वाले उत्पादों के मूल्य, सविर्स, गुणवत्ता एवं सुविधओं में किस प्रकार की समानता एवं विविध्ता पाते हैं।

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