अध्याय 6 व्यवसाय का सामाजिक उत्तरदायित्व एवं व्यावसायिक नैतिकता अध्िगम उद्देश्य इस अध्याय के अध्ययन के पश्चात् आपः ऽ सामाजिक उत्तरदायित्व की अवधरणा को समझ सवेंफगेऋ ऽ सामाजिक उत्तरदायित्व की आवश्यकता पर विचार - विमशर् कर सवेंफगेऋ ऽ विभ्िान्न वगोर्ं के प्रति उत्तरदायित्व की पहचान कर सवेंफगेऋ ऽ व्यवसाय एवं पयार्वरण संरक्षण के मध्य संबंध् का विश्लेषण कर सवेंफगेऋ ऽ व्यावसायिक नैतिकता की अवधरणा को परिभाष्िात कर सवेंफगे तथा व्यावसायिक नैतिकता के तत्त्वों को बता सवेंफगे। मण्िा एक युवा समाचार - पत्रा संवाददाता है जो विगत छः माह से व्यावसायिक इकाइयों में व्याप्त वुफरीतियों जैसे - भ्रामक विज्ञापन, मिलावटी सामान की पूतिर्, श्रमिकों की दयनीय कायर् - स्िथतियाँ, पयार्वरण प्रदूषण, सरकारी कमर्चारियों को घूस देना आदि के विषय में लिख रहे हैं। अब उन्हें विश्वास हो गया है कि व्यापारी लोग ध्न कमाने के लिए वुफछ भी कर सकते हैं। वे श्री रमन झुनझुनवाला, जो एक अनुकरणीय ट्रक निमार्ता वंफपनी के चेयरमैन हैं, का साक्षात्कार लेते हैं। यह वंफपनी अपने ग्राहकों, कमर्चारियों, विनियोजकों तथा अन्य सामाजिक समुदायों से सद्व्यवहार के लिए विख्यात वंफपनी है। इस साक्षात्कार से मण्िा की समझ में आने लगता है कि एक व्यावसायिक इकाइर् समाज के प्रति उत्तरदायी भी हो सकती है, वह नैतिक रूप से सच्ची भी हो सकती है तथा एक उच्च कोटि का लाभ देने वाली भी हो सकती है। इसके उपरांत वे व्यावसाय के सामाजिक उत्तरदायित्व तथा व्यावसायिक नैतिकता विषय के गहन अध्ययन में जुट जाते हैं। 6.1 परिचय नैतिकता का सि(ांत है कि व्यावसायिक इकाइर्यों को सामाजिक आकांक्षाओं का ध्यान रखते हुए व्यावसायिक ियाएँ करनी चाहिए तथा लाभ अजिर्त करना चाहिए। समाज में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ित के वुफछ सामाजिक उत्तरदायित्व हैं। उसे सामाजिक मूल्यों का आदर करना चाहिए तथा व्यवहार वुफशल होना चाहिए। प्रत्येक व्यावसायिक इकाइर् को लाभ अजिर्त करने के लिए औद्योगिक तथा वाण्िाज्ियक ियाएँ करने का अिाकार समाज से प्राप्त है। लेकिन यह भी आवश्यक है कि वह ऐसी कोइर् भी कायर्वाही न करे जो समाज के दृष्िटकोण से अवांछनीय हो। वुफछ ऐसी कायर्वाहियाँ हैं जो लाभ तो अिाक प्रदान करती हैं लेकिन समाज पर उनका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हैऋ उदाहरणाथर्, माल उत्पादन एवं विक्रय में मिलावट, भ्रामक विज्ञापन, करों का भुगतान न करना, वातावरण को प्रदूष्िात करना तथा ग्राहकों का शोषण। वुफछ अन्य ऐसे ियाकलाप हैं जो उद्यम की छवि को भी सुधारते हैं तथा लाभाजर्न में वृि भी करते हैं जैसे उच्च कोटि के माल की पूतिर् करना, स्वस्थ कायर्स्थल वातावरण बनाना, देय करों का समय पर भुगतान करना, कारखाने में प्रदूषण रोकने के लिए उपयुक्त उपकरण लगवाना तथा ग्राहकों की श्िाकायतों को सुनना तथा उन पर उचित कारर्वाइर् करना है। वास्तव में यह सत्य है कि सामाजिक उत्तरदायित्व तथा सच्चा नैतिकतापूणर् व्यवहार ही किसी व्यावसायिक उद्यम को दीघर्कालीन सपफलता प्रदान करता है। 6.2 सामाजिक उत्तरदायित्व की अवधारणा व्यवसाय के सामाजिक उत्तरदायित्व का अथर् उन नीतियों का अनुसरण करना, उन निणर्यों को लेना अथवा उन कायो± को करना है जो समाज के लक्ष्यों एवं मूल्यों की दृष्िट से वांछनीय हैं। वास्तविक अथर् मंे सामाजिक दायित्वों के अंगीकरण से तात्पयर् समाज की आकांक्षाओं को समझना एवं मान्यता देना, इसकी सपफलता के लिए योगदान देने का निश्चय करना, तथा साथ ही अपने लाभ कमाने के हित को भी ध्यान में रखना है। यह विचारधारा, सवर्साधारण की उस विचारधारा से विपरीत है जिसमें यह माना जाता है कि व्यवसायों का एकमात्रा उद्देश्य है पूंजीपति के लिए अिाक से अिाक लाभ कमाना तथा जनता - जनादर्न के हित में सोचना इससे असंबंिात है। यह कहा जा सकता है कि दायित्वपूणर् व्यवसायों को, बल्िक कहें प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक को अपने समाज से प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष और सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने चाहिए। यदि देखा जाए तो एक व्यवसाय के कानूनी उत्तरदायित्वों की अपेक्षा सामाजिक उत्तरदायित्व अिाक विस्तृत होते हैं। कानूनी उत्तरदायित्वों को तो केवल कानूनी बातों का पालन करके ही पूरा किया जा सकता है जबकि सामाजिक उत्तरदायित्व उससे कहीं परे होता है। यह स्पष्ट है कि सामाजिक उत्तरदायित्वों को केवल कानून का पालन करके पूरा नहीं किया जा सकता। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि सामाजिक उत्तरदायित्व में समाज के हिताथर् वे तत्त्व निहित हंै जिन्हें व्यवसायी स्वेच्छा से करते हैं। 6.3 सामाजिक उत्तरदायित्व की आवश्यकता जब चचार् सामाजिक उत्तरदायित्व की हो तो कौन सा कायर् उचित है? क्या व्यावसायिक संगठन का संचालन केवल स्वामियों के आशानुकूल अिाकतम लाभ कमाने के लिए किया जाए अथवा उन लोगों के हिताथर् किया जाए जो समाज में ग्राहक, कमर्चारी, आपूतिर्कत्तार्, सरकार और समुदाय के रूप में रहते हैं? दरअसल सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रश्न ही नैतिकता का है क्योंकि इसमें व्यवसाय के उत्तरदायित्व के संबंध में उचित तथा अनुचित का सवाल उठता है। सामाजिक दायित्व में स्वैच्िछकता निहित है। व्यवसायी मान सकते हैं कि इन दायित्वों को निभाने के लिए वुफछ करने या न करने के लिए वे स्वतंत्रा हैं। वे इसके लिए भी स्वच्छंद हैं कि समाज के विभ्िान्न वगोर्ं की सेवा करने के लिए उन्हें किस सीमा तक जाना है। वास्तविकता यह है कि सभी व्यवसायी समाज के प्रति समान रूप से अपने आप को उत्तरदायित्व नहीं समझते हैं। बहुत लंबे समय से यह वाद - विवाद का विषय रहा है कि व्यवसाय का सामाजिक उत्तरदायित्व होना चाहिए अथवा नहीं। वुफछ लोग निश्िचत रूप से यह मानते हैं कि एक पफमर् केवल अपने स्वामी के प्रति उत्तरदायी है। दूसरी ओर वुफछ लोग जो इससे भ्िान्न विचारधारा वाले हैं, मानते हैं कि व्यवसायों को समाज के उन वगो± के प्रति भी उत्तरदायी होना चाहिए जो उनके निणर्यों एवं ियाकलापों से प्रभावित होते हैं। सामाजिक उत्तरदायित्वों की अवधारणा को समझने के लिए व्यावसायिक इकाइयों को इसके पक्ष एवं विपक्ष में दिए गए तको± को समझना होगा। 6.3.1 सामाजिक उत्तरदायित्व के पक्ष मंे तवर्फ ;कद्ध अस्ितत्व एवं विकास के लिए औचित्यः व्यवसाय का अस्ितत्व वस्तुओं एवं सेवाओं के मानव जाति की संतुष्िट के लिए उपलब्ध कराने पर निभर्र करता है जबकि व्यावसायिक ियाओं द्वारा लाभ कमाना भी एक महत्वपूणर् औचित्य है। यह मनुष्यों को प्रदान की हुइर् सेवाओं का परिणाम ही समझना चाहिए। वास्तव में व्यवसाय की उन्नति एवं विकास तभी संभव है जबकि समाज को वस्तुएँ एवं सेवाएँ लगातार उपलब्ध होती रहें। अतः एक व्यावसायिक इकाइर् द्वारा सामाजिक उत्तरदायित्व की अभ्िाधारणा ही उसके अस्ितत्व एवं विकास के लिए औचित्य प्रदान करती है। ;खद्ध पफमर् का दीघर्कालीन हितः एक पफमर् दीघर्काल तक अिाकतम लाभ तभी कमा सकती है जब उसका सवोर्च्च लक्ष्य समाज सेवा करना हो। यदि समाज के बहुत से लोग जिनमें कमर्चारी, उपभोक्ता, अंशधारी, सरकारी अिाकारीगण आदि सम्िमलित हैं, यदि इन्हें यह विश्वास हो जाता है कि अमुक व्यवसाय समाज के हित में वह वुफछ नहीं कर रहा है जो व्यवसाय अध्ययन उसे करना चाहिए तो वे उस व्यवसाय से अपने सहयोग के हाथ को वापस खींच लेते हैं। सामाजिक उत्तरदायित्व की पूतिर् करना उस संस्था के अपने हित में है। यदि कोइर् पफमर् सामाजिक लक्ष्यों की प्राप्ित में सहायता करती है तो जनता की धारणा भी उसके पक्ष में विकसित होती है। ;गद्ध सरकारी विनिमयन से बचावः व्यवसायी के दृष्िटकोण से सरकारी विनियमों का पालन करना अवांछित है क्योंकि वे स्वतंत्राता को सीमित करते हैं। अतः यह भरोसा किया जाता है कि व्यवसायी वगर् स्वेच्छा से सामाजिक उत्तरदायित्व को ग्रहण करके सरकारी विनिमय से बचा सकते हैं तथा नये कानून बनाने की आवश्यकता में कमी करने में सहायता करते हैं। निगर्मित सामाजिक उत्तरदायित्व प्रत्येक व्यावसायिक इकाइर्, चाहे वह एकाकी व्यापार हो या साझेदारी हो या संयुक्त हिन्दू परिवार हो, या नियमित या संयुक्त पूँजी कंपनी हो, का उत्तरदायित्व है कि वह समाज की इच्छा के अनुरूप कायर् करे। निगर्मित सामाजिक उत्तरदायित्व से तात्पयर् मुख्यतः कंपनी से है जिसने अभी लोकपि्रयता पाइर् है तथा जो व्यावसायिक संस्था, व्यवसाय में उन्नति के श्िाखर पर पहँुचने में नैतिक मूल्यों, जनता, समुदाय तथा प्राकृतिक वातावरण का ध्यान रखती है निगर्मित सामाजिक उत्तरदायित्व की श्रेणी में आती है। निगर्मित सामाजिक उत्तरदायित्व कानूनी, नैतिक, वाण्िाज्ियक तथा अन्य आशाओं का सूचक है जो समाज एक नियमित संस्था से कर सकता है तथा जो अपने निणर्यों एवं कायोर्ं से अंशधरियों, लेनदारों, उपभोक्ताओं, प्रतियोगियों, कमर्चारियों, सरकार तथा समाज के अध्िकारों में साम्ंाजस्य स्थापित करती है। निगर्मित सामाजिक उत्तरदायित्व, नीतियों, प्रथाओं तथा कायर्क्रमों जो व्यावसायिक संचालन में एकीकृत किए गए हैं पर व्यापक दृष्िट रखती है। संपूणर् देश में जहाँ - जहाँ कंपनी कायर्रत होती है वहाँ व्यावसायिक प्रिया, आपूतिर् अध्िकार तथा निणर्य लेने की प्रिया की वतर्मान तथा भूतकाल की कायर्वाही का उत्तरदायित्व लेती है तथा भविष्य के प्रभावों के विषय मंे भी ध्यान रखती है। ;घद्ध समाज का रखरखावः यहाँ यह तकर् दिया जा सकता है कि कानून हर परिस्िथति के लिए नहीं बनाए जा सकते। वे व्यक्ित जो यह सोचते हैं कि उन्हें वह सब वुफछ व्यवसाय से नहीं मिल रहा जो वास्तव में मिलना चाहिए। वे दूसरी असामाजिक गतिवििायों का आश्रय ले सकते हैं जो निश्िचत रूप से सरकारी कानून में नहीं आती। इससे व्यवसाय के हितों को ठेस लग सकती है। अतः यह अत्यन्त आवश्यक है कि व्यावसायिक संगठन सामाजिक उत्तरदायित्वों की ओर जागरूक हों तथा उन्हें ग्रहण करें। ;चद्ध व्यवसाय में संसाधनों की उपलब्धताः यह तकर् साथर्क है कि व्यावसायिक संस्थाओं के बहुमूल्य वित्तीय एवं मानवीय संसाधन होते हैं जिनका उपयोग प्रभावशाली ढंग से समस्याओं के समाधान में किया जा सकता है। उदाहरण के लिए व्यवसाय में पूँजी रूपी संसाधन एवं प्रतिभावान प्रबंधकों का निकाय होता है जो वषोर्ं के अनुभव के आधार पर सभी समस्याओं को आसानी से सुलझा सकते हैं। अतः समाज के पास यह एक अच्छा अवसर है कि वह खोज करें कि ये संसाधन किस प्रकार सहायक हो सकते हैं। ;छद्ध समस्याओं का लाभकारी अवसरों में रूपांतरणः पिछले तको± से संबंिात यह तकर् भी है कि व्यवसाय अपने गौरवपूणर् इतिहास से जोख्िाम भरी परिस्िथतियों को लाभकारी सौदों में बदलने से केवल समस्याओं को ही नहीं सुलझाते बल्िक प्रभावपूणर् ढंग से चुनौतियों को स्वीकार करते हैं। ;जद्ध व्यापारिक गतिवििायोें के लिए बेहतर वातावरणः यदि व्यवसाय का संचालन ऐसे समाज में होना है जहाँ जटिल एवं विविध प्रकार की समस्याएं विद्यमान हैं, वहाँ सपफलता की किरण बड़ी मिम होती है। दूसरी ओर श्रेष्ठ समाज ऐसा वातावरण तैयार करता है जो व्यावसायिक कायो± के लिए अिाक उचित हो। जो इकाइर् लोगों के जीवन की गुणवत्ता के प्रति सवार्िाक संवेदनशील है उसे अपना व्यवसाय चलाने के लिए परिणाम स्वरूप अच्छा समाज मिलेगा। ;झद्ध सामाजिक समस्याओं के लिए व्यवसाय उत्तरदायीः नैतिक रूप से यह तकर् दिया जाता है कि व्यवसायों ने स्वयं वुफछ सामाजिक समस्याओं को या तो पैदा किया है या उन्हें स्थायी बनाया है। उदाहरणस्वरूप पयार्वरण, प्रदूषण, असुरक्ष्िात कायर्स्थल, सरकारी संस्थानों में भ्रष्टाचार तथा विभेदात्मक रोजगार प्रवृति ऐसे ही उदाहरण हैं। अतः व्यवसाय का यह नैतिक कतर्व्य है कि यह समाज को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाले तत्वों का सामना करें न कि उन्हें समाधान के लिए अन्य व्यक्ितयों पर छोड़ दंे। 6.3.2 सामाजिक उत्तरदायित्व के विपक्ष में मुख्य तकर् ;कद्ध अिाकतम लाभ उद्देश्य पर अतिक्रमणः इस तकर् के अनुसार व्यवसाय का मुख्य उद्देश्य अिाकतम लाभ कमाना होता है। अतः कोइर् सामाजिक उत्तरदायित्व का निवार्ह करने की बात इस सि(ांत के विपरीत है। वास्तव में सामाजिक उत्तरदायित्वों का निवार्ह व्यवसायी तभी कर सकते हैं जब लाभ अिाकतम हों। यह सब तभी किया जा सकता है जब लागत मूल्य कम हो तथा कायर्वुफशलता बढ़ी हुइर् हो। ;खद्ध उपभोक्ताओं पर भारः यह भी तकर् दिया जाता है प्रदूषण नियंत्राण तथा वातावरण संरक्षण अत्यन्त खचीर्ले उपाय हैं जिन्हें अपनाने में भारी आथ्िार्क बोझ उठाना पड़ता है। ऐसी दशा में व्यवसायी लोग इस तरह के बोझ को मूल्यों में वृि करके उपभोक्ताओं पर ही डालने का प्रयत्न करते हैं बजाय इसके कि वे इसे स्वयं वहन करें। अतः सामाजिक उत्तरदायित्व के नाम पर उपभोक्ता से अिाक मूल्य वसूल करना सवर्था अनुचित ही है। ;गद्ध सामाजिक दक्षता की कमीः सभी सामाजिक समस्याओं का निराकरण उसी प्रकार से नहीं किया जा सकता जिस प्रकार व्यावसायिक समस्याओं का किया जाता है। वास्तविकता यह है कि व्यावसायियों को सामाजिक समस्याओं को सुलझाने की न तो कोइर् समझ होती है और न ही उन्हें कोइर् प्रश्िाक्षण दिया जाता है। अतः यह तकर् दिया जाता है कि सामाजिक समस्याओं का निदान अन्य विशेषज्ञ एजेन्िसयों द्वारा कराया जाना चाहिए। ;घद्ध विशाल जन - समथर्न का अभावः प्रायः यह देखने में आया है कि सामान्य रूप से जनता सामाजिक कायर्क्रमों में उलझना पसन्द नहीं करती है। इस तकर् के अनुसार कोइर् भी व्यावसायिक इकाइर् जनता के विश्वास व्यवसाय अध्ययन के अभाव एवं सहयोग के बिना सामाजिक समस्याओं को सुलझाने में सपफलतापूवर्क कायर् नहीं कर सकती। 6.3.3 सामाजिक उत्तरदायित्व की यथाथर्वादिता सामाजिक उत्तरदायित्व के उपरोक्त, पक्ष एवं विपक्ष में दिए गए तकोर्ं के आधार पर कोइर् भी व्यक्ित यह विचार कर सकता है कि वास्तव में व्यावसायियों को क्या करना चाहिए? क्या उन्हें लाभ अिाक से अिाक कमाने के विषय में ही अपना ध्यान वेंफदि्रत करना चाहिए अथवा सामाजिक उत्तरदायित्वों के विषय में भी सोचना चाहिए। यदि यथाथर्वादिता की ओर देखा जाय तो आज के परिवतर्नशील युग में व्यवसायी लोग यह अहसास करने लगे हैं कि हमारा अस्ितत्व तभी बना रह सकेगा, यदि हम लाभकारी गतिवििायों के साथ - साथ सामाजिक बन्धनों का भी निवार्ह करते रहें। यदि देखा जाए तो इस अहसास का एक भाग वास्तविक प्रतीत नहीं होता क्योंकि यह केवल कहने भर की बात है। निजी उद्यमों को चालू रखने में यह धारणा आश्वस्त नहीं कर पाती है। यह भी कटु सत्य है कि निजी कंपनियाँ भी प्रजातंात्रिाक समाज की चुनौतियों को स्वीकार करती हंै। जहाँ सभी लोगों को वुफछ मानवीय अिाकार हैं तथा वे व्यवसाय से अच्छे व्यवहार की आशा करते हैं सामाजिक उत्तरदायित्व की अवधारणा मूलतः नीतिशास्त्रा संबंधी अवधारणा है। इसमें मानवीय कल्याण की बदलती धारणा सम्िमलित है तथा यह उन व्यावसायिक ियाओं के सामाजिक पहलुओं की चिंता पर जोर देती है जिसका सीधा संबंध सामाजिक जीवन की गुणवत्ता से है। यह अवधारणा व्यवसाय को इन सामाजिक पहलुओं का ध्यान रखने एवं अपने सामाजिक प्रभावों की ओर ध्यान देने का मागर् दिखलाती है। उत्तरदायित्व से अभ्िाप्राय है कि सामाजिक संगठनों का उस समाज के प्रति एक प्रकार का कतर्व्य है, जिसमें रहकर वह कायर् करते हैं। उन्हें सामाजिक समस्याओं का समाधान करना है तथा आथ्िार्क वस्तु एवं सेवाओं के अतिरिक्त भी योगदान देना है। यहाँ पर उन ताकतों की ओर ध्यान देना आवश्यक होगा जिन्होंने व्यावसायियों को सामाजिक उत्तरदायित्व की ओर ध्यान देने के लिए बाध्य किया है। उनमें से वुफछ महत्वपूणर् निम्नानुसार हंैः ;कद्ध सावर्जनिक नियमन की आशंकाः प्रजातांत्रिाक ढंग से चुनी हुइर् आधुनिक सरकारों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे समाज के सभी वगोर्ं की समान रूप से सुरक्षा करेंगी। जब व्यावसायिक संगठन सामाजिक उत्तरदायित्वपूणर् ढंग से कायर् करते हैं तो जनता की सुरक्षा हेतु सावर्जनिक विनियमनों को लागू किए जाने की कायर्वाही की जाती है। यही सावर्जनिक नियमन आशंका ही महत्वपूणर् है जिसके कारण व्यावसायिक उद्यम सामाजिक उत्तरदायित्व को अपनाते हैं। ;खद्ध श्रम आंदोलनों का दबावः विगत शताब्दी में श्रमिक अिाक श्िाक्ष्िात एवं संगठित हो गए हैं। अतः श्रम संगठन संपूणर् विश्व में श्रमिकों को अिाक पफलदायी सि( हो रहे हैं। इस धारणा ने उन उद्योगपतियों को ‘रखो और निकालो’ की धारणा से बदल कर उनके हिताथर् कायर् करने के लिए बाध्य किया है। ;गद्ध उपभोक्ता जागरण का प्रभावः जन संपवर्फ साधनों तथा श्िाक्षा के विकास एवं बाजार में बढ़ती हुइर् प्रतियोगिता ने आज उपभोक्ता को अपने अिाकारों के प्रति अिाक जागरूक एवं अिाक सशक्त बना दिया है जिसके कारण ‘व्रेफता सावधान’ के सि(ांत को ‘व्रेफता बादशाह’ में परिवतिर्त कर दिया है। अतः व्यावसायियों ने ग्राहक उन्मुख नीतियों का पालन करना प्रारंभ कर दिया है। ;घद्ध व्यावसायियों के लिए सामाजिक मानकों का विकासः आज कोइर् भी व्यावसायिक इकाइर् अपने मनमाने ढंग या मनमाने मूल्य पर वस्तुओं का विक्रय नहीं कर सकती। नवीनतम सामाजिक मानकों के विकसित हो जाने से वििासंगत नियमोें का पालन करते हुए व्यवसायी सामाजिक आवश्यकता की वस्तुओं की पूतिर् करते हैं। कोइर् भी व्यवसाय समाज से पृथक नहीं हो सकता केवल समाज ही व्यवसाय को स्थायी बनाता है तथा वही उसे उन्नतशील बनाता है। यह केवल सामाजिक मानकों के आधार पर ही व्यावसायिक ियाकलापों का निणर्य होता है। ;घद्ध व्यावसायिक श्िाक्षा का विकासः व्यावसायिक श्िाक्षा के विकास ने समाज को सामाजिक उद्देश्यों के प्रति और अिाक जागरूक बना दिया है। आज श्िाक्षा के प्रसार ने समाज के विभ्िान्न अंगों जैसे उपभोक्ता, विनियोजक कमर्चारी अथवा स्वामी सभी को अिाक समझदार बना दिया है। पहले की अपेक्षा जब श्िाक्षा का अभाव था, आज सभी वगर् अपने हितों को अच्छी तरह पहचानते हैं। ;चद्ध सामाजिक हित तथा व्यावसायिक हितों में संबंधः आज व्यावसायिक उपक्रमों ने यह सोचना आरंभ कर दिया है कि सामाजिक हित तथा व्यावसायिक हित एक दूसरे के विरोधी, न होकर एक दूसरे के पूरक हैं। यह धारणा है कि व्यवसाय का विकास केवल समाज के शोषण करने से ही संभव है, आज पुरानी हो चुकी है। इसका स्थान इस मत ने लिया है कि व्यवसाय दीघर्काल तक तभी चल सकते हैं जब वे समाज की सेवा भली - भाँति करें। ;छद्ध पेशेवर एवं प्रबंधकीय वगर् का विकासः विश्वविद्यालयों तथा विश्िाष्ट प्रबंधन संस्थानों ने पेशेवर एवं प्रबंधकीय श्िाक्षा प्रदान कर एक विश्िाष्ट वगर् को जन्म दिया है जिसका सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति पृथक मत है जो सवर्था पूवर्कालीन मालिक/प्रबंधकों के वगर् से भ्िान्न है। पेशेवर प्रबंधक व्यवसाय के सपफलता पूवर्क संचालन के लिए केवल लाभ अजिर्त करने की अपेक्षा समाज के विविध हितों में अिाक रुचि लेते हैं। उपरोक्त एवं वुफछ अन्य सामाजिक एवं आथ्िार्क बल आपस में मिलकर व्यवसाय को एक सामाजिक - आथ्िार्क िया का रूप देते हैं। अब व्यवसाय मात्रा धंधा नहीं रह गया है बल्िक एक ऐसा आथ्िार्क संस्थान है जो लघुकालीन एवं दीघर्कालीन आथ्िार्क हितों की आवश्यकताओं का मिलान करता है, उस समाज की जहाँ वह कायर्रत होता है। तत्वतः यह वह है जो व्यावसायिक सामान्य एवं विश्िाष्ट सामाजिक उत्तरदायित्वों का उत्थान करता है। इस बात में कोइर् मतभेद नहीं है कि व्यवसाय एक आथ्िार्क िया है और वह उसे व्यवसाय अध्ययन प्रमाण्िात भी करता है। यह भी सत्य है कि व्यवसाय समाज का एक अंग है तथा उस कत्तर्व्य को वह समाज की आवश्यकताओं को निरंतर पूरा करके निभाता है। 6.4 सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रकार व्यवसाय के सामाजिक उत्तरदायित्वों को विस्तृत रूप से चार भागों में विभाजित किया जा सकता है। जो इस प्रकार से हैंः ;कद्ध आथ्िार्क उत्तरदायित्वः मूल रूप से व्यावसायिक उपक्रम एक आथ्िार्क इकाइर् है तथा इसका सबसे पहला उत्तरदायित्व उपभोक्ता वस्तुओं एवं सेवाओं का समाज को उपलब्ध् कर तथा लाभ पर विक्रय करके सुलभ कराना है, जिसकी समाज को आवश्यकता है। इस उत्तरदायित्व को निभाने में थोडे़ विवेक की आवश्यकता होती है। ;खद्ध कानूनी उत्तरदायित्वः प्रत्येक व्यवसाय का यह उत्तरदायित्व है कि वह देश के कानून का पालन करे क्योंकि ये कानून समाज के हित के लिए होते हैं। कानून का पालन करने वाला उद्यम सामाजिक उत्तरदायित्व का पालन करने वाला उद्यम होता है। ;गद्ध नैतिक उत्तरदायित्वः इसमें वह व्यवहार सम्िमलित है जिसकी समाज को व्यवसाय से अपेक्षा होती है लेकिन कानून से आब( नहीं होता। उदाहरणाथर् किसी भी उत्पाद का विज्ञापन करते समय मनुष्यों की धामिर्क भावनाओं का आदर करना। इस उत्तरदायित्व को पूरा करने के लिए स्वेच्छापूवर्क कायर् करने की भावना अपनानी होती है। ;घद्ध विवेकशील उत्तरदायित्वः यह पूणर्रूपेण स्वैच्िछक एवं बाध्यपूणर् उत्तरदायित्व है जिसे व्यवसाय अपनाते हैं। उदाहरणाथर् श्िाक्षण संस्थाओं के लिए दान देना अथवा बाढ़ या भूकंप पीडि़तों की सहायता करना। प्रबंधकों का यह कत्तर्व्य होता है कि पूँजीगत विनियोजन को सुरक्ष्िात रखने के लिए सट्टðेबाजी संबंधी सौदों से बचाकर स्वस्थ व्यावसायिक ियाओं में संलग्न रहें ताकि विनियोजन पर उचित लाभ मिलता रहे। 6.5 व्यवसाय का विभ्िान्न संबंिात वगो± के प्रति उत्तरदायित्व व्यवसाय के सामाजिक उद्देश्यों की पहचान कर लेने के उपरांत यह निश्िचत करना अत्यंत आवश्यक है कि एक व्यवसाय किसके प्रति कितना उत्तरदायी है। निश्िचत रूप से यह कहा जा सकता है कि व्यवसाय स्वयं यह तय करे कि उन्हें किस क्षेत्रा में कायर् करना है। उनमें से वुफछ निम्न प्रकार हैंः ;कद्ध व्यवसाय का अंशधारियोें अथवा स्वामियों के प्रति उत्तरदायित्वः एक व्यवसाय का यह उत्तरदायित्व है कि वह स्वामियों अथवा अंशधारियों को उनके द्वारा विनियोजित पूँजी पर उचित प्रतिपफल दे तथा इसका विश्वास दिलाए कि उनकी विनियोजित पूँजी व्यवसाय में सुरक्ष्िात है। एक निगमित निकाय के रूप में एक कंपनी का यह भी कतर्व्य है कि वह अंशधारियांे को कंपनी की कायर्शैली तथा भविष्य में विकास की योजना के विषय में नियमित एवं सही सूचना दे। ;खद्ध कमर्चारियों के प्रति उत्तरदायित्वः एक उद्यम के प्रबंधकों का यह भी उत्तरदायित्व है कि वे कमर्चारियों को अथर्पूणर् कायर् के सुअवसर प्रदान करें। प्रबंधकों को कमर्चारियों का सहयोग प्राप्त करने के लिए सही ढंग के कायर् दशाओं का सृजन करना चाहिए। व्यवसाय को चाहिए कि वह कमर्चारियों को श्रम संगठन बनाने में प्रजातांत्रिाक अिाकारों का उपयोग करने के लिए हाथ बढ़ाए। श्रमिकों को उचित वेतन तथा उचित व्यवहार का प्रबंधकों से भरोसा मिलना चाहिए। ;गद्ध उपभोक्ताओं के प्रति उत्तरदायित्वः उपभोक्ताओं को उत्तम किस्म की वस्तु/सेवाएँ उचित मूल्य पर, उचित समय तथा उचित मात्रा में उपलब्ध कराने का व्यवसाय का महत्त्वपूणर् उत्तरदायित्व है। व्यवसाय को मिलावट करने के विरु( सतकर्ता बरतने, निम्न स्तर के माल की पूतिर् न होने देना, आवश्यक सेवाओं की पूतिर् में कमी न होने देना तथा ग्राहकों से श्िाष्टाचार का बतार्व करने एवं धोखापूणर् तथा अविश्वसनीय विज्ञापन पर रोक लगाने आदि कायो± के संपादन का भी उत्तरदायित्व है। उपभोक्ताओं को उत्पाद से संबंिात सूचनाएँ पाने का अिाकार तथा कंपनी के क्रय आदि कायोर्ं से संबंिात सूचनाएँ भी अवश्य मिलनी चाहिए। ;घद्ध सरकार तथा समाज के प्रति उत्तरदायित्वः देश के कानूनों का पालन करना तथा करों का सरकार को समयानुसार इर्मानदारी से भुगतान करने का भी व्यवसाय का उत्तरदायित्व है। उसे देश के एक अच्छे नागरिक की तरह व्यवहार करना चाहिए तथा सामाजिक रीति रिवाजों के पालन हेतु उचित कदम उठाने चाहिए। कारखानों की चिमनियों से निकलने वाला धुआँ तथा उनके गंदे पानी से वायु तथा पानी को प्रदूष्िात होने से बचाना चाहिए जिससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव न पडे़। 6.6 व्यवसाय तथा पयार्वरण संरक्षण पयार्वरण संरक्षण एक विषम समस्या है जो व्यावसायिक प्रबंधकोें तथा निणर्ायकों को साहस के साथ सामना करने के लिए प्रेरित करती है। पयार्वरण की परिभाषा में मनुष्य के आस - पास के प्राकृतिक तथा मानव - निमिर्त दोनों ही वातावरण को सम्िमलित किया जाता है। ये वातावरण प्राकृतिक संसाध्नों में है और जो मानव - जीवन के लिए उपयोगी है। ;कद्ध इन संसाध्नों को प्राकृतिक संसाध्न भी कहा जा सकता है जिसमें भूमि, जल हवा, वनस्पति तथा कच्चा माल इत्यादि सम्िमलित हैं। ;खद्ध मानव - निमिर्त संसाध्न जैसे सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक - आथ्िार्क संस्थान तथा मनुष्य इत्यादि। पयार्वरण जिसमें भूमि, जल, वायु, मनुष्य, पेड़ - पौधे तथा पशु - पक्षी सभी को सम्िमलित किया जाता है, को व्यवसाय अध्ययन पतन से बचाते हुए इनका संरक्षण करना आवश्यक होता है ताकि वातावरण के संतुलन को बनाया रखा जा सके। एक प्राकृतिक संसाधन जिनमें भूमि, जल तथा वायु कच्चा माल आदि आते हैं तो दूसरा मनुष्यों के प्रयासोें से रचित सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एवं आथ्िार्क संस्थान तथा मनुष्य की गणना की जाती है। यह सवर्विदित है कि शु( वातावरण का बड़ी तीव्र गति से ह्रास हो रहा है जिसके कारण विशेषतः औद्योगिक गतिविध्ियों में वृि है। सामान्यतः देश के महानगरों का जैसे कानपुर, जयपुर, दिल्ली, पानीपत, कोलकाता तथा अन्य नगरोें मंे यह आम दृश्य है। इन महानगरों के कारखानों से निकले उत्सजर्न मनुष्य जाति के स्वास्थ्य पर वुफप्रभाव डालते हैं। यद्यपि वुफछ छीजन का उपयोग कच्चे माल तथा ऊजार् के रूप में, अपरिहायर् है लेकिन उत्पादकों के लिए इसके प्रयोग से वुफप्रभावों को कम करना एक बड़ी समस्या है। पयार्वरण संरक्षण हम सभी के लिए उपयोगी है। प्रदूषण भौतिक, रासायनिक तथा जैविक लक्षणों जैसे हवा, भूमि तथा जल में बदलाव लाता है। प्रदूषण मानव जीवन के लिए हानिकारक तथा अन्य वगोर्ं के जीवन को नष्ट करने वाला है। यह जीवन स्तर को गिराता है तथा सांस्कृतिक विरासतों को भी हानि पहुँचाता है। पयार्वरण केवल सीमित प्रदूषण को ही समाप्त कर पाता है। अतः यह बढ़ता ही जाता है। वायु प्रदूषण मुख्यतः रासायनिक क्षय तथा कूडे़ - कचरे को नदियों में प्रवाहित करने से होता है। दुग±धमय क्षण तथा भारी प्रदूष्िात सामग्री एकत्रिात होने से भूमि क्षतिग्रस्त होती है। प्रदूषण के कारण वातावरणीय ह्रास होता है तथा मानव स्वास्थ्य एवं प्राकृतिक एवं बनावटी संसाधनों को हानि पहुँचती है। वातावरण की सुरक्षा का प्रत्यक्ष संबंध प्रदूषण नियंत्राण से है। 6.6.1 प्रदूषण के कारण आज के युग में चाहे वह सरकारी क्षेत्रा हो या निजी, जिनमें उद्योग, सरकार, कृष्िा, खनन, ऊजार्, यातायात, निणार्यक उद्योग तथा उपभोक्ता सम्िमलित हैं, सभी गंदगी पफैलाते हैं तथा कूड़ा करकट पफैलाते हैं। इन प्रदूष्िात करने वाली वस्तुओं में उत्पादन के समय छाँट कर अलग निकाली गयी वस्तुएँ या उपभोक्ताओं द्वारा परित्यक्त वस्तुएँ होती हंै। इन्हीं वस्तुओं के द्वारा प्रदूषण उत्पन्न होता हैं। अन्य प्रदूषण के कारणों में उद्योग सवोर्परि है। व्यावसायिक ियाओं में उत्पादन - वितरण, यातायात, गोदाम, वस्तुओं का उपभोग तथा सेवाएँ भी मुख्य स्थान रखती हैं। बहुत सी व्यावसायिक इकाइयाँ ;कद्ध हवा ;खद्ध जल ;गद्ध भूमि एवं ;घद्ध शोर प्रदूषण के लिए उत्तरदायी पाइर् गइर् हैं। इस प्रकार के प्रदूषण के कारणों को नीचे समझाया गया हैः ;कद्ध वायु प्रदूषणः वायु प्रदूषण वह है जब बहुत से तत्व मिलकर वायु की गुणवत्ता को कम कर देते हैं। मोटर वाहनों द्वारा छोड़ा गया काबर्न मोनो आॅक्साइड वायु प्रदूषण पफैलाता है। कारखानों से निकला हुआ धुआँ प्रदूषण पफैलाता है। ;खद्ध जल प्रदूषणः पानी मुख्यतः रसायन एवं कचरा के ढलाव से प्रदूष्िात हो जाता है। वषोर्ं से व्यवसायों एवं शहरों का कचरा नदियों एवं झीलों में बिना परिणाम की परवाह किए पेंफका जाता रहा है। जल प्रदूषण के कारण प्रतिवषर् हजारों पशुओं की मृत्यु हो जाती है और यह मानव जीवन के लिए गंभीर चेतावनी है। पयार्वरण समस्याएँ संयुक्त राष्ट्र ने प्राकृतिक पयार्वरण को हानि पहुँचाने वाली आठ समस्याओं की पहचान की है। ;कद्ध ओजोन ;विशेष गंधयुक्त धनी आॅक्सीजनद्ध क्षय ;खद्ध भूमण्डलीय उष्मीकरण/उष्णता ;गद्ध अनवरत अवशेष खतरनाक ;घद्ध जल प्रदूषण ;घद्ध ताजे जल की मात्रा एवं गुणवत्ता ;चद्ध वनोन्मूलन ;छद्ध भूमि निम्नीकरण ;क्षयद्ध ;जद्ध जैविक परिवतर्नों का भय ;गद्धभूमि प्रदूषणः इस प्रदूषण का कारण कचरे को भूमि के अंदर गाड़ देने से होता है। इसके कारण भूमि की गुणवत्ता तो नष्ट होती ही है, भूमि की उवर्रा शक्ित भी कम हो जाती है। भूमि की जो गुणवत्ता पहले ही नष्ट हो चुकी है वह मानव जाति के लिए आज के समय में बहुत बड़ी चुनौती बन गइर् है। ;घद्ध ध्वनि प्रदूषणः पफैक्टरियों तथा मोटर गाडि़यों से निकलती हुइर् ध्वनि केवल खीझ का स्रोत ही नहीं है, बल्िक स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए एक चेतावनी है। ध्वनि प्रदूषण के कारण बहुत सी बीमारियाँ हो सकती हैं जैसे कम सुनना, दिल की बीमारी लगना तथा मानसिक असंतुलन इत्यादि। 6.6.2 प्रदूषण नियंत्राण की आवश्यकता मानव जाति तथा अन्य जीव - धारियों के लिए वायु, जल तथा हवा अत्यंत आवश्यक तत्व हैं या यह कहा जाए कि इनके बिना जीवन असंभव है तो यह कहना भी गलत नहीं होगा। इन जीवनदायी तत्त्वों को कितनी क्षति पहँुची है यह इस बात पर निभर्र करता है कि प्रदूषण किस प्रकार का है। प्रदूषण पफैलाने वाले तत्वों को कितनी मात्रा मंे नष्ट कर दिया गया है तथा हमारे माध्यम प्रदूषण स्रोत से कितनी दूरी पर हैं। इस प्रकार की क्षति पयार्वरण गुणवत्ता में परिवतर्न कर देती है तथा जीवन को दुष्कर बना देती है। इस प्रकार से वायु मनुष्य के लिए सांस लेने में हानिकारक हो सकती है। पानी पीने के योग्य नहीं रहता तथा भूमि धरती माता न रहकर विषैले पदाथर् उगलने वाली बन जाती व्यवसाय अध्ययन है। अतः यह आवश्यक हो जाता है कि प्रदूषण रोकने के लिए वुफछ आवश्यक कदम उठाये जाएं ताकि मानव जीवन सुखी एवं संपन्न रह सके। प्रदूषण को नियत्रिात करने के वुफछ मुख्य कारण निम्नलिख्िात हैंः ;कद्धस्वास्थ्य संबंधी आशंकाओं को कम करनाः वैंफसर, हृदय एवं पफेपफड़ों से संबंिात बीमारियाँ हमारे समाज में मृत्यु के प्रमुख कारण हैं तथा ये बीमारियाँ वातावरण में दूष्िात तत्वों के कारण हैं। प्रदूषण नियंत्राण उपाय ऐसी बीमारियों की भंयकरता को ही नहीं रोकते, बल्िक मानव - जीवन को सुखी बनाने में भी सहायक होते हैं तथा स्वास्थ्य जीवन जीने का सुअवसर प्रदान करते हैं। ;खद्ध दायित्वों के जोख्िाम को कम करनाः यह संभावना हो सकती है कि व्यावसायिक इकाइयों को विषाक्त गैस आदि से पीडि़त कमर्चारियों को क्षतिपूतिर् करने के लिए उत्तरदायी बना दिया जाए जिन्होंने प्रदूषण पफैलाया है। अतः यह आवश्यक है कि दायित्वों के जोख्िामों को कम करने के लिए पफैक्टरी में तथा भवनों के अन्य भागों में प्रदूषण नियंत्राण उपकरण स्थापित किए जाएँ। ;गद्धलागत में बचतः एक प्रभावी प्रदूषण नियंत्राण कायर्क्रम उत्पादन लागत को कम करने के लिए भी आवश्यक है। यह उस समय अिाक आवश्यक है जब उत्पादन इकाइर्, उत्पादन िया में अिाक कचरा छोड़ रही हो। ऐसी अवस्था में कचरे तथा मशीन की सपफाइर् में अिाक धन व्यय करना पड़ेगा, जिसे सही प्रदूषण नियंत्राण उपकरणों द्वारा बचाया जा सकता है। ;घद्ध सावर्जनिक छवि में सुधरः आज जनता वातावरण की गुणवत्ता के बारे में अिाक जागरूक है। कचरे के नियंत्राण संबंधी अच्छी नीतियों के विषय में जानकर जनता और अिाक प्रभावित होती है। जब एक व्यावसायिक संस्था वातावरण को अच्छा बनाने का उत्तरदायित्व स्वयं ग्रहण कर लेती है तो उस संस्था की सावर्जनिक प्रतिष्ठा एक सावर्जनिक कतर्व्यनिष्ठ उद्यम के रूप में उभरती है। ;घद्ध अन्य सामाजिक हित/लाभः प्रदूषण नियंत्राण के अन्य भी बहुत से हित/लाभ प्राप्त होते हैं उदाहरणाथर् - स्पष्ट दृश्यता, स्वच्छ इमारतें, उच्च कोटि का जीवन स्तर तथा प्राकृतिक उत्पादों की शु( रूप में उपलब्धता। 6.6.3 पयार्वरण संरक्षण में व्यवसाय की भूमिका पयार्वरण का स्वरूप हम सभी के लिए महत्त्वपूणर् है। इसको नष्ट होने से बचाने का उत्तरदायित्व हम सभी का है। चाहे वह स्वयं सरकार हो, व्यावसायिक उद्यम हों, उपभोक्ता हों, कमर्चारी हों या समाज के अन्य सदस्य, सभी को इसे प्रदूष्िात होने से बचाने के लिए वुफछ न वुफछ अवश्य करना चाहिए। खतरनाक प्रदूषण उत्पादों पर रोक लगाने के लिए सरकार अिानियम बना सकती है। उपभोक्ता, कमर्चारी तथा समाज के सदस्य ऐसे उत्पादों के उपभोग को बंद कर सकते हैं जो पयार्वरण के लिए घातक हैं। पयार्वरण संबंधी समस्याओं को सुलझाने के लिए व्यावसायिक इकाइयों को स्वयं आगे आना चाहिए। व्यावसायिक इकाइयों की यह भी सामाजिक जिम्मेदारी है कि वे केवल प्रदूषण जनित बातों पर ही ध्यान वेंफदि्रत न करें बल्िक पयार्वरण संसाधनांे की सुरक्षा का भी उत्तरदायित्व अपने ऊपर लें। व्यावसायिक इकाइयाँ धन की सृजनकतार्, रोजगारदाता तथा भौतिक एवं मानवीय संसाधनों को संभालने वाली संस्थाएँ हैं। वे यह भी समझती हैं कि प्रदूषण नियंत्राण से संबंिात समस्याओं को वैफसे सुलझाया जा सकता है जिसमें उत्पादन प्रिया में परिवतर्न करके, संयंत्रों के रूप में बदलाव करके, घटिया किस्म के कच्चे माल के प्रयोग के स्थान पर उच्च कोटि के कच्चे माल का प्रयोग करके, प्रदूषण को नियंत्रिात करने में सहायता प्रदान कर सकती हैं। प्रदूषण नियंत्राण के वुफछ उपाय निम्नलिख्िात हैंः ;कद्ध उच्च स्तरीय प्रबंधकों द्वारा पयार्वरण सुरक्षा तथा प्रदूषण नियंत्राण के लिए वचनब( होकर कायर् करना। ;खद्ध इस बात का विश्वास दिलाना कि उद्यम की प्रत्येक इकाइर् पयार्वरण सुरक्षा तथा प्रदूषण नियंत्राण के लिए वचनब( है। ;गद्ध अच्छे किस्म के कच्चे माल के क्रय के लिए नियम बनाना, उच्च कोटि की तकनीक अपनाना, कचरे के निष्पादन के लिए वैज्ञानिक तकनीक अपनाना ताकि प्रदूषण का नियंत्राण हो। ;घद्ध प्रदूषण नियंत्राण से संबंिात सरकार द्वारा बनाये गए नियमों का पालन करना। ;घद्ध जोख्िाम भरे द्रव्य पदाथोर्ं का उचित व्यवस्था हेतु सरकारी कायर्क्रमों में सहयोग करना। इनमें प्रदूष्िात नदियों की सपफाइर्, वृक्षारोपण तथा वनों की कटाइर् को रोकना आदि हो सकते हैं। ;चद्ध समय - समय पर प्रदूषण नियंत्राण कायर्क्रम का लागत एवं प्रतिपफल का मूल्यांकन करना ताकि पयार्वरण सुरक्षा हेतु प्रगतिशील कायर्वाही की जा सके। ;छद्ध प्रदूषण नियंत्राण कायर्क्रम के सपफल ियान्वयन हेतु आपूतिर्कतार्, डीलसर् तथा व्यवसाय अध्ययन क्रेताओं के तकनीकी ज्ञान तथा अनुभवों का लाभ प्राप्त करने हेतु समय पर कायर्शालाओं का आयोजन करना। 6.7 व्यावसायिक नैतिकता सामाजिक दृष्िटकोण से व्यवसाय का मुख्य कायर् समाज को आवश्यक वस्तुएँ एवं सेवाएँ उपलब्ध कराना है। व्यक्ितगत दृष्िटकोण से भारत में प्रदूषण नियंत्राण ;सरकारी कदमद्ध 1.कानूनः भारतीय संविधन में पयार्वरण सुरक्षा पर बल हेतु सरकारी ;कद्ध नीति में दिए गए निदेशात्मक सि(ांत। उनमें से वुफछ निम्नानुसार हैः वन्य जीवन सुरक्षा अध्िनियम 1972ऋ 2.जल ;प्रदूषण निवारण एवं नियंत्राणद्ध अध्िनियम 1974, संशोध्ित 1974 तथा 1988ऋ 3.वायु ;प्रदूषण निवारण एवं नियंत्राणद्ध अध्िनियम 1974, संशोध्ित 1974 तथा 1988ऋ 4.पयार्वरण ;सुरक्षाद्ध अध्िनियम 1986ऋ 5.वन संरक्षण अध्िनियम 1980 संशोध्ित 1988ऋ 6.जोख्िामपूणर् कचरा अध्िनियम 1989ऋ ;खद्ध विनियम - सरकार द्वारा प्रशासनिक आदेश/पाॅलिसी मागर् दशर्न निधर्रण, सरकार द्वारा 1980 में पयार्वरण विभाग का पृथक निमार्ण। ;गद्ध नियंत्राक ;रैगूलेटरीद्ध निकायों अथवा कल्प - न्यायिक प्राध्िकरणों की स्थापना ;कद्ध राष्ट्रीय वृक्षारोपण तथा ध्वनि विकास बोडर्, तथा ;खद्ध राष्ट्रीय बंजर भूमि विकास बोडर्। 4.शहरों में निमार्ण उद्योगों को बंद कर दिया गया है। दिल्ली हाइर् कोटर् के आदेश से सभी निमार्णी उद्योगों को बंद कर दिया गया है। दिल्ली हाइर् कोटर् ने सभी उत्पादक इकाइयों को शहर से बाहर ले जाने के लिए आदेश दिया हुआ है। ठीक इसी प्रकार आगरा शहर से पफाउंड्रीस को कोटर् द्वारा बाहर ले जाने के लिए आदेश पारित किये हुए हैं। कानपुर की निमार्णी इकाइयों को भी बाहर ले जाने के आदेश किए गए हैं। 5.पयार्वरण श्िाक्षा पर बहुत से कायर्क्रम तथा विचार गोष्िठयों का आयोजन ताकि साध्नों तथा जागरूकता का सृजन हो सके। 6.सरकार ने पयार्वरण कायर्वाही योजना ;इर्.ए.पी.द्ध का भी शुभारंभ किया है। व्यावसायिक इकाइयों का मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना है। यह भी कहा जा सकता है कि व्यावसायिक इकाइर् के मुख्य उद्देश्य तथा सामाजिक उद्देश्यों में टकराव नहीं होना चाहिए। यद्यपि व्यावसायिक इकाइयों के संचालनकतार्ओं के निणर्य एवं ियाकलाप सदैव जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप होंगेे यह सदैव सही नहीं है। एक उद्यम आथ्िार्क कायो± ;जैसे आय, लागत तथा लाभद्ध में बहुत उच्च कोटि का हो सकता है, लेकिन सामाजिक कायर् पालन में उतना अच्छा नहीं हो जैसे उत्पाद की पूतिर् उचित मात्रा में उचित मूल्य पर करना। इससे यह प्रश्न सामने खड़ा हो जाता है कि सामाजिक दृष्िटकोण से क्या उचित है तथा क्या अनुचित। इस प्रश्न का उत्तर इसलिए और भी आवश्यक है कि व्यावसायिक उद्यमों का जन्म समाज से होता है तथा वे समाज से ही प्रभावित होते हैं। अतः उन्हें अपने आप को स्थापित करने तथा अपने बारे में व्याख्या करने के लिए सामाजिक मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए। व्यावसायिक नैतिकता व्यक्ितगत हितों तथा सामाजिक हितों में सामंजस्य स्थापित करने की एक वििा है। 6.7.1 व्यावसायिक नैतिकता की अवधारणा नैतिकता शब्द का मूल ग्रीक शब्द ‘एथ्िाक्स’ है जिसका अथर् चरित्रा मानक, आदशर् या नैतिकता से है जो एक समाज में प्रचलित होते हैं। यदि हम एक कायर्, निणर्य या व्यवहार को नैतिक मानें जो समाज की मान्यताओं या सि(ांतों के अनुरूप है तो यह नैतिक ही होगा। इससे इस बात को बल मिलेगा कि क्या यह अपने आप मंे पूणर् सि(ांत अपने आप में पूणर् नैतिक मूल्य हैं। दूसरी ओर बहुतों का यह मानना है कि हमारे समाज में विगत वुफछ वषो± में व्यवहार में तीन समरूपी अवधरणाओं का उद्गम ;कद्ध सामूहिक निगमित सामाजिक उत्तरदायित्वः इसका उद्गम यू.एस.ए. में हुआ जहाँ सरकार ने एकाध्िकारी प्रवृतियों के विरु( ‘एंटी - ट्रस्ट एक्ट’ पास किया था ताकि समाज की सुरक्षा एवं उन्नति संभव हो सके। ;खद्ध व्यावसायिक नैतिकताः इसका प्रारंभ भी 1970 में यू.एस.ए. में ही हुआ था। सामाजिक मूल्यों एवं समाज से संबंध्ित व्यावसायिक नैतिकता की मुख्य बातें उस देश के व्यवसायों के नियमों का पालन करने के लिए तथा जो बातें उपभोक्ताओं के प्रतिकूल हैं उनका तिरस्कार करने के लिए बाध्य करती हैं अथवा जो उपभोक्ता संरक्षण तथा वातावरण सुरक्षा के प्रतिकूल हैं उनका त्याग करने के लिए भी बाध्य करती हैं। ;गद्ध निगमित शासनः इसका प्रारंभ यू.के. में संचालकों की अंशधरियों के प्रति अध्िक जिम्मेदारी के उद्देश्य से हुआ था। जिसमें अंशधरियों के हितों की सुरक्षा के लिए पारदशीर् अंकेक्षण तथा स्वतंत्रा संचालकों, चेयरमैन तथा मैनेजिंग डाइरेक्टर की भूमिका के विभाजन पर अध्िक जोर दिया गया है। मूल्यों में परिवतर्न आया है। यद्यपि वुफछ परिपूणर् मूल्यों पर हम सहमत हो सकते हैं। जो सि(ांत व्यवसाय के लिए अिाक कठोर हुए हैं उनके उदाहरण हैं - लोगों से वैफसे व्यवहार किया जाए, पयार्वरण संरक्षण कायर्स्थल पर सुरक्षा एवं कमर्चारियों के अिाकार आदि। इन सब में वुफछ समय से परिवतर्न आया है, यह हम स्पष्ट देख सकते हैं। व्यावसायिक नैतिकता का सीधा संबंध व्यावसायिक उद्देश्य, चलन तथा तकनीक से है जो समाज के साथ - साथ चलन में रहते हैं। एक व्यावसायिक इकाइर् को चाहिए कि वह सही मूल्य वसूल करे, सही तोल कर दे, ग्राहकों से सद्भावनापूणर् व्यवहार करे। नैतिकता में मानवीय कायो± का यह निश्िचत करने के लिए आलोचनात्मक विश्लेषण किया जाता है कि वे सत्य एवं न्याय दो महत्त्वपूणर् मानदंडों के आधार पर सही हैं या गलत। विश्व में यह धारणा प्रबल हो चुकी है कि समाज के विकास के लिए व्यावसायिक इकाइयों द्वारा नैतिक मूल्यों का पालन अति आवश्यक व्यवसाय अध्ययन है। नैतिकतापूणर् व्यवसाय एक अच्छा व्यवसाय होता है। यह जनता में विश्वास पैदा करता है तथा अपनी साख में वृि भी करता है। लोगों में विश्वास जगाकर अिाक लाभ अजिर्त करता है। नैतिकता का पालन हमारे जीवन स्तर को ऊपर उठाने में सहायक तथा जो कायर् हम करते हैं उसे सराहना भी मिलती है। व्यावसायिक नैतिकता के तत्वः यद्यपि नैतिकतापूणर् व्यावसायिक व्यवहार व्यावसायिक उद्यमों तथा समाज दोनों के हित में है। इससे इस भावना को प्रोत्साहन मिलता है कि उद्यम अपने दैनिक ियाकलापों में किस प्रकार इन्हें अपना सकते हैं। एक संचालित व्यावसायिक उद्यम के व्यावसायिक नैतिकता के मूल तत्त्व निम्नांकित हैंः ;कद्ध उच्च स्तरीय प्रबंध की प्रतिब(ताः उच्च स्तरीय प्रबंध की नैतिकता के व्यवहार के विषय में संगठन में समझाने की भूमिका बड़ी निणार्यक होती है। परिणामों को प्राप्त करने के लिए मुख्य कायर्कारी अिाकारी तथा नैतिकता के आधरभूत नियम यह सावर्जनिक रूप से विदित है कि प्रत्येक मनुष्य अपने जीवन में इर्मानदारी, नैतिकता आदि को अपनाता है, विकसित करता है तथा प्रयोग में लाता है। ;कद्ध इर्मानदार होना। ;खद्ध दूसरों के प्रति आदर भाव होना। ;गद्ध उत्तरदायित्व को स्वीकार करना। ;घद्ध व्यवहार वुफशल होना। ;घद्ध दूसरों से व्यवहार में सतकर्ता का बतार्व करना। ;चद्ध अपने आप को एक सच्चा नागरिक, सदाचारी तथा कतर्व्य परायण सि( करना। अन्य उच्च स्तरीय प्रबंधकों को निश्िचत रूप से तथा दृढ़तापूवर्क नैतिकता के व्यवहार के लिए वचनब( होना चाहिए। उन्हें संगठन के मूल्यों के विकास तथा अनुरक्षण के लिए सदैव अपना नेतृत्व अवरु( गति से प्रदान करते रहना चाहिए। ;खद्ध सामान्य कोड का प्रकाशनः ये वे उद्यम जिनके पास प्रभावी नैतिक कायर्क्रम हैं वे सभी संगठनों के लिए नैतिक सि(ांतों को लिख्िात प्रलेखों के रूप में परिभाष्िात करते हैं जिन्हें ‘कोड’ कहा जाता है। वुफछ नैतिक मूल्यों जैसे आधारभूत इर्मानदारी कानून पालन, उत्पादन सुरक्षा एवं कोटि, कायर्स्थल पर सुरक्षा हितों का टकराव, नियोजन वििायाँ, बाजार की उचित विक्रय प्रणाली तथा वित्तीय प्रतिवेदन आदि के विषय में कानूनी प्रकाशन होने इत्यादि को सम्िमलित करते हैं। ;गद्ध अनुपालन तंत्रा की स्थापनाः यह निश्िचत करने के लिए कि वास्तविक निणर्य तथा कायोर्ं का निरूपण पफमर् के नैतिक स्तरों के अनुसार किया जाता है, उचित यंत्रा निमार्ण कला मुख्य शब्दावलीः की स्थापना करनी चाहिए। इसके वुफछ उदाहरण हैं भतीर् तथा भाडे़ पर श्रम लेने के लिए नैतिक मूल्यों की ओर ध्यान देना। प्रश्िाक्षण के समय नैतिकतापूणर् व्यवहार करना तथा अनैतिक कायो± के विषय में कमर्चारियों को सूचित करना। ;घद्ध हर स्तर पर कमर्चारियों को सम्िमलित करनाः व्यवसाय को नैतिकता का वास्तविक रूप देने के लिए कमर्चारियों को हर स्तर पर सम्िमलित किया जाना चाहिए ताकि उनकी संब(ता नैतिक कायर्क्रमों में भी हो सके। पफमर् की नैतिक नीतियों के निधार्रण में कमर्चारियों के छोटे गुटों को सम्िमलित किया जाना चाहिए तथा उनके रुझान का मूल्यांकन भी किया जाना चाहिए। ;घद्ध परिणामों का मापनः यद्यपि यह बहुत ही कठिन कायर् है कि नैतिक कायर्क्रमों की माप की जाए लेकिन पिफर भी पफमंेर् वुफछ मानक स्थापित करके ऐसा कर सकती हैं। भविष्य की कायर्वाही में विषय में उच्च - स्तरीय प्रबंधक तथा कमर्चारियों की टीम इस विषय में वाद - विवाद कर सकते हैं। सामाजिक उत्तरदायित्व कानूनी उत्तरदायित्व ध्वनि प्रदूषण वातावरण प्रदूषण नैतिकता वातावरण संरक्षण वायु प्रदूषण व्यावसायिक नैतिकता जल प्रदूषण भूमि प्रदूषण नैतिकता की आचार संहिता सारांश सामाजिक उत्तरदायित्व की अवधरणाः व्यवसाय के सामाजिक उत्तरदायित्व का अथर् उन नीतियों का अनुसरण करना, उन निणर्यों को लेना अथवा उन कायोर्ं को करना है जो समाज के लक्ष्यों एवं मूल्यों की दृष्िट से वांछनीय हैं। सामाजिक उत्तरदायित्व की आवश्यकताः व्यवसाय के सामाजिक उत्तरदायित्व की आवश्यकता का आविभार्व पफमर् के हित तथा समाज के हित के कारण होता है। सामाजिक उत्तरदायित्व के पक्ष में तकर्ः मुख्य तकर् हैं ;कद्ध अस्ितत्व एवं विकास के लिए औचित्य, ;खद्ध दीघर्कालीन हित तथा पफमर् की छवि, ;गद्ध सरकारी विनिमयन से बचाव, ;घद्ध समाज का रखरखाव, ;घद्ध व्यवसाय के संसाध्नों की उपलब्ध्ता, ;चद्ध समस्याओं का लाभकारी अवसरों में रूपांतरण, ;छद्ध व्यापारिक गतिविध्ियों के लिए बेहतर वातावरण, ;जद्ध सामाजिक समस्याओं के लिए व्यवसाय उत्तरदायी। सामाजिक उत्तरदायित्व के विपक्ष में तवर्फः सामाजिक उत्तरदायित्व के विपक्ष में मुख्य तकर् है ;कद्ध अध्िकतम लाभ उद्देश्य पर अतिक्रमण, ;खद्ध उपभोक्ताओं पर भार, ;गद्ध सामाजिक दक्षता की कमी, एवं ;घद्ध विशाल जन समथर्न का अभाव। सामाजिक उत्तरदायित्व की यथाथर्वादिताः सामाजिक उत्तरदायित्व की वास्तविकता यह है कि सामाजिक उत्तरदायित्व से संबंध्ित अलग - अलग तको± के होते हुए भी व्यावसायिक उद्यम वुफछ बा“य ताकतों के प्रभाव के कारण, सामाजिक उत्तरदायी होने के लिए बाध्य हंै। ये ताकतें हैंः ;कद्ध सावर्जनिक नियमन की आशंका, ;खद्ध श्रम आंदोलन का दबाव, ;गद्ध उपभोक्ता जागरण का प्रभाव, ;घद्ध व्यावसायियों के लिए सामाजिक मानकों का विकास ;घद्ध व्यावसायिक श्िाक्षा का विकास, ;चद्ध सामाजिक हित तथा व्यावसायिक हितों में संबंध ;छद्ध पेशेवर एवं प्रबंध्कीय वगर् का विकास। व्यवसाय का विभ्िान्न संबंध्ित वगोर्ं के प्रति उत्तरदायित्व व्यावसायिक उद्यमों का निम्न के प्रति उत्तरदायित्व होता हैः ;कद्ध अंशधरी अथवा स्वामी ;खद्ध कमर्चारी ;गद्ध उपभोक्ता ;घद्ध सरकार तथा समाज अंशधरियों को उनके द्वारा विनियोजित पूँजी पर उचित प्रतिपफल, विनियोजित पूँजी की सुरक्षा, कमर्चारियों को अथर्पूणर् कायर् के सुअवसर प्रदान करके उपभोक्ताओं को उत्तम किस्म की वस्तुएँ/सेवाएँ उचित मूल्य पर, उचित समय तथा उचित मात्रा में उपलब्ध् कराना, सरकार को समयानुसार करों का भुगतान तथा वातावरण संरक्षण इत्यादि व्यवसाय के वुफछ सामाजिक उत्तदायित्व हैं। व्यवसाय तथा पयार्वरण संरक्षणः पयार्वरण संरक्षण एक विषम समस्या है जो व्यवसायिक प्रबंधकों तथा निणार्यकों को साहस के साथ सामना करने के लिए प्रेरित करती है। पयार्वरण की परिभाषा में मनुष्य के आस - पास के प्राकृतिक तथा मानव - निमिर्त दोनों ही वातावरण को सम्िमलित किया जाता है। प्रदूषण - वातावरण में हानिकारक तत्वों का मिलना विस्तृत रूप से वास्तव में औद्यौगिक उत्पादन का परिणाम है। प्रदूषण मानव - जीवन के लिए हानिकारक तथा अन्य वगोर्ं के जीवन को भी नष्ट करने वाला है। प्रदूषण के कारणः अन्य प्रदूषण के कारणों में उद्योग सवोर्परि है, मात्रा एवं विषाक्तता के परिपेक्ष्य में उद्योग अपश्िाष्ट पदाथोर्ं का एक मुख्य उत्सजर्क है। ऐसे बहुत सी व्यावसायिक उद्यम हैं जो वायु, जल, भूमि तथा ध्वनि प्रदूषण के लिए जिम्मेवार हैं। प्रदूषण - नियंत्राण की आवश्यकताः प्रदूषण को नियंत्रिात करने के वुफछ मुख्य कारण हैंऋ ;कद्ध स्वास्थ्य संबंध्ी आशंकाओं को कम करना, ;खद्ध दायित्वों की जोख्िाम को कम करना, ;गद्ध लागत में बचत, तथा ;घद्ध अन्य सामाजिक हित/लाभ। पयार्वरण संरक्षण में व्यवसाय की भूमिकाः समाज का प्रत्येक व्यक्ित पयार्वरण के संरक्षण के लिए वुफछ न वुफछ कर सकता है। पयार्वरण संबंध्ी समस्याओं को सुलझाने के लिए व्यावसायिक इकाइयों को स्वयं पहल करनी चाहिए। वुफछ कदम जो वे उठा सकते हैं, वे हैं - उच्च स्तरीय प्रबंध् की प्रतिब(ता, स्पष्ट नीतियाँ एवं कायर्क्रम, सरकारी नियमों का पालन करना, सरकारी कायर्क्रमों में भागीदारी, समय - समय पर पयार्वरण - नियंत्राण, कायर्क्रम का मूल्यांकन तथा संबंिात व्यक्ितयों की समुचित श्िाक्षा तथा प्रश्िाक्षण। व्यावसायिक नैतिकता की अवधरणाः नैतिकता का संबंध समाज द्वारा निधर्रित व्यवहार के मानकों के आधर पर यह निणर्य लेने से है कि कौन सा मानवीय व्यवहार उचित या अनुचित है। व्यावसायिक नैतिकता के तत्वः वुफछ मूल व्यावसायिक नैतिकता के तत्वों को अपनाकर कोइर् भी उद्यम, कायर्स्थल पर व्यावसायिक नैतिकता को प्रोत्साहित कर सकती है जैसे - ;कद्ध उच्च स्तरीय प्रबंध् की प्रतिब(ता, ;खद्ध कोड का प्रकाशन, ;गद्ध अनुपालन तंत्रा की स्थापना, ;घद्ध हर स्तर पर कमर्चारियों को सम्िमलित करना, तथा ;घद्ध परिणामों का मापन। अभ्यास बहु विकल्प प्रश्नः 1. सामाजिक उत्तरदायित्व हैः ;कद्ध कानूनी उत्तरदायित्व जैसा ;खद्ध कानूनी उत्तरदायित्व से अध्िक विस्तृत ;गद्ध कानूनी उत्तरदायित्व से छोटा। ;घद्ध इनमें से कोइर् नहीं। 2.यदि एक व्यवसाय को समाज में कायर् करना है तो कौन सी समस्या भ्िान्न एवं जटिल हैः ;कद्ध सपफलता के कम अवसर। ;खद्ध सपफलता के महान अवसर। ;गद्ध असपफलता के कम अवसर। ;घद्ध सपफलता तथा असपफलता में कोइर् संबंध नहीं। 3.व्यवसायियों में सुलझाने का चातुयर् होता हैः ;कद्ध सभी सामाजिक समस्याओं को ;खद्ध वुफछ सामाजिक समस्याओं को। ;गद्ध किसी सामाजिक समस्या को नहीं ;घद्ध सभी आथ्िार्क समस्याओं को। 4. एक उद्यमं को एक अच्छे नागरिक की भाँति व्यवहार करना चाहिए, किसके प्रति उत्तरदायित्व का उदाहरण हैः ;कद्ध स्वामी ;खद्ध कमर्चारी ;गद्ध उपभोक्ता ;घद्ध समाज। 5.वातावरण सुरक्षा को सवोर्त्तम प्रयत्नों द्वारा किया जा सकता हैः ;कद्ध व्यावसायियों द्वारा ;खद्ध सरकार द्वारा ;गद्ध वैज्ञानिकों द्वारा ;घद्ध सभी व्यक्ितयों द्वारा 6.आॅटोमोबाइल्स द्वारा काबर्न मोनोक्साइड का छोड़ना प्रत्यक्ष रूप में सहयोग करता हैः ;कद्ध जल प्रदूषण। ;खद्ध ध्वनि प्रदूषण। ;गद्ध भूमि प्रदूषण। ;घद्ध सभी। 7.निम्नांकित में से कौन प्रदूषण नियंत्राण की आवश्यकता का वणर्न कर सकता है? ;कद्ध लागत बचत। ;खद्ध कम किया हुआ जोख्िाम दायित्व। ;गद्ध स्वास्थ्य जोख्िामों को कम करना। ;घद्ध सभी। 8.निम्नलिख्िात में से कौन समाज का अध्िकतम हित कर सकता है? ;कद्ध व्यावसायिक सपफलता ;खद्ध कानून एवं अध्िनियम ;गद्ध नैतिकता ;घद्ध पेशेवर प्रबंध् 9.नैतिकता महत्त्वपूणर् है ;कद्ध उच्च स्तरीय प्रबंध् के लिए। ;खद्ध मध्य स्तरीय प्रबंध् के लिए। ;गद्ध बिना प्रबंध्कीय कमर्चारियों के लिए। ;घद्ध सभी के लिए। 10.एक व्यावसायिक इकाइर् में निम्नलिख्िात में से कौन अकेले नैतिक कायर्क्रमों को प्रभावी बना सकता है? ;कद्ध कोड का प्रकाशन। ;खद्ध कमर्चारियों का सहयोग। ;गद्ध आज्ञापालन की स्थापना तथा यंत्रा निमार्ण। ;घद्ध इनमें से कोइर् नहीं। लघु उत्तरीय प्रश्नः 1.व्यवसाय के सामाजिक उत्तरदायित्व से क्या तात्पयर् है? यह कानूनी उत्तरदायित्व से किस प्रकार भ्िान्न है? 2.वातावरण क्या है? वातावरण - प्रदूषण क्या है? 3.व्यावसायिक नैतिकता क्या है? व्यावसायिक नैतिकता के आधरभूत तत्वों को बताइए। 4.संक्षेप में समझाइए ;कद्ध वायु प्रदूषण ;खद्ध जल प्रदूषण तथा ;गद्ध भूमि प्रदूषण 5.व्यवसाय के सामाजिक उत्तरदायित्व के मुख्य क्षेत्रा क्या हैं? दीघर् उत्तरीय प्रश्न 1.सामाजिक उत्तरदायित्व के पक्ष तथा विपक्ष मंे तकर् दीजिए। 2.उन शक्ितयों का वणर्न कीजिए जो व्यावसायिक उद्यमों की सामाजिक जिम्मेदारियों को बढ़ाने के लिए उत्तरदायी हैं। 3.‘‘व्यवसाय निश्िचत रूप से एक सामाजिक संस्था है, न कि केवल लाभ कमाने की िया।’’ व्याख्या कीजिए। 4.व्यावसायिक इकाइयों को प्रदूषण नियंत्राण उपायों को अपनाने की क्यों आवश्यकता है? 5.एक उद्यम वातावरण को प्रदूष्िात होने के खतरों से बचाने के लिए क्या - क्या उपाय कर सकता है? 6.व्यावसायिक नैतिकता के विभ्िान्न तत्वों की व्याख्या कीजिए। परियोजना कायर् 1.कक्षा में उपयोग के लिए एक नैतिकता कोड विकसित कीजिए तथा लिख्िाए। आपके प्रलेख में विद्याथ्िार्यों, श्िाक्षकों तथा प्रधनाचायर् के लिए दिशा निदेर्श होने चाहिए। 2.समाचार पत्रा, पत्रिाकाएँ तथा अन्य व्यावसायिक सूचनाओं का प्रयोग करते हुए किन्हीं तीन ऐसी वंफपनियों को बताइए जो सामाजिक उत्तरदायित्व का निवार्ह करती हैं तथा विंफही तीन के नाम बताइए जो सामाजिक उत्तरदायी हंै।

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