इकाइर् चार भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव आज वैश्वीकरण के इस युग में जहाँ भौगोलिक परिसीमाएँ धीरे - धीरे अथर्हीन होती जा रही हैं, विकासशील विश्व के देशों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपने पड़ोसी देशों द्वारा अपनाइर् जा रही विकास की रणनीतियों को समझें। ऐसा इसलिए भी आवश्यक है कि वे विश्व बाशार में सीमित आथ्िार्क हिस्सेदारी करते हैं। इस इकाइर् में हम भारत के विकास अनुभवों की तुलना इसके दो महत्त्वपूणर् और निणार्यक पड़ोसियों - पाकिस्तान और चीन से करेंगे। भूगोल ने हमें पड़ोसी, इतिहास ने मित्रा, अथर्शास्त्रा ने भागीदार तथा आवश्यकता ने सहयोगी बना दिया है। जिन्हें भगवान ने ही इस प्रकार जोड़ा है, उन्हें इन्सान कैसे अलग कर पाए! - जाॅन एपफ कैनेडी़10.1 परिचय पिछली इकाइयों में हमने भारत के अनेक विकास अनुभवों का विस्तार से अध्ययन किया है। हमने यह भी अध्ययन किया था कि भारत ने किस प्रकार की नीतियाँ अपनाईं और उनके विभ्िान्न क्षेत्राकों पर किस प्रकार के प्रभाव पड़े। पिछले लगभग दो दशकों से वैश्वीकरण ने विश्व के प्रायः सभी देशों में नवीन आथ्िार्क परिवतर्न हुए हैं। इन परिवतर्नों के वुफछ अल्पकालिक, तो वुफछ दीघर्कालिक प्रभाव भी हैं। भारत भी इनसे अछूता नहीं रहा है। विश्व के सभी राष्ट्र अपनी अथर्व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के लिए अनेक उपाय अपनाते रहे हंै। इसी उद्देश्य से वे अनेक प्रकार के क्षेत्राीय और वैश्िवक समूहों का निमार्ण करते रहे हंै जैसे कि साकर्, यूरोपियन संघ, बि्रक्स, आसियान, जी - 8, जी - 20 बि्रक्स आदि। इसके अतिरिक्त, विभ्िान्न राष्ट्र इस बात के लिए उत्सुक रहे हैं कि वे अपने पड़ोसी राष्ट्रों द्वारा अपनाइर् गइर् विकासात्मक प्रियाओं को समझने की कोश्िाश करंे। इससे उन्हें अपने पड़ोसी देशों की शक्ितयों एवं कमजोरियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। वैश्वीकरण की प्रिया के दौरान इसे विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए आवश्यक समझा गया, क्योंकि वे अपेक्षाकृत सीमित स्थान में न केवल विकसित देशों द्वारा प्रतिस्पधार् का सामना कर रहे थे, बल्िक आपसी प्रतिस्पधार् का भी। इसके अतिरिक्त, अपने पड़ोसी देशों की अन्य आथ्िार्क व्यवस्थाओं की जानकारी भी आवश्यक थी, क्योंकि क्षेत्रा की सभी मुख्य सामान्य आथ्िार्क गतिवििायाँ एक सहभागी वातावरण में मानव विकास से संबंिात थीं। इस अध्याय में हम भारत और उसके दो बड़े पड़ोसी राष्ट्रों - पाकिस्तान और चीन द्वारा अपनाइर् गइर् विकासात्मक नीतियों की तुलना करेंगे। परंतु यह याद रखना होगा कि भौतिक साधन संपन्नता संबंधी समानताओं के बावजूद विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्रा और 50 से भी अिाक वषो± से धमर्निरपेक्षता और अति उदार संविधान के प्रति प्रतिब( रहे भारत की राजनीतिक शक्ित व्यवस्था और पाकिस्तान की सत्तावादी एवं सैन्यवादी राजनीतिक शक्ित संरचना या चीन की निदेर्श्िात अथर्व्यवस्था के बीच कोइर् समानता नहीं है। चीन ने तो हाल ही में उदारवादी व्यवस्था की दिशा में अग्रसर होना प्रारंभ किया है। 10.2 विकास पथः एक चित्रांकन क्या आप यह जानते हैं कि भारत, पाकिस्तान और चीन की विकासात्मक नीतियों में अनेक समानताएँ हैं। तीनों राष्ट्रों ने विकास पथ पर एक ही समय चलना प्रारंभ किया है। भारत और पाकिस्तान 1947 में स्वतंत्रा हुए जबकि चीन गणराज्य की स्थापना 1949 में हुइर्। उस समय पंडित जवाहरलाल नेहरु ने अपने भाषण में कहा था ‘‘यद्यपि भारत और चीन के बीच विचारधारा में बहुत भेद है, लेकिन नए और क्रांतिकारी परिवतर्न एश्िाया की नवीन भावना और नइर् शक्ित के प्रतीक हैं जो एश्िाया के देशों में साकार रूप ग्रहण कर रहे हैं।’’ तीनों देशों ने एक ही प्रकार से अपनी विकास नीतियाँ तैयार करना शुरू किया था। भारत ने 1951 - 56 में प्रथम पंचवषीर्य योजना की घोषणा की और पाकिस्तान ने 1956 में अपनी प्रथम पंचवषीर्य योजना की घोषणा की थी, जिसे मध्यकालिक विकास योजना भी कहा जाता था। चीन ने 1953 में अपनी प्रथम पंचवषीर्य योजना की घोषणा की। वषर् 2013 में पाकिस्तान ने 11वीं पंचवषीर्य विकास योजना ;2013 - 18द्ध पर कायर् शुरू किया है जबकि चीन की बारहवीं पंचवषीर्य योजना की अविा 2011 - 15 है। भारत की वतर्मान योजना बारहवीं पंचवषीर्य योजना 2012 - 2017 पर आधारित है। भारत और पाकिस्तान ने समान नीतियाँ अपनाईं जैसे, वृहत् सावर्जनिक क्षेत्राक का सृजन और सामाजिक विकास पर सावर्जनिक व्यय। 1980 के दशक तक तीनों देशों की संवृि दर और प्रतिव्यक्ित आय समान थी। एक दूसरे की तुलना में आज उनकी स्िथति क्या है? इस प्रश्न का उत्तर देने से पहले आइए, हम चीन और पाकिस्तान की विकास नीतियों के ऐतिहासिक पथ की जानकारी लें। पिछली तीन इकाइयों का अध्ययन करने के बाद हम अब यह जानते हंै कि भारत स्वतंत्राता प्राप्ित के समय से कौन - सी नीतियाँ अपनाता रहा है। चीनः एक दलीय शासन के अंतगर्त चीन गणराज्य की स्थापना के बाद अथर्व्यवस्था सभी महत्वपूणर् क्षेत्राकों, उद्यमों तथा भूमि, जिनका स्वामित्व और संचालन व्यक्ितयों द्वारा किया जाता था, को सरकारी नियंत्राण में लाया गया। 1998 में ‘ग्रेट लीप पफाॅरवडर्’ अभ्िायान शुरू किया गया था जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर देश का औद्योगीकरण करना था। लोगांे को अपने घर के पिछवाड़े में उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में कम्यून प्रारंभ किये गये। कम्यून प(ति के अंतगर्त लोग सामूहिक रूप से खेती करते थे। 1958 मे 26,000 ‘कम्यून’ थे जिनमें प्रायः समस्त कृषक शामिल थे। जी.एल.एपफ. अभ्िायान में अनेक समस्याएँ आयीं। भयंकर सूखे ने चीन में तबाही मचा दी जिसमें लगभग 30 मिलियन लोग मारे गये। जब रूस और चीन के बीच संघषर् हुआ, तब रूस ने अपने विशेषज्ञों को वापस बुला लिया, जिन्हें औद्योगीकीकरण प्रकिया के दौरान सहायता करने के लिए चीन भेजा गया था। 1965 में माओ ने महान सवर्हारा सांस्कृतिक क्रांति का आरंभ किया ;1966 - 76द्ध। छात्रों और विशेषज्ञों को ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने और अध्ययन करने के लिए भेजा गया। संप्रति चीन में जो तेज औद्योगिक संवृि हो रही है, उसकी जड़ें1978 में लागू किये गये सुधारों में खोजी जा सकती हैं। चीन में सुधार चरणों में शुरू किया गया। प्रारंभ्िाक चरण में कृष्िा, विदेशी व्यापार तथा निवेश क्षेत्राकों में सुधार किये गये। उदाहरण के लिए, कृष्िा, क्षेत्राक में कम्यून भूमि को छोटे - छोटे भूखंडों में बाँट दिया गया जिन्हें अलग - अलग परिवारों को आवंटित किया गया ;प्रयोग के लिये न कि स्वामित्व के लिएद्ध। वे प्रकल्िपत कर देने के बाद भूमि से होने वाली समस्त आय को अपने पास रख सकते थे। बाद के चरण में औद्योगिक क्षेत्रा में सुधार आरंभ किये गये। सामान्य, नगरीय तथा ग्रामीण उद्यमों की निजी क्षेत्राक की उन पफमो± को वस्तुएँ उत्पादित करने की अनुमति थी, जो स्थानीय लोगों के स्वामित्व और संचालन के अधीन थे। इस अवस्था में उद्यमों को जिन पर सरकार का स्वामित्व था, ;जिन्हें राज्य के उद्यम एस.ओ.इर्. के नाम से जाना जाता हैद्ध और जिन्हें हम भारत में सावर्जनिक क्षेत्राक के उद्यम कहते हंै, उनको प्रतिस्पधार् का सामना करना पड़ा। सुधार प्रिया में दोहरी कीमत निधार्रण प(ति लागू थी। इसका अथर् यह है कि कीमत का निधार्रण दो प्रकार से किया जाता था। किसानों और औद्योगिक इकाइयों से यह अपेक्षा की जाती थी कि वे सरकार द्वारा निधार्रित की गइर् कीमतों के आधार पर आगतों एवं निगर्तांे की निधार्रित मात्राएँ खरीदंेगे और बेचंेगे और शेष वस्तुएँ बाजार कीमतों पर खरीदी और बेची जाती थीं। गत वषोर्ं के दौरान उत्पादन में वृि के साथ - साथ बाजार में बेची और खरीदी गइर् वस्तुओं या आगतांे के अनुपात में भी वृि हुइर्। विदेशी निवेशकों को आकष्िार्त करने के लिए विशेष आथ्िार्क क्षेत्रा स्थापित किये गये। पाकिस्तानः द्वारा अपनायी गइर् विभ्िान्न आथ्िार्क नीतियों पर विचार करते हुए आप यह देखंेगे कि भारत और पाकिस्तान के बीच अनेक समानताएँ हंै। पाकिस्तान में सावर्जनिक तथा निजी क्षेत्राकों के सह - अस्ितत्व वाली मिश्रित अथर्व्यवस्था माॅडल का अनुसरण किया जाता है। 1950 और 1960 के दशकों के अंत में पाकिस्तान के अनेक प्रकार की नियंत्रिात नीतियों का प्रारूप लागू किया गया ;आयात प्रतिस्थापन औद्योगीकरण के लिएद्ध। उक्त नीति में उपभोक्ता वस्तुओं के विनिमार्ण के लिए प्रशुल्क संरक्षण करना तथा प्रतिस्पधीर् आयातों पर प्रत्यक्ष आयात नियंत्राण करना शामिल था। हरित क्रांति के आने से यंत्राीकरण का युग शुरू हुआ और चुनिंदा क्षेत्रों की आधारिक संरचना में सरकारी निवेश में वृि हुइर्, जिसके पफलस्वरूप खाद्यान्नों के उत्पादन में भी अंततोगत्वा वृि हुइर्। इसके कारण कृष्िा भूमि संबंधी संरचना में भी नाटकीय ढंग से परिवतर्न हुआ। 1970 के दशक में पूँजीगत भारतीय अथर्व्यवस्था का विकास वस्तुओं के उद्योगों का राष्ट्रीयकरण हुआ। उसके बाद, पाकिस्तान ने 1970 और 1980 के दशकों के अंत में अपनी नीति उस समय बदल दी, जब अ - राष्ट्रीयकरण पर जोर दिया जा रहा था और निजी क्षेत्राक को प्रोत्साहित किया जा रहा था। इस अविा के दौरान पाकिस्तान को पश्िचमी राष्ट्रांे से भी वित्तीय सहायता प्राप्त हुइर् और मध्य - पूवर् देशों को जाने वाले प्रवासियों से निरंतर पैसा मिला। इससे देश की आथ्िार्क संवृि को प्रोत्साहन मिला। तत्कालीन सरकार ने निजी क्षेत्राक को और भी प्रोत्साहन प्रदान किये। इन सब के कारण नये निवेशों के लिए अनुकूल वातावरण बना। 1988 में देश में सुधार शुरू किए गए। चीन और पाकिस्तान की विकास नीतियों की संक्ष्िाप्त रूपरेखा का अध्ययन करने के बाद, आइए अब हम भारत, चीन और पाकिस्तान के वुफछ विकास संकेतकों की तुलना करें। 10.3 जनांकिकीय संकेतक यदि हम विश्व की जनसंख्या पर विचार करें तो पायेंगे कि इस विश्व में रहने वाले प्रत्येक छः व्यक्ितयों में से एक व्यक्ित भारतीय है और दूसरा चीनी। हम भारत में वुफछ जनांकिकीय संकेतकांे की तुलना करेंगे। पाकिस्तान की जनसंख्या बहुत कम है और वह चीन या भारत की जनसंख्या का लगभग दसवाँ भाग है। यद्यपि इन तीनों में चीन सबसे बड़ा राष्ट्र है तथापि इसका जनसंख्या का घनत्व सबसे कम है और भौगोलिक रूप से इसका क्षेत्रा सबसे बड़ा है। सारणी 10.1 में यह भी दिखाया गया है कि पाकिस्तान में जनसंख्या की वृि सबसे अिाक है, उसके बाद भारत और चीन का स्थान है। विद्वानों का मत है कि चीन में जनसंख्या की कम वृि का मुख्य कारण यह था कि 1970 के दशक के अंत में चीन में केवल एक संतान नीति लागू की गइर् थी। उनका यह भी कहना है कि इसके कारण लिंगानुपात ;प्रत्येक एक हजार पुरुषों में महिलाओं का अनुपातद्ध में गिरावट आइर्। परंतु सारणी से आपको पता चलेगा कि तीनों देशों में लिंगानुपात महिलाओं के पक्ष में कम था और पूवार्ग्रह से युक्त था। आजकल तीनों देश स्िथति को सुधारने के लिए विभ्िान्न उपाय कर रहे हैं। एक - संतान नीति और उसे लागू किये जाने के परिणामस्वरूप सारणी 10.1 वुफछ चुने हुए जनांकिकीय संकेतक 2013 देश अनुमानित जनसंख्या ;मिलियन मेंद्ध जनसंख्या की वाष्िार्क संवृि 2001 - 2010 जनसंख्या का घनत्व ;प्रति वगर् कि. मी.द्ध लिंग अनुपात प्रजनन दर नगरीकरण भारत 1252 1.24 421 934 2.6 32 चीन 1357 0.49 145 929 1.6 53 पाकिस्तान 182 1.65 236 947 3.3 38 स्रोतः विश्व विकास सूचक, ूूूण्ूवतसकइंदाण्वतह भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव जनसंख्या वृि थमने के अन्य प्रभाव भी थे। उदाहरण के भूमि प्रयोग और कृष्िा लिए, वुफछ दशकों के बाद चीन में वयोवृ( लोगांे की जनसंख्या का अनुपात युवा लोगांे की अपेक्षा अिाक होगा। इसके कारण, वुफछ कामगारों को सामाजिक सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराने के हेतु कदम उठाने के लिए चीन को बाध्य होना पड़ेगा। चीन में प्रजनन दर भी बहुत कम है और पाकिस्तान में बहुत अिाक। पाकिस्तान और चीन दोनों में नगरीकरण अिाक है। भारत में नगरीय क्षेत्रों में 32 सारणी 10.2प्रतिशत लोग रहते हंै। सकल घरेलू उत्पाद में वाष्िार्क औसत संवृि ;»द्ध - 1980 - 2013 10.4 सकल घरेलू उत्पाद एवं क्षेत्राक चीन के बारे में विश्व में बहुचचिर्त एक मुद्दा उसके सकल घरेलू उत्पाद में वृि है। चीन का सकल घरेलू उत्पाद 15.6 ट्रीलियन विश्व में दूसरे स्थान पर है। भारत का स.घ. उत्पाद 6.6 देश 1980 - 90 2005 - 2013 भारत 5.7 7.6 चीन 10.3 10.2 पाकिस्तान 6.3 4.4 स्रोतः एश्िायाइर् विकास बैंक, एश्िाया तथा पैसिपिफक में मुख्य सूचक, 2011 इन्हंे कीजिए ऽ क्या भारत जनसंख्या स्िथरीकरण संबंधी उपाय कर रहा है? यदि हाँ, तो ब्यौरा एकत्रा कीजिए और कक्षा में चचार् कीजिए । आप नीवनतम आथ्िार्क सवेर्क्षण स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की वाष्िार्क रिपोटार्ें या वेबसाइटों ;ीजजचरूध्ध्उवीूिण्दपबण्पदद्ध का संदभर् दे सकते हैं। ऽ विद्वानों का मानना है कि भारत, चीन एवं पाकिस्तान सहित अनेक विकाशसील देशों में पुत्रा को वरीयता देना एक सामान्य बात है। क्या आप इस बात को अपने परिवार या पड़ोस में देखते हैं? लोग लड़के और लड़कियों में भेदभाव क्यों करते हैं? आप इस बारे मंे क्या सोचते हंै? कक्षा में चचार् कीजिए। चित्रा 10.2 भारत, चीन तथा पाकिस्तान में भूमि - प्रयोग तथा कृष्िा ;स्केल के अनुसार नहींद्ध उद्योग बंगलोर ट्रीलियन तथा पाकिस्तान का जी.डी.पी. 0.83 टिªलियन डाॅलर भारत के जी.डी.पी. के लगभग 13 प्रतिशत है। जब अनेक विकसित देश 5 प्रतिशत तक की संवृि दर बनाये रखने में कठिनाइर् महसूस कर रहे थे तब चीन एक ऐसा देश था जो दो दशकांे से भी अिाक लगभग इसकी दोगुनी संवृि बनाये रखने में समथर् था। जैसा कि सारणी 10.2 में देखा जा सकता है। यह भी देख्िाए कि 1980 के दशक में पाकिस्तान भारत से आगे था। चीन की संवृि दोहरे अंकांे में थी और भारत सबसे नीचे था। 2005 - 2013 के दशक में भारत और चीन की संवृि दरों में मामूली गिरावट आइर्, जबकि पाकिस्तान में 4.4 प्रतिशत की अत्यिाक गिरावट आइर्। वुफछ विद्वानों का मत है कि पाकिस्तान मंे 1988 मंे प्रारंभ की गइर् सुधार प्रिया तथा राजनीतिक अस्िथरता इस प्रवृृिा का मुख्य कारण था। हम अगले अनुच्छेद में इसके बारे में और अिाक अध्ययन करेंगे, कि किस क्षेत्राक ने इन प्रवृिायों में योगदान दिया है। सबसे पहले यह देखंे कि विभ्िान्न क्षेत्राकों मंे नियुक्त लोग सकल घरेलू उत्पाद में योगदान कैसे करते हैं। पिछले खंड में बताया गया था कि चीन और पाकिस्तान में भारत की अपेक्षा नगर में रहने वाले लोगों का अनुपात अिाक है। चीन में स्थलाकृति तथा जलवायु दशाओं के कारण कृष्िा के लिए उपयुक्त क्षेत्रा अपेक्षाकृत कम अथार्त् वुफल भूमि क्षेत्रा का लगभग दस प्रतिशत है। चीन में वुफल कृष्िा योग्य भूमि भारत में कृष्िा क्षेत्रा की 40 प्रतिशत है। 1980 के दशक तक चीन मे 80 प्रतिशत से भी अिाक लोग जीविका के एकमात्रा साधन के रूप में कृष्िा पर निभर्र थे। उस समय से सरकार ने लोगांे को कृष्िा कायर् त्यागने और हस्तश्िाल्प, वाण्िाज्य तथा परिवहन जैसी गतिवििायाँ अपनाने के लिए प्रेरित किया। 2013 में 30 प्रतिशत श्रमिकों के साथ कृष्िा ने चीन में सकल उत्पाद में 10 प्रतिशत में योगदान दिया ;देख्िाए सारणी 10.3द्ध। भारत और पाकिस्तान में जी.डी.पी के लिए कृष्िा का योगदान 18 तथा 25 प्रतिशत था। परंतु इस क्षेत्राक मंे श्रमिकों का अनुपात भारत में सारणी 10.3 2013 में रोजगार एवं सकल घरेलू उत्पाद ;»द्ध के क्षेत्रा शेयर क्षेत्रा सकल घरेलू उत्पाद में येागदान कायर्बल का वितरण भारत चीन पाकिस्तान भारत चीन पाकिस्तान कृष्िा 18 10 25 47 31 44 उद्योग 25 44 21 25 30 14 सेवा 57 46 54 28 39 42 योग 100 100 100 100 100 100 स्रोतः विश्व विकास सूचक ;ूूूण्ूवतसकइंदाण्वतहद्ध अिाक है। पाकिस्तान में लगभग 44 प्रतिशत लोग कृष्िा कायर् करते हैऋ जबकि भारत में 47 प्रतिशत उत्पादन तथा रोजगार में क्षेत्राकवार हिस्सेदारी भी यह दशार्ती है कि तीनों अथर्व्यवस्थाओं में उद्योग तथा सेवा क्षेत्राकों मंे श्रमिकों का अनुपात कम है। परंतु उत्पादन की दृष्िट से उनका योगदान अिाक है। चीन में विनिमार्ण एवं सेवा क्षेत्राकों से जी.डी.पी. में 44 एवं 46 प्रतिशत योगदान होता है जबकि भारत और पाकिस्तान में केवल सेवा क्षेत्राक द्वारा ही सबसे अिाक योगदान अथार्त 50 प्रतिशत से अिाक होता है। विकास की सामान्य प्रकिया के दौरान इन देशों ने सबसे पहले रोजगार और कृष्िा उत्पादन से संबंिात अपनी नीतियों को बदलकर उन्हें विनिमार्ण और उसके बाद सेवाओं की ओर परिवतिर्त कर दिया। ऐसा ही चीन में हो रहा है जैसा की सारणी 10.4 में देखा जा सकता है। भारत और पाकिस्तान में विनिमार्ण में लगे श्रमबल का अनुपात बहुत कम अथार्त क्रमशः 25 प्रतिशत और 14 प्रतिशत था। जी.डी.पी. मंे उद्योगों का योगदान कृष्िा के उत्पादन के लगभग बराबर है। भारत और पाकिस्तान में सीधे सेवा क्षेत्राक पर जोर दिया जा रहा है। इस प्रकार भारत और पाकिस्तान दोनों में सेवा क्षेत्राक विकास के लिए एक महत्वपूणर् घटक के रूप में उभर कर आ रहा है। यह जी.डी.पी. में अिाक योगदान कर रहा है और साथ ही यह संभावित नियोक्ता बन रहा है। 1980 के दशक में श्रमिकों के अनुपात पर विचार करते हैं तो यह पाते हैं कि पाकिस्तान, भारत और चीन के अपेक्षा सेवा क्षेत्राक में अपने श्रमिकों को तेजी से भेज रहा है। 1980 के दशक में भारत, चीन तथा पाकिस्तान में सेवा क्षेत्राक में क्रमशः 17, 12, और 27 प्रतिशत श्रमबल इसमें गिरावट आइर् है। चीन और भारत में कायर्रत था। वषर् 2013 में यह बढ़कर 28, 1980 - 2013 के दौरान सेवा क्षेत्राक में संवृि 39 और 42 प्रतिशत हो गया है। दर बढ़ी है, जबकि पाकिस्तान में इस क्षेत्राक में सारणी 10.4 विभ्िान्न क्षेत्राकांे में उत्पादन संवृि वाष्िार्क औसत की प्रवृिायाँ 1980 - 2013 देश 1980 - 90 2005 - 2013 कृष्िा उद्योग सेवा कृष्िा उद्योग सेवा भारत 3.1 7.4 6.9 4.0 6.1 9.1 चीन 5.9 10.8 13.5 4.5 11 10.9 पाकिस्तान 4 7.7 6.8 3.4 4.3 4.8 पिछले दो दशकों में तीनों ही देशों में संवृि रुक गइर् है। इस प्रकार, चीन की कृष्िा क्षेत्राक, जिसमें उक्त तीनों देशों के श्रमबल आथ्िार्क संवृि का मुख्य आधार विनिमार्ण का सबसे बड़ा अनुपात कायर्रत था, की संवृि क्षेत्राक है और भारत की संवृि सेवा क्षेत्राक से में कमी आइर् है। चीन में तो द्विअंकीय संवृि हुइर् है। पाकिस्तान में इस अविा में तीनों ही दर बनी रही, ¯कतु भारत और पाकिस्तान में क्षेत्राकों में गिरावट आइर् है। सारणी 10.5 मानव विकास, 2012 - 13 के वुफछ चुनिंदा संकेतक मद भारत चीन पाकिस्तान मानव विकास सूचकांक ;मूल्यद्ध 0.586 0.719 0.537 रैंक ;एच.डी.आइर्. के आधर परद्ध 135 91 146 जन्म के समय जीवन प्रत्याशा ;वषर्द्ध 66.2 75.2 66.4 वयस्क सारक्षरता दर ;» आयु - वगर् के 15 और ऊपरद्ध 62.8 95.1 54.7 प्रति व्यक्ित सकल घरेलू उत्पाद ;पी.पी.पी. अमेरिकी डाॅलरद्ध 5238 11524 4549 गरीबी रेखा से नीचे लोगों का ;»द्ध ;$ 2 एक दिन पी.पी.पी. परद्ध 61 19 51 श्िाशु मृत्यु दर ;1000 जीवित जन्मों के अनुसारद्ध 41 11 69 मातृत्व मृत्यु दर ;एक लाख जन्मों के अनुसारद्ध 190 32 170 जनसंख्या में सुधर स्वच्छता ;»द्ध का उपयोग 36 65 48 सुधर हुआ, पीने के पानी के स्रोतों को स्थायी एक्सेस ;»द्ध के साथ जनसंख्या 93 92 91 बच्चे वुफपोषण के श्िाकार का प्रतिशत ;वजनद्ध ;आयु - वगर्ढ5द्ध 43.5 3.4 31 स्रोतः मानव विकास रिपोटर् 2014 और विश्व विकास सूचक ;ूूूण्ूवतसकइंदाण्वतहद्ध। भारत और इसके पड़ोसी देशों के तुलनात्मक विकास अनुभव 10.5 मानव विकास के संकेतक आपने निचली कक्षाओं में मानव विकास के संकेतकांे के महत्व और अनेक विकसित और विकासशील देशों की स्िथति के विषय में पढ़ा होगा। आइए, हम देखें कि भारत, चीन और पाकिस्तान ने मानव विकास के चुनिंदा संकेतकांे में कैसा निष्पादन हुआ है ;सारणी 10.5 देखेंद्ध। सारणी 10.5 दशार्ती है कि चीन भारत तथा पाकिस्तान से आगे है। यह बात अनेक संकेतकों के विषय में सही है जैसे, आय संकेतक अथार्त प्रतिव्यक्ित जी.डी.पी अथवा निधर्नता रेखा से नीचे की जनसंख्या का अनुपात अथवा स्वास्थ्य संकेतकों जैसे कि मृत्यु दर, स्वच्छता, साक्षरता तक पहुँच, जीवन प्रत्याशा अथवा वुफपोषण। पाकिस्तान निधर्नता रेखा के नीचे के लोगों का अनुपात कम करने में भारत से आगे है। श्िाक्षा, स्वच्छता और जल तक पहुँच के मामलों में इसका निष्पादन भारत से बेहतर है। ¯कतु ये दोनों देश महिलाओं को मातृमृत्यु से बचा पाने में असपफल रहे हैं। चीन में प्रति एक लाख जन्म पर केवल 32 महिलाओं की मृत्यु होती है, जबकि भारत और पाकिस्तान में यह संख्या 190 एवं 170 ऊपर है। आश्चयर् की बात यह है कि तीनों देश उत्तम पेय जल स्रोत उपलब्ध् करा रहे हैं। आप यह भी देखेंगे कि दो डाॅलर प्रतिदिन की अंतरार्ष्ट्रीय निधर्नता दर के नीचे के लोगों का अनुपात भारत में तीनों देशों से अध्िक गरीब व्यक्ित हैं। स्वयं ज्ञात कीजिये कि यह अंतर क्यों है? परंतु, ऐसे प्रश्नों पर विचार करने अथवा निणर्य लेते समय हमें मानवीय विकास संकेतकांे के विवेकपूणर् प्रयोग से संबंिात एक समस्या पर ध्यान देना होगा। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ये सभी संकेतक अत्यंत महत्वपूणर् हैं, परंतु पयार्प्त नहीं हंै। इनके साथ ही स्वतंत्राता संकेतकों की भी आवश्यकता है। ‘सामाजिक व राजनीतिक निणर्य - प्रिया में लोकतांत्रिाक भागीदारी’ की सीमा के संकेतक को इसके माप के रूप में जोड़ दिया गया है, परंतु इसे किसी अतिरिक्त मानवीय विकास सूचक की रचना में महत्व नहीं दिया गया है। ऐसे वुफछ स्पष्ट स्वतंत्राता संकेतक इनमें अभी तक नहीं जोड़े गये हैं जैसे, नागरिक अिाकारों की संवैधानिक संरक्षण की सीमा, न्यायपालिका की स्वतंत्राता के लिए संवैधानिक संरक्षण की सीमा या न्यायपालिका की स्वतंत्राता को सरंक्षण देने की संवैधानिक सीमा तथा वििा - सम्मत शासन अभी तक लागू नहीं किया गया है। इन्हें और वुफछ उपायों को सूची में शामिल किये बिना तथा इन्हें महत्व दिये बिना, मानव विकास सूचक का निमार्ण अधूरा रहेगा तथा इसकी उपादेयता भी सीमित होगी। 10.6 विकास नीतियाँः एक मूल्यांकन सामान्यतया यह देखा जाता है कि किसी देश की विकास नीतियों को अपने देश के विकास के लिए मागर्दशर्न एवं सीख के रूप में ग्रहण किया जाता है। विश्व के विभ्िान्न भागों में सुधार कायर्क्रमों के लागू होने के पश्चात, ऐसा विशेष रूप से देखा जा सकता है। अपने पड़ोसी देशों की आथ्िार्क सपफलताओं से वुफछ सीख ग्रहण करने के लिए यह आवश्यक है कि हम उनकी सपफलताओं तथा विपफलताओं के मूल कारणों को समझें। यह भी आवश्यक है कि हम उनकी रणनीतियों के विभ्िान्न चरणों के बीच अंतर और विभेद करें। विभ्िान्न देश अपनी विकास प्रिया अलग - अलग तरीकों से पूरा करते हैं। आइए, सुधार कायर्क्रमों के आरंभ को हम संदभर् ¯बदु के रूप में लें। हम जानते हंै कि सुधार कायर्क्रम का आरंभ चीन में 1978 में, पाकिस्तान में 1988 में और भारत में 1991 में हुआ। आइए, सुधार पूवर् और सुधार पश्चात् अविा में उनकी उपलब्िधयों और विपफलताओं का संक्ष्िाप्त मूल्यांकन करें। चीन ने संरचनात्मक सुधारों को 1978 में क्यों प्रारंभ किया? चीन को इन्हें प्रारंभ करने के लिए विश्व बैंक और अतंरार्ष्ट्रीय मुद्राकोष की कोइर् बाध्यता नहीं थी जैसी कि भारत और पाकिस्तान को थी। चीन के तत्कालीन नये नेता माओवादी शासन के दौरान चीन की धीमी आथ्िार्क संवृि और देश में आधुनिकीकरण के अभाव को लेकर संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने महसूस किया कि विवेंफद्रीकरण, आत्मनिभर्रता, विदेश प्रौद्योगिकी और उत्पादों तथा पूंजी के बहिष्कार पर आधारित आथ्िार्क विकास माओवादी दृष्िटकोण से विपफल रहा है। व्यापक भूमि सुधारों, सामुदायिकीकरण और ग्रेट लीप पफाॅरवडर् तथा अन्य पहलों के बाद भी 1978 में प्रतिव्यक्ित अन्न उत्पादन उतना ही था, जितना 1950 के दशक के मध्य में था। यह भी देखा गया कि श्िाक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में आधारिक संरचना की स्थापना किये जाने के पफलस्वरूप भूमि सुधारों, दीघर्कालिक विवेंफद्रीकृत योजनाओं और लघु उद्योगों से सुधारोत्तर अविा में सामाजिक और आय संकेतकों में निश्िचत रूप से सुधार हुआ था। सुधारों के प्रारंभ होने से पूवर् ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का बड़े व्यापक स्तर पर प्रसार हो चुका था। कम्यून व्यवस्था के कारण खाद्यान्नों का अिाक समतापूणर् वितरण था। विशेषज्ञ यह भी कहते हंै कि प्रत्येक सुधार के पहले छोटे स्तर पर लागू किया गया और बाद में उसे व्यापक पैमाने पर लागू किया गया। विवेंफद्रीकृत शासन के प्रयोग के आथ्िार्क, सामाजिक और राजनीतिक लागतों की सपफलता या विपफलता का आकलन किया जा सका। उदाहरण के लिए, जब छोटे - छोटे भूखंड कृष्िा के लिए व्यक्ितयों को दिए गए तो बहुत बड़ी संख्या में लोग समृ( बन गये। इसके पफलस्वरूप, ग्रामीण उद्योगों के अपूवर् विकास की स्िथति बनी और आगे और सुधारों के लिये मजबूत आधार बनाया गया। विद्वान ऐसे अनेक उदाहरण देते हैं कि चीन में सुधारों के कारण किस प्रकार तीव्र संवृि हुइर्। विद्वान तकर् देते हैं कि सुधार प्रिया से पाकिस्तान में तो सभी आथ्िार्क संकेतकों में गिरावट आयी है। हमने पिछले खंड में देखा है कि वहाँ 1980 को दशक की तुलना में जी.डीपी. और क्षेत्राक घटकों की संवृि दर 1990 के दशक में कम हो गइर् है। यद्यपि पाकिस्तान के अंतरार्ष्ट्रीय गरीबी रेखा से संबंिात आँकड़े बहुत सकारात्मक रहे हैं, परंतु पाकिस्तान के सरकारी आँकड़ों का प्रयोग करने वाले यह संकेत देते हैं कि वहाँ निधर्नता बढ़ रही है। 1960 के दशक में निधर्नों का अनुपात 40 प्रतिशत था, जो 1980 के दशक में गिर कर 25 प्रतिशत हो गया और 1990 के दशक में पुनः बढ़ने लगा। विद्वानों ने पाकिस्तान की अथर्व्यवस्था में संवृि दर की कमी और निधर्नता के पुनः आविभार्व के ये कारण बतायेः ;कद्ध कृष्िा संवृि और खाद्य पूतिर्, तकनीकी परिवतर्न संस्थागत प्रिया पर आधारित न होकर अच्छी पफसल पर आधारित था। जब पफसल अच्छी होती थी तो अथर्व्यवस्था भी ठीक रहती थी और पफसल अच्छी नहीं होती थी तो आथ्िार्क संकेतक नकारात्मक प्रवृतियाँ दशार्ते थे। ;खद्ध आपको ध्यान होगा कि भारत को अपने भुगतान संतुलन संकट को ठीक करने के लिये अंतरार्ष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक से उधार लेना पड़ा था। विदेशी मुद्रा प्रत्येक देश के लिए एक अनिवायर् इन्हें कीजिए ऽ वुफछ समय से यह देखा जा रहा है कि भारत में सस्ते चीनी सामान का अचानक अंबार लग गया है, जिसके विनिमार्ण क्षेत्राक पर कइर् प्रभाव हैं हम स्वयं भी अपने पड़ोसी राष्ट्रांे से व्यापार नहीं करते हैं। निम्न सारणी को देखें। इसमें भारत से पाकिस्तान और चीन को किये गये नियार्तों और आयातों को दिखाया गया है। अपने परिणामों का निवर्चन कीजिए और कक्षा में उस पर चचार् कीजिए। घटक है और यह जानना आवश्यक है कि इसे वैफसे अजिर्त किया जाता है। यदि कोइर् देश अपने विनिमिर्त उत्पादों के धारणीय नियार्त द्वारा विदेशी मुद्रा कमाने में समथर् है, तो उसे कोइर् चिंता करने की जरूरत नहीं है। पाकिस्तान में अिाकांश विदेशी मुद्रा मध्यपूवर् में काम करने वाले पाकिस्तानी श्रमिकों की आय प्रेषण तथा अति अस्िथर कृष्िा उत्पादों के नियार्तांे से प्राप्त होती है। एक ओर विदेशी )णों पर निभर्र रहने की प्रवृति बढ़ रही थी, तो दूसरी ओर पुराने )णों को चुकाने में कठिनाइर् बढ़ती जा रही थी। जबकि भारत ने अन्य विकासशील देशों की तरह आथ्िार्क वृि की है लेकिन भारत मानव विकास सूचकों में विश्व के बुरे देशों में से एक है। भारत से कहाँ गलती हुइर् - क्यों हम अपने मानव ससाध्नों की रक्षा नहीं पाये? कक्षा में चचार् कीजिए। समाचार पत्रों, वेबसाइटों तथा समाचार सुनकर, अपने पड़ोसी राष्ट्रों के साथ व्यापार में शामिल वस्तुओं और सेवाओं का विवरण एकत्रा कीजिए। भारत के अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार से संबंिात जानकारी प्राप्त करने के लिए आप इस वेबसाइट पर लाॅग कर सकते हंैः ीजजचरूध्ध्कहजिण्हवअण्पदण् देश भारत के नियार्त ;करोड़ रुपये मेंद्ध भारत के आयात ;करोड़ रुपये मेंद्ध 2004 - 05 2012 - 13 संवृि दर ;ःद्ध 2004 - 05 2012 - 13 संवृि दर ;ःद्ध पाकिस्तान 2341 11233 380 427 2944 589 चीन 25232 73733 192 31892 284385 792 स्रोतः ीजजचरूध्ध्कहजिण्हवअण्पद जैसाकि पाकिस्तान की वा£षक योजना 2011 - 12 में कहा गया है कि पाकिस्तान की अथर्व्यवस्था की ध्ीमी संवृि के लिए विभ्िान्न कारक उत्तरदायी हैं। उद्ध्ृत किया गया है कि निम्न कारणों से अथर्व्यवस्था की गति ध्ीमी रही - जैसे बाढ़ का आनाऋ आ£थक सुधरों को लागू करने में देरी करनाऋ सुरक्षा स्िथति का पुराना होना और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की कमी के कारण सभी मुख्य क्षेत्राकों में संवृि की गति का ध्ीमा होना। अत्यध्िक बाढ़ों के कारण कृष्िा एवं आधरभूत संरचना का भारी नुकसान हुआ है जबकि 2010 - 11 में ऊजार् संकट विदेशी प्रत्यक्ष - निवेश में भारी कमी के कारण और बढ़ गया है जिसके कारण व्यावसायिक गतिविध्ियाँ कम हो गइर् हैं। पाकिस्तान की अथर्व्यवस्था में वषर् 2010 - 11 के दौरान 2.4 प्रतिशत की संवृि दर की उम्मीद थी जबकि पिछले वषर् के दौरान यह लक्ष्य 4.5 प्रतिशत था। इसके साथ - साथ ऊँची मुद्रास्पफीति दरें और तीव्र निजीकरण के कारण, सरकार उन विभ्िान्न क्षेत्रों में अिाक खचर् कर रही है जो निधर्नता को कम कर सकते हैं। 10.7 निष्कषर् अपने पड़ोसी देशों के विकास अनुभवों से हमें क्या सीख मिलती है? भारत, पाकिस्तान और चीन की पाँच दशकों से भी अिाक लंबी विकास यात्रा रही है और उनको अलग - अलग परिणाम प्राप्त हुए हैं। 1970 के दशक के उत्तरा(र् में तीनों का ही विकास स्तर निम्न था। पिछले तीन दशकों में इन तीनों देशों का विकास स्तर अलग - अलग रहा है। लोकतांत्रिाक संस्थाओं सहित भारत का निष्पादन साधारण रहा है। अिाकतर लोग आज भी कृष्िा पर निभर्र हंै। भारत के अनेक भागों में आधारिक संरचना का अभाव है। भारत में निधर्नता रेखा से नीचे रहने वाले एक चैथाइर् से भी अिाक जनसंख्या का रहन - सहन के स्तर को ऊपर उठाने की आवश्यकता है। विद्वानों का मत है कि राजनैतिक अस्िथरता, प्रेषणों और विदेशी सहायता पर अत्यिाक निभर्रता और कृष्िा क्षेत्राक का अस्िथर निष्पादन पाकिस्तान की अथर्व्यवस्था की गिरावट के कारण हैं। वुफछ समय से पाकिस्तान जी.डी.पी. संवृि की उच्चदर कायम रखते हुए, स्िथति में सुधार करने की आशा कर रहा है। वषर् 2005 के विनाशकारी भूकंप, जिसमें 75,000 लोगों की जानें गईं और संपिा का भारी नुकसान हुआ, के झटके से उबरना भी आज पाकिस्तान के सामने एक बड़ी चुनौती है। चीन में राजनीतिक स्वतंत्राता का अभाव तथा मानव अिाकारों पर उसके निहताथर् चिंता के मूल विषय हंै। पिफर भी, अंतिम तीन दशकों में से इसने अपनी राजनीतिक प्रतिब(ता को खोये बिना, बाजार व्यवस्था का प्रयोग किया तथा निधर्नता निवारण के साथ - साथ संवृि के स्तर को बढ़ाने में सपफल रहा है। आप यह भी देखेंगे कि भारत और पाकिस्तान में जहाँ सावर्जनिक क्षेत्राक के उपक्रमों के निजीकरण का प्रयास हो रहा है, वहाँ चीन ने बाजार व्यवस्था का उपयोग अतिरिक्त सामाजिक - आथ्िार्क सुअवसरों के सजर्न के लिए किया है। सामुदायिक भू - स्वामित्व को कायम रखते हुए और लोगों को भूमि पर कृष्िा की अनुमति देकर चीन ने ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सुरक्षा सुनिश्िचत कर दी है। चीन में सुधारों से पूवर् ही सामाजिक आधारिक संरचना उपलब्ध कराने में सरकारी हस्तक्षेप द्वारा मानव विकास संकेतकों में सकारात्मक परिणाम हुए हंै। पुनरावतर्न 1 वैश्वीकरण की प्रिया आरंभ होने के बाद से विकासशील देश अपने आस - पास के देशों की विकास प्रियाओं और नीतियों को समझने के लिए उत्सुक हैं। इसका कारण यही है कि उन्हें अब केवल विकसित देशों से ही नहीं वरन् अपने जैसे अनेक विकासशील देशों से भी, प्रतिस्पधार् का सामना करना पड़ रहा है। 2 भारत, पाकिस्तान और चीन की भौतिक खाद्यान्न संपन्नताओं में तो कापफी समानता है परंतु उनकी राजनीतिक व्यवस्थाएँ बिल्वुफल भ्िान्न हैं। 3 तीनों ही देशों ने पंचवषीर्य योजनाओं को विकास के स्वरूप का आधार बनाया है ¯कतु उन योजनाओं के ियान्वयन के लिए इन्होंने जो संरचनाएँ बनाइर् हैं, वे भ्िान्न - भ्िान्न हैं। 4 1980 के दशक के प्रारंभ्िाक वषोर् तक तीनों देशों के सभी विकास संकेतक ;अथार्त् संवृि दर, राष्ट्रीय आय में उद्योगवार योगदान आदिद्ध समान थे। 5 चीन ने आथ्िार्क सुधार 1978 में प्रारंभ किये, पाकिस्तान ने 1988 में और भारत ने 1991 में। 6 चीन ने संरचनात्मक सुधारों का निणर्य स्वयं लिया था जबकि भारत और पाकिस्तान को अंतराष्ट्रीय संस्थाओं ने ऐसे सुधार करने के लिए बाध्य किया था। 7 इन तीन देशों में अपनाए गए नीति उपायों के परिणाम भी भ्िान्न - भ्िान्न रहे हैं। उदाहरणाथर्, चीन में केवल एक संतान नीति के द्वारा जनसंख्या की वृि रुक गइर्। किंतु, भारत और पाकिस्तान में इस दिशा में अभी ऐसा परिवतर्न होना बाकी है। 8 पचास वषोर् के योजनाब( विकास के बाद भी इन देशों की जनसंख्या का एक बहुत बड़ा भाग अभी तक कृष्िा पर निभर्र है। भारत में कृष्िा निभर्रता सबसे अिाक है। 9 चीन ने परंपरागत विकास नीति को अपनाया जिसमें क्रमशः कृष्िा से विनिमार्ण तथा उसके बाद सेवा की ओर अग्रसर होने की प्रवृति थी। भारत तथा पाकिस्तान सीधे कृष्िा से सेवा क्षेत्राक की ओर चले गए। 10 चीन में औद्योगिक क्षेत्राक में उच्च संवृि दर कायम रही है, जबकि भारत और पाकिस्तान में कोइर् परिवतर्न नहीं हुआ है। 11 चीन अनेक मानव विकास संकेतको में भारत और पाकिस्तान से आगे है, इसके बावजूद इस प्रगति में सुधार प्रिया का कोइर् योगदान नहीं था बल्िक उस रणनीति का था, जिसे चीन ने सुधार के पूवर् अविा में अपनाया था। 12 विकास संकेतकों के मूल्यांकन के लिए स्वतंत्राता - संबंधी सूचकों को भी ध्यान में रखना होगा। अभ्यास 1.क्षेत्राीय और आथ्िार्क समूहों के बनने के कारण दीजिए। 2.वे विभ्िान्न साधन कौन से हैं जिनकी सहायता से देश अपनी घरेलू व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं? 3.वे समान विकासात्मक नीतियाँ कौन - सी हैं जिनका कि भारत और पाकिस्तान ने अपने - अपने विकासात्मक पथ के लिए पालन किया है? 4.1958 में प्रारंभ की गइर् चीन के ग्रेट लीप पफाॅरवडर् अभ्िायान की व्याख्या कीजिए। 5.चीन की तीव्र औद्योगिक संवृि 1978 में उसके सुधारों के आधार पर हुइर् थी। क्या आप इस कथन से सहमत हंै? स्पष्ट कीजिए। 6.पाकिस्तान द्वारा अपने आथ्िार्क विकास के लिए किए गए विकासात्मक पहलों का उल्लेख कीजिए। 7. चीन में ‘एकसंतान’ नीति का महत्वपूणर् निहिताथर् क्या है? 8. चीन, पाकिस्तान और भारत के मुख्य जनांकिकीय संकेतकों का उल्लेख कीजिए। 9. मानव विकास के विभ्िान्न संकेतकों का उल्लेख कीजिए। 10. स्वतंत्राता संकेतक की परिभाषा दीजिए। स्वतंत्राता संकेतकों के वुफछ उदाहरण दीजिए। 11. उन विभ्िान्न कारकों का मूल्यांकन कीजिए जिनके आधार पर चीन में आथ्िार्क विकास में तीव्र वृि ;तीव्र आथ्िार्क विकास हुआद्ध हुइर्। 12.भारत, चीन और पाकिस्तान की अथर्व्यवस्थाओं से संबंिात विशेषताओं को तीन शीषर्कों के अंतगर्त समूहित कीजिए। एक संतान का नियम निम्न प्रजनन दर नगरीकरण का उच्च स्तर मिश्रित अथर्व्यवस्था अति उच्च प्रजनन दर भारी जनसंख्या जनसंख्या का अत्यिाक घनत्व विनिमार्ण क्षेत्राक के कारण संवृि सेवा क्षेत्राक के कारण संवृि 13. पाकिस्तान में धीमी संवृि तथा पुनः निधर्नता के कारण बताइए। 14.वुफछ विशेष मानव विकास संकेतकों के संदभर् में भारत, चीन और पाकिस्तान के विकास की तुलना कीजिए और उसका वैषम्य बताइए। 15.पिछले दो दशकों में चीन और भारत में देखी गइर् संवृि दर की प्रवृत्ितयों पर टिप्पणी दीजिए। 16. निम्नलिख्िात रिक्त स्थानों को भरिएः ;कद्ध 1956 में की प्रथम पंचवषीर्य योजना शुरू हुइर् थी। ;पाकिस्तान/चीनद्ध ;खद्ध मातृमृत्यु दर में अिाक है। ;चीन/पाकिस्तानद्ध ;गद्ध निधर्रता रेखा से नीचे रहने वाले लोगांे का अनुपात में अिाक है। ;भारत/पाकिस्तानद्ध ;घद्ध में आथ्िार्क सुधार 1978 में शुरू किए गए थे ;चीन/पाकिस्तानद्ध अतिरिक्त गतिवििायाँ 1 भारत और चीन तथा भारत और पाकिस्तान के बीच स्वतंत्रा व्यापार के मुद्दे पर कक्षा में एक वाद - विवाद आयोजित कीजिए। 2 आपको पता है कि बाजार में चीन में बनी सस्ती वस्तुएँ उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए, ख्िालौने, बिजली का सामान, कपड़े, बैटरी आदि। क्या आपके विचार में गुणवत्ता और कीमत की दृष्िट से इन उत्पादों की तुलना भारत में निमिर्त वस्तुओं से की जा सकती है? क्या इन वस्तुओं से हमारे घरेलू उत्पादकों को खतरा पैदा हो सकता है? चचार् कीजिए। 3 क्या आपके विचार से जनसंख्या संवृि को कम करने के लिए चीन की तरह भारत भी एक संतान की नीति को लागू कर सकता है? उन नीतियों पर एक वाद - विवाद आयोजित कीजिए, जिन्हें जनसंख्या वृि के कम करने के लिए भारत अपना सकता है। 4 चीन की संवृि का कारण मुख्यतः विनिमार्ण क्षेत्राक है और भारत की संवृि का कारण सेवा क्षेत्राक है। एक चाटर् तैयार कीजिए। उसमें संबंिात देशों में पिछले दशक में हुए संरचनात्मक परिवतर्नों के संदभर् में इस कथन की संगतता दिखाएँ। 5 सभी मानव विकास संकेतकों में चीन कैसे आगे है? कक्षा में चचार् कीजिए। नवीनतम वषर् की मानव विकास रिपोटर् का अवलोकन करें। पुस्तवेंफ जीन ड्रेज एंड अमत्यर् सेन ;1996द्ध, इंडिया इकोनाॅमिक डवलपमेंट सोशल अपरचुनिटी, आॅक्सपफोडर् यूनिवसिर्टी प्रेस, दिल्ली। लेख आलोक राय, द चाइनीज इकाॅनाॅमिक मिरेकिलः लेसन्स टू बी लन्टर्, इकाॅनाॅमिक एंड पाॅलिटिकल वीकली, सितम्बर 14, 2002। एस. अकबर जायदी;1999द्ध, ‘‘इज पावटीर् नाउ ए परमानेंट पिफनोमेनन इन पाकिस्तान?’’ इकनाॅमिक एंड पाॅलिटिकल वीकली, अक्तूबर 9, पी.पी. 2943 - 2951। सरकारी रिपोटे± ह्यूमन डवलपमेंट रिपोटर् 2005, यूनाइटेड नेशंस डवलपमेंट प्रोग्राम, आॅक्सपफार्डर् यूनिवसिर्टी प्रेस, आॅक्सपफोडर्। पाकिस्तानः नेशनल ह्यूमन डवलपमेंट रिपोटर्, 2003, यूनाइटेड नेशंस डवलपमेंट प्रोग्राम, सेवेंफड इंप्रेशन 2004। वल्डर् डवलपमेंट रिपोटर्, 2005, द वल्डर् बैंक, पब्िलश्ड बाय आॅक्सपफाडर् यूनिवसिर्टी प्रेस, न्यूयाॅवर्फ। लेबर मावेर्फट इंडीकेटसर्, थडर् ऐडिशन, इंटरनेशनल लेबर आॅगेर्नाइजेशन, जिनेवा। आथ्िार्क सवेर्क्षणः भारत सरकार विभ्िान्न वषो± के लिए। वेबसाइट्स ूूूण्ेजंजेण्हवअण्पद ूूूण्ेजंजचंाण्हवअण्चा ूूूण्नदण्वतह ूूूण्पसववण्वतह ूूूण्चसंददपदहबवउउपेेपवदण्दपबण्पद ूूूण्कहजिण्कमसीपण्दपबण्पद

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