अनेक वस्तुएँ जिनकी हमें आवश्यकता है, प्रतीक्षा कर सकती हैंऋ लेकिन एक बच्चा नहीं। उसे हम ‘कल’ नहीं कह सकते। उसका नाम ‘आज’ है। - चीली कवि गबरेयल्ला मिस्ट्रल ऐसा ही आधारिक संरचना के साथ है। 8.1 परिचय क्या आपने कभी इस बात पर विचार किया है कि भारत के वुफछ राज्य, अन्य क्षेत्रों के वुफछ राज्यों के मुकाबले अिाक अच्छी तरह से क्यों कायर् कर रहे हैं? कृष्िा और बागवानी के उत्पादन में क्यों पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश समृ( हो गए हैं? औद्योगिक तौर पर महाराष्ट्र और गुजरात अन्य राज्यों की अपेक्षा आगे क्यों हैं? स्वयं इर्श्वर देश के रूप में प्रसि( केरल राज्य साक्षरता, स्वास्थ्य की देखभाल और सपफाइर् में वैफसे प्रवीणता प्राप्त कर गया और बड़ी संख्या में पयर्टकों को आकष्िार्त करता है? कनार्टक सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग सारे विश्व का ध्यान क्यों आकष्िार्त करता है? यह सब इसीलिए है क्योंकि इन राज्यों में अन्य राज्यों की अपेक्षा उन क्षेत्रों में बेहतर आधारिक संरचना है, जिनमंे वे आगे बढ़े हुए हैं। वुफछ राज्यों के पास बेहतर सिंचाइर् सुविधाएँ हैं। वुफछ राज्यों में परिवहन की अच्छी सुविधा है या वे बंदरगाह के निकट स्िथत हैं, जिसमें उन्हें अपने विभ्िान्न विनिमार्ण उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चा माल आसानी से मिल जाता हैं। कनार्टक में बंगलौर जैसे शहर अनेक बहुराष्ट्रीय वंफपनियों को आकष्िार्त करते हैं, क्योंकि वे विश्वस्तरीय संचार सुविधाएँ उपलब्ध कराते हैं। ये समस्त सहयोगी संरचना जो किसी एक देश के विकास को संभव बनाती हैं, उस देश की आधारिक संरचना का निमार्ण करती हैं। पिफर, आधारिक संरचना किस प्रकार से विकास को संभव करती हैं? 8.2 आधारिक संरचना क्या हैं? आधारिक संरचना औद्योगिक व कृष्िा उत्पादन, घरेलू व विदेशी व्यापार और वाण्िाज्य के प्रमुख क्षेत्रों में सहयोगी सेवाएँ उपलब्ध कराती हैं। इन सेवाओं में सड़क, रेल, बंदरगाह, हवाइर् अड्डे, बाँध, बिजली घर, तेल व गैस, पाइर्पलाइन, दूरसंचार सुविधाएँ, स्वूफल - काॅलेज सहित देश की शैक्ष्िाक व्यवस्था, अस्पतालव स्वास्थ्य व्यवस्था, सपफाइर्, पेयजल और बैंक, बीमा व अन्य वित्तीय संस्थाएँ तथा मुद्रा प्रणाली शामिल हैं। इनमें से वुफछ सुविधाओं का प्रत्यक्ष प्रभाव वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन पर पड़ता है, जबकि वुफछ अन्य अथर्व्यवस्था के सामजिक क्षेत्राकों के निमार्ण में अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करते हैं। इन्हें कीजिए ऽ अपने क्षेत्रा में या पड़ोस में आप अनेक प्रकार की आधारिक संरचनाओं का उपयोग करते हैं। उन सबकी सूची बनायें। आपके क्षेत्रा को वुफछ और आवश्यकताएँ हो सकती हैं। अलग से उनकी सूची बनायेंं। वुफछ लोग आधारिक संरचना को दो श्रेण्िायों में बाँटते हैं - सामाजिक और आथ्िार्क। ऊजार्, परिवहन और संचार आथ्िार्क श्रेणी में आते हैं जबकि श्िाक्षा, स्वास्थ्य और आवास सामाजिक आधारिक संरचना की श्रेणी में आते हैं। 8.3 आधारिक संरचना की प्रासंगिकता आधारिक संरचना ऐसी सहयोगी प्रणाली है, जिस पर एक आधुनिक औद्योगिक अथर्व्यवस्था की कायर्वुफशल कायर्प्रणाली निभर्र करती है। आधुनिक कृष्िा भी बीजों, कीटनाशक दवाइयों और खाद के तीव्र व बड़े पैमाने पर परिवहन के लिए इस पर निभर्र करती है। इसके लिए यह आधुनिक सड़कों, रेल और जहाजी सुविधाओं का उपयोग करती हैं। वतर्मान समय में कृष्िा को बहुत बड़े पैमाने पर कायर् करने की आवश्यकता के कारण बीमा और बैंकिग सुविधाओं पर भी निभर्र होना पड़ता है। संरचनात्मक सुविधाएँ एक देश के आथ्िार्क विकास में उत्पादन के तत्वों की उत्पादकता में वृि करके और उसकी जनता के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करके अपना योगदान करती हैं। अपयार्प्त आधारिक संरचना से स्वास्थ्य पर अनेक प्रकार से बुरा असर पड़ सकता है। जलापूतिर् और सपफाइर् में सुधार से प्रमुख जल संक्रमित बीमारियों से अस्वस्थता में कमी आती है और बीमारी के होने पर भी उसकी गंभीरता कम होती है। जल, सपफाइर् और स्वास्थ्य के बीच इस स्पष्ट संबंध के अलावा यह भी हम जानते हैं कि परिवहन और संचार की संरचनात्मक सुविधा की गुणवत्ता का प्रभाव स्वास्थ्य देखभाल पर पड़ सकता है। विशेषकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में परिवहन से जुड़े वायु प्रदूषण और बचाव जोख्िामों का असर रुग्णता पर पड़ सकता है। 8.4 आधारिक संरचना की स्िथति पारंपरिक रूप से भारत में आधारिक संरचना को विकसित करने का पूरा उत्तरदायित्व सरकार का था। लेकिन यह पाया गया कि आधारिक संरचना में सरकार का निवेश अपयार्प्त था। आजकल निजी क्षेत्राक ने स्वयं और सरकार के साथ संयुक्त भागीदारी कर आधारिक संरचना के विकास में एक अत्यंत महत्वपूणर् भूमिका निभानी शुरू कर दी है। हमारी बहुसंख्य आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती है। विश्व में अत्यिाक तकनीकी उन्नति के बावजूद ग्रामीण महिलाएँ अपनी ऊजार् की आवश्यकताओं की पूतिर् हेतु पफसल का बचा - खुचा, गोबर और जलाऊ लकड़ी जैसे जैव ईंधन का आज भी उपयोग करती हैं। ईंधन, जल और अन्य बुनियादी आवश्यकताओं के लिए उन्हें दूर - दूर तक जाना पड़ता है। 2001 की जनगणना के आँकड़े यह बताते हैं कि ग्रामीण भारत में केवल 56 प्रतिशत परिवारों में बिजली की सुविधा है, जबकि 43 प्रतिशत परिवारों में आज भी मि‘ी के तेल का उपयोग होता है। ग्रामीण क्षेत्रा में लगभग 90 प्रतिशत परिवार खाना बनाने में जैव - ईंधन का इस्तेमाल करते हैं। केवल 24 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों में लोगों को नल का पानी उपलब्ध है। लगभग 76 प्रतिशत लोग वुफआँ, टैंक, तालाब, झरना, नदी, नहर आदि जैसे पानी के खुले स्रोतों से पानी सारणी 8.1 भारत तथा अन्य देशों में वुफछ आधारिक संरचना देश सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में निवेशऽ ;2013द्ध सुरक्ष्िात पेयजल तक पहुँच ;ःद्ध;2012द्ध उन्नत सपफाइर् तक पहँुच ;ःद्ध ;2012द्ध मोबाइल प्रयोक्ता/1000 लोग ;2013द्ध बिजली उत्पादन ;बिलियन किलोवाट प्रति घंटाद्ध 2011 चीन 49 98 55 89 4715 हांगकांग 24 100 100 239 39 भारत 30 97 31 71 1052 दक्ष्िाण कोरिया 29 99 100 111 520 पाकिस्तान 14 96 45 70 95 सिंगापुर 29 100 100 156 46 इण्डोनेश्िाया 34 92 52 122 182 स्रोतः विश्व विकास सूचक ;ूूूण्ूवतसकइंदाण्वतहण्द्ध ऽसकल पूँजी सृजन को दशार्ता है। इन्हें कीजिए ऽ समाचार पत्रा पढ़ते हुए आप भारत निमार्ण, विशेष प्रयोजन वाहन ;ैचमबपंस च्नतचवेम टमीपबसमद्ध, विश्िाष्ट आथ्िार्क क्षेत्रा, निमार्ण परिचालन हस्तातंरण ;ठनपसज व्चमतंजम ज्तंदेमितद्ध निजी सावर्जनिक भागीदारी इत्यादि शब्दों को पढ़ते हैं। स्व्रैफपबुक में ऐसे शब्दों का प्रयोग करने वाले समाचारों को चिपकाइए। इन शब्दों का आधारिक संरचना से क्या संबंध है। ऽ इस पाठ के अंत में दिये गये संदभो± का उपयोग करते हुए अन्य आधारिक संरचना के बारे में जानकारी प्राप्त करंें। पीते हैं। ग्रामीण इलाकोें में केवल 20 प्रतिशत लोगों वफो सपफाइर् की सुविधाएँ प्राप्त थीं। सारणी 8.1 देखें। इसमें भारत में उपलब्ध वुफछ आधारिक संरचना सुविधाओं की तुलना वुफछ अन्य देशों में उपलब्ध सुविधाओं से की गइर् है। यह सवर्विदित है कि आधारिक संरचना विकास की नींव है, लेकिन भारत में अभी भी इनकी बहुत कमी है। भारत आधारिक संरचना पर अपने सकल घरेलू उत्पाद का मात्रा 5 प्रतिशत निवेश करता है जो कि चीन और इंडोनेश्िाया से कापफी कम है। वुफछ अथर्शास्ित्रायों ने अनुमान लगाया है कि अबसे वुफछ दशकों के बाद भारत विश्व की तीसरी बड़ी अथर्व्यवस्था होगी। इसके लिए भारत को आधारिक संरचना सुविधाओं में निवेश को बढ़ाना होगा। किसी भी देश में आय में वृि के साथ - साथ आधारिक संरचना के गठन में महत्वपूणर् परिवतर्न आते हैं। अल्प आय वाले देशों के लिये सिंचाइर्, परिवहन और बिजली जैसी बुनियादी आधारिक संरचना सेवाएँ अिाक महत्वपूणर् हैं। जैसे - जैसे अथर्व्यवस्थाएँ परिपक्व होती हैं और उनकी बुनियादी उपयोग के योग्य माँगों की पूतिर् होती है, वैसे - वैसे अथर्व्यवस्था में कृष्िा की हिस्सेदारी कम होती जाती है और सेवा से संबंिात आधारिक संरचना की आवश्यकता पड़ती है। यही कारण है कि उच्च आय वाले देशों में बिजली और दूरसंचार की आधारिक संरचना का हिस्सा अिाक होता है। अतः आधारिक संरचना का विकास और आथ्िार्क विकास साथ - साथ होते हैं। कापफी हद तक कृष्िा सिंचाइर् सुविधाओं के पयार्प्त विकास व विस्तार पर निभर्र करती है। औद्योगिक प्रगति बिजली उत्पादन, परिवहन और संचार के विकास पर निभर्र करती है। यह स्पष्ट है कि यदि आधारिक संरचना की ओर उचित ध्यान नहीं दिया गया, तो इससे आथ्िार्क विकास में गंभीर रुकावटें आएँगी। इस अध्याय में हमारा ध्यान दो प्रकार की आधारिक संरचनाओं की ओर होगा, जिनका संबंध ऊजार् और स्वास्थ्य से है। 8.5 ऊजार् हमें ऊजार् की आवश्यकता क्यों पड़ती हैं? किन स्वरूपों में यह उपलब्ध है? किसी राष्ट्र की विकास प्रिया में ऊजार् का एक महत्वपूणर् स्थान है, साथ ही यह उद्योगों के लिए भी अनिवायर् है। अब इसका कृष्िा और उससे संबंिात क्षेत्रों जैसे खाद, कीटनाशक और कृष्िा - उपकरणों के उत्पादन और यातायात में उपयोग भारी स्तर पर हो रहा है। घरों में इसकी आवश्यकता भोजन बनाने, घरों को प्रकाश्िात करने और गमर् करने के लिए होती है। क्या आप ऊजार् के बिना किसी उपयोगी वस्तु के उत्पादन या सेवा की कल्पना कर सकते हैं? ऊजार् के स्रोतः ऊजार् के व्यावसायिक और गैर व्यावसायिक स्रोत होते हैं। व्यावसायिक स्रोतों में कोयला, पेट्रोल और बिजली आते हैं क्योंकि उन्हें खरीदा और बेचा जाता है। ऊजार् के गैर - व्यावसायिक स्रोतों में जलाऊ लकड़ी, कृष्िा का वूफड़ा - कचरा ;ॅंेजमद्ध और सूखा गोबर आते हैं। ये गैर - व्यावसायिक हैं, क्योंकि ये हमें प्रकृति/जंगलों में मिलते हैं। आमतौर पर ऊजार् के व्यावसायिक स्रोत ;पनबिजली को छोड़करद्ध समाप्त हो जाते हैं जबकि गैर - व्यवसायिक स्रोतों का पुननर्वीनीकरण हो सकता है। भारतीय परिवारों में 60 प्रतिशत से अिाक परिवार अपनी नियमित भोजन और गमर् करने की आवश्यकताओं के लिए ऊजार् के परम्परागत स्रोतों पर निभर्र हैं। ऊजार् के गैर - पारंपरिक स्रोतः ऊजार् के व्यावसायिक और गैर - व्यावसायिक स्रोतों को हम ऊजार् के पारंपरिक स्रोत कहते हैं। ऊजार् के तीन और स्रोत हैं जिन्हें हम आमतौर पर गैर - पारंपरिक स्रोत कहते हैं, वे हैं - सौर ऊजार्, पवन ऊजार् और ज्वार ऊजार्। उष्ण प्रदेश होने के कारण भारत में इन तीनों प्रकार की ऊजार्ओं का उत्पादन करने की असीमित संभावनाएँ हंै। ऐसा तभी संभव होगा जबकि कोइर् मौजूदा सस्ती प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाये या और भी सस्ती प्रौद्योगिकी विकसित की जाये। व्यावसायिक ऊजार् की उपभोग प(तिः भारत में ऊजार् के वुफल उपभोग का 74 प्रतिशत व्यावसायिक ऊजार् से पूरा होता है। इसमें कोयला शामिल है, जिसका 54 प्रतिशत का अंश सबसे अिाक है। इसमे तेल ;32 प्रतिशतद्ध, प्राकृतिक गैस ;10 प्रतिशतद्ध और जल ऊजार् ;2 प्रतिशतद्ध शामिल हैं। जलाऊ लकड़ी, गाय का गोबर और कृष्िा का वूफड़ा - कचरा आदि गैर - व्यावसायिक ऊजार् स्रोतों का उपयोग भारत में वुफल ऊजार् उपयोग का 26 प्रतिशत से ज्यादा है। भारत के ऊजार् क्षेत्राक की एक महत्वपूणर् विशेषता है, सारणी 8.2 व्यावसायिक ऊजार् उपयोग के क्षे़़त्राकवार हिस्सेदारी की प्रवृत्ितयाँ ;ः मेंद्ध क्षेत्राक 2009 - 10 1953 - 54 1970 - 71 1990 - 91 1996 - 97 परिवार 22 10 12 12 12 कृष्िा 18 01 03 08 09 उद्योग 45 40 50 45 42 परिवहन 2 44 28 22 22 अन्य 13 5 07 13 15 वुफल 100 100 100 100 100 स्रोतः ग्यारहवीं पंचवषीर्य योजना, भाग 2, योजना आयेाग, भारत सरकार, नयी दिल्लीजिसका अथर्व्यवस्था से भी संबंध है, कि हमें पेट्रोल और पेट्रोलियम उत्पादों के लिए आयात पर निभर्र होना पड़ता है और निकट भविष्य में इस निभर्रता में क्रमिक वृि होगी। सारणी 8.2 में व्यावसायिक ऊजार् के उपयोग की क्षेत्राकवार प(ति दी गइर् है। 1953 - 54 में परिवहन क्षेत्राक व्यावसायिक ऊजार् का सबसे बड़ा उपभोक्ता था। लेकिन परिवहन क्षेत्राक के अंश में निरंतर गिरावट आइर् है जबकि घर, कृष्िा तथा औद्योगिक क्षेत्राक उपयोग में वृि हो रही है। समस्त व्यावसायिक ऊजार् उपयोग में तेल और गैस का अंश सबसे अिाक है। आथ्िार्क विकास की तीव्र दर के साथ - साथ ऊजार् के उपयोग में भी वृि हुइर् है। ऊजार्/विद्युत उफजार्ः ऊजार् का सबसे दृष्िटगोचर रूप, जिसे प्रायः आधुनिक सभ्यता की प्रगति का द्योतक माना जाता है, में बिजली आती है। किसी देश के आथ्िार्क विकास को चाटर् 8.1ः भारत मंे विद्युत उत्पादन के विभ्िान्न स्रोत, 2013 विद्युत प्राध्िकरण, पावर मंत्रालय, भारत सरकार निधार्रित करने वाली आधारिक संरचना में बिजली अत्यंत महत्वपूणर् है। प्रायः बिजली की माँग की अभ्िावृि दर सकल घरेलू उत्पाद दर से ऊँची होती है। अध्ययनों से पता चलता है कि 8 प्रतिशत प्रतिवषर् सकल घरेलू उत्पाद प्राप्त करने के लिए बिजली की पूतिर् में अभ्िावृि का प्रतिवषर् दर लगभग 12 प्रतिशत होना चाहिए। भारत में 2012 - 13 में वुफल बिजली उत्पादन क्षमता का लगभग 70 प्रतिशत उत्पादन तापीय स्रोतों से हुआ। जल, वायु और परमाणु स्रोतों का प्रतिशत क्रमशः 16 और 2.0 रहा। भारत की ऊजार् नीति जल और वायु के ऊजार् स्रोतों को प्रोत्साहन देती है क्योंकि ये स्रोत जीवाश्म ईंधन पर निभर्र नहीं हैं, इसीलिए इनमें काबर्न उत्सजर्न नहीं होता। इसके परिणामस्वरूप, इन दोनों स्रोतों से उत्पादित बिजली मेें तीव्र अभ्िावृि हुइर् है। बिजली की शक्ित का एक महत्वपूणर् स्रोत परमाणु ऊजार् हैऋ इसके पयार्वरण संबंधी पफायदे हैं और दीघर्काल में यह सस्ती साबित हो सकती है। वतर्मान में परमाणु ऊजार् का वुफल प्राथमिक ऊजार् खपत में केवल 2.4 प्रतिशत का अंश है, जबकि विश्व औसत 13 प्रतिशत है। यह बहुत ही कम है। इसलिए, वुफछ विद्वानों की राय है कि अध्िक से अध्िक विद्युत का उत्पादन परमाणु स्रोत और वुफछ अन्य वस्तुओं द्वारा किया जाए जिससे पयार्वरण और धरणीय विकास प्रभावित न हो। इस संबंध् में आपकी क्या राय है? विद्युत क्षेत्राक की वुफछ चुनौतियाँः विभ्िान्न पाॅवर स्टेशनों द्वारा जनित बिजली का पूरा उपभोग उपभोक्ता नहीं करते। उसके एक अंश का उपभोग पाॅवर स्टेशन के सहायक इकाइयों द्वारा किया जाता हैै। बिजली के संप्रेषण में भी उसका एक हिस्सा खत्म हो जाता है। शेष बिजली हम अपने घरों, आॅपिफसों और कारखानों मंे प्राप्त करते हैं। भारत के बिजली क्षेत्रा के समक्ष आज कइर् प्रकार की चुनौतियाँ हैंः ;कद्ध भारत की वतर्मान बिजली उत्पादन क्षमता 9 प्रतिशत की प्रतिवषर् आथ्िार्क क्षमता अभ्िावृि के लिए पयार्प्त नहीं है। भारत की व्यवसायिक ऊजार् पू£त 7 प्रतिशत की दर से बढ़ने की आवश्यकता है। वतर्मान में भारत प्रतिवषर् मात्रा 20 हजार मेगावाट नइर् क्षमता जोड़ पाता है। यहाँ तक कि स्थापित क्षमता का भी अल्प उपयोग होता है, क्योंकि बिजलीघर उचित तरीके से नहीं चल रहे। ;खद्ध राज्य विद्युत बोडर् जो विद्युत वितरण करते हैं, की हानि पाँच सौ विलियन से ज्यादा है। इसका कारण संप्रेषण बाॅक्स 8.1ः लीक से हटकर थाणे शहर की एक पूणर्तया नइर् छवि उभर रही है - जो पयार्वरण मित्रा के रूप में है। सौयर् ऊजार्, जिसे कभी असंभव माना जाता था, के बड़े पैमाने पर प्रयोग द्वारा वास्तविक लाभ मिले हैं तथा लागत और ऊजार् की बचत हुइर् है। इसका प्रयोग पानी गरम करने, विद्युत्चालित यातायात प्रकाश व्यवस्था और विज्ञापन होडि±गों को प्रकाशमान करने के लिए किया जाता है। थाणे नगरपालिका का इस अद्वितीय प्रयोग में अग्रणी स्थान है। शहर की सभी नइर् इमारतों के लिए सौयर् जल तापन प(ति को स्थापित करना अनिवायर् कर दिया गया है ;आउटलुक 01, अगस्त, 2005 में काॅलम ‘मेकिंग ए डिपफरेंस’ में प्रकाश्िातद्ध। ऽ क्या आप गैर परंपरागत ऊजार् के प्रयोग का ऐसा ही कोइर् अन्य उदाहरण दे सकते हैं? बाॅक्स 8.2ः विद्युत वितरण दिल्ली के संदभर् में स्वतंत्राता के पश्चात् राजधानी में विद्युत प्रबंधन में चार बार परिवतर्न हुआ। 1951 में दिल्ली राज्य - विद्युत बोडर् की स्थापना हुइर्। 1958 में दिल्ली विद्युत आपूतिर् निगम ;क्ण्म्ण्ैण्न्द्ध बना। 1997 में प्रंबंध व्यवस्था में तीसरा परिवतर्न हुआ और दिल्ली विद्युत बोडर् ;क्ण्टण्ठण्द्ध बना। अब विद्युत वितरण का कायर् निजी क्षेत्रा की दो अग्रणी वंफपनियाँ रिलायंस एनजीर् लिमिटेड ;ठण्ैण्म्ण्ैद्ध राजधनी पावर लिमिटेड और ठण्ैण्म्ण्ै युमना पावर लिमिटेड तथा टाटा पावर लिमिटेड छण्क्ण्च्ण्स् कर रही हैं। ये दिल्ली में लगभग 43 लाख उपभोक्ता को विद्युत पूतिर् करते हंै। बिजली की दर और अन्य विनियामक मुद्दों की देख रेख दिल्ली विद्युत विनियमन आयोग करता है। यह आशा थी कि विद्युत् वितरण में अिाक सुधार होगा और उपभोक्ताओं को कइर् रूपों में लाभ मिलेगा। लेकिन अनुभव बताता है कि परिणाम असंतोषजनक है। और वितरण का नुकसान, बिजली की अनुचित कीमतें और अकायर्वुफशलता है। वुफछ विद्वानों का यह मत है कि किसानों को विद्युत का वितरण ही नुकसान का प्रमुख कारण है। अनेक क्षेत्रों में बिजली की चोरी होती है जिससे राज्य विद्युत निगमों को और भी नुकसान होता है। ;गद्ध बिजली के क्षेत्रा में निजी क्षेत्राक की भूमिका बहुत कम है। विदेशी निवेश का भी यही हाल है। ;घद्ध भारत के विभ्िान्न भागों में बिजली की ऊँची दरें और लंबे समय तक बिजली गुल होने से आमतौर पर जनता में असंतोष है। भारत के थमर्ल पावर स्टेशन, जो कि भारत के बिजली क्षेत्रा के आधार हैं, कच्चे माल और कोयले की पूतिर् में कमी का सामना कर रहे हंै। इस प्रकार, निरंतर आथ्िार्क विकास और जनसंख्या वृि से भारत में ऊजार् की माँग में तीव्र वृि हो रही है। यह माँग वतर्मान में उत्पन्न की जा रही ऊजार् से बहुत अिाक है। अिाक सावर्जनिक निवेश, बेहतर अनुसंधान व विकास के उपाय तकनीकी खोज और ऊजार् के पुननर्वीनीकृत स्रोतों से बिजली की अतिरिक्त पूतिर् सुनिश्िचत की जा सकती है। अतिरिक्त क्षमता वाले पावर क्षेत्राक में बाॅक्स 8.3ः ऊजार् बचतः काॅमपेक्ट फ्रलोरोसेंट लैंप के विषय का संव(र्न ऊजार् कायर्वुफशलता ब्यूरो के अनुसार काॅम्पेक्ट फ्रलोरोसेंट लैंप सामान्य बल्बों की अपेक्षा 80 प्रतिशत कम बिजली की खपत करते हैं। इंडो - एश्िायन नामक काॅमपेक्ट फ्रलोरोसेंट लैम्प के निमार्ता का कहना है कि दस लाख 100 वाॅट बल्व की 20 वाॅट की काॅमपेक्ट फ्रलोरोसेंट लैंप का प्रयोग करने से बिजली उत्पादन में 80 मेगावाॅट की बचत हो सकती है। बचत की यह राश्िा 400 करोड़ रुपया है। स्रोतः नरेश मिनोच्चा की यूश काॅमनसेंस टू सोल्ब पाॅवर क्राइसिस, तहलका 1 अक्तूबर, 2005 इन्हें कीजिए ऽ आप किस प्रकार की ऊजार् का प्रयोग अपने घर में करते हैं? अपने अभ्िाभावक से पता करें कि वे विभ्िान्न प्रकारों की ऊजार् में एक महीने में कितना धन खचर् करते हैं? ऽ आपको बिजली की पूतिर् कौन करता है और उसका उत्पादन कहाँ होता है? क्या आप किसी सस्ती वैकल्िपक ऊजार् स्रोत के बारे में सोच सकते हैं, जो कि आपके घर को प्रकाश्िात करने या भोजन पकाने या दूरदराज की जगहों का भ्रमण करने में सहायक हो सकती है। ऽ नीचे की सारणी देखें। क्या आप समझते हैं कि ऊजार् खपत विकास का एक प्रभावशाली सूचक है? देश भारत इंडोनेश्िाया मिस्र इग्लैंड जापान अमेरिका 2012 पी.पी.पी. में प्रतिव्यक्ित ;डाॅलर मेंद्ध आय 3550 4200 6060 36410 34640 47360 2011 में ऊजार् की प्रतिव्यक्ित खपत ;ज्ञॅीद्ध 684 680 1743 5472 7848 13246 स्रोत - वल्डर् डेवलपमेंट सूचक ;ूूूण्ूवतसकइंदाण्वतहद्ध ऽ पता करें कि आपके क्षेत्रा में बिजली का वितरण वैफसे होता है? साथ में अपने शहर की वुफल बिजली मांग का पता करें और यह भी पता लगायें कि उसे वैफसे पूरा किया जाता है। ऽ आपने देखा होगा कि लोग बिजली और अन्य ऊजार् को बचाने के लिए विभ्िान्न प्रकार के तरीकों का प्रयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, गैस स्टोव का प्रयोग करने पर गैस एजेंसी गैस को कायर्वुफशलता और बचत के साथ प्रयोग करने के वुफछ तरीके बतलाती है। अपने अभ्िाभावकों और बुजुगो± से उन पर चचार् कीजिए, मुख्य बातों को लिख्िाए और कक्षा में उन पर चचार् कीजिए। निवेश के बावजूद सरकार पावर क्षेत्राक के 8.6 स्वास्थ्य निजीकरण के लिए सहमत हुइर् है ;और खासकर स्वास्थ्य से हमारा मतलब केवल बीमारियों का वितरण के मामले में देखे बाॅक्स 8.2द्ध तथा उच्च न होना ही नहीं है, बल्िक यह अपनी कायर् - क्षमता कीमतों पर विद्युत आपूतिर् की स्वीवृफति दी जिसका प्राप्त करने की योग्यता भी है। किसी की वुफछ खास वगो± पर बहुत बुरा असर पड़ा। ;देखें सुख - समृि का मापदंड है। स्वास्थ्य राष्ट्र की बाॅक्स 3.3द्ध। क्या आप सहमत हैं कि यह एक समग्र संवृि और विकास से जुड़ी एक पूणर् सही नीति हैं? प्रिया है। यद्यपि बीसवीं शताब्दी के इतिहास ने उत्कृष्ट मानव स्वास्थ्य के वैश्िवक रूपांतरण को देखा है, पिफर भी किसी राष्ट्र की स्वास्थ्य - दशा की माप को किसी एक इकाइर् के रूप में परिभाष्िात करना कठिन है। आमतौर पर विद्वान, लोगों के स्वास्थ्य का निधार्रण श्िाशु मृत्यु - दर और मातृत्व मृत्यु दर, जीवन - प्रत्याशा और पोषण स्तर के साथ - साथ संक्रामक और असंक्रामक रोगों की घटनाओं जैसे सूचकों द्वारा करते हैं। स्वास्थ्य आधारिक संरचना के विकास से किसी देश में वस्तुओं व सेवाओं के उत्पादन के लिए स्वस्थ जनशक्ित सुनिश्िचत होती है। हाल के वषो± में विद्वानों का कहना है कि लोगों को स्वास्थ्य - सुविधाएँ प्राप्त करने का अिाकार है। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह नागरिकों के स्वस्थ स्वास्थ्य जीवन के अिाकार को सुनिश्िचत करे। स्वास्थ्य आधारिक संरचना में अस्पताल, डाॅक्टर, नसर् और अन्य अ(र् - चिकित्साकमीर्, बेड, अस्पतालों में जरूरी उपकरण और एक सुविकसित दवा उद्योग शामिल हैं। यह भी सत्य है कि स्वास्थ्य आधारिक संरचना की मात्रा उपस्िथति से ही लोग स्वस्थ हों यह आवश्यक नहीं, लोगों की इन सुविधाओं पर पहुँच होनी चाहिए। योजनाब( विकास के आरंभ से ही नीति निमार्ताओं ने जोर दिया कि कोइर् व्यक्ित चिकित्सा सुविधा - आरोग्यकारी और निवारक, प्राप्त करने से वंचित इसलिए न रह जाए, क्योंकि वह उसकी कीमत अदा नहीं कर पाता। लेकिन, क्या हम इस आदशर् को प्राप्त कर पाये हैं? इससे पहले कि हम विभ्िान्न आधारिक संरचनाओं पर विचार करें, आइए, भारत में स्वास्थ्य की स्िथति पर चचार् करें। स्वास्थ्य आधारिक संरचना की स्िथति: सरकार पर यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह स्वास्थ्य - श्िाक्षा, भोजन में मिलावट, दवाएँ तथा जहरीले पदाथर्, चिकित्सा व्यवसाय, जन्म - मृत्यु संबंधी आँकड़े, मानसिक अक्षमता और पागलपन जैसे स्वास्थ्य संबंिात गंभीर मुद्दों को निदेश्िात व विनियमित करे। वेंफद्र सरकार, वेंफद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद् की सहायता से विस्तृत नीतियाँ एवं योजनाएँचित्रा 8.9 देश के हिस्से में अभी भी स्वास्थ्य आधारिक संरचना का अभाव विकसित करती है। वे सूचनाएँ इकटòा करते हैं और देश में महत्वपूणर् स्वास्थ्य कायर्क्रमों को लागू करने के लिए राज्य सरकारों, वेंफद्र शासित प्रदेशों और अन्य निकायों को वित्तीय व तकनीकी सहायता प्रदान करती है। पिछले वषो± के दौरान भारत ने विभ्िान्न स्तरों पर एक व्यापक स्वास्थ्य आधारिक संरचना और जनशक्ित को विकसित किया है। गाँव के स्तर पर सरकार ने अनेक प्रकार के अस्पतालों की व्यवस्था की है। भारत में ऐसे अस्पतालों - तकनीकी रूप से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों ;च्भ्ब्ैद्ध ;देखंे बाॅक्स 8.5द्ध की संख्या भी अिाक है जो कि स्वैच्िछक संस्थाओं और निजी क्षेत्राक द्वारा चलाये जा रहे हैं। इन अस्पतालों को मेडिकल, दवा और नसि±ग काॅलेजों में प्रश्िाक्ष्िात चिकित्सा और अ(र् - चिकित्साकमीर् संचालित करते हैं। स्वतंत्राता के बाद से स्वास्थ्य सेवाओं की संख्या में महत्वपूणर् विस्तार हुआ है। 1951 - 2013 के बीच सरकारी अस्पतालों और दवाखानों की संख्या 9300 से बढ़कर 45,200 हो गइर् और अस्पतालों तकनीकी रूप से प्राथमिक स्वास्थ्य वेंफद्रों ;च्भ्ब्ेद्ध ;देखें बाॅक्स 8.5द्ध के बेड 1.2 से 6.3 लाख हो गये ;सारणी 8.3 देखेंद्ध। 1951 - 2013 के दौरान नसि±गकमिर्यों की संख्या 0.18 से 23.44 लाख हो गइर् जबकि एलोपैथी डाॅक्टरों की संख्या 0.62 से 9.2 लाख हो गइर्। स्वास्थ्य आधारिक संरचना के विस्तार से चेचक और स्नायुक रोगों का उन्मूलन और पोलियो तथा वुफष्ठ रोग का पूणर् उन्मूलन हो गया है। सारणी 8.3 भारत में सावर्जनिक स्वास्थ्य संरचनात्मक सेवाएँ 1951 - 2010 मद 1951 1981 2000 2013 - 2014 अस्पताल 2694 6805 15888 19817ऽ अस्पताल / दवाखाना में बेड 117000 504538 719861 628708ऽ दवाखाना 6600 16745 23065 24392 सावर्जनिक स्वास्थ्य वेंफद्र 725 9115 22842 24448 उपवेंफद्र - 84736 137311 151684 सामुदायिक स्वास्थ्य वेंफद्र - 761 3043 5187 नोटः ;ऽद्ध आँकड़े केवल सरकारी अस्पतालों से संबंध्ित हैं। स्रोतः नेशनल कमीशन आॅन मैक्रोइकोनाॅमिक्स एंड हेल्थ, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, नयी दिल्ली, 2005 और नेशनल हेल्थ प्रोपफाइल, 2013, ूूूण्बइीपकहीेण्दपबण्पद निजी क्षेत्राक में स्वास्थ्य आधारिक संरचनाः हाल के समय में सावर्जनिक स्वास्थ्य क्षेत्राक अपने कत्तर्व्य के निवार्ह में बहुत अिाक सपफल नहीं हुआ है। इस बारे में और अिाक अध्ययन हम अगले अध्याय में करेंगे। लेकिन इस क्षेत्रा में निजी क्षेत्रा ने बहुत प्रगति की है। भारत में 70 प्रतिशत से अिाक अस्पतालों का संचालन निजी क्षेत्राक कर रहा है। उनके पास अस्पतालों में उपलब्ध बेडों का 2/5 वाँ हिस्सा है। लगभग 60 प्रतिशत दवाखाने निजी क्षेत्रा द्वारा चलाये जा रहे हैं। वे 80 प्रतिशत बहिर्रोगियों और 46 प्रतिशत अंतःरोगियों के स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं। पिछले वषो± में निजी क्षेत्राक मेडिकल श्िाक्षा व प्रश्िाक्षण, मेडिकल प्रौद्योगिकी तथा रोग - निदान अन्वेषण, दवाइयों की बिक्री, बाॅक्स 8.5ः भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था भारत की स्वास्थ्य आधारिक संरचना और स्वास्थ्य सुविधाओं की तीन स्तरीय व्यवस्था है - प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक। प्राथमिक क्षेत्राक सुविधाओं में प्रचलित स्वास्थ्य समस्याओं का ज्ञान तथा उन्हें पहचानने, रोकने और नियंत्रिात करने की वििा, खाद्य पूतिर् तथा उचित पोषण और जल की पयार्प्त पूतिर् तथा मूलभूत स्वच्छता, श्िाशु एवं मातृत्व देखभाल, प्रमुख संक्रामक बीमारियों और चोटों से प्रतिरोध तथा मानसिक स्वास्थ्य का संव(र्न और आवश्यक दवाओं का प्रावधान शामिल है। आॅक्सीलियरी नसि±ग मिडवाइपफ ;ए.एन.एम.द्ध पहला व्यक्ित है, जो ग्रामीण इलाके में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करता है। प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करने के लिए गाँवों तथा छोटे कस्बों में अस्पताल बनाये गये हैं। आमतौर पर यहां एक डाॅक्टर, एक नसर् और सीमित मात्रा में दवाएँ उपलब्ध होती हैं। इन्हें प्राथमिक चिकित्सा वेंफद्र, सामुदायिक चिकित्सा वेंफद्र और उपवेंफद्रों के नाम से जाना जाता है। जब एक रोगी की हालत में प्राथमिक चिकित्सा वेंफद्र में सुधार नहीं हो पाता, तो उन्हें द्वितीयक या मध्य या उच्च श्रेणी के अस्पतालों में भेजा जाता है। जिन अस्पतालों में शल्य - चिकित्सा, एक्सरे, इ.सी.जी. जैसी बेहतर सुविधाएं होती हैं, उन्हें माध्यमिक चिकित्सा संस्थाएँ कहते हैं। वे प्राथमिक चिकित्सा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ, दोनों ही प्रदान करते हैंै। वे प्रायः जिला मुख्यालय और बड़े कस्बों में होते हैं। ऐसे सभी अस्पताल जहाँ उच्च - स्तर के उपकरण और दवाइयाँ उपलब्ध हों और और जो कि ऐसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का निपटान करें जिसकी सुविधाएँ प्राथमिक या माध्यमिक अस्पतालों में हो,श्िाशु को पोलियो ड्राप दिया जाना तृतीयक क्षेत्रा में आते हैं। तृतीयक क्षेत्रा में ऐसे प्रमुख संस्थान भी शामिल हैं जो कि न केवल उत्तम मेडिकल श्िाक्षा प्रदान करते और अनुसंधान करते हैं बल्िक वे विश्िाष्ट स्वास्थ्य सेवाएँ भी प्रदान करते हैं। इनमें से वुफछ है - मेडिकल इंस्टीट्यूट, नयी दिल्ली, पोस्ट ग्रेजुयेट इंस्टीट्यूट, चंडीगढ़ऋ नेशनल इंस्टीट्यूट आॅपफ मेंटल हेल्थ और न्यूरो साइंस, बंगलौर और आॅल इंडिया इंस्टीट्यूट आॅपफ हाइजीन एंड पब्िलक हेल्थ, कोलकाता। स्रोतः नेशनल कमीशन आॅन मेकरोइकोनाॅमिक्स एंड हेल्थ, 2005 स्वास्थ्य जागरूकता गोष्ठी की प्रगति पर बाॅक्स 8.6ः चिकित्सा पयर्टन - एक महान अवसर आपने टेलीविजन समाचारों या समाचार - पत्रों में देखा होगा कि बड़ी संख्या में विदेशी शल्य चिकित्सा, गुदार्रोपण, दंत और यहाँंतक कि सौदयर्व(र्क देखभाल के लिए भारत आ रहे हैं। क्यों? क्योंकि हमारी स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिकतम चिकित्सा प्रौद्योगिकी है, हमारे पास योग्य डाॅक्टर हैं और विदेश्िायों को उनके देश में ऐसी चिकित्सा के लिए लगने वाली कीमत की अपेक्षा हमारे यहाँ चिकित्सा सेवाएँ कापफी सस्ती हैं। वषर् 2004 - 05 में 1.50.000 से भी अिाक पयर्टक चिकित्सा के लिए भारत आये और इस संख्या में प्रतिवषर् 15 प्रतिशत वृि होने की संभावना है। विशेषज्ञों की यह भविष्यवाणी है कि 2012 में भारत मेडिकल पयर्टन से 1000 अरब रुपयों से अिाक की आय अजिर्त कर सकता है। अिाक विदेश्िायों को भारत की ओर आकष्िार्त करने के लिए स्वास्थ्य आधारिक संरचना को ऊँचा उठाया जा सकता है। अस्पताल निमार्ण व मेडिकल सेवाओं की व्यवस्था में एक प्रमुख भूमिका निभा रहा है। 2001 - 2002 में 13 लाख से अिाक मेडिकल उद्यम थे जिनमें 22 लाख लोग काम कर रहे थेऋ इनमें से 80 प्रतिशत से अिाक एक व्यिाफ के स्वामित्व वाले थे जो समय - समय पर भाड़े के श्रमिकों से काम लेते थे। विद्वानों ने यह कहा है कि भारत में निजी क्षेत्राक स्वतंत्रा रूप से और बिना किसी बड़े विनियमन के विकसित हुआ है। वुफछ निजी चिकित्सकों का तो पंजीकरण भी नहीं हुआ है और उन्हें हम पफजीर् चिकित्सक कहते हैं। बाॅक्स 8.7ः समुदाय और स्वास्थ्य देखभाल की अलाभकारी संस्थाएँ समुदाय एक अच्छी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली का महत्त्वपूणर् पक्ष है। यह इस विचार पर कायर् करती है कि लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्रश्िाक्ष्िात करके स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में लगाया जा सकता है। देश के वुफछ हिस्सों में इस विध्ि का उपयोग पहले ही से किया जा रहा है। सेवा स्वनियोजित महिला समिति ;ैम्ॅ।द्ध अहमदाबाद और ।बबवतक नीलगिरि भारत में कायर् कर रही वुफछ ऐसी ही गैर - सरकारी संस्थाओं ;छळव्श्ेद्ध के उदाहरण हंै। व्यापार संघ ने अपने सदस्यों के लिए वुफछ वैकल्िपक स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ उपलब्ध् कराए हैं और आस - पास के गाँव के लोगों को निम्न लागत पर स्वास्थ्य की देखभाल की सुविध प्रदान की है। इस संबंध् में सवार्ध्िक अग्रणी और सुविख्यात पहल शाहिद अस्पताल ने की है। इस अस्पताल का निमार्ण मध्य प्रदेश के दुगर् में छत्तीसगढ़ श्रमिक संघ के श्रमिकों द्वारा 1983 में किया गया। वैकल्िपक स्वास्थ्य देखभाल पहलों का निमार्ण करने के लिए ग्रामीण संस्थाओं ने वुफछ प्रयास किए हैंैै। थाणे, महाराष्ट्र में कबिलाइर् लोगों का संगठन, काश्तकारी संगठन इसका उदाहरण है। यहाँ न्यूनतम लागत पर साधरण बीमारी का गाँव के स्तर पर उपचार करने के लिए महिला स्वास्थ्य श्रमिकों को प्रश्िाक्ष्िात किया गया है। सारणी 8.4 अन्य देशों की तुलना में भारत में स्वास्थ्य सूचक, 2012 सूचक भारत चीन अमेरिका श्रीलंका 1.श्िाशु मृत्यु दर/प्रति 1000 ज्ि़ान्दा श्िाशु 44 12 6 8 2.पांच वषर् के नीचे मृत्यु दर/प्रति 1000 श्िाशु 56 14 7 10 3.प्रश्िाक्ष्िात परिचारिका द्वारा जन्म 67 96 99 99 4.पूणर्तः प्रतिरक्ष्िात 72 99 99 99 5.सकल घरेलू उत्पाद में स्वास्थ्य पर व्यय ;»द्ध 3.9 5.1 17.7 3.3 6.वुफल स्वास्थ्य व्यय में सरकारी हिस्सेदारी 8.2 12.5 20.3 6.5 7.जेब से बाहर का व्यय, स्वास्थ्य पर निजी व्यय के प्रतिशत के रूप में 86 79 22 83 स्रोतः नेशनल हेल्थ प्रोपफाइल, 2013, चैप्टर 6, मिनिस्ट्री आॅपफ हेल्थ एंड पैफमिली वेलपेफयर, भारत सरकार। 1990 के दशक से उदारीकरण उपायों के कारण अनेक अप्रवासी भारतियों और औद्योगिक तथा दवा कंपनियों ने भारत के अमीरों और चिकित्सा पयर्टकों को आकष्िार्त करने के लिए आधुनिकतम सुपर - स्पैशलिटी अस्पतालों का निमार्ण किया। ;देखें बाॅक्स 8.6द्ध। क्या आप सहमत हैं कि भारत के अध्िकतर लोग इस प्रकार के सुपर स्पैशलिटी अस्पतालों की सेवा प्राप्त कर सकते हैं? क्यों नहीं? ऐसा करने के लिए क्या किया जा सकता है जिससे कि भारत के प्रत्येक व्यक्ित उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त कर सवेंफ? चिकित्सा की भारतीय प्रणालीः चिकित्सा की भारतीय प्रणाली में 6 व्यवस्थाएँ हैं - आयुवेर्द, योग, यूनानी, सि(, प्राकृतिक चिकित्सा और होम्योपैथी। इनके अंग्रेजी नामों के अनुसार भारतीय प्रणाली को आयुश भी कहते हैं ;आयुवेर्द, योग, यूनानी, सि(, प्राकृतिक और होम्योपैथ्िाकद्ध। भारत वतर्मान में चिकित्सा की भारतीय प्रणाली के 3167 अस्पताल, 26000 दवाखाने और 7.0 लाख पंजीकृत चिकित्सक हैं। लेकिन चिकित्सा की भारतीय प्रणाली में शैक्ष्िाक मानकीकरण या अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए किसी प्रकार की रूपरेखा बनाने हेतु वुफछ नहीं किया गया है। चिकित्सा की भारतीय प्रणाली में भारी संभावनाएँ हंै और वे हमारे स्वास्थ्य की देखभाल की अनेक समस्याओं का निराकरण कर सकती हैं क्योंकि वे प्रभावशाली, सुरक्ष्िात और सस्ती हैं। स्वास्थ्य और स्वास्थ्य आधारिक संरचना के सूचकः एक मूल्यांकनः जैसा कि पहले बताया गया है कि एक देश में स्वास्थ्य की स्िथति का मूल्यांकन श्िाशु मृत्यु तथा मातृ - मृत्यु दरों, जीवन - प्रत्याशा व पोषण स्तरों के साथ - साथ संक्रामक व गैर - संक्रामक रोगों की घटनाओं जैसे सूचकों के द्वारा होता है। इनमें से वुफछ स्वास्थ्य सूचकों और उनकी भारत में स्िथति के बारे में जानकारी सारणी 8.4 में दी गइर् है। विशेषज्ञों की यह राय है कि स्वास्थ्य क्षेत्राक में इन्हें कीजिए ऽ अपने इलाके या पड़ोस में स्िथत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में जाइए। अपने इलाके में निजी अस्पतालों, चिकित्सा प्रयोगशालाओं, सूक्ष्म परीक्षा वेंफद्रों और दवा की दुकानों और इसी प्रकार की अन्य सुविधाओं की संख्या की जानकारी प्राप्त कीजिए। ऽ ‘प्रतिवषर् मेडिकल काॅलेजों से पास करने वाले हजारों मेडिकल स्नातकों की सेवाओं को प्राप्त करने में साधनहीन गरीबों की देखभाल के लिए क्या हमें दाइयों की एक सेना तैयार करनी चाहिए?’ इस विषय पर कक्षा में वाद - विवाद करें। ऽ एक अध्ययन के द्वारा यह अनुमान लगाया गया है कि केवल चिकित्सा व्यय ही प्रतिवषर् 2.2 प्रतिशत जनसंख्या को गरीबी रेखा से नीचे ले जाता है। वैफसे? ऽ अपने स्थानीय क्षेत्रा में वुफछ अस्पतालों में जाइए। उनसे प्रतिरक्षण प्राप्त करने वाले बच्चों की संख्या का पता करें। अस्पताल कमिर्यों से 5 वषर् पहले प्रतिरक्ष्िात बच्चों की संख्या के बारे में पूछें। प्राप्त जानकारी पर कक्षा में चचार् करें। ऽ असम के दो छात्रों लीना तालुकदार ;16द्ध और सुशांता महंत ;16द्ध ने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध झाडि़यों, धान का भूसा, छिलवफों और सूखे वूफड़े की सहायता से मच्छरों को भगाने वाली हबर्ल दवा ‘जग’ बनाइर्। उनका यह प्रयोग सपफल रहा ;शोधयात्रा, योजना, सितंबर 2005द्ध। यदि आप किसी व्यक्ित को जानते हैं जिसके नूतन तरीकों से लोगों के स्वास्थ्य स्तर में सुधार हुआ हो या यदि आप जिन्हें जड़ी बूटियों की जानकारी हो और वे लोगों के रोगों को ठीक करते हों, तो उनसे बात करें, उन्हें कक्षा में लायें या तो उनसे यह सूचना प्राप्त करें कि वे क्यों और वैफसे रोग का निदान करते हैं। कक्षा में यह जानकारी दें। आप स्थानीय समाचार - पत्रों या पत्रिाकाओं में भी इस के बारे में लिख सकते हैं। ऽ क्या आप मानते हैं कि भारतीय शहरों में विश्व स्तर की चिकित्सा आधारिक संरचना उपलब्ध हो सकती हैं, जिससे कि वे मेडिकल पयर्टन के लिए आकष्िार्त हो सकें? या क्या सरकार को ग्रामीण क्षेत्रों में जनता के लिए आधारिक संरचना प्रदान करने पर केंदि्रत होना चाहिए? सरकार की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए? चचार् कीजिए। ऽ स्वास्थ्य सुविधा के क्षेत्रा में आपके क्षेत्रा में कायर् कर रहे गैर सरकारी संगठनों की कायर्प्रणाली का पता करें। उनकी गतिवििायों के बारे में जानकारी प्राप्त करें और उन पर कक्षा में चचार् करें। सरकार की भूमिका के लिए अिाकािाक स्थान है। उदाहरण के लिए, सारणी यह बतलाती है कि स्वास्थ्य क्षेत्राक में व्यय सकल घरेलू उत्पाद का मात्रा 8.2 प्रतिशत है। यह अन्य देशों के मुकाबले बहुत कम है। इन देशों में विकसित और विकासशील देश - दोनों आते हैं। एक अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि भारत में विश्व की वुफल जनसंख्या की लगभग 17 प्रतिशत संख्या निवास करती है, लेकिन इस देश पर विश्व के वुफल रोगियों का 20 प्रतिशत बोझ ;ळक्ठद्ध है। विश्व रोग भार ;ळक्ठद्ध एक सूचक है जिसका प्रयोग विशेषज्ञ इन्हें कीजिए ऽ भारत की समग्र स्वास्थ्य स्िथति में निश्चय ही सुधार हुआ है। जीवन - प्रत्याशा बढ़ी है, श्िाशु मृत्यु दर में कमी आइर् है। चेचक का उन्मूलन हो गया है। वुफष्ठ तथा पोलियो के उन्मूलन का लक्ष्य भी प्राप्त होने वाला है। लेकिन ये आँकड़े तभी अच्छे लगते हैं जबकि उन्हें आप अलग करके देखें। इन आँकड़ों की तुलना शेष विश्व से करें ;आप ये आँकडे़ विश्व स्वास्थ्य संगठन की विश्व स्वास्थ्य रिपोटर् से प्राप्त कर सकते हैं।द्ध आपको क्या जानकारी मिली? ऽ एक महीने के लिए अपनी कक्षा का पयर्वेक्षण करें और पता करें कि वुफछ छात्रा अनुपस्िथत क्यों रहते हैं? यदि अनुपस्िथति का कारण स्वास्थ्य समस्याएँ हैं, तो पता करें कि उन्हें क्या बीमारी है। उनके रोग, उपचार की प्रकृति और उनके अभ्िाभावकों द्वारा उनके उपचार पर किये जा रहे खचर् का विवरण तैयार करें। इस सूचना पर कक्षा में चचार् करें। किसी विशेष रोग के कारण असमय मरने वाले लेागों की संख्या के साथ - साथ रोगों के कारण असमथर्ता में बिताये सालों की संख्या जानने के लिए करते हैं। भारत में जी.डी.बी. के आधे से अिाक हिस्से के अंतगर्त अतिसार, मलेरिया और क्षय रोग जैसी संक्रामक बीमारियाँ आती हैं। प्रत्येक वषर् 5 लाख बच्चे जल - संक्रमित रोगों से मर जाते हैं। एड्स का खतरा भी छाया हुआ है। वुफपोषण और टीके की दवा की अपयार्प्त पूतिर् के कारण प्रत्येक वषर् 22 करोड़ बच्चे मौत के श्िाकार होते हैं। वतर्मान में 20 प्रतिशत से भी कम जनसंख्या जन स्वास्थ्य सुविधाओं का उपभोग करती है। एक अध्ययन से पता चला कि केवल 38 प्रतिशत प्राथमिक चिकित्सा वेंफद्रों में डाॅक्टरों की वांछित संख्या उपलब्ध है और केवल 30 प्रतिशत प्राथमिक चिकित्सा वेंफद्रों में दवाइयों का पयार्प्त भंडार होता है। शहरी - ग्रामीण तथा धनी - निधर्न विभाजनः भारत की 70 प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में रहती है, लेकिन ग्रामीण इलाकों में भारत के केवल 1/5 अस्पताल ;प्राइवेट क्षेत्राक सहितद्ध स्िथत हैं। ग्रामीण भारत के पास वुफल दवाखानांे के चित्रा 8.10 कइर् प्रकार की चिकित्सा सुविधओं के बावजूद महिलाओं की चिंताजनक स्िथति लगभग आधे दवाखाने ही हैं। सरकारी अस्पतालों में लगभग 6.3 लाख बेड में से ग्रामीण इलाकों में केवल 30 प्रतिशत बेड उपलब्ध हैं। अतः ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को पयार्प्त स्वास्थ्य आधारिक संरचना उपलब्ध नहीं हैं। इससे भारत के लोगों में स्वास्थ्य की स्िथति में विभेद उत्पन हो गया है। जहाँ तक अस्पतालों का सवाल है, ग्रामीण इलाकों में प्रत्येक एक लाख लोगों पर 0.36 अस्पताल हैं जबकि शहरी इलाकों में यह संख्या 3.6 अस्पतालों की है। ग्रामीण इलाकों में स्थापित प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों में एक्स - रे या खून की जाँच जैसी सुविधाएँ नहीं है, जबकि किसी शहरी के लिए ये बुनियादी स्वास्थ्य देखभाल का निमार्ण करती है। बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य स्वास्थ्य सुविधाओं में अपेक्षाकृत पीछे हैं। ग्रामीण इलाकों में उचित चिकित्सा से वंचित लोगों के प्रतिशत में पिछले वुफछ वषो± में वृि हुइर् है। ग्रामीणों को श्िाशु - चिकित्सा, स्त्राी - रोग चिकित्सा, संवेदनाहरण तथा प्रसूति - विद्या जैसी विश्िाष्ट चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद कि 380 मान्यता प्राप्त मेडिकल काॅलेजों से प्रतिवषर् 44,000 मेडिकल स्नातक निकलते हैं, ग्रामीण इलाकों में डाॅक्टरों की कमी बनी हुइर् है। इनमें से 1/5 डाॅक्टर बेहतर कमाइर् के लिए विदेश चले जाते हैं, अन्य निजी अस्पतालों में नौकरी करना पसंद करते हैं जोकि अिाकांशतः शहरी इलाकों में स्िथत होते हैं। भारत के शहरी और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले निधर्नतम लोग अपनी आय का 12 प्रतिशत स्वास्थ्य सुविधाओं में खचर् करते हैं, जबकि धनी केवल 2 प्रतिशत खचर् करते हैं। क्या होता है जब गरीब बीमार पड़ता है? वुफछ अपनी जमीन बेचते हैं या उपचार के लिए अपने बच्चों को भूखेे रखते हैं। चूँकि सरकारी अस्पतालों में पयार्प्त सुविधाएँ नहीं हैं, उन्हें निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है जिससे वे हमेशा के लिए ट्टणग्रस्त हो जाते हैं या मौत के विकल्प को चुनते हैं। महिला स्वास्थ्यः भारत की जनसंख्या का लगभग आधा भाग महिलाओं का है। पुरुषों की तुलना में उन्हें श्िाक्षा, आथ्िार्क गतिवििायों में भागीदारी और स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्रों में अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। देश में श्िाशु - लिंग अनुपात में 2011 की जनगणना के अनुसार 2001 में 927 से 914 की गिरावट, भ्रूण हत्या की बढ़ती घटनाओं की ओर इशारा करती है। 15 वषर् से कम लगभग 3,00,000 लड़कियाँ न केवल शादीशुदा हैं बल्िक कम से कम एक बच्चे की माँ भी हैं। 15 से 49 आयु समूह में शादीशुदा महिलाओं में 50 प्रतिशत से ज्यादा रक्ताभाव और रक्तक्षीणता से ग्रसित हैं। यह बीमारी लौह - न्यूनता के कारण होती है जिसके परिणामस्वरूप गभर्पात भारत में स्ित्रायों की अस्वस्थता और मौत का एक बहुत बड़ा कारण है। स्वास्थ्य एक आवश्यक सावर्जनिक सुविधा और एक बुनियादी मानवािाकार है। सभी नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ प्राप्त हो सकती हैं, यदि सावर्जनिक स्वास्थ्य सेवाएँ विवेंफदि्रत हों। रोगों से दीघर्कालीन संघषर् में सपफलता श्िाक्षा और कायर्वुफशल स्वास्थ्य आधारिक संरचना पर निभर्र करती है। इसीलिए स्वास्थ्य और सपफाइर् के प्रति जागरूकता पैदा करना और कायर्वुफशल व्यवस्थाएँ प्रदान करना आवश्यक है। इस प्रिया से दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों की भूमिका की अवहेलना नहीं की जा सकती। स्वास्थ्य देखभाल कायर्क्रमों की प्रभावशीलता प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं पर निभर्र करती है। अंततः हमारा उद्देश्य लोगों को एक बेहतर गुणवत्तापूणर् जीवन की ओर ले जाना है। भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं में शहर और गाँव के बीच स्पष्ट विभाजन है। यदि हम इस बढ़ते विभाजन की अवहेलना करते रहेंगे, तो हमारे देश के सामाजिक - आथ्िार्क ढाँचे में अस्िथरता की आशंका रहेगी। सभी के लिए बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं को सुनिश्िचत करने के लिए हमारी बुनियादी आधारिक संरचना में सक्षमता और सुलभता की आवश्यकताओं का एकीकरण करना जरूरी है। 8.7 निष्कषर् एक देश के विकास में सामाजिक और आथ्िार्क, दोनों प्रकार की आधारिक संरचना का होना अनिवायर् है। उत्पादन के कारकों की उत्पादकता में वृि करते हुए तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार लातेे हुए ये सभी एक सहयोगी प्रणाली के रूप में आथ्िार्क ियाओं को प्रभावित करती हंै। अपनी स्वतंत्राता के पिछले छह दशकों में भारत ने आधारिक संरचना के निमार्ण में महत्वपूणर् प्रगति की है, लेकिन उनका वितरण असमान है। ग्रामीण भारत के अनेक हिस्सों में अभी भी अच्छी सड़वेंफ, दूरसंचार सुविधाएँ, बिजली, स्वूफलों और अस्पतालों का अभाव है। जैसे - जैसे भारत आधुनिकीकरण की ओर बढ़ रहा है, गुणवत्तापूणर् आधारिक संरचना की माँग भी बढ़ेगी। पयार्वरण पर उनके असर वफो भी यहाँ ध्यान में रखना होगा। विभ्िान्न प्रकार के रियायत और प्रोत्साहनों को प्रदान करने वाली सुधार नीतियों का लक्ष्य आमतौर पर निजी क्षेत्राक और, विशेष तौर पर विदेशी निवेशकों को आकष्िार्त करना है। ऊजार् और स्वास्थ्य की दो आधारिक संरचनाओं का मूल्यांकन करने से यह स्पष्ट हो जाता है कि आधारिक संरचना पर सभी की समान रूप से पहुँच की संभावना हो सकती है। पुनरावतर्न ऽ संरचनात्मक सुविधाएँ, भौतिक सुविधाएँ व सावर्जनिक सेवाओं का एक नेटववर्फ है। इनके साथ सहयोग करने के लिए सामाजिक आधारिक संरचना का होना समान रूप से महत्वपूणर् है। देश के आथ्िार्क विकास में यह एक महत्वपूणर् आधार है। ऽ उच्च आथ्िार्क संवृि दर बनाये रखने के लिए समय - समय पर आधारिक संरचना का स्तर ऊँचा करना आवश्यक है। हाल ही में बेहतर आधारिक संरचना ने विदेशी निवेश और पयर्टकों को भारत की ओर आकष्िार्त किया है। ऽ ग्रामीण आधारिक संरचना को विकसित करने की आवश्यकता है। ऽ आधारिक संरचना के विकास के लिए विशाल धन इकट्ठा करने के लिए सावर्जनिक और निजी सहभागिता की आवश्यकता है। ऽ तीव्र आथ्िार्क विकास के लिए ऊजार् अत्यंत ही महत्वपूणर् है। भारत में बिजली की उपभोक्ता माँग और उसकी पूतिर् में बहुत अंतर है। ऽ बिजली की कमी की पूतिर् में ऊजार् के गैर - पांरपरिक स्रोत कापफी सहायक हो सि( हो सकते हैं। ऽ भारत विद्युत क्षेत्राक उत्पादन, संचारण और वितरण स्तरों में अनेक समस्याओं का सामना कर रहा है। ऽ स्वास्थ्य मनुष्य के शारीरिक और मानसिक सुख का एक मापदंड है। ऽ स्वतंत्राता के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की भौतिक व्यवस्था में महत्वपूणर् विस्तार और स्वस्थ सूचकों में सुधार हुआ है। ऽ अिाकांश जनसंख्या के लिए सावर्जनिक स्वास्थ्य प्रणाली और सुविधाएँ पयार्प्त नहीं हंै। ऽ ग्रामीण शहरी इलाकों और अमीर व गरीब के बीच स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के उपभोग में बड़ा अंतर है। ऽ देश में भ्रूण हत्या की बढ़ती घटनाओं के कारण देश में स्ित्रायों का स्वास्थ्य गंभीर चिंता का विषय बन गया है। ऽ निजी क्षेत्रा की विनियमित स्वास्थ्य सेवाओं से स्िथति में सुधार हो सकता है। इसके साथ - साथ स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएँ प्रदान करने और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में गैर - सरकारी संगठन और सामुदायिक सहभागिता बहुत महत्वपूणर् है। ऽ जन स्वास्थ्य की सहायता के लिए चिकित्सा की प्राकृतिक प्रणालियांे पर अनुसंधान करना और उनके परिणामों का उपयोग करना होगा। भारत में चिकित्सा पयर्टन के बढ़ने की असीम संभावनाएँ हंै। अभ्यास1.आधारिक संरचना की व्याख्या कीजिए। 2.आधारिक संरचना को विभाजित करने वाले दो वगो± की व्याख्या कीजिए? दोनों एक - दूसरे पर वैफसे निभर्र हैं? 3.आधारिक संरचना उत्पादन का संव(र्न वैफसे करती है? 4.किसी देश के आथ्िार्क विकास में आधारिक संरचना योगदान करती है? क्या आप सहमत हैं? कारण बताइये। 5.भारत में ग्रामीण आधारिक संरचना की क्या स्िथति है? 6.‘ऊजार्’ का महत्व क्या है? ऊजार् के व्यावसायिक और गैर - व्यावसायिक स्रोतों में अंतर कीजिए। 7.विद्युत के उत्पादन के तीन बुनियादी स्रोत कौन - से हैं। 8.संचारण और वितरण हानि से आप क्या समझते हैं? उन्हें वैफसे कम किया जा सकता है। 9.ऊजार् के विभ्िान्न गैर - व्यावसायिक स्रोत कौन - से हैं? 10.इस कथन को सही सि( कीजिए कि ऊजार् के पुननर्वीनीकृत स्रोतों के इस्तेमाल से ऊजार् संकट दूर किया जा सकता है? 11.पिछले वषो± के दौरान ऊजार् के उपभोग प्रतिमानों में वैफसे परिवतर्न आया है? 12. ऊजार् के उपभोग और आथ्िार्क संवृि की दरें वैफसे परस्पर संबंिात हैं? 13.भारत में विद्युत क्षेत्राक किन समस्याओं का सामना कर रहा है? 14.भारत में ऊजार् संकट से निपटने के लिए किये गये सुधारों पर चचार् कीजिए। 15.हमारे देश की जनता के स्वास्थ्य की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? 16. रोग वैश्िवक मार ;ळठक्द्ध क्या है? 17.हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की प्रमुख कमियाँ क्या हैं? 18. महिलाओं का स्वास्थ्य गहरी चिंता का विषय वैफसे बन गया है? 19. सावर्जनिक स्वास्थ्य का अथर् बतलाइए। राज्य द्वारा रोगों पर नियंत्राण के लिए उठाये गये प्रमुख सावर्जनिक स्वास्थ्य कायर्क्रमों को बताइए। 20. भारतीय चिकित्सा की छह प्रणालियों में भेद कीजिए। 21. हम स्वास्थ्य सुविधा कायर्क्रमों की प्रभावशीलता वैफसे बढ़ा सकते हैं? अतिरिक्त गतिवििायाँ 1 क्या आप जानते हैं कि आपके घरों में एक मेगावाट बिजली लाने के लिए 300 - 400 करोड़ रुपये खचर् होते हैं? एक नये बिजली - घर के निमार्ण में करोड़ों रुपयों की लागत आती है। क्या यही कारण कापफी नहीं है कि आप अपने घर में बिजली की बचत करें। बिजली की बचत का अथर् पैसों की बचत है। जब आपके पास बिजली का बिल आता है, तो आपको यह भान होता है कि घर में अनेवफ बल्बों और पंखों की जरूरत नहीं है। आपको थोड़ी - सी सतकर्ता बरतने की आवश्यकता है। सबसे बढि़या बात तो यह है कि आपको तुंरत इस दिशा में प्रयास आरंभ कर देना चाहिए। इस कायर् में परिवार के अन्य सदस्यों को शामिल कीजिए और अंतर देख्िाए। अपने घर में बिजली का मासिक उपभोग नोट कीजिए। ऊजार् बचाव के तरीकों को लागू करने के पश्चात बिजली के बिल में अंतर देख्िाए। 2 यह पता करें कि आपके क्षेत्रा में कौन - सी आधारिक संरचना परियोजना चल रही है। उसके बाद पता करेंः ;कद्ध परियोजना के लिए आबंटित बजट ;खद्ध उसमें पूँजी निवेश के स्रोत क्या हैं? ;गद्ध वह परियोजना कितना रोजगार उत्पन्न करेगी? ;घद्ध परियोजना की समाप्ित के बाद वुफल मिला कर कितना लाभ होगा? ;घद्ध परियोजना को पूणर् होने में कितना समय लगेगा? ;चद्ध परियोजना में कायर्रत वंफपनी/वंफपनियाँ 3 किसी गौबर गैस परियोजना/ताप बिजली स्टेशन/ज्वार बिजली स्टेशन/परमाणु बिजली स्टेशन में जाइए। अवलोकन कीजिए कि यह वैफसे काम करते हैं। 4 पड़ोस में ऊजार् के प्रयोग पर एक सवेर्क्षण करने के लिए कक्षा को समूहों में बांटा जा सकता है। सवेर्क्षण का लक्ष्य यह पता करना है कि पड़ोस में कौन - सा विश्िाष्ट ईंधन सबसे ज्यादा प्रयोग में लाया जाता है और कितनी मात्रा में विभ्िान्न समूहों के द्वारा ग्रापफ बनाए जा सकते हैं और एक विश्िाष्ट ईंधन की प्राथमिकता के संभावित कारण जानने के लिए कोश्िाश की जा सकती है। भारत की ऊजार् व्यवस्था के निमार्ता डाॅ होमी भामा के जीवन कायर् का अध्ययन कीजिए। ‘यु(रत राष्ट्र एक अस्वस्थ्य विश्व की रचना करते हैं। इसी प्रकार पक्षपातपूणर् दृष्िटकोण और संकीणर् दिमाग वाले मानसिक रोगों की रचना करते हंै।’ इस विषय में कक्षा में वाद विवाद व चचार् कीजिए। पुस्तकें जालान बिमल ;ऐड.द्ध द इंडियन इकोनाॅमी प्रोब्लम्स एंड प्रोस्पेक्ट्स, पेंग्िवन बुक्स, दिल्ली - 1993। कलाम ए.पी.जे. अब्दुल विद वाइर्. एस. राजन, 2002. इंडिया 2020ः ए विशन पफाॅर दि न्यू मिलेनियम, पेंग्िवन बुक्स, दिल्ली। किरति एस. पारिख एंड राधकृष्णनन ;ऐड.द्ध 2005.इंडिया डेवलपमेंट रिपोटर् 2004 - 2005, आॅक्सपफोडर् यूनिवसिर्टी प्रेस, दिल्ली। सरकारी रिपोटर् द वल्डर् हेल्थ रिपोटर् 2002, रिड्यूसिंग रिस्क्स, प्रमो¯टग हेल्दी लाइपफ, वल्डर् हेल्थ आगर्ेनाइजेशन, जिनेवा। गवनर्मेंट आॅपफ इंडिया ;2005द्ध, रिपोटर् आॅपफ द नेशनल कमीशन आॅन मेकरोइकोनाॅमिक्स एंड हेल्थ एंड पेफमिली वेलपेफयर, गवनर्मेंट आॅपफ इंडिया, नइर् दिल्ली। टेंथ पफाइव इर्यर प्लान वोल्यूम - 2 प्लानिंग कमीशन, गवनर्मेंट आॅपफ इंडिया, नइर् दिल्ली। द इंडिया इंप्रफास्ट्रक्चर रिपोटर्ः पाॅलिसी इंपरेव्िस पफार ग्रोथ एंड वेल्पेफयर, एक्सपटर् ग्रूप आन द काॅमसिर्लाइजेशन आॅपफ इंप्रफास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, वोल्यूम 1, 2 एंड 3, मिनिस्ट्री आॅपफ पफायनेंस, गवनर्मेंट आॅपफ इंडिया 1996 । इंडिया विशन 2020, द रिपोटर् आॅपफ प्लानिंग कमीशन, गवनर्मेंट आॅपफ इंडिया, नइर् दिल्ली। वल्डर् डेवलपमेंट रिपोटर् 1994, द वल्डर् बैंक, वश्िांगटन डी.सी.। इंडिया इंप्रफास्ट्रक्चर रिपोटर् 20041, आॅक्सपफोडर् यूनिवसिर्टी प्रेस, नइर् दिल्ली। इकोनाॅमिक सवर्े 2004 - 2005, मिनिस्ट्री आॅपफ पफाइनेंस, गवनर्मेंट आॅपफ इंडिया। वल्डर् हेल्थ स्टैटिस्िटक्स, 2014 । नेशनल हेल्थ प्रोपफाइल ;ने.हे.प्रो.द्ध आॅपफ इंडिया विभ्िान्न वषो± के लिए, सैंट्रल ब्यूरो आॅपफ इंटेलीजेंस, भारत सरकार, नयी दिल्ली। वेबसाइट ऊजार् संबंध्ी मुद्दों परः स्वास्थ्य संबंध्ी मुद्दों परः ूूूण्चबतंण्वतह ीजजचरूध्ध्ूूूण्ंपपउेण्मकन ूूूण्इमम.पदकपंण्बवउ ीजजचरूध्ध्ूूूण्ूीवपदकपंण्वतह ूूूण्मकनहतममदण्जमतपण्तमेण्पद ीजजचरूध्ध्उवीूिण्दपबण्पद ीजजचरूध्ध्चवूमतउपदण्दपबण्पद ूूूण्ंचवससवीवेचपजंसेहतवनतण्बवउ ूूूण्बइीपकहीेण्दपबण्पद

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