श्िाक्षा पर निजी और सावर्जनिक नििा के व्यय की साथर्कता का मूल्यांकन केवल उसके प्रत्यक्ष परिणामों के माध्यम से नहीं हो। इसमें निवेश - मात्रा ही लोगों को उससे अिाक अवसर उपलब्ध कराने में पयार्प्त होगा, जितना कि वे स्वयं ही प्राप्त कर सकते थे। इनके माध्यम से कितने ही ऐसे व्यक्ितयों की अंतनिर्हित योग्यताएँ उजागर हो पाती हैं, जो अन्यथा बिना पहचान के ही मर जाते। - अल्Úेड माशर्ल 5ण्1 परिचय मानव जाति के विकास को बहुत अिाक प्रभावित करने वाले कारकों पर विचार करें। ये शायद मनुष्य के ज्ञान - संग्रह करने की और उसका प्रसारण करने की क्षमताएँ ही हंै, जो मनुष्य बातचीत, लोकगीत और बड़े - बड़े व्याख्यानों के माध्यम से करता आ रहा है। मनुष्य ने यह शीघ्र जान लिया कि हमें कायार्ें को वुफशलतापूवर्क करने के लिए अच्छे प्रश्िाक्षण तथा कौशल की आवश्यकता है। हम जानते हैं कि किसी श्िाक्ष्िात व्यिाफ के श्रम - कौशल अश्िाक्ष्िात व्यिाफ से अिाक होते हैं। इसी कारण से पहला, दूसरे की अपेक्षा, अिाक आय का सृजन करता है और आथ्िार्क समृि में उसका योगदान क्रमशः अिाक होता है। श्िाक्षा पाने का प्रयास केवल उपाजर्न क्षमता बढ़ाने के लिए नहीं किया जाता बल्िक उसके और भी अिाक मूल्यवान लाभ हैं। श्िाक्षा लोगों को उच्चतम सामाजिक स्िथति और गौरव प्रदान करती है। यह किसी व्यिाफ को अपने जीवन में बेहतर विकल्पों का चयन कर पाने के योग्य बनाता है, व्यक्ित को समाज में चल रहे परिवतर्नों की बेहतर समझ प्रदान करता है और नव परिवतर्नों को बढ़ावा देता है। श्िाक्ष्िात श्रम शक्ित की उपलब्धता नयी प्रौद्योगिकी को अपनाने में भी सहायक होती है। देश श्िाक्षा के अवसरों समान भूमि की मात्रा होने पर भी उसकी उपज मुझसे चित्रा 5.1 किसानों को समुचित श्िाक्षा तथा प्रश्िाक्षण ही खेतों की उत्पादकता में वृि कर सकती है के विस्तार की आवश्यकता पर बल देते हैं, क्योंकि यह विकास प्रिया को तेज करती है। 5.2 मानव पँूजी क्या है? जिस प्रकार एक देश अपने भूमि जैसे भौतिक संसाधनांे को कारखानांे जैसी भौतिक पँूजी में परिवतिर्त कर सकता है, उसी प्रकार वह अपने छात्रा रूपी मानव संसाधनांे को अभ्िायंता और डाॅक्टर जैसी मानव पूँजी में भी परिवतिर्त कर सकता है। समाज को सबसे पहले पयार्प्त मात्रा में मानव पूँजी की शरूरत है, जो ऐसे योग्य व्यक्ितयों के रूप मंे अिाक होती है जो पहले स्वयं प्रश्िाक्ष्िात हो चुके हों और प्रोपफेसरांे आदि़के रूप मंे कायर् करने योग्य हों। दूसरे शब्दांे मंे, हमें अन्य मानव पूँजी जैसे डाॅक्टर, इंजीनियर आदि को तैयार करने के लिए श्िाक्षकांे, प्रश्िाक्षकांे के रूप मंे बेहतर मानव पँूजी की आवश्यकता होती है। इसका अथर् है कि हमें मानव संसाधनांे को मानव पूँजी के रूप में परिवतिर्त करने के लिए मानव पूँजी निवेश करने की भी आवश्यकता है। आइए, इन प्रश्नांे के माध्यम से मानव पूँजी के अथर् को वुफछ अिाक स्पष्ट रूप से जानने का प्रयास करेंः ;कद्ध मानव पूँजी के ड्डोत क्या हैं? ;खद्ध क्या किसी देश की आथ्िार्क संवृि और वहाँ की मानव पूँजी में कोइर् संबंध होता है? ;गद्ध क्या मानव पूँजी के निमार्ण का संबंध मनुष्य के सवा±गीण विकास से है जिसे आमतौर पर मानव विकास के रूप में जाना जाता है? ;घद्ध भारत मंे मानव पूँजी के निमार्ण में सरकार की क्या भूमिका हो सकती है? 5.3 मानव पूँजी के ड्डोत श्िाक्षा मंे निवेश को मानव पूँजी का एक प्रमुख ड्डोत माना जाता है। इसके अतिरिक्त स्वास्थ्य में निवेश, कायर् के दौरान प्रश्िाक्षण, प्रबंधन तथा सूचना आदि मानव पूँजी के निमार्ण के अन्य ड्डोत हैं। इन्हें कीजिए ऽ समाज के अलग - अलग वगोर्ं से तीन परिवारांे का चयन करें ;कद्ध अति निधर्न ;खद्ध मध्यमवगीर्य तथा ;गद्धसंपन्न। इन परिवारांे के लड़के तथा लड़कियों की श्िाक्षा पर व्यय की प्रवृिा का आकलन करें। आपके माता - पिता आपकी श्िाक्षा पर व्यय क्यों कर रहे हैं? व्यक्ितयांे द्वारा श्िाक्षा पर व्यय वुफछ उसी प्रकार का खचर् है जैसा कि कंपनियाँ निश्िचत अविा में अपने दीघर्कालिक निश्िचत लाभ को सुधारने के लिए पूँजीगत वस्तुओं पर करती हैं। इसी प्रकार व्यक्ित अपनी भविष्य की आय को बढ़ाने के लिए श्िाक्षा पर निवेश करता है। श्िाक्षा की भाँति ही स्वास्थ्य को भी किसी व्यक्ित के साथ - साथ देश के विकास के लिए एक महत्वपूणर् आगत माना जाता है। किसी भी कायर् को अच्छी तरह से कौन कर सकता है - एक बीमार व्यक्ित या एक स्वस्थ व्यक्ित? चिकित्सा सुविधाआंे के सुलभ नहीं होने पर एक बीमार श्रमिक कायर् से विमुख रहेगा। इससे उत्पादकता में कमी आएगी। अतः इस प्रकार से स्वास्थ्य पर व्यय मानव पूँजी के निमार्ण का एक महत्वपूणर् ड्डोत है। प्रतिषेधी आयुविर्ज्ञान ;टीकाकरणद्ध, चिकित्सीय आयुव्िार्ज्ञान ;बीमारियोें के क्रम मेें उसकी चिकित्साद्ध तथा सामाजिक आयुविर्ज्ञान ;स्वास्थ्य संबंधी साक्षरता या ज्ञान का प्रसारद्ध और इनके साथ - साथ स्वच्छ पेय जल का प्रावधान आदि स्वास्थ्य व्यय के विभ्िान्न रूप हैं। स्वास्थ्य पर किया गया व्यय स्वस्थ श्रमबल की पूतिर् को प्रत्यक्ष रूप से बढ़ाता है और इसी कारण यह मानव पूँजी निमार्ण का एक ड्डोत है। पफमे± अपने कमर्चारियों के कायर् - स्थल पर प्रश्िाक्षण में व्यय करती हैं। इसके कइर् तरीके हो सकते हैं। पफमर् के अपने कायर् स्थान पर ही पहले से काम को जानने वाले वुफशलकमीर् कमर्चारियों को काम सिखा सकते हैं। दूसरे, कमर्चारियों को किसी अन्य स्थान/संस्थान में प्रश्िाक्षण पाने के लिए भेजा जा सकता है। दोनों ही वििायों में पफमर् अपने कमर्चारियों के प्रश्िाक्षण का वुफछ व्यय वहन करती है। इसी कारण से पफमर् इस बात पर बल देगी कि प्रश्िाक्षण के बाद वे कमर्चारी एक निश्िचत अविा तक अवश्य पफमर् के पास ही कायर् करें। इस प्रकार पफमर् उनके प्रश्िाक्षण पर किये गये व्यय की उगाही अिाक उत्पादकता से हुए लाभ के रूप में कर पाने में सपफल रहती है। कायर् के दौरान प्रश्िाक्षण पर किया गया व्यय भी इस दृष्िट से मानव पूँजी का ड्डोत बन जाता है। ऐसे खचर् की तुलना में श्रम उत्पादकता में वृि से हुए लाभ कहीं अिाक होते हैं। व्यक्ित अपने मूल स्थान की आय से अिाक आय वाले रोजगार की तलाश में प्रवसन/पलायन करते हैं। भारत में ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर प्रवसन मुख्यतः गाँवों में बेराजगारी के कारण ही होता है। तकनीकी श्िाक्षा संपन्न अभ्िायंता, डाॅक्टर आदि भी अच्छे वेतनमानों की अपेक्षा में दूसरे देशों में चले जाते हैं। प्रवसनों की दोनों ही स्िथतियों में परिवहन की लागत और उच्चतर निवार्ह लागत के साथ एक अनजाने सामाजिक सांस्कृतिक परिवेश में रहने की मानसिक लागतें भी प्रवासी श्रमिकों को सहन करनी पड़ती हैं। किंतु नये स्थान पर उनकी कमाइर् प्रवास से जुड़ी सभी लागतों से कहीं अिाक होती है। अतः प्रवसन पर व्यय भी मानवीय पूँजी निमार्ण का ड्डोत है। व्यक्ित श्रम बाशार तथा दूसरे बाशार जैसे, श्िाक्षा और स्वास्थ्य से संबंिात सूचनाओं को प्राप्त करने के लिए व्यय करते हैं। वे यह जानना चाहते हैं, कि विभ्िान्न प्रकार के कायोर्ं में वेतनमान क्या हैं या पिफर क्या शैक्ष्िाक संस्थाएँ सही प्रकार के कौशल में प्रश्िाक्षण दे रही हैं और किस लागत पर? यह जानकारी मानव पूँजी में निवेश करने से प्राप्त मानव पूँजी के भंडार बाॅक्स 5.1 भौतिक और मानव पूँजी दोनों ही प्रकार का पूँजी निमार्ण सुविचारित निवेश निणर्यों का परिणाम होता है। भौतिक पूँजी में निवेश का निणर्य अपने ज्ञान के आधार पर लिया जाता है। इस संबंध में उद्यमी के पास अनेक प्रकार के निवेश विकल्पों की आंतरिक प्रतिपफल दर का आकलन कर पाने का ज्ञान होता है। इन गणनाओं के बाद ही वह अपना विवेक आधारित निवेश करता है। भौतिक पूँजी का स्वामित्व उस व्यक्ित के सुविचारित निणर्य का परिणाम होता है - भौतिक पूँजी निमार्ण मुख्यतः एक आथ्िार्क और तकनीकी प्रिया है। मानव पूँजी के निमार्ण का महत्वपूणर् भाग व्यक्ित के जीवन की उस अविा में होता है, जब वह यह निणर्य लेने मेें असमथर् होता है कि क्या वह अपनी आमदनी को अिाकतम कर पायेगा या नहीं। बच्चों की श्िाक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंिात निणर्य उनके अभ्िाभावक तथा समाज ही करते हैं। उनके समकक्षी श्िाक्षाविद् और समाज उच्चतर स्तरों ;महाविद्यालय/विश्वविद्यालयद्ध पर मानव पूँजी में निवेश संबंधी निणर्य को प्रभावित करते हैं। पिफर भी इस स्तर पर मानव पूँजी निमार्ण, विद्यालय स्तर पर मानव पूँजी निमार्ण, पर निभर्र करता है। मानव पूँजी निमार्ण आंश्िाक रूप से एक सामाजिक प्रिया है और अंशतः मानव पूँजी को धारण करने वालों के सुविचारित निणर्य का प्रतिपफल है। आप जानते ही हैं कि बस जैसी भौतिक पूँजी के स्वामी को सदैव वहाँ उपस्िथत नहीं रहना होता, जहाँ वह बस यात्रिायों/सामान के परिवहन में प्रयुक्त हो। ¯कतु उस वाहन को चलाने के ज्ञान से संपन्न चालक को वाहन के साथ ही रहना पड़ता है। भौतिक पूँजी किसी भी अन्य वस्तु की भाँति दृश्य होती है। उसे किसी भी वस्तु की तरह बाशार में बेचा जा सकता है। मानव पूँजी अदृश्य होती है - यह धारक के शरीर और मस्ितष्क में रची - बसी होती है। बाशार में मानव पूँजी को बेचा नहीं जा सकता, केवल उसकी सेवाओं की बिक्री की जा सकती है इसलिए मानव पूँजी के स्वामी को उसके उत्पादन के स्थान पर उपस्िथत होना आवश्यक होता है। भौतिक पूँजी को उसके स्वामी से पृथक किया जा सकता है, किंतु मानव पूँजी का स्वामी से पृथक्करण संभव नहीं होता। दोनों प्रकार की पँूंजियों में उनके स्थानों की गतिश्िालता के आधार पर अंतर होता है। प्रायः वुफछ कृत्रिाम अपवादों को छोड़ भौतिक पूँजी का विश्व भर में निबार्ध आवागमन चलता रहता है। किंतु मानव पूँजी का प्रवाह इतना निबार्ध नहीं होता, इसके मागर् में राष्ट्रीयता और संस्कृति की ऊँची बाधाएँ आ जाती हैं। अतः भौतिक पूँजी का निमार्ण तो आयात के सहारे भी हो जाता है, किंतु मानवीय पूँजी की रचना तो समाज तथा अथर्व्यवस्था की अंतभूर्त विशेषताओं के अनुरूप सुविचारित नीति निधार्रण संबंधी निणर्यों तथा सरकार और व्यक्ितगत व्यय के आधार पर होती है। समय के साथ - साथ दोनों ही प्रकार की पूँजियों में मूल्य ”ास होता है। किसी मशीन के निरंतर प्रयोग से वह घ्िास जाती है और प्रौद्योगिकीय परिवतर्न उसे पुराना घोष्िात कर देते हैं। मानव पूँजी में आयु के अनुसार वुफछ ‘”ास’ आता है। किंतु श्िाक्षण और स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर निवेश से उस ‘”ास’ का कापफी सीमा तक निराकरण हो सकता है। यह निवेश मानव पूँजी को प्रौद्योगिकीय परिवतर्नों का सामना करने योग्य भी बना देता है - ¯कतु भौतिक पूँजी में किसी भी प्रकार से प्रौद्योगिकीय परिवतर्न का सामना करने की क्षमता नहीं आ पाती। मानव पूँजी द्वारा सृजित हितलाभ के प्रवाह का स्वरूप भी भौतिक पूँजी से अलग होता है। मानव पूँजी से केवल उसका स्वामी ही नहीं वरन् सारा समाज लाभांवित होता है। इसे एक बाह्य हित लाभ कहा जा सकता है। एक सुश्िाक्ष्िात व्यक्ित लोकतांत्रिाक प्रिया में प्रभावपूणर् भागीदारी के माध्यम से राष्ट्र की सामाजिक, आथ्िार्क प्रगति में योगदान करता है। एक स्वस्थ व्यक्ित अपने वैयक्ितक स्तर पर तथा आस - पास में सपफाइर् आदि के माध्यम से रोगों का संक्रमण रोक उन्हें महामारियों का रूप धारण नहीं करने देता। मानवीय पूँजी से व्यक्ितगत के साथ - साथ सामाजिक हितलाभों का भी सृजन होता है। किंतु भौतिक पूँजी तो प्रायः निजी लाभ को ही जन्म दे पाती है। पूँजीगत पदाथो± के लाभ उन्हीं को मिल पाते हैं जो उनके द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की कीमत चुका सवेंफ। का सदुपयोग करने की दृष्िट से बहुत उपयोगी होती है। इसीलिए श्रम बाशार तथा अन्य बाशारों के विषय में जानकारी प्राप्त करने पर किया गया व्यय भी मानव पूँजी निमार्ण का ड्डोत है। भौतिक पूँजी की अवधारणा के आधार पर ही मानव पूँजी के वैचारिक आधार की रचना की गयी है। दोनों प्रकार की पूँजी के बीच वुफछ समरूपताएँ तथा वुफछ प्रभावशाली असमानताएँ हैं ;देखें बाॅक्स 5.1द्ध। मानव पूँजी और आथ्िार्क संवृि राष्ट्रीय आय में किसका योगदान अिाक होता है? किसी कारखाने के कमर्चारी का या ‘साॅफ्रटवेयर विशेषज्ञ’ का? हम जानते ही हैं कि एक श्िाक्ष्िात व्यक्ित का श्रम - कौशल अश्िाक्ष्िात की अपेक्षा अिाक होता है। इसी कारण वह अपेक्षाकृत अिाक आय अजिर्त कर पाता है। आथ्िार्क संवृि का अथर् देश की वास्तविक चित्रा 5.2 मानव पूँजी निमार्णः दिल्ली में अस्थाइर् रूप से चल रहा एक विद्यालय इसीलिए स्वास्थ्य भी आथ्िार्क संवृि का एक महत्वपूणर् कारक बन जाता है। अतः कायर् के दौरान प्रश्िाक्षण, श्रम बाशार की जानकारी, प्रवसन आदि के साथ - साथ श्िाक्षा और स्वास्थ्य व्यक्ित की उपाजर्न क्षमता का संवधर्न करती है। मानव की संविार्त उत्पादकता या मानव पूँजी न केवल श्रम की उत्पादकता को बढ़ाती है बल्िक यह साथ ही साथ परिवतर्न को प्रोत्साहित कर नवीन प्रौद्योगिकी को आत्मसात् करने की क्षमता भी विकसित करती है। श्िाक्षा समाज में परिवतर्नों और वैज्ञानिक प्रगति को समझ पाने की क्षमता प्रदान करती है - जिससे आविष्कारों और नव परिवतर्नों में सहायता मिलती है। इसीलिए श्िाक्ष्िात श्रम शक्ित की उपलब्धता नवीन प्रौद्योगिकी को अपनाने में सहायक होती है। मानव पूँजी की वृि के कारण आथ्िार्क संवृि होती है। इसे सि( करने के लिए व्यावहारिक साक्ष्य अभी स्पष्ट नहीं हैं। इसका कारण मापन की समस्यायें हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, स्वूफली वषो± की गणना, श्िाक्षक - श्िाक्षाथीर् अनुपात और नामांकन दर आदि के आधार पर श्िाक्षा का मापन उसकी गुणवत्ता को आथ्िार्क रूप से व्यक्त नहीं कर पाता। इसी प्रकार स्वास्थ्य सेवाओं पर मौदि्रक व्यय, जीवन प्रत्याशा तथा मृत्यु दरों आदि से देश की जनसंख्या के वास्तविक स्वास्थ्य स्तर का सही ज्ञान नहीं होता। यदि इन सूचकों का प्रयोग कर विकसित तथा विकासशील देशों में श्िाक्षा व स्वास्थ्य स्तरों और प्रतिव्यक्ित आय में सुधारों की तुलना करें तो हमें मानव पूँजी के परिवतर्नों में साहचयर् दिखायी पड़ता है, ¯कतु प्रतिव्यक्ित वास्तविक आय में ऐसी कोइर् प्रवृिा स्पष्ट नहीं होती। दूसरे शब्दों में, विकासशील देशों में मानव पूँजी की संवृि तो बहुत तेजी से हो रही है, ¯कतु उनकी प्रतिव्यक्ित वास्तविक आय की वृि उतनी तीव्र नहीं है। यह मानना तकर्संगत है कि मानव पूँजी और आथ्िार्क संवृि परस्पर एक दूसरे को प्रभावित करते हैं। अथार्त् एक ओर जहाँ प्रवाहित उच्च आय उच्च स्तर पर मानव पूँजी के सृजन का कारण बन सकती है तो दूसरी ओर उच्च स्तर पर मानव पूँजी निमार्ण से आय की सृंवि में सहायता मिल सकती है। भारत ने तो बहुत पहले आथ्िार्क संवृि में मानव पूँजी के महत्व को समझ लिया था। सातवीं पंचवषीर्य योजना में कहा गया है - फ्एक विशाल जनसंख्या वाले देश में तो विशेष रूप से मानव संसाधनों ;मानव पूँजीद्ध के विकास को आथ्िार्क विकास की युिाफ में बहुत महत्वपूणर् स्थान देना ही होगा। उचित श्िाक्षण प्रश्िाक्षण पा कर एक विशाल जनसंख्या अपने आप में आथ्िार्क संवृि को बढ़ाने वाली परिसंपिा बन जायेगी। साथ ही यह वांछित दिशा में सामाजिक परिवतर्न भी सुनिश्िचत कर देगी।य् सारणी 5.1 श्िाक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्राकंों में विकास के चुने हुए सूचक विवरण 1951 1981 1991 2001 2011 - 12 वास्तविक प्रति व्यक्ित आय ;रु मेंद्ध 5,708 8,594 11,535 16,172 38,037 अशोिात मृत्यु दर ;प्रति हजार जनसंख्या मेंद्ध 25.1 12.5 9.8 8.1 7.0 श्िाशु मृत्यु दर 146 110 80 63 42 जन्म के समय जीवन प्रत्याशा ;वषो± मेंद्ध पुरुष 37.2 54.1 59.7 63.9 64.6 महिला 36.2 54.7 60.9 66.9 67.7 साक्षरता दर ;»द्ध 16.67 43.57 52.21 65.20 74 मानव पूँजी ;श्िाक्षा और स्वास्थ्यद्ध तथा आथ्िार्क संवृि के बीच कारण - प्रभाव संबंध का स्पष्ट निरूपण कठिन होता है विंफतु सारणी 5.1 में देख सकते हैं कि ये दोनों क्षेत्रा में साथ - साथ संवृ( हुए हैं। संभवतः प्रत्येक क्षेत्रा की संवृि ने दूसरे क्षेत्रा का संवृि को सहारा दिया है। हाल ही में भारतीय अथर्व्यवस्था पर दो स्वतंत्रा अध्ययनों ने इस बात पर बल दिया है कि भारत अपनी मानव पूँजी निमार्ण क्षमता के कारण बहुत तेजी से संवृिशील हो पाएगा। ड्यूश नामक जमर्नी के बैंक ने अपनी ‘विश्व स्तरीय संवृि वेंफद्र’ ;ळसवइंस ळतवूजी ब्मदजतमद्ध नामक रिपोटर् ;प्रकाशन 01.07.05द्ध में कहा है कि भारत 2020 तक विश्व के चार प्रमुख विकास वेंफद्रांे में से एक बन कर उभरेगा। उसी में आगे कहा गया, फ्हमारा व्यावहारिक अन्वेषण इस मत का पक्षधर है कि आज की अथर्व्यवस्थाओं में मानव पूँजी उत्पादन का सबसे महत्वपूणर् कारक है। सकल घरेलू उत्पाद की वृि में मानव पूँजी की वृि का निणार्यक योगदान रहता है। भारत के संदभर् में इसी रिपोटर् में आगे कहा गया है। ‘‘हमारी आशा है कि 2005 - 2020 की अविा में भारत में 7 वषर् से ऊपर श्िाक्षा के औसत वषो± में 40 प्रतिशत की वृि की संभावित है....।य् विश्व बैंक ने अपनी एक ताजा रिपोटर् ‘भारत और ज्ञानचित्रा 5.4 आगे का कामः भारत को ज्ञान अथर्व्यवस्था में परिवतिर्त करना बाॅक्स 5.2 ज्ञानाधारित अथर्व्यवस्था के रूप में भारत भारत मंे पिछले दशक से साॅफ्रटवेयर उद्योग ने बहुत प्रगति का उत्साहजनक प्रदशर्न किया है। अब तो उद्यमी, नौकरशाह और राजनेता सभी इस बारे में अपने विचार अभ्िाव्यक्त कर रहे हैं कि सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर भारत किस प्रकार अपने आपको ज्ञानाधारित अथर्व्यवस्था में परिवतिर्त कर सकता है। अथर्तंत्रा में परिवतिर्त कर सकता है। वुफछ ग्रामीणों द्वारा इर् - मेल ;म्.डंपसद्ध के प्रयोग के उदाहरणों को ऐसे व्यापक परिवतर्न का संकेत माना जा रहा है। इसी प्रकार से इर् - प्रशासन को भविष्य के एक मागर् के रूप में जाना जा रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी का सही मूल्यमान तो वतर्मान आथ्िार्क विकास के स्तर पर निभर्र रहता है। क्या आप सोच सकते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में सूचना, प्रौद्योगिकी पर आधरित सेवाएँ मानव विकास करने में सक्षम होंगी? चचार् करें। अथर्व्यवस्था - शक्ितयों और अवसरों का सदुपयोग’ ;प्दकपं ंदक जीम ज्ञदवूसमकहम म्बवदवउल.स्मअमतंहपदह ैजतमदहजीे ंदक व्चचवतजनदपजपमेद्ध में कहा है कि भारत अपने आपको एक ज्ञानाधारित अथर्व्यवस्था में परिवतिर्त कर सकता है, यदि यह भी उतने ज्ञान का प्रयोग करे, जितना आयरलैंड करता है ;आयरलैंड को विश्व ज्ञान अथर्व्यवस्था के श्रेष्ठ प्रयोग करने वाला देश माना जाता है।द्ध, तो निश्चय ही भारत की प्रतिव्यक्ित आय 2020 में वतर्मान अनुमान 1,000 अमेरिकी डाॅलर से बढ़कर 3,000 डाॅलर हो सकती है। इस रिपोटर् में आगे कहा गया है कि भारतीय अथर्व्यवस्था में इस प्रकार के संक्रमण को संभव बनाने वाले सारे मुख्य तत्व जैसे वुफशल श्रमिकों का विशाल समूह, सुचारु रूप से कायर् कर रहा लोकतंत्रा तथा विस्तृत एवं विविधतापूणर् वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय आधारभूत संरचनाएँ विद्यमान हैं। इस प्रकार इन दोनों ही रिपोटो± में बताया गया है कि भारत में आगे चलकर मानव पूँजी निमार्ण ही इसकी अथर्व्यवस्था को आथ्िार्क संवृि के उच्च पथ पर ले जायेगा। 5.4 मानव पूँजी और मानव विकास ये दोनों पारिभाष्िाक शब्द मिलते - जुलते भले ही प्रतीत होते हैं, पर इनके बीच स्पष्ट अंतर है। मानव पूँजी की अवधारणा श्िाक्षा और स्वास्थ्य को श्रम की उत्पादकता बढ़ाने का माध्यम मानती है। मानव विकास इस विचार पर आधारित है कि श्िाक्षा और स्वास्थ्य मानव कल्याण के अभ्िान्न अंग हैं, क्योंकि जब लोगों में पढ़ने - लिखने तथा सुदीघर् स्वस्थ जीवन यापन की क्षमता आती है, तभी वह ऐसे अन्य चयन करने में सक्षम हो पाते हैं जिन्हें वे महत्वपूणर् मानते हैं। मानव पूँजी का विचार मानव को किसी साध्य की प्राप्ित का साधन मानता है। यह साध्य उत्पादकता में वृि का है। इस मतानुसार श्िाक्षा और स्वास्थ्य पर किया गया निवेश अनुत्पादक है, अगर उससे वस्तुओं और सेवाओं के निगर्त में वृि न हो। मानव विकास के परिपे्रक्ष्य में मानव स्वयं साध्य भी है। भले ही श्िाक्षा स्वास्थ्य आदि पर निवेश से श्रम की उच्च उत्पादकता में सुधार नहीं हो ¯कतु इनके माध्यम से मानव कल्याण का संवधर्न तो होना ही चाहिए। अतः श्रम की उत्पादकता में सुधार के पक्ष को अनदेखा करते हुए भी बुनियादी श्िाक्षा और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं का अपना अलग महत्व हो जाता है। इस दृष्िट से प्रत्येक व्यक्ित का बुनियादी श्िाक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं पर अिाकार सि( हो जाता है। दूसरे शब्दों में, समाज के प्रत्येक सदस्य को साक्षर तथा स्वस्थ जीवन जीने का अिाकार होता है। 5.5 भारत में मानव पूँजी निमार्ण की स्िथति इस खंड में हम भारत में मानव पूँजी निमार्ण का विश्लेषण करने जा रहे हैं। हम पहले ही पढ़ चुके हैं कि मानव पूँजी निमार्ण श्िाक्षा, स्वास्थ्य, कायर् स्थल प्रश्िाक्षण, प्रवसन और सूचना निवेश का परिणाम है। इनमें से श्िाक्षा और स्वास्थ्य मानव पूँजी निमार्ण के दो सबसे महत्वपूणर् ड्डोत हैं। हम जानते हैं कि हमारे देश की प्रशासन व्यवस्था संघीय है जिसमें वेंफद्र, राज्य तथा स्थानीय निकाय ;नगर निगम, नगर पालिका, ग्राम पंचायत आदिद्ध हैं। भारत के संविधान ने सभी स्तर के प्रशासकीय निकायों के कायो±, दायित्वों को भी बहुत स्पष्ट रूप से निधार्रित किया है। इसी प्रकार श्िाक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर व्यय तीनों ही प्रशासकीय स्तरों पर साथ - साथ वहन किया जाता है। स्वास्थ्य क्षेत्रा का विस्तृत विश्लेषण अध्याय 8 में किया जा चुका है। अतः यहाँ हम केवल श्िाक्षा क्षेत्राक का विश्लेषण करेंगे। क्या आप जानते हैं कि भारत मेें श्िाक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की देख - रेख कौन करता है? भारत में श्िाक्षा क्षेत्राक के विश्लेषण से पूवर् यहाँ हम श्िाक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्राकों में सरकार के हस्तक्षेप की आवश्यकता पर विचार करेंगे। हम जानते ही हैं कि श्िाक्षा और स्वास्थ्य की देखभाल निजी तथा सामाजिक लाभों को उत्पन्न करती है। इसी कारण इन सेवाओं के बाशार में निजी और सावर्र्जनिक संस्थाओं का अस्ितत्व है। श्िाक्षा और स्वास्थ्य पर व्यय महत्वपूणर् दीघर्कालिक प्रभाव डालते हैं और उन्हें आसानी से बदला नहीं जा सकता। इसलिए सरकारी हस्तक्षेप अनिवायर् है। मान लीजिए, जब भी किसी बच्चे को किसी स्वूफल या पिफर स्वास्थ्य देखभाल वेंफद्र में भतीर् करा दिया जाता है, जहाँ आवश्यक सुविधाएँ नहीं प्रदान की जा रही हों तो इससे पहले कि बच्चे को किसी अन्य संस्थान में स्थानांतरित किए जाने का निणर्य लिया जाए, पयार्प्त मात्रा में हानि हो चुकी होगी। यही नहीं, इन सेवाओं के व्यक्ितगत उपभोक्ताओं को सेवाओं की गुणवत्ताओं और लागतों के विषय में पूणर् जानकारी नहीं होती। इन परिस्िथतियों में श्िाक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध करा रही संस्थाएँ एकािाकार प्राप्त कर लेती हैं और शोषण करने लगती हैं। यहाँ सरकार की भूमिका का एक स्वरूप यह हो सकता है कि वह निजी सेवा प्रदायकों को उचित मानकों के अनुसार सेवाएँ देने तथा उनकी उचित कीमत उगाहने को बाध्य करे। भारत में श्िाक्षा क्षेत्राक के अंतगर्त संघ और राज्य स्तर पर श्िाक्षा मंत्रालय तथा राष्ट्रीय शैक्ष्िाक अनुसंधान और प्रश्िाक्षण परिषद्, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और अख्िाल भारतीय तकनीकी श्िाक्षा परिषद् आती हैं। स्वास्थ्य क्षेत्राक के अंतगर्त संघ और राज्य स्तरों पर स्वास्थ्य मंत्रालय और विभ्िान्न संस्थाओं के स्वास्थ्य विभाग तथा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् आदि कायर् कर रही हैं। हमारे जैसे विकासशील देश में जहाँ जनसंख्या का एक विशाल वगर् गरीबी रेखा से नीचे जीवन बिता रहा है, हममें से कइर् लोग बुनियादी श्िाक्षा और स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं पर पयार्प्त व्यय नहीं कर सकते। यही नहीं हमारी अिाकांश जनता अति विश्िाष्ट स्वास्थ्य देखभाल और उच्च श्िाक्षा का भार वहन नहीं कर पाती। जब बुनियादी श्िाक्षा और स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को नागरिकों का अिाकार मान लिया जाता है, तो यह अनिवायर् है कि सभी सुपात्रा नागरिकों को, विशेषकर सामाजिक दृष्िट से दलित रहे वगो± को, सरकार ये सुविधाएँ निःशुल्क प्रदान करे। शत - प्रतिशत साक्षरता और भारतीयों की औसत उपलब्िधयों में प्राप्त वृि के लिए वेंफद्र तथा राज्य दोनों सरकारें पिछले कइर् वषो± से अपने श्िाक्षा क्षेत्राक पर व्यय में वृि करती आ रही हैं। 5.6 श्िाक्षा पर सावर्जनिक व्यय में वृि क्या आप जानते हैं कि सरकार श्िाक्षा पर कितना व्यय करती है? सरकार द्वारा किए गये श्िाक्षा पर वुफल व्यय को अिाक साथर्क रूप से समझने के लिए हम इस व्यय को दो प्रकार से व्यत्तफ करेंगे - ;कद्धवुफल सरकारी व्यय में इसका प्रतिशत तथा ;खद्धसकल घरेलू उत्पाद में इसका प्रतिशत। वुफल सरकारी व्यय में श्िाक्षा पर व्यय का प्रतिशत सरकारी योजनाओं में श्िाक्षा के महत्व का सूचक है। सकल घरेलू उत्पाद में शैक्ष्िाक व्यय का प्रतिशत यह व्यक्त करता है कि हमारी आय का कितना भाग देश के शैक्ष्िाक विकास के लिए प्रतिब( है। 1952 से 2012 के बीच वुफल सरकारी व्यय में श्िाक्षा पर व्यय 7.92 प्रतिशत से बढ़कर 11.7 प्रतिशत हो गया है। इसी प्रकार सकल घरेलू उत्पाद में इसका प्रतिशत 0.64 से बढ़कर 3.31 प्रतिशत हो गया है। इस संपूणर् समयाविा में शैक्ष्िाक व्यय की वृि समान नहीं रही है इसमें अनियमित रूप से उतार - चढ़ाव आते रहे हैं। यदि इस सरकारी व्यय के साथ हम व्यक्ितयों के द्वारा किया गया निजी व्यय तथा परोपकारी ;धमार्थर्द्ध संस्थाओं के शैक्ष्िाक व्यय को शामिल कर लें तो श्िाक्षा पर वुफल व्यय और अिाक होना चाहिए। वुफल श्िाक्षा व्यय का एक बहुत बड़ा हिस्सा प्राथमिक श्िाक्षा पर खचर् होता है। उच्चतर/तृतीयक शैक्ष्िाक संस्थाओं ;उच्च श्िाक्षा के संस्थानों जैसे - महाविद्यालयों, बहुतकनीकी संस्थानों और विश्वविद्यालयों आदिद्ध पर होने वाला व्यय सबसे कम है। यद्यपि औसत रूप से सरकार उच्चतर श्िाक्षा पर बहुत कम व्यय करती है, ¯कतु प्रति विद्याथीर् उच्चतर श्िाक्षा पर व्यय प्राथमिक श्िाक्षा की तुलना में अिाक है। इसका, अथर् यह नहीं है कि वित्तीय संसाधनों को उच्चतर श्िाक्षा से प्राथमिक श्िाक्षा की ओर कर दिया जाना चाहिए। जैसे - जैसे हम विद्यालय श्िाक्षा का प्रसार करेंगें तो हमें उच्चतर शैक्ष्िाक संस्थानों से प्रश्िाक्ष्िात और अिाक श्िाक्षकों की आवश्यकता होगी। अतः श्िाक्षा के सभी स्तरों पर व्यय में वृि करना चाहिए। वषर् 2009 - 10 में राज्यों में होने वाले प्रतिव्यक्ित श्िाक्षा व्यय में कापफी अंतर है। जहाँ हिमाचल प्रदेश में इसका उच्च - स्तर 12,500 रु है, वहीं पंजाब में यह मात्रा 2200 रु है। इस प्रकार की विषमताओं के कारण ही विभ्िान्न राज्यों में श्िाक्षा के अवसरों और शैक्ष्िाक उपलब्िधयों के स्तर में बहुत भारी अंतर हो जाता है। विभ्िान्न आयोगों के द्वारा श्िाक्षा व्यय के वंाछित स्तर के साथ यदि श्िाक्षा व्यय की तुलना की जाय तो इसकी अपयार्प्तता समझ में आ सकती है। 50 वषर् पूवर् ;1964 - 66द्ध नियुक्त श्िाक्षा आयोग ने सिपफारिश की थी कि शैक्ष्िाक उपलब्िधयों की संवृि दर में उल्लेखनीय सुधार लाने के लिए सकल घरेलू उत्पाद का कम - से - कम 6 प्रतिशत श्िाक्षा पर खचर् किया जाना चाहिए। वषर् 2009 में भारत सरकार ने श्िाक्षा का अध्िकार अध्िनियम का कानून बनाया है जिसके अन्तगर्त 6 - 14 वषर् के आयु - वगर् के सभी बच्चों को मुफ्रत श्िाक्षा प्रदान की जाती है। 1998 में भारत सरकार द्वारा नियुक्त तापस मजूमदार समिति ने अनुमान लगाया था कि देश के 6 - 14 आयु वगर् के सभी बच्चों को स्वूफली श्िाक्षा व्यवस्था में शामिल करने के लिए ;1998 - 99 से 2000 - 07द्ध के दस वषो± की अविा में लगभग 1.3 लाख करोड़ रुव्यय करना होगा। सकल घरेलू उत्पाद के 6 प्रतिशत के स्तर की तुलना में वांछित वतर्मान 4 प्रतिशत व्यय का स्तर बहुत कम है। आने वाले वषार्ें में 6 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुँचने की आवश्यकता है, जैसा कि सि(ांत रूप में स्वीकार किया गया है। भारत सरकार ने सभी वंेफन्द्रीय करों पर 2 प्रतिशत फ्श्िाक्षा उपकारय् लगाना भी प्रारंभ किया है। श्िाक्षा उपकार से प्राप्त राजस्व को प्राथमिक श्िाक्षा पर व्यय करने हेतु सुरक्ष्िात रखा है। साथ ही सरकार ने उच्च श्िाक्षा संवधर्न के लिए भी एक विशाल धन राश्िा स्वीकृत कराने की बात की है। उच्च श्िाक्षाथ्िार्यों के लिए एक नयी ट्टण योजना की भी घोषणा की गयी है। भारत में शैक्ष्िाक उपलब्िधयाँ सामान्यतया किसी देश की शैक्ष्िाक उपलब्िधयांे का आकलन वयस्क साक्षरता स्तर, प्राथमिक श्िाक्षा संपूतिर् दर और युवा साक्षरता दर द्वारा किया जाता है। सारणी 5.2 में भारत की इन दरांे के दो दशकों के आँकड़े दिये गये हैं। 5.7 भविष्य की संभावनाएँ सब के लिए श्िाक्षा - अभी भी एक सपना है। यद्यपि वयस्क और युवा साक्षरता दरांे में सुधार हो रहा है, ¯कतु आज भी देश में निरक्षरांे की संख्या उतनी ही है जितनी स्वाधीनता के समय भारत की जनसंख्या थी। भारत की संविधान सभा ने 1950 में संविधान को पारित करते समय संविधान के नीति निदेशक तत्वों में स्पष्ट किया था कि सरकार संविधान पारित होने के दस साल के अंदर 14 वषर् की आयु के बच्चों सारणी 5.2 भारत मंे शैक्ष्िाक उपलब्िधयाँ विवरण 1990 1. वयस्क साक्षरता दर ;15 वषर् से अिाक आयुवगर् मंे साक्षरांे का प्रतिशतद्ध 1.1 पुरुष 61.9 1.2 महिलाएँ 37.9 2. प्राथमिक श्िाक्षा संपूूतिर्दर ;संब( वगर् प्रतिशतद्ध 2.1 पुरुष 78 2.2 महिलाएँ 61 3. युवा साक्षरता दर ;15 से 24 आयु वगर् की जनसंख्या का प्रतिशतद्ध 3.1 पुरुष 76.6 3.2 महिलाएँ 54.2 2000 68.4 45.4 85 69 79.7 64.8 2008 - 12 76.7 67.6 96.6 96.3 88 74 के लिए निःशुल्क और अनिवायर् श्िाक्षा का प्रावधान करेगी। इस लक्ष्य को प्राप्त कर लेते तो अब तक शत - प्रतिशत साक्षरता हो गइर् होती। लिंग समता - पहले से बेहतरः अब साक्षरता मंे पुरुषों और महिलाआंे के बीच का अंतर कम हो रहा है जो लिंग - समता की दिशा में एक सकारात्मक विकास है। नारी श्िाक्षा को भारत में और प्रोत्साहन दिए जाने के कइर् कारण हैं। जैसे, श्िाक्षा नारी की आथ्िार्क स्वतंत्राता और सामाजिक स्तर मंे सुधार और साथ ही ड्डी श्िाक्षा, प्रजनन दर और ियांे व बच्चांे के स्वास्थ्य देखभाल पर अनुकूल प्रभाव डालती है। अतः हमें साक्षरता स्तर सुधारने के अपने प्रयासांे में श्िाथ्िालता नहीं आने देनी चाहिए। अभी हमें शत - प्रतिशत वयस्क साक्षरता दर प्राप्त करने के लिए अनेक मंजिलें को पार करनी है। उच्च श्िाक्षा - लेने वालों की कमीः भारत में श्िाक्षा का पिरामिड बहुत ही नुकीला है, जो दशार्ता है कि उच्चतर श्िाक्षा स्तर तक बहुत कम लोग पहुँच पाते हैं। यही नहीं, श्िाक्ष्िात युवाआंे की बेरोजगारी दर भी उच्चतम है। राष्ट्रीय प्रतिदशर् सवेर्क्षण संगठन के आंकड़ों के अनुसार, वषर् 2011 - 12 में ग्रामीण क्षेत्रों में स्नातक व ऊपर अध्ययन किया हो युवा पुरुषों के बीच बेरोजगारी दर 19 प्रतिशत थी। उनके शहरी समकक्षों में 16 प्रतिशत अपेक्षावृफत कम स्तर पर बेरोजगारी दर थी। सबसे गंभीर रूप से प्रभावित लोगों में लगभग 30 प्रतिशत बेरोजगार हैं जो युवा ग्रामीण महिला थीं। इसके चित्रा 5.6 विद्यालय छोड़ने वाले छात्रा बाल श्रम को बढ़ावा देते हैं जिससे मानव पूँजी का क्षय होता है विपरीत, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में प्राथमिक स्तर के श्िाक्ष्िात युवाओं में से केवल 3 - 6 प्रतिशत बेरोजगार थे। अतः सरकार को उच्च श्िाक्षा के लिए अिाक धन का आबंटन करना चाहिए तथा उच्च श्िाक्षा संस्थानों के स्तर में सुधार लाना चाहिए ताकि वहाँ पढ़ रहे छात्रा रोजगार योग्य कौशल प्राप्त कर सवेंफ जब कम पढ़े - लिखे लोगों से तुलना की जाती है, तो श्िाक्ष्िात लोगों का एक बड़ा अनुपात बेरोजगार है। क्यों? 5.8 निष्कषर् मानव पूँजी निमार्ण और मानव विकास के आथ्िार्क सामाजिक लाभांे से तो सभी परिचित हैं। भारत मंे वेंफद्र और राज्य सरकारें श्िाक्षा तथा स्वास्थ्य क्षेत्राकांे के विकास के लिए पयार्प्त वित्तीय व्यवस्था का प्रावधान करती आ रही हैं। श्िाक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ समाज के सभी वगोर्ं को सुनिश्िचत रूप से सुलभ करायी जानी चाहिए, ताकि आथ्िार्क संवृि के साथ - साथ समता की प्राप्ित भी हो सके। भारत के पास वैज्ञानिक और तकनीकी जन - शक्ित है। समय की माँग है कि गुणात्मकता में सुधार करें तथा इस प्रकार की परिस्िथतियांे का भी निमार्ण करें कि इन्हें अपने ही देश में पयार्प्त रूप से प्रयुक्त किया जा सके। पुनरावतर्न ऽ श्िाक्षा में निवेश मानव को मानव पूँजी में परिवतिर्त करता है। इस प्रकार मानव पूँजी बढ़ी हुइर् उत्पादकता का प्रतिनििात्व करती है। यह एक अजिर्त योग्यता है और समझ बूझ से किए गए निवेशगत निणर्यों का परिणाम है, जो भविष्य में आय के ड्डोतों में वृि की अपेक्षा से किए जाते हैं। ऽ श्िाक्षा में निवेश, कायर् स्थल प्रश्िाक्षण, स्वास्थ्य, प्रवसन और सूचना मानव पूँजी निमार्ण के ड्डोत हैं। ऽ भौतिक पूँजी की संकल्पना मानव पूँजी की संकल्पना निधार्रण का आधार है। पूँजी निमार्ण के दोनों प्रकारों में वुफछ समानताएँ और वुफछ विषमताएँ हंै। ऽ मानव पूँजी निमार्ण में निवेश को प्रभावपूणर् तथा संवृि बढ़ाने वाला माना जाता है। ऽ मानव विकास इस विचार पर आधारित है कि श्िाक्षा और स्वास्थ्य दोनों मनुष्यों के कल्याण के लिए अभ्िान्न हैं, क्योंकि जब लोगों के पास पढ़ने और लिखने तथा दीघार्यु तथा स्वस्थ जीवन की योग्यता होगी, तभी वे उन मूल्यों का मापन करने में सक्षम होंगे जिनको वे महत्व देते हैं। ऽ वुफल सरकारी व्यय में श्िाक्षा पर किये जाने वाले व्यय का प्रतिशत सरकार द्वारा श्िाक्षा को दिए गए महत्व को दशार्ता है। अभ्यास 1.किसी देश में मानवीय पूँजी के दो प्रमुख ड्डोत क्या होते हैं?2.किसी देश की शैक्ष्िाक उपलब्िधयांे के दो सूचक क्या होंगे?3.भारत में शैक्ष्िाक उपलब्िधयांे मंे क्षेत्राीय विषमताएँ क्यों दिखाइर् दे रही हैं?4.मानव पूँजी निमार्ण और मानव विकास के भेद को स्पष्ट करें।5.मानव पूँजी की तुलना में मानव विकास किस प्रकार से अिाक व्यापक है?6.मानव पूँजी के निमार्ण में किन कारकों का योगदान रहता है?7.सरकारी संस्थाएँ भारत में किस प्रकार स्वूफल एवं अस्पताल की सुविधएँ उपलब्ध् करवाती है?8.श्िाक्षा को किसी राष्ट्र के विकास में एक महत्वपूणर् आगत माना जाता है। क्यों? 9.पूँजी निमार्ण के निम्नलिख्िात स्रोतों पर चचार् कीजिए। ;कद्ध स्वास्थ्य आधारिक संरचना ;खद्ध प्रवसन पर व्यय 10. मानव संसाधनों के प्रभावी प्रयोग के लिए स्वास्थ्य और श्िाक्षा पर व्यय संबंधी जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता का निरूपण करें। 11. मानव पूँजी में निवेश आथ्िार्क संवृि में किस प्रकार सहायक होता है? 12. विश्व भर में औसत शैक्ष्िाक स्तर में सुधार के साथ - साथ विषमताआंे में कमी की प्रवृिा पायी गयी है। टिप्पणी करें। 13. किसी राष्ट्र के आथ्िार्क विकास में श्िाक्षा की भूमिका का विश्लेषण करें। 14. समझाइए कि श्िाक्षा में निवेश आथ्िार्क संवृि को किस प्रकार प्रभावित करता है? 15. किसी व्यक्ित के लिए कायर् के दौरान प्रश्िाक्षण क्यांे आवश्यक होता है? 16. मानव पूँजी और आथ्िार्क संवृि के बीच संबंध स्पष्ट करें। 17. भारत में स्त्राी श्िाक्षा के प्रोत्साहन की आवश्यकता पर चचार् करें। 18. श्िाक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रांे में सरकार के विविध प्रकार के हस्तक्षेपांे के पक्ष में तवर्फ दीजिए। 19. भारत में मानव पूँजी निमार्ण की मुख्य समस्याएँ क्या हैं? 20. क्या आपके विचार में सरकार को श्िाक्षा और स्वास्थ्य देखभाल संस्थानांे में लिए जाने वाले शुल्कांे की संरचना निधार्रित करनी चाहिए। यदि हाँ, तो क्यांे? अतिरिक्त गतिवििायाँ 1 पता करें कि मानव विकास सूचक की रचना कैसे की जाती है। मानव विकास सूचक के अनुसार भारत की विश्व में क्या स्िथति है? 2 क्या निकट भव्िाष्य मंे भारत एक ज्ञानाधारित अथर्व्यवस्था बनने जा रहा है? कक्षा मंे इस पर चचार् करें। 3 सारणी 5.2 के आँकड़ांे की व्याख्या करें। 4 एक श्िाक्ष्िात व्यक्ित के रूप मंे आप श्िाक्षा प्रसार मंे क्या योगदान देंगे। ;उदाहरणाथर्, एक व्यक्ित एक श्िाक्षाद्ध 5 श्िाक्षा, स्वास्थ्य और श्रम संबंधी सूचना देने वाले ड्डोतों की सूची बनाइए। 6 मानव संसाधन विकास मंत्रालय की वाष्िार्क रिपाटो± को पढ़कर उनका सार संक्षेप करें। वेंफद्रीय आथ्िार्क सवेर्क्षण के सामाजिक क्षेत्राक अध्याय को पढ़ें। पुस्तवेंफ बेकर, ग्रे एस. 1964.ह्यूमन वैफपिटल 2वाॅ एंडिशन, कोलम्िबया यूनिवसिर्टी प्रेस, न्यू याॅकर्। प्रफीमेन रिचडर्, 1976.द ओवरएजुकेटिड अमेंरिकन, एकेडमिक प्रेस, न्यूयाॅकर्। सरकारी रिपोटे± 1.भारत मंे श्िाक्षा मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार ;पिछले वुफछ वषोर्ं की रिपोटर् देखेंद्ध। 2.वाष्िार्क रिपोट±े, मानव संसाध्न विकास मंत्रालय, भारत सरकार। भारत मंे श्िाक्षा विषयक जानकारी देने वाली वुफछ वेबसाइट्स ूूूण्मकनबंजपवदण्दपबण्पद ूूूण्बइेमण्दपबण्पद ूूूण्नहबण्ंबण्पद ूूूण्ंपबजमण्मतदमजण्पद ूूूण्दबमतजण्दपबण्पद स्वास्थ्य क्षेत्रा विषयक जानकारी के लिए ूूूण्उवीूिण्दपबण्पद ूूूण्पबउअण्दपबण्पद भारतीय अथर्व्यवस्था संबंिात जानकारी के लिए ूूूण्पिदउपदण्दपबण्पद ूूूण्उवेचपण्दपबण्पद

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