अध्याय 3 सरल रेखा में गति 3ण्1 भूमिका 3ण्2 स्िथति, पथ - लंबाइर् एवं विस्थापन 3ण्3 औसत वेग तथा औसत चाल 3ण्4 तात्क्षण्िाक वेग एवं चाल 3ण्5 त्वरण 3ण्6 एकसमान त्वरण से गतिमान वस्तु काशु(गतिकी संबंध्ी समीकरण 3ण्7 आपेक्ष्िाक वेग सारांश विचारणीय विषय अभ्यास अतिरिक्त अभ्यास परिश्िाष्ट 3ण्1 3ण्1 भूमिका विश्व की प्रत्येक वस्तु प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गतिमान रहती है । हमाराचलना, दौड़ना, साइकिल सवारी आदि दैनिक जीवन में दिखाइर् देने वाली ियाएँगति के वुफछ उदाहरण हैं । इतना ही नहीं, निद्रावस्था मंे भी हमारे पेफपफड़ों मंे वायुका प्रवेश एवं निष्कासन तथा हमारी ध्मनियों एवं श्िाराओं मंे रुध्िर का संचरणहोता रहता है । हम पेड़ों से गिरते हुए पत्तों को तथा बाँध् से बहते हुए पानी कोदेखते हैं । मोटरगाड़ी और वायुयान यात्रिायों को एक स्थान से दूसरे स्थान को लेजाते हैं । पृथ्वी 24 घंटे मंे एक बार अपनी अक्ष के परितः घूणर्न करती है तथावषर् मंे एक बार सूयर् की परिक्रमा पूरी करती है । सूयर् अपने ग्रहों सहित हमारीआकाशगंगा नामक मंदाकिनी मंे विचरण करता है, तथा जो स्वयं भी स्थानीयमंदाकिनियों के समूह मंे गति करती है । इस प्रकार समय के सापेक्ष वस्तु की स्िथति मंे परिवतर्न को गति कहते हैं ।समय के साथ स्िथति वैफसे परिवतिर्त होती है ? इस अध्याय मंे हम गति के बारेमंे पढ़ंेगे । इसके लिए हमंे वेग तथा त्वरण की धरणा को समझना होगा । इसअध्याय मंे हम अपना अध्ययन वस्तु के एक सरल रेखा के अनुदिश गति तक हीसीमित रखेंगे । इस प्रकार की गति को सरल रेखीय गति भी कहते हैं । एकसमानत्वरित सरल रेखीय गति के लिए वुफछ सरल समीकरण प्राप्त किए जा सकते हैं।अंततः गति की आपेक्ष्िाक प्रवृफति को समझने के लिए हम आपेक्ष्िाक गति कीधरणा प्रस्तुत करेंगे । इस अध्ययन मंे हम सभी गतिमान वस्तुओं को अतिसूक्ष्म मानकर बिंदु रूप मंेनिरूपित करेंगे । यह सन्िनकटन तब तक मान्य होता है जब तक वस्तु का आकारनिश्िचत समय अंतराल मंे वस्तु द्वारा चली गइर् दूरी की अपेक्षा पयार्प्त रूप से कमहोता है । वास्तविक जीवन मंे बहुत - सी स्िथतियांे मंे वस्तुओं के आमाप ;साइशद्धकी उपेक्षा की जा सकती है और बिना अध्िक त्राुटि के उन्हंे एक बिंदु - वस्तु मानाजा सकता है । शु(गतिकी मंे, हम वस्तु की गति के कारणों पर ध्यान न देकर केवल उसकीगति का ही अध्ययन करते हैं । इस अध्याय एवं अगले अध्याय मंे विभ्िान्न प्रकारकी गतियांे का वणर्न किया गया है । इन गतियांे के कारणों का अध्ययन हम पाँचवेंअध्याय मंे करेंगे । 3ण्2 स्िथति, पथ - लंबाइर् एवं विस्थापन पहले आपने पढ़ा है कि किसी वस्तु की स्िथति में परिवतर्न को गति कहते हैं।स्िथति के निधर्रण के लिए एक संदभर् बिंदु तथा अक्षों के एक समुच्चय की आवश्यकता होती है। इसके लिए एक समकोण्िाक निदेर्शांक - निकायका चुनाव सुविधजनक होता है। इस निकाय में तीन परस्परलम्बवत अक्ष होते हैं जिन्हें ग.ए ल.तथा ्र.अक्ष कहते हैं। इनअक्षों के प्रतिच्छेद बिंदु को मूल बिंदु ;व्द्ध कहते हैं तथा यहसंदभर् बिंदु होता है। किसी वस्तु के निदेर्शांक ;गए लए ्रद्ध इस निदेर्शांक निकाय के सापेक्ष उस वस्तु की स्िथति निरूपित करतेहैं। समय नापने के लिए इस निकाय में एक घड़ी रख देते हैं।घड़ी सहित इस निदेर्शांक - निकाय को निदेर्श तंत्रा ;तिंउम व ितममितमदबमद्ध कहते हैं। जब किसी वस्तु के एक या अध्िक निदेर्शांक समय के साथपरिव£तत होते हैं तो वस्तु को गतिमान कहते हैं। अन्यथा वस्तु कोउस निदेर्श तंत्रा के सापेक्ष विरामावस्था में मानते हैें। किसी निदेर्श तंत्रा में अक्षों का चुनाव स्िथति विशेष पर निभर्रकरता है। उदाहरण के लिए, एक विमा में गति के निरूपण केलिए हमें केवल एक अक्ष की आवश्यकता होती है। दो/तीनविमाओं मंे गति के निरूपण के लिए दो/तीन अक्षों कीआवश्यकता होती है। किसी घटना का वणर्न इसके लिए चुने गए निदेर्श - तंत्रा परनिभर्र करता है। उदाहरण के लिए, जब हम कहते हैं कि सड़कपर कार चल रही है तो वास्तव में ‘कार की गति’ का वणर्न हमस्वयं से या जमीन से संलग्न निदेर्श तंत्रा के सापेक्ष करते हैं। यदिहम कार में बैठे किसी व्यक्ित से संलग्न निदेर्श तंत्रा के सापेक्षकार की स्िथति का वणर्न करें तो कार विरामावस्था में होगी। एक सरल रेखा में किसी वस्तु की गति के विवरण हेतु हमएक अक्ष ;मान लीजिए ग - अक्षद्ध को इस प्रकार चुन सकते हैंकि वह वस्तु के पथ के संपाती हो । इस प्रकार वस्तु की स्िथति को हम अपनी सुविधनुसार चुने गए किसी मूल बिंदु ;मानलीजिए चित्रा 3ण्1 मंे दशार्ए गए बिंदु व्द्ध के सापेक्ष निरूपितकरते हैं । बिंदु व् के दायीं ओर के निदेर्शांक को हम ध्नात्मकतथा बायीं ओर के स्िथति - निदेर्शांक को ट्टणात्मक कहेंगे । इसप(ति के अनुसार चित्रा 3ण्1 मंे बिंदु च् और फ के स्िथति - निदेर्शांक क्रमशः $360 उ और $240 उ हैं । इसी प्रकार बिंदु त् का स्िथति - निदेर्शांक - 120 उ है । पथ - लंबाइर् कल्पना कीजिए कि कोइर् कार एक सरल रेखा के अनुदिशगतिमान है । हम ग - अक्ष इस प्रकार चुनते हैं कि यह गतिमान कार के पथ के संपाती हो । अक्ष का मूल बिंदु वह है जहाँ सेकार चलना शुरू करती है अथार्त समय ज त्र0 पर कार ग त्र 0 पर थी ;चित्रा 3ण्1द्ध । मान लीजिए कि भ्िान्न - भ्िान्न क्षणों परकार की स्िथति बिंदुओं च्ए फ तथा त् से व्यक्त होती है । यहाँ हम गति की दो स्िथतियांे पर विचार करेंगे । पहली मंे कार व् से च् तक जाती है । अतः कार द्वारा चली गइर् दूरी व्च् त्र ़360 उ है । इस दूरी को कार द्वारा चली गइर् पथ - लंबाइर् कहतेहैं । दूसरी स्िथति मंे कार पहले व् से च् तक जाती है और पिफर च् से फ पर वापस आ जाती है । गति की इस अवध्ि मंे कारद्वारा चली गइर् पथ - लंबाइर् त्र व्च् ़ च्फ त्र 360 उ ़ ;़120 उद्ध त्र ़480 उ होगी। क्योंकि पथ - लंबाइर् मंे केवल परिमाणहोता है दिशा नहीं, अतः यह एक अदिश राश्िा है ;अध्याय 4 देख्िाएद्ध । विस्थापन यहाँ यह प्रासंगिक होगा कि हम एक दूसरी उपयोगी भौतिक राश्िा विस्थापन को वस्तु की स्िथति मंे परिवतर्न के रूप मंे परिभाष्िातकरें । कल्पना कीजिए कि समय जव जपर वस्तु की स्िथति12 क्रमशः गव ग है । तब समय Δज ;त्रज√जद्ध मंे उसका12 21विस्थापन, जिसे हम Δग से व्यक्त करते हैं, अंतिम तथा प्रारंभ्िाकस्िथतियांे के अंतर द्वारा व्यक्त किया जाता है: Δग त्रग2√ग1 ;यहाँ हम ग्रीक अक्षर डेल्टा ;Δद्ध का प्रयोग किसी राश्िा मंेपरिवतर्न को व्यक्त करने के लिए करते हैंद्ध। यदि ग झ ग तो Δग ध्नात्मक होगा, परंतु यदि ग ढ ग तो 21 21 Δग ट्टणात्मक होगा । विस्थापन मंे परिमाण व दिशा दोनों होते हैं, ऐसी राश्िायों को सदिशों द्वारा निरूपित किया जाता है । आपसदिशों के विषय मंे अगले अध्याय मंे पढ़ेंगे । इस अध्याय मंे हमएक सरल रेखा के अनुदिश सरल गति ;जिसे हम रेखीय गति कहते हैंद्ध के विषय मंे ही पढ़ेंगे । एक - विमीय गति मंे केवलदो ही दिशायंे होती हैं ;अग्रवतीर् एवं पश्चगामी अथवा अधेगामीएवं ऊध्वर्गामीद्ध जिनमंे वस्तु गति करती है । इन दोनांे दिशाओंको हम सुगमता के लिए $ और - संकेतांे से व्यक्त कर सकतेहैं । उदाहरण के लिए, यदि कार स्िथति व् से च् पर पहँुचती है, तो उसका विस्थापन Δग त्र ग2 √ ग1 त्र ;़360 उद्ध √ 0 उ त्र ़360 उ होगा । इस विस्थापन का परिमाण 360 उ है तथा इसकी दिशा ग की ध्नात्मक दिशा मंे होगी जिसे हम $ संकेत से चिित करेंगे ।इसी प्रकार कार का च् से फ तक का विस्थापन 240 उ √ 360 उ त्र √120 उ होगा । ट्टणात्मक चिÉ विस्थापन की दिशाको इंगित करता है । अतएव, वस्तु की एक - विमीय गतिके विवरण के लिए सदिश संकेत का उपयोग आवश्यक नहींहोता है । चित्रा 3ण्1 ग - अक्ष, मूल बिंदु तथा विभ्िान्न समयांे मंे कार की स्िथतियाँ । विस्थापन का परिमाण गतिमान वस्तु द्वारा चली गइर् पथ - लंबाइर् के बराबर हो भी सकता है और नहीं भी होसकता है । उदाहरण के लिए, यदि कार स्िथति व् से चल कर च् पर पहुँच जाए, तो पथ - लंबाइर् त्र $360 उ तथा विस्थापन त्र $360 उ होगा । यहाँ विस्थापन का परिमाण ;360 उद्धपथ - लंबाइर् ;360 उद्ध के बराबर है । परंतु यदि कार व् से चलकर च् तक जाए और पिफर फ पर वापस आ जाए तो,पथ - लंबाइर् त्र ;़360 उद्ध ़ ;़120 उद्ध त्र ़480 उ होगी परंतुविस्थापन त्र ;़240 उद्ध √ ;0 उद्ध त्र ़240 उ होगा । इस बारविस्थापन का परिमाण ;240 उद्ध कार द्वारा चली गइर् पथ - लंबाइर्;480 उद्ध के बराबर नहीं ;वास्तव मंे कमद्ध है । विस्थापन का परिमाण गति की किसी अवध्ि के लिए शून्यभी हो सकता है जबकि तदनुरूप पथ - लंबाइर् शून्य नहीं है।उदाहरण के लिए, चित्रा 3ण्1 मंे यदि कार व् से चल कर च् तक जाए और पुनः व् पर वापस आ जाए तो कार की अंतिम स्िथतिप्रारंभ्िाक स्िथति के संपाती हो जाती है और विस्थापन शून्य हो जाता है । परंतु कार की इस पूरी यात्रा के लिए वुफल पथ - लंबाइर् व्च् ़ च्व् त्र ़360 उ ़ 360 उ त्र ़720 उ होगी । जैसा कि आप पहले पढ़ चुके हैं किसी भी वस्तु की गतिको स्िथति - समय ग्रापफ द्वारा व्यक्त किया जा सकता है । इस प्रकार के ग्रापफ ऐसे सशक्त साध्न होते हैं, जिनके माध्यम से वस्तु वफी गति के विभ्िान्न पहलुआंे का निरूपण एवं विश्लेषणआसानी से किया जा सकता है । किसी सरल रेखा ;जैसे - ग - अक्षद्ध के अनुदिश गतिमान वस्तु के लिए समय के साथकेवल ग - निदेर्शांक ही परिवत्िार्त होता है । इस प्रकार हमंे ग . ज ग्रापफ प्राप्त होता है । हम सवर्प्रथम एक सरल स्िथति पर विचार करेंगे, जिसमंे वस्तु उदाहरणाथर्, एक कार ग त्र 40 उ परस्िथत है । ऐसी वस्तु के लिए स्िथति - समय ;ग.जद्ध ग्रापफ समय - अक्ष के समांतर एक सीध्ी सरल रेखा होता है जैसा किचित्रा 3ण्2;ंद्ध मंे दिखाया गया है । यदि कोइर् वस्तु समान समय अंतराल मंे समान दूरी तय करतीहै, तो उस वस्तु की गति एकसमान गति कहलाती है । इस प्रकार की गति का स्िथति - समय ग्रापफ चित्रा 3ण्2;इद्ध मंे दिखलायागया है । अब हम उस कार की गति पर विचार करेंगे जो मूल बिंदु व् से ज त्र 0 े पर विरामावस्था से चलना प्रारंभ करती है । इसकीचाल उत्तरोत्तर ज त्र 10 े तक बढ़ती जाती है । इसके बाद वह ज त्र 18े तक एकसमान चाल से चलती है । इस समय इसमंेब्रेक लगाया जाता है जिसके परिणामस्वरूप वह ज त्र 20 े पर और ग त्र 296 उ पर रुक जाती है । ऐसी कार का स्िथति - समय ;ंद्ध ;इद्ध चित्रा 3ण्2 स्िथति - समय ग्रापफ, जब ;ंद्ध वस्तु स्िथर है, तथा ;इद्ध जब वस्तु एकसमान गति से चल रही है । ↑ ग ;उद्ध ज;ेद्धऽ ग्रापफ चित्रा 3ण्3 मंे दिखाया गया है । हम इस ग्रापफ की चचार् इसीअध्याय मंे आगे आने वाले वुफछ खंडों मंे पुनः करेंगे । 3ण्3 औसत वेग तथा औसत चाल जब कोइर् वस्तु गतिमान होती है तो समय के साथ - साथ उसकीस्िथति परिवतिर्त होती है । प्रश्न उठता है कि समय के साथ कितनी तेजी से वस्तु की स्िथति परिवतिर्त होती है तथा यहपरिवतर्न किस दिशा मंे होता है ? इसके विवरण के लिए हम एक राश्िा परिभाष्िात करते हैं जिसे औसत वेेग कहा जाता है ।किसी वस्तु की स्िथति मंे परिवतर्न अथवा विस्थापन ;Δगद्ध कोसमय अंतराल ;Δजद्ध द्वारा विभाजित करने पर औसत वेग प्राप्त होता है । इसे अ से चिित करते हैं: ग − ग Δग अ त्रत्र 21 ;3ण्1द्ध ज − ज Δज21 यहां ग , आरंभ्िाक समय ज पर तथा ग अंतिम समय ज पर,1122 वस्तु की स्िथति को व्यक्त करता है । यहाँ वेग के प्रतीक ;अद्ध के ऊपर लगाइर् गइर् ‘रेखा’ वेग के औसत मान को व्यक्त करतीहै। किसी राश्िा के औसत मान को दशार्ने की यह एक मानक प(ति है । वेग का ैप् मात्राक उध्े अथवा उ े√1 है यद्यपिदैनिक उपयोगों मंे उसके लिए ाउध्ी का भी प्रयोग होता है। विस्थापन की भाँति माध्य - वेग भी एक सदिश राश्िा है ।इसमें दिशा एवं परिमाण दोनों समाहित होते हैं । परंतु जैसा किहम पीछे स्पष्ट कर चुके हैं, यदि वस्तु एक सरल रेखा मंेगतिमान हो तो उसके दिशात्मक पक्ष को ़ या - चिÉों द्वारा प्रकट कर सकते हैं । इसलिए इस अध्याय मंे वेग के लिए हम सदिश संकेतन का उपयोग नहीं करेंगे । चित्रा 3ण्4 औसत चाल सरल रेखा च्च्की प्रवणता है ।1 2 चित्रा 3ण्3 मंे दशार्इर् गइर् कार की गति के लिए ग.ज ग्रापफ का ज त्र 0 े तथा ज त्र8 े के बीच के भाग को बड़ा करके चित्रा 3.4 में दिखाया गया है । जैसा कि आलेख से स्पष्ट है, ज त्र 5 े तथा ज त्र7 े के मध्य समय अंतराल मंे कार का औसत - वेग होगाः ग2 − ग1 ;27ण्4 −10ण्0 द्ध उ दृ1अ त्रत्र त्र 8ण्7 उ े ज −ज ;7 − 5द्ध े21 यह मान चित्रा 3ण्4 मंे दशार्इर् गइर् सरल रेखा च्1 च्2 की प्रवणता के बराबर होगा । यह सरल रेखा कार की प्रारंभ्िाक स्िथति च् 1 को उसकी अंतिम स्िथति च्से मिलाती है ।2 औसत वेग का ट्टणात्मक या ध्नात्मक होना विस्थापन केचिÉ पर निभर्र करता है । यदि विस्थापन शून्य होगा तो औसतवेग का मान भी शून्य होगा । ध्नात्मक तथा ट्टणात्मक वेग से चलती हुइर् वस्तु के लिए ग√ज ग्रापफ क्रमशः चित्रा 3ण्5;ंद्ध तथा चित्रा 3ण्5;इद्ध मंे दशार्ए गए हैं । किसी स्िथर वस्तु के लिए ग.ज ग्रापफ चित्रा 3ण्5;बद्ध में दशार्या गया है । ;ंद्ध ;इद्ध ;बद्ध चित्रा 3ण्5 स्िथति - समय ग्रापफ उस वस्तु के लिए जो ;ंद्ध ध्नात्मकवेग से गतिमान है, ;इद्ध ट्टणात्मक वेग से गतिमान है, तथा ;बद्ध विरामावस्था मंे है । औसत वेग को परिभाष्िात करने के लिए केवल विस्थापन का ज्ञान ही आवश्यक होता है । हम यह देख चुके हैं कि विस्थापन का परिमाण वास्तविक पथ - लंबाइर् से भ्िान्न हो सकता है । वास्तविक पथ पर वस्तु की गति की दर के लिए हम एक दूसरी राश्िा को प्रयुक्त करते हैं जिसे औसत चाल कहते हैं । वस्तु की यात्रा की अवध्ि मंे चली गइर् वुफल पथ - लंबाइर् एवं इसमंे लगे समय के भागपफल को औसत चाल कहते हैं । सपंण्ूार् पथ - लबंाइर् औसत चाल त्र सपंण्ूार् समयावध्ि ;3ण्2द्ध औसत चाल का वही मात्राक ;उ े√1द्ध होता है जो वेग का होता है । परंतु औसत चाल से यह पता नहीं चल पाता कि वस्तु किस दिशा मंे गतिमान है । इस दृष्िटकोण से औसत चाल सदैवध्नात्मक ही होती है ;जबकि औसत वेग ध्नात्मक या ट्टणात्मक वुफछ भी हो सकता हैद्ध। यदि वस्तु एक सरल रेखा के अनुदिश गतिमान है और केवल एक ही दिशा मंे चलती है तो विस्थापन का परिमाण वुफल पथ - लंबाइर् के बराबर होगा । ऐसी परिस्िथतियांे मंे वस्तु के औसत वेग का परिमाण उसकी औसत चाल के बराबर होगा । परंतु यह बात हमेशा सही नहीं होगी । यह आप उदाहरण 3ण्1 मंे देखेंगे । ऽ उदाहरण 3ण्1 कोइर् कार एक सरल रेखा ;मान लीजिए चित्रा 3.1 मंे रेखा व्च्द्ध के अनुदिश गतिमान है । कार व् से चलकर 18 े मंे च् तक पहंुचती है, पिफर 6ण्0 े मंे स्िथति फ पर वापस आ जाती है । कार के औसत वेग एवं औसत चाल की गणना कीजिए, जब ;ंद्ध कार व् से च् तक जाती है, और ;इद्ध जब वह व् से च् तक जा कर पुनः फ पर वापस आ जाती है । हल ;ंद्ध विस्थापन आसैत वगे समयावध्ि ़ 360 उ 1अथवा अ20 उ े 18 े पथ दूरीऔसत चाल त्र समयावध्ि 360 उ 120 उ े 18 े अतः इस स्िथति में औसत चाल का मान औसत वेग के परिमाण के बराबर है । ;इद्ध विस्थापन 240उ आसैत वगे त्र समयावध्ि18़6ण्0 े त्र ़10 उ े√1 पथ - लम्बाइर् व्च् ़ च्फ औसत चाल त्र त्र समयावध्ि ज ;360़120द्ध उ त्र 24 े त्र 20 उ े√1 अतः इस स्िथति मंे औसत चाल का मान औसत वेग के परिमाणके बराबर नहीं है । इसका कारण कार की गति के दौरान गति में दिशा परिवतर्न है जिसके पफलस्वरूप पथ - लंबाइर् विस्थापन केपरिमाण से अध्िक है । इससे स्पष्ट है कि वस्तु की चाल सामान्यतया वेग के परिमाण से अध्िक होती है । फ् यदि उदाहरण 3.1 मंे कार स्िथति व् से च् ब्िांदु तक जाए तथा उसीसमय अंतराल मंे वह व् स्िथति पर वापस आ जाए तो कार की माध्य चाल 20 उ े√1 होगी, परंतु उसका औसत वेगशून्य होगा! 3ण्4 तात्क्षण्िाक वेग एवं चाल जैसा कि हम पढ़ चुके हैं कि औसत वेग से हमें यह ज्ञात होता है कि कोइर् वस्तु किसी दिए गए समय अंतराल मंे किस गति सेचल रही है, किन्तु इससे यह पता नहीं चल पाता कि इस समय अंतराल के भ्िान्न - भ्िान्न क्षणों पर वह किस गति से चल रही है।अतः किसी क्षण ज पर वेग के लिए हम तात्क्षण्िाक वेग या केवल वेग अ को परिभाष्िात करते हैं ।गतिमान वस्तु का तात्क्षण्िाक वेग उसके औसत वेग के बराबर होगा यदि उसके दो समयों ;ज तथा ज ़ Δजद्ध के बीच का अंतराल ;Δजद्ध अनन्तः सूक्ष्म हो । गण्िातीय विध्ि से हम इस कथन को निम्न प्रकार से व्यक्त करते हैं - Δगअत्रसपउ १ ;3ण्3ंद्धΔजΔे→0 कग ;3ण्3इद्धकज यहाँ प्रतीक सपउ का तात्पयर् उसके दायीं ओर स्िथत राश्िाΔज→0 ;जैसे Δग द्ध का वह मान है जो Δज के मान को शून्य की ओरΔज ;Δज→0द्ध प्रवृत्त करने पर प्राप्त होगा । कलन गण्िात की भाषा ⎛ कग ⎞मंे समीकरण ;3ण्3ंद्ध में दायीं ओर की राश्िा ⎜⎟ग का ज⎝ कज ⎠ के सापेक्ष अवकलन गुणांक है। ;परिश्िाष्ट 3ण्1 देख्िाएद्ध। यह गुणांक उस क्षण पर वस्तु की स्िथति परिवतर्न की दर होती है । किसी क्षण पर वस्तु का वेग निकालने के लिए हम समीकरण ;3ण्3ंद्ध का उपयोग कर सकते हैं । इसके लिए ग्राप्िाफक या गण्िातीय विध्ि को प्रयोग मंे लाते हैं । मान लीजिए कि हम चित्रा ;3ण्3द्ध मंे निरूपित गतिमान कार का वेग ज त्र 4 े ;बिंदु च्द्ध पर निकालना चाहते हैं । गणना की आसानी के लिए इस चित्रा को चित्रा 3ण्6 मंे अलग पैमाना लेकर पुनः खींचा गया है। पहले हम ज त्र 4 े को वेंफद्र मंे रखकर Δज को 2 े लें । औसत वेग की परिभाषा के अनुसार सरल रेखा च्1च् ;चित्रा 3ण्6द्ध की2प्रवणता 3 े से 5 े के अंतराल मंे वस्तु के औसत वेग को व्यक्त करेगी । अब हम Δज का मान 2 े से घटाकर 1 े कर देते हैं तो च्च् रेखा फफ हो जाती है और इसकी प्रवणता 3ण्5 े से 12 124ण्5 े अंतराल में औसत वेग का मान देगी । अंततः सीमांत मान चित्रा 3ण्6 स्िथति - समय ग्रापफ से वेग ज्ञात करना । ज त्र 4े पर वेग उस क्षण पर ग्रापफ की स्पशर् रेखा की प्रवणता है । Δज→0 की परिस्िथति मंे रेखा च्च्स्िथति - समय वक्र के बिंदु12 च् पर स्पशर् रेखा हो जाती है । इस प्रकार ज त्र 4 े क्षण पर कार का वेग उस बिंदु पर खींची गइर् स्पशर् रेखा की प्रवणता के बराबर होगा । यद्यपि ग्रापिफक विध्ि से इसे प्रदश्िार्त करना वुफछ कठिन है तथापि यदि इसके लिए हम गण्िातीय विध्ि का उपयोग करेें तो सीमांत प्रिया आसानी से समझी जा सकती है । चित्रा 3ण्6 मंे खींचे गए ग्रापफ के लिए ग त्र 0ण्8 ज3 है । सारणी 3ण्1 मंे ज त्र4 े को वेंफद्र में रखकर Δज त्र 2ण्0 ेए1ण्0 ेए 0ण्5 ेए 0ण्1े तथा 0ण्01 े के लिए Δगध्Δज के मूल्यों को दशार्या गया है । दूसरे और तीसरे काॅलम मंे ज;त्रज √Δजध्2द्ध तथा1ज;त्रज√Δजध्2द्ध और चैथे एवं पाँचवें काॅलम मंे ग के तदनुरूप2मानों अथार्त ग;ज1द्ध त्र 0ण्08 ज31 तथा ग;ज2द्ध त्र 0ण्03 ज32 को दिखलाया गया है । छठे काॅलम मंे अंतर Δग त्र ग;ज द्ध√ग;ज द्ध को 21तथा अंतिम काॅलम मंे Δग व Δज के अनुपात को व्यक्त किया गया है । यह अनुपात प्रथम काॅलम मंे अंकित Δज के भ्िान्न - भ्िान्न मानों के संगत औसत वेग का मान है । सारणी 3ण्1 से स्पष्ट है कि जैसे - जैसे Δज का मान 2ण्0 े से घटाते - घटाते 0ण्01 े करते हैं तो औसत वेग अंततः सीमांत मान 3ण्84 उे.1के बराबर हो जाता है जो जत्र4 े पर कार का वेग है अथार्त जत्र4 े पर कगध्कज का मान । इस प्रकार चित्रा 3ण्3 में दशार्इर् गइर् गति के हर क्षण के लिए हम कार का वेग निकाल सकते हैं । इस उदाहरण के लिए समय के सापेक्ष वेग मंे परिवतर्न चित्रा 3ण्7 मंे दशार्या गया है । चित्रा 3ण्7 चित्रा 3ण्3 मंे दशार्इर् गइर् वस्तु की गति के तदनुरूपवेग - समय ग्रापफ । यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है कि वस्तु का तात्क्षण्िाक वेग निकालने के लिए ग्रापिफक विध्ि सदैव सुविधजनक नहीं होती है । इस विध्ि ;ग्रापिफक विध्िद्ध मंे हम गतिमान वस्तु के स्िथति - समय ग्रापफ को सावधनीपूवर्क खींचते हैं तथा Δज को उत्तरोत्तर कम करते हुए वस्तु के औसत वेग ; अ द्ध की गणना करते जाते हैं । भ्िान्न - भ्िान्न क्षणों पर वस्तु का वेग निकालना तब बहुत आसान हो जाता है जब विभ्िान्न समयों पर हमारे पास वस्तु की स्िथति के पयार्प्त आँकड़े उपलब्ध् हों अथवा वस्तु की स्िथति का समय के पफलन के रूप मंे हमारे पास यथाथर् व्यंजक उपलब्ध् हो । ऐसी स्िथति मंे उपलब्ध् आँकड़ों का उपयोग करते हुए समय अंतराल Δज को क्रमशः सूक्ष्म करते हुए Δगध्Δज का मान निकालते जाएँगे और अंततः सारणी 3.1 मंे दशार्इर् गइर् विध्ि Δगध्Δज का सीमांत मान के अनुसार Δगध्Δज का सीमांत मान प्राप्त कर लेंगे । अन्यथा किसी दिए गए व्यंजक के लिए अवकल गण्िात का प्रयोग करके गतिमान वस्तु के भ्िान्न - भ्िान्न क्षणों के लिए कगध्कज की गणना कर लेंगे जैसा कि उदाहरण 3.2 मंे बताया गया है । ऽ उदाहरण 3ण्2 ग.अक्ष के अनुदिश किसी गतिमान वस्तुकी स्िथति निम्नलिख्िात सूत्रा से व्यक्त की जाती है: गत्रं़इज2 । यहाँ ं त्र 8ण्5 उए इ त्र 2ण्5 उ े√2 तथा समय ज को सेवंफड मंे व्यक्त किया गया है । जत्र0 े तथा जत्र2ण्0 े क्षणों पर वस्तु का वेग क्या होगा ? जत्र2ण्0 े तथा जत्र4ण्0 े के मध्य के समय अंतराल मंे वस्तु का औसत वेग क्या होगा ? हल अवकल गण्िात की प(ति के अनुसार वस्तु का वेग कग क ं इज 22 ण् ज उ े√1 अ इज 50 कज कज ज त्र0 े क्षण के लिए अ त्र 0 उध्ेए तथा ज त्र2ण्0 े समय पर, अ त्र10 उ े√1गज;द्ध गज;द्ध ग 4ण्0 ग 2ण्0 औसत वेग त्र 21 ज2 ज1 4ण्0 2ण्0 ;ं 16द्ध ;ं 4द्ध इइत्र त्र 6ण्0इ2ण्0 त्र 6ण्0 2ण्5 त्र 15 उ े√1 फ् चित्रा 3ण्7 से यह स्पष्ट है कि जत्र10 े से 18 े के मध्य वेग स्िथर रहता है । जत्र18 े से जत्र20 े के मध्य यह एकसमानरूप से घटता जाता है जबकि जत्र0 े से जत्र10 े के बीच यह बढ़ता जाता है । ध्यान दीजिए कि एकसमान गति मंे हर समय;तात्क्षण्िाकद्ध वेग का वही मान होता है जो औसत वेग का होता है। तात्क्षण्िाक चाल या केवल चाल गतिमान वस्तु के वेग का परिमाण है । उदाहरण के तौर पर, वेग ़ 24ण्0 उ े√1 तथा √24ण्0 उ े√1 दोनों मंे प्रत्येक का परिमाण 24ण्0 उ े√1 होगा। यहाँ यह तथ्य ध्यान मंे रखना है कि जहाँ किसी सीमित समयअंतराल मंे वस्तु की औसत चाल उसके औसत वेग के परिमाण के या तो बराबर होती है या उससे अध्िक होती है वहीं किसीक्षण पर वस्तु की तात्क्षण्िाक चाल उस क्षण पर उसके तात्क्षण्िाक वेग के परिमाण के बराबर होती है । ऐसा क्यों होता है ? 3ण्5 त्वरण सामान्यतः वस्तु की गति की अवध्ि मंे उसके वेग मंे परिवतर्नहोता रहता है । वेग मंे हो रहे इस परिवतर्न को वैफसे व्यक्त करें । वेग मंे हो रहे इस परिवतर्न को समय के सापेक्ष व्यक्त करनाचाहिए या दूरी के सापेक्ष ? यह समस्या गैलीलियो के समय भी थी । गैलीलियो ने पहले सोचा कि वेग मंे हो रहे परिवतर्न की इस दर को दूरी के सापेक्ष व्यक्त किया जा सकता है परंतुजब उन्होंने मुक्त रूप से गिरती हुइर् तथा नत समतल पर गतिमान वस्तुओं की गति का विध्िवत् अध्ययन किया तो उन्होंने पायाकि समय के सापेक्ष वेग परिवतर्न की दर का मान मुक्त रूप सेगिरती हुइर् वस्तुओं के लिए, स्िथर रहता है जबकि दूरी के सापेक्षवस्तु का वेग परिवतर्न स्िथर नहीं रहता वरन जैसे - जैसे गिरती हुइर्वस्तु की दूरी बढ़ती जाती है वैसे - वैसे यह मान घटता जाता है।इस अध्ययन ने त्वरण की वतर्मान धरणा को जन्म दिया जिसकेअनुसार त्वरण को हम समय के सापेक्ष वेग परिवतर्न के रूप मंेपरिभाष्िात करते हैं ।जब किसी वस्तु का वेग समय के सापेक्ष बदलता है तो हमकहते हैं कि उसमंे त्वरण हो रहा है । वेग मंे परिवतर्न तथातत्संबंध्ित समय अंतराल के अनुपात को हम औसत त्वरण कहतेहैं । इसे ं - से प्रदश्िार्त करते हंै: अ दृ अअ21ं ;3ण्4द्धज दृ जज21 यहां ज1ए जक्षणों पर वस्तु का वेग क्रमशः अतथा अ है । यह212एवफांक समय मंे वेग मंे औसत परिवतर्न होता है । त्वरण का √2ैप् मात्राक उ े है ।वेग - समय ;अ.जद्ध ग्रापफ से हम वस्तु का औसत त्वरण निकाल सकते हैं । यह इस प्रकार के ग्रापफ मंे उस सरल रेखा की प्रवणताके बराबर होता है जो बिंदु ;अ ए ज द्ध को बिंदु22;अ1ए जद्ध से जोड़ती है । नीचे के उदाहरण मंे चित्रा 3.7 मंे दशार्इर्1गइर् गति के भ्िान्न - भ्िान्न समय अंतरालों मंे हमने वस्तु का औसत त्वरण निकाला है: 24दृ0 उे दृ1 दृ2ं 2ण्4 उे 0 े . 10 े 10दृ0 े 24दृ24 उे दृ1 दृ2ं 0उे 10 े . 18 े 18दृ10 े 0दृ24 उे दृ1 18 े . 20 े ं दृ12 उ े दृ2 20दृ 18 े चित्रा 3ण्8 चित्रा 3ण्3 मंे दशार्इर् गति के संगत समय के पफलन के रूप मंे वस्तु का त्वरण । तात्क्षण्िाक त्वरण: जिस प्रकार हमने पूवर् मंे तात्क्षण्िाक वेग कीव्याख्या की है, उसी प्रकार हम तात्क्षण्िाक त्वरण को भीपरिभाष्िात करते हैं । वस्तु के तात्क्षण्िाक त्वरण को ं से चिितकरते हैं, अथार्त अ कअं सपउ ;3ण्5द्धज0ज कज अ√ज ग्रापफ मंे किसी क्षण वस्तु का त्वरण उस क्षण वक्रपर खींची गइर् स्पशर् रेखा की प्रवणता के बराबर होता है । चित्रा 3ण्7 मंे दशार्ए गए अ√ज वक्र मंे प्रत्येक क्षण के लिए त्वरण प्राप्तकर सकते हैं । परिणामस्वरूप उपलब्ध् ं√ज वक्र चित्रा 3ण्8 मंे दिखाया गया है । चित्रा से स्पष्ट है कि 0 े से 10 े की अवध्ि मंे त्वरण असमान है । 10 े√18 े के मध्य यहशून्य है जबकि 18 े तथा 20 े के बीच यह स्िथर है तथाइसका मान - 12 उ े√2 है । जब त्वरण एकसमान होता है तोयह स्पष्ट है कि वह उस अवध्ि मंे औसत त्वरण के बराबरहोता है। चूँकि वेग एक सदिश राश्िा है जिसमंे दिशा एवं परिमाण दोनोंहोते हैं अतएव वेग परिवतर्न में इनमें से कोइर् एक अथवा दोनोंनिहित हो सकते हैं । अतः या तो चाल ;परिमाणद्ध में परिवतर्न,दिशा मंे परिवतर्न अथवा इन दोनों मंे परिवतर्न से त्वरण काउद्भव हो सकता है । वेग के समान ही त्वरण भी ध्नात्मक,ट्टणात्मक अथवा शून्य हो सकता है । इसी प्रकार के त्वरणसंबंध्ी स्िथति - समय ग्रापफों को चित्रों 3ण्9 ;ंद्धए 3ण्9 ;इद्ध तथा 3ण्9 ;बद्ध में दशार्या गया है । चित्रों से स्पष्ट है कि ध्नात्मकत्वरण के लिए ग√ज ग्रापफ ऊपर की ओर वित है किन्तुट्टणात्मक त्वरण के लिए ग्रापफ नीचे की ओर वित है । शून्यत्वरण के लिए ग√ज ग्रापफ एक सरल रेखा है । अभ्यास के लिए चित्रा 3ण्3 मंे दशार्इर् गइर् गति के उन तीनों भागों को पहचानिएजिनके लिए त्वरण ़ंए √ं अथवा शून्य है। यद्यपि गतिमान वस्तु का त्वरण समय के साथ - साथ बदलसकता है, परंतु सुविध के लिए इस अध्याय मंे गति संबंध्ी ध्नात्मक )णात्मक ;ंद्ध ;इद्ध ;बद्ध चित्रा 3ण्9 ऐसी गति के लिए स्िथति - समय ग्रापफ जिसके लिए ;ंद्ध त्वरण ध्नात्मक है, ;इद्ध त्वरण ट्टणात्मक है तथा ;बद्ध त्वरण शून्य है । हमारा अध्ययन मात्रा स्िथर त्वरण तक ही सीमित रहेगा । एसी ेस्िथति मंे औसत त्वरण ंका मान गति की अवध्ि मंे स्िथरत्वरण के मान के बराबर होगा । ;ंद्ध ;इद्ध ;बद्ध ;कद्ध चित्रा 3ण्10 स्िथर त्वरण के साथ गतिमान वस्तु का वेग - समय ग्रापफ ;ंद्ध ध्नात्मक त्वरण से ध्नात्मक दिशा मंे गति, ;इद्ध ट्टणात्मक त्वरण से ध्नात्मक दिशा मंे गति, ;बद्ध ट्टणात्मक त्वरण से ट्टणात्मक दिशा मंे गति, ;कद्ध ट्टणात्मक त्वरण के साथ वस्तु की गति जो समय ज1 पर दिशा बदलती है । 0 से ज1 समयावध्ि में यह ध्नात्मक ग की दिशा मंे गति करती है जबकि ज1 व ज2 के मध्य वह विपरीत दिशा मंे गतिमान है । यदि क्षण जत्र0 पर वस्तु का वेग अ॰ तथा ज क्षण पर उसका वेगअअ अ हो, तो त्वरण ं त्रंत्र 0 होगा । ज0 अतएव, अत्र अ॰़ंज ;3ण्6द्ध अब हम यह देखेंगे कि वुफछ सरल उदाहरणों मंे वेग - समय ग्रापफ वैफसा दिखलाइर् देता है । चित्रा 3ण्10 मंे स्िथर त्वरण केलिए चार अलग - अलग स्िथतियों मंे अ √ ज ग्रापफ दिखाए गए हैंः ;ंद्ध कोइर् वस्तु ध्नात्मक दिशा मंे ध्नात्मक त्वरण से गतिमान है ।उदाहरणाथर्, चित्रा 3.3 मंे ज त्र 0 े से ज त्र 10 े के बीच की अवध्ि मंे कार की गति । ;इद्ध कोइर् वस्तु ध्नात्मक दिशा में ट्टणात्मक त्वरण से गतिमान है । उदाहरणाथर्, चित्रा 3ण्3 मंे ज त्र 18 े से ज त्र 20 े के बीच की अवध्ि मंे कार की गति । ;बद्ध कोइर् वस्तु ट्टणात्मक दिशा मंे ट्टणात्मक त्वरण से गतिमानहै । उदाहरणाथर्, चित्रा 3ण्1 मंे व् से ग की ट्टण दिशा मंे त्वरित होती कार । ;कद्ध कोइर् वस्तु पहले ज समय तक ध्नात्मक दिशा मंे चलती है1और पिफर ट्टणात्मक दिशा मंे ट्टणात्मक त्वरण के साथ गतिमान है । उदाहरण के लिए, चित्रा 3ण्1 मंे कार का ज1 समय तक व् से ¯बदु फ तक मंदन के साथ जाना, पिफर,मुड़कर उसी ट्टणात्मक त्वरण के साथ जसमय तक चलते2 रहना है ।किसी गतिमान वस्तु के वेग - समय ग्रापफ का एक महत्त्वपूणर्लक्षण है कि अ√ज ग्रापफ के अंतगर्त आने वाला क्षेत्रापफल वस्तु का विस्थापन व्यक्त करता है। इस कथन की सामान्य उपपिा के लिए अवकल गण्िात की आवश्यकता पड़ती है तथापि सुगमता के लिए एक स्िथर वेग न से गतिमान वस्तु पर विचारकरके इस कथन की सत्यता प्रमाण्िात कर सकते हैं । इसका वेग - समय ग्रापफ चित्रा 3ण्11 मंे दिखाया गया है । चित्रा 3ण्11 अ.ज ग्रापफ के अंतगर्त आने वाला क्षेत्रापफल वस्तु द्वारा निश्िचत समय अंतराल मंे विस्थापन व्यक्त करता है । चित्रा मंे अ.ज वक्र समय अक्ष के समांतर एक सरल रेखा है । जत्र 0 से जत्रज् के मध्य इस रेखा के अंतगर्त आने वाला क्षेत्रापफलउस आयत के क्षेत्रापफल के बराबर है जिसकी ऊँचाइर् न तथा आधर ज् है । अतएव क्षेत्रापफल त्र न ज् त्र नज्ए जो इस समय मंे वस्तु के विस्थापन को व्यक्त करता है । कोइर् क्षेत्रापफल दूरी के बराबर वैफसे हो सकता है ? सोचिए ! दोनों निदेर्शांक अक्षों के अनुदिश जो राश्िायाँ अंकित की गइर् हैं, यदि आप उनकी विमाओंपर ध्यान देंगे तो आपको इस प्रश्न का उत्तर मिल जाएगा। ध्यान दीजिए कि इस अध्याय मंे अनेवफ स्थानों पर खींचे गए ग√जए अ√ज तथा ं√ज ग्रापफों मंे वुफछ बिंदुओं पर तीक्ष्ण मोड़ हैं । इसका आशय यह है कि दिए गए पफलनों का इन बिंदुओं पर अवकलन नहीं निकाला जा सकता । परंतु किसीवास्तविक परिस्िथति में सभी ग्रापफ निष्कोण वक्र होंगे और उनके सभी बिंदुओं पर पफलनों का अवकलन प्राप्त कियाजा सकता है। इसका अभ्िाप्राय है कि वेग तथा त्वरण किसी क्षणसहसा नहीं बदल सकते। परिवतर्न सदैव सतत होता है। 3ण्6 एकसमान त्वरण से गतिमान वस्तु का शु(गतिकीसंबंध्ी समीकरण अब हम एकसमान त्वरण त्र्ं» से गतिमान वस्तु के लिए वुफछगण्िातीय समीकरण व्युत्पन्न कर सकते हैं जो पाँचों राश्िायों को किसी प्रकार एक दूसरे से संबंध्ित करते हैं । ये राश्िायाँ हैंःविस्थापन ;गद्धए लिया गया समय ;जद्धए ज त्र 0 समय पर वस्तु का प्रारंभ्िाक वेग ;अद्ध, समय ज बीत जाने पर अंतिम वेग ;अद्धए तथादत्वरण ;ंद्ध । हम पहले ही अ और अ के मध्य एक समीकरणद;3ण्6द्ध प्राप्त कर चुके हैं जिसमंे एकसमान त्वरण ं तथा समय ज निहित हैं । यह समीकरण है: अ त्र अद ़ ंज ;3ण्6द्ध इस समीकरण को चित्रा 3ण्12 मंे ग्रापफ के रूप मंे निरूपित किया गया है । चित्रा 3ण्12 एकसमान त्वरण से गतिमान वस्तु के लिए अ.ज वक्र के नीचे का क्षेत्रापफल । इस वक्र के अंतगर्त आने वाला क्षेत्रापफल रू 0 से ज समय के बीच का क्षेत्रापफल त्र त्रिाभुज ।ठब् का क्षेत्रापफल ़ आयत व्।ब्क् का क्षेत्रापफल 1 त्र ;अ√अध्द्ध ज ़ अध् ज2 जैसे कि पहले स्पष्ट किया जा चुका है, अ.ज ग्रापफ के अंतगर्त आने वाला क्षेत्रापफल वस्तु का विस्थापन होता है। अतः वस्तु का विस्थापन ग होगाः 1 ग त्र ;अ√अध्द्ध ज ़ अध् ज ;3ण्7द्ध2 परंतु अ√अध् त्र ंज 1अतः ग त्र ंज2 ़ अ0 ज2 अथवा ग त्र अध्ज ़ 1 ंज2 ;3ण्8द्ध2 समीकरण ;3ण्7द्ध को हम निम्न प्रकार भी लिख सकते हैंअ़अध् ग त्र ज2- त्र अण्ज ;3ण्9ंद्ध अअ अ 0 ;मात्रा स्िथर त्वरण के लिएद्ध2 ;3ण्9इद्ध समीकरण ;3ण्9ंद्ध तथा ;3ण्9इद्ध का अभ्िाप्राय है कि वस्तु का विस्थापन ग माध्य वेग - अ से होता है जो प्रारंभ्िाक एवं अंतिम वेगों के समांतर माध्य के बराबर होता है । समीकरण ;3ण्6द्ध से ज त्र ;अ√अध्द्धध्ं । यह मान समीकरण ;3ण्9ंद्ध में रखने पर 22अअअअ अअ 00 0गअज ण् 2 ं 2ं 22अअ 02ंग ;3ण्10द्ध यदि हम समीकरण ;3ण्6द्ध से ज का मान समीकरण ;3ण्8द्ध में रख दें तो भी उपरोक्त समीकरण को प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रकार पांचों राश्िायों अध़्अएृ़ेतथा गके बीच संबंध् स्थापितकरनेवाले हमें तीन महत्त्वपूणर् समीकरण प्राप्त हुए - अअ ंज012गअज ंज02 22 अअ 02ंग ;3ण्11ंद्ध ये सभी एकसमान त्वरित सरल रेखीय गति के शु(गतिक समीकरण हैं । व्यंजक ;3ण्11ंद्ध में जो समीकरण दिए गए हैं, उसकीव्युत्पत्ित के लिए हमने माना है कि क्षण ज त्र 0 पर वस्तु कीस्िथति 0 है ;अथार्त् ग त्र 0द्ध । परंतु यदि हम यह मान लें किक्षण ज त्र 0 पर वस्तु की स्िथति शून्य न हो, वरन् अशून्य यानी ग हो तो समीकरण ;3ण्11ंद्ध और व्यापक समीकरण मंे0रूपांतरित हो जाएगी ;यदि हम ग के स्थान पर ग√ग लिखेंद्धः0अअ ंज0गग अज 1 ंज2 ;3ण्11इद्ध0 02 2 22; ;3ण्11बद्धअअ 0 ंगग 0द्ध ऽ उदाहरण 3ण्3 कलन - विध्ि का उपयोग कर एकसमान त्वरण के लिए शु(गतिक समीकरण प्राप्त कीजिए। हल परिभाषा से कअ ं कजकअ त्र ं कज दोनों पक्षों के समाकलन से अज कअ कंज अ00 ज ं 0कज ;ं अचर हैद्ध दृत्र जअअ ं0 अअ ं़ जत्र 0कगपुनः अ कज कग त्र अ कज दोनों पक्षों के समाकलन से गज कग अजक ग00 ज अंकजज 00 गग अ12दृ0 त्र 0ज़ंज 2 12़ग त्र ग अज़ ंज0 02 हम लिख सकते हैं: कअकक अअग क ंअ कजकक गगज क अथवा, अ कअत्र ं कग दोनों पक्षों के समाकलन से अग क ंकअअ ग अग00 2दृ 2अअ ंगग 20 त्र; दृ0द्ध 2त्र 2़ ं; दृ द्धअअ 02 गग 0 इस विध्ि का लाभ यह है कि इसका प्रयोग असमान त्वरण वाले गति के लिए भी कर सकते हैं।अब हम उपरोक्त समीकरणों का उपयोग वुफछ महत्त्वपूणर् उदाहरणों मंे करेंगे । ऽ उदाहरण 3ण्4 किसी बहुमंजिले भवन की ऊपरी छत से कोइर् गेंद 20 उ े√1 के वेग से ऊपर की ओर ऊध्वार्ध्र दिशा मंे पेंफकी गइर् है । जिस बिंदु से गेंद पेंफकी गइर्है ध्रती से उसकी ऊँचाइर् 25ण्0 उ है । ;ंद्ध गेंद कितनी ऊपर जाएगी ?, तथा ;इद्ध गेंद ध्रती से टकराने के पहले कितना समय लेगी? ह त्र 10 उ े√2 । हल ;ंद्ध ल √ अक्ष को चित्रा 3ण्13 मंे दिखाए गए अनुसारऊध्वार्ध्र दिशा मंे ऊपर की ओर इस प्रकार चुनते हैं कि अक्ष का शून्य बिंदु ध्रती पर हो । अब, अ त्र ़ 20 उ े√1एव ं त्र √ ह त्र √10 उ े√2ए अ त्र 0 उ े√1 यदि पेंफके गए बिंदु से गेंद ल ऊँचाइर् तक जाती है तो समीकरण 2 2अत्र अ ़ 2ं;ल √ लद्ध से हमें निम्नलिख्िात परिणाम मिलेगा - 000 त्र ;20द्ध2 ़ 2;√10द्ध;ल √ लद्ध, हल करने पर,0∴ ल √ ल0 त्र 20 उ ;इद्ध इस खण्ड का उत्तर हम दो प्रकार से प्राप्त कर सकते हैं । इन दोनों विध्ियों को ध्यानपूवर्क समझें । चित्रा 3ण्13 पहली विध्ि: इसमंे, हम गेंद के मागर् को दो भागों मंे विभाजितकरते हैं: ऊपर की ओर गति ;। से ठद्ध तथा नीचे की ओर गति ;ठ से ब्द्ध तथा संगत समय ज व ज निकाल लेते हैं । क्योंकि ठ 12 पर वेग शून्य है, इसलिए: अ त्रअ ़ ंज00 त्र20 √ 10 ज1 या ज त्र2 े 1 इस समय मंे गेंद बिंदु । से ठ पर पहुंचती है । ठ अथार्त अध्िकतम ऊँचाइर् से गेंद गुरुत्वजनित त्वरण से मुक्त रूप से नीचे की ओर गिरती है । क्योंकि गेंद ल की ट्टणात्मक दिशा के अनुदिश चलती है, इसलिए निम्नलिख्िात समीकरण का उपयोग करके हम ज का मान निकाल लेते हैं - 212ललअज ंज0 02 हमें लत्र 45 उ दिया है तथा ल त्र 0ए अ त्र 0ए ं त्र √ह त्र 0 0√10 उ े√2 ∴ 0 त्र 45 ़;1ध्2द्ध ;√10द्ध ज 2 2 अतः ज2 त्र 3 े इसलिए ध्रती पर टकराने के पहले गेंद द्वारा लिया गया वुफल समय ज ़ जत्र 2 े ़ 3 ेत्र5े होगा ।12 दूसरी विध्ि: मूल बिंदु के सापेक्ष गेंद के प्रारंभ्िाक तथा अंतिम स्िथतियों के निदेर्शांकों को निम्नलिख्िात समीकरण मंे उपयोग करके हम गेंद द्वारा लिए गए वुफल समय की गणना कर सकते हैं: लल अज 1 ंज2 002 ल त्र 0 उए ल0त्र 25 उएअ0 त्र 20 उ े√1ए ं त्र √10 उ े√2ए ज त्र घ् 0 त्र 25 ़ 20 ज ़ ;1ध्2द्ध ;√10द्धज2 या 5ज2√ 20ज √ 25 त्र 0 ज के लिए यदि इस द्विघाती समीकरण को हल करें, तो ज त्र 5 े ध्यान दीजिए कि दूसरी विध्ि पहली से श्रेष्ठ है क्योंकि इसमें हमें गति के पथ की चिंता नहीं करनी है क्योंकि वस्तु स्िथर त्वरण से गतिमान है । फ् ऽ उदाहरण 3ण्5 मुक्त पतन: स्वतंत्रातापूवर्क नीचे की ओर गिरती हुइर् वस्तु की गति का वणर्न कीजिए । वायुजनित प्रतिरोध् की उपेक्षा की जा सकती है । हल यदि ध्रती की सतह से थोड़ी ऊंचाइर् पर से कोइर् वस्तु छोड़ दी जाए तो वह पृथ्वी की ओर गुरुत्व बल के कारण त्वरित होगी। गुरुत्वजनित त्वरण को हम ह से व्यक्त करते हैं । यदि वस्तु पर वायु के प्रतिरोध् को हम नगण्य मानें तो हम कहेंगे कि वस्तु का पतन मुक्त रूप से हो रहा है । यदि गिरती हुइर् वस्तु द्वारा चली गइर् दूरी पृथ्वी की त्रिाज्या की तुलना मंे बहुत कम है, तो हम ह के मान को स्िथर अथार्त 9ण्8 उ े√2 ले सकते हैं। इस प्रकार मुक्त पतन एकसमान त्वरण वाली गति का एक उदाहरण है ।हम यह मानेंगे कि वस्तु की गति - ल दिशा मंे है, क्योंकिऊपर की दिशा को हम ध्नात्मक मानते हैं । गुरुत्वीय त्वरण की दिशा सदैव नीचे की ओर होती है, इसलिए इसे हम ट्टणात्मक दिशा मंे लेेते हैं । अतएव, ं त्र √ह त्र √ 9ण्8 उ े√2 वस्तु को ल त्र 0 स्िथति मंे विरामावस्था से गिराते हैं । इसलिए अ त्र0 और वस्तु के लिए गति संबंध्ी ;3ण्11ंद्ध में दिए गए0 ;इद्ध चित्रा 3ण्14 मुक्त पतन में वस्तु की गति । ;ंद्ध समय के अनुरूप वस्तु के त्वरण मंे परिवतर्न, ;इद्ध समय के अनुरूप वस्तु के वेग मंे परिवतर्न, ;बद्ध समय के अनुरूप वस्तु की स्िथति मंे परिवतर्न । समीकरण निम्नलिख्िात प्रकार से व्यक्त किए जा सकते हैं - अ त्र 0 √ ह ज त्र √9ण्8 ज उ े√1 ल त्र 0 √ ) ह ज2 त्र √4ण्9 ज 2उ अ2 त्र 0 √ 2 ह ल त्र √19ण्6 ल उ2 े√2 ये समीकरण वस्तु के वेग, और उसके द्वारा चली गइर् दूरी को समय के पफलन के रूप मंे तथा दूरी के सापेक्ष उसके वेग मंे परिवतर्न को व्यक्त करते हैं । समय के सापेक्ष त्वरण, वेग तथा दूरी के परिवतर्न को चित्रा 3ण्14;ंद्धए ;इद्ध तथा ;बद्ध में दिखलाया गया है । फ् ऽ उदाहरण 3ण्6 गैलीलियो का विषम अंक संबंध्ित नियम: इस नियम के अनुसार ‘‘विरामावस्था से गिरती हुइर् किसी वस्तु द्वारा समान समय अंतरालों मंे चली गइर् दूरियाँ एक दूसरे से उसी अनुपात मंे होती हैं जिस अनुपात मंे एक से प्रारंभ होने वाले विषम अंक ख्अथार्त 1ः 3ः 5ः 7एण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्,»»। इस कथन को सि( कीजिए । हल हम विरामावस्था से गिरती हुइर् किसी वस्तु के समय अंतराल को बहुत - से समान समय अंतरालों τ मंे विभक्त कर लेते हैं तथा क्रमशः इन समय अंतरालों मंे वस्तु द्वारा चली गइर् दूरी निकालते जाते हैं । इस स्िथति मंे वस्तु का प्रारंभ्िाक वेग शून्य है, अतः 12 ल हज 2 इस समीकरण की सहायता से हम भ्िान्न - भ्िान्न समय अंतरालों 0ए τए 2τ ए 3τ ए ण्ण्ण्ण्ण्ण् में वस्तु की स्िथतियों की गणना कर सकते हैं जिन्हें सारणी 3.2 के दूसरे काॅलम मंे दिखाया है । यदि प्रथम समय अंतराल τ पर वस्तु का स्िथति निदेर्शांक ल लें ;ल00 त्र ;√1ध्2द्धहτ2द्ध तो आगे के समय अंतरालों के बाद वस्तु की स्िथतियों को ल के मात्राक मंे काॅलम तीन मंे दिए गए तरीके0से व्यक्त कर सकते हैं । क्रमिक समय अंतरालों ;प्रत्येक τद्ध में चली गइर् दूरियों को काॅलम चार मंे व्यक्त किया गया है । स्पष्ट है कि क्रमशः समय अंतरालों मंे वस्तु द्वारा चली गइर् दूरियाँ 1रू3रू5रू7रू9रू11ण्ण्ण्ण्ण्ण् के सरल अनुपात में हैं जैसा कि अंतिम काॅलम मंे दिखाया गया है । इस नियम को सवर्प्रथम गैलीलियो गैलिली ;1564.1642द्ध ने प्रतिपादित किया था जिन्होंने मुक्त रूप से गिरती हुइर् वस्तु का पहली बार विध्िवत परिमाणात्मक अध्ययन किया था । सारिणी 3ण्2 0 0 0 τ œ;1ध्2द्धहτ2 लल1 व व 2τ œ4;1ध्2द्धहτ2 4ल3ल3 व व 3τ œ9;1ध्2द्धहτ2 9ल5ल5 व व 4τ œ16;1ध्2द्धहτ2 16ल7ल7 व व 5τ œ25;1ध्2द्धहτ2 25ल9ल9 व व 6τ œ36;1ध्2द्धहτ2 36लव ऽ उदाहरण 3ण्7 वाहनों की अवरोध्न दूरी: अवरोध्न दूरी से हमारा अभ्िाप्राय उस दूरी से है जो गतिमान वस्तु ब्रेक लगाने के कारण रुकने से पहले चल चुकी होती है । सड़क पर गतिमान वाहनों की सुरक्षा के संबंध् मंे यह एकमहत्त्वपूणर् कारक है । यह दूरी वाहन के प्रारंभ्िाक वेग ;अवद्ध तथा उसके ब्रेक की क्षमता या ब्रेक लगाए जाने के परिणामस्वरूप वाहन मंे उत्पन्न मंदन √ं पर निभर्र करती है। किसी वाहन की अवरोध्न दूरी के लिए अ तथा ं वके पदों मंे व्यंजक निकालिए । हल मान लीजिए कि वाहन रुकने के पूवर् क दूरी चल चुकाेहै । गति संबंध्ी समीकरण अ2 त्र अ 02 ़ 2ंग में यदि अंतिम वेग अ त्र 0 तो अवरोध्न दूरी 2दृअ क 0 े 2ं होगी। अतः अवरोध्न दूरी वाहन के प्रारंभ्िाक वेग के वगर् के समानुपाती होती है । यदि प्रारंभ्िाक वेग को दूना कर दिया जाए तो उसी मंदन के लिए अवरोध्न दूरी चार गुनी हो जाएगी। कार के किसी विश्िाष्ट माॅडल के लिए विभ्िान्न वेगों 11ए 15ए 20 तथा 25 उे√1 के संगत अवरोध्न दूरियाँ क्रमशः 10 उए 20उए 34 उ तथा 50 उ पाइर् गइर् हैं जो उपरोक्त समीकरण से प्राप्त मानों के लगभग संगत हैं । वुफछ क्षेत्रों, जैसे किसी विद्यालय के निकट वाहनों की चालकी सीमा के निधर्रण मंे अवरोध्न दूरी का ज्ञान एक महत्त्वपूणर् कारक होता है । फ् 11ल11 फ्व ऽ उदाहरण 3ण्8 प्रतििया काल: कभी - कभी हमारेसामने ऐसी परिस्िथति पैदा हो जाती है कि हमसे तत्क्षणकायर्वाही की अपेक्षा की जाती है विंफतु अनुिया व्यक्तकरने मंे हमसे वुफछ समय लग जाता है । प्रतििया कालकिसी व्यक्ित को कोइर् घटनाक्रम देखने मंे, उसके विषयमंे सोचने मंे तथा कायर्वाही करने मंे लगने वाला समय है ।उदाहरणस्वरूप, मान लीजिए कि कोइर् व्यक्ित सड़क परकार चला रहा है और अचानक रास्ते मंे एक लड़का सामनेआ जाता है तो कार मंे तेजी से ब्रेक लगाने के पहलेव्यक्ित को जो समय लग जाता है, उसे प्रतििया कालकहेंगे । प्रतििया काल परिस्िथति की जटिलता एवंव्यक्ित विशेष पर निभर्र करता है । आप स्वयं का प्रतििया काल एक साधरण प्रयोगद्वारा माप सकते हैं । आप अपने मित्रा को एक रूलर देंऔर उससे कहें कि वह आपके हाथ के अंगूठे और तजर्नीके बीच की खाली जगह से रूलर ऊध्वार्ध्र दिशा मंे गिरादे ;चित्रा 3ण्15द्ध । ज्योंही रूलर को छोड़ा जाए आप उसेपकड़ लें । इन दोनों घटनाओं ;रूलर को छोड़ने तथा आपकेद्वारा पकड़नेद्ध के बीच लगे समय ज तथा रूलर द्वारा चलीत गइर् दूरी क को नाप लें । किसी विशेष उदाहरण मंे क त्र 21ण्0 बउ है तो प्रतििया काल की गणना कीजिए । हल रूलर मुक्त रूप से गिरता है, अतः अ0 त्र 0ए ं त्र √ ह त्र √9ण्8 उे√2 प्रतििया काल ज तथा तय की गइर् दूरी ;कद्ध मंे त संबंध् है, 1क हज2 2त 2क ेया ज त ह चित्रा 3ण्15 प्रतििया काल का मापन । यदि क त्र 21ण्0 बउ और ह त्र 9ण्8 उे√2 है, तो फ् 2×0ण्21ज े 0ण्2 े त 9ण्8 3ण्7 आपेक्ष्िाक वेग आपको रेलगाड़ी मंे यात्रा करने तथा यात्रा के दौरान यह देखने का अवसर मिला होगा कि एक दूसरी रेलगाड़ी जो आपकी ही दिशा मंे गतिमान है, आपसे आगे निकल जाती है । क्योंकि यह रेलगाड़ी आपसे आगे निकल जाती है इसलिए यह आपकी रेलगाड़ी से अध्िक तीव्र गति से चल रही है । परंतु यह आपको उस व्यक्ित की अपेक्षा ध्ीमी चलती दिखाइर् दे रही होगी, जो ध्रती पर खड़ा होकर दोनों रेलगाडि़यों को देख रहा है । यदि ध्रती के सापेक्ष दोनों रेलगाडि़यों का वेग समान है तो आपको ऐसा लगेगा कि दूसरी गाड़ी बिलवुफल भी नहीं चल रही है । इन अनुभवों को समझने के लिए अब हम आपेक्ष्िाक वेग की संकल्पना को प्रस्तुत करते हैं । ऐसी दो वस्तुओं । व ठ पर विचार कीजिए जो एक - विमा ;मान लीजिए कि ग - अक्षद्ध के अनुदिश औसत वेगों अ तथा अ ।ठ से गतिमान हैं । ;जब तक विशेष रूप से उल्लेेख्िात न हो इस अध्याय मंे वेगों को ध्रती के सापेक्ष व्यक्त किया गया हैद्ध । यदि जत्र0 क्षण पर वस्तु । व ठ की स्िथतियाँ क्रमशः ग;0द्ध तथा।ग;0द्ध हों, तो किसी अन्य क्षण ज पर ये स्िथतियाँ निम्नवत होंगीः ठग ;जद्ध त्र ग ;0द्ध ़ अज ;3ण्12ंद्ध।।। गठ;जद्ध त्र गठ;0द्ध ़ अठज ;3ण्12इद्ध वस्तु । तथा वस्तु ठ के मध्य विस्थापन गठ।;जद्ध त्र गठ;जद्ध √ ग।;जद्ध त्र ख्गठ;0द्ध √ ग।;0द्ध, ़ ;अठ√अ।द्धज ;3ण्13द्ध होगा । समीकरण ;3ण्13द्ध की हम आसानी से व्याख्या कर सकते हैं । इस समीकरण से यह मालूम पड़ता है कि जब वस्तु । से देखते हैं तो वस्तु ठ का वेग अ√अहोता है क्योंकि । से ठ तकठ। विस्थापन एकांक समय मंे अ√अकी दर से अनवरत बदलताठ। जाता है । अतः हम यह कहते हैं कि वस्तु ठ का वेग वस्तु । के सापेक्ष अ√अहोता हैःठ। अ ठ। त्र अ ठ √अ । ;3ण्14ंद्ध इसी प्रकार वस्तु । का वेग वस्तु ठ के सापेक्ष अ ।ठ त्र अ । √अ ठ ;3ण्14इद्ध होगा । इससे यह निकलता है कि, अ ठ। त्र √अ ।ठ ;3ण्14बद्ध चित्रा 3ण्16 समान वेग से गतिमान वस्तुओं । व ठ के लिए स्िथति - समय ग्रापफ । अब हम वुफछ विशेष परिस्िथतियों पर विचार करेंगे: ;ंद्ध यदि अ त्र अ ए अ √ अ त्र 0ए तो समीकरण ;3ण्13द्ध से ठ ।ठ।ग ;जद्ध√ग ;जद्ध त्र ग ;0द्ध √ ग ;0द्ध । इसका आशय यह है कि दोनोंठ।ठ।वस्तुएँ एक दूसरे से सदैव स्िथर दूरी ;ग ;0द्ध √ ग ;0द्धद्ध पर हैं औरठ।उनके स्िथति - समय ग्रापफ परस्पर समांतर सरल रेखाएँ होती हैं,जैसा चित्रा 3ण्16 से दशार्या गया है । इस उदाहरण मंे आपेक्ष्िाक वेग अ या अ शून्य है ।।ठठ।;इद्ध यदि अ। झ अठए अ √ अ। )णात्मक है । एक वस्तु के ग्रापफठका ढाल दूसरी वस्तु के ग्रापफ के ढाल की अपेक्षा अध्िक है । दोनों ग्रापफ एक उभयनिष्ठ बिंदु पर मिलते हैं । उदाहरण के तौरपर यदि अ त्र 20 उ े√1 एवं ग ;0द्ध त्र 10 उय तथा अ त्र ।।ठ10 उ े.1 और ग;0द्ध त्र 40 उ हों तो जिस क्षण पर दोनों वस्तुठएक दूसरे से मिलती हैं वह ज त्र 3 े होगा ;चित्रा 3.17द्ध । इस क्षण वे दोनों वस्तुएँ ग।;जद्ध त्र ग;जद्ध त्र 70 उपर होंगी । इस प्रकारठइस क्षण पर वस्तु । वस्तुठ से आगे निकल जाएगी । इस उदाहरण में अठ। त्र 10उ े√1 √ 20 उ े√1 त्र √10 उ े√1 त्र √अ।ठ चित्रा 3ण्17 असमान वेगों से गतिमान वस्तुओं के स्िथति - समय ग्रापफ जिसमें मिलने का समय दशार्या गया है । ;बद्ध मान लीजिए कि अव अ विपरीत चिह्नों के हैं ।।ठउदाहरणस्वरूप, उपरोक्त उदाहरण में यदि वस्तु । स्िथति ग;0द्धत्र10 उ से 20 उ े√1 के वेग से तथा वस्तु ठ स्िथतिग;0द्ध। ठत्र 40 उ से √10 उ े√1 वेग से चलना प्रारंभ करती हैं तो वे जत्र1 े ;चित्रा 3ण्18द्ध पर मिलती हैं । । के सापेक्ष ठ का वेग, चित्रा 3ण्18 परस्पर विपरीत दिशाओं में गतिमान दो वस्तुओं केस्िथति - समय ग्रापफ जिसमें दोनों के मिलने का समयदशार्या गया है । अ त्र ख्√10√;20द्ध, उ े√1 त्र √30 उ े√1त्र √अहोगा । इसठ। ।ठ उदाहरण में, अ या अका परिमाण ;त्र30 उ े√1द्ध वस्तु । याठ।।ठ ठ के वेग के परिमाण से अध्िक है । यदि विचाराध्ीन वस्तुएंँ दो रेलगाडि़याँ हैं तो उस व्यक्ित के लिए जो किसी एक रेलगाड़ी में बैठा है, दूसरी रेलगाड़ी बहुत तेज चलती हुइर् प्रतीत होती है। ध्यान दीजिए कि समीकरण ;3ण्14द्ध तब भी सही होगी जब अऔर अतात्क्षण्िाक वेगों को व्यक्त करते हैं ।।ठ उदाहरण 3ण्9 दो समांतर रेल पटरियाँ उत्तर - दक्ष्िाण दिशा में हैं । एक रेलगाड़ी । उत्तर दिशा में 54 ाउध्ी की चाल से गतिमान है तथा दूसरी रेलगाड़ी ठ दक्ष्िाण दिशा में 90 ाउध्ी की चाल से चल रही है । ;ंद्ध । के सापेक्ष ठ का आपेक्ष्िाक वेग निकालिए, ;इद्ध ठ के सापेक्ष पृथ्वी का आपेक्ष्िाक वेग निकालिए, ;बद्ध रेलगाड़ी । की छत पर गति की विपरीत दिशा में ;रेलगाड़ी । के सापेक्ष 18 ाउध्ी√1 के वेग सेद्ध दौड़ते हुए उस बंदर के वेग की गणना कीजिए जो पृथ्वी पर खड़े व्यक्ित द्वारा देखा जा रहा है । हल ;ंद्ध ग .अक्ष की ध्नात्मक दिशा को दक्ष्िाण से उत्तर की ओर चुनिए । तब, अ त्र ़54 ाउध्ी√1 त्र 15 उ े√1 ।अठ त्र √90 ाउध्ी√1 त्र √25 उ े√1 । के सापेक्ष ठ का आपेक्ष्िाक वेग अ √अ त्र √40 उ े.1 होगा । ठ ।इसका अभ्िाप्राय यह है कि रेलगाड़ी ठ रेलगाड़ी । के सापेक्ष उत्तर से दक्ष्िाण दिशा में 40 उ े√1 की गति से चलती प्रतीत होगी । ;इद्ध ठ के सापेक्ष पृथ्वी का आपेक्ष्िाक वेग त्र 0√ अ त्र ठ25 उ े√1 ;बद्ध मान लीजिए कि पृथ्वी के सापेक्ष बंदर का वेग अ है । इसलिएड। के सापेक्ष बंदर का वेग अत्र अ√अ त्र √18ाउ ी√1 ड। ड।त्र √5 उ े√1 । पफलस्वरूप, अ त्र ;15√5द्ध उ े√1 त्र 10उ े√1 फ्डसारांश 1ण् यदि किसी वस्तु की स्िथति समय के साथ बदलती है तो हम कहते हैं कि वस्तु गतिमान है। एक सरल रैख्िाक गति में वस्तु की स्िथति को सुगमता के दृष्िटकोण से चुने गए किसी मूल बिंदु के सापेक्ष निदिर्ष्ट किया जा सकता है । मूल बिंदुके दायीं ओर की स्िथतियों को धनात्मक तथा बायीं ओर की स्िथतियों को ट्टणात्मक कहा जाता है । 2ण् किसी वस्तु द्वारा चली गइर् दूरी की लंबाइर् को पथ - लंबाइर् के रूप में परिभाष्िात करते हैं । 3ण् वस्तु की स्िथति में परिवतर्न को हम विस्थापन कहते हैं और इसे Δग से निरूपित करते हैंऋ Δग त्र ग2 √ ग1 ग और गवस्तु की क्रमशः प्रारंभ्िाक तथा अंतिम स्िथतियाँ हैं ।12 पथ - लंबाइर् उन्हीं दो बिंदुओं के बीच विस्थापन के परिणाम के बराबर या उससे अिाक हो सकती है । 4ण् जब कोइर् वस्तु समान समय अंतराल में समान दूरियाँ तय करती है तो ऐसी गति को एकसमान गति कहते हैं । यदि ऐसा नहीं है तो गति असमान होती है । 5ण् विस्थापन की अविा के समय अंतराल द्वारा विस्थापन को विभाजित करने पर जो राश्िा प्राप्त होती है, उसे औसत वेग कहते हैं तथा इसे अ द्वारा चिित करते हैंऋ Δग अ त्र Δज ग √ ज ग्रापफ में किसी दिए गए अंतराल की अविा में औसत वेग उस सरल रेखा की प्रवणता है जो समय अंतराल की प्रांरभ्िाक एवं अंतिम स्िथतियों को जोड़ती है । 6ण् वस्तु की यात्रा की अविा में चली गइर् वुफल पथ - लंबाइर् एवं इसमें लगे समय अंतराल अनुपात को औसत चाल कहते हैं। किसी वस्तु की औसत चाल किसी दिए गए समय अन्तराल में उसके औसत वेेग के परिणाम के बराबर अथवा अिाक होती है । 7ण् जब समय अतंराल Δज अत्यल्प हो तो वस्तु के औसत वेग के सीमान्त मान को तात्क्षण्िाक वेग या केवल वेग कहते हैं: ग कग अ सपउ अ सपउ ज0 ज0 कजज किसी क्षण वस्तु का वेग उस क्षण स्थान समय - ग्रापफ की प्रवणता के बराबर होता है । 8ण् वस्तु के वेग में परिवतर्न को संगत समय अंतराल से विभाजित करने पर जो राश्िा प्राप्त होती है, उसे औसत त्वरण कहते हैं: अ ं ज 9ण् जब समय अंतराल अत्यल्प Δज→0 हो तो, वस्तु के औसत त्वरण के सीमान्त मान को तात्क्षण्िाक त्वरण या केवल त्वरण कहते हैं: अ कअ ं सपउ ं सपउ ज0 ज0 ज कज किसी क्षण वस्तु का त्वरण उस क्षण वेग - समय ग्रापफ की प्रवणता के बराबर होता है । एकसमान गति के लिए त्वरण शून्य होता है तथा ग . ज ग्रापफ समय - अक्ष पर आनत एक सरल रेखा होती है । इसी प्रकार एकसमान गति के लिए अ . ज ग्रापफ समय - अक्ष के समांतर सरल रेखा होती है । एकसमान त्वरण के लिए ग . ज ग्रापफ परवलय होता है जबकि अ . ज ग्रापफ समय - अक्ष के आनत एक सरल रेखा होती है । 10ण् किन्हीं दो क्षणों जतथा ज के मध्य खींचे गए वेग - समय वक्र के अंतगर्त आने वाला क्षेत्रापफल वस्तु के विस्थापन के बराबर12होता है । 11ण् एकसमान त्वरण से गतिमान वस्तु के लिए वुफछ सामान्य समीकरणों का एक समूह होता है जिससे पाँच राश्िायाँ यथा विस्थापन ग, तत्संबंध्ित समय जए प्रारंभ्िाक वेग अ ए अंतिम वेग अ तथा त्वरण ं एक दूसरे से संबंध्ित होते हैं । इन समीकरणों कोववस्तु के शु(गतिक समीकरणों के नाम से जाना जाता है: अ त्र अ ़ ंज01 2 ग त्र अज ़ ंज0 2 22 अ त्र अ ़ 2ंग 0 इन समीकरणों में क्षण ज त्र 0 पर वस्तु की स्िथति ग त्र 0 ली गइर् है । यदि वस्तु ग त्र ग से चलना प्रारंभ करे तो उपयुर्क्तवसमीकरणों में ग के स्थान पर ;ग √ ग द्ध लिखेंगे ।वपथ - लंबाइर् ख्स्, उ विस्थापन Δग ख्स्, उ त्र ग . ग2 1 एक विमा में इसका चिÉ दिशा को इंगित करता है । वेग ख्स्ज्.1, उ े√1 Δगत्र;ंद्ध औसत अ Δज ग कगसपउ ;इद्ध तात्क्षण्िाक अ ज 0 ज कज एक विमा में इसका चिÉ दिशा को इंगित करता है चाल ख्स्ज्√1, उ े√1 पथ - लबंाइर् ;ंद्ध औसत समय अतंराल कग ;इद्ध तात्क्षण्िाक त्र कज त्वरण ख्स्ज्√2, उ े√2 अ;ंद्ध औसत ं ज अ कअसपउ ज 0 ज कज;इद्ध तात्क्षण्िाक ं एक विमा में इसका चिÉ दिशा को इंगित करता है विचारणीय विषय 1ण् सामान्यतया दो बिंदुओं के मध्य किसी वस्तु द्वारा चली गइर् पथ - लंबाइर् विस्थापन के परिमाण के बराबर नहीं होती । विस्थापन छोर के बिंदुओं पर निभर्र करता है जबकि पथ - लंबाइर् ;जैसा नाम से पता चलता हैद्ध वास्तविक पथ पर निभर्र करती है। एक विमा में दोनों राश्िायाँ तभी बराबर होती हंै जब वस्तु गति की अवध्ि में अपनी दिशा नहीं बदलती है । अन्य सभी उदाहरणों में पथ - लंबाइर् विस्थापन के परिमाण से अध्िक होती है । 2ण् उपरोक्त बिंदु 1 के अनुसार किसी दिए गए समय अंतराल के लिए वस्तु की औसत चाल का मान या तो औसत वेग के परिमाण के बराबर होता है या उससे अध्िक होता है । दोनों तभी बराबर होंगे जब पथ - लंबाइर् विस्थापन के परिमाण के बराबर होगी। 3ण् मूल बिंदु तथा किसी अक्ष की ध्नात्मक दिशा का चयन अपनी रुचि का विषय है । आपको सबसे पहले इस चयन काउल्लेख कर देना चाहिए और इसी के बाद राश्िायोंऋ जैसे - विस्थापन, वेग तथा त्वरण के चिÉों का निधर्रण करना चाहिए । 4ण् यदि किसी वस्तु की चाल बढ़ती जा रही है तो त्वरण वेग की दिशा में होगा परंतु यदि चाल घटती जाती है तो त्वरण वेग की विपरीत दिशा में होगा । यह कथन मूल बिंदु तथा अक्ष के चुनाव पर निभर्र नहीं करता । 5ण् त्वरण के चिÉ से हमें यह पता नहीं चलता कि वस्तु की चाल बढ़ रही है या घट रही है । त्वरण का चिÉ ;जैसा कि उपरोक्त बिंदु 3 में बतलाया गया हैद्ध अक्ष के ध्नात्मक दिशा के चयन पर निभर्र करता है । उदाहरण के तौर पर यदि उफपर की ओर उफध्वार्ध्र दिशा को अक्ष की ध्नात्मक दिशा माना जाए तो गुरुत्वजनित त्वरण )णात्मक होगा । यदि कोइर् वस्तुगुेफ कारण नीचेरुत्व व की ओर गिर रही है तो भी वस्तु की चाल बढ़ती जाएगी यद्यपि त्वरण का मान )णात्मक है। वस्तु उफपर की दिशा में पेंफकी जाए तो उसी )णात्मक ;गुरुत्वजनितद्ध त्वरण के कारण वस्तु की चाल में कमी आती जाएगी। 6ण् यदि किसी क्षण वस्तु का वेग शून्य है तो यह आवश्यक नहीं है कि उस क्षण उसका त्वरण भी शून्य हो । कोइर् वस्तु क्षण्िाक रूप से विरामावस्था में हो सकती है तथापि उस क्षण उसका त्वरण शून्य नहीं होगा । उदाहरणस्वरूप, यदि किसी वस्तु को उफपर की ओर पेंफका जाए तो शीषर्स्थ बिंदु पर उसका वेग तोे शून्य होगा परंतु इस अवसर पर उसका त्वरण गुरुत्वजनित त्वरण ही होगा । 7ण् गति संबंध्ी शु(गतिक समीकरणों ¹समीकरण ;3ण्11द्धह् की विभ्िान्न राश्िायाँ बीजगण्िातीय हैं अथार्त वे ध्नात्मक या )णात्मक हो सकती हैं । ये समीकरण सभी परिस्िथतियों ;स्िथर त्वरण वाली एकविमीय गतिद्ध के लिए उपयुक्त होते हैंबशतेर् समीकरणों में विभ्िान्न राश्िायों के मान उपयुक्त चिÉों के साथ रखे जाएँ । 8ण् तात्क्षण्िाक वेग तथा त्वरण की परिभाषाएँ ख्समीकरण ;3ण्3द्ध तथा समीकरण ;3ण्5द्ध, यथाथर् हैं और सदैव सही हैं जबकि शु(गतिक समीकरण ख्समीकरण ;3ण्11द्ध, उन्हीं गतियों के लिए सही है जिनमें गति की अवध्ि में त्वरण का परिमाण और दिशा स्िथर रहते हैं । अभ्यास 3ण्1 नीचे दिए गए गति के कौन से उदाहरणों में वस्तु को लगभग बिंदु वस्तु माना जा सकता है: ;ंद्ध दो स्टेशनों के बीच बिना किसी झटके के चल रही कोइर् रेलगाड़ी । ;इद्ध किसी वृत्तीय पथ पर साइकिल चला रहे किसी व्यक्ित के उफपर बैठा कोइर् बंदर । ;बद्ध जमीन से टकरा कर तेजी से मुड़ने वाली िकेट की कोइर् पिफरकती गंेद । ;कद्ध किसी मेज के किनारे से पिफसल कर गिरा कोइर् बीकर । 3ण्2 दो बच्चे । व ठ अपने विद्यालय व् से लौट कर अपने - अपने घर क्रमशः च् तथा फ को जा रहे हैं । उनके स्िथति - समय ;ग .ज द्ध ग्रापफ चित्रा 3ण्19 में दिखाए गए हैं । नीचे लिखे कोष्ठकों में सही प्रविष्िटयों को चुनिए: ;ंद्ध ठध्। की तुलना में ।ध्ठ विद्यालय से निकट रहता है । ;इद्ध ठध्। की तुलना में ।ध्ठ विद्यालय से पहले चलता है । ;बद्ध ठध्। की तुलना ।ध्ठ तेज चलता है । ;कद्ध । और ठ घर ;एक ही/भ्िान्नद्ध समय पर पहुँचते हैं । ;मद्ध ।ध्ठ सड़क पर ठध्। से ;एक बार/दो बारद्ध आगे हो जाते हैं । 3ण्3 एक महिला अपने घर से प्रातः 9ण्00 बजे 2ण्5 ाउ दूर अपने कायार्लय के लिए सीध्ी सड़क पर 5 ाउ ी√1 चाल से चलती है । वहाँ वह सायं 5ण्00 बजे तक रहती है और 25 ाउ ी√1 की चाल से चल रही किसी आॅटो रिक्शा द्वारा अपने घर लौट आती है । उपयुक्त पैमाना चुनिए तथा उसकी गति का ग .ज ग्रापफ खींचिए । 3ण्4 कोइर् शराबी किसी तंग गली में 5 कदम आगे बढ़ता है और 3 कदम पीछे आता है, उसके बाद पिफर 5 कदम आगे बढ़ता है और 3 कदम पीछे आता है, और इसी तरह वह चलता रहता है । उसका हर कदम 1उ लंबा है और 1े समय लगता है । उसकी गति का ग .ज ग्रापफ खींचिए । ग्रापफ से तथा किसी अन्य विध्ि से यह ज्ञात कीजिए कि वह जहां से चलना प्रारंभ करता है वहाँ से 13 उ दूर किसी गइे में कितने समय पश्चात गिरता है । 3ण्5 कोइर् जेट वायुयान 500 ाउ ी√1 की चाल से चल रहा है और यह जेट यान के सापेक्ष 1500 ाउ ी√1 की चाल से अपने दहन उत्पादों को बाहर निकालता है । जमीन पर खड़े किसी प्रेक्षक के सापेक्ष इन दहन उत्पादों की चाल क्या होगी? 3ण्6 सीध्े राजमागर् पर कोइर् कार 126 ाउ ी√1 की चाल से चल रही है । इसे 200 उ की दूरी पर रोक दिया जाता है । कार के मंदन को एकसमान मानिए और इसका मान निकालिए । कार को रुकने में कितना समय लगा ? 3ण्7 दो रेलगाडि़याँ । व ठ दो समांतर पटरियों पर 72 ाउ ी√1 की एकसमान चाल से एक ही दिशा में चल रही हैं । प्रत्येक गाड़ी 400 उ लंबी है और गाड़ी । गाड़ी ठ से आगे है । ठ का चालक । से आगे निकलना चाहता है तथा 1उ े√2 से इसे त्वरित करता है । यदि 50 े के बाद ठ का गाडर् । के चालक से आगे हो जाता है तो दोनों के बीच आरंभ्िाक दूरी कितनी थी ? 3ण्8 दो - लेन वाली किसी सड़क पर कार । 36 ाउ ी√1 की चाल से चल रही है । एक दूसरे की विपरीत दिशाओं में चलती दो कारें ठ व ब् जिनमें से प्रत्येक की चाल 54 ाउ ी√1 है, कार । तक पहुँचना चाहती हैं । किसी क्षण जब दूरी ।ठ दूरी ।ब् के बराबर है तथा दोनों 1ाउ है, कार ठ का चालक यह निणर्य करता है कि कार ब् के कार । तक पहुँचने के पहले ही वह कार । से आगे निकल जाए । किसी दुघर्टना से बचने के लिए कार ठ का कितना न्यूनतम त्वरण जरूरी है ? 3ण्9 दो नगर । व ठ नियमित बस सेवा द्वारा एक दूसरे से जुड़े हैं और प्रत्येक ज् मिनट के बाद दोनों तरपफ बसें चलती हैं। कोइर् व्यक्ित साइकिल से 20 ाउ ी√1 की चाल से । से ठ की तरपफ जा रहा है और यह नोट करता है कि प्रत्येक 18 मिनट के बाद एक बस उसकी गति की दिशा में तथा प्रत्येक 6 मिनट बाद उसके विपरीत दिशा में गुजरती है । बस सेवाकाल ज् कितना है और बसें सड़क पर किस चाल ;स्िथर मानिएद्ध से चलती हैं ? 3ण्10 कोइर् ख्िालाड़ी एक गेंद को उफपर कीओरआरंभ्िाकचाल 29 उ े√1 से पेंफकता है, ;पद्ध गंेद की उफपर की ओर गति के दौरान त्वरण की दिशा क्या होगी ? ;पपद्ध इसकी गति के उच्चतम बिंदु पर गेंद के वेेग व त्वरण क्या होंगे ? ;पपपद्ध गेंद के उच्चतम बिंदु पर स्थान व समय को ग त्र 0 व ज त्र 0 चुनिए, उफध्वार्ध्र नीचे की ओर की दिशा को ग.अक्ष की ध्नात्मक दिशा मानिए । गेंद की उफपर की व नीचे की ओर गति के दौरान स्िथति, वेग व त्वरण के चिÉ बताइए । ;पअद्ध किस उफँचाइर् तक गेंद उफपर जाती है और कितनी देर के बाद गेंद ख्िालाड़ी के हाथों में आ जाती है ? ख्ह त्र 9ण्8 उ े√2 तथा वायु का प्रतिरोध् नगण्य है ।, 3ण्11 नीचे दिए गए कथनों को ध्यान से पढि़ए और कारण बताते हुए व उदाहरण देते हुए बताइए कि वे सत्य हैं या असत्य, एकविमीय गति में किसी कण की ;ंद्ध किसी क्षण चाल शून्य होने पर भी उसका त्वरण अशून्य हो सकता है । ;इद्ध चाल शून्य होने पर भी उसका वेग अशून्य हो सकता है । ;बद्ध चाल स्िथर हो तो त्वरण अवश्य ही शून्य होना चाहिए । ;कद्ध चाल अवश्य ही बढ़ती रहेगी, यदि उसका त्वरण ध्नात्मक हो । 3ण्12 किसी गेंद को 90 उ की उफँचाइर् से पफशर् पर गिराया जाता है । पफशर् के साथ प्रत्येक टक्कर में गेंद की चाल 1ध्10 कम हो जाती है । इसकी गति का ज त्र 0 से 12 े के बीच चाल - समय ग्रापफ खींचिए । 3ण्13 उदाहरण सहित निम्नलिख्िात के बीच के अंतर को स्पष्ट कीजिए: ;ंद्ध किसी समय अंतराल में विस्थापन के परिमाण ;जिसे कभी - कभी दूरी भी कहा जाता हैद्ध और किसी कण द्वारा उसी अंतराल के दौरान तय किए गए पथ की वुफल लंबाइर् । ;इद्ध किसी समय अंतराल में औसत वेग के परिमाण और उसी अंतराल में औसत चाल ;किसी समय अंतराल में किसी कण की औसत चाल को समय अंतराल द्वारा विभाजित की गइर् वुफल पथ - लंबाइर् के रूप में परिभाष्िात किया जाता हैद्ध । प्रदश्िार्त कीजिए कि ;ंद्ध व ;इद्ध दोनों में ही दूसरी राश्िा पहली से अध्िक या उसके बराबर है । समताका चिÉ कब सत्य होता है ? ;सरलता के लिए केवल एकविमीय गति पर विचार कीजिए ।द्ध 3ण्14 कोइर् व्यक्ित अपने घर से सीध्ी सड़क पर 5 ाउ ी√1 की चाल से 2ण्5 ाउ दूर बाजार तक पैदल चलता है । परंतु बाजार बंद देखकर वह उसी क्षण वापस मुड़ जाता है तथा 7ण्5 ाउ ी√1 की चाल से घर लौट आता है । समय अंतराल ;पद्ध 0 . 30 मिनट, ;पपद्ध 0 . 50 मिनट, ;पपपद्ध 0 . 40 मिनट की अवध्ि में उस व्यक्ित ;ंद्ध के माध्य वेग का परिमाण, तथा ;इद्ध का माध्य चाल क्या है? ;नोट: आप इस उदाहरण से समझ सकेंगे कि औसत चाल को औसत - वेग के परिमाण के रूप में परिभाष्िात करने की अपेक्षा समय द्वारा विभाजित वुफल पथ - लंबाइर् के रूप में परिभाष्िात करना अध्िक अच्छा क्यों है । आप थक कर घर लौटे उस व्यक्ित को यह बताना नहीं चाहेंगे कि उसकी औसत चाल शून्य थी ।द्ध 3ण्15 हमने अभ्यास 3ण्13 तथा 3ण्14 में औसत चाल व औसत वेग के परिमाण के बीच के अंतर को स्पष्ट किया है । यदि हम तात्क्षण्िाक चाल व वेग के परिमाण पर विचार करते हैं तो इस तरह का अंतर करना आवश्यक नहीं होता । तात्क्षण्िाक चाल हमेशा तात्क्षण्िाक वेग के बराबर होती है । क्यों ? 3ण्16 चित्रा 3ण्20 में ;ंद्ध से ;कद्ध तक के ग्रापफों को ध्यान से देख्िाए और देखकर बताइए कि इनमें से कौन - सा ग्रापफ एकविमीय गति को संभवतः नहीं दशार् सकता । चाल वुफल पथ - लंबाइर् चित्रा 3ण्20 3ण्17 चित्रा 3ण्21 में किसी कण की एकविमीय गति का ग .ज ग्रापफ दिखाया गया है । ग्रापफ से क्या यह कहना ठीक होगा कि यह कण ज ढ 0 के लिए किसी सरल रेखा में और ज झ 0 के लिए किसी परवलीय पथ में गति करता है । यदि नहीं, तो ग्रापफ के संगत किसी उचित भौतिक संदभर् का सुझाव दीजिए । 3ण्18 किसी राजमागर् पर पुलिस की कोइर् गाड़ी 30 ाउध्ी की चाल से चल रही है और यह उसी दिशा में 192 ाउध्ी की चाल से जा रही किसी चोर की कार पर गोली चलाती है। यदि गोली की नाल मुखी चाल 150 उ े.1 है तो चोर की कार को गोली किस चाल के साथ आघात करेगी ? ;नोट: उस चाल को ज्ञात कीजिए जो चोर की कार को हानि पहँुचाने में प्रासंगिक होद्ध । 3ण्19 चित्रा 3ण्22 में दिखाए गए प्रत्येक ग्रापफ के लिए किसी उचित भौतिक स्िथति का सुझाव दीजिए: ;ंद्ध;इद्ध;बद्ध चित्रा 3ण्22 3ण्20 चित्रा 3ण्23 में किसी कण की एकविमीय सरल आवतीर् गति के लिए ग .ज ग्रापफ दिखाया गया है । ;इस गति के बारे में आप अध्याय 14 में पढ़ेंगेद्ध समय ज त्र 0ण्3 ेए 1ण्2 ेए √1ण्2 े पर कण के स्िथति, वेग व त्वरण के चिÉ क्या होंगे ? चित्रा 3ण्23 3ण्21 चित्रा 3ण्24 किसी कण की एकविमीय गति का ग .ज ग्रापफ दशार्ता है । इसमें तीन समान अंतराल दिखाए गए हैं । किस अंतराल में औसत चाल अध्िकतम है और किसमें न्यूनतम है ? प्रत्येक अंतराल के लिए औसत वेग का चिÉ बताइए। 3ण्22 चित्रा 3ण्25 में किसी नियत ;स्िथरद्ध दिशा के अनुदिश चल रहे कण का चाल - समय ग्रापफ दिखाया गया है । इसमें तीन समान समय अंतराल दिखाए गए हैं । किस अंतराल में औसत त्वरण का परिमाण अध्िकतम होगा ? किस अंतराल में औसत चाल अध्िकतम होगी ? ध्नात्मक दिशा को गति की स्िथर दिशा चुनते हुए तीनों अंतरालों में अ तथा ं के चिÉ बताइए । ।ए ठए ब्ए व क् बिंदुओं पर त्वरण क्या होंगे ? चाल चित्रा 3ण्24 चित्रा 3ण्25 अतिरिक्त अभ्यास 3ण्23 कोइर् तीन पहिये वाला स्वूफटर अपनी विरामावस्था से गति प्रारंभ करता है । पिफर 10 े तक किसी सीध्ी सड़क पर 1उ े.2 के एकसमान त्वरण से चलता है । इसके बाद वह एकसमान वेग से चलता है । स्वूफटर द्वारा दवें सेकंड ;द त्र 1ए 2ए 3ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्द्ध में तय की गइर् दूरी को द के सापेेक्ष आलेख्िात कीजिए । आप क्या आशा करते हैं कि त्वरित गति के दौरान यह ग्रापफ कोइर् सरल रेखा या कोइर् परवलय होगा ? 3ण्24 किसी स्िथर लिफ्रट में ;जो उफपर से खुली हैद्ध कोइर् बालक खड़ा है । वह अपने पूरे जोर से एक गेंद उफपर की ओर पेंफकता है जिसकी प्रारंभ्िाक चाल 49 उ े√1 है । उसके हाथों में गेंद के वापिस आने में कितना समय लगेगा ? यदि लिफ्रट उफपर की ओर 5 उ े.1 की एकसमान चाल से गति करना प्रारंभ कर दे और वह बालक पिफर गेंद को अपने पूरे जोर से पेंफकता तो कितनी देर में गेंद उसके हाथों में लौट आएगी ? 3ण्25 क्षैतिज में गतिमान कोइर् लंबा प‘ा ;चित्रा 3ण्26द्ध 4 ाउध्ी की चाल से चल रहा है । एक बालक इस पर ;प‘ेे के सापेक्षद्ध 9 ाउध्ी की चाल से कभी आगे कभी पीछे अपने माता - पिता के बीच दौड़ रहा है । माता व पिता के बीच 50 उ की दूरी है । बाहर किसी स्िथर प्लेटपफामर् पर खड़े एक प्रेक्षक के लिए, निम्नलिख्िात का मान प्राप्त करिए । ;ंद्धप‘े की गति की दिशा में दौड़ रहे बालक की चाल, ;इद्धप‘े की गति की दिशा के विपरीत दौड़ रहे बालक की चाल, ;बद्ध बच्चे द्वारा ;ंद्ध व ;इद्ध में लिया गया समय यदि बालक की गति का प्रेक्षण उसके माता या पिता करें तो कौन - सा उत्तर बदल जाएगा ? चित्रा 3ण्26 3ण्26 किसी 200 उ ऊँची खड़ी च‘ान के किनारे से दो पत्थरों को एक साथ उफपर की ओर 15 उ े√1 तथा 30 उ े√1 की प्रारंभ्िाक चाल से पंेफका जाता है । इसका सत्यापन कीजिए कि नीचे दिखाया गया ग्रापफ ;चित्रा 3ण्27द्ध पहले पत्थर के सापेक्ष दूसरे पत्थर की आपेक्ष्िाक स्िथति का समय के साथ परिवतर्न को प्रदश्िार्त करता है । वायु के प्रतिरोध् को नगण्य मानिए और यह मानिए कि जमीन से टकराने के बाद पत्थर उफपर की ओर उछलते नहीं । मान लिजिए ह त्र 10 उ े√2 । ग्रापफ के रेखीय व वक्रीय भागों के लिए समीकरण लिख्िाए । 3ण्27 किसी निश्िचत दिशा के अनुदिश चल रहे किसी कण का चाल - समय ग्रापफ चित्रा 3ण्28 में दिखाया गया है । कण द्वारा ;ंद्ध ज त्र 0 े से ज त्र 10 ेए ;इद्ध ज त्र 2 े से 6 े के बीच तय की गइर् दूरी ज्ञात कीजिए । चित्रा 3ण्28 ;ंद्ध तथा ;इद्ध में दिए गए अंतरालों की अवध्ि में कण की औसत चाल क्या है ? 3ण्28 एकविमीय गति में किसी कण का वेग - समय ग्रापफ चित्रा 3ण्29 में दिखाया गया है: चित्रा 3ण्29 नीचे दिए सूत्रों में ज से ज तक के समय अंतराल की अवध्ि में कण की गति का वणर्न करने के लिए कौन - से सूत्रा सही12हैं: ;पद्ध ग ;जद्ध त्र ग ;जद्ध ़ अ ;जद्ध;ज√ जद्ध ़ ;1ध्2द्ध ं;ज √ जद्ध2 2 112 121;पपद्ध अ;ज2द्ध त्र अ;ज1द्ध ़ ं;ज2 √ ज1द्ध ;पपपद्ध अ त्र ख्ग;जद्ध √ ग ;जद्ध,ध्;ज √ जद्धंअमतंहम2121;पअद्ध ं त्र ख्अ;जद्ध √ अ ;जद्ध,ध्;ज √ जद्धंअमतंहम2121;अद्ध ग;जद्ध त्र ग;जद्ध ़ अ ;ज √ जद्ध ़ ;1ध्2द्ध ं ;ज √ जद्ध2 21ंअमतंहम21ंअमतंहम21;अपद्ध ग ;जद्ध √ ग ;जद्ध त्र ज.अक्ष तथा दिखाइर् गइर् बिंदुकित रेखा के बीच दशार्ए गए वक्र के अंतगर्त आने वाला क्षेत्रापफल । 21परिश्िाष्ट 3ण्1 कलन के अवयव अवकल गण्िात ‘अवकल गुणांक’ अथवा ‘अवकलज’ की संकल्पना का उपयोग करके हम आसानी से वेग तथा त्वरण को परिभाष्िात करसकते हैं । यद्यपि आप अवकलजों के विषय में विस्तार से गण्िात में अध्ययन करेेंगे, तथापि इस परिश्िाष्ट मंे हम संक्षेप में इससंकल्पना से आपको परिचित कराएँगे, ताकि आपको गति से संब( भौतिक राश्िायों के वणर्न करने में सुविध हो जाए । मान लीजिए हमारे पास कोइर् राश्िा ल है जिसका मान किसी एकल चर ग पर निभर्र करता है, तथा इस राश्िा को एकसमीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है जो ल को ग के किसी विश्िाष्ट पफलन के रूप में परिभाष्िात करती है । इसे इस प्रकारनिरूपित करते हैं: ल त्र ि;गद्ध ;1द्ध इस संबंध् को पफलन ल त्र ;िगद्ध का ग्रापफ खींचकर चित्रा 3ण्30 ;ंद्ध में दशार्ए अनुसार ल तथा ग को कातीर्य निदेर्शांक ;ब्ंतजमेपंद बववतकपदंजमेद्ध मानते हुए स्पष्ट रूप से देख सकते हैं । ;ंद्ध ;इद्ध चित्रा 3.30 वक्र ल त्र ;िगद्ध पर एक बिंदु च् जिसके निदेर्शांक ;गए लद्ध हैं तथा अन्य बिंदु जिसके निदेर्शांक ;ग ़ Δ गए ल ़ Δ लद्ध हैं मान लीजिए । च् तथा फ को मिलाने वाली सरल रेखा के ढाल को इस प्रकार दशार्या जाता है, Δल ;ल ़Δलद्ध− लजंदθत्र त्र ;2द्धΔग Δग अब अगर बिंदु फ को वक्र के अनुदिश बिंदु च् की ओर लाया जाता है । इस प्रिया में Δल तथा Δग घटते जाते हैं तथाΔलशून्य की ओर अग्रसर होते जाते हैं, यद्यपि इनका अनुपातअनिवायर् रूप से लुप्त नहीं होगा । जब Δल→0ए Δग→0 है,Δगतब रेखा च्फ का क्या होगा ? आप यह देख सकते हैं कि यह रेखा चित्रा 3ण्30 ;इद्ध में दशार्ए अनुसार वक्र के बिंदु च् पर स्पशर् रेखा बन जाती है । इसका यह अथर् हुआ कि जंद θ बिंदु च् पर स्पशर् रेखा के ढाल के सदृश होता जाता है । इसे उ द्वारा निदिर्ष्ट किया जाता है, ल ;ललद्ध लउ सपउ सपउ ;3द्धग0 ग 0गग अनुपात Δलध्Δग की सीमा, जैसे - जैसे Δग शून्य की ओर बढ़ता जाता है, ग के सापेक्ष ल का अवकलज कहलाता है तथा इसे कलध्कग लिखते हैं । यह वक्र ल त्र ;िगद्ध के बिंदु ;गए लद्ध पर स्पशर् रेखा के ढाल को निरूपित करता है । चूँकि ल त्र ;िगद्ध तथा ल ़ Δ ल त्र ि;ग ़ Δगद्ध, हम अवकलज की परिभाषा इस प्रकार लिख सकते हैं: कल क ि; गद्ध Δल ⎡ ि;ग ़Δगद्धदृ ि;गद्ध⎤ त्रत्र सपउ त्र सपउकग कग Δग →0 Δग Δग →0 ⎢⎣ Δग ⎥⎦ नीचे पफलनों के अवकलजों के लिए वुफछ प्राथमिक सूत्रा दिए गए हैं । इनमें न ;गद्ध तथा अ ;गद्ध, ग के यादृच्िछक पफलनों का निरूपण करते हैं तथा ं और इ नियत राश्िायों को निदिर्ष्ट करते हैं, जो ग पर निभर्र नहीं करतीं । वुफल सामान्य पफलनों के अवकलजों की सूची भी दी गइर् है । क ;ं नद्धकन कन कन कग त्रं य त्रण्कज कग कजकग कग क;नअद्ध कअ कन क नअध् 1कन कअ दृत्रन ़ अ य न कगअ2कग कगकग कग कग कन कन कग त्र कअ कअ कग क ;ेपद गद्धत्र बवे ग य क बवे ग दृ ेपद ग कग कग क2क 2;जंद गद्ध ेमब ग य ;बवज गद्ध दृबवेमब ग कग कग क ;ेमब गद्ध त्र जंद ग ेमब ग य क ;बवेमब 2 गद्ध दृ बवज गबवेमब गक ग कग क दददृ1कन क1 न सद;द्ध त्र दन य ; नद्धत्र कग कग कनन क नन;द्ध मम कन अवकलनों के पदों में तात्क्षण्िाक वेग तथा त्वरण की परिभाषा इस प्रकार करते हैंμ Δग कग अत्र सपउ त्र Δज→0 Δज कज क्अ कअ क2 ग ंत्रसपउ त्रत्र 2ज 0 क्ज कज कजक्® समाकलन - गण्िात क्षेत्रापफल की धरणा से आप भलीभाँति परिचित हैं । वुफछ सरल ज्यामितीय आवृफतियों के क्षेत्रापफल के लिए सूत्रा भी आपको ज्ञात हैं । उदाहरण के लिए, किसी आयत का क्षेत्रापफल उसकी लंबाइर् और चैड़ाइर् का गुणनपफल, तथा त्रिाभुज का क्षेत्रापफल उसके आधर तथा शीषर्लंब के गुणनपफल का आध होता है । परंतु किसी अनियमित आवृफति का क्षेत्रापफल ज्ञात करने की समस्या पर वैफसे विचार किया जाए ? ऐसी समस्याओं को हल करने के लिए समाकलन की गण्िातीय धरणा आवश्यक है । आइए, अब हम एक प्रत्यक्ष उदाहरण लेेते हैं। मान लीजिए गति करते किसी कण पर ग.अक्ष के अनुदिश गत्र ं से ग त्र इ तक कोइर् चर बल ि;गद्ध कायर् करता है । हमारी समस्या यह है कि इस बल द्वारा कण की गति की अवध्ि में किया गया कायर् ;ॅद्ध वैफसे ज्ञात किया जाए । इस समस्या पर अध्याय 6 में विस्तार से चचार् की गइर् है । चित्रा 3ण्31 में ग के साथ ि;गद्ध में परिवतर्न दशार्या गया है । यदि बल अचर होता, तो किया गया कायर् चित्रा 3ण्31 ;पद्ध में दशार्ए अनुसार मात्रा क्षेत्रापफल ि;इ.ंद्ध होगा । परंतु व्यापक प्रकरणों में, बल चर होता है । चित्रा 3.31 इस वक्र ¹चित्रा 3ण्31 ;पपद्धह् के नीचे के क्षेत्रापफल का परिकलन करने के लिए एक युक्ित करते हैं जो निम्नलिख्िात है । ग.अक्ष पर ं से इ तक के अंतराल को संख्या मंे बहुत अध्िक ;छद्ध लघु - अंतरालों में विभाजित कर लेते हैं, जो इस प्रकार हैं: ग ;त्रंद्ध से ग तक, ग से ग तक, ग से ग तक,.......गसे ग ;त्रइद्ध तक । इस प्रकार वक्र के नीचे का वुफल011223 छ.1छक्षेत्रापफल छ प‘ियों में विभाजित हो जाता है । प्रत्येक प‘ी सन्िनकटतः आयताकार है, चूँकि किसी प‘ी पर थ्;गद्ध में परिवतर्न नगण्य है । चित्रा 3ण्31 ;पपद्ध में दशार्यी गइर् पवीं प‘ी का सन्िनकटतः क्षेत्रापफल तब होगा, Δ।प त्र थ्;गपद्ध;गप दृ गप दृ1द्ध त्र थ् ;गप द्धΔग यहाँ Δग प‘ी की चैड़ाइर् है जो हमने सभी प‘ियों के लिए समान ली है । आप उलझन में पड़ सकते हैं कि इस व्यंजक में हमें थ्;गद्ध लिखना चाहिए अथवा थ्;गद्ध तथा थ्;गद्ध का माध्य लिखना चाहिए । यदि संख्या छ को बहुत - बहुत बड़ीप.1पप.1;छ→∞द्ध लें, तो पिफर इसका कोइर् महत्त्व नहीं रहेगा । क्योंकि तब प‘ियाँ इतनी पतली होंगी कि थ्;ग द्ध तथा थ्;ग द्ध के बीचपप.1का अंतर इतना कम होगा कि उसे नगण्य माना जा सकता है । तब वक्र के नीचे का वुफल क्षेत्रापफल, छछ । त्रΔ। त्र थ्;गप द्धΔग∑ प ∑ प त्र1 प त्र1 इस योग की सीमा को, जब छ→∞ हो, ं से इ तक थ्;गद्ध का ग पर समाकलन कहते हैं । इसे एक विशेष प्रतीक दिया गया है जिसे नीचे दशार्या गया हैμ इ । त्र∫थ् ;गद्धकग ं समाकलन - चिÉ ∫विस्तारित ै जैसा दिखाइर् देता है । यह हमें याद दिलाता है कि मूल रूप से यह असंख्य पदों के योग की सीमा है । एक अत्यंत महत्त्वपूणर् गण्िातीय तथ्य यह है कि समाकलन, वुफछ अथोर् मेें अवकलन का व्युत्क्रम है । मान लीजिए हमारे कह;ग द्धपास कोइर् पफलन ह ;गद्ध है जिसका अवकलन ि;गद्ध है, तब ि;ग द्ध त्र कग पफलन ह ;गद्ध को ि;गद्ध का अनिश्िचत समाकल कहते हैं तथा इसे इस प्रकार निदिर्ष्ट किया जाता है ह;गद्ध त्र∫ ि;गद्धकग कोइर् समाकल जिसकी निम्न सीमा तथा उच्च सीमा ज्ञात हो, निश्िचत समाकल कहलाता है । यह कोइर् संख्या होती है ।अनिश्िचत समाकल की कोइर् सीमा नहीं होती । यह एक पफलन होता है । उपरोक्त प्रकरण के लिए गण्िात की एक मूल प्रमेयबताती है कि इ ∫ ि;गद्ध कग त्र ह;गद्ध इ ≡ ह;इद्धदृ ह;ंद्धं ं उदाहरण के लिए, मान लीजिए ि;गद्ध त्र ग2, तथा हम ग त्र 1 से ग त्र 2 तक इसके निश्िचत समाकल का मान ज्ञात करना चाहतेहैं। वह पफलन ि;गद्ध जिसका अवकलन ग2 होता है, ग3ध्3 है। अतः2 2 ∫ 2 33ग 81 7 ग कग त्र त्र दृ त्र 333 11 स्पष्ट है कि निश्िचत समाकलों का मूल्यांकन करने के लिए हमें उसके तदनुरूपी अनिश्िचत समाकलों को जानना आवश्यक है। वुफछ सामान्य अनिश्िचत समाकल इस प्रकार हैंμ द 1 दग ग कग ;द दृ1द्ध द 1 1; द्धक ग सद ग ;ग 0द्ध ग ेपदगगक दृबवे ग बवेग कग ेपद ग गगमकग म अवकल गण्िात तथा समाकलन गण्िात का आरंभ्िाक ज्ञान कठिन नहीं है तथा यहाँ आपको कलन की मूल धरणाओं से परिचित कराने का प्रयास किया गया है ।

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अध्याय 3

सरल रेखा में गति


3.1 भूमिका

3.2 स्थिति, पथ-लंबाई एवं विस्थापन

3.3 औसत वेग तथा औसत चाल

3.4 तात्क्षणिक वेग एवं चाल

3.5 त्वरण

3.6 एकसमान त्वरण से गतिमान वस्तु का शुद्धगतिकी संबंधी समीकरण

3.7 आपेक्षिक वेग

सारांश

विचारणीय विषय

अभ्यास

अतिरिक्त अभ्यास

परिशिष्ट 3.1

3.1 भूमिका

विश्व की प्रत्येक वस्तु प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गतिमान रहती है । हमारा चलना, दौड़ना, साइकिल सवारी आदि दैनिक जीवन में दिखाई देने वाली क्रियाएँ गति के कुछ उदाहरण हैं । इतना ही नहीं, निद्रावस्था में भी हमारे फेफड़ों में वायु का प्रवेश एवं निष्कासन तथा हमारी धमनियों एवं शिराओें में रुधिर का संचरण होता रहता है । हम पेड़ों से गिरते हुए पत्तों को तथा बाँध से बहते हुए पानी को देखते हैं । मोटरगाड़ी और वायुयान यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान को ले जाते हैं । पृथ्वी 24 घंटे में एक बार अपनी अक्ष के परितः घूर्णन करती है तथा वर्ष में एक बार सूर्य की परिक्रमा पूरी करती है । सूर्य अपने ग्रहों सहित हमारी आकाशगंगा नामक मंदाकिनी में विचरण करता है, तथा जो स्वयं भी स्थानीय मंदाकिनियों के समूह में गति करती है ।

इस प्रकार समय के सापेक्ष वस्तु की स्थिति में परिवर्तन को गति कहते हैं । समय के साथ स्थिति कैसे परिवर्तित होती है ? इस अध्याय में हम गति के बारे में पढ़ेंगे । इसके लिए हमें वेग तथा त्वरण की धारणा को समझना होगा । इस अध्याय में हम अपना अध्ययन वस्तु के एक सरल रेखा के अनुदिश गति तक ही सीमित रखेंगे । इस प्रकार की गति को सरल रेखीय गति भी कहते हैं । एकसमान त्वरित सरल रेखीय गति के लिए कुछ सरल समीकरण प्राप्त किए जा सकते हैं। अंततः गति की आपेक्षिक प्रकृति को समझने के लिए हम आपेक्षिक गति की धारणा प्रस्तुत करेंगे ।

इस अध्ययन में हम सभी गतिमान वस्तुओं को अतिसूक्ष्म मानकर बिंदु रूप में निरूपित करेंगे । यह सन्निकटन तब तक मान्य होता है जब तक वस्तु का आकार निश्चित समय अंतराल में वस्तु द्वारा चली गई दूरी की अपेक्षा पर्याप्त रूप से कम होता है । वास्तविक जीवन में बहुत-सी स्थितियाें में वस्तुओं के आमाप (साइज़) की उपेक्षा की जा सकती है और बिना अधिक त्रुटि के उन्हें एक बिंदु-वस्तु माना जा सकता है ।

शुद्धगतिकी में, हम वस्तु की गति के कारणोें पर ध्यान न देकर केवल उसकी गति का ही अध्ययन करते हैं । इस अध्याय एवं अगले अध्याय में विभिन्न प्रकार की गतियाें का वर्णन किया गया है । इन गतियाें के कारणों का अध्ययन हम पाँचवें अध्याय में करेंगे ।

3.2 स्थिति, पथ-लंबाई एवं विस्थापन

पहले आपने पढ़ा है कि किसी वस्तु की स्थिति में परिवर्तन को गति कहते हैं। स्थिति के निर्धारण के लिए एक संदर्भ बिंदु तथा अक्षों के एक समुच्चय की आवश्यकता होती है। इसके लिए एक समकोणिक निर्देशांक-निकाय का चुनाव सुविधाजनक होता है। इस निकाय में तीन परस्पर लम्बवत अक्ष होते हैं जिन्हें x-, y- तथा z-अक्ष कहते हैं। इन अक्षों के प्रतिच्छेद बिंदु को मूल बिंदु (O) कहते हैं तथा यह संदर्भ बिंदु होता है। किसी वस्तु के निर्देशांक (x, y, z) इस निर्देशांक निकाय के सापेक्ष उस वस्तु की स्थिति निरूपित करते हैं। समय नापने के लिए इस निकाय में एक घड़ी रख देते हैं। घड़ी सहित इस निर्देशांक-निकाय को निर्देश तंत्र (frame of reference) कहते हैं।

जब किसी वस्तु के एक या अधिक निर्देशांक समय के साथ परिवर्तित होते हैं तो वस्तु को गतिमान कहते हैं। अन्यथा वस्तु को उस निर्देश तंत्र के सापेक्ष विरामावस्था में मानते हैें।

किसी निर्देश तंत्र में अक्षों का चुनाव स्थिति विशेष पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, एक विमा में गति के निरूपण के लिए हमें केवल एक अक्ष की आवश्यकता होती है। दो/तीन विमाओं में गति के निरूपण के लिए दो/तीन अक्षों की आवश्यकता होती है।

किसी घटना का वर्णन इसके लिए चुने गए निर्देश-तंत्र पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, जब हम कहते हैं कि सड़क पर कार चल रही है तो वास्तव में ‘कार की गति’ का वर्णन हम स्वयं से या जमीन से संलग्न निर्देश तंत्र के सापेक्ष करते हैं। यदि हम कार में बैठे किसी व्यक्ति से संलग्न निर्देश तंत्र के सापेक्ष कार की स्थिति का वर्णन करें तो कार विरामावस्था में होगी।

एक सरल रेखा में किसी वस्तु की गति के विवरण हेतु हम एक अक्ष (मान लीजिए x-अक्ष) को इस प्रकार चुन सकते हैं कि वह वस्तु के पथ के संपाती हो । इस प्रकार वस्तु की स्थिति को हम अपनी सुविधानुसार चुने गए किसी मूल बिंदु (मान लीजिए चित्र 3.1 में दर्शाए गए बिंदु O) के सापेक्ष निरूपित करते हैं । बिंदु O के दायीं ओर के निर्देशांक को हम धनात्मक तथा बायीं ओर के स्थिति-निर्देशांक को ऋणात्मक कहेंगे । इस पद्धति के अनुसार चित्र 3.1 में बिंदु P और Q के स्थिति-निर्देशांक क्रमशः +360 m और +240 m हैं । इसी प्रकार बिंदु R का स्थिति-निर्देशांक -120 m है ।

1671.png

चित्र 3.1 x-अक्ष, मूल बिंदु तथा विभिन्न समयाें में कार की स्थितियाँ ।

पथ-लंबाई

कल्पना कीजिए कि कोई कार एक सरल रेखा के अनुदिश गतिमान है । हम x-अक्ष इस प्रकार चुनते हैं कि यह गतिमान कार के पथ के संपाती हो । अक्ष का मूल बिंदु वह है जहाँ से कार चलना शुरू करती है अर्थात समय t =0 पर कार x = 0 पर थी (चित्र 3.1) । मान लीजिए कि भिन्न-भिन्न क्षणों पर कार की स्थिति बिंदुओं P, Q तथा R से व्यक्त होती है । यहाँ हम गति की दो स्थितियाें पर विचार करेंगे । पहली में कार O से P तक जाती है । अतः कार द्वारा चली गई दूरी OP = +360 m है । इस दूरी को कार द्वारा चली गई पथ-लंबाई कहते हैं । दूसरी स्थिति में कार पहले O से P तक जाती है और फिर P से Q पर वापस आ जाती है । गति की इस अवधि में कार द्वारा चली गई पथ-लंबाई = OP + PQ = 360 m + (+120 m) = +480 m होगी। क्योंकि पथ-लंबाई में केवल परिमाण होता है दिशा नहीं, अतः यह एक अदिश राशि है (अध्याय 4 देखिए) ।

विस्थापन

यहाँ यह प्रासंगिक होगा कि हम एक दूसरी उपयोगी भौतिक राशि विस्थापन को वस्तु की स्थिति में परिवर्तन के रूप में परिभाषित करें । कल्पना कीजिए कि समय t1t2 पर वस्तु की स्थिति क्रमशः x1x2 है । तब समय t (=t2t1) में उसका विस्थापन, जिसे हम x से व्यक्त करते हैं, अंतिम तथा प्रारंभिक स्थितियाें के अंतर द्वारा व्यक्त किया जाता है:

x =x2x1

(यहाँ हम ग्रीक अक्षर डेल्टा (∆) का प्रयोग किसी राशि में परिवर्तन को व्यक्त करने के लिए करते हैं)।

यदि x2 > x1 तो x धनात्मक होगा, परंतु यदि x2 < x1 तो x ऋणात्मक होगा । विस्थापन में परिमाण व दिशा दोनों होते हैं, एेसी राशियों को सदिशों द्वारा निरूपित किया जाता है । आप सदिशों के विषय में अगले अध्याय में पढ़ेंगे । इस अध्याय में हम एक सरल रेखा के अनुदिश सरल गति (जिसे हम रेखीय गति कहते हैं) के विषय में ही पढ़ेंगे । एक-विमीय गति में केवल दो ही दिशायें होती हैं (अग्रवर्ती एवं पश्चगामी अथवा अधोगामी एवं ऊर्ध्वगामी) जिनमें वस्तु गति करती है । इन दोनाें दिशाओं को हम सुगमता के लिए + और - संकेताें से व्यक्त कर सकते हैं । उदाहरण के लिए, यदि कार स्थिति O से P पर पहुँचती है, तो उसका विस्थापन

x = x2 x1 = (+360 m) 0 m = +360 m

होगा । इस विस्थापन का परिमाण 360 m है तथा इसकी दिशा x की धनात्मक दिशा में होगी जिसे हम + संकेत से चिह्नित करेंगे । इसी प्रकार कार का P से Q तक का विस्थापन 240 m 360 m = 120 m होगा । ऋणात्मक चिह्न विस्थापन की दिशा को इंगित करता है । अतएव, वस्तु की एक-विमीय गति के विवरण के लिए सदिश संकेत का उपयोग वश्यक नहीं होता है ।

विस्थापन का परिमाण गतिमान वस्तु द्वारा चली गई पथ-लंबाई के बराबर हो भी सकता है और नहीं भी हो सकता है । उदाहरण के लिए, यदि कार स्थिति O से चल कर P पर पहुँच जाए, तो पथ-लंबाई = +360 m तथा विस्थापन = +360 m होगा । यहाँ विस्थापन का परिमाण (360 m) पथ-लंबाई (360 m) के बराबर है । परंतु यदि कार O से चलकर P तक जाए और फिर Q पर वापस आ जाए तो, पथ-लंबाई = (+360 m) + (+120 m) = +480 m होगी परंतु विस्थापन = (+240 m) (0 m) = +240 m होगा । इस बार विस्थापन का परिमाण (240 m) कार द्वारा चली गई पथ-लंबाई (480 m) के बराबर नहीं (वास्तव में कम) है ।

विस्थापन का परिमाण गति की किसी अवधि के लिए शून्य भी हो सकता है जबकि तदनुरूप पथ-लंबाई शून्य नहीं है। उदाहरण के लिए, चित्र 3.1 में यदि कार O से चल कर P तक जाए और पुनः O पर वापस आ जाए तो कार की अंतिम स्थिति प्रारंभिक स्थिति के संपाती हो जाती है और विस्थापन शून्य हो जाता है । परंतु कार की इस पूरी यात्रा के लिए कुल पथ-लंबाई OP + PO = +360 m + 360 m = +720 m होगी ।

जैसा कि आप पहले पढ़ चुके हैं किसी भी वस्तु की गति को स्थिति-समय ग्राफ द्वारा व्यक्त किया जा सकता है । इस प्रकार के ग्राफ एेसे सशक्त साधन होते हैं, जिनके माध्यम से वस्तु की गति के विभिन्न पहलुआें का निरूपण एवं विश्लेषण आसानी से किया जा सकता है । किसी सरल रेखा (जैसे- x-अक्ष) के अनुदिश गतिमान वस्तु के लिए समय के साथ केवल x-निर्देशांक ही परिवर्तित होता है । इस प्रकार हमें x - t ग्राफ प्राप्त होता है । हम सर्वप्रथम एक सरल स्थिति पर विचार करेंगे, जिसमें वस्तु उदाहरणार्थ, एक कार x = 40 m पर स्थित है । एेसी वस्तु के लिए स्थिति-समय (x- t) ग्राफ समय-अक्ष के समांतर एक सीधी सरल रेखा होता है जैसा कि चित्र 3.2(a) में दिखाया गया है ।

1625.png

चित्र 3.2 स्थिति-समय ग्राफ, ज (a) वस्तु स्थिर है, तथा (b) जब वस्तु एकसमान गति से चल रही है ।

यदि कोई वस्तु समान समय अंतराल में समान दूरी तय करती है, तो उस वस्तु की गति एकसमान गति कहलाती है । इस प्रकार की गति का स्थिति-समय ग्राफ चित्र 3.2(b) में दिखलाया गया है ।

अब हम उस कार की गति पर विचार करेंगे जो मूल बिंदु O से t = 0 s पर विरामावस्था से चलना प्रारंभ करती है । इसकी चाल उत्तरोत्तर t = 10 s तक बढ़ती जाती है । इसके बाद वह t = 18 s तक एकसमान चाल से चलती है । इस समय इसमें ब्रेक लगाया जाता है जिसके परिणामस्वरूप वह t = 20 s पर और x = 296 m पर रुक जाती है । एेसी कार का स्थिति-समय ग्राफ चित्र 3.3 में दिखाया गया है । हम इस ग्राफ की चर्चा इसी अध्याय में आगे आने वाले कुछ खंडों में पुनः करेंगे ।

1617.png

चित्र 3.3 किसी कार का स्थिति-समय ग्राफ ।

3.3 औसत वेग तथा औसत चाल

जब कोई वस्तु गतिमान होती है तो समय के साथ-साथ उसकी स्थिति परिवर्तित होती है । प्रश्न उठता है कि समय के साथ कितनी तेजी से वस्तु की स्थिति परिवर्तित होती है तथा यह परिवर्तन किस दिशा में होता है ? इसके विवरण के लिए हम एक राशि परिभाषित करते हैं जिसे औसत वेेग कहा जाता है । किसी वस्तु की स्थिति में परिवर्तन अथवा विस्थापन (x) को समय अंतराल (t) द्वारा विभाजित करने पर औसत वेग प्राप्त होता है । इसे से चिह्नित करते हैं:

2472.png (3.1)

यहां x1, आरंभिक समय t1 पर तथा x2 अंतिम समय t2 पर, वस्तु की स्थिति को व्यक्त करता है । यहाँ वेग के प्रतीक (v) के ऊपर लगाई गई ‘रेखा’ वेग के औसत मान को व्यक्त करती है। किसी राशि के औसत मान को दर्शाने की यह एक मानक पद्धति है । वेग का SI मात्रक m/s अथवा m s–1 है यद्यपि दैनिक उपयोगों में उसके लिए km/h का भी प्रयोग होता है।

विस्थापन की भाँति माध्य-वेग भी एक सदिश राशि है । इसमें दिशा एवं परिमाण दोनों समाहित होते हैं । परंतु जैसा कि हम पीछे स्पष्ट कर चुके हैं, यदि वस्तु एक सरल रेखा में गतिमान हो तो उसके दिशात्मक पक्ष को + या - चिह्नों द्वारा प्रकट कर सकते हैं । इसलिए इस अध्याय में वेग के लिए हम सदिश संकेतन का उपयोग नहीं करेंगे ।

2477.png 

 

चित्र 3.4 औसत चाल सरल रेखा P1 P2 की प्रवणता है ।

चित्र 3.3 में दर्शाई गई कार की गति के लिए x-t ग्राफ का t = 0 s तथा t=8 s के बीच के भाग को बड़ा करके चित्र 3.4 में दिखाया गया है । जैसा कि आलेख से स्पष्ट है, t = 5 s तथा t =7 s के मध्य समय अंतराल में कार का औसत-वेग होगाः

2488.png

यह मान चित्र 3.4 में दर्शाई गई सरल रेखा p1 p2 की प्रवणता के बराबर होगा । यह सरल रेखा कार की प्रारंभिक स्थिति p1 को उसकी अंतिम स्थिति p2 से मिलाती है ।

औसत वेग का ऋणात्मक या धनात्मक होना विस्थापन के चिह्न पर निर्भर करता है । यदि विस्थापन शून्य होगा तो औसत वेग का मान भी शून्य होगा । धनात्मक तथा ऋणात्मक वेग से चलती हुई वस्तु के लिए x–t ग्राफ क्रमशः चित्र 3.5(a) तथा चित्र 3.5(b) में दर्शाए गए हैं । किसी स्थिर वस्तु के लिए 
x-t ग्राफ चित्र 3.5(c) में दर्शाया गया है ।

2493.png 

(a) (b) (c)

चित्र 3.5 स्थिति-समय ग्राफ उस वस्तु के लिए जो (a) धनात्मक वेग से गतिमान है, (b) ऋणात्मक वेग से गतिमान है, तथा (c) विरामावस्था में है ।

औसत वेग को परिभाषित करने के लिए केवल विस्थापन का ज्ञान ही आवश्यक होता है । हम यह देख चुके हैं कि विस्थापन का परिमाण वास्तविक पथ-लंबाई से भिन्न हो सकता है । वास्तविक पथ पर वस्तु की गति की दर के लिए हम एक दूसरी राशि को प्रयुक्त करते हैं जिसे औसत चाल कहते हैं ।

वस्तु की यात्रा की अवधि में चली गई कुल पथ-लंबाई एवं इसमें लगे समय के भागफल को औसत चाल कहते हैं ।

tr

औसत चाल का वही मात्रक (m s–1) होता है जो वेग का होता है । परंतु औसत चाल से यह पता नहीं चल पाता कि वस्तु किस दिशा में गतिमान है । इस दृष्टिकोण से औसत चाल सदैव धनात्मक ही होती है (जबकि औसत वेग धनात्मक या ऋणात्मक कुछ भी हो सकता है)। यदि वस्तु एक सरल रेखा के अनुदिश गतिमान है और केवल एक ही दिशा में चलती है तो विस्थापन का परिमाण कुल पथ-लंबाई के बराबर होगा । एेसी परिस्थितियाें में वस्तु के औसत वेग का परिमाण उसकी औसत चाल के बराबर होगा । परंतु यह बात हमेशा सही नहीं होगी । यह आप उदाहरण 3.1 में देखेंगे ।

¯ उदाहरण 3.1 कोई कार एक सरल रेखा (मान लीजिए चित्र 3.1 में रेखा op) के अनुदिश गतिमान है । कार O से चलकर 18 s में P तक पहुंचती है, फिर 6.0 s में स्थिति Q पर वापस आ जाती है । कार के औसत वेग एवं औसत चाल की गणना कीजिए, जब (a) कार O से P तक जाती है, और (b) जब वह O से P तक जा कर पुनः Q पर वापस आ जाती है ।

हल (a)

veg

अथवा 2515.png

aus

2522.png

अतः इस स्थिति में औसत चाल का मान औसत वेग के परिमाण के बराबर है ।

(b)

hn

= 2542.png

= 20 m s–1

अतः इस स्थिति में औसत चाल का मान औसत वेग के परिमाण के बराबर नहीं है । इसका कारण कार की गति के दौरान गति में दिशा परिवर्तन है जिसके फलस्वरूप पथ-लंबाई विस्थापन के परिमाण से अधिक है । इससे स्पष्ट है कि वस्तु की चाल सामान्यतया वेग के परिमाण से अधिक होती है । °

यदि उदाहरण 3.1 में कार स्थिति O से P बिंदु तक जाए तथा उसी समय अंतराल में वह O स्थिति पर वापस आ जाए तो कार की माध्य चाल 20 m s–1 होगी, परंतु उसका औसत वेग शून्य होगा!

3.4 तात्क्षणिक वेग एवं चाल

जैसा कि हम पढ़ चुके हैं कि औसत वेग से हमें यह ज्ञात होता है कि कोई वस्तु किसी दिए गए समय अंतराल में किस गति से चल रही है, किन्तु इससे यह पता नहीं चल पाता कि इस समय अंतराल के भिन्न-भिन्न क्षणों पर वह किस गति से चल रही है। अतः किसी क्षण t पर वेग के लिए हम तात्क्षणिक वेग या केवल वेग v को परिभाषित करते हैं ।

गतिमान वस्तु का तात्क्षणिक वेग उसके औसत वेग के बराबर होगा यदि उसके दो समयों (t तथा t + t) के बीच का अंतराल (∆t) अनन्तः सूक्ष्म हो । गणितीय विधि से हम इस कथन को निम्न प्रकार से व्यक्त करते हैं-

lim(3.3a)

2547.png (3.3b)

यहाँ प्रतीक 2552.png का तात्पर्य उसके दायीं ओर स्थित राशि (जैसे 2557.png) का वह मान है जो t के मान को शून्य की ओर (t0) प्रवृत्त करने पर प्राप्त होगा । कलन गणित की भाषा में समीकरण (3.3a) में दायीं ओर की राशि 2562.png x का के सापेक्ष अवकलन गुणांक है। (परिशिष्ट 3.1 देखिए)। यह गुणांक उस क्षण पर वस्तु की स्थिति परिवर्तन की दर होती है ।

किसी क्षण पर वस्तु का वेग निकालने के लिए हम समीकरण (3.3a) का उपयोग कर सकते हैं । इसके लिए ग्राफिक या गणितीय विधि को प्रयोग में लाते हैं । मान लीजिए कि हम चित्र (3.3) में निरूपित गतिमान कार का वेग t = 4 s (बिंदु P) पर निकालना चाहते हैं । गणना की आसानी के लिए इस चित्र को चित्र 3.6 में अलग पैमाना लेकर पुनः खींचा गया है। पहले हम t = 4 s को केंद्र में रखकर t को 2 s लें । औसत वेग की परिभाषा के अनुसार सरल रेखा p1p2 (चित्र 3.6) की प्रवणता 3 s से 5 s के अंतराल में वस्तु के औसत वेग को व्यक्त करेगी । अब हम t का मान 2 s से घटाकर 1 s कर देते हैं तो P1P2 रेखा Q1Q2 हो जाती है और इसकी प्रवणता 3.5 s से 4.5 s अंतराल में औसत वेग का मान देगी । अंततः सीमांत मान t→0 की परिस्थिति में रेखा P1P2 स्थिति-समय वक्र के बिंदु P पर स्पर्श रेखा हो जाती है । इस प्रकार t = 4 s क्षण पर कार का वेग उस बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा की प्रवणता के बराबर होगा । यद्यपि ग्राफिक विधि से इसे प्रदर्शित करना कुछ कठिन है तथापि यदि इसके लिए हम गणितीय विधि का उपयोग करेें तो सीमांत प्रक्रिया आसानी से समझी जा सकती है । चित्र 3.6 में खींचे गए ग्राफ के लिए x = 0.8 t3 है । सारणी 3.1 में t=4 s को केंद्र मेें रखकर t = 2.0 s, 1.0 s, 0.5 s, 0.1 s तथा 0.01 s के लिए x/t के मूल्यों को दर्शाया गया है । दूसरे और तीसरे कॉलम में t1(=tt/2) तथा t2(=tt/2) और चौथे एवं पाँचवें कॉलम में x के तदनुरूप मानोें अर्थात x(t1) = 0.08 t31 तथा x(t2) = 0.03 t32 को दिखलाया गया है । छठे कॉलम में अंतर x = x(t2)–x(t1) को तथा अंतिम कॉलम में xt के अनुपात को व्यक्त किया गया है । यह अनुपात प्रथम कॉलम में अंकित t के भिन्न-भिन्न मानों के संगत औसत वेग का मान है ।

1787.png
चित्र 3.6 स्थिति-समय ग्राफ से वेग ज्ञात करना । t = 4 s पर वेग उस क्षण पर ग्राफ की स्पर्श रेखा की प्रवणता है ।

सारणी 3.1 से स्पष्ट है कि जैसे-जैसे t का मान 2.0 s से घटाते-घटाते 0.01 s करते हैं तो औसत वेग अंततः सीमांत मान 3.84 ms-1 के बराबर हो जाता है जो t=4 s पर कार का वेग है अर्थात t=4 s पर dx/dt का मान । इस प्रकार चित्र 3.3 में दर्शाई गई गति के हर क्षण के लिए हम कार का वेग निकाल सकते हैं । इस उदाहरण के लिए समय के सापेक्ष वेग में परिवर्तन चित्र 3.7 में दर्शाया गया है ।

2567.png 

चित्र 3.7 चित्र 3.3 में दर्शाई गई वस्तु की गति के तदनुरूप वेग-समय ग्राफ ।

hu

यहाँ यह बात ध्यान देने योग्य है कि वस्तु का तात्क्षणिक वेग निकालने के लिए ग्राफिक विधि सदैव सुविधाजनक नहीं होती है । इस विधि (ग्राफिक विधि) में हम गतिमान वस्तु के स्थिति-समय ग्राफ को सावधानीपूर्वक खींचते हैं तथा t को उत्तरोत्तर कम करते हुए वस्तु के औसत वेग (2579.png) की गणना करते जाते हैं । भिन्न-भिन्न क्षणों पर वस्तु का वेग निकालना तब बहुत आसान हो जाता है जब विभिन्न समयों पर हमारे पास वस्तु की स्थिति के पर्याप्त आँकड़े उपलब्ध हों अथवा वस्तु की स्थिति का समय के फलन के रूप में हमारे पास यथार्थ व्यंजक उपलब्ध हो । एेसी स्थिति में उपलब्ध आँकड़ों का उपयोग करते हुए समय अंतराल t को क्रमशः सूक्ष्म करते हुए x/t का मान निकालते जाएँगे और अंततः सारणी 3.1 में दर्शाई गई विधि के अनुसार x/t का सीमांत मान प्राप्त कर लेंगे । अन्यथा किसी दिए गए व्यंजक के लिए अवकल गणित का प्रयोग करके गतिमान वस्तु के भिन्न-भिन्न क्षणों के लिए dx/dt की गणना कर लेंगे जैसा कि उदाहरण 3.2 में बताया गया है ।

¯ उदाहरण 3.2 x-अक्ष के अनुदिश किसी गतिमान वस्तु की स्थिति निम्नलिखित सूत्र से व्यक्त की जाती है: x=a+bt2 । यहाँ a = 8.5 m, b = 2.5 m s–2 तथा समय t को सेकंड में व्यक्त किया गया है । t=0 s तथा t=2.0 s क्षणों पर वस्तु का वेग क्या होगा ? t=2.0 s तथा t=4.0 s के मध्य के समय अंतराल में वस्तु का औसत वेग क्या होगा ?

हल अवकल गणित की पद्धति के अनुसार वस्तु का वेग

2584.pngt m s–1

t =0 s क्षण के लिए v = 0 m/s, तथा t =2.0 s समय पर, v =10 m s–1

औसत वेग =2590.png

 

= 2595.png = 6.0b

= 6.0 ×2.5 = 15 m s–1 °

चित्र 3.7 से यह स्पष्ट है कि t=10 s से 18 s के मध्य वेग स्थिर रहता है । t=18 s से t=20 s के मध्य यह एकसमान रूप से घटता जाता है जबकि t=0 s से t=10 s के बीच यह बढ़ता जाता है । ध्यान दीजिए कि एकसमान गति में हर समय (तात्क्षणिक) वेग का वही मान होता है जो औसत वेग का होता है।

तात्क्षणिक चाल या केवल चाल गतिमान वस्तु के वेग का परिमाण है । उदाहरण के तौर पर, वेग + 24.0 m s–1 तथा –24.0 m s–1 दोनों में प्रत्येक का परिमाण 24.0 m s–1 होगा। यहाँ यह तथ्य ध्यान में रखना है कि जहाँ किसी सीमित समय अंतराल में वस्तु की औसत चाल उसके औसत वेग के परिमाण के या तो बराबर होती है या उससे अधिक होती है वहीं किसी क्षण पर वस्तु की तात्क्षणिक चाल उस क्षण पर उसके तात्क्षणिक वेग के परिमाण के बराबर होती है । एेसा क्यों होता है ?

3.5 त्वरण

सामान्यतः वस्तु की गति की अवधि में उसके वेग में परिवर्तन होता रहता है । वेग में हो रहे इस परिवर्तन को कैसे व्यक्त करें । वेग में हो रहे इस परिवर्तन को समय के सापेक्ष व्यक्त करना चाहिए या दूरी के सापेक्ष ? यह समस्या गैलीलियो के समय भी थी । गैलीलियो ने पहले सोचा कि वेग में हो रहे परिवर्तन की इस दर को दूरी के सापेक्ष व्यक्त किया जा सकता है परंतु जब उन्होंने मुक्त रूप से गिरती हुई तथा नत समतल पर गतिमान वस्तुओं की गति का विधिवत् अध्ययन किया तो उन्होंने पाया कि समय के सापेक्ष वेग परिवर्तन की दर का मान मुक्त रूप से गिरती हुई वस्तुओं के लिए, स्थिर रहता है जबकि दूरी के सापेक्ष वस्तु का वेग परिवर्तन स्थिर नहीं रहता वरन जैसे-जैसे गिरती हुई वस्तु की दूरी बढ़ती जाती है वैसे-वैसे यह मान घटता जाता है। इस अध्ययन ने त्वरण की वर्तमान धारणा को जन्म दिया जिसके अनुसार त्वरण को हम समय के सापेक्ष वेग परिवर्तन के रूप में परिभाषित करते हैं ।

जब किसी वस्तु का वेग समय के सापेक्ष बदलता है तो हम कहते हैं कि उसमें त्वरण हो रहा है । वेग में परिवर्तन तथा तत्संबंधित समय अंतराल के अनुपात को हम औसत त्वरण कहते हैं । इसे a- से प्रदर्शित करते हैं:

2600.png (3.4) यहां t1, tक्षणों पर वस्तु का वेग क्रमशः v1 तथा v2 है । यह एकांक समय में वेग में औसत परिवर्तन होता है । त्वरण का SI मात्रक m s–2 है ।

वेग-समय (v-t) ग्राफ से हम वस्तु का औसत त्वरण निकाल सकते हैं । यह इस प्रकार के ग्राफ में उस सरल रेखा की प्रवणता के बराबर होता है जो बिंदु (v2, t2) को बिंदु (v1, t1) से जोड़ती है । नीचे के उदाहरण में चित्र 3.7 में दर्शाई गई गति के भिन्न-भिन्न समय अंतरालों में हमने वस्तु का औसत त्वरण निकाला है:

0 s - 10 s 2605.png

10 s - 18 s 2610.png

18 s - 20 s 2615.png

1746.png

चित्र 3.8 चित्र 3.3 में दर्शाई गति के संगत समय के फलन के रूप में वस्तु का त्वरण ।

तात्क्षणिक त्वरण: जिस प्रकार हमने पूर्व में तात्क्षणिक वेग की व्याख्या की है, उसी प्रकार हम तात्क्षणिक त्वरण को भी परिभाषित करते हैं । वस्तु के तात्क्षणिक त्वरण को a से चिह्नित करते हैं, अर्थात

2620.png (3.5)

vt ग्राफ में किसी क्षण वस्तु का त्वरण उस क्षण वक्र पर खींची गई स्पर्श रेखा की प्रवणता के बराबर होता है । चित्र 3.7 में दर्शाए गए v–t वक्र में प्रत्येक क्षण के लिए त्वरण प्राप्त कर सकते हैं । परिणामस्वरूप उपलब्ध a–t वक्र चित्र 3.8 में दिखाया गया है । चित्र से स्पष्ट है कि 0 s से 10 s की अवधि में त्वरण असमान है । 10 s–18 s के मध्य यह शून्य है जबकि 18 s तथा 20 s के बीच यह स्थिर है तथा इसका मान -12 m s–2 है । जब त्वरण एकसमान होता है तो यह स्पष्ट है कि वह उस अवधि में औसत त्वरण के बराबर होता है।

चूँकि वेग एक सदिश राशि है जिसमें दिशा एवं परिमाण दोनों होते हैं अतएव वेग परिवर्तन में इनमें से कोई एक अथवा दोनों निहित हो सकते हैं । अतः या तो चाल (परिमाण) में परिवर्तन, दिशा में परिवर्तन अथवा इन दोनों में परिवर्तन से त्वरण का उद्भव हो सकता है । वेग के समान ही त्वरण भी धनात्मक, ऋणात्मक अथवा शून्य हो सकता है । इसी प्रकार के त्वरण संबंधी स्थिति-समय ग्राफों को चित्रों 3.9 (a), 3.9 (b) तथा 3.9 (c) में दर्शाया गया है । चित्रों से स्पष्ट है कि धनात्मक त्वरण के लिए x–t ग्राफ ऊपर की ओर वक्रित है किन्तु ऋणात्मक त्वरण के लिए ग्राफ नीचे की ओर वक्रित है । शून्य त्वरण के लिए x–t ग्राफ एक सरल रेखा है । अभ्यास के लिए चित्र 3.3 में दर्शाई गई गति के उन तीनों भागों को पहचानिए जिनके लिए त्वरण +a, a अथवा शून्य है ।

यद्यपि गतिमान वस्तु का त्वरण समय के साथ-साथ बदल सकता है, परंतु सुविधा के लिए इस अध्याय में गति संबंधी हमारा अध्ययन मात्र स्थिर त्वरण तक ही सीमित रहेगा । एेसी स्थिति में औसत त्वरण 2625.png का मान गति की अवधि में स्थिर त्वरण के मान के बराबर होगा ।

1863.png

चित्र 3.9 एेसी गति के लिए स्थिति-समय ग्राफ जिसके लिए (a) त्वरण धनात्मक है, (b) त्वरण ऋणात्मक है तथा (c) त्वरण शून्य है ।

1823.png

चित्र 3.10 स्थिर त्वरण के साथ गतिमान वस्तु का वेग-समय ग्राफ (a) धनात्मक त्वरण से धनात्मक दिशा में गति, (b) ऋणात्मक त्वरण से धनात्मक दिशा में गति, (c) ऋणात्मक त्वरण से ऋणात्मक दिशा में गति, (d) ऋणात्मक त्वरण के साथ वस्तु की गति जो समय t1 पर दिशा बदलती है । 0 से t1समयावधि में यह धनात्मक x की दिशा में गति करती है जबकि t1 व t2 के मध्य वह विपरीतदिशा में गतिमान है ।

यदि क्षण t=0 पर वस्तु का वेग v॰ तथा t क्षण पर उसका वेग v हो, तो त्वरण a =2630.png= 2635.png होगा ।

अतएव, v= v+at (3.6)

अब हम यह देखेंगे कि कुछ सरल उदाहरणों में वेग-समय ग्राफ कैसा दिखलाई देता है । चित्र 3.10 में स्थिर त्वरण के लिए चार अलग-अलग स्थितियों में v t ग्राफ दिखाए गए हैंः

(a) कोई वस्तु धनात्मक दिशा में धनात्मक त्वरण से गतिमान है । उदाहरणार्थ, चित्र 3.3 में t = 0 s से t = 10 s के बीच की अवधि में कार की गति ।

(b) कोई वस्तु धनात्मक दिशा में ऋणात्मक त्वरण से गतिमान है । उदाहरणार्थ, चित्र 3.3 में t = 18 s से t = 20 s के बीच की अवधि में कार की गति ।

(c) कोई वस्तु ऋणात्मक दिशा में ऋणात्मक त्वरण से गतिमान है । उदाहरणार्थ, चित्र 3.1 में O से x की ऋण दिशा में त्वरित होती कार ।

(d) कोई वस्तु पहले t1 समय तक धनात्मक दिशा में चलती है और फिर ऋणात्मक दिशा में ऋणात्मक त्वरण के साथ गतिमान है । उदाहरण के लिए, चित्र 3.1 में कार का t1 समय तक O से बिंदु Q तक मंदन के साथ जाना, फिर, मुड़कर उसी ऋणात्मक त्वरण के साथ t2 समय तक चलते रहना है ।

किसी गतिमान वस्तु के वेग-समय ग्राफ का एक महत्त्वपूर्ण लक्षण है कि v–t ग्राफ के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल वस्तु का विस्थापन व्यक्त करता है। इस कथन की सामान्य उपपत्ति के लिए अवकल गणित की आवश्यकता पड़ती है तथापि सुगमता के लिए एक स्थिर वेग u से गतिमान वस्तु पर विचार करके इस कथन की सत्यता प्रमाणित कर सकते हैं । इसका वेग-समय ग्राफ चित्र 3.11 में दिखाया गया है ।

2641.png 

चित्र 3.11 v-t ग्राफ के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल वस्तु द्वारा निश्चित समय अंतराल में विस्थापन व्यक्त करता है ।

चित्र में v-t वक्र समय अक्ष के समांतर एक सरल रेखा है । t=0 से t=T के मध्य इस रेखा के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल उस आयत के क्षेत्रफल के बराबर है जिसकी ऊँचाई u तथा आधार T है । अतएव क्षेत्रफल = u × T = uT, जो इस समय में वस्तु के विस्थापन को व्यक्त करता है । कोई क्षेत्रफल दूरी के बराबर कैसे हो सकता है ? सोचिए ! दोनों निर्देशांक अक्षों के अनुदिश जो राशियाँ अंकित की गई हैं, यदि आप उनकी विमाओं पर ध्यान देंगे तो आपको इस प्रश्न का उत्तर मिल जाएगा।

ध्यान दीजिए कि इस अध्याय में अनेक स्थानों पर खींचे गए x–t, v–t तथा a–t ग्राफों में कुछ बिंदुओें पर तीक्ष्ण मोड़ हैं । इसका आशय यह है कि दिए गए फलनों का इन बिंदुओं पर अवकलन नहीं निकाला जा सकता । परंतु किसी वास्तविक परिस्थिति में सभी ग्राफ निष्कोण वक्र होंगे और उनके सभी बिंदुओं पर फलनों का अवकलन प्राप्त किया जा सकता है।

इसका अभिप्राय है कि वेग तथा त्वरण किसी क्षण सहसा नहीं बदल सकते। परिवर्तन सदैव सतत होता है।

3.6 एकसमान त्वरण से गतिमान वस्तु का शुद्धगतिकी संबंधी समीकरण

अब हम एकसमान त्वरण ‘a’ से गतिमान वस्तु के लिए कुछ गणितीय समीकरण व्युत्पन्न कर सकते हैं जो पाँचों राशियों को किसी प्रकार एक दूसरे से संबंधित करते हैं । ये राशियाँ हैंः विस्थापन (x), लिया गया समय (t), t = 0 समय पर वस्तु का प्रारंभिक वेग (vo ), समय t बीत जाने पर अंतिम वेग (v), तथा त्वरण (a) । हम पहले ही vo और v के मध्य एक समीकरण (3.6) प्राप्त कर चुके हैं जिसमें एकसमान त्वरण a तथा समय t निहित हैं । यह समीकरण है:

v = vo + at (3.6)

इस समीकरण को चित्र 3.12 में ग्राफ के रूप में निरूपित किया गया है ।

2651.png 

चित्र 3.12 एकसमान त्वरण से गतिमान वस्तु के लिए v-t वक्र के नीचे का क्षेत्रफल ।

इस वक्र के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल :

0 से t समय के बीच का क्षेत्रफल = त्रिभुज ABC का क्षेत्रफल + आयत OACD का क्षेत्रफल

= 2665.png(v–v0 ) t + v0 t

जैसे कि पहले स्पष्ट किया जा चुका है, v-t ग्राफ के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल वस्तु का विस्थापन होता है। अतः वस्तु का विस्थापन x होगाः

x = 2670.png(v–v0 ) t + v0 t (3.7)

परंतु v–v0 = at

अतः x = 2675.pngat2 + v0 t

अथवा x = v0 t +2680.pngat2 (3.8)

समीकरण (3.7) को हम निम्न प्रकार भी लिख सकते हैं

jy

2687.png (मात्र स्थिर त्वरण के लिए) (3.9b)

समीकरण (3.9a) तथा (3.9b) का अभिप्राय है कि वस्तु का विस्थापन x माध्य वेग - v से होता है जो प्रारंभिक एवं अंतिम वेगों के समांतर माध्य के बराबर होता है ।

समीकरण (3.6) से t = (vv0)/a । यह मान समीकरण (3.9a) में रखने पर

2692.png

2697.png (3.10)

यदि हम समीकरण (3.6) से t का मान समीकरण (3.8) में रख दें तो भी उपरोक्त समीकरण को प्राप्त किया जा सकता है। इस प्रकार पांचों राशियों v0, v, a, t तथा x के बीच संबंध स्थापित करनेवाले हमें तीन महत्त्वपूर्ण समीकरण प्राप्त हुए-

2703.png

2708.png

2713.png (3.11a)

ये सभी एकसमान त्वरित सरल रेखीय गति के शुद्धगतिक समीकरण हैं ।

व्यंजक (3.11a) में जो समीकरण दिए गए हैं, उसकी व्युत्पत्ति के लिए हमने माना है कि क्षण t = 0 पर वस्तु की स्थिति 0 है (अर्थात् x = 0) । परंतु यदि हम यह मान लें कि क्षण t = 0 पर वस्तु की स्थिति शून्य न हो, वरन् अशून्य यानी x0 हो तो समीकरण (3.11a) और व्यापक समीकरण में रूपांतरित हो जाएगी (यदि हम x के स्थान पर x–x0 लिखें)ः

2718.png

2723.png (3.11b)

2728.png (3.11c)

¯ उदाहरण 3.3 कलन-विधि का उपयोग कर एकसमान त्वरण के लिए शुद्धगतिक समीकरण प्राप्त कीजिए।

हल परिभाषा से

2733.png

dv = a dt

दोनों पक्षों के समाकलन से

2738.png

2747.png (a अचर है)

2755.png

2761.png

पुनः 2766.png

dx = v dt

दोनों पक्षों के समाकलन से

2771.png2781.png

2789.png

2797.png

x = 2802.png

हम लिख सकते हैं:

2807.png

अथवा, v dv = a dx

दोनों पक्षों के समाकलन से

2812.png

2820.png

2826.png

इस विधि का लाभ यह है कि इसका प्रयोग असमान त्वरण वाले गति के लिए भी कर सकते हैं।

अब हम उपरोक्त समीकरणों का उपयोग कुछ महत्त्वपूर्ण उदाहरणों में करेंगे ।

¯ उदाहरण 3.4 किसी बहुमंजिले भवन की ऊपरी छत से कोई गेंद 20 m s–1 के वेग से ऊपर की ओर ऊर्ध्वाधर दिशा में फेंकी गई है । जिस बिंदु से गेंद फेंकी गई है धरती से उसकी ऊँचाई 25.0 m है । (a) गेंद कितनी ऊपर जाएगी ?, तथा (b) गेंद धरती से टकराने के पहले कितना समय लेगी? g = 10 m s–2

हल (a) y अक्ष को चित्र 3.13 में दिखाए गए अनुसार ऊर्ध्वाधर दिशा में ऊपर की ओर इस प्रकार चुनते हैं कि अक्ष का शून्य बिंदु धरती पर हो ।

अब, vo = + 20 m s–1,

a = g = –10 m s–2,

v = 0 m s–1

यदि फेंके गए बिंदु से गेंद y ऊँचाई तक जाती है तो समीकरण

v2 = 2831.png + 2a(y y0) से हमें निम्नलिखित परिणाम मिलेगा-

0 = (20)2 + 2(–10)(y y0), हल करने पर,

y y0 = 20 m

(b) इस खण्ड का उत्तर हम दो प्रकार से प्राप्त कर सकते हैं । इन दोनों विधियों को ध्यानपूर्वक समझें ।

1931.png


चित्र 3.13

पहली विधि: इसमें, हम गेंद के मार्ग को दो भागों में विभाजित करते हैं: ऊपर की ओर गति (A से B) तथा नीचे की ओर गति (B से C) तथा संगत समय t1t2 निकाल लेते हैं । क्योंकि B पर वेग शून्य है, इसलिए:

v =v0 + at

0 =20 10 t1

या t1 =2 s

इस समय में गेंद बिंदु A से B पर पहुंचती है । B अर्थात अधिकतम ऊँचाई से गेंद गुरुत्वजनित त्वरण से मुक्त रूप से नीचे की ओर गिरती है । क्योंकि गेंद y की ऋणात्मक दिशा के अनुदिश चलती है, इसलिए निम्नलिखित समीकरण का उपयोग करके हम t2 का मान निकाल लेते हैं-

2836.png

हमें y0 = 45 m दिया है तथा y = 0, v0= 0, a = g = –10 m s–2

0 = 45 +(1/2) (–10) t22

अतः t2 = 3 s

इसलिए धरती पर टकराने के पहले गेंद द्वारा लिया गया कुल समय t1 + t2 = 2 s + 3 s = 5 s होगा ।

दूसरी विधि: मूल बिंदु के सापेक्ष गेंद के प्रारंभिक तथा अंतिम स्थितियों के निर्देशांकों को निम्नलिखित समीकरण में उपयोग करके हम गेंद द्वारा लिए गए कुल समय की गणना कर सकते हैं:

2841.png

y = 0 m, y0 = 25 m, v0 = 20 m s–1, a = –10 m s–2, t = ?

0 = 25 + 20 t + (1/2) (–10)t2

या 5t2 20t 25 = 0

t के लिए यदि इस द्विघाती समीकरण को हल करें, तो

t = 5 s

ध्यान दीजिए कि दूसरी विधि पहली से श्रेष्ठ है क्योंकि इसमें हमें गति के पथ की चिंता नहीं करनी है क्योंकि वस्तु स्थिर त्वरण से गतिमान है । °

¯ उदाहरण 3.5 मुक्त पतन: स्वतंत्रतापूर्वक नीचे की ओर गिरती हुई वस्तु की गति का वर्णन कीजिए । वायुजनित प्रतिरोध की उपेक्षा की जा सकती है ।

हल यदि धरती की सतह से थोड़ी ऊंचाई पर से कोई वस्तु छोड़ दी जाए तो वह पृथ्वी की ओर गुरुत्व बल के कारण त्वरित होगी। गुरुत्वजनित त्वरण को हम g से व्यक्त करते हैं । यदि वस्तु पर वायु के प्रतिरोध को हम नगण्य मानें तो हम कहेंगे कि वस्तु का पतन मुक्त रूप से हो रहा है । यदि गिरती हुई वस्तु द्वारा चली गई दूरी पृथ्वी की त्रिज्या की तुलना में बहुत कम है, तो हम g के मान को स्थिर अर्थात 9.8 m s–2 ले सकते हैं। इस प्रकार मुक्त पतन एकसमान त्वरण वाली गति का एक उदाहरण है ।

हम यह मानेंगे कि वस्तु की गति -y दिशा में है, क्योंकि ऊपर की दिशा को हम धनात्मक मानते हैं । गुरुत्वीय त्वरण की दिशा सदैव नीचे की ओर होती है, इसलिए इसे हम ऋणात्मक दिशा में लेेते हैं ।

अतएव, a = g = 9.8 m s–2

वस्तु को y = 0 स्थिति में विरामावस्था से गिराते हैं । इसलिए v0=0 और वस्तु के लिए गति संबंधी (3.11a) में दिए गए समीकरण निम्नलिखित प्रकार से व्यक्त किए जा सकते हैं-

2002.png

1986.png

1995.png

चित्र 3.14 मुक्त पतन में वस्तु की गति । (a) समय के अनुरूप वस्तु के त्वरण में परिवर्तन, (b)समय के अनुरूप वस्तु के वेग में परिवर्तन, (c) समय के अनुरूप वस्तु की स्थिति में परिवर्तन ।

v = 0 g t = –9.8 t m s–1

y = 0 ½ g t2 = –4.9 t2 m

v2 = 0 2 g y = –19.6 y m2 s–2

ये समीकरण वस्तु के वेग, और उसके द्वारा चली गई दूरी को समय के फलन के रूप में तथा दूरी के सापेक्ष उसके वेग में परिवर्तन को व्यक्त करते हैं । समय के सापेक्ष त्वरण, वेग तथा दूरी के परिवर्तन को चित्र 3.14(a), (b) तथा (c) में दिखलाया गया है । °

¯ उदाहरण 3.6 गैलीलियो का विषम अंक संबंधित नियम: इस नियम के अनुसार ‘‘विरामावस्था से गिरती हुई किसी वस्तु द्वारा समान समय अंतरालों में चली गई दूरियाँ एक दूसरे से उसी अनुपात में होती हैं जिस अनुपात में एक से प्रारंभ होने वाले विषम अंक [अर्थात 1ः 3ः 5ः 7,.......]’’। इस कथन को सिद्ध कीजिए ।

हल हम विरामावस्था से गिरती हुई किसी वस्तु के समय अंतराल को बहुत-से समान समय अंतरालों τ में विभक्त कर लेते हैं तथा क्रमशः इन समय अंतरालों में वस्तु द्वारा चली गई दूरी निकालते जाते हैं । इस स्थिति में वस्तु का प्रारंभिक वेग शून्य है, अतः

2846.png

इस समीकरण की सहायता से हम भिन्न-भिन्न समय अंतरालों 0, τ, , , ...... में वस्तु की स्थितियों की गणना कर सकते हैं जिन्हें सारणी 3.2 के दूसरे कॉलम में दिखाया है । यदि प्रथम समय अंतराल τ पर वस्तु का स्थिति निर्देशांक y0 लें (y0 = (–1/2)gτ2) तो आगे के समय अंतरालों के बाद वस्तु की स्थितियों को y0 के मात्रक में कॉलम तीन में दिए गए तरीके से व्यक्त कर सकते हैं । क्रमिक समय अंतरालों (प्रत्येक τ) में चली गई दूरियों को कॉलम चार में व्यक्त किया गया है । स्पष्ट है कि क्रमशः समय अंतरालों में वस्तु द्वारा चली गई दूरियाँ 1:3:5:7:9:11...... के सरल अनुपात में हैं जैसा कि अंतिम कॉलम में दिखाया गया है ।

इस नियम को सर्वप्रथम गैलीलियो गैलिली (1564-1642) ने प्रतिपादित किया था जिन्होंने मुक्त रूप से गिरती हुई वस्तु का पहली बार विधिवत परिमाणात्मक अध्ययन किया था ।

tbc

¯ उदाहरण 3.7 वाहनों की अवरोधन दूरी: अवरोधन दूरी से हमारा अभिप्राय उस दूरी से है जो गतिमान वस्तु ब्रेक लगाने के कारण रुकने से पहले चल चुकी होती है । सड़क पर गतिमान वाहनों की सुरक्षा के संबंध में यह एक महत्त्वपूर्ण कारक है । यह दूरी वाहन के प्रारंभिक वेग (vo) तथा उसके ब्रेक की क्षमता या ब्रेक लगाए जाने के परिणामस्वरूप वाहन में उत्पन्न मंदन a पर निर्भर करती है। किसी वाहन की अवरोधन दूरी के लिए vo तथा a के पदों में व्यंजक निकालिए ।

हल मान लीजिए कि वाहन रुकने के पूर्व ds दूरी चल चुका है । गति संबंधी समीकरण v2 = v02 + 2ax में यदि अंतिम वेग v = 0 तो अवरोधन दूरी होगी। अतः अवरोधन दूरी वाहन के प्रारंभिक वेग के वर्ग के समानुपाती होती है । यदि प्रारंभिक वेग को दूना कर दिया जाए तो उसी मंदन के लिए अवरोधन दूरी चार गुनी हो जाएगी।

2851.png


कार के किसी विशिष्ट मॉडल के लिए विभिन्न वेगों 11, 15, 20 तथा 25 m s–1 के संगत अवरोधन दूरियाँ क्रमशः 10 m, 20 m, 34 m तथा 50 m पाई गई हैं जो उपरोक्त समीकरण से प्राप्त मानों के लगभग संगत हैं ।

कुछ क्षेत्रों, जैसे किसी विद्यालय के निकट वाहनों की चाल की सीमा के निर्धारण में अवरोधन दूरी का ज्ञान एक महत्त्वपूर्ण कारक होता है । °

¯ उदाहरण 3.8 प्रतिक्रिया काल: कभी-कभी हमारे सामने एेसी परिस्थिति पैदा हो जाती है कि हमसे तत्क्षण कार्यवाही की अपेक्षा की जाती है किंतु अनुक्रिया व्यक्त करने में हमसे कुछ समय लग जाता है । प्रतिक्रिया काल किसी व्यक्ति को कोई घटनाक्रम देखने में, उसके विषय में सोचने में तथा कार्यवाही करने में लगने वाला समय है । उदाहरणस्वरूप, मान लीजिए कि कोई व्यक्ति सड़क पर कार चला रहा है और अचानक रास्ते में एक लड़का सामने आ जाता है तो कार में तेजी से ब्रेक लगाने के पहले व्यक्ति को जो समय लग जाता है, उसे प्रतिक्रिया काल कहेंगे । प्रतिक्रिया काल परिस्थिति की जटिलता एवं व्यक्ति विशेष पर निर्भर करता है ।

आप स्वयं का प्रतिक्रिया काल एक साधारण प्रयोग द्वारा माप सकते हैं । आप अपने मित्र को एक रूलर दें और उससे कहें कि वह आपके हाथ के अंगूठे और तर्जनी के बीच की खाली जगह से रूलर ऊर्ध्वाधर दिशा में गिरा दे (चित्र 3.15) । ज्योंही रूलर को छोड़ा जाए आप उसे पकड़ लें । इन दोनों घटनाओं (रूलर को छोड़ने तथा आपके द्वारा पकड़ने) के बीच लगे समय tr तथा रूलर द्वारा चली गई दूरी d को नाप लें । किसी विशेष उदाहरण में d = 21.0 cm है तो प्रतिक्रिया काल की गणना कीजिए ।

हल रूलर मुक्त रूप से गिरता है, अतः v0 = 0, a = g = –9.8 ms–2 प्रतिक्रिया काल tr तथा तय की गई दूरी (d) में संबंध है,

2856.png

या 2861.png

यदि d = 21.0 cm और g = 9.8 ms–2 है, तो

2866.png

chr

चित्र 3.15 प्रतिक्रिया काल का मापन ।

3.7 आपेक्षिक वेग

आपको रेलगाड़ी में यात्रा करने तथा यात्रा के दौरान यह देखने का अवसर मिला होगा कि एक दूसरी रेलगाड़ी जो आपकी ही दिशा में गतिमान है, आपसे आगे निकल जाती है । क्योंकि यह रेलगाड़ी आपसे आगे निकल जाती है इसलिए यह आपकी रेलगाड़ी से अधिक तीव्र गति से चल रही है । परंतु यह आपको उस व्यक्ति की अपेक्षा धीमी चलती दिखाई दे रही होगी, जो धरती पर खड़ा होकर दोनों रेलगाड़ियों को देख रहा है । यदि धरती के सापेक्ष दोनों रेलगाड़ियों का वेग समान है तो आपको एेसा लगेगा कि दूसरी गाड़ी बिलकुल भी नहीं चल रही है । इन अनुभवों को समझने के लिए अब हम आपेक्षिक वेग की संकल्पना को प्रस्तुत करते हैं ।

एेसी दो वस्तुओं AB पर विचार कीजिए जो एक-विमा (मान लीजिए कि x-अक्ष) के अनुदिश औसत वेगों vA तथा vB से गतिमान हैं । (जब तक विशेष रूप से उल्लेेखित न हो इस अध्याय में वेगों को धरती के सापेक्ष व्यक्त किया गया है) । यदि t=0 क्षण पर वस्तु AB की स्थितियाँ क्रमशः xA(0) तथा xB(0) हों, तो किसी अन्य क्षण t पर ये स्थितियाँ निम्नवत होंगी:

xA(t) = xA(0) + vAt (3.12a)

xB(t) = xB(0) + vBt (3.12b)

वस्तु A तथा वस्तु B के मध्य विस्थापन

xBA(t) = xB(t) xA(t)

= [xB(0) xA(0)] + (vBvA)t (3.13)

होगा । समीकरण (3.13) की हम आसानी से व्याख्या कर सकते हैं । इस समीकरण से यह मालूम पड़ता है कि जब वस्तु A से देखते हैं तो वस्तु B का वेग vBvA होता है क्योंकि A से B तक विस्थापन एकांक समय में vBvA की दर से अनवरत बदलता जाता है । अतः हम यह कहते हैं कि वस्तु B का वेग वस्तु A के सापेक्ष vBvA होता हैः

vBA = vBvA (3.14a)

इसी प्रकार वस्तु A का वेग वस्तु B के सापेक्ष

vAB = vAvB (3.14b)

होगा । इससे यह निकलता है कि,

vBA = vAB (3.14c)

2871.png 

चित्र 3.16 समान वेग से गतिमान वस्तुओं A B के लिए स्थिति-समय ग्राफ ।

अब हम कुछ विशेष परिस्थितियों पर विचार करेंगे:

(a) यदि vB = vA, vB vA= 0, तो समीकरण (3.13) से xB(t)–xA(t) = xB(0) xA(0) । इसका आशय यह है कि दोनों वस्तुएँ एक दूसरे से सदैव स्थिर दूरी (xB(0) xA(0)) पर हैं और उनके स्थिति-समय ग्राफ परस्पर समांतर सरल रेखाएँ होती हैं, जैसा चित्र 3.16 से दर्शाया गया है । इस उदाहरण में आपेक्षिक वेग vAB या vBA शून्य है ।

(b) यदि vA > vB, vB vA ऋणात्मक है । एक वस्तु के ग्राफ का ढाल दूसरी वस्तु के ग्राफ के ढाल की अपेक्षा अधिक है । दोनों ग्राफ एक उभयनिष्ठ बिंदु पर मिलते हैं । उदाहरण के तौर पर यदि vA = 20 m s–1 एवं xA(0) = 10 m; तथा vB = 10 m s-1 और xB(0) = 40 m हों तो जिस क्षण पर दोनों वस्तु एक दूसरे से मिलती हैं वह t = 3 s होगा (चित्र 3.17) । इस क्षण वे दोनों वस्तुएँ xA(t) = xB(t) = 70 m पर होंगी । इस प्रकार इस क्षण पर वस्तु A वस्तु B से आगे निकल जाएगी । इस उदाहरण में vBA = 10 m s–1 20 m s–1 = –10 m s–1 = vAB

2108.png

चित्र 3.17 असमान वेगों से गतिमान वस्तुओं के स्थिति-समय ग्राफ जिसमें मिलने का समय दर्शाया गया है ।



(c) मान लीजिए कि vAvB विपरीत चिह्नों के हैं । उदाहरणस्वरूप, उपरोक्त उदाहरण में यदि वस्तु A स्थिति xA(0)=10 m से 20 m s–1 के वेग से तथा वस्तु B स्थिति xB(0) = 40 m से –10 m s–1 वेग से चलना प्रारंभ करती हैं तो वे t=1 s (चित्र 3.18) पर मिलती हैं । A के सापेक्ष B का वेग, vBA = [–10–(20)] m s–1 = –30 m s–1= vAB होगा । इस उदाहरण में, vBA या vAB का परिमाण (=30 m s–1) वस्तु A या B के वेग के परिमाण से अधिक है । यदि विचाराधीन वस्तुएंँ दो रेलगाड़ियाँ हैं तो उस व्यक्ति के लिए जो किसी एक रेलगाड़ी में बैठा है, दूसरी रेलगाड़ी बहुत तेज चलती हुई प्रतीत होती है।

ध्यान दीजिए कि समीकरण (3.14) तब भी सही होगी जब vA और vB तात्क्षणिक वेगों को व्यक्त करते हैं ।

2099.png

चित्र 3.18 परस्पर विपरीत दिशाओं में गतिमान दो वस्तुओं के स्थिति-समय ग्राफ जिसमें दोनों के मिलने का समय दर्शाया गया है ।


उदाहरण 3.9 दो समांतर रेल पटरियाँ उत्तर-दक्षिण दिशा में हैं । एक रेलगाड़ी A उत्तर दिशा में 54 km/h की चाल से गतिमान है तथा दूसरी रेलगाड़ी B दक्षिण दिशा में 90 km/h की चाल से चल रही है ।

(a) A के सापेक्ष B का आपेक्षिक वेग निकालिए,

(b) B के सापेक्ष पृथ्वी का आपेक्षिक वेग निकालिए,

(c) रेलगाड़ी A की छत पर गति की विपरीत दिशा में (रेलगाड़ी A के सापेक्ष 18 km/h–1 के वेग से) दौड़ते हुए उस बंदर के वेग की गणना कीजिए जो पृथ्वी पर खड़े व्यक्ति द्वारा देखा जा रहा है ।

हल (a) x-अक्ष की धनात्मक दिशा को दक्षिण से उत्तर की ओर चुनिए । तब,

vA = +54 km/h–1 = 15 m s–1

vB = –90 km/h–1 = –25 m s–1

A के सापेक्ष B का आपेक्षिक वेग vBvA = 40 m s-1 होगा । इसका अभिप्राय यह है कि रेलगाड़ी B रेलगाड़ी A के सापेक्ष उत्तर से दक्षिण दिशा में 40 m s–1 की गति से चलती प्रतीत होगी ।

(b) B के सापेक्ष पृथ्वी का आपेक्षिक वेग = 0 vB = 25 m s–1

(c) मान लीजिए कि पृथ्वी के सापेक्ष बंदर का वेग vM है । इसलिए A के सापेक्ष बंदर का वेग vMA = vMvA = –18km h–1
= –5 m s–1। फलस्वरूप, vM = (15–5) m s–1 = 10m s–1 °


सारांश

1. यदि किसी वस्तु की स्थिति समय के साथ बदलती है तो हम कहते हैं कि वस्तु गतिमान है। एक सरल रैखिक गति में वस्तु की स्थिति को सुगमता के दृष्टिकोण से चुने गए किसी मूल बिंदु के सापेक्ष निर्दिष्ट किया जा सकता है । मूल बिंदु के दायीं ओर की स्थितियों को धनात्मक तथा बायीं ओर की स्थितियों को ऋणात्मक कहा जाता है ।

2. किसी वस्तु द्वारा चली गई दूरी की लंबाई को पथ-लंबाई के रूप में परिभाषित करते हैं ।

3. वस्तु की स्थिति में परिवर्तन को हम विस्थापन कहते हैं और इसे x से निरूपित करते हैं;

x = x2 x1

x1 और x2 वस्तु की क्रमशः प्रारंभिक तथा अंतिम स्थितियाँ हैं ।

पथ-लंबाई उन्हीं दो बिंदुओं के बीच विस्थापन के परिणाम के बराबर या उससे अधिक हो सकती है ।

4. जब कोई वस्तु समान समय अंतराल में समान दूरियाँ तय करती है तो एेसी गति को एकसमान गति कहते हैं । यदि एेसा नहीं है तो गति असमान होती है ।

5. विस्थापन की अवधि के समय अंतराल द्वारा विस्थापन को विभाजित करने पर जो राशि प्राप्त होती है, उसे औसत वेग कहते हैं तथा इसे 2924.png द्वारा चिह्नित करते हैं;

2929.png 

x t ग्राफ में किसी दिए गए अंतराल की अवधि में औसत वेग उस सरल रेखा की प्रवणता है जो समय अंतराल की प्रांरभिक एवं अंतिम स्थितियों को जोड़ती है ।

6. वस्तु की यात्रा की अवधि में चली गई कुल पथ-लंबाई एवं इसमें लगे समय अंतराल अनुपात को औसत चाल कहते हैं । किसी वस्तु की औसत चाल किसी दिए गए समय अन्तराल में उसके औसत वेेग के परिणाम के बराबर अथवा अधिक होती है ।

7. जब समय अतंराल t अत्यल्प हो तो वस्तु के औसत वेग के सीमान्त मान को तात्क्षणिक वेग या केवल वेग कहते हैं:

2934.png 

किसी क्षण वस्तु का वेग उस क्षण स्थान समय-ग्राफ की प्रवणता के बराबर होता है ।

8. वस्तु के वेग में परिवर्तन को संगत समय अंतराल से विभाजित करने पर जो राशि प्राप्त होती है, उसे औसत त्वरण कहते हैं:

2939.png 

9. जब समय अंतराल अत्यल्प t0 हो तो, वस्तु के औसत त्वरण के सीमान्त मान को तात्क्षणिक त्वरण या केवल त्वरण कहते हैं:

2944.png 

किसी क्षण वस्तु का त्वरण उस क्षण वेग-समय ग्राफ की प्रवणता के बराबर होता है । एकसमान गति के लिए त्वरण शून्य होता है तथा x - t ग्राफ समय-अक्ष पर आनत एक सरल रेखा होती है । इसी प्रकार एकसमान गति के लिए v - t ग्राफ समय-अक्ष के समांतर सरल रेखा होती है । एकसमान त्वरण के लिए x - t ग्राफ परवलय होता है जबकि v - t ग्राफ समय-अक्ष के आनत एक सरल रेखा होती है ।

10. किन्हीं दो क्षणों t1 तथा t2 के मध्य खींचे गए वेग-समय वक्र के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल वस्तु के विस्थापन के बराबर होता है ।

11. एकसमान त्वरण से गतिमान वस्तु के लिए कुछ सामान्य समीकरणों का एक समूह होता है जिससे पाँच राशियाँ यथा विस्थापन x, तत्संबंधित समय t, प्रारंभिक वेग vo, अंतिम वेग v तथा त्वरण a एक दूसरे से संबंधित होते हैं । इन समीकरणों को वस्तु के शुद्धगतिक समीकरणों के नाम से जाना जाता है ः

v = v0 + at

2949.png

2954.png

इन समीकरणों में क्षण t = 0 पर वस्तु की स्थिति x = 0 ली गई है । यदि वस्तु x = xo से चलना प्रारंभ करे तो उपर्युक्त समीकरणों में x के स्थान पर (x xo) लिखेंगे ।

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विचारणीय विषय

1. सामान्यतया दो बिंदुओं के मध्य किसी वस्तु द्वारा चली गई पथ-लंबाई विस्थापन के परिमाण के बराबर नहीं होती । विस्थापन छोर के बिंदुओं पर निर्भर करता है जबकि पथ-लंबाई (जैसा नाम से पता चलता है) वास्तविक पथ पर निर्भर करती है। एक विमा में दोनों राशियाँ तभी बराबर होती हैं जब वस्तु गति की अवधि में अपनी दिशा नहीं बदलती है । अन्य सभी उदाहरणों में पथ-लंबाई विस्थापन के परिमाण से अधिक होती है ।

2. उपरोक्त बिंदु 1 के अनुसार किसी दिए गए समय अंतराल के लिए वस्तु की औसत चाल का मान या तो औसत वेग के परिमाण के बराबर होता है या उससे अधिक होता है । दोनों तभी बराबर होंगे जब पथ-लंबाई विस्थापन के परिमाण के बराबर होगी।

3. मूल बिंदु तथा किसी अक्ष की धनात्मक दिशा का चयन अपनी रुचि का विषय है । आपको सबसे पहले इस चयन का उल्लेख कर देना चाहिए और इसी के बाद राशियों; जैसे- विस्थापन, वेग तथा त्वरण के चिह्नों का निर्धारण करना चाहिए ।

4. यदि किसी वस्तु की चाल बढ़ती जा रही है तो त्वरण वेग की दिशा में होगा परंतु यदि चाल घटती जाती है तो त्वरण वेग की विपरीत दिशा में होगा । यह कथन मूल बिंदु तथा अक्ष के चुनाव पर निर्भर नहीं करता ।

5. त्वरण के चिह्न से हमें यह पता नहीं चलता कि वस्तु की चाल बढ़ रही है या घट रही है । त्वरण का चिह्न (जैसा कि उपरोक्त बिंदु 3 में बतलाया गया है) अक्ष के धनात्मक दिशा के चयन पर निर्भर करता है । उदाहरण के तौर पर यदि ऊपर की ओर ऊर्ध्वाधर दिशा को अक्ष की धनात्मक दिशा माना जाए तो गुरुत्वजनित त्वरण ऋणात्मक होगा । यदि कोई वस्तु गुरुत्व के कारण नीचे की ओर गिर रही है तो भी वस्तु की चाल बढ़ती जाएगी यद्यपि त्वरण का मान ऋणात्मक है। वस्तु ऊपर की दिशा में फेंकी जाए तो उसी ऋणात्मक (गुरुत्वजनित) त्वरण के कारण वस्तु की चाल में कमी आती जाएगी।

6. यदि किसी क्षण वस्तु का वेग शून्य है तो यह आवश्यक नहीं है कि उस क्षण उसका त्वरण भी शून्य हो । कोई वस्तु क्षणिक रूप से विरामावस्था में हो सकती है तथापि उस क्षण उसका त्वरण शून्य नहीं होगा । उदाहरणस्वरूप, यदि किसी वस्तु को ऊपर की ओर फेंका जाए तो शीर्षस्थ बिंदु पर उसका वेग तोे शून्य होगा परंतु इस अवसर पर उसका त्वरण गुरुत्वजनित त्वरण ही होगा ।

7. गति संबंधी शुद्धगतिक समीकरणों [समीकरण (3.11)] की विभिन्न राशियाँ बीजगणितीय हैं अर्थात वे धनात्मक या ऋणात्मक हो सकती हैं । ये समीकरण सभी परिस्थितियों (स्थिर त्वरण वाली एकविमीय गति) के लिए उपयुक्त होते हैं बशर्ते समीकरणों में विभिन्न राशियों के मान उपयुक्त चिह्नों के साथ रखे जाएँ ।

8. तात्क्षणिक वेग तथा त्वरण की परिभाषाएँ [समीकरण (3.3) तथा समीकरण (3.5)] यथार्थ हैं और सदैव सही हैं जबकि शुद्धगतिक समीकरण [समीकरण (3.11)] उन्हीं गतियों के लिए सही है जिनमें गति की अवधि में त्वरण का परिमाण और दिशा स्थिर रहते हैं ।

अभ्यास

3.1 नीचे दिए गए गति के कौन से उदाहरणों में वस्तु को लगभग बिंदु वस्तु माना जा सकता है:

(a) दो स्टेशनों के बीच बिना किसी झटके के चल रही कोई रेलगाड़ी ।

(b) किसी वृत्तीय पथ पर साइकिल चला रहे किसी व्यक्ति के ऊपर बैठा कोई बंदर ।

(c) जमीन से टकरा कर तेजी से मुड़ने वाली क्रिकेट की कोई फिरकती गेंद ।

(d) किसी मेज के किनारे से फिसल कर गिरा कोई बीकर ।

3.2 दो बच्चे A व B अपने विद्यालय O से लौट कर अपने-अपने घर क्रमशः P तथा Q को जा रहे हैं । उनके स्थिति-समय (x - t ) ग्राफ चित्र 3.19 में दिखाए गए हैं । नीचे लिखे कोष्ठकों में सही प्रविष्टियों को चुनिए:

(a) B/A की तुलना में A/B विद्यालय से निकट रहता है ।

(b) B/A की तुलना में A/B विद्यालय से पहले चलता है ।

(c) B/A की तुलना A/B तेज चलता है ।

(d) A और B घर (एक ही/भिन्न) समय पर पहुँचते हैं ।

(e) A/B सड़क पर B/A से (एक बार/दो बार) आगे हो जाते हैं ।

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चित्र 3.19

3.3 एक महिला अपने घर से प्रातः 9.00 बजे 2.5 km दूर अपने कार्यालय के लिए सीधी सड़क पर 5 km h–1 चाल से चलती है । वहाँ वह सायं 5.00 बजे तक रहती है और 25 km h–1 की चाल से चल रही किसी अॉटो रिक्शा द्वारा अपने घर लौट आती है । उपयुक्त पैमाना चुनिए तथा उसकी गति का x - t ग्राफ खींचिए ।

3.4 कोई शराबी किसी तंग गली में 5 कदम आगे बढ़ता है और 3 कदम पीछे आता है, उसके बाद फिर 5 कदम आगे बढ़ता है और 3 कदम पीछे आता है, और इसी तरह वह चलता रहता है । उसका हर कदम 1m लंबा है और 1s समय लगता है । उसकी गति का x - t ग्राफ खींचिए । ग्राफ से तथा किसी अन्य विधि से यह ज्ञात कीजिए कि वह जहां से चलना प्रारंभ करता है वहाँ से 13 m दूर किसी गड्ढे में कितने समय पश्चात गिरता है ।

3.5 कोई जेट वायुयान 500 km h–1 की चाल से चल रहा है और यह जेट यान के सापेक्ष 1500 km h–1 की चाल से अपने दहन उत्पादों को बाहर निकालता है । जमीन पर खड़े किसी प्रेक्षक के सापेक्ष इन दहन उत्पादों की चाल क्या होगी ?

3.6 सीधे राजमार्ग पर कोई कार 126 km h–1 की चाल से चल रही है । इसे 200 m की दूरी पर रोक दिया जाता है । कार के मंदन को एकसमान मानिए और इसका मान निकालिए । कार को रुकने में कितना समय लगा ?

3.7 दो रेलगाड़ियाँ A व B दो समांतर पटरियों पर 72 km h–1 की एकसमान चाल से एक ही दिशा में चल रही हैं । प्रत्येक गाड़ी 400 m लंबी है और गाड़ी A गाड़ी B से आगे है । B का चालक A से आगे निकलना चाहता है तथा 1m s–2 से इसे त्वरित करता है । यदि 50 s के बाद B का गार्ड A के चालक से आगे हो जाता है तो दोनों के बीच आरंभिक दूरी कितनी थी ?

3.8 दो-लेन वाली किसी सड़क पर कार A 36 km h–1 की चाल से चल रही है । एक दूसरे की विपरीत दिशाओं में चलती दो कारें B व C जिनमें से प्रत्येक की चाल 54 km h–1 है, कार A तक पहुँचना चाहती हैं । किसी क्षण जब दूरी AB दूरी AC के बराबर है तथा दोनों 1km है, कार B का चालक यह निर्णय करता है कि कार C के कार A तक पहुँचने के पहले ही वह कार A से आगे निकल जाए । किसी दुर्घटना से बचने के लिए कार B का कितना न्यूनतम त्वरण जरूरी है ?

3.9 दो नगर A व B नियमित बस सेवा द्वारा एक दूसरे से जुड़े हैं और प्रत्येक T मिनट के बाद दोनों तरफ बसें चलती हैं । कोई व्यक्ति साइकिल से 20 km h–1 की चाल से A से B की तरफ जा रहा है और यह नोट करता है कि प्रत्येक 18 मिनट के बाद एक बस उसकी गति की दिशा में तथा प्रत्येक 6 मिनट बाद उसके विपरीत दिशा में गुजरती है । बस सेवाकाल T कितना है और बसें सड़क पर किस चाल (स्थिर मानिए) से चलती हैं ?

3.10 कोई खिलाड़ी एक गेंद को ऊपर की ओर आरंभिक चाल 29 m s–1 से फेंकता है,

(i) गेंद की ऊपर की ओर गति के दौरान त्वरण की दिशा क्या होगी ?

(ii) इसकी गति के उच्चतम बिंदु पर गेंद के वेेग व त्वरण क्या होंगे ?

(iii) गेंद के उच्चतम बिंदु पर स्थान व समय को x = 0 व t = 0 चुनिए, ऊर्ध्वाधर नीचे की ओर की दिशा को x-अक्ष की धनात्मक दिशा मानिए । गेंद की ऊपर की व नीचे की ओर गति के दौरान स्थिति, वेग व त्वरण के चिह्न बताइए ।

(iv) किस ऊँचाई तक गेंद ऊपर जाती है और कितनी देर के बाद गेंद खिलाड़ी के हाथों में आ जाती है ?

[g = 9.8 m s–2 तथा वायु का प्रतिरोध नगण्य है ।]

3.11 नीचे दिए गए कथनों को ध्यान से पढ़िए और कारण बताते हुए व उदाहरण देते हुए बताइए कि वे सत्य हैं या असत्य,

एकविमीय गति में किसी कण की

(a) किसी क्षण चाल शून्य होने पर भी उसका त्वरण अशून्य हो सकता है ।

(b) चाल शून्य होने पर भी उसका वेग अशून्य हो सकता है ।

(c) चाल स्थिर हो तो त्वरण अवश्य ही शून्य होना चाहिए ।

(d) चाल अवश्य ही बढ़ती रहेगी, यदि उसका त्वरण धनात्मक हो ।

3.12 किसी गेंद को 90 m की ऊँचाई से फर्श पर गिराया जाता है । फर्श के साथ प्रत्येक टक्कर में गेंद की चाल 1/10 कम हो जाती है । इसकी गति का t = 0 से 12 s के बीच चाल-समय ग्राफ खींचिए ।

3.13 उदाहरण सहित निम्नलिखित के बीच के अंतर को स्पष्ट कीजिए:

(a) किसी समय अंतराल में विस्थापन के परिमाण (जिसे कभी-कभी दूरी भी कहा जाता है) और किसी कण द्वारा उसी अंतराल के दौरान तय किए गए पथ की कुल लंबाई ।

(b) किसी समय अंतराल में औसत वेग के परिमाण और उसी अंतराल में औसत चाल (किसी समय अंतराल में किसी कण की औसत चाल को समय अंतराल द्वारा विभाजित की गई कुल पथ-लंबाई के रूप में परिभाषित किया जाता है) । प्रदर्शित कीजिए कि (a) व (b) दोनों में ही दूसरी राशि पहली से अधिक या उसके बराबर है । समता का चिह्न कब सत्य होता है ? (सरलता के लिए केवल एकविमीय गति पर विचार कीजिए ।)

3.14 कोई व्यक्ति अपने घर से सीधी सड़क पर 5 km h–1 की चाल से 2.5 km दूर बाजार तक पैदल चलता है । परंतु बाजार बंद देखकर वह उसी क्षण वापस मुड़ जाता है तथा 7.5 km h–1 की चाल से घर लौट आता है । समय अंतराल (i) 0 - 30 मिनट, (ii) 0 - 50 मिनट, (iii) 0 - 40 मिनट की अवधि में उस व्यक्ति (a) के माध्य वेग का परिमाण, तथा (b) का माध्य चाल क्या है? (नोट: आप इस उदाहरण से समझ सकेंगे कि औसत चाल को औसत-वेग के परिमाण के रूप में परिभाषित करने की अपेक्षा समय द्वारा विभाजित कुल पथ-लंबाई के रूप में परिभाषित करना अधिक अच्छा क्यों है । आप थक कर घर लौटे उस व्यक्ति को यह बताना नहीं चाहेंगे कि उसकी औसत चाल शून्य थी ।)

3.15 हमने अभ्यास 3.13 तथा 3.14 में औसत चाल व औसत वेग के परिमाण के बीच के अंतर को स्पष्ट किया है । यदि हम तात्क्षणिक चाल व वेग के परिमाण पर विचार करते हैं तो इस तरह का अंतर करना आवश्यक नहीं होता । तात्क्षणिक चाल हमेशा तात्क्षणिक वेग के बराबर होती है । क्यों ?

3.16 चित्र 3.20 में (a) से (d) तक के ग्राफों को ध्यान से देखिए और देखकर बताइए कि इनमें से कौन-सा ग्राफ एकविमीय गति को संभवतः नहीं दर्शा सकता ।

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चित्र 3.20

3.17 चित्र 3.21 में किसी कण की एकविमीय गति का x - t ग्राफ दिखाया गया है । ग्राफ से क्या यह कहना ठीक होगा कि यह कण t < 0 के लिए किसी सरल रेखा में और t > 0 के लिए किसी परवलीय पथ में गति करता है । यदि नहीं, तो ग्राफ के संगत किसी उचित भौतिक संदर्भ का सुझाव दीजिए ।

2305.png

चित्र 3.21


3.18 किसी राजमार्ग पर पुलिस की कोई गाड़ी 30 km/h की चाल से चल रही है और यह उसी दिशा में 192 km/h की चाल से जा रही किसी चोर की कार पर गोली चलाती है । यदि गोली की नाल मुखी चाल 150 m s-1 है तो चोर की कार को गोली किस चाल के साथ आघात करेगी ? 

(नोट: उस चाल को ज्ञात कीजिए जो चोर की कार को हानि पहुँचाने में प्रासंगिक हो) ।

3.19 चित्र 3.22 में दिखाए गए प्रत्येक ग्राफ के लिए किसी उचित भौतिक स्थिति का सुझाव दीजिए:

2222.png

चित्र 3.22

3.20 चित्र 3.23 में किसी कण की एकविमीय सरल आवर्ती गति के लिए x - t ग्राफ दिखाया गया है । (इस गति के बारे में आप अध्याय 14 में पढ़ेंगे) समय t = 0.3 s, 1.2 s, –1.2 s पर कण के स्थिति, वेग व त्वरण के चिह्न क्या होंगे ?

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चित्र 3.23

3.21 चित्र 3.24 किसी कण की एकविमीय गति का x - t ग्राफ

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चित्र 3.24

दर्शाता है । इसमें तीन समान अंतराल दिखाए गए हैं । किस अंतराल में औसत चाल अधिकतम है और किसमें न्यूनतम है ? प्रत्येक अंतराल के लिए औसत वेग का चिह्न बताइए । 

3.22 चित्र 3.25 में किसी नियत (स्थिर) दिशा के अनुदिश चल रहे कण का चाल-समय ग्राफ दिखाया गया है । इसमें तीन समान समय अंतराल दिखाए गए हैं । किस अंतराल में औसत त्वरण का परिमाण अधिकतम होगा ? किस अंतराल में औसत चाल अधिकतम होगी ?

धनात्मक दिशा को गति की स्थिर दिशा चुनते हुए तीनों अंतरालों में v तथा a के चिह्न बताइए । A, B, C, व D बिंदुओं पर त्वरण क्या होंगे ?

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चित्र 3.25

अतिरिक्त अभ्यास

3.23 कोई तीन पहिये वाला स्कूटर अपनी विरामावस्था से गति प्रारंभ करता है । फिर 10 s तक किसी सीधी सड़क पर 1m s-2 के एकसमान त्वरण से चलता है । इसके बाद वह एकसमान वेग से चलता है । स्कूटर द्वारा nवें सेकंड (n = 1, 2, 3........) में तय की गई दूरी को n के सापेेक्ष आलेखित कीजिए । आप क्या आशा करते हैं कि त्वरित गति के दौरान यह ग्राफ कोई सरल रेखा या कोई परवलय होगा ?

3.24 किसी स्थिर लिफ्ट में (जो ऊपर से खुली है) कोई बालक खड़ा है । वह अपने पूरे जोर से एक गेंद ऊपर की ओर फेंकता है जिसकी प्रारंभिक चाल 49 m s–1 है । उसके हाथों में गेंद के वापिस आने में कितना समय लगेगा ? यदि लिफ्ट ऊपर की ओर 5 m s-1 की एकसमान चाल से गति करना प्रारंभ कर दे और वह बालक फिर गेंद को अपने पूरे जोर से फेंकता तो कितनी देर में गेंद उसके हाथों में लौट आएगी ?

3.25 क्षैतिज में गतिमान कोई लंबा पट्टा (चित्र 3.26) 4 km/h की चाल से चल रहा है । एक बालक इस पर (पट्टेे के सापेक्ष) 9 km/h की चाल से कभी आगे कभी पीछे अपने माता-पिता के बीच दौड़ रहा है । माता व पिता के बीच 50 m की दूरी है । बाहर किसी स्थिर प्लेटफार्म पर खड़े एक प्रेक्षक के लिए, निम्नलिखित का मान प्राप्त करिए ।

(a) पट्टे की गति की दिशा में दौड़ रहे बालक की चाल,

(b) पट्टे की गति की दिशा के विपरीत दौड़ रहे बालक की चाल,

(c) बच्चे द्वारा (a) व (b) में लिया गया समय यदि बालक की गति का प्रेक्षण उसके माता या पिता करें तो कौन- सा उत्तर बदल जाएगा ?

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चित्र 3.26

3.26 किसी 200 m ऊँची खड़ी चट्टान के किनारे से दो पत्थरों को एक साथ ऊपर की ओर 15 m s–1 तथा 30 m s–1 की प्रारंभिक चाल से फेंका जाता है । इसका सत्यापन कीजिए कि नीचे दिखाया गया ग्राफ (चित्र 3.27) पहले पत्थर के सापेक्ष दूसरे पत्थर की आपेक्षिक स्थिति का समय के साथ परिवर्तन को प्रदर्शित करता है । वायु के प्रतिरोध को नगण्य मानिए और यह मानिए कि जमीन से टकराने के बाद पत्थर ऊपर की ओर उछलते नहीं । मान लिजिए g = 10 m s–2 । ग्राफ के रेखीय व वक्रीय भागों के लिए समीकरण लिखिए ।

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चित्र 3.27


3.27 किसी निश्चित दिशा के अनुदिश चल रहे किसी कण का चाल-समय ग्राफ चित्र 3.28 में दिखाया गया है । कण द्वारा
(a) t = 0 s से t = 10 s, (b) t = 2 s से 6 s के बीच तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए ।

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चित्र 3.28

(a) तथा (b) में दिए गए अंतरालों की अवधि में कण की औसत चाल क्या है ?

3.28 एकविमीय गति में किसी कण का वेग-समय ग्राफ चित्र 3.29 में दिखाया गया है:

2429.png

चित्र 3.29

नीचे दिए सूत्रों में t1 से t2 तक के समय अंतराल की अवधि में कण की गति का वर्णन करने के लिए कौन-से सूत्र सही हैं:

(i) x (t2) = x (t1) + v (t1)(t2 t1) + (1/2) a(t2 t1)2

(ii) v(t2) = v(t1) + a(t2 t1)

(iii) vaverage = [x(t2) x (t1)]/(t2 t1)

(iv) aaverage = [v(t2) v (t1)]/(t2 t1)

(v) x(t2) = x(t1) + vaverage (t2 t1) + (1/2) aaverage (t2 t1)2

(vi) x (t2) x (t1) = t- अक्ष तथा दिखाई गई बिंदुकित रेखा के बीच दर्शाए गए वक्र के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल ।

परिशिष्ट 3.1

कलन के अवयव

अवकल गणित

‘अवकल गुणांक’ अथवा ‘अवकलज’ की संकल्पना का उपयोग करके हम आसानी से वेग तथा त्वरण को परिभाषित कर सकते हैं । यद्यपि आप अवकलजों के विषय में विस्तार से गणित में अध्ययन करेेंगे, तथापि इस परिशिष्ट में हम संक्षेप मेें इस संकल्पना से आपको परिचित कराएँगे, ताकि आपको गति से संबद्ध भौतिक राशियों के वर्णन करने में सुविधा हो जाए ।

मान लीजिए हमारे पास कोई राशि y है जिसका मान किसी एकल चर x पर निर्भर करता है, तथा इस राशि को एक समीकरण द्वारा व्यक्त किया जाता है जो y को x के किसी विशिष्ट फलन के रूप मेें परिभाषित करती है । इसे इस प्रकार निरूपित करते हैं:

y = f (x) (1)

इस संबंध को फलन y = f(x) का ग्राफ खींचकर चित्र 3.30 (a) में दर्शाए अनुसार y तथा x को कार्तीय निर्देशांक (Cartesian coordinates) मानते हुए स्पष्ट रूप से देख सकते हैं ।

2959.png2972.png

चित्र 3.30

वक्र y = f(x) पर एक बिंदु P जिसके निर्देशांक (x, y) हैं तथा अन्य बिंदु जिसके निर्देशांक (x + x, y + y) हैं मान लीजिए । P तथा Q को मिलाने वाली सरल रेखा के ढाल को इस प्रकार दर्शाया जाता है,

2983.png (2)

अब अगर बिंदु Q को वक्र के अनुदिश बिंदु P की ओर लाया जाता है । इस प्रक्रिया में y तथा x घटते जाते हैं तथा शून्य की ओर अग्रसर होते जाते हैं, यद्यपि इनका अनुपात2994.pngअनिवार्य रूप से लुप्त नहीं होगा । जब y0, x0 है, तब रेखा PQ का क्या होगा ? आप यह देख सकते हैं कि यह रेखा चित्र 3.30 (b) में दर्शाए अनुसार वक्र के बिंदु P पर स्पर्श रेखा बन जाती है । इसका यह अर्थ हुआ कि tan θ बिंदु P पर स्पर्श रेखा के ढाल के सदृश होता जाता है । इसे m द्वारा निर्दिष्ट किया जाता है,

2999.png (3)

अनुपात y/x की सीमा, जैसे-जैसे x शून्य की ओर बढ़ता जाता है, x के सापेक्ष y का अवकलज कहलाता है तथा इसे dy/dx लिखते हैं । यह वक्र y = f(x) के बिंदु (x, y) पर स्पर्श रेखा के ढाल को निरूपित करता है ।

चूँकि y = f(x) तथा y + y = f (x + x), हम अवकलज की परिभाषा इस प्रकार लिख सकते हैं:

3004.png

नीचे फलनों के अवकलजों के लिए कुछ प्राथमिक सूत्र दिए गए हैं । इनमें u (x) तथा v (x), x के यादृच्छिक फलनों का निरूपण करते हैं तथा a और b नियत राशियों को निर्दिष्ट करते हैं, जो x पर निर्भर नहीं करतीं । कुल सामान्य फलनों के अवकलजों की सूची भी दी गई है ।

3020.png ; 3029.png

3034.png ; 3042.png

3054.png 

3062.png ; 3070.png

3075.png ; 3080.png

3085.png ;

3093.png 3098.png ; 3103.png

3108.png 

अवकलनों के पदों में तात्क्षणिक वेग तथा त्वरण की परिभाषा इस प्रकार करते हैं–

3114.png 

3119.png 

समाकलन-गणित

क्षेत्रफल की धारणा से आप भलीभाँति परिचित हैं । कुछ सरल ज्यामितीय आकृतियों के क्षेत्रफल के लिए सूत्र भी आपको ज्ञात हैं । उदाहरण के लिए, किसी आयत का क्षेत्रफल उसकी लंबाई और चौड़ाई का गुणनफल, तथा त्रिभुज का क्षेत्रफल उसके आधार तथा शीर्षलंब के गुणनफल का आधा होता है । परंतु किसी अनियमित आकृति का क्षेत्रफल ज्ञात करने की समस्या पर कैसे विचार किया जाए ? एेसी समस्याओं को हल करने के लिए समाकलन की गणितीय धारणा आवश्यक है ।

आइए, अब हम एक प्रत्यक्ष उदाहरण लेेते हैं। मान लीजिए गति करते किसी कण पर x-अक्ष के अनुदिश x= a से x = b तक कोई चर बल f (x) कार्य करता है । हमारी समस्या यह है कि इस बल द्वारा कण की गति की अवधि में किया गया कार्य (W) कैसे ज्ञात किया जाए । इस समस्या पर अध्याय 6 में विस्तार से चर्चा की गई है ।

चित्र 3.31 में x के साथ f (x) मेें परिवर्तन दर्शाया गया है । यदि बल अचर होता, तो किया गया कार्य चित्र 3.31 (i) में दर्शाए अनुसार मात्र क्षेत्रफल f (b-a) होगा । परंतु व्यापक प्रकरणों में, बल चर होता है ।

3124.png 

चित्र 3.31

इस वक्र [चित्र 3.31 (ii)] के नीचे के क्षेत्रफल का परिकलन करने के लिए एक युक्ति करते हैं जो निम्नलिखित है । x-अक्ष पर a से b तक के अंतराल को संख्या में बहुत अधिक (N) लघु-अंतरालों में विभाजित कर लेते हैं, जो इस प्रकार हैं: x0 (=a) से x1 तक, x1 से x2 तक, x2 से x3 तक,.......x N-1 से xN (=b) तक । इस प्रकार वक्र के नीचे का कुल क्षेत्रफल N पट्टियों में विभाजित हो जाता है । प्रत्येक पट्टी सन्निकटतः आयताकार है, चूँकि किसी पट्टी पर F(x) में परिवर्तन नगण्य है । चित्र 3.31 (ii) मेें दर्शायी गई iवीं पट्टी का सन्निकटतः क्षेत्रफल तब होगा,

3136.png 

यहाँ x पट्टी की चौड़ाई है जो हमने सभी पट्टियों के लिए समान ली है । आप उलझन में पड़ सकते हैं कि इस व्यंजक में हमें F(xi-1) लिखना चाहिए अथवा F(xi) तथा F(xi-1) का माध्य लिखना चाहिए । यदि संख्या N को बहुत-बहुत बड़ी (N→∞) लें, तो फिर इसका कोई महत्त्व नहीं रहेगा । क्योंकि तब पट्टियाँ इतनी पतली होंगी कि F(xi) तथा F(xi-1) के बीच का अंतर इतना कम होगा कि उसे नगण्य माना जा सकता है । तब वक्र के नीचे का कुल क्षेत्रफल,

3141.png 

इस योग की सीमा को, जब N→∞ हो, a से b तक F(x) का x पर समाकलन कहते हैं । इसे एक विशेष प्रतीक दिया गया है जिसे नीचे दर्शाया गया है–

 fc

समाकलन-चिह्न ∫ विस्तारित S जैसा दिखाई देता है । यह हमें याद दिलाता है कि मूल रूप से यह असंख्य पदों के योग की सीमा है ।

एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण गणितीय तथ्य यह है कि समाकलन, कुछ अर्थो मेें अवकलन का व्युत्क्रम है । मान लीजिए हमारे पास कोई फलन g (x) है जिसका अवकलन f (x) है, तब ji

फलन g (x) को f (x) का अनिश्चित समाकल कहते हैं तथा इसे इस प्रकार निर्दिष्ट किया जाता है

gx 

कोई समाकल जिसकी निम्न सीमा तथा उच्च सीमा ज्ञात हो, निश्चित समाकल कहलाता है । यह कोई संख्या होती है । अनिश्चित समाकल की कोई सीमा नहीं होती । यह एक फलन होता है । उपरोक्त प्रकरण के लिए गणित की एक मूल प्रमेय बताती है कि

bg

उदाहरण के लिए, मान लीजिए f (x) = x2, तथा हम x = 1 से x = 2 तक इसके निश्चित समाकल का मान ज्ञात करना चाहते हैं। वह फलन f (x) जिसका अवकलन x2 होता है, x3/3 है। अतः

nh

स्पष्ट है कि निश्चित समाकलों का मूल्यांकन करने के लिए हमें उसके तदनुरूपी अनिश्चित समाकलों को जानना आवश्यक है। कुछ सामान्य अनिश्चित समाकल इस प्रकार हैं–

3172.png 

3184.png

3195.png

अवकल गणित तथा समाकलन गणित का आरंभिक ज्ञान कठिन नहीं है तथा यहाँ आपको कलन की मूल धारणाओें से परिचित कराने का प्रयास किया गया है ।

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