अध्याय अपवाह तंत्रा आपने वषार् )तु में बहती नदियाँए नाले व वाहिकाएँ देखी होंगीए जो अतिरिक्त जल बहाकर ले जाती हैं। अगर ये वाहिकाएँ न होतीं तो बड़े पैमाने पर बाढ़ आ जाती। जहाँेँय वाहिकाए अवरू( या अस्पष्ट हैंए वहाँ़बाढ का आना एक सामान्य परिघटना है। निश्िचत वाहिकाओं के माध्यम से हो रहे जलप्रवाह को ‘अपवाह’ कहते हैं। इन वाहिकाओं के जाल को ‘अपवाह तंत्रा’कहा जाता है। किसी क्षेत्रा का अपवाह तंत्रा वहाँ के भूवैज्ञानिक समयावध्िए चट्टðानों की प्रवृफति एवं संरचनाए स्थलावृफतिए ढालए बहते जल की मात्रा और बहाव की अवध्ि का परिणाम है। क्या आपके शहर या गाँव के पास कोइर् नदी है? क्या आप कभी वहाँ नौकायन करने अथवा नहाने के लिए गए हैं? क्या यह नदी बारहमासी है या अल्पकालिक ;केवल वषार् )तु में पानी अन्यथा सूखीद्ध है? क्या आप जानते हैं कि नदी सदैव एक ही दिशा में क्यों बहती है? आपने भूेगाल की अन्य दो पाठ्यपुस्तकों में ढालों के बारे में पढ़ा होगा। तो क्या आप जल के एक दिशा से दूसरी दिशा में बहने का कारण बता सकते हैं? उत्तर में हिमालय तथा दक्ष्िाण में पश्िचमी घाट चित्रा 3.1: पवर्तीय क्षेत्रा की एक नदी से निकलने वाली नदियाँ पूवर् की ओर क्यों बहती हैं व बंगाल की खाड़ी में अपना जल विस£जत क्यों करती हैं? एक नदी विश्िाष्ट क्षेत्रा से अपना जल बहाकर लाती है जिसे ‘जलग्रहण’ ;ब्ंजबीउमदजद्ध क्षेैत्रा कहा जाता ह। एक नदी एवं उस की सहायक नदियों द्वारा अपवाहित मुख्य अपवाह प्रतिरूप ;पद्ध जो अपवाह प्रतिरूप पेड़ की शाखाओं के अनुरूप होए उसे वृक्षाकार ;क्मदकतपजपबद्धप्रतिरूप कहा जाता हैए जैसे उत्तरी मैदान की नदियाँ। ;पपद्ध जब नदियाँ किसी पवर्त से निकलकर सभी दिशाओं में बहती हैं, तो इसे अरीय ;त्ंकपंसद्धप्रतिरूप कहा जाता है।अमरकंटक पवर्त शृंखला से निकलने वाली नदियाँ इस अपवाह प्रतिरूप के अच्छे उदाहरण हैं। ;पपपद्ध जब मुख्य नदियाँ एक - दूसरे के समांतर बहती हों तथा सहायक नदियाँ उनसे समकोण पर मिलती हों, तो ऐसे प्रतिरूप को जालीनुमा ;ज्तमससपेद्धअपवाह प्रतिरूप कहते हैं। ;पअद्ध जब सभी दिशाओं से नदियाँ बहकर किसी झील या गतर् में विस£जत होती हंैए तो ऐसे अपवाह प्रतिरूप को अभ्िावेंफद्री ;ब्मदजतपचमजंसद्धप्रतिरूप कहते हैं। भूगोल भाग - प्ए अध्याय 5 ;राúशैúअúप्रúपú, 2006द्ध के प्रायोगिक कायर् में इन अपवाह प्रतिरूपों में से वुफछ को ढूँढिए।

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