अध्याय क्या आपने कभी सोचा है कि मिट्टðी की उवर्रता, गठन व स्वरूप अलग क्यों है? आपने यह भी सोचा होगा कि अलग - अलग स्थानों पर चट्टðानों के प्रकार भी भ्िान्न हैं। चट्टðानें व मिट्टðी आपस में संबंिात हैं क्योंकि असंगठित चट्टðानें वास्तव में मििðयाँ ही हैं। पृथ्वी के धरातल पर चट्टðानों व मििðयों में भ्िान्नता धरातलीय स्वरूप के अनुसार पाइर् जाती है। वतर्मान अनुमान के अनुसार पृथ्वी की आयु लगभग 46 करोड़ वषर् है। इतने लम्बे समय में अंतजार्त व बहिजार्त बलों से अनेक परिवतर्न हुए हैं। इन बलों की पृथ्वी की धरातलीय व अधस्तलीय आवृफतियों की रूपरेखा निधार्रण में एक महत्त्वपूणर् भूमिका रही है। आप पृथ्वी की विवतर्निक हलचलों ;च्संजम जमबजवदपबेद्ध के विषय में ‘भौतिक भूगोल का परिचय’ ;रा.शै.अ.प्र.प., 2006द्ध नामक पुस्तक में पढ़ चुके हैं। क्या आप जानते हैं कि करोड़ों वषर् पहले ‘इंडियन प्लेट’ भूमध्य रेखा से दक्ष्िाण में स्िथत थी। यह आकार में कापफी विशाल थी और ‘आस्ट्रेलियन प्लेट’ इसी का हिस्सा थी। करोड़ों वषो± के दौरान, यह प्लेट कापफी हिस्सों में टूट गइर् और आस्ट्रेलियन प्लेट दक्ष्िाण - पूवर् तथा इंडियन प्लेट उत्तर दिशा में ख्िासकने लगी। क्या आप इंडियन प्लेट के ख्िासकने की विभ्िान्न अवस्थाओं को रेखांकित कर सकते हैं? इंडियन प्लेट का ख्िासकना अब भी जारी है और इसका भारतीय उपमहाद्वीप के भौतिक पयार्वरण पर महत्त्वपूणर् प्रभाव है। क्या आप इंडियन प्लेट के उत्तर में ख्िासकने के परिणामों का अनुमान लगा सकते हैं? भारतीय उपमहाद्वीप की वतर्मान भूवैज्ञानिक संरचना व इसके ियाशील भूआकृतिक प्रक्रम मुख्यतः अंतजर्नित व बहिजर्निक बलों व प्लेट के क्षैतिज संचरण की अंतः संरचना तथा भूआवृफति विज्ञान िया के परिणामस्वरुप अस्ितत्व में आएँ हैं। भूवैज्ञानिक संरचना व शैल समूह की भ्िान्नता के आधार पर भारत को तीन भूवैज्ञानिक खंडों में विभाजित किया जाता है जो भौतिक लक्षणों पर आधरित हंै - ;कद्ध प्रायद्वीपीय खंड ;खद्ध हिमालय और अन्य अतिरिक्त प्रायद्वीपीय पवर्त मालाएँ ;गद्ध सिंधु - गंगा - ब्रह्मपुत्रा मैदान प्रायद्वीपीय खंड प्रायद्वीप खंड की उत्तरी सीमा कटी - पफटी है, जो कच्छ से आरंभ होकर अरावली पहाडि़यों के पश्िचम से गुजरती हुइर् दिल्ली तक और पिफर यमुना व गंगा नदी के समानांतर राजमहल की पहाडि़यों व गंगा डेल्टा तक जाती है। इसके अतिरिक्त उत्तर - पूवर् में कबीर् एंेगलाॅग ;ज्ञंतइप ।दहसवदहद्ध व मेघालय का पठार तथा पश्िचम में राजस्थान भी इसी खंड के विस्तार हैं। पश्िचम बंगाल में मालदा भ्रंश उत्तरी - पूवीर् भाग में स्िथत मेघालय व कबीर् एंेगलाॅग पठार को छोटा नागपुर पठार से अलग करता है। राजस्थान में यह प्रायद्वीपीय खंड मरुस्थल व मरुस्थल सदृश्य स्थलाकृतियों से ढका हुआ है। प्रायद्वीप मुख्यतः प्राचीन नाइस व ग्रेनाइर्ट से बना है। वैफम्िब्रयन कल्प से यह भूखंड एक कठोर खंड के रूप में खड़ा है। अपवाद स्वरूप पश्िचमी तट समुद्र में डूबा होने और वुफछ हिस्से विवतर्निक ियाओं से परिवतिर्त होने के उपरान्त भी इस भूखंड के वास्तविक आधार तल पर प्रभाव नहीं पड़ता है। इंडो - आस्ट्रेलियन प्लेट का हिस्सा होने के कारण यह उध्वार्धर हलचलों व खंड भ्रंश से

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