अध्याय आप भूआकृतिक प्रियाओं विशेषकर अपक्षय और विभ्िान्न जलवायवी क्षेत्रों में अपक्षय आदि के विषय में पहले ही पढ़ चुके हैं। यदि आपको स्मरण नहीं है, तो संक्ष्िाप्त सार के लिए अध्याय 6 में चित्रा 6.2 देखें। यह अपक्षय प्रावार ;ॅमंजीमतपदह उंदजसमद्ध वनस्पति विविधता का आधार है, अतः इसे जैव - विविधता का आधार माना गया है। सौर उफजार् और जल ही अपक्षय में विविधता और इसके परिणामस्वरूप उत्पन्न जैव - विविधता का मुख्य कारण है। इसमें कोइर् आश्चयर् नहीं कि वे क्षेत्रा, जहाँ उफजार् व जल की उपलब्धता अिाक है, वहीं जैव - विविधता भी व्यापक स्तर पर है। आज जो जैव - विविधता हम देखते हैं, वह 2.5 से 3.5 अरब वषोर्ं के विकास का परिणाम है। मानव जीवन के प्रारंभ होने से पहले, पृथ्वी पर जैव - विविधता किसी भी अन्य काल से अिाक थी। मानव के आने से जैव - विविधता में तेजी से कमी आने लगी, क्योंकि किसी एक या अन्य प्रजाति का आवश्यकता से अिाक उपभोग होने के कारण, वह लुप्त होने लगी। अनुमान के अनुसार, संसार में वुफल प्रजातियों की संख्या 20 लाख से 10 करोड़ तक है, लेकिन एक करोड़ ही इसका सही अनुमान है। नयी प्रजातियों की खोज लगातार जारी है और उनमें से अिाकांश का वगीर्करण भी नहीं हुआ है। ;एक अनुमान के अनुसार दक्ष्िाण अमेरिका की ताशे पानी की लगभग 40 प्रतिशत मछलियों का वगीर्करण नहीं हुआद्ध। उष्ण कटिबंधीय वनों में जैव - विविधता की अिाकता है। प्रजातियों के दृष्िटकोण से और अकेले जीवधारी के दृष्िटकोण से जैव - विविधता सतत् विकास का तंत्रा है। जैव - विविधता एवं संरक्षण पृथ्वी पर किसी प्रजाति की औसत आयु 10 से 40 लाख वषर् होने का अनुमान है। ऐसा भी माना जाता है कि लगभग 99 प्रतिशत प्रजातियाँ, जो कभी पृथ्वी पर रहती थी, आज लुप्त हो चुकी हैं। पृथ्वी पर जैव - विविधता एक जैसी नहीं है। जैव - विविधता उष्ण कटिबंधीय प्रदेशों में अिाक होती है। जैसे - जैसे हम ध्रुवीय प्रदेशों की तरपफ बढ़ते हैं, प्रजातियों की विविधता तो कम होती जाती है, लेकिन जीवधारियों की संख्या अिाक होती जाती है। जैव विविधता दो शब्दों के मेल से बना है, ;ठपवद्ध ‘बायो’ का अथर् है - जीव तथा डाइवसिर्टी ;क्पअमतेपजलद्ध का अथर् है - विविधता। साधारण शब्दों में किसी निश्िचत भौगोलिक क्षेत्रा में पाए जाने वाले जीवों की संख्या और उनकी विविधता को जैव - विविधता कहते हैं। इसका संबंध पौधों के प्रकार, प्राण्िायों तथा सूक्ष्म जीवाणुओं से है। उनकी आनुवंश्िाकी और उनके द्वारा निमिर्त पारितंत्रा से है। यह पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीवधारियों की परिवतर्नशीलता, एक ही प्रजाति तथा विभ्िान्न प्रजातियों में परिवतर्नशीलता तथा विभ्िान्न पारितंत्रों में विविधता से संबंिात है। जैव - विविधता सजीव संपदा है। यह विकास के लाखों वषोर्ं के इतिहास का परिणाम है। जैव - विविधता को तीन स्तरों पर समझा जा सकता है - ;पद्धआनुवांश्िाक जैव - विविधता ;ळमदमजपब कपअमतेपजलद्ध, ;पपद्धप्रजातीय जैव - विविधता ;ैचमबपमे कपअमतेपजलद्ध तथा ;पपपद्ध पारितंत्राीय जैव - विविधता ;म्बवेलेजमउ कपअमतेपजलद्ध। आनुवांश्िाक जैव - विविधता ;ळमदमजपब इपवकपअमतेपजलद्ध जीवन निमार्ण के लिए जीन ;ळमदमद्ध एक मूलभूत इकाइर् है। किसी प्रजाति में जीन की विविधता ही जैव - विविधता एवं संरक्षण आनुवंश्िाक जैव - विविधता है। समान भौतिक लक्षणों वाले जीवों के समूह को प्रजाति कहते हैं। मानव आनुवांश्िाक रूप से ‘होमोसेप्िायन’ ;भ्वउवेंचपमदेद्ध प्रजाति से संबंिात है, जिसमें कद, रंग और अलग दिखावट जैसे शारीरिक लक्षणों में कापफी भ्िान्नता है। इसका कारण आनुवांश्िाक विविधता है। विभ्िान्न प्रजातियों के विकास व पफलने - पूफलने के लिए आनुवांश्िाक विविधता अत्यिाक अनिवायर् है। प्रजातीय विविधता ;ैचमबपमे कपअमतेपजलद्ध यह प्रजातियों की अनेकरूपता को बताती है। यह किसी निधार्रित क्षेत्रा में प्रजातियों की संख्या से संबंिात है। प्रजातियों की विविधता, उनकी समृि, प्रकार तथा बहुलता से आँकी जा सकती है। वुफछ क्षेत्रों में प्रजातियों की संख्या अिाक होती है और वुफछ में कम। जिन क्षेत्रों में प्रजातीय विविधता अिाक होती है, उन्हें विविधता के ‘हाॅट - स्पाॅट’ ;भ्वज ेचवजेद्ध कहते हैं। ;चित्रा 16.1द्ध पारितंत्राीय विविधता ;म्बवेलेजमउ कपअमतेपजलद्ध आपने प्िाछले अध्याय में पारितंत्रों के प्रकारों में व्यापक भ्िान्नता और प्रत्येक प्रकार के पारितंत्रों में होने वाले पारितंत्राीय प्रियाएँ तथा आवास स्थानों की भ्िान्नता ही पारितंत्राीय विविधता बनाते हैं। पारितंत्राीय विविधता का परिसीमन करना मुश्िकल और जटिल है, क्योंकि समुदायों ;प्रजातियों का समूहद्ध और पारितंत्रा की सीमाएँ निश्िचत नहीं हैं। जैव - विविधता का महत्त्व ;प्उचवतजंदबम व िइपवकपअमतेपजलद्ध जैव - विविधता ने मानव संस्कृति के विकास में बहुत योगदान दिया है और इसी प्रकार, मानव समुदायों ने भीआनुवंश्िाक, प्रजातीय व पारिस्िथतिक स्तरों पर प्राकृतिक विविधता को बनाए रखने में बड़ा योगदान दिया है। जैव - विविधता की पारिस्िथतिक ;म्बवसवहपबंसद्ध, आथ्िार्क ;म्बवदवउपबद्ध और वैज्ञानिक ;ैबपमदजपपिबद्ध भूूमिकाएँ प्रमुख है। जैव - विविधता की पारिस्िथतिकीय भूमिका ;म्बवसवहपबंस तवसम व िइपवकपअमतेपजलद्ध पारितंत्रा में विभ्िान्न प्रजातियाँ कोइर् न कोइर् िया करती हैं। पारितंत्रा में कोइर् भी प्रजाति बिना कारण न तो विकसित हो सकती है और न ही बनी रह सकती है। अथार्त्, प्रत्येक जीव अपनी शरूरत पूरा करने के साथ - साथ दूसरे जीवों के पनपने में भी सहायक होता है। क्या आप बता सकते हैं कि मानव, पारितंत्रों के बने रहने में क्या योगदान देता है? जीव व प्रजातियाँ उफजार् ग्रहण कर उसका संग्रहण करती हैं, काबर्निक पदाथर् उत्पन्न एवं विघटित करती हैं और पारितंत्रा में जल व पोषक तत्त्वों के चक्र को बनाए रखने में सहायक होती हैं। इसके अतिरिक्त प्रजातियाँ वायुमंडलीय गैस को स्िथर करती हैं और जलवायु को नियंत्रिात करने में सहायक होती हैं।ये पारितंत्राी ियाएँ मानव जीवन के लिए महत्त्वपूणर् ियाएँ हैं। पारितंत्रा में जितनी अिाक विविधता होगी प्रजातियों के प्रतिवूफल स्िथतियों में भी रहने की संभावना और उनकी उत्पादकता भी उतनी ही अिाक होगी। प्रजातियों की क्षति से तंत्रा के बने रहने की क्षमता भी कम हो जाएगी। अिाक आनुवंश्िाक विविधता वाली प्रजातियों की तरह अिाक जैव - विविधता वाले पारितंत्रा में पयार्वरण के बदलावों को सहन करने की अिाक सक्षमता होती है। दूसरे शब्दों में, जिस पारितंत्रा में जितनी प्रकार की प्रजातियाँ होंगी, वह पारितंत्रा उतना ही अिाक स्थायी होगा। जैव - विविधता एवं संरक्षण सुभेद्य प्रजातियाँ ;टनसदमतंइसम ेचमबपमेद्ध इसमें वे प्रजातियाँ सम्िमलित हैं, जिन्हें यदि संरक्ष्िात नहीं,किया गया या उनके विलुप्त होने में सहयोगी कारकयदि जारी रहे तो निकट भविष्य में उनके विलुप्त होनेका खतरा है। इनकी संख्या अत्यिाक कम होने केकारण, इनका जीवित रहना सुनिश्िचत नहीं है। दुलर्भ प्रजातियाँ ;त्ंतम ेचमबपमेद्ध संसार में इन प्रजातियों की संख्या बहुत कम है। येप्रजातियाँ वुफछ ही स्थानों पर सीमित हैं या बड़े क्षेत्रा मेंविरल रूप में बिखरी हुइर् हैं। जैव - विविधता का संरक्षण ;ब्वदेमतअंजपवद व िइपवकपअमतेपजलद्ध मानव के अस्ितत्व के लिए जैव - विविधता अति आवश्यक है। जीवन का हर रूप एक दूसरे पर इतना निभर्र है कि किसी एक प्रजाति पर संकट आने से दूसरों में असंतुलन की स्िथति पैदा हो जाती है। यदि पौधों और प्राण्िायों की प्रजातियाँ संकटापन्न होती हैं, तो इससे पयार्वरण में गिरावट उत्पन्न होती है और अन्ततोगत्वा मनुष्य का अपना अस्ितत्व भी खतरे में पड़ सकता है। आज यह अति अनिवायर् है कि मानव को पयार्वरण - मैत्राी संबंधी प(तियों के प्रति जागरूक किया जाए और विकास की ऐसी व्यावहारिक गतिवििायाँ अपनाइर् जाएँ, जो दूसरे जीवों के साथ समन्िवत हों और सतत् पोषणीय ;ैनेजंपदंइसमद्ध हों। इस तथ्य के प्रति भी जागरूकता बढ़ रही है कि संरक्षण तभी संभव और दीघर्कालिक होगा, जब स्थानीय समुदायों व प्रत्येक व्यक्ित की इसमें भागीदारी होगी। इसके लिए स्थानीय स्तर पर संस्थागत संरचनाओं का विकास आवश्यक है। केवल प्रजातियों का संरक्षण और आवास स्थान की सुरक्षा ही अहम समस्या नहीं है, बल्िक संरक्षण की प्रिया को जारी रखना भी उतना ही शरूरी है। सन्1992 में ब्राजील के रियो - डी - जेनेरो ;त्पव.कम.श्रंदमपतवद्ध में हुए जैव - विविधता के सम्मेलन ;म्ंतजी ेनउउपजद्ध में लिए गए संकल्पों का भारत अन्य 155 देशों सहित हस्ताक्षरी है। विश्व संरक्षण कायर् योजना में जैव - विविधता संरक्षण के निम्न तरीके सुझाए गए हैंः ;पद्ध संकटापन्न प्रजातियों के संरक्षण के लिए प्रयास करने चाहिए। ;पपद्ध प्रजातियों को लुप्त होने से बचाने के लिए उचित योजनाएँ व प्रबंधन अपेक्ष्िात हैं। ;पपपद्ध खाद्यान्नों की किस्में, चारे संबंधी पौधों की किस्में, इमारती लकड़ी के पेड़, पशुधन, जंतु व उनकी वन्य प्रजातियों की किस्मों को संरक्ष्िात करना चाहिए। ;पअद्ध प्रत्येक देश को वन्य जीवों के आवास को चिित कर उनकी सुरक्षा को सुनिश्िचत करना चाहिए। ;अद्ध प्रजातियों के पलने - बढ़ने तथा विकसित होने के स्थान सुरक्ष्िात व संरक्ष्िात हों। ;अपद्ध वन्य जीवों व पौधों का अंतरार्ष्ट्रीय व्यापार, नियमों के अनुरूप हो।भारत सरकार ने प्राकृतिक सीमाओं के भीतर विभ्िान्न प्रकार की प्रजातियों को बचाने, संरक्ष्िात करने और विस्तार करने के लिए, वन्य जीव सुरक्षा अिानियम 1972 ;ॅपसक सपमि चतवजमबजपवद ंबजए 1972द्ध, पारित किया है, जिसके अंतगर्त नेशनल पाकर् ;छंजपवदंस चंतोद्ध, पशुविहार ;ैंदबजनंतपमेद्ध स्थाप्िात किये गए तथा जीवमंडल आरक्ष्िात क्षेत्रा ;ठपवेचीमतम तमेमतअमेद्ध भौतिक भूगोल के मूल सि(ांत घोष्िात किये गए। इन संरक्ष्िात क्षेत्रों का विस्तारपूवर्क वणर्न ‘भारतः भौतिक पयार्वरण’ ;एन.सी.इर्.आर.टी., 2006द्ध पुस्तक में किया गया है। वह देश, जो उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रा में स्िथत हैं, उनमें संसार की सवार्िाक प्रजातीय विविधता पाइर् जाती है। उन्हें ‘महा विविधता वेंफद्र’ ;डमहं कपअमतेपजल बमदजतमेद्ध कहा जाता है। इन देशों की संख्या 12 है और उनके नाम हैं: मैक्िसको, कोलंबिया, इक्वेडोर, पेरू, ब्राशील, डेमोव्रेफटिक रिपब्िलक आॅपफ कांगो, मेडागास्कर, चीन, भारत, मलेश्िाया, इंडोनेश्िाया और आस्ट्रेलिया। इन देशों में समृ( महा - विविधता के वेंफद्र स्िथत हैं। ऐसे क्षेत्रा, जो अिाक संकट में हैं, उनमें संसाधनों को उपलब्ध कराने के लिए अंतरार्ष्ट्रीय संरक्षण संघ ;प्न्ब्छद्ध ने जैव - विविधता हाॅट - स्पाॅट ;भ्वज ेचवजेद्ध क्षेत्रा के रूप में निधार्रित किया है ;चित्रा 16.1द्ध। हाॅट - स्पाॅट उनकी वनस्पति के आधार पर परिभाष्िात किये गए हैं। पादप महत्वपूणर् है, क्योंकि ये ही किसी पारितंत्रा की प्राथमिक उत्पादकता को निधार्रित करते हैं। यह भी देखा गया है कि श्यादातर हाॅट - स्पाॅट में जैव - विविधता एवं संरक्षण रहने वाले प्रजाति भोजन, जलाने के लिए लकड़ी, कृष्िा भूमि और इमारती लकड़ी आदि के लिए वहाँ पाइर् जाने वाली समृ( पारितंत्रों पर ही निभर्र है। उदाहरण के लिए मेडागास्कर में पाए जाने वाले वुफल पौधें व जीवों में से 85 प्रतिशत पौधे व जीव संसार मंे अन्यत्रा कहीं भी नहीं पाए जाते हैं। अन्य हाॅट स्पाॅट, जो समृ( देशों में पाए जाते हैं, वहाँ वुफछ अन्य प्रकार की समस्याएँ हैं। हवाइर् द्वीप जहाँ विशेष प्रकार की पादप व जंतु प्रजातियाँ मिलती हैं, वह विदेशश प्रजातियों के आगमन और भूमि विकास के कारण असुरक्ष्िात ह।ंैअभ्यास 1. बहुवैकल्िपक प्रश्न: ;पद्ध जैव - विविधता का संरक्षण निम्न में किसके लिए महत्वपूणर् है ;कद्धजंतु ;खद्ध पौधे ;गद्धपौधे और प्राणी ;घद्ध सभी जीवधारी ;पपद्ध निम्नलिख्िात में से असुरक्ष्िात प्रजातियाँ कौन सी हैं ;कद्ध जो दूसरों को असुरक्षा दें ;खद्ध बाघ व शेर ;गद्ध जिनकी संख्या अत्यिाक हों ;घद्ध जिन प्रजातियों के लुप्त होने का खतरा है। ;पपपद्ध नेशनल पावर्फ ;छंजपवदंस चंतोद्ध और पशुविहार ;ैंदबजनंतपमेद्ध निम्न में से किस उद्देश्य के लिए बनाए गए हैंः ;कद्ध मनोरंजन ;खद्ध पालतू जीवों के लिए ;गद्धश्िाकार के लिए ;घद्ध संरक्षण के लिए ;पअद्ध जैव - विविधता समृ( क्षेत्रा हैं: ;कद्ध उष्णकटिबंधीय क्षेत्रा ;खद्ध शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रा ;गद्धध्रुवीय क्षेत्रा ;घद्ध महासागरीय क्षेत्रा ;अद्ध निम्न में से किस देश में पृथ्वी सम्मेलन ;म्ंतजी ेनउउपजद्ध हुआ थाः ;कद्धयू.के.;न्ण्ज्ञण्द्ध ;खद्ध ब्राजील ;गद्धमैक्िसको ;घद्ध चीन 2. निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए: ;पद्ध जैव - विविधता क्या हैं? ;पपद्ध जैव - विविधता के विभ्िान्न स्तर क्या हैं? ;पपपद्ध हाॅट - स्पाॅट ;भ्वज ेचवजेद्ध से आप क्या समझते हैं? ;पअद्ध मानव जाति के लिए जंतुओं के महत्व का वणर्न संक्षेप में करें। ;अद्ध विदेशज प्रजातियों ;म्गवजपब ेचमबपमेद्ध से आप क्या समझते हैं? 3. निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए: ;पद्ध प्रकृति को बनाए रखने में जैव - विविधता की भूमिका का वणर्न करें। ;पपद्ध जैव - विविधता के ”ास के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारकों का वणर्न करें। इसे रोकने के उपाय भी बताएँ। परियोजना कायर् जिस राज्य में आपका स्वूफल है, वहाँ के नेशनल पावर्फ ;छंजपवदंस चंतोद्ध पशुविहार ;ैंदबजनंतपमेद्ध और जीवमंडल आरक्ष्िात क्षेत्रा ;ठपवेचीमतम तमेमतअमेद्ध के नाम लिखें और उन्हें भारत के मानचित्रा पर रेखांकित करें।

RELOAD if chapter isn't visible.