वायुमंडल का संघटन तथा संरचना क्या कोइर् व्यक्ित वायु के बिना रह सकता है? हम लोग दिन में दो - तीन बार भोजन करते हैं तथा कइर् बार पानी पीते हैं, लेकिन साँस लगभग प्रत्येक सेवेंफड लेते रहते हैं। जीवित रहने के लिए वायु सभी जीवों के लिए आवश्यक है। मनुष्य जैसे वुफछ जीव बिना भोजन और पानी लिये वुफछ समय तक जीवित रह सकते हैं, लेकिन साँस लिये बिना वुफछ मिनट भी जीवित रहना सम्भव नहीं होता। यही कारण है कि हमें वायुमंडल का विस्तृत ज्ञान होना चाहिए। वायुमंडल विभ्िान्न प्रकार के गैसों का मिश्रण है और यह पृथ्वी को सभी ओर से ढके हुए है। इसमें मनुष्यों एवं जंतुओं के जीवन के लिए आवश्यक गैसें जैसे आॅक्सीजन तथा पौधों के जीवन के लिए काबर्न डाइर्आॅक्साइड पाइर् जाती है। वायु पृथ्वी के द्रव्यमान का अभ्िान्न भाग है तथा इसके वुफल द्रव्यमान का 99 प्रतिशत पृथ्वी की सतह से 32 कि॰मी॰ की ऊँचाइर् तक स्िथत है। वायु रंगहीन तथा गंधहीन होती है तथा जब यह पवन की तरह बहती है, तभी हम इसे महसूस कर सकते हैं। वायुमंडल का संघटन वायुमंडल गैसों, जलवाष्प एवं धूल कणों से बना है। सारणी 8.1 में हवा में उपस्िथत उन गैसों का विवरण है, जो वायुमंडल के निचले भाग में पाइर् जाती हैं। वायुमंडल की ऊपरी परतों में गैसों का अनुपात इस प्रकार बदलता है जैसे कि 120 कि॰मी॰ की ऊँचाइर् पर आॅक्सीजन की मात्रा नगण्य हो जाती है। इसी प्रकार, काबर्न डाइर्आॅक्साइड एवम् जलवाष्प पृथ्वी की सतह से 90 कि॰मी॰ की ऊँचाइर् तक ही पाये जाते हैं। गैस काबर्न डाइर्आॅक्साइड मौसम विज्ञान की दृष्िट से बहुत ही अध्याय तालिका 8.1: वायुमंडल की स्थायी गैसें घटक सूत्रा द्रव्यमान प्रतिशत नाइट्रोजन छ 78.8 2 आॅक्सीजन व् 20.95 2 आगर्न ।त 0.93 काबर्न डाइर्आॅक्साइड ब्व् 0.036 2 नीआॅन छम 0.002 हिलीयम भ्म 0.0005 व्रेफप्टो ज्ञत 0.001 जेनन ग्म 0.00009 हाइर्ड्रोजन भ्2 0.00005 महत्त्वपूणर् गैस है, क्योंकि यह सौर विकिरण के लिए पारदशीर् है, लेकिन पाथ्िार्व विकिरण के लिए अपारदशीर् है। यह सौर विकिरण के एक अंश को सोख लेती है तथा इसके वुफछ भाग को पृथ्वी की सतह की ओर प्रतिबिंबित कर देती है। यह ग्रीन हाउफस प्रभाव के लिए पूरी तरह उत्तरदायी है। दूसरी गैसों का आयतन स्िथर है, जबकि पिछले वुफछ दशकों में मुख्यतः जीवाश्म इर्ंधन को जलाये जाने के कारण काबर्न डाइर्आॅक्साइड के आयतन में लगातार वृि हो रही है। इसने हवा के ताप को भी बढ़ा दिया है। ओशोन वायुमंडल का दूसरा महत्त्वपूणर् घटक है जो कि पृथ्वी की सतह से 10 से 50 किलोमीटर की ऊँचाइर् के बीच पाया जाता है। यह एक पिफल्टर की तरह कायर् करता है तथा सूयर् से निकलने वाली पराबैंगनी किरणों को अवशोष्िात कर उनको पृथ्वी की सतह पर पहुँचने से रोकता है। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि वायुमंडल में ओशोन कि अनुपस्िथति से हमारे उफपर क्या प्रभाव होगा? भौतिक भूगोल के मूल सि(ांत जलवाष्प जलवाष्प वायुमंडल में उपस्िथत ऐसी परिवतर्नीय गैस है, जो ऊँचाइर् के साथ घटती जाती है। गमर् तथा आद्रर् उष्ण कटिबंध में यह हवा के आयतन का 4 प्रतिशत होती है, जबकि धु्रवों जैसे ठंडे तथा रेगिस्तानों जैसे शुष्क प्रदेशों में यह हवा के आयतन के 1 प्रतिशत भाग से भी कम होती है। विषुवत् वृत्त से धु्रव की तरपफ जलवाष्प की मात्रा कम होती जाती है। यह सूयर् से निकलने वाले ताप के वुफछ भाग को अवशोष्िात करती है तथा पृथ्वी से निकलने वाले ताप को संग्रहित करती है। इस प्रकार यह एक कंबल की तरह कायर् करती है तथा पृथ्वी को न तो अिाक गमर् तथा न ही अिाक ठंडा होने देती है। जलवाष्प वायु को स्िथर और अस्िथर होने में भी योगदान देती है। धूलकण वायुमंडल में छोटे - छोटे ठोस कणों को भी रखने की क्षमता होती है। ये छोटे कण विभ्िान्न स्रोतों जैसे - समुद्री नमक, महीन मिट्टðी, धुएँ की कालिमा, राख, पराग, धूल तथा उल्काओं के टूटे हुए कण से निकलते हैं। धूलकण प्रायः वायुमंडल के निचले भाग में मौजूद होते हैं, पिफर भी संवहनीय वायु प्रवाह इन्हें कापफी ऊँचाइर् तक ले जा सकता है। धूलकणों का सबसे अिाक जमाव उपोष्ण और शीतोष्ण प्रदेशों में सूखी हवा के कारण होता है, जो विषुवत् और धु्रवीय प्रदेशों की तुलना में यहाँ अिाक मात्रा में होते है। धूल और नमक के कण आद्रर्ताग्राही वेंफद्र की तरह कायर् करते हैं जिसके चारों ओर जलवाष्प संघनित होकर मेघों का निमार्ण करती हैं। वायुमंडल की स्ंारचना वायुमंडल अलग - अलग घनत्व तथा तापमान वाली विभ्िान्न परतों का बना होता है। पृथ्वी की सतह के पास घनत्व अिाक होता है, जबकि उफँचाइर् बढ़ने के साथ - साथ यह घटता जाता है। तापमान की स्िथति के अनुसार वायुमंडल को पाँच विभ्िान्न संस्तरों में बाँटा गया है। ये हैंः क्षोभमंडल, समतापमंडल, मध्यमंडल, बाह्य वायुमंडल तथा बहिम±डल। क्षोभमंडल वायुमंडल का सबसे नीचे का संस्तर है। इसकी उफँचाइर् सतह से लगभग 13 कि॰मी॰ है तथा यह ध्रुव के निकट 8 कि॰मी॰ तथा विषुवत् वृत्त पर 18 कि॰मी॰ की उफँचाइर् तक है। क्षोभमंडल की मोटाइर् विषुवत् वृत्त पर सबसे अिाक है, क्योंकि तेज वायुप्रवाह के कारण ताप का अिाक उफँचाइर् तक संवहन किया जाता है। इस संस्तर में धूलकण तथा जलवाष्प मौजूद होते हैं। मौसम में परिवतर्न इसी संस्तर में होता है। इस संस्तर में प्रत्येक 165 मी. की उफँचाइर् पर तापमान 1° से॰ घटता जाता है। जैविक वि्रफया के लिए यह सबसे महत्त्वपूणर् संस्तर है। क्षोभमंडल और समतापमंडल को अलग करने वाले भाग को क्षोभसीमा कहते हैं। विषुवत् वृत्त के ऊपर क्षोभ सीमा में हवा का तापमान दृ80° से॰ और ध्रुव के ऊपर दृ45° से॰ होता है। यहाँ पर तापमान स्िथर होने के कारण इसे क्षोभसीमा कहा जाता है। समतापमंडल इसके ऊपर 50 कि॰मी॰ की ऊँचाइर् तक पाया जाता है। समतापमंडल का एक महत्त्वपूणर् लक्षण यह है कि इसमें ओशोन परत पायी जाती है। यह परत पराबैंगनी किरणों को अवशोष्िात कर पृथ्वी को ऊजार् के तीव्र तथा हानिकारक तत्त्वों से बचाती है। मध्यमंडल, समतापमंडल के ठीक ऊपर 80 कि॰मी॰ की ऊँचाइर् तक पैफला होता है। इस संस्तर में भी ऊँचाइर् के साथ - साथ तापमान में कमी होने लगती है और 80 किलोमीटर की ऊँचाइर् तक पहुँचकर यह दृ100° से॰ हो चित्रा 8.1: वायुमंडल की संरचना वायुमंडल का संघटन तथा संरचना जाता है। मध्यमंडल की ऊपरी परत को मध्यसीमा उपलब्ध है। इस संस्तर में मौजूद सभी घटक विरल हैं, कहते हंै। आयनमंडल मध्यमंडल के ऊपर 80 से 400 जो धीरे - धीरे बाहरी अंतरिक्ष में मिल जाते हैं। यद्यपि किलोमीटर के बीच स्िथत होता है। इसमें विद्युत आवेश्िात वायुमंडल के सभी संस्तर हमें प्रभावित करते हैं पिफर कण पाये जाते हैं, जिन्हें आयन कहते हैं तथा इसीलिए भी भूगोलवेत्ता वायुमंडल के पहले दो संस्तरों का ही इसे आयनमंडल के नाम से जाना जाता है। पृथ्वी के अध्ययन करते हैं। द्वारा भेजी गइर् रेडियो तरंगें इस संस्तर के द्वारा वापस मौसम और जलवायु के तत्त्वपृथ्वी पर लौट आती हैं। यहाँ पर ऊँचाइर् बढ़ने के साथ ही तापमान में वृि शुरू हो जाती है। वायुमंडल का ताप, दाब, हवा, आद्रर्ता, बादल और वषर्ण, वायुमंडल केसबसे ऊपरी संस्तर, जो बाह्यमंडल के ऊपर स्िथत महत्त्वपूणर् तत्त्व हैं, जो पृथ्वी पर मनुष्य के जीवन कोहोता है उसे बहिम±डल कहते हैं। यह सबसे ऊँचा प्रभावित करते हैं। इन तत्त्वों के बारे में विस्तृत जानकारी संस्तर है तथा इसके बारे में बहुत कम जानकारी अध्याय 9, 10 और 11 में दी गइर् है। अभ्यास 1. बहुवैकल्िपक प्रश्न: ;पद्ध निम्नलिख्िात में से कौन - सी गैस वायुमंडल में सबसे अिाक मात्रा में मौजूद है? ;कद्ध आॅक्सीजन ;खद्ध आगर्न ;गद्ध नाइट्रोजन ;घद्ध काबर्न डाइर्आॅक्साइड ;पपद्ध वह वायुमंडलीय परत जो मानव जीवन के लिये महत्त्वपूणर् है: ;कद्ध समतापमंडल ;खद्ध क्षोभमंडल ;गद्ध मध्यमंडल ;घद्ध आयनमंडल ;पपपद्ध समुद्री नमक, पराग, राख, धुएँ की कालिमा, महीन मिट्टðी - किससे संबंिात हैं? ;कद्ध गैस ;खद्ध जलवाष्प ;गद्ध धूलकण ;घद्ध उल्कापात ;पअद्ध निम्नलिख्िात में से कितनी उफँचाइर् पर आॅक्सीजन की मात्रा नगण्य हो जाती है? ;कद्ध 90 कि॰मी॰ ;खद्ध 100 कि॰मी॰ ;गद्ध 120 कि॰मी॰ ;घद्ध 150 कि॰मी॰ ;अद्ध निम्नलिख्िात में से कौन - सी गैस सौर विकिरण के लिए पारदशीर् है तथा पाथ्िार्व विकिरण के लिए अपारदशीर्? ;कद्ध आॅक्सीजन ;खद्ध नाइट्रोजन ;गद्ध हीलियम ;घद्ध काबर्न डाइर्आॅक्साइड 2. निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए: ;पद्ध वायुमंडल से आप क्या समझते हैं? ;पपद्ध मौसम एवं जलवायु के तत्त्व कौन - कौन से हैं? ;पपपद्ध वायुमंडल की संरचना के बारे में लिखें। ;पअद्ध वायुमंडल के सभी संस्तरों में क्षोभमंडल सबसे अिाक महत्त्वपूणर् क्यों है? 3. निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए: ;पद्ध वायुमंडल के संघटन की व्याख्या करें। ;पपद्ध वायुमंडल की संरचना का चित्रा खींचे और व्याख्या करें।

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