अध्याय पृथ्वी विभ्िान्न तत्त्वों से बनी हुइर् है। इसकी बाहरीपरत पर ये तत्त्व ठोस रूप में और आंतरिक परत में ये गमर् एवं पिघली हुइर् अवस्था में पाए जाते हैं। पृथ्वी के संपूणर् पपर्टी का लगभग 98 प्रतिशत भागआठ तत्त्वों, जैसे आॅक्सीजन, सिलिकन, एलुमिनियम, लौहा, वैफल्िशयम, सोडियम, पोटैश्िायम तथा मैगनीश्िायम से बना है ;सारणी 5.1द्ध तथा शेष भाग टायटेनियम, हाइड्रोजन, पफाॅस्पफोरस, मैंगनीज, सल्पफर, काबर्न, निकिल एवं अन्य पदाथो± से बना है। सारणी 5.1: पृथ्वी के पपर्टी के प्रमुख तत्त्व संपदाथर्ख्या वशन के अनुसार ;»द्ध 1.आॅक्सीजन 46.60 2.सिलिकन 27.72 3.एलुमिनियम 8.13 4.लौह 5.00 5.वैफलश्िायम 3.63 6.सोडियम 2.83 7.पोटैश्िायम 2.59 8.मैगनेश्िायम 2.09 9.अन्य 1.41 भूपपर्टी पर पाए जाने वाले तत्त्व प्रायः अलग - अलगनहीं मिलते, बल्िक सामान्यतः ये दूसरे तत्त्वों के साथ इस प्रकार, खनिज एक ऐसा प्रावृफतिक, काबर्निक एवंअकाबर्निक तत्त्व है, जिसमें एक व्रफमब( परमाणविक संरचना, निश्िचत रासायनिक संघटन तथा भौतिक गुणध्मर्होते हैं। खनिज का निमार्ण दो या दो से अध्िक तत्त्वों से मिलकर होता है। लेकिन, कभी - कभी सल्प़फर, ताँबा, चाँदी,स्वणर्, ग्रेपफाइट जैसे एक तत्त्वीय खनिज भी पाए जाते हैं। खनिज एवं शैल मिलकर विभ्िान्न पदाथो± का निमार्ण करते हैं। इन पदाथो± को खनिजों का नाम दिया गया है।यद्यपि स्थलमंडल का निमार्ण करने वाले तत्त्वों की संख्या अत्यंत कम है, लेकिन आपस में उनका संयोजन विभ्िान्न तरीकों से होता है, जिससे खनिजों की अनेक किस्में बनती हैं। भूपपर्टी पर कम से कम 2000 प्रकार के खनिजों को पहचाना गया है, और उनको नाम दिया गया है। लेकिन इनमें से सामान्यतः उपलब्ध् लगभग सभी पदाथर्, छह प्रमुख खनिज समूहों से संबंध्ित होते हैं, जिनको शैलों का निमार्ण करने वाले प्रमुख खनिज माना गया है। पृथ्वी के आंतरिक भाग में पाया जाने वाला मैग्मा ही सभी खनिजों का मूल स्रोत है। इस मैग्मा के ठंडे होने पर भौतिक विशेषताओं और स्वभाव के आधर पर वुफछ प्रमुख खनिजों की संक्ष्िाप्त जानकारी यहाँ दी गइर् है। भौतिक विशेषताएँ ;पद्ध वि्रफस्टल का बाहरी रूप - अणुओं की आंतरिक व्यवस्था द्वारा तय होती है - घनाकार, अष्टभुजाकार, षट्भुजाकार पि्रश्म आदि। ;पपद्ध विदलन - सापेक्ष्िाक रूप से समतल सतह बनाने के लिए निश्िचत दिशा में टूटने कीप्रवृिाऋ अणुओं की आंतरिक व्यवस्था का परिणामऋ एक या कइर् दिशा में एक दूसरे से कोइर् भी कोण बनाकर टूट सकते हैं। ;पपपद्ध विभंजन - अणुओं की आंतरिक व्यवस्था इतनी जटिल होती है कि अणुओं का कोइर् तल नहीं होता हैऋ वि्रफस्टल विदलन तल के अनुसार नहीं बल्िक अनियमित रूप से टूटता है।

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