अध्याय क्या आपको वह कविता याद है जो आपने अपनी नसर्री की कक्षा में पढ़ी थी? ‘‘टि्वंकल - टि्वंकल लिटिल स्टार............’’ बचपन से ही तारों भरी रातों ने हमें हमेशा आकष्िार्त किया है। आपने भी इन तारों के बारे में सोचा होगा और असंख्य प्रश्न आपके दिमाग में आए होंगे। वुफछ इस प्रकार के प्रश्न जैसे - आकाश में कितने तारे हैं? ये तारे वैफसे बने? क्या कोइर् आकाश के अंत तक पहुँच सकता है? इन प्रश्नों के अतिरिक्त भी कइर् प्रश्न आपके दिमाग में आए होंगे। इस अध्याय में आप जानंेगे कि ‘ये टिमटिमाते छोटे तारे’ वैफसे बनंे? इसके साथ ही आप पृथ्वी की उत्पिा व विकास की कहानी भी पढ़ंेगे। आरंभ्िाक सि(ांत पृथ्वी की उत्पिा पृथ्वी की उत्पिा के संबंध् में विभ्िान्न दाशर्निकों व वैज्ञानिकों ने अनेक परिकल्पनाएँ प्रस्तुत की हैं। इनमें से एक प्रारंभ्िाक एवं लोकिय मत जमर्न दाशर्निक इमैनुअल कान्ट ;प्उउंदनमस ज्ञंदजद्ध का है। 1796 इर्॰ में गण्िातज्ञ लाप्लेस ;स्ंचसंबमद्ध ने इसका संशोध्न प्रस्तुत किया जो नीहारिका परिकल्पना;छमइनसंत ीलचवजीमेपेद्ध के नाम से जाना जाता है। इस परिकल्पना के अनुसार ग्रहों का निमार्ण ध्ीमी गति से घूमते हुए पदाथोर्ं के बादल से हुआ जो कि सूयर् की युवा अवस्था से संब( थे। बाद में 1900 इर्॰ में चेम्बरलेन और मोल्टन ;ब्ींउइमतसंपद - डवनसजवदद्ध ने कहा कि ब्रह्मांड में एक अन्य भ्रमणशील तारा सूयर् के नजदीक से गुजरा। इसके परिणाम स्वरूप तारे के गुरूत्वाकषर्ण से सूयर् - सतह से सिगार के पृथ्वी की उत्पिा एवं विकास आकार का वुफछ पदाथर् निकलकर अलग हो गया। यह तारा जब सूयर् से दूर चला गया तो सूयर् - सतह से बाहर निकला हुआ यह पदाथर् सूयर् के चारों तरपफ घूमने लगा और यही ध्ीरे - ध्ीरे संघनित होकर ग्रहों के रूप में परिवतिर्त हो गया। पहले सर जेम्स जींस ;ैपत श्रंउमे श्रमंदेद्ध और बाद में सर हॅरोल्ड जैपफरी ;ैपत भ्ंतवसक श्रमतििमलद्ध ने इस मत का समथर्न किया। यद्यपि वुफछ समय बाद के तवर्फ सूयर् के साथ एक और साथी तारे के होने की बात मानते हैं। ये तवर्फ ‘‘द्वैतारक सि(ांत’’ ;ठपदंतल जीमवतपमेद्ध के नाम से जाने जाते हंै। 1950 इर्॰ में रूस के आॅटो श्िामिड ;व्जजव ेबीउपकजद्ध व जमर्नी के कालर् वाइशास्कर ;ब्ंतस ूमप्रंेबंतद्ध ने नीहारिका परिकल्पना ;छमइनसंत ीलचवजीमेपेद्ध में वुफछ संशोधन किया, जिसमें विवरण भ्िान्न था। उनके विचार से सूयर् एक सौर नीहारिका से घ्िारा हुआ था जो मुख्यतः हाइड्रोजन, हीलीयम और ध्ूलिकणों की बनी थी। इन कणों के घषर्ण व टकराने ;ब्वससपेपवदद्ध से एक चपटी तश्तरी की आवृफति के बादल का निमार्ण हुआ और अभ्िावृि ;।बबतमजपवदद्ध प्रक्रम द्वारा ही ग्रहों का निमार्ण हुआ। अंततोगत्वा, वैज्ञानिकों ने पृथ्वी या अन्य ग्रहों की ही नहीं वरन् पूरे ब्रह्मांड की उत्पिा संबंध्ी समस्याओं को समझने का प्रयास किया। आध्ुनिक सि(ांत ब्रह्मांड की उत्पिा आध्ुनिक समय में ब्रह्मांड की उत्पिा संबंध्ी सवर्मान्य सि(ांत बिग बैंग सि(ांत;ठपह इंदह जीमवतलद्ध है। इसे विस्तरित ब्रह्मांड परिकल्पना ;म्गचंदकपदह नदपअमतेम ीलचवजीमेपेद्ध भी कहा जाता है। 1920 इर्॰ पृथ्वी की उत्पिा एवं विकास में एडविन हब्बल ;म्कूपद भ्नइइसमद्ध ने प्रमाण दिये कि ब्रह्मांड का विस्तार हो रहा है। समय बीतने के साथ आकाशगंगाएँ एक दूसरे से दूर हो रही हैं। आप प्रयोग कर जान सकते हैं कि ब्रह्मांड विस्तार का क्या अथर् है। एक गुब्बारा लें और उसपर वुफछ निशान लगाएँ जिनको आकाशगंगायें मान लें। जब आप इस गुब्बारे को पुफलाएँगे, गुब्बारे पर लगे ये निशान गुब्बारे के पैफलने के साथ - साथ एक दूसरे से दूर जाते प्रतीत होंगे। इसी प्रकार आकाशगंगाओं के बीच की दूरी भी बढ़ रही है और परिणामस्वरूप ब्रह्मांड विस्तारित हो रहा है। यद्यपि आप यह पाएँगे कि गुब्बारे पर लगे चिÉों के बीच की दूरी के अतिरिक्त, चिÉ स्वयं भी बढ़ रहे हैं। जबकि यह तथ्य के अनुरूप नहीं है। वैज्ञानिक मानते हैं कि आकाशगंगाओं के बीच की दूरी बढ़ रही है, परंतु प्रेक्षण आकाशगंगाओं के विस्तार को नहीं सि( करते। अतः गुब्बारे का उदाहरण आंश्िाक रूप से ही मान्य है। बिग बैंग सि(ांत के अनुसार ब्रह्मांड का विस्तार निम्न अवस्थाओं में हुआ हैः चित्रा 2.1: बिग बैंग ;पद्ध आरम्भ में वे सभी पदाथर्, जिनसे ब्रह्मांड बना है, अति छोटे गोलक ;एकाकी परमाणुद्ध के रूप में एक ही स्थान पर स्िथत थे। जिसका आयतन अत्यध्िक सूक्ष्म एवं तापमान तथा घनत्व अनंत था। ;पपद्ध बिग बैंग की प्रिया में इस अति छोटे गोलक में भीषण विस्पफोट हुआ। इस प्रकार की विस्पफोट प्रिया से वृहत् विस्तार हुआ। वैज्ञानिकों का विश्वास है कि बिग बैंग की घटना आज से 13.7 अरब वषोर्ं पहले हुइर् थी। ब्रह्मांड का विस्तार आज भी जारी है। विस्तार के कारण वुफछ ऊजार् पदाथर् में परिवतिर्त हो गइर्। विस्पफोट ;ठंदहद्ध के बाद एक सैकेंड के अल्पांश के अंतगर्त ही वृहत् विस्तार हुआ। इसके बाद विस्तार की गति ध्ीमी पड़ गइर्। बिग बैंग होने के आरंभ्िाक तीन मिनट के अंतर्गत ही पहले परमाणु का निमार्ण हुआ। ;पपपद्ध बिग बैंग से 3 लाख वषांेर् के दौरान, तापमान 4500॰ केल्िवन तक गिर गया और परमाणवीय पदाथर् का निमार्ण हुआ। ब्रह्मांड पारदशीर् हो गया। ब्रह्मांड के विस्तार का अथर् है आकाशगंगाओं के बीच की दूरी में विस्तार का होना। हाॅयल ;भ्वलसमद्ध ने इसका विकल्प ‘स्िथर अवस्था संकल्पना’ ;ैजमंकल ेजंजम बवदबमचजद्ध के नाम से प्रस्तुत किया। इस संकल्पना के अनुसार ब्रह्मांड किसी भी समय में एक ही जैसा रहा है। यद्यपि ब्रह्मांड के विस्तार संबंध्ी अनेक प्रमाणों के मिलने पर वैज्ञानिक समुदाय अब ब्रह्मांड विस्तार सि(ांत के ही पक्षध्र हैं। तारों का निमार्ण प्रारंभ्िाक ब्रह्मांड में ऊजार् व पदाथर् का वितरण समान नहीं था। घनत्व में आरंभ्िाक भ्िान्नता से गुरुत्वाकषर्ण बलों में भ्िान्नता आइर्, जिसके परिणामस्वरूप पदाथर् का एकत्राण हुआ। यही एकत्राण आकाशगंगाओं के विकास का आधार बना। एक आकाशगंगा असंख्य तारों का समूह है। आकाशगंगाओं का विस्तार इतना अध्िक होता है कि उनकी दूरी हजारों प्रकाश वषोर्ं में ;स्पहीज लमंतेद्ध मापी जाती है। एक अकेली आकाशगंगा का व्यास 80 हजार से 1 लाख 50 हजार प्रकाश वषर् के बीच हो सकता है। एक आकाशगंगा के निमार्ण की शुरूआत हाइड्रोजन गैस से बने विशाल बादल के संचयन से होती है जिसे नीहारिका ;छमइनसंद्ध कहा गया। क्रमशः इस बढ़ती हुइर् नीहारिका में गैस के झंुड विकसित हुए। ये झुंड बढ़ते - बढ़ते घने गैसीय पिंड बने, जिनसे तारों का निमार्ण आरंभ हुआ। ऐसा विश्वास किया जाता है कि तारों का निमार्ण लगभग 5 से 6 अरब वषोर्ं पहले हुआ। प्रकाश वषर् ;स्पहीज लमंतद्ध समय का नहीं वरन् दूरी का माप है। प्रकाश की गति 3 लाख कि0 मी0 प्रति सैकेंड है। विचारणीय है कि एक साल में प्रकाश जितनी दूरी तय करेगा, वह एक प्रकाश वषर् होगा। यह 9.461×1012 कि॰ मी॰ के बराबर है। पृथ्वी व सूयर् की औसत दूरी 14 करोड़ 95 लाख, 98 हजार किलोमीटर है। प्रकाश वषर् के संदभर् में यह प्रकाश वषर् का केवल 8.311 है। ग्रहों का निमार्ण ग्रहों के विकास की निम्नलिख्िात अवस्थाएँ मानी जाती हैंः ;पद्ध तारे नीहारिका के अंदर गैस के गुंथ्िात झुंड हैं। इन गुंथ्िात झुंडों में गुरुत्वाकषर्ण बल से गैसीय बादल में व्रफोड का निमार्ण हुआ और इस गैसीय व्रफोड के चारों तरपफ गैस व ध्ूलकणों की घूमती हुइर् तश्तरी ;त्वजंजपदह कपेबद्ध विकसित हुइर्। ;पपद्ध अगली अवस्था में गैसीय बादल का संघनन आरंभ हुआ और व्रफोड को ढकने वाला पदाथर् छोटे गोलों के रूप में विकसित हुआ। ये छोटे गोले संसंजन ;अणुओं में पारस्परिक आकषर्णद्ध प्रिया द्वारा ग्रहाणुओं ;च्संदमजमेपउंसेद्ध में विकसित हुए। संघट्टðन ;ब्वससपेपवदद्ध की िया द्वारा बड़े पिंड बनने शुरू हुए और गुरुत्वाकषर्ण बल के परिणामस्वरूप ये आपस में जुड़ गए। छोटे पिंडों की अध्िक संख्या ही ग्रहाणु है। ;पपपद्ध अंतिम अवस्था में इन अनेक छोटे ग्रहाणुओं के सहवध्िर्त होने पर वुफछ बड़े पिंड ग्रहों के रूप में बने। भौतिक भूगोल के मूल सि(ांत सौरमंडल हमारे सौरमंडल में आठ ग्रह हैं। नीहारिका को सौरमंडल का जनक माना जाता है उसके ध्वस्त होने व व्रफोड के बनने की शुरूआत लगभग 5 से 5.6 अरब वषो± पहले हुइर् व ग्रह लगभग 4.6 से 4.56 अरब वषोर्ं पहले बने। हमारे सौरमंडल में सूयर् ;ताराद्ध, 8 ग्रह, 63 उपग्रह, लाखों छोटे पिंड जैसे - क्षुद्र ग्रह ;ग्रहों के टुकड़ेद्ध ;।ेजमतवपकेद्ध, धूमकेतु ;ब्वउमजेद्ध एवं वृहत् मात्रा में ध्ूलिकण व गैस हंै। इन आठ ग्रहों में बुध्, शुक्र, पृथ्वी व मंगल भीतरी ग्रह ;प्ददमत चसंदमजेद्ध कहलाते हैं, क्योंकि ये सूयर् व छुद्रग्रहों की पट्टðी, के बीच स्िथत हैं। अन्य चार ग्रह बाहरी ग्रह ;व्नजमत चसंदमजेद्ध कहलाते हैं। पहले चार ग्रह पाथ्िार्व ;ज्मततमेजतपंसद्ध ग्रह भी कहे जाते हैं। इसका अथर् है कि ये ग्रह पृथ्वी की भाँति ही शैलों और धतुओं से बने हैं और अपेक्षाकृत अध्िक घनत्व वाले ग्रह हैं। अन्य चार ग्रह गैस से बने विशाल ग्रह या जोवियन ;श्रवअपंदद्ध ग्रह कहलाते हैं। जोवियन का अथर् है बृहस्पति ;श्रनचपजमतद्ध की तरह। इनमें से अध्िकतर पाथ्िार्व ग्रहों से विशाल हैं और हाइड्रोजन व हीलीयम से बना सघन वायुमंडल है। सभी ग्रहों का निमार्ण लगभग 4.6 अरब वषो± पहले एक ही समय में हुआ। अभी तक प्लूटो को भी एक ग्रह माना जाता था। परन्तु अंतरार्ष्ट्रीय खगोलिकी संगठन ने अपनी बैठक ;अगस्त 2006द्ध में यह निणर्य लिया कि वुफछ समय पहले खोजे गए अन्य खगोलीय पिण्ड ;2003 न्ठ313द्ध तथा प्लूटोे ‘बोने ग्रह’ कहे जा सकते हैं। हमारे सौरमंडल से संबंध्ित वुफछ तथ्य सारणीय 2.1 में दिए गए हैं। भीतरी ग्रह पाथ्िार्व हैं जबकि दूसरे ज्यादातर ग्रह गैसीय हैं। ऐसा क्यों है? पाथ्िार्व व जोवियन ग्रहों में अंतर निम्न परिस्िथतियों के पफलस्वरूप हो सकता हैः सारणी 2.1: सौरमंडल बुध् शुव्रफ पृथ्वी मंगल बृहस्पति शनि यूरेनस नेप्च्यून दूरी ’ 0ण्387 0ण्723 1ण्000 1ण्524 5ण्203 9ण्539 19ण्182 30ण्058 घनत्व / 5ण्44 5ण्245 5ण्517 3ण्945 1ण्33 0ण्70 1ण्17 1ण्66 अधर्व्यास रु 0ण्383 0ण्949 1ण्000 0ण्533 11ण्19 9ण्460 4ण्11 3ण्88 उपग्रह 0 0 1 2 16 30 से अध्िक लगभग 17 8 ऽ सूयर् से दूरी खगोलीय एकक में हैं। अथार्त् अगर पृथ्वी की मध्यमान दूरी 14 करोड़ 95 लाख 98 हजार कि0मी0 एक एकक के बराबर है । / घनत्व ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर ;हउध्ब्उ3द्ध रु अध्र्व्यास: अगर भूमध्यरेखीय अध्र्व्यास 6378.137 कि0 मी0=1 है। पृथ्वी की उत्पिा एवं विकास ;पद्ध पाथ्िार्व ग्रह जनक तारे के बहुत समीप बनें जहाँ अत्यध्िक तापमान के कारण गैसें संघनित नहीं हो पाइर्ं और घनीभूत भी न हो सकीं। जोवियन ग्रहों की रचना अपेक्षाकृत अध्िक दूरी पर हुइर्। ;पपद्ध सौर वायु सूयर् के नज़दीक ज्यादा शक्ितशाली थी। अतः पाथ्िार्व ग्रहों से ज्यादा मात्रा में गैस व ध्ूलकण उड़ा ले गइर्। सौर पवन इतनी शक्ितशाली न होने के कारण जोवियन ग्रहों से गैसों को नहीं हटा पाइर्। ;पपपद्ध पाथ्िार्व ग्रहों के छोटे होने से इनकी गुरुत्वाकषर्ण शक्ित भी कम रही जिसके परिणामस्वरूप इनसे निकली हुइर् गैस इनपर रुकी नहीं रह सकी। चंद्रमा चंद्रमा पृथ्वी का अकेला प्राकृतिक उपग्रह है। पृथ्वी की तरह चंद्रमा की उत्पिा संबंध्ी मत प्रस्तुत किए गए हैं। सन् 1838 इर्॰ में, सर जाजर् डाविर्न ;ैपत ळमवतहम क्ंतूपदद्ध ने सुझाया कि प्रारंभ में पृथ्वी व चंद्रमा तेजी से घूमते एक ही पिंड थे। यह पूरा पिंड डंबल ;बीच से पतला व किनारों से मोटाद्ध की आकृति में परिवतिर्त हुआ और अंततोगत्वा टूट गया। उनके अनुसार चंद्रमा का निमाणर् उसी पदाथर् से हुआ है जहाँ आज प्रशांत महासागर एक गतर् के रूप में मौजूद है। यद्यपि वतमार्न समय के वैज्ञानिक इनमें से किसी भी व्याख्या को स्वीकार नहीं करते। ऐसा विश्वास किया जाता है कि पृथ्वी के उपग्रह के रूप में चंद्रमा की उत्पिा एक बड़े टकराव ;ळपंदज पउचंबजद्ध का नतीजा है जिसे ‘द बिग स्प्लैट’ ;ज्ीम इपह ेचसंजद्ध कहा गया है। ऐसा मानना है कि पृथ्वी के बनने के वुफछ समय बाद ही मंगल ग्रह के 1 से 3 गुणा बड़े आकार का पिंड पृथ्वी से टकराया। इस टकराव से पृथ्वी का एक हिस्सा टूटकर अंतरिक्ष में बिखर गया। टकराव से अलग हुआ यह पदाथर् पिफर पृथ्वी के कक्ष में घूमने लगा और क्रमशः आज का चंद्रमा बना। यह घटना या चंद्रमा की उत्पिा लगभग 4.44 अरब वषोर्ं पहले हुइर्। पृथ्वी का उद्भव क्या आप जानते हैं कि प्रारंभ में पृथ्वी चट्टðानी, गमर् और वीरान ग्रह थी, जिसका वायुमंडल विरल था जो हाइड्रोजन व हीलीयम से बना था। यह आज की पृथ्वी के वायुमंडल से बहुत अलग था। अतः वुफछ ऐसी घटनाएँ एवं वि्रफयाएँ अवश्य हुइर् हांेगी जिनके कारण चट्टðानी, वीरान और गमर् पृथ्वी एक ऐसे सुंदर ग्रह में परिवतिर्त हुइर् जहाँ बहुत सा पानी, तथा जीवन के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध् हुआ। अगले वुफछ भागों में आप पढ़ेंगे कि आज से 460 करोड़ सालों के दौरान इस ग्रह पर जीवन का विकास वैफसे हुआ। पृथ्वी की संरचना परतदार है। वायुमंडल के बाहरी छोर से पृथ्वी के व्रफोड तक जो पदाथर् हैं वे एक समान नहीं हैं। वायुमंडलीय पदाथर् का घनत्व सबसे कम है। पृथ्वी की सतह से इसके भीतरी भाग तक अनेक मंडल हैं और हर एक भाग के पदाथर् की अलग विशेषताएँ हैं। पृथ्वी की परतदार संरचना वैफसे विकसित हुइर्? स्थलमंडल का विकास ग्रहाणु व दूसरे खगोलीय पिंड ज्यादातर एक जैसे ही घने और हल्के पदाथांेर् के मिश्रण से बने हैं। उल्काओं के अध्ययन से हमें इस बात का पता चलता है। बहुत से ग्रहाणुओं के इकट्टòा होने से ग्रह बनें। पृथ्वी की रचना भी इसी प्रकम के अनुरूप हुइर् है। जब पदाथर् गुरुत्वबल के कारण संहत हो रहा था, तो उन इकट्टòा होते पिंडों ने पदाथर् को प्रभावित किया। इससे अत्यध्िक ऊष्मा उत्पन्न हुइर्। यह िया जारी रही और उत्पन्न ताप से पदाथर् पिघलने/गलने लगा। ऐसा पृथ्वी की उत्पिा के दौरान और उत्पिा के तुरंत बाद हुआ। अत्यध्िक ताप के कारण, पृथ्वी आंश्िाक रूप से द्रव अवस्था में रह गइर् और तापमान की अिाकता के कारण ही हल्के और भारी घनत्व के मिश्रण वाले पदाथर् घनत्व के अंतर के कारण अलग होना शुरू हो गए। इसी अलगाव से भारी पदाथर् ;जैसे लोहाद्ध, पृथ्वी के केन्द्र में चले गए और हल्के पदाथर् पृथ्वी की सतह या ऊपरी भाग की तरपफ आ गए। समय के साथ यह और ठंडे हुए और ठोस रूप में परिवतिर्त होकर छोटे आकार के हो गए। अंततोगत्वा यह पृथ्वी की भूपपर्टी के रूप में विकसित हो गए। हल्के व भारी घनत्व वाले पदाथोर्ं के पृथक होने की इस प्रिया को विभेदन ;क्पमिितमदजपंजपवदद्ध कहा जाता है। चंद्रमा की उत्पिा के दौरान, भीषण संघट्टð भूवैज्ञानिक काल मापव्रफम इयान ;म्वदेद्ध महाकल्प ;म्तंद्ध कल्प ;च्मतपवकद्ध युग;म्चवबीद्ध आयु/आध्ुनिक वषर् पहले ;।हमध्ल्मंते इमवितम चतमेमदजद्ध जीवन/मुख्य घटनाएँ;स्पमिध्डंरवत म्अमदजेद्ध नवजीवन ;बमद्रव्रवपबद्ध ;आज से 6.3 करोड़ वषर् पहलेद्ध चतुथर् कल्प ;फनंजमतदंतलद्ध अभ्िानव अत्यन्त नूतन 0 से 10,000 10,000 से 20 लाख वषर् आध्ुनिक मानव आदिमानव ;भ्वउवेंचपमदेद्ध तृतीय कल्प ;ज्मतजपंतलद्ध अतिनूतन अल्पनूतन अध्िनूतन अदिनूतन पुरानूतन 20 लाख से 50 लाख 50 लाख से 2.4 करोड़ 2.4 करोड़ से 3.7 करोड़ 3.7 करोड़ से 5.8 करोड़ 5.7 करोड़ से 6.5 करोड़ आरम्िभक मनुष्य के पूवर्ज वनमानुष, पूफल वाले पौध्े और वृक्ष मनुष्य से मिलता - जुलता वनमानुष जंतु खरगोश ;त्ंइइपजे ंदक ींतमद्ध छोटे स्तनपायी: चूहे, आदि। मध्यजीवी ;डमेव्रवपबद्ध 6.5 करोड़ से 24.5 करोड़ वषर् पहले स्तनपायी व्रफीटेश्िायस जुरेसिक टिªयासिक 6.5 करोड़ से 14.4 करोड़ 14.4 से 20.8 करोड़ 20.8 से 24.5 करोड़ वषर् डायनोसोर का विलुप्त होना। डायनासोर का युग। मेंढक व समुद्री कछुआ। पुराजीव;24.5 करोड़ वषर् से 57.0 करोड़ वषर् पहलेद्ध परमियन काबोर्निपेफरस डेवोनियन प्रवालवदि/सिलरियन ओडोर्विसयन वैफम्िब्रयन 24.5 करोड़ से 28.6 वषर् 28.6 से 36.0 करोड़ वषर् 36.0 से 40.8 करोड़ 40.8 करोड़ से 43.8 करोड़ 43.8 से 50.5 करोड़ 50.5 से 57.0 करोड़ वषर् रेंगने वाले जीवों की अध्िकता जलस्थलचर। पहले रेंगने वाले जंतु - रीढ़ की हîóी वाले पहले जीव स्थल व जल पर रहने वाले जीव स्थल पर जीवन के प्रथम चिÉः पौध्े पहली मछली स्थल पर कोइर् जीवन नहींः जल में बिना रीढ़ की हîóी वाले जीव। प्रागजीव ;च्तवजमतम्रवपबद्ध पूवर् - वैफम्बि्रयन 57 करोड़ से 4 अरब 80 करोड़ वषर् पहले 57 करोड़ से 2 अरब 50 करोड़ वषर् 2.5 अरब से 3.8 अरब वषर् पहले 3.8 अरब से 4.8 अरब वषर् पहले कइर् जोड़ो वाले जीव ब्लू - ग्रीन शैवालः एक कोशीय जीवाणु महाद्वीप व महासागरों का निमार्णः महासागरों व वायुमंडल में काबर्नडाइर् आक्साइड की अध्िकता आद्य महाकल्प हेडियन तारों की उत्पिा 5 अरब से 13.7 वषर् पहले 5 अरब वषर् पहले 12 अरब वषर् पहले 13.7 अरब वषर् पहले सूयर् की उत्पिा ब्रह्मांड की उत्पिा सुपरनोवा बिग बैंग ’ अन्ितम तीन पंक्ितयाँ बिग बैंग ;ठपह ठंदहद्ध से तारे की उत्पिा - संबंध् ;ळपंदज पउचंबजद्ध के कारण, पृथ्वी का तापमान पुनः बढ़ा या पिफर ऊजार् उत्पन्न हुइर् और यह विभेदन का दूसरा चरण था। विभेदन की इस प्रिया द्वारा पृथ्वी का पदाथर् अनेक परतों में अलग हो गया। पृथ्वी के ध्रातल से व्रफोड तक कइर् परतें पाइर् जाती हैं। जैसे - पपर्टी ;ब्तनेजद्ध, प्रावार ;डंदजसमद्ध, बाह्य व्रफोड ;व्नजमत बवतमद्ध और आंतरिक व्रफोड ;प्ददमत बवतमद्ध। पृथ्वी के ऊपरी भाग से आंतरिक भाग तक पदाथर् का घनत्व बढ़ता है। हर परत की विशेषताओं का विस्तारपूवर्क अध्ययन हम अगले अध्याय में करेंगे। पृथ्वी की उत्पिा एवं विकास वायुमंडल व जलमंडल का विकास पृथ्वी के वायुमंडल की वतर्मान संरचना में नाइट्रोजन एवं आॅक्सीजन का प्रमुख योगदान है। वायुमंडल की संरचना व संगठन आठवें अध्याय में बतायी गयी है। वतर्मान वायुमंडल के विकास की तीन अवस्थाएँ हैं। इसकी पहली अवस्था में आदिकालिक वायुमंडलीय गैसों का ”ास है। दूसरी अवस्था में, पृथ्वी के भीतर से निकली भाप एवं जलवाष्प ने वायुमंडल के विकास में सहयोग किया। अंत में वायुमंडल की संरचना को जैव मंडल के प्रकाश संश्लेषण प्रिया ;च्ीवजवेलदजीमेपेद्ध ने संशोिात किया। प्रारंभ्िाक वायुमंडल जिसमें हाइड्रोजन व हीलियम की अध्िकता थी, सौर पवन के कारण पृथ्वी से दूर हो गया। ऐसा केवल पृथ्वी पर ही नहीं, वरन् सभी पाथ्िार्व ग्रहों पर हुआ। अथार्त् सभी पाथ्िार्व ग्रहों से, सौर पवन के प्रभाव के कारण, आदिकालिक वायुमंडल या तो दूर ध्केल दिया गया या समाप्त हो गया। यह वायुमंडल के विकास की पहली अवस्था थी। पृथ्वी के ठंडा होने और विभेदन के दौरान, पृथ्वी के अंदरूनी भाग से बहुत सी गैसें व जलवाष्प बाहर निकले। इसी से आज के वायुमंडल का उद्भव हुआ। आरंभ में वायुमंडल में जलवाष्प, नाइट्रोजन, काबर्न डाइर् आॅक्साइड, मीथेन व अमोनिया अध्िक मात्रा में, और स्वतंत्रा आॅक्सीजन बहुत कम थी। वह प्रिया जिससे पृथ्वी के भीतरी भाग से गैसें ध्रती पर आइंर्, इसे गैस उत्सजर्न ;क्महंेेपदहद्ध कहा जाता है। लगातार ज्वालामुखी विस्पफोट से वायुमंडल में जलवाष्प व गैस बढ़ने लगी। पृथ्वी के ठंडा होने के साथ - साथ जलवाष्प का संघनन शुरू हो गया। वायुमंडल में उपस्िथत काबर्न डाइर् आॅक्साइड के वषार् के पानी में घुलने से तापमान में और अध्िक गिरावट आइर्। पफलस्वरूप अध्िक संघनन व अत्यध्िक वषार् हुइर्। पृथ्वी के ध्रातल पर वषार् का जल गतो± में इकट्टòा होने लगा, जिससे महासागर बनंे। पृथ्वी पर उपस्िथत महासागर पृथ्वी की उत्पिा से लगभग 50 करोड़ सालों के अंतगर्त बनें। इससे हमें पता चलता है कि महासागर 400 करोड़ साल पुराने हंै। लगभग 380 करोड़ साल पहले जीवन का विकास आरंभ हुआ। यद्यपि लगभर 250 से 300 करोड़ साल पहले प्रकाश संश्लेषण प्रिया विकसित हुइर्। लंबे समय तक जीवन केवल महासागरों तक सीमित रहा। प्रकाश संश्लेषण की प्रिया द्वारा आॅक्सीजन में बढ़ोतरी महासागरों की देन है। ध्ीरे - ध्ीरे महासागर आॅक्सीजन से संतृप्त हो गए और वायुमंडल में आॅक्सीजन की मात्रा 200 करोड़ वषर् पूवर् पूणर् रूप से भर गइर्। जीवन की उत्पिा पृथ्वी की उत्पिा का अंतिम चरण जीवन की उत्पिा व विकास से संबंध्ित है। निःसंदेह पृथ्वी का आरंभ्िाक वायुमंडल जीवन के विकास के लिए अनुकूल नहीं था। आध्ुनिक वैज्ञानिक, जीवन की उत्पिा को एक तरह की रासायनिक प्रतििया बताते हैं, जिससे पहले जटिल जैव ;काबर्निकद्ध अणु ;ब्वउचसमग वतहंदपब उवसमबनसमेद्ध बने और उनका समूहन हुआ। यह समूहन ऐसा था जो अपने आपको दोहराता था। ;पुनः बनने में सक्षम थाद्ध, और निजीर्व पदाथर् को जीवित तत्त्व में परिवतिर्त कर सका। हमारे ग्रह पर जीवन के चिÉ अलग - अलग समय की चट्टðानों में पाए जाने वाले जीवाश्म के रूप में हंै। 300 करोड़ साल पुरानी भूगभ्िार्क शैलों में पाइर् जाने वाली सूक्ष्मदशीर् संरचना आज की शैवाल ;ठसनम हतममद ंसहंमद्ध की संरचना से मिलती जुलती है। यह कल्पना की जा सकती है कि इससे पहले समय में साधरण संरचना वाली शैवाल रही होगी। यह माना जाता है कि जीवन का विकास लगभग 380 करोड़ वषर् पहले आरंभ हुआ। एक कोशीय जीवाणु से आज के मनुष्य तक जीवन के विकास का सार भूवैज्ञानिक काल मापक्रम से प्राप्त किया जा सकता है। जो भूवैज्ञानिक काल मापव्रफम ;पृष्ठ 18द्ध में दशार्या गया है। अभ्यास 1.बहुवैकल्िपक प्रश्न: ;पद्ध निम्नलिख्िात में से कौन सी संख्या पृथ्वी की आयु को प्रदश्िार्त करती है? ;कद्ध 46 लाख वषर् ;खद्ध 4600 करोड़ वषर् ;गद्ध 13.7 अरब वषर् ;घद्ध 13.7 खरब वषर् ;पपद्ध निम्न में कौन सी अवध्ि सबसे लंबी हैः ;कद्ध इओन ;म्वदेद्ध ;खद्ध महाकल्प ;म्तंद्ध ;गद्ध कल्प ;च्मतपवकद्ध ;घद्ध युग ;म्चवबीद्ध ;पपपद्ध निम्न में कौन सा तत्व वतर्मान वायुमंडल के निमार्ण व संशोध्न में सहायक नहीं है? ;कद्ध सौर पवन ;खद्ध गैस उत्सजर्न ;गद्ध विभेदन ;घद्ध प्रकाश संश्लेषण ;पअद्ध निम्नलिख्िात में से भीतरी ग्रह कौन से हंैः ;कद्ध पृथ्वी व सूयर् के बीच पाए जाने वाले ग्रह ;खद्ध सूयर् व छुद्र ग्रहों की पट्टðी के बीच पाए जाने वाले ग्रह ;गद्ध वे ग्रह जो गैसीय हैं। ;घद्ध बिना उपग्रह वाले ग्रह ;अद्ध पृथ्वी पर जीवन निम्नलिख्िात में से लगभग कितने वषोर्ं पहले आरंभ हुआ। ;कद्ध 1अरब 37 करोड़ वषर् पहले ;खद्ध 460 करोड़ वषर् पहले ;गद्ध 38 लाख वषर् पहले ;घद्ध 3 अरब, 80 करोड़ वषर् पहले 2.निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए: ;पद्ध पाथ्िार्व ग्रह चट्टðानी क्यों हैं? ;पपद्ध पृथ्वी की उत्पिा संबंध्ित दिये गए तकांेर् में निम्न वैज्ञानिकों के मूलभूत अंतर बताएँ: ;कद्ध कान्ट व लाप्लेस ;खद्ध चैम्बरलेन व मोल्टन ;पपपद्ध विभेदन प्रिया से आप क्या समक्षते हैं। ;पअद्ध प्रारम्िभक काल में पृथ्वी के ध्रातल का स्वरूप क्या था? ;अद्ध पृथ्वी के वायुमंडल को निमिर्त करने वाली प्रारंभ्िाक गैसंे कौन सी थीं? 3.निम्नलिख्िात प्रश्नों के उत्तर लगभग 150 शब्दों में दीजिए: ;पद्ध बिग बैंग सि(ांत का विस्तार से वणर्न करें। ;पपद्ध पृथ्वी के विकास संबंध्ी अवस्थाओं को बताते हुए हर अवस्था/चरण को संक्षेप में वण्िार्त करें। परियोजना कायर् ‘स्टार डस्ट’ परियोजना के बारे में निम्नलिख्िात पक्षों पर वेबसाइट से सूचना एकत्रिात कीजिए: ;ूूूण्ेबपण्मकनध्चनइसपबण्ीजउस ंदक ूूूण्दंेउण्मकनद्ध ;अद्ध इस परियोजना को किस एजेंसी ने शुरू किया था? ;बद्ध स्टार डस्ट को एकत्रिात करने में वैज्ञानिक इतनी रूचि क्यों दिखा रहे हैं? ;सद्ध स्टार डस्ट कहाँ से एकत्रा की गइर् है?

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