270 जीव विज्ञान वंफठच्छद अपूणर् उपास्िथमय वलय वंफठ श्वासनली श्वसनी पसली का कटा पुफप्पुफसावरणी झिल्ली आख्िारी छोर वूफपिका पेफपफड़ा पुफप्पुफसावरणी द्रव श्वसनी डायाप्रफाम चित्रा 17.1 मानव श्वसन तंत्रा का आरेखीय दृश्य ;साथ ही बाएं पेफपफड़े का अनुप्रस्थ काट दिखाया गया हैद्ध श्वसन में निम्नलिख्िात चरण सम्िमलित हैंः ;पद्ध श्वसन या पुफप्पुफसी संवातन जिससे वायुमंडलीय वायु अंदर खींची जाती है और ब्व् 2से भरपूर वूफपिका की वायु को बाहर मुक्त किया जाता है। ;पपद्ध वूफपिका झिल्ली के आर - पार गैसों ;व्2 और ब्व् 2द्ध का विसरण। ;पपपद्ध रुध्िर द्वारा गैसों का परिवहन ;अभ्िागमनद्ध ;पअद्ध रुध्िर और ऊतकों के बीच व्2 और ब्व् 2का विसरण। ;अद्ध अपचयी ियायों के लिए कोश्िाकाओं द्वारा व्2 का उपयोग और उसके पफलस्वरूप ब्व् 2 का उत्पन्न होना ;कोश्िाकीय श्वसन,जैसे कि अध्याय 14 - श्वसन में बताया गया हैद्ध। 17.2 श्वासन की ियाविध्ि श्वासन में दो चरण सम्िमलित हैःअंतःश्वसन ;श्वासनद्ध जिसके दौरान वायुमंडलीय वायु को अंदर खीचा जाता है और निःश्वसन जिसके द्वारा पुुफफ्रपुफसी वायु को बाहर मुक्त किया जाता है। वायु को पेफपफड़ों के अंदर ले जाने के लिए पेफपफड़ों एवं वायुमंडल के बीच दाब प्रवणता निमिर्त की जाती है। अंतःश्वसन तभी हो सकता है जब वायुमंडलीय दाब से पेफपफड़ों की वायु का दाब ;आंतर पुफप्पुफसी दाबद्ध कम हो अथार्त् पेफपफड़ों का दाब वायुमंडलीय दाब के सापेक्ष कम होता है। इस तरह निःश्वसन तब होता है, जब आंतर पुफप्पुफसी दाब वायुमंडलीय दाब से श्वसन और गैसों का विनिमय अध्िक होता है। डायाप्रफाम और एक विश्िाष्ट पेशी समूह ;पसलियों के बीच स्िथत बाह्य एवं अंतः अंतरापशर्ुक /इंटरकोस्टलद्ध इस तरह की प्रवणताएं उत्पन्न करते हैं । अंतःश्वसन डायाप्रफाम के संवुफचन से प्रारंभ होता है जो अग्र पश्च अक्ष ;ंदजमतव चवेजमतपवत ंगपेद्ध में वक्ष गुहा का आयतन बढ़ा देता है। बाह्य अंतरापशर्ुक पेश्िायों का संवुफचन पसलियों और उरोस्िथ को ऊपर उठा देता है, जिससे पृष्ठधर अक्ष ;कवतेव अमदजतंस ंगपेद्ध में वक्ष - गुहा कक्ष का आयतन बढ़ जाता है। वक्ष गुहा के आयतन में किसी प्रकार से भी हुइर् वृि के कारण पुफप्पुफस के आयतन में भी समान वृि होती है। यह समान तरह की वृि पुफप्पुफसी दाब को वायुमंडलीय दाब से कम कर देती है, जिससे बाहर की वायु बलपूवर्क पेफपफड़ों के अंदर आ जाती है अथार्त् अंतःश्वसन की िया होती है ;चित्रा - 17.2अद्ध। डायाप्रफाम और अंतरापशुर्क पेश्िायों का श्िाथ्िालन ;तमसंगंजपवदद्ध डायाप्रफम और उरोस्िथ को उनके सामान्य स्थान पर वापस कर देता है और वृक्षीय आयतन को घटाता है जिससे पुफप्पुफसी आयतन भी घट जाता है। इसके परिणामस्वरूप अंतर पुफप्पुफसी दाब वायुमंडलीय दाब से थोड़ा अध्िक हो जाता है, जिससे पेफपफड़ों की हवा बाहर निकल जाती है अथार्त् निःश्वसन हो जाता है ;चित्रा 17.2 बद्ध। हम अपनी अतिरिक्त उदरीय पेश्िायों की सहायता से अंतःश्वसन और निःश्वसन की क्षमता को बढ़ा सकते हैं। औसतन एक स्वस्थ मनुष्य प्रति मिनट 12 - 16 बार श्वसन करता हैै। श्वसन गतिविध्ि यों में सम्िमलित वायु के आयतन का आकलन स्पाइरोमीटर की सहायता से किया जा सकता है जो पुफप्पुफसी कायर्कलापों का नैदानिक मूल्यांकन करने में सहायक होता है। 17.2.1 श्वसन संबंध्ी आयतन और क्षमताएं ज्वारीय आयतन ;ज्पकंस टवसनउमध् ज्टद्धः सामान्य श्वसन िया के समय प्रति श्वास अंतः श्वासित या निःश्वासित वायु का आयतन यह लगभग 500 मिलीहोता है अथार्त् स्वस्थ मनुष्य लगभग 6000 से 8000 मिली. वायु प्रति मिनट की दर से अंतः श्वासित/निःश्वासित कर सकता है। पसलियों और उरोस्िथ का पैफलाना पसली पिंजर पसलियों और उरोस्िथ मूल स्थान पर वापस लौटना चित्रा 17.2 वायु का पेफपफड़ों में प्रवेश वक्ष के आयतन में वृि संवुफचित होता हुआ डायाप्रफाम ;अद्ध वायु का पेफपफड़ों से बाहर निकलना वक्ष के आयतन में कमी डायाप्रफाम श्िाथ्िालन एवं आचर्ड उपरिगमन ;बद्ध ;अद्ध अंतः श्वसन ;बद्ध निःश्वसन दशार्ते हुए श्वसन की ियाविध्ि 274 जीव विज्ञान आॅक्सीजन के साथ हीमोग्लोबिन के संतृप्त का प्रतिशत घुलनशीलता से 20 - 25 गुना अध्िक होती है, अंतःविसरणवायु झिल्िलका में से प्रति इकाइर् आंश्िाक दाब के अंतर कीवूफपिका भ्िािा आधरीय विसरित होने वाली ब्व्2 मात्रा व्2 की तुलना में बहुत;एक कोश्िाका तत्व अध्िक होती है। विसरण झिल्िलका मुख्य रूप से तीनस्थूल स्तरों की बनी होती है, ;चित्रा 17.4द्ध, यथा वूफपिका की पतली शल्की उपकला ;शल्की एपिथ्िालियमद्ध, वूफपिकाओं की कोश्िाकाओं की अंतःकला और उनके बीच स्िथत लाल रक्त आधरी तत्व । पिफर भी, इनकी वुफल मोटाइर् एक मिलीमीटर कोश्िाका से बहुत कम होती है। इसलिए हमारे शरीर में सभी कारक व्2के वूफपिकाओं से ऊतकों और ब्व्2 के ऊतकों रक्त वाहिका चित्रा 17.4 एक पुफप्पुफसीय वाहिका की एक वायुवूफपिका से वूफपिकाओं में विसरण के लिए अनुवूफल होते हैं।का अनुप्रस्थ काट 17.4 गैसों का परिवहन ;ज्तंदेचवतज व िळंेमेद्ध व्और ब्व्के परिवहन का माध्यम रक्त होता है। लगभग 97 प्रतिशत व्का परिवहन2 2 2 रक्त में लाल रक्त कण्िाकाओं द्वारा होता है। शेष 3 प्रतिशत व्2 का प्लाजमा द्वारा घुल्य अवस्था में होता हैं। लगभग 20 - 25 प्रतिशत ब्व्2 का परिवहन लाल रक्त कण्िाकाओं द्वारा है, जबकि 70 प्रतिशत का बाइर्काबोर्नेट के रूप में अभ्िागमित होती है। लगभग 7 प्रतिशत ब्व्2 प्लाजमा द्वारा घुल्य अवस्था होता हैं। 17.4.1 आॅक्सीजन का परिवहन;ज्तंदेचवतज व िव्गलहमदद्ध हीमोग्लोबिन लाल रक्त कण्िाकाओं में स्िथत एक लाल रंग का लौहयुक्त वणर्क है। हीमोग्लोबिन के साथ उत्क्रमणीय ;त्मतमतेपइसमद्ध ढंग से बंध्कर आॅक्सीजन आॅक्सी - हीमोग्लोबिन का गठन कर सकता है। प्रत्येक हीमोग्लोबिन अणु अध्िकतम चार व्2 अणुओं के वहन कर सकते हैं। हीमोग्लोबिन के साथ आॅक्सीजन का बंध्ना प्राथमिक तौर पर व्2 के आंश्िाक दाब से संबंिात है। ब्व्2 का आंश्िाक दाब हाइड्रोजन आयन सांद्रता और तापक्रम वुफछ अन्य कारक हैं जो इस बंध्न को बाध्ि त कर सकते हैं। हीमोग्लोबिन की आॅक्सीजन से प्रतिशत संतृप्ित को चव्2 के सापेक्ष आलेख्िात करने पर सिग्माभ वक्र ;ैपहउवपक ब्नतअमद्ध प्राप्त होता है। इस वक्र को वियोजन वक्र ;क्पेेवबपंजपवद ब्नतअमद्ध कहते हैं जो हीमोग्लोबिन से व्2 बंध्न को प्रभावित करने वाले चब्व्2ए भ़् आयन सांद्रता, आदि घटकों के अध्ययनचित्रा 17.5 आॅक्सीजन वियोजन वक्र में अत्यध्िक सहायक होता है ;चित्रा 17.5द्ध। वूफपिकाओं में जहाँ उच्च चव्2, निम्न चब्व्2, कम भ़् सांद्रता और

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