पादप में श्वसन है। उपापचयी पथ जिसके द्वारा इलेक्ट्राॅन एक वाहक से अंतर झिल्ली भीतरी माइटोकोंडिªयल अन्य वाहक की ओर गुजरता है इसे इलेक्ट्राॅन परिवहन झिल्ली आधत्राीअवकाश तंत्रा ;म्ज्ैद्ध कहते हैं, ;चित्रा 14.4द्ध जो माइटोकोंडिªया के भ्िातरी झिल्ली पर संपन्न होता है। माइटोकोंडिªया के आधत्राी में टीसीए चक्र के दौरान छ।क्भ् से बनने वाले इलेक्ट्राॅन, एंजाइम छ।क्भ् डिहाइड्रोजिनेज द्वारा आॅक्सीकृत होता है ;काॅम्पलेक्स - प्द्ध, तत्पश्चात् इलेक्ट्राॅन भीतरी झिल्ली में उपस्िथत यूबीक्िवीनोन की ओर स्थानंातरित होता है। यूबीक्िवनोन अपचयी समतुल्य थ्।क्भ्2 द्वारा प्राप्त करता है ;काॅम्पलेक्स - प्प्द्ध जो सिटिªक अम्ल चक्र में सक्सीन के आॅक्सीकरण के दौरान उत्पन्न होते हैं। अपचयित यूबिक्िवनोन ;यूबिक्िवनोलद्ध इलेक्ट्राॅन को साइटोक्रोम इब 1 साइटोक्रोम ब् की ओर स्थानंातरित कर आॅक्सीकृत हो जाता है ;काॅम्पलेक्स - प्प्प्द्ध। साइटोक्रोम ब् एक छोटा प्रोटीन है जो, भीतरीः झिल्ली की बाह्य सतह पर चिपका होता है जो इलेक्ट्राॅन को काॅम्पलेक्स - प्प्प् तथा काॅम्पलेक्स - प्ट के बीच स्थानंातरण का कायर् गतिशील वाहक के रूप में करता है। काॅम्पलेक्स - प्ट साइटोक्रोम ब् आॅक्सीडेज काॅम्पलेक्स है, जिसमें साइटोक्रोम ं, ं3तथा दो तांबा कंेद्र मिलते हैं। जब इलेक्ट्राॅन, इलेक्टॅªान परिवहन शृंखला में एक वाहक से दूसरे वाहक तक काॅम्पलेक्स - प् से काॅम्पलेक्स - प्ट द्वारा गुजरते हैं, तब वे एटीपी सिंथेज ;काॅम्पलेक्स - टद्ध से युग्िमत होकर एडीपी व अकाबर्निक पफाॅस्पफेट से एटीपी का निमार्ण करते हैं। इस दौरान संश्लेष्िात होने वाली एटीपी अणुओं की संख्या इलेक्ट्राॅन दाता पर निभर्र है। छ।क्भ् के एक अणु के आॅक्सीकरण से एटीपी के तीन अणुओं का निमार्ण होता है जबकि थ्।क्भ्2 का एक अणु से एटीपी का दो अणु बनता है जबकि साँस की आॅक्सी प्रिया आॅक्सीजन की उपस्िथति में ही संपन्न होती है। प्रिया के अंतिम चरण में आॅक्सीजन की भूमिका सीमित होती है। यद्यपि आॅक्सीजन की उपस्िथति अत्यावश्यक हैऋ क्योंकि यह पूरे तंत्रा से भ्2 ;हाइड्रोजनद्ध को मुक्त कर पूरी प्रिया को संचालित करती है। आॅक्सीजन अंतिम हाइड्रोजन ग्राही के रूप में कायर् करता है। प्रकाश पफाॅस्पफोरिलिकरण के विपरीत, जहाँ प्रोटीन प्रवणता के निमार्ण में प्रकाश ऊजार् का उपयोग पफाॅस्पफोरिलिकरण के लिए होता है, साँस में इसी प्रकार की प्रिया में आॅक्सीकरण अपचयन द्वारा ऊजार् की पूतिर् होती है। पफलस्वरूप इस कारण से हुइर् ियाविध्ि को आॅक्सीकारी - पफाॅस्पफोरिलिकरण कहते हैं। जीव विज्ञान अभ्यास 1.इनमें अंतर करिए? ;अद्धसाँस ;श्वसनद्ध और दहन ;बद्धग्लाइकोलिसिस तथा क्रेब्स चक्र ;सद्धआॅक्सी श्वसन तथा किण्वन 2.श्वसनीय ियाधर क्या है? सवार्ध्िक साधरण ियाधर का नाम बताइए? 3.ग्लाइकोलिसिस को रेखा द्वारा बनाइए? 4.आॅक्सी श्वसन के मुख्य चरण कौन - कौन से हैं? यह कहाँ संपन्न होती है? 5.क्रेब्स चक्र का समग्र रेखा चित्रा बनाइए? 6.इलेक्ट्राॅन परिवहन तंत्रा का वणर्न कीजिए? 7.निम्न के मध्य अंतर कीजिए? ;अद्धआॅक्सी श्वसन तथा अनाॅक्सी श्वसन ;बद्धग्लाइकोलिसिस तथा किण्वन ;सद्ध ग्लाइकोलिसिस तथा सिटिªक अम्ल चक्र 8.शु( एटीपी के अणुओं की प्राप्ित की गणना के दौरान आप क्या कल्पनाएं करते हैं? 9.‘श्वसनीय पथ एक ऐंपफीबोलिक पथ होता है’, इसकी चचार् करें। 10.साँस गुणांक को पारिभाष्िात कीजिए, वसा के लिए इसका क्या मान है? 11.आॅक्सीकारी पफाॅस्पफोरिलीकरण क्या है? 12.साँस के प्रत्येक चरण में मुक्त होने वाली ऊजार् का क्या महत्व है?

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