8.1 कोश्िाका क्या है? 8.2 कोश्िाका सि(ांत 8.3 कोश्िाका का समग्र अध्ययन 8.4 प्रोवैफरियोटिक कोश्िाकाएं 8.5 यूवैफरियोटिक कोश्िाकाएं अध्याय 8 कोश्िाका: जीवन की इकाइर् जब आप अपने चारों तरपफ देखते हैं तो जीव व निजीर्व दोनों को आप पाते हैं। आप अवश्य आश्चयर् करते होंगे एवं अपने आप से पूछते होंगे कि ऐसा क्या है, जिस कारण जीव, जीव कहलाते हैं और निजीर्व जीव नहीं हो सकते। इस जिज्ञासा का उत्तर तो केवल यही हो सकता है कि जीवन की आधरभूत इकाइर् जीव कोश्िाका की उपस्िथत एवं अनुपस्िथत है। सभी जीवधारी कोश्िाकाओं से बने होते हैं। इनमें से वुफछ जीव एक कोश्िाका से बने होते हैं जिन्हंे एककोश्िाक जीव कहते हैं, जबकि दूसरे, हमारे जैसे अनेक कोश्िाकाओं से मिलकर बने होते हैंें बहुकोश्िाक जीव कहते हैं। 8.1 कोश्िाका क्या है? कोश्िाकीय जीवधारी ;1द्ध स्वतंत्रा अस्ितत्व यापन व ;2द्ध जीवन के सभी आवश्यक कायर् करने में सक्षम होते हैं। कोश्िाका के बिना किसी का भी स्वतंत्रा जीव अस्ितत्व नहीं हो सकता। इस कारण जीव के लिए कोश्िाका ही मूलभूत से संरचनात्मक व ियात्मक इकाइर् होती है। एन्टोनवान लिवेनहाक ने पहली बार कोश्िाका को देखा व इसका वणर्न किया था। राबटर् ब्राउन ने बाद में वेंफद्रक की खोज की। सूक्ष्मदशीर् की खोज व बाद में इनके सुधार के बाद इलेक्ट्राॅन सूक्ष्मदशीर् द्वारा कोश्िाका की विस्तृत संरचना का अध्ययन संभव हो सका। कोश्िाका: जीवन की इकाइर् श्वेत रुध्िर कोश्िाकाएंलाल रुध्िर कोश्िाकाएं ;अमीवाकृतीद्ध;गोल व द्वअवतलीद्ध तंत्रिाका कोश्िाका ;शाख्िात व लंबीद्ध एक वाहिनिका दीघीर्कृत चित्रा 8.1 विभ्िान्न प्रकार के आकार की कोश्िाकाओं का चित्रा द्वारा प्रदशर्न यूवैफरियोटिक व प्रोवैफरियोटिक दोनों कोश्िाकाओं में झिल्ली रहित अंगक राइबोसोम मिलते हैं। कोश्िाका के भीतर राइबोसोम केवल कोश्िाका द्रव्य में ही नहींऋ बल्िक दो अंगकों - हरित लवक ;पौधें मेंद्ध व सूत्रा कण्िाका में व खुरदरी अंतदर््रव्यी जालिका में भी मिलते हैं। जंतु कोश्िाकाओं में झिल्ली रहित तारक वेंफद्रक जैसे अन्य अंगक मिलते हैं, जो कोश्िाका विभाजन में सहायता करते हैं। कोश्िाकाएं माप, आकार व कायर् की दृष्िट से कापफी भ्िान्न होती हैं ;चित्रा 8.1द्ध। उदाहरणाथर् - सबसे छोटी कोश्िाका माइकोप्लाज्मा 0.3 - उ ;माइक्रोमीटरद्ध लंबाइर् की, जबकि जीवाणु ;बैक्टीरियाद्धमें 3 से 5 - उ ;माइक्रोमीटरद्ध की होती हैं। पृथक की गइर् सबसे बड़ी कोश्िाका शुतरमुगर् के अंडे के समान है। बहुकोश्िाकीय जीवधरियों में मनुष्य की लाल रक्त कोश्िाका का व्यास लगभग 7.0 - उ ;माइक्रोमीटरद्ध होता है। तंत्रिाका कोश्िाकाएं सबसे लंबी कोश्िाकाओं में होती हैं। ये बिंबाकार बहुभुजी, स्तंभी, घनाभ, धागे की तरह या असमाकृति प्रकार की हो सकती हंै। कोश्िाकाओं का रूप उनके कायर् के अनुसार भ्िान्न हो सकता है। स्तंभाकार उपकला कोश्िाकाएं ;लंबी व सँकरीद्ध मध्योतिकी कोश्िाकाएं ;गोलद्ध 130 जीव विज्ञान चिकनी अंतद्रर्व्यी जालिका जीवद्रव्य तंतु सूक्ष्मनलिका एक्िटन तंतु मध्यवतीर् तंतु परअॅाक्सीसोम कोश्िाकाद्रव्य गाॅल्जी उपकरण चिकनी अंतद्रर्व्यी जालिका वेंफद्रक आवरण वेंफदि्रक वेंफद्रक लयनकाय हरित लवक ;अद्ध खुरदुरी अंतद्रर्व्यी जालिका वेंफद्रक वेंफदि्रक वेंफद्रक उपकरण वेंफद्रक आवरण कोश्िाका झिल्ली रसधनी कोश्िाकाभ्िािा सूत्राकण्िाका राइबोसोम सुक्ष्मांवुफर जीवद्रव्य झिल्ली तारककाय परअॅाक्सीसोम लयनकाय राइबोसोम सूत्राकण्िाका खुरदरी अंतः प्रद्रव्यी जालिका कोश्िाका द्रव्य ;बद्ध चित्रा 8.3 चित्रा प्रदश्िार्त करता है ;अद्ध पादप कोश्िाका ;बद्ध प्राण्िा कोश्िाका झिल्ली की तरलीय प्रकृति इसके कायर् जैसे - कोश्िाकावृि, अंतरकोश्िाकीय संयोजन का निमार्ण, स्रवण, अंतकोश्िाक, कोश्िाका विभाजन इत्यादि की दृष्िट में महत्वपूणर् है। जीवद्रव्यझिल्ली का सवार्िाक महत्वपूणर् कायर् यह है कि इससे अणुओं का परिवहन होता है। यह झिल्ली इसके दोनों तरपफ मिलने वाले अणुओं के लिए चयनित पारगम्य है। वुफछ अणु बिना ऊजार् की आवश्यकता के इस झिल्ली से होकर आते हैं जिसे निष्िक्रय परिवहन कहते हैं। उदासीन विलेय सांद्रप्रवणता के अनुसार जैसे - उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर साधारण विसरण द्वारा इस झिल्ली से होकर जाते हैं। जल भी इस झिल्ली से उच्च सांद्रता से निम्न सांद्रता की ओर गति करता है। विसरण द्वारा जल के प्रवाह को परासरण कहते हैं। चूँकि ध्रुवीय अणु जो अध्रुवीय लिपिड द्विसतह से होकर नहीं जा सकते, उन्हें झिल्ली से होकर परिवहन के लिए झिल्ली की वाहक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। वुफछ आयन या अणुओं का झिल्ली से होकर परिवहन उनकी सांद्रता प्रवणता के विपरीत जैसे निम्न से उच्च सांद्रता की ओर होता है। इस प्रकार के परिवहन हेतु ऊजार् आधरित प्रिया होती है, जिसमें एटीपी का उपयोग होता है जिसे सिय परिवहन कहते हैं। यह एक पंप के रूप में कायर् करता है जैसे - सोडियम आपन/पोटैसियम आपन पंप। 8.5.2 कोश्िाका भ्िािा आपको याद ही होगा कि कवक व पौधों की जीवद्रव्यझिल्ली के बाहर पाए जाने वाली दृढ़ निजीर्व आवरण को कोश्िाका भ्िािा कहते हैं। कोश्िाका भ्िािा कोश्िाका को केवल कोश्िाका: जीवन की इकाइर् यांत्रिाक हानियों और संक्रमण से ही रक्षा नहीं करता हैऋ बल्िक यह कोश्िाकाओं के बीच आपसी संपकर् बनाए रखने तथा अवांछनीय वृहद अणुओं के लिए अवरोध प्रदान करता है। शैवाल की कोश्िाका भ्िािा सेलुलोज, गैलेक्टेन्स, मैनान्स व खनिज जैसे वैफल्िसयम काबोर्नेट की बनी होती है, जबकि दूसरे पौधों में यह सेलुलोज, हेमीसेलुलोज, पेक्टीन व प्रोटीन की बनी होती है। नव पादप कोश्िाका की कोश्िाका भ्िािा में स्िथत प्राथमिक भ्िािा में वृि की क्षमता होती है, जो कोश्िाका की परिपक्वता के साथ घटती जाती है व इसके साथ कोश्िाका के भीतर की तरपफ द्वितीय भ्िािा का निमार्ण होने लगता है। मध्यपटलिका मुख्यतयः वैफल्िसयम पेक्टेट की बनी सतह होती है जो आस - पास की विभ्िान्न कोश्िाकाओं को आपस में चिपकाएं व पकड़े रहती है। कोश्िाका भ्िािा एवं मध्य पटलिका में जीवद्रव्य तंतु ;प्लाज्मोडैस्मेटाद्ध आड़े - तिरछे रूप में स्िथत रहते हैं। जो आस - पास की कोश्िाका द्रव्य को जोड़ते हैं। 8.5.3 अंतः झिल्िलका तंत्रा झिल्लीदार अंगक कायर् व संरचना के आधार पर एक दूसरे से कापफी अलग होते हैं, इनमें बहुत से ऐसे होेते हैं जिनके कायर् एक दूसरे से जुड़े रहते हैं उन्हें अंतः झिल्िलका तंत्रा के अंतगर्त रखते हैं। इस तंत्रा के अंतगर्त अंतदर््रव्यी जालिका, गाॅल्जीकाय, लयनकाय, व रसधानी अंग आते हैं। सूत्राकण्िाका ;माइटोकाॅन्िड्रयाद्ध, हरितलवक व परअॅाक्सीसोम के कायर् उपरोक्त अंगों से संबंिात नहीं होेते, इसलिए इन्हें अंतः झिल्िलका तंत्रा के अंतगर्त नहीं रखते हैं। 8.5.3.1 अंतदर््रव्यी जालिका ;ऐन्डोप्लाज्िमक रेटीवुफलमद्ध इलेक्ट्राॅन सूक्ष्मदशीर् से अध्ययन के पश्चात् यह पता चला कि यूवैफरियोटिक कोश्िाकाओं के कोश्िाकाद्रव्य में चपटे, आपस में जुड़े, थैली युक्त छोटी नलिकावत जालिका तंत्रा बिखरा रहता है जिसे अंतदर््रव्यी जालिका कहते हैं ;चित्रा 8.5द्ध। प्रायः राइबोसोम अंतदर््रव्यी जालिका के बाहरी सतह पर चिपके रहते हैं। जिस अंतदर््रव्यी जालिका के सतह पर यह राइबोसोम मिलते हैं, उसे खुरदरी अंतदर््रव्यी जालिका कहते हैं। राइबोसोम की अनुपस्िथति पर अंतदर््रव्यी जालिका वेंफद्रक खुरदुरीवेंफद्रक छिद्र अंतद्रर्व्यी जालिका राइबोसोम चिकनी अंतद्रर्व्यी चित्रा 8.5 अंतद्रर्व्यी जालिकाजालिका वुंफड चित्रा 8.6 गाॅल्जी उपकरण 136 जीव विज्ञान 8.5.5 लवक ;प्लास्िटडद्ध लवक सभी पादप कोश्िाकाओं एवं वुफछ प्रोटोजोआ जैसे यूग्िलना में मिलते हैैं। ये आकार में बड़े होने के कारण सूक्ष्मदशीर् से आसानी से दिखाइर् पड़ते हैं। इसमें विश्िाष्ट प्रकार के वणर्क मिलने के कारण पौधे भ्िान्न - भ्िान्न रंग के दिखाइर् पड़ते हैं। विभ्िान्न प्रकार के वणर्कों के आधार पर लवक कइर् तरह के होते हैं जैसे - हरित लवक, वणीर्लवक व अवणीर्लवक। हरित लवकांे में पणर्हरित वणर्क व केरोटिनाॅइड वणर्क मिलते हैं जो प्रकाश - संश्लेषण के लिए आवश्यक प्रकाशीय ऊजार् को संचित रखने का कायर् करते हैं। वणीर्लवकों में वसा विलेय केरोटिनाॅइड वणर्कजैसे - केरोटीन, जैंथोपिफल व अन्य दूसरे मिलते हैं। इनके कारण पादपोें में पीले, नारंगी व लाल रंग दिखाइर् पड़ते हैं। अवणीर् लवक विभ्िान्न आकृति एवं आकार के रंगहीन लवक होते हैं जिनमें खाद्य पदाथर् संचित रहते हैंः मंडलवक में मंड के रूप में काबार्ेहाइड्रेट संचित होता हैऋ जैसे - आलूऋ तेल लवक में तेल व वसा तथा प्रोटीन लवक मंे प्रोटीन का भंडारण होता है। हरे पौधांे के अिाकतर हरितलवक पत्ती की पणर्मध्योतक कोश्िाकाओं में पाए जाते हैं। हरित लवक लेंस के आकार के अंडाकार, गोलाकार, चिक व पफीते के आकार के अंगक होते हैं जो विभ्िान्न लंबाइर् ;5 - 10 माइक्रोमीटरद्ध व चैड़ाइर् ;2 - 4 माइक्रोमीटरद्ध के होते हैं। इनकी संख्या भ्िान्न हो सकती है जैसे प्रत्येक कोश्िाका में एक ;क्लेमाइडोमोनास - हरितशैवालद्ध से 20 से 40 प्रति कोश्िाका पणर्मध्योतक कोश्िाका हो सकती है। सूत्राकण्िाका की तरह हरित लवक द्विझिल्िलकायुक्त होते हैं। उपरोक्त दो में से इसकी भीतरी लवक झिल्ली अपेक्षाकृत कम पारगम्य होती है। हरितलवक के अंतःझिल्ली से घ्िारे हुए भीतर के स्थान को पीठिका ;स्ट्रोमाद्ध कहते हैं। पीठिका में चपटे, झिल्लीयुक्त थैली जैसी संरचना संगठित होती है जिसे थाइलेकोइड कहते हैं ;चित्रा 8.8द्ध। थाइलेकोइड सिक्कों के चट्टों की भँाति ढेर के रूप में मिलते हैं जिसे ग्रेना ;एकवचन - ग्रेनमद्ध या अंतरग्रेना थाइलेकोइड कहते हैं। इसके अलावा कइर् चपटीबाह्य झिल्ली झिल्लीनुमा नलिकाएं जो ग्रेना के विभ्िान्न थाइलेकोइड कोभीतरी झिल्ली जोड़ती है उसे पीठिका पट्टलिकाएं कहते हैं। थाइलेकोइडग्रेनम की झिल्ली एक रिक्त स्थान को घेरे होती है। इसेथाइलाकोइड अवकाश्िाका कहते हैं। हरितलवक की पीठिका में बहुतपीठिका एंजाइम मिलते हैं जो काबोर्हाइड्रेट व प्रोटीन संश्लेषण केपटलिका लिए आवश्यक है। इनमें छोटा, द्विलड़ी, वृत्ताकार डीएनए पीठिका अणु व राइबोसोम मिलते हैं। हरित लवक थाइलेकोइड में उपस्िथत होते हैं। हरित लवक में पाए जाने वाला राइबोसोमचित्रा 8.8ः हरित लवक का अनुभागीय दृश्य ;70ेद्ध कोश्िाकाद्रव्यी राइबोसोम ;80ेद्ध से छोटा होता है। 8.5.6 राइबोसोम जाजर् पैलेड ;1953द्ध ने इलेक्ट्राॅन सूक्ष्मदशीर् द्वारा सघन कण्िाकामय संरचना राइबोसोम को सवर्प्रथम देखा था। ये राइबोन्यूक्िलक अम्ल व प्रोटीन के बने और किसी भी झिल्ली से घ्िारे नहीं रहते। कोश्िाका: जीवन की इकाइर् यूवैफरियोटिक बोसोम 80ै व प्रोवैफरियोटिक राइबोसोम 70ै प्रकार के होते हैं। यहाँ पर ‘ै’ ;स्वेडवगर्स इकाइर्द्ध अवसादन गुणंाक को प्रदश्िार्त करता है। यह अपरोक्ष रूप में आकार व घनत्व को व्यक्त करता है। दोनों 70ै व 80ै राइबोसोम दो उपइकाइयों से बना होता है। 8.5.7 साइटोपंजर ;साइटोस्केलेटनद्ध प्रोटीनयुक्त विस्तृत जालिकावत तंतु जो कोश्िाकाद्रव्य में मिलता है उसे साइटोपंजर कहते हैं। कोश्िाका में मिलने वाला साइटोपंजर के विभ्िान्न कायर् जैसे - यांत्रिाक सहायता, गति व कोश्िाका के आकार को बनाए रखने में उपयोगी है। 8.5.8 पक्ष्माभ व कशाभ्िाका ;सीलिया तथा फ्रलैज्िालाद्ध पक्ष्माभ्िाकाएं ;एकवचन - पक्ष्माभद्ध व कशाभ्िाकाएं ;एक वचन - कशाभ्िाकाद्ध रोम सदृश कोश्िाका झिल्ली पर मिलने वाली अपवृि है। पक्ष्माभ एक छोटी संरचना चप्पू की तरह कायर् करती है, जो कोश्िाका को या उसके चारों तरपफ मिलने वाले द्रव्य की गति में सहायक है। कशाभ्िाका अपेक्षाकृत लंबे व कोश्िाका के गति में सहायक हैै। प्रोवैफरियोटिक जीवाणु में पाइर् जाने वाली कशाभ्िाका संरचनात्मक रूप में यूवैफरियोटिक कशाभ्िाका सेे भ्िान्न होती है। इलेक्टॅªान सूक्ष्मदशीर् अध्ययन से पता चलता है कि पक्ष्माभ व कशाभ्िाका जीवद्रव्यझिल्ली से ढके होते हैं। इनके कोर को अक्षसूत्रा कहते हैं, जो कइर् सूक्ष्म नलिकाओं का बना होता है जो लंबे अक्ष के समानांतर स्िथत होते हैं। अक्षसूत्रा के वेंफद्र में एक जोड़ा सूक्ष्म नलिका मिलती है और नौ द्विक अरीय परिध्ि की ओर व्यवस्िथत सूक्ष्मनलिकाएं होती हंै। अक्षसूत्रा की सूक्ष्मनलिकाओं की इस व्यवस्था को 9़2 प्रणाली कहते हैं ;चित्रा 8.9द्ध। वेंफद्रीय नलिका सेतु द्वारा जुडे़ हुए एवं वेंफद्रीय आवरण द्वारा ढके होते हैं, जो परिधीय द्विक के प्रत्येक नलिका को अरीय दंड द्वारा जोड़ते हैं। इस प्रकार नौ अरीय तान ;छड़द्ध बनती हैं। परिधीय द्विक सेतु द्वारा आपस में जुड़े होते हैं। दोनों पक्ष्माभ व कशाभ्िाका तारक वेंफद्रजीवद्रव्य झिल्ली परिध्ीय सूक्ष्म नलिकाएं वेंफद्रीय आच्छद अंतराद्विक सेतु ;अद्ध वेंफद्रीय सूक्ष्म नलिका अरीय डंडा ;बद्ध चित्रा 8.9 पक्ष्माभ/कशाभ्िाका का अनुभाग जो विभ्िान्न भागों ;अद्ध इलेक्ट्राॅन सूक्ष्मलेखी ;बद्ध आंतरिक संरचना का चित्रात्मक प्रदशर्न करता है

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